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VB-GRAM-G योजना पर मान सरकार का बड़ा फैसला, अधिसूचना जारी; पहले AAP ने किया था विरोध

चंडीगढ़  पंजाब में वीबी जी राम जी (विकसित भारत रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन) योजना लागू हो गई है। राज्य सरकार ने स्कीम लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है।पंजाब सरकार पहले इस योजना के विरोध में थी। योजना के खिलाफ विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पास किया गया था। केंद्र की इस स्कीम के तहत एक वित्तीय वर्ष में ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने की व्यवस्था की गई है।  केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम को रद्द करके विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण अधिनियम लाई थी। संसद से ये बिल पिछले साल दिसंबर में पारित हुआ था, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिली थी।  बता दें कि केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम को रद्द करके विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका गारंटी मिशन ग्रामीण अधिनियम लाया था. संसद से ये बिल पिछले साल दिसंबर में पारित हुआ था, जिसके बाद इसे राष्ट्रपति की मंज़ूरी मिली थी।  कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार ने 2005 में MGNREGA शुरू किया था. इसके तहत ग्रामीण परिवार को साल में 100 दिन का काम मिलने की गारंटी दी गई थी. अब नए कानून के तहत, गारंटी वाले काम के दिनों की संख्या बढ़कर 125 हो गई है।  पंजाब सरकार ने किया एक्ट का विरोध विपक्ष शासित पांच राज्यों कर्नाटक, केरल, पंजाब, तेलंगाना और झारखंड ने VB-G Ram G एक्ट का विरोध करते हुए और MGNREGA योजना को बहाल करने की मांग करते हुए प्रस्ताव पारित किए थे. पंजाब सरकार ने तर्क दिया था कि VB-G RAM G एक्ट का गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले परिवारों, अनुसूचित जाति समुदायों और ग्रामीण मजदूरों पर बुरा असर पड़ेगा, जो अपनी जीविका के लिए MGNREGA पर निर्भर हैं।  योजना का उद्देश्य स्पष्ट VB-G RAM G योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना है। यह योजना प्रधानमंत्री मोदी के विकास के विजन को ध्यान में रखते हुए बनाई गई है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में काम की तलाश करने वाले लोगों को 125 दिनों का रोजगार दिया जाएगा, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकेगी। आर्थिक सुधारों की दिशा में एक कदम इस योजना का उद्देश्य न केवल रोजगार पैदा करना है, बल्कि ग्रामीण विकास को भी बढ़ावा देना है। एएपी सरकार के इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि इससे राज्य के आर्थिक ढांचे में सुधार होगा और युवा वर्ग को रोजगार के अवसर मिलेंगे। योजना के तहत, कर्मचारियों को स्थायी नौकरी के लिए भी प्रोत्साहित किया जायेगा। गांवों में काम से होगी खुशहाली VB-G RAM G योजना की लॉन्चिंग से ग्रामीण क्षेत्र में काम की प्रवृत्ति बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल मजदूरों को काम मिलेगा, बल्कि इसके चलते स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मजबूत होगी। इस योजना का पूरा फायदा उन परिवारों को होगा जो रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे थे। सरकार की तैयारियों में तेजी पंजाब सरकार ने इस योजना को लागू करने के लिए पूरी तैयारी कर ली है। इसके लिए आवश्यक संसाधनों और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने की दिशा में तत्काल कदम उठाए जा रहे हैं। यह योजना न केवल रोजगार बल्कि आजीविका के अवसर भी प्रदान करेगी, जिससे ग्रामीण लोगों का जीवन स्तर बेहतर होगा। आवश्यकता जन जागरूकता की योजना के सफल कार्यान्वयन के लिए सरकार को गांवों में जन जागरूकता अभियान चलाना होगा। लोगों को योजना की जानकारी और उसके लाभ समझाने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इससे जुड़ सकें और इसका लाभ उठा सकें। सरकार ने क्या कहा? हालांकि, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा जताया कि VB-G Ram G एक्ट मजदूरों के जीवन में एक नए युग की शुरुआत करेगा. उन्होंने कहा कि इस योजना से जल संरक्षण और ग्रामीण बुनियादी ढांचे के विकास जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और सड़कें, पुल, पुलिया, स्कूल और आंगनवाड़ी भवन बनाए जा सकेंगे. केंद्र सरकार ने इस योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 95,600 करोड़ रुपये से ज़्यादा का बजट आवंटित किया।  1 जुलाई से लागू होगी योजना शिवराज चौहान ने कहा, VB GRAM-G योजना 1 जुलाई से लागू हो रही है, जिससे बिना किसी रुकावट के पूरी तरह से सुचारू और कर्मचारी-केंद्रित बदलाव सुनिश्चित होना चाहिए. उन्होंने कहा, यह सिर्फ एक स्कीम का बदलाव नहीं है, बल्कि करोड़ों मज़दूरों की ज़िंदगी और रोज़ी-रोटी से जुड़ा मामला है. एक भी मज़दूर एक दिन के लिए भी बिना काम के नहीं रहना चाहिए. रोज़गार पैदा करने, मज़दूरी के भुगतान या कानूनी अधिकारों में कोई रुकावट नहीं आनी चाहिए।  उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार ने MGNREGA के तहत पहले ही 30,000 करोड़ रुपये आवंटित कर दिए थे. इस नए आवंटन के साथ, स्कीम के तहत कुल फंड 1.25 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया है। 

