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नवागढ़ की गुफाओं से फोर्ट विलियम तक, जानें शहीद बख्तर साय और मुंडल सिंह के बलिदान की गौरवशाली कहानी

गुमला आज 4 अप्रैल को बख्तर साय व मुंडल सिंह का शहादत दिवस है. देश की आजादी में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है. ऐसे तो गुमला में कई वीर पैदा हुए, जिन्होंने इस्ट इंडिया कंपनी (अंग्रेज) से लोहा लिया. इतना ही नहीं, वो अपनी साहस, शक्ति, सूझबूझ से अंग्रेजों को पराजित भी किया. इन्हीं वीर सपूतों में गुमला जिला स्थित रायडीह प्रखंड के बख्तर साय व मुंडल सिंह हैं. जिन्होंने ना इस्ट इंडिया कंपनी का विरोध किया, बल्कि उन्हें छोटानागपुर क्षेत्र में घुसने का सबक भी सिखाया. इस लड़ाई में दोनों शहीद हो गए, लेकिन आज भी गुमला जिले में इन दोनों वीर सपूतों को याद किया जाता है. इन दोनों वीरों की वीरता की कहानी आज भी रायडीह प्रखंड के वादियों में गूंजती है और लोगों के जुबान से इन सपूतों का वीरभाव सुनने को मिलता है. इन दोनों ने जिस बहादुरी से अंग्रेजों को खदेड़ा है. यह इस क्षेत्र के लिए गर्व की बात है. आज वे हमारे बीच नहीं है, लेकिन बख्तर साय व मुंडल सिंह की पूजा आज भी गुमला जिले में होती है. अंग्रेजों से लड़ाई के दौरान बख्तर व मुंडल ने नवागढ़ क्षेत्र की गुफाओं को अपना घर बनाया. यह गुफा आज भी इस क्षेत्र में साक्षात है. जहां दोनों सेनानी रहते थे. जिस तालाब का पानी पीते थे. वह तालाब भी है. युद्ध के दौरान यह तालाब रक्त से भर गया था. इसलिए इसे रक्त तालाब भी कहा जाता है.  शिवलिंग जहां दोनों पूजा करते थे. वह भी नवागढ़ में है. गढ़पहाड़ जहां युद्ध हुआ था. वह पहाड़ आज भी युद्ध की कहानी कह रही है. वीर सेनानियों की यह भूमि आज भी अंग्रेजों के पराजय की कहानी बयां करती है. बख्तर साय ने हीरा राम का सिर काट कर अंग्रेजों को भेजा था बख्तर साय नवागढ़ परगना (वर्तमान में रायडीह प्रखंड) के जागीरदार थे. उन्होंने इस्ट इंडिया कंपनी को खुली चुनौती दी. उनसे लोहा ले उसे पराजय का मुंह दिखाया. इस्ट इंडिया कंपनी की टुकड़ी बख्तर साय के सामने टिक नहीं सकी और उन्हें हार का सामना करना पड़ा. पराजय के बाद अंग्रेज छोटानागपुर के महाराजा ह्रदयनाथ शाहदेव से संधि किये. उसके बाद अंग्रेज 12 हजार रुपये टैक्स वसूली करने लगे. उस समय अंग्रेज टैक्स वसूली के लिए कड़ा रूख अपना लिये थे. जागीरदार व रैयत पैसा दे देकर परेशान हो गये थे. अंग्रेजों से संधि के बाद महाराजा ह्रदयनाथ शाहदेव ने हीरा राम को टैक्स वसूली के लिए नवागढ़ भेजा. बख्तर साय ने हीरा राम का सिर काट कर महाराजा को भेजवा दिया. महाराजा इससे अत्यंत क्रोधित हुए. इस्ट इंडिया कंपनी को इसकी सूचना दी गयी. 11 फरवरी 1812 को रामगढ़ मजिस्ट्रेट ने लेफ्टीनेंट एचओ डोनेल के नेतृत्व में हजारीबाग के सैन्य टुकड़ी को नवागढ़ के जागीरदार को पकड़ने के लिए भेजा. इसी बीच रामगढ़ बटालियन के कमांडेंट आर गार्ट ने छोटानागपुर के बारवे (वर्तमान में रायडीह, चैनपुर व डुमरी), जशपुर व सरगुजा के राजा को पकड़ने के लिए एक पत्र लिखा. साथ ही पूरे क्षेत्र की नाकेबंदी करने की सहायता मांगी. जशपुर राजा के साथ आर गार्ट का अच्छा संबंध था. इसका फायदा उठाते हुए लेफ्टीनेंट एचओ डोनेल ने हजारों सैनिकों के साथ मिलकर नवागढ़ को घेर लिया. अंग्रेजों के मंसूबों की जानकारी पनारी परगना के जागीरदार मुंडल सिंह को हो गयी थी. वे बख्तर साय की सहायता के लिए नवागढ़ पहुंच गए. दोनों ने मिलकर अंग्रेजों से लोहा लिया. अंग्रेजों की कूटनीति में दोनों वीर फंसकर शहीद हुए थे नवागढ़ में 1812 के आसपास घना जंगल था. ऊंचे ऊंचे पहाड़ थे. अंग्रेजों को मुंडल सिंह व बख्तर साय तक पहुंचने में परेशानी होने लगी. अंग्रेजों ने एक विशेष रणनीति के तहत नवागढ़ को चारों ओर से घेर लिया. बख्तर साय व मुंडल सिंह जगह बदल कर आरागढ़ा के गुफा में रहने लगे. अंग्रेजों को जब इसकी जानकारी हुई, तो वे गुफा तक जाने वाली नदी की धारा के पानी को गंदा कर दिया. जिससे बख्तर साय व मुंडल सिंह अपने सैनिकों के साथ पानी पी न सके. अंग्रेजों की इस कूटनीति चाल के बाद बख्तर व मुंडल जशपुर (छत्तीसगढ़ राज्य) के राजा रणजीत सिंह के यहां गए. जहां से दूसरे स्थान पर निकलने के कारण दोनों 23 मार्च 1812 को पकड़े गए. 4 अप्रैल 1812 को दोनों को कलकत्ता के फोर्ट विलियम में फांसी की सजा दे दी गई थी.

