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अपराधियों पर योगी का बड़ा बयान: कानून से नहीं मानोगे तो गोली की भाषा समझाई जाएगी

लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर अपनी सरकार की नीति को एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है। अपराधियों के खिलाफ पुलिस की मुठभेड़ की कार्रवाइयों पर उठने वाले सवालों का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपराध और अपराधियों के प्रति हमारी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है और इसमें किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि टिप्पणी की जाती है कि पुलिस ने गोली क्यों मारी? सीएम योगी ने पूछा कि पुलिस गोली न मारे तो क्या गोली खाए? कहा कि जो जिस भाषा में समझेगा उसे उसी भाषा में समझाया ही जाएगा। सीएम योगी मंगलवार को लखनऊ में आयोजित पहले फार्मा कान्क्लेव को संबोधित कर रहे थे। सीएम योगी का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले ही हफ्ते इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी में हो रहे हाफ एनकाउंटर (पैर में गोली मारने की घटनाओं) पर सवाल उठाते हुए कहा था कि पुलिस के पास दंड देने का हक नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने तय किया है कि कानून सभी के लिए बराबर है। कोई अपना या पराया नहीं है। यदि कोई अपना व्यक्ति भी गलत करेगा तो उस पर वही कठोर कानून लागू होगा जो किसी माफिया पर लागू होता है। उन्होंने कहा कि हमने हमेशा प्रयास किया कि कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर हो, लेकिन अगर सामने वाला अपराधी कानून से भयभीत नहीं है, तो उसे उसी की भाषा में समझाना तात्कालिक परिस्थिति की मांग हो जाती है। पुलिस को पिस्तौल और प्रशिक्षण दिया जाता है सीएम योगी ने कहा कि बहुत बार लोग सवाल उठाते हैं कि पुलिस ने गोली क्यों मार दी। मैं पूछता हूं कि पुलिस गोली न चलाए तो क्या गोली खाए? यह दोनों काम एक साथ नहीं चल सकता। अगर अपराधी को गोली चलाने की स्वतंत्रता है तो पुलिस के पास भी पिस्तौल इसीलिए है कि वह उसका डटकर मुकाबला करे। उन्होंने आगे कहा कि पुलिस का प्रशिक्षण ही इसीलिए होता है कि कोई अपराधी जिस भाषा को समझता है, उसे उसी भाषा में जवाब दे सके। सीएम योगी ने अपनी सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए कहा कि जब पुलिस ने अपराधियों को उनकी भाषा में समझाना शुरू किया, तभी प्रदेश में बदलाव आया है। पिछले 9 वर्षों में उत्तर प्रदेश के बड़े-बड़े त्योहार शांति से संपन्न हुए हैं। कहीं कोई अराजकता नहीं है। आज प्रदेश में कहीं दंगा-फसाद, गुंडा टैक्स या अराजकता की बात नहीं होती है। सुरक्षा के इसी माहौल के कारण आज उत्तर प्रदेश देश और दुनिया के लिए निवेश का बेहतरीन गंतव्य (Investment Destination) बन चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार और अपराध के खिलाफ यह लड़ाई बिना किसी भेदभाव के जारी रहेगी। जीरो टॉलरेंस का मतलब यह है कि अगर शासन-प्रशासन से जुड़ा कोई व्यक्ति भी गलत करेगा, तो उसे भी माफिया की तरह ही कानूनी परिणाम भुगतने होंगे। उनके इस बयान को पुलिस बल का मनोबल बढ़ाने और अपराधियों को आखिरी चेतावनी देने के तौर पर देखा जा रहा है।  

कवासी लखमा को बड़ी राहत, छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में SC ने दी अंतरिम जमानत

