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Republic Day Special: इन देशभक्ति कविताओं के साथ दें दमदार भाषण, पाएं तालियों की गूंज

भोपाल देश इस साल अपना 77वां गणतंत्र दिवस (77th Republic Day 2026) मनाने जा रहा है। 26 जनवरी का यह दिन न केवल एक राष्ट्रीय पर्व है, बल्कि यह हमारे संविधान की शक्ति और लोकतंत्र की महानता का उत्सव भी है। स्कूल, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में इस गौरवशाली दिन के लिए तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं। यदि आप भी इस अवसर पर मंच से अपनी बात रखना चाहते हैं, तो यहां एक प्रभावी और कविताओं से सुसज्जित भाषण का प्रारूप दिया गया है, जो श्रोताओं के दिलों में देशभक्ति का संचार कर देगा: गणतंत्र दिवस 2026: भाषण का प्रारूप नमस्कार, मैं……(नाम), आज राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस के पावन मौके पर यहां पर उपस्थित सभी महानुभावों/ अतिथिगण/ टीचर एवं सभी भैया बहनों का अभिवादन करता हूं। जैसे कि हम सभी जानते हैं कि हम यहां पर देश के 76वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में यहां उपस्थित हुए हैं। आज ही के दिन 1950 में भारत ने अपने संविधान को अपनाया और एक संप्रभु गणराज्य के रूप में अस्तित्व में आया। इस वर्ष भारत गणतंत्र देश के रूप में 77वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। इन 77 वर्षों के अंदर ही हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक बनकर सामने आया है।   हमारे देश के संविधान को डॉ. भीमराव अंबेडकर के नेतृत्व में संविधान सभा ने तैयार किया था। डॉ. अंबेडकर के अलावा इस संविधान सभा में जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद, सरदार वल्लभ भाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, पंडित गोविंद बल्लभ पंत, आचार्य जेबी कृपलानी, शरत चंद्र बोस, सच्चिदानंद सिन्हा थे। इस संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद थे। संविधान को तैयार करने में 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे थे। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को राष्ट्र को समर्पित कर दिया गया था। इसके दो माह बाद 26 जनवरी 1950 को इसे देशभर में लागू कर दिया गया। अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मैं एक कविता सुनाने वाला हूं देखो फिर से गणतंत्र दिवस आ गया, जो आते ही हमारे दिलो-दिमाग पर छा गया। यह है हमारे देश का राष्ट्रीय त्यौहार, इसलिए तो सब करते हैं इससे प्यार। इस अवसर का हमें रहता विशेष इंतजार, क्योंकि इस दिन मिला हमें गणतंत्र का उपहार। आओ लोगों तक गणतंत्र दिवस का संदेश पहुचाएं, लोगों को गणतंत्र का महत्व समझाएं। गणतंत्र द्वारा भारत में हुआ नया सवेरा, इसके पहले तक था देश में तानाशाही का अंधेरा। क्योंकि बिना गणतंत्र देश में आ जाती है तानाशाही, नहीं मिलता कोई अधिकार वादे होते हैं हवा-हवाई। तो आओ अब इसका और ना करें इंतजार, साथ मिलकर मनाये गणतंत्र दिवस का राष्ट्रीय त्यौहार।। हमारा संविधान दुनिया का सबसे बेहतरीन संविधान माना जाता है क्योंकि इसमें गरीब हो अमीर सभी के लिए स्वतंत्रता, समानता और न्याय का अधिकार देता है। संविधान में किसी भी प्रकार की ऊंच नीच को स्थान नहीं दिया गया है जो मजबूत राष्ट्र को मजबूती प्रदान करता है। यह दिन हमें हमारे अधिकारों और कर्तव्यों की याद दिलाता है और सभी लोगों के प्रति समान व्यवहार करने का उचित पाठ पढ़ाता है।

रामगंजमंडी स्टेशन पर बढ़ी सतर्कता: बाबा बागेश्वर कथा को लेकर विशेष रेलवे व्यवस्थाएं लागू

