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क्या केंद्र की राजनीति में होगा बड़ा उलटफेर? राघव चड्ढा को लेकर चर्चाएं तेज, दो मंत्री हो सकते हैं बाहर

 नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव परिणाम से पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलों ने जोर पकड़ लिया है। हालांकि, अब तक NDA यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने इसे लेकर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है। कहा जा रहा है कि इस दौरान टीम मोदी से कई मंत्री बाहर जा सकते हैं और संगठन में पद संभाल सकते हैं। वहीं, चुनावी राज्यों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों की भी एंट्री हो सकती है। राघव चड्ढा के नाम की अटकलें पंजाब में भारतीय जनता पार्टी खासी सक्रिय नजर आ रही है। इसके साथ ही अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि कैबिनेट में पंजाब के चेहरों को शामिल किया जा सकता है। भाजपा ने मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट से महासचिव तरुण चुघ को मैदान में उतारा है। उनके अलावा पूर्व कांग्रेस नेता और राज्य में भाजपा की कमान संभाल चुके सुनील जाखड़ के नाम की भी अटकलें हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आम आदमी पार्टी से आए राघव चड्ढा को भी कैबिनेट में मौका दिया जा सकता है। हालांकि, इसे लेकर चड्ढा या पार्टी नेता की ओर से आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा गया है। दरअसल, पंजाब से आने वाले नेता रवनीत सिंह बिट्टू को इस बार भाजपा ने राज्यसभा उम्मीदवार नहीं बनाया है। ऐसे में पंजाब के कई नए चेहरों के मंत्री परिषद में आने की संभावनाएं जताई जा रही हैं। 2 मंत्रियों का कट सकता है टिकट  रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि 2 मंत्री बाहर किए जा सकते हैं। हालांकि, अब तक साफ नहीं है कि इनमें किन नेताओं नाम शामिल है और इसे लेकर आधिकारिक रूप से भी कुछ नहीं बताया गया है। खास बात है कि भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए दो केंद्रीय मंत्रियों को टिकट नहीं दिया है। इनमें बिट्टू के अलावा जॉर्ज कुरियन का नाम भी शामिल है। दक्षिण भारतीय राज्य की किसे मिलेगी कमान रिपोर्ट में यह भी कहा जा रहा है कि कैबिनेट फेरबदल में 10 से 12 मंत्री शामिल या बदले जा सकते हैं। कई मंत्रियों के विभाग बदले जाने की भी अटकलें हैं। इसके अलावा कहा जा रहा है कि भाजपा किसी कैबिनेट मंत्री को कर्नाटक इकाई का प्रमुख भी बना सकती है। हालांकि, नाम अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। फिलहाल, पार्टी के कर्नाटक प्रमुख बीवाई विजयेंद्र हैं। याचिका समिति के अध्यक्ष हैं राघव चड्डा मई में चड्ढा को उच्च सदन की याचिका समिति का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। तब राज्यसभा सभापति सीपी राधाकृष्णन की तरफ से समिति को दोबारा बनाया गया था और 10 सदस्यों को नामित किया था। समिति में चड्ढा के अलावा हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंक कुमार नायक, मस्तान राव यादव बीडा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रवंगवरा नारजारी और संदोष कुमार पी अन्य सदस्य हैं।

