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US में पंजाब-हरियाणा के ड्राइवरों पर असर, 1790 नौकरियों का नुकसान, वर्क वीजा के बिना नहीं मिलेगा DL, पूरे USA में हो सकता है लागू

पटियाला  अमेरिका के इंडियाना राज्य ने अवैध रूप से गए सभी पंजाबी ड्राइवरों के लाइसेंस कैंसिल कर दिए हैं। इंडियाना के नए कानून से 1790 ड्राइवरों की नौकरी चली गई है। इसमें अधिकतर पंजाब और हरियाणा के रहने वाले हैं।  इंडियाना की लाइसेंसिंग अथारिटी ने बताया कि लगातार इंडियन ड्राइवरों से हो रहे हादसों के बाद ये फैसला लिया गया। हादसों के बाद पूछताछ में पता चला कि पंजाब-हरियाणा मूल के ड्राइवरों को न तो रोड साइन इंग्लिश में पढ़ना आते थे और न ही वे अंग्रेजी में बात कर सकते थे। गवर्नर माइक ब्रॉन ने मार्च 2026 में हाउस एनरोल्ड एक्ट 1200 पर साइन कर दिए हैं। इंडियाना बीएमवी ने 16 मार्च को 1790 ड्राइवरों को नोटिस भेजा था, जिसमें लाइलेंस रद्द करने की सूचना दी गई थी। कानून लागू होते ही 1 अप्रैल को सभी नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल (जिनके पास एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा नहीं था) अपने आप एक्सपायर हो गए। इंडियाना के अटॉर्नी जनरल टॉड रॉकटा बोले- हमारा मकसद किसी समुदाय को निशाना बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि स्टीयरिंग व्हील के पीछे बैठा व्यक्ति पूरी तरह ट्रेंड और कानूनी रूप से योग्य हो। तरनतारन के युवक ने बैन को मारी थी ट्रक से टक्कर: इंडियाना के अटॉर्नी जनरल टॉड रॉकटा ने बताया कि कानून बनाने का मुख्य कारण पिछले 4 महीनों में अवैध इमिग्रेंट ट्रक ड्राइवरों द्वारा किए गए हादसे हैं। इनमें कुल 6 मौतें हुईं। पंजाब के एक ट्रक ड्राइवर की अमेरिका के फ्लोरिडा टर्न पाइक में ड्राइविंग दौरान बड़ी लापरवाही का वीडियो सामने आया था। फ्लोरिडा की सड़क पर गलत यूटर्न लेने कारण एक बड़ा एक्सीडेंट हो गया था। इसमें वैन में सवार 3 लोगों की मौत हो गई थी। ट्रक ड्राइवर तरनतारन के गांव रटैला का रहने वाला था। पंजाबी मूल के सुखदीप सिंह ने रेड लाइट जंप कर मारी थी टक्कर: दूसरा हादसा 18 फरवरी 2026 को पंजाबी मूल के सुखदीप सिंह ने किया। 24 साल का सुखदेव 2018 में अवैध रूप से आया था और मई 2025 में लाइसेंस लिया था। उसने हैंड्रिक्स काउंटी में यूएस 36 पर रेड लाइट क्रॉस की। सेमी ट्रक ने पिकअप ट्रक को टक्कर मारी जिसमें 64 वर्षीय टेरी शुल्त्ज की मौत हो गई। सिंह ने पुलिस को बताया था कि वह सिर्फ 3 महीने से ट्रक चला रहा था। इसी के साथ अमेरिका के कैलिफोर्निया में पंजाब के ट्रक ड्राइवर ने करीब 10 वाहनों को टक्कर मार दी थी। हादसे में 3 लोगों की मौत हो गई थी। पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को गिरफ्तार कर लिया था। उसकी पहचान 21 साल के जशनप्रीत सिंह के रूप में हुई थी। हादसों के बाद कानून बनने पूरी कहानी     इंडियाना विधानसभा में एचईए 1200 पेश:फरवरी 2026 में इंडियाना विधानसभा में एचईए 1200 पेश किया गया। कई भयंकर एक्सीडेंट्स के बाद यह बिल पास हुआ। गवर्नर माइक ब्रॉन ने मार्च 2026 के मध्य में इसे साइन किया। लेफ्टिनेंट गवर्नर माइका बेकविथ और अटॉर्नी जनरल ने इसे सड़क सुरक्षा का बड़ा कदम बताया।     बीएमवी ने पहले नोटिस भेजा: इंडियाना ब्यूरो ऑफ मोटर व्हीकल्स (बीएमवी) ने 16 मार्च 2026 को लाइसेंस रद्द करने से पहले 1790 ड्राइवरों को मेल से नोटिस भेजा। इनमें वे सभी शामिल थे जिनके पास नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल था और लीगल स्टेटस यानी एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा नहीं था।     1 अप्रैल 2026 को कानून लागू हुआ: 31 मार्च 2026 की मिडनाइट को सभी पुराने नॉन-डोमिसाइल्ड सीडीएल एक्सपायर हो गए। अब अवैध इमिग्रेंट्स को नया सीडीएल नहीं मिलेगा। केवल एच-2ए, एच-2बी या ई-2 वीजा वाले ही अप्लाई कर सकेंगे।     नए कानून में अंग्रेजी आना जरूरी किया: नया लाइसेंस लेने के लिए एग्जाम अब केवल अंग्रेजी या अमेरिकन साइन लैंग्वेज में होगा। ड्राइवर को अंग्रेजी में बातचीत, ट्रैफिक साइन समझने और रिपोर्ट लिखना आना जरूरी कर दिया गया है। कंपनियां या ड्राइविंग लाइसेंस स्कूल अगर जानबूझकर अनएलिजिबल ड्राइवर को ट्रेनिंग या नौकरी देते हैं तो उन पर 50 हजार डॉलर (लगभग 42 लाख रुपए) जुर्माना होगा। फर्जी दस्तावेज देने पर भी 42 लाख की पेनल्टी लगेगी। लाइसेंस रद्द करने वाला इंडियाना पहला सूबा, बाकी जगह भी हो सकते अवैध रूप से ट्रक चला रहे प्रवासियों पर कार्रवाई करने वाला इंडिया अमेरिका का पहला सूबा है। गवर्नर माइक ब्रॉन ने बताया कि ये फैसला फरवरी 2026 में पंजाबी ट्रक ड्राइवरों द्वारा किए 2 बड़े हादसों के बाद लिया गया है। खासकर फरवरी 2026 में सुखदीप सिंह के ट्रक से हुए एक्सीडेंट में 64 वर्षीय व्यक्ति की मौत हो गई थी। सरकार का कहना है कि इससे अनट्रेंड और अनक्वालिफाइड ड्राइवरों को रोका जाएगा, सड़कें सुरक्षित होंगी। नए नियम में अंग्रेजी आना अनिवार्य है। रद्द लाइसेंस वाले ट्रक ड्राइवरों को नौकरी देने वाले ट्रक मालिकों पर 50000 डॉलर जुर्माना लगेगा।

