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न्याय प्रक्रिया हुई आसान: गवाह अब स्पेशल सेंटर से ही दर्ज कर सकेंगे अपने बयान

भागलपुर. गवाहों की सुरक्षा को लेकर सरकार की नई कार्य योजना जल्द ही साकार होने जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर संवेदनशील गवाही केंद्र (Vulnerable Witness Deposition Center) का निर्माण किया जाएगा, जिसके लिए आवश्यक भूमि का चयन कर लिया गया है। जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी के नेतृत्व में अधिकारियों की एक टीम ने 9 अप्रैल 2026 को जिला विधिज्ञ संघ परिसर के निकट इस सेंटर के लिए भूमि चिह्नित की थी। इस सेंटर के निर्माण से गवाहों को न केवल सुरक्षित माहौल मिलेगा, बल्कि वे वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गवाही भी दे सकेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उच्च न्यायालय को इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए थे, जिसके तहत सभी कचहरी परिसरों में ऐसे सेंटर का निर्माण किया जाएगा। इन सेंटरों का उद्देश्य गवाहों की पहचान को गुप्त रखते हुए उन्हें पूरी सुरक्षा प्रदान करना है। गवाहों को अब अदालत में जाने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। गवाहों को बिना डर के गवाही देने का अवसर इस सेंटर में विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं, यौन उत्पीड़न पीड़िताओं, दिव्यांगों और धमकी के शिकार गवाहों के लिए गवाही देने की व्यवस्था की जाएगी। यह सेंटर उन्हें सुरक्षित और भयमुक्त माहौल में बयान दर्ज कराने की सुविधा प्रदान करेगा। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर देशभर में ऐसे केंद्रों का निर्माण किया जा रहा है। वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर की विशेषताएं वल्नरेबल विटनेस डिपोजिशन सेंटर एक विशेष प्रकार का कोर्ट रूम है, जो सामान्य अदालतों से भिन्न है। इसे 'कमजोर या संवेदनशील गवाहों' के लिए डिजाइन किया गया है, जहां गवाहों का आरोपितों से सामना नहीं होगा। गवाह एक अलग कमरे में बैठता है, जबकि न्यायाधीश, अधिवक्ता और आरोपित दूसरे कमरे में स्क्रीन पर गवाही की प्रक्रिया देखते हैं। इस सेंटर में चाइल्ड-फ्रेंडली माहौल प्रदान किया जाएगा, जिसमें रंगीन दीवारें, खिलौने, किताबें और आरामदायक फर्नीचर होंगे, ताकि बच्चे सहज महसूस करें। गवाहों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, और उनके आने-जाने का रास्ता भी अलग होगा। गवाही के दौरान गवाह के साथ मनोवैज्ञानिक, काउंसलर या परिवार का सदस्य रह सकता है। एक बार में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, जिससे पीड़ित को बार-बार कोर्ट में उपस्थित होकर घटना को दोहराने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। पॉक्सो और महिला अपराध के मामलों में तेजी भागलपुर रेंज में पॉक्सो एक्ट, दुष्कर्म और घरेलू हिंसा के सैकड़ों मामले लंबित हैं। अक्सर नाबालिग पीड़ित कोर्ट में आरोपित को देखकर सहम जाते हैं और अपने बयान से पलट जाते हैं, जिससे दोषसिद्धि दर में कमी आती है।

