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उज्जैन में शिव-विवाह उत्सव की शुरुआत, बाबा महाकाल नौ स्वरूपों में देंगे दर्शन, तैयारियां अंतिम चरण में

उज्जैन  महाशिवरात्रि में कुछ ही दिन का समय शेष बचा है। लेकिन शिव और पार्वती के विवाह के इस त्योहार को लेकर उज्जैन के बाबा महाकाल मंदिर में तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। मंदिर की दीवारों से लेकर शिखर पर रंग-रोगन किया जा रहा है। इसी के साथ 6 फरवरी से मंदिर में 9 दिनों तक चलने वाले उत्सव की शुरुआत होगी, जिसमें बाबा भक्तों को नौ अलग-अलग रूपों में दर्शन देंगे। बाबा महाकाल की नगरी में महाशिवरात्रि का त्योहार 9 दिन तक चलता है, जो 6 फरवरी से शुरू होगा और 15 फरवरी तक चलेगा, जिसमें रोजाना भगवान का रुद्राभिषेक, 24 घंटे निराकार रूप में दर्शन और जलधारी, रात के समय स्नान और वस्त्र धारण का कार्यक्रम रहेगा। साथ ही अलग-अलग नौ विग्रहों की स्थापना और पूजा की जाएगी। ये नौ दिन भगवान की पूजा नवरात्रि के नौ दिनों जैसी होती है। भक्तों के लिए मंदिर भी खुले रहेंगे और भक्त बाबा महाकाल पर जलधारी अर्पित कर पाएंगे। महाकाल मंदिर के पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि पहले दिन बाबा का दुशाला ओढ़ाकर श्रंगार होता है और फिर दूसरे दिन बाबा को शेषनाग धारण कराए जाते हैं। तीसरे दिन घटाघटा स्थापित किया जाता है, जो शिवलिंग के समान ही होता है। चौथे दिन प्रभु के छवि दर्शन होते हैं और पांचवें दिन बाबा को मन-महेश, उमा महेश, शिव तांडव और होलकर के रूप में सजाया जाता है। इस वर्ष 15 फरवरी को होने वाली खास पूजा और अनुष्ठान पर पुजारी पं महेश शर्मा ने बताया कि 15 फरवरी को जलधारी के साथ चारों पहर की पूजा और आरती होगी और रात के समय स्नान के साथ बाबा को दूल्हे के रूप में श्रंगार कर सजाया जाएगा और रात को विशेष श्रंगार पूजा होगी, जिसे सेहरा दर्शन भी कहा जाता है। इस दौरान नौ दिनों तक मंदिर परिसर में भजन और कीर्तन का आयोजन होगा और भक्तों के आगमन के लिए तैयारियां की जा रही हैं क्योंकि महाशिवरात्रि के दिन मंदिर में भीड़ बढ़ जाती है। मंदिर में हो रही तैयारी पर उन्होंने कहा कि गर्भगृह की सफाई, मंदिर के कुंड़ों की सफाई और रंग-रोगन का काम शुरू हो चुका है, जिसे 6 फरवरी तक खत्म करने की कोशिश रहेगी। अधिकारियों ने देखी व्यवस्था महापर्व 2026 के अवसर पर ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर जी के दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की संभावित अत्यधिक संख्या को दृष्टिगत रखते हुए दर्शन व्यवस्था को सुव्यवस्थित, सुरक्षित एवं सुगम बनाए जाने के उद्देश्य से कलेक्टर एवं श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के अध्यक्ष रोशन कुमार सिंह द्वारा आज श्री महाकालेश्वर मंदिर परिक्षेत्र एवं श्री महाकाल लोक के आंतरिक एवं बाह्य क्षेत्रों का विस्तृत भ्रमण एवं निरीक्षण किया गया।निरीक्षण के दौरान रोशन कुमार सिंह ने दर्शन मार्ग, श्रद्धालुओं की आवाजाही, सुरक्षा व्यवस्था, मूलभूत सुविधाओं तथा भीड़ प्रबंधन की व्यवस्थाओं का अवलोकन करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए। साथ ही मंदिर परिसर एवं श्री महाकाल लोक में चल रहे निर्माण कार्यों की प्रगति का भी जायजा लिया गया तथा संबंधित निर्माण एजेंसियों को कार्यों को समय-सीमा में गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए, जिससे महापर्व के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस अवसर पर मंदिर प्रशासक एवं अपर कलेक्टर प्रथम कौशिक, अतेंद्र सिंह एडीएम उज्जैन अभिलाष मिश्रा आयुक्त नगर पालिका निगम एवं संबंधित निर्माण एजेंसियों के प्रतिनिधि, मंदिर अधिकारी एवं प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