राज्यसभा में बड़ा बदलाव: राघव चड्ढा बने पिटीशन्स कमेटी के चेयरमैन

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा की याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने समिति का पुनर्गठन करते हुए इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. राज्यसभा की ओर से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि सभापति ने 20 मई से प्रभावी रूप से याचिका समिति का पुनर्गठन किया है. इसके तहत सदन के 10 सदस्यों को पैनल में नामित किया गया है. इसमें लिखा है, "राघव चड्ढा को अध्यक्ष नियुक्त किया गया है." राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के अलावा याचिका समिति में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, र्वंग्रा नारजरी और संतोष कुमार पी. को सदस्य बनाया गया है. इसी के साथ राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी एक अन्य अधिसूचना में कहा गया कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई 2026 को राज्यसभा सदस्य डॉ. मेनका गुरुस्वामी को 'कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026' पर बनी संयुक्त समिति का सदस्य नामित किया है. वहीं लोकसभा सचिवालय की अलग अधिसूचना में कहा गया कि लोकसभा अध्यक्ष ने 21 मई से प्रभावी रूप से अरविंद गणपत सावंत को 'कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक' पर बनी संयुक्त समिति के लिए नामित किया है. गौरतलब है कि राघव चड्ढा दो तिहाई ज्यादा AAP के राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी में शामिल हुए थे. उनके साथ हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजेंद्र गुप्ता, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी और अशोक मित्तल सहित कई नेता शामिल रहे. उस वक्त राघव चड्ढा ने कहा था, 'पिछले कुछ वर्षों से मुझे यह महसूस हो रहा था कि मैं गलत पार्टी में सही आदमी हूं. हमने यह फैसला किया है कि हम संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए खुद को BJP में मिला लेंगे.'' उन्होंने कहा था कि जिस आम आदमी पार्टी को खून-पसीने से सींचा और अपनी जवानी के 15 साल दिए, वो अब अपने सिद्धांतों, मूल्यों और मूल नैतिकता से भटक गई है. अब यह पार्टी देश के हित में नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम करती है.

राघव चड्ढा को मिला बड़ा पद! राज्यसभा में महत्वपूर्ण समिति की कमान संभालेंगे

नई दिल्ली हाल ही में आम आदमी पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। उन्हें राज्यसभा की याचिका समिति का अध्यक्ष बनाया गया है। समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस पैनल के लिए नामित किया गया है। याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया राज्यसभा की एक अधिसूचना में कहा गया है कि राघव चड्ढा को याचिका समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसमें यह भी बताया गया कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई से प्रभावी रूप से इस पैनल का पुनर्गठन किया है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने याचिका समिति का पुनर्गठन करने के बाद सदन के 10 सदस्यों को इस पैनल के लिए नामित किया। चड्ढा के अलावा पैनल के सदस्यों में हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी माथेर हिशाम, सुभाशीष खुंटिया, रंगव्रा नारज़ारी और संदोश कुमार पी शामिल हैं। एक अन्य अधिसूचना में राज्यसभा सचिवालय ने कहा कि राज्यसभा के सभापति ने 20 मई 2026 को राज्यसभा के सदस्य डॉ. मेनका गुरुस्वामी को कॉर्पोरेट कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 पर संयुक्त समिति के सदस्य के रूप में नामित किया है। आप के 7 सांसदों ने थामा था बीजेपी का हाथ बता दें कि आम आदमी पार्टी के बड़े नेताओं में एक रहे राघव चड्ढा ने राज्यसभा के छह अन्य सांसदों के साथ पार्टी को अलविदा कह दिया था। सभी सात सांसदों ने 27 अप्रैल को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ली। राज्यसभा में 10 सांसदों वाली आप के अब केवल 3 सांसद बचे हैं। आप ने की थी बर्खास्त करने की मांग इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने के बाद आम आदमी पार्टी ने राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन से उन्हें बर्खास्त करने की मांग की थी। बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों में राघव चड्ढा, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, स्वाति मालीवाल, राजिंदर गुप्ता और विक्रमजीत सिंह साहनी हैं। दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया इस बीच राघव चड्ढा की ओर से दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर किया गया है। इसमें सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों पर उनके बारे में प्रसारित किए जा रहे फर्जी, एआई-जनरेटेड और डीपफेक कंटेंट को तत्काल हटाने और ब्लॉक करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि संबंधित सामग्री दुर्भावनापूर्ण, मनगढ़ंत और राघव चड्ढा की प्रतिष्ठा व व्यक्तित्व अधिकारों को गंभीर नुकसान पहुंचाने वाली है। याचिका में यह भी कहा गया है कि एआई और डीपफेक तकनीक का इस्तेमाल कर छेड़छाड़ की गई सामग्री तैयार करना और प्रसारित करना न केवल कानूनी और संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है, बल्कि इससे अपूरणीय प्रतिष्ठात्मक क्षति भी हो रही है। कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा दिल्ली हाई कोर्ट में दायर इस याचिका पर जस्टिस सुब्रह्मण्यम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई की। जस्टिस प्रसाद ने कहा कि यह राघव चड्ढा के व्यक्तिगत अधिकारों के उल्लंघन का मामला नहीं बनता। उनकी आलोचना उनके राजनीतिक फैसले को लेकर और बीजेपी में जाने को लेकर की जा रही है। हाई कोर्ट ने कहा कि व्यक्तित्व अधिकारों का व्यवसायिक इस्तेमाल और आलोचना करने में अंतर है। कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

