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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का अवलोकन

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर में  निर्माणाधीन जगदेव राम उरांव कल्याण आश्रम चिकित्सालय का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने कार्य की गति और निर्धारित मानकों के अनुरूप हो रहे निर्माण पर संतोष जताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल के पूर्ण होने के बाद यह क्षेत्र के लोगों के लिए जीवनरेखा साबित होगा और मरीजों को यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की बेहतर सेवाएं उपलब्ध होंगी।   इस अत्याधुनिक चिकित्सालय का निर्माण एनटीपीसी लारा के सीएसआर फंड से लगभग 35 करोड़ 53 लाख रुपये की लागत से किया जा रहा है। अस्पताल का भूमिपूजन 7 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री  साय द्वारा किया गया था। वर्तमान में इस अस्पताल का निर्माण कार्य तेजी से प्रगति पर है। प्रस्तावित 6 मंजिला भवन में ग्राउंड फ्लोर सहित चार मंजिलों का ढलाई कार्य पूर्ण हो चुका है।  अस्पताल के ग्राउंड फ्लोर में इमरजेंसी सेवाएं, प्रथम तल पर ओपीडी, द्वितीय एवं तृतीय तल पर वार्ड, चतुर्थ तल पर आईसीयू, पंचम तल पर ऑपरेशन थियेटर संचालित होगा। यह चिकित्सालय अत्याधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित होगा। 100 बिस्तरों वाले इस अस्पताल में 15 ओपीडी, 4 आईसीयू, 4 ऑपरेशन थियेटर, फिजियोथेरेपी, पैथोलॉजी लैब, सीटी स्कैन, डायलिसिस, एक्स-रे, इमरजेंसी वार्ड, एमआरआई, ईसीजी सहित अन्य आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जूदेव,  भरत सिंह, कृष्ण कुमार राय,  विजय आदित्य प्रताप सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधिगण एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत का शानदार प्रदर्शन, राज्य को दिलाया लगातार चौथा रजत

रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 के अंतर्गत तैराकी प्रतियोगिताओं का आज समापन हो गया। प्रतियोगिता में देशभर के खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जिसमें पुरुष वर्ग में कर्नाटक ने 123 अंकों के साथ ओवरऑल टीम चौंपियनशिप का खिताब अपने नाम किया। वहीं असम 69 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और ओडिशा 31 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा। महिला वर्ग में ओडिशा ने 102 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन करते हुए चौंपियन बनने का गौरव हासिल किया, जबकि कर्नाटक 50 अंकों के साथ प्रथम रनरअप और मेजबान छत्तीसगढ़ 38 अंकों के साथ द्वितीय रनरअप रहा। प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की तैराक अनुष्का भगत ने लगातार चौथा रजत पदक जीतकर प्रदेश का मान बढ़ाया। उन्होंने महिला 50 मीटर ब्रेस्ट स्ट्रोक स्पर्धा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए यह उपलब्धि हासिल की। उनके इस प्रदर्शन से छत्तीसगढ़ की पदक स्थिति मजबूत हुई है और राज्य के खिलाड़ियों में उत्साह का संचार हुआ है। आज आयोजित विभिन्न स्पर्धाओं में भी खिलाड़ियों ने दमदार प्रदर्शन किया। पुरुष 100 मीटर फ्रीस्टाइल में कर्नाटक के धोनिश ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि असम के फर्मिनो एमोन लालुंग ने रजत और कर्नाटक के कीर्थन शरथ ने कांस्य पदक प्राप्त किया। महिला 100 मीटर फ्रीस्टाइल में ओडिशा की रितिका मिन्ज ने स्वर्ण पदक जीता, वहीं उनकी ही राज्य की कृष्णा प्रिया नायक ने रजत और असम की वायोलिना क्रो ने कांस्य पदक हासिल किया। पुरुष 50 मीटर बैकस्ट्रोक में असम के निबिर निलिम क्रो ने स्वर्ण, कर्नाटक के धोनिश ने रजत और ओडिशा के राजेश सोरेन ने कांस्य पदक जीता। महिला 50 मीटर बैकस्ट्रोक में ओडिशा की अंजलि मुंडा ने स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि छत्तीसगढ़ की अनुष्का भगत ने रजत और कर्नाटक की मेघांजली ने कांस्य पदक अपने नाम किया। रिले स्पर्धाओं में पुरुष 4Û100 मीटर मेडले में कर्नाटक ने स्वर्ण, असम ने रजत और त्रिपुरा ने कांस्य पदक जीता, वहीं महिला 4Û100 मीटर मेडले में ओडिशा ने स्वर्ण, त्रिपुरा ने रजत और गुजरात ने कांस्य पदक हासिल किया। खेलो इंडिया खेलो ट्राइबल प्रतियोगिता 2026 में अब तक छत्तीसगढ़ ने कुल 8 पदक 1 स्वर्ण, 4 रजत और 3 कांस्य अपने नाम किए हैं और इसी के साथ राज्य पदक तालिका में छठे स्थान पर बना हुआ है। प्रतियोगिता में कर्नाटक और ओडिशा का दबदबा देखने को मिला, जबकि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने भी शानदार प्रदर्शन कर भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं।

