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आर्थिक संकट, ब्यावर के खनिज उद्योग में छाई खामोशी और 5000 मजदूरों का पलायन

ब्यावर  ईरान और इजराइल के बीच छिड़ी जंग की तपिश अब राजस्थान के 'मिनरल हब' कहे जाने वाले ब्यावर जिले की गलियों में महसूस होने लगी है। अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक तनाव ने यहां के फलते-फूलते खनिज उद्योग की कमर तोड़ दी है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि ब्यावर की करीब 1100 फैक्ट्रियों में से 1000 इकाइयों पर ताले लटक गए हैं। मशीनों का शोर अब सन्नाटे में बदल चुका है और औद्योगिक क्षेत्रों में छाई यह खामोशी हजारों परिवारों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। ग्लोबल वॉर का 'लोकल' जख्म ब्यावर का मिनरल उद्योग मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय मांग और सुगम सप्लाई चेन पर निर्भर है। ईरान-इजराइल संघर्ष के कारण समुद्री मार्ग असुरक्षित हो गए हैं और लॉजिस्टिक्स खर्च आसमान छू रहा है। इसका सीधा असर डिमांड पर पड़ा है। निर्यात ठप होने और नई डिमांड न आने के कारण उद्यमियों ने उत्पादन बंद करना ही बेहतर समझा। सिर्फ ब्यावर ही नहीं, इसका असर गुजरात के मोरबी तक फैला है, जहां करीब 2300 से ज्यादा मिनरल ग्राइंडिंग यूनिट्स बंद हो चुकी हैं। 'साहब, अब घर जाने के अलावा चारा नहीं' इस औद्योगिक संकट की सबसे करुण तस्वीर उन प्रवासी मजदूरों की है, जो बिहार और झारखंड जैसे राज्यों से हजारों किलोमीटर दूर सुनहरे भविष्य की तलाश में यहां आए थे। आंकड़ों की मानें तो पिछले कुछ दिनों में 5000 से ज्यादा मजदूरों की नौकरी जा चुकी है। ब्यावर के बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर अब उन मजदूरों की भीड़ दिखने लगी है, जो अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर पलायन करने को मजबूर हैं। फैक्ट्री मालिक ने हाथ खड़े कर दिए हैं। काम नहीं है तो तनख्वाह कहां से मिलेगी? कमरे का किराया और खाने के लाले पड़ रहे हैं। 6 लाख लोगों की रोजी-रोटी दांव पर लघु उद्योग भारती के जानकारों का कहना है कि राजस्थान के करीब 14 जिलों में यह सेक्टर फैला है, जिससे 6 लाख लोग सीधे तौर पर जुड़े हैं। हर फैक्ट्री औसतन 30 टन उत्पादन करती थी, जो अब शून्य पर पहुंच गया है। यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो ब्यावर का मिनरल मार्केट पूरी तरह तबाह हो सकता है। फिलहाल, उद्यमियों और मजदूरों की नजरें अंतरराष्ट्रीय हालातों के सुधरने पर टिकी हैं। पुलकित सक्सेना

