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किसानों को मिलेंगे बेहतर बीज, विभागों के समन्वय से बनेगी रूपरेखा

उच्च गुणवत्ता के बीज उपलब्ध कराने के लिये बनेगी कमेटी सहयोगी संबंधित विभागों के समन्वय से बनायें रूपरेखा : मंत्री सारंग प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिये हुई बैठक भोपाल  प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता बढ़ाने के लिये सहकारिता मंत्री विश्वास कैलाश सारंग की अध्यक्षता में मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। बैठक में प्रमाणित एवं हाइब्रिड बीज की उपलब्धता बढ़ाने के लिये कार्य-योजना पर चर्चा की गई। मंत्री सारंग ने कहा कि दलहन के बीजों की उपलब्धता पर ध्यान दिया जाना होगा। जिस प्रकार पिछले वर्ष 5 बीजों पर बीज संघ ने काम किया था, उसी प्रकार इस वर्ष कार्य-योजना बनाई जाये। दूसरे विभागों से क्या अपेक्षाएँ हैं उस पर एक पीपीटी तैयार करें। मंत्री सारंग ने कहा कि एक हाई लेवल कमेटी बनाकर उच्च गुणवत्ता का बीज तैयार करने और इसके लिये अन्य विभागों से समन्वय स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की जाये। हाई लेवल कमेटी में सहकारिता, कृषि, उद्यानिकी और कृषि विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि भी शामिल हों, जो एक माह में विस्तृत रूप से कार्य कर रिपोर्ट प्रस्तुत करें। बैठक में बीज उत्पादन एवं विपणन में शासकीय संस्थानों की उपादेयता, प्रमुख फसलों की बीज आवश्यकता, उपलब्धता, प्रदेश में प्रमुख फसलों का बोया गया क्षेत्रफल, फसलवार अधिक व कम उत्पादकता वाले जिले, हाइब्रिड बीज-आवश्यकता, शासकीय योगदान एवं कार्य-योजना, आगामी 5 वर्षों के लिये बीज उत्पादन कार्यक्रम, उद्यानिकी हाईब्रिड बीजों के लिये आधारभूत संरचना विकसित करने, बीज उत्पादन एवं विपणन में वर्तमान बाधाएँ एवं समाधान जैसे विषयों पर चर्चा की गई। बैठक में कृषि उत्पादन आयुक्त के.सी. गुप्ता, सहकारिता आयुक्त दीपक सिंह, संचालक कृषि उमाशंकर भार्गव, उप सचिव मनोज सिन्हा और प्रबंध संचालक बीज संघ महेन्द्र दीक्षित सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।  

उद्योगों-रेलवे में होगा ट्रीटेड पानी का इस्तेमाल, 15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

उपचारित जल के उपयोग पर जोर, निकायों को 50 किमी के दायरे में यूजर तलाशने के निर्देश उद्योगों से लेकर रेलवे तक में उपयोग की होगी पड़ताल, 15 दिनों में निकाय देंगे जानकारी 6 शहरों में बन रहे कुल 338 एमएलडी के एसटीपी सूडा ने निकायों को परिपत्र जारी कर संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और आवश्यक कार्यवाही के दिए निर्देश रायपुर  सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले उपचारित पानी के सदुपयोग के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग गंभीरता से पहल कर रही है। विभाग ने उपचारित जल के दोबारा उपयोग को बढ़ावा देने नगरीय निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं की पहचान और उनकी जल आवश्यकता के आकलन के निर्देश दिए हैं। इसके लिए एसटीपी से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले थर्मल पावर प्लांट, उद्योग, रेलवे, शासकीय विभाग और अन्य संस्थानों से समन्वय करने को कहा गया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के राज्य शहरी विकास अभिकरण (सूडा) ने राज्य के जिन 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन है, वहां के आयुक्तों को परिपत्र जारी कर इस दिशा में आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। इन निकायों को एसटीपी के उपचारित जल के संभावित उपयोगकर्ताओं की जानकारी जुटाने को कहा गया है। साथ ही संबंधित संस्थानों को कितनी मात्रा में उपचारित जल की आवश्यकता होगी, इसका भी आकलन करने को कहा गया है।  50 किमी के दायरे में तलाशेंगे उपयोगकर्ता उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए एसटीपी के आसपास के क्षेत्र को केंद्र में रखा गया है। निकायों को 50 किलोमीटर की परिधि में स्थित थर्मल पावर प्लांट, उद्योगों, रेलवे, शासकीय विभागों और अन्य संस्थानों से संपर्क कर उनकी जल आवश्यकता की जानकारी लेने के निर्देश दिए गए हैं। इससे एसटीपी से उपचारित जल उपलब्ध होने के बाद उसके उपयोग के लिए संभावित उपभोक्ताओं की पहचान पहले से की जा सकेगी। स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत 6 नगर निगमों में कुल 338 एमएलडी क्षमता के एसटीपी निर्माणाधीन हैं। बीरगांव में 55 एमएलडी, भिलाई-चरौदा में 13 एमएलडी, भिलाई में 150 एमएलडी, दुर्ग में 47 एमएलडी, अंबिकापुर में 32 एमएलडी और राजनांदगांव में 41 एमएलडी क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। केंद्र सरकार और एनजीटी के निर्देशों के अनुरूप राज्य शासन की पहल सूडा ने दुर्ग, भिलाई, भिलाई-चरोदा, बीरगांव, अंबिकापुर और राजनांदगाव के निगम आयुक्तों को परिपत्र जारी कर बताया है कि भारत सरकार के ऊर्जा विभाग की टैरिफ पॉलिसी, 2016 के तहत एसटीपी के 50 किलोमीटर के दायरे में स्थित थर्मल पावर प्लांटों में उपचारित जल के पुन: उपयोग के निर्देश दिए गए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने भी एसटीपी के उपचारित जल के पुन: उपयोग के लिए निर्देशित किया है। सूडा ने संबंधित निकायों को संभावित उपयोगकर्ताओं और उनकी जल आवश्यकता के संबंध में जानकारी 15 दिनों में उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं, जिससे कि एसटीपी का संचालन शुरू होने के बाद उपचारित जल का पुनः उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