कांकेर ऑपरेशन में बड़ी सफलता, 3 नक्सलियों ने डाली हथियार, 14 की तलाश तेज

बड़गांव कांकेर जिले में माओवादियों के लगातार आत्मसमर्पण से संगठन को बड़ा झटका लगा है। शनिवार को पखांजूर क्षेत्र के परतापुर थाने में एरिया कमेटी सदस्य राधिका कुंजाम, संदीप कड़ियाम और रैनू पद्दा ने समर्पण कर दिया है। इनके पास से दो एसएलआर और एक 303 राइफल मिली है। बीते चार दिनों में नौ माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं। पुलिस के सामने शेष बचे 14 माओवादियों का समर्पण करवाना सबसे बड़ी चुनौती है। बड़े चेहरों का समर्पण पुलिस के लिए बड़ी चुनौती सूत्रों के अनुसार मिलिट्री कंपनी की सदस्य व आठ लाख की इनामी स्वरूपा व अन्य समर्पण ने संगठन को अंदर तक प्रभावित किया है। हालांकि स्टेट कमेटी सदस्य रूपी और डिविजनल कमेटी सदस्य चंदर के आत्मसमर्पण की चर्चाएं लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन अब तक दोनों ने हथियार नहीं डाले हैं। जानकारी के मुताबिक रूपी राजनांदगांव-कांकेर-बैलाडीला डिवीजन के माओवादी विजय रेड्डी की पत्नी है और वह अब भी जंगलों में सक्रिय रहकर संगठन को संभाल रही है। प्रशासन की अपील और आत्मसमर्पण नीति का असर पखांजूर एडिशनल एसपी राकेश कुर्रे का कहना है कि आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों से मिली जानकारियों के आधार पर शेष माओवादियों से संपर्क साधने और उन्हें मुख्यधारा में लाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। अधिकारियों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही शेष बचे माओवादी भी समर्पण कर देंगे। बस्तर रेंज के आइजी सुंदरराज पी. ने शेष माओवादियों से भी हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की है। पूर्व माओवादी स्वरूपा के आत्मसमर्पण के बाद अब उनके हाथ से लिखा हुआ मार्मिक पत्र इंटरनेट मीडिया पर तेजी से प्रसारित हो रहा है। यह पत्र गोंडी भाषा में लिखा गया है, जिसमें स्वरूपा ने अपने पूर्व साथियों से मुख्यधारा में लौटने की अपील की है। आंकड़ों में आत्मसमर्पण और माओवाद का इतिहास सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में सुरक्षा बल के लगातार अभियान और सरकार की आत्मसमर्पण नीति के दबाव के चलते माओवादी संगठन के सदस्य मुख्यधारा में लौट रहे हैं। कांकेर सहित बस्तर के सात जिलों में जनवरी 2024 से मार्च 2026 तक कुल 2,756 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है। कांकेर जिले में माओवाद का प्रभाव 1980 के दशक के अंत और 1990 के दशक की शुरुआत में पड़ोस के आंध्र प्रदेश और गढ़चिरौली (महाराष्ट्र) से आए माओवादियों के माध्यम से शुरू हुआ। जिले की पहाड़ियां और घने जंगल माओवादियों के लिए सुरक्षित पनाहगाह और प्रशिक्षण शिविर के रूप में इस्तेमाल होते रहे हैं। जिले में अब तक की प्रमुख मुठभेड़ें मार्च 2025 – बीजापुर-कांकेर सीमा पर हुई मुठभेड़ में 30 माओवादी ढेर। अप्रैल 2025 – कांकेर के छोटे बेठिया थाना क्षेत्र में 29 माओवादी मारे गए। अगस्त 2025 – कांकेर-बस्तर सीमा पर मंडा पहाड़ के पास मुठभेड़ में तीन माओवादी ढेर। सितंबर 2024 – कांकेर के छिंदखड़क जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में तीन माओवादी मारे गए। फरवरी 2026 – कांकेर के जंगलों में हुई मुठभेड़ में दो सक्रिय माओवादी मारे गए।