रायपुर  छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री और वर्तमान कांग्रेस विधायक कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दे दी है. कवासी को ED और EOW मामले में अंतरिम जमानत दी गई है. हालांकि जमानत के लिए बेल बॉन्ड निचली अदालत तय करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि कवासी लखमा अंतरिम जमानत के दौरान छत्तीसगढ़ में नहीं रहेंगे.  शीर्ष अदालत ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के बाद उन्हें जमानत देने का आदेश जारी किया। प्रवर्तन निदेशालय ने कवासी लखमा को इसी वर्ष 15 जनवरी को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे रायपुर सेंट्रल जेल में न्यायिक रिमांड पर थे। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि कवासी लखमा शराब सिंडिकेट के सक्रिय सदस्य थे और उनके निर्देशों पर ही पूरा नेटवर्क संचालित किया जा रहा था। जांच एजेंसी का दावा है कि लखमा ने शराब नीति में बदलाव और लाइसेंस प्रक्रियाओं में अहम भूमिका निभाई थी। ईडी ने अदालत में दलील दी थी कि आबकारी विभाग में हो रही अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद उन्होंने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया। एजेंसी ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह भी दावा किया है कि इस कथित घोटाले के दौरान कवासी लखमा को हर महीने करीब दो करोड़ रुपये मिलते थे। ईडी के अनुसार, 36 महीनों में उन्हें कुल 72 करोड़ रुपये प्राप्त हुए, जिसका उपयोग उनके बेटे के मकान और सुकमा में कांग्रेस भवन के निर्माण में किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि इस सिंडिकेट के जरिए सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाते हुए 2,100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई की गई। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ शराब घोटाले की जांच वर्तमान में ईडी के साथ-साथ राज्य की एसीबी भी कर रही है। इस मामले में तत्कालीन सरकार के कई अधिकारियों और कारोबारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कवासी लखमा की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। क्या आप इस मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत के लिए रखी गई शर्तों या शराब घोटाले से जुड़ी एसीबी की आगामी कार्यवाही के बारे में जानना चाहेंगे?

24 घंटे में खाली हुई 65 हजार एकड़ जमीन

लखनऊ  भारत किसी के आगे नहीं झुकेगा: सीएम योगी ‘उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि हम प्रधानमंत्री जी व अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आभारी हैं, जिन्होंने रोलबैक करते हुए भारत के टैरिफ को कम किया है और भारत को एक विश्वसनीय सहयोगी के रूप में माना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत अपनी नीतियों पर अडिग था, और इसका परिणाम है ‘सत्यमेव जयते’। यह पहले भी हुआ है और आगे भी होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विकसित भारत और बढ़ते भारत की यात्रा का प्रमाण है, जहां भारत एक जिम्मेदार और भरोसेमंद वैश्विक साझेदार के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री ने आगाह भी किया कि भारत की इस बढ़ती ताकत से कुछ लोग सशंकित भी हैं, इसलिए देश को विश्वसनीय सहयोगियों के साथ आगे बढ़ते हुए सतर्कता और विवेक के साथ कार्य करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 से पहले जिस भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, आज वही भारत अपनी नीतियों पर दृढ़ रहते हुए वैश्विक शक्तियों को भी संवाद और सहयोग के लिए विवश कर रहा है। भारत अब अपनी शर्तों पर आगे बढ़ रहा है और स्वयं अपना नियंता बन रहा है, जो यह स्पष्ट करता है कि आज देश वैश्विक चुनौतियों और दबावों के बीच आत्मविश्वास, नीति-स्थिरता और निर्णायक नेतृत्व के साथ अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ रहा है। 24 घंटे में खाली हुई 65 हजार एकड़ जमीन ‘उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0’ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 में जब हम लोग सत्ता में आए थे, उत्तर प्रदेश के अंदर कहीं जमीन ढूंढते हुए नहीं बनती थी। कोई लैंड नहीं मिल पाती थी, क्योंकि उस पर लैंड माफिया ने कब्जा कर रखा था। हमने भू-माफिया टास्क फोर्स गठित की और मैंने कहा, 24 घंटे का समय दे रहा हूं। उत्तर प्रदेश के अंदर जिस भी सरकारी भूमि पर जिस भू माफिया ने कब्जा किया है, उसको तत्काल छोड़ दे। 24 घंटे के बाद जब हम कारवाई करेंगे तो उसको जमीन तो छोड़नी ही पड़ेगी, लेकिन साथ-साथ उसने जो कमाई की होगी, उसकी ब्याज सहित वसूली करेंगे। आप आश्चर्य करेंगे कि हमारी 65000 एकड़ लैंड खाली हुई थी। यह हमारा लैंड बैंक बना था। उस लैंड बैंक में हमने निवेश भी करवाए। इनसेट-3 फार्मा कॉन्क्लेव में 10 हजार करोड़ के एमओयू पर सहमति, 5525 करोड़ के 11 एमओयू का आदान-प्रदान *‘उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0’ के दौरान राज्य के फार्मास्यूटिकल सेक्टर में 10  हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से जुड़े समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर सहमति बनी है, जिसमें औषधि, चिकित्सा उपकरण एवं संबंधित क्षेत्रों में 5,525 करोड़ रुपये के 11 एमओयू का आज मंच पर औपचारिक आदान-प्रदान किया गया। प्रमुख निवेशकों में अर्ना फार्मा व बायोजेंटा लाइफ साइंसेज ने 1,250-1,250 करोड़ रुपये, शुक्रा फार्मास्यूटिकल्स ने 737 करोड़, वाल्टर बुशनेल एंटरप्राइज ने 590 करोड़, झानविका लैब्स ने 553 करोड़, कोरो हेल्थ ने 418 करोड़, मार्क लेबोरेटरीज ने 300 करोड़, हाई ग्लांस लैबोरेटरीज ने 120 करोड़, रासपा फार्मा ने 107 करोड़, रोमसंस मेडवर्ल्ड ने 100 करोड़ और कोटक हेल्थकेयर ने 100 करोड़ रुपये के निवेश की प्रतिबद्धता जताई, जिससे उत्तर प्रदेश के फार्मा निवेश के नए केंद्र के रूप में उभरने को मजबूती मिली है। इन निवेश प्रस्तावों से फार्मा इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूती, नवाचार को बढ़ावा और हजारों नए रोजगार अवसर सृजित होने की संभावना है।

