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अलवर: केंद्र-राज्य योजनाओं और विकास कार्यों की मंत्री ने दी जानकारी

 जयपुर 12 साल विश्वास के, विकास के, जनकल्याण के विषय पर आधारित तीन दिवसीय प्रदर्शनी का जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय, धौलपुर में प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की प्रदर्शनी न केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराती है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों को भी जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की व्यापकता एवं प्रभावशीलता को समझने का अवसर प्रदान करती है। प्रदर्शनी के माध्यम से यह स्पष्ट रूप से देखने को मिला कि सरकार की विभिन्न योजनाओं ने समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। प्रदर्शनी में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत योजना, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, डिजिटल इंडिया, किसान सम्मान निधि सहित विभिन्न केंद्रीय योजनाओं तथा राज्य सरकार की जनहितकारी पहल, सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों, शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में किए गए सुधारों तथा विकास परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदर्शित की गई। इसके अतिरिक्त महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, रोजगार संवर्धन तथा ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार से संबंधित उपलब्धियों को भी प्रमुखता से दर्शाया गया। उन्होंने प्रदर्शनी के सफल आयोजन के लिए सूचना एवं जनसंपर्क विभाग की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन आमजन एवं प्रशासन के बीच संवाद स्थापित करने तथा विकास यात्रा को समझने का प्रभावी माध्यम हैं। उल्लेखनीय है कि सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित यह प्रदर्शनी केंद्र एवं राज्य सरकार की विकासोन्मुखी नीतियों, जनकल्याणकारी कार्यक्रमों तथा सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। प्रदर्शनी के माध्यम से नागरिकों को सरकार द्वारा संचालित योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के साथ-साथ उन्हें इन योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है। इस दौरान जिला कलक्टर निधि बी टी, जिला अध्यक्ष राजवीर सिंह राजावत, गिर्राज सिंह, डॉ. शिवचरण कुशवाह, नीरजा शर्मा, मोतीलाल मीणा सहित अन्य जनप्रतिनिधि व कर्मचारी उपस्थित रहे।

नमक उत्पादकों के लिए नए नियम, लीज नवीनीकरण और 6 माह की छूट मंजूर

जयपुर राजस्‍थान सरकार द्वारा नमक उत्‍पादकों के हित को ध्‍यान में रखते हुए भूखंड आवंटन से संबंधित नियमों में संशोधन किया गया है। राज्य में नमक उद्योग को बढावा देने के लिए वतर्मान में प्रचलित नियमों में संशोधन कर राजस्‍थान (लवण क्षेत्रों में भूखंड आवटंन) संशोधन नियम, 2026 जारी किए गए हैं। नए नियमों के अनुसार, अब नमक उद्योग के लिए भूखंड आवंटन ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा। पूर्व में यह प्रक्रिया लॉटरी आधारित थी। साथ ही, नियमों में अपील किए जाने, नमक इकाइयों के वर्गीकरण संबंधी प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। जिन जिलो में नमक उत्‍पादन हेतु लवणीय भूमि उपलब्‍ध है, उनमें अब  सर्वे सीमांकन और भूखंडो के मापन के बाद आवंटन की कार्यवाही की जा सकेगी। इन नियमों की लंबे समय से नमक उत्‍पादको द्वारा  मांग की जारी रही थी। वर्तमान में लीज नवीनीकरण से वंचित नमक उत्‍पादक इकाइयों का नवीनीकरण किए जाने से नमक उद्यमियों को राहत मिलेगी।  नए लवण क्षेत्रों मे आवंटन की राह खुलेगी, जिससे इस क्षेत्र में और अधिक निवेश होगा। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेगा। 300 इकाइयां नवीनीकरण से थी वचिंत, अब 6 माह की छूट मिलेगी पूर्व के नियमों में लीज समाप्‍त होने के चार वर्ष पश्‍चात नवीनीकरण करने को कोई प्रावधान नही होने से लगभग 300 नमक उत्‍पादक इकाइयां लीज नवीनीकरण से वंचित थी, जिसके कारण नमक उत्‍पादक काफी परेशान थे। राज्‍य सरकार द्वारा ऐसी इकाईयों को 6 माह की एकमुश्‍त छूट प्रदान कर नमक उत्‍पादकों को काफी राहत प्रदान की है। इस छूट से नमक उत्‍पादक इकाईयों का लीज नवीनीकरण हो सकेगा और राज्‍य सरकार को राजस्‍व में भी लाभ मिलेगा ।