‘गंगा बहाएगी, तिरंगा लहराएगा’: राघव चड्ढा की पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी

 चंडीगढ़  आम आदमी पार्टी से बीजेपी में आए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा अपने बेबाक अंदाज के लिए जाने जाते हैं। शुक्रवार (08 मई, 2026) को अपने इस बेबाक अंदाज में राघव चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक वीडियो पोस्ट करते हुए पाकिस्तान को चेतावनी दे डाली। बीजेपी सांसद ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि वह सुधर जाए नहीं तो वो दिन दून नहीं जब गंगा काशी से इस्लामाबाद तक बहेगी। आइए जानते हैं सांसद ने और क्या-क्या कहा। दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं: राघव चड्ढा राघव चड्ढा ने कहा,'जय हिंद साथियों, ये सच्चाई है कि आप दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन अपना पड़ोसी नहीं और अगर पड़ोसी पाकिस्तान जैसा हो, तो उसे ठीक करने के लिए कठोर दंड देना हमारा पहला कर्तव्य है। आज भारत सिर्फ पाकिस्तान नहीं बल्कि क्रूरता बर्बरता और आतंकी मानसिकता के खिलाफ है और एक जंग लड़ रहा है। हमारी सेना जिस अद्भुत वीरता और शौर्य से लड़ रही है। उससे साफ है कि इस बार आतंकवाद का खात्मा होकर रहेगा।' राज्यसभा सांसद ने आगे कहा, 'जिन परिवारों के बेटे सरहद पर दुश्मन का मुकाबला कर रहे हैं, उन परिवारों के साथ चट्टान की तरह खड़ा होना चाहिए। दुनिया जानती है कि हमारा ये वसूल है, ना हम किसी को पहले छेड़ते हैं और ना ही बाद में किसी को छोड़ते हैं। राघव चड्ढा ने सेना की प्रशंसा की आप से बीजेपी में आए राज्यसभा सांसद ने पहलगाम हमले को लेकर सेना के द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, '22 अप्रैल को पहलगाम में पाकिस्तानी आतंकियों ने जिस कार्यरता और क्रूरता से हमारे निहत्थे लोगों की हत्या की थी। वो मानवता के इतिहास पर एक कलंक की तरह है। तो हमने भी अपने बहनों के सिंदूर का बदला ऑपरेशन सिंदूर कि पहली इंस्टॉलमेंट से ले लिया। हमारी मिसाइलें, हमारे विमान, पाकिस्तान की छाती पर गरज रहे हैं। हमारा एयर डिफेंस सिस्टम पाकिस्तान की मिसाइलों और ड्रोन्स को मच्छर की तरह मसलकर मार रहा है।' उन्होंने कहा, 'जिन आतंकियों ने रहम की भीख मांग रही माताओं के सामने उनके कलेजे के टुकड़े को छीना था, जिन आतंकियों ने पुलवामा से लेकर उरी तक हमारे लोगों पर नापाक नजर डाली थी, जिन आतंकियों ने 2008 में मुंबई में हमारे सैकड़ों निहत्थे और बेकसूर लोगों की हत्या की थी, जिन आतंकियों ने 2001 में हमारे लोकतंत्र के मंदिर भारतीय संसद भवन पर घिनौना हमला किया, जिन आतंकवादियों ने 1993 में हमारी आर्थिक राजधानी मुंबई को सीरियल ब्लास्ट से दहला दिया था। हमारी सेना उन आतंकियों को और उनके नफरत की मानसिकता को पूरी ताकत से दफनाने में जुटी है।' काशी से लेकर इस्लामाबद तक बहेगी गंगा: राघव चड्ढा बीजेपी सांसद ने पाकिस्तान को चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा, 'हम सबको आपस में एक रहना है। मुसीबत में देश की कमजोरी नहीं बल्कि ताकत बनना। हमारी आर्मी, नेवी और एयर फोर्स पाकिस्तान को फिर से याद दिला रहे हैं कि ऐसे ही 1971 में उसको धूल चटाया थी। ऐसे ही पाकिस्तान के 90 हजार से अधिक सैनिको को घुटनों पर लाकर भारत ने नया बांग्लादेश बनाया था। ऐसे ही 1999 में कारगिल में हमारी सेना ने पाक के सारे नापाक इरादों को मिट्टी में मिलाया था। अबकी बार पाकिस्तान को सुधार कर रहेंगे। भारत, पाकिस्तान को चुनौती और चेतावनी दे रहा है कि सुधर जाओ, नहीं तो काशी से लेकर इस्लामाबाद तक बहेगी गंगा और रावलपिंडी में लहराएगा भारत का तिंरगा। जय हिंद।'  

राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राघव चड्ढा ने किया खुलासा, कहा – ‘AAP मुझे भी टारगेट कर सकती है’

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी से बीजेपी में शामिल होने वाले सांसदों ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की और आप सरकार द्वारा उनके खिलाफ की जा रही कार्रवाई पर चर्चा की। मुलाकात के बाद राज्यसभा सांसद ने आम आदमी पार्टी पर खूब निशाना साधा। उन्होंने कहा, आज हमने राष्ट्रपति को बताया कि पंजाब सरकार किस तरह आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हुए सांसदों के खिलाफ बदले की राजनीति के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। पंजाब पुलिस की मदद से आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने विश्व कप विजेता हरभजन सिंह के आवास के बाहर 'देशद्रोही' लिखा। इसके बाद पंजाब में पद्म श्री राजेंद्र गुप्ता की फैक्ट्री का पानी का कनेक्शन काट दिया गया। राघव चड्ढा ने दावा किया है कि इनका अगला टारगेट मैं बनूंगा। मीडिया से बात करते हुए राघव चड्ढा ने कहा , आम आदमी पार्टी ने संदीप पाठक के खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत एफआईआर दर्ज कराईं और मीडिया के जरिए यह अफवाह फैलाई कि उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा। मैं आम आदमी पार्टी को बताना चाहता हूं कि उन्होंने सतर्कता बोर्ड और प्रदूषण बोर्ड की मदद से बदले का एक खतरनाक खेल शुरू किया है, जिसका अंजाम बेहद बुरा होगा। आप का अगला टारगेट मैं- राघव चड्ढा उन्होंने सूत्रों के हवाले से दावा करते हुए कहा कि , मैं उनका अगला निशाना बनूंगा। ये मेरे ऊपर भी कोई कार्रवाई करने जा रहे हैं। इन्होंने हम सब की छवि खराब करने की पूरी कोशि्श की है। पंजाब सरकार ने सोशल मीडिया पर हमें धमकाने के लिए एजेंसियों को काम पर रखा है। आम आदमी पार्टी यह सब पंजाब सरकार के फंड से कर रही है। यही कारण है कि मैंने कहा कि आम आदमी पार्टी भ्रष्ट और समझौतावादी लोगों के हाथों में फंसी हुई है। बता दें, आम आदमी पार्टी (आप) को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके राज्यसभा के 10 सदस्यों में से सात- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजिंदर गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल ने यह आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी कि 'आप' अपने मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटक गई है। इसके बाद इन सभी ने भाजपा में विलय कर लिया था। 'आप' छोड़ने वाले सात सांसदों में से छह पंजाब से थे। 

राघव चड्ढा को पांच मई को राष्ट्रपति से मिलने का समय, सीएम मान से पहले तय हुई मुलाकात

चंडीगढ़ पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान आज पांच मई को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मिलेंगे। इस प्रस्तावित मुलाकात से पहले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा तीन अन्य सांसदों के साथ राष्ट्रपति से मिलेंगे। ये सभी सांसद हाल ही में भाजपा में शामिल हुए हैं।  राष्ट्रपति कार्यालय ने इन सांसदों को 5 मई को सुबह 10.40 बजे का समय दिया है। बताया जा रहा है कि यह सांसद पंजाब सरकार पर राज्य मशीनरी के कथित दुरुपयोग का मुद्दा उठाएंगे। उनका आरोप है कि राजनीतिक प्रतिशोध के तहत उन्हें निशाना बनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री मान उसी दिन दोपहर 12 बजे राष्ट्रपति से मिलेंगे। उन्होंने आम आदमी पार्टी के छह सांसदों को रिकॉल करने के मुद्दे पर समय मांगा है। पार्टी की ओर से 80 विधायकों को दिल्ली भेजने की तैयारी है हालांकि राष्ट्रपति से मुलाकात केवल मुख्यमंत्री ही करेंगे। 

