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ब्यौहारी स्टेशन पर ट्रेन की बोगी में आग, शहडोल में अफरा-तफरी; टला बड़ा हादसा

शहडोल. जिले के ब्यौहारी रेलवे स्टेशन पर रविवार दोपहर अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। प्लेटफॉर्म नंबर एक के पास साइडिंग में खड़ी रेलवे ट्रैक मशीन की बोगी में लगी आग से यहां हड़कंप मच गया। हालांकि राहत टीम की तत्परता से स्थिति पर जल्द ही नियंत्रण पा लिया गया और बड़ा हादसा टल गया। क्या है मामला जानकारी के अनुसार, रेलवे स्टेशन के साइडिंग ट्रैक पर चार कोच वाली वर्कशॉप कम रेस्ट फॉर ट्रैक मशीन खड़ी थी। इसी दौरान इनमें से एक कोच, जिसका नंबर ईसीओ 994129 बताया जा रहा है, उसमें अचानक अज्ञात कारणों से आग भड़क उठी। यह अच्छा रहा कि घटना के समय बोगी के अंदर कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था। घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। दमकल कर्मियों ने तत्परता दिखाते हुए आग पर काबू पाया और उसे फैलने से रोक लिया। यदि समय पर आग पर नियंत्रण नहीं पाया जाता, तो पास खड़ी अन्य बोगियां भी इसकी चपेट में आ सकती थीं। मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया थाना प्रभारी जिया उल हक भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। वहीं ब्यौहारी आरपीएफ चौकी प्रभारी गिरीश कुमार मिश्रा ने बताया कि घटना के समय ट्रैक स्टाफ कार्य के लिए बाहर गया हुआ था। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है, हालांकि वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए जांच जारी है। रेलवे अधिकारियों को घटना की सूचना दे दी गई है।  

2 दिन में किसानों को 6 करोड़ 37 लाख का भुगतान

भोपाल.  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूँ की खरीदी जारी है। जिला प्रशासन द्वारा स्थानीय खरीदी केन्द्रों पर सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को खरीदी केन्द्रों पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाये। उन्हें गेहूँ बेचने के लिये इंतजार नहीं करना पड़े। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अभी तक 7 हज़ार से अधिक किसानों से 3 लाख 6 हजार 190 क्विंटल गेहूँ की खरीदी की जा चुकी है। दो दिन में किसानों को 6 करोड़ 37 लाख रुपए का भुगतान भी उनके बैंक खाते में किया जा चुका है। गेहूँ का उपार्जन इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में 9 अप्रैल से शुरू हो चुका है। उन्होंने बताया कि शेष संभागों में 15 अप्रैल से गेहूँ का उपार्जन शुरू किया जायेगा। अभी तक एक लाख 90 हजार 261 किसानों द्वारा 85 लाख 12 हजार 830 क्विंटल गेहूँ के विक्रय के लिये स्लॉट बुक किये जा चुके हैं। गेहूँ खरीदी के लिये 3171 उपार्जन केन्द्र बनाये गये हैं। गेहूं की खरीदी कार्यालयीन दिवसों में होती है। उपार्जन केंद्र में किसानों के लिये गेहूं बिक्री की सभी सुविधाएं : मंत्री राजपूत खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि जिन जिलों में गेहूँ उपार्जन की प्रक्रिया शुरू हो गई है, वहाँ गेहूं विक्रय की सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। उपार्जन केन्द्रों में छायादार स्थान में बैठने और पेय जल की समुचित सुविधा उपलब्ध कराई गई है। केंद्र में बारदाने ,तौल कांटे सिलाई मशीन, कंप्यूटर, इंटरनेट, गुणवत्ता परीक्षण उपकरण और उपज की साफ सफाई के लिए पंखा, छनना आदि की व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित की गई हैं। खाद्य मंत्री राजपूत ने बताया है कि रबी विपणन वर्ष 2026-27 में किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा घोषित 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। गेहूँ के उपार्जन के लिये आवश्यक बारदानों की व्यवस्था की जा चुकी है। उपार्जित गेहूँ को रखने के लिये जूट बारदानों के साथ ही पीपी/एचडीपी बैग एवं जूट के भर्ती बारदाने का उपयोग किया जा रहा है। समर्थन मूल्य पर उपार्जित गेहूँ के सुरक्षित भंडारण की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। उपार्जित गेहूं में से 1लाख 5 हजार 260 क्विंटल गेहूं का परिवहन किया जा चुका है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश में गेहूँ उपार्जन के लिये इस वर्ष रिकार्ड 19 लाख 4 हजार किसानों ने पंजीयन कराया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 लाख 60 हजार अधिक है। विगत वर्ष समर्थन मूल्य पर लगभग 77 लाख मीट्रिक टन गेहूँ का उपार्जन किया गया था। इस वर्ष युद्व की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद किसानों के हित में सरकार द्वारा 78 लाख मीट्रिक टन गेहूँ के उपार्जन का लक्ष्य रखा गया है, जो कि पिछले वर्ष से एक लाख मीट्रिक टन अधिक है। 