ग्राम पंचायत स्तर पर बड़े बदलाव, IAS–RAS अधिकारियों को मिली विशेष शक्तियां

 जयपुर राज्य सरकार द्वारा प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों की समस्याओं, विशेषकर जमीन से जुड़े मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। जनकल्याण शिविर के अन्तर्गत प्रदेश की प्रत्येक ग्राम पंचायत मुख्यालय पर दिनांक 12 जून से 15 जुलाई तक 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' का वृहद स्तर पर आयोजन किया जा रहा है। संभागीय आयुक्त और जिला कलक्टरों को मिले विशेष अधिकार इस महा-अभियान के प्रभावी एवं सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राजस्व विभाग ने प्रशासनिक शक्तियों का विकेंद्रीकरण किया है। अभियान की अवधि के लिए समस्त संभागीय आयुक्तों और जिला कलक्टरों को विशेष रूप से प्राधिकृत किया गया है। इसके तहत वे अपने-अपने क्षेत्राधिकार में 'नॉन-फील्ड' (कार्यालयों/गैर-क्षेत्रीय पदों पर) कार्यरत तहसीलदारों एवं नायब तहसीलदारों को तुरंत प्रभाव से तहसीलों या उप-तहसीलों के रिक्त पदों पर पदस्थापित कर सकेंगे राज्यभर में 12 जनवरी से शुरू हो रहे 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' अभियान में मौके पर ही समस्या समाधान के लिए राज्य सरकार ने कई अधिकारियों की शक्तियों को शिविर प्रभारियों व अन्य अधिकारियों को डेलीगेट कर दी है। ये आदेश 12 जून से 15 जुलाई तक प्रभावी होंगे। शिविर प्रभारी आईएएस, आरएएस को मिली ये शक्तियां आदेशों के अनुसार राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने एवं राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 92 के अंतर्गत आबादी विस्तार हेतु भूमि आरक्षित किये जाने की जिला कलक्टर की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दे दी गई हैं।   राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के अंतर्गत उपखण्ड अधिकारी की शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251-ए व उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत अन्य खातेदार की जोत में से होकर भूमिगत पाइपलाइन बिछाने या नया मार्ग खोलने या विद्यमान मार्ग को चौड़ा करने के लिये उपखण्ड अधिकारियों को प्रदत्त शक्तियां भी इन अधिकारियों को दी गई हैं। राजस्व अभिलेख की त्रुटियों के शुद्धिकरण के प्रकरणों के निस्तारण हेतु उपखण्ड अधिकारी की  शक्तियां भी शिविर प्रभारी बनाए गए भारतीय प्रशासनिक सेवा एवं राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को दी गई हैं। शिविरों में नियुक्त तहसीलदार/नायब तहसीलदार को मिली शक्तियां राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 53 की उप-धारा (1) व (2) एवं उसके अन्तर्गत बने नियमों के तहत भूमि के बंटवारे की तहसीलदार की शक्तियां 'ग्रामीण सेवा शिविर-2026' के लिये नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को दी गई हैं। राजस्थान काश्तकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम संख्या 3, वर्ष 1955) की धारा 251 (1) के तहत रास्ते तथा अन्य निजी सुखाचार के अधिकार के तहत तहसीलदार की शक्तियां शिविरों के लिए नियुक्त  समस्त नायब तहसीलदारों को प्रदान की गई हैं। नामान्तरकरण के मामलों की ग्राम पंचायत की शक्तियां और राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम 18 के अन्तर्गत तहसीलदार की शक्ति व राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 (अधिनियम संख्या 15, वर्ष 1956) की धारा 128 के परन्तुक एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/36 दिनांक 04.09.1982 के तहत अविवादित सीमा ज्ञान के मामलो को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां शिविर में नियुक्त तहसीलदार/ नायब तहसीलदार को प्रदत्त की गई हैं। ऐसे तहसीलदारों व नायब तहसीलदारों को  राज्य सरकार राजस्थान काश्ताकारी अधिनियम, 1955 (अधिनियम सख्यां 3, वर्ष 1955) की धारा 251 एवं अधिसूचना क्रमांक 5 (21) राज-4/80/34 दिनांक 14.09.1982 के तहत मार्गाधिकार या अन्य सुखाचार के वास्तविक उपयोग में विघ्न डाले जाने के मामलों को निर्णित करने की ग्राम पंचायत की शक्तियां भी दे दी गई हैं। समय अवधि 15 दिन से 7 दिन की राजस्थान भू-राजस्व (कृषि प्रयोजनार्थ भूमि आवंटन) नियम, 1970 के नियम के खण्ड (ख) के द्वितीय परन्तुक में प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुये भूमि आवंटन के लिये आवेदन प्रस्तुत किये जाने के लिये जारी उद्घोषणा के लिये निर्धारित पन्द्रह दिवस की कालावधि को कम कर सात दिन कर दिया गया है। भूमि आवंटन की राज्य सरकार की पॉवर कलेक्टर को राजस्थान भू-राजस्व अधिनियम, 1956 की धारा 102क के अन्तर्गत आबादी विस्तार हेतु आरक्षित भूमि को स्थानीय निकायों के अधीन किये जाने की राज्य सरकार को प्रदत्त शक्तियां  जिला कलक्टर को दी गई है।  

