samacharsecretary.com

श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

अयोध्या के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे नहीं टिक पाया कोई दुश्मनः योगी  श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  कुछ लोगों ने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी बना दिया था उपद्रव और संघर्ष का अड्डा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह जी की रही प्रत्यक्ष भूमिकाः सीएम  पांच साल में 45 करोड़ श्रद्धालु आए अयोध्याः मुख्यमंत्री   पहले मिलती थीं लाठी और गोली, अब देश में हर जगह बोल सकते जयश्रीराम और राम-रामः गोरक्षपीठाधीश्वर सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की दी शुभकामना, सभी के लिए मंगलकारी हो यह वर्ष अयोध्या श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ बुधवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की शुभकामना देते हुए प्रार्थना की कि यह वर्ष सभी के लिए मंगलकारी हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या ने स्वतंत्र भारत में रामजन्मभूमि आंदोलन के अनेक पड़ाव देखे हैं। अयोध्या के नाम से ही अहसास होता है कि यहां कभी युद्ध नहीं हुआ। कोई भी दुश्मन यहां के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे टिक नहीं पाया, लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी उपद्रव और संघर्ष का अड्डा बना दिया था।  पिछली सरकारों के शासन में होते थे आतंकी हमले सीएम योगी ने पिछली सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिस अयोध्या में कभी संघर्ष नहीं होता था, उस अयोध्या में पिछली सरकारों के शासन में आतंकी हमले होते थे। अयोध्या को लहुलूहान करने का प्रयास हुआ था, लेकिन जहां प्रभु की कृपा बरसती हो और जहां हनुमानगढ़ी में स्वयं हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां कोई आतंकी कैसे घुस जाता। 2005 में जैसे ही आतंकियों ने दुस्साहस किया, तैसे ही पीएसी के जवानों ने ठक-ठक करके उन्हें मार गिराया। कभी विस्मृत नहीं हो सकती तीन तिथियां  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष के अंदर तीन महत्वपूर्ण घटनाओं को अयोध्या कभी विस्मृत नहीं कर सकती। स्वतंत्र भारत में पहली बार 5 अगस्त 2020 को किसी प्रधानमंत्री का अयोध्या में आगमन हुआ। उन्होंने उस दिन यहां श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन किया। 22 जनवरी 2024 (पौष शुक्ल द्वादशी) को फिर अयोध्या धाम आकर प्रधानमंत्री ने रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संपन्न किया। 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी पर प्रधानमंत्री जी ने अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म की भगवा ध्वजा को प्रतिष्ठित किया और संदेश दिया कि सनातन से ऊपर कोई नहीं। सनातन का पताका हमेशा ऐसी ही दिखाई देगी।    श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह जी की रही प्रत्यक्ष भूमिका  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए और संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए राजनाथ सिंह जी की श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका रही है। 500 वर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु रामलला के विराजमान होने और मंदिर के इस भव्य स्वरूप को देखकर वे आनंद-गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करने वाले रक्षा मंत्री जी प्रतिष्ठा द्वादशी पर जब मां अन्नपूर्णा के मंदिर पर सनातन धर्म की ध्वजा का आरोहण कर रहे थे तो मैंने उन्हें भावुक होते देखा है।  पांच साल में 45 करोड़ श्रद्धालु आए अयोध्या   सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले बिजली, पानी, स्वच्छता, सड़क, कनेक्टिविटी, सुरक्षा भी नहीं थी। जयश्रीराम बोलने पर लाठी और गिरफ्तारी होती थी, लेकिन अयोध्या के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए देश-दुनिया का हर सनातन धर्मावलंबी अब यहां दर्शन करके अभिभूत होता है। पहले कुछ लाख लोग यहां आते थे, लेकिन पिछले पांच साल में 45 करोड़ से अधिक श्रदधालु अयोध्या आए। सूर्य वंश की राजधानी अयोध्या देश की पहली सोलर सिटी के रूप में हो गई है। अयोध्या धाम में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, अयोध्या रेलवे की डबल लाइन के साथ जुड़ गया है। हर ओर से यहां कनेक्टिविटी बेहतर हुई। जिस अयोध्या में सिंगल लेन की सड़कें थीं, आज फोरलेन की सड़कें हैं।  देश में अब हर जगह बोल सकते जयश्रीराम और राम-राम गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में अब हर जगह जयश्रीराम और राम-राम बोल सकते हैं। अब भारत सरकार की योजना भी ‘जी राम जी’ के नाम पर आ गई है। यह रोजगार की सबसे बड़ी स्कीम बनने जा रही है। कोई भी बेरोजगार कहेगा कि मुझे अपनी ग्राम पंचायत में रोजगार चाहिए तो उसे साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी गांव में ही मिल जाएगी।  रामभक्तों ने नहीं की लाठी और गोली की परवाह सीएम योगी ने कहा कि हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है। पांच सौ वर्ष के इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1528 से लेकर 1992 और इसके उपरांत भी अयोध्या में हर 20-25 वर्ष में राम मंदिर को वापस लेने के लिए राम भक्त लगातार संघर्ष करता रहा। वह रूका, झुका और बैठा नहीं। उसने सत्ता, दमन, लाठी व गोली की परवाह नहीं की बल्कि वह लड़ता रहा। यह आंदोलन सफलता की नई ऊंचाइयों तक तब पहुंचा, जब आरएसएस ने नेतृत्व दिया। पूज्यों संतों को एक मंच पर लाने में अशोक सिंहल ने सफलता हासिल की। गुलामी का कलंक मिटा और भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ।  यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है सीएम योगी ने कहा कि आज प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित हुआ। अयोध्या की भव्यता, दिव्यता को अनंत काल तक बनाए रखने के लिए हर सनातन धर्मावलंबी को आगे बढ़ना होगा। यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। विरासत पर गौरव की अनुभूति करते हुए विकास के नित नए प्रतिमान को स्थापित करना है। पीएम मोदी ने हर भारतवासी को विकसित भारत की संकल्पना दी है। देश जब आजादी के 100 वर्ष पूरा करेगा तो हर भारतवासी का संकल्प होना चाहिए कि विरासत का संरक्षण करते हुए अपने क्षेत्र में उत्कृष्टतम कार्य करके दिखाना है। देश … Read more

