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जैसलमेर में हेलीबोर्न सर्वे से सामने आई खुशखबरी, 64 स्थानों पर मिलेंगे भूजल के भंडार

जैसलमेर  भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय के प्रयासों से 2021-22 में राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में किए गए हेलीबोर्न जियोफिजिकल सर्वे (Heliborne Geophysical Survey) के नतीजे अब सामने आ रहे हैं. इस सर्वे से जैसलमेर जिले में 64 ऐसे स्थान चिह्नित किए गए हैं जहां भूजल उपलब्ध हो सकता है. इनमें से कई जगहें ऐसी हैं जहां पहले के पारंपरिक तरीकों से पानी नहीं मिल पाया था. यह खोज पश्चिमी राजस्थान के सूखे इलाकों में पानी की समस्या का स्थाई समाधान दे सकती है. सर्वे का विवरण हेलीबोर्न सर्वे हेलिकॉप्टर से किया जाता है. इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक और जियोफिजिकल तकनीकों का इस्तेमाल कर जमीन के नीचे 500 मीटर तक की जानकारी ली जाती है. यह तरीका तेज, सटीक और बड़े क्षेत्र को कवर करने में सक्षम है. सर्वे से भूजल के स्रोत, उनकी गहराई, मीठे और खारे पानी के क्षेत्र, प्राचीन नदी मार्ग (पेलियोचैनल) और कृत्रिम रिचार्ज के लिए उपयुक्त जगहों की जानकारी मिलती है. यह सर्वे केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB), जल शक्ति मंत्रालय और CSIR-नेशनल जियोफिजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (NGRI), हैदराबाद ने किया. राजस्थान में कुल 66,810 वर्ग किमी क्षेत्र कवर किया गया, जिसमें जैसलमेर, जोधपुर और सीकर जैसे प्राथमिकता वाले जिले शामिल हैं. जैसलमेर जिले में करीब 15,000 वर्ग किमी क्षेत्र में सर्वे किया गया. पोकरण क्षेत्र में बड़ी सफलता वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक डॉ. नारायण दास इणखिया के अनुसार, पोखरण तहसील का ज्यादातर हिस्सा भूजल की दृष्टि से कमजोर माना जाता है. लेकिन हेलीबोर्न सर्वे से फलसूंड से छायन, धुडसर से राजगढ़ तक के इलाकों में भूजल भंडार मिलने की संभावना जगी है. कुल 64 स्थानों पर भूजल की उपलब्धता बताई गई है. इनमें से अधिकांश गांव ऐसे हैं जहां पेयजल की किल्लत आम है. पहले जांच में पानी नहीं मिला था. फलसूंड इलाका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां भूजल मिलना एक बड़ी उपलब्धि होगी. हालांकि पोकरण और भनियाणा में नहर का पानी उपलब्ध है, लेकिन इन स्थानों पर नलकूप बनाकर आपात स्थिति में लोगों को पानी मिल सकेगा. सर्वे के फायदे     भूजल के नए स्रोत ढूंढने में मदद.     कृत्रिम रिचार्ज (जमीन में पानी भरने) के लिए सही जगहों की पहचान.     जल संकट वाले क्षेत्रों में स्थायी समाधान.     सांकड़ा ब्लॉक जैसे शुष्क इलाकों में उच्च-रिजॉल्यूशन एक्विफर मैपिंग से जल संकट से राहत मिलेगी. यह सर्वे राष्ट्रीय एक्विफर मैपिंग प्रोग्राम (NAQUIM) का हिस्सा है, जो राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में 3.88 लाख वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करेगा. इससे जल संरक्षण और सतत विकास में बड़ी मदद मिलेगी.  डॉ. इणखिया ने कहा कि यह रिपोर्ट जैसलमेर जिला कलेक्टर और राज्य भूजल बोर्ड को भेजी गई है. अब इन स्थानों पर आगे जांच और नलकूप निर्माण से लाखों लोगों को फायदा होगा.

