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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में शिफ्ट होंगे किराए के कमरों वाले आंगनबाड़ी केंद्र

जयपुर. किराए के भवनों में संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों को अब पास के सरकारी स्कूलों में शिफ्ट किया जाएगा। आंगनबाड़ी में शाला पूर्व शिक्षा लेने वाले बच्चों को आगे उसी स्कूल में प्रवेश दिया जाएगा। महिला एवं बाल विकास विभाग ने इस दिशा में कवायद शुरू कर दी है। जो केंद्र स्कूलों में शिफ्ट नहीं हो पाएंगे, उनकी पास के स्कूलों से मैपिंग को जाएगी। दूरी का निर्धारण शहरी क्षेत्रों में एक किमी के दायरे में स्थित स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्र शिफ्ट होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में 500 मीटर के दायरे में स्थित स्कूलों में आंगनबाड़ी केंद्र शिफ्ट किए जाएंगे। जयपुर में सबसे अधिक किराए के भवनों में सबसे अधिक आंगनबाड़ी केंद्र जयपुर में चल रहे हैं। जिले में कुल 1078 केंद्र किराए के भवनों में संचालित हैं। स्थिति इतनी खराब है कि कई केंद्र छोटे-छोटे कमरों में चल रहे हैं। इनका कहना है किराए के भवनों में चल रहे आंगनबाड़ी केंद्रों को पास के स्कूलों में जोड़ रहे हैं, जिससे स्कूल प्रबंधन की मॉनिटरिंग भी हो सकेगी। वहीं, बच्चों को स्कूल जैसा माहौल भी मिलेगा। 6 वर्ष की आयु पूरी होते ही बच्चे को उसी स्कूल में प्रवेश मिल जाएगा। – वासुदेव मालावत, निदेशक, समेकित बाल विकास सेवाएं

बैलेट पेपर से पंच और सरपंच तथा ईवीएम से होंगे जिला पंचायत के चुनाव

जयपुर. राजस्थान में आगामी पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर मतदान व्यवस्था में एक बड़ा और अहम बदलाव किया गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस बार पंच और सरपंच पदों के चुनाव बैलेट पेपर के जरिए कराने का फैसला लिया है। वहीं, पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए ईवीएम से मतदान कराया जाएगा। इस संबंध में आयोग ने सभी जिला कलेक्टरों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं और उसी अनुरूप चुनावी तैयारियां करने को कहा गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने जारी की गाइड लाइन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी गाइडलाइन के अनुसार, पंच और सरपंच चुनावों में बैलेट पेपर, बैलेट बॉक्स, मतगणना की प्रक्रिया और सुरक्षा से जुड़ी व्यवस्थाएं समय रहते सुनिश्चित की जाएंगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि इन पदों के लिए ईवीएम का इस्तेमाल नहीं होगा। इसके साथ ही जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम से कराए जाएंगे, लेकिन जहां ईवीएम की उपलब्धता कम होगी, वहां वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर बैलेट बॉक्स की तैयारी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसका मकसद यह है कि किसी भी जिले में मशीनों की कमी के कारण मतदान प्रक्रिया प्रभावित न हो। गौरतलब है कि राजस्थान में पिछले तीन पंचायती राज चुनावों में सभी पदों के लिए मतदान ईवीएम से ही कराया गया था। पंच, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद चारों स्तरों पर ईवीएम का इस्तेमाल किया जाता रहा है। ऐसे में लंबे समय बाद पंच और सरपंच चुनावों में बैलेट प्रणाली की वापसी को एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है। प्रशासनिक हलकों में इसे चुनाव प्रबंधन से जुड़ा बड़ा फैसला बताया जा रहा है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह निर्णय चुनावों को सुचारु, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है। ईवीएम की सीमित संख्या और बड़े पैमाने पर होने वाले ग्रामीण चुनावों को देखते हुए बैलेट और ईवीएम दोनों विकल्पों को साथ में रखा गया है। आयोग ने जिला कलेक्टरों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में आवश्यक संसाधनों का आकलन कर समय रहते सभी व्यवस्थाएं पूरी करें, ताकि चुनाव के दौरान किसी तरह की अव्यवस्था न हो। पंचायती राज संस्थाएं ग्रामीण लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती हैं और इन चुनावों में बड़ी संख्या में मतदाता भाग लेते हैं। ऐसे में मतदान प्रक्रिया में किए गए इस बदलाव को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज कर दी गई हैं। अब ग्रामीण मतदाता पंच और सरपंच के लिए मतपत्र के जरिए वोट डालेंगे, जबकि पंचायत समिति और जिला परिषद के लिए ईवीएम का इस्तेमाल होगा। आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी राजेश वर्मा की ओर से जारी आदेश के अनुसार, विधानसभा की मतदाता सूचियों के आधार पर फोटोयुक्त पंचायत मतदाता सूचियां तैयार की जा रही हैं। इन सूचियों का अंतिम प्रकाशन 25 फरवरी को होगा। पंच और सरपंच के चुनाव मतपेटियों से कराए जाएंगे, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव ईवीएम से होने की संभावना है। मध्यप्रदेश राज्य निर्वाचन आयोग की एमपीएसवी ईवीएम भी मंगाई जा रही हैं।