नए साल पर युवाओं में धार्मिक पर्यटन का बढ़ा रुझान, काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा

योगी सरकार के प्रयास से सनातन का लौटा वैभव, युवाओं में बढ़ा काशी, मथुरा और अयोध्या का क्रेज नए साल पर युवाओं में धार्मिक पर्यटन का बढ़ा रुझान, काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा सोशल मीडिया पर छाया काशी, अयोध्या, मथुरा में नए साल का जश्न मनाने का ट्रेंड सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी से बढ़ी पर्यटकों की संख्या लखनऊ  नए साल का जश्न मनाने के लिए  जहां युवा पहले पाश्चात्य संस्कृति से प्रेरित होकर डिस्को, होटल, रेस्टोरेंट और हिल स्टेशनों का रुख करता था, इस साल इसमें एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन के पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में जिस तरह से  धार्मिक और पर्यटन स्थलों का विकास हुआ है, उसका ही परिणाम है कि युवा लाखों की संख्या में काशी, मथुरा-वृंदावन और अयोध्या में नए साल की शुरूआत अपने इष्ट का दर्शन-पूजन से कर रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश से उठी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की वो लहर है, जिसमें न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के युवा, लड़के-लड़कियां नए जोश और उत्साह के साथ सम्मिलित हो रहे हैं।  काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा पर्यटन विभाग के अनुसार, इस वर्ष नए साल से कई दिन पहले से ही प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज में लाखों की संख्या में युवा पर्यटक पहुंच रहे हैं। इस क्रम में 29-30 दिसंबर को ही अयोध्या में भगवान श्रीराम का दर्शन करने 5 लाख से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं, जबकि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में पिछले तीन दिनों में 10 लाख और मथुरा में 3 लाख से अधिक पर्यटकों ने दर्शन पूजन किया। इनमें युवा पर्यटकों की संख्या सर्वाधिक है। 31 दिसंबर और 01 जनवरी को और अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा प्रबंध किए हैं, साथ ही सुविधा के लिए गाइडलाइन भी जारी की है।  सोशल मीडिया पर भी छाया हैशटैग न्यू ईयर 2026 इन अयोध्या नए साल का जश्न धर्म स्थलों में मनाने का युवाओं का यह रुझान सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रहा है। जहां न्यू ईयर 2026 इन अयोध्या, न्यू ईयर 2026 इन काशी या स्पिरिचुअल न्यू ईयर जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। युवा नए साल के जश्न में इन धर्म स्थलों पर दर्शन पूजन कर, दोस्तों और परिवारजनों के साथ सेल्फी अपलोड कर रहे हैं। यही रुझान पिछले वर्ष प्रयागराज में आयोजित हुए दिव्य-भव्य महाकुंभ में भी देखने को मिला था, जिसमें न केवल देश बल्कि विश्व के कोने-कोने से श्रद्धालु और पर्यटकों ने आकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया था। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस तरह से प्रदेश में धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और सांस्कृतिक पुनरुत्थान हुआ है, उसने युवाओं के मन में आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अलख जगाई है। इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, विश्व भूषण मिश्र का कहना है- सनातन संस्कृति उत्सव, उत्साह एवं उल्लास की आश्रयस्थली है। विश्व के समस्त उत्सव सनातन मान्यता में उत्कर्ष प्राप्त करते हैं। लोक उत्सव प्रायः तात्कालिक सत्ता के आचरण को प्रतिबिंबित करता है। अतः स्वाभाविक ही है कि वर्तमान काल में प्रत्येक पर्व पर चाहे वह भारतीय हो अथवा पश्चिम का पर्व, सनातन आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं का प्रवाह अभूतपूर्व है। मंदिरों और तीर्थस्थलों के पुनरुद्धार से बढ़ा पर्यटन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से जिस तरह से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन हुआ, वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण और मथुरा-वृंदावन, तीर्थराज प्रयागराज, विंध्याचल, नैमिषारण्य, संभल, मुजफ्फरनगर में शुक्रतीर्थ (शुक्रताल) के साथ प्रदेश के पुरातन मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ है, इससे विशेष तौर पर युवाओं में सनातन संस्कृति और अपनी परंपराओं के प्रति नई को ऊर्जा का संचार हुआ। यह स्थान पहले की सरकारों में उपेक्षा का शिकार थे। प्रमुख तीर्थों और धार्मिक स्थलों तक सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के साथ वहां रुकने ठहरने, होटल और रेस्टोरेंट गतिविधियों का विकास हुआ है। यही नहीं जिस तरह से समय-समय पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से दिव्य-भव्य उत्सवों का आयोजन किया जाता है, उसने प्रदेश के युवाओं में सनातन संस्कृति के तीर्थों और धर्म स्थलों के प्रति आकर्षण बढ़ाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के इन प्रयासों ने न केवल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दिया है, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी मिला है।