राजस्थान में 12 लाख लखपति दीदी के बाद अब युवाओं को बनाएगी आर्थिक संपन्न

जयपुर. राजस्थान की सियासत और अर्थव्यवस्था के बीच मंगलवार को एक ऐसी तस्वीर उभरी, जिसने आने वाले वर्षों की दिशा का संकेत दे दिया। मुख्यमंत्री कार्यालय में हुई एक बैठक में जब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बोलना शुरू किया, तो यह सिर्फ आंकड़ों की प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि एक बड़े सामाजिक बदलाव की झलक थी। मुख्यमंत्री ने कहा- प्रदेश में 19 लाख से अधिक महिलाओं को प्रशिक्षण देकर 12 लाख से ज्यादा महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है। अब ये लखपति दीदी मिलेनियर दीदी बनने की ओर अग्रसर हैं। यह सुनते ही साफ हो गया कि सरकार की नजर अब केवल योजनाओं तक सीमित नहीं, बल्कि महिला आर्थिक सशक्तिकरण को अगले स्तर तक ले जाने की है। अपराध में कमी, भरोसे में बढ़ोतरी मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान एक और अहम संकेत दिया। उन्होंने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के अंतिम दो वर्षों (फरवरी 2022 से दिसंबर 2023) की तुलना में मौजूदा सरकार के कार्यकाल में प्रदेश में अपराधों में करीब 12 प्रतिशत तक की कमी आई है। राजस्थान जैसे बड़े और विविधतापूर्ण राज्य में यह आंकड़ा केवल प्रशासनिक सफलता नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था में जनता के बढ़ते भरोसे का भी संकेत माना जा रहा है। बजट 2026-27 पर टिकी निगाहें इस पूरे कार्यक्रम का असली मकसद था— बजट पूर्व चर्चा। मुख्यमंत्री ने महिलाओं, युवाओं, उद्योग जगत, व्यापारियों, सेवा क्षेत्र, कर सलाहकारों और युवा प्रोफेशनल्स से सीधे संवाद किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि महिला प्रतिनिधियों और विभिन्न वर्गों से मिले सुझावों को बजट 2026-27 में यथासंभव शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस बयान ने यह साफ कर दिया कि आने वाला बजट केवल सरकारी दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ का प्रतिबिंब बनने की कोशिश करेगा। उद्योग और निवेश: राजस्थान की नई पहचान उद्योग, सेवा क्षेत्र और युवा प्रोफेशनल्स के साथ हुई चर्चा में मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों की समृद्धि से ही विकास को नई गति मिलती है। उन्होंने एमएसएमई, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा और तकनीकी सेवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इन क्षेत्रों में उद्यमशीलता ने राजस्थान के आर्थिक परिदृश्य को तेजी से बदला है। मुख्यमंत्री के शब्दों में— “आज राजस्थान निवेशकों की पहली पसंद बनता जा रहा है।” यह बयान उस समय आया जब राज्य सरकार लगातार निवेश प्रस्तावों और औद्योगिक विस्तार को लेकर सक्रिय दिखाई दे रही है। वागड़ क्षेत्र पर विशेष फोकस कार्यक्रम का एक अहम पड़ाव तब आया जब मुख्यमंत्री ने डूंगरपुर जिले से आए युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और राजस्थान का गौरव भी। वागड़ क्षेत्र, जो आदिवासी बहुल माना जाता है, वहां सरकार लगातार सशक्तिकरण के फैसले ले रही है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वागड़ क्षेत्र में विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं, जो आने वाले समय में पूरे दक्षिण राजस्थान की तस्वीर बदल सकते हैं। बेणेश्वर धाम का सौंदर्यीकरण कार्यक्रम के दौरान बेणेश्वर धाम के सौंदर्यीकरण को लेकर एक प्रस्तुतीकरण भी दिया गया। इसे धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। इस मौके पर सागवाड़ा विधायक शंकरलाल डेचा भी मौजूद रहे। सत्ता, समाज और संकेत इस बैठक में उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, प्रमुख सचिव वित्त वैभव गालरिया, प्रमुख सचिव महिला एवं बाल विकास भवानी सिंह देथा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने इस चर्चा को और खास बना दिया। राजस्थान में लखपति दीदी से मिलेनियर दीदी तक का सफर, अपराध में कमी, निवेशकों का भरोसा और आदिवासी क्षेत्रों पर फोकस— ये सभी संकेत एक ही ओर इशारा करते हैं। प्रदेश अब सिर्फ योजनाओं की बात नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य की तस्वीर गढ़ने की कोशिश में जुटा है।

भजनलाल सरकार का बड़ा कदम, 3 बच्चों के माता-पिता को निकाय-पंचायत चुनाव में उम्मीदवार बनने का मिलेगा मौका