प्रिया और हनुमान ने आखिरी समय पर बदली शादी की जगह

अलवर. राजस्थान में इस समय प्रिया सेठ और हनुमान प्रसाद की शादी सुर्खियों में है। अलवर जिले के निवासी हनुमान प्रसाद और पाली जिले की रहने वाली प्रिया सेठ 23 जनवरी को बसंत पंचमी अबूझ सावे के दिन विवाह के बंधन में बंध गए। दोनों की शादी एक होटल में हुई।शादी में कौन-कौन शामिल हुआ जयपुर की खुली जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे प्रिया और हनुमान की शादी में परिवार के अलावा केवल नजदीकी रिश्तेदार ही मौजूद रहे। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद इन दोनों को पैरोल मिली है। दोनों चर्चित हत्याकांड में शामिल रहे हैं। क्यों चर्चा में है यह शादी प्रिया सेठ और हनुमान प्रसाद के दिल जेल में ही मिले। दो कैदियों की प्रेम कहानी की वजह से यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। शादी पर मीडिया और लोगों की नजर के कारण कपल को आखिरी समय पर अलवर जिले के बड़ौदामेव कस्बे से अपनी शादी की जगह बदलनी पड़ी। ये थी शादी के वेन्यू में बदलाव की वजह 34 वर्षीय प्रिया सेठ और 29 साल के हनुमान प्रसाद ने अलवर में शादी की। शादी की जगह में बदलाव की वजह दोनों की शादी का कार्ड बताया जा रहा है। दरअसल दोनों के शादी के निमंत्रण पत्र में हनुमान का नंबर था। सोशल मीडिया पर दोनों की शादी का कार्ड वायरल हो गया था। बड़ौदामेव में उनका घर शादी के सजा हुआ था, वहां शादी की जगह बदलने के बाद सन्नाटा पसरा हुआ था। इससे कस्बे में ये अटकलें लगने लगीं कि क्या शादी टाल दी गई है। लेकिन शादी प्लान के अनुसार ही हुई, केवल जगह अलग थी। शादी को लेकर क्या बोली हनुमान प्रसाद की मां हनुमान प्रसाद की मां चंद्र कला ने कहा कि हम खुश हैं कि हमारे बेटे की आखिरकार शादी हो रही है। जब उनके पूछा गया कि आपका शादी को लेकर क्या कहना है। इस पर उन्होंने कहा कि अच्छा है। दोनों नई जिंदगी की शुरुआत कर रहे हैं। प्रिया सेठ को 2018 में जयपुर में दुष्यंत शर्मा की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था, जिससे वह एक डेटिंग ऐप पर मिली थी। वहीं हनुमान प्रसाद को 2017 के एक मामले में अलवर में एक आदमी, उसके 3 बेटों और एक भतीजे की हत्या के लिए दोषी ठहराया गया था। दोनों को 2023 में दोषी ठहराया गया और उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