DAVV में डेटा गड़बड़ी, उच्च शिक्षा विभाग को रिपोर्ट भेजने की तैयारी

इंदौर  उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेशभर के सभी सरकारी कालेज से प्राध्यापकों के अवकाश को लेकर ब्यौरा मांगा है। यह जानकारी केंद्र सरकार के समर्थ पोर्टल पर अपलोड की जानी है। इसे लेकर अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (डीएवीवी) की मुश्किलें बढ़ गई हैं। कारण यह है कि विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी टीचिंग डिपार्टमेंट (यूटीडी) में वर्ष 2012 से अब तक प्राध्यापकों की छुट्टियों का कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इसके चलते समर्थ पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने को लेकर कोई डेटा नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक अब प्रोफेसरों को आगे से अवकाश के लिए पोर्टल के माध्यम से आवेदन करना होगा। विश्वविद्यालय प्रशासन मुताबिक बीते कई वर्षों से प्राध्यापकों की छुट्टियों से संबंधित आवेदन न तो संकलित किए गए और न ही उन्हें डिजिटल रूप में सुरक्षित रखा गया। अब जब उच्च शिक्षा विभाग ने अचानक यह जानकारी मांगी है तो विश्वविद्यालय के पास प्रस्तुत करने के लिए कोई ठोस डेटा नहीं है। इस स्थिति का पता चलते ही विश्वविद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि विभाग ने दो दिनों के भीतर समर्थ पोर्टल पर छुट्टियों की जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। लेकिन रिकॉर्ड के अभाव में यह कार्य लगभग असंभव नजर आ रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बिना किसी दस्तावेज या आवेदन के सही जानकारी देना मुश्किल है। इससे विश्वविद्यालय की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं। इस संकट से निपटने के लिए डीएवीवी प्रशासन ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। पत्र के माध्यम से विभाग को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाएगा और समयसीमा में छूट या वैकल्पिक समाधान की मांग की जाएगी। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति न बने। इसके लिए छुट्टियों से जुड़े रिकार्ड को व्यवस्थित और डिजिटल रूप में संधारित करने पर भी विचार किया जा रहा है। कुलसचिव प्रज्वल खरे का कहना है कि प्रोफेसरों के अवकाश से जुड़ा रिकॉर्ड अव्यवस्थित है। इस बारे में संबंधित विभाग के अधिकारियों से जानकारी जुटाई जा रही है। वैसे उच्च शिक्षा विभाग को एक रिपोर्ट भी भेजेंगे।