राज्यमंत्री डॉ. गौतम टेटवाल ने शासकीय स्विमिंग पूल का किया लोकार्पण

राजगढ़.  राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रोजगार कौशल विकास एवं रोजगार विभाग, मध्य प्रदेश शासन डॉ. गौतम टेटवाल ने रविवार को राजगढ़ प्रवास के दौरान जिला मुख्यालय स्थित शासकीय स्विमिंग पूल का विधिवत फीता काटकर लोकार्पण किया। इस अवसर पर राज्यमंत्री डॉ. टेटवाल ने कहा कि जिले में खेल सुविधाओं का विस्तार युवाओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि स्विमिंग पूल के संचालन से युवाओं को तैराकी जैसी महत्वपूर्ण खेल गतिविधि का अवसर मिलेगा, जिससे उनकी प्रतिभा निखरेगी और वे राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर जिले का नाम रोशन कर सकेंगे। कार्यक्रम में कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा ने बताया कि जिले में खेल अधोसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्विमिंग पूल की सुविधा शुरू होने से आमजन, विशेषकर युवाओं को बेहतर खेल वातावरण उपलब्ध होगा। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अमित तोलानी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी-कर्मचारी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

फ्लाइट सेफ्टी पर फोकस: अमृतसर एयरपोर्ट मैनेजमेंट सख्त, बर्ड-हिट और अवैध निर्माणों पर रोक