कृषि एवं विज्ञान में नवाचार विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन का किया शुभारंभ

भोपाल  उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने कृषि महाविद्यालय रीवा में विकसित भारत 2047 के लिए विज्ञान और कृषि में नवाचार विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन शुभारंभ किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती हमारी अर्थव्यवस्था का आधार है। हम वर्तमान में विपुल अन्न और फल सब्जियों का उत्पादन कर रहे हैं। उत्पादन बढ़ाने के लिए हमने खाद और कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग किया है, जिसके कारण धरती माता बीमार हो गई हैं। धरती माता को स्वस्थ रखना और भावी पीढ़ी को स्वस्थ जीवन देने के लिए प्राकृतिक खेती इस समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है । गोपालन पर आधारित प्राकृतिक खेती से ही हमें अच्छे स्वास्थ्य की नेमत मिलेगी। हर किसान अपनी कुल जमीन के दस प्रतिशत भाग पर प्राकृतिक विधि से अनाज फल और सब्जी का उत्पादन करें जिससे कम से कम उसके परिवार को रसायन रहित पौष्टिक आहार मिल सके। सेमिनार का आयोजन कृषि महाविद्यालय, जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर, एकेएस यूनिवर्सिटी तथा श्याम दुलारे तिवारी शिक्षा एवं शोध संस्थान द्वारा किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए लगातार किसानों को प्रोत्साहित कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही देश के गृहमंत्री  अमित शाह जी ने बसामन मामा गौ अभ्यारण्य में प्राकृतिक खेती के प्रकल्प का शुभारंभ किया। उन्होंने प्राकृतिक खेती के लिए किया जा रहे प्रयासों की सराहना की। कृषि वैज्ञानिकों और अनुसंधानकर्ताओं के सामने आज सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अन्न उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ ऐसी किस्म का विकास करें जिससे माटी की उर्वरा शक्ति बनी रहे, धरती बीमार न हो और पौष्टिक अनाज से हम सब भी स्वस्थ रहें। समारोह में सांसद  जनार्दन मिश्र ने कहा कि वर्ष 2047 की अनुमानित जनसंख्या को ध्यान में रखकर प्राकृतिक खेती तथा अनाज उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित करना होगा। रासायनिक खाद और कीटनाशकों के स्थान पर जैविक विधि से बनाई गई खाद तथा कीटनाशकों का उपयोग करना होगा, जिससे धरती का स्वास्थ्य और मानव के लिए हितकारी जीवाणु, कीट और पक्षी रह सकें। सेमिनार में जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरू प्रोफेसर पी.के. मिश्रा ने कहा कि कोरोना काल ने हमें प्रकृति की ओर लौटने और प्राकृतिक खेती को अपनाने के स्पष्ट संकेत दिए हैं। हमारा अस्तित्व तभी तक है जब तक हम प्रकृति के अनुसार आचरण करेंगे। निर्माण कार्यों, बड़े बांध, खनन परियोजनाओं से वनों का विनाश होने के साथ-साथ खेती की जमीन घट रही है। साथ ही पूरी दुनिया में जल संकट की आहट है। युवा, कृषि वैज्ञानिक और शोधकर्ताओं के कंधों पर इन संकटों को दूर करने की जिम्मेदारी है। हमारे पूर्वजों ने बहुत सोच समझकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से खेती के साथ गोपालन को जोड़ा और धरती तथा गौ को माता के समान आदर दिया। हमें पुन: उसी तरफ चलने की आवश्यकता है। सेमिनार में उप मुख्यमंत्री ने कृषि महाविद्यालय की पत्रिका हरियाली, प्राकृतिक खेती की पुस्तिका तथा गौ आधारित प्राकृतिक खेती एवं 17 शोध पत्रों के संकलन का विमोचन किया। सेमिनार में एकेएस विश्वविद्यालय के चांसलर  अनंत सोनी ने ऊर्जा संरक्षण तथा खेती में नवाचार के संबंध में विचार व्यक्त किए। कृषि महाविद्यालय के डीन डॉ. एसके त्रिपाठी ने प्राकृतिक खेती के लिए महाविद्यालय में किए जा रहे शोध की जानकारी दी। सेमिनार में प्रोफेसर डॉ. आरके तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। सेमिनार में  एके जैन, डॉ. एसके पाण्डेय, प्रोफेसर एके शर्मा तथा वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक एवं शोधकर्ता शामिल हुए। सेमिनार में आठ राज्यों के कृषि वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।  

