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पंजाब में बड़ा बदलाव: 102 नगर परिषदों के प्रधान और 9 नगर निगमों के मेयर हटाए गए

चंडीगढ़   चुनाव में देरी के चलते पंजाब सरकार ने 102 नगर परिषदों के प्रधान और नौ नगर निगमों के मेयर को हटा दिया है। इसके साथ ही प्रशासनिक अधिकारी नियुक्त कर दिए गए हैं। यह अधिकारी चुनाव होने तक कामकाज देखेंगे। आज से ही प्रशासनिक अधिकारी नगर परिषद और नगर निगम के कार्य संभालना शुरू कर देंगे। पंजाब सरकार ने राज्य के नगर परिषद और नगर निगमों के कार्यकाल संबंधी आदेश जारी किए हैं। जिसमें लिखा गया है कि पंजाब नगर पालिका अधिनियम, 1911 और पंजाब नगर निगम अधिनियम, 1976 के तहत राज्यपाल ने उपयुक्त अधिकारियों को अस्थायी रूप से नगर पालिकाओं और नगर निगमों की सभी शक्तियों और कर्तव्यों का पालन करने के लिए नियुक्त किया है। जारी आदेश के अनुसार, नगर पालिकाओं के कार्यकाल 5 अप्रैल से लेकर 17 जून तक के बीच में खत्म हो रहे हैं।  हालांकि, राज्यपाल की राय है कि इन नगर पालिकाओं और निगमों के चुनाव कार्यकाल की समाप्ति से पहले आयोजित नहीं किए जा सकते हैं। इसलिए पंजाब के राज्यपाल ने अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत अधिकारियों को उनके पांच वर्ष के कार्यकाल की समाप्ति के अगले दिन से लेकर पुनर्गठित होने तक सभी प्रशासनिक शक्तियों और कर्तव्यों का प्रयोग करने का अधिकार दिया है। अबोहर निगम का कार्यकाल 8 अप्रैल, एसएएस नगर, होशियारपुर, बठिंडा का कार्यकाल 11 अप्रैल को समाप्त हो रहा है। वहीं, बटाला नगर निगम का 18 अप्रैल, बरनाला 14 अप्रैल, पठानकोट 28 अप्रैल, मोगा 12 मई 2026, कपूरथला 6 जून को कार्यकाल समाप्त हो रहा है। इन सभी नगर निगम के लिए कमिश्नर नियुक्त किए गए हैं। अधिकारियों की यह नियुक्ति नगर पालिकाओं और नगर निगमों की सुचारू व प्रभावी कार्यवाही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई है, ताकि स्थानीय प्रशासनिक कार्य बाधित न हों। इस कदम से स्थानीय निकायों में संचालन की स्थिरता बनी रहेगी और नागरिकों को नियमित सेवाएं उपलब्ध होती रहेंगी।

