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राजस्थान: बाड़मेर में चल रही थी एमडी ड्रग फैक्टरी, करोड़ों की नशीली सामग्री जब्त

बाड़मेर बाड़मेर जिले में पुलिस ने नशे के कारोबार के खिलाफ एक और बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस थाना सदर क्षेत्र के केरली, आदर्श चवा इलाके में छापामारी कर अवैध एमडी ड्रग्स बनाने की फैक्टरी का पर्दाफाश किया गया। कार्रवाई के दौरान मौके से करीब 40 किलो एमडी ड्रग बरामद की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 80 करोड़ रुपये आंकी गई है।   भारी मात्रा में रसायन और उपकरण जब्त पुलिस ने फैक्टरी से भारी मात्रा में ड्रग्स बनाने में प्रयुक्त रसायन, मशीनें और अन्य उपकरण भी जब्त किए हैं। जब्त सामग्री से लगभग 50 करोड़ रुपये की अतिरिक्त एमडी ड्रग्स तैयार की जा सकती थी। इस पूरी सामग्री की कुल कीमत करीब 85 करोड़ रुपये बताई गई है, जिससे यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।   डीएसटी की सूचना पर की गई संयुक्त कार्रवाई एसपी नरेंद्र सिंह मीना ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि डीएसटी टीम को सूचना मिली थी कि सदर थाना क्षेत्र के आदर्श चवा इलाके में एक मकान में अवैध एमडी फैक्टरी संचालित हो रही है। सूचना के आधार पर डीएसटी और सदर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने भैराराम पुत्र हनुमानाराम जाट के मकान पर दबिश दी, जहां से अवैध मादक पदार्थ और निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद की गई।   मकान मालिक गिरफ्तार, मास्टरमाइंड फरार पुलिस ने मौके से मकान मालिक भैराराम पुत्र हनुमानाराम जाट निवासी केरली, आदर्श चवा को गिरफ्तार कर लिया है। इस फैक्ट्री का मास्टरमाइंड कुख्यात तस्कर मोटाराम पुत्र वीरमाराम जाट निवासी आदर्श चवा बताया गया है। उसके साथ दिनेश गिरी पुत्र अचलगिरी स्वामी निवासी रावतसर और एक अन्य फौजी को भी नामजद किया गया है, जो फिलहाल फरार हैं। पुलिस टीमें उनकी तलाश में जुटी हुई हैं।   बरामदगी और आगे की जांच एसपी ने बताया कि मौके से 39 किलो 777 ग्राम अवैध एमडी और 99 किलो 931 ग्राम केमिकल बरामद किए गए हैं। इसके अलावा कांच के बर्तन, वैक्यूम पंप, सेक्शन पाइप, डिजिटल थर्मामीटर, भट्टियां, मशीनें, प्लास्टिक टंकियां, इलेक्ट्रॉनिक कांटा और दो लग्जरी वाहन भी जब्त किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी एमडी तैयार करने के बाद मशीनों के पार्ट्स खोलकर अलग-अलग स्थानों पर छिपा देते थे। पुलिस ने थाना सदर में मामला दर्ज कर तस्करी नेटवर्क की गहन जांच शुरू कर दी है।

तापमान में तेज गिरावट के संकेत, अगले सप्ताह प्रदेश में ठंड और घना कोहरा—IMD की चेतावनी

जयपुर राजस्थान में वेस्टर्न डिस्टरबेंस के प्रभाव से उत्तरी हवाएं कमजोर पड़ गई हैं, जिससे प्रदेश के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पाली, करौली, उदयपुर, अजमेर सहित कई शहरों में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान बढ़ने से सुबह और शाम की सर्दी से लोगों को कुछ राहत मिली। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर के अनुसार, प्रदेश में 21 दिसंबर तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रहेगा और तापमान में हल्का उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा। हालांकि 22 और 23 दिसंबर को 10 जिलों में घने कोहरे और शीतलहर की संभावना को देखते हुए यलो अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 24 दिसंबर से तापमान में गिरावट आने के आसार हैं। शुक्रवार को दिन के समय अधिकांश जिलों में मौसम साफ रहा और तेज धूप निकलने से अधिकतम तापमान में मामूली बढ़ोतरी हुई। प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान बाड़मेर में 33.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटों में प्रदेश का सबसे ठंडा इलाका सीकर का फतेहपुर और सिरोही का माउंट आबू रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। अगले तीन दिन छाए रहेंगे बादल विक्षोभ का असर अगले 3 दिन रहने की संभावना है। मौसम विभाग का अनुमान है कि  22 दिसंबर तक पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों में बादल छाए रहेंगे। इसके बाद न्यूनतम तापमान में एक से तीन डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी होने की संभावना है। हालांकि, राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा।

बोर्ड छात्रों के लिए बड़ी खबर: 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 12 फरवरी से