उदयपुर के गेमिंग जोन में लगी भीषण आग

नई दिल्ली. उदयपुर में सुखेर पुलिस स्टेशन के पास एक गेमिंग जोन में भीषण आग लग गई। इससे परिसर का सारा सामान जल गया, जिसमें संपत्ति का भारी नुकसान हुआ है। लेकिन किसी के हताहत होने की खबर सामने नहीं आई है। यह घटना शुक्रवार की शाम करीब 4 बजे की है। घटना की जानकारी मिलने के साथ ही दमकल विभाग की गाड़ियां मौके पर पहुंच गई। सुखेर पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) रविंद्र चरण ने घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया, 'हमें शाम करीब 4 बजे आग लगने की घटना की जानकारी मिली। किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन संपत्ति का काफी नुकसान हुआ है।'

लोकसभा अध्यक्ष ने सस्ते पक्के घरों सहित 67 करोड़ के विकास कार्यों की दी सौगात

कोटा. शहर के लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शनिवार सुबह 11 बजे जगपुरा क्षेत्र में 832 अफोर्डेबल आवासों के निर्माण का शिलान्यास किया। ये आवास मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत बनाए जाएंगे। इस योजना से शहर के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को सस्ते दामों में पक्का घर मिलने का सपना पूरा होगा। कोटा विकास प्राधिकरण (केडीए) की ओर से जगपुरा क्षेत्र में लगभग 38 करोड़ रुपए की लागत से इन 832 अफोर्डेबल आवासों का निर्माण किया जाएगा। योजना का उद्देश्य ऐसे परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है, जो आर्थिक कारणों से अब तक अपने घर का सपना पूरा नहीं कर सके हैं। इन घरों में बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। अफोर्डेबल आवासों के साथ-साथ लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में भी बड़े विकास कार्यों की शुरुआत की गई। करीब 27 करोड़ रुपए की लागत से सड़क निर्माण, खेल मैदान और सामुदायिक भवन जैसे विकास कार्य किए जाएंगे। इस तरह कुल 67 करोड़ रुपए के विभिन्न विकास कार्यों की आधारशिला रखी गई। शहर के विकास को मिलेगी नई गति इन विकास कार्यों से न केवल आवास समस्या का समाधान होगा, बल्कि शहर के बुनियादी ढांचे को भी मजबूती मिलेगी। बेहतर सड़कें, खेल मैदान और सामुदायिक भवन बनने से स्थानीय लोगों को सुविधाएं मिलेंगी और क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी इस अवसर पर लाडपुरा विधायक कल्पना देवी भी मौजूद रहीं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर मिले और शहर के हर क्षेत्र में समान रूप से विकास हो। कार्यक्रम में केडीए के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हुए। गरीब और मध्यम वर्ग को मिलेगा सीधा लाभ सरकार की इस पहल से हजारों परिवारों को राहत मिलेगी। सस्ते आवास और बेहतर सुविधाओं के साथ ये योजना कोटा शहर के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। जिससे शहर के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को पक्के घर का लाभ मिलेगा। अफोर्डेबल हाउस के साथ 27 करोड़ रुपए की लागत से लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में सड़क निर्माण, खेल मैदान, सामुदायिक भवन सहित कुल 67 करोड़ के विभिन्न विकास कार्यों की भी आधारशिला रखी जाएगी। इस अवसर पर लाडपुरा विधायक कल्पना देवी भी उपस्थित रहीं।

एसओजी ने फर्जीवाड़े में 3 बड़ी भर्तियों में नौकरी लगे अभ्यर्थियों की मांगी OMR शीट्स