पश्चिमी विक्षोभ के असर से बदला मौसम, 4–5 दिन और बारिश के आसार

 लखनऊ प्रदेश में आंधी बारिश का दौर लगातार जारी है.  बरसात के बीच लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है.  शनिवार को भी राज्य के कई स्थानों में बरसात हुई.  राजस्थान में प्री मानसून अच्छी बरसात हो रही है. कई जगहों पर ओलावृष्टि भी हुई. बरसात के कारण कई जगहों के तापमान में गिरावट हुई.  प्रदेश में जैसलमेर में तापमान सर्वाधिक 40.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो कि शुक्रवार की तुलना में करीब 3.4 डिग्री सेल्सियस कम हुआ.   राजधानी जयपुर में भी सुबह से ही सूरज और बादल की आंख मिचौली चल रही है.  लोगों का उमस से हाल बेहाल है.  लेकिन तापमान में पिछले दिनों की तुलना गिरावट हुई है.   बदला मौसम का मिजाज मौसम विभाग के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ के असर से मौसम का मिजाज बदला हुआ है.  वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ हरियाणा और आसपास के क्षेत्र में परिसंचरण तंत्र के रूप में सक्रिय है.  इसके साथ ही बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नम हवाओं के कारण प्रदेश में आंधी-बारिश की गतिविधियां बढ़ी हैं. तेज मेघगर्जन के साथ आंधी-बारिश पिछले 24 घंटे में बीकानेर, जयपुर और भरतपुर संभाग के कुछ हिस्सों में तेज मेघगर्जन, आंधी के साथ बारिश दर्ज की गई.  सीकर के दांतारामगढ़ में सबसे ज्यादा 50 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड हुई. आज भी बीकानेर, जयपुर, भरतपुर, अजमेर, जोधपुर और कोटा संभाग के कुछ क्षेत्रों में तेज आंधी के साथ बारिश की संभावना जताई गई है.  इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं.  अगले 4 से 5 दिन तक प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है.