अजमेर राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं का टाइम टेबल घोषित कर दिया है। 10वीं की परीक्षा 12 फरवरी से 28 फरवरी तक आयोजित होगी। वहीं, 12वीं की परीक्षा 12 फरवरी से 11 मार्च तक परीक्षा होगी। परीक्षा में कुल 19 लाख 86 हजार 422 परीक्षार्थी भाग लेंगे। बोर्ड सचिव गजेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि इन परीक्षाओं के दौरान करीब 6 अवकाश रहेंगे, जिसमें चार रविवार और दो अवकाश होली और धुलण्डी के रहेंगे। उन्होंने बताया कि परीक्षा के लिए 19 लाख 86 हजार 422 परीक्षार्थी पंजीकृत किए गए हैं। इनमें सेकेंडरी के 10 लाख 68 हजार 610, सीनियर सेकेंडरी के 9 लाख 5 हजार 872 परीक्षार्थी शामिल हैं। वरिष्ठ उपाध्याय के 4123 और प्रवेशिका के 7817 परीक्षार्थी हैं। कुल 6193 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं।   सचिव ने बताया कि सुरक्षा को लेकर पुख्ता बंदोबस्त किए गए हैं। प्रश्न पत्र पुलिस थानों और चौकियों में रखे जाएंगे। सेंटर्स पर नकल न हो, इसे लेकर सीसीटीवी से निगरानी रखी जाएगी। साथ ही वीडियोग्राफी भी होगी। बोर्ड ने संवेदनशील और अति संवेदनशील परीक्षा केन्द्र चिन्हित किए हैं। इनमें विशेष तौर पर वीडियोग्राफी की जाएगी। परिणाम जल्द घोषित करने के प्रयास किए जाएंगे। जयपुर में हाई पावर कमेटी की बैठक आयोजित राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षाओं के सफल आयोजन के लिए राज्य स्तरीय उच्चाधिकार प्राप्त परीक्षा समिति की बैठक शासन सचिव स्कूल शिक्षा कृष्ण कुणाल की अध्यक्षता में आयोजित की गई। शिक्षा संकुल में आयोजित बैठक में गृह विभाग, शिक्षा विभाग एवं सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित प्रमुख बिन्दुओं, कानून व्यवस्था, प्रश्न-पत्रों के सुरक्षित वितरण व उनकी परीक्षा केन्द्रों पर सुरक्षा, जिला स्तरीय परीक्षा संचालन समितियों का गठन व परीक्षा संचालन के लिए रेस्मा कानून आदि बिन्दुओं पर चर्चा की गई। इसके साथ ही अति संवेदनशील परीक्षा केन्द्रों पर अनुचित साधनों की रोकथाम के लिए विशेष व्यवस्थाओं पर बात की गई। परीक्षाओं को पारदर्शी बनाए रखने के लिए प्रश्न पत्र केंद्रों की पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने व एकल केंद्र बनाने से यथासंभव बचने के लिए कहा। साथ ही उन्होंने गत वर्षों के परिणाम के आंकड़ों की समीक्षा कर इसके आधार पर केंद्रों की सुरक्षा रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने आगामी सत्र एक अप्रैल से शुरू किए जाने के मद्देनजर इस बार दसवीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम पहले जारी करने के निर्देश दिए, जिससे विद्यालयों में 11वीं कक्षा की प्रवेश प्रक्रिया प्रभावित न हो।   यह रहेगा टाइम टेबल माध्यमिक, माध्यमिक व्यावसायिक एवं प्रवेशिका परीक्षा वर्ष 2026- गुरुवार 12 फरवरी को अंग्रेजी, शनिवार 14 फरवरी को ऑटोमोटिव/सौंदर्य एवं स्वास्थ्य/स्वास्थ्य देखभाल/सूचना प्रौद्योगिकी व सूचना प्रौद्योगिकी की समर्पित सेवाएं (आईटी एण्ड आईटीज), फुटकर बिकी/ट्यूरिज्म एण्ड हॉस्पिटैलिटी/निजी सुरक्षा/अपैरल मेड-अप्स एंड होम फर्निशिंग/इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड हार्डवेयर/कृषि/प्लम्बर/टेलिकॉम/बैंकिंग फाईनेंशियल सर्विस एण्ड इन्श्योरेंस/कन्स्ट्रक्शन/फूड प्रोसेसिंग, मंगलवार 17 फरवरी को सामाजिक विज्ञान, गुरुवार 19 फरवरी को हिंदी, शनिवार 21 फरवरी को विज्ञान, मंगलवार 24 फरवरी को गणित, गुरुवार 26 फरवरी को संस्कृत (प्रथम प्रश्न पत्र), शुक्रवार 27 फरवरी को तृतीय भाषा संस्कृत/उर्दू/गुजराती/सिन्धी/पंजाबी, शनिवार 28 फरवरी को संस्कृत (द्वितीय प्रश्न पत्र) की परीक्षा होगी।   