जयपुर. राजस्थान में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों बेरोजगारों के भविष्य से जुड़े सबसे बड़े दस्तावेज, यानी ओएमआर शीट्स पर ही अब सवाल खड़े हो गए हैं। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड पर गंभीर आरोप है कि उसने 3 बड़ी भर्ती परीक्षाओं की मूल ओएमआर शीट्स या तो नष्ट कर दी हैं या फिर जानबूझकर एसओजी को उपलब्ध नहीं करवा रहा। सुपरवाइजर (महिला अधिकारिता) सीधी भर्ती परीक्षा–2018, प्रयोगशाला सहायक भर्ती परीक्षा–2018 और कृषि पर्यवेक्षक भर्ती परीक्षा–2018 में ओएमआर शीट्स में छेड़छाड़ कर नंबर बढ़ाने के मामले की जांच कर रही स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने बोर्ड से अब तक करीब 8 से अधिक पत्र लिखकर मूल OMR शीट्स मांगी हैं, लेकिन इसके बावजूद बोर्ड ने जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए। सबकी नहीं, नौकरी लगने वालों की ही दे दें ओएमआर शीट्स एसओजी सूत्रों के मुताबिक, अब तक जो गड़बड़ियां सामने आई हैं, वे सिर्फ शुरुआत हैं। यदि बोर्ड मूल OMR शीट्स उपलब्ध करवा देता है तो और भी कई मामलों में छेड़छाड़, फर्जीवाड़ा और अंक बढ़ाने के ठोस प्रमाण मिल सकते हैं। इससे यह भी स्पष्ट हो सकता है कि कितने और अभ्यर्थियों के साथ अन्याय हुआ और कितनों को गलत तरीके से नौकरी दिलाई गई। बोर्ड सबकी ओएमआर शीट्स उपलब्ध नहीं करवाना चाहता तो केवल नौकरी में लगने वाले अभ्यर्थियों की ही मूल ओएमआर शीट्स उपलब्ध करवा दें। ओएमआर शीट्स में हेरफेर एसओजी की जांच में सामने आया है कि इन तीन परीक्षाओं में कम से कम 42 अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट्स में हेरफेर कर उनके नंबर बढ़ाए गए। इनमें से 38 अभ्यर्थियों के अंकों में भारी बढ़ोतरी की गई। सबसे चौंकाने वाला मामला उस अभ्यर्थी का है, जिसके वास्तविक रूप से माइनस 6 नंबर आ रहे थे, लेकिन उसकी ओएमआर शीट में सीधे 259 नंबर दर्ज कर दिए गए। यह आंकड़ा खुद इस बात का सबूत है कि गड़बड़ी मामूली नहीं, बल्कि सुनियोजित और संगठित तरीके से की गई। जब भी मांगी…जवाब मिला, नहीं मिल रही एसओजी सूत्रों के मुताबिक जब भी बोर्ड अधिकारियों से ओएमआर शीट्स मांगी, लेकिन बोर्ड में वर्षों से तैनात कर्मचारी अधिकारियों को नहीं मिलने का जवाब देकर गुमराह देते हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब एसओजी जैसी जांच एजेंसी बार-बार दस्तावेज मांग रही है, तो बोर्ड उन्हें उपलब्ध क्यों नहीं करवा रहा? क्या ओएमआर शीट्स नष्ट कर दी गई हैं या फिर इसलिए रोकी जा रही हैं ताकि और बड़े खुलासे न हो सकें?

पहला स्वदेशी ऑटोनॉमस रोबोट ‘डैगर’ जयपुर में बना, दिल्ली में परेड में दिखेंगे मेड इन इंडिया के 3 रोबोट