कन्या विवाह उपहार योजना में बेटियों की शादी में लाखों किए दान

रांची. झारखंड में बेटियों की शादी को लेकर अभिभावकों की आर्थिक चिंता को कम करने की दिशा में अभिनंदन ट्रस्ट ने एक अहम पहल की है. ट्रस्ट बेटियों की शादी में लाखों रुपये मूल्य का सामान फ्री में उपलब्ध करा रहा है. अभिनंदन ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. विवेकानंद कुमार ने कहा कि अब माता-पिता को बेटी के विवाह के लिए कर्ज लेने की मजबूरी नहीं रहेगी. रांची में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. विवेकानंद कुमार ने बताया कि झारखंड की प्रगति और सामाजिक विकास को ध्यान में रखते हुए रांची स्थित रोस्पा टावर कार्यालय में अभिनंदन ट्रस्ट द्वारा एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह है कि राज्य के अधिक से अधिक लोग ट्रस्ट की योजनाओं से जुड़ें और जरूरतमंद परिवारों तक इनका लाभ पहुंच सके. कन्या विवाह उपहार योजना पर विशेष जोर प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेष रूप से कन्या विवाह उपहार योजना पर चर्चा की जा रही है. इस योजना के तहत नवविवाहित बेटियों को ट्रस्ट की ओर से विवाह से जुड़ी आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है. डॉ. विवेकानंद कुमार ने बताया कि इस योजना से गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को सीधा लाभ मिल रहा है. 122 प्रकार की सामग्री निःशुल्क उपलब्ध ट्रस्ट की ओर से विवाह के लिए कुल 122 प्रकार की सामग्री निःशुल्क प्रदान की जाती है. इनमें गोदरेज, टीवी, बर्तन सहित अन्य घरेलू उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं. खास बात यह है कि मोटरसाइकिल की कीमत में ही मोटरसाइकिल भी उपलब्ध कराई जाती है, जिससे नवदंपती को जीवन की शुरुआत में सहूलियत मिल सके. वर्षों से जारी सेवा कार्य डॉ. विवेकानंद कुमार ने बताया कि यह सेवा कार्य अभिनंदन ट्रस्ट द्वारा पिछले कई वर्षों से लगातार किया जा रहा है. ट्रस्ट का उद्देश्य केवल सामग्री देना ही नहीं, बल्कि बेटियों के सम्मान और सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करना भी है. यह सभी सामग्री दान स्वरूप प्रदान की जाती है. बेरोजगार युवाओं के लिए अवसर उन्होंने यह भी कहा कि अभिनंदन ट्रस्ट से जुड़कर बेरोजगार युवा अच्छी आमदनी कर सकते हैं. ट्रस्ट के माध्यम से युवाओं को सामाजिक सेवा के साथ रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं. कार्यक्रम में कई पदाधिकारी रहे मौजूद इस मौके पर ट्रस्ट के स्टेट प्रभारी जितेंद्र कुमार सिंह, अनिल कुमार, भरत कुमार, कृष्णा वल्लभ और डॉ. एस.के. वर्मा सहित कई अन्य लोग उपस्थित रहे. सभी ने ट्रस्ट की इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया.