पर्यावरणीय मंजूरी नियमों में बदलाव, 45 दिन में ‘सिया’ ने नहीं दी प्रतिक्रिया तो मुख्य सचिव करेंगे निर्णय

भोपाल  खदान, सड़क निर्माण या अन्य परियोजनाएं हों, इनकी पर्यावरणीय स्वीकृति से जुड़े महत्वपूर्ण नियम में केंद्र सरकार बदलाव करने जा रही है। इसके प्रभावी होने पर यदि किसी परियोजना को राज्य पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन प्राधिकरण (सिया) 45 दिन तक स्वीकृति नहीं देती है तो राज्यों में मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समिति इस पर निर्णय करेगी। इसमें प्रमुख सचिव, पर्यावरण और प्रमुख सचिव, नगरीय विकास एवं आवास सदस्य होंगे। इसके लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने प्रारूप की अधिसूचना जारी कर सुझाव मांगे हैं। अभी ऐसी व्यवस्था है कि यदि 45 दिन तक सिया की स्वीकृति नहीं मिलती तो परियोजना अपने आप स्वीकृत मानी जाती है। मध्य प्रदेश में भी वर्ष 2025 में ऐसा मामला सामने आ चुका है। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। सभी राज्यों में सिया है। वहां भी ऐसे मामले हो सकते हैं। इसी कारण केंद्र सरकार नियम बदलने जा रही है। अपने आप अनुमति मिलने की व्यवस्था में कमी यह है कि बिना मूल्यांकन के परियोजनाएं स्वीकृत होने पर उन्हें भी अनुमति मिल जाती है, जिन्हें पात्रता नहीं होती। यानी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम की शर्तों के अनुरूप नहीं होतीं। सामान्यत: 45 दिन में स्वीकृति नहीं मिलने का बड़ा कारण सिया की बैठक नहीं होना है। नई व्यवस्था में परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन करने के बाद ही अनुमति मिल पाएगी। इससे विवाद या पक्षपात की स्थिति भी नहीं बनेगी। अभी कई बार यह आरोप लगता है कि 45 दिन तक जानबूझकर बैठकें नहीं की जातीं, जिससे बिना मूल्यांकन अनुमति मिल सके।  