राघव चड्ढा की एंट्री के बावजूद पंजाब में BJP को फायदा नहीं, जानें क्या है वजह

लुधियाना  आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्य सभा सांसद बीजेपी में शामिल हो गए हैं। इसको लेकर राज्य सभा सचिवालय ने भी अधिसूचना जारी कर दी है। इसी के साथ उच्च सदन में भाजपा की ताकत भी बढ़ी है और सांसदों की संख्या 113 हो गई है। जिन सात सांसदों ने बीजेपी का दामन थामा है, उनमें से 6 पंजाब का प्रतिनिधित्व करते हैं और स्वाती मालिवाल दिल्ली से है। पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इससे पहले राज्य सभा सांसदों का बीजेपी में जाना अरविंद केजरीवाल की पार्टी AAP के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दरअसल, दिल्ली हारने के बाद अब आम आदमी पार्टी की पंजाब में ही सरकार है। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली चुनाव हारने के बाद पूरा ध्यान पंजाब पर लगा दिया है। AAP के बागी सांसदों के शामिल होने से बीजेपी खुश नजर आ रही है। दरअसल, राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने विधासनभा चुनाव 2022 में AAP की जीत में अहम भूमिका निभाई थी। जो सांसद बीजेपी में शामिल हुए हैं उनमें- राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत सिंह साहनी, राजिंदर गुप्ता और स्वाति मालीवाल शामिल है।  क्या बीजेपी को मिलेगा फायदा?  AAP के सातों राज्य सभा सांसदों के विलय के बाद उच्च सदन में भले ही बीजेपी का संख्या बल बढ़ा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर फायदा कम होता नजर आ रहा है। अपनी रणनीति से 2022 में राघव चड्ढा और संदीप पाठक ने AAP को जीत दिलाई हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इन नेताओं का कोई जनाधार नहीं है। ऐसे में बीजेपी के लिए इनका कितना उपयोगी साबित होना संभव है, यह आने वाला समय बताएगा। पंजाब में चड्ढा का इस्तेमाल करेगी बीजेपी वहीं पंजाब में बीजेपी अब राघव चड्ढा का इस्तेमाल करेगी, क्योंकि प्रदेश में कायदे से पार्टी अपनी उपस्थिति भी दर्ज नहीं करा पाई है। इसके अलावा बीजेपी पर पंजाब में किसान विरोधी होने का आरोप भी लगता है। खासकर केंद्र के कृषि कानूनों के विवाद के बाद। संयुक्त किसान मोर्चा और अन्य किसान संगठनों ने बीजेपी पर किसानों की मांगों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इसलिए अकाली दल भी अब बीजेपी के साथ नहीं है। चड्ढा के सामने भी होगी चुनौती राघव चड्ढा AAP की तरफ से राज्य सभा में पंजाब का प्रतिनिधित्व करते थे, लेकिन अब बीजेपी में जाने के बाद उनके सामने कई चुनौतियां होगी। दरअसल, इससे पहले तक वे बीजेपी के मुखर विरोधी रहे है और कई मौके पर मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा है। खासतौर पर कृषि कानूनों को लेकर। ऐसे में प्रदेश की जनता और बीजेपी में अपनी जगह कैसे बनाते है, यह आने वाला समय बताएगा। उन्हें न केवल पार्टी की विचारधारा के साथ तालमेल बैठाना होगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं का भरोसा भी जीतना होगा। 

