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गंज थाने में हंगामा: महिला कार्यकर्ताओं ने स्याही फेंकी, पुलिस ने की कार्रवाई

अजमेर अजमेर में चर्चित स्याही कांड के बाद पुलिस अधिकारियों ने बड़ी कार्रवाई की है. कल, 30 नवंबर को अजमेर के गंज थाने में बीजेपी की महिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने पुलिस के सामने ही एक कांग्रेस नेता के ऊपर स्याही फेंक दी थी. बीजेपी की कार्यकर्ताएं दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के बारे में अजमेर कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के पदाधिकारी पीयूष सुराणा की एक पोस्ट का विरोध कर रहे थे. इसी मामले में पुलिस ने पीयूष सुराणा को हिरासत में लिया गया था. लेकिन पुलिस कस्टडी में ही कांग्रेस नेता के ऊपर स्याही फेंके जाने की घटना के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे. इसके बाद अब अजमेर के पुलिस अधीक्षक ने तत्काल एक्शन लेते हुए संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की है. तीन पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई अजमेर के एसपी हर्षवर्धन अग्रवाल ने गुरुवार शाम को थाने में स्याही फेंके जाने की घटना के लिए गंज थाना प्रभारी महावीर सिंह, एक संतरी और ड्यूटी ऑफिसर को प्रथम दृष्टया ड्यूटी में लापरवाही मानते हुए लाइन हाजिर कर दिया है. इस कार्रवाई से पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया है और मामले को गंभीरता से लिया जा रहा है. साथ ही मामले की जांच की जा रही है. थाने में फेंक दी स्याही अजमेर कांग्रेस के सोशल मीडिया प्रकोष्ठ के पदाधिकारी पीयूष सुराणा को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के खिलाफ कथित अमर्यादित पोस्ट के मामले में गुरुवार को हिरासत में लिया गया था. यह कार्रवाई भाजपा पदाधिकारी की शिकायत पर गंज थाने में की गई. गिरफ्तारी के बाद भाजपा महिला मोर्चा की पदाधिकारी गंज थाने पहुंचीं और विरोध प्रदर्शन के दौरान सुराणा पर स्याही फेंक दी. बीजेपी नेताओं पर मुकदमा थाने में स्याही फेंकने के मामले में सुराणा के छोटे भाई श्रेयांश सुराणा ने महिला मोर्चा से जुड़ी पदाधिकारियों के खिलाफ गंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया. अजमेर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (सिटी) हिमांशु जांगीड़ ने बताया कि इस प्रकरण में दोनों पक्षों की ओर से मामले दर्ज किए गए हैं. दोनों मामलों की जांच दरगाह थाना प्रभारी दिनेश जीवनानी को सौंपी गई है. वहीं, पीयूष सुराणा ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि संबंधित फेसबुक पोस्ट से उनका कोई लेना-देना नहीं है और उनकी आईडी का दुरुपयोग किया गया है.  पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है, जिसमें सोशल मीडिया अकाउंट की तकनीकी जांच भी शामिल है.