 जयपुर  भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध कौशल और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। हाल ही में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के खिलाफ हुए सफल ऑपरेशन में मानवरहित रोबोट ‘जीना’ ने मुख्य भूमिका निभाई। करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगलों के बीच छिपे भारी हथियारों से लैस तीन आतंकियों का पता लगाने और उन्हें ढेर करने में इस एआई-लेस रोबोट का इस्तेमाल किया गया। इस तकनीक की मदद से बिना किसी मानवीय क्षति के ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। स्वदेशी ‘डैगर’ भारतीय सेना की 50 पैरा (स्पेशल फोर्सेज) में शामिल किया गया ‘डैगर’ देश का पहला पूरी तरह से स्वदेशी और नेक्स्ट-जेन ऑटोनॉमस रोबोट है। यह रोबोट न केवल युद्ध क्षेत्र में रीयल-टाइम निगरानी करता है, बल्कि भीषण गोलीबारी के बीच घायलों को सुरक्षित स्थान तक निकालने में भी सक्षम है। ‘डैगर’ को राइफल, लाइट मशीन गन (LMG) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर जैसे हथियारों से लैस किया जा सकता है। यह 450 किलो तक वजन उठाकर उबड़-खाबड़ रास्तों पर 10 घंटे तक लगातार काम कर सकता है। ‘मेक इन इंडिया’ का गौरव इन अत्याधुनिक रोबोट्स को जयपुर की कंपनी क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स द्वारा ‘सीतापुरा’ क्षेत्र में डिजाइन और तैयार किया गया है। कंपनी के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा और डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा के अनुसार, डैगर को पूरी तरह से भारत में विकसित करना ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक मील का पत्थर है। रक्षा रोबोटिक्स के अलावा, कंपनी ने ‘कृष्णा’ नामक रोबोट भी बनाया है जो खतरनाक आग बुझाने और केमिकल प्लांट्स जैसी जोखिम भरी जगहों पर काम करने में सक्षम है। राजपथ पर दिखेगा पराक्रम आगामी 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस परेड के दौरान देश की राजधानी दिल्ली में इन स्वदेशी रोबोट्स का वैभव पूरी दुनिया देखेगी। सेना की तकनीकी निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किए गए ये रोबोट अब ऊंचे पहाड़ी इलाकों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में सैनिकों के लिए ‘कवच’ का काम करेंगे। इनकी मदद से सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए मिलिट्री ऑपरेशन करना संभव होगा, जिससे सैनिकों की जान का जोखिम न्यूनतम हो जाएगा। इन खूबियों से लैस हैं ये व्हीकल यूजीवी डैगर : नाइट विजन के साथ अत्याधुनिक फीचर इसे जमीन पर सहायता के लिए ह्यूमन कंट्रोल से लैस किया गया है। मल्टी यूजीवी कॉर्डिनेट मूवमेंट के लिए कॉन्वॉय फॉलोइंग मोड का विकल्प भी है। मजबूत मिलिट्री-ग्रेड ऑल-टेरेन मोबिलिटी यूजीवी डैगर दूसरे रोबोट्स की तुलना में अधिक मजबूत है। इसमें नाइट विजन के साथ रीयल टाइम आईएसआर जैसे अत्याधुनिक फीचर भी हैं। डैगर युद्ध क्षेत्र में घायलों को निकालकर सुरक्षित स्थान तक लाने की खूबी रखता है। यह आईएसआर मिशन के लिए टेथर्ड ड्रोन को सपोर्ट करता है। इस अत्याधुनिक रोबोट को आरसीडब्ल्यूएस के अनुकूल किया गया है। इससे यह राइफल, लाइट मशीन गन (एलएमजी), मीडियम