कोटा बाबा बागेश्वर जी की कथा आयोजन के दौरान 23 से 25 जनवरी के बीच रामगंजमंडी रेलवे स्टेशन पर श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए रेलवे प्रशासन ने विशेष भीड़ प्रबंधन व्यवस्था लागू की है। इस व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा एवं सुविधा सुनिश्चित करना है। वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि कथा अवधि के दौरान स्टेशन पर यात्रियों की आवाजाही को सुव्यवस्थित रखने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि ट्रेनों के निर्धारित प्लेटफॉर्म में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जाएगा, ताकि यात्रियों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। सौरभ जैन ने यह भी बताया कि यात्रियों को सही एवं समय पर जानकारी उपलब्ध कराने के लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली के माध्यम से नियमित एवं स्पष्ट घोषणाएं की जाएंगी। साथ ही स्टेशन परिसर में प्रवेश एवं निकास के दौरान भीड़ के प्रवाह को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सक्रिय रखी जाएंगी। रेलवे अधिकारियों ने बताया कि स्टेशन पर तैनात टिकट जांच स्टाफ एवं रेलवे सुरक्षा बल के जवान यात्रियों एवं श्रद्धालुओं को मार्गदर्शन प्रदान करेंगे तथा भीड़ को नियंत्रित एवं सुव्यवस्थित रखने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्टेशन परिसर में भीड़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी, ताकि आवश्यकता पड़ने पर त्वरित निर्णय लिए जा सकें। स्टेशन परिसर में सुरक्षा, सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पार्किंग सुविधा, टिकट वेंडिंग मशीनों तथा बुकिंग खिड़कियों के सुचारु संचालन को सुनिश्चित किया गया है, जिससे श्रद्धालुओं एवं नियमित यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

रक्षा उत्पादन में एमपी की बड़ी भूमिका, भारतीय सेना को मिलेंगे 10 ‘अजेय’ टैंक

जबलपुर भारतीय सेना के मुख्य युद्धक दो टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य वीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में पूरा कर लिया गया है। अब इसे रोल-ऑन प्रक्रिया के लिए तैयार किया जा रहा है, जो सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में पूरी की जाएगी। इसके बाद टैंक को अंतिम परीक्षण के लिए हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी (चेन्नई) भेजा जाएगा। टेस्टिंग में सफलता मिलने पर वीएफजे को 10 टी-72 टैंकों (T-72 Tanks) की नई खेप मिलने की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी। 2023 के दौरान कार्य में हुई थी भारी कमी रक्षा कंपनी आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड के अंतर्गत आने वाली वीएफजे में वर्ष 2023 के दौरान कार्य की भारी कमी हो गई थी। 1500 करोड़ रुपए तक उत्पादन क्षमता वाली फैक्ट्री के पास उस समय मात्र 500-600 करोड़ रुपए का कार्य शेष था। ऐसे में फैक्ट्री प्रबंधन भविष्य को ने देखते हुए टी-72 टैंक मेंटेनेंस, रिपेयरिंग एंड ओवरहालिंग (एमआरओ) परियोजना पर काम शुरू किया।   इस परियोजना के तहत कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए चेन्नई भेजा गया, जहां उन्होंने टी-72 टैंक की ओवरहालिंग की तकनीकी बारीकियां सीखी। अप्रैल 2025 में बीएफजे को दो टी-72 टैंक प्राप्त हुए थे थे, जिनकी मैकेनिकल ओवरहालिंग दिसंबर 2025 में पूरी कर ली गई है। दो चरणों में हो रहा ओवरहालिंग कार्य पहले चरण में टैंक के टरेट और हल की ओवरहालिंग की गई। टरेट टैंक का ऊपरी हिस्सा होता है, जिस पर गन माउंट रहती है और जो 360 डिग्री घूमने में सक्षम होती है। वहीं हल वह आधार होता है, जिस पर पूरा टैंक निर्भर रहता है। दूसरे चरण में टैंक के अंदरूनी और इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की मरम्मत व बदलाव किया जाएगा।   टी-72 टैंक को सोवियत संघ में डिजाइन और निर्मित किया गया था। भारत ने 1970 के दशक में इसे आयात किया और बाद में हैवी व्हीकल फैक्ट्री, आवडी में इसका स्वदेशी निर्माण और उन्नयन शुरू हुआ। 'अजेय टैंक' के नाम से पहचाना जाने वाला टी-72 आज भी भारतीय सेना के टैंक बेड़े की रीढ़ है।   चेन्नई में होगा प्रशिक्षण- जनसंपर्क अधिकारी टी-72 टैंक की मैकेनिकल ओवरहालिंग का कार्य पूरा हो चुका है। सेना के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से निरीक्षण के बाद इसे टेस्टिंग के लिए चेन्नई भेजा जाएगा। इसके पश्चात भविष्य में 10 नए टैंकों की खेप मिलने की उम्मीद है, जिनमें मैकेनिकल के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स की ओवरहालिंग भी की जाएगी। -हर्ष भटनागर, जनसंपर्क अधिकारी, वीएफजे

