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चंबल नदी जलीय जीव एवं पक्षियों की वार्षिक गणना के लिए सर्वेक्षण दल हुआ रवाना

भोपाल. चंबल नदी के घाट दांतरदा क्षेत्र में जलीय जीवों तथा प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों की वार्षिक गणना के लिये गठित सर्वेक्षण दल को मुख्य वन संरक्षक, ग्वालियर वृत्त और वनमंडलाधिकारी, मुरैना ने गुरुवार को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह सर्वेक्षण चंबल नदी क्षेत्र की जैव विविधता के संरक्षण, प्रबंधन एवं वैज्ञानिक आंकड़ों के संकलन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सर्वेक्षण दल में वन विभाग के फील्ड स्टाफ के साथ राजस्थान वन विभाग के प्रतिनिधि श्री भानु प्रताप सिंह एवं फील्ड स्टाफ भी शामिल हैं। सर्वेक्षण दल निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार चंबल नदी क्षेत्र में घड़ियाल, मगरमच्छ सहित अन्य जलीय जीवों तथा स्थानीय, प्रवासी और अप्रवासी पक्षियों की गणना करेगा। इस अवसर पर अधीक्षक, राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, श्योपुर श्री संदीप वास्कले, गेम रेंज ऑफिसर, सबलगढ़ श्री दीपक शर्मा सहित विभाग के अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।  

मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी 14 करोड़ रूपए की लागत से करेगी स्थापित

जबलपुर में स्थापित होगा देश का सबसे बड़ा मल्टी फंक्शनल ट्रेनिंग सिम्युलेटर मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी 14 करोड़ रूपए की लागत से करेगी स्थापित जबलपुर मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी (MPPGCL) जबलपुर के नयागांव स्थि‍त पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान में लगभग 14 करोड़ रूपए की लागत से देश का सबसे बड़ा मल्टी-फंक्शनल थर्मल एवं हाइड्रो ऑपरेटर ट्रेनिंग सिम्युलेटर स्थापित करने जा रही है। इस अत्याधुनिक सिम्युलेटर के माध्यम से विद्युत उत्पादन अभियंताओं को विद्युत संयंत्रों के संचालन, नियंत्रण एवं आपातकालीन परिस्थितियों के प्रबंधन का यथार्थपरक एवं व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त होगा, जिससे प्लांट ट्रिपिंग जैसी घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आएगी। यह सिम्युलेटर रिमोट ऑपरेशन की सुविधा से भी युक्त होगा। इससे पॉवर जनरेटिंग प्रशिक्षण संस्थान न केवल राज्य बल्कि अन्य राज्यों की विद्युत कंपनियों के अभियंताओं एवं तकनीकी विद्यार्थियों के लिए भी एक प्रमुख प्रशिक्षण केन्द्र के रूप में स्थापित होगा। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी अपने कार्मिकों को उच्च स्तरीय तकनीकी , वित्तीय एवं प्रबंधकीय दक्षताओं से सुसज्जित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए मुख्यालय स्थि‍त नयागांव में प्रशिक्षण संस्थान को अत्याधुनिक नवाचारों के साथ विकसित कर रही है। कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह, डायरेक्टर टेक्न‍िकल सुबोध निगम और डायरेक्टर कॉमर्श‍ियल  मिलिन्द भान्दक्कर के प्रगतिशील मार्गदर्शन में यह संस्थान देश के ऊर्जा क्षेत्र में एक विशिष्ट एवं अग्रणी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में उभर रहा है। मुख्य अभियंता मानव संसाधन व प्रशासन  दीपक कुमार कश्यप ने जानकारी कि प्रशिक्षण संस्थान में आधुनिक स्मार्ट कक्षाओं की स्थापना की जा रही है, जहाँ कंपनी के सभी कॉडर के कार्मिकों को तकनीकी, वित्तीय व प्रबंधकीय विषयों पर समग्र प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। यह संस्थान नवनियुक्त कार्मिकों व अभियंताओं के लिए प्रेरण प्रशिक्षण (इंडक्शन ट्रेनिंग) का प्रमुख केंद्र होगा। कंपनी की मिड-कैरियर ट्रेनिंग पॉलिसी के अंतर्गत करंट चार्ज अथवा पदोन्नति प्राप्त करने वाले सहायक अभियंता से लेकर अतिरिक्त मुख्य अभियंता स्तर तक के कार्मिकों को विशेष रूप से संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रमों से लाभान्वित किया जाएगा। निर्माणाधीन ‘मंत्रा’ ऑडिटोरियम एवं आईटी प्रशिक्षण केंद्र-प्रशिक्षण संस्थान परिसर में 150 सीटों की क्षमता वाला अत्याधुनिक ‘मंत्रा’ ऑडिटोरियम निर्माणाधीन है, जिसमें सम्मेलन, सेमिनार, कार्यशालाएँ एवं विभिन्न प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 21 कम्प्यूटर एवं समर्पित कार्यस्थलों से युक्त एक आधुनिक कम्प्यूटर प्रशिक्षण केंद्र भी विकसित किया जा रहा है, जहाँ ईआरपी, ऑटोकैड, प्राइमावेरा सहित विभिन्न तकनीकी एवं वित्तीय सॉफ्टवेयर पर व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित बहुआयामी प्रशिक्षण परिसर-प्रशिक्षण संस्थान में एक अत्याधुनिक मॉडल रूम एवं डिजिटल पुस्तकालय का विकास भी किया जा रहा है, जहाँ हाइड्रो एवं थर्मल पॉवर प्लांटों के कार्यशील मॉडल, कोल हैंडलिंग प्लांट, टरबाइन, जनरेटर, बॉयलर, ईएसपी, कंडेंसर एवं कूलिंग टावर जैसी प्रमुख मशीनों के मॉडल स्थापित किए जाएंगे। प्रशिक्षणार्थियों के आवास हेतु लगभग 3.8 करोड़ रुपये की लागत से 16 कमरों वाला छात्रावास निर्माणाधीन है, जिसमें डाइनिंग हॉल, किचन, रिक्रिएशन हॉल एवं मिनी जिम जैसी सुविधाएँ उपलब्ध होंगी। साथ ही, संस्थान में एक हाई-टेक स्टूडियो भी विकसित किया जाएगा, जहाँ विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण वीडियो की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग एवं एडिटिंग की जाएगी, जिनका प्रसारण विभिन्न शैक्षणिक एवं व्यावसायिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया जा सकेगा। मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी की यह पहल न केवल मानव संसाधन विकास की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगी, बल्कि आधुनिक तकनीक, नवाचार एवं प्रशिक्षण उत्कृष्टता के माध्यम से राज्य के ऊर्जा क्षेत्र को और अधिक सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।  