बच्चों की संदिग्ध मौतों से सलूंबर में हड़कंप, 17 मेडिकल टीमों ने संभाला मोर्चा

सलूंबर सलूंबर जिले के लसाड़िया ब्लॉक में बच्चों की लगातार हो रही मौतों ने चिंता बढ़ा दी है। बीते पांच दिनों में पांच मासूमों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रशासन के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर बच्चों और परिजनों की जांच कर रही हैं। दो से चार साल के बच्चों में बुखार, उल्टी-दस्त और ऐंठन जैसे लक्षण सामने आए हैं, जिससे बीमारी को लेकर रहस्य और गहरा गया है। संदिग्ध मरीजों की पहचान की गई कलेक्टर मुहम्मद जुनैद पीपी के नेतृ्त्व में प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया गया। उन्होंने मेडिकल टीमों को विस्तृत सर्वे कर जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को 17 मेडिकल टीमों ने 429 परिवारों का सर्वे किया। इस दौरान 17 बुखार के मरीज मिले, जिनके सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिया गया है। उदयपुर से आई डॉक्टरों की टीम मौके पर तैनात है, जो कि लगातार हालातों पर नजर बनाए हुए है। बच्चों को किया गया रेफर स्वास्थ्य जांच के बाद कई बच्चों को बेहतर इलाज के लिए अलग-अलग अस्पतालों में रेफर किया गया है। इनमें पेट दर्द, बुखार और उल्टी-दस्त की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ बच्चों को उदयपुर तो कुछ को जिला अस्पताल सलंबूर भेजा गया है, जहां उनका इलाज जारी है। स्वास्थ्य ने की अपील सीएमएचओ डॉ महेंद्र परमार के अनुसार, विशेष मेडिकल टीम गांव में डेरा डालकर लगातार जांच कर रही। ग्रामीणों को साफ-सफाई रखने, शुद्ध पानी पीने और पानी उबालकर इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है। इधर, लसाड़िया ब्लॉक के प्रभावित इलाकों में लगातार सर्वे और सैंपलिंग का काम जारी है। प्रशासन किसी भी संभावित खतरे को देखते हुए सावधानी बरत रहा है।  

क्यूआर कोड स्कैन करते ही ‘कलेक्टर ट्री’ सुनाएगा अपनी कहानी, पचपहाड़ के सरकारी स्कूल का डिजिटल नवाचार

