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खेजड़ी संरक्षण की लड़ाई तेज हुई, बीकानेर में 2 फरवरी को होगा महापड़ाव

जोधपुर राजस्थान में खेजड़ी सहित अन्य हरे वृक्षों के संरक्षण को लेकर चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ अभियान’ अब तेज़ी से जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है। जोधपुर संभाग समेत प्रदेश के विभिन्न जिलों में जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया गया है। मुकाम में आयोजित महापंचायत के निर्णय के अनुसार आगामी 2 फरवरी 2026 को बीकानेर जिला मुख्यालय पर विशाल महापड़ाव एवं आंदोलन आयोजित किया जाएगा।  अभियान के तहत साधु-संतों के सानिध्य में बाड़मेर, सांचौर, जालौर और जोधपुर सहित कई क्षेत्रों में व्यापक जनसंपर्क किया गया। पर्यावरण प्रेमियों, ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों से संवाद कर उन्हें आंदोलन से जोड़ा गया। इस दौरान खेजड़ी वृक्ष के पर्यावरणीय, सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व को लेकर लोगों में गहरी चिंता और जागरूकता देखने को मिली। बिश्नोई समाज के साथ-साथ अन्य पर्यावरण प्रेमी भी इस बार आर-पार की लड़ाई के मूड में नजर आए। मीडिया से बातचीत में आंदोलन संयोजक परसराम बिश्नोई ने सरकार को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि बिश्नोई समाज और पर्यावरण प्रेमियों की ताकत को कमतर नहीं आंका जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि खेजड़ी और अन्य हरे वृक्षों की कटाई रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कानून नहीं बनाए गए, तो आंदोलन और अधिक उग्र होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी। परसराम बिश्नोई ने दो टूक कहा कि हरे पेड़ों की कटाई किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने खेजड़ी की रक्षा के लिए मां अमृता देवी के नेतृत्व में दिए गए 363 बलिदानों का स्मरण करते हुए कहा कि यह परंपरा आज भी समाज को संघर्ष और बलिदान की प्रेरणा देती है। अभियान के तहत बाड़मेर, सांचौर, भीनमाल और जोधपुर के कई गांवों में जनसंपर्क किया गया है। साथ ही राजस्थान हाईकोर्ट के अधिवक्ताओं से चर्चा कर आंदोलन को कानूनी मजबूती देने की रणनीति भी तैयार की गई है। आने वाले दिनों में यह अभियान फलोदी, नागौर, बीकानेर के साथ-साथ हरियाणा और पंजाब तक विस्तारित किया जाएगा। खेजड़ी बचाओ अभियान अब केवल एक मांग नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई बनता जा रहा है।  

होली स्पेशल ट्रैवल प्लान: दिल्ली और पंजाब से बिहार के लिए 200 अतिरिक्त बसें, जानें बुकिंग डेट