उद्यमियों को भेल और गेल सहित मानक ब्यूरो से मिले अनेक टिप्स

अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम एवं गुणवत्ता सत्र संपन्न उद्यमियों को भेल और गेल सहित मानक ब्यूरो से मिले अनेक टिप्स उत्पाद की गुणवत्ता, भारतीय मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं के संबंध में दी गई व्यावहारिक जानकारी भोपाल अंतर्राष्ट्रीय एमएसएमई दिवस पर शनिवार को रवीन्द्र भवन, भोपाल में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम तथा “उत्पाद गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक के लिए“सशक्त उद्यमी, समृद्ध मध्यप्रदेश—हार्ट ऑफ इंडिया, हार्ट ऑफ ग्रोथ” की थीम पर हुए सत्र में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, प्रतिष्ठित निजी कंपनियों एवं संस्थागत खरीदारों से जोड़ने के साथ-साथ उत्पाद की गुणवत्ता, भारतीय मानकों और प्रमाणन प्रक्रियाओं के संबंध में व्यावहारिक जानकारी दी गई। सत्र में विशेष रूप से बीएचईएल, गेल, एनसीएल और पावरग्रिड सहित सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख उपक्रमों एवं प्रतिष्ठित निजी कंपनियों से प्रदेश के एमएसएमई उद्यमियों ने सीधा संवाद किया। भारतीय मानक ब्यूरो के मोहम्मद रिजवान तथा मोहम्मद तौसीफ ने दी मानकीकरण, प्रमाणन और शुल्क रियायतों की जानकारी दी।भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय द्वारा विश्व बैंक की RAMP योजना के अंतर्गत वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम का आयोजन किया गया।  इस अवसर पर बीएचईएल, गेल इंडिया लिमिटेड, नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड, Resonia, JadeBlue, FabIndia और Olam Agri सहित सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने व्याखान एवं प्रेजेंटेशन दिया | कार्यक्रम में प्रदेश के पंजीकृत एमएसएमई उद्यमियों को इन संस्थाओं की खरीद प्रणाली, वेंडर पंजीकरण प्रक्रिया, निविदाओं में भागीदारी, तकनीकी पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाओं, समयबद्ध आपूर्ति तथा आपूर्ति शृंखला में उपलब्ध व्यावसायिक अवसरों के संबंध में जानकारी प्रदान की गई। बीएचईएल के विभाग अध्यक्ष पंकज कुमार झा एवं  प्रबंधक सुमीनाक्षी सिंह ने संस्थान की खरीद प्रक्रिया, वेंडर पंजीकरण व्यवस्था तथा एमएसएमई के लिए उपलब्ध खरीद अवसरों की जानकारी दी। उन्होंने प्रदेश के सक्षम उद्यमों को निर्धारित गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप बीएचईएल की आपूर्ति शृंखला से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया। Resonia के सहायक उपाध्यक्ष दीपांकर बरगली ने कॉर्पोरेट वेंडर ऑनबोर्डिंग, खरीद प्रक्रिया और व्यावसायिक अवसरों के संबंध में जानकारी साझा की। गेल इंडिया लिमिटेड के नवीन जमालमुडी ने वेंडर पंजीकरण, निविदा प्रक्रिया, तकनीकी योग्यता और आपूर्ति शृंखला की आवश्यकताओं से उद्यमियों को अवगत कराया। उन्होंने संस्थागत खरीद में भागीदारी के लिए उद्यम पंजीकरण, आवश्यक अभिलेखों, तकनीकी क्षमता और डिजिटल उपस्थिति के महत्व पर बल दिया। नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के विपुल जैन ने एनसीएल के साथ व्यवसाय करने, वेंडर के रूप में पंजीकरण कराने और संस्थान की खरीद प्रक्रिया में भाग लेने के संबंध में मार्गदर्शन दिया। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड की सुपल्लवी मिश्रा ने विद्युत पारेषण क्षेत्र में सामग्री आपूर्ति, सिविल कार्य, रखरखाव सेवाओं और अन्य श्रेणियों में एमएसएमई के लिए उपलब्ध अवसरों की जानकारी दी। निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों द्वारा क्रमशः JadeBlue के अमित खामर ने परिधान खुदरा क्षेत्र में उत्पाद गुणवत्ता, निरंतर आपूर्ति और समयबद्ध डिलीवरी से संबंधित अपेक्षाओं पर जानकारी दी। FabIndia की सुनलिनी गर्ग ने पारंपरिक शिल्प, हथकरघा वस्त्र, गृह-सज्जा और कारीगर आधारित उत्पादों से जुड़े उद्यमों के लिए उपलब्ध वेंडर डेवलपमेंट अवसरों पर प्रकाश डाला। Olam Agri के निर्देश त्रिवेदी ने कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में कमोडिटी एकत्रीकरण, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, खाद्य सुरक्षा, ट्रेसेबिलिटी और लॉजिस्टिक्स से संबंधित खरीद अवसरों की जानकारी दी। वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम के दौरान यह रेखांकित किया गया कि बड़े सार्वजनिक उपक्रमों और निजी कंपनियों की आपूर्ति शृंखला से जुड़ने के लिए उत्पाद की निरंतर गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धी मूल्य, निर्धारित समय पर आपूर्ति, तकनीकी क्षमता और आवश्यक प्रमाणनों का अनुपालन महत्वपूर्ण है। प्रेजेंटेशन के बाद क्रेता–एमएसएमई संवाद और व्यावसायिक नेटवर्किंग बैठकें आयोजित की गईं। इनमें पंजीकृत उद्यमियों को संस्थागत खरीदारों के प्रतिनिधियों के समक्ष अपने उत्पाद, उत्पादन क्षमता और व्यावसायिक प्रस्ताव प्रस्तुत करने तथा संबंधित संस्थाओं की वर्तमान एवं संभावित खरीद आवश्यकताओं पर सीधे चर्चा करने का अवसर मिला। मानक ब्यूरो का हुआ विशेष सत्र कार्यक्रम के समानांतर आयोजित भारतीय मानक ब्यूरो के विशेष सत्र का संचालन ब्यूरो के अधिकारी मोहम्मद रिजवान तथा मोहम्मद तौसीफ ने किया। दोनों अधिकारियों ने एमएसएमई उद्यमियों को भारतीय मानकों, उत्पाद प्रमाणन, गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों, BIS लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया और उद्यमों के लिए उपलब्ध शुल्क रियायतों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानकीकरण और प्रमाणन को केवल वैधानिक अनुपालन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह उत्पाद की गुणवत्ता, बाजार में विश्वसनीयता, उपभोक्ताओं के विश्वास और बड़े संस्थागत बाजारों तक पहुँच बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। सत्र में बताया गया कि 22 जून 2026 की स्थिति में भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा 22 हजार 860 से अधिक भारतीय मानक विकसित किए गए हैं। कुल 1,477 उत्पाद BIS प्रमाणन के दायरे में हैं तथा मानव स्वास्थ्य एवं सुरक्षा सहित विभिन्न कारणों से 600 से अधिक उत्पादों के लिए अनिवार्य प्रमाणन लागू है। देशभर में 53 हजार से अधिक BIS लाइसेंस संचालित हैं। उद्यमियों को लागू भारतीय मानक की पहचान करने, मानक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन प्रस्तुत करने, कारखाना निरीक्षण, उत्पाद नमूना परीक्षण तथा लाइसेंस प्रदान किए जाने की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया। बीआईएसअधिकारियों ने गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के संबंध में बताया कि इनका उद्देश्य उत्पादों की गुणवत्ता एवं विश्वसनीयता सुनिश्चित करना, उपभोक्ता सुरक्षा को बढ़ाना, मानव, पशु एवं पादप स्वास्थ्य की रक्षा करना, पर्यावरण संरक्षण तथा अनुचित व्यापार व्यवहारों को रोकना है। उद्यमियों को यह भी बताया गया कि गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों के अंतर्गत चिन्हित उत्पादों का निर्माण, आयात अथवा विक्रय निर्धारित भारतीय मानकों और प्रमाणन आवश्यकताओं के अनुरूप किया जाना आवश्यक होता है। सत्र में एमएसएमई के लिए BIS द्वारा प्रदान की जा रही विशेष शुल्क रियायतों की जानकारी भी दी गई। सूक्ष्म उद्यमों एवं स्टार्टअप्स को वार्षिक न्यूनतम मार्किंग शुल्क में 80 प्रतिशत, लघु उद्यमों को 50 प्रतिशत तथा मध्यम उद्यमों को 20 प्रतिशत तक रियायत उपलब्ध है। महिला उद्यमियों को संबंधित उद्यम श्रेणी में मिलने वाली रियायत के अतिरिक्त 10 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट प्रदान किए जाने का प्रावधान है। यह स्पष्ट किया गया कि वेंडर डेवलपमेंट और उत्पाद मानकीकरण एक-दूसरे के पूरक हैं। वेंडर डेवलपमेंट प्रोग्राम उद्यमों को संभावित खरीदारों और नए बाजारों से जोड़ता है, जबकि BIS मानकों का अनुपालन और उत्पाद प्रमाणन उन्हें संस्थागत खरीद एवं बड़ी आपूर्ति शृंखलाओं की गुणवत्ता संबंधी अपेक्षाओं … Read more