US में कार्रवाई तेज: 1790 लाइसेंस कैंसल, पंजाबी चालकों के सामने रोजगार संकट

चंडीगढ़. अमेरिका में प्रवासी चालकों के खिलाफ सख्ती लगातार बढ़ती जा रही है। इंडियाना राज्य में मोटर वाहन विभाग ने बड़ा कदम उठाते हुए 1,790 गैर-स्थायी वाणिज्यिक ड्राइविंग लाइसेंस रद्द कर दिए हैं। यह आदेश 1 अप्रैल से लागू हो गया, जिससे हजारों प्रवासी चालकों, खासकर पंजाबी समुदाय से जुड़े लोगों की रोजी-रोटी पर सीधा असर पड़ा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यह कार्रवाई केवल प्रशासनिक कारणों से नहीं, बल्कि हाल में हुई कुछ गंभीर सड़क दुर्घटनाओं के बाद की गई है। फरवरी 2026 में सुखदीप सिंह से जुड़ी एक दुर्घटना में एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई थी, जिसके बाद नियमों को सख्त करने की मांग तेज हो गई थी। इससे पहले कैलिफोर्निया में भी समय सीमा पूरी होने के कारण 17 हजार लाइसेंस रद्द किए जा चुके हैं। हालांकि, कुछ वीजा श्रेणियों के तहत काम कर रहे चालकों को इस कार्रवाई से राहत मिली है, लेकिन बड़ी संख्या में ऐसे प्रवासी चालक प्रभावित हुए हैं, जो लंबे समय से ट्रकिंग क्षेत्र में काम कर रहे थे। अमेरिका में सक्रिय यूनाइटेड सिख्स ने प्रभावित चालकों की मदद के लिए देशभर में सहायता सेवा शुरू की है। इंडियाना सरकार के फैसले का पंजाब में विरोध इस फैसले को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई है। पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने मीडिया के सामने अमेरिका के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि हजारों पंजाबी युवा ट्रक चलाकर अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं और इस फैसले से उनकी आजीविका खतरे में पड़ गई है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस मामले को कूटनीतिक स्तर पर उठाया जाए। वहीं, सिख गठबंधन सहित अन्य सिख संगठनों ने भी इस फैसले का विरोध किया है। संगठनों का कहना है कि कई चालकों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया और अचानक लिए गए इस फैसले से पूरे समुदाय में चिंता का माहौल है। लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया और सख्त नए नियमों के तहत अब गैर-नागरिक चालकों के लिए लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया और सख्त कर दी गई है। कानूनी स्थिति की जांच अनिवार्य कर दी गई है और भाषा दक्षता जैसे मानकों को भी कड़ा किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से योग्य चालकों की कमी हो सकती है, जिससे परिवहन व्यवस्था और आपूर्ति तंत्र पर भी असर पड़ सकता है।

अब गांवों तक तेज इलाज: 6 नई संजीवनी एंबुलेंस सेवा का शुभारंभ

दंतेवाड़ा. जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 6 नई 108 संजीवनी एक्सप्रेस एंबुलेंस शुरू की गई हैं। इन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस वाहनों को विभिन्न विकासखंडों के लिए रवाना किया गया, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सकेगी। अब तक दुर्गम सड़कों के कारण मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में देरी होती थी, जिससे कई बार स्थिति गंभीर हो जाती थी। नई एंबुलेंस सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहेगी और आपातकालीन स्थिति में त्वरित सहायता सुनिश्चित करेगी। जनप्रतिनिधियों ने इसे स्वास्थ्य क्षेत्र में महत्वपूर्ण सुधार बताया है और कहा कि इससे ग्रामीणों की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी हुई है। यह पहल नक्सल प्रभावित क्षेत्र में जीवन रक्षा की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी और स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को अंतिम छोर तक ले जाएगी। बीजापुर में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य बीजापुर. जिले में संभावित संकट की आशंकाओं के बीच प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है। कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त प्रेस वार्ता में बताया कि एलपीजी गैस, पेट्रोल और डीजल की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। जिले में 30 से 45 दिनों का खाद्यान्न स्टॉक सुरक्षित रखा जा रहा है और किसानों के लिए खाद की आपूर्ति भी सुचारू रूप से जारी है। सीमावर्ती जिला होने के कारण सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है और हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन ने अफवाहों से बचने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी। यह संदेश लोगों में विश्वास बनाए रखने और अनावश्यक भय को दूर करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस व यूडीएफ नहीं दे सकती सुरक्षा-रोजगार की गारंटी, यह गारंटी केवल भाजपा ही दे सकतीः मुख्यमंत्री