प्रमोशन को लेकर बड़ा सवाल: क्या यह मौलिक अधिकार है? हाईकोर्ट का अहम जवाब

चंडीगढ़  पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने प्रमोशन को लेकर बड़ा फैसला दिया है। अदालत का कहना है कि एक कर्मचारी का प्रमोशन उसका मौलिक अधिकार नहीं है। पटियाला की एक महिला ने प्रमोशन के लिए उसके नाम पर विचार नहीं किए जाने को लेकर याचिका दाखिल की थी। इसपर अदालत ने उन्हें पदोन्नत नहीं करने के विभागीय फैसले को बरकरार रखा है।   क्या था मामला पंजाब में साल 1990 से टाउन एंड कंट्री प्लानिंग डिपार्टमेंट से शुरुआत करने वाली महिला ने याचिका दाखिल की थी। उन्होंने इस अंतराल में प्रमोशन हासिल करते हुए साल 2023 तक डिस्ट्रिक्ट टाउन प्लानर के पद पर सेवाएं दीं। इसके साथ ही वह सीनियर पोस्ट के लिए पात्र हो गईं थीं। अब प्रमोशन के लिए उनके नाम पर आगे विचार नहीं किया गया। विभाग के निदेशक का कहना है कि सेवा में रहते हुए याचिकाकर्ता महिला ने विकलांगता का सर्टिफिकेट जमा किया था। इसमें उनके अस्थायी सुनने की विकलांगता 41 फीसदी होने की बात कही गई थी। यह प्रमाण पत्र उन्होंने दिव्यांग कर्मचारियों को मिलने वाले लाभों के लिए किया था, जिसमें रिटायरमेंट की उम्र 58 के बजाए 60 भी शामिल है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने एक और सर्टिफिकेट जमा कराया, जिसमें सुनने की अक्षमता 53 फीसदी और स्थायी दिव्यांग बताई गई। विभाग के पास दो सर्टिफिकेट पहुंचने के कारण संदेह पैदा हुआ। इधर, मेडिकल बोर्ड ने उनके दिव्यांग होने को अस्थायी करार दिया और उनके दिव्यांग के तौर पर पहचाने जाने वाले दावे को भी अधिकारियों ने खारिज कर दिया। इसके बाद उन्हें 58 साल की उम्र में रिटायर करने का फैसला लिया गया। कोर्ट ने क्या कहा जस्टिस नमित कुमार याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कोर्ट ने कहा, 'कानून के मुताबिक, प्रमोशन ना ही निहित अधिकार है और ना ही मौलिक अधिकार है। प्रमोशन के लिए नाम पर विचार किया जाना मौलिक अधिकार है। प्रतिवादियों की तरफ से याचिकाकर्ता को सीनियर टाउन प्लानर पद पर प्रमोट नहीं किए जाने में कुछ गलत नहीं है।' खास बात है कि सेवा में रहने के दौरान महिला को सीनियर टाउन प्लानर कार्यभार सौंपा गया था। अब कोर्ट ने उनकी याचिका इस कार्यभार को संभालने के लिए उनकी भत्ते और भुगतान की मांग वाली याचिका को स्वीकार कर लिया है।

रीवा बना पर्यटकों की पसंद, 80% बुकिंग के साथ होम स्टे और बैलगाड़ी में मजेदार अनुभव