लखनऊ में चाइनीज मांझे से मौत पर मर्डर केस दर्ज, योगी ने जताया गुस्सा, यूपी भर में रेड की शुरुआत

लखऊ उत्तर प्रदेश में चाइनीज मांझे से मौत को अब हत्या माना जाएगा। ऐसी मौत मामले में मर्डर का केस चलेगा। प्रदेश में लगातार हो रहे हादसों पर सीएम योगी ने सख्ती दिखाई है। इसके इस्तेमाल और बिक्री पर रोक को लेकर सख्त रुख अपनाया है। हाल ही में हुई समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से पूछा कि प्रतिबंध के बावजूद बाजार में चाइनीज़ मांझा कैसे उपलब्ध हो रहा है। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाकर ऐसे मांझे की बिक्री, भंडारण और सप्लाई करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। सीएम योगी ने यह भी कहा कि चाइनीज़ मांझे से होने वाली मौतों को गंभीर अपराध माना जाएगा और जरूरत पड़ने पर ऐसे मामलों को हत्या की श्रेणी में दर्ज किया जा सकता है। इसके साथ ही अधिकारियों को जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि लोग इस खतरनाक मांझे के इस्तेमाल से बचें और सुरक्षित विकल्प अपनाएं। उन्होंने पुलिस प्रमुखों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध मांझे की सप्लाई चेन की पहचान कर बड़े स्तर पर छापेमारी की जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। आपको बता दें 4 फरवरी को लखनऊ में चाइनीज मांझे से गर्दन कटने की वजह से एमआर की मौत हो गई थी। वह बाइक से जा रहे थे। तभी उनके गले में चाइनीज मांझा फंस गया। खून से लथपथ होकर वह बाइक समेत गिर गए और करीब 10 मिनट तक तड़पते रहे। राहगीरों ने उन्हें ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। चाइनीज़ मांझा बेहद खतरनाक होता है और इससे लोगों की जान को गंभीर खतरा रहता है। जिसे देखते हुए सरकार इस मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। लखनऊ में चाइनीज मांझा बना काल लखनऊ से हैरान करने वाली घटना सामने आई है. हैदरगंज पुल पर बुधवार को दर्दनाक हादसा हो गया. चाइनीज मांझे से एक युवक की गर्दन कट गई. लहूलुहान हालत में युवक को अस्पताल में भर्ती कराया गया. जहां युवक की मौत हो गई. मृतक युवक की पहचान शोएब के रूप में हुई. शोएब परिवार का एकलौता बेटा था. वहीं, शोएब की मौत पर परिवार वाले आक्रोश में हैं. चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध की मांग की है.  बाइक सवार आया चपेट में  लखनऊ पुलिस के मुताबिक, शोएब दुबग्गा का रहने वाला था. बुधवार दोपहर वह अपनी बाइक से हैदरगंज ओवरब्रिज से जा रहा था. तभी अचानक चाइनीज मांझा उनके गले में फंस गया. मांझे से युवक की गर्दन पर गहरा घाव हो गया. युवक लहूलुहान होकर सड़क पर गिर पड़ा. राहगीर उसे अस्पताल ले गए. लेकिन चिकित्सक उसकी जान नहीं बचा पाए. बताया गया कि अस्पताल ले आते तक ब्लड ज्यादा ​बह गया था. वहीं, शोएब की मौत की खबर मिलते ही दुबग्गा स्थित उनके घर में कोहराम मच गया.  घटना की सूचना मिलते ही बाजारखाला पुलिस मौके पर पहुंची. शोएब के घर वालों ने चाइनीज मांझे पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर हंगामा किया. घर वालों का कहना है कि चाइनीज मांझा खुलेआम बिक रहा है. प्रशासन प्रतिबंध नहीं लगा पा रहा है. वहीं, इंस्पेक्टर ने बताया कि शोएब के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. परिजनों की ओर से तहरीर पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. चाइनीज मांझे के खिलाफ भी अभियान चलाया जाएगा. 

प्रभात मिश्रा बने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष, राज्य शासन ने जारी किया आदेश

रायपुर. प्रभात मिश्रा बने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष, राज्य शासन ने जारी किया आदेश छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य की राजभाषा को और ज्यादा सशक्त और प्रभावी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। शासन की ओर से प्रभात मिश्रा को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। इसे लेकर संस्कृति विभाग की ओर से आदेश भी जारी कर दिया गया है। जारी आदेश के मुताबिक राज्य शासन ने अपने निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए प्रभात मिश्रा को उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष पद पर नियुक्त किया है।  शासन के इस फैसले को राजभाषा के प्रचार-प्रसार और शासकीय कार्यों में हिंदी के प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है। नवनियुक्त अध्यक्ष प्रभात मिश्रा रायपुर जिले के टिकरापारा स्थित नंदी चौक क्षेत्र के रहने वाले हैं। प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र में उनके अनुभव को देखते हुए शासन ने उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।