कांग्रेस घुसपैठ व दंगा कराती थी, भाजपा ऐसा करने वालों को निकाल बाहर करती है: मुख्यमंत्री सीएम योगी ने असम के बरछला विधानसभा क्षेत्र से भाजपा उम्मीदवार ऋतु बरन सरमा के लिए मतदाताओं से मांगा वोट  पहले नौजवानों के हक पर काबिज होते थे घुसपैठिए, अब डबल इंजन सरकार नागरिकों को दिला रही हकः सीएम योगी असम में भी दिखा सीएम योगी का जबरदस्त क्रेज, एक झलक पाने के लिए पेड़ों पर चढ़े असम के युवा  पीएम मोदी ने 11 साल में पूर्वोत्तर भारत की 78 और असम की 36 यात्राएं कीं, तब यहां शांति, सुरक्षा व सुशासन का माहौल बना: मुख्यमंत्री कांग्रेस व यूडीएफ नहीं दे सकती सुरक्षा-रोजगार की गारंटी, यह गारंटी केवल भाजपा ही दे सकतीः मुख्यमंत्री  सोनितपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा घुसपैठ व दंगा कराने का काम किया, लेकिन भाजपा ऐसा करने वालों को निकाल बाहर करती है। पहले नौजवानों के हक पर घुसपैठिए काबिज होते थे, असम के लोगों का राशन डकार जाते थे, लेकिन अब डबल इंजन सरकार असम के हर नागरिक को उसका हक दिलाने की गारंटी ले रही है। सीएम योगी शुक्रवार को असम विधानसभा चुनाव में बरछला विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी ऋतु बरन सरमा के पक्ष में जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जनता से 9 अप्रैल को कमल का बटन दबाकर भाजपा प्रत्याशी को भारी मतों से जिताने की अपील की। कांग्रेस व यूडीएफ ने असमिया संस्कृति समाप्त करने की रची साजिश  सीएम योगी ने कहा कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत वाली, किसानों का संरक्षण और विदेशी आक्रांताओं को धूल धूसरित करने वाली इस पावन धरा के सामने कांग्रेस ने यूडीएफ के साथ मिलकर पहचान का संकट खड़ा किया। यह संकट किसी एक क्षेत्र में नहीं था। कांग्रेस व यूडीएफ के अघोषित समझौते के कारण असमिया जाति, माटी व बेटी के सामने पहचान का संकट हुआ था। इन्होंने तुष्टिकरण की नीति पर चलकर असमिया पहचान को समाप्त करने का प्रयास किया। यहां की माटी में घुसपैठियों को घुसाकर असम के सामने पहचान का संकट खड़ा किया। असम के नागरिकों, बहनों के हक पर घुसपैठियों के जरिये डकैती डलवाई। असमिया संस्कृति मिटाने की साजिश रची, लेकिन जब पीएम मोदी के नेतृत्व में दिल्ली और असम में पहले सर्वानंद सोनोवाल, फिर हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा सरकार बनी तो असम चाय के साथ अब चिप उत्पादन का नया केंद्र भी बन गया है। पहले घुसपैठिए खा जाते थे गरीबों का राशन सीएम योगी ने कहा कि डबल इंजन सरकार असम की पहचान को संरक्षित कर रही है। असमिया संगीत-संस्कृति, महापुरुषों, महानायकों, योद्धाओं को सम्मान दे रही है। अब असम में विकास और विरासत का अद्भुत समन्वय दिख रहा है। मां कामाख्या, श्रीमंत शंकर देव कॉरिडोर व भूमि संरक्षण का कार्य नए सिरे से प्रारंभ हुआ है। 10 साल में डबल इंजन सरकार ने बिना भेदभाव गरीबों तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाया है। पहले गरीबों का राशन विदेशी घुसपैठिए खा जाते थे, अब असम के लोगों को राशन, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्कीम के तहत हर गरीब को पांच लाख रुपये की स्वास्थ्य सुविधा, प्रधानमंत्री आवास, नौजवानों को रोजगार-नौकरी मिल रही है। अब चाय बागान में काम करने वाली बहनों, कारीगरों, नौजवानों के लिए स्पेशल पैकेज की व्यवस्था है।  घुसपैठ व दंगा कराती थी कांग्रेस सीएम योगी ने कहा कि डबल इंजन सरकार का संकल्प है कि असम के लोगों का संरक्षण होगा और एक-एक घुसपैठिए को निकाल बाहर करेंगे। कांग्रेस घुसपैठ-दंगा कराती थी और भाजपा ऐसा करने वालों को निकाल बाहर करती है। भाजपा सरकार दंगा-कर्फ्यू मुक्त असम के निर्माण के लिए कार्य कर रही है। जहां भी भाजपा सरकार आई है, वहां शांति-सुरक्षा, समृद्धि लाई है। उत्तर प्रदेश में पहले हर दूसरे-तीसरे दिन दंगा व कर्फ्यू लगता था। यूपी की आबादी 25 करोड़ है, लेकिन वहां 9 वर्ष में नो कर्फ्यू, नो दंगा है, सब चंगा है। 500 वर्ष में जो काम नहीं हो पाया, वह काम भी अयोध्या में भव्य राममंदिर निर्माण के रूप में हो गया।  यूपी में अब सड़कों पर नहीं पढ़ी जाती नमाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी में उग्रवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद नहीं है, वहां सड़कों पर नमाज भी नहीं पढ़ी जाती है। भाजपा की डबल इंजन सरकार लव जेहाद, लैंड जेहाद का सफाया करने को संकल्पित है। कांग्रेस व यूडीएफ को घुसपैठियों का वोट चाहिए, वे सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकतीं। इन पार्टियों को देश की कीमत पर वोट चाहिए। ये नौजवानों के सामने पहचान का संकट खड़ा कर देश की सुरक्षा में सेंध लगाने और अफवाह फैलाकर गुमराह करने वाले लोग हैं। वहीं मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा ने जो कहा, वो कर के दिखाया। मोदी जी जितनी बार पूर्वोत्तर भारत में आए हैं, 60 साल के कांग्रेस के शासनकाल में इतनी बार कोई प्रधानमंत्री नहीं आया। मोदी जी ने 11 साल में पूर्वोत्तर भारत की 78 और असम की 36 यात्राएं की हैं, तब शांति, सुरक्षा व सुशासन का माहौल तैयार हुआ है। 60 वर्ष में कांग्रेस उचित कनेक्टिविटी नहीं दे पाई, लेकिन आज पूर्वोत्तर के हर राज्य तक रोड, रेलवे, एयर व इनलैंड वाटरवे की कनेक्टिविटी है। पहले मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज नहीं थे, लेकिन डबल इंजन सरकार ने एम्स, आईआईएम, आईआईटी, एनआईटी दिया है। पूर्वोत्तर भारत व असम विश्वस्तरीय संस्थानों का केंद्र बना है।  कांग्रेस व यूडीएफ नहीं दे सकती सुरक्षा, रोजगार की गारंटी  सीएम योगी ने कहा कि पहले नौजवानों के हक पर घुसपैठिए काबिज होते थे और असम के लोगों का राशन डकार जाते थे, लेकिन अब असम के हर नागरिक को उसका हक दिलाने की गारंटी डबल इंजन सरकार ले रही है। अयोध्या में राममंदिर व काशी में काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर का निर्माण हुआ तो मां कामाख्या के भव्य कॉरिडोर का निर्माण भी उसी भव्यता से हो रहा है। यह गारंटी केवल भाजपा की डबल इंजन सरकार देगी, यह गारंटी कांग्रेस नहीं देगी। नौजवानों को रोजगार, बहनों को सुरक्षा की गारंटी केवल डबल इंजन सरकार देगी, कांग्रेस व यूडीएफ यह गारंटी नहीं दे सकती। वे सुरक्षा में सेंध लगाने वाले लोग हैं। घुसपैठियों के जरिये भारत की संस्कृति के साथ खिलवाड़ करने वाले लोग हैं। कांग्रेस व यूडीएफ पर विश्वास नहीं किया जा … Read more