अमृतसर. अमृतसर के अंतर्राष्ट्रीय श्री गुरु रामदास जी एयरपोर्ट पर विमानों के सुरक्षित संचालन और पर्यावरण प्रबंधन को लेकर शनिवार को 'एयरपोर्ट एनवायरनमेंट मैनेजमेंट केन्द्र (ए.ई.एम.सी.) की एक महत्वपूर्ण मीटिंग का आयोजन किया गया। एयरपोर्ट डायरेक्टर भूपेंद्र सिंह की अध्यक्षता में ए.ए.आई. बिजनेस सेंटर में हुई इस बैठक में विमानों की सुरक्षा में बाधक बनने वाले कारणों पर विस्तार से मंथन किया गया। मीटिंग के दौरान नागरिक उड्डयन विभाग, स्थानीय प्रशासन व पुलिस विभाग के अतिरिक्त एक दर्जन से अधिक विभागों के अधिकारियों ने भी संयुक्त रूप से भाग लिया, ताकि इन चुनौतियों का समाधान निकाला जा सके। इस दौरान मुख्य तौर पर एयरपोर्ट निर्देशक भूपेंद्र सिंह, भारतीय वायु सेना से रिपुदमन कौर मान, कैप्टन अजय पाल सिंह, खुशबीर सिंह एस.डी.एम., एस.पी. देहाती आदित्य वारियर, सी.आई.एस.एफ से तुषार डी., जंगलात विभाग से डा. दिलप्रीत कौर, डा. जसपाल सिंह (डी.एच.ओ.), फूड सप्लाई विभाग से संदीप सिंह, इंडिगो एयरलाइंस से मैनेजर सुनंदा आले, विमानपत्तन प्राधिकरण से वरुण प्रताप, पवन, रतन सिंह, लोकल पुलिस से मैडम कलजीत कौर आदि उपस्थित रहे। पक्षियों और वन्यजीवों के खतरे पर रहा फोक्स बैठक के दौरान समिति ने इस बात पर चिंता जताई कि हवाई अड्डे के आस-पास पक्षियों और वन्यजीवों की बढ़ती गतिविधि विमानों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। एयरपोर्ट के निदेशक भूपेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया कि ‘बर्ड-हिट’ जैसी घटनाओं को रोकने के लिए निरंतर और प्रभावी कदम उठाना अनिवार्य है। पिछली बार जब मीटिंग 22 मई 2025 को हुई थी, जिसके बाद से अब तक के सुरक्षा उपायों की भी समीक्षा की गई। इन मुख्य मुद्दों पर हुई चर्चा एयरपोर्ट डायरेक्टर ने बताया कि इस मीटिंग में पक्षियों के खतरे के साथ-साथ कई आधुनिक चुनौतियों पर भी गहनता से अध्ययन किया गया, जो लैंडिंग और टेक ऑफ से संबंधित थे। उन्होंने कहा कि एयरपोर्ट पर लैंडिंग और टेक ऑफ पर हमारी पैनी नजर रहती है। लेजर बीम का खतरा  लैंडिंग और टेक-ऑफ के समय विमानों पर लेजर लाइट डालने की घटनाओं पर रोक लगाने की बात कही गई। तर्क दिया गया कि इनसे पायलटों की दृश्यता प्रभावित होती है। अवैध ड्रोन विमान मूवमेंट के लिए खतरा  मीटिंग के दौरान हवाई अड्डे के प्रतिबंधित क्षेत्रों में अनधिकृत ड्रोन उड़ानों पर सख्ती बरतने के निर्देश दिए गए। हालांकि एयरपोर्ट का प्रतिबंधित क्षेत्र बहुत सीमित है, जबकि इसके निकटवर्ती क्षेत्रों के लिए स्थानीय प्रशासन और बलों की भी जिम्मेदारी बनती है। हवाई अड्डे के आस-पास अवैध निर्माणों पर फोक्स  एयरपोर्ट परिसर के पास नियमों के विरुद्ध हो रहे निर्माण कार्यों को लेकर खुलकर चर्चा हुई। एयरपोर्ट पर उपस्थित बुद्धिजीवियों द्वारा इसे सुरक्षा के लिहाज से गंभीर माना गया। डायरैक्टर ने कहा कि एयरपोर्ट एक संवेदनशील स्थल है और इसका आस-पास भी अति सुरक्षित होना चाहिए। पशुओं के अवशेष व बूचड़खानों से पक्षी आकर्षित  हवाई अड्डे के आस-पास स्थित अनधिकृत झुग्गी-बस्तियों, खाने-पीने की दुकानों और अवैध बूचड़खानों को लेकर समिति ने सख्त रुख अपनाया है। मीटिंग में कहा गया कि खुले में फेंका गया कचरा, पशुओं के अवशेष, खुला सीवरेज व नालियां ही मुख्य कारण हैं, जिनसे भारी संख्या में पक्षी हवाई अड्डे की ओर आकर्षित होते हैं।

‘राजनीतिक दल से बढ़कर विचारधारा’—भाजपा पर किशन सूर्यवंशी का बड़ा बयान

भोपाल. नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी जी ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाअभियान 2026 के अंतर्गत आज मध्य विधानसभा के महाराणा प्रताप मंडल में आयोजित प्रशिक्षण वर्ग में मुख्य वक्ता के रूप में सहभागिता की। इस अवसर पर सूर्यवंशी जी ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन की विचारधारा, कार्यपद्धति एवं जनसेवा के मूल्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता ही संगठन की सबसे बड़ी ताकत हैं और उनके माध्यम से ही सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को समाज के अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनहितैषी योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा करते हुए कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे इन योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक पहुंचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही, उन्होंने संगठन को और अधिक मजबूत बनाने एवं सेवा के संकल्प को निरंतर आगे बढ़ाने पर जोर दिया। प्रशिक्षण वर्ग के दौरान कार्यकर्ताओं के साथ आत्मीय संवाद भी हुआ, जिसमें विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श कर संगठनात्मक गतिविधियों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में मार्गदर्शन प्रदान किया गया। सूर्यवंशी ने कहा कि भाजपा केवल राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक राष्ट्रवादी विचारधारा है जिसके हम सभी संवाहक हैं इसके लिए हमारे कई नेताओं ने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया है ।

ग्रामीणों तक पहुंचा विकास: कोंडागांव में शिविर के जरिए योजनाओं का लाभ, कलेक्टर ने दिए निर्देश