विश्व धरोहर चित्तौड़गढ़ दुर्ग से हटाया गया अतिक्रमण, 2 मंजिला होटल ध्वस्त

चित्तौड़गढ़ विश्व विरासत में शुमार ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ दुर्ग के भीतर प्रशासन का बुलडोजर चला. फोर्ट के भीतर अतिक्रमण को लेकर प्रशासन ने यह कार्रवाई की. यहां पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध 2 मंजिला होटल बनाया जा रहा था. प्रशासन रविवार (14 जून) अलसुबह भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचा और अवैध निर्माण को ढहा दिया. सुबह ठीक 4 बजे, जब पूरा शहरवासी गहरी नींद में थे, तब प्रशासनिक अमला अपने दुर्ग पर पहुंचा. अवैध रूप से बन रही इमारत को जमींदोज करने के लिए 10 जेसीबी, 8 ट्रेक्टर, 3 ब्रेकर मशीनों की मदद ली गई. सुरक्षा के लिहाज से दुर्ग की तरफ आने-जाने वाले सभी रास्तों को ब्लॉक कर दिया गया. चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा. शहर कोतवाली में नामजद मामला भी दर्ज पिछले दिनों कलेक्ट्रेट में उच्च स्तरीय बैठक में प्लानिंग बनाई गई और आज सुबह एक्शन लिया गया. जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने बैठक में सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण करने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए. कलक्टर के आदेश के बाद पुरातत्व विभाग के अधिकारी ने चित्तौड़गढ़ शहर कोतवाली में एक नामजद मामला भी दर्ज हुआ. पुरातत्व विभाग की जमीन पर पहली बार ऐसी कार्रवाई पुरातत्व विभाग के अधिकारी मनोज द्विवेदी ने बताया कि हमारे संरक्षित क्षेत्र में यह अवैध निर्माण किया गया था. अवैध निर्माण हटाने को लेकर पहले नोटिस भी दिया गया था. जिला प्रशासन के सहयोग से पुरातत्व विभाग की जमीन पर अवैध निर्माण होटल को हटा दिया गया है. राजस्थान में यह अपने आप में पहली ऐसी बड़ी कार्रवाई है, जहां पुरातत्व विभाग की जमीन से अतिक्रमण हटाया गया है. अगर ऐसी कार्रवाई होती रही, तो हमारी राष्ट्रीय धरोहरें हमेशा सुरक्षित रहेंगी. 8 से 10 रेस्टोरेंट पर चल सकता है बुलडोजर प्रशासन की इस बुलडोजर कार्रवाई के बाद दुर्ग क्षेत्र के आसपास हलचल तेज हो गई है. साल 2020 के बाद से चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर करीब 8 से 10 अवैध रेस्टोरेंट और होटलों का निर्माण हुआ है. इन सभी पर कार्रवाई के लिए दिल्ली स्थित आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट को पत्र लिखा जा चुका है. जैसे ही वहां से उच्च स्तरीय स्वीकृति मिलेगी, दुर्ग पर बने अन्य अवैध होटलों और रेस्टोरेंट्स पर भी प्रशासन का बुलडोजर चलना तय माना जा रहा है.

जयपुर डेयरी का मेगा अपग्रेड तैयार, CM भजनलाल शर्मा करेंगे उद्घाटन; बढ़ी प्रोसेसिंग क्षमता