इंडस्ट्री में जीरो पॉलिटिकल इंटरफेयर, आइए निवेश करें, उत्पादन करें और समय पर इंसेंटिव लें: सीएम

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को होटल ताज में आयोजित वैश्विक निवेशकों एवं उद्यमियों के महासंगम “उत्तर प्रदेश फार्मा कॉन्क्लेव 1.0” का शुभारंभ करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज केवल एक राज्य नहीं, बल्कि निवेशकों के लिए भरोसे की गारंटी बन चुका है। प्रदेश सरकार हर निवेशक को ट्रिपल-एस यानी सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड की पूर्ण गारंटी देती है और उत्तर प्रदेश आज ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का रोल मॉडल बनकर उभरा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में रूल ऑफ लॉ पूरी मजबूती से लागू है। कानून से खिलवाड़ करने की छूट किसी को नहीं है। यदि कोई कानून को आंख दिखाने की कोशिश करता है, तो कानून अपने दायरे में लाकर उसे उसकी ही भाषा में जवाब देता है। यह नया उत्तर प्रदेश है, जहां व्यवस्था कमजोर नहीं, बल्कि निर्णायक है। अराजकता से विश्वास तक का सफर मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में 2017 से पहले की स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि उस दौर में उत्तर प्रदेश असुरक्षा, अराजकता और अविश्वास का पर्याय बन चुका था। वर्ष 2012 से 2017 के बीच प्रदेश में 900 से अधिक दंगे हुए। शायद ही कोई शहर रहा हो, जहां कर्फ्यू न लगा हो। उद्योग, व्यापार और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों को गुंडा टैक्स देना पड़ता था। सुरक्षा के अभाव में पहले से स्थापित उद्योग भी प्रदेश छोड़ने पर मजबूर थे, युवा वर्ग पलायन कर रहा था। जिस धरती पर बचपन बीता हो, उसे छोड़ना किसी के लिए भी पीड़ादायक होता है, लेकिन असुरक्षा के चलते मजबूरी थी। यह केवल किसी एक उद्यमी की पीड़ा नहीं थी, बल्कि हर व्यापारी, हर निवेशक और हर नागरिक की व्यथा थी। जीरो टॉलरेंस से लौटा भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें यह दायित्व सौंपा, तो सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना और नागरिकों के मन में विश्वास पैदा करना था। सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई। हमने स्पष्ट कहा कि कानून सभी पर समान रूप से लागू होगा, चाहे कोई कितना ही प्रभावशाली क्यों न हो। आज इसका परिणाम सबके सामने है। बड़े पर्व-त्योहार शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो रहे हैं। कहीं दंगे नहीं, कहीं फिरौती नहीं, कहीं गुंडा टैक्स नहीं। उत्तर प्रदेश में शांति, सुरक्षा और स्थिरता का वातावरण है और यही निवेश की सबसे मजबूत नींव है। डी-रेगुलेशन में नंबर वन, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप अचीवर बना है यूपी सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश आज डी-रेगुलेशन रैंकिंग में देश में नंबर वन है और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में टॉप अचीवर बन चुका है। डी-क्रिमिनलाइजेशन के तहत 13 राज्य अधिनियमों में मौजूद आपराधिक प्रावधानों को समाप्त किया गया, ताकि उद्योग बिना भय और बाधा के कार्य कर सकें। एमएसएमई सेक्टर में निवेश करने वाले उद्यमियों को 1000 दिनों तक निरीक्षण से छूट दी गई है। कई अन्य सेक्टरों में भी प्रक्रियाओं को सरल किया गया है। सरकार का उद्देश्य उद्योगों को डराना नहीं, बल्कि उन्हें सुविधा देना है। 14 हजार से 30 हजार फैक्ट्रियों तक की छलांग मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में लगभग 14,000 कारखाने कार्यरत थे, जो आज बढ़कर 30,000 से अधिक हो चुके हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि डबल इंजन सरकार डबल स्पीड से काम कर रही है। प्रदेश में अब तक 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं, जिनमें 20 लाख करोड़ प्रस्तावो की ग्राउंड ब्रेकिंग हो चुकी है और कई प्रोजेक्ट्स में उत्पादन भी शुरू हो चुका है। निवेशकों के साथ सरकार का निरंतर संवाद बना हुआ है। फार्मा सेक्टर को बनाया जा रहा ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को फार्मास्यूटिकल मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन का अग्रणी केंद्र बनाने के लिए ठोस नीति और स्पष्ट विजन के साथ कार्य किया जा रहा है। ललितपुर में विकसित किया जा रहा बल्क ड्रग फार्मा पार्क केवल एक औद्योगिक इकाई नहीं होगा, बल्कि इसे हब एंड स्पोक मॉडल पर विकसित किया जा रहा है, जहां अत्याधुनिक आर एंड डी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वहीं गौतम बुद्ध नगर में मेडिकल डिवाइस पार्क, यूएस-एफडीए टेस्टिंग लैब और वर्ल्ड-क्लास लॉजिस्टिक्स हब विकसित किए जा रहे हैं। फरवरी के दूसरे सप्ताह में बजट सत्र के माध्यम से लखनऊ में एक वर्ल्ड-क्लास फार्मा इंस्टीट्यूट के निर्माण की दिशा में भी कदम बढ़ाया जाएगा। बरेली सहित अन्य जनपदों में भी नए फार्मा पार्क विकसित किए जाएंगे। लोकल से ग्लोबल की यात्रा तय की यूपी ने मुख्यमंत्री ने कहा कि वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) के माध्यम से उत्तर प्रदेश ने ‘लोकल को ग्लोबल’ बनाने का सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। आज मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में देश का लगभग 55 प्रतिशत और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स में 60 प्रतिशत उत्पादन अकेले उत्तर प्रदेश में हो रहा है। पिछले नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है। देश के लगभग 55 प्रतिशत एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश में हैं। हर जिला मुख्यालय फोरलेन से जुड़ा है। बेहतर रेल नेटवर्क, सर्वाधिक मेट्रो सेवाएं, देश का पहला इनलैंड वाटरवे और सर्वाधिक एयरपोर्ट वाला राज्य आज उत्तर प्रदेश है। वर्तमान में 16 एयरपोर्ट क्रियाशील हैं, जिनमें चार अंतरराष्ट्रीय हैं और पांचवें नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जल्द ही प्रधानमंत्री राष्ट्र को समर्पित करेंगे। निवेशकों को सरकार का पूर्ण समर्थन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निवेशकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी है। यहां जीरो पॉलिटिकल इंटरफेयर, पारदर्शी नीतियां और समयबद्ध इंसेंटिव वितरण सुनिश्चित किया गया है। आइए निवेश करें, उत्पादन करें और समय पर इंसेंटिव प्राप्त करें, यही उत्तर प्रदेश का मॉडल है। उत्तर प्रदेश आज बीमारू नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस राज्य है और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। विकसित भारत की ओर उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि फार्मा कॉन्क्लेव उसी संकल्प का हिस्सा है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश को फार्मा सेक्टर में मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन हब के रूप में स्थापित किया जाएगा। एआई, टेलीमेडिसिन, डीप-टेक, मेड-टेक, हेल्थ-टेक और क्लिनिकल रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार पूरी मजबूती के साथ आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से आह्वान किया कि वे उत्तर प्रदेश की इस विकास यात्रा में … Read more

