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मई-जून में संभावित स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज

रायपुर : आगामी मई -जून माह में संभावित स्थानीय निकायो के आम/उप चुनाव के दृष्टिगत मतदाता सूची पुनरीक्षण की तैयारियां तेज त्रुटिरहित एवं समयबद्ध कार्यवाही सुनिश्चित करें प्रेक्षक : राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह रायपुर छत्तीसगढ़ राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आगामी नगरीय निकाय एवं त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव मई जून-2026 की तैयारियों को गति प्रदान की जा रही है। इसी क्रम में आज निर्वाचक नामावली प्रेक्षकों की ब्रीफिंग आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता राज्य निर्वाचन आयुक्त अजय सिंह ने की।राज्य निर्वाचन आयुक्त  अजय सिंह ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य त्रुटिरहित, पारदर्शी एवं समयबद्ध ढंग से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से छूटना नहीं चाहिए तथा सभी दावा-आपत्तियों का गंभीरता से परीक्षण कर निर्धारित समय-सीमा में उनका निराकरण किया जाए। उन्होंने पुनरीक्षण कार्य की सघन निगरानी और प्रभावी सुपरविजन पर विशेष बल दिया। बैठक में आयोग ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची का व्यापक पुनरीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए 01 अप्रैल 2026 को अर्हता तिथि निर्धारित की गई है। इस तिथि तक 18 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाले तथा भारत निर्वाचन आयोग की विधानसभा मतदाता सूची में शामिल नागरिक ही स्थानीय चुनाव में मतदाता बनने के पात्र होंगे। निर्वाचक नामावली का प्रारंभिक प्रकाशन 13 अप्रैल 2026 को किया जाएगा। इसके पश्चात 20 अप्रैल 2026 तक दावा-आपत्तियां प्राप्त की जाएंगी तथा 27 अप्रैल 2026 तक उनका निराकरण किया जाएगा। अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन 05 मई 2026 को किया जाएगा। आयोग द्वारा बताया गया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने, संशोधन एवं विलोपन के लिए निर्धारित प्रपत्रों के माध्यम से आवेदन प्राप्त किए जाएंगे।  बैठक में रिक्त पदों की जानकारी भी साझा की गई। नगरीय निकायों में अध्यक्ष के 4पद एवं 60 पार्षद के पदों पर आम निर्वाचन तथा अध्यक्ष के 4 पद एवं 17 पार्षद पदों पर उप निर्वाचन प्रस्तावित है। वहीं, त्रिस्तरीय पंचायत निर्वाचन के अंतर्गत जनपद पंचायत सदस्य के 10 पद, सरपंच के 82 पद एवं पंचों के 1110 पद रिक्त हैं, जिन पर निर्वाचन संपन्न कराया जाएगा। इस अवसर पर आयोग की सचिव श्रीमती शिखा राजपूत तिवारी ने भी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ करें तथा मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में उच्च गुणवत्ता के साथ पूर्ण करना सुनिश्चित करें।

रायपुर : महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल

रायपुर : महतारी वंदन योजना से महिलाओं को आर्थिक संबल रायपुर राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी महतारी वंदन योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में प्रभावी पहल साबित हो रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में संचालित इस योजना के माध्यम से महिलाओं को न केवल नियमित आर्थिक सहायता मिल रही है, बल्कि वे आत्मनिर्भरता की ओर भी तेजी से अग्रसर हो रही हैं। योजना के तहत पात्र महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान की जा रही है, जिससे वे अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के साथ परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। अब तक 26 किश्तों का 16 हजार 240 करोड़ रूपए का भुगतान पात्र हितग्राही महिलाओं को किया जा चुका है। इस योजना की नियमित किस्त मिलने से महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और वह आर्थिक रूप से सक्षम हुई है।  कोरबा शहर के पोड़ीबहार निवासी श्रीमती श्यामा प्रजापति इसकी एक उदाहरण हैं। श्रीमती प्रजापति बताती हैं कि योजना से मिलने वाली राशि उनके जीवन में बदलाव लेकर आई है। पहले छोटी-छोटी आवश्यकताओं के लिए उन्हें दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे अपने घरेलू खर्च, बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को स्वयं पूरा कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि नियमित सहायता से उन्हें आर्थिक राहत के साथ मानसिक संतोष और आत्मविश्वास भी मिला है। यह योजना उनके जैसे हजारों परिवारों के लिए सहारा बनी है। श्रीमती प्रजापति ने राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल ने महिलाओं को समाज में सशक्त पहचान दिलाने के साथ उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है।