मशीन गन (एमएमजी) और ऑटोमैटिक ग्रेनेड लॉन्चर (एजीएल) के साथ काम करने में भी सक्षम है। इसकी खासियत से सैनिकों को उबड़-खाबड़ रास्तों व खतरे वाले स्थानों पर जाने की जरूरत नहीं होगी और जान का खतरा नहीं होगा। जीना : ऊंचाई और मुश्किल इलाकों के लिए बनाया यह एक मिनी वेपनाइज्ड मानवरहित ग्राउंड व्हीकल (यूजीवी) है। इसे विशेष तौर पर ऊंचाई और मुश्किल इलाकों में टेक्निकल निगरानी, पैरामीटर सुरक्षा और कॉम्बैट सपोर्ट के लिए डिजाइन किया है। यह दिन के साथ रात में भी कैमरा पेलोड और रिमोट वेपन स्टेशन इंटीग्रेशन को सपोर्ट करता है। इससे सुरक्षित दूरी से बिना किसी खतरे के मिलिट्री ऑपरेशन किए जा सकते हैं। इसका कॉम्पैक्ट डिजाइन रक्षा मिशन के लिए तेज डिप्लॉयमेंट, उच्च स्थिरता और मजबूत मोबिलिटी सुनिश्चित करता है। अखनूर में आतंकवादियों के खिलाफ इस्तेमाल हुआ जीना रोबोट अक्टूबर 2024 में जम्मू-कश्मीर के अखनूर में आतंकियों के साथ हुई मुठभेड़ में सेना की ओर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस मानव रहित रोबोट 'जीना' का इस्तेमाल किया गया था। वहां करीब 30 डिग्री की ढलान और घने जंगल में आतंकवादियों का पता लगाने और उन तक पहुंचने के लिए इनका इस्तेमाल किया था। इस आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन में भारी हथियारों से लैस तीनों आतंकवादी मारे गए थे। कृष्णा : आग लगने की जगह पानी-फोम फेंककर बुझाने में सक्षम यह एडवांस्ड एआई लैस फायर फाइटिंग यूजीवी है। इसे औद्योगिक और तेल व गैस, केमिकल प्लांट, आयुध और विस्फोटक क्षेत्रों जैसे उच्च जोखिम वाले आग वाले वातावरण के लिए बनाया गया है। यह ऑनबोर्ड कैमरों और सेंसर से रियल-टाइम निगरानी के साथ रिमोट फायर सप्रेशन को सक्षम बनाता है। आपातकालीन टीमों के लिए डिजाइन किया गया कृष्णा रोबोट खतरनाक स्थितियों में इंसान की जान के जोखिम को कम करते हुए अत्यधिक प्रेशर से पानी/फोम फेंकने में सक्षम है। अत्यधिक गर्मी या धुएं वाला वातावरण भी इसको नुकसान नहीं पहुंचा सकते। यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स की डायरेक्टर डॉ. नीलिमा मिश्रा ने बताया- यूजीवी डैगर 450 किलो तक वजन ले जाने में सक्षम है। इसे 30 किलोमीटर की रेंज में ऑटोनॉमस नेविगेशन से ऑपरेट किया जा सकता है। गोला-बारूद और अन्य लॉजिस्टिक्स को युद्ध क्षेत्र में ले जाने के लिए यह लगातार 10 घंटे तक ऑपरेशन करने की काबिलियत रखता है। भारत में डिजाइन, डेवलप हैं ये रोबोट क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स के प्रबंध निदेशक भुवनेश मिश्रा ने कहा- हमें गर्व है कि हमने यूजीवी डैगर को पूरी तरह से भारत में डिजाइन, डवलप और निर्मित किया है। इससे यह सही मायने में पूरी तरह से स्वदेशी रोबोट है। टीम ने 'मेक इन इंडिया' अभियान में योगदान देने की कोशिश की है। यह कदम भारतीय सेना के रक्षा रोबोटिक्स में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में माइलस्टोन है। उल्लेखनीय है कि क्लब फर्स्ट रोबोटिक्स भारत की रक्षा और अग्निशमन रोबोटिक्स इनोवेटर कंपनी है। इसके द्वारा राइजिंग राजस्थान में किए एमओयू के तहत देश की एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग यूनिट जयपुर में स्थापित की जा रही है।  