खेजड़ी की लड़ाई को मिला बड़ा चेहरा: वसुंधरा राजे बोलीं – जरूरत पड़ी तो बलिदान भी

बीकानेर राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के विरोध में चल रहे 'खेजड़ी बचाओ आंदोलन' के तहत बीकानेर में सोमवार को महापड़ाव में जन सैलाब उमड़ पड़ा। इस बीच अब पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी इन पेड़ों को देववृक्ष बताते हुए कटान के विरोध आवाज उठाई है। उन्होंने राजनीति से ऊपर उठकर संरक्षण के लिए आगे आने की अपील की और खुद को इस मुहिम के साथ बताया। भाजपा की वरिष्ठ नेता ने राजस्थान की लोकोक्ति है का भी जिक्र किया गया जिसमें कहा गया है कि 'यदि सिर देकर भी वृक्ष/प्रकृति की रक्षा हो जाए, तो वह सौदा बहुत सस्ता है।' बीकानेर में जुटे आंदोलनकारियों का आरोप है कि बीकानेर सहित पश्चिमी राजस्थान में सोलर कंपनियां नई परियोजनाएं लगाने के नाम पर बड़े पैमाने पर खेजड़ी के पेड़ काट रही हैं। कई बीघा भूमि पर सौर परियोजना स्थापित करने के लिए जमीन को पूरी तरह साफ किया जाता है। आंदोलनकारियों का यह भी कहना है कि कंपनियां रात के अंधेरे में पेड़ों को काटकर जमीन में दबा देती हैं, ताकि कोई विरोध न कर सके। मंगलवार को 10 राज्यों से करीब एक लाख लोग बीकानेर पहुंचे। खेजड़ी को बचाने के लिए केवल राजस्थान ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश से भी हजारों की संख्या में लोग, विशेषकर महिलाएं पहुंची हैं। वसुंधरा राजे ने कहा- देववृक्ष हैं, मुहिम में साथ हूं इस बीच राजस्थान की पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने खेजड़ी की पूजा करते हुए अपनी एक तस्वीर साझा की और इनके संरक्षण के लिए प्रतिबद्धता जाहिर की। उन्होंने कहा, 'सिर साँठे रूंख रहे तो भी सस्तो जाण। खेजड़ी साधारण पेड़ नहीं, यह हमारे लिए देववृक्ष है। जो हमारी आस्था और भावनाओं से जुड़ा है। हमारे यहां खेजड़ी की पूजा की जाती हैं। मैं स्वयं भी खेजड़ी की पूजा करती हूं। जिसकी हम पूजा करें, उस देवता का संरक्षण हमारा दायित्व है। राजनीति से ऊपर उठकर हमें इसके संरक्षण के लिए आगे आना चाहिए। इसे बचाना चाहिए। मैं खेजड़ी और ओरण (गौचर भूमि) को बचाने की मुहिम में सबके साथ हूं।' बीकानेर बंद और विरोध प्रदर्शन सोमवार को आंदोलन के तहत बीकानेर बंद का आयोजन किया गया जिसका व्यापक असर रहा। शहर के व्यापारिक संगठनों ने आंदोलन को समर्थन देते हुए अपने प्रतिष्ठान दोपहर दो बजे तक बंद रखे। वहीं, शहरी क्षेत्र के सरकारी और निजी स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी घोषित की गई। बंद के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने शहरभर में पुख्ता इंतजाम किए। इससे पहले सरकार की तरफ से प्रशासन की ओर से वार्ता करने कलेक्टर नम्रता वृष्णि महापड़ाव स्थल पर पहुंची, लेकिन वार्ता विफल रही। महापड़ाव में भीड़ को देखते हुए पुलिस-प्रशासन सतर्क है।  