पटना होली के रंग में सराबोर होने के लिए अपने घर बिहार लौटने की तैयारी कर रहे प्रवासियों के लिए राज्य सरकार ने इस साल बड़ा तोहफा दिया है। बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) ने होली के त्योहार पर ट्रेनों में होने वाली भारी भीड़ और वेटिंग लिस्ट की समस्या को देखते हुए 200 विशेष फेस्टिवल बसों के परिचालन का निर्णय लिया है। ये बसें न केवल आरामदायक होंगी, बल्कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे दूरदराज के राज्यों से आने वाले यात्रियों के लिए किफायती भी साबित होंगी। 15 फरवरी से शुरू होगा परिचालन इन विशेष बसों का परिचालन 15 फरवरी से शुरू होकर 15 मार्च 2026 तक जारी रहेगा, जिससे यात्रियों को आने और वापस लौटने, दोनों ही समय सुविधा मिल सके। यात्रियों की सुविधा के लिए टिकट बुकिंग की प्रक्रिया 1 फरवरी से आधिकारिक वेबसाइट https://bsrtc.bihar.gov.in/ पर शुरू कर दी जाएगी। सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निजी ऑपरेटरों की मनमानी को रोकने के लिए इन बसों के किराए में विशेष छूट दी जाए, जिससे गरीब प्रवासियों पर आर्थिक बोझ न पड़े। भुगतान के लिए डिजिटल माध्यम जैसे यूपीआई, डेबिट और क्रेडिट कार्ड की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।   पांच राज्यों के प्रमुख रूटों पर संचालन ये बसें उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, दिल्ली, पंजाब और हरियाणा के प्रमुख शहरों के लिए चलाई जाएंगी। ये बसें पीपीपी (PPP) मोड पर संचालित होंगी और इनमें एसी डीलक्स व नॉन-एसी डीलक्स दोनों तरह के विकल्प मौजूद रहेंगे। बसों की क्षमता 50 से 60 सीटों की होगी, जिससे अधिक से अधिक लोगों को सफर का मौका मिल सके। विभाग वर्तमान में रूटों के अंतिम निर्धारण और समय-सारणी को अंतिम रूप देने में जुटा है ताकि 1 फरवरी से बिना किसी बाधा के बुकिंग शुरू हो सके। होली पर आरामदायक होगी यात्रा: मंत्री परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने इस संबंध में कहा कि त्योहारों के समय ट्रेनों में पैर रखने तक की जगह नहीं होती, जिससे प्रवासियों को काफी कठिनाई होती है। इसी समस्या के समाधान के लिए विभाग लगातार सकारात्मक योजनाओं पर काम कर रहा है। इन बसों के माध्यम से यात्री न केवल आरामदायक सफर कर सकेंगे, बल्कि समय पर अपने घर भी पहुंच पाएंगे। इसके अलावा, यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं का ध्यान रखते हुए बस पड़ावों पर महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालयों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।   पिछले साल ढाई लाख यात्रियों ने किया था सफर पिछला रिकॉर्ड देखें तो बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की यह रणनीति काफी सफल रही है। पिछले साल भी निगम ने 220 बसों का सफल संचालन किया था, जिससे लगभग 2.50 लाख यात्रियों को लाभ मिला था। उस दौरान औसतन रोजाना 107 बसें चलाई गई, जिसमें 81 प्रतिशत सीटें भरी रही थीं। इस साल भी वैसी ही सफलता की उम्मीद की जा रही है।