अपराधियों की पहचान छिपाने से रोकने के लिए जयपुर पुलिस ने कड़ा निर्देश जारी

जयपुर  जयपुर में समेत राजस्थान के बड़े शहरों में किराए पर मकान देकर पैसे कमाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है. लेकिन जयपुर में अब बिना पुलिस वेरिफिकेशन के किरायेदार रखे तो मकान मालिक को जेल जाना पड़ सकता है. जयपुर पुलिस ने इस मामले में सख्त हिदायत दी है. पुलिस का कहना है कि किरायेदार रखने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन जरूर करवाएं. दरअसल, पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि बाहरी राज्य के अपराधी जयपुर में अपनी पहचान छिपाकर फरारी काट रहे हैं. ऐसे में जाने-अनजाने में मकान मालिक ऐसे अपराधियों का सहयोग कर रहे हैं. ऐसे में पुलिस वेरिफिकेशन का मुद्दा काफी चर्चाओं में है. जयपुर में बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन के किरायदार रखना आपको दुविधा में डाल सकता है. नियमानुसार किरायदार रखने से पहले उसका पुलिस वेरिफ़िकेशन करवाना बेहद ज़रूरी है. इसके लिए राज कॉप पुलिस सिटीज़न ऐप या संबंधित स्थानीय थाने में इसकी सूचना देना अनिवार्य है. लेकिन इसकी पालना धरातल पर नहीं हो रही. इसी का फ़ायदा अपराधी उठा रहे हैं. मकान मालिक पर BNS 188 के तहत होगी कार्रवाई पुलिस ने बताया कि पुलिस वेरिफ़िकेशन के दौरान किराएदार का नाम पता घर का एड्रेस पूरा बैकग्राउंड यहां तक कि आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में भी जानकारी मिल जाती है. लेकिन मकान मालिक द्वारा यह लापरवाही की जा रही है उधर पुलिस का कहना है कि बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन किये बिना मकान देने पर मकान मालिक पर BNS 188 के तहत कार्रवाई की जाएगी. जयपुर में पहले भी हो चुकी है घटना पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि ऐसे कई अपराधी है जो बिना वेरिफ़िकेशन के जयपुर में रह रहे हैं और उनका मक़सद जयपुर में वारदात करना है. पिछले दिनों बिंदायका थाना पुलिस ने रोहित गोदारा गैंग से जुड़े कुछ शूटर को गिरफ़्तार किया था. वह बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन के रह रहे थे तो वहीं जवाहर सर्किल में प्रेगनेंट महिला से छेड़छाड़ का आरोपी राहुल भी बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन के अपनी पहचान छुपाकर किराये के मकान में रह रहा था. वहीं आतंकी खरगोश भी जयसिंह पुरा खोर इलाक़े में एक साल तक जयपुर में रहा वह सहजाद नाम से यहां पर रहा और उसका पुलिस वेरिफ़िकेशन नहीं करवाया गया था. वहीं दो दिन पहले वैशाली थाना पुलिस ने आरोपी अबू-बकर को गिरफ़्तार किया था जो म्यांमार का रहने वाला है, और बिना पुलिस वेरिफ़िकेशन के रह रहा था. इन सभी मामलों में मकान मालिक की लापरवाही सामने आयी इसके लिए अब जयपुर में पुलिस वेरीफिकेशन करवाना अनिवार्य कर दिया. अगर किरादार ने कोई बड़ी वारदात की तो इसकी ज़िम्मेदारी मकान मालिक की रहेगी पुलिस  मकान मालिक पर भी एक्शन लेगी.