झालावाड़ झालावाड़ जिले के भवानीमंडी क्षेत्र के पचपहाड़ स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय में पर्यावरण शिक्षा को रोचक बनाने के लिए एक अनोखी पहल शुरू की गई है। हर पेड़ कुछ कहता है- नाम की अभिनव पहल चलाई जा रही है। इस पहल के तहत विद्यालय परिसर में लगे लगभग 500 पेड़-पौधों पर क्यूआर कोड लगाए जा रहे हैं, जिन्हें मोबाइल से स्कैन करते ही अब पौधे स्वयं अपनी विशेषताएं, उपयोग और पर्यावरणीय महत्व के बारे में ऑडियो संदेश के माध्यम से जानकारी दे रहे हैं। क्यूआर स्कैन करने पर सुनाई देगा ऑडियो प्रधानाचार्य कृष्ण गोपाल वर्मा ने बताया कि इस परियोजना की शुरुआत लगभग दो वर्ष पूर्व की गई थी। प्रारंभ में QR कोड स्कैन करने पर पौधों की जानकारी पीडीएफ के रूप में खुलती थी, लेकिन अब इस परियोजना को अपडेट करते हुए इसे ऑडियो आधारित बना दिया है। प्रोजेक्ट के संयोजक एवं राज्य स्तरीय पुरुस्कृत , डॉ दिव्येंदु सेन व्याख्याता, जीव विज्ञान ने बताया कि अब QR कोड स्कैन करते ही संबंधित पौधे के बारे में ऑडियो संदेश सुनाई देता है- मानो पौधा स्वयं अपनी कहानी सुना रहा हो। इस पहल की विशेष बात यह है कि इन ऑडियो संदेशों में स्टूडेंट्स, विद्यालय स्टाफ तथा जिला अधिकारियों, जिला कलक्टर, उपखण्ड अधिकारी, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, एबीईओ, डीईओ एवं विद्यालय प्रिंसिपल ने अपनी आवाज़ दी है, इससे यह पहल और भी प्रेरणादायक बन गई है। मुख्य आकर्षण कलक्टर ट्री मुख्य आकर्षण जीव विज्ञान के व्याख्याता डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ से भी एक पेड़ को आवाज देने के लिए अनुरोध किया था। इसे उन्होंने स्वीकार किया और जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ ने भी एक वृक्ष को अपनी आवाज दी गई थी। जिसे हमने “कलक्टर ट्री” नाम दिया है, जिला कलक्टर ने कुपोषण से लड़ने में सहायक मोरिंगा (सहजन) वृक्ष के लिए अपनी आवाज में संदेश रिकॉर्ड किया है। इस वृक्ष पर लगाए गए QR कोड को स्कैन करने पर कलक्टर की आवाज़ में पेड़ का संदेश सुनाई देता है, जो स्टूडेंट्स और आगंतुकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। मनोविज्ञान के समन्वय पर आधारित डॉ. दिव्येंदु सेन ने बताया कि यह पहल तकनीक और शैक्षिक मनोविज्ञान के समन्वय पर आधारित है। इस परियोजना में स्टूडेंट्स की सक्रिय भागीदारी निर्धारित की गई है। स्टूडेंट्स ने स्वयं पौधों की जानकारी एकत्र की, स्क्रिप्ट तैयार की और ऑडियो रिकॉर्डिंग की प्रक्रिया में भाग लिया। इससे स्टूडेंट्स की जिज्ञासा, स्मरण शक्ति और प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव बढ़ता है। स्थानीय भाषा में उपलब्ध है रिकॉर्डिंग डॉ सेन ने आगे बताया कि इस पहल में कुछ पौधों के ऑडियो संदेश स्थानीय मालवी भाषा में भी रिकॉर्ड किए हैं, ताकि स्थानीय समुदाय भी पौधों के महत्व को समझ सकें और इस पहल से जुड़ सकें। पलाश और देशी बबूल जैसे पौधे स्थानीय भाषा में स्वयं अपनी कहानी सुनाते हैं, इससे यह परियोजना केवल स्कूल तक सीमित न रहकर समाज से भी जुड़ रही है। स्कूल परिसर में पीपल, बरगद, नीम, खेजड़ी, सागवान, अर्जुन, महुआ, जामुन, आम, अमरूद, पारिजात, पलाश, कचनार, बबूल, काजूरिना, यूकेलिप्टस, मोरिंगा सहित अनेक पौधों को इस परियोजना में शामिल किया गया है। कुछ पौधे अपनी विशेषताओं के साथ-साथ अपनी सीमाओं के बारे में भी बताते हैं, इससे स्टूडेंट्स को सही पौधा सही स्थान पर लगाने की जानकारी भी मिलती है। जिला शिक्षा अधिकारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पर्यावरण शिक्षा को रोचक और प्रभावी बनाने वाला अभिनव प्रयास बताया।          

डमी कैंडिडेट और नकल माफिया के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, एसओजी ने शिक्षा विभाग से मांगी संदिग्धों की कुंडली

जालोर जालोर जिले में प्रतियोगी परीक्षाओं में नकल, डमी उम्मीदवार और फर्जीवाड़े के मामले लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। हाल ही में स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) ने जिले को विशेष निगरानी में लेकर जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। अभ्यर्थियों की विस्तृत जानकारी जुटाई जा रही एसओजी मुख्यालय ने शिक्षा विभाग से संदिग्ध अभ्यर्थियों के दस्तावेज, हस्ताक्षर, आवेदन पत्र, फोटो सहित अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी गई हैं। इसके बाद जिला स्तर पर भी जांच शुरू कर दी गई और संबंधित अभ्यर्थियों की जानकारी मुख्यालय के माध्यम से एसओजी भेजी जा रही है। विभागीय सूत्रों की मानें तो अभी तक कुल 30 अभ्यर्थियों के खिलाफ रिपोर्ट एसओजी को भेजी जा चुकी है। वहीं, 250 के लगभग अभ्यर्थी संदेह के घेरे में हैं। शुरुआती जांच में सामने आया कि कई मामलों में डमी उम्मीदवारों का चयन परीक्षा में बैठकर हुआ था। पिछले कई वर्षों की परीक्षाओं की जांच हुई शिक्षा विभाग पिछले पांच वर्षों में हुई विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की भी गहन जांच कर रहा है। विशेष रूप से शिक्षा विभाग से जुड़े मामलों में गड़बड़ी पाई गई है, जिसके कारण दस्तावेजों का सत्यापन और सख्ती से किया जा रहा है। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक भंवरलाल परमार ने बताया कि एसओजी द्वारा मांगी गई सभी जानकारियों का मिलान किया जा रहा है। दस्तावेजों, आवेदन प्रक्रिया और अन्य विवरणों की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने पर दोषी पाए गए अभ्यर्थियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस प्रक्रिया का उद्देश्य भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और फर्जीवाड़े पर रोक लगाना है।  

पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख, प्रधानमंत्री करेंगे 79 हजार करोड़ की रिफाइनरी का लोकार्पण

जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। यह दौरा पिछले दो महीनों में उनका दूसरा राजस्थान दौरा होगा। इससे पहले वे 28 फरवरी 2026 को अजमेर आए थे, जहां उन्होंने हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। मारवाड़ सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए पचपदरा रिफाइनरी का खास महत्व है। इस परियोजना से बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होने की संभावना है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। जनवरी से ही पहले चरण के ट्रायल रन की तैयारी शुरू कर दी गई थी और अब जल्द ही कमर्शियल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। रिफाइनरी परियोजना का इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसका पहला शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने किया था, उस समय प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार थी और लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए आंकी गई थी। बाद में शर्तों में बदलाव के बाद 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका पुनः शुभारंभ किया, तब लागत बढ़कर 43,129 करोड़ रुपए हो गई। समय के साथ परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई और अब यह करीब 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।   मुझे यह जानकारी देते हुए अत्यंत हर्ष और गर्व की अनुभूति हो रही है कि विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता, हम सभी के मार्गदर्शक, यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी आगामी 21 अप्रैल 2026 को पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण हेतु वीरधरा राजस्थान पधार रहे हैं। रिफाइनरी के बारे में रिफाइनरी की सालाना क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल के प्रसंस्करण की है, जबकि 2 मिलियन टन का पेट्रोकेमिकल उत्पादन भी होगा। इसमें करीब 7.5 मिलियन टन क्रूड ऑयल अरब देशों से आयात किया जाएगा और शेष 1.5 मिलियन टन तेल राजस्थान में उत्पादित होगा। कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी रिफाइनरी रिफाइनरी परियोजना राजस्थान और देश के लिए एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक सपना रही है, जिसकी यात्रा दो दशकों में कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी है। शुरुआत (2005-2013) वर्ष 2005 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद 2013 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा में एचपीसीएल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत बढ़कर 37,320 करोड़ रुपए हो गई और इसकी वार्षिक क्षमता 90 लाख टन तय की गई। राजे सरकार में नए एमओयू (2013-2017) वसुंधरा राजे सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार के समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए गए। इसके बाद 2017 में एचपीसीएल के साथ नया समझौता हुआ, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि में बड़ा बदलाव किया गया और इसे 3,736 करोड़ रुपए से घटाकर 1,123 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया।2018 में पीएम मोदी ने किया शिलान्यास (2018-2025) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में परियोजना स्थल का उद्घाटन किया।    

दल बदल लेते हैं पर दिल नहीं बदलता, राजस्थान की पूर्व सीएम ने बाहरी नेताओं पर कसा तंज