रीवा  नए साल 2026 के आगमन का उत्साह चरम पर है और इसका सीधा असर रीवा के पर्यटन पर भी साफ दिखाई दे रहा है. 31 दिसंबर और 1 जनवरी को लेकर जिले के प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर पर्यटन स्थल और आस्था के केंद्र सैलानियों से गुलजार हो चुके हैं. यहां ठंडी फिजा और विंध्य की मनमोहक वादियां पर्यटकों को बड़ी संख्या में रीवा की तरफ खींच कर ला रही है. हालात यह हैं कि शहर के लगभग सभी होटलों की बुकिंग धड़ाधड़ शुरू है. जबकि सेमरिया क्षेत्र के पुरवा में बने होम-स्टे भी ऑनलाइन और ऑफलाइन बुकिंग के जरिए तेजी से फुल होते जा रहे हैं, क्योंकि रीवा के 4 सबसे खूबसूरत वाटर फॉल में से एक पूर्वा वाटर फॉल इसी क्षेत्र में है. नए वर्ष पर रीवा में बढ़ी पर्यटकों की संख्या रीवा में बीते कुछ वर्षों की तुलना में इस बार पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. करीब 80 प्रतिशत बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है, जो इस बात का संकेत है कि इस बार न्यू ईयर पर रीवा में पर्यटन को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. खास बात यह है कि रीवा का पर्यटन अब केवल शहरी होटल और स्थलों तक सीमित नहीं रहा. पर्यटक अब ग्रामीण जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य और शांत माहौल की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. गांवों में बने होम-स्टे, प्राकृतिक पिकनिक स्पॉट और आसपास के हरियाली से भरपूर इलाके सैलानियों की पहली पसंद बनते जा रहे हैं. पर्यटक क्यों कर रहें रीवा का रुख रीवा में कई ऐसे प्राकृतिक और सांस्कृतिक क्षेत्र हैं, जिनके बारे में जानकर पर्यटक नए वर्ष को यादगार बनाने के लिए बड़ी संख्या में यहां का रुख कर रहे हैं और रीवा को अपना बेहतरीन डेस्टिनेशन मान रहे हैं. यहां कल-कल बहती सुंदर नदियां, मनमोहक झरने, घने जंगल और आस्था से जुड़े धार्मिक स्थल पर्यटकों को खासा आकर्षित कर रहे हैं. इसके साथ ही ग्रामीण संस्कृति को नजदीक से देखने और सादगी भरे जीवन का अनुभव करने का अवसर भी सैलानियों को रीवा की ओर खींच रहा है. न्यू ईयर के अवसर पर परिवारों और युवाओं की बढ़ती मौजूदगी यह साफ दर्शाती है कि रीवा अब नेचर और बेस्ट एक्सपीरियंस टूरिज्म के रूप में अपनी एक नई और मजबूत पहचान बना चुका है. रीवा में टेंपल टूरिज्म का नया दौर रीवा अब सिर्फ हरियाली, झरनों और जंगलों तक सीमित पहचान नहीं रखता, बल्कि यहां का टेंपल टूरिज्म भी तेजी से नई ऊंचाइयों को छू रहा है. श्रद्धा आस्था और सुकून की तलाश में रीवा का रुख करने वाले पर्यटक अब एक ही यात्रा में मंदिरों के दर्शन, प्राकृतिक स्थलों की खूबसूरती और ऐतिहासिक धरोहरों का अनुभव कर रहे हैं. यही अनोखा संगम रीवा को खास बनाता है, जहां आस्था, प्रकृति और इतिहास एक साथ सांस लेते नजर आते हैं. बढ़ती पर्यटक आमद और विविध अनुभवों की उपलब्धता ने रीवा को विंध्य क्षेत्र का उभरता हुआ पर्यटन केंद्र बना दिया है, जो हर वर्ग के सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है. ग्रामीण इलाकों के होम स्टे में छाई न्यू ईयर की रौनक न्यू ईयर के आगमन के साथ ही रीवा की होटल इंडस्ट्री और गांवों में बने होम स्टे पूरी तरह गुलजार नजर आ रहें है. शहर के ज्यादातर छोटे-बड़े होटलों से लेकर प्रीमियम होटल और रिसॉर्ट्स तक में एक सप्ताह पहले से ही लगभग फुल होने की कगार पर हैं. होटल संचालकों के मुताबिक 31 दिसंबर और 1 जनवरी को सेलिब्रेट करने के लिए पहले ही बुकिंग हो चुकी हैं. यहां विंध्य के सतना, सीधी, शहडोल, सिंगरौली के साथ ही उत्तर प्रदेश, बिहार समेत छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों से पर्यटक बड़ी संख्या में रीवा पहुंच रहे हैं. नए साल में युवा ग्रुप की पसंदीदा जगह बन रहा रीवा परिवारों के साथ-साथ युवाओं के ग्रुप भी नए साल का जश्न मनाने के लिए रीवा को अपनी पसंद बना रहे हैं. कुछ सैलानी विंध्य क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहरों और प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आ रहे हैं, तो वहीं कई पर्यटक प्राकृतिक सौंदर्य, शांति और ग्रामीण जीवन के अनूठे अनुभव की तलाश में रीवा का रुख कर रहे हैं. रीवा में है प्रसिद्ध मंदिर, ऐतिहासिक धरोहर और कई पर्यटन स्थल नववर्ष के अवसर पर रीवा शहर और आसपास के प्रमुख पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों पर सैलानियों की भारी भीड़ उमड़ने की प्रबल संभावना है. ठंडक भरे सुहावने मौसम और नव वर्ष के माहौल के चलते पर्यटकों की आवाजाही में इस बार उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिलेगी. विशेष रूप से प्रसिद्ध मंदिरों, प्राकृतिक पर्यटन स्थलों, झरनों, पिकनिक स्पॉट और ऐतिहासिक धरोहरों पर पर्यटकों की संख्या अधिक रहने की उम्मीद है. होम स्टे बने आकर्षण का केंद्र न्यू ईयर के मौके पर इस बार रीवा के ग्रामीण क्षेत्रों में बने होम-स्टे पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. सेमरिया क्षेत्र के पुरवा गांव में विकसित किए गए 10 होम-स्टे खासतौर पर सैलानियों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं. होम-स्टे संचालक पुरवा गांव के निवासी अभय मिश्रा के अनुसार "यहां करीब 80 प्रतिशत बुकिंग पहले ही पूरी हो चुकी है, जो की ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से की गई है." यहां पर्यटकों को कराई जाती है बैल गाड़ी से गांव की सैर इन होम-स्टे की पहचान केवल ठहरने की सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यटकों को ग्रामीण जीवन की आत्मा से रू-बरू कराने वाला अनुभव भी प्रदान करते हैं. संचालकों के अनुसार सैलानियों को बैलगाड़ी के माध्यम से पुरवा गांव, पुरवा वाटरफॉल, बसामन मामा और गौवंश अभ्यारण्य का भ्रमण कराया जाता है. इस दौरान पर्यटक गांव की गलियों से गुजरते हुए खेत-खलिहान, तालाब, पारंपरिक दिनचर्या और ग्रामीण परिवेश को नजदीक से देखते हैं, जिससे वे गांव की परंपराओं और ग्रामीणों की जीवनशैली को प्रत्यक्ष रूप से समझ पाते हैं. प्राकृतिक सौन्दर्य से भरपूर है रीवा यही कारण है कि न्यू ईयर के मौके पर प्रकृतिक की गोद और सादगी भरे माहौल की तलाश में पहुंचे पर्यटक इन ग्रामीण होम-स्टे को विशेष प्राथमिकता दे रहे हैं. यहां सैलानियों को शुद्ध देसी बघेली भोजन परोसा जा रहा है, जिसमें स्थानीय व्यंजनों का पारंपरिक स्वाद झलकता है. वहीं शाम ढलते ही बघेली लोकगीतों और … Read more

कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल, उत्तर भारत में तापमान लुढ़का; दिल्ली एयरपोर्ट पर उड़ानों पर ब्रेक

चंडीगढ़  पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली समेत समूचे उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड का असर तेज़ी से बढ़ता जा रहा है। बुधवार को घने कोहरे और गिरते तापमान के कारण जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सड़क, रेल और हवाई यातायात पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है, वहीं वायु प्रदूषण ने भी हालात को और गंभीर बना दिया है। घने कोहरे और बेहद कम दृश्यता के चलते बुधवार को दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बड़ा असर पड़ा। कम से कम 148 उड़ानें रद्द कर दी गईं, जबकि 150 से अधिक उड़ानों में देरी हुई। इनमें 78 आगमन और 70 प्रस्थान उड़ानें शामिल रहीं। दो उड़ानों का मार्ग भी परिवर्तित किया गया। दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (डायल) के अनुसार दृश्यता में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है, लेकिन कुछ उड़ानें अभी भी प्रभावित रह सकती हैं। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एयरलाइंस को यात्री सेवा मानकों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए हैं।   दिल्ली में ‘बहुत खराब’ हवा और ऑरेंज अलर्ट राष्ट्रीय राजधानी बुधवार सुबह घने कोहरे की मोटी चादर में लिपटी रही। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने सुबह घने कोहरे को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया। पालम और सफदरजंग में दृश्यता मात्र 50 मीटर दर्ज की गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, दिल्ली का 24 घंटे का औसत एक्यूआई 384 रहा, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में है। आनंद विहार में एक्यूआई 452 के साथ सबसे खराब दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता पूर्व चेतावनी प्रणाली के मुताबिक, एक जनवरी को हालात ‘गंभीर’ हो सकते हैं और अगले कई दिनों तक हवा की गुणवत्ता बेहद खराब रहने की आशंका है। न्यूनतम तापमान 6–8 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। गुवाहाटी में ठंड के कारण स्कूल बंद कड़ाके की ठंड को देखते हुए असम के कामरूप महानगर जिले में सभी सरकारी और निजी स्कूलों को 31 दिसंबर से 6 जनवरी तक बंद रखने के आदेश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय ने बताया कि छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए यह फैसला लिया गया है और स्कूल 7 जनवरी से दोबारा खुलेंगे। मौसम विभाग के अनुसार, गुवाहाटी में अधिकतम तापमान सामान्य से काफी कम दर्ज किया गया है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी ठंड, कोहरा और कुछ इलाकों में हल्की बारिश की संभावना जताई है। प्रशासन ने लोगों से सावधानी बरतने, अनावश्यक यात्रा से बचने और स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की अपील की है। 

RSS प्रमुख मोहन भागवत बोले—अरावली में विकास हो, लेकिन संतुलन के साथ, युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह

रायपुर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने युवा संवाद कार्यक्रम में विकास, पर्यावरण और युवाओं के भविष्य पर अपनी बात कही. उन्होंने अरावली पर्वतमाला का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया अब तक ऐसा विकास मॉडल नहीं बना पाई है, जिसमें पर्यावरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर साथ‑साथ बिना नुकसान के चल सकें, इसलिए अब संतुलित विकल्प तलाशना ही होगा. बता दें कि सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास पर हैं. इस दौरान आज रायपुर एम्स में वे युवा संवाद कार्यक्रम के जरिए युवाओं से रू-ब-रू हो रहे हैं. भागवत ने अरावली पर्वत श्रृंखला के संदर्भ से चेताया कि अंधाधुंध विकास की दौड़ अगर इसी तरह चलती रही तो आने वाली पीढ़ियां पर्यावरणीय संतुलन की भारी कीमत चुकाएंगी. उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्रकृति दोनों का समानांतर विकास जरूरी है, इसके लिए नीतियों और जीवनशैली दोनों में बदलाव लाना होगा. इसके साथ उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे रोजगार और करियर के साथ‑साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी समझें और अपने छोटे‑छोटे फैसलों से बड़ी सकारात्मक शुरुआत करें. डॉ. भागवत ने युवाओं में बढ़ते नशे को गंभीर चिंता बताते हुए कहा कि आज का यूथ अंदर से लोनली फील कर रहा है. परिवारों में संवाद घटने और रिश्तों के न्यूट्रल होते जाने की वजह से युवाओं के सामने मोबाइल और नशा आसान विकल्प की तरह खड़े हो रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर फैमिली के भीतर बात‑चीत और इमोशनल कनेक्शन मजबूत होगा तो बाहर की बुरी आदतों की खींच कम हो जाएगी. समाज और परिवार, दोनों को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा जिसमें युवा अकेलेपन से भागकर नशे में नहीं, बल्कि सार्थक कामों में अपना समय लगाएं.

