samacharsecretary.com

जंगल माफिया और अफसरों की मिलीभगत पर सरकार सख्त, पंचकूला के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पर गिरेगी गाज

पंचकूला पंचकूला के संरक्षित वन क्षेत्र (आसरेवाली जंगल) में खैर के 1148 पेड़ कटने व उनकी तस्करी के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। विभाग की प्राथमिक जांच में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आईएफएस अधिकारी बी निवेदिता, पंचकूला के रेंज अधिकारी इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह और जिला वन्य जीव अधिकारी आरपी दांगी की लापरवाही व मिलीभगत सामने आई है। पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव विभाग के एसीएस ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को इन तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। निर्देश मिलने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पंचकूला के पुलिस कमिश्नर से तीनों पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है। उन्होंने प्राथमिकी में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा लगाने व वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इस मामले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी विभागीय रिपोर्ट सौंपी गई है। इसमें कहा गया है कि तीनों अधिकारियों की लापरवाही से कुल ⁠1148 पेड़ काटे गए हैं जिनमें 99 फीसदी खैर के है। कटे पेड़ों के ठूंठ को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इतने बड़े स्तर पर अवैध कटाई बिना अंदरखाने मिलीभगत के नहीं हो सकती है। पत्र में तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात भी है। इस मामले की जांच के लिए बनाई गई छह सदस्यीय एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू हो गई है। आरोप सही साबित होने पर पहले से दर्ज एफआईआर में तीनों का नाम जोड़ा जा सकता है। तीनों की भूमिका बी. निवेदिता अंबाला कमिश्नरी और रोहतक कमिश्नरी की चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन हैं। रोहतक सर्कल में सात और अंबाला सर्कल के पांच जिलों में स्थित वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, चिड़ियाघर और कलेसर नेशनल पार्क की निगरानी की जिम्मेदारी इनके पास ही है। रिपोर्ट में लिखा कि इनकी सुपरविजन में लापरवाही हुई है जिसकी वजह से जंगल माफिया को जमकर पेड़ काटने से रोका नहीं जा सका। सुरजीत सिंह वाइल्डलाइफ रेंज अधिकारी होने के नाते पंचकूला के सभी संरक्षित जंगल क्षेत्र की सुरक्षा व वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी है। वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हुए। आरपी दांगी बतौर जिला वन्य जीव अधिकारी के अधीन पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और कैथल के जंगल व चिड़ियाघर आते हैं। उनको हर माह में अपने कार्यक्षेत्र के अधीन आने वाले एक वन क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजनी होती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन्होंने भी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई।  

तापमान में 12 डिग्री की भारी गिरावट, बारिश और कुप्रबंधन ने बढ़ाई अन्नदाता की चिंता