प्रॉपर्टी रजिस्ट्री से पहले KYC अनिवार्य: नए आदेश लागू

अमृतसर. रजिस्ट्री दफ्तरों में सरगर्म लैंड माफिया के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई करते हुए एफ.सी.आर. (फाइनांस कमिश्नर रैवेन्यू) अनुराग वर्मा के आदेशानुसार जहां डी.सी. दलविन्दरजीत सिंह की तरफ से 8 जाली रजिस्ट्रियां करवाने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है। वहीं रजिस्ट्री दफ्तरों में हाल ही में तैनात किए गए सब-रजिस्ट्रारों ने जिसमें सब-रजिस्ट्रार वन जसबीर सिंह संधू, सब-रजिस्ट्रार टू अभिषेक वर्मा और सब-रजिस्ट्रार विकास गुप्ता सहित, सब-रजिस्ट्रार करनबीर ढिल्लों की तरफ से सभी वसीका नवीसों को निर्देश दिए गए हैं कि रजिस्ट्री करवाने से पहले खरीदार और बेचने वालों के दस्तावेजों की ‘के.वाई.सी.’ जरूर करवाई जाए। अधिकारियों ने कहा कि ईजी रजिस्ट्री के तहत माल विभाग की तरफ से ‘के.वाई.सी.’ को जल्द ही सबके लिए जरुरी कर दिया जाएगा, लेकिन फिर सभी वसीका नवीसों और रैवेन्यू से संबंधित वकीलों को दस्तावेजों की ‘के.वाई.सी.’ जरुर करवानी चाहिए, ताकि बार-बार सामने आने वाली जाली रजिस्ट्रियों पर लगाम लगाई जा सके। दूसरी तरफ वसीका नवीस यूनियन की तरफ से जिला प्रधान नरेश शर्मा ने भी आश्वासन दिया है कि यूनियन के सभी पदाधिकारियों व सदस्यों की तरफ से ‘के.वाई.सी.’ को पहल के आधार पर किया जा रहा है, क्योंकि जब भी कोई जाली रजिस्ट्री का मामला पकड़ा जाता है तो इससे इमानदारी के साथ काम करने वाले वसीका नवीसों की भी बदनामी होती है। ‘के.वाई.सी.’ के पहले ही दिन पकड़ा गया था नकली अरमान जमीन जायदाद की रजिस्ट्री करवाते समय ‘के.वाई.सी.’ कितनी अहम बन जाती है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिस समय सरकार की तरफ से रजिस्ट्रियों के दस्तावेजों में ‘के.वाई.सी.’ को शुरू करवाया गया तो पहले ही दिन एक नाबालिग लड़के की जमीन की जाली रजिस्ट्री होने से बच गई, जिसका नाम अरमान था संबंधित वसीका नवीस ने जब तथाकथित अरमान के दस्तावेजों की के.वाई.सी. करवाई तो अरमान नकली निकला। मामला थाने तक भी पहुंच गया, लेकिन लैंडमाफिया ने अपना दबाव बनाकर मामले को रफा- दफा कर दिया, जबकि प्रशासन की तरफ से इस मामले की गहराई के साथ जांच की जानी चाहिए थी और नकली दस्तावेज बनाने वाले आरोपियों पर सख्त एक्शन लेना चाहिए था। नकली दस्तावेज पेश करने वाले के खिलाफ 7 वर्ष की सजा का प्रावधान रजिस्ट्री दफ्तरों पर लागू रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत यदि रजिस्ट्री दफ्तरों में तैनात तहसीलदार या सब-रजिस्ट्रार आदि को कोई व्यक्ति नकली दस्तावेज पेश करता है या फिर जाली रजिस्ट्री करवाता है तो पांच लाख रुपये तक जुर्माना और 7 वर्ष की सजा का प्रावधान है रजिस्ट्री लिखते समय भी यह लिखा जाता है, लेकिन बड़े प्रशासनिक अधिकारियों की तरफ से इस बाबत कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाते हैं, जिससे लैंड माफिया का हौंसला बढ़ता जाता है।

मदिरा से भरा सरकारी खजाना: राजनांदगांव में 360 करोड़ की आमद, बढ़ेंगी दुकानें

राजनांदगांव. जिले में आबकारी विभाग के खजाने में शराब प्रेमियों में भरपूर राजस्व जमा कर दिया है। वर्ष 2025-26 में राजनांदगांव जिले में आबकारी विभाग ने छह सौ करोड़ का शराब बेच दिया। जिससे विभाग के खजाने में 360 करोड़ रुपए का राजस्व जमा हो गया है। पिछले साल प्राप्त राजस्व 345 करोड़ का रिकार्ड टूटने के बाद आबकारी विभाग ने इस बार चार सौ करोड़ रुपए अधिक के राजस्व का अनुमान लगाया है। यही नहीं इस को देखते हुए आबकारी विभाग ने सात और दुकान खोलने की तैयारी कर ली है। जानकारी के अनुसार, पिछले साल आबकारी विभाग को 585 करोड़ का शराब बेचने पर 345 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ था। लेकिन इस बार यह आंकड़ा पिछले साल से बढ़कर 360 करोड़ रुपए तक पहुंच गया हैं। वर्ष 2025-26 में अप्रैल से मार्च तक वित्तीय वर्ष में छह सौ करोड़ रुपए की शराब बिक्री हुई। यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष से लगभग 24 फीसदी तक अधिक है। आंकड़ों के अनुसार, जिले में सालभर में कुल 327 करोड़ रुपए की देशी शराब बेची गई है, यहां कुल बिक्री का लगभग 54 फीसदी है। वहीं शेष 225 करोड़ की विदेशी और 48 करोड़ विदेशी माल्ट शराब बेची गई। जिले में कुल 19 दुकानें स्थापित किए गए है। साढ़े छह सौ करोड़ शराब बिक्री का अनुमान जिले में हाल के वित्तिय वर्ष में छह सौ करोड़ का शराब बिकने के बाद आबकारी विभाग के अफसर इस वर्ष 2026-27 में बिक्री का अनुमसान साढ़े छह सौ करोड़ रुपए तक आंक रहे है। इस बिक्री से अबकारी को चार सौ करोड़ का राजस्व प्राप्त हो सकता हैं।