पहली बार ऑनलाइन जनगणना सुविधा शुरू, 15 मई तक खुद भर सकेंगे नागरिक डेटा

जयपुर  राजस्थान में आज यानी 1 मई 2026 से जनगणना 2027 के पहले चरण 'हाउस लिस्टिंग' की शुरुआत हो गई है. प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा (Bhajanlal Sharma) ने जयपुर में सबसे पहले अपना स्व-गणना (Self Enumeration) प्रपत्र भरकर इस राष्ट्रीय अभियान का शुभारंभ किया है. सीएम ने सोशल मीडिया के जरिए प्रदेशवासियों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी निभाएं. उन्होंने कहा, 'सटीक जानकारी ही सरकार की योजनाओं को हर पात्र नागरिक तक पहुंचाने में मदद करेगी.' सीएम ने खुद ऑनलाइन फॉर्म भरकर यह संदेश भी दिया कि तकनीक के माध्यम से समय की बचत की जा सकती है. आज से प्रदेश में प्रारंभ हो रही जनगणना के प्रथम चरण ‘हाउस लिस्टिंग' प्रक्रिया के अंतर्गत, मैंने अपना स्वयं-गणना (Self Enumeration) प्रपत्र भरा।  यह प्रक्रिया सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को हर पात्र नागरिक तक प्रभावी रूप से पहुँचाने तथा प्रदेश के समग्र विकास के लिए सटीक नीतियाँ… पहली बार घर बैठे खुद गणना करने की सुविधा इस बार की जनगणना बेहद खास है क्योंकि पहली बार नागरिकों को वेब पोर्टल के जरिए अपनी जानकारी खुद भरने का विकल्प दिया गया है. सभी नागरिक 1 मई से 15 मई के बीच http://se.census.gov.in पर जाकर अपनी डिटेल खुद भर सकते हैं. अगर आप खुद फॉर्म भरते हैं, तो जब कर्मचारी आपके घर आएंगे, तो आपको लंबी कागजी कार्यवाही नहीं करनी होगी, बस अपनी SE ID दिखानी होगी. 16 मई से 14 जून तक कर्मचारी घर-घर जाकर डेटा वेरिफिकेशन और मकानों की लिस्टिंग करेंगे. तैयार रखें इन 33 सवालों के जवाब जनगणना कर्मचारी जब आपके घर पहुंचेंगे, तो वे आपसे कुल 33 सवाल पूछेंगे. इनमें प्रमुख हैं:- मकान का नंबर, फर्श, दीवार और छत किस सामग्री से बनी है? परिवार के मुखिया का नाम, जेंडर और क्या वे एससी/एसटी वर्ग से हैं? मकान अपना है या किराए का? परिवार के पास रहने के लिए कितने कमरे हैं? पीने के पानी और रोशनी का मुख्य स्रोत क्या है? शौचालय की सुविधा, गंदे पानी की निकासी और रसोईघर की क्या व्यवस्था है? खाना पकाने के लिए कौन सा ईंधन (LPG/PNG) इस्तेमाल होता है? घर में टीवी, इंटरनेट, लैपटॉप, स्मार्टफोन, साइकिल, कार या बाइक जैसी कितनी सुविधाएं मौजूद हैं? परिवार मुख्य रूप से खाने में किस अनाज का इस्तेमाल करता है?

बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता: राजस्थान शिक्षा विभाग ने प्रार्थना सभा, पेयजल और पहनावे में बदलाव किए

जयपुर राजस्थान में आसमान से बरसती आग और झुलसा देने वाली लू के बीच स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश का शिक्षा विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। बुधवार को माध्यमिक शिक्षा निदेशालय की ओर से जारी एक विशेष आदेश ने प्रदेश के सभी सरकारी और निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली को बदल दिया है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि जब तक पारा नीचे नहीं आता, तब तक स्कूलों को नई गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करना होगा। अब भारी यूनिफॉर्म से आजादी इस नए आदेश के तहत सबसे बड़ी राहत बच्चों को उनके पहनावे में दी गई है। अब भीषण गर्मी में छात्रों को भारी-भरकम और गहरे रंग की स्कूल यूनिफॉर्म पहनने की मजबूरी नहीं होगी। शिक्षा विभाग ने स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों को हल्के सूती कपड़े पहनकर आने की अनुमति दें, ताकि गर्मी के कारण होने वाली घबराहट और हीटस्ट्रोक से बचा जा सके। आउटडोर गतिविधियों पर 'नो एंट्री' सूरज के तीखे तेवरों को देखते हुए स्कूलों में होने वाली तमाम आउटडोर एक्टिविटीज, खेलकूद और धूप में होने वाले कार्यक्रमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। अब मैदानों में पीटीआई क्लास या खेल प्रतियोगिताएं आयोजित नहीं की जाएंगी। क्लासरूम में होगी प्रार्थना सभा और पानी की सख्ती स्कूलों में हर सुबह होने वाली प्रार्थना सभा के स्वरूप में भी बदलाव किया गया है। अब असेंबली का समय कम कर दिया गया है और स्कूलों को हिदायत दी गई है कि प्रार्थना या तो किसी छायादार स्थान पर कराएं या फिर सीधे क्लासरूम के भीतर ही आयोजित की जाए। विभाग ने पेयजल व्यवस्था को लेकर भी कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि छुट्टी के समय घर जाते वक्त बच्चों के पास ठंडे पानी की पर्याप्त उपलब्धता रहे। जल्दी छुट्टियों पर लगा विराम अभिभावकों और शिक्षकों के बीच जल्दी गर्मियों की छुट्टियों को लेकर जो उम्मीदें थीं, उन पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने फिलहाल विराम लगा दिया है। मंत्री दिलावर ने स्पष्ट किया है कि स्कूल अपने तय शेड्यूल के अनुसार ही चलेंगे। उन्होंने इसके पीछे शैक्षणिक लक्ष्यों का तर्क देते हुए कहा, 'हमारा लक्ष्य है कि छुट्टियों से पहले 20% सिलेबस पूरा कर बच्चों का टेस्ट लिया जाए, ताकि वे अवकाश के दौरान उसका रिवीजन कर सकें।' प्रदेश में स्कूल की छुट्टियां 16 मई से 21 जून तक ही रहेंगी, जबकि कॉलेजों में 1 मई से ही अवकाश शुरू हो चुका है। स्वास्थ्य विभाग भी 'हाई अलर्ट' पर गर्मी के इस संकट से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग भी मैदान में उतर गया है। गुरुवार से शनिवार तक प्रदेश के सभी जिलों में विशेष स्वास्थ्य टीमें तैनात की गई हैं, जो अस्पतालों में लू से निपटने की तैयारियों और दवाओं के स्टॉक का निरीक्षण करेंगी। साथ ही, फूड सेफ्टी अधिकारी सार्वजनिक स्थानों और हॉस्टलों में खाने-पीने की गुणवत्ता की जांच करेंगे ताकि भीषण गर्मी में संक्रमण को रोका जा सके।