किसानों को राहत: छत्तीसगढ़ में धान खरीदी की अवधि बढ़ी, 4–5 फरवरी को भी होगी खरीद

रायपुर राज्य सरकार ने धान खरीदी की समय अवधि दो दिन बढ़ा दी है। अब चार और पांच फरवरी को भी धान खरीदी की जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को इसकी घोषणा की। पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कहा कि समीक्षा में जानकारी मिली कि कुछ किसानों के टोकन नहीं कट पाए हैं, कुछ पंजीयन नहीं कर पाए। इसलिए समय अवधि बढ़ाई जा रही है। राज्य के ऐसे किसान जो पंजीकृत है और जिनका टोकन कट चुके है, उन किसानों का धान खरीदा जाएगा। मुख्यमंत्री ने धान खरीदी के दिवस में बढ़ोतरी की  ने अपनी पड़ताल के बाद खबर प्रकाशित कर सरकार को चेताया था कि टोकन कट जाने के बाद भी प्रदेश के लगभग ढाई लाख किसानों का धान नहीं बिक पाया है। इसके बाद राज्य सरकार ने मामले को संज्ञान में लिया। कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने भी जिलों से जानकारी मांगी थी और इसके बाद मुख्यमंत्री ने धान खरीदी के दिवस में बढ़ोतरी कर दी। अब तक 140 लाख टन धान की खरीदी 15 नवंबर 2025 से शुरू धान खरीदी का महाभियान के तहत 31 जनवरी 2026 तक 25 लाख 11 हजार से अधिक किसानों से लगभग 140 लाख टन धान की खरीदी की गई है। धान खरीदी के एवज में इन किसानों को 33 हजार 149 करोड़ रुपये का भुगतान बैंक लिकिंग व्यवस्था के तहत किया जा चुका है। राज्य में इस वर्ष 27 लाख 43 हजार 145 किसानों ने पंजीयन कराया है। 2,740 धान उपार्जन केंद्रों के माध्यम से खरीदी की प्रक्रिया हुई है। शासन की यह व्यवस्था सुनिश्चित कर रही है कि वास्तविक किसान को ही लाभ मिले और बिचौलियों अथवा फर्जी प्रविष्टियों की कोई गुंजाइश न रहे। यह भी पढ़ें- रायपुर-दुर्ग के बीच सफर होगा और भी आसान, सिरसा गेट और खुर्सीपार में बनेंगे ग्रेड सेपरेटर, ₹77 करोड़ मंजूर ये किसान होंगे धान बेचने के पात्र   ऐसे किसान जिन्होंने 10 जनवरी 2026 के बाद टोकन के लिए आवेदन तो किया था, लेकिन उनका भौतिक सत्यापन अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।  वे किसान जिन्होंने 10 जनवरी 2026 के बाद आवेदन किया और सत्यापन के दौरान जिनके पास वास्तव में धान का स्टॉक (बचा हुआ धान) पाया गया है।  ऐसे किसान जिन्हें 28, 29 या 30 जनवरी 2026 के लिए टोकन जारी किया गया था, लेकिन वे किसी भी कारणवश निर्धारित तिथि पर अपना धान नहीं बेच पाए थे। हमने धान खरीदी की समीक्षा की है। कुछ किसान जिनका टोकन कट गया था और धान नहीं बेच पाए थे और कुछ किसानों का पंजीयन नहीं हो पाया था। इसलिए दो दिन और किसानों का धान खरीदेंगे। – विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़    

सालाना 6 हजार से बढ़कर 9 हजार! बिहार सरकार ने पीएम किसान और कर्पूरी निधि में की बढ़ोतरी