धनबाद के डीसी-एसपी ने डिस्पैच और रिसीविंग सेंटर का किया निरीक्षण

धनबाद. नगर पालिका (आम) निर्वाचन 2026 को लेकर धनबाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है. चुनाव को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और त्रुटिरहित तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से सोमवार 02 फरवरी 2026 को उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी आदित्य रंजन और वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने चुनावी केंद्रों का निरीक्षण किया. प्रशासन की ओर से यह निरीक्षण चुनावी तैयारियों की अंतिम समीक्षा के तौर पर किया गया. डिस्पैच सेंटर और रिसीविंग सेंटर का बारीकी से निरीक्षण उपायुक्त और एसएसपी ने बिरसा मुंडा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्थित डिस्पैच सेंटर का निरीक्षण किया. यहां मतदान कर्मियों के लिए तैयार की गई व्यवस्थाओं, सामग्री वितरण प्रणाली और सुरक्षा इंतजामों की गहन जांच की गई. इसके बाद धनबाद पॉलिटेक्निक स्थित रिसीविंग सेंटर पहुंचकर मतगणना के बाद ईवीएम और चुनाव सामग्री जमा कराने की प्रक्रिया की समीक्षा की गई. मटेरियल सेल में व्यवस्थाओं की जांच प्रशासनिक अधिकारियों ने टाउन हॉल के सामने विवाह भवन स्थित मटेरियल सेल का भी निरीक्षण किया. यहां चुनाव से जुड़ी सामग्री के भंडारण, आवंटन और रिकॉर्ड संधारण की व्यवस्था की जांच की गई. उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी सामग्री समय पर और सही तरीके से मतदान दलों तक पहुंचे, इसमें किसी तरह की लापरवाही न हो. हर स्तर पर निगरानी के निर्देश निरीक्षण के दौरान उपायुक्त आदित्य रंजन ने कार्य में लगे पदाधिकारियों और कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्वाचन से संबंधित प्रत्येक गतिविधि की सतत और बारीकी से निगरानी की जाए. उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर छोटी सी भी चूक पूरे चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है, इसलिए जिम्मेदारी और सतर्कता के साथ काम करें. आयोग के निर्देशों का अक्षरशः पालन जरूरी उपायुक्त ने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग, झारखंड द्वारा जारी सभी दिशा-निर्देशों का अक्षरशः अनुपालन सुनिश्चित किया जाए. उन्होंने सभी संबंधित कोषांगों को आपसी समन्वय बनाकर कार्य करने का निर्देश दिया. समयबद्ध तरीके से कार्य निष्पादन और स्पष्ट जिम्मेदारी तय करने पर विशेष जोर दिया गया. सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर भी फोकस वरीय पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार ने कहा कि मतदान और उससे जुड़े सभी चरणों में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद रखी जाएगी. संवेदनशील और अति संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर रखी जा रही है. पुलिस और प्रशासन के बीच बेहतर तालमेल के साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं. कई वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद निरीक्षण के दौरान सिटी एसपी ऋत्विक श्रीवास्तव, उप विकास आयुक्त सन्नी राज, एसडीएम लोकेश बारंगे, निदेशक डीआरडीबी राजीव रंजन, एडीएम लॉ एंड ऑर्डर हेमा प्रसाद, जिला पंचायती राज पदाधिकारी मुकेश बाउरी समेत कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे. सभी अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर पर चुनावी तैयारियों की जानकारी साझा की और आवश्यक निर्देश प्राप्त किए.. 