उच्च माध्यमिक, उच्च माध्यमिक व्यावसायिक एवं वरिष्ठ उपाध्याय परीक्षा वर्ष 2026- गुरुवार 12 फरवरी को मनोविज्ञान, शुक्रवार 13 फरवरी को अंग्रेजी अनिवार्य, शनिवार 14 फरवरी को लोक प्रशासन, सोमवार 16 फरवरी को भूगोल/लेखाशास्त्र/भौतिक विज्ञान, मंगलवार 17 फरवरी को कम्प्यूटर विज्ञान/इन्फोरमेटिक्स प्रैक्टिसेस, बुधवार 18 फरवरी को संस्कृत साहित्य/संस्कृत वाङ्मय, गुरुवार 19 फरवरी को पर्यावरण विज्ञान, शुक्रवार 20 फरवरी को हिंदी अनिवार्य, शनिवार 21 फरवरी को दर्शन शास्त्र/सामान्य विज्ञान, सोमवार 23 फरवरी को राजनीति विज्ञान/भूविज्ञान/कृषि विज्ञान, मंगलवार 24 फरवरी को चित्रकला, बुधवार 25 फरवरी को गणित, गुरुवार 26 फरवरी को अंग्रेजी साहित्य/टंकण लिपि (हिन्दी), शुक्रवार 27 फरवरी को ऋग्वेद/शुक्ल यजुर्वेद/कृष्ण यजुर्वेद/सामवेद/अथर्ववेद/न्याय दर्शन/वेदान्त दर्शन/मीमांसा दर्शन/जैन दर्शन/निम्बार्क दर्शन/वल्लम दर्शन/सामान्य दर्शन/रामानन्द दर्शन/व्याकरण शास्त्र/साहित्य शास्त्र/पुराणेतिहास/धर्मशास्त्र/ज्योतिष शास्त्र/सामुद्रिक शास्त्र/वास्तुविज्ञान/पीरोहित्य शास्त्र, शनिवार 28 फरवरी को अर्थशास्त्र/शीप लिपि-हिन्दी/शीघ्र लिपि अंग्रेजी/कृषि जीव विज्ञान/जीव विज्ञान, बुधवार 4 मार्च को इतिहास/व्यवसाय अध्ययन/कृषि रसायन विज्ञान/रसायन विज्ञान, गुरुवार 5 मार्च को कंठसंगीत/नृत्य कथक/वाद्य संगीत (तबला), (पखावज), (सितार), (सरोद), (वायलिन). (दिलरुबा), (बांसुरी), (गिटार), शुक्रवार 6 मार्च को ऑटोमोटिव/सौदर्य एवं स्वास्थ्य/स्वास्थ्य देखभाल/सूचना प्रौद्योगिकी व सूचना प्रौद्योगिकी की समर्पित सेवाएं (आईटी एण्ड आईटीज)/फुटकर बिकी/ट्यूरिज्म एण्ड हॉस्पिटैलिटी (टेबल एण्ड ट्यूरिज्म)/अपैरल मेड-अप्स एण्ड होम फर्निशिंग/इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड हार्डवेयर (इलैक्टि्रकल एण्ड इलेक्ट्रोनिक्स)/कृषि (सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली)/प्लम्बर/टेलीकॉम/बैंकिंग फाईनेशियल सर्विस एण्ड इन्श्योरेंस/कन्स्ट्रक्शन/फूड प्रोसेसिंग, शनिवार 7 मार्च को समाजशास्त्र, सोमवार 9 मार्च को गृह विज्ञान, मंगलवार 10 मार्च को हिन्दी साहित्य/उर्दू साहित्य/सिन्धी साहित्य/गुजराती साहित्य/पंजाबी साहित्य/राजस्थानी साहित्य/फारसी/प्राकृत भाषा/टंकण लिपि (अंग्रेजी), बुधवार 11 मार्च को शारीरिक शिक्षा की परीक्षा होगी।   माध्यमिक, माध्यमिक व्यावसायिक एवं प्रवेशिका मूक बधिर (CWSN) परीक्षा वर्ष 2026- गुरुवार 12 फरवरी को अंग्रेजी, शनिवार 14 फरवरी को ऑटोमोटिव/सौंदर्य एवं स्वास्थ्य/स्वास्थ्य देखभाल/सूचना प्रौद्योगिकी व सूचना प्रौद्योगिकी की समर्पित सेवाएं (आईटी एण्ड आईटीज), फुटकर बिक्री/ट्यूरिज्म एण्ड हॉस्पिटैलिटी/निजी सुरक्षा/अपैरल मेड-अप्स एण्ड होम फर्निशिंग/इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड हार्डवेयर/कृषि/प्लम्बर/टेलीकॉम/बैंकिंग फाईनेंशियल सर्विस एण्ड इन्श्योरेंस/कन्स्ट्रक्शन/फूड प्रोसेसिंग, मंगलवार 17 फरवरी को सामाजिक विज्ञान, गुरुवार 19 फरवरी को हिन्दी अनिवार्य, शनिवार 21 फरवरी को विज्ञान, मंगलवार 24 फरवरी को गणित की परीक्षा होगी।   उच्च माध्यमिक, उच्च माध्यमिक व्यावसायिक मूक बधिर (CWSN) परीक्षा वर्ष 2026- शुक्रवार 13 फरवरी को अंग्रेजी अनिवार्य, शनिवार 14 फरवरी को लोक प्रशासन, सोमवार 16 फरवरी को भूगोल, शुक्रवार 20 फरवरी को हिन्दी अनिवार्य, सोमवार 23 फरवरी को राजनीतिक विज्ञान, मंगलवार 24 फरवरी को चित्रकला, बुधवार 4 मार्च को इतिहास, शुक्रवार 6 मार्च को ऑटोमोटिव/सौंदर्य एवं स्वास्थ्य/स्वास्थ्य देखभाल/सूचना प्रौद्योगिकी व सूचना प्रौद्योगिकी की समर्पित सेवाएं (आईटी एण्ड आईटीज)/फुटकर बिक्री/ट्यूरिज्म एण्ड हॉस्पिटैलिटी (ट्रैवल एण्ड ट्यूरिज्म)/अपैरल मेड-अप्स एण्ड होम फर्निशिंग/इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड हार्डवेयर (इलैक्टि्रकल एण्ड इलेक्ट्रोनिक्स)/कृषि (सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली)/प्लम्बर/टेलीकॉम/बैंकिंग फाईनेंशियल सर्विस एण्ड इंश्योरेन्स/कन्स्ट्रक्शन/फूड प्रोसेसिंग, शनिवार 7 मार्च को समाज शास्त्र, सोमवार 9 मार्च को गृह विज्ञान, मंगलवार 10 मार्च को हिन्दी साहित्य की परीक्षा होगी।