मध्यप्रदेश में 12,000 आउटसोर्स कर्मचारियों की छंटनी की आशंका, जानें कब तक फैसला

जबलपुर मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों (Outsourced Employees) की नौकरी पर 31 मार्च के बाद संकट के बादल मंडरा सकते हैं। वर्तमान में कार्यरत एजेंसियों की टेंडर अवधि इसी तिथि को समाप्त हो रही है, लेकिन अब तक नए टेंडर की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। इससे समय पर नई एजेंसी तय होने और कर्मचारियों को निरंतर काम मिलने की संभावना कमजोर नजर आ रही है। दस्तावेज अब तक तैयार नहीं सूत्रों के अनुसार ऊर्जा विभाग से टेंडर प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक दस्तावेज अब तक तैयार नहीं हो पाए है। इसी कारण वितरण कंपनियां नई निविदा प्रक्रिया प्रारंभ नहीं कर पा रही है। इस देरी का सीधा असर जिले के 12 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जो विभिन्न कार्यों में वर्षों से सेवाएं दे रहे है। बताया जाता है कि विद्युत वितरण कंपनियां अलग-अलग कार्यों के लिए आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति करती हैं। यह पूरी प्रक्रिया टेंडर के जरिए होती है। हर वर्ष 31 मार्च को टेंडर अवधि समाप्त होती है। आमतौर पर एजेंसी बदलती है, लेकिन कर्मचारी उसी स्थान पर कार्यरत रहते हैं, केवल उनका नियोक्ता बदल जाता है।   जानकारों के मुताबिक नई निविदा प्रक्रिया सामान्यतः दो महीने पहले शुरू कर दी जाती है, क्योंकि टेंडर कई चरणों में पूरा होता है और इसमें पर्याप्त समय लगता है। हालांकि इस बार ऊर्जा विभाग द्वारा बीते करीब डेढ़ साल से एक नई संयुक्त टेंडर प्रणाली के दस्तावेज तैयार किए जा रहे है, जिसके तहत प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों में एक साथ आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी निविदा निकाली जानी है। ऊर्जा विभाग के आदेश का इंतजार मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारी फिलहाल ऊर्जा विभाग के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। विभागीय स्वीकृति मिलते ही टेंडर जारी किए जाने की विद्युद् ब्रह्मेति बात कही जा रही है। इस संबंध में मप्र पावर मैनेजमेंट कंपनी के मानव संसाधन विभाग प्रमुख राजीव गुप्ता ने बताया कि ऊर्जा विभाग से आदेश प्राप्त होने के बाद ही नई टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा सकेगी।

नर्मदा पर स्वास्थ्य सेवा की नई पहल: पानी पर तैरते अस्पताल बनेंगे, नदी एम्बुलेंस नेटवर्क होगा विस्तारित