डायल-112 हीरोज की बहादुरी: विदिशा में सूखे कुएँ से मिली नवजात बच्ची को अस्पताल पहुँचाया

भोपाल  विदिशा जिले के थाना कुरवाई क्षेत्र में डायल-112 जवानों की संवेदनशील एवं मानवीय कार्रवाई से सूखे कुएँ में परित्यक्त अवस्था में मिली नवजात बच्ची को सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल अस्पताल पहुँचाया गया। समय पर किए गए इस प्रयास से मासूम बच्ची को जीवनदान मिल सका। दिनांक 10 अप्रैल को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112, भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना कुरवाई क्षेत्र अंतर्गत ग्राम परसरी में एक सूखे कुएँ में नवजात बच्ची परित्यक्त अवस्था में मिली है, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति छोड़कर चला गया है। तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना प्राप्त होते ही कुरवाई थाना क्षेत्र में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को घटनास्थल के लिए रवाना किया गया तथा वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराया गया। मौके पर पहुँचकर डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री नेतराम अहिरवार एवं पायलट श्री नरेंद्र दांगी ने नवजात बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लिया।डायल-112 जवानों ने त्वरित एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए बच्ची को एफआरव्ही वाहन से तत्काल शासकीय चिकित्सालय, कुरवाई पहुँचाया, जहाँ प्राथमिक उपचार उपरांत उसे जिला चिकित्सालय, विदिशा रेफर किया गया।  इस कार्रवाई में डायल-112 जवानों की सजगता एवं संवेदनशीलता से एक नवजात को समय पर चिकित्सकीय सहायता मिल सकी। डायल-112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना दर्शाती है कि मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 सेवा आमजन, विशेषकर असहाय एवं जरूरतमंदों की सुरक्षा हेतु सदैव तत्पर, संवेदनशील एवं प्रतिबद्ध है।  

आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह ने बताया: प्रभावी प्रचार के लिए रचनात्मक कंटेंट की भूमिका