मुख्यमंत्री साय ने जशपुर सर्किट हाउस में मातृत्व वन का किया लोकार्पण

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज जशपुर सर्किट हाउस परिसर में विकसित मातृत्व वन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि मातृत्व वन न केवल हरित क्षेत्र के रूप में विकसित होगा, बल्कि यह प्रकृति के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का एक सशक्त प्रतीक भी है और आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण एवं जागरूकता का केंद्र बनेगा। उल्लेखनीय है कि जशपुर मंडल द्वारा विकसित मातृत्व वन में लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। इस अवसर पर ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया, जिससे प्रकृति और परिवार के बीच भावनात्मक संबंध को और अधिक सुदृढ़ करने का संदेश दिया गया। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने अपने संबोधन में कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ने का एक सार्थक प्रयास कर रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र के विस्तार में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को भी मजबूत करेंगी। मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीताअशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि भविष्य में औषधीय उपयोग एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समाज और पर्यावरण के लिए प्रेरणादायक बताया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अध्यक्ष  रामप्रताप सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष  सालिक साय, नगर पालिका अध्यक्ष  अरविंद भगत, नगर पालिका उपाध्यक्ष  यश प्रताप सिंह जूदेव, जिला पंचायत उपाध्यक्ष  शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, जनपद पंचायत अध्यक्ष  गंगाराम भगत,  विजय आदित्य सिंह जूदेव सहित जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026: निकिता ने रचा इतिहास, भारोत्तोलन में कुल 160 किलोग्राम उठाकर छत्तीसगढ़ को दिलाया पहला स्वर्ण

रायपुर खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में छत्तीसगढ़ की बेटी निकिता ने राज्य को पहला स्वर्ण पदक दिलाकर इतिहास रच दिया है। राजधानी रायपुर स्थित पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में निकिता ने महिला 77 किलोग्राम भारोत्तोलन वर्ग में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए कुल 160 किलोग्राम वजन उठाकर प्रथम स्थान हासिल किया। प्रतियोगिता में निकिता ने स्नैच में 70 किलोग्राम तथा क्लीन एंड जर्क में 90 किलोग्राम वजन उठाया। दोनों ही वर्गों में उन्होंने संतुलित और प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। इस शानदार जीत के साथ उन्होंने न केवल स्वर्ण पदक अपने नाम किया, बल्कि छत्तीसगढ़ को खेलों में मजबूत शुरुआत भी दिलाई। प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर ओडिशा की मती जानी रहीं, जिन्होंने कुल 126 किलोग्राम वजन उठाया, जबकि तीसरा स्थान असम की जॉय पाटिर को मिला, जिनका कुल प्रदर्शन 118 किलोग्राम रहा। निकिता की इस उपलब्धि से पूरे राज्य में खुशी की लहर दौड़ गई है। खेल प्रेमियों और अधिकारियों ने उनकी मेहनत, समर्पण और आत्मविश्वास की सराहना की है। यह जीत छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी और आने वाले मुकाबलों में राज्य के खिलाड़ियों का मनोबल और बढ़ाएगी। खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में देशभर के जनजातीय प्रतिभागी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में निकिता का यह स्वर्ण पदक न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि छत्तीसगढ़ के खेल इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दर्ज हो गया है।

