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राजस्थान में 2 रुपए घटे सरस दूध के भाव

जयपुर. सवाई माधोपुर एवं करौली जिला दुग्ध उत्पादक सहकारी संघ लिमिटेड ने आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरस दूध की कीमतों में कमी की घोषणा की है। संघ के प्रबंध संचालक सुरेश कुमार सेन ने बताया कि दुग्ध क्रय दरों में कमी होने के कारण यह निर्णय किया है। अब सरस गोल्ड दूध का एक लीटर पैक 68 रुपए में और टीएम दूध का एक लीटर पैक 52 रुपए में उपलब्ध होगा। पहले इनकी कीमत क्रमशः 70 रुपए और 54 रुपए थी। नई दरें 13 जनवरी से लागू होंगी और उपभोक्ता सरस बूथ व शॉप एजेंसियों से दूध प्राप्त कर सकेंगे। गुणवत्ता पर विशेष जोर संघ ने स्पष्ट किया है कि कीमतों में कमी के बावजूद दूध की गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं तक शुद्ध और पौष्टिक दूध पहुंचाना ही संघ का उद्देश्य है। दूध की कीमतों में कमी से आमजन को सीधी राहत मिलेगी। रोजाना सरस दूध का उपयोग करने वाले परिवारों के लिए यह निर्णय आर्थिक दृष्टि से सहायक साबित होगा। संघ के अनुसार उपभोक्ताओं को उचित दर पर गुणवत्तायुक्त दूध उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। साथ ही किसानों से खरीदे जाने वाले दूध की दरों में आई कमी का लाभ सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया है।