जयपुर राजस्थान में पंचायत और निकाय चुनावों से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव होने के संकेत मिल रहे हैं. भजनलाल सरकार दो संतान बाध्यता वाले पुराने कानून में संशोधन की दिशा में आगे बढ़ रही है. सूत्रों के मुताबिक करीब 30 साल पुराने इस प्रावधान में बदलाव के लिए आगामी विधानसभा बजट सत्र में विधेयक पेश किया जा सकता है. संशोधन के बाद तीन संतान होने पर भी पंचायत और निकाय चुनाव लड़ने की पात्रता मिल सकती है. जानकारी के अनुसार पहले 1994 के पंचायती राज अधिनियम और 2009 के नगरपालिका अधिनियम में अध्यादेश के जरिए संशोधन की योजना थी, लेकिन वह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी. अब सरकार सीधे विधानसभा में विधेयक लाकर बदलाव करने की तैयारी में है. पंचायती राज विभाग और नगरीय विकास विभाग अपने-अपने स्तर पर ड्राफ्ट तैयार कर विधि विभाग को भेज चुके हैं, जिन्हें जल्द अंतिम रूप दिए जाने की संभावना है. क्या है वर्तमान प्रावधान राज्य में 27 नवंबर 1995 से लागू कानून के तहत तीन या उससे अधिक संतान वाले माता-पिता पंचायत और निकाय चुनावों में प्रत्याशी नहीं बन सकते. इस नियम के दायरे में पंच, सरपंच, उपसरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्य, प्रधान, प्रमुख, पार्षद, सभापति और महापौर जैसे पद शामिल हैं. नियम का उल्लंघन कर गलत जानकारी देकर चुनाव जीतने पर प्रत्याशी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और जेल तक का प्रावधान भी है. यह शर्त राजस्थान नगरपालिका अधिनियम की धारा 24 और पंचायती राज अधिनियम में दर्ज है. पहले देश के कई राज्यों में इस तरह की दो संतान नीति लागू थी, लेकिन समय के साथ अधिकतर राज्यों ने इसे खत्म कर दिया है. राजस्थान में हालांकि यह नियम अब तक पंचायत और निकाय चुनावों के लिए जारी है. सरकारी कर्मचारियों के मामले में राज्य सरकार पहले ही दो संतान के नियमों में शिथिलता दे चुकी है. पहले जहां दो से अधिक संतान होने पर वेतनवृद्धि और पदोन्नति पर रोक लगती थी, वहां अब कुछ राहत दी जा चुकी है. लेकिन जनप्रतिनिधियों के लिए पंचायत-निकाय चुनाव लड़ने पर लगी पाबंदी अभी भी लागू है, जिसे हटाने के लिए अब सरकार कानूनी बदलाव की तैयारी कर रही है.