हरियाणा AAP के पूर्व अध्यक्ष का आरोप: राघव चड्ढा को ‘शीशमहल’ में मुर्गा बना पीटा गया था

रोहतक  हरियाणा में आम आदमी पार्टी के अध्यक्ष रहे नवीन जयहिंद ने अपने एक्स अकाउंट पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया है कि आप सांसद राघव चड्ढा को दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री के आधिकारिक आवास रहे 'शीशमहल' (सीएम हाउस) में मुर्गा बनाकर पीटा गया था। नवीन के मुताबिक राघव के साथ ऐसा चार नेताओं के सामने किया गया था। यही नहीं उनका दावा है कि इस दौरान राघव की आंख पर चोट आई थी जिसका ईलाज करवाने वे इंग्लैंड गए थे जबकि लोगों को यह लग रहा था कि वे हनीमून मनाने गए हैं। यह सभी खुलासे राघव को खुद करने चाहिए। नवीन 2 मिनट के वीडियो में कहते हैं कि ‘आज एक वीडियो देखी हमारे पुराने साथी हैं राघव जी जो कि राज्यसभा में सांसद हैं। उन्हें पार्टी ने उप-नेता पद से हटा दिया। और अभी उनका वीडियो देखा वह कह रहे हैं कि मैं दरिया हूं सैलाब आएगा। तो मैं उन भाई को कहना चाहता हूं कि आप सबको भी बता देना चाहता हूं कि वो राजदार हैं मालदार हैं दिल्ली और पंजाब के तो वे बताएं। राघव वो चीज बताएं कि जब उनको मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के शीशमहल में बुलाकर मुर्गा बनाकर पीटा गया था…तो क्यों नहीं बता रहे वे लोगों को ये बात?’ पूछा- कौन थे वो चार लोग? उन्होंने आगे कहा ‘उस टाइम पर जब सैलाब आया था और रोते हुए उनको आंख में चोट लगी थी तो फिर इंग्लैंड में जाकर उन्होंने अपनी ठीक करवाई। क्यों नहीं बताते वह ये बात। वो जितने मालदार, जितने सूटकेस और जितनी डील हुई थीं वो क्यों नहीं बताते। राघव जी आप राज्यसभा में हैं और आप जब इतना बोलते हैं तो वो भी बोलिए। बताइए कौन-कौन वो चार लोग कौन-कौन थे जो वहां पर बैठे थे। जहां पर आपको मुर्गा बनाया गया और पीटा गया।’ कौन हैं नवीन जयहिंद? आपको बता दें कि नवीन जयहिंद 2011 में अन्ना हजारे के आंदोलन से जुड़े थे। वे आम आदमी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे। पार्टी ने उन्हें हरियाणा की कमान सौंपी थी। हालांकि उन्होंने 2022 में आपसी मतभेद के चलते खुद को पार्टी से अलग कर लिया। उपनेता पद से हटाए जाने के बाद क्या बोले राघव? आपको बता दें कि राघव ने उपनेता पद से हटाए जाने के बाद अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने कहा है कि 'जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं जनता के मुद्दे उठाता हूं और शायद मैं ऐसे विषय उठाता हूं, जो आमतौर पर संसद में नहीं उठाए जाते लेकिन क्या जनता के मुद्दे उठाना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई अपराध किया है? क्या मैंने कोई गलती की है? क्या मैंने कुछ गलत किया है? मैं यह सवाल इसलिए पूछ रहा हूं क्योंकि आप ने राज्यसभा सचिवालय से कहा है कि राघव चड्ढा को संसद में बोलने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि अब कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहेगा? जब भी मैं बोलता हूं, मैं देश के आम आदमी की बात करता हूं। एयरपोर्ट पर महंगे खाने का मुद्दा, जोमैटो-ब्लिंकिट डिलीवरी राइडर्स की समस्या, खाने में मिलावट का मुद्दा, मिडिल क्लास पर टैक्स का बोझ, कंटेंट क्रिएटर्स पर स्ट्राइक का मुद्दा, टेलीकॉम कंपनियों द्वारा 12 महीनों में 13 बार रिचार्ज कराने का मुद्दा समेत अन्य मुद्दे संसद में उठाए हैं। आप नेता ने कहा कि और इन मुद्दों को उठाने के बाद देश के आम आदमी को फायदा हुआ लेकिन इससे आम आदमी पार्टी को क्या नुकसान हुआ? कोई मुझे बोलने से क्यों रोकना चाहेगा? कोई मेरी आवाज क्यों दबाना चाहेगा? खैर, आप लोग मुझे असीम प्यार देते हैं। जब भी मैं आपके मुद्दे उठाता हूं, आप मेरा हौसला बढ़ाते हैं इसके आप सभी का आभार करते हैं।