मकर संक्रांति पर जयपुर में पतंग बिक्री से ₹18 करोड़ का कारोबार

जयपुर. मकर संक्रांति को लेकर बाजार में पतंगों की खरीद-फरोख्त परवान पर है। देर रात तक बाजार में पतंग-मांझा खरीदने वालों की भीड़ उमड़ रही है। पतंग व्यापारियों की मानें तो इस बार डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक पतंगों की बिक्री होने की उम्मीद है। साथ ही मांझा-डोर की चरखी भारी मात्रा में बिकने की भी उम्मीद है। पतंग मार्केट में 18 करोड़ से अधिक के कारोबार होने के अनुमान से व्यापारियों के चेहरे खिले हुए हैं। जयपुर शहर के हांडीपुरा, जगन्नाथशाह का रास्ता, किशनपोल बाजार, चांदपोल बाजार व हल्दियों का रास्ता में पतंगों की 300 से अधिक दुकानें है। जहां सुबह से देर रात तक पतंग और मांझा-डोर के साथ चरखी की खरीदारी हो रही है। मकर संक्रांति के नजदीक आने के साथ ही ग्राहकों की भीड़ भी बढ़ती जा रही है। पिछले तीन दिन से ग्राहकी एक साथ बढ़ी है। बाजार में इस बार छोटी पतंगों से लेकर 4 फीट की पतंगें बिक रही हैं। परंपरागत चांददारा, गिलासदारा जैसी कई डिजायन की अद्धा, मझौली व पोणी पतंगें अधिक बिक रही हैं। इसके साथ ही पन्नी की लटकन, झालर जैसी फैंसी पतंगें भी ग्राहक खरीद रहे हैं। बीकानेर से फर्रूखाबाद तक के व्यापारी स्थानीय व्यापारियों के साथ बरेली, मुरादाबाद, लखनऊ, फर्रूखाबाद के साथ बीकानेर, सीकर सहित प्रदेश के कई शहरों से कारोबारियों ने यहां आकर पतंगों की दुकानें लगाई है। बीकानेर से आए पतंग व्यापारी असलम खान ने बताया कि वे दो माह पहले ही दुकान लगाने के लिए जयपुर आए हैं। दिसंबर तक होलसेल कारोबार हुआ, अब रिटेल में पतंगें बेच रहे हैं। छुट्टियों ने बढ़ाई रौनक इस बार स्कूलों की छुट्टियां आने और रविवार व शनिवार का अवकाश होने से शहर में मकर संक्रांति से पहले ही खूब पतंगें उड़ रही है। इससे बच्चों और युवाओं का उत्साह है, वहीं बाजार में भी रौनक दिखाई दे रही है। कळपने के सामान की दुकानों में भीड़ मकर संक्रांति पर दान-पुण्य के साथ 14-14 वस्तुएं कळपने का विशेष महत्व है, इसे लेकर बाजार में कळपने के सामानों की दुकानों पर भीड नजर आ रही है। दुकानदारों ने संक्रांति को लेकर 14-14 वस्तुओं के पैकेट बना रखे हैं, जो बाजार में 30 रुपए से लेकर 2 हजार रुपए तक बिक रहे हैं। प्लास्टिक के आयटम, सर्दी के ऊनी कपड़े, सुहाग व शृंगार की वस्तुएं अधिक बिक रही हैं। विशिंग लैम्प-पटाखों की बिक्री भी बढ़ी मकर संक्रांति पर विशिंग लैम्प व पटाखों की बिक्री खूब हो रही है। व्यापारियों की मानें तो संक्रांति तक एक करोड़ रुपए से अधिक के विशिंग लैम्प बिकने की उम्मीद है। 600 से 1500 रुपए रोज कमा रहे कारीगर पतंग व मांझा तैयार करने वाले कारीगर इन दिनों 600 से 1500 रुपए रोज कमा रहे हैं। एक पतंग 10 से 15 कारीगरों के हाथों में होकर निकलने के बाद तैयार होती है। इसमें महिलाओं भी पतंग बनाने में सहयोग करती है। वहीं एक कारीगर एक दिन में 12 रील मांझा तैयार कर देता है। इन पतंग बाजारों में भीड़ 1- जगन्नाथशाह का रास्ता (हांडीपुरा)। 2- किशनपोल बाजार। 3- चांदपोल बाजार। 4- हल्दियों का रास्ता। एक नजर… 1- 1500 से अधिक दुकानें है शहर में पतंगों की, 250 से अधिक होलसेल की दुकानें। 2- 2 से 150 रुपए तक की एक पतंग बिक रही बाजार में। 3- 250 से 2000 रुपए तक बिक रहा 3 रील की एक मांझा चरखी। 4- 20 फीसदी महंगी हो गई पतंगें पिछले साल के मुकाबले। (बड़ी दुकानों पर प्रति दुकान एक से डेढ़ लाख तक पतंगें बिक रही)। डेढ़ करोड़ रुपए से अधिक बिक जाएगी पतंगें जयपुर में पतंगों का मार्केट बढ़ता जा रहा है। इस बार डेढ़ करोड़ से अधिक पतंगें बिक जाएगी। पतंग और मांझे का 18 करोड़ से अधिक का कारोबार होने की उम्मीद है। पिछले साल के मुकाबले इस बार ग्राहकी 30 फीसदी बढ़ी है। – संजय गोयल, अध्यक्ष, जयपुर पतंग उद्योग