फेसबुक विज्ञापन से लखपति बनने का सपना बना जाल, ‘ट्रैक्टर नोट’ स्कैम का खुलासा

 अजमेर क्या आपके पास भी वह पुराना 5 रुपये वाला नोट है, जिसके पीछे ट्रैक्टर चलाता हुआ किसान बना है? अगर हां, तो सावधान हो जाइए! जिसे आप अपनी 'किस्मत की चाबी' समझ रहे हैं, वही आपकी जमा-पूंजी साफ करने का जरिया बन सकता है. राजस्थान के अजमेर जिले में एक महिला के साथ ऐसा ही हुआ, जहां एक फेसबुक विज्ञापन ने उसे लखपति बनाने का सपना दिखाकर लाखों का चूना लगा दिया. फेसबुक पोस्ट ने दिखाया '48 लाख' का सपना मामला अजमेर के पॉश इलाके शास्त्री नगर का है. यहां रहने वाली एक महिला ने फेसबुक पर एक लुभावना विज्ञापन देखा. विज्ञापन में दावा किया गया था कि अगर किसी के पास 'ट्रैक्टर वाला' पुराना 5 रुपये का नोट है, तो उसके बदले उसे 48 लाख रुपये मिल सकते हैं. महिला इस विज्ञापन के झांसे में आ गई और दिए गए नंबर पर संपर्क किया. ठगों ने बुना बातों का जाल महिला ने जैसे ही संपर्क किया, ठगों ने खुद को एक बड़ी पुरानी मुद्रा (Antique Currency) खरीदने वाली कंपनी का प्रतिनिधि बताया. उन्होंने महिला का भरोसा जीतने के लिए फर्जी दस्तावेज और आईडी कार्ड्स तक दिखाए. महिला को यकीन दिलाया गया कि उसका 5 रुपये का नोट वाकई 'दुर्लभ' है और उसे 48 लाख रुपये दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. किश्तों में पार किए 3.66 लाख रुपये ठगी का खेल तब शुरू हुआ जब ठगों ने 'प्रोसेसिंग फीस' के नाम पर पैसे मांगना शुरू किया. महिला से कभी GST, कभी रजिस्ट्रेशन शुल्क, तो कभी फाइल चार्ज और ट्रैवलिंग चार्ज के नाम पर किश्तों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए. महिला को बार-बार आश्वासन दिया गया कि बस यह आखिरी चार्ज है, इसके बाद 48 लाख सीधे खाते में आ जाएंगे. लालच और उम्मीद में महिला पैसे भेजती रही. जब तक महिला को ठगी का अहसास हुआ, वह कुल 3 लाख 66 हजार रुपये ठगों के खातों में जमा कर चुकी थी. साइबर थाना जांच में जुटा जब महिला को न तो पैसे मिले और न ही प्रतिनिधि का फोन लगा, तब उसे ठगी का अहसास हुआ. पीड़िता ने अजमेर के साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई है. डीवाईएसपी शमशेर खान ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जिन बैंक खातों में पैसे भेजे गए हैं, उनकी डिटेल खंगाली जा रही है.