7 जिलों से गुजरेगा राजस्थान का नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे, विकास की नई राह

जयपुर  राजस्थान में सड़क बुनियादी ढांचे (Road Infrastructure) को एक नई और आधुनिक पहचान मिलने जा रही है. प्रदेश सरकार के पिछले बजट में घोषित किए गए 9 नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में से दो सबसे महत्वपूर्ण परियोजनाओं को अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) को सौंप दिया गया है.राजस्थान को कनेक्टिविटी के क्षेत्र में बड़ी सौगात मिलने जा रही है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को जामनगर-अमृतसर एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जाएगा, जो जयपुर के दक्षिणी हिस्से से होकर गुजरेगा. इससे पचपदरा रिफाइनरी की दूरी करीब 100 किलोमीटर कम होगी और यात्रा समय 2-3 घंटे घटेगा. यह कॉरिडोर 7 जिलों को जोड़ेगा और औद्योगिक विकास को गति देगा. राजस्थान को कनेक्टिविटी के क्षेत्र में एक बड़ी सौगात मिलने वाली है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को बालोतरा से गुजर रहे जामनगर-अमृतसर एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए एक नया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनेगा। यह नया कॉरिडोर जयपुर शहर के बिल्कुल करीब से गुजरेगा, जिससे पिंकसिटी के दक्षिणी इलाकों में विकास को नई रफ्तार मिलेगी. इस प्रोजेक्ट से पचपदरा रिफाइनरी तक की दूरी करीब 100 किलोमीटर कम हो जाएगी और यात्रा का समय 2 से 3 घंटे बच जाएगा. नया एक्सप्रेसवे दौसा-लालसोट एक्सप्रेसवे के इंटरचेंज पॉइंट अरण्य कलां से शुरू होगा. यहां से यह ग्रीन कॉरिडोर के रूप में जयपुर के दक्षिणी हिस्से से होकर गुजरेगा. वर्तमान में तय अलाइनमेंट के अनुसार, जयपुर रिंग रोड से इसकी दूरी टोंक रोड पर मात्र 9-10 किलोमीटर रहेगी. यह एक्सप्रेसवे जयपुर, टोंक, अजमेर, ब्यावर, जोधपुर, बालोतरा और बाड़मेर सहित कुल 7 जिलों को कनेक्ट करेगा. अंत में यह बालोतरा के पटाउ खुर्द के पास जामनगर-अमृतसर एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। कुल लंबाई करीब 400 किलोमीटर होगी. जयपुर जिले में यह एक्सप्रेसवे कोटखावदा, चाकसू, वाटिका, तूंगा, रेनवाल मांझी, फागी, मौजमाबाद, दूदू और साखून सहित 200 से अधिक गांवों से गुजरेगा. जिले का करीब 110 किलोमीटर का दायरा कवर होगा. इससे जयपुर-टोंक और जयपुर-अजमेर हाईवे भी सीधे कनेक्ट हो जाएंगे. इसके अलावा यह पुष्कर-मेड़ता, एनएच-25 (बाड़मेर-ब्यावर) और एनएच-62 (पिंडवाड़ा) हाईवे से जुड़ेगा.वर्तमान में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से बालोतरा-पचपदरा जाने वाले वाहनों को जयपुर, अजमेर, ब्यावर और जोधपुर से गुजरते हुए अलग-अलग व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्गों का उपयोग करना पड़ता है, जिसमें 10 घंटे से अधिक समय लगता है. नया ग्रीन कॉरिडोर बनने से दूरी 100 किलोमीटर तक कम हो जाएगी और समय की बचत होगी. यह विशेष रूप से पचपदरा रिफाइनरी और बारमेड़ क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए महत्वपूर्ण होगा. एनएचएआई इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार कर रहा है. मंजूरी मिलते ही जमीन अधिग्रहण का नोटिफिकेशन जारी किया जाएगा. जिलेवार जमीन अधिग्रहण की जिम्मेदारी संबंधित कलेक्टरों की होगी. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यह प्रोजेक्ट राजस्थान के उन प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे में शामिल है, जिन्हें तेजी से पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. यह नया कॉरिडोर न केवल यातायात को सुगम बनाएगा बल्कि जयपुर के दक्षिणी इलाकों में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन को बढ़ावा देगा. चाकसू, कोटखावदा और फागी जैसे क्षेत्रों में संपत्ति की कीमतों में उछाल की उम्मीद है. साथ ही, यह दिल्ली-मुंबई और जामनगर-अमृतसर जैसे प्रमुख आर्थिक कॉरिडोर को जोड़कर उत्तर भारत से पश्चिमी बंदरगाहों तक माल परिवहन को तेज करेगा. स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साह है. चाकसू के एक व्यापारी ने कहा कि यह एक्सप्रेसवे हमारे क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा जयपुर से जोधपुर और बारमेड़ का सफर आसान हो जाएगा. इसी तरह, कोटखावदा के किसान नेता ने बताया कि इससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. राजस्थान सरकार और एनएचएआई के अधिकारी इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता दे रहे हैं. मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की हालिया समीक्षा बैठक में ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को तेज करने के निर्देश दिए गए थे. लोगों का मानना है कि यह कॉरिडोर राजस्थान को देश के प्रमुख आर्थिक गलियारों से जोड़कर राज्य की जीडीपी में योगदान बढ़ाएगा. इस प्रोजेक्ट से जुड़े गांवों में सर्वे का काम शुरू हो चुका है. प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की व्यवस्था की जा रही है. पर्यावरण संरक्षण के लिए ग्रीन कॉरिडोर के रूप में डिजाइन किया गया है, जिसमें वन्यजीव क्रॉसिंग और पेड़ लगाने की योजना शामिल है.यह नया एक्सप्रेसवे जयपुर और पूरे शेखावाटी-मारवाड़ क्षेत्र के लिए विकास की नई इबारत लिखेगा. दिल्ली से गुजरात और पंजाब तक की कनेक्टिविटी मजबूत होने से व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए द्वार खुलेंगे.