बारां का लहसुन बनेगा वैश्विक ब्रांड, जीआई टैग से बढ़ेगी पहचान और दाम

बारां राजस्थान के कृषि मानचित्र पर अपनी खास पहचान रखने वाला बारां जिले का लहसुन अब जल्द ही वैश्विक स्तर पर पहचान हासिल करने की ओर बढ़ रहा है। जिले के लहसुन को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (GI) टैग दिलाने के लिए कृषि उपज मंडी समिति बारां ने औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके तहत लहसुन की भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री के लिए प्रस्ताव तैयार कर बौद्धिक संपदा कार्यालय, चेन्नई भेजा गया है। अधिकारियों को उम्मीद है कि यह प्रस्ताव शीघ्र स्वीकृत होगा और बारां के लहसुन को जीआई टैग मिल जाएगा। कृषि उपज मंडी समिति ने करीब एक माह पूर्व इस दिशा में पहल की थी। प्रस्ताव कृषि महाविद्यालय बारां, कृषि विश्वविद्यालय कोटा और राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड जयपुर के सहयोग से तैयार किया गया है। इसे ‘आवेदक समूह उत्पादकों’ के नाम से प्रस्तुत किया गया है, जो कृषि उत्पाद बाजार समिति बारां के नाम से पंजीकृत होगा। जीआई टैग मिलने से जिले के लहसुन को कानूनी संरक्षण मिलेगा और उसकी विशिष्ट पहचान सुरक्षित रहेगी। लहसुन उत्पादन में प्रदेश में अग्रणी बारां दक्षिण-पूर्वी राजस्थान के हाड़ौती क्षेत्र में स्थित बारां जिला लहसुन उत्पादन के मामले में प्रदेश में अग्रणी है। औषधीय श्रेणी की इस फसल में बारां क्षेत्रफल, उत्पादन और उत्पादकता—तीनों ही दृष्टियों से राजस्थान में प्रथम स्थान रखता है। आंकड़ों के अनुसार, राज्य में औसतन 89,805 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की बुवाई होती है, जिसकी औसत उत्पादकता 5,916 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। वहीं बारां जिले में औसतन 30,714 हेक्टेयर क्षेत्र में लहसुन की खेती होती है और उत्पादकता 6,133 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंचती है। पिछले तीन-चार वर्षों से जिले में औसतन 16 लाख क्विंटल लहसुन मंडियों में पहुंच रहा है। क्यों खास है बारां का लहसुन बारां के लहसुन की अलग पहचान का सबसे बड़ा कारण यहां की काली मिट्टी है, जिसमें पोटाश तत्व की मात्रा अधिक पाई जाती है। पोटाश लहसुन की गुणवत्ता, स्वाद और सुगंध को बेहतर बनाता है। लहसुन की कली में पाए जाने वाले ‘डाई एमिल डाई सल्फाइड’ नामक ऑर्गेनो सल्फर यौगिक के कारण इसकी तेज गंध और औषधीय गुण लंबे समय तक बने रहते हैं। कम तापमान और अनुकूल जलवायु भी इसकी गुणवत्ता को और बढ़ाती है। जीआई टैग से क्या होगा फायदा जीआई टैग किसी उत्पाद को उसकी भौगोलिक पहचान से जोड़ता है और यह प्रमाणित करता है कि उसकी गुणवत्ता और विशेषताएं उसी क्षेत्र से जुड़ी हैं। इससे नकली या मिलावटी उत्पादों पर रोक लगेगी, किसानों को बेहतर दाम मिलेंगे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में बारां के लहसुन को नई पहचान मिलेगी। अधिकारियों का मानना है कि जीआई टैग मिलने के बाद न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि जिले के कृषि और विपणन क्षेत्र को भी नई गति मिलेगी।  