भोपाल मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के घाटों पर फ्लोटिंग अस्पताल शुरू कर नदी एम्बुलेंस का विस्तार किया जाएगा। इससे घाट पर आने वाले तीर्थयात्रियों, परिक्रमावासियों, आगंतुकों और स्थानीय निवासियों को स्वास्थ्य सुविधाएं प्राप्त करने में सुगमता होगी। राज्य सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल आलीराजपुर, धार और बड़वानी जिलों में नदी किनारे बसे लोगों को चिकित्सीय सुविधाएं देने के लिए नदी एम्बुलेंस शुरू की गई हैं, जो आपात स्थिति में प्राथमिक उपचार व दवाएं उपलब्ध कराने में मददगार साबित होंगी।   आदिवासी इलाकों के लिए महत्वपूर्ण कदम खासकर बाढ़ प्रभावित और दूरदराज के आदिवासी इलाकों के लिए यह महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इसके अलावा वेलनेस और योग टूरिज्म में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए घाटों पर योग, ध्यान केंद्र और पार्क निर्माण भी किए जाएंगे। नर्मदा के घाटों पर प्रतिदिन 2.5 लाख आते हैं श्रद्धालु नर्मदा नदी के 861 घाटों पर प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख से अधिक पर्यटक, श्रद्धालु, तीर्थयात्री आते हैं। 396 सूक्ष्म आकार के घाटों पर एक लाख आठ हजार से अधिक, 338 मध्यम आकार के घाटों पर 95 हजार और 116 वृहद आकार के घाटों पर 65 हजार से अधिक श्रद्धालु पहुंचते हैं। डॉक्टर, नर्स सहित मेडिकल सुविधाओं से लैस होगा फ्लोटिंग अस्पताल यानी पानी पर तैरता हुआ अस्पताल, जो दूरदराज के इलाकों और द्वीपों पर रहने वाले लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराएगा। यह चिकित्सा सेवाओं को नदी से लगे सड़क विहीन गांवों तक ले जाने में सक्षम होगा। डॉक्टर, नर्सिंग टीम व मेडिकल सुविधाओं से लैस ये अस्पताल आपातकालीन स्थितियों में भी मददगार होंगे। इनमें जरूरी दवाइयां भी उपलब्ध होंगी।

दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पर्यटन क्षेत्र में निवेश पर केंद्रित सत्र को संबोधित करेंगे मुख्यमंत्री

भोपाल देश का हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश पर्यटन के क्षेत्र में नए आत्मविश्वास, नई ऊर्जा और दूरदर्शी दृष्टिकोण के साथ वैश्विक स्तर पर अपनी सशक्त पहचान बना चुका है। प्रदेश, प्रकृति की अनुपम सुंदरता, समृद्ध ऐतिहासिक विरासत, गहन आध्यात्मिक आस्था और विविध वन्य जीवों का अद्भुत संगम है। इन्हीं विशेषताओं और निवेश संभावनाओं को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 21 जनवरी को दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में पर्यटन क्षेत्र में निवेश पर केंद्रित सत्र को संबोधित करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” के दूरदर्शी दृष्टिकोण से प्रेरित होकर मध्यप्रदेश ने पर्यटन को समावेशी और सतत विकास के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया है। इसके परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में प्रदेश में 13.30 करोड़ से अधिक पर्यटकों का आगमन दर्ज किया गया है, जो मध्यप्रदेश के प्रति बढ़ते राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय विश्वास को दर्शाता है। आध्यात्मिक पर्यटन मध्यप्रदेश की प्रमुख पहचान के रूप में स्थापित हुआ है। उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में 6.5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन हो चुका है। इसके साथ ही खजुराहो, सांची, ओरछा, महेश्वर, अमरकंटक और चित्रकूट जैसे ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल देश-विदेश के पर्यटकों के प्रमुख आकर्षण केंद्र बने हुए हैं। राज्य सरकार द्वारा पर्यटन नीति-2025 एवं फिल्म पर्यटन नीति-2025 के माध्यम से निवेश प्रोत्साहन, रोजगार सृजन और सतत पर्यटन विकास को नई दिशा दी गई है। फिल्म पर्यटन नीति-2025 के अंतर्गत मध्यप्रदेश राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय फिल्म निर्माण के लिए एक पसंदीदा डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है, जिससे स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। ग्रामीण पर्यटन को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रदेश के 81 गांवों में 370 से अधिक होमस्टे विकसित किए गए हैं, जिन्हें 1000 तक विस्तारित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष आय और रोजगार उपलब्ध करा रही है। पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने के लिए पीएम श्री पर्यटन वायु सेवा के अंतर्गत भोपाल, इंदौर, जबलपुर, उज्जैन, ग्वालियर, रीवा, सिंगरौली और खजुराहो को हवाई संपर्क से जोड़ा गया है। साथ ही पीएमश्री पर्यटन हेली सेवा के माध्यम से पर्यटकों को तेज़, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। “बेस्ट टूरिज्म स्टेट ऑफ द ईयर” सहित 18 राष्ट्रीय पुरस्कार, यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में प्रदेश के 4 धरोहर स्थलों का शामिल होना और देश की 69 यूनेस्को धरोहरों में से 15 का मध्यप्रदेश में स्थित होना प्रदेश की वैश्विक पर्यटन क्षमता और प्रतिष्ठा को सुदृढ़ करता है। मध्यप्रदेश आज पर्यटन, परंपरा और प्रगति के संगम के साथ वैश्विक निवेशकों और पर्यटकों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है।  

विधायिका तभी मजबूत जब जनता भरोसा करे और जवाबदेह हो– वासुदेव देवनानी

जयपुर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने लखनऊ में 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन में मंगलवार को जनता के प्रति विधायिका की जवाबदेही विषय पर विधायिका को स्वयं का आत्म मूल्यांकन करने लोक और तंत्र के सेतु को सतत और सशक्त बनाने, नई चुनौतियों से मुकाबले के साथ भविष्य को प्रभावशाली बनाने के लिए दूरदर्शी उद्‌बोधन दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव जनता का अडिग विश्वास होता है। यह विश्वास जनता से निरंतर संवाद, पारदर्शिता और उत्तरदायित्वपूर्ण आचरण से ही कायम रह सकता है। देवनानी ने विधायिका को भारतीय लोकतंत्र की धडकन बताया है। विधायी जनता को आकांक्षाओं का दर्पण:- देवनानी ने कहा कि विधायिका कोई स्वतंत्र सता-केंद्र नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का दर्पण है। सदन में बैठने वाला प्रत्येक सदस्य केवल स्वयं का नहीं, बल्कि लाखों नागरिकों की सामूहिक आवाज का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकतंत्र की कसौटी यह है कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय और अधिकार पहुंचे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जवाबदेही केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि सदन के प्रत्येक सत्र, प्रत्येक बहस, प्रत्येक प्रश्न और प्रत्येक विधायी हस्तक्षेप में दिखाई देनी चाहिए। एक जीवंत लोकतंत्र वही है जिसमें विधायिका जनता की समस्याओं को केवल सुनती ही नहीं, बल्कि उन्हें गहराई से महसूस कर समाधान के लिए प्रतिबद्ध रहती है। श्री देवनानी ने कहा कि संवैधानिक नैतिकता केवल कोगों पर अंकित शब्द नहीं है, बल्कि यह हमारे रोजमर्रा के विधायी कार्यों का हिस्सा होनी चाहिए। जब हम सदन में बैठते हैं, तो हमें संविधान के ट्रस्टी के रूप में व्यवहार करना चाहिए, क्योंकि हमारे हाथ में जो शक्ति है, वह जनता द्वारा दी गई पवित्र धरोहर है। अल्पमत की आवाज को दिया सम्मान, सदन की श्रेष्ठता का पैमाना:- विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा कि सदन की श्रेष्ठता बहुमत की शक्ति से नहीं, बल्कि अल्पमत की आवाज को दिए गए सम्मान से तय होती है। असहमति और स्वस्थ आलोचना लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि संवाद और वाद-विवाद ही विधायिका की जवाबदेही के मजबूत स्तंभ हैं। देवनानी ने कार्यपालिका पर प्रभावी नियंत्रण को विधायिका का प्रमुख संवैधानिक दायित्व बताया। उन्होंने कहा कि जनता के कर से एकत्रित प्रत्येक रुपये का उपयोग जनकल्याण में हो, यह सुनिश्चित करना विधायिका का परम कर्तव्य है। प्रश्नकाल, ध्यानाकर्षण प्रस्ताव और शून्यकाल को उन्होंने जनता की आवाज का सशक्त माध्यम बताया। विधायी समितियां लघु सदन है:- देवनानी ने कहा कि विधायी समितियों की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि समितियां 'लघु सदन" के रूप में कार्य करती हैं, जहां गहन, निष्पक्ष और तकनीकी समीक्षा संभव होती है। समिति प्रतिवेदन केवल फाड़ों तक सीमित न रहें, बल्कि उन पर सदन में चर्चा हो और सरकार द्वारा की गई कार्रवाई का विवरण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने बताया कि राजस्थान विधानसभा ने लोक लेखा समिति और प्राक्कलन समिति के माध्यम से वित्तीय अनुशासन को सुदृढ़ किया है तथा यह सुनिश्चित किया है कि समितियों की रिपोर्ट पर समयबद्ध और प्रभावी कार्रवाई हो। साथ ही सदस्यों के प्रशिक्षण, अभिमुखीकरण कार्यक्रम, बाल विधानसभा और यूथ पार्लियामेंट जैसी पहलों से भविष्य की पीढ़ी को लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ा जा रहा है। आज डिजिटल जवाबदेही का युग:- राजस्थान विधानसभा ‌द्वारा उठाए गए डिजिटल नवाचारों के ऐतिहासिक कदर्मों का उल्लेख करते हुए देवनानी ने कहा कि आज डिजिटल जवाबदेही का युग है। ऑनलाइन प्रक्रियाओं, पेपरलेस व्यवस्था, यूट्यूब पर कार्यवाही के सजीव प्रसारण और राजस्थान विधानसभा के डिजिटल म्यूजियम के माध्यम से पारदर्शिता को नई ऊँचाइयों पर ले जाया गया है। यह एक प्रकार का 'सोशल ऑडिट है, जो सदन को निरंतर सजग बनाए रखता है। विधायी प्रभाव मूल्याकंन:- देवनानी ने लेजिस्लेटिव इम्पैक्ट असेसमेंट और पोस्ट-लेजिस्लेटिव ऑडिट की आवश्यकता पर भी बल दिया, ताकि कानून बनने के बाद उनके वास्तविक प्रभाव का आकलन किया जा सके। उन्होंने कहा कि जनता को नीति-निर्माण की प्रक्रिया में सहभागी बनाना ही सच्ची जवाबदेही का उच्चतम रूप है। आसन की भूमिका महत्वपूर्ण:- पीठासीन अधिकारियों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि अध्यक्ष का आसन केवल एक रेफरी का नहीं, बल्कि संविधान के संरक्षक का होता है। नियर्मा की व्याख्या इस प्रकार होनी चाहिए कि वह चर्चा को रोकने वाली नहीं, बल्कि उसे विस्तार देने वाली हो। विधायिका को स्वयं का आत्म मूल्यांकन करना होगा, इस परिप्रेक्ष्य में उन्होंने सदनों में सदस्यों की उपस्थिति विधेयकों के विविध पहलुओं पर चर्चा और सदन के भीतर संसदीय मर्यादाओं के पालन को विचारणीय बताया। विधायिका वह पथ है जो राष्ट्र को सशक्त बनाता है:- देवनानी ने कहा कि लोकतंत्र कोई अंतिम मंजिल नहीं, बल्कि एक निरंतर यात्रा है और इस यात्रा में विधायिका जनता के विश्वास के ईंधन से चलती है। राजस्थान विधानसभा लोकतांत्रिक मूल्यों, विधायी मर्यादाओं और जनता के विश्वास की रक्षा के अपने संकल्प पर सदैव दृढ़ रहेगी। उन्होंने सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना को बधाई दी और सभी प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