 सोनीपत हरियाणा में मंगलवार रात से मौसम ने एक बार फिर करवट ली। बीते 24 घंटों में प्रदेश के 20 जिलों में हल्की से मध्यम स्तर की बारिश हुई। इससे अधिकतम तापमान में 12 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। पूरे प्रदेश में दिन का तापमान 24 से 29 डिग्री के बीच रहा। बारिश के कारण गर्मी से तो राहत मिली लेकिन किसानों की मुश्किल बढ़ गई है। नूंह व सोनीपत में किसानों को नहीं मिला तिरपाल मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद मंडियों में फसल प्रबंधन के उचित प्रबंध नहीं किए गए। कहीं तिरपाल कम पड़ गईं तो कहीं प्रबंध ही नहीं किया गया। नतीजा हजारों क्विंटल गेहूं व बोरियां भीग गईं। अकेले पानीपत में 20 हजार क्विंटल गेहूं भीग गई। इससे प्रदेश की अधिकतर मंडियों में सरकारी और निजी खरीद भी ठप रही। पूरा दिन किसान अपने स्तर पर मंडियों में लाई गई फसल को बचाते नजर आए। नूंह व सोनीपत में किसानों को तिरपाल ही नहीं मिला। पानीपत अनाज मंडी में बारिश में भीगा गेहूं – फोटो : संवाद रेवाड़ी में खराब मौसम के कारण मंडी की बंद वहीं, झज्जर में हजारों क्विंटल गेहूं भीगने के बाद बुलडोजर की मदद से उसे शेड के नीचे करने का प्रयास किया गया। रेवाड़ी में तो खराब मौसम के कारण मंडी ही बंद कर दी गई। हिसार व भिवानी में जिला मुख्यालय की मंडी में फसल को तिरपाल से ढका पर तेज हवा के कारण फसल भीग गई। करनाल में भी शेड के बाहर पड़े गेहूं को किसान तिरपाल से ढकते नजर आए। अंबाला में केवल साहा अनाज मंडी में थोड़ा गेहूं भीगा है। हालांकि कैथल, यमुनानगर व फतेहाबाद में बचाव रहा। किसानों के चेहरे पर चिंता मंडियों में उचित प्रबंध नहीं होने के कारण किसानों के चेहरे पर चिंता और बेबसी साफ झलकी। पलवल की मंडी में पहुंचे किसान रघुवीर ने बताया कि सरकार ने 12 प्रतिशत नमी का मानक तय किया है लेकिन लगातार खराब मौसम के कारण फसल ठीक से सूख ही नहीं पा रही। पहले ओलावृष्टि ने फसल को नुकसान पहुंचाया। अब बारिश से हालत और खराब हो गई है। फसल मानकों पर खरी नहीं उतर रही तो खरीद कैसे होगी। इस बीच खेतों में गेहूं कटान व थ्रेसिंग का कार्य रुक गया है। फसल भीगने के कारण नमी की मात्रा बढ़ने की पूरी संभावना है। सिरसा, फरीदाबाद व हांसी में नहीं बरसे बादल अंबाला, पंचकूला, हिसार, महेंद्रगढ़, रोहतक, कुरुक्षेत्र भिवानी, जींद, रेवाड़ी, गुरुग्राम, करनाल, पलवल, नूंह, पानीपत, झज्जर, सोनीपत, चरखी-दादरी, कैथल, यमुनानगर, फतेहाबाद में बारिश हुई है। हालांकि सभी जिलों में दिनभर बादल छाए रहे। फरीदाबाद, हांसी व सिरसा में बारिश नहीं हुई। तापमान में एक दिन में इतनी गिरावट से लोगों को सर्दी महसूस हुई। कैथल में गेहूं खरीद की रफ्तार सुस्त वहीं, हरियाणा के कैथल जिले में करीब 17,500 मीट्रिक टन गेहूं खुले आसमान के नीचे पड़ा है। फसल को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल ही सहारा है। दरअसल, एक ओर जहां गेहूं की आवक तेज हो गई है, वहीं खरीद की सुस्त रफ्तार ने किसानों और आढ़तियों की चिंता बढ़ा दी है। जिले के 42 मंडी केंद्रों पर करीब 22 हजार मीट्रिक टन गेहूं पहुंच चुका है, लेकिन अब तक केवल 4,500 मीट्रिक टन की ही खरीद हो पाई है। वहीं, बारिश के बाद किसानों की परेशानी बढ़ गई है। आज भी पूरे प्रदेश में बरसेंगे बादल मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि संपूर्ण प्रदेश में तेज हवा और बूंदाबांदी हुई है। कुछ स्थानों पर मामूली ओलावृष्टि की गतिविधियों को भी दर्ज किया गया। पूर्वी और उत्तरी जिलों में 20-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवा ने मौसम को बदला। बुधवार को भी तेज हवा के साथ हल्की बारिश की संभावना है। गुरुवार को उत्तरी जिलों में हल्की बारिश की संभावना है। 11 अप्रैल को एक नया कमजोर पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से धीरे-धीरे संपूर्ण इलाके में तापमान में एक बार फिर से बढ़ोतरी की संभावना बन रही है।  

धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसे जवाद अहमद सिद्दीकी, ईडी ने बैंक बैलेंस और जमीनें की जब्त

फरीदाबाद  प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत फरीदाबाद स्थित अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके मैनेजिंग ट्रस्टी जवाद अहमद सिद्दीकी की कुल 39.45 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। इस कुर्की में शामिल संपत्तियों में जवाद अहमद सिद्दीकी का दिल्ली के जामिया नगर, ओखला इलाके में स्थित आवासीय परिसर, फरीदाबाद के धौज गांव में अल-फलाह विश्वविद्यालय के पास स्थित कृषि भूमि, साथ ही ट्रस्ट और जवाद सिद्दीकी की डीमैट अकाउंट्स, बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं। तीन एफआईआर पर आधारित है जांच ईडी की जांच दिल्ली पुलिस की तीन एफआईआर पर आधारित है। इनमें दिल्ली क्राइम ब्रांच की दो एफआईआर (संख्या 337/2025 और 338/2025, दोनों 13 नवंबर 2025 को दर्ज) और दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के पालम पुलिस स्टेशन की एफआईआर संख्या 0021/2026 (10 जनवरी 2026 को दर्ज) शामिल हैं। इन एफआईआर में धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भारतीय न्याय संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं, जो पीएमएलए के अंतर्गत अनुसूचित अपराध माने जाते हैं। क्या है आरोप? आरोप है कि अल-फलाह विश्वविद्यालय ने अपनी समाप्त हो चुकी एनएएसी 'ए' ग्रेड मान्यता को गलत तरीके से वैध बताकर छात्रों और अभिभावकों को धोखा दिया। साथ ही ऐसी यूजीसी धारा 12बी मान्यता का दावा किया जो कभी मिली ही नहीं थी। इसके अलावा विश्वविद्यालय के मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर ने नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) से अनुमोदन लेने के लिए कागजों पर दिखाई जाने वाली फर्जी फैकल्टी और नकली मरीजों का इस्तेमाल किया। 'अपराध से अर्जित आय' कमाई ईडी की जांच में सामने आया है कि ट्रस्ट और विश्वविद्यालय ने वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2024-25 तक इन गलत तरीकों से कुल 493.24 करोड़ रुपए की 'अपराध से अर्जित आय' कमाई। इस पैसे को उन कंपनियों में भेजा गया जिन पर जवाद अहमद सिद्दीकी और उनके परिवार का नियंत्रण था। इनमें करकुन कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स, अमला एंटरप्राइजेज एलएलपी और दियाला कंस्ट्रक्शन एंड डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाएं शामिल हैं। बाद में यह राशि विदेश भी भेज दी गई। जवाद अहमद सिद्दीकी अरेस्ट इससे पहले 16 जनवरी 2026 को ईडी ने फरीदाबाद के धौज स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय कैंपस की जमीन और इमारतों को 144.09 करोड़ रुपए में कुर्क किया था। ईडी ने 16 जनवरी 2026 को ही विशेष पीएमएलए अदालत, साकेत, दिल्ली में जवाद अहमद सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के खिलाफ अभियोजन शिकायत भी दायर की है। जवाद अहमद सिद्दीकी को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। ईडी का कहना है कि ये सभी कुर्कियां अपराध से अर्जित आय की जांच का हिस्सा हैं। जांच अभी भी जारी है और आगे और संपत्तियों तथा लेन-देन की जानकारी जुटाई जा रही है।