खेतों पर संकट के बादल: मौसम विभाग की चेतावनी, गेहूं की फसल को बड़ा नुकसान संभव

चंडीगढ़. पंजाब समेत उत्तर भारत के कई इलाकों में इन दिनों मौसम ने अचानक करवट ली है। एक तरफ गेहूं की फसल पूरी तरह पक कर कटाई के लिए तैयार है, तो दूसरी तरफ भारी वर्षा और आंधी-तूफान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खेतों में खड़ी सुनहरी फसल अब भीगने लगी है, जिससे बड़े नुकसान की आशंका बन गई है। खेतीबाड़ी माहिर डॉ. राकेश कुमार ने कहा कि इस समय बारिश किसानों के लिए अच्छा संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि गेहूं का दाना अब पूरी तरह पक चुका होता है और कटाई का समय भी आ गया है। ऐसे में बारिश से दाने की क्वालिटी और पैदावार दोनों पर असर पड़ता है। गेहूं की फसल को नुकसान खेतों में पानी भरने और अंकुरण की समस्या वर्षा के कारण खेतों में पानी भरने की समस्या भी सामने आती है। जहां पानी निकलने की सही सुविधा नहीं होती, वहां फसल लंबे समय तक भीगी रहती है। इससे गेहूं के दानों में अंकुरण हो सकता है, जिससे बाजार में कीमत काफी कम हो जाती है। डॉ. राकेश ने कहा कि लगातार नमी की वजह से अनाज का रंग फीका पड़ जाता है आर वजन भी कम हो जाता है। इससे किसानों को प्रति क्विंटल कम दाम मिलते हैं, जिसका सीधा असर उनकी इनकम पर पड़ता है। उन्होंने सलाह दी कि मौसम साफ होने पर तुरंत कटाई शुरू कर देनी चाहिए। किसान मदन लाल व धर्म चन्द ने कहा कि उनकी गेहूं की फसल पूरी तरह तैयार है, लेकिन लगातार बारिश की वजह से फसल गिरने का खतरा बन गया है। बारिश की वजह से खेतों में बढ़ी नमी उनके मुताबिक, अगर फसल गिर गई तो कटाई मुश्किल होगी और अनाज भी खराब हो जाएगा, जिससे भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है। इसी तरह, किसान संगठन ने भी कहा कि बारिश की वजह से खेतों में नमी बढ़ रही है, जिससे बीज अंकुरित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर बीज अंकुरित हुए तो उन्हें बाजार में सही दाम नहीं मिलेगा और सारी मेहनत बेकार हो सकती है।

हिसार-सिरसा हाईवे पर किसानों का धरना, पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

हिसार संयुक्त किसान मोर्चा ने नेशनल हाइवे जाम कर दिया है। जाम के बाद किसान धरना देकर विरोध जता रहे हैं। फसल खरीद को लेकर किसान विरोधी फैसलों के विरोध में किसानों ने शनिवार को सुबह 11 से 3 बजे तक लांधड़ी चिकनवास टोल के पास रोड़ जाम का एलान किया है। जाम से निपटने के लिए पुलिस प्रशासन ने 250 कर्मचारियों को तैनात किया है। हिसार- सिरसा हाइवे पर वाहनों को बरवाला रुट पर डायवर्ट किया गया है। संयुक्त किसान मोर्चा संयोजक सरदानंद की अगुवाई में जाम का एलान किया गया है। उन्होंने कहा कि फसल खरीद को लेकर की थोंपी गई शर्तों को किसी सूरत में नहीं मानेंगे। गेट पास और बायोमेट्रिक की जबरदस्ती बंद की जाए। किसान सरकार के नए खरीद नियमों के खिलाफ हैं। गेट पास , बायोमेट्रिक, ट्रैक्टर नाम प्लेट को लेकर किसानों को बहुत दिक्कतें आएंगी। मंडियों के बाहर लंबी लाइनें लग जाएंगी। जब सरकार के पास किसान का मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल के जरिए पूरा ब्योरा है तो अब जबरदस्ती की शर्त लगाकर क्यों परेशान किया जा रहा है। सरकार कागजी जाल में फंसा कर उसे कुचल रही है। किसान एक ट्राली के साथ बायोमीट्रिक लगाने मंडी में आए या अपनी बची हुई फसल को बचाने का काम करे। किसान अपनी जमीन किसी को बटाई पर देता है, वह किराए पर किसी तीसरे व्यक्ति का ट्रैक्टर लेकर आता है तो तीनों का मिलान कैसे होगा। किसान नेता शमशेर नंबरदार ने बताया कि संयुक्त मोर्चा के आदेश अनुसार अगला फैसला लिया जाएगा। पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने बताया कि पुलिस के करीब 200 कर्मचारी लांधड़ी व मय्यड़ टोल पर तैनात किए गए हैं। एनएच पर मय्यड़ से अग्रोहा के बीच सभी प्रमुख चौक पर पुलिस बल तैनात है। फायर ब्रिगेड , एंबलुेंस को भी अलर्ट पर रखा गया है। एक इंस्पेक्टर के साथ 71 पुलिस कर्मियों को रिजर्व में रखा गया है। किसी तरह की शिकायत मिलने पर यह रिजर्व टीम तुरंत मौके पर भेजी जाएगी। चिकनवास, अग्रोहा चौक पर भी पुलिस बल तैनात रहेगा। शहर में पुलिस के नाके लगाए गए हैं। 75 हजार रुपये प्रति एकड़ ठेके पर ली थी जमीन वहीं, शुक्रवार को सिरसा के गांव मीरपुर में 26 एकड़ गेहूं की फसल आग लगने से पूरी तरह नष्ट हो गई। प्रभावित किसान वीरेंद्र कुमार, ललित मोहन और अमित चंद का आरोप है कि शुक्रवार दोपहर करीब 12 बजे रेलवे ट्रैक से गुजर रही ट्रेन से किसी व्यक्ति द्वारा बीड़ी या जलती वस्तु फेंकने के कारण आग लगी। तेज हवा के चलते आग तेजी से खेतों में फैल गई और देखते ही देखते पकी फसल को चपेट में ले लिया। सूचना के बाद दमकल की पांच गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और किसानों के सहयोग से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया लेकिन तब तक 26 एकड़ फसल जलकर राख हो चुकी थी। महिलाओं ने बताया कि यह जमीन उन्होंने 75 हजार रुपये प्रति एकड़ ठेके पर ली थी। चार एकड़ फसल ही बच पाई है। उन्होंने सरकार से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।  

सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल की रिहाई, काफिले के साथ निकला जेल से

हिसार पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल 11 साल 4 माह 24 दिन बाद शुक्रवार को मुस्कराते हुए जेल से बाहर निकला। परिवार के लोग उसे लेने गाड़ियों के काफिले के साथ हिसार सेंट्रल जेल 2 पहुंचे। बदन पर सफेद कुर्ता-पायजामा, पैरों में ब्रांडेड शूज और चेहरे पर हल्की मुस्कान लिए सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल ने देशद्रोह मामले में शुक्रवार को 11 साल 5 महीने बाद जेल से बाहर कदम रखा। एहतियात के तौर पर पुलिस ने जेल के आसपास कड़े सुरक्षा प्रबंध किए। इस वजह से ज्यादा लोग नहीं जुटे। कुछ लोग आए थे जो रोड के दोनों और व्यवस्थित तरीके से खड़े रहे और दूर से ही रामपाल को प्रणाम किया। जेल से बाहर आने के तीन मिनट में रामपाल लग्जरी गाड़ियों के काफिले के साथ सोनीपत के लिए रवाना हो गया। शाम पांच बजकर 5 मिनट पर जैसे ही रामपाल जेल से बाहर आया गेट पर तैनात संतरी ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया। इससे पहले सुबह करीब 10 बजे केस नंबर 428 में रामपाल की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेशी हुई। छह पुलिसकर्मियों और एक तहसीलदार की गवाही दर्ज की गई। अदालत ने सुनवाई अगली तारीख 16 मई तय की है। दोपहर में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश गगनदीप मित्तल की अदालत में जमानती बॉन्ड भरवाने की प्रक्रिया शुरू हुई। रामपाल की ओर से मिर्जापुर निवासी धर्मपाल और सतबीर बतौर जमानती अदालत में पेश हुए। वरिष्ठ अधिवक्ता महेंद्र सिंह नैन और सचिन दास की मौजूदगी में शाम करीब 4:30 बजे तक बेल बॉन्ड संंबधी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद हाईकोर्ट से मिली जमानत आदेश की कॉपी जेल प्रशासन को सौंपी। रिहाई से पहले जेल परिसर में ही रामपाल के साथ बंद अनुयायी बबीता और मनोज के भी बेल बॉन्ड जमा करवाए गए। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद सतलोक आश्रम प्रमुख रामपाल 11 साल 4 माह 24 दिन बाद शुक्रवार को मुस्कराते हुए जेल से बाहर निकला। परिवार के लोग उसे लेने गाड़ियों के काफिले के साथ हिसार सेंट्रल जेल 2 पहुंचे। शाम 5 बजकर 5 मिनट पर जेल से बाहर आते ही रामपाल सफेद रंग की फॉर्च्यूनर गाड़ी में सवार होकर सोनीपत स्थित पैतृक गांव धनाना रवाना हो गया। देशद्रोह के मामले में जेल में बंद रामपाल को हाईकोर्ट ने 8 अप्रैल को सशर्त जमानत दी थी। रामपाल को लेने के लिए दोपहर बाद 3.10 बजे परिजन वकीलों के साथ सेंट्रल जेल 2 पहुंचे। वकील सचिन दास व एमएस नैन ने देशद्रोह और हत्या के मामले में एक-एक लाख रुपये के बेल बॉन्ड की प्रति और जमानत के आदेश की कॉपी जेल प्रशासन को सौंपी। करीब पौने दो घंटे तक कागजी प्रक्रिया पूरी करने के बाद रामपाल जेल से बाहर आया और मुख्य गेट के पास ही खड़ी गाड़ी में सवार हो गया। इसके बाद गाड़ियों का काफिला सोनीपत के लिए रवाना हो गया। काफिले में डिफेंडर, फॉर्च्यूनर गाड़ियां शामिल रहीं। हरियाणा पुलिस की एक गाड़ी काफिले को एस्कॉर्ट कर रही थी। हमें न्याय मिला, अनुयायियों के लिए दिवाली जैसी खुशी जेल परिसर के बाहर रामपाल के भतीजे युद्धवीर ने बताया कि हमें बहुत लंबे समय बाद न्याय मिला है। धनाना से एक किलोमीटर पहले रामपाल का भव्य स्वागत किया जाएगा। उनका जेल से बाहर आना लाखों अनुयायियों के लिए दिवाली जैसी खुशी है।  