 जयपुर राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी की कद्दावर नेता वसुंधरा राजे ने पार्टी के स्थापना दिवस के मौके पर एक ऐसा बयान दिया है, जिसके कई सियासी मायने निकाले जा रहे हैं। जयपुर स्थित प्रदेश भाजपा कार्यालय में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राजे ने साफ लहजे में कहा कि पार्टी को अब अवसरवादियों की जगह अपने मूल वफादारों को पहचानने की जरूरत है। दल बदल लेते हैं, पर दिल नहीं वसुंधरा राजे ने बीजेपी के 46 साल के सफर का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान कई लोग आए और कई चले गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, आजकल कई लोग दल तो बदल लेते हैं, लेकिन उनका दिल नहीं बदलता। उनकी मानसिकता वही पुरानी रहती है। राजे का इशारा साफ तौर पर उन नेताओं की तरफ था जो दूसरी पार्टियों से आकर बीजेपी में ऊंचे पद पाने की जुगत में रहते हैं। वफादारों को मिले सम्मान, अवसरवादियों को नो एंट्री! राजे ने आगामी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर नेतृत्व को सावधान किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि राजनीतिक नियुक्तियां और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सिर्फ उन्हीं को मिलनी चाहिए जो मूल भाजपा के हैं। जिन्होंने तूफानों और मुश्किल वक्त में पार्टी के लिए लाठियां खाईं और संघर्ष किया, उन्हें ही मौका मिले। उन्होंने कहा कि संगठन के प्रति समर्पण दिखाने वाले कार्यकर्ताओं को ही शासन में भागीदारी दी जानी चाहिए। पद के पीछे भागने वालों को नसीहत कार्यकर्ताओं में जोश भरते हुए वसुंधरा ने एक बड़ी बात कही। उन्होंने कहा, पद के लालच में काम मत करो। अगर आप ईमानदारी से जमीन पर काम करेंगे, तो पद खुद चलकर आपके पास आएगा। उन्होंने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर अटल-आडवाणी और विजयाराजे सिंधिया के योगदान को याद करते हुए कहा कि आज पीएम नरेंद्र मोदी उस दीप को और प्रकाशमान कर रहे हैं।

भर्ती में धांधली और अनियमितताओं के आरोप, कोर्ट ने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड से मांगा जवाब

जयपुर  राजस्थान हाउसिंग बोर्ड (RHB) में जूनियर असिस्टेंट बनने का सपना देख रहे अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने इस भर्ती प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं को देखते हुए नियुक्तियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। कोर्ट ने साफ कह दिया है कि अगली सुनवाई तक इन पदों को नहीं भरा जाएगा। कोर्ट में क्यों नाराज हुए जज? आज कोर्ट रूम में माहौल काफी गरमाया रहा। दरअसल, सुनवाई के दौरान रेस्पोंडेंट (बोर्ड) पक्ष के वकील बार-बार समय मांग रहे थे, जिस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। अभ्यर्थियों के वकील आनंद शर्मा और अरविंद कुमार शर्मा ने मजबूती से पक्ष रखते हुए बताया कि भर्ती प्रक्रिया में नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। भर्ती में धांधली के आरोप सूत्रों और याचिकाकर्ताओं के वकीलों की मानें तो इस भर्ती में पारदर्शिता की भारी कमी रही है। कोर्ट के सामने दलील दी गई कि विज्ञापन में लिखा था कि मुख्य परीक्षा और टाइपिंग टेस्ट के नंबर जोड़कर मेरिट बनेगी, लेकिन बोर्ड ने टाइपिंग के अंक जोड़े ही नहीं। भर्ती का परिणाम कई बार संशोधित किया गया, जिसके पीछे कोई ठोस वजह नहीं दी गई। सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि जिन अभ्यर्थियों के नाम दस्तावेज सत्यापन (DV) सूची में थे, उन्हें बाद में बिना किसी कारण बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। वहीं मामले की गंभीरता और अभ्यर्थियों के भविष्य को देखते हुए न्यायालय ने अंतरिम आदेश जारी कर सभी संबंधित पदों को रिजर्व रखने के निर्देश दिए हैं। यानी जब तक कोर्ट का अंतिम फैसला नहीं आता, तब तक बोर्ड किसी को जॉइनिंग नहीं दे पाएगा।

कोटा में दिव्यांग पार्क का शिलान्यास, स्पीकर बिरला ने रेल, रोड और एयर कनेक्टिविटी को बताया वरदान