छत्तीसगढ़ में सुशासन की नई रूपरेखा, साय सरकार का मॉडल

रायपुर. ग्राउंड से ग्रोथ तक: छत्तीसगढ़ में साय सरकार का सुशासन मॉडल छत्तीसगढ़ आज ग्रामीण विकास के उस मुकाम पर खड़ा है, जहाँ नीतियाँ केवल कागज़ों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि ज़मीन पर ठोस बदलाव का माध्यम बन चुकी हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सुशासन को केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि कार्यशैली के रूप में अपनाया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), महात्मा गांधी नरेगा, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं के प्रभावी और पारदर्शी क्रियान्वयन ने छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण विकास का एक उभरता मॉडल बना दिया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में 8 लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण होना, देश में सर्वाधिक है। यह उपलब्धि केवल आंकड़ों की कहानी नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और गरिमापूर्ण जीवन की दिशा में एक बड़ा कदम है। मुख्यमंत्री  साय का मानना है कि आवास केवल छत नहीं, बल्कि सुरक्षा, स्थिरता और आत्मसम्मान का आधार है। यही कारण है कि राज्य सरकार ने आवास योजना को आजीविका से जोड़ा है। आवास हितग्राहियों को सेंटरिंग प्लेट एवं अन्य निर्माण की आपूर्ति कर 8 हजार से अधिक महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बन सकीं। छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी चुनौती रहे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सरकार ने सुरक्षा के साथ-साथ विकास और विश्वास को समान महत्व दिया है। कौशल प्रशिक्षण और पुनर्वास योजनाओं के माध्यम से युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। आर-सेटी एवं प्रोजेक्ट उन्नति के जरिए आत्मसमर्पित नक्सलियों सहित 5 हजार से अधिक हितग्राहियों को राजमिस्त्री का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, 3416 आत्मसमर्पित नक्सलियों और नक्सल पीड़ित परिवारों को आवास की स्वीकृति दी गई है। पीएम-जनमन आवास योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 33 हजार से अधिक आवासों की स्वीकृति इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। साय सरकार ने योजनाओं की निगरानी में आम नागरिक को सहभागी बनाकर पारदर्शिता को नई परिभाषा दी है। टोल-फ्री हेल्पलाइन, पंचायत स्तर पर क्यूआर कोड और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से कोई भी व्यक्ति विकास कार्यों की जानकारी सीधे प्राप्त कर सकता है। प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों को मनरेगा, उज्ज्वला, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और पीएम सूर्यघर जैसी योजनाओं से अभिसरण के माध्यम से जोड़ा गया है, जिससे समग्र लाभ सुनिश्चित हो रहा है। ‘मोर गांव मोर पानी’ महाभियान छत्तीसगढ़ की जल संरक्षण नीति का प्रतीक बनकर उभरा है। नरेगा के तहत दो वर्षों में 20 करोड़ से अधिक मानव दिवसों का सृजन हुआ है। जल संरक्षण के लिए 35 हजार से अधिक कार्य और 10 हजार से अधिक आजीविका डबरियों की स्वीकृति ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दी है। युक्तधारा पोर्टल के माध्यम से जीआईएस आधारित योजना निर्माण में छत्तीसगढ़ ने देश के अग्रणी राज्यों में स्थान बनाया है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत 2.82 लाख से अधिक स्व-सहायता समूहों से लगभग 30 लाख महिलाएँ जुड़ी हैं। ‘लखपति दीदी’ अभियान के माध्यम से अब तक 4.94 लाख महिलाएँ आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। महिलाओं की आवाज़ को मंच देने के लिए ‘दीदी के गोठ’ रेडियो कार्यक्रम और उनके उत्पादों के विपणन हेतु ‘छत्तीसकला’ ब्रांड राज्य सरकार के नवाचारों के प्रमाण हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत 2902 किलोमीटर सड़कों की स्वीकृति और 1064 किलोमीटर सड़कों का निर्माण पूर्ण होना, दूरस्थ और जनजातीय अंचलों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। प्रधानमंत्री जनमन योजना के अंतर्गत स्वीकृत सड़कों के निर्माण में छत्तीसगढ़ देश में अग्रणी राज्य है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के विभिन्न चरणों में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में दशकों से अधूरी पड़ी 43 सड़कों को पूरा कर सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि विकास अब किसी क्षेत्र या वर्ग तक सीमित नहीं रहेगा। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का कहना है कि शासन का वास्तविक उद्देश्य आम नागरिक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। आवास, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, जल संरक्षण और अधोसंरचना के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ आज समावेशी और आत्मनिर्भर विकास की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। पारदर्शी, नवाचारी और जनोन्मुखी कार्यप्रणाली के कारण छत्तीसगढ़ अब केवल एक राज्य नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास का राष्ट्रीय मॉडल बन रहा है।

महिला शक्ति और वनोपज का सफल संगम, हरिबोल स्व-सहायता समूह ने रचा आर्थिक सशक्तिकरण का उदाहरण