राजस्थान में भीषण शीतलहर के बीच 13 जिलों में स्कूलों की छुट्टियां बढ़ीं

जयपुर. राजस्थान में जारी भीषण शीतलहर और घने कोहरे को देखते हुए राज्य के कई जिलों में स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं और कहीं-कहीं स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। छात्रों की सेहत और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने 12 और 13 जनवरी के लिए नए निर्देश जारी किए हैं। प्रदेश में तापमान लगातार गिर रहा है। कई इलाकों में न्यूनतम तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राजस्थान के 11 जिलों में शीतलहर को लेकर रेड, ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, 14–15 जनवरी के बाद ही ठंड से कुछ राहत मिलने की संभावना है। जिलावार स्कूलों को लेकर आदेश जयपुर में कक्षा 5 तक के सभी स्कूलों में 12 और 13 जनवरी को अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, कक्षा 9 से 12 तक के स्कूल 14 जनवरी से सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगे। नागौर में कक्षा 5 तक के स्कूल 12 और 13 जनवरी को बंद रहेंगे। दौसा में कक्षा 8 तक के सभी छात्रों के लिए 12 जनवरी से अवकाश घोषित किया गया है। सीकर में कक्षा 1 से 5 तक के स्कूल बंद किए गए हैं। जालोर में कक्षा 5 तक के स्कूल 12 से 14 जनवरी तक बंद रहेंगे। झुंझुनूं में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों की छुट्टियां 13 जनवरी तक बढ़ा दी गई हैं। झालावाड़/जूनागढ़ में कक्षा 5 तक के स्कूल 12 और 13 जनवरी को बंद रहेंगे। डूंगरपुर में कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों के लिए सोमवार को अवकाश घोषित किया गया है। वहीं, हनुमानगढ़ में कक्षा 1 से 8 तक के स्कूलों में सोमवार को अवकाश रहेगा, जबकि मंगलवार को लोहड़ी का अवकाश रहेगा। स्कूल 14 जनवरी से खुलेंगे। अजमेर में कक्षा 12 तक के सभी स्कूल अगले आदेश तक सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक संचालित होंगे। चूरू में कक्षा 8 तक के स्कूलों में सोमवार को अवकाश घोषित किया गया है। जोधपुर संभाग में सभी स्कूल सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक चलाए जाएंगे। बच्चों को लेकर प्रशासन की अपील लगातार पड़ रही ठंड और कोहरे को देखते हुए प्रशासन ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों को पर्याप्त गर्म कपड़े पहनाकर ही स्कूल भेजें और जिला स्तर पर जारी होने वाले निर्देशों पर नजर बनाए रखें। राज्य में ठंड का प्रकोप फिलहाल जारी रहने की संभावना है, ऐसे में आने वाले दिनों में स्कूलों को लेकर और भी आदेश जारी किए जा सकते हैं।

शिक्षा राज़्यमंत्री मदन दिलावर से शहर के प्रबुद्धजनों ने की शिष्टाचार भेंट’

जयपुर. दो दिवसीय जोधपुर प्रवास पर आए राजस्थान सरकार के शिक्षा (विद्यालयी/ संस्कृत) एवं पंचायती राज मंत्री तथा जोधपुर जिले के प्रभारी मंत्री मदन दिलावर से सोमवार को शहर के प्रबुद्धजनों ने सर्किट हाउस में शिष्टाचार भेंट की।  जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. वीरेंद्र सिंह जैतावत तथा राजस्थान ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष मुकेश भारतीय ने सर्किट हाउस पहुंचकर प्रभारी मंत्री मदन दिलावर से मुलाकात की तथा उनका स्वागत एवं अभिनंदन किया। भेंट के दौरान कुलगुरु डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कृषि विश्वविद्यालय से संबंधित विषयों पर चर्चा की, वहीं मंत्री दिलावर ने विश्वविद्यालय में संचालित शैक्षणिक गतिविधियों के संबंध में जानकारी प्राप्त की। इस अवसर पर अन्य गणमान्य नागरिकों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी प्रभारी मंत्री से मुलाकात कर शुभकामनाएं दीं।