अरावली पर मंडराते खतरे पर सियासी पहल, विधायक भाटी ने पीएम से की नीति बदलने की मांग

बाड़मेर अरावली पर्वतशृंखला के संरक्षण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच शिव विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक विस्तृत पत्र लिखकर सुप्रीम कोर्ट की हालिया व्याख्या के आधार पर अपनाई जा रही 100 मीटर ऊंचाई संबंधी प्रशासनिक नीति पर पुनर्विचार की मांग की है। विधायक ने इसे केवल कानूनी व्याख्या का विषय नहीं, बल्कि उत्तर भारत के पर्यावरणीय भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न बताया है।   अरावली का ऐतिहासिक और भौगोलिक महत्व पत्र में विधायक भाटी ने उल्लेख किया कि अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक है, जिसकी आयु लगभग 2.5 अरब वर्ष मानी जाती है। लगभग 692 किलोमीटर लंबी यह पर्वतमाला राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरती है, जिसमें करीब 80 प्रतिशत हिस्सा राजस्थान में स्थित है और यह राज्य के 15 जिलों को आच्छादित करती है। उन्होंने अरावली को राजस्थान की लाइफलाइन बताते हुए इसे मरुस्थलीकरण के विरुद्ध प्राकृतिक सुरक्षा कवच बताया।   100 मीटर व्याख्या से संरक्षण पर खतरे की आशंका विधायक भाटी ने चिंता जताई कि 100 मीटर से कम ऊंचाई वाली पहाड़ियों को पहाड़ न मानने की प्रवृत्ति से अरावली का बड़ा हिस्सा कानूनी संरक्षण से बाहर हो सकता है। उन्होंने फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आंकड़ों का हवाला देते हुए लिखा कि राजस्थान की 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 ही 100 मीटर से अधिक ऊंची हैं। इस स्थिति में नई व्याख्या लागू होने पर अरावली की लगभग 90 प्रतिशत पहाड़ियां संरक्षण से वंचित हो सकती हैं, जिससे खनन और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों का खतरा बढ़ेगा।   जल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन में भूमिका पत्र में अरावली की पारिस्थितिक भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा की गई है। विधायक ने लिखा कि अरावली की चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर भूमि में समाहित करने में सहायक है, जिससे प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष लगभग 20 लाख लीटर भूजल का पुनर्भरण होता है। उन्होंने आगाह किया कि अरावली के कमजोर होने से पश्चिमी राजस्थान में जल संकट स्थायी रूप ले सकता है। जैव विविधता और मानव जीवन से जुड़ाव विधायक भाटी ने यह भी रेखांकित किया कि अरावली केवल भू-आकृतिक संरचना नहीं है, बल्कि यह 300 से अधिक वन्य जीवों और पक्षियों का आवास है। यह लाखों पशुपालकों के लिए चारागाह, बनास, लूणी, साबरमती और बाणगंगा जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। साथ ही अरावली मानसूनी हवाओं को रोकने, लू की तीव्रता कम करने और तापमान संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र के लिए इसे प्राकृतिक ग्रीन बैरियर बताया गया है।   नीतिगत विरोधाभास पर उठाए सवाल पत्र में राज्य सरकार की नीतियों की ओर भी ध्यान दिलाया गया है। विधायक ने लिखा कि एक ओर बजट 2025-26 में 250 करोड़ रुपये की हरित अरावली विकास परियोजना की घोषणा की जाती है, वहीं दूसरी ओर ऐसी व्याख्याएं सामने आती हैं जो अरावली को कमजोर कर सकती हैं। इसे उन्होंने विकास और संरक्षण के बीच विरोधाभास बताया। प्रधानमंत्री से विधायक भाटी ने चार प्रमुख मांगें रखी हैं 1. अरावली पर्वतमाला की परिभाषा केवल ऊंचाई के आधार पर नहीं, बल्कि उसके पारिस्थितिक और भूवैज्ञानिक महत्व के आधार पर तय की जाए। 2. 100 मीटर ऊंचाई संबंधी व्याख्या पर पुनर्विचार कर अरावली की सभी पहाड़ियों को संरक्षण प्रदान किया जाए। 3. अरावली क्षेत्र में खनन और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण लगाया जाए। 4. ‘हरित अरावली विकास परियोजना’ को केवल घोषणाओं तक सीमित न रखते हुए जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।   प्रधानमंत्री से संरक्षण सुनिश्चित करने की अपील अपने पत्र के अंत में विधायक रविन्द्र सिंह भाटी ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि अरावली पर्वतमाला की परिभाषा केवल ऊंचाई के आधार पर नहीं, बल्कि उसके पारिस्थितिक और भूवैज्ञानिक महत्व को ध्यान में रखकर तय की जाए। उन्होंने कहा कि अरावली पर हो रहा आक्रमण विकास नहीं, बल्कि विनाश की ओर ले जाने वाला कदम है और प्रकृति के साथ अन्याय का प्रभाव अंततः समाज पर ही पड़ता है।