रायपुर. बढ़ती मांग, मजबूत बाजारः स्थानीय से प्रदेश स्तर तक वनौषधियों की निरंतर आपूर्ति ग्रामीण अंचलों में वनोपज पर आधारित आजीविका सदियों से महिलाओं के जीवन और आर्थिक संरचना का अभिन्न हिस्सा रही है। जंगलों से प्राप्त वनोषधि एवं अन्य वनोपज न केवल पारंपरिक ज्ञान का प्रतीक हैं, बल्कि आज के समय में महिला स्वावलंबन, स्वास्थ्य और सतत रोजगार का मजबूत आधार भी बन रहे हैं। जब संगठित प्रयास, प्रशिक्षण और बाजार से जुड़ाव मिलता है, तब यही वनोपज ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आत्मनिर्भरता और सम्मान का नया अध्याय रचते हैं। इसी सोच को साकार करता हुआ एक सशक्त उदाहरण है कोरबा जिले के ग्राम डोंगानाला का हरिबोल स्व सहायता समूह है, वर्ष 2006-07 में यूरोपियन कमीशन परियोजना के अंतर्गत स्वीकृत इस पहल के माध्यम से गठित हरिबोल स्व सहायता समूह ने आज महिला सशक्तिकरण की एक सफल मिसाल कायम की है। 12 महिला सदस्यों से युक्त यह समूह वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र, डोंगानाला का सफल संचालन कर रहा है, जहां कच्ची वनौषधियों का संग्रहण, वैज्ञानिक पद्धति से प्रसंस्करण एवं विपणन किया जाता है। समूह की महिलाएं स्वयं जंगलों से कच्ची वनौषधि एकत्र कर, निर्धारित घटक मात्रा के अनुसार प्रसंस्करण कार्य करती हैं। प्रसंस्करित वनौषधियों की मांग स्थानीय स्तर के साथ-साथ प्रदेश स्तर पर भी निरंतर बनी हुई है। समूह द्वारा उत्पादित वनौषधियों का विक्रय एन.डब्ल्यू.एफ.पी. मार्ट बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, कांकेर, अंबिकापुर, जगदलपुर सहित संजीवनी केंद्र केवची (कटघोरा) एवं कोरबा में किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रसंस्करण केंद्र में नियुक्त वैद्य द्वारा स्थानीय एवं आसपास के क्षेत्रों के 1500 से अधिक मरीजों का सफल उपचार किया जा चुका है। समूह की महिलाओं द्वारा हिंगवाष्टक चूर्ण, अजमोदादि चूर्ण, अश्वगंधादि चूर्ण, सितोपलादि चूर्ण, अविपत्तिकर चूर्ण, बिल्वादि चूर्ण, पुष्यानुग चूर्ण, त्रिफला चूर्ण, पंचसम चूर्ण, शतावरी चूर्ण, आमलकी चूर्ण, पायोकिल (दंतमंजन), सर्दी-खांसी नाशक चूर्ण, हर्बल कॉफी चूर्ण, महिला मित्र चूर्ण, हर्बल मधुमेह नाशक चूर्ण, हर्बल फेसपैक चूर्ण तथा हर्बल केशपाल चूर्ण का निर्माण किया जा रहा है। आर्थिक दृष्टि से हरिबोल स्व सहायता समूह ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्तमान में समूह द्वारा 20 लाख 52 हजार रुपये की वार्षिक आय अर्जित की जा रही है तथा प्रतिवर्ष लगभग 50 लाख रुपये की वनौषधियों का विक्रय किया जाता है। इससे प्रत्येक सदस्य को औसतन 1.71 लाख रुपये प्रति वर्ष की आमदनी प्राप्त हो रही है। बीते दो वर्षों में समूह का विक्रय एवं लाभ दोनों दोगुने हुए हैं, जहां पूर्व में वार्षिक लाभ 10.68 लाख रुपये था, जो वर्तमान में बढ़कर 20.52 लाख रुपये हो गया है। वन मंडलाधिकारी कटघोरा ने बताया कि यह वनौषधि प्रसंस्करण केंद्र समूह से जुड़ी महिलाओं को स्थायी रोजगार, आत्मनिर्भरता और आर्थिक सुरक्षा प्रदान कर रहा है। महिलाएं अपनी आय से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य उपचार, घरेलू आवश्यकताओं एवं त्यौहारों के खर्चों को सहजता से पूरा कर रही हैं। समूह की महिलाएं मासिक अंशदान के माध्यम से आपसी सहयोग, ऋण व्यवस्था और सामाजिक सहभागिता को भी मजबूत कर रही हैं। हरिबोल स्व सहायता समूह की उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहा गया है। वर्ष 2008 में फिलिप्स बहादुरी पुरस्कार प्राप्त करने के साथ ही भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन संघ (ट्राइफेड), भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 में वनधन विकास केंद्र, डोंगानाला को राष्ट्रीय स्तर पर अधिकतम प्रकार के वनोत्पाद निर्माण एवं विपणन हेतु प्रथम पुरस्कार तथा अधिकतम विक्रय हेतु द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया, केंद्रीय मंत्री  अर्जुन मुंडा द्वारा प्रदान किया गया। हरिबोल स्व सहायता समूह की यह सफलता इस बात का सशक्त प्रमाण है कि जब महिलाओं की पारंपरिक जानकारी को आधुनिक प्रसंस्करण और विपणन से जोड़ा जाता है, तब वनोपज न केवल आजीविका का साधन बनते हैं, बल्कि ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की मजबूत नींव भी तैयार करते हैं।