सीएम मोहन यादव और सीएस अनुराग जैन के बीच हुई चर्चा, एमपी में होगा बड़ा प्रशासनिक बदलाव

भोपाल  मध्यप्रदेश में बड़ा प्रशासनिक बदलाव होनेवाला है। कई जिलों के कलेक्टर व पुलिस अधीक्षक यानि एसपी बदले जाएंगे। इसकी कवायद तेज हो चुकी है। राज्य के आइएएस-आइपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल के लिए वरिष्ठ स्तर पर बातचीत चल रही है। राज्य के सीएम मोहन यादव व सीएस अनुराग जैन के बीच भी इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी है। बताया जा रहा है कि वरिष्ठ नेतृत्व से चर्चा के बाद प्रदेश में व्यापक स्तर पर प्रशासनिक फेरबदल कर आइएएस-आइपीएस अधिकारियों को नए दायित्व देने की अंदरखाने तैयारी की जा रही है। बीजेपी के स्थानीय प्रमुख नेताओं व सांसद-विधायकों से जिलास्तर के प्रमुख अधिकारियों के संबंध भी एक प्रमुख कसौटी बनी वित्तीय वर्ष 2025-26 खत्म हो चुका है और 2026-27 की शुरुआत हो गई है। प्रदेशभर के कलेक्टर-संभागायुक्तों को राजस्व संग्रहण के जो लक्ष्य मिले थे, उसके परिणाम भी सामने आ चुके हैं। एसआइआर की बंदिश तो काफी पहले ही खत्म हो चुकी हैं। प्रशासनिक दक्षता के साथ ही अधिकारियों के काम करने के तरीके व आम जनों से उनके व्यवहार को परखा जा रहा है। बीजेपी के स्थानीय प्रमुख नेताओं व सांसद-विधायकों से जिलास्तर के प्रमुख अधिकारियों के संबंध भी एक प्रमुख कसौटी बनी है। सीएम मोहन यादव व सीएस अनुराग जैन ने अच्छे व बुरे बर्ताव के कारण निशाने पर आए कई आइएएस के संबंध में बातचीत की है। निगेटिव रिपोर्ट वाले अधिकारियों को मौजूदा ओहदे से हटाकर दूसरी जिम्मेदारी देने पर चार दौर की चर्चा पूरी की जा चुकी है।  पीएचक्यू द्वारा तैयार की गई सूची पर राज्य के डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच एक दौर की मंत्रणा भी हो चुकी पुलिस महकमे में भी खासा बदलाव किया जाना है। कई जिलों के एसपी बदले जा सकते हैं। पीएचक्यू द्वारा तैयार की गई सूची पर राज्य के डीजीपी और मुख्यमंत्री के बीच एक दौर की मंत्रणा भी हो चुकी है। 15 जिलों के एसपी बदल सकते हैं, खंडवा, भिंड, धार, रीवा झाबुआ और दो रेल एसपी सहित 9 अधिकारी ऐसे हैं जो प्रमोट होने के बाद भी एसपी की भूमिका में चर्चा है कि 15 से ज्यादा जिलों के एसपी को इधर से उधर किया जाएगा। इसके अलावा खंडवा, भिंड, धार, रीवा और झाबुआ और दो रेल एसपी सहित 9 अधिकारी ऐसे हैं जो प्रमोट होने के बाद भी एसपी की भूमिका में तैनात है। ऐसे में इन्हें नई जिम्मेदारी मिलना तय है। साथ ही परफॉर्मेंस पर एसपी को बड़े जिलों की कमान मिल सकती है।

एमपी बोर्ड 10वीं-12वीं रिजल्ट की घोषणा 15 अप्रैल से पहले, माध्यमिक शिक्षा मंडल अंतिम चरण में, 16 लाख छात्रों का इंतजार