कोटा स्पीकर बिरला ने कहा- आमजन के सुझावों के आधार पर विकास की रूपरेखा तैयार की गई है। चंबल गार्डन, जो शहर की पहचान है, को देश-दुनिया का आकर्षण बनाया जाएगा। वहीं, दिव्यांगजनों के लिए देश का तीसरा दिव्यांग पार्क और युवाओं के लिए संविधान पार्क का निर्माण किया जाएगा। शहर की पेयजल समस्या के स्थायी समाधान के लिए 350 करोड़ की परियोजना पर जल्द काम शुरू होगा। मेडिकल कॉलेज को अत्याधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है। "रामाश्रय" भवन के माध्यम से मरीजों के परिजनों को निशुल्क भोजन और ठहरने की सुविधा मिलेगी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने श्रीनाथपुरम में सरस डेयरी से गोबरिया बावड़ी के बीच प्रस्तावित विकास पथ का शिलान्यास किया। कोटा विकास प्राधिकरण द्वारा 30 करोड़ की लागत से इस विकास पथ का निर्माण किया जाएगा। लोगों को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि कोटा शहर के समग्र और संतुलित विकास के लिए जो व्यापक कार्ययोजना बनाई गई है, वह अब धरातल पर उतर रही है। आने वाले सालों में आधुनिक, स्मार्ट और समृद्ध शहर की झलक कोटा में दिखाई देगी। कनेक्टिविटी बनेगी वरदान बिरला ने कहा कि रेल, रोड और एयर कनेक्टिविटी कोटा के लिए वरदान बनेगी। कोटा शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, पर्यटन के मामले में अग्रणी होगा। जल-जंगल सफारी के लिए पर्यटक आएंगे। जेके पैवेलियन को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम के तौर पर विकसित किया जा रहा है, श्रीनाथपुरम, ध्यानचंद स्टेडियम सहित सभी स्टेडियम आधुनिक बनेंगे। केन्द्र-राज्य के सहयोग से ट्रिपल आईटी को भी देश के श्रेष्ठ संस्थानों में शामिल करने की दिशा में कार्य हो रहा है। हर गरीब को आवास उपलब्ध कराने के लिए 10 हजार मकानों का लक्ष्य रखा गया है। कोटा में फिर लौट रही रौनक विधायक संदीप शर्मा ने कहा कि कोटा दक्षिण क्षेत्र में आमजन की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए हर वार्ड में स्मार्ट पार्क, गली-मोहल्लों में सीसी सड़कों और खेल मैदानों का विकास किया जा रहा है। पिछली कांग्रेस सरकार के समय इस क्षेत्र के साथ पक्षपात हुआ लेकिन अब विकास का दौर है। स्पीकर बिरला के प्रयासों से हवाई सेवा, मथुराधीश मंदिर कॉरिडोर जैसे कार्य भी साकार हो रहे है। कोचिंग को लेकर चुनौतिया धीरे धीरे समाप्त हो रही है, कोटा में सकारात्मक माहौल बना है और बच्चों के आने से कोटा की रौनक लौटने लगी है। विकास पथ के साथ ही कोटा के सभी प्रमुख मार्गों को स्मार्ट रोड के रूप में विकसित किया जाएगा। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष राकेश जैन, मंडल अध्यक्ष दीनू बांजरा, अक्षय चौधरी, विनय आजाद, पन्नालाल बंजारा सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद रहे।

एयरलाइंस को मिली राहत, केंद्र ने सब्सिडी की अवधि बढ़ाई, इंदौर-भोपाल समेत अन्य शहरों के जुड़ने की संभावना