DGP चयन प्रक्रिया तेज: मान सरकार ने 14 IPS अफसरों का पैनल UPSC को भेजने की तैयारी की

चंडीगढ़. राज्य सरकार ने स्थायी डीजीपी की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया तेज कर दी है। जल्द ही 14 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) को भेजने की तैयारी की जा रही है। यूपीएससी इस पैनल में से तीन अधिकारियों को शार्टलिस्ट करेगा, जिनमें से एक को राज्य का नियमित डीजीपी नियुक्त किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत मान की मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव तैयार किया गया है और इसे जल्द यूपीएससी को भेजा जाएगा। जानकारी के मुताबिक, यह पैनल 1992, 1993 और 1994 बैच के आईपीएस अधिकारियों से तैयार किया गया है, जो डीजीपी पद के लिए पात्र हैं। इन अधिकारियों के नाम शामिल 1992 बैच के अधिकारियों में कार्यवाहक डीजीपी गौरव यादव, पंजाब पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी शरद सत्य चौहान, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स के स्पेशल डीजीपी कुलदीप सिंह और हरप्रीत सिंह सिद्धू (पोस्टिंग का इंतजार) शामिल हैं। 1993 बैच से कम्युनिटी अफेयर्स डिवीजन व महिला मामलों की स्पेशल डीजीपी गुरप्रीत कौर देओ, पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन के स्पेशल डीजीपी डॉ. जितेंद्र कुमार जैन और रेलवे के स्पेशल डीजीपी शशि प्रभा द्विवेदी का नाम पैनल में है। वहीं, 1994 बैच के अधिकारियों में स्पेशल डीजीपी (मुख्यालय) सुधांशु शेखर श्रीवास्तव, विजिलेंस ब्यूरो के स्पेशल डीजीपी-कम-चीफ डायरेक्टर प्रवीण कुमार सिन्हा, ट्रैफिक व रोड सेफ्टी के स्पेशल डीजीपी अमनदीप सिंह राय, साइबर क्राइम के स्पेशल डीजीपी वरुण नेराजा, महाराजा रणजीत सिंह पंजाब पुलिस अकादमी, फिल्लौर की डायरेक्टर अनीता पुंज, मानवाधिकार के स्पेशल डीजीपी नरेश कुमार और टेक्निकल सर्विसेज के स्पेशल डीजीपी राम सिंह शामिल हैं। दो साल का होगा कार्यकाल पैनल में से चुने जाने वाले डीजीपी को कम से कम दो साल का कार्यकाल मिलेगा, भले ही उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख कुछ भी हो। यह प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के 2006 के निर्देशों और बाद में तय यूपीएससी गाइडलाइंस के तहत लागू होता है। पंजाब में जुलाई 2022 से कार्यवाहक डीजीपी की व्यवस्था जारी है। आम आदमी पार्टी सरकार ने गौरव यादव को यह जिम्मेदारी सौंपी थी और वे तब से लगातार इस पद पर कार्यरत हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 5 फरवरी को इस मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए राज्यों को नियमित डीजीपी नियुक्त करने की प्रक्रिया अपनाने को कहा था और यूपीएससी को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। प्रक्रिया में देरी पर सवाल सरकार को 10 दिन के भीतर प्रस्ताव भेजने को कहा गया था, लेकिन इसमें देरी हुई। राज्य ने 2023 में पारित पंजाब पुलिस संशोधन विधेयक का हवाला देते हुए अपनी प्रक्रिया अपनाने की कोशिश की थी। हालांकि 12 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया कि डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी की प्रक्रिया से ही होगी। यूपीएससी की भूमिका अहम यूपीएससी की एंपैनलमेंट कमेटी में चेयरमैन या सदस्य, केंद्रीय गृह सचिव का प्रतिनिधि और केंद्रीय पुलिस संगठन का प्रमुख शामिल होता है। यही कमेटी राज्य द्वारा भेजे गए नामों में से तीन अधिकारियों को चुनती है। अब सभी की नजरें यूपीएससी पर टिकी हैं, जो इस पैनल से तीन नाम तय करेगी। इसके बाद पंजाब सरकार अंतिम फैसला लेकर राज्य को नया नियमित डीजीपी देगी।

इंद्रावती नेशनल पार्क के अंदर विकास की एंट्री, 79 साल बाद सागमेटा गांव जुड़ा सड़क से

