samacharsecretary.com

राजस्थान में 2 बच्चों से अधिक वाले उम्मीदवार भी पंचायत-नगरपालिका चुनाव में हिस्सा ले सकेंगे

जयपुर राजस्थान में दो से अधिक बच्चे वाले भी अब पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ सकते हैं. राजस्थान कैबिनेट का फैसला. कानून मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा- ‘कैबिनेट ने राजस्थान पंचायतीराज संशोधन बिल और राजस्थान नगरपालिका संशोधन बिल 2026 को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट से मंजूरी के बाद पूरी संभावना है कि यही बिल राजस्थान विधानसभा के मौजूदा सत्र में पेश किया जाएगा. इससे पहले दो से अधिक बच्चे वाले पंचायत व नगरपालिका चुनाव नहीं लड़ सकते थे. समय की जरूरत है दो बच्चों की बाध्यता को हटाना: राज्यवर्धन सिंह राठौड़ कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में राज्य के उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा कि राजस्थान सरकार ने आज बड़ा फैसला करते हुए पंचायत और नगरपालिका चुनाव में दो संतान का नियम हटा दिया है. अब किसी व्यक्ति के कितने भी बच्चे हैं वो पंचायत और नगरपालिका चुनाव लड़ सकता है. इससे पहले दो से अधिक संतान पर पंचायत और स्थानीय निकाय के चुनाव लड़ने पर रोक थी. राजस्थान के उद्योग मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा ये समय की जरूरत है, इसलिए फैसला किया. राठौड़ ने कहा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत या बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री के बयान से इस फैसले का कोई संबंध नहीं है. राठौड़ ने कहा कि अगर हम उनके बयान से फैसला करते तो तीन बच्चे की भी बात कर सकते थे. 1995 में भैरोंसिंह शेखावत की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने राजस्थान में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए दो बच्चों की बाध्यता लागू की थी. अब बीजेपी की भजनलाल सरकार ने ही इसे पलट दिया है. पंचायती राज चुनाव में दो संतानों की पाबंदी हटाने के मामले पर मंत्री जोगाराम पटेल ने कहा कि पहले जनसंख्या का दबाव काफी तेज था, अलग तरह की स्थिति थी, अब पहले से हालत में सुधार हुआ, ऐसे में पहले जैसे स्थिति नहीं है. पंचायती राज चुनाव में दो संतान से अधिक संतान होने की धारा 19 के मामले में उसके स्पष्टीकरण में नगर पालिका की धारा 24 में संशोधन करके दो या अधिक संतान होने के बावजूद भी अगर जानते जनप्रतिनिधि अन्य योग्यताएं रखता है. चाहे पंचायती राज का इलेक्शन हो या नगर निगम का कोई इलेक्शन है चुनाव लड़ने के लिए योग्य माना जाएगा.