राजस्थान में 70,000 छात्रों का AI से एग्जाम एनालिसिस, अब ‘स्कोर कार्ड’ की जगह ‘स्किल्स कार्ड’

जोधपुर राजस्थान के जोधपुर जिले में शिक्षा और तकनीक का एक अनूठा संगम देखने को मिल रहा है. जिले के सरकारी स्कूलों में शुरू की गई एक एआई (Artificial Intelligence) आधारित प्रायोगिक परियोजना ने छात्रों के मूल्यांकन और रिपोर्ट कार्ड तैयार करने की पारंपरिक व्यवस्था को पूरी तरह से बदल दिया है. अब शिक्षकों को उत्तर पुस्तिकाओं की जांच के लिए घंटों पसीना नहीं बहाना पड़ता, बल्कि एआई प्रणाली महज कुछ ही सेकंड में यह काम पूरा कर रही है. लाखों उत्तर पुस्तिकाओं का 'सुपरफास्ट' मूल्यांकन 'योग्यता-आधारित मूल्यांकन और स्कूल रिपोर्टिंग प्रायोगिक परियोजना' के दूसरे चरण के तहत एक बड़ी उपलब्धि हासिल की गई है. अधिकारियों के मुताबिक, कक्षा 6 से 9 तक के 70,000 से अधिक छात्रों का मूल्यांकन किया गया. इसमें हिंदी और अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों के 5 मुख्य विषयों (हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान) में कुल 3 लाख से अधिक टेस्ट पेपर जांचे गए. जहां पहले इस पूरी प्रक्रिया में कई हफ्ते लग जाते थे, वहीं अब शिक्षकों के जरिए ऐप से स्कैन की गई कॉपियों का परिणाम मात्र 3 दिनों केअंदर विस्तार  के साथ तैयार हो जाता है. स्कोर कार्ड नहीं, अब 'स्किल्स कार्ड' की बारी इस नई प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत इसका सूक्ष्म विश्लेषण है. अधिकारियों ने कहा कि कुल अंकों पर निर्भर रहने के बजाय, मूल्यांकन अब विशिष्ट दक्षताओं पर आधारित है. उदाहरण के तौर पर यदि कोई छात्र सांख्यिकी में बेहतर है लेकिन भाषा की समझ में कमजोर है, तो रिपोर्ट में इसका स्पष्ट उल्लेख रहता है. रिपोर्ट कार्ड में छात्र के सुधार के लिए विषय-वार विस्तृत जानकारी दी जाती है, जिससे अभिभावकों और शिक्षकों को सटीक दिशा मिलती है. प्रशासन का विजन, 1000 स्कूलों तक विस्तार मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी रजनी शेखावत ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम जिले के सभी 15 ब्लॉक के 1,000 से अधिक स्कूलों में लागू है. इसकी शुरुआत अक्टूबर 2025 में पहले चरण के रूप में जोधपुर ब्लॉक के अंग्रेजी माध्यम के 54 सरकारी स्कूलों में की गई थी, जिसमें छठी से आठवीं कक्षा तक के 3,000 से अधिक छात्रों को शामिल किया गया था. इस प्रक्रिया में शिक्षक एक विशेष ऐप के माध्यम से उत्तर पुस्तिकाओं को स्कैन करते हैं, जिसके बाद एआई प्रणाली उत्तरों का मूल्यांकन करती है.