मध्य प्रदेश में 3 चक्रवात सक्रिय, 7 जिलों में बारिश, 11 जिलों में अलर्ट; ओले पड़ने की आशंका

भोपाल मध्य प्रदेश के आसमान पर इस समय तीन साइक्लोनिक सर्कुलेशन मंडरा रहे हैं, जिसके प्रभाव से अप्रैल के महीने में मानसून जैसा नजारा दिख रहा है. बुधवार को भोपाल, उज्जैन और रायसेन समेत 7 जिलों में झमाझम बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई है. मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ घंटों में प्रदेश के कई हिस्सों में ओले गिर सकते हैं।  ओलावृष्टि और आंधी का 'डबल अटैक' मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, दतिया, निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़ में ओले गिरने का प्रबल अनुमान है. इसके अलावा, ग्वालियर-चंबल संभाग और विंध्य क्षेत्र के 18 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।  IMD (मौसम केंद्र), भोपाल ने ग्वालियर, भिंड, मुरैना, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर समेत 18 जिलों में बारिश होने का अलर्ट है, वहीं दतिया, निवाड़ी, छतरपुर और टीकमगढ़ में ओले गिरने का अनुमान जताया है। इससे पहले मंगलवार को भिंड, श्योपुर, मुरैना, शिवपुरी, श्योपुर, ग्वालियर, दतिया, निवाड़ी, गुना, अशोक नगर, टीकमगढ़, सतना के चित्रकूट और रीवा में मौसम का मिजाज बदला हुआ रहा। कहीं, तेज आंधी चली तो कहीं बारिश का दौर जारी रहा। शिवपुरी, दतिया, धार, पीथमपुर और झाबुआ में तेज बारिश हुई। वहीं रतलाम में धूल भरी हवाएं चलीं। हवा की रफ्तार: प्रदेश के कुछ हिस्सों में आंधी की रफ्तार 40 से 60 किमी प्रतिघंटा तक रह सकती है।  नया सिस्टम: 11 अप्रैल को एक नया पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) सक्रिय हो रहा है, जिससे अप्रैल के दूसरे सप्ताह में भी गर्मी से राहत मिलने के आसार हैं।  11 अप्रैल को नया सिस्टम मौसम विभाग की मानें तो 11 अप्रैल को उत्तर-पश्चिमी हिस्से में नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव होगा, जिसका असर प्रदेश में भी देखने को मिल सकता है। तेज आंधी भी चलेगी मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में तेज आंधी भी चलेगी। कुछ जिलों में इसकी अधिकतम रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक रहेगी। बाकी में 30 से 40 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से आंधी चलेगी। मौसम का मिजाज दोपहर बाद ही बदलेगा। भोपाल में 1996 में पड़ी थी सबसे ज्यादा गर्मी अप्रैल में गर्मी के ट्रेंड की बात करें तो भोपाल में 29 अप्रैल 1996 को अधिकतम तापमान 44.4 डिग्री सेल्सियस पहुंचा था। इस महीने भोपाल में बारिश-आंधी के आसार भी बनते हैं। यही कारण है कि पिछले कुछ साल से अप्रैल में बारिश का दौर चल रहा है। 20 अप्रैल 2013 को भोपाल में 24 घंटे के भीतर 30.8 मिमी यानी एक इंच से ज्यादा बारिश हुई थी। वहीं, 2023 में 22.6 मिमी पानी गिरा था। 17-18 अप्रैल को तापमान 40.9 डिग्री सेल्सियस रहा था। भीषण गर्मी का इतिहास और वर्तमान मध्य प्रदेश में अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा आमतौर पर झुलसाने वाली गर्मी के लिए जाना जाता है।  ग्वालियर में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है. भोपाल का रिकॉर्ड 29 अप्रैल 1996 को 44.4 डिग्री रहा था. हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से 'क्लाइमेट चेंज' के कारण अप्रैल में बारिश का ट्रेंड बढ़ा है. साल 2013 और 2023 में भी अप्रैल के दौरान भारी बारिश दर्ज की गई थी।  इन जिलों में बारिश का अलर्ट: ग्वालियर, भिंड, मुरैना, पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, मैहर, कटनी, उमरिया, शहडोल, अनूपपुर, इटारसी और शिवपुरी। 