युवाओं को मिलेगा एआई, जनरेटिव टूल्स और उद्यमिता कौशल पर व्यावहारिक प्रशिक्षण

भोपाल मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा एआई आधारित प्रौद्योगिकी उद्यमिता विकास कार्यक्रम का आयोजन 28 जनवरी 2026 से 11 मार्च 2026 तक विज्ञान भवन, नेहरू नगर, भोपाल में किया जाएगा।इस छह सप्ताह के कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं में नवाचार, तकनीकी दक्षता और उद्यमशील सोच को सशक्त करना है।कार्यक्रम भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रौद्योगिकी अनुवाद एवं नवाचार प्रभाग द्वारा प्रायोजित है।इसके माध्यम से प्रतिभागियों को एआई की मौलिक एवं उन्नत अवधारणाओं, आधुनिक टूल्स और उनके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे सामाजिक एवं औद्योगिक समस्याओं के समाधान के लिए नवाचारी, स्केलेबल और सतत स्टार्टअप विकसित कर सकें। कार्यक्रम में उद्यमिता की समझ, एमएसएमई सहायता योजनाएं, वित्तीय संस्थान, परियोजना चयन एवं पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन, बाजार सर्वेक्षण, प्रारंभिक परियोजना रिपोर्ट निर्माण, संचार एवं सॉफ्ट स्किल्स विकास, प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग, जनरेटिव एआई, उत्पादन योजना, कार्यशील पूंजी प्रबंधन, विपणन, वित्त, मानव संसाधन, कानूनी औपचारिकताएं, कराधान और नेतृत्व कौशल जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल हैं। साथ ही प्रतिभागियों को इंटरएक्टिव टूल्स, ग्राफिक्स और ऑगमेंटेड रियलिटी के माध्यम से तकनीकी प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा।कार्यक्रम में देश के विभिन्न संगठनों और संस्थानों से जुड़े अनुभवी विशेषज्ञ, शासकीय विभागों के अधिकारी, सफल उद्यमी, बैंकर्स, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, विपणन एवं प्रेरणात्मक विशेषज्ञ और उद्यमिता विकास संस्थानों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। प्रशिक्षण की कार्यप्रणाली में व्याख्यान, केस स्टडी, समूह अभ्यास, प्रस्तुतिकरण, हैंड्स-ऑन सत्र और उद्यमियों के साथ संवाद शामिल रहेगा। कार्यक्रम के लिए पात्रता अंतर्गत विज्ञान, इंजीनियरिंग अथवा प्रौद्योगिकी में स्नातक, पॉलिटेक्निक डिप्लोमा या पीजीडीसीए धारक अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। आयु सीमा 18 से 35 वर्ष निर्धारित की गई है, जबकि महिला एवं एससी,एसटी,ओबीसी वर्ग के अभ्यर्थियों को शासन के नियमानुसार आयु में छूट प्रदान की जाएगी। कुल 30 प्रतिभागियों का चयन ऑनलाइन पंजीकरण एवं आवश्यक होने पर साक्षात्कार के माध्यम से किया जाएगा। प्रवेश ‘पहले आओ–पहले पाओ’ के आधार पर होगा।कार्यक्रम पूर्णतः निःशुल्क है।इच्छुक अभ्यर्थी टीईडीपी के लिए https://tinyurl.com/mpcstAl पर ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण की अंतिम तिथि 24 जनवरी 2026 निर्धारित की गई है। कार्यक्रम के संरक्षक एमपीसीएसटी के महानिदेशक डॉ. अनिल कोठारी हैं।समन्वय टीम में डॉ. प्रवीण दिघर्रा, श्री अवनीश के. शर्मा, नव्या चतुर्वेदी एवं श्री रविंद्र कौरव शामिल हैं।कार्यक्रम प्रदेश में एआई आधारित स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने, स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करने और डिजिटल नवाचार और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।  

इंदौरवासियों को जाम से बड़ी राहत, 5 महीने में पूरे होंगे 4 फ्लाईओवर, कई इलाकों में सिग्नल फ्री सफर

इंदौर शहर के निर्माणाधीन चार प्रमुख फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पांच माह में पूरा हो जाएगा। निर्माण पूरा होने के साथ ही इन चौराहों से वाहनों का आवागमन सुगम होगा और सिग्नल पर रूकने की आवश्यकता नहीं होगी। कलेक्टर शिवम वर्मा और निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने निर्माणाधीन फ्लाईओवर का दौरा कर निरीक्षण किया। फ्लाईओवर को जून माह तक पूरा करने के निर्देश दिए गए। 267 करोड़ की लागत से तैयार हो रहे हैं प्रोजेक्ट शहर में सत्य सांई चौराहा, देवास नाका, मूसाखेडी और आइटी पार्क चौराहा पर निर्माणाधीन फ्लाईओवर का निर्माण किया जा रहा है। मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) द्वारा चारों चौराहों पर फ्लाईओवर का निर्माण कार्य किया जा रहा है। यह फ्लाईओवर 267 करोड़ की लागत से बनाए जा रहे है। सोमवार को कलेक्टर शिवम वर्मा ने निर्माण कार्यो का अवलोकन किया। उन्होंने जून माह तक चारों का काम पूरा करने के निर्देश दिए। कलेक्टर वर्मा ने बताया कि यह सभी फ्लाईओवर्स शहर की यातायात व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इनके पूर्ण होने से नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।   अतिक्रमण हटाकर बाधाएं दूर करने के निर्देश चारों चौराहों पर निर्माण के दौरान कुछ बाधाए है, इन बाधाओं को रिमूवल कर हटाया जाएगा। वहीं चौराहों पर वैकल्पिक व्यवस्थाओं और समय-सीमा में काम पूरा करने को लेकर भी अधिकारियों ने चर्चा की। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि व्यवस्थित संचालन के लिए गार्ड तैनात किए जाएं, ताकि यातायात सुचारु रहे। धूल उड़ने से रोकने के लिए नेटिंग और अन्य उपाय किए जाएंगे। सर्विस रोड और पैदल यात्रियों की सुविधा पर जोर सर्विस लेन पर पैच रिपेयरिंग और डामरीकरण कर ट्रैफिक को सुचारू बनाया जाए। निर्माण कार्यो की आने वाले दिनों में नियमित समीक्षा की जाएगी। कलेक्टर वर्मा ने मूसाखेड़ी चौराहा पार करने के लिए पैदल नागरिकों के लिए व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने निर्देशित किया कि निर्माणाधीन फ्लाईओवर के सर्विस रोड़ पर पर्याप्त लाईटिंग भी की जाए।   निर्माण में देरी, बढ़ाई समय सीमा फ्लाईओवर का निर्माण कार्य धीमी गति से किया जा रहा है।पहले निर्माण मार्च तक पूरा किया जाना था, लेकिन देरी को देखते हुए समय सीमा तीन माह बढ़ाई है। निर्माण कार्य जून तक पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। चारों फ्लाईओवर को अब पांच माह में पूरा करना होगा। इसके लिए लगातार मानिटरिंग कर काम की गति को बढ़ाया जाएगा। धीमे निर्माण के कारण आमजन को परेशानी हो रही है।