145 साल पुराने आबूरोड रेलवे स्टेशन का होगा कायाकल्प

अजमेर. आबूरोड रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास के लिए अमृत भारत स्टेशन योजनांतर्गत रेल मंत्रालय ने 81.51 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। वर्ष 1880 में स्थापित स्टेशन के विकास को करीब 28 हजार करोड़ की लागत से निर्माणाधीन अंबाजी-आबूरोड-तारंगा हिल नई रेललाइन परियोजना से जोड़कर भी देखा जा रहा है। परियोजना का कार्य पूर्ण होने पर स्थानीय स्टेशन से यात्री गाड़ियों का संचालन शुरू होगा। इससे यात्रियों की संख्या में वृद्ध होगी। यह विकास कार्य होंगे मंडल रेल प्रबंधक राजू भूतड़ा के अनुसार आबूरोड, अजमेर मंडल का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। इस स्टेशन के पुनर्विकास से यह स्टेशन नए स्वरूप में नजर आएगा और यात्रियों को और भी अधिक बेहतर सुविधाएं प्राप्त हो सकेंगी। स्वीकृत राशि में से 74.87 करोड़ निर्माण लागत, 0.75 करोड़ यूटिलिटी सर्विसेज, 0.19 करोड़ आर्टवर्क, 0.75 करोड़ डिजाइन चार्ज, 0.07 करोड़ ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन, 0.75 करोड़ फर्नीचर, 0.77 करोड़ कंटीन्जेंसीज और 3.36 करोड़ डिपार्टमेंटल चार्जेज खर्च शामिल हैं। अजमेर मंडल के 15 स्टेशनों का पुनर्विकास अजमेर मंडल के 15 स्टेशनों पर अमृत भारत स्टेशन योजना के अंतर्गत पुनर्विकास कार्य किए जा रहे हैं। उदयपुर स्टेशन पर पुनर्विकास का कार्य जारी है, जबकि अजमेर स्टेशन पर भी पुनर्विकास कार्य स्वीकृत किया है। आबूरोड स्टेशन 145 साल का गौरवशाली इतिहास समेटे हैं। आबूरोड रेलवे ने मीटर गेज के स्टीम इंजन से वर्तमान में विद्युतीकृत ब्रॉडगेज लाइन की राजधानी, शताब्दी और वंदे भारत जैसी गाड़ियों के संचालन तक का दौर देखा है। यह प्रमुख पर्वतीय पर्यटन स्थल माउंट आबू का प्रवेश द्वार होने से वर्षभर देश-विदेश के पर्यटक ट्रेन के माध्यम से यहां पहुंचते हैं। निकट ही अंबाजी का मंदिर भी है, जहां भी देश-विदेश से श्रद्धालु दर्शन करने के लिए आते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की अजमेर में जनसभा को लेकर सीएम ने किया निरीक्षण

अजमेर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 फरवरी को अजमेर दौरे पर आने वाले हैं. इसके लिए जोर शोर से तैयारियां की जा रही है. शनिवार के इस दौरे पर कम समय बचा है, ऐसे में तैयारियों में तेजी लाई जा रही है. वहीं सीएम भजनलाल शर्मा अजमेर पहुंचे, जहां उन्होंने पीएम मोदी के दौरे की पूरी जानकारी, तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया. सीएम अजमेर पहुंचकर सभा स्थल कायड़ विश्राम स्थली का अवलोकन किया और अधिकारियों की बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने आयोजन स्थल पर बैठने की व्यवस्था, पेयजल, चिकित्सा, विद्युत आपूर्ति, पार्किंग, यातायात और सुरक्षा सहित सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की. उन्होंने ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए ताकि यातायात सुचारु रहे और पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित हो सके. उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ समयबद्ध तरीके से कार्य पूर्ण करें. पीएम देंगे लोकार्पण और शिलान्यास की सौगात प्रस्तावित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राजस्थान को विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास की सौगात देंगे. साथ ही एचपीवी वैक्सीन की लॉन्चिंग की जाएगी और बड़ी संख्या में युवाओं को नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए जाएंगे. बैठक के दौरान केंद्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी तैयारियां समय पर पूरी की जाएं और आयोजन को सफल बनाया जाए. वहीं सीएम भजनलाल बैठक के बाद पुष्कर में धीरेंद्र शास्त्री से भी मुलाकात करने पहुंचे थे. 

जेडीए के कानोता में सैटेलाइट अस्पताल निर्माण का कार्यादेश वापस

जयपुर. कानोता में प्रस्तावित 50 बेड के सैटेलाइट अस्पताल के निर्माण पर अब पूरी तरह ब्रेक लग गया है। बस्सी विधायक लक्ष्मण मीणा की ओर से विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) ने सक्षम स्तर पर निर्णय लेते हुए अस्पताल निर्माण का कार्यादेश वापस ले लिया है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि फिलहाल इस अस्पताल को पुनः स्वीकृत कर बनाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। गहलोत सरकार की घोषणा पर चली 'कैंची' गौरतलब है कि अप्रेल 2022 में आइपीडी टावर के शिलान्यास समारोह के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस अस्पताल की घोषणा की थी। योजना के मुताबिक, जयपुर के चारों प्रमुख राजमार्गों पर चार सैटेलाइट अस्पताल बनाए जाने थे, जिसके लिए 25-25 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया था। इस बजट का वहन नगरीय विकास विभाग, स्वायत्त शासन विभाग और आवासन मंडल को संयुक्त रूप से करना था। काम शुरू होने के बाद निरस्त हुआ अनुबंध घोषणा के बाद जेडीए ने प्रक्रिया शुरू करते हुए 19.11 करोड़ रुपए की लागत से निर्माण का जिम्मा मैसर्स हरि नारायण खंडेलवाल को सौंपा था। संशोधित समय-सीमा के अनुसार इस अस्पताल का काम सितंबर 2024 तक पूरा होना था। लेकिन इससे पहले ही जेडीए ने सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से अनुबंध को निरस्त कर दिया, जिससे क्षेत्र के हजारों लोगों की चिकित्सा सुविधाओं की उम्मीदें फिलहाल खत्म हो गई हैं।