जैसलमेर टूरिस्ट्स के लिए नई व्यवस्था, एंट्री पर 50-200 रुपए यात्री कर देना होगा, 2 टोल नाके बनाए जाएंगे

 जैसलमेर  स्वर्ण नगरी जैसलमेर की खूबसूरती निहारने आने वाले पर्यटकों को अब शहर में प्रवेश के लिए 'यात्री कर' (Entry Tax) देना होगा। जैसलमेर नगर परिषद ने 22 साल के लंबे अंतराल के बाद फिर से पर्यटक वाहनों पर टैक्स लगाने का निर्णय लिया है। राज्य सरकार के स्वायत्त शासन विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है और गजट नोटिफिकेशन जारी होते ही इसे लागू कर दिया जाएगा। जैसलमेर एक छोटा शहर है, लेकिन पर्यटन सीजन (अक्टूबर से मार्च) के दौरान यहां लाखों सैलानी और हजारों वाहन पहुँचते हैं। इससे शहर की सफाई व्यवस्था, सड़कों के रखरखाव और ट्रैफिक प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। नगर परिषद के अनुसार, इस कर से मिलने वाले राजस्व का उपयोग शहर के विकास और पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए किया जाएगा। कहां लगेंगे टोल नाके और कितना होगा शुल्क? शहर में प्रवेश के मुख्य रास्तों पर दो टोल नाके बनाए जाएंगे। जोधपुर रोड, यहां से जयपुर, जोधपुर और बीकानेर की ओर से आने वाले पर्यटक वाहन प्रवेश करते हैं। बाड़मेर रोड : यहाँ से गुजरात और दक्षिण राजस्थान की ओर से आने वाले वाहनों का प्रवेश होता है। निर्धारित शुल्क : वाहनों की श्रेणी के अनुसार पर्यटकों को 50 रुपये से लेकर 200 रुपये तक की रसीद कटवानी होगी। किसे मिलेगी छूट और किस पर लगेगा टैक्स? स्थानीय निजी वाहन : जैसलमेर के स्थानीय निवासियों की निजी कारों/गाड़ियों को इस टैक्स से पूरी तरह छूट दी गई है। टैक्सी वाहन : जैसलमेर नंबर की लोकल टैक्सियों और बाहर से आने वाली टैक्सियों, दोनों को यह शुल्क देना होगा। यह टैक्स मुख्य रूप से कमर्शियल और पर्यटक वाहनों पर केंद्रित है। नगर परिषद का पक्ष : नगर परिषद आयुक्त लजपाल सिंह सोढा ने बताया कि पर्यटन सीजन में शहर पर बढ़ते आर्थिक भार को कम करने के लिए यह आवश्यक था। उन्होंने कहा:यात्री कर से सालाना लाखों रुपये का राजस्व मिलने की उम्मीद है। इस राशि का सही इस्तेमाल पर्यटन स्थलों की सार-संभाल, शहर की सफाई और विकास कार्यों में किया जाएगा। जैसलमेर में टूरिस्ट सीजन में सैलानियों की बम्पर आवक होती है। इसके चलते नगर परिषद ने शहर में प्रवेश करने वाले पर्यटक वाहनों पर यात्री कर लगाने का फैसला किया है। पर्यटन सीजन में बढ़ता दबाव बना वजह जैसलमेर एक छोटा शहर है, लेकिन अक्टूबर से मार्च के पर्यटन सीजन में यहां लाखों पर्यटक पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में वाहनों की आवाजाही से शहर की सड़कों पर दबाव बढ़ता है, जाम की स्थिति बनती है और प्रदूषण में भी इजाफा होता है। इन्हीं कारणों से अतिरिक्त बजट की जरूरत महसूस की गई। कहां कटानी होगी रसीद? नगर परिषद ने 2 प्रमुख रास्तों पर एंट्री पॉइंट बनाने का फैसला किया है। एक एंट्री गेट जोधपुर रोड पर बनेगा, जहां से जयपुर, जोधपुर और बीकानेर की ओर से आने वाले अधिकतर पर्यटक प्रवेश करते हैं। दूसरा एंट्री गेट बाड़मेर रोड पर बनाया जाएगा, जहां से गुजरात और दक्षिण राजस्थान की ओर से आने वाले वाहनों का दबाव रहता है। इन नाकों को पार करते समय पर्यटक वाहनों को निर्धारित शुल्क जमा कर रसीद लेनी होगी। स्थानीय निजी गाडियों को छूट, टैक्सी पर लगेगा टैक्स नगर परिषद ने साफ किया है कि स्थानीय निवासियों की निजी गाडियों पर यह यात्री कर लागू नहीं होगा। हालांकि, जैसलमेर नंबर की टैक्सी भी इस टैक्स के दायरे में आएगी। यानी शहर की स्थानीय टैक्सी और बाहर से आने वाली टैक्सी दोनों को एंट्री शुल्क देना होगा। यह टैक्स केवल पर्यटकों और कॉमर्शियल उपयोग में आने वाले वाहनों पर लागू रहेगा। जैसलमेर नगर परिषद को होगी कमाई इस पूरे प्रोजेक्ट से नगर परिषद को भारी राजस्व मिलने की उम्मीद है। नगरपरिषद कमिश्नर लजपाल सिंह सोढा ने बताया- यात्री कर से लाखों रुपए सालाना मिलने की उम्मीद है। इससे सीजन में बढ़ने वाले यात्री भार से शहर की सफाई पर व अन्य भार बढ़ जाता है जिसको लेकर हम उस पैसों का सही इस्तेमाल कर सकेंगे। उस पैसों का खर्च हम पर्यटन स्थलों की सार संभाल व विकास आदि पर कर सकेंगे।नगर परिषद जल्द ही इन नाकों का निर्माण शुरू करेगी और सीजन के चरम पर पहुंचने से पहले इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने भर्ती परीक्षाओं के OMR शीट के लिए की नई व्यवस्था का ऐलान