दूषित पानी से प्रभावित इंदौर, जांच में जुटी राज्य समिति

भोपाल/इंदौर मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में दूषित जल पीने से हुई त्रासदी की जांच के लिए राज्य स्तरीय समिति बनाई गई है, जिसमें अध्यक्ष के अलावा तीन सदस्य होगें। आधिकारिक जानकारी में बताया गया है कि इंदौर नगर में प्रदूषित जल आपूर्ति के घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा कर निष्कर्ष, सुझाव एवं अनुशंसाएं प्रस्तुत करने के लिए राज्य शासन ने अपर मुख्य सचिव सामान्य प्रशासन संजय कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक समिति में प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी पी. नरहरि, आयुक्त संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास श्री संकेत भोडवे को सदस्य बनाया गया है। आयुक्त इंदौर संभाग, इंदौर सुदाम खाड़े को सदस्य-सचिव नामित किया गया है। राज्य स्तरीय यह समिति इंदौर के भागीरथपुरा में घटित घटना के वास्तविक कारणों एवं आवश्यक तथ्यों का परीक्षण करना एवं घटना से संबंधित प्रशासनिक, तकनीकी एवं प्रबंधनगत कमियों का विश्लेषण करेगी। समिति घटना के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की जवाबदेही तय करना, भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो इसके लिए आवश्यक सुझाव देना और अन्य मसलों को भी जांच में शामिल कर सकेगी। समिति संबंधित विभागों से आवश्यक अभिलेख, प्रतिवेदन एवं जानकारी प्राप्त कर सकेगी तथा आवश्यकता होने पर स्थल निरीक्षण भी करेगी। समिति द्वारा जांच प्रतिवेदन यथाशीघ्र किन्तु अधिकतम एक माह के भीतर राज्य शासन को प्रस्तुत किया जाएगा। दरअसल पिछले दिनों इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित जल पीने से बड़ी तादाद में लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग बीमार हुए थे। इसके बाद सरकार ने कई अधिकारियों के तबादले किए और निलंबन भी किया। इस पर राजनीति भी खूब हो रही है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी इंदौर का दौरा कर चुके हैं।