प्रभावी प्रचार-प्रसार के लिए रचनात्मक कंटेंट क्रिएशन महत्वपूर्ण : आयुक्त जनसंपर्क मनीष सिंह लेखन कौशल में पारंगत अधिकारियों का होता है विशिष्ट स्थान : कुलगुरू तिवारी एमसीयू में जनसंपर्क अधिकारियों का दो दिवसीय प्रशिक्षण हुआ संपन्न भोपाल आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह ने कहा है कि जनसंपर्क विभाग में प्रभावी तौर से प्रचार-प्रसार के लिए रचनात्मक कंटेंट क्रिएशन महत्वपूर्ण होता है। समाचार को प्रभावी बनाने के लिये कंटेट की हर क्षेत्र में मांग है। समाचार, फीचर, आलेख या एडवर्टोरियल जैसे फार्मेट के लिए उपयुक्त कंटेट आवश्यक है। भाषा की विशिष्टता का ध्यान रखना भी आवश्यक है। प्रेस विज्ञप्तियों की भाषा की अपनी शैली होती है। अधिकारियों को भाषा पर भी विशेष कार्य करना चाहिए। आयुक्त सिंह शुक्रवार को एमसीयू में जनसंपर्क अधिकारियो का 2 दिवसीय प्रशिक्षण के समापन-सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क के सभी जिला कार्यालयों में ई-ऑफिस सॉफ्टवेयर पर कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसके साथ ही वित्तीय प्रबंधन बेहतर ढंग से होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं को किस तरह बेहतर ढंग से जनता तक पहुंचाया जा सकता है इस दिशा में कार्य करने की आवश्यकता है। जनसंपर्क के क्षेत्र में लेखन कार्य बेहद महत्वपूर्ण इस अवसर पर सत्र में विश्वविद्यालय के कुलगुरू विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि जनसंपर्क के क्षेत्र में लेखन कार्य बेहद महत्वपूर्ण है। लेखन कौशल में पारंगत अधिकारियों का अपना विशिष्ट स्थान होता है। उन्होंने कहा कि जनसंपर्क अधिकारियों को लेखन में रूचि लेकर समाचारों को लिखना चाहिए। एक छोटे से विषय पर भी बेहतर ढंग से लिखे हुए समाचार को प्रकाशनों में अच्छा कवरेज मिलता है। उन्होंने कहा कि जिला स्तर पर जनसंपर्क अधिकारी किसी भी सकारात्मक आइडिया को लेकर सक्सेस स्टोरीज लिख सकते हैं। इस तरह की स्टोरीज को शेयर करने से उनके विभागों के बेहतर कार्यों को मीडिया में बेहतर स्थान मिलता है। पूर्व संचालक जनसम्पर्क लाजपत आहूजा ने जनसम्पर्क के अनुभवों को साझा करते हुए शासकीय विज्ञापनों की नीति के संबंध में चर्चा की। उन्होंने कुशल जनसम्पर्क के लिए विभिन्न विधाओं के उपयोग से परिचित कराया। जनसंपर्क विभाग की विविध शाखाओं में एमसीयू के विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप कार्यक्रम पर भी चर्चा हुई। कार्यक्रम में विभागीय बजट, भंडार नियमों की जानकारियों पर सत्र भी आयोजित हुए। इसके अलावा पत्रकारों के लिए संचालित विविध योजनाओं की जानकारी भी अधिकारियों को दी गई। अंतिम सत्र में जनसंपर्क विभाग के पोर्टल प्रबंधन पर प्रतिभागी अधिकारियों को जानकारी दी गई। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रदेश के जिला जनसंपर्क कार्यालयों से तथा निदेशालय से जनसंपर्क अधिकारी एवं वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इस प्रशिक्षण का आयोजन जनसंपर्क विभाग एवं एमसीयू की प्रशिक्षण शाखा के तत्वावधान में हुआ। प्रशिक्षण का समन्वय डॉ. शलभ श्रीवास्तव ने किया। प्रशिक्षण के दोनों दिन संगठन प्रबंधन, डिजिटल नवाचार, ई-ऑफिस, ई-एचआरएमएस, एआई, कंटेंट मैंनेजमेंट, आरटीआई, प्रेस के नियम, जनसंपर्क की नीतियों और उनके क्रियान्वयन के व्यवहारिक पहलुओं सहित वित्तीय प्रबंधन आदि विषयों पर विविध सत्र आयोजित हुए। दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के विभिन्न सत्रों को अन्य विशेषज्ञों के साथ विभागीय अपर संचालक जी.एस. वाधवा, संजय जैन, उप संचालक संतोष मिश्रा, सुनील वर्मा, सहायक संचालक राजेश पाण्डेय, सहायक जनसम्पर्क अधिकारी शिवम शुक्ल, प्रोजेक्ट मैनेजर वेबसाइट एमपीइन्फो डॉट ओआरजी अमकेश्वर मिश्रा ने भी महत्वपूर्ण जानकारियां दी। सत्र का संचालन जनसंपर्क विभाग के सहायक जनसम्पर्क अधिकारी अनिल वशिष्ठ ने किया। प्रशिक्षण का समन्वय एमसीयू के डॉ. शलभ श्रीवास्तव ने किया।  

डॉ धर्मजीत सिंह के नेतृत्व में मनाया गया जिला उपाध्यक्ष निलेश ठाकुर का जन्मदिवस, छत्तीसगढ़ में धूम