10वीं-12वीं की परीक्षाओं से पहले MP सरकार का बड़ा फैसला, स्कूलों में 1 फरवरी से ESMA लागू

भोपाल मप्र बोर्ड 10वीं व 12वीं की परीक्षाएं 10 फरवरी से और पांचवीं व आठवीं की बोर्ड परीक्षा 20 फरवरी से शुरू होंगी। वहीं शासन ने एसेंशियल सर्विस एंड मेंटेनेंस (एस्मा) लगा दिया है। यह एक फरवरी से 30 अप्रैल तक लागू रहेगा। तीन माह तक शिक्षक सामान्य के साथ महिला शिक्षिक भी संतान पालन अवकाश (सीसीएलई) भी नहीं ले पाएंगी। साथ ही शिक्षक आंदोलन या धरना-प्रदर्शन तक नहीं कर पाएंगे। प्रदेश के स्कूलों में एक फरवरी को एस्मा लग जाएगा। इसके पहले सभी विभिन्न विभागों में अटैच शिक्षकों को स्कूलों में अपनी उपस्थिति दर्ज करानी होगी। इसके बाद ही उन्हें फरवरी का वेतन मिलेगा। अटैच शिक्षकों की मूल स्कूलों में वापसी, भोपाल में 300 शिक्षक कार्यमुक्त इस संबंध में अभी सिर्फ भोपाल जिले के शिक्षकों को कार्यमुक्त किया गया है। भोपाल के जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) ने 300 अटैच शिक्षकों को कार्यमुक्त करने का आदेश जारी कर दिया है। वहीं कलेक्टर के आदेश से बीएलओ कार्य में लगे शिक्षकों में ड्यूटी को लेकर असमंजस की स्थिति है। राजधानी में 300 ऐसे शिक्षक हैं जो मुख्य पदांकित संस्था छोड़ अपनी पसंद की जगहों पर सालों से अटैच हैं। बता दें कि प्रदेश के करीब छह हजार शिक्षक विभिन्न विभागों में अटैच हैं। साथ ही करीब 15 हजार शिक्षक विशेष पुनरीक्षण कार्य (एसआइआर) में लगे हैं।  ई-सेवा पुस्तिका अपडेट करने की समय-सीमा 31 जनवरी तय शासन द्वारा जारी आदेश के बाद डीईओ ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि 31 जनवरी तक शिक्षकों की ई-सेवा पुस्तिका अपडेट होगी। इस कारण सभी शिक्षकों का अटैचमेंट खत्म किया जा रहा है। सभी शिक्षक अपनी उपस्थिति अपने मूल पदांकित स्कूल में देंगे। वे 31 जनवरी तक अपनी ई-सेवा पुस्तिका में अपडेट कराएंगे। तभी फरवरी का वेतन मूल पदांकित स्कूल में उपस्थिति देने के बाद दिया जाएगा। हालांकि संभागीय संयुक्त संचालक कार्यालय और जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ही कई शिक्षक अटैच हैं। भोपाल, डीईओ, एनके अहिरवार  ने बताया एसआइआर कार्य में लगे शिक्षकों की सूची बुलाकर उन्हें परीक्षा में ड्यूटी करने कार्यमुक्त किया जाएगा। अटैच शिक्षक अपने मूल स्कूल में उपस्थिति देंगे। तभी उनका फरवरी में वेतन जारी होगा।