स्टिंग ऑपरेशन पर बोले विधायक भाटी— निष्पक्ष जांच से ही सामने आएंगे तथ्य

बाड़मेर शिव विधायक रवींद्र सिंह भाटी ने तीन विधायकों के स्टिंग ऑपरेशन को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह मामला गंभीर है और इसकी निष्पक्ष व गहन जांच आवश्यक है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।   सदाचार समिति और फॉरेंसिक जांच की मांग रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि इस प्रकरण की जांच सदाचार समिति की बैठक में होनी चाहिए। उन्होंने यह भी जोर दिया कि फॉरेंसिक जांच के माध्यम से तथ्यों की पुष्टि की जाए, जिससे किसी भी तरह की शंका की गुंजाइश न रहे।   विधायक निधि को बताया जनता का पैसा भाटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विधायक निधि जनता का पैसा है, किसी व्यक्ति का निजी धन नहीं। जनता ने विधायकों को इस राशि की रखवाली के लिए चुना है और यह टैक्सपेयर्स की गाढ़ी कमाई है, जिसकी हर एक पाई जनता के हित में खर्च होनी चाहिए।   सिस्टम पर भरोसा, दोषियों को सजा की उम्मीद उन्होंने कहा कि उन्हें सिस्टम पर पूरा भरोसा है और जांच के बाद दोषियों को सजा मिलेगी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने यह भी कहा कि यदि कभी सिस्टम ही सिस्टम की भेंट चढ़ जाए, तो मीडिया और उनके जैसे विधायक सच्चाई को सामने लाने का काम करेंगे।   विधायक निधि को लेकर स्पष्ट रुख अमर उजाला के एक अन्य सवाल पर रवींद्र सिंह भाटी ने कहा कि यदि विधायकों को पैसा कमाना है तो वे व्यापार करें, इसमें कोई रोक नहीं है, लेकिन विधायक निधि से छेड़छाड़ करना जनता के साथ सीधा धोखा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यक्ति ईमानदार और मेहनती होता है, उसे चुनाव जीतने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती। राजनीति में साफ-सुथरी छवि और जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी पूंजी है। किसानों के धरने पर क्या बोले भाटी? किसानों के मुद्दे पर भी रविंद्र सिंह भाटी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई यों ही धरने पर नहीं बैठ जाता है। यूरिया मांग रहे हैं, उनका हक है। बिजली मांग रहे हैं, उनका हक है। पानी मांग रहे हैं, उनका हक है। वहीं, राज्य सरकार के दो साल की उपलब्धियों पर रविंद्र सिंह भाटी ने कहा कि विकास कहां है? आपको दिख जाए तो हमें भी बताएं।

किराए के मकान में चल रहा था धर्मांतरण का खेल, विदेशी नागरिकों सहित छह गिरफ्तार

श्रीगंगानगर राजस्थान के बॉर्डर एरिया श्रीकरणपुर में अवैध धर्मांतरण का बड़ा मामला सामने आया है। वार्ड नंबर 22 की लक्कड़ मंडी में श्री गुरुनानक दरबार गुरुद्वारे के पास एक किराए के नवनिर्मित मकान में गुपचुप तरीके से चर्च चलाया जा रहा था। यहां जर्मनी के दंपति सहित कुछ लोग पैसे और अन्य लालच देकर गरीबों को ईसाई धर्म अपनाने के लिए भ्रमित कर रहे थे। गुरुवार देर रात विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंच गए और हंगामा शुरू हो गया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए जर्मनी के स्वैन बॉज बेट जलेर और उनकी पत्नी संदरा, कर्नाटक के संतोष वर्गीसी, केरल के मैथ्यू, बलजिंदर सिंह खोसा और राजेश कंबोज उर्फ पोपी को हिरासत में ले लिया। देर रात तक चर्च के बाहर और थाने के सामने हिंदू व सिख संगठनों के सैकड़ों लोग जमा हो गए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया। सीओ पुष्पेंद्र सिंह ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और लोगों से पूछताछ की। हिरासत में 6 लोग, विदेशी फंडिंग पर शक पुलिस के अनुसार, श्रीकरणपुर भारत-पाकिस्तान सीमा से सटा संवेदनशील क्षेत्र है। यहां विदेशी नागरिकों की आवाजाही पर सख्त प्रतिबंध हैं। जर्मन दंपति ने बिना अनुमति के यहां प्रवेश किया और गुप्त रूप से धर्मांतरण का कार्यक्रम चला रहे थे। इससे धार्मिक भावनाएं भड़कने का खतरा था। हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ जारी है। विश्व हिंदू परिषद ने अवैध धर्मांतरण का आरोप लगाते हुए थाने में परिवाद दिया। विरोध करने वालों में श्याम सिंह राजपुरोहित, चिराग, अशोक जोशी, गुंटूर गुंबर सहित कई कार्यकर्ता शामिल थे। हैरानी की बात यह है कि यह मकान जोगेंद्र सिंह पेटीवाले के परिवार का है, जो किराए पर दिया गया था। गली के लोगों को भी इसकी भनक नहीं थी। कुछ दिनों से संदिग्ध लोगों का आना-जाना बढ़ गया था, जिनमें विदेशी भी शामिल थे। सीआईडी के खुफिया विभाग को भी सूचना मिली और वे मौके पर पहुंचे। बॉर्डर एरिया में 3 महीने में 4 मामले राजस्थान में नए धर्मांतरण विरोधी कानून के बाद श्रीगंगानगर जिले में कई मामले सामने आ चुके हैं। पिछले तीन महीनों में बॉर्डर एरिया से ही चार मामले दर्ज हुए हैं। 16 सितंबर: अनूपगढ़ में पादरी पोलस बारजो, विनोद कुमार और उसके बेटे आर्यन पर केस। 6 अक्तूबर: हिंदूमलकोट में पादरी बग्गू सिंह और उसके बेटे अमनदीप पर मामला। 11 अक्तूबर: अनूपगढ़ में सास, पत्नी के बाई और दो पादरियों पर जबरन धर्मांतरण की कोशिश। अब श्रीकरणपुर में जर्मन दंपति वाला मामला। गरीब लोग बन रहे सॉफ्ट टारगेट विशेषज्ञों का मानना है कि ईसाई मिशनरियां एनजीओ के जरिए विदेशी फंडिंग से गरीबों को आर्थिक लालच देकर धर्म बदलवा रही हैं। बॉर्डर एरिया को इसलिए टारगेट किया जा रहा है ताकि भविष्य में इन लोगों से गोपनीय जानकारी जुटाई जा सके और भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो। ऐसी गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हैं। देर रात तक माहौल गर्म रहा। पुलिस पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