भोपाल  मध्यप्रदेश में एमपी बोर्ड 10वीं और 12वीं के लाखों छात्रों का इंतजार अब जल्द खत्म होने वाला है। माध्यमिक शिक्षा मंडल इस साल 15 अप्रैल से पहले रिजल्ट जारी करने की तैयारी में है, जबकि संभावित तारीख 7 से 12 अप्रैल के बीच तय हो सकती है। स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि सभी जरूरी प्रक्रियाएं अंतिम चरण में हैं और रिजल्ट पूरी तरह त्रुटिरहित जारी किया जाएगा। इस बार करीब 16 लाख छात्र परीक्षा में शामिल हुए हैं, ऐसे में समय पर परिणाम घोषित कर छात्रों को आगे की पढ़ाई में कोई देरी न हो, यह विभाग की प्राथमिकता है। 16 लाख से ज्यादा छात्र हुए शामिल इस वर्ष प्रदेश में 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में करीब 16 लाख से अधिक छात्र शामिल हुए हैं। इनमें लगभग 9 लाख 7 हजार विद्यार्थी 10वीं और करीब 7 लाख छात्र 12वीं की परीक्षा में बैठे। इतनी बड़ी संख्या को देखते हुए परीक्षा संचालन के लिए प्रदेशभर में 3856 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे। पूरे प्रदेश से बने 100 नकल प्रकरण परीक्षा को नकलमुक्त बनाने के लिए इस बार विशेष व्यवस्थाएं की गई थीं। फ्लाइंग स्क्वॉड, सीसीटीवी निगरानी और प्रश्नपत्र वितरण की वीडियोग्राफी जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इसके बावजूद मुरैना में सबसे ज्यादा 41 नकल के प्रकरण सामने आए, जबकि भोपाल दूसरे स्थान पर रहा, जहां 20 मामले दर्ज किए गए। वहीं, पूरे प्रदेश से करीब 100 नकल प्रकरण बने थे। अंतिम चरण में रिजल्ट की तैयारी स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बताया कि रिजल्ट जारी करने से पहले क्रॉस चेकिंग और वैरिफिकेशन की प्रक्रिया तेजी से चल रही है। विभाग हर स्तर पर जांच कर रहा है ताकि किसी भी तरह की गलती न रह जाए। उन्होंने कहा कि रिजल्ट पूरी तरह “फुलप्रूफ” होना चाहिए, जिससे छात्रों को कोई परेशानी न हो। संभावना है कि अप्रैल के पहले पखवाड़े में परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। एक्सपर्ट की सलाह: तनाव से बचें छात्र परीक्षा के दौरान छात्रों की सेहत को लेकर भी विशेषज्ञों ने अहम सलाह दी है। डॉक्टरों और काउंसलर्स ने अभिभावकों से अपील की है कि वे बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें और उन्हें मानसिक रूप से सहयोग दें। सही दिनचर्या, पर्याप्त नींद और संतुलित आहार से बेहतर प्रदर्शन संभव है। रिजल्ट का ट्रेंड: उतार-चढ़ाव का पैटर्न     2017 में 10वीं का रिजल्ट 49.9% और 12वीं का 67.8% रहा।     2018 में 10वीं 66.54% और 12वीं 68.08% पहुंचा।     2019 में 12वीं का रिजल्ट 72.37% तक गया।     2021 में कोरोना के कारण दोनों कक्षाओं का रिजल्ट 100% रहा।     2023 में 12वीं का रिजल्ट गिरकर 55.28% पर आ गया।     2025 में सुधार दिखा, जहां 10वीं में 76.22% और 12वीं में 74.28% छात्र पास हुए। समय पर रिजल्ट, आगे की पढ़ाई में राहत शिक्षा विभाग का मुख्य उद्देश्य इस बार समय पर रिजल्ट जारी करना है, ताकि छात्र बिना देरी के अगली कक्षा या कोर्स में प्रवेश ले सकें। यदि तय समयसीमा के भीतर परिणाम घोषित हो जाते हैं, तो यह छात्रों और अभिभावकों दोनों के लिए बड़ी राहत होगी।

GMADA की स्कीम, बनेंगी चंडीगढ़ जैसी लग्जरी कोठियां, ₹60 हजार प्रति गज तक पहुंचेगी जमीन की कीमत