छत्तीसगढ़ के उत्कृष्ट विधायक डॉ धर्मजीत सिंह के नेतृत्व में मनाया गया जिला उपाध्यक्ष निलेश ठाकुर का जन्मदिवस  बिलासपुर  बिलासपुर में संगठनात्मक एकता और जनसेवा की भावना का शानदार उदाहरण उस समय देखने को मिला, जब जिला उपाध्यक्ष निलेश ठाकुर का जन्मदिवस अत्यंत भव्य, गरिमामय और उत्साहपूर्ण माहौल में मनाया गया। इस आयोजन का नेतृत्व क्षेत्र के लोकप्रिय एवं उत्कृष्ट विधायक डॉ धर्मजीत सिंह ने किया, जबकि जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता का विशेष सहयोग कार्यक्रम की सफलता में महत्वपूर्ण रहा। जन्मदिवस समारोह में बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी, कार्यकर्ता, समर्थक एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिससे उत्सव का माहौल और भी जीवंत हो उठा। कार्यक्रम की शुरुआत केक काटने और पुष्पगुच्छ भेंट कर की गई, जिसके बाद उपस्थित सभी लोगों ने निलेश ठाकुर को जन्मदिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर डॉ धर्मजीत सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि निलेश ठाकुर एक ऊर्जावान, समर्पित और कर्मठ कार्यकर्ता हैं, जिन्होंने संगठन को मजबूत करने और जनसेवा के कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि ऐसे युवा नेतृत्व ही पार्टी की असली ताकत हैं और इनके प्रयासों से समाज में सकारात्मक बदलाव संभव हो पाता है। जिला अध्यक्ष वैभव गुप्ता ने भी कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन और सक्रिय सहयोग से आयोजन सुव्यवस्थित और प्रभावी ढंग से संपन्न हुआ। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि निलेश ठाकुर का कार्यशैली, अनुशासन और जनता के प्रति समर्पण अन्य कार्यकर्ताओं के लिए प्रेरणादायक है। कार्यक्रम में उपस्थित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए निलेश ठाकुर के व्यक्तित्व और उनके संगठनात्मक योगदान की सराहना की। सभी ने एकजुट होकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का संकल्प लिया। अंत में निलेश ठाकुर ने सभी अतिथियों, कार्यकर्ताओं एवं विशेष रूप से डॉ धर्मजीत सिंह और वैभव गुप्ता का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उन्हें जो स्नेह और समर्थन मिला है, वह उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है और वे भविष्य में भी पूरी निष्ठा एवं समर्पण के साथ जनता की सेवा करते रहेंगे। यह जन्मदिवस समारोह केवल एक व्यक्तिगत उत्सव नहीं, बल्कि संगठनात्मक एकता, सेवा भावना और जनहित के प्रति अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर उभरा।

68 प्रदेशीय कॉलेजों में एआई कोर्सेस की शुरुआत, आईआईटी दिल्ली के सहयोग से छात्रों को मिलेगा बड़ा फायदा

भोपाल   मध्यप्रदेश में कॉलेजों के स्टूडेंट के लिए बड़ी पहल की गई है। यहां परंपरागत विषयों से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अंतर्गत प्रदेश के 68 महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानि एआई एवं फिनटेक विथ एआई कोर्स प्रारंभ किए जा रहे हैं। ये ऑनलाइन सर्टिफिकेट होंगे जिससे स्टूडेंट आसानी से रोजगार से जुड़ सकेंगे। प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र में 68 महाविद्यालयों में एआई आधारित पाठ्यक्रम संचालित किया जाएगा। इनमें प्रदेश के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस के साथ स्वायत्त महाविद्यालय भी शामिल हैं। एआई एवं फिनटेक विथ एआई कोर्स प्रदेश के इन कॉलेजों में आईआईटी दिल्ली के सहयोग से संचालित किए जाएंगे। प्रदेश के शासकीय महाविद्यालयों में परंपरागत पाठ्यक्रमों की पढ़ाई तो चल ही रही है, इसके साथ ही यहां के विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए भी कई कवायदें की जा रही हैं। इसके लिए महाविद्यालयों में रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम प्रारंभ करने को लेकर महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिल्ली आईआईटी के सहयोग से यह काम किया जा रहा है। प्रदेश के 68 शासकीय महाविद्यालयों में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा एआई एवं फिनटेक विथ एआई के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ किए जा रहे हैं। इनमें 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस तथा 13 स्वायत्त महाविद्यालय शामिल हैं। यह कोर्स आईआईटी दिल्ली के सहयोग से संचालित किया जाएगा। विद्यार्थियों को इसकी सुविधा नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 से मिलना शुरू होगी। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा पाठ्यक्रम प्रारंभ करने को लेकर तैयारी पूर्ण कर ली गई है। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं उच्च शिक्षा मंत्री इन्दर सिंह परमार प्रदेश के कॉलेजों में रोजगारोन्मुखी शिक्षा की बात लगातार कहते रहे हैं। उनका मानना है कि यहां ऐसे कोर्सेस की पढ़ाई कराई जाए जिनकी उद्योगों को जरूरत है। इससे स्टूडेंट को आसानी से नौकरियां मिल सकेंगी। 2000 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य उच्च शिक्षा विभाग द्वारा इस वर्ष 2000 विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं फिनटेक विथ आई के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स के माध्यम से प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रथम चरण में यह लक्ष्य 1000 विद्यार्थियों का था, जिसे इस वर्ष बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है। नवीन शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को मिलेगा पाठ्यक्रमों का लाभ अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा अनुपम राजन ने बताया कि महाविद्यालयों में परंपरागत विषयों से पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे वे आसानी से रोजगार से जुड़ सकेंगे। प्रदेश के 68 महाविद्यालयों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं फिनटेक विथ एआई के ऑनलाइन सर्टिफिकेट कोर्स प्रारंभ किए जा रहे हैं। प्रथम चरण की सफलता को देखते हुए छात्र संख्या को दोगुना कर दिया गया है। प्रमुख बिंदु मध्यप्रदेश के 68 महाविद्यालयों में संचालित होगा एआई आधारित पाठ्यक्रम नवीन शैक्षणिक सत्र 2026-27 में होंगे प्रारंभ आईआईटी दिल्ली के सहयोग से संचालित होगा पाठ्यक्रम प्रदेश के 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में प्रारंभ होगा कोर्स 13 स्वायत्त महाविद्यालयों में पाठ्यक्रम संचालित होगा

