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संजय भाटिया ने सीएम सैनी की मौजूदी में भरा राज्यसभा के लिए नामांकन

चंडीगढ़. बीजेपी के संजय भाटिया ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। इस दौरान उनके साथ हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सैनी भी मौजूद रहे। संजय भाटिया की गिनती केंद्रीय ऊर्जा, आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल के करीबी नेताओं में होती है। पानीपत के रहने वाले संजय भाटिया 2019 के लोकसभा चुनाव में करनाल सीट से सांसद चुने गए थे। उन्होंने कांग्रेस नेता कुलदीप शर्मा को उस चुनाव में 6 लाख 56 हजार 142 वोटों के भारी अंतर से हराया था, जो हरियाणा के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी जीत थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने करनाल सीट से संजय भाटिया के स्थान पर हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल को टिकट दिया था। मनोहर लाल तब लोकसभा का चुनाव जीते और केंद्र की मोदी सरकार में मंत्री बने थे। तब के बाद से संजय भाटिया को कभी संगठन तो कभी सरकार में एडजेस्ट करने की कोशिश हो रही थी, जो अब जाकर पूरी हुई है।

ग्रामीण विकास को नई रफ्तार: हरियाणा के 111 गांवों में बनेंगी स्मार्ट गलियां

चंडीगढ़ हरियाणा के 111 गांवों में स्मार्ट गलियों का विकास किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 1 करोड़ 19 लाख 39 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे। यह जानकारी विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने कांग्रेस विधायक कुलदीप वत्स द्वारा उठाए गए मुद्दे के जवाब में दी। पंवार ने बताया कि जिन गांवों में मतदाताओं की संख्या 10 हजार है, वहां एक गली को स्मार्ट गली के रूप में विकसित किया जाएगा। बादली विधानसभा क्षेत्र के बादली गांव को भी इस योजना में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का दृष्टिकोण है कि जिस प्रकार शहरों में साफ-सुथरी और व्यवस्थित गलियां होती हैं, उसी तर्ज पर गांवों में भी आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्मार्ट गलियां विकसित की जाएं। शून्यकाल के दौरान विधायक कपूर वाल्मीकि द्वारा मिट्टी उठाने के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में मंत्री ने कहा कि यदि ग्राम पंचायत प्रस्ताव भेजती है तो खनन विभाग के अधिकारियों को परमिट जारी करने के निर्देश दिए जाएंगे। पंचायत भूमि पर मालिकाना हक के लिए विशेष कैंप कालांवाली से कांग्रेस विधायक शीशपाल केहरवाल ने पंचायत भूमि पर बने मकानों को वैध करने का मुद्दा उठाया। पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार जहां पंचायत की फिरनी, पौंड या तालाब हैं, वहां बने मकानों को मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता। मुख्यमंत्री द्वारा पिछले सत्र में पेश किए गए विधेयक के तहत ग्राम पंचायत की कृषि भूमि या फिरनी पर मकान नहीं होने चाहिए। हालांकि, यदि मकान ग्राम पंचायत की भूमि पर है तो 500 गज तक के क्षेत्रफल पर मालिकाना हक दिया जा रहा है।

बढ़ती गर्मी से किसान चिंतित: हरियाणा में समय से पहले बढ़ा तापमान, फसलों को नुकसान की आशंका