चंडीगढ़   सिटी ब्यूटीफुल के नाम से देश- दुनिया में विख्यात चंडीगढ़ जैसा एक और नया शहर बसाने की तैयारियां शुरू हो गई है. पंजाब सरकार ने न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में 309.30 एकड़ जमीन पर लो डेंसिटी आवासीय टाउनशिप विकसित की जाएगी जहां पुराने चंडीगढ़ के VIP सेक्टरों की तर्ज पर बड़ी- बड़ी लग्जरी कोठियां और बंगले बनाए जाएंगे. किसानों को जमीन के बदले प्रति एकड़ 6.24 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।  उन्हें 29 जून तक अपना सहमति पत्र ग्रेटर मोहाली एरिया डेवलपमेंट ऑथोरिटी (GMADA) को देना होगा. इसके बाद, आगामी प्रकिया शुरू की जाएगी. मुल्लांपुर में गरीबदास गांव के पास विकसित होने वाला यह इलाका भीड़- भाड़ से दूर और हरियाली व पर्यावरण के अनुकूल रहेगा।  यह रहेगी प्लॉट की कीमत इस योजना में 500 गज (1 कनाल) और 1,000 गज (2 कनाल) के बड़े प्लॉट मिलेंगे. इनकी कीमत करीब 60 हजार रुपए प्रति गज हो सकती है. आवेदन करते समय कुल कीमत के 10% पैसे का भुगतान करना होगा।  न्यू चंडीगढ़ की खासियतें     हरियाली और पर्यावरण अनुकूल बसाएं जा रहे न्यू चंडीगढ़ शहर को ग्रिड पैटर्न में बसाया जाएगा जिससे ट्रैफिक और प्लानिंग बेहतर रहेगी।      60, 45 और 30 मीटर चौड़ी सड़कों का मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है।      GMADA एक्सप्रेस-वे से बद्दी और आनंदपुर साहिब तक आसान कनेक्टिविटी मिलेगी।      करीब 33% एरिया को हरियाली क्षेत्र के रूप में विकसित किया जाएगा जिसमें पार्क और ओपन स्पेस शामिल हैं।      900 हेक्टेयर में स्पोर्ट्स और मनोरंजन सुविधाएं जैसे स्टेडियम और गोल्फ कोर्स विकसित होंगे।      रिहायशी, मेडिसिटी, एजुकेशन सिटी, ट्रांसपोर्ट टर्मिनल और प्रस्तावित मेट्रो के साथ रोजगार और आवागमन की बेहतर व्यवस्था होगी।  किसानों को मिलेगी सुविधा इस योजना के लिए जमीन देने वालों को लैंड पूलिंग की सुविधा का लाभ मिलेगा. इस पॉलिसी के तहत प्रति एकड़ जमीन के बदले मालिक को 1,600 वर्ग गज आवासीय प्लॉट या 1,000 वर्ग गज आवासीय प्लॉट के साथ 200 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट मिल सकता है. इस प्लॉट में बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलेगी. यदि सरकार जमीन बेचती है या विकसित परियोजना से मुनाफा अर्जित करती है तो जमीन देने वाले किसानों को भी इसका फायदा पहुंचेगा।  मेरा नाम अजय सहरावत है. मीडिया जगत में पिछले 6 साल से काम कर रहा हूँ. बीते साढ़े 5 साल से Haryana E Khabar डिजिटल न्यूज़ वेबसाइट के लिए बतौर कंटेंट राइटर के पद पर काम कर रहा हूँ।  इको सिटी के पास बसेगी सोसाइटी यह स्कीम न्यू चंडीगढ़ (मुल्लांपुर) में मुल्लांपुर गरीबदास गांव के पास बनाई जा रही है। यहां बड़े-बड़े प्लॉट और फार्महाउस जैसे घर बनाए जाएंगे। यानी कम भीड़-भाड़ वाला इलाका होगा। इसका मकसद है कि हरियाली और पर्यावरण का संतुलन बना रहे। GMADA के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि इसे लोग काफी पसंद करेंगे, क्योंकि पहले ही इस इलाके में GMADA की ओर से ईको सिटी-1, ईको सिटी-2 और मेडिसिटी बसाई गई हैं। एक से दो कनाल के होंगे प्लॉट इस स्कीम में 500 गज (1 कनाल) और 1000 गज (2 कनाल) के बड़े प्लॉट मिलेंगे। इनकी कीमत करीब 60 हजार रुपए प्रति गज हो सकती है। यानी 500 गज का प्लॉट लगभग 3 करोड़ तक पड़ सकता है। आवेदन करते समय कुल कीमत का 10% पैसा (EMD) जमा करना होगा। स्कीम में कुल प्लॉटों की संख्या अभी तक क्लियर नहीं है, लेकिन योजना में लगभग 185 से 200 के बीच रहने की उम्मीद है। 6 शहरों की स्टडी की गई लो-डेंसिटी योजना दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, गुरुग्राम, गांधीनगर और लखनऊ में भी है। इन इलाकों की स्टडी भी GMADA की टीम ने की है, ताकि योजना को अच्छे तरीके से पूरा किया जा सके। इसके अलावा GMADA पहले ही न्यू चंडीगढ़ को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित कर रहा है। यहां भी चंडीगढ़ की तरह 17 सेक्टर काटे गए हैं। किसानों को लैंड पूलिंग जमीन मालिकों के पास नकद मुआवजे के अलावा लैंड पूलिंग पॉलिसी का विकल्प भी है। इस पॉलिसी के तहत प्रति एकड़ जमीन के बदले मालिक को 1,600 वर्ग गज आवासीय प्लॉट या 1,000 वर्ग गज के आवासीय प्लॉट के साथ 200 वर्ग गज का कमर्शियल प्लॉट (SCO) मिल सकता है। इसके अलावा पूरा एरिया पहले ही बस चुका है, जिससे इलाके के लोगों का फायदा होगा।  