सरकार समाज के सभी वर्गों के कल्याण और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध : उप मुख्यमंत्री देवड़ा

भोपाल.  उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने “गांव चलो अभियान” के अंतर्गत जिले के विभिन्न ग्रामों का भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ग्राम धुंधड़का, धमनार, गुलियाना, हतुनिया, जोगीखेड़ा, रातीखेड़ी, खजूरी फंटा, झिरकन, सिखेड़ी फंटा, बडवन फंटा, भाटरेवास, अफजलपुर, राणखेड़ा, बिलांत्री, चिरमोलिया, रठाना, लोध, सूरी, बोरखेड़ा एवं गारियाखेड़ा में पहुंचकर ग्रामीणों से संवाद किया। इस अवसर पर जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, जनपद पंचायत अध्यक्ष बसंत शर्मा सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने गांव, बस्ती एवं चौपाल पर पहुंचकर ग्रामीणों से भेंट की तथा केंद्र एवं राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच रहा है और लगातार विकास कार्य किए जा रहे हैं। एक कार्य पूर्ण होने से पहले ही नए विकास कार्यों की सौगात क्षेत्र को मिल रही है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि दूरदर्शी नीतियों के परिणामस्वरूप आज भारत विश्व पटल पर एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित हुआ है। केंद्र सरकार की योजनाएं जैसे आयुष्मान भारत योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला गैस योजना, स्वच्छ भारत मिशन, हर घर जल योजना एवं किसान सम्मान निधि से गरीब, किसान, महिला एवं वंचित वर्ग के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि राज्य सरकार भी सभी वर्गों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लाड़ली बहना योजना, बेटियों के लिए लाड़ली लक्ष्मी योजना, किसानों की आय बढ़ाने हेतु कृषि योजनाएं तथा युवाओं के लिए कौशल विकास एवं स्वरोजगार योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं से समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना सरकार का लक्ष्य है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना में गरीबों को पक्के मकान, प्रधानमंत्री सड़क योजना से गांव-गांव तक सड़कों का जाल, उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन तथा आयुष्मान योजना में गरीबों को 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा लाड़ली बहना योजना में महिलाओं को प्रतिमाह आर्थिक सहायता प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री देवड़ा ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित योजनाओं से गरीब, युवा, महिला एवं किसानों का समग्र विकास सुनिश्चित हो रहा है और प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।  

स्वच्छता के सारथियों के स्वास्थ्य और सम्मान को समर्पित स्वच्छता स्वाभिमान कार्यशाला