जमशेदपुर के मानगो निकाय चुनाव में बन्ना और सरयू में सिंदूर पर महाभारत!

जमशेदपुर. मानगो नगर निगम चुनाव के अखाड़े में अब विकास के मुद्दे आइसीयू में चले गए हैं, उनकी जगह एक चुटकी सिंदूर और व्यक्तिगत चरित्र हनन ने ले ली है। जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने गुरुवार को पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता के उन आपत्तिजनक आरोपों का चुन-चुनकर जवाब दिया, जिन्होंने शहर की राजनीति में भूचाल ला दिया था। राय ने दो टूक कहा कि जो व्यक्ति हर नारी को केवल देह की दृष्टि से देखता हो, उससे मर्यादा की उम्मीद करना ही बेमानी है। सियासी दंगल में गुरुवार को सरयू राय के तेवर रुद्र नजर आए। उन्होंने बन्ना गुप्ता को अल्पज्ञानी बताते हुए कहा कि किसी महिला के चरित्र पर अंगुली उठाना अक्षम्य अपराध है। राय ने स्पष्ट किया कि मधु और उनका पूरा शिक्षित परिवार (माता, बेटा और बेटी) उनके साथ रहता है। उन्होंने कहा, मैं रामार्चा पूजा में बैठता हूं, पंडित पूजा कराते हैं और संकल्प के समय कई महिलाएं मौजूद रहती हैं। बन्ना की सोच इतनी विकृत है कि उन्हें पवित्र संकल्प में भी केवल पति-पत्नी का रिश्ता दिखता है। बेहुदगी की भी एक सीमा होती है। सरयू राय ने बन्ना गुप्ता को आईना दिखाते हुए उनका वह अश्लील वीडियो याद दिलाया, जो विधानसभा चुनाव के कुछ दिन पहले रिलीज हुआ था। राय ने तीखा हमला करते हुए कहा, बन्ना गुप्ता को उस वीडियो वाली महिला को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेना चाहिए, क्योंकि सच्चाई सबके सामने है। जिसका अपना दामन दागों से भरा हो, वह दूसरों के सिंदूर और पूजा पर सवाल उठा रहा है। राय ने तंज कसा कि बन्ना गुप्ता मेयर पति बनकर नगर निगम के पैसों को लूटने की फिराक में हैं और इसी बौखलाहट में वे मानसिक संतुलन खो बैठे हैं। दरअसल, इस विवाद की पटकथा बुधवार को बन्ना गुप्ता ने लिखी थी। एक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान बन्ना ने सरयू राय के निजी जीवन पर सीधा हमला करते हुए ''आपरेशन सिंदूर'' छेड़ा था। बन्ना ने सार्वजनिक रूप से पूछा था कि सरयू राय जिस महिला के साथ सालों से रामार्चा पूजा में पति-पत्नी के रूप में बैठते हैं, उनके सम्मान में अपनी चुप्पी क्यों नहीं तोड़ते? बन्ना ने व्यंग्य करते हुए कहा था कि अगर रिश्ता इतना ही गहरा है, तो सरयू राय उस महिला की मांग में सिंदूर क्यों नहीं भर देते और उन्हें समाज में पत्नी का दर्जा क्यों नहीं देते? बन्ना ने राय पर दोहरा चरित्र जीने का आरोप लगाते हुए उन्हें सार्वजनिक रूप से इस रिश्ते को स्वीकार करने की चुनौती दी थी। अब मानगो की चुनावी जंग पूरी तरह व्यक्तिगत ईगो और चरित्र हनन की भेंट चढ़ चुकी है। एक तरफ बन्ना गुप्ता ने सिंदूर को हथियार बनाया, तो दूसरी तरफ सरयू राय ने नैतिकता और पुराने वीडियो के जरिए पलटवार किया। मानगो की राजनीति में अब कीचड़ इतना गहरा हो गया है कि जनता विकास के कम और विवादों के चर्चे ज्यादा कर रही है। अब देखना यह है कि मानगो की महारानियों की इस लड़ाई में यह व्यक्तिगत हमला किसे ले डूबता है।