लोक संस्कृति, और पतंगबाज़ी का 14 को दिखेगा अनूठा संगम

जयपुर. राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और पर्यटन पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त करने वाला काइट फेस्टिवल 2026 इस वर्ष भी अपने भव्य और आकर्षक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। पर्यटन आयुक्त रूकमणी रियाड़ के अनुसार इस अवसर पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगी। उनकी उपस्थिति आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान करेगी और यह राज्य सरकार की उस प्रतिबद्धता को दर्शाएगी, जिसके तहत राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर, लोक परंपराओं और पर्यटन को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। पर्यटन आयुक्त ने कहा कि दो दशकों से भी अधिक समय से निरंतर आयोजित हो रहा यह उत्सव आज केवल एक पारंपरिक आयोजन नहीं रह गया है, बल्कि यह राजस्थान के इवेंट-बेस्ड टूरिज़्म का प्रमुख और विश्वसनीय ब्रांड बन चुका है। विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार 14 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले इस उत्सव का एक दिवसीय कार्यक्रम सुबह 11.00 बजे से दोपहर 2.00 बजे तक जलमहल की पाल, आमेर रोड, जयपुर पर आयोजित किया जाएगा। ऐतिहासिक जलमहल, शांत झील और खुले आसमान के बीच रंग-बिरंगी पतंगों की उड़ान पर्यटकों और शहरवासियों के लिए एक अविस्मरणीय अनुभव रचेगी। कार्यक्रम के अंतर्गत लोक कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, पतंगों की प्रदर्शनी, पतंग निर्माण का लाइव प्रदर्शन तथा फैंसी पतंग उड़ाने का विशेष डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किया जाएगा। पर्यटकों के आकर्षण के लिए पारंपरिक व्यंजनों का निःशुल्क वितरण, विदेशी सैलानियों के लिए निःशुल्क पतंगें तथा निःशुल्क ऊँटगाड़ी सवारी जैसी विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी। शेखावत ने बताया की दिनभर के सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव के बाद शाम 6.30 बजे से आयोजन का दूसरा चरण प्रारंभ होगा। इस दौरान लालटेन उड़ाने का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, इसे लालटेन उत्सव का का नाम दिया गया है। इसके बाद हवामहल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में भव्य आतिशबाज़ी की जाएगी। गुलाबी शहर के आसमान में रोशनी और रंगों से सजी यह आतिशबाज़ी काइट फेस्टिवल का प्रमुख आकर्षण होगी, जो उत्सव को यादगार समापन प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि काइट फेस्टिवल 2026 एक बार फिर यह संदेश देता है कि राजस्थान केवल देखने की जगह नहीं, बल्कि दिन से रात तक जीने और महसूस करने वाला अनुभव है जहां दिन में आसमान पतंगों से संवाद करता है और रात में ऐतिहासिक धरोहरें रोशनी में नहाकर उत्सव की साक्षी बनती हैं। गौरतलब है कि काइट फेस्टिवल वर्षों से शहरवासियों, देशी पर्यटकों और विदेशी सैलानियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय रहा है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक इस उत्सव के माध्यम से राजस्थान की जीवंत संस्कृति, लोक कला और आतिथ्य परंपरा का अनुभव करते हैं। यह आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग, राजस्थान सरकार द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसे जिला प्रशासन जयपुर, जयपुर नगर निगम एवं पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का सहयोग प्राप्त है।

अलवर के रिहायशी इलाके में टाइमर ‘बमनुमा’ वस्तु से मचा हड़कंप

अलवर. राजस्थान के अलवर शहर के विवेकानंद नगर सेक्टर-4 में सोमवार सुबह टाइमर लगी बमनुमा वस्तु से मिलने से हड़कंप मच गया। पुलिस के मुताबिक बमनुमा वस्तु एक रिहायशी इलाके में स्थित एक घर के पास मिली है। पुलिस के मुताबिक सूचना मिलते ही जयपुर से आतंकवाद विरोधी दस्ते और बम निरोधक दस्ता बुला लिया गया है जो कि संदिग्ध वस्तु की जांच करेगी। पुलिस के मुताबिक संदिग्ध वस्तु अरावली विहार क्षेत्र के विवेकानंद नगर सेक्टर-4 में देखी गई। पुलिस ने तुरंत इलाके को घेर लिया और एहतियात के तौर पर संदिग्ध वस्तु को आनन-फानन में शहर से लगभग साढ़े छह किलोमीटर दूर जयसमंद बांध के पास एक सुनसान स्थान पर रखा दिया। पुलिस ने बताया कि बांध के आसपास के इलाके को सील कर दिया गया है और लोगों की आवाजाही प्रतिबंधित कर दी गई है। पुलिस संदिग्ध वस्तु पर लगातार नजर रखे हुए हैं। पुलिस को सुबह कंट्रोल रूम के जरिए बमनुमा वस्तु की सूचना मिली थी। पुलिस तुरंत रिहायशी इलाके में पहुंची और वस्तु को चेक किया। पुलिस को संदेह हुआ और इसके बाद मामले की जानकारी पुलिस के उच्च अधिकारियों को दी गई। बताया जा रहा है कि बमनुमा वस्तु में टाइमर लगा हुआ है और साथ में कुछ पदार्थ भी है। आपको बता दें कि पुलिस संदिग्ध वस्तु को ऐसे इलाके में लेकर पहुंची है जहां आस-पास कोई आबादी नहीं है।