इंदौर में दूषित जल आपूर्ति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव सख्त, उप यंत्री बर्खास्त, चार अधिकारी निलंबित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर में दूषित जल आपूर्ति से संक्रमण को लिया गंभीरता से प्रभारी उप यंत्री को सेवा से किया बर्खास्त जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री निलंबित जांच के लिए समिति गठित इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनसामान्य का स्वास्थ्य, राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल आपूर्ति से नागरिकों के संक्रमित होने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। घटना में लापरवाही पाये जाने पर जोन क्रमांक–4 के जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री एवं प्रभारी सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। प्रभारी उपयंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मामले की गहन जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति भी गठित कर दी गई है। डायरिया के बढ़ रहे थे मामले बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में उल्टी, दस्त और बुखार के मरीज लगातार सामने आ रहे थे। 26 दिसंबर को गोमती रावत की मौत इस पूरे घटनाक्रम की पहली कड़ी थी। इसके बाद धीरे-धीरे बीमार लोगों की संख्या बढ़ती गई और पांच दिनों के भीतर मौतों का आंकड़ा आठ तक पहुंच गया। इसके बावजूद शुरुआती दौर में स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। पहली मौत को पुरानी बीमारी बताकर मामला दबाने की कोशिश भी की गई, लेकिन जब हालात बिगड़ते चले गए तो प्रशासन हरकत में आया। 150 से अधिक लोग हुए बीमार इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अचानक दिल्ली से इंदौर पहुंचे और वर्मा हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इसके बाद सामने आया कि 150 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं और कई अस्पतालों में मरीज भर्ती हैं। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में 125 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें वर्मा हॉस्पिटल में 30, ईएसआईसी हॉस्पिटल में 11, एमवाय हॉस्पिटल में 5, त्रिवेणी हॉस्पिटल में 7 और अरविंदो हॉस्पिटल में 2 मरीज शामिल हैं। अन्य निजी अस्पतालों में भी मरीज भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया अभियान स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सर्वे और उपचार अभियान शुरू किया है। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार अब तक 2703 घरों का सर्वे किया जा चुका है और करीब 12 हजार लोगों की जांच की गई है। इनमें से 1146 मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया जबकि 125 से अधिक मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। 18 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। भागीरथपुरा की 15 गलियों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा क्लोरीन टैबलेट, जिंक और ओआरएस का वितरण भी किया जा रहा है। शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइप लाइन जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि भागीरथपुरा में पुलिस चौकी से लगे शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य जल आपूर्ति लाइन में लीकेज था। आशंका जताई जा रही है कि इसी लीकेज के कारण गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे यह भयावह स्थिति पैदा हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे पिछले 15 दिनों से बदबूदार और दूषित पानी आने की शिकायत कर रहे थे लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। इन पर हुई कार्रवाई मामले में लापरवाही बरतने पर नगर निगम और पीएचई विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई है। जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले को निलंबित किया गया है, प्रभारी सहायक अभियंता योगेश जोशी को सस्पेंड किया गया है, जबकि प्रभारी डिप्टी इंजीनियर शुभम श्रीवास्तव की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है जिसकी अध्यक्षता आईएएस नवजीवन पंवार कर रहे हैं। दो-दो लाख मुआवजे की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि 70 से अधिक पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह सरकारी खर्च पर किया जाएगा। जिन लोगों ने इलाज के लिए निजी अस्पतालों में पैसे जमा किए हैं, उन्हें भी राशि वापस दिलाई जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में 50 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है और लोगों को उबला हुआ पानी पीने, बाहर का खाना न खाने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है।  

नए साल के स्वागत से एक दिन पहले बागेश्वर धाम में भक्तों की भारी उपस्थिति, प्रशासन और पुलिस तैनात