गणतंत्र दिवस 2026 परेड के सहभागी रा.से.यो. के स्वयं सेवक लोक भवन में हुए सम्मानित

भोपाल. राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा है कि आत्मीय सद्भावना के साथ जरूरतमंद की मदद सच्ची समाज सेवा है। सेवा का भाव सबकी अंतरात्मा में निहित है। उसे अच्छे संस्कारों और मूल्यों से उभारने की जरूरत है। उन्होंने राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों से कहा कि आपके कार्यों से लोगों को खुशी मिले। किसी को दुख नहीं हो। हर दिन के अंत में चिंतन करें, क्योंकि समाज बदलने के लिए स्वयं को बदलना आवश्यक है। सबके लिए सद्भावना और निस्वार्थ सेवा से ही आत्मिक आनंद की प्राप्ति होती है। धन से क्षणिक सुख तो प्राप्त किया जा सकता है, किन्तु वास्तविक सुख संस्कारित आचरण से ही मिलता है।राज्यपाल  पटेल गुरुवार को लोकभवन में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना का ‘कैंपस टू कम्यूनिटी’ सफर ‘शिक्षा द्वारा समाज सेवा’ और ‘समाज सेवा द्वारा शिक्षा’ के महान लक्ष्य को प्राप्त करने का संकल्प है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना केवल प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि “स्वयं से पहले सेवा” के जीवन-मंत्र को अपनाने की साधना है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रीय सेवा योजना के युवा केवल विद्यार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा के समर्पित सिपाही हैं। उनका प्रत्येक कदम समाज की प्रगति, जागरूकता और संवेदनशीलता की दिशा में आगे बढ़ता है। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि राष्ट्रपति के समक्ष सलामी देना बड़ी उपलब्धि है, लेकिन असली सार्थकता तब है, जब स्वयंसेवक अपनी निस्वार्थ सेवा और अटूट संकल्प से वंचित और जरूरतमंद लोगों के जीवन में वास्तविक सुधार लाएँ। उन्होंने कहा कि समाज सेवा में सद्भाव होगा तभी वंचितों के जीवन में खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पथ पर युवाओं की अनुशासित और प्रभावशाली कदमताल ने प्रदेशवासियों का दिल जीता है। साथ ही यह संदेश दिया कि मध्यप्रदेश का युवा हर क्षेत्र में अग्रणी है। राज्यपाल  पटेल ने गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड में प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले स्वयंसेवकों और पुरस्कार प्राप्त युवाओं का लोकभवन में हार्दिक स्वागत किया। उनको उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दी। राज्यपाल  पटेल का कार्यक्रम में पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्रम भेंट कर स्वागत और स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। स्वागत उद्बोधन अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा  अनुपम राजन ने दिया और आभार प्रदर्शन आयुक्त उच्च शिक्षा  प्रबल सिपाहा ने किया। कार्यक्रम में राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, क्षेत्रीय निदेशक राष्ट्रीय सेवा योजना सहित अधिकारी और राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक उपस्थित थे। राज्यपाल  पटेल को MY भारत राष्ट्रीय सेवा योजना पुरस्कार प्राप्त करने वाले छात्रा आयुषी सिन्हा और सोमित दुबे ने पुरस्कार का अवलोकन कराया। पुरस्कार के संबंध में जानकारी दी। छात्रा रिमी शर्मा और संजय कुमार रजक ने एक माह के शिविर की गतिविधियों के संबंध में छायाचित्रों के माध्यम से जानकारी प्रस्तुत की। छात्रा प्रज्ञा सक्सेना और छात्र विनोद कुमार सेन ने शिविर की गतिविधियों और अनुभवों को साझा किया। राज्यपाल  पटेल ने नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस 2026 की राष्ट्रीय परेड में शामिल राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों को पुरस्कार और मेडल प्रदान किए। पुरस्कार और पदक प्राप्त करने वालों में आयुषी सिन्हा, सोमित दुबे, प्रज्ञा सक्सेना, विनोद कुमार सेन, आशा वरकड़े, रिमी शर्मा, अंतरा चौहान, आदित्य गौर, महेश चौहान और संजय कुमार रजक शामिल थे। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने समवेद स्वर में गीतों की उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को सजाया। उन्होंने ‘स्वयं सजें वसुंधरा, सवार दें’ और ‘गूंजे गगन में, महकें पवन में, हर एक मन में सद्भावना’ जैसे गीतों के माध्यम से सामाजिक चेतना और देशभक्ति का संदेश सभी उपस्थित जनों तक पहुँचाया।  