राजस्थान के पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने छोड़ी भाजपा

जयपुर. राजस्थान के आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय भाजपा छोड़कर दोबारा कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने दावा किया कि पिछली सरकार में मंत्री रहे महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने भाजपा छोड़ दी है। डोटासरा के अनुसार, महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने स्वीकार किया है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में जाना उनकी एक ऐतिहासिक गलती थी। कांग्रेस प्रदेश गोविंद सिंह डोटासरा ने रविवार को दावा किया कि महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने BJP छोड़ दी है। उन्होंने बताया कि पिछले कांग्रेस सरकार में मंत्री रहे मालवीय ने पार्टी के शीर्ष नेताओं से मुलाकात की है और फिर से शामिल होने के लिए पत्र लिखा है। भाजपा में जाना ऐतिहासिक गलती गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि महेंद्रजीत सिंह ने साफ किया है कि कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होना एक ऐतिहासिक गलती थी। महेंद्रजीत का अनुरोध अनुशासन समिति को भेज दिया गया है। समित के फैसले के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। डोटासरा ने यह भी दावा किया कि मालवीय का कहना है कि कांग्रेस ने हमेशा उनको सम्मान दिया है। भाजपा में तो उनको घुटन महसूस हो रही थी। मालवीय कांग्रेस की नीतियों में यकीन रखते हैं। मालवीय ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है। लोकसभा चुनाव में ज्वाइन की थी भाजपा राजस्थान के वागड़ क्षेत्र से आने वाले आदिवासी नेता महेंद्रजीत सिंह मालवीय 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान बीजेपी में शामिल हुए थे। उन्होंने बांसवाड़ा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था लेकिन BAP कंडिडेट राजकुमार रोत से हार गए थे। सरकार पर साधा निशाना रिपोर्ट के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक के बाद मालवीय ने संवाददाताओं से कहा कि सूबे में भाजपा की सरकार होने के बाद भी वह लोगों के लिए काम नहीं करवा पा रहे थे। मौजूदा राज्य सरकार में कोई ऐसा नहीं है जो गरीबों की बात सुने। मैंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को कई बार लेटर लिखा लेकिन समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकल सका है। मेरा मानना है कि केवल कांग्रेस ही जनता का भला कर सकती है।

चित्तौड़गढ़ में 11 देशों से आएगा डिजिटल मायरा, 151 गांव बनेंगे साक्षी, गोकुल जैसी गोशाला का निर्माण