जयपुर  राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं के OMR शीट को लेकर घमासान मचा हुआ है। भर्ती परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने एक नया फैसला लिया है। नए फैसले के तहत अब राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की OMR शीट को ऑनलाइन अपलोड किया जाएगा। राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज के अनुसार चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ओएमआर शीट को ऑनलाइन अपलोड करने का फैसला लिया गया है। चपरासी भर्ती परीक्षा से इस नई व्यवस्था की शुरुआत की जाएगी। ओएमआर शीट में धांधली की मिलीं कई शिकायतें उल्लेखनीय है कि चयन बोर्ड के अफसरों और एक प्राइवेट फर्म के कर्मचारियों पर अभ्यर्थियों से पैसे लेकर ओएमआर शीट में नंबर बढ़ाने का आरोप है। ओएमआर शीट घोटाले के बाद अभ्यर्थियों की ओर से इस धांधली की कई शिकायतें मिलीं। शिकायतों पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड गंभीर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया है। जिसके बाद राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड के अध्यक्ष आलोक राज ने चयन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने का नया फैसला लिया।

राजस्थान पुलिस ने लिया कड़ा कदम, अपराधियों की फोटो मीडिया और सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने पर रोक

 जयपुर  राजस्थान पुलिस ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों की निजता और उनके मानवीय अधिकारों को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (अपराध शाखा), डॉ. हवा सिंह घुमरिया ने एक नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी करते हुए प्रदेश के सभी पुलिस कमिश्नर और जिला पुलिस अधीक्षकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि किसी भी अभियुक्त की फोटो या वीडियो अब सार्वजनिक नहीं करेंगे। यह निर्णय राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर द्वारा  दिए गए एक आदेश की अनुपालना में लिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमा के साथ जीने का अधिकार है। पुलिस के अनुसार, "अभियुक्त केवल आरोपित होता है, दोषी नहीं", इसलिए गिरफ्तारी के बाद उसकी निजता को भंग करना कानून सम्मत नहीं है। नए दिशा-निर्देशों की मुख्य बातें : सोशल मीडिया पर पाबंदी : पुलिस अब किसी भी आरोपी की फोटो या वीडियो अपने आधिकारिक या अनौपचारिक सोशल मीडिया हैंडल पर अपलोड नहीं कर सकेगी। मीडिया ट्रायल पर रोक : प्रेस ब्रीफिंग के दौरान आरोपी को अपमानजनक स्थिति में पेश नहीं किया जाएगा। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे ऐसी किसी भी गतिविधि को बढ़ावा न दें जिससे 'मीडिया ट्रायल' की स्थिति पैदा हो। मर्यादित शब्दावली : पुलिस ब्रीफिंग के दौरान अभियुक्तों के लिए उपयोग किए जाने वाले शब्दों में गरिमा और सावधानी बरतनी होगी। विशेष संवेदनशीलता : महिलाओं, बुजुर्गों और कमजोर वर्ग के आरोपितों के साथ व्यवहार के दौरान विशेष संवेदनशीलता रखने के निर्देश दिए गए हैं। सुरक्षित हिरासत और सभ्य व्यवहार SOP में यह भी कहा गया है कि अभियुक्त को बैठाने, ले जाने और हिरासत में रखने की व्यवस्था सुरक्षित और सभ्य होनी चाहिए। पुलिस अब किसी भी आरोपी को सार्वजनिक रूप से अपमानित या अपराधी की तरह प्रदर्शित नहीं कर पाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से पूरे राजस्थान में लागू कर दिया गया है। इसकी प्रतियां महानिदेशक पुलिस (DGP) सहित सभी महत्वपूर्ण विभागों को भेज दी गई हैं ताकि इन नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जा सके।