अंबानी परिवार ने श्रीनाथजी के दर्शन कर मनाया कोकिलाबेन का जन्मदिन

जयपुर. पुष्टिमार्गीय वल्लभ सम्प्रदाय की प्रधान पीठ नाथद्वारा में श्रीनाथजी मंदिर मंडल की उपाध्यक्ष कोकिला बेन ने अपने जन्मदिन के अवसर पर पूरे परिवार के साथ श्रीजी प्रभु के दर्शन किए। पूरे परिवार ने युवाचार्य विशाल बावा से आशीर्वाद लिया। कोकिला बेन के 92वें जन्मदिन के अवसर पर पूरा अंबानी परिवार अपने ईष्ट प्रभु श्रीनाथजी के दर्शन करने पहुंचा। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चैयरमेन मुकेश अंबानी, उनके भाई अनिल अंबानी, पुत्र आकाश अंबानी, बहु श्लोका अंबानी, पुत्र अनंत अंबानी, बहु राधिका अंबानी, अंशुल अंबानी, अनमोल अंबानी, नीना बेन कोठारी, दीप्ति सालगांवकर सहित पूरे अंबानी परिवार एवं धनराज नाथवानी ने श्रीजी प्रभु की संध्या आरती के दर्शन किए। दर्शन पश्चात युवाचार्य विशाल बावा ने अंबानी परिवार के सभी सदस्यों का फेंटा बांधकर, रजाई व ऊपरना ओढ़ाकर एवं प्रसाद प्रदान कर मंदिर की परंपरानुसार समाधान किया। सभी ने विशाल बावा का आशीर्वाद लिया। वल्लभ कुल की दीक्षिता बहू ने भी आशीर्वाद एवं शुभकामनाएं दीं। इस दौरान पूरे परिवार ने गोस्वामी तिलकायत इंद्रदमन (राकेश) महाराज और राजेश्वरी गोस्वामी से वीडियो कॉल पर आशीर्वाद लिया। तिलकायत ने कोकिला बेन को जन्मदिन पर आशीर्वाद और शुभकामनाएं दीं। महाप्रभुजी की बैठक में 51 वेदपाठी ब्राह्मणों ने स्वस्ति वाचन एवं मंगलाचरण के पाठ किए। मोती महल चौक में भजन गायन कर शुभकामनाएं प्रेषित कीं। अंबानी परिवार के दर्शन सहित सभी कार्यक्रमों के दौरान श्रीनाथजी मंदिर के अधिकारी सुधाकर उपाध्याय, तिलकायत के मुख्य सलाहकार अंजन शाह, बोर्ड सदस्य समीर चौधरी, सहायक अधिकारी अनिल सनाढ्य, मंदिर मंडल के सीईओ जितेंद्र पांडेय, तिलकायत सचिव लीलाधर पुरोहित, समाधानी उमंग मेहता, जमादार विट्ठल सनाढ्य, कैलाश पालीवाल, मोती महल निगरा गोपी वर्मा, सेवा विभाग सहित सेवादार मौजूद रहे।

‘रॉयल डिलीवरी’ का नया वीडियो, Blinkit वाले अंकल घोड़े पर सवार होकर पहुंचाते दिखे ऑर्डर