चंडीगढ़ हरियाणा में मौसम का मिजाज इस बार गड़बड़ाया हुआ है जिसका सीधा असर फसलों पर पड़ता हुआ नजर आ रहा है। 2012 से लेकर अब तक वर्ष 2022, 2023 एवं 2025 को छोड़कर मानसून प्रभावी नहीं रहा है। हालांकि 2022 में मानसून में औसत 426 मिलीमीटर की तुलना में 464 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई जबकि 2023 में मानसून में 512.7 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। इस बार मौसम में आए एकाएक बदलाव के बाद फरवरी में ही अधिकतम तापमान 30 डिग्री तक पहुंच गया है। 5 मार्च तक अधिकतम तापमान 34 डिग्री तक पहुंचने की संभावना जताई गई है। इकोनॉमिक एंड स्टैटिकल अफेयर्स हरियाणा की वार्षिक रिपोर्ट-2025 के अनुसार 2019 में फरवरी में औसतन अधिकतम तापमान 20.8, 2020 में 22.2, 2021 में 24.7, 2022 में 22.1, 2023 में 25.7 और 2024 में 23.2 रहा जबकि इस बार यह 30 डिग्री तक पहुंच गया है। इस बार सर्दी के मौसम में अभी तक औसत से 57 फीसदी कम बरसात हुई है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस साल 1 जनवरी से 26 फरवरी तक सिरसा में 6.7 मिलीमीटर, फतेहाबाद में 27.6, हिसार में 17.1, जींद में 24.8, कैथल में 26.6, करनाल में 29.4, पानीपत में 37.5, सोनीपत में 13.9, भिवानी में 23.2, चरखी दादरी में 15.5, झज्जर में 18.5, महेंद्रगढ़ में 12, रेवाड़ी में 15.2, गुरुग्राम में 21.7, नूंह में 12.4, पलवल में 16, फरीदाबाद में 3.2, कुरुक्षेत्र में 56.2, अंबाला में 60.4, यमुनानगर में 43.2 एवं पंचकूला में 48.4 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई है। वैसे मौसम विभाग का मानना है कि इस बार प्रदेश में 1 जून से 30 सितम्बर तक अच्छी बरसात हो सकती है। मानसून में जुलाई और अगस्त में होती है सबसे अधिक बरसात हरियाणा में 1 जून से 30 सितम्बर तक औसतन 426 मिलीमीटर बरसात दर्ज की जाती है। जुलाई और अगस्त के महीनों में सबसे अधिक बरसात होती है। जून में औसतन 54, जुलाई में 149, अगस्त में 146 और सितम्बर में 76 मिलीमीटर बरसात आमतौर पर होती है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार हरियाणा में सर्द मौसम में 32.4, प्री-मानसून सीजन में 33.6, मानसून सीजन में 426 मिलीमीटर एवं पोस्ट मानसून सीजन में 28.9 मिलीमीटर बरसात होनी चाहिए। हर साल हरियाणा में 554.7 मिलीमीटर बरसात होनी चाहिए, पर 2012 के बाद 2022, 2023 और 2025 को छोड़कर यह आंकड़ा 460 मिलीमीटर को भी पार नहीं कर पा रहा है। 2012 में हरियाणा में महज 307 मिलीमीटर बरसात हुई यानी औसत बरसात से 45 फीसदी कम। इसी तरह से 2013 में 452 मिलीमीटर बरसात हुई। 2013 में देश में अंडमान-निकोबार में सबसे अधिक 3757 मिलीमीटर बरसात हुई थी जबकि सबसे कम बरसात का चिंताजनक रिकॉर्ड हरियाणा के नाम रहा था। 2014 में तो पूरे साल 301.3 मिलीमीटर बरसात ही हुई। 2014 में मानसून में 197.3 मिलीमीटर बरसात हुई जबकि होनी चाहिए थी 42 मिलीमीटर। 2015 में पूरे देश में हरियाणा में सबसे कम 437.8 मिलीमीटर बरसात हुई यानी औसत से करीब 23 फीसदी कम। 2016 में सर्द ऋतु में महज 1.2 मिलीमीटर जबकि पूरे साल में कुल 392.9 मिलीमीटर ही बरसात हुई। 2017 में मानसून सीजन में 418.8, 2018 में 416.3, 2019 में 418, 2020 में 419.9, 2021 में 423, 2022 में 417.3, 2023 में 512.7, 2024 में 409 मिलीमीटर बरसात हुई थी। 2025 में तो प्रदेश में मानसून में 568 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। इस बार भी मानसून काफी अच्छा बताया जा रहा है। गेहूं के उत्पादन पर पड़ सकता है असर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, पंजाब व राजस्थान के बाद हरियाणा देश का प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य है। इस रबी सीजन में प्रदेश में करीब 26 लाख हैक्टेयर में गेहूं की फसल है। इस बार दिसम्बर, जनवरी एवं फरवरी माह में औसत से कम सर्दी पड़ी है। तापमान भी अधिक रहा है और कोहरा भी नहीं पड़ा। ऐसे में गेहूं के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि औसत से करीब 5 से 6 डिग्री अधिक तापमान के चलते गेहूं के अलावा सरसों की फसल पर भी असर पड़ सकता है। मिनिस्ट्री ऑफ स्टैटिक्स एंड प्रोग्राम इंप्लीमैंटेशन की ओर से जारी एन्वायरनमैंट स्टैटिक 2024 की एक रिपोर्ट के अनुसार हरियाणा में कुल भौगोलिक क्षेत्र 44212 वर्ग किलोमीटर में से महज 1559 वर्ग किलोमीटर ही वनाच्छादित क्षेत्र है। यह औसत से बहुत कम है। ऐसे में यहां मौसम का मिजाज बिगड़ा-बिगड़ा रहता है। यही वजह है कि पिछले 2 दशक में उत्तरी भारत के राज्यों में गर्मी का पीरियड बढ़ता जा रहा है और सर्दी का पीरियड सिकुड़ रहा है। 1988 में हुई थी 1108 मिलीमीटर बरसात भारतीय मौसम विभाग चंडीगढ़ के आंकड़े भी हैरान करने वाले हैं। हरियाणा में मानसून 30 जून को दस्तक देता है। 2008 में मानसून समय से पहले 13 जून को आया जबकि 1987 में मानसून 27 जुलाई को आया था। मानसून के दौरान पिछले साल 1 जून से लेकर 30 सितम्बर तक हरियाणा में 568 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। आमतौर पर मानसून में 426 मिलीमीटर बरसात होती है। आंकड़ों की बात करें तो साल 1988 में सबसे अधिक 1108 मिलीमीटर बरसात हुई थी। इसी तरह से 1995 में 939 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई। 2011 में 374 मिलीमीटर, 2018 में 415 मिलीमीटर व 2020 में 376 मिलीमीटर बरसात दर्ज की गई थी। वैसे हरियाणा में 1995 में बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई थी। 16 जिलों में 20 लाख 35 हजार एकड़ फसल प्रभावित हुई थी। 2840 गांवों और हरियाणा के अनेक शहरों के 28 लाख 87 हजार आबादी पर बाढ़ का असर पड़ा था। 