Rajasthan IPS Nitya: सादगी से जीता दिल, चौकी छोड़ जमीन पर खड़े होकर लिया सम्मान

जोधपुर. राजस्थान पुलिस की युवा और तेजतर्रार आईपीएस अधिकारी पीडी नित्या इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा के केंद्र में हैं। जोधपुर ग्रामीण एसपी का पदभार ग्रहण करने के बाद शुक्रवार को वे पहली बार एक थाने के निरीक्षण पर पहुँचीं। लेकिन दौरे की चर्चा निरीक्षण से ज्यादा उनके उस 'अंदाज' की है, जिसने पुलिसिया तामझाम की दीवार को ढहा दिया। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में देखा जा सकता है कि कैसे एक महिला एसपी ने वीवीआईपी कल्चर को दरकिनार कर अपने जवानों के साथ जमीन पर खड़े होकर 'गार्ड ऑफ ऑनर' स्वीकार किया। प्रोटोकॉल का 'कारपेट' और वो लकड़ी की 'चौकी' आमतौर पर जब भी कोई बड़ा पुलिस अधिकारी थाने के दौरे पर आता है, तो उसके स्वागत के लिए रेड कारपेट बिछाया जाता है। सलामी (Guard of Honour) लेने के लिए एक विशेष लकड़ी की चौकी (Podium) रखी जाती है, जिस पर खड़े होकर अधिकारी जवानों की सलामी लेते हैं। क्या हुआ अलग: एसपी पीडी नित्या जैसे ही अपने सरकारी वाहन से उतरीं, उन्होंने बिछाए गए कारपेट पर चलने के बजाय कच्ची जमीन से होकर सलामी स्थल तक पहुंचना बेहतर समझा। पैर से सरकाई परंपरा: सलामी स्थल पर उनके लिए लकड़ी की चौकी रखी गई थी। लेकिन नित्या ने उसे अपने पैर से एक तरफ सरका दिया और नीचे जमीन पर ही जवानों के बिल्कुल बराबर खड़े होकर सलामी ली। जवानों के बराबर खड़ी होकर दिया बड़ा संदेश एसपी नित्या का यह कदम केवल एक क्रिया नहीं, बल्कि एक गहरा संदेश था। पैर से उस चौकी को सरकाना इस बात का प्रतीक था कि बेमतलब के तामझाम और ब्रिटिश काल से चली आ रही 'दूरी' वाली परंपराएं अब मायने नहीं रखतीं। समानता का भाव: जवानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जमीन पर खड़ा होना यह दर्शाता है कि पुलिसिंग में अब 'साहब कल्चर' के बजाय 'टीम वर्क' और 'समानता' को प्राथमिकता दी जा रही है। वहां मौजूद हर पुलिसकर्मी एसपी के इस सादगी भरे व्यवहार से दंग रह गया। शेरगढ़ थाने का पहला निरीक्षण: अपराध नियंत्रण पर फोकस एसपी ने शेरगढ़ थाने का गंभीरता से जायजा लिया। आईपीएस इंदिरा देवी और सीआई बुद्धाराम ने उनका स्वागत किया। दस्तावेज और रिकॉर्ड: एसपी ने अपराध रिकॉर्ड और दस्तावेजों के संधारण (Maintenance) की बारीकी से जांच की। प्राथमिकताएं: उन्होंने मादक पदार्थ (Drugs) की रोकथाम और महिला सशक्तिकरण को अपनी प्राथमिकता बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराधियों में भय और आमजन में विश्वास तभी पैदा होगा जब पुलिस सक्रिय और संवेदनशील होगी। पुरानी जीप और महिला बैरक: समस्याओं का सुना दुखड़ा निरीक्षण के दौरान थाने की जमीनी समस्याओं पर भी चर्चा हुई। पुलिसकर्मियों ने एसपी को बताया कि थाने में जवानों की कमी है। जर्जर संसाधन: थाने की पुरानी जीप और महिला पुलिसकर्मियों के लिए अलग बैरक की अनुपलब्धता जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए। आश्वासन: एसपी पीडी नित्या ने इन समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुना और जल्द समाधान का भरोसा दिलाया। उन्होंने जवानों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने की बात कही। सोशल मीडिया पर 'तारीफों' का सैलाब जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, लोग एसपी पीडी नित्या की तुलना बॉलीवुड फिल्म 'सिंघम' के किरदारों से करने लगे। नेटिजन्स का कहना है कि राजस्थान को ऐसे ही अधिकारियों की जरूरत है जो तामझाम के बजाय काम और अपने मातहतों के सम्मान पर ध्यान दें।