जयपुर  जयपुर जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड (जयपुर डेयरी) ने अपने उपभोक्ताओं और पशुपालकों को बड़ी सौगात देते हुए प्लांट की उत्पादन व प्रोसेसिंग क्षमता में ऐतिहासिक विस्तार किया है। डेयरी ने करीब 133 करोड़ रुपए की लागत से अपने मौजूदा प्लांट का आधुनिकीकरण (Modernization) पूरा कर लिया है। इस अपग्रेडेशन के बाद प्लांट की दूध प्रोसेसिंग क्षमता अब 12 लाख लीटर से सीधे बढ़कर 20 लाख लीटर प्रतिदिन हो गई है। इस अत्याधुनिक नए प्लांट का उद्घाटन मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जल्द ही करेंगे। विद्युत और प्रोसेसिंग यूनिट्स के सफल संचालन के बाद डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने प्लांट का दौरा कर उद्घाटन समारोह की तैयारियों की समीक्षा की। मंत्री कुमावत ने अधिकारियों से नई ऑटोमैटिक प्रोसेसिंग यूनिट्स की कार्यप्रणाली को बारीकी से समझा और कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  इस अवसर पर राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की प्रबंध संचालक (MD) श्रुति भारद्वाज और जयपुर डेयरी के एमडी मनीष फौजदार सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। संवाददाताओं से बातचीत करते हुए डेयरी मंत्री ने बताया कि इस नए और सर्वसुविधायुक्त प्लांट से उत्पादन क्षमता में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जिसका सीधा फायदा जयपुर और आसपास के जिलों के दुग्ध उत्पादकों को मिलेगा: पैकेजिंग क्षमता: दूध की प्रोसेसिंग के साथ ही पाउच पैकिंग की क्षमता को भी रफ्तार दी गई है। अब प्रतिदिन दूध पाउच पैक करने की क्षमता 10 लाख लीटर से बढ़कर 16.50 लाख लीटर हो गई है। घी उत्पादन: प्लांट की नई तकनीक के चलते अब यहाँ रोजाना 70 टन घी का उत्पादन आसानी से किया जा सकेगा। आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर : प्लांट में नई जनरेशन के बॉयलर और हैवी मशीनरी स्थापित की गई है, जो प्रति घंटे लगभग 70 मीट्रिक टन भाप जेनरेट कर सकती है। इसकी मदद से घी, बटर और वे-वाटर (Whey Water) जैसे विभिन्न दुग्ध उत्पादों का निर्माण और अधिक शुद्धता व गति से संभव हो सकेगा। महत्व : जयपुर डेयरी का यह नया रूप न केवल मिलावट रहित और शुद्ध दुग्ध उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सहकारिता आंदोलन को भी राजस्थान में एक नई मजबूती प्रदान करेगा।

मानव हस्तक्षेप से प्रभावित अरावली क्षेत्र की जैव विविधता में गिरावट

 उदयपुर  उदयपुर संभाग के जंगलों में आज भले ही तेंदुए, सियार और जंगली सूअर बड़ी संख्या में दिखाई दे रहे हों, लेकिन एक सदी पहले मेवाड़ के वन बाघ, शेर, चीता और जंगली कुत्तों जैसे शीर्ष वन्यजीवों की शरणस्थली थे। जयसमंद वन्यजीव अभयारण्य पर किए गए एक शोध अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि मानव हस्तक्षेप, जंगलों के विखंडन और प्राकृतिक वन्यजीव गलियारों के टूटने से क्षेत्र की जैव विविधता में भारी गिरावट आई है। शोध के अनुसार जयसमंद और आसपास का क्षेत्र कभी बाघ, शेर, चीता, भेड़िया, जंगली कुत्ता, काला हिरण, चिंकारा, चीतल, सांभर और नीलगाय जैसे वन्यजीवों से समृद्ध था। उस समय अरावली के जंगल पाली के गोरमघाट और कमलीघाट से लेकर मध्यप्रदेश तक फैले हुए थे, जिससे वन्यजीवों का आवागमन निर्बाध बना रहता था। शिकार और जंगलों की कटाई बनी बड़ी वजह विशेषज्ञों के अनुसार राजशाही काल में बड़े पैमाने पर शिकार और बाद के वर्षों में बढ़ते मानव दबाव ने वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंचाया। खेती के विस्तार, खनन गतिविधियों, सड़क निर्माण और आबादी बढ़ने से वन क्षेत्र छोटे-छोटे हिस्सों में बंट गए। इसका सीधा असर उन प्रजातियों पर पड़ा जिन्हें बड़े और निरंतर जंगलों की आवश्यकता होती है। कई प्रजातियां हुईं स्थानीय रूप से विलुप्त शोध में बताया गया है कि बाघ, शेर, चीता, जंगली कुत्ता और काला हिरण जैसी कई प्रजातियां जयसमंद क्षेत्र से स्थानीय रूप से विलुप्त हो चुकी हैं। वर्ष 2005 से 2009 के बीच किए गए अध्ययन में केवल 21 स्तनधारी प्रजातियां दर्ज की गईं, जिनमें से बड़ी संख्या कम या दुर्लभ श्रेणी में पाई गई। वर्तमान में तेंदुआ और जंगली सूअर का दबदबा हाल ही में उदयपुर संभाग की वन्यजीव गणना के अनुसार वर्तमान में जंगली सूअर 515, सियार 251, जरख 173 और तेंदुए 57 दर्ज किए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेंदुए जैसे अनुकूलनशील वन्यजीव बदलते परिवेश में खुद को ढालने में सफल रहे हैं, जबकि कई संवेदनशील प्रजातियां लगातार सिमटती जा रही हैं। कॉरिडोर बचाने की जरूरत वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि फुलवारी की नाल, जयसमंद, सज्जनगढ़ और कुंभलगढ़ के बीच प्राकृतिक वन्यजीव कॉरिडोर का संरक्षण नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में जैव विविधता पर और गंभीर खतरा मंडरा सकता है। शोधकर्ताओं ने वन्यजीव आवासों की सुरक्षा, मानव हस्तक्षेप में कमी और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया है।  