RPSC में डिप्टी कमांडेंट भर्ती में बिना वैकेंसी के करवाया एग्जाम

जयपुर. RPSC की ओर से 11 जनवरी 206 को डिप्टी कमांडेंट (गृह रक्षा विभाग) की भर्ती परीक्षा आयोजित हुई थी। इसमें 17 सेंटर बनाए गए थे। जहां 255 कैंडिडेट्स ही शामिल हुए थे। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से डिप्टी कमांडेंट (गृह रक्षा विभाग) की भर्ती पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। आयोग ने 4 पदों के लिए भर्ती निकाली थी, जिसमें ओबीसी और एसटी के 1-1 और एससी के दो पद थे। इस भर्ती के लिए आर्मी का एक्स कैप्टन होना जरूरी है। एक्स सर्विस मैन वर्ग के जिन 34 लोगों ने आवेदन किए, वे भी एक्स आर्मी कैप्टन हैं या नहीं, एग्जाम भी देने आए या नहीं, इस पर फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है। वहीं, करीब 4 हजार से ज्यादा ऐसे अभ्यर्थी थे, जिन्होंने न तो फॉर्म विड्रॉ किया और न ही एग्जाम देने गए। इस कारण सिर्फ 255 लोगों ने एग्जाम दिया। जबकि आवेदन करने वालों में एक्स आर्मी मैन 34 ही हैं। अब यदि इन 34 लोगों ने आरपीएससी की क्वालिफिकेशन पूरी नहीं की तो भर्ती के सभी पद खाली रह जाएंगे। खास बात यह भी रही कि जिस वर्ग के लिए भर्ती में पद ही नहीं थे, उनमें भी सैकड़ों लोगों ने इस भर्ती के लिए फॉर्म भर दिए और कई लोगों ने एग्जाम भी दिए। बता दें, आयोग की चेतावनी के बाद 6 हजार लोगों ने आवेदन विड्रॉ कर लिए, उसके बाद भी ये स्थिति है। भर्ती और एग्जाम के यह रोचक तथ्य EWS, जनरल और MBC में कोई वैकेंसी ही नहीं थी। इसके बावजूद कैंडिडेट्स ने आवेदन किए। ST का एक पद है और 791 ने आवेदन किए, जबकि एक्स सर्विस मेन केवल एक ही है। SC के दो पद है, लेकिन आवेदन एक हजार लोगों ने किए, जबकि एक्स सर्विस मेन 3 ही है। भर्ती निकालने पर 10 हजार से ज्यादा आवेदन हुए, चेतावनी के बाद 6 हजार विड्रॉ कर लिए। RPSC ने 4 हजार 221 कैंडिडेट्स के एग्जाम की व्यवस्था की, लेकिन एग्जाम में 255 ही आए। एग्जाम एक सेंटर पर ही हो सकता था, लेकिन फॉर्म ज्यादा भरने के कारण 17 सेंटर बनाए गए। एग्जाम एक लाख के खर्चे में हो सकता था, उसके लिए आयोग को 20 लाख खर्चा करना पड़ा। मार्च 2025 में निकाली वैकेंसी – RPSC ने 18 मार्च 2025 को गृह रक्षा विभाग में डिप्टी कमाडेंट के 4 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी किया था। इसके लिए 24 मार्च से 22 अप्रैल 2025 तक ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे। वैकेंसी में आवेदन करने के लिए केवल सेना के कैप्टन स्तर के सेवानिवृत्त/त्यागपत्र देने वाले भूतपूर्व अधिकारी अथवा इमरजेंसी और शॉर्ट सर्विस कमीशन से मुक्त/विमुक्त कैंडिडेट्स ही योग्य थे। बिना योग्यता वालों ने बड़ी संख्या में भरे फॉर्म इस भर्ती में बिना योग्यता वाले कई लोगों ने भी आवेदन कर दिए। ऐसे में 10 हजार से ज्यादा लोगों ने आवेदन आए, जिनकी जांच में कई अयोग्य पाए गए। इन्हें फॉर्म वापस लेने का मौका दिया गया। आयोग ने फॉर्म विड्रॉ नहीं करने पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 217 के तहत कार्रवाई करने की चेतावनी दी। विज्ञापन के मुताबिक, योग्यताधारी अभ्यर्थियों को भी अपना सेवानिवृत्ति प्रमाण-पत्र ऑनलाइन आवेदन पत्र के साथ अपलोड करने के निर्देश दिए। इसके बाद करीब 6 हजार कैंडिडेट्स ने आवेदन फॉर्म विड्रो कर लिए।