2 अप्रैल की सुनवाई से पहले हाईकोर्ट जजों ने भोजशाला की जमीनी हकीकत परखी

धार शहर की ऐतिहासिक भोजशाला से जुड़े प्रकरण में मप्र हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शनिवार को दोपहर में आकस्मिक रूप से स्थल का निरीक्षण किया। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला एवं न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच धार पहुंचे और लगभग एक घंटे तक भोजशाला परिसर का बारीकी से अवलोकन किया बाहरी और आंतरिक परिसर का लिया जायजा इस दौरान न्यायमूर्तिगण ने भोजशाला के बाहरी एवं आंतरिक दोनों परिसरों की स्थिति और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। सर्वे की सारी प्रक्रिया के बारे में सूक्ष्मता से जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर, एसपी सहित प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। आयोजनों और सर्वे की ली जानकारी मिली जानकारी के अनुसार न्यायमूर्तिगण ने परिसर में होने वाले मंगलवार और शुक्रवार के आयोजनों की जानकारी भी ली, कहां और किस प्रकार आयोजन होते हैं, इसकी विस्तृत जानकारी अधिकारियों से प्राप्त की। इंदौर खंडपीठ न्यायमूर्तिगण ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए सर्वे के संबंध में भी अधिकारियों से स्थानीय जानकारी ली। एएसआइ के अधिकारी ने मौके पर उपस्थित रहकर पूरी स्थिति से अवगत कराया। 16 मार्च को कहा था विवादित स्थल खुद देखेंगे बता दें कि ‘हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस’ की याचिका पर इंदौर हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसमें भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को स्पष्ट किया जाना है। प्रकरण में गत 16 मार्च को हुई सुनवाई के दौरान इंदौर खंडपीठ ने सभी पक्षों को सुनने के दौरान विवादित स्थल का स्वयं निरीक्षण करने की बात कही थी। इसी क्रम में करीब 12 दिन बाद न्यायाधीशों ने भोजशाला का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। शनिवार दोपहर लगभग 1:52 बजे न्यायाधीशों का वाहनों का काफिला भोजशाला परिसर पहुंचा और करीब 2:50 बजे तक निरीक्षण जारी रहा। इसके बाद वाहनों का काफिला वापस रवाना हो गया। इस मौके पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा व एसपी मयंक अवस्थी मौजूद रहे। आगे होगी नियमित सुनवाई गौरतलब है कि आगामी 2 अप्रैल से इस मामले में नियमित सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में न्यायमूर्तिगण का यह स्थल निरीक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मौके का प्रत्यक्ष अवलोकन उन्हें वास्तविक स्थिति समझने में सहायक होगा और आगे की सुनवाई में यह एक मजबूत आधार बन सकता है। पहले क्या हुआ था धार स्थित भोजशाला में 22 मार्च 2024 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वैज्ञानिक और तकनीकी आधार पर सर्वे कार्य शुरू किया गया। यह सर्वे लगातार 98 दिनों तक चला। जुलाई 2024 में सर्वे रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत कर दी गई थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के कारण आगे की कार्रवाई लंबित रही। वर्ष 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा उक्त रोक हटाए जाने के बाद अब मामले में आगे की प्रक्रिया का रास्ता साफ हो गया है।