दो बड़ी वारदातों से उठा पर्दा, मध्यप्रदेश पुलिस की बड़ी सफलता

भोपाल  प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने और अपराधियों के विरूद्ध कार्यवाही करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत निरंतर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में पिछले 48 घंटों के भीतर विदिशा और खरगोन पुलिस ने दो अलग-अलग बड़ी वारदातों का खुलासा करते हुए लगभग 1 करोड़ 90 लाख रुपये की संपत्ति बरामद करने में बड़ी सफलता हासिल की है। विदिशा: 1 करोड़ की डकैती का पर्दाफाश, 'डायल-112' की सतर्कता रही निर्णायक विदिशा पुलिस ने थाना त्योदा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रायखेडी में घटित सनसनीखेज डकैती का सफलतापूर्वक पर्दाफाश किया है। इस कार्रवाई पुलिस ने चार मुख्य आरोपियों और एक विधि-विरुद्ध बालक को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 44 तोला सोना, 1 किलो 300 ग्राम चांदी, 10 लाख रुपये नगद, पांच मोबाइल फोन, एक मोटरसाइकिल, एक देशी कट्टा (.315 बोर) और एक तलवार बरामद की है। जिनकी कुल कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस डकैती के सुराग में सागर जिले के थाना राहतगढ़ क्षेत्र में डायल-112 पुलिस बल की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई निर्णायक साबित हुई। रात्रिकालीन गश्त और रिस्पॉन्स के दौरान गिरोह का एक आरोपी विदिशा से डकैती करके भागने का प्रयास कर रहा था और उसने अपह्त संपत्ति सड़क पर गिरा दी। डायल-112 पुलिस बल ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी को मौके से ही संपत्ति सहित गिरफ्तार कर लिया। इससे प्राप्त महत्वपूर्ण सुरागों के आधार पर आगे की कार्रवाई को दिशा मिली और पूरे गिरोह का पता चला।विदिशा पुलिस की विशेष टीमों ने 300 से अधिक सीसीटीवी कैमरों के विश्लेषण और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर गिरोह के चार सदस्‍यों और एक विधि-विरुद्ध बालक को गिरफ्तारकर उनके कब्जे से संपूर्ण संपत्ति बरामद की है। खरगोन: सूने मकानों में चोरी करने वाले गिरोह से 90 लाख का माल बरामद जिले की बड़वाह पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सूने मकानों और दुकानों को निशाना बनाने वाले शातिर गिरोह को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने महज48 घंटों की कड़ी मशक्कत और तकनीकी विश्लेषण के बाद 02 आरोपियों और 01 विधि-विरुद्ध बालक को अभिरक्षा में लिया है। पूछताछ में आरोपियों ने चोरी का सामान कचरे के ढेर में छिपाकर रखना स्‍वीकार किया। आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने 300 ग्राम सोने के बार, 05 किलोग्राम चांदी के बार, अन्य आभूषण और नगदीसहितलगभग 90 लाख रुपये की सामग्री जब्‍त की है। ये दोनों ही कार्यवाहियां मध्यप्रदेश पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया, बेहतर अंतर-जिला समन्वय और आधुनिक तकनीकी विवेचना (CCTV विश्लेषण एवं साइबर सेल) के उत्कृष्ट उदाहरण को दर्शाती हैं। विदिशा में जहां 'डायल-112' और विशेष टीमों के तालमेल ने डकैतों को पकड़ा, वहीं खरगोन में स्थानीय मुखबिर तंत्र और सीसीटीवी फुटेज के सूक्ष्म परीक्षण से चोरों तक पहुँचा जा सका। मध्य प्रदेश पुलिस आम नागरिकों से अपील करती है कि वे अपने आसपास की किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत डायल-112 या नजदीकी थाने पर दें। नागरिकों की सतर्कता ही सुरक्षित समाज की नींव है।  