सूखे से राहत की बड़ी पहल: सिकासार जल से जुड़ेगा महासमुंद, 3400 करोड़ की परियोजना मंजूर

गारियाबंद. सिकासार जलाशय के अतिरिक्त जल से आने वाले दिनों में महासमुंद जिले का सूखा दूर होगा। सीकासार-कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना के लिए 3400 करोड़ की मंजूरी मिली है। डेम से डेम को जोड़ने वाली इस पहली परियोजना से अतिरिक्त 25 हजार हेक्टेयर रकबे को सिंचाई सुविधा मिलेगी। भाजपा सरकार ने सीकासार कोडार जलाशय नहर लिंक परियोजना के लिए 3400 करोड़ की मंजूरी दे दिया है। परियोजना को वर्ष 2029 तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। मंजूरी के बाद सिंचाई विभाग ने टेंडर की प्रकिया शुरू कर दी है। कई मायने में यह परियोजना भाजपा सरकार की सबसे अलग-थलग और अहम योजना मानी जा रही है। विभाग के ईई एसके बर्मन ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों के मार्गदर्शन में टेंडर कॉल की तैयारी की जा रही है।कार्य किसी अनुभवी और पारंगत ठेका कम्पनी को ही दी जाए इसकी तैयारी विभाग कर रही है। 79,650 परिवार होंगे लाभान्वित सिकासार जलाशय के प्रमुख नहरों से अब तक गरियाबंद और मगररोड क्षेत्र के 101 गांव में रवि और खरीफ़ मिलकर 58 हजार हेक्टेयर में सिंचाई सुविधा दी जाती थी। लेकिन नई परियोजना से अतिरिक्त 178 गांव में सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक क्षेत्र के लिए पानी की सप्लाई होगी। 41780 एसटी और 6145 एससी परिवार समेत कुल 79650 परिवार इससे लाभान्वित होंगे। परियोजना में बागबाहरा और झलप क्षेत्र के कई असिंचित रकबा तक न केवल सिंचाई सुविधा मिलेगी, बल्कि वाटर लेबल रिचार्ज कर पेयजल संकट को भी दूर किया जाना योजना का मकसद होगा। भूमिगत स्टील पाइप से जुड़ेंगे जलाशय यह पहली परियोजना है, जिसमें इंजीनियरिंग के नए तकनीकी मापदंडों का भरपूर इस्तेमाल किया जाएगा। 88 किमी लंबे भूमिगत स्टील पाइप से सीकासार बैराज का अनुपयुक्त जल सीधे कोडार पहुंचेगा, सोखने और वाष्पीकरण का प्रभाव से 25 फीसदी तक नष्ट होने वाला जल सुरक्षित हो जाएगा।विभाग का दावा है कि इस पद्धति से 30 से 35 मिलियन घन मीटर पानी की बचत होगी जिससे अतिरिक्त सिंचाई या जल संचय किया जाएगा। यही वजह है कोडार के अलावा प्रोजेक्ट में केशवा जलाशय के सूखे को दूर किया जाएगा। स्काडा तकनीकी से गांवों में पहुंचेगा पानी डेम टू डेम जोड़ने की पहली परियोजना में सेंसर टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है।जिन गांव से पाइप लाइन गुजरेगी वहां प्रत्येक गांव के लिए एक आउट लेट भी होगा।जरूरत के मुताबिक इस आउटलेट में पानी ओटोमेटिक होगा।इसे इंजीनियरों ने स्काडा तकनीकी से कंट्रोल करेंगे।कमांड रूम में सेंसर टेक्नोलॉजी इसकी मॉनिटरिंग करेगा। नवाचार की जिद से मिली सफलता संभाग में कार्यपालन अभियंता एसके बर्मन महासमुंद में सेवा देने के बाद गरियाबंद में 4 साल से सेवा से रहे हैं। इन्होंने बांध को बांध से जोड़ने पर विचार किया, और 2022 में इसे बड़े अफसरों के सामने प्रस्तुत किया. सिंचाई विभाग के सचिव राजेश टोप्पो को भी योजना रास आ गई। तकनीकी में नवाचार था, ऐसे में इसकी सर्वे की मंजूरी 2023 में मिल गई। बर्मन ने बताया कि वर्तमान में 58 हजार हेक्टेयर को पर्याय सिंचाई सुविधा देने के अलावा सिकासार का प्रवाह व्यर्थ जा रहा था। द्वितीय चरण की भी शुरू हो गई है तैयारी नदी को नदी से, नहर को नहर से जोड़ने की परियोजना चल रहे थे, इसी कॉन्सेप्ट पर हमने बांध को बांध से जोड़ने की योजना का प्रारूप सरकार के समक्ष रखी, ड्रोन और आधुनिक लिडार सर्वे के अलावा, जिसकी कई चरणों के परीक्षण और दूरदर्शिता को देखते हुए सरकार ने मंजूरी दे दी है. उन्होंने कहा कि द्वितीय चरण में सिकासार को अमानाला और सोन नदी से जोड़ने की तैयारी की जा रही है।