हरियाणा पुलिस में नई जिम्मेदारियां तय, डीजीपी स्तर से लेकर एसपी तक कई अधिकारियों के पद बदले गए

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने शुक्रवार (26 जून, 2026) देर रात पुलिस विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 15 आईपीएस और 21 एचपीएस अधिकारियों के तबादला आदेश जारी किए हैं। पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल को हरियाणा पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन के चेयरमैन तथा प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। अभी तक यह पद आलोक कुमार मित्तल के पास था। आलोक मित्तल को हरियाणा का जेल महानिदेशक नियुक्त करने के साथ रेजीडेंट कमिश्नर हरियाणा का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। एडीजीपी से पदोन्नत होकर पुलिस महानिदेशक बने नवदीप सिंह विर्क को हरियाणा स्टेट एन्फोर्समेंट ब्यूरो का महानिदेशक तथा विजिलेंस और सुरक्षा एचपीयूएस का निदेशक बनाया गया है। एडीजीपी से डीजीपी के पद पर पदोन्नत नवदीप सिंह विर्क की पत्नी कला रामचंद्रन को डीजीपी प्रशिक्षण एवं निदेशक हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन की जिम्मेदारी मिली है। चारू बाली को एडीजीपी साइबर, एडीजीपी आइटी और एडीजपी एससीआरबी का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। वे एडीजीपी भोंडसी पुलिस कांप्लेक्स का कार्यभार भी संभालेंगी आईपीएस डॉ. सीएस राव को होमगार्ड व सिविल डिफेंस का कमांडेंट जनरल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। वे एडीजीपी एचआर एंड लिटिगेशन का कार्यभार भी देखते रहेंगे। सीनियर आईपीएस अधिकारी विकास अरोड़ा को एडीजीपी ईआरएसएस, ट्रैफिक एवं हाईवे के साथ टेली कम्युनिकेशन मुख्यालय की जिम्मेदारी दी गई। राकेश कुमार आर्य को स्टेट क्राइम ब्रांच के साथ आईजी कानून-व्यवस्था का अतिरिक्त प्रभार सौपा गया है। मनीष चौधरी को आईजी रेलवे और कमांडो के साथ आईजी जेल का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया। अशोक कुमार करनाल रेंज के आईजी के साथ ही आईजी एचएपी मधुबन की जिम्मेदारी संभालेंगे। आरटीसी भोंडसी की आईजी नाजनीन भसीन को आईजी सीआइडी मुख्यालय बनाया गया है। सुरेंद्र पाल सिंह को डीआईजी एसटीएफ और राजिंदर कुमार मीणा को ज्वाइंट सीपी फरीदाबाद होंगे। डॉ. अंशु सिंगला को डीसीपी मुख्यालय गुरुग्राम बनाया गया है। सुरेंद्र सिंह भोरिया को एसपी एसटीएफ पंचकूला और एसपी कमांडो नेवल के साथ ही एसपी ला एंड आर्डर पुलिस मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार मिला है। एचपीएस अनिल कुमार को एसपी एसटीएफ करनाल नियुक्त किया गया है। इन एचपीएस अधिकारियों के हुए तबादले नाम – नई जिम्मेदारी 1. शक्ति सिंह – डीएसपी तृतीय बटालियन एचएपी हिसार 2. कमलजीत सिंह – 3. अरविंद कांबोज – डीएसपी सतर्कता एवं विजिलेंस तथा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो मुख्यालय 4. रविंदर सिंह – डीएसपी राज्य सतर्कता एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो 5. सतीश कुमार – डीएसपी राज्य सतर्कता एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो 6. सुनील कुमार – डीएसपी रादौर 7. आशीष चौधरी – डीएसपी यमुनानगर 8. विकास कुमार – डीएसपी पानीपत 9. राजबीर सिंह – डीएसपी सिरसा 10. कुलदीप सिंह – डीएसपी अंबाला छावनी 11. धर्मबीर सिंह – डीएसपी सीआइडी मुख्यालय 12. संजीव कुमार – डीएसपी तृतीय बटालियन एचएपी हिसार 13. जितेंद्र कुमार – डीएसपी एसटीएफ मुख्यालय 14. ओम प्रकाश – डीएसपी टेलीकाम मुख्यालय पंचकूला 15. जय प्रकाश – डीएसपी तृतीय आइआरबी सुनारियां रोहतक 16. जितेंद्र सिंह – डीएसपी हरियाणा राज्य नशा नियंत्रण ब्यूरो मुख्यालय 17. सुरेश कुमार – डीएसपी द्वितीय आइआरबी भोंडसी 18. राज सिंह – डीएसपी द्वितीय आइआरबी भोंडसी 19. विकास कृष्ण – डीएसपी पीटीसी सुनारियां 20. जसपाल सिंह – डीएसपी चरखी दादरी  