पटना बिहार में किसान सम्मान निधि योजना की राशि डेढ़ गुना बढ़ा दी गई है। इसके लिए नीतीश सरकार ने जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की है। इसके तहत किसानों को साल में 3000 रुपये एक्स्ट्रा मिलेंगे। यह राशि पीएम किसान सम्मान निधि की मौजूदा राशि के साथ ही डीबीटी के माध्यम से किसानों के खाते में सीधे ट्रांसफर की जाएगी। मंगलवार को बिहार विधानमंडल में पेश हुए बजट में इसकी घोषणा की गई। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत अभी तक हर साल कुल तीन किस्तों में लाभार्थियों को कुल 6000 रुपये दिए जाते हैं। एक किस्त में किसानों के खाते में 2000 रुपये आते हैं। अब बिहार सरकार ने कर्पूरी ठाकुर के नाम पर अलग से किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत की है। इसके तहत प्रति किस्त 1000 और कुल तीन किस्तों में 3000 रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे। इस तरह, बिहार के किसानों को पीएम किसान एवं जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि, दोनों योजनाओं को मिलाकर हर किस्त में कुल 3000 रुपये मिलेंगे। यानी कि साल में कुल तीन किस्तों में बिहार के किसानों को 6000 की बजाय कुल 9000 रुपये दिए जाएंगे। NDA ने चुनावी संकल्प पत्र में किया था वादा- बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए ने अपने चुनावी संकल्प पत्र में कर्पूरी ठाकुर के नाम से किसानों के लिए नई योजना शुरू करने का वादा किया था। एनडीए ने संकल्प किया था कि अगर वह दोबारा सत्ता में आते हैं तो पीएम किसान सम्मान निधि पाने वाले लाखों किसानों को साल में 3000 रुपये अतिरिक्त देंगे। पिछले बिहार चुनाव में एनडीए ने भारी बहुमत के साथ जीत दर्ज की और नीतीश कुमार के नेतृत्व में बीते नवंबर में नई सरकार का गठन हुआ। अब सरकार के पहले पूर्णकालिक बजट में इस योजना की शुरुआत करने की घोषणा कर दी गई है। इस योजना का लाभ बिहार के लगभग 73 लाख से ज्यादा किसानों को मिलेगा।

75 लाख की लूट केस में बड़ा खुलासा, होटल कर्मचारी समेत 4 आरोपी पुलिस गिरफ्त में

 नरसिंहपुर.  जिला मुख्यालय के मुशरान पार्क चौराहा के समीप स्थित होटल कुसुम वैली में हुई करीब 75 से 80 लाख रुपये की सनसनीखेज लूट के 4 आरोपियों को पुलिस ने चंद घंटों में गिरफ्तार कर लिया। 2-3 जनवरी की दरमियानी रात्रि करीब 2.30 बजे जिला मुख्यालय में मुशरान पार्क चौराहा के पास स्थित होटल कुसुम वैली के कर्मचारियों ने थाना में सूचना दी कि 3–4 नकाबपोश बदमाशों ने होटल में जबरन प्रवेश कर वहां रखी नकद राशि लूट ली है। सूचना मिलते ही सुबह 4 बजे पुलिस अधीक्षक डा. ऋषिकेश मीणा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप भूरिया के साथ स्वयं घटनास्थल पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। होटल में रखी रकम बना लालच की वजह जांच के दौरान सामने आया कि होटल कर्मचारी अनुज कुमार वाल्मीकि को होटल में रखी नकदी की पूर्व जानकारी थी। लालच में आकर उसने यह जानकारी रात्रिकालीन मैनेजर चंद्रेश रजक एवं राकेश कुमार शुक्ला को दी। फिर अनुज ने अपने साथी मोनू उर्फ डइया वंशकार निवासी रिप्टापार से संपर्क कर इस राशि को हड़पने की साजिश रची। इसके तहत मोनू अपने अन्य तीन साथियों के साथ होटल में पहुंचा और वहां मौजूद अनुज, राकेश शुक्ला व चंद्रेश रजक से दिखावटी मारपीट की और ड्राज में रखी हुई रकम निकालकर वहां से फरार हो गए।     पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक एवं तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए गए।     सीसीटीवी फुटेज लूट की साजिश उजागर करने में अहम कड़ी साबित हुई, जिसके आधार पर पुलिस ने तेजी से आरोपियों तक पहुंच बनाई। 4 गिरफ्तार, 3 फरार पुलिस अधीक्षक ऋषिकेश मीणा ने देर शाम पत्रकारवार्ता आयोजित कर वारदात के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि मामले में आरोपी चंद्रेश रजक निवासी यादव कॉलोनी नरसिंहपुर, राकेश कुमार शुक्ला निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर, अनुज कुमार वाल्मीकि निवासी लखीमपुर खीरी उ.प्र., हाल निवास नरसिंहपुर एवं मोनू उर्फ डइया बंशकार निवासी रिपटा पार, नरसिंहपुर को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में संलिप्त 3 अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।  

ग्वालियर में आसमानी आफत: ओलावृष्टि से खेत बर्फ में तब्दील, फसलें चौपट, किसान की मौत