ऊर्जा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम: हरियाणा के इस जिले में बनेगा पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट, 200MW पावर जनरेशन

चंडीगढ़ प्रदेश में किसानों को निर्बाध और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के लिए सरकार हरियाणा एग्री डिस्काम नाम से तीस्सरी ऊर्जा बिजली वितरण कंपनी स्थापित करेगी। साथ ही सरकार हरियाणा हरित हाइड्रोजन नीति भी लागू करेगी। ऊर्जा क्षेत्र के बजट में बढ़ोतरी करते हुए वित्त वर्ष 2025-26 के 6,379.63 करोड़ रुपये की तुलना में वर्ष 2026-27 के लिए बजट 7.66 प्रतिशत बढ़ाकर 6,868 करोड़ रुपये निर्धारित किया है। हरियाणा एयी डिस्काम राज्य के सभी 5,084 कृषि फीडरों और 7.12 लाख कृषि उपभोक्ताओं को सेवाएं प्रदान करेगा। इसका उद्देश्य नए ट्यूबवेल कनेक्शन तेजी से जारी करना, खराब ट्रांसफार्मरों को शीघ्र बदलना और किसानों के खेतों तक नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करना है। वर्तमान में उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम 14,391 फीडरों से घरेलू, वाणिज्यिक, कृषि और औद्योगिक उपभोक्ताओं को बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। 2004-05 से 2014-15 के बीच इन दोनों निगमों ने 1,89,978 नए ट्यूबवेल कनेक्शन जारी किए थे। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत 35,000 नए सौर पंप स्थापित होंगे। 13 जिलों में 200 मेगावाट क्षमता की पराली आधारित बायोमास परियोजनाएं स्थापित होंगी। किसान अपने ट्यूबवेल पर सौर पैनल लगाकर अतिरिक्त बिजली बेच भी सकेंगे। किसानों के मौजूदा बिजली आधारित ट्यूबवेल कनेक्शनों पर खेतों में सौर ऊर्जा लगाने की अनुमति मिलेगी। ऐसे में उपयोग से बढ़ने वाली बिजली निगम खरीदेंगे। प्रदेश में स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पानीपत में पहला ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट बनेगा। वर्ष 2030 तक 250 किलो टन प्रतिवर्ष हरित हाइड्रोजन उत्पादन और 2 गीगावाट इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत 2.2 लाख घरों की छतों पर सौर संयंत्र लगेंगे। गैर बकायेदार उपभोक्ताओं और अंत्योदय परिवारों को इसके लिए ब्याज मुक्त सहायता भी दी जाएगी। शेष 68 लाख उपभोक्ताओं के लिए स्मार्ट मीटर लगाए जाएंगे।