‘नौवें बम’ मामले में सरवर और शाहबाज की स्टे अपील खारिज, जेल में रहेंगे उम्रकैद

 जयपुर राजस्थान हाईकोर्ट ने साल 2008 में हुए जयपुर सीरियल बम धमाकों से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में दो दोषियों को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है. जस्टिस इंद्रजीत सिंह और जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने शुक्रवार को मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद की उस अर्जी (स्टे एप्लीकेशन) को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी सजा पर रोक लगाने की मांग की थी. क्या है 'नौवें बम' का मामला? 13 मई 2008 को जयपुर में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने पूरे देश को दहला दिया था. इन धमाकों में 71 बेगुनाहों की जान गई थी, और 185 लोग घायल हुए थे. पुलिस को चांदपोल बाजार के पास एक 9वां बम भी मिला था, जिसे फटने से महज 15 मिनट पहले डिफ्यूज कर दिया गया था. इसी 'जिंदा बम' मामले में विशेष अदालत ने दोनों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी, जिसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी है. 'जब 8 केस में बरी, तो यहां क्यों नहीं?' दोषियों के वकील ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट पहले ही मुख्य 8 ब्लास्ट मामलों में उन्हें बरी कर चुका है. ऐसे में 'जिंदा बम' मामले में भी उन्हें राहत मिलनी चाहिए. उन्होंने दलील दी कि अपील पर सुनवाई में लंबा समय लग सकता है, इसलिए उनकी सजा पर रोक लगाकर उन्हें जमानत दी जाए. ई-मेल बना मुख्य सबूत राज्य सरकार की ओर से पैरवी करते हुए इन दलीलों का पुरजोर विरोध किया गया. सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि इन आरोपियों के खिलाफ पुख्ता और अतिरिक्त साक्ष्य मौजूद हैं. धमाकों के तुरंत बाद दो न्यूज चैनलों को ई-मेल भेजकर इन लोगों ने धमाकों की जिम्मेदारी ली थी. ई-मेल के जरिए धमाकों को 'सही' ठहराना इनके शामिल होने का बड़ा प्रमाण है. अदालत का फैसला दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल सजा पर रोक लगाना सही नहीं होगा. इस फैसले के बाद अब सरवर और शाहबाज को जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा.

राजस्थान में 1.25 लाख सरकारी नौकरियों का ऐलान, मुख्यमंत्री शर्मा ने कहा – ‘नो पेपर लीक्स’