ग्वालियर.  पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते ग्वालियर जिले में मंगलवार सुबह वर्षा और भारी ओलावृष्टि हुई। प्रकृति का यह प्रकोप भितरवार-चीनोर क्षेत्र के गांव कछौआ, बड़की सराय, जुझारपुर, भोरी, ररुआ, चीनोर, आंतरी, करहिया और सिकरौदा समेत 12 से अधिक गांवों में देखा गया। जहां पर भीषण ओलावृष्टि हुई। ओलावृष्टि की तीव्रता इतनी अधिक थी कि खेतों में फसलों के ऊपर चार-चार इंच तक बर्फ जम गई। बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजारा मंजर ऐसा था कि दूर-दूर तक फैली हरियाली गायब हो गई और पूरा इलाका बर्फ की चादर से ढका कश्मीर जैसा नजर आने लगा। किसानों के मुताबिक गेहूं, सरसों व चना आदि फसलों में 70 से 90 प्रतिशत तक नुकसान हुआ है। ओलावृष्टि की सूचना मिलते ही प्रशासन की टीमें फसलों में हुए नुकसान का सर्वे करने के लिए मौके पर पहुंची। कुछ गांवों में कलेक्टर रुचिका चौहान भी नुकसान को देखने के लिए पहुंची। मौसम विज्ञान केंद्र के मुताबिक आगामी 24 घंटों में गरज चमक के साथ वर्षा व ओलावृष्टि की संभावना अभी बनी हुई है। साथ ही कोहरा भी रहेगा। आसमानी बिजली से किसान की मौत शिवपुरी में आसमानी बिजली की चपेट में आने से एक किसान की मौत भी हो गई। कई खेतों में तो नुकसान का आकलन 70 से 90 प्रतिशत तक बताया जा रहा है। ओलावृष्टि की सूचना के बाद कलेक्टर रुचिका चौहान ने बड़की सराय व सिकरौदा गांव में पहुंचकर ओलावृष्टि से प्रभावित क्षेत्र निरीक्षण किया और किसानों से बात की। शिवपुरी में बिजली गिरने से किसान झुलसा शिवपुरी के सिलानगर निवासी वीर सिंह पुत्र रामप्रसाद आदिवासी उम्र 25 साल गांव में बटाई से खेती करता है। रात में खेत पर फसल की रखवाली के लिए रुका था। इसी दौरान तेज आंधी, वर्षा आदि से बचने के लिए वह खेत में बनी झोंपड़ी के अंदर जाकर सो गया। इसी दौरान आसमानी बिजली झोपड़ी गिरी, जिससे झोंपड़ी में आग लग गई। किसान झोपड़ी में लगी आग की चपेट में आ गया, जिससे उसकी जलने के कारण मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाकर मर्ग कायम कर लिया है।  

टैरिफ में की गई ऐतिहासिक कटौती सीएम योगी के $1 ट्रिलियन इकोनॉमी विजन को देगी मजबूती