हाई अलर्ट पर हरियाणा का यह जिला, 800+ पुलिस जवानों की ड्यूटी; प्रशासन ने क्यों उठाया बड़ा कदम?

रेवाड़ी होली (धुलंडी) के अवसर पर शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला पुलिस ने व्यापक एक्शन प्लान तैयार कर लिया है। पुलिस अधीक्षक हेमेंद्र कुमार मीणा के निर्देश पर जिलेभर में सख्त व्यवस्था की जा रही है, ताकि शराब पीकर हुड़दंग करने वाले असामाजिक तत्वों पर लगाम लगाई जा सके और त्योहार को खुशहाली के साथ मनाया जा सके। जिले में कुल 25 नाके बनाए गए हैं, जिनमें 20 स्थानीय और 5 इंटरस्टेट नाके शामिल हैं। इन सभी नाकों पर 800 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। एल्को-सेंसर (एल्कोमीटर) की मदद से शराब पीकर वाहन चलाने वालों की जांच की जाएगी। इसके अलावा, जिले के विभिन्न गांवों में लगने वाले 22 मेलों में 350 पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो। सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए 42 राइडर टीमें, 25 ईआरवी (इमरजेंसी रिस्पॉन्स वाहन) और 8 पीसीआर वाहन फील्ड में सक्रिय रहेंगे। एसपी हेमेंद्र मीणा ने कहा कि होली के पावन पर्व में खलल डालने वाले या हुड़दंग मचाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि रंगों का यह पर्व भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक है, इसलिए सभी नागरिक इसे शांति और सद्भाव के साथ मनाएं। वहीं, त्योहार के दिन ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों को परिवार की कमी महसूस न हो, इसके लिए एक अनोखी पहल भी की गई है। डीएसपी हैडक्वार्टर डॉ. रविंद्र कुमार ने बताया कि एसपी के आदेश पर सभी नाकों पर तैनात पुलिसकर्मियों को एसएचओ, डीएसपी और स्वयं एसपी मौके पर पहुंचकर मिठाइयां खिलाएंगे और उनका मनोबल बढ़ाएंगे। पुलिस प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, नशे में वाहन न चलाएं और सुरक्षित व जिम्मेदार तरीके से होली का पर्व मनाएं।

विकास और पर्यटन पर फोकस: पिजौंर, खरखौदा व मानेसर में बनेंगे वेडिंग डेस्टिनेशन, बोले नायब सिंह सैनी