छतरपुर   बागेश्वर धाम में नए साल का स्वागत करने के लिए एक दिन पहले ही बड़ी संख्या में भक्त धाम पहुंच गए. इसके साथ ही भक्तों ने छतरपुर और खजुराहो के होटलों व धर्मशालाओं में डेरा डाल लिया है. ये भक्त नए साल की शुरुआत बागेश्वर धाम में हनुमानजी महाराज के दर्शन करके करेंगे. बागेश्वर धाम में भक्तों की भीड़ को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. नए साल का स्वागत सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ नए साल के अंतिम दिन भक्तों को संबोधित करते हुए बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा "जानकारी मिली है कि लाखों भक्त खजुराहो व छतरपुर के अलावा बागेश्वर धाम में पहुंच गए हैं. बागेश्वर धाम में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ करके नए साल का स्वागत करेंगे. युवाओं में ये बड़ा बदलाव देखा जा रहा है कि लोग नए साल का शुभारंभ धार्मिक कार्यक्रमों के साथ कर रहे हैं." सनातन धर्म के प्रति जागरूक हुए युवा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा "एक समय था जब युवा नए साल का स्वागत करने के लिए पबों, बारों और महंगे होटलों में जश्न मनाने पहुंचते थे. लेकिन अब युवा अयोध्या में रामलला के दर्शन करके, वाराणसी जाकर और बागेश्वर धाम आकर नए साल का आगाज कर रहे हैं. ये बताता है कि युवा भी सनातन धर्म के प्रति कितने जागरूक हो गए हैं. युवा पीढ़ी में आया ये बदलाव देश और समाज के हित में है." बागेश्वर धाम की रसोई में खास इंतजाम बागेश्वर धाम में नए साल का स्वागत करने के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है. निःशुक्ल रसोई में विशेष इंतजाम किए गए हैं. इसके साथ ही पुलिस और प्रशासन ने भी यहां खास इंतजाम किए हैं. यहां पिछले एक साल में करीब 50 लाख लोगों ने भोजन प्रसाद पाया है. रसोई अनवरत चालू रहती है. इसके अलावा एक वर्ष में धाम की गौशाला में 5 हजार पौधे रोपे गए हैं. शिवरात्रि के पावन पर्व पर 108 आदिवासी बेटियों सहित 251 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा गया. कैंसर अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज दिलाने के लिए बागेश्वर सरकार के मन में प्रेरणा हुई, जिससे दीन दुखियों की मदद के लिए उन्होंने कैंसर अस्पताल बनाने की घोषणा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 फरवरी 2025 को कन्या विवाह महा महोत्सव के अवसर पर आकर कैंसर अस्पताल की आधारशिला रखी. मुंबई के भिवंडी में बालाजी सनातन मठ की स्थापना कराई गई है. बागेश्वर महाराज ने इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया, फिजी, ओमान, लंदन, दुबई, न्यूजीलैंड जैसे देशों की यात्रा करते हुए यहां कथा के माध्यम से लोगों में सनातन के प्रति जुड़ाव पैदा किया. बागेश्वर के सेवादार कमल अवस्थी कहते हैं "भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है. पूरे साल धाम पर धार्मिक आयोजन चलते रहते हैं. सनातन की अलख जगाने के लिए महाराज बागेश्वर लगातार लगे हैं."

राज्यपाल पटेल ने प्रदेशवासियों को दी नववर्ष की शुभकामनाएँ, सकारात्मक शुरुआत का आह्वान

नया वर्ष नए संकल्पों, नई ऊर्जा और नए अवसरों का प्रतीक : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को दी नव वर्ष की शुभकामनाएँ भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने नववर्ष 2026 के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी है। उन्होंने कहा है कि नया वर्ष नए संकल्पों, नई ऊर्जा और नए अवसरों का प्रतीक है। यह समय है कि हम बीते अनुभवों से सीख लेते हुए मध्यप्रदेश को प्रगति की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का संकल्प लें। राज्यपाल पटेल ने अपने शुभकामना संदेश में कहा है कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। किसान, युवा, महिलाएँ और वंचित वर्गों का कल्याण सरकार की नीतियों के केंद्र में हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढाँचे और निवेश के क्षेत्र में संतुलित विकास की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि को लाभकारी बनाना, युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ना और मातृशक्ति को सशक्त करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधन और पर्यटन संभावनाएँ हमारे गौरव का आधार हैं।  हमें सदैव स्मरण रखना होगा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के बिना समृद्धि संभव नहीं है। राज्यपाल पटेल ने प्रदेशवासियों का आह्वान  किया है कि सामाजिक सद्भाव, स्वच्छता, जल संरक्षण और संवैधानिक मूल्यों को अपनाते हुए विकास की इस यात्रा में सहभागी बने। नववर्ष 2026 में एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प लें।