इंदौर के ट्रिपल लेयर ब्रिज से तीन एनएच मार्गों को मिलेगा रास्ता, पचास हजार वाहन होंगे प्रभावित

इंदौर इंदौर के बायपास पर एमआर-10 जंक्शन पर थ्री लेयर फ्लायओवर का काम 80 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। हालांकि, दो साल में फ्लायओवर का निर्माण पूरा होना था, लेकिन इसमें देरी हुई। अब यह ब्रिज अक्तूबर तक बनकर तैयार होगा। ब्रिज पर देश का सबसे बड़ा पियर कैप बनाया जा रहा है, जिसकी चौड़ाई 27 मीटर रहेगी। इसी पियर कैप के ऊपर गर्डर रखे गए हैं।  इंदौर के एमआर-10 जंक्शन पर ब्रिज बनाने की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि यहां तीन राष्ट्रीय राजमार्ग आकर मिलते हैं। एबी रोड के अलावा इंदौर-अहमदाबाद और इंदौर-नागपुर हाईवे इस जंक्शन से जुड़ते हैं। नागपुर को जोड़ने के लिए इंदौर-हरदा के लिए 25 किलोमीटर लंबा बायपास बनाया गया है। इसका ट्रैफिक अंडरपास से होकर गुजरेगा। वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी इस ब्रिज के निर्माण से हर दिन 50 हजार से ज्यादा वाहन चालकों को फायदा होगा। इसके अलावा इंदौर आने वाले वाहनों की एंट्री आसान हो जाएगी। अभी तक बोगदों के भीतर से वाहनों को आना पड़ता है और इस कारण कई बार ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है, लेकिन अब इससे भी राहत मिलेगी। बेस्ट प्राइस की तरफ के मार्ग से वाहन इंदौर की ओर ब्रिज के नीचे से आ सकेंगे। फ्लायओवर का एक हिस्सा जंक्शन पर बंगाली चौराहे की तरफ बना है, जबकि दूसरे सिरे का निर्माण बेस्ट प्राइस के पास हुआ है। डेढ़ किलोमीटर लंबे इस ब्रिज के नीचे एक और ब्रिज बन चुका है, जिस पर एबी रोड का ट्रैफिक गुजर रहा है। महाराष्ट्र की ओर जाने वाले वाहन इस ब्रिज का उपयोग कर रहे हैं, जबकि अंडरपास को इंदौर-हरदा मार्ग से जोड़ा गया है। अंडरपास बनकर तैयार हो चुका है। अब सड़क निर्माण स्टार चौराहा तक किया जाएगा। इंदौर-हरदा मार्ग का निर्माण भी अंतिम दौर में है। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार, मुंबई के सी लिंक की तर्ज पर ब्रिज पर एस्थेटिक केबल से लाइटिंग की जाएगी, ताकि यह आकर्षक दिखे। यह फ्लायओवर इंदौर की एंट्री का मुख्य मार्ग भी बनेगा। यहां से ज्यादातर वाहन शहर में आ-जा सकेंगे। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि यह प्रदेश का पहला तीन स्तरीय ब्रिज है, जो राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ इंदौर की एंट्री को भी आसान बनाएगा।   

भीषण गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग का फैसला, अब सुबह 6:30 बजे से शुरू होंगी कक्षाएं

पटना  बिहार में बढ़ती गर्मी और लू को देखते हुए शिक्षा विभाग ने छात्रों को बड़ी राहत दी है. माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने आदेश जारी किया है कि राज्य के सभी सरकारी स्कूल अब मॉर्निंग शिफ्ट में चलेंगे. यह नया नियम 6 अप्रैल से लागू होकर 31 मई तक लागू रहेगा. क्या है नया टाइम-टेबल? नए शेड्यूल के मुताबिक, अब स्कूल सुबह 6:30 बजे शुरू हो जाएंगे. आधे घंटे की प्रार्थना के बाद सुबह 7:00 बजे से पढ़ाई शुरू होगी. बच्चों को दोपहर 12:20 बजे छुट्टी दे दी जाएगी. मिड-डे मील के लिए सुबह 9:00 से 9:40 बजे तक का समय तय किया गया है. विभाग ने यह भी कहा है कि जिन स्कूलों में बच्चों की संख्या ज्यादा है, वहां हेडमास्टर दो शिफ्टों में खाना खिला सकते हैं ताकि भीड़ न हो. डीएम को स्पेशल पावर गर्मी की स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने डीएम को भी स्पेशल अधिकार दिए हैं. अगर किसी जिले में गर्मी बहुत ज्यादा बढ़ जाती है या लू का प्रकोप बढ़ता है, तो डीएम अपने स्तर से स्कूल के समय में और भी बदलाव कर सकते हैं. छुट्टियों के बाद फिर बदलेगा समय फिलहाल यह मॉर्निंग शिफ्ट केवल गर्मी की छुट्टियों शुरू होने तक ही लागू रहेगी. जैसे ही गर्मी की छुट्टियां खत्म होंगी और स्कूल दोबारा खुलेंगे, समय वापस पुराना वाला हो जाएगा. यानी तब स्कूल सुबह 9:30 बजे से शाम 4:00 बजे तक चलेंगे. इस संबंध में सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (DEO) को जरूरी निर्देश भेज दिए गए हैं.