SSO आईडी से ऑनलाइन पेंशन वेरिफिकेशन की नई व्यवस्था लागू

जयपुर अब तक पेंशन चालू रखने के लिए हर साल बुजुर्गों को बैंकों में जाकर लंबी लाइनों में लगना पड़ता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। सरकार ने तकनीक का इस्तेमाल करते हुए फेस ऑथेंटिकेशन को हरी झंडी दे दी है। इसका मतलब है कि पेंशनर्स अब मोबाइल या कंप्यूटर पर सिर्फ अपना चेहरा स्कैन करके अपना जीवन प्रमाण पत्र घर बैठे ही जमा कर सकेंगे। SSO ID से वेरिफिकेशन हुआ बेहद आसान पेंशनर्स के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी बहुत आसान बना दिया गया है। सचिवालय के सूत्रों के मुताबिक, अब चतुर्थ श्रेणी से ऊपर के कोई भी सरकारी कर्मचारी अपनी एसएसओ आईडी का इस्तेमाल कर सकेंगे। वे इसके जरिए ई-साइन करके किसी भी पेंशनर के जीवन प्रमाण पत्र को तुरंत ऑनलाइन वेरिफाई कर पाएंगे। इससे कागजी कार्रवाई से पूरी तरह छुटकारा मिल जाएगा। दिव्यांग बच्चों की आजीवन पेंशन पर नया नियम सरकार ने दिव्यांग बच्चों को मिलने वाली आजीवन पारिवारिक पेंशन के नियमों में भी बड़ा सुधार किया है। अब दिव्यांगता का सर्टिफिकेट किसी सक्षम अधिकारी या विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड से ही बनवाना होगा। अगर दिव्यांगता स्थाई है, तो यह सर्टिफिकेट पूरी जिंदगी में सिर्फ एक ही बार जमा करना होगा। अगर दिव्यांगता अस्थाई है, तो पेंशन जारी रखने के लिए हर 3 साल में नया सर्टिफिकेट जमा कराना जरूरी होगा।

बीएड प्रवेश परीक्षा PTET-2026: 1.26 लाख अभ्यर्थी देंगे एग्जाम, कड़े सुरक्षा इंतजाम