झारखंड में स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार पर जोर, 100 गुणवत्ता मानकों पर परखे जाएंगे सीएचसी अस्पताल

रांची  रांची जिले के अनगड़ा और रातू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (एनक्वास) अवार्ड दिलाने की तैयारी तेज कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग दोनों अस्पतालों में आधारभूत सुविधाओं और स्वास्थ्य सेवाओं को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित करने में जुटा है। यदि दोनों अस्पताल करीब 100 गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते हैं तो उन्हें एनक्वास प्रमाणन के साथ 50 लाख रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा। यह राशि अस्पताल के विकास, मरीजों की सुविधाओं और चिकित्सा सेवाओं को और बेहतर बनाने में खर्च की जाएगी। रांची जिले में इससे पहले सदर अस्पताल को वर्ष 2024 में एनक्वास अवार्ड मिल चुका है। वहीं ओरमांझी सीएचसी और कुच्चू पीएचसी भी यह उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। जिले के 80 आयुष्मान आरोग्य मंदिर (हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर) भी एनक्वास प्रमाणन प्राप्त कर चुके हैं। अब विभाग की नजर अनगड़ा और रातू सीएचसी पर है। ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित होना है बाकी सिविल सर्जन डा. प्रभात कुमार बताते हैं कि दोनों अस्पतालों में अधिकांश स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हैं, लेकिन एनक्वास के लिए कुछ महत्वपूर्ण कमियां अभी भी दूर की जानी हैं। सबसे बड़ी चुनौती दोनों अस्पतालों में ब्लड स्टोरेज यूनिट स्थापित करना है। योजना के तहत सदर अस्पताल स्थित मदर ब्लड बैंक से रक्त लाकर यहां सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि विशेषकर गर्भवती महिलाओं और आपातकालीन मरीजों को तत्काल रक्त उपलब्ध कराया जा सके। अनगड़ा सीएचसी में रेडियोलाजी विभाग को भी पूरी तरह सुदृढ़ किया जाना बाकी है, जबकि रातू सीएचसी में यह सुविधा पहले से संचालित है। वहीं सर्जरी की सुविधा दोनों अस्पतालों में है, लेकिन रातू सीएचसी में सबसे अधिक सीजेरियन आपरेशन किए जाते हैं। अनगड़ा में सर्जिकल सेवाएं अभी सीमित हैं। यहां जरूरत पड़ने पर निजी विशेषज्ञ चिकित्सकों को बुलाकर आपातकालीन सर्जरी कराई जाती है, जबकि गंभीर मरीजों को उच्च संस्थानों में रेफर करना पड़ता है। कई मानकों पर होती है जांच एनक्वास प्रमाणन केवल भवन या उपकरणों के आधार पर नहीं मिलता। इसके लिए अस्पतालों को करीब 100 गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरना पड़ता है। इनमें मरीजों की सुरक्षा, संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता, दवा उपलब्धता, प्रशिक्षित मानव संसाधन, प्रयोगशाला एवं रेडियोलाजी सेवाएं, प्रसव एवं नवजात देखभाल, आपातकालीन चिकित्सा, रिकार्ड प्रबंधन, जैव-चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, अग्नि सुरक्षा, मरीजों की शिकायतों का निस्तारण और अस्पताल प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। राष्ट्रीय स्तर की टीम अस्पताल का निरीक्षण करती है और निर्धारित अंक मिलने के बाद ही एनक्वास प्रमाणन दिया जाता है। अस्पताल और मरीजों दोनों को मिलेगा लाभ एनक्वास अवार्ड मिलने के बाद अस्पताल को 50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है। इस राशि का उपयोग नई चिकित्सा सुविधाएं विकसित करने, उपकरण खरीदने, मरीजों के लिए आधारभूत सुविधाएं बढ़ाने और गुणवत्ता सुधार कार्यों में किया जाता है। इसका सबसे बड़ा लाभ मरीजों को मिलता है। अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता बढ़ती है, संक्रमण का खतरा कम होता है, दवाओं और जांच सेवाओं की उपलब्धता बेहतर होती है तथा रेफरल की आवश्यकता भी घटती है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों को अपने जिले या प्रखंड स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण इलाज मिलने लगता है। तीन वर्ष बाद फिर कराना पड़ता है मूल्यांकन एनक्वास प्रमाणन स्थायी नहीं होता। इसकी वैधता तीन वर्ष की होती है। इसके बाद अस्पताल को दोबारा आवेदन कर पुनर्मूल्यांकन कराना पड़ता है। यदि गुणवत्ता मानकों का पालन जारी नहीं रहता तो प्रमाणन समाप्त भी हो सकता है। यही कारण है कि एनक्वास प्राप्त अस्पतालों को लगातार अपनी सेवाओं की गुणवत्ता बनाए रखनी पड़ती है। एनक्वास क्या है? एनक्वास स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की राष्ट्रीय गुणवत्ता प्रमाणन प्रणाली है। जिला अस्पताल, सीएचसी, पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को यह प्रमाणन दिया जाता है। अस्पताल का मूल्यांकन मरीजों की सुरक्षा, इलाज की गुणवत्ता, स्वच्छता, मानव संसाधन, संक्रमण नियंत्रण और प्रबंधन समेत लगभग 100 गुणवत्ता मानकों पर किया जाता है। प्रमाणन मिलने पर अस्पताल को गुणवत्ता सुधार के लिए 50 लाख रुपये तक की प्रोत्साहन राशि मिलती है। झारखंड में पिछले कुछ वर्षों में जिला अस्पतालों, सीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को एनक्वास से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाई जा सकें।

मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने बदला पाठ्यक्रम, 174 कॉलेजों के छात्रों को मिलेगा नया अध्ययन

 बलरामपुर उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में स्थित मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय ने एक ऐतिहासिक और साहसिक शैक्षणिक कदम उठाते हुए अपने हिंदी पाठ्यक्रम में हनुमान चालीसा और सुंदरकांड को शामिल कर लिया है। यह निर्णय न केवल बलरामपुर, बल्कि पूरे देश की शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बन गया है। 174 महाविद्यालयों के छात्रों पर पड़ेगा सीधा प्रभाव छात्रों पर प्रभाव देवी पाटन मंडल के अंतर्गत आने वाले 174 महाविद्यालयों के हजारों विद्यार्थी अब हिंदी साहित्य के पाठ्यक्रम के तहत इन पवित्र और काव्यात्मक रचनाओं का अध्ययन करेंगे। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह बदलाव शिक्षा को संस्कृति, आध्यात्म और स्थानीय परंपरा से जोड़ने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। बलरामपुर के तुलसीदास की है यह रचना, विश्वविद्यालय का दावा विश्वविद्यालय ने एक महत्वपूर्ण तथ्य को भी सामने रखा है जो अब तक व्यापक रूप से चर्चित नहीं था। विश्वविद्यालय के अनुसार, हनुमान चालीसा की यह विशेष रचना गोस्वामी तुलसीदास (काशी) की नहीं, बल्कि बलरामपुर के तुलसीपुर क्षेत्र के भोजपुर निवासी संत तुलसीदास की है, जिन्होंने इसे इसी पवित्र आध्यात्मिक भूमि पर अपने साधना काल में रचा था। प्रोफेसर शैलेंद्र नाथ मिश्र के अनुसार, ये संत तुलसीदास स्वयं को गोस्वामी तुलसीदास का अवतार मानते थे। इस तथ्य का उल्लेख 1940 के दशक में प्रकाशित कल्याण पत्रिका में विनायक के लेख में मिलता है। इसके अलावा अखिल भारतीय विक्रम परिषद, काशी द्वारा प्रकाशित तुलसी ग्रंथावली में भी इसकी पुष्टि की गई है। बाद में ये संत भवनियापुर में बस गए और तुलसीपुर नगर की स्थापना की। कक्षावार पाठ्यक्रम में क्या-क्या बदला बीए प्रथम वर्ष के हिंदी पाठ्यक्रम में अब अयोध्याकांड (दोहा 28 से 41) और रामलला नहछू शामिल की गई हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा गोंडा क्षेत्र की अवधी बोली में रचित यह बाललीला काव्य है, जिसमें बालक राम के स्नेहपूर्ण बाल स्वरूप का जीवंत और मनोरम चित्रण है। विश्वविद्यालय स्तर पर यह पहला अवसर है जब स्थानीय अवधी रूप को इस तरह औपचारिक सम्मान दिया गया है। विश्वविद्यालय ने पहली बार हनुमान चालीसा को स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल किया है। यह रचना न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से, बल्कि काव्य-सौंदर्य, भाषा-शक्ति और भक्ति भाव की दृष्टि से भी अत्यंत समृद्ध है। एमए प्रथम वर्ष के पाठ्यक्रम में सुंदरकांड को जोड़ा गया है, जिससे छात्रों को तुलसीदास के काव्य कौशल, भाषा-सौंदर्य और भक्ति दर्शन की गहराई समझने का अवसर मिलेगा। कुलपति का दृष्टिकोण मां पाटेश्वरी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रविशंकर सिंह ने कहा कि हमारा उद्देश्य शिक्षा को अपनी संस्कृति से जोड़ना है। जब विद्यार्थी अपनी भाषा और परंपरा को जानेंगे, तभी शिक्षा का वास्तविक अर्थ साकार होगा। उनके नेतृत्व में हिंदी विभाग के पाठ्यक्रम को स्थानीयता से वैश्विकता की दृष्टि से नया रूप दिया गया है। सितंबर 2025 में यह पाठ्यक्रम में शामिल करने की स्वीकृति दे दी गई थी। इस वर्ष से नए सत्र में पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। विश्वविद्यालय वित्त समिति के सदस्य सर्वेश सिंह ने कहा कि यह निर्णय केवल पाठ्यक्रम को समृद्ध नहीं करेगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश भी देगा कि अपनी जड़ों से जुड़कर ही ज्ञान का वृक्ष फलता-फूलता है। हिंदी पाठ्यक्रम समिति के पूर्व संयोजक प्रो. शैलेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि आधुनिक शिक्षा तभी पूर्ण है, जब उसमें संस्कृति, लोकभाषा और आध्यात्मिक चेतना का समावेश हो।

2028 तक पूरा होगा DMRC प्रोजेक्ट, दक्षिण-पूर्व दिल्ली में ट्रैफिक और प्रदूषण कम होने की उम्मीद