बीजापुर. जिले के इंद्रावती नेशनल पार्क क्षेत्र में बसे सागमेटा गाँव के लिए 2 अप्रैल 2026 का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब पहली बार बस सेवा गाँव तक पहुँची। दशकों से बुनियादी सुविधाओं से वंचित इस क्षेत्र के करीब 600 परिवारों को अब बाजार, अस्पताल और प्रशासनिक सेवाओं तक सीधी पहुंच मिल सकेगी। इससे पहले ग्रामीणों को 17 किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता था, जिससे दिनचर्या और जीवन स्तर प्रभावित होता था। इस बदलाव के पीछे स्थानीय युवाओं और प्रशासन का संयुक्त प्रयास रहा, जिन्होंने बस संचालकों को सेवा विस्तार के लिए तैयार किया और सुरक्षा का भरोसा दिलाया। क्षेत्र में स्थापित सुरक्षा कैंपों और सड़क निर्माण ने इस परिवर्तन को संभव बनाया है, जिससे विकास की राह खुली है। बस सेवा शुरू होने से शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंच आसान होगी। सागमेटा और आसपास के गाँवों में इस पहल ने उम्मीद की नई किरण जगा दी है और यह साबित किया है कि इच्छाशक्ति और समन्वय से दूरस्थ क्षेत्रों तक भी विकास पहुँच सकता है। बीजापुर का 200 किलोमीटर का लंबा सफर बीजापुर का आखिरी गांव पामेड़, जहां जाने के लिए लोगों को कभी 200 किलोमीटर का लंबा सफर तय करना पड़ता था, अब सीधे जिले से जुड़ गया है। यह वही इलाका है, जहां सड़कों पर वाहनों की आवाज से ज्यादा धमाकों की गूंज सुनाई देती थी। जहां विकास का सपना, नक्सलियों के साये में दम तोड़ देता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। सरकार ने इस दुर्गम क्षेत्र तक बस सेवा शुरू कर दी है, जो न सिर्फ एक सफर को आसान बना रही है, बल्कि नक्सल प्रभावित इस इलाके को मुख्यधारा से जोड़ने की एक नई उम्मीद भी जगा रही है। पामेड़ गांव अब बस सेवा से जुड़ा छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले का आखिरी गांव पामेड़ अब बस सेवा से जुड़ गया है। यह गांव अब तक सीधे जिले से नहीं जुड़ा था और वहां पहुंचने के लिए लोगों को तेलंगाना के रास्ते जाना पड़ता था। लेकिन अब राज्य सरकार ने नक्सल प्रभावित इस क्षेत्र में विकास को गति देने के लिए सात पंचायतों को जोड़ते हुए पामेड़ तक बस सेवा शुरू की है। यह कदम बीजापुर के तेजी से विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। बीजापुर, जो अक्सर नक्सली हमलों, आईईडी ब्लास्ट और मुठभेड़ों की वजह से सुर्खियों में रहता था, अब एक नई पहचान की ओर बढ़ रहा है। 50 साल बाद बस सेवा की शुरुआत पिछले 50 सालों से इस इलाके में कोई बस सेवा उपलब्ध नहीं थी। पहले यहां सड़कें थीं, लेकिन उन पर वाहनों का संचालन नहीं होता था। धीरे-धीरे नक्सलियों ने इस पूरे क्षेत्र पर कब्जा कर लिया और वहां विकास कार्य रुक गए। लेकिन अब सरकार की ओर से यहां तेजी से सड़क निर्माण, सुरक्षा कैंप और अन्य बुनियादी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, बीते चार महीनों में नक्सल प्रभावित इस इलाके में विकास कार्यों की रफ्तार काफी तेज हुई है। इस बस सेवा की शुरुआत से स्थानीय लोगों को काफी राहत मिलेगी और वे सीधे जिला मुख्यालय से जुड़ सकेंगे।

फर्जी कागजों से RTE में दाखिला, जांच में खुलासा—23 एडमिशन निरस्त

दुर्ग. फर्जी दस्तावेजों के जरिए शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत निजी स्कूलों में प्रवेशित 23 बच्चों का एडमिशन निरस्त कर दिया गया है। ये वे बच्चे हैं, जिनका एडमिशन आरटीई के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में निजी स्कूलों के केजी -1 में हुआ था। इनमें सर्वाधिक 9 बच्चे डीपीएस रिसाली के हैं। बताया जा रहा है कि एडमिशन को लेकर शिकायत हुई थी। यह शिकायत संबंधित नगरीय निकाय तथा संयुक्त संचालक कार्यालय शिक्षा संभाग दुर्ग को गई थी। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा के मार्गदर्शन में जांच कराई गई। जांच के बाद 19 मार्च को इन सभी 23 बच्चों के एडमिशन को निरस्त करने का निर्णय लिया गया। वहीं 18 बच्चों के दस्तावेज सही पाए गए। इनको लेकर की गई शिकायत निराधार पाई गई। दुर्ग जिले के बड़े जिी स्कूलों में एडमिशन के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। यहां तक कि एडमिशन के लिए जरूरी दस्तावेजों में छेड़छाड़ करने से नहीं चूकते। हो सकता है कि फर्जी दस्तावेज बनाने कोई गिरोह सक्रिय हो । तभी तो बीपीएल राशन कार्ड फर्जी होने के कई मामले सामने आए हैं। इस वजह से बच्चों का एडमिशन भी निरस्त हुआ है। सबसे बड़ी परेशानी उन बच्चों का है, जो साल भर की पढ़ाई कर लिए रहते हैं। उसके बाद उन्हें उस स्कूल से बेदखल किया जाता है। हालांकि जिला शिक्षा विभाग ऐसे बच्चों को स्वामी आत्मानंद तथा अनुदान प्राप्त स्कूलों में प्रवेश के लिए अवसर प्रदान करता है, ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो। उनकी शिक्षा को जारी रखने विभाग हरसंभव प्रयास करता है। पूर्व में 22 बच्चों का प्रवेश रिजेक्ट जिला शिक्षा विभाग द्वारा पिछले वर्ष दिसंबर माह में 13 बच्चों का एडमिशन रिजेक्ट किया गया था। इस आशय का आदेश 2 दिसंबर 2025 को जारी किया गया। इन 13 बच्चों में सर्वाधिक 5 बच्चे माइलस्टोन स्कूल के थे। शेष बच्चों में शंकराचार्य स्कूल हुडको 4, केपीएस नेहरूनगर तथा डीएवी हुडको के 2-2 बच्चे शामिल थे। इसके पहले 12 नवंबर 2025 को 9 बच्चों का एडमिशन निरस्त किया गया था। ये सभी माइलस्टोन स्कूल के बताए गए।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा – ‘सम्राट विक्रमादित्य’ महानाट्य सुशासन का अहम संदेश देता है