सरकार का बड़ा फैसला: PNG पाइपलाइन प्रस्ताव अब 24 घंटे में होंगे क्लियर

पंचकूला. पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध से आए गए संकट के बीच केंद्र के निर्देश पर हरियाणा सरकार ने पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) से अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने का काम आरंभ कर दिया है। सरकार ने गुरुग्राम, फरीदाबाद सहित उन शहरों के निगमायुक्त को निर्देश दिए हैं कि गैस कंपनियों के पीएनजी लाइन बिछाने के प्रस्ताव को 24 घंटे में पास कर जरूरी कार्रवाई पूरी की जाए। इसके अलावा पीएनजी लाइन बिछाने के लिए पहले से लंबित प्रस्तावों को डीम्ड परमिशन (अनुमति मान ली गई) की श्रेणी में डाल दिया जाए। उक्त निर्देश 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेंगे रहेंगे। इसके बाद समीक्षा कर अगले कदम को उठाया जाएगा। मीथेस से बनी होती है पीएनजी पीएनजी स्वच्छ और किफायती ईंधन है, जो पाइपलाइन के जरिए सीधे घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और उद्योगों तक पहुंचाई जाती है। यह मुख्य रूप से मीथेन से बनी होती है और एलपीजी सिलिंडर के मुकाबले अधिक सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि यह हवा से हल्की होती है और लीक होने पर ऊपर उड़ जाती है। पीएनजी कनेक्शनों की संख्या अभी तक सबसे अधिक गुरुग्राम में है। यहां पर कनेक्शनों की संख्या करीब ढाई लाख है। इसके बाद फरीदाबाद तथा सोनीपत और रेवाड़ी तथा अन्य शहर हैं। गुरुग्राम के सुशांत लोक, सेक्टर पंद्रह तथा सेक्टर सत्रह और कुछ जगहों पर कई साल से प्रस्तावित है। रेवाड़ी के दो रिहायशी सेक्टर में यह सुविधा है। इसी तरह फरीदाबाद तथा अन्य शहरों के सीमित इलाकों तक यह सुविधा है। तीन माह के लिए सरकार ने गैस कंपनियों को टास्क दिया है कि इस सुविधा को हर शहर में साठ प्रतिशत की जाए। जिससे उपभोक्ताओं को एलपीजी से पीएनजी में शिफ्ट किया जा सके। 11 नगर निगमों को सौंपा गया पत्र शहरी स्थानीय निकाय विभाग की ओर से जारी 11 नगर निगमों को पत्र में यह भी कहा गया है कि गैस लाइन डालने के लिए सड़क की खोदाई करने वाली एजेंसी को सड़क मरम्मत के लिए रकम वहन करनी पड़ेगी। इसके लिए लाइन के सर्वे के बाद जो भी प्रोजेक्ट फाइल होगी उसमें गैस लाइन बिछाने वाली कंपनी को एक शपथ पत्र भी लगाना होगा। यह इसलिए कहा गया कि सड़क तोड़कर ऐसे ही डाल नहीं दी जाए जिससे आने-जाने में आमजन को परेशानी उठानी पड़े। यह सब नगर निगम को ही तय करना है। 

प्रदूषण नियमों की अनदेखी करने वाले कंक्रीट प्लांट पर बड़ी कार्रवाई, गुरुग्राम में सबसे बुरा हाल