ऑनलाइन हाजिरी में ‘ऑन ड्यूटी’ का खेल पड़ा भारी, शिक्षा विभाग ने दी वेतन कटौती और सख्त कार्रवाई की चेतावनी

नवादा  जिले में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति में बड़ी लापरवाही सामने आई है। इस मामले में जिला शिक्षा विभाग ने 386 शिक्षक-शिक्षिकाओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिससे शिक्षकों में हड़कंप मच गया है। डीपीओ स्थापना शिव कुमार वर्मा द्वारा जारी पत्र के अनुसार, 30 मार्च को कई शिक्षकों ने अटेंडेंस स्टेटस कॉलम में 'प्रेजेंट' और अटेंडेंस टाइप में 'मार्क ऑन ड्यूटी' दिखाया। हालांकि, 'मार्क ऑन ड्यूटी रीजन' कॉलम में या तो खाली छोड़ा गया था या 'डेपुटेशन' और 'ऑफिस वर्क' दर्ज किया गया था। कटेगा शिक्षकों का वेतन विभाग ने इसे विभागीय निर्देशों का उल्लंघन और मनमानी माना है। पत्र में स्पष्ट किया गया है कि ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर सही उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऑनलाइन उपस्थिति व्यवस्था को पारदर्शिता और अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित तीन दिनों के भीतर स्पष्टीकरण प्राप्त नहीं होता है, तो 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के सिद्धांत पर वेतन कटौती की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों में काफी खलबली मच गई है। कारण बताओ नोटिस जारी शिक्षा विभाग को जैसे ही या जानकारी मिली उनके द्वारा तुरंत ही सभी लोगों को कारण बताओं नोटिस थमा दिया गया है। गुरुवार को नोटिस भेज कर लोगों को या कहा गया है कि तीन दिन के अंदर सभी लोग नोटिस का जवाब भी दे। इससे पूर्व भी शिक्षा विभाग में 500 से अधिक शिक्षकों पर कार्रवाई कर चुके थे और एक बार फिर से नवादा में शिक्षकों की गजब की कारनामा देखने को मिला है। शिक्षा विभाग अलर्ट ध्यान रहे कि हाल के दिनों में शिक्षकों की ओर से हाजिरी बनाने को लेकर कुछ छेड़छाड़ का मामला बांका में अंजाम दिया गया था। ऐसी ही एक घटना पूर्व में जमुई में हुई थी। उसके बाद शिक्षा विभाग ने इस पर त्वरित एक्शन लेते हुए शिक्षकों पर कार्रवाई की है। हालांकि, बिहार के अन्य स्कूलों में शिक्षक ऑनलाइन अपनी हाजिरी बना रहे हैं। उन्हें किसी प्रकार की दिक्कत नहीं हो रही है। हालांकि, इंटरनेट कनेक्शन कई स्कूलों में ठीक नहीं रहने की वजह से शिक्षक कभी छत पर जाकर और कभी पेड़ का सहारा लेकर हाजिरी बनाते हैं। वैसी स्थिति को भी शिक्षा विभाग को समझना होगा। ई- शिक्षाकोष से छेड़छाड़ के मामले को गंभीरता से लिया गया है। आशुतोष कुमार पांडेय