लखनऊ  भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुई आर्थिक साझेदारी और अमेरिकी टैरिफ में की गई कटौती ने उत्तर प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक संभावनाओं को नई दिशा दे दी है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लागू टैरिफ को पहले के लगभग 50 प्रतिशत स्तर से घटाकर औसतन 18 प्रतिशत कर दिया है। यह निर्णय भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक और दृढ़ नेतृत्व का परिणाम है, जिसमें भारत ने अपनी नीतियों पर अडिग रहते हुए वैश्विक शक्तियों के साथ समानता के आधार पर संवाद किया। वैश्विक भरोसे की कसौटी पर खरा उतरा भारत मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फार्मा कॉन्क्लेव में स्पष्ट शब्दों में कहा कि 2014 से पहले जिस भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, आज वही भारत अपनी नीतियों पर दृढ़ रहते हुए वैश्विक शक्तियों को भी संवाद और सहयोग के लिए विवश कर रहा है। भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है। अमेरिकी टैरिफ में की गई यह कटौती इसी बदले हुए वैश्विक दृष्टिकोण का प्रमाण मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अब भारतीय निर्यातकों पर लगने वाला अतिरिक्त ‘पेनल्टी टैरिफ’ हट चुका है और केवल रेसिप्रोकल टैक्स स्ट्रक्चर लागू है, जिससे भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में पहले से कहीं अधिक प्रतिस्पर्धी बन गए हैं। एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर को मिलेगा सीधा और दीर्घकालिक लाभ अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर लगाए जाने वाले आयात शुल्क में की गई कटौती का व्यापक और प्रत्यक्ष असर उत्तर प्रदेश के एमएसएमई और ओडीओपी सेक्टर पर पड़ने वाला है। भदोही के हस्तनिर्मित कालीन, मुरादाबाद के पीतल व धातु उत्पाद, आगरा का चमड़ा उद्योग, वाराणसी की रेशमी साड़ियां और कन्नौज का पारंपरिक इत्र अब अमेरिकी बाजार में पहले की तुलना में कम लागत और बेहतर लाभांश के साथ पहुंच सकेगा। अब तक ऊंचे टैरिफ के कारण ये उत्पाद कीमत के मामले में चीन, वियतनाम और बांग्लादेश जैसे देशों से पिछड़ जाते थे, लेकिन शुल्क में कमी के बाद उत्तर प्रदेश के पारंपरिक उद्योग वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती से खड़े हो सकेंगे।  आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल निर्यात ऑर्डर बढ़ेंगे, बल्कि सीधे निर्यात को भी प्रोत्साहन मिलेगा, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और कारीगरों को उनकी मेहनत का सही मूल्य मिलेगा। इसका सकारात्मक असर रोजगार पर भी दिखाई देगा। उत्पादन बढ़ने से बुनकरों, शिल्पकारों, कारीगरों और छोटे उद्योगों में काम करने वाले लाखों लोगों को नियमित रोजगार मिलेगा, वहीं नई यूनिट्स की स्थापना से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।  डिफेंस कॉरिडोर में तकनीक का होगा प्रवेश भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और व्यापारिक रिश्तों में आई मजबूती का प्रभाव अब रणनीतिक क्षेत्रों तक भी महसूस किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब दो देश व्यापार और निवेश के मोर्चे पर एक-दूसरे के प्रति भरोसा जताते हैं, तो उसका स्वाभाविक विस्तार रक्षा और उन्नत तकनीक जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी होता है। इसी क्रम में भारत-अमेरिका के बीच बढ़ते सहयोग का सकारात्मक असर उत्तर प्रदेश के डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर भी दिख सकता है। झांसी, कानपुर, लखनऊ, अलीगढ़ और आगरा जैसे रणनीतिक नोड्स अब केवल असेंबली यूनिट्स तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि यहां टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त उपक्रमों और उच्चस्तरीय अनुसंधान के माध्यम से उन्नत रक्षा उपकरणों के निर्माण की संभावनाएं आकार ले रही हैं।  जानकारों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ संभावित सहयोग से ड्रोन सिस्टम, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार एवं राडार सिस्टम तथा अत्याधुनिक कंपोनेंट्स का निर्माण प्रदेश में ही संभव हो सकता है। टैरिफ में कटौती से बने अनुकूल निवेश माहौल और भारत की नीतिगत स्थिरता ने विदेशी कंपनियों का भरोसा बढ़ाया है, जिसका लाभ रक्षा क्षेत्र को भी मिलने की संभावना जताई जा रही है। इससे न केवल आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त होगी।  इस बदलाव का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के युवाओं को मिलने वाला है। उन्नत मैन्युफैक्चरिंग और रक्षा तकनीक से जुड़े प्रोजेक्ट्स के कारण इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। साथ ही एमएसएमई सेक्टर को भी रक्षा आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय उद्योगों को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी। आईटी, जीसीसी और डेटा सेंटर सेक्टर को मिलेगी गति भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ में कटौती और द्विपक्षीय व्यापारिक संबंधों में आई मजबूती का असर केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका विस्तार उच्च तकनीक और डिजिटल अर्थव्यवस्था तक भी देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब वैश्विक स्तर पर व्यापार बाधाएं कम होती हैं और नीतिगत स्थिरता का संकेत मिलता है, तो अंतरराष्ट्रीय टेक कंपनियों के लिए निवेश निर्णय लेना आसान हो जाता है। इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश की जीसीसी नीति-2024 को नया बल मिलता नजर आ रहा है। नोएडा और लखनऊ में विकसित हो रहा एआई, आईटी और डेटा सेंटर इकोसिस्टम अब अमेरिकी और अन्य वैश्विक टेक कंपनियों के लिए अधिक आकर्षक बनता जा रहा है। टैरिफ कटौती से आईटी हार्डवेयर, सर्वर, नेटवर्किंग उपकरण और सेमीकंडक्टर से जुड़ी आयात लागत में संभावित कमी आने से डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स की आर्थिक संभाव्यता और बेहतर होगी। इससे बड़े पैमाने पर कैपिटल-इंटेंसिव निवेश को गति मिलने की संभावना जताई जा रही है। जानकारों का मानना है कि अनुकूल व्यापार माहौल और मजबूत भारत-अमेरिका तकनीकी सहयोग के चलते नोएडा, ग्रेटर नोएडा और लखनऊ जैसे शहर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के नए हब के रूप में उभर सकते हैं। इन केंद्रों के माध्यम से क्लाउड कंप्यूटिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी, फिनटेक और एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में उच्चस्तरीय कार्य होंगे, जिससे प्रदेश के युवाओं को वैश्विक स्तर के रोजगार के अवसर मिलेंगे।  राज्य सरकार का फोकस डेटा सेंटर, एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी, जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट और स्थिर बिजली आपूर्ति जैसे बुनियादी ढांचे पर है। इन कारकों और टैरिफ कटौती से बने सकारात्मक वैश्विक माहौल के चलते डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और आईटी सेवाओं में आने वाले वर्षों में हजारों करोड़ रुपये के निवेश की संभावनाएं बन सकती हैं। … Read more