अलवर में बन रहा नीचे बना अंडरपास वाला पहला फोरलेन ओवरब्रिज

अलवर. राजस्थान के अलवर जिले में मेवात नगर डबल फाटक पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज का स्वरूप दिखने लगा है। यहां पिलर्स के निर्माण के बाद कास्टिंग का काम शुरू हो गया है। यह अलवर शहर का पहला फोरलेन पुल होगा, जिसके नीचे अंडरपास भी बनाया जा रहा है, जिससे छोटे वाहनों को सहूलियत मिलेगी। इसके निर्माण पर 62 लाख की लागत आएगी। 2 साल से चल रहा ओवरब्रिज का काम बता दें कि अलवर शहर में हसन खां मेवात नगर डबल फाटक पर पिछले दो साल से ओवरब्रिज बनने का काम चल रहा है। पुल बनाने के काम पीडब्ल्यूडी की देखरेख में हो रहा है। माना जा रहा है कि इस वर्ष शहरवासियों का ओवरब्रिज पर आवागमन शुरू हो जाएगा। लाखों लोगों को मिलेगी राहत इस फाटक से हर दिन 15 हजार से ज्यादा वाहन निकलते हैं। भिवाड़ी मार्ग से शहर आने वाले वाहन चालकों के साथ—साथ फाटक के नजदीकी क्षेत्रों के लोग भी यहीं से निकलते है। यहां से हर दिन 30 से ज्यादा ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में यहां अक्सर जाम के हालात बन जाते हैं। लेकिन, फोरलेन ओवरब्रिज बनने के बाद लाखों लोगों को राहत मिलेगी। फोरलेन ओवरब्रिज के नीचे अंडरपास भी बनेगा फोरलेन ओवरब्रिज के नीचे से अंडरपास भी बनेगा। अलवर का यह पहला पुल होगा, जिसके नीचे अंडरपास भी होगा। छोटे वाहनों के लिए अंडरपास की सुविधा होगी और बड़े वाहनों के लिए पुल रहेगा।

सरकार का फोकस ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर: मंत्री श्री वर्मा

भोपाल. राजस्व मंत्री  करण सिंह वर्मा ने कहा है कि ग्रामीण स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है, जिससे लोगों को उपचार के लिये सुविधाएँ सहज और सुलभ रूप से उपलब्ध हो सकें। प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ और आमजन के लिए सुलभ बनाने के उद्देश्य से निरंतर कार्य कर रही है। मंत्री  वर्मा सीहोर के ग्राम नापलाखेड़ी एवं ग्राम धामंदा में आयोजित लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  वर्मा ने ग्राम नापलाखेड़ी में 56.09 लाख रुपये की लागत से निर्मित उप स्वास्थ्य केंद्र और ग्राम धामंदा में 65 लाख रुपये की लागत से निर्मित आयुष्मान आरोग्य मंदिर का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि नवीन उप स्वास्थ्य केंद्र एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिर प्रारंभ होने से क्षेत्रीय नागरिकों को प्राथमिक उपचार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, टीकाकरण सहित विभिन्न जांच एवं परामर्श सुविधाएँ स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेंगी। आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को निःशुल्क उपचार की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिली है। मंत्री  वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य केवल उपचार उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि नागरिकों को बीमारियों की रोकथाम के प्रति जागरूक करना भी है। नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, संतुलित आहार, स्वच्छ पेयजल एवं साफ-सफाई की आदतें अपनाकर अनेक गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। प्रदेश सरकार स्वास्थ्य अधोसंरचना के विस्तार के लिए निरंतर कार्य कर रही है। इसके लिए नए स्वास्थ्य केंद्रों की स्थापना, पुराने भवनों का उन्नयन, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता एवं विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना सुनिश्चित की जा रही है। कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। इस अवसर पर जनप्रतिनिधियों सहित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।