नई दिल्ली  राजधानी दिल्ली में मेट्रो कनेक्टिविटी को और भी मजबूत बनाने के लिए दिल्ली मेट्रो रेलवे कॉर्पोरेशन ने गोल्डन लाइन' के विस्तार की घोषणा की है। DMRC के फेज V(A) विस्तार के तहत बनने वाला यह 3.9 किलोमीटर लंबा कालिंदी कुंज-तुगलकाबाद कॉरिडोर दिल्ली, नोएडा और फरीदाबाद के बीच सफर करने वाले यात्रियों को बड़ी राहत देगा। कब तक पूरा होगा DMRC का प्रोजेक्ट DMRC ने मैजेंटा और वॉयलेट मेट्रो लाइनों को आपस में जोड़ने वाले इस प्रोजेक्ट के लिए साल 2028 के आखिर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस नए कॉरिडोर को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह यमुना रिवरफ्रंट के साथ-साथ दक्षिण-पूर्व दिल्ली के मुख्य रिहायशी और उभरते इंडस्ट्रियल इलाकों को बेहतर ढंग से जोड़ेगा। नए रूट पर बनाए जाएंगे कितने स्टेशन इस 3.9 किलोमीटर के रूट पर कुल चार स्टेशन बनाए जाएंगे जिसमें सरिता विहार डिपो, मदनपुर खादर और कालिंदी कुंज एलिवेटेड स्टेशन होंगे, जबकि तुगलकाबाद अंडरग्राउंड बनाया जाएगा। लोगों को मिलेगी बेहतर कनेक्टिविटी DMRC के अनुसार, नया कॉरिडोर दक्षिण-पूर्व दिल्ली में रिहायशी इलाकों और इंडस्ट्रियल इलाकों के लिए कनेक्टिविटी को बढ़ावा देगा। यह साकेत और छतरपुर जैसे रिहायशी इलाकों तक सीधी पहुंच भी देगा और साथ ही नोएडा, फरीदाबाद, दक्षिण और पश्चिम दिल्ली के बीच लिंक को बेहतर बनाएगा। ट्रैफिक जाम और प्रदूषण से मिलेगा छुटकारा DMRC ने कहा कि नया कॉरिडोर नोएडा-फरीदाबाद रूट के साथ-साथ एयरपोर्ट से जुड़ने वाली सड़कों पर ट्रैफिक जाम और प्रदूषण को कम करने में मदद करेगा। एक अतिरिक्त मेट्रो कनेक्शन देकर, इस प्रोजेक्ट से रोज़ाना सफर करने वालों के लिए यात्रा की क्षमता में सुधार होने की उम्मीद है।  

पंजाब पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अमृतसर में अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी गिरोह का पर्दाफाश; विदेश से मिल रहे थे निर्देश

अमृतसर  अमृतसर कमिश्नरेट पुलिस ने सीमा पार से संचालित अवैध हथियार तस्करी के एक नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 10 अत्याधुनिक पिस्तौल और कारतूस बरामद किए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी विदेश में बैठे एक तस्कर के निर्देश पर काम कर रहे थे। ये आरोपी सीमा पार से भेजी गई हथियारों की खेप प्राप्त कर उन्हें आगे अपराधी तत्वों तक पहुंचाते थे। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क के तार संगठित अंतरराष्ट्रीय अपराध से जुड़े हो सकते हैं। थाना छेहरटा और मकबूलपुरा में एफआईआर दर्ज इस मामले में थाना छेहरटा और थाना मकबूलपुरा में एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। जांच के दौरान यह पता लगाया जा रहा है कि हथियार कहां से आए, किन-किन लोगों तक पहुंचाए जाने थे और इस तस्करी गिरोह में और कौन-कौन शामिल है। जांच में और गिरफ्तारियों की संभावना पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी और इस नेटवर्क से जुड़े सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही विदेशी तस्कर और उसके स्थानीय संपर्कों की भी पहचान की जा रही है। फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस को इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिलने की उम्मीद है।  

मध्य प्रदेश में 43 जिलों के लिए वर्षा चेतावनी, एंट्री के बाद थमा मानसून; 2-3 दिन और नहीं मिलेगी राहत