बिहार इंटर की छूटी परीक्षा तो अप्रैल में दे सकेंगे विशेष एग्जाम

पटना. इंटरमीडिएट परीक्षा के पहले दिन पहली पाली में जीव विज्ञान, दर्शनशास्त्र और दूसरी पाली में कला व वाणिज्य संकाय के अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा हुई। राज्य भर में पहले दिन विलंब से परीक्षा केंद्रों पर पहुंचने वाले परीक्षार्थियों को प्रवेश नहीं दिया गया है। परीक्षा की निर्धारित अवधि के आधा घंटा पहले केंद्र का मेन गेट बंद कर दिया जाता है। इसकी घोषणा लगातार माइक से की जाती है। जिन परीक्षार्थियों की पहले दिन किसी भी कारण परीक्षा छूटी है, वह अन्य पेपर की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। बोर्ड ने कहा कि किन्हीं कारणों से परीक्षा छूटने पर विद्यार्थी अप्रैल में आयोजित विशेष परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। उसका परिणाम मई में आएगा। इंटर की परीक्षा 13 फरवरी तक संचालित होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि किसी भी स्थिति में परीक्षा प्रारंभ होने के निर्धारित समय के आधा घंटे पहले केंद्र का मुख्य द्वार बंद कर दिया जाएगा। परीक्षार्थी निर्धारित समय में केंद्र में प्रवेश कर लें। निर्धारित समय के एक घंटा पहले केंद्र में परीक्षार्थियों को प्रवेश दिया जा रहा है। दूसरे दिन यानी तीन फरवरी को प्रथम पाली में साइंस व आर्ट्स के परीक्षार्थियों के लिए गणित, वहीं, दूसरी पाली में कला संकाय के परीक्षार्थियों के लिए राजनीति व वोकेशनल कोर्स के परीक्षार्थियों के लिए फाउंडेशन कोर्स की परीक्षा ली जाएगी। दूसरी पाली में भी विलंब से पहुंचे दर्जनों विद्यार्थी राजधानी के विभिन्न केंद्रों पर दूसरी पाली की परीक्षा में भी विलंब से आने वाले विद्यार्थियों की परीक्षा छूटने की सूचना है। पहले दिन पहली पाली में जीव विज्ञान, दर्शनशस्त्र और दूसरी पाली में कला संकाय के अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा हुई। पहली पाली की परीक्षा सुबह 9.30 से दोपहर 12.45 बजे तक और दूसरी पाली की परीक्षा दोपहर 1.30 से शाम 5.15 बजे तक संचालित हुई। पटना जिले में इंटर परीक्षा से 574 अनुपस्थित  जागरण संवाददाता, पटना : प्रथम पाली में पटना जिले में 98.55 प्रतिशत परीक्षार्थियों की उपस्थिति दर्ज की गई। प्रथम पाली में कुल 27,119 विद्यार्थियों में 26,727 उपस्थित रहे। यानी प्रथम पाली में 392 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। वहीं, दूसरी पाली में 97.17 प्रतिशत विद्यार्थी उपस्थित रहे। यानी कुल 7,006 विद्यार्थियों में 6,808 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए, जबकि 198 विद्यार्थी अनुपस्थित रहे।

जितनी बेहतर तैयारी होगी होगी, उतने प्रभावी ढंग से होगा चुनौती का समाधान: मुख्यमंत्री