अरावली की ढलान पर खनन को हरी झंडी! SC के फैसले से पर्यावरण पर मंडराया बड़ा खतरा

अरावली देश में पिछले कुछ वर्षों से खनन के जरिए पहाड़ों को काटने का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले ने पर्यावरण से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने खनन से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाया, जिसके तहत 100 मीटर तक ऊंचाई वाले पहाड़ों पर खनन की अनुमति दी गई है। यह फैसला खासतौर पर राजस्थान और अरावली पर्वतमाला के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह फैसला पूरी तरह लागू हुआ, तो राजस्थान में रेगिस्तान का क्षेत्र बढ़ सकता है। अरावली पर्वतमाला पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला अरावली पर्वतमाला को राजस्थान की लाइफ लाइन कहा जाता है, लेकिन अब यह लाइफ लाइन खतरे में नजर आ रही है। पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट के आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि अरावली पर्वत का क्षेत्र तेजी से सिकुड़ रहा है। कोर्ट के अनुसार, अरावली का लगभग 90% हिस्सा अब 100 मीटर से कम ऊंचाई का रह गया है, 100 मीटर से कम ऊंचाई वाले क्षेत्र को अब पर्वत नहीं, सिर्फ भूभाग माना जाएगा,  इसका सीधा मतलब यह है कि इन इलाकों में खनन के रास्ते खुल सकते हैं। क्या राजस्थान में बढ़ेगा रेगिस्तान? पर्यावरण मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया कि अरावली पर्वतमाला अब पहले जैसी ऊंची नहीं रही। अरावली मरुस्थल के विस्तार को रोकने में प्राकृतिक दीवार का काम करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अरावली में खनन बढ़ा, तो: मरुस्थल का विस्तार तेजी से होगा, मानसून की हवाएं कमजोर पड़ेंगी, प्रदेश में बारिश कम होगी। अरावली की ऊंचाई घटने से मानसून सिस्टम भी प्रभावित हो रहा है, जिससे राजस्थान के मौसम में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। राजस्थान की पहचान है अरावली पर्वतमाला अरावली पर्वतमाला को दुनिया की सबसे पुरानी वलित पर्वतमालाओं में से एक माना जाता है। अरावली की कुल लंबाई: 692 किलोमीटर राजस्थान में हिस्सा: करीब 550 किलोमीटर सबसे ऊंची चोटी: गुरु शिखर (माउंट आबू) – ऊंचाई 1727 मीटर अरावली तीन राज्यों—दिल्ली, राजस्थान और गुजरात—से होकर गुजरती है। राजस्थान की अधिकांश नदियों का उद्गम भी अरावली पर्वतमाला से ही होता है, इसलिए इसे प्रदेश की लाइफ लाइन कहा जाता है। अरावली कमजोर होने से क्या होंगे नुकसान अगर अरावली पर्वतमाला का क्षरण इसी तरह जारी रहा, तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं: राजस्थान में मरुस्थल का तेजी से विस्तार गर्म हवाओं का असर और बढ़ेगा बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसून कमजोर पड़ेगा भूकंप के झटकों का असर बढ़ सकता है अरावली से निकलने वाली नदियां सूख सकती हैं खेती और फसलों पर बुरा असर पड़ेगा प्रदेश की जलवायु और भौगोलिक संतुलन बिगड़ जाएगा बारिश का सिस्टम हो रहा है प्रभावित पर्यावरण विशेषज्ञ और राजस्थान विश्वविद्यालय की भूगोल विभाग की वरिष्ठ प्रोफेसर के अनुसार, अरावली की ऊंचाई कम होने से राजस्थान का वर्षा तंत्र बिगड़ रहा है। पहले मानसून की हवाएं अरावली से टकराकर पूर्वी राजस्थान में बारिश करती थीं, लेकिन अब अरावली कमजोर होने के कारण हवाएं पश्चिमी राजस्थान की ओर निकल जा रही हैं। इससे पूरे प्रदेश का वर्षा संतुलन गड़बड़ा रहा है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है। कैसे शुरू हुआ अरावली का क्षरण अरावली पर्वतमाला के क्षरण की शुरुआत 1990 के दशक में हुई। इसके मुख्य कारण बताए जा रहे हैं: तेजी से शहरीकरण दिल्ली और राजस्थान में बड़े निर्माण कार्य पत्थर और खनिजों के लिए अंधाधुंध खनन पेड़ों की कटाई स्थिति बिगड़ने पर 2002 में सुप्रीम कोर्ट ने अरावली में अवैध खनन पर रोक लगाई थी, लेकिन अब नए फैसले के बाद एक बार फिर पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ गई है।  

उच्च शिक्षा को नई उड़ान, कोटा के IIIT में आ रहे AI और अत्याधुनिक टेक्नोलॉजी कोर्स