भोपाल.  मध्यप्रदेश के नगरीय क्षेत्रों को स्वच्छ और सुंदर बनाने में 'स्वच्छता के प्रहरियों' के स्वास्थ्य संरक्षण एवं कार्य स्थल पर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा प्रदेश के समस्त नगरीय निकायों के सफाई मित्रों के लिए “स्वच्छता स्वाभिमान कार्यशाला” का आयोजन किया गया। वर्चुअली आयोजित कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य सफाई मित्रों को उनके दायित्व निर्वहन के दौरान स्वास्थ्य के प्रति सजग करना और सुरक्षा मानकों के पालन हेतु प्रशिक्षित करना रहा। स्वास्थ्य ही वास्तविक पूँजी कार्यशाला के मुख्य वक्ता गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल के प्रख्यात विशेषज्ञ डॉ. प्रो. एस.के. पटने (एमडी पीएसएम)उपस्थित रहे। उन्होंने “कार्य के दौरान सावधानियां एवं व्यक्तिगत स्वास्थ्य” विषय पर अपना सारगर्भित और व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया। डॉ. पटने ने रेखांकित किया कि सफाई मित्र हमारी शहरी व्यवस्था की रीढ़ हैं और उनका सुरक्षित रहना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रमुख बिंदु सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य उपयोग: कार्य के दौरान दस्ताने, मास्क और गमबूट (PPE) जैसे उपकरणों को केवल औपचारिकता न मानकर जीवन रक्षक कवच के रूप में अपनाने की सलाह दी गई। संक्रमण से बचाव के लिये कचरा संग्रहण और निस्तारण के दौरान संक्रमण के संभावित खतरों और उनसे बचाव के वैज्ञानिक तरीकों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों द्वारा सफाई मित्रों को समय-समय पर अपनी स्वास्थ्य जांच कराने हेतु प्रेरित किया गया। संवाद से समाधान की ओर कार्यशाला की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका संवादात्मक स्वरूप रहा। प्रदेश के विभिन्न निकायों से जुड़े सफाई मित्रों ने अपनी कार्यशैली और स्वास्थ्य संबंधी शंकाओं को डॉ. पटने के समक्ष रखा। डॉ . पटने ने अत्यंत सहजता से उनकी समस्याओं का समाधान किया और उन्हें कार्य के पश्चात व्यक्तिगत स्वच्छता के नियमों से अवगत कराया गया। विभाग की प्रतिबद्धता और भविष्य का लक्ष्य विभागीय अधिकारियों ने इस अवसर पर कहा कि “स्वच्छ भारत मिशन (शहरी)” की सफलता केवल साफ गलियों से नहीं, बल्कि उन गलियों को साफ करने वाले हाथों की मजबूती और सुरक्षा से भी मापी जाती है। यह कार्यशाला सफाई मित्रों के जीवन स्तर में गुणात्मक सुधार लाने और उन्हें एक भयमुक्त एवं स्वस्थ्य कार्य वातावरण उपलब्ध कराने की हमारी निरंतर प्रतिबद्धता का प्रमाण है। कार्यक्रम के समापन पर समस्त प्रतिभागियों से आह्वान किया गया कि वे कार्यशाला में अर्जित ज्ञान को अपने दैनिक जीवन और कार्य प्रणाली का अभिन्न अंग बनाएं, जिससे स्वस्थ सफाई मित्र—स्वच्छ प्रदेश का संकल्प सिद्ध हो सके।  