उदयपुर उदयपुर की हवाई कनेक्टिविटी को लेकर अब नई उम्मीद जगी है। केंद्र सरकार की संशोधित उड़ान योजना में वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) की अवधि 3 साल से बढ़ाकर 5 साल कर दी गई है। इससे एयरलाइंस कंपनियां की ओर से इंदौर, भोपाल, अहमदाबाद और पुणे जैसे हाई-डिमांड रूट।  लंबे समय तक मिलने वाली सब्सिडी एयरलाइंस के लिए जोखिम कम करेगी और मेवाड़ को फिर से बेहतर हवाई नेटवर्क से जोड़ सकती है। केंद्र सरकार की यह पहल उदयपुर के पर्यटन और मार्बल उद्योग के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि राज्य सरकार चैलेंज मोड के तहत इन बंद रूट्स की डिमांड केंद्र को भेजती है तो इन रूट्स को प्राथमिकता मिल सकती है। एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बड़े विमान और किफायती किराया मॉडल के साथ इन रूट्स पर पैसेंजर लोड और बढ़ सकता है। पहले से ही इन रूट्स पर करीब 80 फीसदी सीटें भरी जा रही थीं। जो इनके व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य होने का संकेत है। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत सहित क्षेत्र के जनप्रतिनिधि भी लगातार इन फ्लाइट्स को बहाल करने की मांग कर रहे हैं, जिससे केंद्र स्तर पर इस दिशा में पहल की संभावना और मजबूत हो गई है। ये रूट बंद हुए, यही प्राथमिकता पर     इंदौर रूट (29 मार्च 2026 से बंद) – इसी समर शिड्यूल में कनेक्टिविटी टूटी। व्यापारिक और धार्मिक पर्यटन के लिहाज से यह सबसे ज्यादा मांग वाला रूट था।     भोपाल एवं अहमदाबाद (पिछले शिड्यूल से बंद) – मध्य प्रदेश की राजधानी और गुजरात के सबसे बड़े व्यापारिक केंद्र से सीधा हवाई संपर्क कटा हुआ है। इससे यात्रियों को सड़क मार्ग पर निर्भर होना पड़ रहा है।     पुणे रूट (2020 से बंद) – पिछले 6 सालों से सीधी उड़ान का इंतजार है। पुणे में रहने वाले हजारों मेवाड़ी छात्र और आईटी प्रोफेशनल्स के लिए यह कनेक्टिविटी सबसे जरूरी है। भास्कर सुझाव – संशोधित उड़ान में बड़े विमान-सस्ता किराया यात्रियों का लोड बढ़ाने में रहेगा कारगार संशोधित उड़ान में बड़े विमान-सस्ता किराया का फार्मूला इन रूट्स पर पैसेंजर लोड बढ़ाने में कारगर हो सकता है। क्योंकि, अब 5 साल तक सरकार वित्तीय घाटे की भरपाई करेगी। इससे उनपर वित्तीय भार भी नहीं पड़ेगा। उदयपुर सांसद डॉ. मन्नालाल रावत सहित मेवाड़ के बड़े जनप्रतिनिधि इन बंद हुई इन फ्लाइट्स को वापस बहाल कराने की लगातार मांग कर रहे हैं। नए शिड्यूल पर सवाल – जो फ्लाइटें छीनी, उनमें था 80 फीसदी यात्रीभार टूरिस्ट सिटी उदयपुर की हवाई कनेक्टिविटी पिछले कुछ समय से लैंडिंग मोड पर चल रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि समर शिड्यूल में उदयपुर-भोपाल, उदयपुर-इंदौर और उदयपुर-अहमदाबाद के बीच चलने वाली जिन फ्लाइट्स का बंद किया गया, उनमें करीब 80 फीसदी सीट्स फुल चल रही थीं। वहीं, पुणे जैसा बड़ा आईटी और एजुकेशन हब तो साल 2020 से ही उदयपुर के हवाई नक्शे से गायब है। अभी मुंबई के लिए 6, दिल्ली 4 फ्लाइट, जयपुर 2, और बेंगलुरु व हैदराबाद के लिए 1-1 फ्लाइट का संचालन हो रहा है।  