भोपाल  मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून के प्रवेश के बाद उसकी रफ्तार थम सी गई है। मौसम विभाग ने राज्य के 43 जिलों में आज शनिवार को मध्यम से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है, जबकि कुछ इलाकों में अत्यधिक वर्षा की संभावना भी जताई गई है। विभाग के अनुसार, मानसून अभी पूरी तरह सक्रिय नहीं हुआ है। सामान्य स्थिति में इस समय तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में अच्छी बारिश हो जानी चाहिए थी, लेकिन सिस्टम के कमजोर पड़ने के कारण इसमें 2-3 दिन की और देरी होने की संभावना है। खासतौर पर ग्वालियर-चंबल संभाग में मानसून सबसे देर से पहुंचने वाला है।. मानसून ने 24 जून को दी थी दस्तक गौरतलब है कि प्रदेश में मानसून ने 24 जून को दस्तक दी थी। पहले ही दिन इंदौर, धार, आलीराजपुर, हरदा, बैतूल, खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, बड़वानी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला और डिंडौरी जिलों में मानसून के आगमन की आधिकारिक घोषणा कर दी गई थी। हालांकि, इसके बाद से परिस्थितियां थमी हुई हैं, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि आगामी 48 से 72 घंटों में मानसून के आगे बढ़ने के लिए मौसम अनुकूल हो रहा है। शनिवार को इन जिलों में भारी बारिश का अनुमान इस बीच, शनिवार को राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रीवा और सागर संभाग समेत प्रदेश के करीब 40 से अधिक जिलों में गरज-चमक के साथ बारिश का अनुमान जताया गया है। वहीं, ग्वालियर-चंबल संभाग, नीमच, मंदसौर और बुंदेलखंड के कुछ हिस्सों में छिटपुट बौछारें पड़ सकती हैं। एमपी के कई हिस्सों में दिखा आंधी-बारिश का दौर इससे पहले, शुक्रवार को राज्य के कई हिस्सों में तेज आंधी और भारी बारिश का दौर देखने को मिला। सिवनी में करीब दो इंच और उज्जैन में डेढ़ इंच से ज्यादा पानी बरसा। शाजापुर, दतिया, राजगढ़ और मंडला समेत कई इलाकों में मौसम बदला रहा। इस बदलते मौसम के बीच बालाघाट और देवास जिलों से दर्दनाक हादसे भी सामने आए, जहाँ आकाशीय बिजली गिरने और दीवार ढहने की अलग-अलग घटनाओं में कुल 5 लोगों की असमय मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हुए हैं। कहां-कहां है अलर्ट? मौसम केंद्र ने रीवा, सागर, जबलपुर, शहडोल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और चंबल सहित कुल 43 जिलों में आज बारिश-आंधी का येलो अलर्ट जारी किया है। कुछ जिलों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने और 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली हवाओं का भी अनुमान है। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि खेतों में खड़ी फसलों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। खासकर सोयाबीन, मक्का और दलहन की फसलों पर अतिरिक्त नजर रखने की जरूरत है। कब तक सुधरेगा मौसम? मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, अगले 48-72 घंटों में एक नया सिस्टम सक्रिय होने की उम्मीद है, जिसके बाद राज्य भर में मानसून की गति बढ़ सकती है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, शिवपुरी और श्योपुरकलां जैसे उत्तरी जिलों में सामान्य बारिश में सबसे ज्यादा देरी हो सकती है। वर्षा के आंकड़ों में सुधार पिछले तीन दिनों की बारिश से प्रदेश की औसत वर्षा की स्थिति में सुधार हुआ है। 1 जून से अब तक सामान्य से 41 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि 24 जून तक यह कमी 50 प्रतिशत थी। लगातार बारिश के कारण बारिश का घाटा घटा है, हालांकि पूर्वी मध्य प्रदेश में अब भी सामान्य से काफी कम वर्षा हुई है। एमपी में तेज बारिश…सिवनी में 2 इंच पानी गिरा इससे पहले शुक्रवार को तेज आंधी और बारिश का दौर रहा। सिवनी में करीब 2 इंच पानी गिर गया। शाजापुर के शुजालपुर, अकोदिया समेत आसपास के इलाकों में झमाझम बारिश हुई। उज्जैन में डेढ़ इंच से ज्यादा पानी गिरा। वहीं, दतिया, इंदौर, राजगढ़, शिवपुरी, मंडला, रीवा, सागर, बालाघाट, खंडवा, शाजापुर, आगर-मालवा, मंदसौर समेत कई जिलों में आंधी-बारिश का दौर जारी रहा। बालाघाट के बैहर तहसील के बिरवा ग्राम पंचायत में बिजली गिरने से 2 बच्चों सहित 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग झुलस गए। मृतकों की पहचान लल्की मेरावी, झामसिंह ताराम (35) और सतीश वलके के रूप में हुई है। वहीं, देवास के खटांबा गांव में सूरज की पूजा के दौरान आंधी-बारिश से गैलरी गिर गई। हादसे में 2 महिलाओं की मौत हो गई, जबकि एक बच्ची समेत 3 लोग घायल हो गए। मृतकों की पहचान लक्ष्मीबाई और भगवंताबाई के रूप में हुई है। आंधी-बारिश की वजह से दिन के तापमान में खासी गिरावट हुई है। खरगोन में तापमान सबसे कम 30 डिग्री पहुंच गया। खंडवा में 30.1 डिग्री, सागर में 31.1 डिग्री, छिंदवाड़ा में 31.8 डिग्री, बैतूल में 32.7 डिग्री, सिवनी-उमरिया में 33.2 डिग्री, धार में 33.4 डिग्री, नर्मदापुरम में 33.8 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में भोपाल-इंदौर में 33.8 डिग्री, उज्जैन में 33.5 डिग्री, जबलपुर में 36.7 डिग्री और ग्वालियर में 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।    

छत्तीसगढ़ में मानसून होगा एक्टिव, 7 दिन तक बारिश की संभावना; 3-4 दिन में पूरे प्रदेश को करेगा कवर