पश्चिमी राजस्थान के औद्योगिक विकास को लगेंगे पंख, प्रधानमंत्री करेंगे 79 हजार करोड़ की रिफाइनरी का लोकार्पण

जयपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 21 अप्रैल को राजस्थान के बालोतरा जिले में पचपदरा रिफाइनरी के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। यह दौरा पिछले दो महीनों में उनका दूसरा राजस्थान दौरा होगा। इससे पहले वे 28 फरवरी 2026 को अजमेर आए थे, जहां उन्होंने हजारों करोड़ की विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया था। मारवाड़ सहित पूरे पश्चिमी राजस्थान के लिए पचपदरा रिफाइनरी का खास महत्व है। इस परियोजना से बाड़मेर और जैसलमेर क्षेत्र में इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होने की संभावना है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स और सहायक उद्योगों को बड़ा बढ़ावा मिलेगा। जनवरी से ही पहले चरण के ट्रायल रन की तैयारी शुरू कर दी गई थी और अब जल्द ही कमर्शियल उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। रिफाइनरी परियोजना का इतिहास भी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। इसका पहला शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को सोनिया गांधी ने किया था, उस समय प्रदेश में अशोक गहलोत की सरकार थी और लागत करीब 37,230 करोड़ रुपए आंकी गई थी। बाद में शर्तों में बदलाव के बाद 16 जनवरी 2018 को प्रधानमंत्री मोदी ने इसका पुनः शुभारंभ किया, तब लागत बढ़कर 43,129 करोड़ रुपए हो गई। समय के साथ परियोजना की लागत लगातार बढ़ती गई और अब यह करीब 79,459 करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है।   मुझे यह जानकारी देते हुए अत्यंत हर्ष और गर्व की अनुभूति हो रही है कि विश्व के सर्वाधिक लोकप्रिय नेता, हम सभी के मार्गदर्शक, यशस्वी प्रधानमंत्री आदरणीय श्री @narendramodi जी आगामी 21 अप्रैल 2026 को पचपदरा रिफाइनरी के लोकार्पण हेतु वीरधरा राजस्थान पधार रहे हैं। रिफाइनरी के बारे में रिफाइनरी की सालाना क्षमता 9 मिलियन टन कच्चे तेल के प्रसंस्करण की है, जबकि 2 मिलियन टन का पेट्रोकेमिकल उत्पादन भी होगा। इसमें करीब 7.5 मिलियन टन क्रूड ऑयल अरब देशों से आयात किया जाएगा और शेष 1.5 मिलियन टन तेल राजस्थान में उत्पादित होगा। कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी रिफाइनरी रिफाइनरी परियोजना राजस्थान और देश के लिए एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक सपना रही है, जिसकी यात्रा दो दशकों में कई मोड़ों, समझौतों और विवादों से होकर गुजरी है। शुरुआत (2005-2013) वर्ष 2005 में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 12,000 करोड़ रुपए रखी गई थी। इसके बाद 2013 में अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में पचपदरा में एचपीसीएल के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर हुए और शिलान्यास किया गया। उस समय परियोजना की लागत बढ़कर 37,320 करोड़ रुपए हो गई और इसकी वार्षिक क्षमता 90 लाख टन तय की गई। राजे सरकार में नए एमओयू (2013-2017) वसुंधरा राजे सरकार के सत्ता में आने के बाद पिछली सरकार के समझौते की शर्तों पर सवाल उठाए गए। इसके बाद 2017 में एचपीसीएल के साथ नया समझौता हुआ, जिसमें राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले ब्याज-मुक्त ऋण की राशि में बड़ा बदलाव किया गया और इसे 3,736 करोड़ रुपए से घटाकर 1,123 करोड़ रुपए प्रतिवर्ष कर दिया गया।2018 में पीएम मोदी ने किया शिलान्यास (2018-2025) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2018 में परियोजना स्थल का उद्घाटन किया।    

जंगल माफिया और अफसरों की मिलीभगत पर सरकार सख्त, पंचकूला के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन पर गिरेगी गाज