Avalanche Tragedy: लद्दाख में शहीद हुआ नालंदा का जवान, अंतिम संस्कार में उमड़ी भीड़

नूरसराय/नालंदा. देश की सरहदों की रक्षा करते हुए बिहार के नालंदा जिले के एक वीर सपूत ने अपने प्राण न्योछावर कर दिए। नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र के मोकरमपुर मिर्चायगंज निवासी जेसीओ सुमन कुमार सिंह उर्फ पंकज (45) लद्दाख में ड्यूटी के दौरान हिमस्खलन (एवलांच) की चपेट में आ गए थे। इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। जैसे ही देर रात उनका पार्थिव शरीर गांव पहुंचा, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। बर्फ में दबने से बिगड़ी हालत, इलाज के दौरान मौत जानकारी के अनुसार, 26 मार्च को लद्दाख में तैनाती के दौरान अचानक आए भीषण हिमस्खलन में सुमन कुमार सिंह बर्फ के नीचे दब गए। सेना के बचाव दल ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल लखनऊ स्थित आर्मी अस्पताल में भर्ती कराया। जहां 27 मार्च को डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्होंने दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि वे पहले से पीलिया और ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी जूझ रहे थे। परिवार का सहारा थे सुमन, सेना से जुड़ा है घराना सुमन कुमार सिंह अपने परिवार के मजबूत स्तंभ थे। वे दो भाइयों में बड़े थे, जबकि उनके छोटे भाई वर्तमान में सीआईएसएफ में कार्यरत हैं। अपने पीछे वे पत्नी नीलम सिंह, दो बेटियां स्नेहा और सलोनी तथा दो बेटे अंश राज और यशराज छोड़ गए हैं। बड़ी बेटी इंटर और छोटी बेटी मैट्रिक की छात्रा है। पिता के बलिदान की खबर मिलते ही परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ‘अमर रहें’ के नारों के बीच दी गई अंतिम विदाई शहीद का पार्थिव शरीर जैसे ही गांव पहुंचा, पूरा इलाका ‘शहीद सुमन कुमार अमर रहें’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों से गूंज उठा। आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए उमड़ पड़े। प्रशासन और सेना के अधिकारियों की मौजूदगी में बाढ़ के उमानाथ घाट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। मां की आंखें नम, आखिरी बातचीत को किया याद शहीद की मां ने बताया कि 13 मार्च को बेटे से आखिरी बार बात हुई थी। उसने कहा था, “आप चंडीगढ़ चली जाइए, बच्चों का ख्याल रखिएगा।” उन्होंने बताया कि बेटे ने दवा भी मंगवाकर दी थी और खुद का ख्याल रखने को कहा था। मंत्री श्रवण कुमार ने दी श्रद्धांजलि बलिदान की सूचना मिलते ही बिहार सरकार के ग्रामीण विकास एवं परिवहन मंत्री श्रवण कुमार शहीद के घर पहुंचे और श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि देश ने एक वीर योद्धा खोया है, लेकिन हमें उनके बलिदान पर गर्व है।

CM का मेगा ऐलान: अब हर घर पहुंचेगा नर्मदा का पानी 24×7, ₹1356 करोड़ की योजना लॉन्च