जयपुर  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान में बालिका शिक्षा में तेजी से प्रगति हो रही है, जिसका श्रेय राज्य सरकार की उन नीतियों को जाता है जो बुनियादी ढांचे के विस्तार और सभी क्षेत्रों में उच्च शिक्षा तक पहुंच सुनिश्चित करने पर केंद्रित हैं। वे पाली जिले के रोहट में राजेश्वर भगवान अंजनी माता कन्या गुरुकुल संस्थान द्वारा स्थापित नवनिर्मित बालिका महाविद्यालय के उद्घाटन और गुरुकुल के 10वें स्थापना दिवस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। युवाओं के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर क्षेत्रीय विकास निर्भर होने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि नया महाविद्यालय युवा महिलाओं को शिक्षित करने और क्षेत्र में शैक्षिक पहुंच को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि क्षेत्र की जल आवश्यकताओं को सुव्यवस्थित और समयबद्ध तरीके से पूरा करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी। शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण के अनुरूप राज्य सरकार ने युवाओं, महिलाओं, किसानों और श्रमिकों पर केंद्रित एक व्यापक विकास रोडमैप तैयार किया है। राम जल सेतु लिंक परियोजना, देवास परियोजना, यमुना जल समझौता और सोम-कमला-अंबा परियोजना सहित जल और बिजली से संबंधित परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने संतुलित और समावेशी क्षेत्रीय विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में 24 जिलों के किसानों को दिन के समय बिजली मिल रही है, और यह सुविधा चरणबद्ध तरीके से 2027 तक पूरे राजस्थान में विस्तारित की जाएगी। रोजगार प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए शर्मा ने कहा कि सरकार का लक्ष्य 10 लाख नौकरियां सृजित करना है, जिनमें से 6 लाख निजी क्षेत्र में और 4 लाख सरकारी क्षेत्र में होंगी। अब तक लगभग 1.25 लाख सरकारी पदों पर भर्ती हो चुकी है, 1.33 लाख पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है, और 1.25 लाख अन्य पदों के लिए भर्ती कैलेंडर जारी किया जा चुका है। निजी क्षेत्र में, विभिन्न पहलों के तहत अब तक लगभग 3 लाख नौकरियां सृजित की जा चुकी हैं। उन्होंने परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के मामले में पिछली सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि पहले ऐसी घटनाओं से युवाओं की उम्मीदें चकनाचूर हो जाती थीं, लेकिन वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक कोई प्रश्नपत्र लीक नहीं हुआ है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में शुरू की गई पहलों का जिक्र करते हुए शर्मा ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन और जल जीवन मिशन जैसे प्रमुख अभियानों पर प्रकाश डाला, जिनका उद्देश्य महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और समग्र जीवन स्तर को बेहतर बनाना है। मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम-2026) का आयोजन 23 से 25 मई तक जयपुर में किया जाएगा, जिसमें देशभर के किसान, पशुपालक, वैज्ञानिक और निवेशक भाग लेंगे। उन्होंने किसानों से इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में शामिल होने का आग्रह किया। शर्मा ने कहा कि पिछले ढाई वर्षों में 71 नए सरकारी कॉलेज खोले गए हैं और 185 कॉलेजों के भवनों का उद्घाटन किया गया है, जिससे राज्य में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिली है। उन्होंने बताया कि पिछली सरकार ने पांच वर्षों में केवल 57 कॉलेज भवनों का निर्माण किया था।

राजस्थान वन विभाग का बड़ा फैसला: लेपर्ड को मारने से पहले DNA जांच जरूरी

जयपुर  राजस्थान में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं के बीच राज्य वन विभाग ने एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। अब किसी भी लेपर्ड को 'आदमखोर' घोषित कर उसे मारने की अनुमति देना आसान नहीं होगा। चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन के.सी.ए. अरुणप्रसाद द्वारा जारी की गई नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर में स्पष्ट किया गया है कि लेपर्ड को 'आदमखोर' श्रेणी में डालने के लिए अब पुख्ता वैज्ञानिक और कानूनी साक्ष्यों की आवश्यकता होगी। बिना फॉरेंसिक जांच नहीं होगा फैसला नई गाइडलाइन के अनुसार, यदि किसी लेपर्ड पर इंसानों पर हमला करने या उन्हें खाने का संदेह है, तो केवल अनुमान के आधार पर कार्रवाई नहीं की जाएगी। विभाग को अब निम्नलिखित प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी-     डीएनए विश्लेषण: घटनास्थल पर मिले बालों, लार या अन्य नमूनों का मिलान संदिग्ध जानवर से करना होगा।     फॉरेंसिक साक्ष्य: हमले के निशान और अन्य फॉरेंसिक एविडेंस की जांच अनिवार्य कर दी गई है।     वैज्ञानिक निगरानी: हमले वाले क्षेत्र में ट्रैप कैमरे और ड्रोन के जरिए लेपर्ड के व्यवहार की निगरानी की जाएगी। मारना नहीं, पकड़ना होगी पहली प्राथमिकता SOP में यह भी साफ किया गया है कि अगर किसी लेपर्ड को 'आदमखोर' मान भी लिया जाता है, तब भी पहली प्राथमिकता उसे जीवित पकड़ने की होगी। उसे मारने का आदेश केवल अंतिम विकल्प के रूप में और चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन की लिखित अनुमति के बाद ही दिया जा सकेगा। भीड़ पर लगेगी लगाम अक्सर रेस्क्यू के दौरान उमड़ने वाली भीड़ लेपर्ड को हिंसक बना देती है। अब ऐसे संवेदनशील ऑपरेशन्स के दौरान भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (पूर्व में 144) लागू की जाएगी। पुलिस को भीड़ हटाने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए हैं ताकि वैज्ञानिक तरीके से जांच पूरी की जा सके। हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें होगी तैनात वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि हैबिटेट के विखंडन के कारण लेपर्ड आबादी के करीब आ रहे हैं। इस नई नियमावली का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी बेगुनाह जानवर को महज लोगों के गुस्से या डर के कारण अपनी जान न गंवानी पड़े। अब हर जिले में रैपिड रिस्पांस टीमें तैनात रहेंगी, जो आधुनिक उपकरणों और वैज्ञानिक डेटा के आधार पर ऐसे संकटों का समाधान करेंगी।