प्रभारी मंत्री बिश्नोई ने जनसंवाद में सुनी ग्रामीणों की परिवेदनाएं

जयपुर. प्रभारी मंत्री के.के. विश्नोई की अध्यक्षता में सिरोही जिले के पालडी एम. में रात्रि चौपाल एवं जनसंवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। उन्होंने रात्रि चौपाल में आमजन की परिवेदनाओं को सुना और संबंधित को निस्तारण के लिए निर्देशित किया। प्रभारी मंत्री ने कहा कि आमजन के समस्याओं का समयबद्ध एवं गुणवत्ता पूर्ण निस्तारण राज्य सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि वीबीजीरामजी गांवों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का एक सशक्त माध्यम है इससे गांवों में प्रगति का पथ अग्रसर होगा। वीबीजीरामजी से भारत के विकसित भारत में बदलने की संकल्पना सत्य सिद्ध होगी। गांव मजबूत होंगे तभी देश मजबूत होगा। किसान एवं श्रमिकों के समृद्ध होने से भारत विकसित होगा। यह योजना सिर्फ रोजगार की योजना न हो के गांवों को सशक्त करने का माध्यम है। प्रभारी मंत्री ने इस दौरान ग्रामीणों की परिवेदनाओं को सुनते हुए उन्हें शीघ्र राहत प्रदान करने के लिए अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधि एवं प्रशासन दोनो ही सामुहिक रूप से क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध है और आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए सतत प्रयास किए जा रहे है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा नियमित रूप से क्षेत्र के विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की बात कही एवं बताया कि भारत अब विश्व में अपनी विशेष पहचान कायम करते हुए निरन्तर प्रगति के पथ पर अग्रसर हो रहा है। रात्रि चौपाल में विभिन्न योजनाओं के तहत लाभार्थियों को संबंधित दस्तावेज एवं लाभ प्रदान किया गया। रात्रि चौपाल में राजस्व विभाग द्वारा 3 सम्मानजनक नाम दर्ज किए गए। जिसमें बजट घोषणा क्रियान्विति के तहत राजकीय कृषि महाविद्यालय सिरोही उच्च शिक्षा विभाग राजस्थान को 30 हेक्टेयर भूमि यानि 185 बीघा भूमि आवंटन के भू अभिलेख उपलब्ध कराए व भूमि का कब्जा सुपुर्द दस्तावेज राजकीय महाविद्यालय के सहायक आचार्य को सौपा गया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज विभाग द्वारा 4 स्वामित्व कार्ड, 2 जन्म प्रमाण पत्र व 1 विवाह प्रमाण पत्र संबंधित को सौपा गया। महिला अधिकारिता विभाग तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा लाडो योजना के लाभार्थियों का स्वागत एवं अभिनन्दन किया गया। वही आयुष्मान कार्ड के लाभार्थियों को आयुष्मान कार्ड वितरित किया गया। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लाभार्थियों की गोद भराई की गई। पशुपालन विभाग द्वारा मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना की पॉलिसी का वितरण किया गया। उद्यानिकी विभाग द्वारा विभिन्न योजनाओं में अनुदान की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति के दस्तावेज प्रदान किए गए। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 31 हजार का चैक पंकुदेवी भगाराम मेघवाल को व मुद्रा ऋण योजना के तहत अनाराम हिरागर को 50 हजार रूपये अनुदान का चैक प्रदान किया गया। सांसद लुंबाराम चौधरी ने रात्रि चौपाल में विभिन्न विभागों से जुड़ी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने इस दौरान पशुपालकों, किसानों सहित विभिन्न वर्ग की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए प्रत्येक पात्र को लाभान्वित होने की बात कही। जिला प्रमुख अर्जुनराम पुरोहित ने रात्रि चौपाल में प्रभारी मंत्री बिश्नोई का स्वागत करते हुए कहा कि रात्रि चौपालों के माध्यम से जनता की समस्याओं का निस्तारण करना एक अनुपम पहल है उन्होंने इस दौरान उपस्थित सभी पात्र को जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी प्रेरित किया।

राजस्थान के राज्यपाल बागडे से मिले मिजोरम के गवर्नर

जयपुर. राज्यपाल हरिभाऊ बागडे से बुधवार को मिजोरम के राज्यपाल विजय कुमार सिंह ने लोकभवन पहुंचकर मुलाकात की। इस दौरान दोनों ने विभिन्न विषयों पर चर्चा की। राज्यपाल से उनकी यह शिष्टाचार भेंट थी। भारतीय सशस्त्र सेना भूतपूर्व सैनिक दिवस मनाया श्रीगंगानगर. भारतीय सशस्त्र सेना भूतपूर्व सैनिक (वेटरन्स डे) दिवस 14 जनवरी 2026 को सैनिक विश्राम गृह श्रीगंगानगर में मनाया गया। इसमें मुख्य अतिथि वेटरन कर्नल श्री संदीप शर्मा, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी श्री आत्मेश बेनीवाल की अध्यक्षता में दो मिनट का मौन व कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सेना मेडल आॅ केप्टेन रामकिशन यादव, श्रीमती रतना कंवर वीरांगना शहीद सुगन सिंह, श्रीमती सरस्वती देवी माता शहीद काॅन्सटेबल सुभाष, वरिष्ठ पूर्व सैनिक सूबेदार मेजर किशनलाल लिम्बा को शाॅल प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर जिले के पूर्व सैनिक, वीरांगनाएं एवं उनके आश्रित भूतपूर्व सैनिक सहित अन्य मौजूद रहे। 