जयपुर राजस्थान की रंगीन संस्कृति और शाही अंदाज की झलक दिखाता एक अनोखा वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में एक बुजुर्ग व्यक्ति घोड़े पर सवार नजर आता है और उसकी पीठ पर ब्लिंकिट का चमकीला पीला डिलीवरी बैग टंगा हुआ है. पारंपरिक सवारी और आधुनिक डिलीवरी सिस्टम का यह मेल लोगों का ध्यान खींच रहा है. वीडियो में दिख रहा है कि बुजुर्ग व्यक्ति आराम से घोड़े पर बैठकर सड़क से गुजर रहा है. उसके पीछे लटका ब्लिंकिट का बैग साफ दिखाई देता है, जो आमतौर पर कंपनी के डिलीवरी पार्टनर्स इस्तेमाल करते हैं. हालांकि यह साफ नहीं हो पाया है कि वह सच में किसी ग्राहक का ऑर्डर पहुंचाने जा रहे थे या सिर्फ मजाकिया अंदाज में बैग लेकर निकले थे. इस अनोखे दृश्य ने सोशल मीडिया यूजर्स को खूब मनोरंजन दिया. कई लोगों ने इसे 'राजस्थान स्टाइल एक्सप्रेस डिलीवरी' करार दिया तो कुछ ने इसे 'रॉयल डिलीवरी सर्विस'का नाम दे डाला. एक यूज़र ने टिप्पणी की कि जहां देशभर में बाइक और स्कूटर से डिलीवरी होती है, वहीं राजस्थान में घोड़े से ऑर्डर पहुंचाना भी संभव है. कुछ लोगों ने इस वीडियो को परंपरा और आधुनिकता के सुंदर संगम के रूप में देखा. उनका कहना है कि यह दृश्य दिखाता है कि तकनीक और संस्कृति साथ-साथ चल सकती हैं. वहीं कई यूजर्स ने बुजुर्ग की ऊर्जा और आत्मविश्वास की भी तारीफ की. हालांकि कंपनी की ओर से इस वीडियो पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह क्लिप इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन चुकी है.    

प्राचीन माँ बीजासन मंदिर में बुजुर्गों-महिलाओं-दिव्यांगों को रहत देने बनेगा रोप-वे