लखनऊ. प्रदेश में संभावित बाढ़ और अतिवृष्टि की चुनौतियों को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को व्यापक तैयारी और प्रभावी समन्वय पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जितनी बेहतर तैयारी होगी, उतनी ही तेजी और सफलता से चुनौती का समाधान किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री ने बाढ़/अतिवृष्टि पूर्व प्रबंधन की विस्तृत समीक्षा करते हुए सभी तटबंधों, ड्रेनों और संवेदनशील स्थानों की समयबद्ध मरम्मत, सुदृढ़ीकरण और निगरानी को अनिवार्य बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि सतर्कता, समन्वय और तय समयसीमा में काम पूरा करना ही सुरक्षित बाढ़ प्रबंधन की मूल कुंजी है। बैठक में प्रमुख सचिव सिंचाई एवं जल संसाधन ने बताया कि उत्तर प्रदेश में गंगा, सरयू (घाघरा) राप्ती, रामगंगा, गंडक, यमुना, गोमती और सोन नदी बेसिन के आस-पास के जनपद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। नदी-पट्टी और वर्षा पैटर्न का विश्लेषण करते हुए इस वर्ष 12 जनपदों में 18 तटबंधों को संवेदनशील चिह्नित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 241.58 किमी है। 11 जनपद के 19 तटबंधों को अति संवेदनशील चिन्हित किया गया है, जिनकी कुल लंबाई 464.92 किमी है। इन सभी स्थानों पर अग्रिम सुरक्षा कार्य प्राथमिकता पर चल रहे हैं। बैठक में बताया गया कि ग्रामीण इलाकों में जल-निकासी को सुचारु रखने के लिए बड़े पैमाने पर ड्रेनों की सफाई और ड्रेजिंग कराई जा रही है। विभाग के अधीन कुल 10,727 ड्रेन हैं, जिनकी संयुक्त लंबाई 60,047 किमी है। कई महत्त्वपूर्ण रूटों की सफाई पूरी हो चुकी है और शेष कार्य तय समय में पूरे किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए अनुमोदित ड्रेजिंग परियोजनाएं जनपदवार लागू की जा रही हैं, जिससे नदी प्रवाह सुधरेगा और तटीय इलाकों में जलभराव कम होगा। इसके साथ ही वर्ष 2026 की संभावित बाढ़ स्थिति को ध्यान में रखते हुए नई सुरक्षा परियोजनाएं भी प्रस्तावित की गई हैं, जिनके परीक्षण और अनुमोदन की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी तटबंधों और बैराजों पर रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। उन्होंने ड्रोन-मैपिंग, वाटर लेवल सेंसर और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय को और मजबूत बनाने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां कहीं नदी के मेन स्ट्रीम में सिल्ट की अधिकता हो, नदी उथली हो, वहां ड्रेजिंग को प्राथमिकता दी जाए और नदी को चैनलाइज किया जाए। यदि ड्रेजिंग से समाधान होना संभव न हो, तब ही तटबंध अथवा कटान निरोधी अन्य उपायों को अपनाया जाये।

उद्योग से जुड़े लोगों को दिया गया पं. दीन दयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान, ‘रेशम मित्र’ पत्रिका का विमोचन

लखनऊ उत्तर प्रदेश में सिल्क उद्योग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आज लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में सिल्क एक्सपो-2026 का शुभारंभ हुआ। एक्सपो का उद्घाटन प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा रेशम उद्योग मंत्री राकेश सचान ने किया। पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप भी इस अवसर पर मौजूद रहे। इस मौके  पर ‘रेशम मित्र-2025’ पत्रिका के विमोचन के साथ ही उद्योग से जुड़े लोगों को सम्मानित भी किया गया। एक्सपो के आयोजन से सिल्क उत्पादकों व उद्यमियों को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही प्रदेश में सिल्क उत्पादन तथा इससे जुड़े उद्योगों व व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। मंत्री राकेश सचान ने इस अवसर पर रेशम उत्पादकों व उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री रेशम विकास योजना के तहत प्रदेश सरकार का लक्ष्य दस वर्षों में लगभग 13,500 उत्पादकों को लाभ पहुंचाना है। योजना के तहत अब तक 1630 लाभार्थियों को 32.49 करोड़ रुपये की अनुदान सहायता दी जा चुकी है, जिससे उत्पादन में अच्छी वृद्धि हुई है। इसके साथ ही 9,000 एकड़ में शहतूत पौधरोपण का कार्य जारी है, जिससे 360 मीट्रिक टन अतिरिक्त रेशम उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। प्रदेश में रेशम उद्योग उत्पादकों व बुनकरों को नियमित रोजगार के अवसर दे रहा है। मल्टी रीलिंग इकाइयों की स्थापना से प्रसंस्करण की सुविधाएं मजबूत हुई हैं। रेशम मित्र पोर्टल के जरिए ऑनलाइन आवेदन, निगरानी और पारदर्शी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। इस अवसर पर उपस्थित पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री नरेंद्र कश्यप ने कहा कि डबल इंजन सरकार के समर्थन से उत्तर प्रदेश में रेशम उद्योग ने अभूतपूर्व प्रगति की है। प्रदेश में रेशम उत्पादन 27 मीट्रिक टन से बढ़कर अब 450-500 मीट्रिक टन तक पहुंच गया है, जो आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य को मजबूती दे रहा है। साथ ही प्रदेश गरीब और पिछड़े तबके के लोगों को आय और रोजगार के नये अवसर प्रदान कर रहा है।  इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान (आईजीपी) के मरकरी हॉल में आयोजित सिल्क एक्सपो के उद्घाटन अवसर पर प्रदेश के रेशम उद्योग से जुड़े 16 उत्पादकों, बुनकरों, उद्यमियों और अन्य योगदानकर्ताओं को पं. दीन दयाल उपाध्याय रेशम रत्न सम्मान प्रदान किया गया। साथ ही रेशम निदेशालय की विभागीय उपलब्धियों पर आधारित ‘रेशम मित्र-2025’ पत्रिका का विमोचन भी किया गया। सिल्क एक्सपो, 06 फरवरी 2026 तक चलेगा, जहां देशभर के बुनकर और व्यापारी हाथ से बने रेशमी वस्त्र, साड़ियां, दुपट्टे और अन्य उत्पाद लेकर आए हैं। यह आयोजन प्रदेश के रेशम उद्योग को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने के साथ यूपी को रेशम उत्पादन व निर्यात का केंद्र बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रहा है।