सोनीपत बजट को लेकर मंगलवार को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि कल पेश किए गए बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। बजट में महिलाओं का ध्यान रखा गया है। युवाओं, किसानों और गरीबों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विकसित हरियाणा गति से आगे बढ़ेगा। यह पीएम मोदी के संकल्प को पूरा करने वाला बजट है। पीएम मोदी के विकसित भारत के संकल्प को हरियाणा सशक्त करेगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में एक शब्द कहा था। उन्होंने कहा कि भारत से बड़ी संख्या में लोग शादियों के लिए विदेश जाते हैं। यहां के विवाह स्थलों में ऐसी सुविधाएं होनी चाहिए कि हमारे लोगों को विदेश जाने की जरूरत ही न पड़े, उन्हें ये सुविधाएं यहीं मिल जाएं। उन्होंने कहा कि कल बजट में मैंने प्रावधान किया कि हम पिजौंर, खरखौदा और मानेसर के पास तीन वेडिंग डेस्टिनेशन खड़े करेंगे जिससे विदेश के लोग यहां शादी करने आएं और हमारे लोग बाहर न जाएं वो व्यवस्था हम लोग खड़ी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सोमवार को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का 2.23 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया। इस बार हरियाणा सरकार के बजट में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर फोकस किया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट पेश करते हुए सोमवार को 'हरियाणा एग्री डिस्कॉम' नाम की एक तीसरी बिजली डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी बनाने की घोषणा की, जो खासतौर पर किसान समुदाय की जरूरतों को पूरा करने के लिए होगी। वित्त विभाग भी संभाल रहे मुख्यमंत्री सैनी ने अपना दूसरा बजट पेश करते हुए कहा कि राजकोषीय घाटा 40,293.17 करोड़ रुपए रहने का अनुमान है, जो सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.65 प्रतिशत है। उन्होंने बताया कि राजस्व घाटा जीडीपी का 0.87 प्रतिशत और प्रभावी राजस्व घाटा 0.41 प्रतिशत रहने का अनुमान है। पूंजीगत व्यय जीडीपी का 1.86 प्रतिशत और प्रभावी पूंजीगत व्यय 2.32 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

हरियाणा में बैजलपुर की देवर-भाभी की ‘कोरड़ा होली’ बनी पहचान

फतेहाबाद. होली के रंग जहां देशभर में मस्ती और उमंग के प्रतीक हैं, वहीं जिले के गांव बैजलपुर में यह पर्व सामाजिक सौहार्द और परंपरा के संरक्षण का अनोखा संदेश देता है। पिछले 22 वर्षों से यहां दुलहंडी पर मनाई जा रही ‘कोरड़ा होली’ अब केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि गांव की पहचान बन चुकी है। 4 से 6 मार्च तक चलने वाले इस तीन दिवसीय फाग उत्सव में 20 साल के युवाओं से लेकर 70 वर्ष तक के बुजुर्ग देवर-भाभी जोश के साथ हिस्सा लेते हैं। गांव के मुख्य चौक में जैसे ही ढोल की थाप और फाग के पारंपरिक गीत गूंजते हैं, पूरा माहौल रंगों से नहीं, बल्कि रिश्तों की गर्माहट से सराबोर हो उठता है। वर्ष 2004 में गांव में बढ़ते होली हुड़दंग और पानी की बर्बादी को देखते हुए हवलदार सतबीर सिंह झाझडिया, मास्टर रोहताश भाखर और धर्मवीर कादियान के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया। उद्देश्य स्पष्ट था होली की मस्ती भी रहे और सामाजिक मर्यादा भी कायम रहे। कमेटी की पहल पर सामूहिक फाग उत्सव की शुरुआत हुई, जिसमें पूरे गांव ने एक स्थान पर एकत्र होकर होली खेलने की परंपरा अपनाई। धीरे-धीरे यह आयोजन ‘कोरड़ा होली’ के नाम से प्रसिद्ध हो गया और आज यह आसपास के गांवों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन चुका है। कढ़ाई का पानी और रस्सी के कोरड़े इस अनोखी होली की सबसे खास बात है इसकी शैली। गांव के चौक में लोहे की बड़ी कढ़ाई पानी से भरकर रखी जाती है। पास में टैंकरों में भी पानी की व्यवस्था रहती है। एक ओर महिलाएं चुन्नी, कपड़ों और मजबूत रस्सियों से बने कोरड़ों के साथ खड़ी रहती हैं, तो दूसरी ओर रिश्ते में देवर लगने वाले युवा तैयार रहते हैं। महिलाएं हंसी-ठिठोली के बीच कोरड़ों से वार करती हैं और युवक कढ़ाई से पानी भरकर उन पर डालते हैं। यह दृश्य देखने लायक होता है। चारों ओर फाग के गीत, तालियां और ठहाके गूंजते हैं। खास बात यह है कि पूरा आयोजन मर्यादा और सम्मान की सीमा में रहता है। ग्रामीण परिवेश में देवर-भाभी का रिश्ता हमेशा हंसी-मजाक और अपनत्व से जुड़ा रहा है। ‘कोरड़ा होली’ इसी रिश्ते की सजीव झलक पेश करती है, जहां कोरड़ों की मार भी स्नेह का प्रतीक बन जाती है और युवा इसे खुशी-खुशी सहते हैं। सम्मान से बढ़ता उत्साह उत्सव के दौरान बेहतर प्रदर्शन करने वाले देवर-भाभी के जोड़ों को कमेटी की ओर से सम्मानित किया जाता है। विजेताओं को आकर्षक उपहार दिए जाते हैं, जिससे युवाओं में उत्साह दोगुना हो जाता है। ग्राम पंचायत बैजलपुर के सरपंच हेमंत बैजलपुरिया के अनुसार, इस परंपरा का मूल उद्देश्य भाईचारे को मजबूत करना और पानी की अनावश्यक बर्बादी रोकना है।