यूपी में मौसम बदला, गर्मी के साथ धूल भरी हवाओं का दौर

लखनऊ यूपी में आंधी, बारिश, ओलों का दौर खत्म हुआ। अब धूल भरी सतही हवाओं का जोर है। यह हवाएं आंखों की किरकिरी बन रही हैं। सावधानी नहीं बरती गई तो आंखों की पुतलियों को नुकसान हो सकता है। शहरों में फिलहाल चल रहीं सतही हवाओं की तासीर दरअसल ठंडी है। इसलिए यह तापमान को अधिक बढ़ने से रोक रही है। लेकिन निर्माण कार्यों के चलते शहरों में खुदी सड़कें, निर्माण से उड़ रही धूल, वाहनों के जाम से बढ़ा उत्सर्जन हवा में अति सूक्ष्म धूल और रसायनों के कणों को बढ़ा रहा है। यही हवाएं आंखों में चुभ रही हैं। विशेषकर खुले में पैदल निकलने वाले और दोपहिया वाहन चलाने वालों की दिक्कतें बढ़ गई हैं। हाल यह कि वाहन चालकों की आंखों में कीचड़ बन रहा है। 33.2 डिग्री रहा दिन का तापमान शुक्रवार को अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.1 डिग्री कम होकर 17.0 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया। आर्द्रता का अधिकतम प्रतिशत 62 दर्ज किया गया। रात का तापमान कम होने के कारण अभी शाम और रात को मौसम नम है। आने वाले दिनों में ऐसा नहीं रहेगा। 12 तक चलेगा हवाओं का सितम मौसम विभाग के मुताबिक 12 अप्रैल तक सतही हवाओं का दौर रहेगा। इसके बाद आसमान साफ होगा और तेज गर्मी की शुरूआत होगी। 16 अप्रैल तक दिन का तापमान 39 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। जबकि रात का पारा 20 से लेकर 23 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। बरतें सावधानी आखों को पूरी तरह से ढंकने वाला चश्मा लगाना चाहिए खुले में निकलने, दोपहिया चलाने पर लगाना बहुत जरूरी  दोपहिया चालक हेलमेट के ग्लास को बंद करके ड्राइव करें  आखों में कुछ भी गिरने, जलन होने पर मलना नहीं चाहिए  तत्काल साफ या चलते पानी से आखों को धोना चाहिए  लाल होने, खुजली पर डाक्टर से पूछकर ही आईड्राप डालें पांच दिनों में पांच डिग्री तक बढ़ेगा पारा लगातार चार दिनों से दिन में धूप और फिर शाम को हो रही बारिश के बाद शुक्रवार को मौसम पूरी तरह बदल गया। दिन में तेज धूप रही। अन्य दिनों की तरह बादल नहीं होने के कारण धूप का असर भी ज्यादा रहा। जानकारी के अनुसार, मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि अगले 5 दिनों में अधिकतम तापमान में 5-6 डिग्री की वृद्धि हो सकती है। यानी एक बार फिर 40 के आसपास पहुंच जाएगा। फिलहाल अगले 5 दिनों में किसी तरह के बारिश होने की उम्मीद नहीं है।