अब आंखों की बीमारी पकड़ेगा एआई कैमरा, जेपी अस्पताल में शुरू हुई डायबिटिक रेटिनोपैथी की निशुल्क जांच

भोपाल राजधानी के जयप्रकाश (जेपी) जिला चिकित्सालय में शुगर (डायबिटीज) के मरीजों की ''डायबिटिक रेटिनोपैथी'' (शुगर के कारण आंखों के पर्दे का खराब होना) की जांच निश्शुल्क की जाएगी। इसके लिए अस्पताल में अत्याधुनिक एआई फंडस कैमरा लगाया गया है। खास बात यह है कि यदि जांच में कोई गंभीर समस्या पाई जाती है, तो मरीज को तत्काल बेहतर उपचार के लिए हमीदिया अस्पताल रेफर किया जाएगा। नेत्र विशेषज्ञों के अनुसार, निजी क्षेत्र में फंडस स्क्रीनिंग और रेटिनोपैथी की जांच पर दो से ढाई हजार रुपए तक का खर्चा आता है। जेपी अस्पताल में ''अमृता दृष्टि नेत्र स्वास्थ्य कार्यक्रम'' के सहयोग से शुरू हुए इस केंद्र पर यह पूरी तरह निश्शुल्क होगी। केंद्र के शुभारंभ अवसर पर एनएचएम के वरिष्ठ संयुक्त संचालक डा. प्रभाकर तिवारी, सीएमएचओ मनीष शर्मा और सिविल सर्जन संजय जैन विशेष रूप से मौजूद रहे। असंचारी रोग क्लीनिक से किया लिंक इस नई जांच सुविधा को अस्पताल में पहले से संचालित ''असंचारी रोग क्लीनिक'' से जोड़ा गया है। 40 साल से अधिक उम्र के ऐसे लोग जिन्हें डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, उनकी शुगर जांच के बाद विशेषज्ञों की सलाह पर आंखों का परीक्षण किया जाएगा। डाॅक्टरों का कहना है कि शुगर के कारण आंखों के पर्दे पर खून के छींटे आ जाते हैं, जिससे दृष्टि स्थायी रूप से जा सकती है। विजन जाने के बाद वापसी मुश्किल सीएमएचओ डा. मनीष शर्मा ने बताया कि डायबिटिक रेटिनोपैथी में शुरुआत में कोई दर्द या स्पष्ट लक्षण नहीं होते। एक बार नजर चली जाए तो उसे वापस लाना मुश्किल होता है। इसलिए समय पर जांच ही एकमात्र बचाव है। इसका उपचार दवा या लेजर तकनीक से संभव है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज     अक्षर कटे हुए या तिरछे दिखाई देना।     बारीक अक्षर पढ़ने में परेशानी होना।     अचानक रोशनी की कमी महसूस होना या धुंधला दिखना।     आंखों के सामने काले धब्बे या काली रेखाएं तैरती नजर आना।