नया रेलवे ट्रैक 100 किमी की दूरी घटाएगा, भोपाल के करीब पहुंचेगा यह महानगर

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और राजस्थान के कोचिंग महानगर कोटा के बीच की दूरी जल्द ही सिमट जाएगी। भोपाल रामगंज मंडी रेलवे ट्रैक के चालू होने से यह सुविधा मिलेगी। नए ट्रैक से भोपाल एवं कोटा के बीच लगभग 100 किमी की दूरी कम हो जाएगी। नई रेलवे लाइन जल्द ही बनकर तैयार हो जाएगी। पिछले 3 साल से चल रहा यह प्रोजेक्ट दिसंबर 2026 के अंत तक पूरा करने की तैयारी है। भोपाल रामगंज मंडी नई रेल लाइन परियोजना के लिए हाल ही में कोटा मंडल के अंतर्गत खिलचीपुर राजगढ़ सिटी स्टेशन के बीच 17.8 किलोमीटर लंबे रेलवे ट्रैक पर रेलवे सुरक्षा कमिश्नर ने सुरक्षा का जायजा लिया। इस क्षेत्र में यात्री ट्रेन को 130 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ाकर स्पीड ट्रायल लिया गया। ये स्टेशन आएंगे रेल नेटवर्क में मध्यप्रदेश के राजगढ़ और सीहोर जिले के कई स्टेशन इस परियोजना के तहत पहली बार रेल नक्शे पर आएंगे। इनमें पिपलहेड़ा, सोनकच्छ, नरङ्क्षसहगढ़, जमुनियागंज, कुरावर, श्यामपुर, दुराहा, झारखेड़ा, मुगलियाहाट शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोग अब तक सड़क मार्ग पर निर्भर थे, लेकिन रेल सेवा शुरू होने के बाद भोपाल और राजस्थान के शहरों तक पहुंच आसान हो जाएगी। दूरी 100 किमी घटेगी, समय में 2-3 घंटे की बचत नई रेल लाइन शुरू होने के बाद मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल और राजस्थान के महानगर कोटा के बीच करीब 100 किलोमीटर दूरी कम होगी और यात्रियों का 2 से 3 घंटे समय बचेगा। राजगढ़ और सीहोर के कई इलाके पहाड़ी और ग्रामीण हैं, जहां रेल सुविधा नहीं थी। नई लाइन इन क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ेगी, जिससे रोजगार, व्यापार और शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे। 276 किमी का लंबा ट्रेक: करीब 276 किमी लंबी रेल परियोजना में अब तक 187 किमी का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। इसमें शेष 89 किलोमीटर का कार्य मार्च 2026 तक वित्तीय वर्ष 2026-27 से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सीनियर डीसीएम सौरभ कटारिया ने बताया कि भोपाल रामगंजमंडी प्रोजेक्ट का काम तेजी से खत्म किया जा रहा है। इसके शुरू होते ही कई नए स्टेशन बनेंगे। कोटा से भोपाल की दूरी कम हो जाएगी। ट्रेनें निरस्त होने से बढ़ी समस्या, पहले था कन्फर्म, अब हर ट्रेन में वेटिंग इधर गर्मी के मौसम और छुट्टियों के सीजन में लंबी दूरी की ट्रेनें निरस्त होने से लोगों के सामने संकट खड़ा हो गया है। कंफर्म टिकट निरस्त करवाने के बाद अब जब दोबारा अन्य तारीख पर टिकट लेने का प्रयास कर रहे हैं तो लंबी वेटिंग मिल रही है। कई तारीख पर रिग्रेट की स्थिति बन रही है। रेलवे मेंटेनेंस के चलते पंजाब, छत्तीसगढ़, ओडिशा रूट पर भोपाल से गुजरने वाली आधा दर्जन गाडिय़ों को निरस्त किया गया है एवं अलग-अलग तारीख पर रीशेड्यूल कर दिया गया है। रेलवे ने दावा किया, सभी प्रभावित यात्रियों को रिफंड कर दिया जाएगा। भोपाल रेल मंडल पर इस प्रकार अनावश्यक कैंसिलेशन के चलते लगभग 50 लाख का आर्थिक बोझ भी रिफंड के रूप में आ गया है। ये ट्रेनें निरस्त: कोरबा-अमृतसर एक्सप्रेस- 25 अप्रैल अमृतसर- बिलासपुर एक्सप्रेस 27 अप्रैल तक रद्द। 12410- 8, 9, 11, 13, 14, 15, 16, 18, 20, 21, 22 अप्रैल। 12409- 8, 9, 10, 11, 13, 15, 16, 17, 18, 20, 22, 23, 24 अप्रैल। 12807- 8, 9, 11, 12, 14, 15, 16, 18, 19, 21, 22, 23 अप्रैल 12808 – 9, 10, 11, 13, 14, 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24, 25 अप्रैल तक रद्द।

प्रदेश में 6500 से अधिक बैंक शिकायतें, उपभोक्ताओं का सबसे ज्यादा गुस्सा इस बैंक पर