राजस्थान में मौसम बदला, सूरज दिखा रहा तल्ख तेवर

जयपुर  राजस्थान में बारिश का दौर थमने के साथ ही अब सूरज ने तल्ख तेवर दिखना शुरू हो गए हैं। पश्चिमी राजस्थान के साथ-साथ अब पूर्वी, उत्तरी और दक्षिणी जिलों में भी गर्मी का असर साफ देखा जा रहा है। बीते दिन 10 अप्रैल को राजस्थान के अधिकांश हिस्सों में दिनभर तेज धूप खिली रही, जिससे अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। राजधानी जयपुर समेत कई इलाकों में पारा 33 डिग्री के स्तर को छू गया, जिससे दोपहर के समय लोगों को हल्की गर्मी और उमस का अहसास हुआ। पश्चिमी विक्षोभ से इन शहरों में छा सकते हैं बादल मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के पूर्वानुमान के अनुसार, शनिवार यानी 11 अप्रैल को एक हल्के प्रभाव वाला पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है। हालांकि, इस सिस्टम का असर काफी सीमित रहने वाला है।इन शहरों पर पड़ सकता है प्रभाव: बीकानेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, फलोदी और चूरू के आसपास के जिलों में आसमान में बादलों की आवाजाही देखी जा सकती है। तापमान में बदलाव: बादलों की वजह से इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान में मामूली गिरावट आ सकती है। बारिश की संभावना: मौसम विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस विक्षोभ से बारिश होने की संभावना बहुत कम है। यह केवल आंशिक रूप से बादल छाने तक ही सीमित रहेगा। आगामी दिनों का हाल: 4 डिग्री तक बढ़ेगा पारा IMD जयपुर केंद्र के अनुसार, आगामी एक सप्ताह तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क बना रहेगा। वर्तमान में रेगिस्तानी इलाकों में तापमान पहले ही 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। विशेष चेतावनी: अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान में 3 से 4 डिग्री सेल्सियस की और बढ़ोतरी होने की संभावना है। साथ ही न्यूनतम तापमान में भी वृद्धि होगी, जिससे रातें भी अपेक्षाकृत गर्म होने लगेंगी।