भोपाल के पत्रकारों ने जाना जम्मू के औद्योगिक विकास का हाल

भोपाल से आए पत्रकारों के दल ने जम्मू क्षेत्र के औद्योगिक विकास के बारे में जानकारी ली सिडको  इंडस्ट्रियल एरिया में औद्योगिक इकाइयों का किया दौरा भोपाल/जम्मू   पत्र सूचना कार्यालय, भोपाल के नेतृत्व में जम्मू आए पत्रकारों के एक दल ने आज जम्मू में उद्योग और वाणिज्य निदेशालय का दौरा किया। सहायक निदेशक श्री जतिंदर पॉल सिंह ने उनका स्वागत किया और उन्हें जम्मू-कश्मीर इंडस्ट्रियल पॉलिसी 2021–30 और नई सेंट्रल सेक्टर स्कीम   (NCSS 2021) के तहत जम्मू-कश्मीर में हो रहे तेज़ी से औद्योगिक बदलाव के बारे में जानकारी दी।श्री जतिंदर पॉल सिंह ने  मीडिया दल को बताया कि जम्मू डिवीज़न में बड़े पैमाने पर औद्योगिक विकास हुआ है। यहां तय औद्योगिक एस्टेट्स में सरकारी ज़मीन पर 1,767 औद्योगिक इकाइयाँ काम कर रही हैं, जिनमें कुल ₹13,391.46 करोड़ का निवेश हुआ है और 49,795 लोगों को सीधा रोज़गार मिला है।  नई सेंट्रल सेक्टर स्कीम 2021 फ्रेमवर्क के तहत, 30 सितंबर 2024 तक 971 इकाइयों का पंजीयन हुआ। इनमें कुल ₹14,294 करोड़ का प्रस्तावित निवेश शामिल है, जिसमें से ₹10,514 करोड़ प्लांट और मशीनरी के लिए हैं। साथ ही, इससे 51,897 लोगों को रोज़गार मिलने का अनुमान है और ₹32,017 करोड़ के वित्तीय प्रोत्साहन का भी अनुमान है। सहायक निदेशक ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में केंद्र शासित प्रदेश में असल निवेश ₹5,824 करोड़ तक पहुँच गया। यह 2021 से पहले के समय में हुए औसत सालाना निवेश के मुकाबले 13 गुना ज़्यादा है। तेज़ी से काम करते हुए, 1 अगस्त 2026 तक रजिस्टर्ड 440 नई और विस्तार वाली इकाइयों में से 401 (यानी 91 प्रतिशत) ने कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के इतिहास में पहली बार, पैकेजिंग, फ़ूड प्रोसेसिंग, पॉलिमर और फ़ार्मास्यूटिकल्स जैसे तेज़ी से बढ़ने वाले सेक्टर में कई बड़ी औद्योगिक इकाइयाँ (मेगा इंडस्ट्रियल यूनिट्स) सफलतापूर्वक स्थापित की गई हैं, जिनमें से हर एक में ₹500 करोड़ से ज़्यादा का निवेश हुआ है। प्रतिनिधिमंडल को निवेशकों को मिलने वाले मज़बूत संस्थागत सहयोग के बारे में भी जानकारी दी गई। इसमें ₹45 लाख तक के  डीजी सेट पर 100% सब्सिडी, ₹50 लाख तक के प्रदूषण नियंत्रण   उपकरणों पर 60% सब्सिडी, पात्र इकाइयों के लिए 10 साल तक 100% नेट SGST की वापसी, 5 साल तक टर्नओवर से जुड़े इंसेंटिव और सिंगल विंडो पोर्टल के ज़रिए मैनेज होने वाला 99 साल तक का पारदर्शी ज़मीन लीज़ फ़्रेमवर्क शामिल है। बाद में, प्रतिनिधिमंडल ने SIDCO इंडस्ट्रियल एरिया में मौजूद फील्ड यूनिट्स का दौरा किया और  नई स्थापित इंडस्ट्रियल यूनिट्स के कामकाज, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं और ऑपरेशनल इकोसिस्टम को प्रत्यक्ष रूप से देखा।