होली पर मिलावटी रंग और मिठाइयों की बिक्री पर कड़ी नजर

पंचकूला. होली पर्व को सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक वातावरण में मनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त सतपाल शर्मा ने फूड सेफ्टी विभाग, जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक तथा संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले की सभी दुकानों, मिठाई की दुकानों और रंगों की बिक्री करने वाले प्रतिष्ठानों का विशेष अभियान चलाकर निरीक्षण किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बाजारों में किसी भी प्रकार का मिलावटी रंग, नकली या अस्वास्थ्यकर मिठाई और खाद्य सामग्री बिक्री के लिए उपलब्ध न हो। उपायुक्त ने कहा कि होली के अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मिठाइयों और रंगों की खरीदारी करते हैं। यदि इन वस्तुओं में मिलावट पाई जाती है तो यह लोगों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बाजारों में नियमित रूप से सैंपलिंग की जाए और संदिग्ध वस्तुओं की तुरंत जांच करवाई जाए। किसी भी दुकानदार द्वारा मिलावटी रंग या मिठाई बेचते पाए जाने पर उसके विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उपायुक्त ने पंचकूला और कालका के एसडीएम को भी अपने-अपने क्षेत्रों में सघन निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों और अस्थायी स्टॉलों पर नजर रखी जाए, ताकि त्योहार की आड़ में कोई भी व्यक्ति नियमों की अनदेखी न कर सके। साथ ही उन्होंने आम नागरिकों से भी अपील की कि वे अधिकृत दुकानों से ही खरीदारी करें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध वस्तु की सूचना प्रशासन को दें। होलिका दहन की दीं शुभकामनाएं उपायुक्त ने जिलावासियों को होलिका दहन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि होली रंगों, उल्लास और भाईचारे का प्रतीक पर्व है। यह त्योहार समाज में प्रेम, सौहार्द और एकता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इस दिन भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति और सत्य की विजय की कथा स्मरण की जाती है। श्रद्धालु पवित्र अग्नि के समक्ष नकारात्मकता का त्याग कर सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि त्योहार को शांति, सद्भाव और आपसी सम्मान के साथ मनाएं तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, ताकि सभी के लिए होली का पर्व सुरक्षित और आनंदमय बन सके।