जेडीए का बड़ा प्लान, वंदे मातरम रोड से खत्म होंगे ब्लैक स्पॉट्स, चौराहों पर लगेंगी आकर्षक मूर्तियां

जयपुर  राजस्थान के200 फीट चौड़ी सड़कों वंदे मातरम रोड को पहले से कही ज्यादा अट्रेक्टिव और हाईटेक बनाने की तैयारी तेज हो गई है। जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) ने मानसरोवर क्षेत्र में स्थित शहर की सबसे चौड़ी और महत्वपूर्ण सड़कों में शुमार वंदे मातरम रोड को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने की तैयारी पूरी कर ली है। अगले 6 महीनों में ये सड़क न केवल सुरक्षित होगी, बल्कि आधुनिक सुविधाओं और सुंदरता के नए पैमाने गढ़ेगी। ब्लैक स्पॉट्स होंगे खत्म, रोड सेफ्टी पर खास फोकस सर्वेक्षण के बाद जेडीए ने इस सड़क के लिए एक नया मास्टर प्लान तैयार किया है। मुख्य फोकस उन स्थानों (ब्लैक स्पॉट्स) को सुधारने पर है जहाँ अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। पूरी सड़क का पुनर्निर्माण भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) के मानकों के अनुसार किया जाएगा। जानिए क्या होने जा रहे हैं बड़े बदलाव वंदे मातरम रोड को दिल्ली और अहमदाबाद की सड़कों की तर्ज पर तैयार इस प्रोजेक्ट में कई आधुनिक फीचर्स शामिल होने जा रहे हैं। मुख्य सड़क को 35-40 फीट और दोनों तरफ की सर्विस रोड को 20-25 फीट चौड़ा किया जाएगा। लेन सिस्टम को खास तौर पर डवलप किया जाएगा। होगा स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार यहां पानी, बिजली, गैस, सीवरेज और टेलीकॉम लाइनों के लिए अलग से अंडरग्राउंड यूटिलिटी कॉरिडोर बनाया जाएगा, ताकि बार-बार सड़क खोदने की जरूरत न पड़े। इसके अलावा सड़क के दोनों ओर व्यवस्थित बस-वे और पार्किंग स्पेस बनाए जाएंगे। पैदल यात्रियों का ध्यान में रखते हुए फुटपाथों का विस्तार होगा और सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था की जाएगी। इसी तरह स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए सौंदर्यीकरण करने के साथ ही चौराहों पर मूर्तियां भी स्थापित करेगा। इन स्थानों पर होगी मूर्तियां स्थापित वंदे मातरम रोड के प्रमुख चौराहे जैसे भारत माता, खरबस, वंदे मातरम, हयात और इस्कॉन सहित 6 प्रमुख चौराहों को आकर्षक मूर्तियों और स्मारकों से सजाया जाएगा। इसके अलावा यहां डिवाइडर और सड़क के किनारों पर सघन वृक्षारोपण कर ग्रीन बेल्ट विकसित की जाएगी। जानिए क्या होंगे बड़े फायदे     न्यू सांगानेर रोड से मुहाना मंडी के बीच के इस हिस्से से रोजाना लगभग 10,000 वाहन गुजरते हैं। इस कायाकल्प से यातायात सुगम होगा     मुहाना मंडी जाने वाले व्यापारियों, कृषकों व स्थानीय निवासियों को जाम से मुक्ति मिलेगी।     सड़क हादसों में कमी आएगी     पहले से कही ज्यादा ये रोड सुंदर लगेगा 6 महीनों में बदलेगी तस्वीर जेडीए अधिकारियों के अनुसार, यह परियोजना जयपुर के तेजी से विकसित हो रहे क्षेत्रों के लिए मील का पत्थर साबित होगी। अगले 6 महीनों में यातायात प्रवाह बेहतर होगा और दुर्घटनाओं के जोखिम में भारी कमी आएगी। खुशेंद्र तिवारी