कपास का अच्छा भाव भी नहीं लुभा पा रहा किसान, 60% तक घट सकता रकबा

 ढिगावा मंडी  हरियाणा में कपास की खेती करने में किसान रूचि नहीं दिखा रहे हैं। मार्केट में अच्छा भाव मिलने के बावजूद भी किसानों का कपास से मोह भंग हो चुका है। मार्केट में नरमा कपास इस समय आठ से 10 हजार रुपये क्विंटल बिक रही है। इसके बावजूद किसान कपास की फसल की बिजाई करने में ज्यादा रुचि नहीं ले रहे। जिसके कारण पिछले साल से 60 से 65 प्रतिशत तक कपास का रकबा घट सकता है। कपास की फसल से किसानों का मोह भंग होने का कारण गुलाबी सुंडी है। गुलाबी सुंडी ने पिछले साल कपास की फसल में कहर ढाया था। जिसके कारण किसानों ने समय से पहले कपास की फसल काटकर अगली फसल की बिजाई कर दी थी। सरकार और कृषि विभाग को भी पहले से ही इस बार कपास का रकबा घटने का अंदेशा था। जिसके चलते गुलाबी सुंडी पर नियंत्रण पाने के लिए खरीफ सीजन से पहले ही प्रयास शुरू कर दिए गए थे। अधिकारियों ने किया था किसानों से संपर्क कृषि विभाग के अधिकारियों ने काटन मिल में जाकर निरीक्षण किया और वहां रखे बिनौले को ढक कर रखने के आदेश दिए थे, ताकि बिनौले से निकल कर गुलाबी सुंडी का फैलाव ना हो। वहीं खेतों में रखे कपास के फसल अवशेष (लकड़ी) भी उठाने या नष्ट करने के लिए कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों से संपर्क किया। ताकि फसल अवशेष में अगर गुलाबी सुंडी है, तो वो भी नष्ट हो जाए और कपास की अगली फसल में जाए। लेकिन कृषि विभाग के प्रयासों के बावजूद कपास की फसल की बिजाई करने में किसान कम रुचि ले रहे हैं। पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी भिवानी जिले का लोहारू, बहल क्षेत्र कपास उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यहां के किसान बाजरा, ग्वार, मूंग की फसलों का रुख कर रहे हैं। दैनिक जागरण टीम ने किसानों से इस बारे में बात की तो उन्होंने बताया कि भूजल स्तर तेजी से गिरना, समर्थन मूल्य पर अनिश्चितता, गुलाबी सुंडी व सफेद मक्खी का प्रकोप किसानों ने कपास की खेती छोड़ने का प्रमुख कारण बताया। बता दें की भिवानी जिले में पिछले साल एक लाख 52 हजार एकड़ में कपास की फसल थी। 15 मई तक कपास की बिजाई के लिए अनुकूल समय माना जाता है, लेकिन अभी तक नाममात्र एकड़ पर ही कपास की बिजाई हो पाई है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में आठ से 10 हजार एकड़ में और कपास की बिजाई हो सकती है। कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अगले पांच दिन मौसम कपास फसल बिजाई के लिए अनुकूल है। क्योंकि वर्षा से तेजी से बढ़ रहे तापमान में गिरावट आई है।