भोपाल  मध्यप्रदेश में बैंकिंग व्यवस्था और उपभोक्ताओं के बीच तालमेल बिगड़ता नजर आ रहा है। राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की ताजा रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े बताते हैं कि 10 मार्च 2026 तक सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर बैंकों के खिलाफ कुल 6544 शिकायतें लंबित हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) से लोग सबसे ज्यादा खफा हैं जोकि शिकायतों के मामले में पहले स्थान पर है। चिंताजनक बात यह है कि आम जनता की शिकायतों को निपटाने में प्रदेश की राजधानी भोपाल ही सबसे फिसड्डी साबित हो रही है। यह आंकड़े बैंकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। जब डिजिटल इंडिया के दौर में बैंकिंग सेवाओं के सरल होने का दावा किया जा रहा है, तब हजारों लोगों का अपनी छोटी- छोटी समस्याओं के लिए मुख्यमंत्री की चौखट तक पहुंचना प्रशासन के लिए आत्ममंथन का विषय है। भोपाल के लोग सबसे ज्यादा परेशान, रीवा और ग्वालियर भी पीछे नहीं जिलों की बात करें तो भोपाल 434 लंबित शिकायतों के साथ सूची में टॉप पर है। इसके बाद रीवा (287), ग्वालियर (279) और इंदौर (241) का नंबर आता है। छोटे जिलों में अलीराजपुर सबसे बेहतर स्थिति में है, जहां मात्र 10 शिकायतें लंबित हैं। आम आदमी की सबसे बड़ी मुसीबत- खाता संचालन और सरकारी योजनाएं रिपोर्ट के मुताबिक, जनता सबसे ज्यादा परेशान अपने बैंक खाते के संचालन को लेकर है। कुल 6544 शिकायतों में से लगभग 49 फीसदी मामले (3191) केवल खाता खोलने, बंद करने या खातों को बिना सूचना होल्ड करने से संबंधित हैं। इसके साथ ही एटीएम कार्ड जारी करने, एटीएम कार्ड से राशि कटने (230 शिकायतें), आधार कार्ड लिंक/खाते में केवायसी/इ-केवायसी (337 शिकायतें), पासबुक जारी करना/पासबुक ​प्रिंटिंग एवं चेक बुक से संबंधित (113 शिकायतें), शासकीय ऋण एवं अनुदान/ब्याज अनुदान से संबंधित (1454 शिकायतें) शामिल हैं। लोकपाल में कर सकते शिकायत… आरबीआई के दिशा-निर्देशों के अनुसार, बैंकों को ग्राहक शिकायतों का निपटारा एक निश्चित समय सीमा में करना अनिवार्य है। लेकिन सीएम हेल्पलाइन का यह डेटा बताता है कि धरातल पर बैंक अधिकारियों और जनता के बीच क्युनिकेशन गैप गहराता जा रहा है। यदि आपका बैंक आपकी सुनवाई नहीं कर रहा है, तो आप सीएम हेल्पलाइन (181) के अलावा आरबीआई के लोकपाल से भी संपर्क कर सकते हैं। बैंकों में स्टाफ की कमी भी बड़ा कारण सेवानिवृत्त एसबीआइ अधिकारी हेमंत गोस्वामी बताते हैं कि काम के बोझ के कारण कई बार सेवाओं में कमी आती है। इसका एक बड़ा कारण बैंकों में स्टाफ की कमी का होना भी है। फिर भी समय-समय पर बैंककर्मी ग्राहकों का समस्या का समाधान करते रहते हैं। ग्राहकों की अपेक्षाएं और त्वरित सेवा की आशा अधिक रहती है। एमपी में बैंकिंग सेक्टर में अधिक कार्य क्षेत्र स्टेट बैंककर्मियों पर होने के कारण उनकी शिकायतेें भी अधिक हैं। किस बैंक से जनता को कितनी शिकायत? सरकारी बैंकों में शिकायतों का ग्राफ काफी ऊंचा है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआइ) 1418 शिकायतों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (817) और बैंक ऑफ इंडिया (746) का नंबर आता है। निजी क्षेत्र में एचडीएफसी बैंक (346) के खिलाफ सबसे अधिक मामले दर्ज हैं। अधिकारियों के स्तर पर अटकी फाइलें शिकायतों के निराकरण की सुस्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अधिकांश शिकायतें एल1 (रीजनल मैनेजर) और एल3 (अग्रणी जिला प्रबंधक) के स्तर पर अटकी हुई हैं। ■ एल1 स्तर पर : 2,941 मामले ■ एल2 स्तर पर : 2,446 मामले कुल लंबित शिकायतें : 6544 सबसे ज्यादा शिकायतों वाला शहर : भोपाल (434 मामले) सबसे बड़ी समस्या : बैंक खाता खोलने, बंद करने या होल्ड होने से जुड़ी (3191 मामले)