बूंदी. हाड़ौती की आराध्य देवी माँ बीजासन के दरबार में अब भक्तों को 750 से अधिक सीढ़ियां चढ़ने की मजबूरी नहीं रहेगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को इन्द्रगढ़ में 18 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले रोप-वे का शिलान्यास किया। इन्द्रगढ़ (बूंदी) स्थित माँ बीजासन मंदिर राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र का एक अत्यंत प्राचीन और चमत्कारी शक्तिपीठ है। यह मंदिर अरावली पर्वत श्रृंखला की एक ऊँची पहाड़ी पर स्थित है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शक्ति के लिए प्रसिद्ध है। इन्द्रगढ़ माताजी: रोप-वे से सुगम होंगे दर्शन इन्द्रगढ़ की पहाड़ी पर स्थित माँ बीजासन मंदिर सदियों से लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। वर्तमान में यहाँ पहुँचने के लिए भक्तों को कड़ी चढ़ाई चढ़नी पड़ती है। रोप-वे बनने से सबसे अधिक लाभ बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग श्रद्धालुओं को होगा। अब वे मिनटों में पहाड़ी के शिखर पर स्थित मंदिर तक पहुँच सकेंगे। ओम बिरला ने कहा कि इस सुविधा के आने से श्रद्धालुओं की संख्या में भारी इजाफा होगा, जिससे स्थानीय व्यापारियों, होटल व्यवसायियों और गाइडों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इन्द्रगढ़ की पहाड़ी पर स्थित माँ बीजासन मंदिर पर्यावरण और पर्यटन का अद्भुत तालमेल चूंकि बीजासन माता मंदिर अभयारण्य क्षेत्र (रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व के पास) में स्थित है, इसलिए विकास कार्यों में पर्यावरण का विशेष ध्यान रखा गया है।     इको-फ्रेंडली प्रोजेक्ट: रोप-वे को इस तरह डिजाइन किया गया है कि वन्यजीवों और वन संपदा को न्यूनतम नुकसान हो।     पर्यटन मानचित्र पर इन्द्रगढ़: बिरला ने विश्वास जताया कि आगामी कुछ वर्षों में इन्द्रगढ़ राजस्थान के धार्मिक पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख गंतव्य के रूप में उभरेगा। दो बार हो चुकी रोप-वे की घोषणा बीजासन माता मंदिर पर पूर्व में कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में भी रोपवे की घोषणा हुई थी, लेकिन रोप-वे की घोषणा केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई। और धरातल पर नहीं आ पाई। ऐतिहासिक एवं पौराणिक पृष्ठभूमि प्राचीनता: माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 2000 वर्ष से भी अधिक पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, सिद्ध संत बाबा कृपानाथ जी महाराज ने यहाँ कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने स्वयं पर्वत की चट्टान चीरकर दर्शन दिए थे। नाम का रहस्य: 'बीजासन' नाम देवी दुर्गा के उस स्वरूप को दर्शाता है जो राक्षस रक्तबीज का संहार करने के बाद उसके ऊपर आसन लगाकर विराजमान हुई थीं। स्थापना: कहा जाता है कि बूंदी के शासक राव शत्रुसाल के भाई इंद्रसाल ने इन्द्रगढ़ नगर बसाया था और पहाड़ी पर स्थित इस मंदिर को भव्य रूप दिया। मंदिर की भौगोलिक स्थिति और वास्तुकला स्थान: यह मंदिर बूंदी जिले की इन्द्रगढ़ तहसील में स्थित है। यह जयपुर से लगभग 160 किमी और कोटा से करीब 75 किमी दूर है। पहाड़ी और सीढ़ियाँ: मंदिर पहाड़ी की चोटी पर एक प्राकृतिक गुफा के अंदर बना हुआ है। वर्तमान में भक्तों को माता के दर्शन के लिए करीब 750 से 1000 सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं। प्रवेश: गुफा के अंदर माता की स्वयंभू (स्वयं प्रकट) प्रतिमा विराजमान है। मंदिर परिसर से अरावली की पर्वत श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य दिखाई देता है। धार्मिक महत्व और मान्यताएँ नवदुर्गा स्वरूप: यहाँ माँ बीजासन को दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। मंदिर में सात बहनों (नवदुर्गा के स्वरूप) की पूजा का भी विधान है। मनोकामना पूर्ण: भक्तों का अटूट विश्वास है कि यहाँ सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। विशेष रूप से निःसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति की कामना लेकर यहाँ आते हैं। अखंड ज्योति: मंदिर में एक अखंड ज्योति 24 घंटे प्रज्वलित रहती है, जिसका धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। प्रमुख उत्सव और मेले नवरात्रि मेला: साल में दोनों नवरात्रि (चैत्र और शारदीय) के दौरान यहाँ विशाल मेला लगता है। इस समय राजस्थान ही नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से भी लाखों श्रद्धालु मत्था टेकने आते हैं। धार्मिक आयोजन: नवरात्रि में यहाँ विशेष मंगल आरती, भोग आरती और संध्या आरती का आयोजन होता है, जिसमें शामिल होना पुण्यदायी माना जाता है।