झारखंड में एक हजार अभ्यर्थियों को मिलेगी सरकारी नौकरी

रांची. राज्य सरकार एक और बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र देने की तैयारी कर रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विदेश से लौटने पर इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। संबंधित विभागों की तैयारी के अनुसार फरवरी के पहले या दूसरे सप्ताह में रांची में बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर झारखंड लोक सेवा आयोग तथा झारखंड कर्मचारी चयन आयोग से अनुशंसित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जा सकता है। Jharkhand Government Jobs राज्य सरकार द्वारा जिन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिया जाना है, उनमें सबसे महत्वपूर्ण झारखंड लोक सेवा आयोग से बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (सीडीपीओ) पद के लिए अनुशंसित अभ्यर्थी हैं। आयोग ने इस पद पर नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा का अंतिम परिणाम जारी कर दिया। इसमें 64 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की गई है। इनमें अनारक्षित श्रेणी के 34, एससी श्रेणी के दो, एसटी श्रेणी के 21, बीसी-वन के एक तथा आर्थिक रूप से कमजाेर श्रेणी के छह अभ्यर्थी सम्मिलित हैं। हालांकि विभाग ने अभी इन अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों की जांच नहीं की है। मेडिकल कालेजों में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी जेपीएससी ने मेडिकल कालेजों में सहायक प्राध्यापक (एनेस्थेसिया) की नियुक्ति प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। इसके माध्यम से चयनित छह अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिल सकता है। JPSC के माध्यम से खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी सहित कुछ एकल पदों पर भी नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की गई है। इन अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र दिया जाना है। इधर, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग ने सीजीएल परीक्षा (CGL Exam) के तहत कुछ अन्य अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया है, जिन्हें नियुक्ति पत्र दिया जाना है। इसी तरह, सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के तहत भी कुछ अन्य अभ्यर्थियों का परिणाम जारी किया गया है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा इन अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए जाने की तैयारी चल रही है।

मोहनपुरा परियोजना से 26 गांवों में पहुंचेगा पानी, 10 हजार किसानों को होगा लाभ, 26 किलोमीटर पाइपलाइन बिछेगी

राजगढ़   एमपी के राजगढ़ जिले में वृहद सिंचाई परियोजना मोहनपुरा-कुंडालिया का और विस्तार होने वाला है। परियोजना से अछूते रहे सारंगपुर ब्लॉक के 26 गांवों की 11040 हेक्टेयर जमीन सींचित होने लगेगी। इसके लिए तैयार योजना को कैबिनेट में मंजूरी मिली है। मंजूरी के साथ ही परियोजना के विस्तार को हरी झंडी मिल गई है। आगामी दिनों में इसका काम शुरू हो जाएगा। जानकारी के अनुसार वर्तमान में मोहनपुरा और कुंडालिया परियोजना से राजगढ़ और आगर जिले के 1136 गांवों में सिंचाई की जा रही है। साथ ही जिले में राजगढ़, ब्यावरा, खिलचीपुर, जीरापुर क्षेत्र में दोनों का पानी पहुंच रहा था। नरसिंहगढ़ और सारंगपुर इससे वंचित था। अब सारंगपुर क्षेत्र के करीब 26 गांवों में पानी पहुंचेगा। जिससे 10400 किसानों को लाभ मिलेगा और 11040 हेक्टेयर जमीन सींचित होगी। सारंगपुर के इन गांवों को मिलेगा फायदा परियोजना के विस्तार से क्षेत्र अंतर्गत लीमा चौहान, पाडदा, टूट्याहेड़ी, दराना, देवीपुरा, भैंसवा माता, भवानीपुरा, कलाली, अरन्या, लोटट्या, घट्ट्या, रोजड़कलां, धामंदा, गायन, पट्टी, इधीवाड़ा, शंकरनगर, अमलावता, पीपल्या पाल, पाडल्या माता, शेरपुरा, कमलसरा, किशनखेड़ी, सुल्तानिया, जोगीपुरा और छापरा गांव शामिल हैं। दो साल में पूरा करेंगे नई परियोजना जिले के अधिकांश हिस्से में मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना का पानी पहुंच रहा था। इसके अतिरिक्त अधिक से अधिक सिंचित रकबा हम बढ़ाने की तैयारी में थे। कैबिनेट से सारंगपुर क्षेत्र के उक्त गांवों की परियोजना का भी मंजूरी मिली है। इससे 26 गांवों लाभान्वित होंगे। दो साल में इसे पूरा करेंगे ताकि जल्द से किसानों को लाभ मिलेगा। – विकास राजोरिया, प्रशासक, मोहनपुरा-कुंडालिया परियोजना, राजगढ़