रायपुर  छत्तीसगढ़ में शनिवार से मौसम का स्वरूप बदलने वाला है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई जिलों के लिए अगले सात दिनों तक बारिश, गरज-चमक और आकाशीय बिजली गिरने की संभावना जताई है। कुछ इलाकों में भारी बारिश होने के भी संकेत दिए गए हैं, जिसके चलते लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस समय तीन अलग-अलग मौसमी सिस्टम सक्रिय हैं। इन सिस्टमों के प्रभाव से प्रदेश में बारिश की गतिविधियों में तेजी आएगी। अनुमान है कि अगले तीन से चार दिनों के भीतर मानसून पूरे छत्तीसगढ़ में पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा, जिससे अधिकांश जिलों में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है। लगातार होने वाली बारिश किसानों के लिए राहत लेकर आ सकती है, क्योंकि इससे खरीफ फसलों की बुवाई और खेती के अन्य कार्यों को फायदा मिलेगा। हालांकि, अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव और स्थानीय स्तर पर परेशानी की स्थिति भी बन सकती है।  अगले एक सप्ताह तक बारिश के आसार मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से लगातार नमी मिलने के कारण प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेज होंगी। कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश के साथ गरज-चमक और बिजली गिरने की भी संभावना बनी हुई है।पिछले 24 घंटों के दौरान भी प्रदेश के कई इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई। अगले दो दिनों में बारिश की तीव्रता और बढ़ सकती है। इन जिलों में पहुंच चुका है मानसून अब तक मानसून ने प्रदेश के 18 से अधिक जिलों में दस्तक दे दी है। इनमें शामिल हैं—     रायपुर     दुर्ग     धमतरी     गरियाबंद     महासमुंद     बलौदाबाजार     बेमेतरा     कबीरधाम     राजनांदगांव     मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी     खैरागढ़-छुईखदान-गंडई     कांकेर     कोंडागांव     नारायणपुर     बस्तर     दंतेवाड़ा     सुकमा     बीजापुर अगले 48 घंटे में इन जिलों में मानसून की एंट्री मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों के भीतर मानसून इन जिलों में भी दस्तक दे सकता है—     सरगुजा     सूरजपुर     बलरामपुर     कोरिया     मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर     जशपुर     कोरबा     गौरेला-पेंड्रा-मरवाही     बिलासपुर     मुंगेली     जांजगीर-चांपा     सक्ती     सारंगढ़-बिलाईगढ़     रायगढ़ हालांकि इन क्षेत्रों में प्री-मानसून की बारिश हो रही है, लेकिन भारतीय मौसम विभाग ने अभी तक इन जिलों में मानसून के आधिकारिक प्रवेश की घोषणा नहीं की है। तापमान में भी आएगी गिरावट बारिश के साथ तापमान में भी गिरावट दर्ज होने लगी है। पिछले 24 घंटे में बिलासपुर में अधिकतम 39.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जबकि पेंड्रा रोड में न्यूनतम 23.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड हुआ।मौसम विभाग का अनुमान है कि लगातार बारिश के चलते अगले कुछ दिनों में अधिकतम तापमान में और कमी आएगी तथा उमस से लोगों को राहत मिलेगी। अब तक 18 से ज्यादा जिलों में पहुंचा मानसून मानसून ने अब तक 18 से अधिक जिलों में स्ट्राइक किया है। इनमें मुख्य रूप से रायपुर, दुर्ग, धमतरी, गरियाबंद, महासमुंद, बलौदाबाजार, बेमेतरा, कबीरधाम, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा सुकमा, बीजापुर शामिल हैं। इन जिलों में एंट्री बाकी सरगुजा, सूरजपुर, बलरामपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, जशपुर, कोरबा, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बिलासपुर, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, सक्ती, सारंगढ़-बिलाईगढ़, रायगढ़। इन जिलों में अगले 48 घंटों में मानसून एंट्री कर सकता है। हालांकि, इन जिलों में प्री-मानसून की बारिश हो रही है, लेकिन IMD ने आधिकारिक तौर पर मानसून के पहुंचने की घोषणा इन जिलों में नहीं की है। बस्तर में सबसे बेहतर स्थिति; फिर भी 54% तक कम वर्षा प्रदेश में मानसून की पहली दस्तक का असर सबसे पहले बस्तर संभाग में दिखाई दे रहा है, लेकिन इसके बावजूद यहां सामान्य से कम पानी गिरा है: बस्तर जिला: यहां स्थिति सबसे बेहतर है। 142.7 मिमी सामान्य बारिश के मुकाबले 74.8 मिमी वर्षा हुई है (48% कम) दंतेवाड़ा: 107.7 मिमी सामान्य के मुकाबले 49.9 मिमी बारिश दर्ज हुई है (54% कम) सुकमा: यहां 60.3 मिमी पानी गिरा है, जो सामान्य से 54% कम है। कोंडागांव, बीजापुर: कोंडागांव में 51.9 मिमी और बीजापुर में 28 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई है। मध्य छत्तीसगढ़ में सबसे ज्यादा चिंता रायपुर: 90.1 मिमी के मुकाबले 25.3 मिमी बारिश, 72% कम धमतरी: 112.6 मिमी के मुकाबले 34.2 मिमी दुर्ग: 113.9 मिमी के मुकाबले 34.2 मिमी महासमुंद: 105.4 मिमी के मुकाबले 20.7 मिमी बलौदाबाजार: 81.3 मिमी के मुकाबले सिर्फ 14 मिमी कई जिलों में 80% से ज्यादा बारिश की कमी राजनांदगांव: 100.3 मिमी के मुकाबले 8.3 मिमी, 92% कम (सबसे गंभीर स्थिति) मोहला-मानपुर-चौकी: 95% कम बलौदाबाजार व सारंगढ़-बिलाईगढ़: 83% कमी सक्ती: 83% कम खरीफ सीजन के लिए अगले 10 दिन अहम प्रदेश में मानसून देर से आने और कमजोर होने के कारण बारिश बहुत कम हुई है। इस वजह से ज्यादातर जिलों में अभी तक बोनी (बुवाई) के लायक खेतों में जरूरी नमी नहीं बन पाई है। रायपुर में आज ऐसा रहेगा मौसम रायपुर में आज (शनिवार) गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है। अधिकतम तापमान 37°C और न्यूनतम तापमान 25°C के आसपास रहने का अनुमान है।

भुवनेश्वर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरियाणा ने डिस्कस थ्रो में रचा इतिहास

भुवनेश्वर भुवनेश्वर में आयोजित 65वीं नेशनल इंटर स्टेट सीनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हरियाणा की महिला खिलाड़ियों ने भारतीय एथलेटिक्स में नया इतिहास रच दिया। डिस्कस थ्रो स्पर्धा में स्वर्ण, रजत और कांस्य, तीनों पदक हरियाणा की बेटियों ने अपने नाम किए। इसके साथ ही तीनों खिलाड़ियों ने एशियन गेम्स के लिए निर्धारित क्वालिफाइंग मानक भी हासिल कर राज्य की खेल प्रतिभा का लोहा मनवाया। पांच दिवसीय इस राष्ट्रीय चैंपियनशिप का आयोजन 24 से 28 जून तक कलिंगा स्टेडियम, भुवनेश्वर (ओडिशा) में किया जा रहा है। प्रतियोगिता में हरियाणा के खिलाड़ी विभिन्न स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन कर पदक जीतने के साथ-साथ भारतीय टीम में जगह बनाने की दौड़ में भी आगे हैं। आगामी एशियन गेम्स का आयोजन 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आइची-नगोया (जापान) में होगा। एथलेटिक्स हरियाणा के महासचिव प्रदीप मलिक के अनुसार, भिवानी की सीमा ने 59.73 मीटर की शानदार थ्रो के साथ स्वर्ण पदक जीतकर एशियन गेम्स के लिए भारतीय टीम में अपना स्थान लगभग सुनिश्चित कर लिया। वहीं महेंद्रगढ़ की सान्या यादव ने 56.05 मीटर की थ्रो के साथ रजत पदक और रोहतक की निधि रानी ने 55.92 मीटर की थ्रो के साथ कांस्य पदक जीतते हुए एशियन गेम्स का क्वालिफाइंग मानक हासिल किया। हैमर थ्रो स्पर्धा में भी हरियाणा के झज्जर निवासी आशीष जाखड़ ने 67.61 मीटर की थ्रो के साथ कांस्य पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। इस स्पर्धा में पंजाब के दमनीत सिंह ने 69.72 मीटर की थ्रो के साथ स्वर्ण तथा राजस्थान के परवीन कुमार ने 69.58 मीटर की थ्रो के साथ रजत पदक जीता। दोनों खिलाड़ियों ने भी एशियन गेम्स क्वालिफाइंग मानक हासिल किया। प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को एथलेटिक्स हरियाणा के अध्यक्ष दिलबाग सिंह, महासचिव प्रदीप मलिक, एएफआई ग्रीवेंस कमेटी के सदस्य राजकुमार मिटान तथा टीम कोच-मैनेजर जसवंत सिवाच और अजय कुमार ने बधाई देते हुए आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दीं।