शंकराचार्य का दर्जा नहीं, समाज के साथ छल: स्वामी जितेंद्रानंद ने उठाया आरोप

वाराणसी प्रयागराज माघ मेले में स्नान को लेकर विवादों में आए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती कभी शंकराचार्य नहीं थे। वे सिर्फ नकारात्मक प्रचार के जरिए समाज के साथ छल करने का काम कर रहे हैं। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने कहा, "अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती 2020 में 2013-14 की वसीयत लेकर आए थे। 2020 में उनके अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गुरु (शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती) ने अपना उत्तराधिकारी बनाने से साफ इनकार किया था। उन्होंने वसीयत लिखने से भी साफ इनकार किया था।" उन्होंने कहा कि अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने अपनी योग्यता को आधार बनाया और परंपरा को नकारकर कोर्ट में मुकदमा दायर किया था। वे परंपरा को स्वीकार नहीं कर सकते थे और इसीलिए वसीयत नहीं लिख सकते थे। हाईकोर्ट ने गलत ठहराया था और सुप्रीम कोर्ट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली थी। स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई का जिक्र करते हुए कहा, "अविमुक्तेश्वरानंद के पट्टाभिषेक पर पुरी के शंकराचार्य निश्चलानंद सरस्वती के शपथपत्र के कारण प्रतिबंध लगा। आजीवन अविमुक्तेश्वरानंद का पट्टाभिषेक नहीं हो सकता है।" अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से पट्टाभिषेक के दावों पर भी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा, "पट्टाभिषेक सिंहासन पर बैठाकर होता है। अविमुक्तेश्वरानंद अपने गुरु की 13वीं करके पहुंचे थे और उस समय किसी शंकराचार्य ने दूर से जल छिड़क दिया था, लेकिन आप कह रहे हैं कि अभिषेक हो गया। यह गलत बयानबाजी है।" स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अविमुक्तेश्वरानंद पर कानून के साथ खिलवाड़ करने के भी आरोप लगाए। उन्होंने पूछा, "देश के अखाड़ों, संन्यासियों या किसी प्रतिष्ठित संत ने अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य नहीं माना। उन्हें किसी कार्यक्रम में नहीं बुलाया गया।" इसी बीच, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने पंडित धीरेंद्र शास्त्री के 'तिरंगे' वाले बयान का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि भारत के विभाजन का आधार सिर्फ धर्म था। अखंड भारत में सिर्फ 23 प्रतिशत मुसलमान थे, तब उन्होंने अलग देश बना लिया। आज भी 'गजबा-ए-हिंद' पर वे काम कर रहे हैं। इन परिस्थितियों में धीरेंद्र शास्त्री का बयान बिल्कुल सही है।