प्रॉपर्टी रेट में बढ़ोतरी तय: शहर की 256 व ग्रामीण क्षेत्र की 57 लोकेशन सूचीबद्ध

ग्वालियर पंजीयन विभाग ने वित्त वर्ष 2026-27 की कलेक्टर गाइडलाइन तैयार करना शुरू कर दिया है। आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस (एआइ) से शहर सहित जिले में हुई रजिस्ट्री का डेटा का विश्लेषण किया। शहर में 256 व गांव में 57 लोकेशन पर बढ़ोतरी बताई है, जिला पंजीयक ने उप पंजीयकों के साथ बैठक की। इस बैठक में उप पंजीयकों से अपने-अपने क्षेत्र की गाइडलाइन के संबंध में जानकारी ली। उप पंजीयकों ने जहां पर ज्यादा रजिस्ट्री हुई हैं, वहां गाइडलाइन बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। अलग-अलग लोकेशन पर 40 से 100 फीसदी तक बढ़ोतरी होगी। शहरी क्षेत्र में औसतन 20 फीसदी तक की बढ़ोतरी संभावित है। ऐसे बढ़ेगी गाइडलाइन -पॉलिगॉन में सुधार किया जा रहा है। स्टांप ड्यूटी चोरी रोकने के लिए पॉलिगॉन का दायर बढ़ाया जा रहा है। एक पॉलिगॉन में अधिक लोकेशन को शामिल किया जाएगा। पॉलिगॉन में जिस लोकेशन की गाइडलाइन अधिक होगी। वह पूरे पॉलिगॉन के ऊपर लागू होगी।   -पॉलिगॉन का दायरा बढ़ने से भी गाइडलाइन स्वतः बढ़ जाएगी। ऐसा करने से स्टांप ड्यूटी चोरी नहीं कर पाएंगे। क्योंकि अभी लोकेशन बदलकर चोरी कर रहे हैं। इस तरह से तैयार की जा रही है गाइडलाइन     संपदा-2 सॉफ्टवेयर एआइ तकनीक पर कार्य करता है। इसके माध्यम से गाइडलाइन तैयार की जा रही है।     उप पंजीयकों ने संपदा-2 से दस्तावेजों का विश्लेषण शुरू कर दिया है। 30 हजार दस्तावेजों का विश्लेषण किया जा रहा है।     उप पंजीयकों ने स्थानीय स्तर पर होने वाली खरीद-फरोख्त की जानकारी जुटा रहे हैं। मल्टियों से भी डेटा लिया गया है।     नवीन क्षेत्रों में निवेश की संभावना को भी देखा जा रहा है। उन्हीं क्षेत्रों का चयन किया जाएगा, जहां पर सबसे ज्यादा विक्रय हो रहा है।     प्लॉट व व्यवसायिक संपत्तियों में ज्यादा बढ़ोतरी संभावित है।   2025 में हुई रजिस्ट्री का डेटा का विश्लेषण करें पंजीयन महानिरीक्षक ने पिछले सप्ताह जिला पंजीयकों की बैठक बुलाई थी। इस बैठक में गाइडलाइन पर चर्चा की गई। जिले में खुद होमवर्क करें। 2025 में हुई रजिस्ट्री का डेटा का विश्लेषण करें। इसके बाद गाइडलाइन में क्या बदलाव चाहते हैं, उनके प्रस्ताव तैयार किए जाएं। उप पंजीयकों ने बढ़ोतरी के प्रस्ताव के संबंध में जिला पंजीयक को जानकारी दी है। विसंगतियां भी बताई गई हैं। इन सबको दूर किया जाएगा। इन क्षेत्रों में रही सबसे अधिक बिक्री वृत्त-2 : मुरार, न्यू सिटी सेंटर, महाराजपुरा, बड़ागांव वृत्त-1 : पुरानी छावनी, शिवपुरी लिंक रोड, गिरवाई क्षेत्र उप पंजीयकों ने डेटा का विश्लेषण किया है। कहां बढ़ोतरी की संभावना है, उन्हीं क्षेत्रों को चिह्नित किया जा रहा है। संपत्तियों का विक्रय कम है। उन लोकेशन पर गाइडलाइन नहीं बढ़ा रहे हैं।- अशोक शर्मा, जिला पंजीयक

इतिहास से रहस्य तक: तात्या टोपे ने जहां काटे 45 दिन, वही रकमगढ़ किला बना भूतिया कहानियों का केंद्र