चित्तौड़गढ़   राजस्थान की मिट्टी की खुशबू और गोसेवा के संस्कार सात समंदर पार भी फीके नहीं पड़े हैं। क्षेत्र के नपानिया गांव के युवाओं ने साबित कर दिया है कि इंसान चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहे, अपनी जड़ों को नहीं भूलता। दुबई, अमरीका, लंदन और जापान जैसे 11 देशों में सफल करियर बना चुके इन युवाओं ने अपनी जन्मभूमि के प्रति कर्तव्य निभाते हुए करीब 20 लाख रुपए की लागत से एक विशाल नंदेश्वर गोशाला का निर्माण करवाया है। इस सामूहिक संकल्प की सिद्धि का उत्सव रविवार से नानी बाई के मायरा के साथ मनाया जाएगा। टीस से जन्मा संकल्प: 11 हजार से शुरू हुआ कारवां नपानिया गांव के युवा रोजगार के सिलसिले में केन्या, चीन और मुंबई जैसे शहरों में बसे हैं। अक्सर त्योहारों पर जब ये युवा गांव लौटते थे, तो सड़कों पर बेसहारा और चोटिल गोवंश को देखकर उनके मन में गहरी टीस उठती थी। यही दर्द पिछले वर्ष एक ठोस संकल्प में बदला। शुरुआत महज 11-11 हजार रुपए के अंशदान से हुई, लेकिन देखते ही देखते कारवां बढ़ता गया। प्रवासियों के साथ स्थानीय भामाशाहों ने भी दिल खोलकर सहयोग किया। 11 देशों से आएगा डिजिटल मायरा, 151 गांव बनेंगे साक्षी इस गोशाला का शुभारंभ एक ऐतिहासिक उत्सव की तरह होगा। 11 जनवरी से चित्तौड़गढ़ के हरे कृष्णा प्रभु राकेश पुरोहित के सानिध्य में नानी बाई का मायरा कथा शुरू होगी। दुबई, अमरीका, यूके, केन्या, जापान और मस्कट सहित 11 देशों से प्रवासी भारतीय मायरा लेकर पहुंचेंगे। मकर संक्रांति को करीब 151 गांवों के श्रद्धालु इस आयोजन में सम्मिलित होंगे। 20 बीघा जमीन पर गोकुल' जैसा आशियाना सांवलियाजी मार्ग पर करीब 20 बीघा भूमि पर इस गोशाला का निर्माण किया गया है। 15 लाख की लागत से विशाल शेड बनाया गया है ताकि गोवंश को हर मौसम से सुरक्षा मिले। किसी ने पशु खेळ (नांद) बनवाई, तो किसी ने बिजली कनेक्शन और समतलीकरण में श्रमदान किया। क्या कहते हैं जिम्मेदार? सड़कों पर चोटिल गोवंश को देख मन दुखी होता था। हमने तय किया कि अपनी कमाई का एक हिस्सा माटी और गोमाता को अर्पित करेंगे। गांव की एकता से ही यह संभव हुआ। – उदयलाल मेनारिया, प्रेम मेनारिया, संजय जाट और नपानिया के युवा 700 वर्ष पहले नरसीजी के भरोसे पर द्वारिकाधीश आए थे, आज उसी अटूट विश्वास के साथ नपानिया के युवा गोमाता के लिए भरोसे की कथा कर रहे हैं। यह आधुनिक पीढ़ी के लिए मिसाल है। – पं. राकेश पुरोहित, प्रशासनिक संत