नवजोत कौर सिद्धू का दावा: प्रियंका चोपड़ा कनेक्शन की चर्चा

इन दिनों संसद से लेकर सड़क तक राघर चड्ढा के नाम का शोर है. राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए हैं. राघव चड्ढा का ये फैसला कई लोगों के लिए शॉकिंग है. कई लोग उनके इस फैसले से खुश हैं. कुछ आहात नजर आ रहे हैं. नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने राघव के बीजेपी जॉइन करने पर बड़ा खुलासा किया है. राघव पर बड़ा खुलासा है नवजोत कौर सिद्धू ने टॉप सीक्रेट के पॉडकास्ट में राघव चड्ढा के बीजेपी में शामिल होने की वजह बताई है. उन्होंने कहा कि प्रियंका चोपड़ा की वजह से राघव बीजेपी में शामिल हुए. वो बताती हैं कि प्रियंका चोपड़ा को पता लग गया था कि ये (आम आदमी पार्टी) लोग राघव के पीछे पड़ गए हैं. अब राघव पर ईडी होगी. नवजोत कौर सिद्धू ने कहा कि प्रियंका चोपड़ा ने राघव चड्ढा को अपनी बहन परिणीति चोपड़ा के कारण बचाया है. नवजोत सिंह सिद्धू की वाइफ ने ये भी कहा कि उन्हें पहले से पता लग गया था कि राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी से निकलने वाले हैं. पार्टी को लगने लगा था कि राघव हमारे लिए नहीं बोल रहा है. इसके बाद वो लड़ाई में पड़ गए. मैं बता दूं कि हर खामोश बंदा पार्टी होता है. राघव चड्ढा आज जो चार साल के बाद बोल रहे हैं. उन्हें डेढ़ साल बाद ही बोलना चाहिए था. अगर कुछ गलत लग रहा है, तभी बोलना चाहिए. नाराज हुए जेन-जी और सेलेब्स राघव चड्ढा का बीजेपी जॉइन करना कई लोगों को अखरा रहा है. बीजेपी जॉइन करने के एक दिन बाद राघव चड्ढा के दो मिलियन से ज्यादा इंस्टाग्राम फॉलोअर्स कम हो गए हैं. कुनिका सदनंद और प्रकाश राज जैसे सेलेब्स ने राघव चड्ढा के फैसले पर अपना गुस्सा जाहिर किया है. नवजोत कौर सिद्धू ने राघव चड्ढा को लेकर जो भी दावा किया है. इस पर अब तक प्रियंका चोपड़ा, परिणीति चोपड़ा या राघव चड्ढा में से किसी ने भी रिएक्ट नहीं किया है. पर हां इतना जरूर कह सकते हैं कि राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी छोड़ने के बाद राजनीति में पार्टी में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है.

राघव चड्ढा का अटका बिल: अगर पास होता तो AAP की टूटन और BJP में जाने की बात न होती