सम्राट विक्रमादित्य के सुशासन का संदेश देता है महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी राज्यों में परस्पर सहयोग को बढ़ाने का कर रहे हैं महत्वपूर्ण कार्य सुशासन से गढ़ा जा रहा है नया इतिहास सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य प्रतिभाओं का मंच, युवा पीढ़ी को सार्थक संदेश बाबा विश्वनाथ और बाबा महाकाल की धरा को जोड़ा है मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी वाराणसी में मध्यप्रदेश सरकार का तीन दिवसीय अनूठा आयोजन भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि सुशासन की उत्कृष्ट परंपरा के नायक सम्राट विक्रमादित्य के जीवन काल से हम सब परिचित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की कर्मस्थली काशी में इस महानाट्य के मंचन के अवसर पर यह कहना प्रासंगिक होगा कि प्रधानमंत्री मोदी के सुशासन से राष्ट्र को दिए जा रहे योगदान के लिए अभिनंदन के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव वाराणसी (काशी) में शुक्रवार को तीन दिवसीय सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य के मंचन पर संबोधित कर रहे थे। समारोह का शुभारंभ मुख्यमंत्री डॉ. यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज बदलते दौर में 2 राज्यों के मध्य सांस्कृतिक संबंध को प्रगाढ़ करने के लिए यह कार्यक्रम महत्वपूर्ण है। दोनों राज्य विभिन्न क्षेत्रों में संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के आशीर्वाद से दोनों राज्यों को अंतर्राज्यीय केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की सौगात मिली है। यह दोनों राज्यों में सिंचाई, कृषि उत्पादन और पेयजल प्रदाय में सहयोग करने वाली महत्वपूर्ण परियोजना है। यह प्रधानमंत्री मोदी का सुशासन भी है, जिसके अंतर्गत राज्यों के बीच परस्पर सहयोग को बढ़ाने की दिशा में कार्य हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी सुशासन के इस काल में सम्राट विक्रमादित्य के शासन काल में स्थापित सुशासन का स्मरण आना स्वभाविक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राष्ट्र के स्वाभिमान के सम्राट विक्रमादित्य के राष्ट्र प्रेम, पराक्रम, न्यायप्रियता, प्रजा वात्सल्य और ज्ञान विज्ञान परम्परा की पुनर्स्थापना के गुणों की जानकारी युवा पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए महानाट्य माध्यम बन रहा है। सम्राट विक्रमादित्य के युग का पुनर्स्मरण करने के लिए महानाट्य का मंचन किया जा रहा है। सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का पहले नई दिल्ली में भी मंचन हुआ है। इस नाटक में अनेक इंजीनियर, डॉक्टर, वकील और अन्य व्यवसायों से जुड़े प्रतिभाशाली व्यक्ति विभिन्न पात्रों के रूप में मंच पर भूमिका निभाते हैं। इससे प्रतिभाओं को तो मंच मिल ही रहा है, एक कुशल शासक के योगदान से देश के नागरिक भी परिचित हो रहे हैं। इस तरह यह महानाट्य लोकरंजन के साथ भारत के गौरवशाली इतिहास को भी आज जीवंत करने में माध्यम बना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत में भाइयों की तीन जोड़ियां प्रसिद्ध हुई हैं। इनमें भगवान श्रीराम और लक्ष्मण, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम के साथ सम्राट विक्रमादित्य और राजा भतृहरि की जोडी शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने एक करोड़ एक लाख रुपए का सम्राट विक्रमादित्य अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्रारंभ किया है। एक राष्ट्रीय सम्मान 21 लाख रुपए राशि का और तीन राज्य स्तरीय सम्मान 5-5 लाख रुपए राशि के स्थापित किए गए हैं। वर्ष 2024 में हुए विक्रमोत्सव को सर्वाधिक अवधि वाली धार्मिक- आध्यात्मिक फैस्टिवल का महाद्वीप स्तरीय वॉव अवार्ड भी मिला है। यही नहीं प्रतिष्ठित ईमैक्स ग्लोबल अवार्ड भी विक्रमोत्सव को प्राप्त हुआ है। विक्रमादित्य महानाट्य मंचन यादगार क्षण : उ.प्र. मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विक्रमादित्य महानाट्य मंचन को यादगार क्षण बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के "एक भारत-श्रेष्ठ भारत'' के भाव को साकार करते हुए मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा विश्वनाथ की इस धरा को बाबा महाकाल की धरा से नाट्य मंचन के माध्यम से जोड़ने का विशिष्ट कार्य किया है। योगी ने भाइयों की जोड़ी का जिक्र करते हुए कहा कि सम्राट विक्रमादित्य और राजा भरथरी की जोड़ी का उल्लेख है। महाराजा ने नाथ संप्रदाय में दीक्षा लेकर काशी की भूमि और चुनार के किले में साधना की थी। सम्राट विक्रमादित्य ने ही आज से दो हजार साल पहले अयोध्या नगरी की खोज की थी और महाराज लव के बाद सबसे पहले भगवान राम के मंदिर का निर्माण करवाया था। सम्राट विक्रमादित्य नीति शास्त्र और न्याय के पर्याय थे। उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उज्जैन महाकाल की नगरी है और काशी पंचांग की नगरी है दोनों मिलकर नया इतिहास बनाते हुए प्रेम और सहयोग किया परंपरा मजबूती से आगे बढ़ायेंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्ष 2014 के बाद मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ज्ञान परंपरा को उचित स्थान देकर पूरे विश्व में प्रतिष्ठित किया है। आज योग और आयुर्वेद की पूरी दुनिया में स्वीकार्यता बढ़ी है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2024 में प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन किया गया। इसमें 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने मां गंगा में स्नान किया। भेंट की गई वैदिक घड़ी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ को वैदिक घड़ी भेंट की। यह घड़ी बाबा विश्वनाथ के मंदिर में वैदिक काल को वर्तमान में जनता के बीच पुनर्स्थापित करने में सहायक होगी। इस घड़ी में प्राचीन वैदिक परंपरा तथा आधुनिक ज्ञान विज्ञान का मिश्रण करके कल की अचूक गणना का समावेश किया गया है। समारोह में उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल, एमएसएमई मंत्री राजेश सचान, पंजीयन मंत्री रविंद्र जायसवाल ,महापौर अशोक तिवारी जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम मौर्या, राज्यसभा सदस्य बाल योगी उमेश नाथ जी, विधायक, स्थानीय जन-प्रतिनिधि सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं संस्कृति प्रेमी उपस्थित रहे। वाराणसी की पावन धरा पर महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ का हुआ ऐतिहासिक मंचन महानाट्य ‘सम्राट विक्रमादित्य’ के भव्य मंचन और ओजस्वी प्रस्तुति से दर्शकों को हजारों वर्ष पुराने स्वर्णिम युग की यात्रा कराई। महानाट्य का आरंभ सम्राट विक्रमादित्य के उस संकल्प से हुआ, जब वे विदेशी आक्रांताओं के चंगुल से मातृ भूमि को मुक्त कराने का प्रण लेते हैं। रंगमंच पर कलाकारों के सजीव अभिनय ने उस कालखंड को जीवंत कर दिया, जब शकों के आतंक से त्रस्त प्रजा की रक्षा के लिए एक महानायक का उदय हुआ था। विशाल और भव्य सेट, ऊंचे दुर्ग … Read more