जयपुर में रोबोटिक डॉग्स की एंट्री, सड़कों पर दिखी इनकी खासियतें, जानें इनका नाम

जयपुर सेना दिवस 2026 की मुख्य परेड जयपुर में 15 जनवरी होगी। इस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल चल रही है। जयपुर की सड़कों पर इन दिनों फौजी बूटों की धमक के साथ-साथ एक और आवाज़ सुनाई दे रही है – लोहे के पैरों की खनक। इस लोहे के रोबोटिक डॉग्स को जो भी देख रहा है वो दंग रह जा रहा है। आखिर ये है क्या चीज? भारतीय सेना ने अपनी सबसे एडवांस तकनीक यानी 'रोबोटिक डॉग्स' को जयपुर की परेड में भी उतारा है। इस 'रोबोटिक डॉग्स' को देखने वालों की सांसें थम जाती हैं। आखिर ये क्या बला है। क्या है इस रोबोटिक डॉग्स की खासियत? ये महज़ खिलौने हैं या फिर जंग के मैदान में पासा पलटने वाले आधुनिक हथियार? आइए जानते हैं रोबोटिक डॉग्स, मल्टी यूटीलिटी लेगी इक्विपमेंट (MULE) की खासियत? रोबोटिक डॉग्स या खच्चर रोचक बात है कि नए रोबोटिक डॉग्स का नाम म्यूल क्यों रखा गया है। नए रोबोटिक डॉग्स को तकनीकी भाषा में MULE यानी Multi-Utility Legged Equipment कहा जाता है। सेना में सामान ढोने के लिए खच्चर का प्रयोग किया जाता है। खच्चर को अंग्रेजी में म्यूल कहते हैं। सामान्यतौर पर इसका भी थोड़ा बहुत इसी प्रकार का उपयोग है। इसका चीन, अमेरिका में भी प्रयोग होता है। सेना ने रोबोटिक डॉग्स का नाम रखा है 'संजय' रोबोटिक डॉग्स यानि म्यूल की खासियतें जानकर चौंक जाएंगे। एकबारगी तो आपको विश्वास नहीं होगा। सेना ने बहुत प्यार से रोबोटिक डॉग्स का नाम 'संजय' रखा है। इनका वजन करीब 51 किलोग्राम है और ये दिखने में किसी खूंखार शिकारी कुत्ते जैसे लगते हैं। लेकिन इनकी असली ताकत इनके अंदर छिपी 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' में है। इनको दिल्ली की एरोआर्क कंपनी ने विकसित किया है। ये रोबोटिक डॉग्स एक बार में चार्ज होने के बाद 20 घंटे तक लगातार काम कर सकते हैं। इनमें NVIDIA के ग्राफिग कार्ड्स लगाए गए हैं। इन्हें रिमोट से तो ऑपरेट किया ही जा सकता है। ये ऑटोमैटिक रूप से भी काम करते हैं। रोबोटिक डॉग्स की खासियतें ये रोबोटिक डॉग्स -40°C की हाड़ कंपाने वाली ठंड से लेकर 55°C की चिलचिलाती धूप में भी काम कर सकते हैं। ये 3 मीटर प्रति सेकंड की रफ़्तार से भाग सकते हैं। ऊबड़-खाबड़ पहाड़, गहरी खाइयां या शहर की संकरी सीढ़ियां, इनके लिए चुटकियों का खेल है। इनके चेहरे पर लगे हाई-डेफिनिशन थर्मल कैमरे और LiDAR सेंसर रात के अंधेरे में भी दुश्मन को पहचान लेते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इन रोबोट्स पर हल्के हथियार (Small Arms) फिट किए जा सकते हैं। ये करीब 12 से 15 किलो तक का बारूद, खाना या दवाइयां अग्रिम चौकियों तक पहुंचा सकते हैं, जहां इंसान का पहुंचना मुश्किल होता है। इन्हें वाई-फाई या LTE के जरिए 10 किमी दूर बैठकर भी कंट्रोल किया जा सकता है। यानी अब आतंकी ठिकानों या संकरी गलियों में घुसने के लिए हमारे जवानों को जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं होगी, ये रोबोटिक डॉग्स खुद मोर्चा संभालेंगे। फिलहाल ये रोबोटिक डॉग्स जयपुर के जगतपुरा और महल रोड पर रिहर्सल के दौरान लोगों के लिए कौतूहल का विषय बने हुए हैं। ये पूरी तरह से 'आत्मनिर्भर भारत' की तस्वीर पेश करते हैं। 15 जनवरी को आर्मी डे परेड देखने जरूरी जाएं तो 15 जनवरी को जब आप आर्मी डे परेड देखने पहुंचेंगे, तो इन आधुनिक योद्धाओं का स्वागत तालियों के साथ ज़रूर कीजिएगा। तकनीक और साहस का यह मेल बताता है कि भारतीय सेना अब केवल जज़्बे से ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बेहतरीन टेक्नोलॉजी से भी लैस है। देश में दिल्ली से बाहर सेना दिवस परेड की मेजबानी करने वाला जयपुर, बेंगलूरू, लखनऊ और पुणे के बाद चौथा शहर है।