कोटा शिक्षा नगरी के रूप में देशभर में पहचान बना चुके कोटा को अब उच्च शिक्षा और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नई उड़ान मिलने जा रही है. ट्रिपल आईटी कोटा (IIIT Kota) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सहित कई अत्याधुनिक और भविष्य उन्मुख पाठ्यक्रम शुरू करने की तैयारी तेज हो गई है. इसे लेकर केंद्र सरकार स्तर पर गंभीर मंथन किया गया है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के बीच संसद भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में कोटा-बूंदी क्षेत्र में उच्च शिक्षा और स्कूली शिक्षा के समग्र विकास पर विस्तृत चर्चा की गई. बैठक के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने एक विशेष समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं, जो एक माह के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि कोटा देश का प्रमुख शैक्षणिक केंद्र है, जहां हर वर्ष लगभग डेढ़ लाख छात्र आईआईटी और मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते हैं. सड़क और रेल कनेक्टिविटी के साथ आने वाले समय में एयर कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी. ऐसे में ट्रिपल आईटी कोटा को और सशक्त बनाना समय की मांग है और इसे आईआईटी की तर्ज पर विकसित किया जाना चाहिए. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया कि आगामी 10 वर्षों में ट्रिपल आईटी कोटा में विद्यार्थियों की क्षमता 25 हजार तक बढ़ाने की योजना है. संस्थान में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की जाएगी और नए, समसामयिक व रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रम शुरू किए जाएंगे. बैठक में पीएमश्री विद्यालयों की संख्या बढ़ाने और राजस्थान के लिए शिक्षा बजट में केंद्रीय सहायता बढ़ाने जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ. ट्रिपल आईटी कोटा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी, वैश्विक रोजगार बाजार की मांग के अनुरूप फ्यूचरिस्टिक कोर्स, एआई सेंटर, पंप स्टोरेज और एटॉमिक स्टडीज जैसे विभाग शुरू करने का प्रस्ताव है. चंबल नदी क्षेत्र की प्राकृतिक समृद्धि और रावतभाटा में परमाणु ऊर्जा संयंत्र के चलते कोटा तकनीकी और ऊर्जा आधारित शिक्षा के लिए अनुकूल माना जा रहा है. इसके साथ ही लोकसभा अध्यक्ष ने कोटा-बूंदी क्षेत्र में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने पर भी जोर दिया. उन्होंने ‘नो योर कॉन्स्टिट्यूशन’ कार्यक्रम को स्कूलों में व्यापक रूप से लागू करने की बात कही, ताकि विद्यार्थी संविधान की मूल भावना और मूल्यों से परिचित हो सकें. बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, ट्रिपल आईटी कोटा के निदेशक सहित कई प्रमुख अधिकारी उपस्थित रहे.

किसानों पर ‘सेम’ की दोहरी मार, राजस्थान की 2 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि प्रभावित

जयपुर राजस्थान में सूखे से ज्यादा सेम की समस्या खेती को बर्बाद कर रही है।  मिट्टी की लवणता यानी ‘सेम’ की समस्या राजस्थान में तेजी से गंभीर रूप ले रही है। केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी कि राज्य में करीब 1 लाख 96 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सेम से प्रभावित हो चुकी है। सबसे ज्यादा असर श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में देखने को मिल रहा है, जहां हजारों हेक्टेयर उपजाऊ जमीन दलदली होकर खेती के लायक नहीं रह गई है। इससे किसानों की आजीविका पर भी गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने सांसद कुलदीप इंदोरा के एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के अंतर्गत केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (CSSRI) द्वारा वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया है। इस अध्ययन में सामने आया कि राजस्थान में 1,95,571 हेक्टेयर भूमि मिट्टी के लवणीकरण से प्रभावित है, जिसे आम भाषा में सेम कहा जाता है। क्यूं बढ़ रही है सेम की समस्या अध्ययन के अनुसार सेम की मुख्य वजहें प्राकृतिक जल निकास में रुकावट, अत्यधिक सिंचाई और भूजल स्तर का बढ़ना हैं। इन कारणों से मिट्टी में मौजूद लवण ऊपर की सतह पर आ जाते हैं, जिससे धीरे-धीरे खेत बंजर हो जाते हैं और फसल उत्पादन प्रभावित होता है। केंद्र सरकार ने माना कि उत्तर राजस्थान के नहर सिंचित क्षेत्रों में स्थिति लगातार बिगड़ रही है। ICAR की रिपोर्ट के मुताबिक अकेले श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में करीब 5,397 हेक्टेयर भूमि सेम से प्रभावित है, जिससे जलभराव, मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट और कृषि उत्पादकता में कमी आ रही है। ICAR ने सुझाए उपाय समस्या से निपटने के लिए ICAR ने अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों उपाय सुझाए हैं। अल्पकालिक उपायों में प्रभावित क्षेत्रों की पहचान, सतही जल निकासी में सुधार, सिंचाई का बेहतर प्रबंधन, मिश्रित गुणवत्ता के पानी का उपयोग और नमक सहनशील फसलों को बढ़ावा देना शामिल है। वहीं दीर्घकालिक समाधान के तौर पर भूमिगत जल निकासी प्रणाली, गहरी जड़ों वाले वृक्षों के जरिए बायो-ड्रेनेज और नमक सहनशील पेड़ों के साथ कृषि वानिकी मॉडल अपनाने की सिफारिश की गई है। सरकार ने बताया कि इन तकनीकों को प्रशिक्षण, प्रदर्शन और जागरूकता अभियानों के माध्यम से किसानों तक पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही मृदा स्वास्थ्य एवं उर्वरता योजना के तहत जारी किए जा रहे सॉयल हेल्थ कार्ड भी सेम प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को मिट्टी प्रबंधन में मदद कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो राजस्थान में उपजाऊ कृषि भूमि का नुकसान और बढ़ सकता है।