ग्रीन स्टील तकनीक पर झारखंड सरकार और टाटा के बीच करार

रांची. वैश्विक औद्योगिक परिदृश्य में एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए झारखंड सरकार और टाटा स्टील लिमिटेड ने विश्व आर्थिक मंच में एक ऐतिहासिक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। यह साझेदारी न्यू एज ग्रीन स्टील प्रौद्योगिकियों में 11,000 करोड़ से अधिक के भारी निवेश की रूपरेखा तैयार करती है, जो एक स्थायी और कार्बन न्यूट्रल भविष्य और प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन की ओर एक ऊंची और लम्बी छलांग है। नीदरलैंड और जर्मनी के अत्याधुनिक नवाचारों को राज्य में लाकर यह पहल सुनिश्चित करती है कि झारखंड प्रकृति के साथ पूर्ण सामंजस्य बनाए रखते हुए हरित विनिर्माण के वैश्विक बदलाव में अग्रणी बना रहे। इस मौके पर टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन एवं प्रतिनिधिमंडल मौजूद था। इस निवेश का मुख्य आधार हिसारना और ईजीमेल्ट जैसी क्रांतिकारी आयरनमेकिंग तकनीकियों की उपयोगिता है, जिसमें कुल 7,000 करोड़ का निवेश शामिल है। क्या है हिसारना परियोजना? हिसारना परियोजना एक ऐसी सफल तकनीक है, जिसमें स्वदेशी कोयले और निम्न श्रेणी के अयस्क का उपयोग करने की क्षमता है, जिससे महंगे आयात पर निर्भरता कम होगी और स्टील उत्पादन अधिक किफायती बनेगा। यह तकनीक कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए एक गेमचेंजर है, जिसमें कार्बन कैप्चर और स्टोरेज के साथ कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन में 80 प्रतिशत तक की कमी लाने की क्षमता है। नीदरलैंड में सफल पायलट परीक्षणों के बाद, टाटा स्टील 2030 तक जमशेदपुर में लगभग एक मिलियन टन प्रति वर्ष क्षमता वाला एक वाणिज्यिक संयंत्र स्थापित करने की योजना बना रही है। इसके साथ ही, ईजीमेल्ट (इलेक्ट्रिकली असिस्टेड सिनगैस मेल्टर) तकनीक पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस प्रक्रिया की स्थिरता को बढ़ाएगी। यह अपनी तरह का दुनिया का पहला समाधान है, जो सिनगैस का उपयोग करके कोक की खपत को कम करता है और कार्बन डाइआक्साइड उत्सर्जन को 50 प्रतिशत तक कम कर सकता है। औद्योगिक बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण आयरनमेकिंग के इन नवाचारों के अलावा इस निवेश पैकेज में एक अत्याधुनिक काम्बी मिल के लिए 1,500 करोड़ और टिनप्लेट विस्तार के लिए 2,600 करोड़ का प्रविधान किया गया है। यह व्यापक औद्योगिक खाका आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने, उच्च तकनीकी रोजगार के अवसर पैदा करने और डी-कार्बोनाइजिंग दुनिया में दीर्घकालिक प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने के लिए डिजाइन किया गया है। ये पहल टाटा स्टील और झारखंड को बड़े पैमाने पर हरित आयरनमेकिंग तकनीक में फर्स्ट मूवर के रूप में स्थापित करती हैं, जिससे घरेलू प्रतिस्पर्धा और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व दोनों पर गहरा प्रभाव पड़ेगा। युवा झारखंड औद्योगिक विरासत से हरित नवाचार तक राज्य की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर यह ऐतिहासिक समझौता झारखंड के परिवर्तनशील औद्योगिक सफर का प्रतीक है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड एक पारंपरिक खनिज आधारित अर्थव्यवस्था से निकलकर हरित नवाचार के वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। इसी क्रम में झारखंड में टाटा समूह से जुड़े खनन एवं विनिर्माण स्थलों पर औद्योगिक पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु राज्य सरकार और टाटा स्टील के बीच एक अलग एमओयू पर भी सहमति बनी है। बैठक के दौरान टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन ने मुख्यमंत्री की दावोस में सक्रिय भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड शिक्षा, विनिर्माण और खनन जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है तथा राज्य को ऐसे वैश्विक बिजनेस मंचों पर नियमित रूप से भाग लेना चाहिए। मुख्यमंत्री ने राज्य की आइटीआइ संस्थाओं को रोजगार और बाजार उन्मुख बनाने के लिए टाटा स्टील द्वारा उन्हें गोद लेने का प्रस्ताव भी रखा, जिसमें कंपनी ने अपने सहमति जताई। इस अवसर पर टाटा समूह द्वारा मुख्यमंत्री को दावोस स्थित टाटा डोम में रात्रिभोज का आमंत्रण भी दिया गया, जिसे मुख्यमंत्री ने सहर्ष स्वीकार किया।