जम्मू एयरपोर्ट के आधुनिकीकरण की जानकारी लेने पहुंचा मीडिया दल

भोपाल से आए मीडिया दल ने जम्मू विमानतल के आधुनिकीकरण और विस्तार की जानकारी ली भोपाल  जम्मू से बड़ी खबर सामने आई है।पीआईबी के नेतृत्व में भोपाल से आए मीडिया दल ने जम्मू विमानतल का दौरा किया और यहां चल रहे आधुनिकीकरण एवं विस्तार कार्यों की जानकारी ली। इस दौरान भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, जम्मू के निदेशक श्री देवेंद्र यादव ने मीडिया दल को विमानतल के विस्तार और नई टर्मिनल बिल्डिंग के निर्माण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जम्मू विमानतल की नई टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण विजन 2047 के अनुरूप किया जा रहा है। इसका उद्देश्य भविष्य की बढ़ती यात्री सुविधाओं और हवाई यातायात की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। मीडिया दल ने विमानतल पर चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का जायजा लिया और अधिकारियों से परियोजना से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कीं।

मध्यप्रदेश को टेलीकॉम, सेमीकंडक्टर, का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

 सीएम डॉ. यादव ने बताईं TMZ की विशेषताएं, कंपनियों ने की 500 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव पर चर्चा  मध्यप्रदेश को टेलीकॉम, सेमीकंडक्टर, का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव – मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बेंगलुरु में उद्योगपतियों से किया वन-टू-वन संवाद – चिप डिजाइन, ड्रोन तकनीक, जीसीसी, डेटा सेंटर पर हुई अहम बातचीत – ग्वालियर टेलीकॉम जोन से लेकर मालवा-महाकौशल तक खुलेंगे रोजगार के नए अवसर भोपाल/बेंगलुरु  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को बेंगलुरु में उद्योगपतियों और प्रमुख निवेशकों से वन-टू-वन संवाद किया। इस दौरान उनके साथ केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद थे। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश देश में सूचना प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण के एक सशक्त केंद्र के रूप में तेजी से उभर रहा है। उन्होंने निवेशकों को आमंत्रित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योग-व्यापार के लिए अपार संभावनाएं, मजबूत अधोसंरचना, प्रचुर प्राकृतिक संसाधन और उद्योग-हितैषी नीतियां मौजूद हैं। राज्य सरकार हर निवेशक को सुरक्षित वातावरण, सिंगल विंडो सिस्टम से त्वरित अनुमतियां और नीतिगत सहयोग देने के लिए पूरी तरह तत्पर है। बेंगलुरु के तकनीकी इको सिस्टम और मध्यप्रदेश के औद्योगिक आधार के समन्वय से प्रदेश में नवाचार और रोजगार के नए आयाम स्थापित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निवेशकों से कहा कि उद्योग की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं के अनुरूप मध्यप्रदेश में सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि वे स्वयं हर रोड शो में निवेशकों के साथ संवाद करते हैं और उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी रहते हैं, ताकि निवेश से जुड़ी समस्याओं और आवश्यकताओं का तत्काल समाधान किया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में पारदर्शी नीतियां लागू हैं और निवेशकों से जुड़े प्रत्येक मुद्दे का तत्परता से निराकरण किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि निवेशकों को जरूरतों के अनुरूप सुविधाएं और अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उद्योगपतियों के साथ वन-टू-वन संवाद में विशेष रूप से ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन (TMZ) की विशेषताओं और संभावनाओं से अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ-साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश की नीतियां भविष्योन्मुखी हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण समूहों के विस्तार के लिए वित्तीय एवं गैर-वित्तीय दोनों ही तरह के आकर्षक प्रोत्साहन प्रदान करती हैं। थोलोन्स और सीजीआई से संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव से संवाद के दौरान आईटी एवं जीसीसी सेक्टर के दिग्गजों ने मध्यप्रदेश में अपनी इकाइयां स्थापित करने को लेकर गहरी रुचि दिखाई। थोलोन्स के चेयरमैन और सीईओ अविनाश वशिष्ठ और अंकिता वशिष्ठ ने प्रदेश में 210 करोड़ रुपये के निवेश से जीसीसी यूनिट स्थापित करने के प्रस्ताव को अंतिम रूप देने पर चर्चा की। सीजीआई के वाइस प्रेसिडेंट अतुल अगाशे ने मध्यप्रदेश में जीसीसी निवेश की संभावनाओं को देखते हुए प्रदेश में विस्तार की मंशा जताई। सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग का प्रमुख केंद्र बनेगा मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव से सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइनिंग के क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने विस्तृत चर्चा की। असेइक मावेन सिलिकॉन के संस्थापक एवं सीईओ शिवकुमार पी.