नई दिल्ली आम आदमी पार्टी को राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा झटका दे चुके हैं. आम आदमी पार्टी में बगावत करने वाले राघव चड्ढा अब भाजपाई हो चुके हैं. उनके साथ छह अन्य सांसद भी आम आदमी पार्टी से नाता तोड़ चुके हैं. अब वे सभी भाजपा में हैं. राघव चड्ढा आज भले ही दल बदलकर भाजपा में जा चुके हैं. मगर राघव चड्ढा का ही लाया बिल पास हो गया होता तो वह आज आम आदमी पार्टी छोड़कर अलग नहीं हो पाते. न ही वह बगावत कर पाते. राघव चड्ढा की यह खबर सिर्फ एक नेता के पार्टी बदलने की नहीं है. इसमें एक बड़ी विडंबना छिपी है. चार साल पहले राघव चड्ढा ने खुद एक बिल लाया था, जो दल-बदल को बहुत सख्ती से रोकता. अगर वह बिल कानून बन गया होता तो आज राघव चड्ढा की कहानी कुछ और होती।  जी हां, चार साल पहले राघव चड्ढा राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य थे. उन्होंने राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य के तौर पर अगस्त 2022 में एक प्राइवेट मेंबर बिल लाया था. उस बिल का मकसद दल-बदल कानून को और सख्त बनाना था. वह कानून बन गया होता तो राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी छोड़कर नहीं जा पाते. न ही वह सदन के अपने छह अन्य पार्टी सदस्यों के साथ मिलकर भाजपा में शामिल हो पाते. दो दिन पहले ही उन्होंने यह घोषणा की थी. जिसमें उन्होंने आम आदमी पार्टी की सदन में मौजूद 10 सदस्यों की कुल संख्या में से दो-तिहाई बहुमत होने का हवाला दिया था।  राघव चड्ढा ने चार साल पहले लाया था बिल  खबर के मुताबिक, अगर राघव चड्ढा का प्रस्तावित बिल कानून बन गया होता तो पार्टी छोड़कर दूसरी पार्टी में जाने के लिए राघव चड्ढा को अपनी पार्टी के छह नहीं, बल्कि सात सदस्यों के समर्थन की जरूरत पड़ती. इतना ही नहीं पार्टी तोड़ने के आरोप में इस मौजूदा टीम पर छह साल तक चुनाव लड़ने पर रोक लग जाती।  उस बिल में क्या था? ऐसा इसलिए, क्योंकि संविधान संशोधन बिल में दलबदल विरोधी कानून को और अधिक सख़्त बनाने की मांग की गई थी. यह बिल उन्होंने राज्यसभा में शामिल होने के तीन महीने बाद पेश किया था. इस बिल के तहत पार्टी में वैध रूप से टूट या विभाजन करने के लिए दो-तिहाई नहीं, बल्कि तीन-चौथाई बहुमत की जरूरत होती. इस बिल को राघव चड्ढा ने 5 अगस्त 2022 को एक ‘निजी सदस्य बिल’ के तौर पर सदन में पेश किया था. तब राघव आप चीफ अरविंद केजरीवाल के भरोसेमंद सहयोगी थे।  बिल में क्या मांग की गई थी? ‘विधायकों द्वारा पूरी तरह से लोकतांत्रिक जनादेश की अनदेखी करते हुए गलत इरादे से पार्टी बदलने’ का हवाला देते हुए राघव चड्ढा के प्रस्तावित बिल में संविधान की दसवीं अनुसूची के लिए और भी अधिक सख़्त प्रावधानों के जरिए दलबदल विरोधी नियमों को मजबूत करने की मांग की गई थी. गौरतलब है कि दसवीं अनुसूची में दलबदल के आधार पर चुने हुए प्रतिनिधियों को अयोग्य ठहराने से जुड़े नियम शामिल हैं।  दसवीं अनुसूची में क्या है वर्तमान कानून (दसवीं अनुसूची) कहता है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य मिलकर दूसरी पार्टी में चले जाएं तो उन्हें अयोग्य नहीं माना जाता. राघव चड्ढा के बिल ने इसे बढ़ाकर तीन-चौथाई (3/4) कर दिया था. मतलब 10 सदस्यों वाली पार्टी में कम से कम 8 सदस्यों का सहमत होना जरूरी होता. सिर्फ 7 से काम नहीं चलता।  जानिए बिल में क्या-क्या?     इस प्रस्तावित कानून का मकसद संविधान के अनुच्छेद 102 और 191 में संशोधन करके और दसवीं अनुसूची में बदलाव करके पार्टी के भीतर विलय के लिए ज़रूरी सदस्यों की संख्या को 2/3 से बढ़ाकर 3/4 करके  लोकतंत्र को मज़बूत करना और जन प्रतिनिधियों को राजनीतिक पार्टी के कार्यकर्ताओं के बजाय जानकार कानून निर्माता बनने में मदद करना था।      बिल में यह भी लिखा था कि अगर कोई सांसद या विधायक चुनाव जीतने के बाद पार्टी बदलता है तो उसे छह साल तक कोई चुनाव लड़ने की इजाजत नहीं होगी. साथ ही ‘रिसॉर्ट पॉलिटिक्स’ रोकने के लिए अगर कोई सरकार से समर्थन वापस लेता है तो उसे सात दिन के अंदर स्पीकर या चेयरमैन के सामने हाजिर होना पड़ता. अगर वह नहीं करता तो उसे अयोग्य ठहराया जा सकता था।      बिल में साफ लिखा था कि दल-बदल कानून का मकसद विधायकों-सांसदों के खरीद-फरोख्त को रोकना था, लेकिन आज भी यह समस्या बदस्तूर जारी है. दसवीं अनुसूची का दुरुपयोग हो रहा है. यह हमारे लोकतंत्र पर कलंक है. बिल ने अनुच्छेद 102 और 191 में भी बदलाव का प्रस्ताव रखा था ताकि सांसद या विधायक अयोग्य होने पर सदन की सदस्यता चली जाए।  और यह विडंबना तब राघव चड्ढा ने बिल पेश करते समय कहा था कि जनता ने जिस उम्मीद से विधायकों को चुना है, उसके खिलाफ फ्लोर क्रॉसिंग (दल-बदल) करना गलत है. लेकिन आज वही राघव चड्ढा आम आदमी पार्टी की दो-तिहाई बहुमत का हवाला देकर भाजपा में चले गए हैं. अगर उनका 2022 वाला बिल कानून बन जाता तो आज उन्हें सात सदस्यों (न कि छह) का समर्थन चाहिए होता और पूरी टीम को छह साल तक चुनाव लड़ने से रोक दिया जाता। 