हरियाणा में पानी की बर्बादी पर 6079 रुपये फाइन और कनेक्शन होगा कट

पंचकूला. सेक्टर-26, सेक्टर-28 तथा आशियाना फ्लैट्स, पाकेट-ए और पाकेट-बी के प्लाट धारकों के लिए सार्वजनिक चेतावनी जारी की गई है। संबंधित विभाग ने स्पष्ट किया है कि जिन मकानों की पानी की टंकियां लीकेज हैं या किसी कारणवश पानी ओवरफ्लो होकर छत और सड़कों पर बह रहा है, उन्हें तुरंत ठीक कराया जाए, अन्यथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जारी सार्वजनिक नोटिस के अनुसार यदि किसी भी प्लॉट से पानी की बर्बादी या लीकेज पाया जाता है तो संबंधित मालिक का चालान काटा जाएगा। विभाग ने बताया कि चालान राशि 6,078 रुपये के साथ 2,000 रुपये अतिरिक्त जुर्माना पानी के बिल में जोड़ दिया जाएगा। सड़कों पर जलभराव से भी दिक्कत निर्धारित समय में जुर्माना जमा न कराने की स्थिति में संबंधित मकान का पानी का कनेक्शन काट दिया जाएगा। अधिकारियों ने कहा है कि लगातार मिल रही शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है। पानी की बर्बादी से न केवल जल संकट गहराता है, बल्कि सड़कों पर जलभराव और फिसलन से दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। दंडात्मक कार्रवाई अनिवार्य कार्यकारी अभियंता, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (मंडल-2), पंचकूला की ओर से जारी इस नोटिस में सभी निवासियों से अपील की गई है कि वे अपनी पानी की टंकियों, पाइपलाइन और वाल्व की समय-समय पर जांच कराएं तथा किसी भी प्रकार की लीकेज तुरंत ठीक करवाएं, ताकि दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सके। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि आगामी निरीक्षण के दौरान नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर बिना किसी पूर्व सूचना के चालान और अन्य कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

पंचकूला के जंगल में हजारों पेड़ काटने वाले तस्करों पर जल्द होगा एक्शन

बरवाला. आसरेवाली क्षेत्र में खैर के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले में आज दोपहर 1 बजे चार सदस्यों की टीम मौके पर पहुंची। टीम शाम 4 बजे तक कई घंटों तक जंगल के भीतर सघन छानबीन की और कटे हुए पेड़ों के ठूंठ व अन्य साक्ष्यों को खंगाला। अब पूरी कार्यवाही टीम की इसी जांच रिपोर्ट पर टिकी है। बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यह खैर की कटाई कुछ दिनों में नहीं हुई बल्कि लंबे समय से चल रही थी। ऐसे में सवाल उन अधिकारियों और जिम्मेदार कर्मचारियों पर भी उठ रहा है जिनकी जिम्मेदारी इस वाइल्डलाइफ सेंचुरी की रखवाली करने की थी। उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र पहले वन विभाग के अधीन था, लेकिन वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी का दायरा बढ़ने के बाद इसे वाइल्डलाइफ विभाग के अधीन कर दिया गया था। जब यह क्षेत्र वन विभाग के पास था, तब गांव आसरेवाली के बाहर एक नाका लगाया गया था, जहां नियमित चेकिंग होती थी। बताया जा रहा है कि क्षेत्र वाइल्डलाइफ के अधीन आते ही नाका हटा दिया गया, जिसके बाद खैर की तस्करी तेजी से बढ़ने लगी। यह खेल कुछ दिनों का नहीं, बल्कि लंबे समय से चल रहा है और इसमें हजारों पेड़ों की कटाई की आशंका जताई जा रही है। हैरानी की बात यह भी है कि क्षेत्र में कथित रूप से खनन गतिविधियां भी जारी रहती हैं, जबकि एरिया में प्रवेश से पहले कोई स्थायी नाका या चेकिंग व्यवस्था नहीं है। संबंधित इलाके में तीन से चार खोल बने हुए बताए जा रहे हैं, जहां सबसे अधिक खैर के पेड़ काटे गए हैं। अक्टूबर 2025 में भी वायरल हुई थी फोटो, पर नहीं हुई कार्रवाई अक्टूबर 2025 में भी इंटरनेट मीडिया पर आसरेवाली में खैर के कटे हुए पेड़ों की करीब 30 फोटो वायरल हुई थी, लेकिन तब इन चीजों की जांच नहीं की गई। इसके बाद से लगातार खैर चोरी के मामले बढ़ते गए। अब जाकर जब मामला मंत्री के संज्ञान में पहुंचा है, तो विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। आज टीम की घंटों चली इस छानबीन के बाद अब रिपोर्ट का इंतजार है कि विभाग आगे क्या कार्रवाई करता है। कल 10 टीमों के पहुंचने की संभावना इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विभाग अब बड़े स्तर पर एक्शन की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, कल सुबह क्षेत्र में 10 अलग-अलग टीमों के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है, जो पूरे प्रभावित इलाके का कोना-कोना खंगालेंगी।