आर. ने प्रदेश में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से 'चिप डिजाइन हाउस' स्थापित करने का प्रस्ताव रखा, जिसके प्रथम चरण में 25 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। कोर-आईसी टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के संस्थापक एवं सीईओ पंकज गर्ग ने भी विभिन्न चरणों में कुल 100 करोड़ रुपये के निवेश से चिप डिजाइन सर्विसेज स्थापित करने पर सहमति जताई। डीपटेक फंडिंग, डेटा सेंटर, स्पेसटेक और सस्टेनेबिलिटी में नए निवेश प्रस्ताव प्रदेश में स्टार्टअप्स और नई तकनीकों को गति देने के लिए डीपटेक वेंचर कैपिटल फंड 'सीफंड' के नरेंद्र भंडारी ने मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स के लिए लगभग 200 करोड़ रुपये की फंडिंग उपलब्ध कराने की योजना प्रस्तुत की। नाइनस्टार्स इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड के चेयरमैन एवं सीईओ गोपाल कृष्णन ने मध्यप्रदेश में आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने पर विमर्श किया। स्पेसटेक के क्षेत्र में गैलेक्सी के सह-संस्थापक रक्षित भट्ट और पायल दवे ने अपनी सहभागिता को लेकर संवाद किया। इसके अलावा, मोबिलिटी एवं बाइक शेयरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी रैपिडो के सह-संस्थापक पवन गुंटुपल्ली तथा पर्यावरण एवं सस्टेनेबिलिटी क्षेत्र में कार्य कर रही कंपनी डोनाउ कार्बन इंडिया के सीईओ व एमडी वीरेंद्र चौधरी ने भी प्रदेश में अपनी योजनाओं को लेकर चर्चा की। ड्रोन विनिर्माण और रक्षा तकनीक को मिलेगी नई गति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की भविष्य की तकनीक को ध्यान में रखते हुए ड्रोन विनिर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ भी महत्वपूर्ण बैठक हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से एयरबाउंड के संस्थापक नमन पुष्प, आइडियाफोर्ज की हेड ऑफ मार्केटिंग कुथि अरमनमाडा, नॉटिकल विंग्स के हेड ऑफ बिजनेस डेवलपमेंट रोहन फर्नांडीस, न्यूस्पेस एंड रिसर्च टेक्नोलॉजीज के हेड ऑफ बिजनेस अश्विन शास्त्री और अनमैन्ड सिस्टम्स के संस्थापक एवं सीईओ यशवंत रेड्डी ने प्रदेश में ड्रोन निर्माण और परीक्षण इकोसिस्टम विकसित करने के साथ-साथ निवेश के अवसरों पर विचार-विमर्श किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव को एयरबाउंड की ओर से प्रतिनिधियों ने ड्रोन भेंट किया। प्रमुख टेक एवं कंसल्टिंग कंपनियों के प्रतिनिधियों ने की भेंट मुख्यमंत्री डॉ. यादव से बैठक के दौरान एचपी एंटरप्राइजेज की ओर से जीसीसी क्षेत्र में कार्यरत जयंत और तारा,  जेडस्केलर आईटी कंपनी की ओर से श्रीनिधि तथा क्वांटम कंप्यूटिंग और एआई क्षेत्र में कार्यरत कंपनी की ओर से अनुराग ने मुलाकात की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से फुजित्सु कंसल्टिंग इंडिया प्रालि की ओर से विशाल अगस्त्या, कंट्री लीडर, इंडिया एवं कंसल्टिंग लीड, ग्लोबल डिलीवरी यूनिट तथा इनफिनिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की ओर से नितिन मेहता, चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर एवं कंट्री हेड ने भी भेंट की। प्रदेश के सभी अंचलों में संतुलित औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का संकल्प मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहकर इंदौर, उज्जैन, भोपाल के साथ-साथ जबलपुर और ग्वालियर जैसे संभागों में भी औद्योगिक गतिविधियों को समान रूप से संचालित कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के छोटे-बड़े शहरों में भारी उद्योगों के साथ एमएसएमई और लघु-कुटीर उद्योगों की स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे स्थानीय स्तर पर नागरिकों को सम्मानजनक रोजगार मिल सके। उपस्थित सभी प्रमुख निवेशकों ने मध्यप्रदेश की निवेश अनुकूल नीतियों, पारदर्शी … Read more

यूथ इनोवेशन कॉन्क्लेव में जुटेंगे युवा इनोवेटर्स, राज्यपाल-सीएम समेत कई मंत्री रहेंगे मौजूद