देवरिया सड़क विवाद मामला: एसडीएम विपिन द्विवेदी पर बड़ी कार्रवाई

 देवरिया यूपी में राज्य सरकार ने बरहज देवरिया के उप जिलाधिकारी विपिन कुमार द्विवेदी को निलंबित कर दिया है। तहसील बरहज के ग्राम लक्ष्मीपुर में राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नाली व नलकूप की जमीन पर पक्की सड़क का निर्माण कराने और धक्का-मुक्की के कारण मृत्यु की घटना की प्रारंभिक जांच कराई गई थी। यह जांच अपर आयुक्त प्रशासन गोरखपुर पुलिस अधीक्षक नगर गोरखपुर और अपर जिलाधिकारी नगर गोरखपुर की तीन सदस्यीय कमेटी ने की थी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रकरण में लापरवाही के लिए प्रथमदृष्टया विपिन कुमार द्विवेदी को जिम्मेदार ठहराया गया है। उनके खिलाफ नियम-7 के तहत जांच के आदेश भी दे दिए गए हैं। प्रयागराज के कमिश्नर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। विपिन कुमार द्विवेदी को राजस्व परिषद से संबंध कर दिया गया है। तहसील बार के पूर्व अध्यक्ष को धमकाने का आरोप देवरिया जिले के बरहज थाना क्षेत्र के ग्राम लक्ष्मीपुर में रविवार को चकनाली पर सड़क निर्माण के विवाद के दौरान दिल का दौरा पड़ने से अधिवक्ता संघ बरहज के पूर्व अध्यक्ष बृजेंद्र कुमार सिंह की मौत हो गई थी। परिजनों के आरोप थे कि एसडीएम बरहज ने विवाद के दौरान अधिवक्ता को धमकाया, जिसके चलते उनकी मौत हो गई। घटना के बाद बरहज तहसील में दर्जनों अधिवक्ता एकत्र हो गए और शव रख कर हंगामा किया था। कुछ लोगों ने एसडीएम को बंधक बनाकर नारेबाजी भी की थी। इस संबंध में एसडीएम विपिन द्विवेदी का कहना है कि वह विवाद सुलझा कर लौट आए थे उसके बाद अधिवक्ता का निधन हुआ। धमकाने का आरोप गलत है। जानकारी के अनुसार बरहज क्षेत्र की ग्राम पंचायत लक्ष्मीपुर में पंचायत द्वारा चकनाली पर सीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा है। रोड व चकनाली अधिवक्ता बृजेन्द्र सिंह के दरवाजे से होकर जाती है। चकनाली पर सड़क निर्माण का वह विरोध कर रहे थे। यह विवाद तीन माह से चल रहा है। उसी विवाद के समाधान के लिए उपजिलाधिकारी विपिन द्विवेदी राजस्व टीम के साथ मौके पर गए थे। वहां पर विवाद होने लगा। उसी दौरान बृजेन्द्र कुमार सिंह को दौरा पड़ गया और उनकी मौत हो गई। परिजनों के मुताबिक एसडीएम ने अधिवक्ता और उनके बेटों पर गम्भीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर 20 साल के लिए जेल भेजने की धमकी दी थी। एसडीएम की बात सुनते ही बृजेन्द्र सिंह नीचे गिर गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। बता दें कि उनके परिवार और अधिवक्ताओं ने जमकर हंगामा किया था। अधिवक्ता मुख्यमंत्री को मौके पर बुलाने के साथ ही एसडीएम, लेखपाल और ग्राम प्रधान पर हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे थे। उसी दौरान हिंदूवादी नेता प्रमोद सिंह के नेतृत्व में भीड़ ने एसडीएम रुद्रपुर को बंधक बनाया था। 15 मिनट की मशक्कत के बाद सीओ रुद्रपुर ने भीड़ से एसडीएम को छुड़ाया था।

हरियाणा में पावर कट पर जीरो टॉलरेंस, 4 घंटे से अधिक कटौती पर अफसरों पर गिरेगी गाज