कोंडागांव/रायपुर. राज्य शासन के निर्देशानुसार विकासखण्डवार जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविरों का लगातार आयोजन किया जा रहा है, जिसके माध्यम से शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ दूरस्थ अंचलों के गांवों तक पहुंचाया जा रहा है। इसी क्रम में बीते दिनों कोंडागांव जिले के केशकाल विकासखंड अंतर्गत जिले के सीमा पर स्थित ग्राम चुरेगांव में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों को शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं से लाभान्वित किया गया। शिविर में कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने ग्रामीणों से आत्मीय संवाद कर उनकी समस्याओं को गंभीरता के साथ सुना। इस दौरान कलेक्टर, जिला पंचायत सदस्य श्री कपिल नाग, जनपद सदस्य श्री घसियाराम सेठिया सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन कर प्राप्त आवेदनों को जानकारी ली और निराकरण हेतु निर्देशित किया। कलेक्टर ने कहा कि इन शिविरों का उद्देश्य शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाना है, ताकि ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान हेतु ब्लॉक या जिला मुख्यालय तक न आना पड़े। उन्होंने आश्वस्त किया कि शिविर में प्राप्त सभी आवेदनों एवं समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया जाएगा। उन्होंने श्रम पंजीयन के लाभों की जानकारी देते हुए ग्रामीण महिलाओं को आजीविका संवर्धन हेतु ई-रिक्शा योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। साथ ही पशुपालन विभाग की योजनाओं से जुड़ने एवं विकसित भारत जीरामजी योजना के अंतर्गत शेड निर्माण का लाभ उठाने की अपील की। शिविर में ग्रामवासियों से विभिन्न मांगों और समस्याओं को लेकर कुल 84 आवेदन प्राप्त हुए। शिविर स्थल में समाज कल्याण विभाग द्वारा दिव्यांगजनों को 04 ट्रायसायकल एवं 01 बैसाखी वितरित की गई। मुख्यमंत्री पेंशन सहायता योजना के अंतर्गत 03 हितग्राहियों को पेंशन स्वीकृत की गई। इसी प्रकार 13 आधार कार्ड, 7 जाति प्रमाण पत्र, श्रम विभाग द्वारा 11 श्रम कार्ड, खाद्य विभाग द्वारा 14 राशन कार्ड, उद्यान विभाग द्वारा 03 वर्मी बेड प्रदान किए गए। राजस्व विभाग द्वारा 15 किसान किताब, कृषि विभाग द्वारा 10 हितग्राहियों को रागी बीज वितरण और वन विभाग द्वारा राजमोहिनी देवी तेंदूपत्ता संग्राहक बीमा योजना के अंतर्गत ग्राम हिचका की श्रीमती सुनीता मंडावी को 02 लाख रुपए एवं ग्राम कावागांव की श्रीमती सुपोतिन कोर्राम को 30 हजार रुपए की सहायता राशि का चेक प्रदान किया गया। साथ ही वन विभाग द्वारा 200 पौधे का भी वितरण किया गया। कलेक्टर ने लिया मड़िया पेज का आनंद कभी लाल आतंक से प्रभावित रहे चुरेगांव जैसे अंदरूनी गांव में आयोजित इस शिविर के दौरान ग्रामीणों द्वारा पारंपरिक पेय ‘मड़िया पेज’ की व्यवस्था की गई थी। कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना ने ग्रामीण महिलाओं के बीच पहुंचकर मड़िया पेज का स्वाद लिया और उनकी सराहना की। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ अविनाश भोई, एसडीएम आकांक्षा नायक, तहसीलदार विजय मिश्रा, संतोष सिन्हा, जनपद पंचायत सीईओ अनुराग सिन्हा, सरपंच, स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

रेल यात्रा में संदेह: 167 बच्चों को कटनी में रोका गया, मानव तस्करी के एंगल से जांच शुरू