भीलवाड़ा सर्राफा बाजार में 100 साल में पहली बार बड़ी गरजे बुलडोज़र

भीलवाड़ा. भीलवाड़ा शहर के सबसे पुराने और तंग रास्तों वाले सर्राफा बाजार में सोमवार को नगर निगम का 'पीला पंजा' खौफ की तरह गरजा। करीब सौ साल के इतिहास में यह पहला मौका था, जब इस व्यस्ततम बाजार में बुलडोजर की गर्जना सुनाई दी। इस कार्रवाई से व्यापारियों में हड़कंप मच गया। वहीं, सालों से अतिक्रमण की मार झेल रहे आमजन ने राहत की सांस ली। वहीं, नगर निगम ने बाजार क्षेत्र और आवासीय क्षेत्र में सालों से दबी नालियों को भी अतिक्रमण एवं पक्के कब्जों से मुक्ति दिलाई। निगम की कार्रवाई से दहशत में आए सर्राफा व अन्य कारोबारी स्वयं दुकानों व प्रतिष्ठानों के बाहर से अतिक्रमण हटाने में जुट गए। लोग व व्यापारी भी कटर, हथौड़ा, गेती व फावड़ा, संबल लेकर खुद के अतिक्रमण को हटाने के साथ ही प्रशासन के हटाने गिरे मलबे को समटने में जुट गए। बड़ा मंदिर से लेकर सांगानेरी गेट क्षेत्र के लोग तो अतिक्रमण का दस्ता पहुंचने से पहले ही स्वयं कब्जे हटाने में जुट गए। विरोध के बावजूद नहीं थमा 'पीला पंजा' क्षेत्र के बड़े बुजुर्गों का कहना है कि सर्राफा बाजार में पहली बार अतिक्रमण हटाने की इतनी बड़ी कार्रवाई हुई। उन्होंने खुशी भी जाहिर की कि इस कार्रवाई से पुराना भीलवाड़ा के इस सर्राफा बाजार में आवागमन सहज हो सकेगा। दूसरी ओर कई व्यापारियों ने निगम की कार्रवाई का विरोध भी किया, लेकिन पीला पंजा नहीं रुका। निगम की कार्रवाई से क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित रही। पांसल चौराहा क्षेत्र से हटाया अतिक्रमण शहर में पुर रोड के पांसल चौराहा क्षेत्र में नगर निगम के दस्ते ने सड़कें के दोनों तरफ दुकानों के बाहर से होर्डिग्स व बैनर हटाए, दुकानों के टीन शेड भी खोल ले गए। केबिन व फर्नीचरों की भी जब्ती की गई। शिकायतों के बाद लिया गया बड़ा एक्शन नगर निगम आयुक्त हेमाराम चौधरी ने बताया कि सर्राफा बाजार की अतिक्रमण़ से सिकुड़ती राह को लेकर कई शिकायतें आमजन की तरफ से आ चुकी थीं। अतिक्रमण हटाने को लेकर क्षेत्र के लोगों को पूर्व में कई बार सूचित किया जा चुका। जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देश पर शहर में प्रमुख बाजारों को अतिक्रमण मुक्त किए जाने के अभियान के तहत सोमवार को भी सर्राफा बाजार में प्रभावी कार्रवाई की गई। उन्होंने बताया कि भीमगंज थाना से लेकर सर्राफा बाजार होते हुए पुराना भीलवाड़ा के शहीद चौक क्षेत्र से होते हुए सांगानेरी गेट चौराहा तक क्षेत्र के अतिक्रमण हटाए जाएंगे। प्रशासन का सराहनीय कदम सर्राफा एसोसिएशन के पदाधिकारी महेश सोनी ने बताया कि सर्राफा बाजार में सोमवार को हुई प्रशासनिक कार्रवाई स्वागत योग्य है। बाजार की सड़कों को कब्जे से मुक्त करने एवं सड़कों को चौड़ा किए जाने की जरूरत भी थी। शहर में नेहरू रोड को चौड़ा किए जाने के दौरान भी सर्राफा बाजार की सड़कों के चौड़ीकरण को लेकर भी कार्ययोजना बनी थी।