पंचकूला पंचकूला के संरक्षित वन क्षेत्र (आसरेवाली जंगल) में खैर के 1148 पेड़ कटने व उनकी तस्करी के मामले में राज्य सरकार ने कड़ा संज्ञान लिया है। विभाग की प्राथमिक जांच में चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन आईएफएस अधिकारी बी निवेदिता, पंचकूला के रेंज अधिकारी इंस्पेक्टर सुरजीत सिंह और जिला वन्य जीव अधिकारी आरपी दांगी की लापरवाही व मिलीभगत सामने आई है। पर्यावरण, वन एवं वन्य जीव विभाग के एसीएस ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को इन तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। निर्देश मिलने के बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पंचकूला के पुलिस कमिश्नर से तीनों पर प्राथमिकी दर्ज करने की सिफारिश की है। उन्होंने प्राथमिकी में भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा लगाने व वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत कार्रवाई किए जाने की मांग की है। इस मामले में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को भी विभागीय रिपोर्ट सौंपी गई है। इसमें कहा गया है कि तीनों अधिकारियों की लापरवाही से कुल ⁠1148 पेड़ काटे गए हैं जिनमें 99 फीसदी खैर के है। कटे पेड़ों के ठूंठ को जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई है। रिपोर्ट में साफ लिखा है कि इतने बड़े स्तर पर अवैध कटाई बिना अंदरखाने मिलीभगत के नहीं हो सकती है। पत्र में तीनों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के निर्देश दिए जाने की बात भी है। इस मामले की जांच के लिए बनाई गई छह सदस्यीय एसआईटी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मामले की जांच शुरू हो गई है। आरोप सही साबित होने पर पहले से दर्ज एफआईआर में तीनों का नाम जोड़ा जा सकता है। तीनों की भूमिका बी. निवेदिता अंबाला कमिश्नरी और रोहतक कमिश्नरी की चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन हैं। रोहतक सर्कल में सात और अंबाला सर्कल के पांच जिलों में स्थित वाइल्ड लाइफ सेंचुरी, चिड़ियाघर और कलेसर नेशनल पार्क की निगरानी की जिम्मेदारी इनके पास ही है। रिपोर्ट में लिखा कि इनकी सुपरविजन में लापरवाही हुई है जिसकी वजह से जंगल माफिया को जमकर पेड़ काटने से रोका नहीं जा सका। सुरजीत सिंह वाइल्डलाइफ रेंज अधिकारी होने के नाते पंचकूला के सभी संरक्षित जंगल क्षेत्र की सुरक्षा व वन्यजीव संरक्षण की जिम्मेदारी है। वह अपनी जिम्मेदारी निभाने में असफल साबित हुए। आरपी दांगी बतौर जिला वन्य जीव अधिकारी के अधीन पंचकूला, यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र और कैथल के जंगल व चिड़ियाघर आते हैं। उनको हर माह में अपने कार्यक्षेत्र के अधीन आने वाले एक वन क्षेत्र का निरीक्षण कर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजनी होती है। रिपोर्ट के अनुसार, इन्होंने भी ड्यूटी ठीक से नहीं निभाई।  

नीति में बदलाव: बिहार के मॉडल स्कूलों में अब उर्दू पढ़ाई भी होगी शुरू

पटना. बिहार के मॉडल स्कूलों में अब उर्दू की भी होगी पढ़ाई, सरकार ने बदला अपना फैसला; BSUTA ने जताई खुशी सीतामढ़ी. बिहार के 534 मॉडल स्कूलों में विभिन्न विषयों के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में उर्दू विषय को शामिल कर लिया गया है। इससे उर्दू के शिक्षकों में जहां खुशी देखी जा रही है। वहीं, मॉडल स्कूलों में उर्दू की पढ़ाई भी सुनिश्चित हो सकेगी। इसको लेकर लेकर कुछ उर्दू शिक्षक संघों ने भी आवाज उठाई थी। इसके बाद यह मामला सरकार के संज्ञान में आया और इस दिशा में पहल की गई। भाषा को मिला न्याय: कमर बिस्बाही  बिहार स्टेट उर्दू टीचर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष क़मर मिस्बाही ने इसके लिए मुख्यमंत्री, शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को धन्यवाद दिया है। उन्होंने राज्य भर के मॉडल स्कूलों में ट्रांसफर होने के इच्छुक उर्दू शिक्षकों से जल्द से जल्द ई-शिक्षा पोर्टल पर ऑनलाइन फार्म भरने का आग्रह किया है, ताकि उनकी उम्मीदवारी पक्की हो सके। उन्होंने कहा कि इससे राज्य की दूसरी आधिकारिक भाषा को मिला न्याय मिल सकेगा। मॉडल स्कूलों के लिए शिक्षकों के रूप में उच्च शिक्षित और ट्रेंड शिक्षकों के चयन के लिए ऑनलाइन आवेदन मांगे गए थे, लेकिन इसमें उर्दू विषय के लिए कोई पद आवंटित नहीं किया गया था।