कृषि विश्वविद्यालय में 28 से 30 सितंबर तक “यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव” का आयोजन राज्यपाल, मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री एवं वित्त मंत्री शुभारंभ समारोह में रहेंगे मौजूद छत्तीसगढ़ के एक हजार से अधिक युवा कान्क्लेव में शामिल होंगे आई.आई.टी, एन.आई.टी, आई.आई.आई.टी., नाबार्ड और सीजी काॅस्ट भी होंगे आयोजन में सहयोगी सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का लोकार्पण भी होगा रायपुर,  छत्तीसगढ़ के युवाओं में नवचार, उद्यमिता विकास एवं प्रौद्योगिकी के व्यवसायीकरण को बढ़ावा देने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर द्वारा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भिलाई, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर, भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान नवा रायपुर, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, छत्तीसगढ़ बायोटेक प्रमोशन सोसायटी तथा राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के संयुक्त तत्वावधान में दिनांक 28 से 30 सितंबर 2026 तक “छत्तीसगढ़ यूथ इनोवेशन एवं एंटरप्रेन्योरशिप कॉन्क्लेव 2026” का आयोजन कृषि मंडपम इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में किया जाएगा। राज्य में उद्यमिता एवं स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने वाले इस यूथ कॉन्क्लेव में प्रदेश भर से लगभग एक हजार से अधिक नवोन्मेषी युवा उद्यमियों के शामिल होने की उम्मीद है। इस तीन दिवसीय यूथ काॅन्क्लेव 2026 का उद्घाटन 28 सितम्बर को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रामेन डेका करेंगे तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चैधरी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहेंगे। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के प्रथम एवं एकमात्र बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर-केंद्रित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर के नवनिर्मित भवन का शुभारंभ भी किया जाएगा। यूथ काॅन्क्लेव के दौरान युवा नेतृत्व वाले उद्यमों और संस्थागत नवाचारों को प्रदर्शित करने वाली “नवाचार एवं स्टार्टअप प्रदर्शनी” भी आयोजित की जाएगी तथा शीर्ष तीन स्टार्टअप्स को पुरस्कृत किया जाएगा। यूथ काॅन्क्लेव में शामिल होने के इच्छुक युवा छात्र एवं उद्यमी 25 सितम्बर 2026 तक पंजीयन करवा सकते हैं।  “यूथ कॉन्क्लेव 2026” में नवाचार अनुसंधान, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण राज्य स्तरीय पहल है। कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रदेश के युवाओं, विद्यार्थियों, शोधार्थियों, नवाचारकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्यमियों, निवेशकों, उद्योग प्रतिनिधियों, इनक्यूबेटर्स, शिक्षाविदों तथा विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारियों को एक साझा मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इस मंच के माध्यम से नवीन विचारों, अनुसंधान एवं तकनीकी नवाचारों को व्यावसायिक अवसरों एवं सफल उद्यमों में परिवर्तित करने के साथ-साथ राज्य में एक सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने में सहायता प्राप्त होगी। कार्यक्रम के अंतर्गत 28 सितम्बर को प्रदेश के प्रथम एवं एकमात्र बायोटेक्नोलॉजी सेक्टर-केंद्रित सुभाष चंद्र बोस बायोटेक्नोलॉजी इन्क्यूबेशन सेंटर का उद्घाटन भी किया जाएगा। यह केंद्र प्रदेश में बायोटेक्नोलॉजी आधारित अनुसंधान, नवाचार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, स्टार्टअप विकास एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित करने के लिए एक महत्वपूर्ण संस्थागत आधार के रूप में कार्य करेगा। इसके माध्यम से शोधार्थियों एवं नवाचारकर्ताओं को प्रोटोटाइप विकास, तकनीकी मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन, मेटरशिप तथा उद्योग एवं निवेशकों से जुड़ने के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जाएगा। छत्तीसगढ़ में लागू नवाचार एवं स्टार्टअप सवर्धन नीति 2025-30 के प्रभावी क्रियान्वयन को गति प्रदान करना इस कॉन्क्लेव का प्रमुख उद्देश्य है। इसके माध्यम से युवाओं में नवाचार एवं उद्यमिता की भावना को प्रोत्साहित करने, स्थानीय आवश्यकताओं एवं समस्याओं के तकनीकी एवं व्यावसायिक समाधान विकसित करने तथा राज्य के स्टार्टअप्स एवं नवाचारों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए आवश्यक मंच एवं अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। कॉन्क्लेव में विशेष रूप से कृषि एवं एग्री टेक. खाद्य प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन, जैव प्रौद्योगिकी, ग्रामीण उद्यमिता, डिजिटल प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सीप-टेक, नवीकरणीय ऊर्जा, पर्यावरण एवं जलवायु स्मार्ट तकनीक, फिनटेक तथा अन्य उभरते क्षेत्रों में नवाचार एवं उद्यमिता को प्रोत्साहित किया जाएगा। उक्त कार्यक्रम में कुल चार तकनीकी सत्रो का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान तकनीकी सत्र, विशेषज्ञों का व्याख्यान, स्टार्टअप प्रदर्शनी, स्टार्टअप पिचिंग, निवेशक/स्टार्टअप संवाद, नीति संवाद, मेंटरशिप एवं इनक्यूबेशन सत्र तथा   उत्कृष्ट नवाचारों एवं स्टार्टअप्स को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। तीन शीर्ष युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को क्रमशः एक लाख रूपये, पचहत्तर रूपये तथा पचास हजार रूपये की राशि से पुरस्कृत किया जाएगा।  इस कॉन्क्लेव में लगभग 1000 प्रतिभागियों की सहभागिता अपेक्षित है, जिनमें युवा, उच्च शिक्षा के विद्यार्थी, शोधार्थी, स्टार्टअप संस्थापक, नवाचारकर्ता, उद्यमी, निवेशक, उद्योग प्रतिनिधि, इनक्यूबेटर, मेंटर, शिक्षाविद् तथा विभिन्न शासकीय विभागों के अधिकारी सम्मिलित होंगे। इस आयोजन से प्रदेश के युवाओं को अपने नवीन विचारों एवं तकनीकी समाधानों को विशेषज्ञों, उद्योगों एवं संभावित निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करने का अवसर एवं लाभ प्राप्त होगा। युथ काॅन्क्लेव 2026 में सहभागिता के इच्छुक युवा छात्र https://forms.gle/UL4UoMW8zi9VxyjQ9 तथा युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स https://forms.gle/vH7RYusdHmmFUsxK6 पर 25 सितम्बर 2026 तक पंजीयन कर सकते हैं।