कटनी. बिहार से महाराष्ट्र पटना पुणे एक्सप्रेस से ले जाए जा रहे डेढ़ सौ से अधिक मुस्लिम बच्चों को मानव तस्करी की आशंका पर देर रात कटनी स्टेशन में उतारा गया। बाल कल्याण समिति और रेल पुलिस ने बच्चों को बाल सुरक्षा गृह में ठहराया है और जांच कर रही है। शनिवार की रात को महिला बाल विकास विभाग और आरपीएफ को सामाजिक संगठन से सूचना मिली कि पटना पुणे ट्रेन से बड़ी संख्या 7 से 15 वर्ष के बच्चों को लेकर महाराष्ट्र ले जा रहे है और मानव तस्करी की आशंका है। मामला की गंभीरता को देखते हुए रेलवे सुरक्षा बल, जीआरपीएफ, महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी कर्मचारी और बाल सुरक्षा अधिकारी मौके पर पहुंचे। ट्रेन के कटनी स्टेशन पहुंचते ही, सभी बच्चों को ट्रेन से नीचे उतारकर अपनी निगरानी में लिया। ट्रेन से 167 बच्चे उतारे गए और उनसे काउंसलिंग की गई। मदरसे में दाखिला कराने की बात सामने आई मनीष तिवारी बाल सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि ट्रेन से उतारे गए बच्चों में अधिकांश मुस्लिम समुदाय के हैं, जिन्हें बिहार से महाराष्ट्र जाया जा रहा था। बच्चों को ले जाने वालों से दस्तावेज मिले हैं, जिसमें मदरसे में बच्चों का दाखिला कराने की बात सामने आई है। आरपीएफ और बाल सुरक्षा अधिकारी के अलावा बाल विकास कल्याण की टीम मामले की जांच कर रही है। रात को 80 बच्चों को जबलपुर के बाल गृह और बाकी को कटनी के बाल गृह में रखा गया है। बिहार में जिन क्षेत्रों से बच्चे ले जाए जा रहे थे, वहां से संपर्क किया जा रहा है और उसके बाद वास्तविक बात सामने आ सकेगी।

उप मुख्यमंत्री शुक्ल बोले – राज्य सरकार शासकीय संस्थानों में उच्च स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय, रीवा में नव स्थापित गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में अत्याधुनिक उपकरणों का निवास कार्यालय भोपाल से वर्चुअल लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि आमजन को शासकीय संस्थानों में उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराने की सरकार की प्रतिबद्धता को साकार करती है। उन्होंने नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल), सिंगरौली का आभार व्यक्त किया। एनसीएल ने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के अंतर्गत इन आधुनिक मशीनों की स्थापना में सहयोग किया है। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि इस सुविधा से न केवल मरीजों को बेहतर उपचार मिलेगा, बल्कि चिकित्सा विद्यार्थियों को भी उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त होगा। उप मुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा कि सरकार निरंतर प्रयासरत है कि प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों एवं अस्पतालों को अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित किया जाए, जिससे मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर न रहना पड़े। उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रकार की पहल चिकित्सा शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को भी नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी। नव स्थापित गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग में 20 बेड की व्यवस्था की गई है, जिसमें 16 सामान्य बेड एवं 4 आईसीयू बेड शामिल हैं। विभाग में एडवांस्ड गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी स्किल लैब की स्थापना की गई है, जो आधुनिक इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी तकनीकों से सुसज्जित है। इन अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से जटिल रोगों जैसे लिवर संबंधी बीमारियाँ, पित्त नली की पथरी, कैंसरजनित पीलिया, पैंक्रियाटाइटिस, आंतों के रोग, अल्सरेटिव कोलाइटिस तथा अन्य गंभीर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिकल समस्याओं का सटीक एवं प्रभावी उपचार अब स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा। ये मशीने अत्यंत उन्नत डायग्नोस्टिक एवं चिकित्सीय प्रक्रियाओं को कम समय में, अधिक सटीकता के साथ संपन्न करने में सक्षम हैं। इंटरवेंशनल एंडोस्कोपी के माध्यम से बिना बड़े ऑपरेशन के कई जटिल प्रक्रियाएँ की जा सकती हैं, जिससे मरीजों को कम दर्द, शीघ्र रिकवरी एवं कम खर्च में उपचार उपलब्ध होता है। विभाग द्वारा 6 अप्रैल से संचालन प्रारंभ होने के पश्चात अब तक 18 सफल प्रक्रियाएँ संपन्न की जा चुकी हैं, जो इसकी उपयोगिता और दक्षता को दर्शाता है। इस अवसर पर सांसद जनार्दन मिश्र, डीन डॉ सुनील अग्रवाल, प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष, गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग डॉ एम एच उस्मानी सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, चिकित्सक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।  