ड्रग्स ने ली 20 जिंदगियां: पंजाब में मातम, एक ही परिवार के चार भाई भी शिकार

कपूरथला. सुल्तानपुर लोधी के मोहल्ला पंडोरी की एक मां के चार बेटों को नशे ने लील लिया और पांचवां भी जिंदगी और-मौत के बीच झूल रहा है। एक-एक करके मां-बाप की आंखों के सामने बेटे काल के गाल में समाते गए, लेकिन इस मां की चीखे अंत तक झकझोर रही हैं। केवल यही नहीं, माेहल्ले में नशे ने और भी युवाओं को मौत की नींद सुलाया है। अब तो मोहल्ले के लोग इतने दुखी हैं कि इस नशे के कोहड़ से बचाने कोई तो मदद को आगे आए। रविवार को मोहल्ले की महिलाओं के पिट स्यापे और रो-रोकर सुनाई आपबीती की गूंज सीएम दरबार तक पहुंची गई है। मीडिया के जरिये मामला तूल पकड़ने के बाद अब जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। मोहल्ले में सुबह से सर्च आपरेशन चल रहा है। बाबा नानक की नगरी में थाने की दीवार से सटे मोहल्ला पंडोरी की दर्दनाक तस्वीरे नशे के नाश के दावों पर जहां गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, वहीं माताओं की चीखें और उजड़े परिवारों की कहानियां इस बात की गवाही दे रही हैं कि नशे की जड़े बेहद गहरी हैं। अब लोगों का गुस्सा ऐसा फूटा कि उनको दर्द बयां करने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करना पड़ा। सरेआम पुड़ियां पकड़ा जाते हैं तस्कर मोहल्ले की महिलाओं ने आरोप लगाया है कि नशे का कारोबार न केवल खुलेआम जारी है, बल्कि अब यह पुलिस थानों के आसपास तक पहुंच चुका है। उनका कहना है कि तस्कर मुंह ढककर मोटरसाइकिलों पर आते हैं और खुलेआम ‘चिट्टे’ की पुड़िया देकर फरार हो जाते हैं। सबसे दिल दहला देने वाली कहानी एक मां की है, जिसने नशे के कारण अपने चार बेटों को खो दिया है। उसकी आंखों में आंसू और आवाज में दर्द साफ झलकता है। चार बेटे को खो चुकी मां रविवार के प्रदर्शन में शामिल इसी मोहल्ले के दंपति जोगिंदर पाल सिंह और उनकी पत्नी मनजीत कौर ने कहा कि नशे की वजह से मैं अपने चार बेटों जसविंदर सिंह, बलविंदर सिंह, मिथुन और रवि खो चुकी हूं। इनमें 2 शादीशुदा और 2 कुंवारे थे। अब 32 साल का 5वां बेटा सोनू भी बिस्तर पर पड़ा है। हमें डर है कि अब इसकी भी मौत हो जाएगी। रुद्धन भरे स्वर में उसने बताया कि “मैं पांच बेटों की मां हूं… चार को नशे ने मुझसे छीन लिया… और पांचवां भी बिस्तर पर पड़ा है… डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया है।” यह दर्द सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है। मोहल्ले की कई महिलाओं ने सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई हैं। किसी ने दो बेटों को खोया, किसी ने तीन तो किसी का इकलौता सहारा भी नशे की भेंट चढ़ चुका है। प्रदर्शन में शामिल दुखी महिलाओं के गंभीर आरोप मोहल्ले की महिलाओं ने प्रशासन और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि इलाके में नशा आज भी सरेआम बिक रहा है। तस्कर बेखौफ होकर पुलिस स्टेशन के आसपास ही नशा बेच रहे हैं। सरकार द्वारा चलाए जा रहे “नशे के खिलाफ युद्ध” का जमीनी स्तर पर कोई असर दिखाई नहीं दे रहा। एक अन्य बेबस मां ने अपने छोटे-छोटे पोतों की ओर इशारा करते हुए प्रशासन से गुहार लगाई, “हमारे बेटे तो चले गए, अब कम से कम इन मासूमों को बचा लो।” महिलाओं का कहना है कि जब ‘बाबा नानक की नगरी’ में ही लोग सुरक्षित नहीं हैं और पुलिस थानों के नजदीक नशा बिक रहा है, तो आम जनता की सुरक्षा पर सवाल उठना लाजिमी है। एक ही गली में 20 से ज्यादा युवा गंवा चुके जान मोहल्ला पंडोरी की एक गली में पिछले कुछ सालों में 20 से ज्यादा युवा नशे की भेंट चढ़ चुके हैं। लेकिन नशे पर लगाम लगने की बजाय यह लगातार फल-फूल रहा है। एएसपी सुल्तानपुर लोधी ने क्या कहा? एएसपी सुल्तानपुर लोधी धीरेंद्र वर्मा ने कहा कि मोहल्ला पंडोरी में जिस महिला द्वारा अपने चार बेटों की मौत होने का दावा किया जा रहा है, उसने कभी इसकी रिपोर्ट थाने में नहीं दी। उसके सबसे बड़े बेटे की मौत आठ साल पहले नशे से हुई थी, उससे छोटे की मौत सात साल पहले जलने, तीसरे की पांच साल पहले जेल और चौथे बेटे की मौत तीन साल पहले अत्याधिक शराब के सेवन से हुई है। महिला का जो पांचवां बेटा भी गंभीर बीमारी से ग्रस्त है। करवाया जा रहा इलाज जिला प्रशासन के निर्देश पर पांचवें बेटे का इलाज करवाया जा रहा है। जरूरत पड़ी तो उसे नशा मुक्ति केंद्र भी भेजा जाएगा। मोहल्ले का सर्वे करवाकर नशे में लिप्त लोगों को नशामुक्ति केंद्र भेज पुलिस उनका ठीक होने तक उपचार करवाएगी। मोहल्ले में नशा तस्करों की कमर तोड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिस लगातार मोहल्ले में छापेमारी करती रहेगी।