जयपुर राजस्थान में बीएड महाविद्यालयों में प्रवेश के लिए वर्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित पीटीईटी-2026 (PTET-2026 ) की परीक्षा रविवार 14 जून को राज्य के 41 जिलों के 300 परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जा रही है. परीक्षा के मुख्य समन्वयक और वीएमओयू के कुलगुरू प्रोफेसर बीएल वर्मा ने बताया कि इस बार फरवरी में राज्य सरकार से दिशा निर्देश मिलने के बाद आवेदन आमंत्रित किए गए. अब तक कुल 1 लाख 26 हजार 600 आवेदन प्राप्त हुए हैं. इनमें छात्रों के 48 हजार 138 तथा छात्राओं के 78 हजार 462 आवेदन शामिल हैं. सुबह 9 बजे से 12 बजे तक परीक्षा होगी आयोजित प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि डीएलएड परीक्षा की तरह इस परीक्षा में भी पूरी शुचिता, पारदर्शिता और गोपनीयता बरती जा रही है. उन्होंने बताया कि 14 जून को परीक्षा का आयोजन सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच किया जा रहा है. सभी परीक्षार्थियों को प्रातः 7.30 बजे से 8.30 बजे के बीच ही परीक्षा केन्द्रों पर प्रवेश मिल सकेगा. इस बार सबसे ज्यादा 1 लाख 15 हजार 293  परीक्षार्थी हिन्दी माध्यम में तथा 11 हजार 307 परीक्षार्थी अंग्रेजी माध्यम में परीक्षा देंगे. जयपुर में हाई टेक कमांड सेंटर प्रोफेसर वर्मा ने बताया के परीक्षार्थी के एडमिट कार्ड में क्यूआर कोड होगा जिसमें उसकी पूरी जानकारी समाहित रहेगी. प्रश्नपत्र पर भी क्यूआर कोड अंकित किया गया है. उन्होंने बताया कि संवेदनशील केन्द्रों की निगरानी के लिए जयपुर में हाई टेक कमांड सेंटर बनाया गया है और कोटा मुख्यालय से भी परीक्षा केन्द्रों की निगरानी की जाएगी. कुलगुरू प्रोफेसर वर्मा ने कहा कि पहली बार एआई साफ्टवेयर से सतर्कता बरती जाएगी. परीक्षा के वक्त जिलों में कई स्तरों पर बनाये गए उड़नदस्ता दल छापामारी का कार्य करेंगे और संदिग्धों पर कड़ी नजर रखी जाएगी. परीक्षा केन्द्रों पर बायोमेट्रिक जांच के बाद भी परीक्षार्थी को प्रवेश मिलेगा.

भजनलाल सरकार का फैसला: SSO ID से पेंशन वेरिफिकेशन हुआ आसान

जयपुर राजस्थान की भजनलाल सरकार ने पेंशन से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने के लिए नियमों में कुछ अहम बदलाव किए हैं. पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में लिए गए फैसलों के बाद, अब 'राजस्थान सिविल सेवा (पेंशन) नियम, 1996' में संशोधन के आधिकारिक आदेश शनिवार को जारी कर दिए गए हैं. राज्यपाल की मंजूरी मिलने के साथ ही नई अधिसूचना भी लागू हो गई है. आइए जानते हैं कि ये बदलाव क्या हैं और आपको इनका सीधा फायदा कैसे मिलेगा. चेहरा दिखाकर जमा होगा 'जीवन प्रमाण पत्र' अब पेंशनरों को अपना जीवितता प्रमाण पत्र (Life Certificate) जमा करने के लिए दफ्तरों या बैंकों की लाइनों में नहीं लगना पड़ेगा. सरकार ने आधार आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को मंजूरी दे दी है. इसका मतलब है कि अब पेंशनर नई तकनीक की मदद से सिर्फ अपना चेहरा स्कैन करके आसानी से अपना जीवन प्रमाण पत्र प्रस्तुत कर सकेंगे. SSO ID के जरिए वेरिफिकेशन हुआ आसान पेंशनरों के जीवन प्रमाण पत्र के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया को भी पहले से काफी सरल कर दिया गया है. नए नियम के तहत, अब चतुर्थ श्रेणी (Class-IV) से ऊपर के कर्मचारी अपनी एसएसओ आईडी (SSO ID) का उपयोग कर सकेंगे. वे इसके जरिए ई-साइन (e-Sign) करके पेंशनरों के जीवन प्रमाण पत्र को तुरंत प्रमाणित कर सकते हैं. दिव्यांग बच्चों की आजीवन पेंशन से जुड़े नियमों में बदलाव सरकार ने दिव्यांगों को मिलने वाली आजीवन पारिवारिक पेंशन के प्रावधानों में भी जरूरी संशोधन किए हैं. नए नियमों के मुताबिक, अब दिव्यांगता का प्रमाण पत्र किसी सक्षम प्राधिकारी या विशेषज्ञों के मेडिकल बोर्ड द्वारा जारी किया हुआ ही पूरी तरह से मान्य होगा. अगर दिव्यांगता परमानेंट है, तो यह प्रमाण पत्र जिंदगी में सिर्फ एक बार ही प्रस्तुत करना होगा. लेकिन, अगर अस्थायी दिव्यांगता की स्थिति में हर 3 साल के बाद नया प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य होगा.