आबू रोड में बड़ा फर्जीवाड़ा: 2023 से 2026 तक प्रमाण पत्रों की जांच के आदेश

स‍िरोही स‍िरोही के आबू रोड में फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने के मामले में 7 ग्राम विकास अधिकारी (VDO) को सस्‍पेंड कर द‍िया गया है. जांच पूरी होने तक न‍िलंब‍ित रहेंगे. मामले में जांच टीम गठ‍ित कर दी गई है. आबू रोड की 32 ग्राम पंचायत में साल 2023 से 2026 तक जारी सभी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र की जांच के न‍िर्देश द‍िए गए हैं. डीएम ने 10 द‍िन में र‍िपोर्ट देने के न‍िर्देश द‍िए हैं. शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई   सबसे पहले जिला परिषद सीईओ को शिकायत दी गई थी, लेकिन यहां पर कार्रवाई नहीं हुई तो सीएमओ में शिकायत की. इसके बाद जिला कलेक्टर ने टीम का गठन करके र‍िपोर्ट मांगी है.  जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी बनाए   प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह फर्जी प्रमाण पत्र बीमा क्लेम पाने के ल‍िए बनाए गए थे. आबू रोड के खडात में 42, सियावा में 24, उपलागढ़ में 95 प्रमाण पत्र और निचलागढ़ में 40 फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनाए गए हैं. निचलागढ़ में 154 फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मामले सामने आए हैं. प्रमाण पत्र पर ग्राम विकास अधिकारी के हस्ताक्षर पाए गए हैं. जिला परिषद को कई बार इसकी शिकायत की गई, इसके बाद भी जिला परिषद के सीईओ ने कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे यह प्रतीत हो रहा है कि इस पूरे प्रकरण में जिला परिषद के अधिकारियों का संरक्षण सामने आ रहा है.

लखपति दीदी सुमा उइके : संघर्ष से सफलता तक की प्रेरक कहानी

भोपाल.  बालाघाट जिले के कटंगी विकासखंड के ग्राम भिजयापार की श्रीमती सुमा उइके आज “लखपति दीदी” के रूप में अपनी पहचान बना चुकी हैं। उनकी सफलता की कहानी इतनी प्रेरणादायक है कि इसका उल्लेख प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 29 जून 2025 को प्रसारित “मन की बात” कार्यक्रम में भी किया गया। संघर्षों से भरी थी शुरुआत जनजातीय परिवार से आने वाली सुमा उइके का जीवन पहले बेहद सीमित दायरे में था। वे केवल घर-गृहस्थी तक ही सीमित थीं और परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी था। उनकी व्यक्तिगत मासिक आय मात्र 4500 रुपए थी, जिससे परिवार का भरण-पोषण करना बेहद कठिन था। स्वयं सहायता समूह बना बदलाव की कुंजी वर्ष 2019 में सुमा उइके “जनजातीय आजीविका स्वयं सहायता समूह” से जुड़ीं और यहीं से उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत हुई। समूह के माध्यम से उन्हें बचत, ऋण प्रबंधन और स्वरोजगार के अवसरों की जानकारी मिली। उन्होंने रिवाल्विंग फंड (RF) की सहायता से जैविक मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे आय के नए रास्ते खुले। कई आजीविका गतिविधियों से बढ़ी आय आगे बढ़ते हुए सुमा दीदी ने जनपद पंचायत कटंगी में कैंटीन संचालन की जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें नियमित आय मिलने लगी। इसके बाद उन्होंने बैंक से 6 लाख रुपए का मुद्रा ऋण लेकर थर्मल थेरेपी सेंटर की शुरुआत की। इन गतिविधियों के माध्यम से न केवल उनकी आय में वृद्धि हुई, बल्कि उन्होंने अपने समूह की अन्य महिलाओं को भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। कैंटीन और थेरेपी सेंटर में समूह की सदस्य महिलाएं भी कार्य कर रही हैं, जिससे उनकी आजीविका भी सशक्त हुई है। आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा आज सुमा उइके की व्यक्तिगत मासिक आय 19 हजार रुपए तक पहुंच गई है, जबकि परिवार की कुल आय 32 हजार रुपए हो गई है। यह बदलाव उनके संघर्ष, मेहनत और सही मार्गदर्शन का परिणाम है। बनीं प्रेरणा और मिसाल आज सुमा उइके न केवल अपने परिवार के लिए, बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र की महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं। वे अन्य महिलाओं को स्वयं सहायता समूह से जुड़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं। नारी सशक्तिकरण की प्रतीक सुमा उइके की यह यात्रा बताती है कि यदि अवसर, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास मिले, तो कोई भी महिला अपनी परिस्थितियों को बदल सकती है। आज वे “लखपति दीदी” बनकर नारी सशक्तिकरण की एक सशक्त प्रतीक के रूप में उभरी हैं।