एग्जाम में गड़बड़ी पर कार्रवाई: दुर्ग में इंग्लिश पेपर रद्द, नई तारीख घोषित

दुर्ग. हेमचंद यादव विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित बीकॉम फाइनल इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र को लेकर उठे विवाद का पटाक्षेप कर लिया गया है। वार्षिक परीक्षा 2025-26 बीकॉम भाग 3 की 28 मार्च को हुई परीक्षा निरस्त कर दी गई है। इस आशय की अधिसूचना विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा 7 अप्रैल को जारी किया गया है। यह परीक्षा फिर से आयोजित की जाएगी। 30 अप्रैल को यह परीक्षा दोबारा ली जाएगी। दरअसल, इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र के पैटर्न को लेकर विवाद उठा था। इससे प्रभावित छात्र छात्राओं ने विश्वविद्यालय परिसर में खूब प्रदर्शन भी किया था। छात्रों को प्रदर्शन को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रबंधन ने मामले को परीक्षा समिति में रखे जाने का आश्वासन दिया था। समिति की अनुशंसा के बाद प्रबंधन द्वारा दोबारा परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। प्रश्न पत्र को लेकर स्कूल शिक्षा तथा उच्च शिक्षा विभाग के छात्र- छात्राओं को लेकर परेशानी उठानी पड़ रही है। इन्हें दोबारा परीक्षा देनी पड़ रही है। एक ओर जहां सीजी 12वीं बोर्ड हिंदी विषय के प्रश्न पत्र दोबारा दिए जाने के निर्देश जारी किए गए हैं। दरअसल यह प्रश्न पत्र लीक होने की जानकारी दी गई। वहीं बीकॉम फाइनल के छात्र इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र दोबारा देंगे। इसके बारे में छात्र-छात्राओं ने कहा कि कई प्रश्न आउट ऑफ सिलेबस पूछे गए प्रश्न पत्र सिलेबस के अनुसार नहीं था। यही वजह सामने आया कि ज्यादातर छात्र-छात्राओं के पेपर अच्छे नहीं बने, उनमें आक्रोश पनप गया। ये छात्र-छात्राएं विश्वविद्यालय परिसर में प्रश्न पत्र की कमियों को लेकर प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी किए। बहरहाल बीकॉम फाइनल इंग्लिश लैंग्वेज के प्रश्न पत्र को निरस्त कर छात्र हित में विश्वविद्यालय प्रबंधन ने एक बड़ा कदम उठाया है। सातवीं के प्रश्नपत्र में प्रश्न अधूरा, पूर्णांक भी गायब भिलाई नगर. स्कूली परीक्षा में गड़बड़ियों का सिलसिला जारी है। मंगलवार को सातवीं गणित के प्रश्नपत्र में फिर गड़बड़ी मिली। वहीं कुछ केन्द्रों में सातवीं के प्रश्नपत्र के पैकेट में कक्षा छठवीं का प्रश्नपत्र भी निकलने की खबर है। जानकारी के अनुसार, कुछ परीक्षा केन्द्रों में लिफाफा खोलने पर गणित के प्रश्नपत्र की कटिंग कुछ इस तरह मिली कि जिससे एक तरफ प्रश्नपत्र अधूरा था तो दूसरी ओर पूर्णांक का पता नहीं चल रहा था। जहां पूर्णांक लिखा होता है, वह हिस्सा कट गया था। इससे काफी परेशानी हुई। शिक्षक और बच्चे दोनों परेशान हुए। अधूरे प्रश्नपत्रों को किसी तरह पूरा लिखवाया गया। इसी तरह जहां पूर्णांक कट गया था, वहां पूर्णांक लिखवाया गया। 