धानापुर के किसानों की मेहनत स्वाहा, अब प्रशासन से उचित मुआवजे की मांग

चंदौली. जिले के धानापुर थाना क्षेत्र में शुक्रवार सुबह एक बड़ा अग्निकांड सामने आया, जिसमें 10 बीघा से अधिक गेहूं की खड़ी फसल जलकर पूरी तरह नष्ट हो गई. यह घटना पगही, विझवल और कुसुम्ही गांव के सिवान में स्थित हरदेव पीजी कॉलेज के पीछे हुई, जिससे क्षेत्र के किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा. बता दें कि शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे अचानक आग लग गई और देखते ही देखते उसने विकराल रूप धारण कर लिया. तेज हवा के कारण आग तेजी से खेतों में फैलती चली गई. स्थानीय ग्रामीण और किसान तुरंत मौके पर पहुंचे और अपने स्तर पर आग बुझाने में जुट गए. सूचना मिलते ही धानापुर थाना प्रभारी त्रिवेणी लाल सेन पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे. दमकल विभाग को भी सूचना दी गई, लेकिन उनके पहुंचने से पहले ही ग्रामीणों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया. इस हादसे में विझवल और पगही गांव के किसान रामलाल यादव, लालमन यादव, प्यारेलाल यादव, मुकेश सिंह यादव, नंदलाल राम और डॉ. कुमार राम सहित कई किसानों की फसल जलकर खाक हो गई. बताया जा रहा है कि कुल मिलाकर 10 बीघा से अधिक गेहूं की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है. घटना के बाद प्रभावित किसानों के सामने अब रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है. समाजसेवी केवट बाबूलाल बिंद ने जिला प्रशासन से मांग की है कि तत्काल नुकसान का सर्वे कराकर किसानों को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे इस संकट से उबर सकें.

दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडल

रायपुर दुर्ग बना जल संरक्षण का मॉडल दुर्ग जिले ने जल संरक्षण के क्षेत्र में एक उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश ही नहीं, देश के लिए भी एक मिसाल पेश की है। कलेक्टर  अभिजीत सिंह के मार्गदर्शन में संचालित “मोर गांव मोर पानी महाभियान” अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत निर्मित आवासों में मात्र 15 दिनों के भीतर 32,058 रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं का निर्माण कर जिले ने एक अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के नेतृत्व में यह अभियान सुनियोजित ढंग से आगे बढ़ाया गया। “एकेच गोठ, एकेच बानी, बूंद-बूंद बचाबो पानी 2.0” थीम के साथ 13 मार्च 2025 को इसकी शुरुआत हुई। अभियान के प्रथम चरण में प्रधानमंत्री आवास हितग्राहियों के घरों में मात्र दो घंटे के भीतर 1,764 सोक पिट का निर्माण कर गोल्डन बुक में नाम दर्ज कराया गया। यह उपलब्धि अपने आप में प्रशासनिक समन्वय और जनसहभागिता का उत्कृष्ट उदाहरण बनी। द्वितीय चरण में 08 दिसंबर को 12,418 सोक पिट का निर्माण किया गया, जिससे कुल 14,182 सोक पिट स्वप्रेरणा से तैयार हुए। इसके साथ ही “मोर गांव मोर पानी” अभियान के अंतर्गत 23,889 कंटूर ट्रेंच एवं वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच का निर्माण भी पूर्ण किया गया है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के माध्यम से इन कार्यों में व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित की गई, जिसके परिणामस्वरूप अब तक 32,058 जल संरक्षण संरचनाओं की एंट्री पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है। इस अभियान की सबसे बड़ी विशेषता ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने स्वयं आगे बढ़कर श्रमदान किया। यही कारण है कि यह पहल केवल एक सरकारी योजना तक सीमित न रहकर जन आंदोलन के रूप में स्थापित हो गई है। प्रत्येक प्रधानमंत्री आवास में निर्मित रेन वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं न केवल वर्तमान जल आवश्यकताओं की पूर्ति कर रही हैं, बल्कि भविष्य की जल सुरक्षा भी सुनिश्चित कर रही हैं। अभियान के तहत विभिन्न प्रकार की जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें कम लागत के 24 कार्य, 15 बोरवेल रिचार्ज, 03 चेकडैम, 5,875 कंटूर ट्रेंच, 07 गली प्लग, 03 नाला बंड, 18 ओपन वेल रिचार्ज (डगवेल), 07 परक्यूलेशन तालाब, 537 रिचार्ज पिट, 05 रिचार्ज शाफ्ट, 817 रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं, 6,676 सोक पिट, 09 टैंक, 48 ग्राम तालाब तथा 18,014 वाटर एब्जॉर्प्शन ट्रेंच शामिल हैं। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा जल का संरक्षण कर भूजल स्तर में सुधार लाने के साथ-साथ स्थायी जल प्रबंधन को बढ़ावा मिल रहा है। जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और गांवों में अधिक से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाकर इस महाभियान में सक्रिय भागीदारी निभाएं, ताकि “हर घर जल संचय” का लक्ष्य साकार हो सके।