चंडीगढ़. हरियाणा के बिजली मंत्री अनिल विज ने गत छह माह के दौरान बिजली आपूर्ति में आए व्यवधान की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को बिजली आपूर्ति की समय सीमा में बांध दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि शहरी क्षेत्रों में अधिकतम दो घंटे तथा ग्रामीण क्षेत्रों में चार घंटे से अधिक बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की स्थिति में संबंधित बिजली अधिकारियों विशेष रूप से अधीक्षण अभियंता (एसई) जिम्मेदार होंगे, जिनके विरुद्ध निलंबन तक की कार्रवाई संभव होगी। लैंड रिकवरी एक्ट के तहत डिफॉल्टर बिजली उपभोक्ताओं से वसूली में ढिलाई बरतने पर विज ने कैथल, कुरुक्षेत्र, पंचकूला और यमुनानगर के बिजली अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। चंडीगढ़ में बिजली अधिकारियों की बैठक लेते हुए अनिल विज ने कहा कि राज्य में बिजली की कोई कमी नहीं है, इसलिए प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण एवं निर्बाध विद्युत आपूर्ति प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने घोषणा की कि सरकारी भवनों में सोलर सिस्टम तथा पीएम सूर्य घर योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के तहत प्रथम, द्वितीय तथा तृतीय स्थान पर आने वाले सर्कल को अवॉर्ड दिया जाएगा। बैठक में ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ तथा उत्तर और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम के प्रबंध निदेशक बिक्रम सिंह की मौजूदगी में अनिल विज ने कहा कि अतिरिक्त मुख्य सचिव का पद लंबे समय से रिक्त रहने के बावजूद विभागीय कार्यों में कोई बड़ी बाधा नहीं आई है, इसके लिए अधिकारी सराहना के पात्र हैं। बिजली मंत्री ने ट्रांसफार्मरों के त्वरित प्रतिस्थापन पर बल देते हुए निर्देश दिया कि मरम्मत कार्यों के दौरान मेंटीनेंस स्टाफ के पास आवश्यक उपकरण, सुरक्षा साधन एवं ट्रांसफार्मर ट्राली उपलब्ध होनी चाहिए। आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड ने आश्वासन दिया कि दो दिनों के भीतर सभी कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करा दिए जाएंगे। विज ने यह भी निर्देश दिए कि भविष्य में स्थापित होने वाले सभी बिजली सबस्टेशन जलभराव वाले क्षेत्रों में न बनाए जाएं अथवा उन्हें संभावित जलस्तर से कम से कम दो फुट ऊंचाई पर स्थापित किया जाए। इसके लिए संबंधित विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य होगा। सबस्टेशनों के रखरखाव एवं अपग्रेडेशन के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए। वर्षा ऋतु से पूर्व बिजली लाइनों के समीप स्थित पेड़ों की छंटाई सुनिश्चित करने के आदेश देते हुए विज ने कहा कि आंधी-तूफान के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित न हो, इसकी सभी अधिकारियों को चिंता करनी होगी। बिजली उपकरणों की खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता और समन्वय बढ़ाने के लिए विज ने एक ऑनलाइन पोर्टल विकसित करने के निर्देश दिए। इस पोर्टल पर पूरे राज्य में उपयोग होने वाले उपकरणों का विवरण उपलब्ध रहेगा। बिजली चोरी के सभी मामले तीन माह में न्यायालय में होंगे पेश बिजली चोरी के मामलों की समीक्षा करते हुए अनिल विज ने निर्देश दिए कि अगले तीन माह में सभी लंबित मामलों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए। चालू वर्ष में 179 लोगों को बिजली चोरी के मामलों में गिरफ्तार किया गया है। वर्ष 2024-25 में 39 हजार 529 तथा 2025-26 में 56 हजार 953 एफआईआर दर्ज की गई हैं। विजिलेंस विंग ने आश्वासन दिया कि सभी मामलों को शीघ्र न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

80% तक मिलावट का दावा, चन्नी बोले—मिलावटखोरों पर लगे हत्या के प्रयास का मुकदमा

जालंधर. लोकसभा सदस्य एवं पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने देश में नकली डेयरी उत्पादों की बिक्री पर चिंता जताई है। चन्नी ने नकली डेयरी उत्पादों से होने वाले जान-माल के नुकसान, इसकी जांच प्रक्रिया को आसान बनाने और दोषियों के खिलाफ सख्त सजा की भी मांग की है। उन्होंने कहा, दूध माफिया यूरिया, डिटर्जेंट पाउडर और अन्य जहरीले पदार्थों के इस्तेमाल से नकली दूध बना रहे हैं। इससे देशवासी भयानक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं। चन्नी ने नकली दूध के कारण डेयरी फार्मिंग के लिए भी चिंता का समय है। उन्होंने कहा कि नकली दूध सस्ता होने के कारण असली दूध की कीमतों को भी नुकसान पहुंच रहा है। उन्होंने दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा कानून नरम और कम जुर्माने वाला होने के कारण डेयरी माफिया का इस पर असर नहीं होता। नकली डेयरी उत्पादों से किसी की जान तक जा सकती है, जिस कारण यह एक तरह से इरादा-ए-कत्ल (हत्या के प्रयास) जैसा संगीन अपराध है। इसलिए सजा और सख्त तथा जुर्माना और बड़ा होना चाहिए। सांसद चन्नी ने कृषि, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, मत्स्य पालन और सहकारिता के लिए संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष के रूप में सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को डेयरियों और दूध के बूथों पर तुरंत चेकिंग करने वाली मशीनें लगानी चाहिए।