‘AAP में घुटन महसूस हो रही थी’, राघव चड्ढा ने बताए अलग होने के कारण

चंडीगढ़. सांसद राघव चड्ढा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर किया है। जिसमें उन्होंने कहा कि पॉलिटिक्स में आने से पहले मैं एक सीए था, मेरे सामने एक बेहतर करियर था, उसे छोड़कर मैं राजनीति में आया। अपना करियर को बनाने के लिए राजनीति में नहीं आया। एक पॉलिटिकल पार्टी का फाउंडिंग मेंबर बना, जिस पार्टी को मैंने अपने प्राइम यूथ के 15 साल दिए। अपने खून-पसीने और बहुत मेहनत से इस पार्टी को सींचा, लेकिन आज ये पार्टी पुरानी वाली पार्टी नहीं रही। इस पार्टी में आज एक टॉक्सिक वर्क एनवायरमेंट है। आपको काम करने से रोका जाता है, पार्लियामेंट में बोलने से रोका जाता है और ये पार्टी आज चंद भ्रष्ट लोगों के हाथ में फंसकर रह गई है, जो अब देश के लिए नहीं, बल्कि अपने निजी फायदे के लिए काम कर रही है। पिछले कुछ सालों से मैं यह महसूस कर रहा था कि शायद मैं एक गलत पार्टी में एक सही आदमी हूं। इसी के चलते मेरे सामने सिर्फ तीन विकल्प थे; पहला विकल्प कि मैं राजनीति ही छोड़ दूं। दूसरा विकल्प कि मैं इसी पार्टी में रहूं और चीजें ठीक करने की कोशिश करूं, जो कि हुआ नहीं। राघव ने गिनाए तीन विकल्प तीसरा विकल्प कि मैं अपनी ऊर्जा और अनुभव लेकर किसी और पार्टी के साथ जुड़कर सकारात्मक राजनीति करूं। इसलिए अकेले मैंने ही नहीं, मेरे साथ छह और सांसदों ने यह फैसला लिया कि हम इस पार्टी से रिश्ता तोड़ देंगे। एक आदमी गलत हो सकता है, दो आदमी गलत हो सकते हैं, लेकिन सात लोग गलत नहीं हो सकते। वे अनगिनत शिक्षित लोग जो इस पार्टी के साथ जुड़े थे, क्या वे सारे लोग गलत थे? आप ऐसे समझिए, आप में से जितने ऑफिस जाने वाले लोग हैं, अगर आपका वर्कप्लेस टॉक्सिक बन जाए तो आप कितना काम कर पाएंगे? क्या आप वहां काम कर पाएंगे? आपको वहां काम करने से रोका जाए, आपकी मेहनत को दबाया जाए, आपको चुप कराया जाए, तो आप क्या करेंगे? उस स्थिति में सही फैसला यही है कि आप उस जगह को छोड़ दें। शायद हमने भी वही किया। आप में से कई लोगों ने पूछा कि क्या मैं आम लोगों के मुद्दे वैसे ही उठाता रहूंगा? तो मैं आपको विश्वास दिलाना चाहता हूं कि मैं आपकी समस्याओं को लगातार और जोश के साथ उठाऊंगा, और अच्छी बात यह है कि अब हम उन दिक्कतों के हल भी ढूंढ पाएंगे। कुछ दिन पहले बीजेपी में हुए थे शामिल कुछ दिन पहले राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपने साथ-साथ छह और सासंदों के आप छोड़क बीजेपी में शामिल होने की बात कही थी। आम आदमी पार्टी के लिए यह बड़ी झटका था। राघव चड्ढा के साथ अशोक मित्तल, संदीप पाठक, स्वाति मालिवाल, हर भजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता आदि बीजेपी में शामिल हो गए थे।