जयपुर इतिहास से जुड़ा रकमगढ़ किला राजस्थान के राजसमंद जिले से करीब 10 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व दिशा में स्थित रकमगढ़ किला एक छोटी पहाड़ी पर बना ऐतिहासिक किला है। यह किला आज खेड़ाना पंचायत क्षेत्र में आता है और इसका इतिहास एशिया की प्राचीनतम मीठे पानी की कृत्रिम झीलों में शामिल राजसमंद झील से भी जुड़ा हुआ है। आकार में भले ही यह किला छोटा हो, लेकिन इसका ऐतिहासिक महत्व बेहद बड़ा माना जाता है। आज़ादी की लड़ाई में रकमगढ़ की भूमिका जानकारी के अनुसार, इस किले का निर्माण कोठारिया रियासत के तत्कालीन राव साहब ने करवाया था। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान यह किला उस समय चर्चा में आया, जब महान क्रांतिकारी तात्या टोपे ने यहां लगभग 45 दिनों तक अंग्रेजों से बचकर शरण ली थी। जैसे ही अंग्रेजों को इसकी भनक लगी, उन्होंने रकमगढ़ किले पर हमला कर दिया। उस समय तात्या टोपे ने कोठारिया राव जी से सहायता की गुहार लगाई, जिसके बाद कोठारिया किला और रकमगढ़ के बीच तोपों से जबरदस्त गोलाबारी हुई। आज भी किले की दीवारों पर उस संघर्ष के निशान देखे जा सकते हैं। झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का आगमन कहते हैं कि जब झांसी की रानी लक्ष्मीबाई को तात्या टोपे पर हुए हमले की जानकारी मिली, तो वह स्वयं उनकी सहायता के लिए रकमगढ़ किले तक पहुंचीं। अंग्रेजों को पीछे हटाने के बाद तात्या टोपे ने यह स्थान छोड़ दिया, लेकिन तब से यह किला उनकी वीरता, साहस और बलिदान की मूक गवाही देता हुआ आज भी खड़ा है। किले से जुड़ी रहस्यमय कथाएं इतिहास के साथ-साथ रकमगढ़ किला अपनी रहस्यमय कहानियों के लिए भी जाना जाता है। आबादी से दूर पहाड़ी पर स्थित होने के कारण आसपास के गांवों में यहां भूत-प्रेत होने की चर्चाएं लंबे समय से चलती आ रही हैं। ग्रामीणों का मानना है कि तात्या टोपे और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई ने अपना सुरक्षित खजाना इसी किले की जमीन में दबाया था। इसी विश्वास के चलते कई लोगों ने वर्षों पहले किले के भीतर 5 से 10 फीट तक गहरे गड्ढे खोद डाले। काले सांप की लोककथा स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार, किले के पास दो लोक देवताओं के मंदिर हैं और कहा जाता है कि एक बहुत बड़ा काला सांप उस खजाने की रखवाली करता है। मान्यता है कि उस सांप के सिर पर धार्मिक निशान मौजूद हैं। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि जिन्हें सपने में माताजी के दर्शन होते हैं, वे किले से धन निकाल सकते हैं और उस सांप से उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचता। हालांकि, बीते समय में सांप के काटने से कुछ लोगों की मौत की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे इन कहानियों को और बल मिला। खंडहर में बदलती ऐतिहासिक धरोहर आज यह किला कोठारिया राजपरिवार की निजी संपत्ति माना जाता है। निजी स्वामित्व और वारिसों के कारण, पुरातत्व विभाग के अधीन होने के बावजूद इसकी देखरेख पर अब तक विशेष ध्यान नहीं दिया गया है। संरक्षण के अभाव में यह किला धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है, लेकिन इसकी जर्जर दीवारें आज भी स्वतंत्रता संग्राम, वीरता और इतिहास की अनकही कहानियां बयां करती हैं। रकमगढ़ किला केवल एक ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि आज़ादी की लड़ाई, वीरता और लोककथाओं का जीवंत प्रतीक है। जहां एक ओर यह तात्या टोपे और झांसी की रानी के शौर्य की याद दिलाता है, वहीं दूसरी ओर रहस्य और किंवदंतियों के कारण लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।