इंदौर  शहर में बढ़ती पानी की जरूरत पूरी करने की कवायद शुरू होने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को 1356 करोड़ की नर्मदा चतुर्थ परियोजना का दशहरा मैदान में भूमिपूजन करेंगे। पेयजल व्यवस्था के लिए टनल निर्माण, क्लोरीनेशन सिस्टम भी बनेगा। सीएम सिरपुर में 20 एमएलडी के एसटीपी प्लांट का भी लोकार्पण करेंगे। वर्ष 2029 से इंदौर को चौथे चरण का पानी देने की योजना है। परियोजना के संबंध में भाजपा कार्यालय में नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, महापौर पुष्यमित्र भार्गव, एमआइसी सदस्य अभिषेक शर्मा आदि ने मीडिया को जानकारी दी। 24 घंटे पानी की सप्लाई और 29 गांवों में बिछेगी पाइपलाइन इंदौर महापौर भार्गव ने बताया कि नर्मदा के चौथे चरण की योजना पूरी होने से शहर में करीब 900 एमएलडी पानी की सप्लाई होगी। अमृत 2.0 योजना के तहत इस परियोजना से शहर में 24 घंटे जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। 29 गांवों के 10 वार्ड में पाइप लाइन बिछाई जाएगी। दो लाख से ज्यादा नए नल कनेक्शन से पानी सह्रश्वलाई होगा। 40 नई टंकियों का निर्माण कर जल वितरण होगा। चौथे चरण में यशवंत सागर की क्षमता 30 से बढ़ाकर 45 एमएलडी कर रहे हैं। पैकेज 2     पैकेज-2 के तहत वांचू पाइंट से राऊ सर्कल तक 2235 एमएम की 39 किमी लंबी ग्रेविटीमेन पाइपलाइन बिछाकर तीन जगह 2870 मीटर लंबाई में टनल निर्माण किया जाएगा। राऊ सर्कल पर क्लोरिनेशन सिस्टम बनेगा। 448.23 करोड़ रुपए में लगभग 30 महीने में काम पूरा करने का लक्ष्य है। पैकेज 3     पैकेज-3 और 4 के तहत 40 नए ओवरहेड टैंक बनेंगे, 76 टैंकों का नवीनीकरण किया जाएगा। पैकेज-3 में 15 से 35 लाख लीटर क्षमता के 20 नए ओवरहेड टैंक का निर्माण कर 29 मौजूदा टैंकों का सुदृढ़ीकरण होगा। इन टैंकों को जोड़ने के लिए 400 से 600 एमएम की 27.4 किमी लंबी फीडर पाइपलाइन तथा 1200 मिमी व्यास की 4.7 किमी ग्रेविटी मेन व 685 किमी डिस्ट्रीब्यूशन लाइन बिछाई जाएगी।     1 लाख 26 हजार पानी के कनेक्शन घरों में देकर 1 लाख 8 हजार से अधिक वाटर मीटर लगाए जाएंगे। इससे 24 घंटे प्रेशर के साथ पानी सह्रश्वलाई होगी। यह काम 36 महीने में 410.50 करोड़ में किया जाएगा। स्मार्ट मॉनिटरिंग से लीकेज व पानी की बर्बादी पर नियंत्रण किया जाएगा।     यहां बनेंगी 40 नई टंकियां, पैकेज-3 के तहत पुराने रजिस्ट्रार ऑफिस का गार्डन, खालसा चौक, आइडीए गार्डन, लवकुश विहार, निरंजनपुर मंडी, कबीटखेड़ी, रेवेन्यू नगर, ट्रेजर टाउन, कावेरी परिसर, कैलोद करताल, लिंबोदी टैंक, पालदा इंडस्ट्रीज एरिया, आरटीओ पत्थर मुंडला, ओमेक्स हिल, देवगुराडिय़ा, कु्हेड़ी, पंचवटी कॉलोनी, अरंडिया, मायाखेड़ी, शक्करखेड़ी, रेवती। पैकेज 4     पैकेज-4 में 20 नए ओवरहेड टैंक का निर्माण तथा 892 किमी लंबी वितरण पाइपलाइन बिछाई जाएगी।     साईं गंगौत्री, लक्ष्मीबाई मंडी, एकेवीएन कैंपस, मैकेनिक नगर, पीयू 4 गार्डन, विजय नगर, सयाजी होटल के पीछे, हाट बाजार के सामने कंचनबाग, महल कचहरी, शिवाजी नगर, कलेक्टोरेट पार्क आदि।