योगी सरकार का बड़ा कदम: 2026 के लिए खाद आपूर्ति रणनीति तैयार

खाद आपूर्ति को लेकर योगी सरकार का बड़ा प्लान, 2026 के लिए विस्तृत आपूर्ति रणनीति तैयार यूरिया, डीएपी और एनपीके की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राज्य सप्लाई प्लान पर किया जा रहा काम सहकारी समितियों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर, निजी क्षेत्र का 35% कोटा प्रस्तावित किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए सरकार की सख्त मॉनीटरिंग व्यवस्था लखनऊ  योगी सरकार ने किसानों को समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए अप्रैल 2026 के लिए एक व्यापक और सुव्यवस्थित सप्लाई प्लान तैयार किया है। इस योजना का उद्देश्य राज्य में किसी भी प्रकार की खाद कमी की स्थिति को रोकना और कृषि कार्यों को सुचारु बनाए रखना है। राज्य सरकार द्वारा जारी इस रणनीति के तहत यूरिया, डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) और एनपीके (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश) जैसे प्रमुख उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। कृषि विभाग के आला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रत्येक जिले में मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति समय से पहले सुनिश्चित की जाए, ताकि बुवाई और फसल की बढ़वार के दौरान किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।        इसके साथ ही प्रदेश के समस्त उर्वरक बिक्री केन्द्रों पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में कमेटी गठित कर कृषि विभाग, राजस्व विभाग एवं आवश्यकतानुसार अन्य विभागों के कार्मिकों की ड्यूटी लगाकर पारदर्शिता के साथ वितरण किया जाए। उर्वरकों की जमाखोरी कर कृत्रिम अभाव करने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए। गैर कृषि क्षेत्रों में उर्वरकों के डायवर्जन यथा-प्लाईवुड इण्डस्ट्रियल, पशु आहार निर्मित इकाइयों पर सघन निगरानी रखी जाए। फसल में संस्तुति / संतुलित मात्रा में (अधिकतम यूरिया 07 बोरी एवं डी०ए०पी०-05 बोरी प्रति हेक्टेयर) उर्वरकों का प्रयोग करने के साथ-साथ उर्वरकों का अग्रिम भण्डारण न करने के सम्बन्ध में ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाए जाए। अन्तर्राष्ट्रीय / अन्तर्राज्यीय सीमावर्ती जनपदों में उर्वरकों की उपलब्धता एवं वितरण की सघन निगरानी रखी जाए।  इस योजना में सहकारी समितियों की भूमिका को और मजबूत करने की बात कही गई है। सरकार ने सहकारी संस्थाओं के माध्यम से खाद वितरण की हिस्सेदारी बढ़ाने का निर्णय लिया है, जिससे पारदर्शिता और सुगमता दोनों में सुधार होगा। वहीं, निजी क्षेत्र की भागीदारी को संतुलित रखते हुए उन्हें लगभग 35 प्रतिशत कोटा देने का प्रस्ताव भी रखा गया है, ताकि सप्लाई चेन प्रभावी बनी रहे।     खाद वितरण की निगरानी के लिए सरकार ने सख्त मॉनीटरिंग व्यवस्था लागू की है। जिला स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाएंगी और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी या जमाखोरी पर तत्काल कार्रवाई की जाए। इसके अलावा, रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम के माध्यम से खाद की उपलब्धता और वितरण पर नजर रखी जाएगी। इस सुनियोजित रणनीति से किसानों को समय पर और पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध होगी, जिससे फसल उत्पादन में वृद्धि होगी और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। यह पहल राज्य के किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।