भजनलाल शर्मा सरकार की युवा कल्याण नीति से राजस्थान बनेगा सशक्त और स्वावलंबी

श्रीगंगा नगर. राजस्थान की प्रगति का मार्ग युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और आत्मविश्वास से होकर गुजरता है। इसी मूल भावना को केंद्र में रखते हुए माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्य में युवा कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की है। उनकी स्पष्ट सोच है कि जब तक युवा सशक्त, शिक्षित, प्रशिक्षित और रोजगारयुक्त नहीं होंगे, तब तक समग्र विकास की परिकल्पना अधूरी रहेगी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही नीतियां और योजनाएं इसी दूरदृष्टि का प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की युवा कल्याण नीति का मूल उद्देश्य केवल सरकारी नौकरी उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को बहुआयामी अवसर प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। इसी क्रम में वर्ष 2026 के लिए एक लाख पदों पर भर्तियों का कैलेंडर जारी किया जाना ऐतिहासिक कदम है। यह कैलेंडर युवाओं के लिए आशा और विश्वास का प्रतीक बनकर सामने आया है, क्योंकि इससे उन्हें अपनी तैयारी को समयबद्ध और योजनाबद्ध ढंग से आगे बढ़ाने का अवसर मिला है। भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता ने युवाओं में विश्वास को और मजबूत किया है। पिछले दो वर्षों में बिना किसी गड़बड़ी के 351 प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन इस बात का प्रमाण है कि सरकार पेपर लीक जैसी समस्याओं पर सख्त नियंत्रण रखने में सफल रही है। यह उपलब्धि केवल प्रशासनिक दक्षता नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के प्रति सरकार की संवेदनशीलता को भी दर्शाती है। मुख्यमंत्री की पहल पर अब तक एक लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां मिल चुकी हैं, जबकि करीब एक लाख से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया प्रगति पर है। यह आंकड़े युवाओं के प्रति सरकार की गंभीरता को स्पष्ट रूप से रेखांकित करते हैं। मुख्यमंत्री की युवा कल्याण नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रोजगार के विविध अवसरों का सृजन है। सरकार द्वारा दो लाख से अधिक युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही कौशल विकास को बढ़ावा देते हुए तीन लाख से अधिक युवाओं को आर्थिक क्षेत्रों से जुड़े कौशल प्रशिक्षण प्रदान किए गए हैं। यह प्रशिक्षण युवाओं को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इंटर्नशिप कार्यक्रम के माध्यम से करीब दो लाख युवाओं को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया है, जिससे वे कार्यस्थल की वास्तविक चुनौतियों से परिचित हो सकें। यह पहल युवाओं को शिक्षा और रोजगार के बीच की खाई को पाटने में सहायक सिद्ध हो रही है। साथ ही आई-स्टार्ट राजस्थान के अंतर्गत 65 आई-स्टार्टअप लॉन्चपैड नेस्ट की स्थापना और 658 स्टार्टअप्स को लगभग साढ़े 22 करोड़ रुपये की सहायता देकर नवाचार और उद्यमिता को नई गति दी गई है। मुख्यमंत्री युवा संबल योजना भी युवा कल्याण नीति का एक प्रभावशाली उदाहरण है। इस योजना के अंतर्गत अब तक चार लाख से अधिक युवाओं को साढ़े ग्यारह सौ करोड़ रुपये से अधिक की राशि भत्ते के रूप में प्रदान की गई है। यह सहायता न केवल आर्थिक संबल देती है, बल्कि युवाओं के आत्मविश्वास को भी सुदृढ़ करती है, जिससे वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर रह सकें। राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री द्वारा मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना का शुभारंभ युवाओं के लिए एक नई दिशा लेकर आया है। इस योजना के तहत एक लाख युवाओं को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराकर उन्हें सूक्ष्म उद्यमी के रूप में विकसित किया जाएगा। यह पहल युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ राज्य की अर्थव्यवस्था को भी सशक्त बनाएगी। इसके अतिरिक्त राजस्थान युवा नीति-2026 और राजस्थान रोजगार नीति-2026 का विमोचन मुख्यमंत्री की दीर्घकालिक सोच का परिचायक है। ये नीतियां आने वाले वर्षों में युवाओं के लिए शिक्षा, प्रशिक्षण, रोजगार, उद्यमिता और सामाजिक सुरक्षा के नए अवसर सृजित करेंगी। इन नीतियों के माध्यम से राज्य सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि युवा केवल योजनाओं के लाभार्थी नहीं, बल्कि राज्य निर्माण के सहभागी हैं। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की युवा कल्याण नीति सशक्तिकरण, पारदर्शिता और अवसरों की समानता पर आधारित है। यह नीति युवाओं को न केवल आज की चुनौतियों से लड़ने में सक्षम बनाती है, बल्कि उन्हें भविष्य के लिए भी तैयार करती है।

पाली में प्रभारी मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने राज्य बजट में अपेक्षाओं पर किया जनसंवाद