राजस्थान में ‘लेडी सिंघम’ IPS डॉ. प्रीति चंद्रा को मिली आईजी की ज़िम्मेदारी

जयपुर. राजस्थान कैडर की सबसे तेज-तर्रार महिला पुलिस अधिकारियों में शुमार डॉ. प्रीति चंद्रा एक बार फिर एक्शन मोड में लौटने को तैयार हैं। दरअसल, सोमवार देर रात को जारी 21 आईपीएस अफसरों की तबादला सूची में डॉ चंद्रा का नाम भी शामिल है। भजनलाल सरकार ने उन्हें डीआईजी (आर्म्ड बटालियन) से पदोन्नत कर आईजी (लॉ एंड ऑर्डर) नियुक्त किया है। यह पद पुलिस महकमे में रीढ़ की हड्डी माना जाता है, क्योंकि पूरे प्रदेश की कानून-व्यवस्था का जिम्मा सीधे तौर पर इसी पद के इर्द-गिर्द घूमता है। क्यों कहा जाता है 'लेडी सिंघम'? प्रीति चंद्रा का नाम सुनते ही चंबल के बीहड़ों के डकैतों से लेकर मानव तस्करी करने वाले गिरोहों तक के पसीने छूट जाते हैं। उन्हें यह खिताब उनके काम और उनकी दबंग छवि के कारण मिला है। बीहड़ों में दबिश: करौली में एसपी रहते हुए उन्होंने चंबल के दुर्गम बीहड़ों में घुसकर डकैतों का पीछा किया। उनके डर से हरिया गुर्जर जैसे 10 हजार के इनामी डकैत और कई अन्य खूंखार अपराधियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था। देह व्यापार पर प्रहार: बूंदी में तैनाती के दौरान उन्होंने देह व्यापार के नरक में फंसी दर्जनों नाबालिग लड़कियों को मुक्त कराया और गिरोह के सरगनाओं को सलाखों के पीछे भेजा। कौन हैं डॉ. प्रीति चंद्रा? (पारिवारिक पृष्ठभूमि) प्रीति चंद्रा राजस्थान के सीकर जिले के कुंदन गांव की रहने वाली हैं। उनका जन्म 1979 में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता सेना से सेवानिवृत्त हैं। उनकी सफलता की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उनकी मां कभी स्कूल नहीं गईं, लेकिन उन्होंने अपनी बेटी को 'सिंघम' बनाने के लिए समाज के हर दबाव का सामना किया। सफर: पत्रकारिता से पुलिस सेवा तक की 10 बड़ी बातें शिक्षिका से शुरुआत: IPS बनने से पहले प्रीति चंद्रा एक स्कूल शिक्षिका थीं। उन्होंने बीएड और एमफिल की डिग्री हासिल की है। पत्रकार बनने का सपना: जयपुर में एक लोकल केबल टीवी चैनल में न्यूज़ रीडर भी रहीं। उनका शुरुआती सपना एक पत्रकार बनने का था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। बिना कोचिंग पहली बार में सफलता: उन्होंने 2008 में बिना किसी भारी-भरकम कोचिंग के, अपने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा क्रैक की और 255वीं रैंक हासिल की। बीकानेर की पहली महिला एसपी: प्रीति चंद्रा के नाम बीकानेर की पहली महिला पुलिस अधीक्षक (SP) होने का गौरव दर्ज है। चंबल के डकैतों का काल: करौली एसपी के रूप में उन्होंने वह कर दिखाया जो कई पुरुष अधिकारी नहीं कर पाए— बीहड़ों के डकैत गिरोहों का सफाया। मानव तस्करी के खिलाफ जंग: बूंदी और अलवर में उनकी तैनाती के दौरान मानव तस्करी गिरोहों पर की गई कार्रवाई आज भी मिसाल दी जाती है। भ्रष्टाचार पर लगाम: उन्होंने एसीबी (ACB) कोटा में भी अपनी सेवाएं दीं, जहाँ उन्होंने कई भ्रष्ट अधिकारियों को रंगे हाथों पकड़ा। अधिकारियों की जासूसी का मामला: बीकानेर में तैनाती के दौरान जब एक दरोगा ने उनकी जासूसी करने की कोशिश की, तो उन्होंने उसे तुरंत पकड़वाकर जेल भिजवाया, जिससे विभाग में उनकी धाक जम गई। सादगी और सख्त अनुशासन: वे फील्ड में जितनी सख्त हैं, व्यक्तिगत जीवन में उतनी ही सरल और अनुशासित मानी जाती हैं। मुख्यधारा में वापसी: पिछले कुछ समय से वे तुलनात्मक रूप से शांत पदों (जैसे आर्म्ड बटालियन) पर थीं, लेकिन अब IG लॉ एंड ऑर्डर के रूप में उनकी 'पावरफुल' वापसी हुई है।

कंबल देने से इनकार का मामला गरमाया: हरियाणा-राजस्थान में चर्चा में आए भाजपा के अरबपति नेता