बेंगलुरु में मकर संक्रांति महोत्सव में दिखा बिहार-झारखंड की संस्कृति का जलवा

रांची. बेंगलुरु में 1 फरवरी 2026 को एचएसआर लेआउट के समर्थनम प्रेक्षा गृह में ज्योति होप फाउंडेशन की ओर से दूसरा मकर संक्रांति महोत्सव का आयोजन बड़े हर्षोल्लास के साथ किया गया. इस अवसर पर नगर में निवास करने वाले बिहार और झारखंड के प्रबुद्ध नागरिकों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया. यह आयोजन एक मिलन समारोह के रूप में सामने आया, जहां परंपरा, संस्कृति और सामाजिक एकता का सुंदर समावेश देखने को मिला. विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति समारोह में झारखंड से रांची सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड के अनिरुद्ध सिंह और कर्नाटक के पूर्व पुलिस महानिदेशक असित मोहन प्रसाद बतौर विशिष्ट अतिथि शामिल हुए. उल्लेखनीय है कि श्री असित मोहन प्रसाद मूल रूप से रांची के निवासी हैं, जिससे कार्यक्रम में झारखंड से भावनात्मक जुड़ाव और गहरा हो गया. अतिथियों की उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की. भोजपुरी, मिथिला और नागपुरी संस्कृति की रंगारंग प्रस्तुति कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रहीं. बिहार की भोजपुरी और मिथिला लोकसंस्कृति के साथ झारखंड के नागपुरी नृत्य-गीत ने दर्शकों का मन मोह लिया. रांची सिक्योरिटी के मरदा रायडीह स्थित श्रीधर जान संस्थान से प्रशिक्षित और कर्नाटक के हासन शहर में हिम्मतसिंगका कंपनी में कार्यरत युवतियों की नागपुरी नृत्य प्रस्तुति को खूब सराहना मिली. यह प्रस्तुति झारखंड की सांस्कृतिक विरासत के लिए गर्व का विषय बनी. सम्मान, उपहार और पारंपरिक स्वाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों के उपरांत गणमान्य अतिथियों को झारखंडी जोहार शॉल और मिथिला पेंटिंग भेंट कर सम्मानित किया गया. साथ ही ज्योति होप फाउंडेशन की ओर से प्रत्येक आगंतुक को उपहार प्रदान किया गया. मकर संक्रांति के अवसर पर दही-चिवड़ा, गुड़ और तिलकुट सहित पारंपरिक एवं स्वादिष्ट व्यंजनों का सभी ने भरपूर आनंद लिया. संस्कृति, समरसता और भावी पीढ़ी का संदेश इस मकर संक्रांति मिलन समारोह का मुख्य उद्देश्य प्रदेश से बाहर रहते हुए भी बिहार और झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखना है. सामाजिक समरसता, परंपरा और सामुदायिक गर्व की भावना को सशक्त करना इस आयोजन का मूल भाव रहा. ऐसे कार्यक्रम भावी पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़े रहने का अवसर प्रदान करते हैं. राष्ट्रभक्ति के संदेश के साथ समापन फाउंडेशन की अध्यक्षा डॉ ज्योति राज ने भारत भारती संस्था का परिचय देते हुए राष्ट्रीय एकता, एकात्मता और विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में सभी से योगदान देने का आह्वान किया. कार्यक्रम का समापन बंदे मातरम राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर सामूहिक गान के साथ हुआ. आयोजन को सफल बनाने में ई-कॉम्प टेक्नोलॉजी के प्रबंध निदेशक गौतम राज की विशेष भूमिका रही.