जयपुर. नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन व पाली जिला प्रभारी श्री झाबरसिंह खर्रा ने सोमवार को आगामी बजट 2026-27 में जिले की अपेक्षाओं को लेकर विभिन्न विभागों के अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, एनजीओ, महिला प्रतिनिधियों एवं युवाओं के साथ जनसंवाद किया। इस अवसर पर पाली जिले के समग्र विकास से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त किए। जनसंवाद के दौरान हेमावास बांध एवं बांडी नदी से प्राप्त जल का अधिक से अधिक उपयोग किसानों तक पहुंचाने, जल प्रदूषण से निजात के लिए पाली-जालौर-बालोतरा होते हुए पाइपलाइन व्यवस्था विकसित करने तथा प्रदूषित जल को शहर से बाहर ले जाने के सुझाव दिए गए। सीईटीपी के कार्य को सरकार द्वारा सीधे अपने नियंत्रण में लेकर शीघ्र एवं प्रभावी समाधान के लिए आग्रह किया। इस अवसर पर शहर के प्रवेश द्वार रजत विहार के पास नाली निर्माण, बांडी नदी पर स्थित पुल के नवनिर्माण, अतिवृष्टि के समय मुख्य मार्ग बाधित होने की समस्या के समाधान के लिए नए पुल के शीघ्र निर्माण, नगर निगम क्षेत्र में रंगमंच के पुनर्निर्माण तथा सोनाई मांझी बायपास निर्माण को लेकर सुझाव दिए गए। चिकित्सा सेवाओं के विस्तार के लिए शहर के सरकारी चिकित्सालय में न्यूरोलॉजिस्ट, ऑन्कोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट एवं नेफ्रोलॉजिस्ट की नियुक्ति, शहर के मध्य स्थित डिस्पेंसरी में हृदय रोग संबंधी प्राथमिक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध  पाली में निर्मित मेडिकल कॉलेज का नाम महाराणा प्रताप की माता जयवंती बाई के नाम पर किए जाने का सुझाव भी दिया गया। इसके अतिरिक्त रोहट एवं मारवाड़ जंक्शन क्षेत्र में खारे पानी की समस्या, पार्षदों को समय पर फंड उपलब्ध कराने, ताकि वार्डों में सफाई एवं निर्माण कार्य सुचारू रूप से हो सकें, स्टार्टअप फाउंडेशन गठन जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रभारी मंत्री खर्रा ने उपस्थित जनसमूह को आश्वस्त किया कि जनसंवाद के दौरान प्राप्त सभी सुझावों को गंभीरता से संकलित कर आगामी बजट में यथासंभव शामिल किया जाएगा ताकि पाली जिले के विकास को नई दिशा मिल सके। इस अवसर पर पूर्व उपसभापति महेंद्र बोहरा, सुनील भण्डारी, अतिरिक्त जिला कलक्टर बजरंग सिंह, अतिरिक्त जिला कलक्टर, सीलिंग ओम प्रभा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुकेश चौधरी भी मौजूद रहे। इसके साथ ही खर्रा ने कलक्ट्रेट में जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक लेकर विभागवार प्रगति की समीक्षा की और आवश्यक दिशा— निर्देश दिए। खर्रा ने बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड, काश्तकारों को ऋण वितरण एवं फसल बीमा योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश दिए। उन्होंने पंच गौरव योजना के कार्यों, व्यय स्थिति तथा नवीन बास्केटबाल ग्राउंड निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया की जानकारी लेकर शीघ्र कार्य प्रारंभ करने को कहा। संपर्क पोर्टल पर प्राप्त शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण निस्तारण एवं अस्वीकृत प्रकरणों में शिकायतकर्ताओं से फीडबैक लेने के निर्देश भी दिए गए। जल मिशन की समीक्षा करते हुए लंबित नल व विद्युत कनेक्शनों को शीघ्र पूर्ण करने के फॉलो-अप शिविरों में लंबित प्रकरणों का तीन दिवस में निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा गया। जिला कलक्टर एल. एन. मंत्री ने सार्वजनिक निर्माण विभाग से सड़कों, अटल प्रगति पथ एवं अन्य विकास कार्यों की प्रगति की जानकारी दी। 