जयपुर एक तरफ जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 'सबका साथ, सबका विकास' को अपनी सरकार का मूल मंत्र बताते हैं तो दूसरी तरफ उन्हीं की पार्टी के एक बड़े नेता ने कथित तौर पर धार्मिक आधार पर ऐसा भेदभाव किया जिसकी खूब आलोचना हो रही है। आरोप है कि उन्होंने एक मुस्लिम महिला को कंबल देने से इनकार कर दिया और विडंबना यह है कि ऐसा करते हुए उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का भी नाम लिया। जिसे सोशल मीडिया पर 'छोटी हरकत' बताकर वायरल किया जा रहा है उसे करने वाले की शख्सियत बहुत बड़ी है। वह ना सिर्फ पूर्व सांसद हैं, बल्कि राजस्थान से हरियाणा तक की राजनीति में पैठ रखते हैं। नाम है- सुखबीर सिंह जौनापुरिया। दरअसल, जौनापुरिया का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें वह कुछ मुस्लिम महिलाओं को कंबल बांटने से इनकार करते दिख रहे हैं। पूर्व सांसद ने फेसबुक पर जो जानकारी दी है उसके मुताबिक यह वीडियो राजस्थान के निवाई विधानसभा के करेड़ा बुजुर्ग गांव का है। यहां उन्होंने लोगों की समस्याओं को सुना और महिलाओं-बुजुर्गों को कंबल वितरित किए। वह 28 फरवरी को अजमेर में पीएम मोदी की होने जा रही सभा के लिए लोगों को आमंत्रित करने गए थे। नाम पूछा, कंबल देने से इनकार और अलग कर दिया वीडियो में दिख रहा है कि जौनापुरिया कतार में बैठी महिलाओं को कंबल बांट रहे हैं। आरोप है कि महिला के मुस्लिम होने की वजह से उन्होंने उसे कंबल देने से इनकार कर दिया। वह भीड़ में बैठी मुस्लिम महिलाओं को अलग हट जाने को कहते हैं। पूर्व सांसद कहते हैं, 'क्या नाम है तेरा, अलग हट, एकदन हट। मत दे इन्हें। नहीं है, बुरा मानो चाहो भला। बात सुनो, जो आप लोग बैठे हो ना मोदी को गाली देने वाला उन्हें लेने का हक ही नहीं हैं। किसी को बुरा लगे तो लगे, सीधी बात है।' इसके बाद जौनपुरिया मुस्लिम महिलाओं को लाभार्थी महिलाओं की भीड़ से अलग कर देते हैं। कार्यक्रम खत्म होने के बाद कुछ लोगों ने पूर्व सांसद को टोका और कहा कि यह अच्छा नहीं है। सरकार किसी से भेदभाव नहीं करती है तो उन्हें भी नहीं करना चाहिए। जौनापुरिया यह कहते हुए गाड़ी में बैठकर चले गए कि 'बहस की जरूरत नहीं है।' लाइव हिन्दुस्तान ने पूर्व सांसद को कई बार फोन किया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। बड़े कारोबारी, हरियाणा से राजस्थान तक पकड़ सुखबीर सिंह जौनापुरिया हरियाणा और राजस्थान में एक बड़ी शख्सियत हैं। ना सिर्फ राजनीति बल्कि कारोबार जगत में उनका बड़ा नाम है। रियल स्टेट कारोबार से जुड़े जौनापुरिया ने 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान अपनी संपत्ति 142 करोड़ रुपये घोषित की थी। वह 2014 से 2024 तक टोंक-सवाई माधोपुर सीट से सांसद रहे हैं। 2014 में उन्होंने मशहूर क्रिकेटर रहे मोहम्मद अजरुद्दीन को हराया था। सांसद चुने जाने से पहले सुखबीर सिंह जौनापुरिया 2004 से 2009 तक हरियाणा की सोहना सीट से विधायक रहे हैं। 2024 में जौनापुरिया लोकसभा चुनाव हार गए थे। फेसबुक पर बुलंद करते हैं 'सबका विकास' वाला नारा मु्स्लिम महिला को कंबल देने से इनकार करने वाले जौनापुरिया सोशल मीडिया पर 'सबका साथ सबका विकास' वाला नारा बुलंद करते दिखते हैं। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट के कवर पेज पर पीएम मोदी के साथ अपनी तस्वीर लगाते हुए यही नारा लिखा है। इसके अलावा उन्होंने पीएम मोदी के साथ मुलाकात करते हुए 2023 की एक तस्वीर को पिन किया है, जिसमें वह उन्हें एक किताब भेंट करते हुए दिख रहे हैं। विडंबना है कि इस पोस्ट में पीएम मोदी की बातचीत का जिक्र करते हुए उन्होंने लिखा है कि किस तरह जब उन्होंने पीएम मोदी को मुस्लिम महिलाओं से राखी बंधवाते हुए तस्वीर दिखाई तो वह बेहद खुश हुए।