मध्यप्रदेश पुलिस का अवैध शराब कारोबार पर कड़ा प्रहार

भोपाल. मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा अवैध शराब के निर्माण, परिवहन एवं विक्रय के विरुद्ध निरंतर वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। श्योपुर एवं कटनी जिलों में अलग-अलग मामलों में पुलिस ने अवैध शराब के विरूद्ध कार्रवाई कर 67 लाख 34 हजार रूपये की शराब एवं वाहन जब्‍त कर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। श्योपुर जिले में की गई कार्रवाई के तहत थाना देहात पुलिस ने राजस्थान–श्योपुर सीमा क्षेत्र में नाकाबंदी कर एक संदिग्ध ट्रक को रोका। वाहन की तलाशी लेने पर ट्रक से अंग्रेजी शराब की 635 पेटियां, कुल 4863 बल्क लीटर अवैध शराब प्राप्‍त हुई, जिसे ट्रक सहित जब्‍त किया गया। जब्‍त की गई शराब और ट्रक की अनुमानित कीमत 58 लाख 90 हजार रूपए है। प्रकरण में 02 आरोपियों को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। कटनी जिले में मुखबिर से सूचना प्राप्‍त हुई कि एक कार से कुछ व्‍यक्ति अवैध शराब लेकर कटनी की ओर आ रहे हैं। सूचना पर पुलिस ने ग्राम देवरी टोला पर वाहन चेकिंग लगाई। इस दौरान एक संदिग्ध कार को रोकने का प्रयास करने पर चालक द्वारा वाहन को तेज गति से बायपास रोड मैहर की ओर ले गए। पुलिस टीम द्वारा पीछा करने पर आरोपी वाहन को खड़ा करके फरार हो गए। मौके पर खड़ी कार की तलाशी लेने पर उसमें देशी मदिरा की 24 पेटियां, कुल 216बल्क लीटर अवैध शराब प्राप्‍त हुई। जिसे कार सहित (अनुमानित कीमत लगभग 8 लाख 44 हजाररूपए), जब्‍त किया गया। विवेचना के दौरान 01 आरोपी को गिरफ्तार कर आबकारी अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। दोनों मामलों में अवैध शराब की आपूर्ति एवं परिवहन से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।  

अरावली की गोद में सोना समेत दुर्लभ खनिज मिलने के दिखे संकेत

उदयपुर. अरावली की गोद में छिपा खजाना अब सामने आने को है। उदयपुर-सिरोही-आबूरोड से जुड़ी अंबाजी (गुजरात) की पर्वत श्रृंखला में 100 मिलियन टन से अधिक दुर्लभ खनिज भंडार होने का आकलन किया गया है। कॉपर, गोल्ड, लेड, जिंक और सिल्वर जैसे कीमती खनिजों की मौजूदगी ने क्षेत्र को देश के बड़े माइनिंग हॉटस्पॉट के रूप में उभारा है। इसी संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए गुजरात मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (जीएमडीसी) ने मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के भू-विज्ञान विभाग के साथ रिसर्च और कंसलटेंसी का एमओयू किया है। दो साल के इस करार के तहत अंबाजी क्षेत्र में खनिज खोज और माइनिंग की कवायद शुरू की है। भू-विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों की देखरेख में 1840 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन की योजना बनाई गई है। इसमें पहले चरण में करीब 140 हेक्टेयर क्षेत्र शामिल है। इस परियोजना के लिए जीएमडीसी ने एक विशेष सोसायटी गठित कर उदयपुर के वैज्ञानिकों को खनिजों की खोज और उनके फैलाव के वैज्ञानिक आकलन की जिम्मेदारी सौंपी है। विशेषज्ञों की टीम संभालेगी कमान इस परियोजना का नेतृत्व भू-विज्ञान विभाग के रिटायर्ड प्रो. हर्ष भू और प्रो. रितेश पुरोहित कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में डॉ. हरीश कपासिया, डॉ. निरंजन मोहंती, डॉ. टी.के. बिनवाल और प्रो. के.के. शर्मा की टीम काम कर रही है। शोध कार्य के लिए विभाग की अत्याधुनिक लैब का उपयोग किया जाएगा, वहीं भू विज्ञान विभाग के ही 7 विद्यार्थियों को प्लेसमेंट देकर उन्हें सीधे रिसर्च से जोड़ा गया है। प्रकृति और आस्था रहेगी सुरक्षित खनन को लेकर पर्यावरणीय चिंताओं पर प्रो. रितेश पुरोहित ने कहा कि अंबाजी क्षेत्र पहाड़ों, जंगलों और मंदिरों से घिरा हुआ है, इसलिए प्रकृति से किसी भी तरह की छेड़छाड़ नहीं की जाएगी। ज्यादातर खनन कार्य अंडरग्राउंड होगा, जिससे पहाड़ और वन क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे। राजस्थान के लिए भी खुलेंगे नए द्वार भू-विज्ञान वैज्ञानिकों का मानना है कि अंबाजी की पर्वत श्रृंखला राजस्थान के सिरोही समेत कई जिलों से होकर गुजरती है। ऐसे में यहां दुर्लभ खनिजों की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। अरावली की चट्टानों में छिपे इस खजाने की वैज्ञानिक खोज न केवल क्षेत्र की आर्थिक तस्वीर बदल सकती है, बल्कि सुरक्षित और संतुलित माइनिंग का नया मॉडल भी पेश कर सकती है।