गुरुग्राम राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के कड़े निर्देशों के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने रेडी मिक्स कंक्रीट प्लांट पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बोर्ड ने पूरे राज्य में 370 से आरएमसी प्लांट को चिन्हित किया है। इनमें से 184 प्लांट बोर्ड की अनुमति से चल रहे हैं जबकि 186 बिना अनुमति के चल रहे हैं। पर्यावरण के मानकों का उल्लंघन करने वाले 108 प्लांट पर आठ लाख रुपये से लेकर एक करोड़ 13 लाख तक जुर्माना लगाया गया है, जबकि 73 पर कार्रवाई की सिफारिश की गई है। हालांकि जिन प्लांट पर जुर्माना लगाया गया है। उनमें से अधिकतर प्लांट मालिकों ने अभी तक जुर्माना जमा नहीं किया है। ये भी पढ़ें एनजीटी ने यह आदेश एक शिकायत के आधार पर दिया था। एनजीटी को दी गई शिकायत में बताया गया था कि हरियाणा में प्लांट पर्यावरण के मानकों का उल्लंघन कर रहे हैं। अधिकतर प्लांटों ने बोर्ड से अनुमति भी नहीं ली। धूल नियंत्रण का कोई उपाय नहीं किया गया है। इससे वायु प्रदूषण भी बढ़ रहा है, जो इलाके में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा बन रहा है। इसके साथ ही भूमिगत जल का दोहन किया जा रहा है। इसके लिए किसी अथॉरिटी से स्वीकृति नहीं ली गई है। बोर्ड की ओर से पेश की गई प्रारंभिक रिपोर्ट में इसे गंभीर समस्या माना गया। इसके बाद पूरे हरियाणा में इसकी जांच की गई और उल्लंघन करने वाले प्लांट पर कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए। आरएमसी प्लांट से ऐसे फैलता है प्रदूषण आरएमसी प्लांट एक रेडी-टू-यूज कंक्रीट बनाने वाली एक स्वचालित फैक्ट्री होती है, जो निश्चित अनुपात में कंक्रीट का मिश्रण बनाती है। इस प्लांट से धूल का उत्सर्जन ज्यादा होता है। इसमें सीमेंट, रेत और गिट्टी के खुले भंडारण, मिक्सिंग और लोडिंग के दौरान महीन धूल के कण हवा में फैलते हैं, जो सबसे प्रदूषक हैं। इसके अलावा ट्रकों और भारी वाहनों के आने व जाने से काफी धूल उड़ती है जिससे आसपास के क्षेत्रों की दृश्यता की काफी कम हो जाती है। वहीं, भारी मिक्सर, मशीनरी, जनरेटर और ट्रकों की आवाज के कारण आसपास के क्षेत्रों में तेज ध्वनि प्रदूषण होता है। पानी का भी खूब दोहन किया जाता है। गुरुग्राम में सबसे ज्यादा अवैध मिले आरएमसी प्लांट गुरुग्राम में 150 से ज्यादा आरएमसी प्लांट संचालित हो रहे हैं। इनमें से आधे से ज्यादा प्लांट बिना अनुमति के चल रहे थे। उनके पास बोर्ड की कोई अनुमति नहीं थी। इनमें से 60 प्लांट पर 80 लाख रुपये से लेकर एक करोड़ तक जुर्माना लगाया गया है। अंबाला में कुल छह प्लांट है, जिनके पास स्वीकृति है। बल्लभगढ़ में कुल 21 प्लांट है। इनमें सिर्फ चार बिना प्लांट के चल रहे हैं। चारों प्लांट को सील कर दिया गया है। फरीदाबाद में कुल 23 प्लांट हैं। इनमें से नौ प्लांट पर कार्रवाई की गई है। यमुनानगर में 11 में से 9 प्लांट बिना स्वीकृति के संचालित हो रहे थे। इन पर कार्रवाई की गई है। बहादुरगढ़ में कुल 37 प्लांट है। इनमें से नौ पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया है 

मीरी पीरी विवाद पर SGPC अध्यक्ष हरजिंद्र सिंह धामी का अहम दौरा, शाहाबाद में लिया जा सकता है बड़ा निर्णय