पोषण माह 2026 में बच्चों की सेहत पर फोकस, विकास की निगरानी के साथ विशेषज्ञ सलाह

सेवा की कहानी: हर बच्चे के विकास पर नजर, समय पर मिल रही सही सलाह और विशेषज्ञ सेवाएं पोषण माह 2026 में बच्चों के विकास की निगरानी और देखभाल पर विशेष जोर रायपुर छत्तीसगढ़ में पोषण माह 2026 के तहत बच्चों के समुचित विकास, पोषण और स्वास्थ्य को लेकर परिवारों को जागरूक किया जा रहा है। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत भी बच्चों के विकास की समय पर पहचान, उचित परामर्श और जरूरतमंद बच्चों को विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ने की दिशा में सेवाभाव के साथ प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के माध्यम से अभिभावकों को बताया जा रहा है कि वे बच्चे की उम्र के अनुसार उसके सीखने, खेलने, प्रतिक्रिया देने और व्यवहार पर ध्यान दें। विकास में किसी प्रकार की देरी या चिंता दिखाई देने पर इंतजार न करें, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से बात करें और स्वास्थ्यकर्मी से आवश्यक सलाह लें। जरूरत पड़ने पर बच्चे को विशेषज्ञ सेवा के लिए रेफर कराया जा सकता है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों के विकास और पोषण की नियमित निगरानी की जा रही है। ‘हर बच्चे के विकास में ध्यान देना जरूरी’ संदेश के साथ परिवारों को यह समझाया जा रहा है कि समय पर पहचान और उचित मार्गदर्शन बच्चों के बेहतर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ‘हमारी आंगनबाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ पोषण माह में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्यकर्मी और परिवार मिलकर बच्चों के स्वस्थ विकास की दिशा में काम कर रहे हैं। यही निरंतर देखभाल और समय पर सहयोग ‘सेवा की कहानी’ को मजबूत करते हुए बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की नींव तैयार कर रहा है।