किसी की पेंशन बंद नहीं, सत्यापन के बाद पुनः प्रारंभ हो जाएगी: अविनाश गहलोत

जयपुर. सामाजिक न्याय एवं अधिकरिता मंत्री अविनाश गहलोत ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन पाने वाले सभी लाभार्थियों से वार्षिक सत्यापन शीघ्र करवाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि किसी भी लाभार्थी की पेंशन बंद नहीं की गई है। सत्यापन के अभाव में रोकी भी गई है तो वार्षिक सत्यापन के बाद पुनः आरंभ हो जाएगी। गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सुशासन में विभाग की मंशा ज्यादा से ज्यादा पात्र पेंशनर्स को नियमित सामजिक सुरक्षा पेंशन उपलब्ध कराने की है। विभाग हर वो प्रक्रिया अपनाता है जिससे पेशनर्स को बिना किसी परेशानी के सुगमता से पेंशन मिलती रहे। सामाजिक न्याय मंत्री ने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के सभी लाभार्थियों  को प्रति वर्ष स्वयं का भौतिक सत्यापन करवाना आवश्यक होता है। भौतिक सत्यापन का कार्य 1 नवम्बर से 31 दिसम्बर की अवधि में संचालित किया जाता है। इस अवधि में वार्षिक सत्यापन नहीं करवाने वाले पेंशनर्स की पेंशन का भुगतान रोका जा सकता है। लेकिन सत्यापन के बाद रुकी हुई पेंशन फिर से चालू हो जाती है। गहलोत ने कहा कि लाभार्थी घर से भी एन्ड्राइड मोबाइल पर Rajasthan social pension and Aadhar face RD एप के जरिए लाभार्थी के फेस रिकाग्निशन के आधार पर भौतिक सत्यापन कर सकते हैं। इसके अलावा लाभार्थी वार्षिक भौतिक सत्यापन के लिए ई-मित्र कियोस्क/ई-मित्र प्लस आदि केन्द्रों पर अंगुली की छाप (Finger Print Impression – Biometrics) से करवा सकते हैं। इसके लिए लाभार्थी को ई-मित्र कियोस्क पर निर्धारित शुल्क 50 रुपए एवं ई-मित्र प्लस पर 10 रुपए का भुगतान करना होता है। उन्होंने बताया कि यह सुविधा पूरी तरह से निःशुल्क है।

टोंक में कल 70 KG का दड़ा करेगा झमाझम बारिश की भविष्यवाणी

टोंक/जयपुर.  टोंक जिले के आवां कस्बे में हर साल 14 जनवरी को मकर संक्रांति के अवसर पर मनाए जाने वाले दड़ा महोत्सव की तैयारियां इन दिनों जोरों पर हैं। राजपरिवार की ओर से आयोजित इस महोत्सव के लिए गढ़ पैलेस में दक्ष कारीगर पिछले 15 दिनों से दड़ा बनाने का कार्य कर रहे हैं। विश्व प्रसिद्ध इस महोत्सव के आयोजनकर्ता राजपरिवार की महारानी विजया देवी और कुंवर कार्तिकेय सिंह ने बताया कि इस वर्ष भी दड़ा महोत्सव का आयोजन परंपरागत धूमधाम से किया जाएगा। ऐसे होता है तैयार लकड़ी के बुरादे, बजरी और टाट से बना यह फुटबॉलनुमा दड़ा तकरीबन 70 किलो वजन का होता है। इसे बनाने में 15 दिन की कड़ी मेहनत लगती है। तैयार होने के बाद इसे पानी में भिगोकर और अधिक मजबूत और सख्त बनाया जाता है। वर्तमान में आवां के विशेषज्ञ ग्रामीण इसकी तैयारी में जुटे हैं। युवा और बुजुर्गों में इसे लेकर खासा उत्साह है। रियासत काल से आवां कस्बे में दड़ा महोत्सव का आयोजन राजपरिवार की ओर से होता आ रहा है। परंपरागत रूप से खेले जाने वाला यह खेल मौजूदा फुटबॉल से मिलता-जुलता है, लेकिन इसमें खिलाड़ियों की संख्या हजारों में होती है। गांव के बीच स्थित गोपाल चौक में खेले जाने वाले इस खेल में दो गोल पोस्ट अखनियां दरवाजा और दूनी दरवाजा होते हैं, जिनकी दूरी लगभग एक किलोमीटर होती है। दड़ा करता है भविष्यवाणी करीब 20 गांवों के तीन हजार लोग इस खेल में भाग लेते हैं, जबकि दस हजार दर्शक मकानों की छतों और चौक में जमा होकर खेल का आनंद लेते हैं। मान्यता है कि यदि दड़ा दूनी दरवाजे की ओर जाता है तो वर्षा अच्छी होती है और साल सुकाल का माना जाता है, जबकि अखनियां दरवाजे की ओर जाने पर अकाल का संकेत माना जाता है। सैनिकों की भर्ती से हुई थी शुरुआत आवां के युवा सरपंच दिव्यांश महेंद्र भारद्वाज ने बताया कि राजस्थानी संस्कृति के प्रतीक इस अद्भुत खेल की शुरुआत एक शताब्दी पहले राव राजा सरदार सिंह ने सेना में वीर योद्धाओं की भर्ती के उद्देश्य से की थी। समय के साथ यह परंपरा महोत्सव के रूप में विकसित हो गई।