कुरुक्षेत्र  शाहाबाद के मीरी पीरी मेडिकल संस्थान में 20 मार्च को हुए विवाद के चलते आज एसजीपीसी अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंद्र सिंह धामी पहुंचे हैं, जहां वे सैंकड़ों की संख्या में पहुंची संगत के साथ बैठक की जा रही है। बैठक में बड़ा फैसला भी लिया जा सकता है, जिस पर संगत के साथ प्रशासन की भी नजरें टिकी हुई है।  20 मार्च को संस्थान में उस समय बड़ा विवाद हो गया था जब अपनी मांगों को लेकर धरना दे रहे कर्मचारियों से मिलने हरियाणा कमेटी के नामित सदस्य बलजीत सिंह दादूवाल समर्थकों व अन्य पदाधिकारियों के साथ पहुंच गए थे। यहां संस्थान को संभाले जाने को लेकर दादूवाल पक्ष व एसजीपीसी पक्ष आमने-सामने आ गया था तो जमकर हंगामा भी हुआ था, जिसके चलते पुलिस को मोर्चा संभालना पड़ा था। हरियाणा कमेटी उपाध्यक्ष ने इस विवाद के बीच अपने साथ मारपीट किए जाने, पकड़ी उछालने के आरोप भी लगाए थे तो वहीं उन्होंने दादूवाल के साथ मिलकर एसपी को शिकायत भी दी थी। वहीं दूसरे पक्ष ने भी शिकायत दी थी, जिसमें दादूवाल व उनके समर्थकों पर संस्थान पर कब्जे के प्रयास तक के भी आरोप लगाए थे। दादूवाल पक्ष की शिकायत पर पुलिस ने एसजपीसी पक्ष के सीनियर मीत प्रधान सरदार रघुजीत सिंह विर्क, बलदेव सिंह कैमपुरिया सहित 20 लोगों पर केस दर्ज कर लिया था, जिसके बाद विवाद और भी गहरा गया। जहां अब एसजीपीसी दादूवाल पक्ष पर कार्रवाई की मांग कर रही है वहीं इसी के चलते ही एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंद्र सिंह धामी भी पहुंचे हैं। उनका कहना है कि वे प्रशासन को अपना मांग पत्र सौंपेंगे और प्रशासन मौके पर नहीं पहुंचा तो एसपी कार्यालय का भी घेराव किया जा सकता है। उधर तीन दिन पहले दादूवाल भी हरियाणा कमेटी मुख्यालय पर अपने समर्थकों के साथ बैठक कर धामी से भी बड़ा शक्ति प्रदर्शन करने का ऐलान कर चुके हैं।  

संशोधन अधिनियम के खिलाफ आवाज: अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने हाईकोर्ट में दी चुनौती

चंडीगढ़. फरीदाबाद स्थित अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और अल-फलाह यूनिवर्सिटी की याचिका पर जवाब देने केंद्र और हरियाणा सरकार ने कोर्ट से कुछ समय मांगा है। सरकार के अनुरोध पर हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई स्थगित कर दी। अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने हरियाणा प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (संशोधन) अधिनियम 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य सरकार ने संशोधन के माध्यम से असीमित और मनमाने अधिकार अपने हाथ में ले लिए हैं, जो निजी और अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकते हैं। याचिका में जोड़ी गई नई धाराएं 44 बी और 46 शामिल हैं, जो छह जनवरी 2025 से लागू होंगी। इन धाराओं के तहत राज्य सरकार को गंभीर चूक या राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित चिंताओं के आधार पर किसी भी निजी विश्वविद्यालय के प्रबंधन में हस्तक्षेप करने का अधिकार दिया गया है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इन धाराओं में प्रयुक्त शब्दावली अस्पष्ट है, जिससे सरकार को अत्यधिक विवेकाधीन शक्ति मिलती है। उल्लेखनीय है कि नई दिल्ली के लाल किले पर हुए बम ब्लास्ट मामले में यूनिवर्सिटी का कनेक्शन मिलने के बाद सरकार ने अल-फलाह ट्रस्ट में सीनियर आइएएस अधिकारी डॉ. अमित अग्रवाल को प्रशासक नियुक्त किया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि संशोधन के तहत सरकार सामान्य स्थिति बहाल होने के बाद भी विश्वविद्यालय पर नियंत्रण बनाए रख सकती है, जिससे निजी विश्वविद्यालय सरकारी संस्थानों में बदल सकते हैं। इसे संविधान के अनुच्छेद 30 का उल्लंघन बताया गया है। अल-फलाह यूनिवर्सिटी, जिसे वर्ष 2015 में यूजीसी से मान्यता मिली थी, ने अदालत को बताया कि वह मेवात क्षेत्र की वंचित आबादी को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रही है। याचिका में आशंका जताई गई है कि यदि सरकार प्रशासक नियुक्त करती है, तो संस्थान का अल्पसंख्यक स्वरूप समाप्त हो जाएगा और क्षेत्र में चल रही सेवाएं प्रभावित होंगी। हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार को जवाब दायर करने का आदेश दिया है।