पंजाब में लश्कर का बड़ा आतंकी गिरफ्तार, 16 साल पहले की थी घुसपैठ, ऐसे बिछाया था जाल

मालेरकोटला जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के एक बड़े अंतर-राज्यीय आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। केंद्रीय एजेंसियों के सहयोग से कई राज्यों में चलाए गए इस व्यापक अभियान में पुलिस ने लश्कर के एक शीर्ष कमांडर सहित पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में दो पाकिस्तानी नागरिक और उनके तीन स्थानीय मददगार शामिल हैं। ऑपरेशन और गिरफ्तारी यह खुफिया ऑपरेशन 15 दिनों से अधिक समय तक चला और इसमें केंद्रीय एजेंसियों की भी मदद ली गई। जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) की एक टीम ने 10 दिन से अधिक समय पहले पंजाब के मालेरकोटला से लश्कर कमांडर अबू हुरैरा और उसके सहयोगी उस्मान को गिरफ्तार किया। पुलिस ह्यूमन इंटेलिजेंस और तकनीकी निगरानी के जरिए पंजाब में स्थित इस आतंकी ठिकाने तक पहुंचने में कामयाब रही। इन दोनों पाकिस्तानी नागरिकों के अलावा, कश्मीर घाटी से तीन अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। ये तीनों श्रीनगर शहर के रहने वाले हैं और इन पर हुरैरा और उसके सहयोगी की मदद करने का आरोप है। कौन है अबू हुरैरा? इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस सूत्रों के हवाले से लिखा है कि अबू हुरैरा लश्कर-ए-तैयबा का एक शीर्ष कमांडर है। उसने करीब 16 साल पहले 2010 में कश्मीर घाटी में घुसपैठ की थी। कई वर्षों तक घाटी में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के बाद, वह सुरक्षाबलों के रडार से गायब हो गया। इसके बाद उसने पंजाब में अपना नया ठिकाना बनाया, जहां वह अपनी असली पहचान छिपाकर (अंडरकवर) रह रहा था। कई राज्यों में छापेमारी इन मुख्य गिरफ्तारियों के बाद, जम्मू-कश्मीर पुलिस की SOG टीमों ने इस नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के लिए कई राज्यों में छापेमारी की। पुलिस ने पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर के कई ठिकानों पर दबिश दी और पूछताछ के लिए कई लोगों को हिरासत में भी लिया। मॉड्यूल का काम और नेटवर्क इस मॉड्यूल ने 40 से अधिक आतंकियों की मदद की। पुलिस सूत्रों का कहना है कि यह अंतर-राज्यीय मॉड्यूल पाकिस्तानी आतंकवादियों को भारत में रिसीव करने और उन्हें सुरक्षित तरीके से जम्मू-कश्मीर तक पहुंचाने का काम करता था। सूत्रों के मुताबिक, इस ग्रुप ने अब तक 40 से अधिक आतंकवादियों की घुसपैठ और ट्रांजिट (आवाजाही) को हैंडल किया था और जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को जिंदा रखने में यह मॉड्यूल बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा था। फर्जी दस्तावेजों की जांच पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या इस मॉड्यूल के किसी सदस्य ने फर्जी भारतीय यात्रा दस्तावेज (पासपोर्ट आदि) बनवाए थे और क्या कोई वैध वीजा पर देश से बाहर भी गया था। पुलिस फिलहाल इस आतंकी नेटवर्क के आगे और पीछे के कनेक्शन खंगाल रही है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।