5 बेटों को हर महीने मां को देना होगा ₹10 हजार भरण-पोषण, हरदा SDM कोर्ट का आदेश

हरदा  मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक एसडीएम कोर्ट ने पांच बेटों को 85 साल की एक बुजुर्ग मां को भरण-पोषण के तौर पर हर महीने दो-दो हजार रुपये देने के आदेश दिए हैं।मध्य प्रदेश के हरदा जिले की खिरकिया तहसील की एसडीएम कोर्ट ने वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण अधिनियम के तहत एक अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने 85 साल की एक बुजुर्ग महिला के 5 बेटों को हर महीने की 10 तारीख तक अपनी मां को दो-दो हजार रुपये यानी कुल 10 हजार रुपये का भरण-पोषण देने का आदेश दिया है। अदालत ने पैसे नहीं देने पर कानूनी कार्रवाई और जमीन की आमदनी से सीधे भुगतान की चेतावनी दी है। मां के गुजारे के लिए हर महीने रकम देने के आदेश प्राप्त जानकारी के अनुसार, 85 साल की बजुर्ग विधवा महिला गीताबाई की याचिका पर सुनवाई करते हुए एसडीएम रजनी वर्मा की अदालत ने उनके पांच बेटों को अपनी मां के भरण-पोषण के लिए हर महीने एक तय रकम देने का आदेश दिया। बुजुर्ग महिला ने दी थी यह शिकायत गीताबाई ने एसडीएम कोर्ट में आवेदन देकर बताया था कि वे वृद्धावस्था के कारण चलने-फिरने, देखने और सुनने में असमर्थ हैं। ग्राम पीपल्या स्थित खसरा नंबर 66/2 (रकबा 3.861 हेक्टेयर) की संयुक्त जमीन में उनका 1/8 हिस्सा दर्ज है। उनके बेटों की ओर से इस जमीन को लीज पर दिया जाता है। उससे मिली पूरी इनकम का वे खुद ही उपभोग करते हैं। बेटे नहीं देते थे मां को पैसे बुजुर्ग मां का आरोप था कि जमीन की आमदनी में से बेटे उनको कोई हिस्सा नहीं देते। सभी बेटे उनकी आर्थिक मदद नहीं करते हैं। बेटे उनका कोई ध्यान भी नहीं रखते हैं। इतना ही नहीं जमीन पर बैंक का केसीसी कर्ज बकाया है जिसका भुगतान भी बेटे नहीं कर रहे हैं। मां को हर महीने देने होंगे 2-2 हजार रुपये मामले की सुनवाई और दस्तावेजों के अवलोकन के बाद एसडीएम कोर्ट ने 'माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरणपोषण और कल्याण अधिनियम, 2007' के तहत बुजुर्ग महिला के पांचों बेटों राजेन्द्रप्रसाद, गोपालप्रसाद, गोविन्द, नारायण और प्रमोद सोनी को निर्देश दिया कि वे हर महीने की 10 तारीख तक अपनी मां को 2-2 हजार रुपये इस तह कुल 10 हजार रुपये प्रतिमाह नकद भुगतान करें या उनके बैंक खाते में जमा कराएं। नहीं किया भुगतान तो ऐक्शन अदालत ने यह भी आदेश दिया कि यदि बेटे नियमित रूप से यह रकम बुजुर्ग महिला के खाते में पैसे जमा नहीं करते हैं तो पीपल्या स्थित खसरा नंबर 66/2 की खोट या बटाई से मिली कुल आमदनी में से मां के हिस्से की राशि सीधे उनको प्रदान की जाएगी। अदालत ने यह भी कहा कि उसके आदेश की अवहेलना करने पर आरोपी बेटों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी वसूली और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर में ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन’ पर प्रशिक्षण हुआ आयोजित

गणित के डर को आकर्षण में बदलने गतिविधि आधारित शिक्षण पर शिक्षकों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर में ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन' पर प्रशिक्षण हुआ आयोजित गणितीय अवधारणाओं को सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से समझाने पर हुई चर्चा रायपुर  छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में  ‘द आर्ट ऑफ टीचिंग मैथेमैटिक्स: फ्रॉम फियर टू फैसिनेशन' विषय पर विशेष प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को गणित शिक्षण की ऐसी नवीन, गतिविधि – आधारित और रचनात्मक विधियों से परिचित कराना रहा, जिनके माध्यम से विद्यार्थियों के लिए गणित को सरल, रोचक और आनंददायक बनाया जा सके।         प्रमुख सचिव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग श्री सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक श्री प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में गणित को केवल पाठ्यपुस्तक, सूत्रों और गणनाओं तक सीमित न रखते हुए दैनिक जीवन, अनुभव, गतिविधियों और रचनात्मकता से जोड़कर पढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि इस तरह की शिक्षण पद्धति विद्यार्थियों में गणित के प्रति रूचि और जिज्ञासा बढ़ाने के साथ-साथ तार्किक सोच विकसित करने में भी सहायक हो सकती है।        कार्यक्रम के विशेषज्ञ इंजीनियर, ऑल इंडिया रामानुजन सोसाइटी के निदेशक एवं रामानुजन टैलेंट सर्च फाउंडेशन बेंगलुरु के मैथ्स कोच श्री बी. एन. राव ने शिक्षकों को विभिन्न गतिविधि-आधारित एवं नवाचारपूर्ण शिक्षण विधियों का प्रशिक्षण दिया। उन्होंने गणितीय अवधारणाओं को सरल तरीके से समझाने के लिए व्यावहारिक उदाहरणों और विभिन्न गतिविधियों का प्रदर्शन किया तथा बताया कि कक्षा में विद्यार्थियों की जिज्ञासा और सक्रिय सहभागिता बढ़ाकर गणित को सहज एवं आनंददायक बनाया जा सकता है।      सेशन के दौरान शिक्षकों ने स्वयं विभिन्न गतिविधियों में भाग लेकर गणितीय अवधारणाओं को समझा। गतिविधियों के माध्यम से यह प्रदर्शित किया गया कि कठिन प्रतीत होने वाली गणितीय अवधारणाओं को भी सरल, रोचक और प्रयोगात्मक तरीके से विद्यार्थियों तक पहुंचाया जा सकता है। शिक्षकों ने इन तकनीकों को अपने-अपने कक्षा में लागू करने के तरीकों को भी समझा।      कार्यक्रम में रायपुर के चार विकासखंडों के शिक्षकों ने ऑफलाइन सहभागिता की, जबकि पूरे रायपुर जिले के शिक्षकों के लिए कार्यक्रम का ऑनलाइन प्रसारण किया गया। इसके माध्यम से जिले के विभिन्न क्षेत्रों के शिक्षक विशेषज्ञ द्वारा साझा की गई गतिविधि-आधारित गणित शिक्षण की विधियों से जुड़े और लाभान्वित हुए।      इंटरैक्टिव सत्र में गणित शिक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर शिक्षकों के साथ संवाद भी किया गया। छोटे-छोटे प्रयोग, गतिविधियां, प्रश्नोत्तर और रचनात्मक अभ्यासों के माध्यम से विद्यार्थियों में गणित के प्रति रुचि विकसित करने के तरीकों पर चर्चा हुई। कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य शिक्षकों को ऐसे प्रभावी शिक्षण उपकरण और तकनीक उपलब्ध कराना रहा, जिनसे विद्यार्थी गणितीय अवधारणाओं को समझकर सीखें, उनका प्रयोग करें तथा उनमें तार्किक और वैज्ञानिक सोच विकसित हो।            कार्यक्रम में शिक्षकों की उत्साहपूर्ण एवं सक्रिय सहभागिता रही। प्रतिभागियों ने विभिन्न गतिविधियों में भाग लेते हुए गणित शिक्षण की नई तकनीकों और दृष्टिकोणों को समझा। शिक्षकों के अनुभव और सुझावों ने कार्यक्रम को अधिक संवादात्मक एवं उपयोगी बनाया। इसी तरह 23 सितंबर को बी.एड. विद्यार्थियों के लिए भी प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