महाकुंभ वाले IIT बाबा अभय सिंह अब गृहस्थ बने, विज्ञान और सनातन के मेल से छाए थे

झज्जर. हरियाणा के जिला झज्जर के सासरौली गांव के रहने वाले और प्रयागराज महाकुंभ मेले में प्रसिद्ध हुए आईआईटी बाबा अभय ने शादी की। शादी के बंधन में बंधने के बाद आज (सोमवार) वे अपने झज्जर वाले घर पहुंचे। उन्होंने 15 फरवरी को शिवरात्रि शुभ अवसर पर शादी की। इसके बाद उन्होंने 19 फरवरी को कोर्ट मैरिज भी की। आखिर महाकुंभ में क्यों चर्चा में आए अभय सिंह? देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी से शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने वैराग्य का मार्ग चुना। अपनी वेशभूषा, बल्कि अपनी तार्किक क्षमता और जीवन के प्रति नजरिये के कारण फेमस हुए। उन्होंने आईआईटी जैसे संस्थान से स्नातक करने के बाद विदेश में मिलने वाले करोड़ों के वेतन और ऐशो-आराम की जिंदगी को ठुकरा दिया।उनका यह निर्णय आज के उस युवा वर्ग को हैरान कर रहा है जो सफलता का पैमाना केवल आर्थिक समृद्धि को मानता है। प्रवचनों में केवल पौराणिक कथाएं नहीं होतीं, बल्कि वे धर्म को विज्ञान की कसौटी पर कसकर समझाते हैं। वे क्वांटम फिजिक्स से लेकर न्यूरोसाइंस तक के उदाहरणों के माध्यम से सनातन धर्म की वैज्ञानिकता को सिद्ध करते हैं, जो शिक्षित युवाओं को खासा प्रभावित कर रहा है। उनके पास न तो कोई बड़ा तामझाम था और न ही वीआईपी संस्कृति का दिखावा। उनकी सरलता ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरी। उन्होंने मानसिक शांति और अवसाद से मुक्ति के लिए आध्यात्मिक मार्ग को वैज्ञानिक तरीके से सुझाया

हरियाणा में 6 ट्रेनी IAS की पोस्टिंग, विवेक यादव होंगे हिसार सहायक आयुक्त, विशाल को मिला रोहतक, शिवानी को कैथल

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने तुरंत प्रभाव से 6 प्रशिक्षणाधीन आईएएस अधिकारियों के नियुक्ति आदेश जारी किए हैं। अमितेज पांगटे को नूंह तथा मुस्कान श्रीवास्तव को फरीदाबाद में सहायक आयुक्त लगाया गया है। इसी तरह शिवानी पांचाल को कैथल, सोहम शैलेन्द्र को करनाल, विशाल सिंह को रोहतक तथा विवेक यादव को हिसार में सहायक आयुक्त लगाया गया है।

महिलाओं के हाथ में स्टीयरिंग: हरियाणा सरकार की ‘पिंक कैब’ योजना से बढ़ेगा रोजगार

चंडीगढ़. हरियाणा की गरीब व जरूरतमंद महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत खासकर “लखपति दीदी” बनाने के लिए राज्य सरकार खास पहल करने जा रही है। प्रदेश सरकार ने महिलाओं के लिए पिंक कैब योजना आरंभ करने का निर्णय लिया है। इस योजना के अंतर्गत न केवल महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा, बल्कि इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए उन्हें 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा। राज्य सरकार ने युवा सशक्तीकरण एवं उद्यमिता विकास की योजनाओं को बढ़ावा देने की कड़ी में पिंक कैब योजना आरंभ करने का सैद्धांतिक निर्णय लिया है। महिलाओं के लिए विशेष “पिंक टैक्सी” या “महिला कैब” का विचार भारत और दुनिया के कई हिस्सों में अलग-अलग समय पर शुरू हुआ। देश में सबसे शुरुआती संगठित पहल चेन्नई (2014) में “पिंक टैक्सी” के रूप में देखी गई, जहां महिलाओं द्वारा महिलाओं के लिए कैब सेवा शुरू की गई थी। इसके बाद देश के कई शहरों जैसे बेंगलुरु, कोलकाता और दिल्ली में इस तरह की सेवाएं शुरू हुईं। वैश्विक स्तर पर भी 2015 के आसपास “पिंक टैक्सी” जैसे महिला केंद्रित माडल सामने आए, जिनका मुख्य उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार था। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने इस बार के बजट में पिंक कैब योजना की शुरुआत करने के संकेत दिए हैं। राज्य में करीब पांच लाख लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य है, जिसमें से आधी से ज्यादा महिलाएं अब तक लखपति बन चुकी हैं। लखपति दीदी स्वयं सहायता समूह की एक ऐसी सदस्य होती है, जिसकी सालाना पारिवारिक आय एक लाख रुपये या इससे अधिक है। इस आय की गणना कम से कम चार कृषि मौसमों या चार व्यापार चक्रों के लिए की जाती है, जिनकी औसत मासिक आय 10 हजार रुपये से अधिक है, जो कि लगातार बनी रहे। पिंक कैब योजना के अंतर्गत सरकार की चाह है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाकर उन्हें स्वाभिमान पैदा किया जा सके। प्रदेश सरकार “पिंक कैब योजना” शुरू कर महिलाओं को वाहन चलाने का प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ेगी, ताकि उनमें आत्मनिर्भरता और सुरक्षा की भावना बढ़ सके। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को न सिर्फ रोजगार देना है, बल्कि उन्हें सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना भी है। पिंक कैब योजना के तहत महिलाएं स्वयं वाहन चलाकर आय अर्जित कर सकेंगी और परिवहन क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ा सकेंगी। पिंक कैब योजना को केंद्र सरकार की “लखपति दीदी” अवधारणा से इसलिए जोड़ा गया है, ताकि महिलाएं नियमित आय के स्रोत से जुड़ सकें। महिलाओं को मिलेंगी कई प्रकार की सुविधाएं – – वाहन चलाने का विशेष प्रशिक्षण – इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद के लिए 10 लाख रुपये तक का ब्याज मुक्त ऋण – स्वरोजगार के लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता – सुरक्षित परिवहन सेवाओं से जोड़ने की व्यवस्था महिलाओं को क्या-क्या लाभ होंगे? 1. आर्थिक सशक्तीकरण – महिलाएं खुद वाहन चलाकर नियमित आय कमा सकेंगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी 2. रोजगार के नए अवसर – परिवहन क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी और बड़े स्तर पर रोजगार सृजित होगा 3. सुरक्षित यात्रा व्यवस्था – महिला ड्राइवर होने से महिला यात्रियों को अधिक सुरक्षित महसूस होगा, जिससे इस सेवा की मांग भी बढ़ेगी 4. आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास – प्रशिक्षण और स्वरोजगार से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे सामाजिक रूप से अधिक सशक्त बनेंगी 5. हरित (ग्रीन) परिवहन को बढ़ावा 6. इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग से पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा। प्रदेश सरकार ने युवाओं को उद्यमी बनाने का प्रशिक्षण देने के लिए 60 करोड़ रुपये की लागत से तीन राज्य उद्यमिता विकास संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है। ऐसे प्रत्येक संस्थान में प्रति वर्ष एक हजार युवाओं को उद्यमिता का प्रशिक्षण देने की क्षमता होगी। इनमें महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत सीटें आरक्षित रहेंगी। करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक राज्य कौशल संकाय प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र भी स्थापित करने की राज्य सरकार की योजना है।