खेल अकादमियों में प्रवेश के लिए चयन ट्रायल 23-24 सितंबर को, खिलाड़ी लें हिस्सा

गैर-आवासीय खेल अकादमियों में प्रवेश और प्रवेश नवीनीकरण के लिए चयन ट्रायल 23-24 सितम्बर को तीरंदाजी, फुटबॉल, हॉकी और एथलेटिक्स खिलाड़ियों के लिए चयन ट्रायल आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य रायपुर राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा रायपुर जिले में संचालित गैर-आवासीय खेल अकादमियों में प्रवेश और प्रवेश के नवीनीकरण के लिए 23 सितम्बर और 24 सितम्बर को चयन ट्रायल का आयोजन किया गया है। इसमें भाग लेने के इच्छुक खिलाड़ी 23 सितम्बर को रायपुर के कोटा स्थित स्वामी विवेकानंद स्टेडियम में प्रातः 7 बजे से 11 बजे तक पंजीयन करा सकते हैं। चयन ट्रायल में शामिल होने के लिए आधार कॉर्ड, निवास प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र या जन्मतिथि के उल्लेख वाली प्रमाणित अंकसूची उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। खेल एवं युवा कल्याण विभाग के अधिकारियों ने बताया कि गैर-आवासीय बालक-बालिका तीरंदाजी और बालिकाओं के फुटबॉल (बालिका) के लिए चयन ट्रायल 23 सितम्बर को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा तथा तीरंदाजी एरिना (बालिका खेल छात्रावास के सामने) में होंगे। वहीं गैर-आवासीय बालक-बालिका हॉकी एवं बालक-बालिका एथलेटिक्स के लिए चयन ट्रायल 24 सितम्बर को स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं हॉकी स्टेडियम पिच-02 में सुबह 7 बजे से आयोजित किए गए हैं। चयन ट्रायल में राज्य के बालक-बालिका खिलाड़ी तथा अन्य राज्यों के 13 से 17 आयु वर्ग के खिलाड़ी शामिल हो सकते हैं। फुटबॉल एवं तीरंदाजी खिलाड़ियों का 23 सितम्बर को पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सकीय परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं खेल कौशल परीक्षण स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं तीरंदाजी एरिना रायपुर में किया जाएगा। वहीं 24 सितम्बर को हॉकी एवं एथलेटिक्स खिलाड़ियों का पंजीयन, दस्तावेज परीक्षण, चिकित्सकीय परीक्षण, शारीरिक दक्षता परीक्षण एवं खेल कौशल परीक्षण स्वामी विवेकानंद स्टेडियम कोटा एवं सरदार वल्लभभाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हॉकी स्टेडियम पिच-02 में होगा। चयन ट्रायल में खिलाड़ियों का चयन उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर चयन समिति द्वारा किया जाएगा। खेल अकादमी संचालन नियम,2014 के तहत अंतिम रूप से चयनित खिलाड़ियों को निःशुल्क प्रशिक्षण, खेल परिधान, प्लेइंग किट, बीमा एवं छात्रवृत्ति आदि सुविधाएं शासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएंगी।