samacharsecretary.com

वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम

जनवरी 2026 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लॉन्च करेंगे उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए योगी सरकार का बड़ा कदम मुख्य सचिव होंगे परियोजना के अध्यक्ष, प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव सदस्य लखनऊ उत्तर प्रदेश को स्वच्छ, स्वस्थ और आर्थिक रूप से अधिक सक्षम राज्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार निरंतर ठोस कदम उठा रही है। वायु प्रदूषण की बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आगामी माह जनवरी 2026 में उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन परियोजना (यूपीसीएएमपी) का शुभारंभ करेंगे। इस परियोजना के शासी निकाय की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव करेंगे, जबकि प्रमुख सचिव और अपर मुख्य सचिव सदस्य के रूप में नामित होंगे। वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने के उद्देश्य से योगी सरकार विश्व बैंक के सहयोग से यूपीसीएएमपी परियोजना का कार्यान्वयन कर रही है। इसी क्रम में हाल ही में यूपीसीएएमपी प्राधिकरण के शासी निकाय की दूसरी बैठक मुख्य सचिव की अध्यक्षता में संपन्न हुई, जिसमें पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि परियोजना के कार्यान्वयन से जुड़े सभी आवश्यक कदमों की समयबद्ध प्रगति की अद्यतन जानकारी आगामी बैठक में प्रस्तुत की जाए। इस परियोजना को लेकर बीते 3 नवंबर 2025 को नई दिल्ली में आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए), विश्व बैंक और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच परियोजना वार्ता सफलतापूर्वक संपन्न हुई थी। इसके पश्चात 10 दिसंबर 2025 को विश्व बैंक के निदेशक मंडल द्वारा परियोजना को औपचारिक मंजूरी प्रदान की गई। शासी निकाय को परियोजना की संरचना, वित्तपोषण व्यवस्था और विशेष प्रयोजन वाहन के रूप में गठित यूपीसीएएमपी प्राधिकरण के माध्यम से कार्यान्वयन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी गई। यूपीसीएएमपी भारत की अपनी तरह की पहली वायुक्षेत्र-आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन परियोजना है, जिसे इंडो-गंगा के मैदानों में वायु प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों को लक्षित करते हुए एक बहु-क्षेत्रीय कार्यक्रम के रूप में विकसित किया गया है। यह परियोजना विश्व बैंक द्वारा IIT कानपुर, IIT दिल्ली और नॉर्वेजियन इंस्टीट्यूट फॉर एयर रिसर्च (NILU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से किए गए व्यापक वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है। इसमें ऑस्ट्रिया के IIASA द्वारा विकसित GAINS मॉडल का उपयोग किया गया है। यूपीसीएएमपी का कुल परिव्यय 304.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जिसमें 299.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर का ऋण (लगभग 46,188 करोड़ येन के बराबर) और 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर का अनुदान शामिल है। इस परियोजना को वर्ष 2025 से 2031 तक छह वर्षों की अवधि में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। परियोजना उद्योग, परिवहन, कृषि, सड़क की धूल, अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छ खाना पकाने जैसे प्राथमिक क्षेत्रों पर केंद्रित है, जिससे उत्सर्जन में कमी के लिए एक समन्वित और प्रभावी रणनीति अपनाई जा सके। इस परियोजना का प्रमुख उद्देश्य वायुक्षेत्र आधारित वायु गुणवत्ता प्रबंधन को सुदृढ़ करना और विभिन्न क्षेत्रों में उत्सर्जन को कम करना है। इसके तहत लगभग 39 लाख परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने के समाधान उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और गोरखपुर में 15,000 इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर और 500 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से स्वच्छ परिवहन को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि 13,500 प्रदूषणकारी भारी वाहनों के प्रतिस्थापन के लिए प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। कृषि और पशुधन प्रबंधन के क्षेत्र में परियोजना के अंतर्गत पोषक तत्व उपयोग दक्षता प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके लिए खेतों में नाइट्रोजन निगरानी प्रणालियों की तैनाती, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों की प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करना, तथा खाद आधारित उर्वरकों और बायोगैस स्लरी के मानकीकृत उपयोग के माध्यम से पशुधन अपशिष्ट प्रबंधन को बेहतर बनाया जाएगा। औद्योगिक क्षेत्र में यूपीसीएएमपी संसाधन-कुशल ईंट निर्माण और टनल भट्टों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन देगा। इसके साथ ही औद्योगिक क्लस्टरों के लिए स्वच्छ वायु प्रबंधन योजनाएं तैयार की जाएंगी तथा मिनी बॉयलर से सामान्य बॉयलर सुविधाओं में परिवर्तन के लिए नीति निर्माण और व्यवहार्यता अध्ययन किया जाएगा। वायु प्रदूषण में प्रभावी कमी लाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार पड़ोसी राज्यों के साथ सहयोग बढ़ाकर सीमा-पार उत्सर्जन से निपटने की रणनीति भी अपनाएगी, जिससे कम लागत में अधिक प्रभावी परिणाम सुनिश्चित किए जा सकें।

पंजाब में बदलेगा मौसम का मिज़ाज! 13 जिलों के लिए येलो अलर्ट, 16 दिसंबर तक रहेगा असर

जालंधर  पंजाब में ठंड ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने लेटेस्ट अपडेट शेयर की है। आने वाले दिनों में राज्य के कई हिस्सों में घना कोहरा पड़ना शुरू हो जाएगा। मौसम विभाग ने आज से 16 दिसंबर तक की जानकारी दी है। इसके साथ ही 13 जिलों के लिए कोल्ड वेव और घने कोहरे का येलो अलर्ट जारी किया गया है। ताजा जानकारी के मुताबिक, मौसम विभाग ने पठानकोट, गुरदासपुर, होशियारपुर, नवांशहर, अमृतसर, फतेहगढ़ साहिब, रूपनगर, पटियाला, मोहाली, तरनतारन, कपूरथला, जालंधर और लुधियाना समेत 13 जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग का कहना है कि इन जिलों के कुछ इलाकों में घना कोहरा छाया रहेगा। मौसम विभाग ने बारिश को लेकर कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। पंजाब में अगले 5 दिनों तक मौसम सूखा रहेगा और घने कोहरे के साथ-साथ कोल्ड वेव भी बढ़ेगी। वहीं, अगर पंजाब में पिछले 24 घंटों के दौरान तापमान की बात करें तो गुरुवार को आदमपुर सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 4 डिग्री रहा, जबकि फरीदकोट में 4.9 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। राज्य के औसत न्यूनतम तापमान में 0.4 डिग्री की कमी आई, जिससे लुधियाना और पटियाला का तापमान सामान्य से कम हो गया। जबकि अधिकतम तापमान में भी मामूली गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में घने कोहरे के कारण लोगों को सावधान रहने की सलाह दी है और वाहन चालकों से कम स्पीड में वाहन चलाने की भी अपील की है। 

खेती का बदलता भविष्य: स्मार्ट एग्रीकल्चर में शिक्षा क्यों बनेगी सबसे बड़ा आधार

लुधियाना  भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) द्वारा हाल ही में सभी राज्य और केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों को जारी एक परिपत्र इस बात को रेखांकित करता है कि आने वाले समय में प्राकृतिक खेती के अध्ययन और उसके प्रचार-प्रसार पर जोर देना क्यों आवश्यक है। कुलपतियों को भेजे गए पत्र में आईसीएआर ने प्राकृतिक खेती से जुड़े स्नातक और स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों तथा शोध कार्यक्रमों को शुरू करने का आग्रह किया है। पत्र में कहा गया है कि प्राकृतिक खेती और सतत कृषि पद्धतियां रासायनिक प्रदूषण, किसानों के कर्ज, जल संरक्षण जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने में सहायक हो सकती हैं। साथ ही, यह जैव विविधता बढ़ाने और स्वस्थ भोजन के उत्पादन में भी मददगार साबित होंगी। पीएयू की पहल लुधियाना स्थित पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) में वर्ष 2017 में जैविक एवं प्राकृतिक खेती का स्कूल स्थापित किया गया था। इसका उद्देश्य जैविक और प्राकृतिक कृषि से संबंधित वैज्ञानिक ज्ञान के विकास और प्रसार के लिए बहुविषयक शोध, प्रशिक्षण और विस्तार गतिविधियों को अंजाम देना है। इस स्कूल के पास एक हेक्टेयर का एकीकृत कृषि प्रणाली मॉडल फार्म है, जिसमें फसल उत्पादन, डेयरी, बागवानी, मत्स्य पालन और कृषि-वनिकी शामिल हैं। इसके अलावा, यहां वर्मी कम्पोस्टिंग और वर्मीकल्चर यूनिट भी स्थापित है। बढ़ती रुचि कोविड महामारी के बाद जैविक और प्राकृतिक खेती के पाठ्यक्रमों में दाखिले को लेकर पूछताछ में कई गुना वृद्धि हुई है। स्कूल ऑफ ऑर्गेनिक एंड नेचुरल फार्मिंग, पीएयू के निदेशक डॉ. सोहन सिंह वालिया कहते हैं, “हमें रोजाना दो-तीन पूछताछ प्राकृतिक और जैविक खेती को लेकर मिलती हैं। कोविड के बाद लोग भोजन उत्पादन के तरीकों को लेकर कहीं अधिक जागरूक हो गए हैं। अब प्राकृतिक खेती को केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि यह स्वास्थ्य की रक्षा करती है, मिट्टी को पुनर्जीवित करती है और अनिश्चित समय में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है।” खेती की पढ़ाई पर जोर पीएयू के छात्रों ने पंजाब सरकार से मांग की है कि कक्षा 9 से 12 तक सरकारी स्कूलों में कृषि को अनिवार्य विषय बनाया जाए। अंग्रेज सिंह, एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ पंजाब (ASAP) के संस्थापक सदस्य, कहते हैं, “हम चाहते हैं कि स्कूलों में कृषि पढ़ाई जाए, क्योंकि यह शिक्षा को वास्तविक कृषि विकास से जोड़ती है और कम उम्र से ही जीवन कौशल तथा सामाजिक जिम्मेदारी सिखाती है। बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर खेती के बारे में शिक्षित करने से वे प्राकृतिक खेती का महत्व समझेंगे और रसायनों के बिना प्रकृति के साथ तालमेल में अपना भोजन उगाना सीखेंगे। इससे सभी के लिए स्वास्थ्य और संतुलन सुनिश्चित होगा।”   पाठ्यक्रमों में शामिल प्राकृतिक खेती पीएयू में बीएससी (कृषि) पाठ्यक्रम में जैविक खेती शामिल है। इसके अलावा, ‘प्राकृतिक खेती के सिद्धांत’ विषय बीएससी (कृषि) और बीएससी (बागवानी) के छात्रों को पढ़ाया जाता है। इसी तरह, कृषि विज्ञान विभाग द्वारा स्नातकोत्तर छात्रों के लिए भी जैविक और प्राकृतिक खेती के पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। साथ ही, घरों में किचन गार्डन विकसित करने के इच्छुक लोगों के लिए समय-समय पर अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। बदलता फोकस पीएयू के कुलपति डॉ. सतबीर सिंह गोसल कहते हैं, “हमने हरित क्रांति का नेतृत्व किया और अब समय आ गया है कि ध्यान प्राकृतिक और जैविक खेती की ओर मोड़ा जाए। छोटे कदमों से भी इस क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। हालांकि प्राकृतिक खेती अपनाने से शुरुआती दौर में पैदावार प्रभावित हो सकती है, लेकिन किचन गार्डन जैसे छोटे स्तर से शुरुआत करना एक बेहतर रास्ता हो सकता है।” प्राकृतिक खेती बनाम जैविक खेती     प्राकृतिक खेती में खेती के तरीकों में प्रकृति के नियमों को अपनाया जाता है। इसमें बीज समेत सभी संसाधन खेत से ही लिए जाते हैं।     जैविक खेती मिट्टी और पर्यावरण के स्वास्थ्य के सिद्धांत पर आधारित एक पर्यावरण-अनुकूल प्रणाली है।     प्राकृतिक खेती में किसी भी बाहरी इनपुट, यहां तक कि जैविक खाद का भी उपयोग नहीं किया जाता और यह पूरी तरह प्राकृतिक चक्रों पर निर्भर होती है।     जैविक खेती में रासायनिक पदार्थों पर रोक होती है, लेकिन कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट और गोबर खाद जैसे अनुमोदित जैविक इनपुट्स की अनुमति होती है।     प्राकृतिक खेती में मिट्टी को कम से कम छेड़ने, बिना जुताई और निराई-गुड़ाई पर जोर दिया जाता है, जबकि जैविक खेती में ये प्रक्रियाएं अपनाई जा सकती हैं।

बस्तर सहित पूरे भारत से नक्सलवाद 31 मार्च 2026 तक खत्म हो जायेगा- अमित शाह

रायपुर : केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया बस्तर सहित पूरे भारत से नक्सलवाद 31 मार्च 2026 तक खत्म हो जायेगा- अमित शाह अगले 5 साल में बस्तर संभाग देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनेगा-अमित शाह 2026 का बस्तर ओलंपिक नक्सलवाद से मुक्त बस्तर में होगा नक्सलवाद छोड़कर 700 से अधिक युवाओं का बस्तर ओलंपिक 2025 से जुड़ना हम सभी के लिए गर्व की बात है आत्मसमर्पण करने वालों ने भय की जगह आशा व विनाश की जगह विकास को चुना, यही मोदी जी की विकसित बस्तर की संकल्पना है जिस बस्तर में पहले ‘लाल सलाम’ के नारे लगते थे, अब वहाँ ‘भारत माता की जय’ के नारे गूँज रहे हैं शांति ही विकास का मार्ग प्रशस्त कर सकती है, इसलिए नक्सली हथियार डालकर मुख्यधारा में आयें और पुनर्वसन नीति का लाभ उठाएं आने वाले कॉमनवेल्थ गेम्स और ओलंपिक में बस्तर के खिलाड़ी देश का नाम रोशन करें, इसके प्रबंध किए जा रहे हैं बस्तर ओलम्पिक 2025 में 3 लाख 91 हज़ार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया, जो ढाई गुना बढ़ा है, खिलाड़ियों की वृद्धि दर में बहनों ने भाइयों से बाजी मारी आत्मसमर्पण करने वाले और नक्सल हिंसा के शिकार लोगों के लिए हम बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना लाएंगे केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर विकसित बस्तर बनाने के लिए कार्य कर रही हैं गृह मंत्री ने समाज के प्रमुखों और समाजसेवकों से अपील करते हुए कहा कि वे हथियारबंद नक्सलियों को समझाकर समाज की मुख्यधारा में वापस लाने में सहयोग करें रायपुर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के समापन समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। इस अवसर पर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि हमने तय किया था कि 31 मार्च, 2026 से पहले पूरे देश से लाल आतंक को खत्म कर देंगे और आज बस्तर ओलंपिक- 2025 में हम इस कगार पर खड़े हैं। उन्होंने कहा कि अगले वर्ष नवंबर-दिसंबर तक बस्तर ओलंपिक-2026 के समय तक पूरे भारत और छत्तीसगढ़ से लाल आतंक समाप्त हो चुका होगा औऱ नक्सलमुक्त बस्तर आगे बढ़ रहा होगा। अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हमने यह संकल्प लिया है कि पूरे बस्तर और भारत को नक्सलमुक्त कराना है। उन्होंने कहा कि हमें यहीं नहीं रुकना बल्कि कांकेर, कोंडागांव, बस्तर, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर और दंतेवाड़ा के 7 ज़िलों का संभाग बस्तर, दिसंबर 2030 दिसंबर तक देश के सबसे अधिक विकसित आदिवासी संभाग बनेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर के हर व्यक्ति को रहने के लिए घर, बिजली, शौचालय, नल से पीने का पानी, गैस सिलिंडर, 5 किलो अनाज और 5 लाख तक का मुफ्त इलाज, बस्तर के घर घर में पहुचाने का संकल्प हमारी सरकार का संकल्प है। शाह ने कहा कि हमने अगले पांच साल में बस्तर को देश का सबसे विकसित आदिवासी संभाग बनाने का संकल्प लिया है। उन्होंने कहा कि इसमें प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार और विष्णुदेव साय जी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार कंधे से कंधा मिलाकर बस्तर को विकसित बस्तर बनाने के लिए मिलकर आगे बढ़ेंगे। केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर का हर गांव सड़क से जुड़ेगा, वहां बिजली होगी, 5 किलोमीटर के क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाएं होंगी और सबसे घने पीएचसी/सीएचसी का नेटवर्क बनाने का काम भी हमारी सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन उपज की प्रोसेसिंग के लिए कोऑपरेटिव आधार पर यूनिट्स लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर के सातों ज़िले सभी आदिवासी ज़िलों में सबसे अधिक दूध उत्पादन कर डेयरी के माध्यम से अपनी आय बढ़ाने वाले ज़िले बनेंगे। उन्होंने कहा कि बस्तर में नए उद्योग, उच्च शिक्षा की व्यवस्था, भारत में सबसे अच्छा स्पोर्ट्स संकुल और अत्याधुनिक अस्पताल की व्यवस्था भी हम करेंगे। शाह ने कहा कि कुपोषण के लिए भी यहां विशेष स्कीम चलाई जाएगी। उन्होंने कहा कि जिन्होंने आत्मसमर्पण किया है और जो नक्सलवाद के कारण घायल हुए हैं, उनके लिए एक बहुत आकर्षक पुनर्वसन योजना भी हम लाएंगे। गृह मंत्री ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि नक्सलवाद समाप्त हो क्योंकि नक्सलवादी इस क्षेत्र के विकास पर नाग बनकर फन फैलाए बैठे हैं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद समाप्त होने के साथ ही इस क्षेत्र में विकास की एक नई शुरूआत होगी और प्रधानमंत्री मोदी जी और विष्णुदेव जी के नेतृत्व में यह सबसे विकसित क्षेत्र बनेगा। अमित शाह ने कहा कि बस्तर ओलंपिक-2025 में सात ज़िलों की सात टीमें और एक टीम आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की थी। उन्होंने कहा कि जब 700 से अधिक सरेंडर्ड नक्सलियों ने इन खेलों में भाग लिया तो यह देखकर बहुत अच्छा लगा। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद के झांसे में आकर उनका पूरा जीवन तबाह हो जाता और हथियार डालकर मुख्यधारा में आने वाले ऐसे 700 से अधिक युवा आज खेल के रास्ते पर आए हैं। शाह ने दोहराया कि 31 मार्च, 2026 को यह देश नक्सलवाद से मुक्त हो जाएगा। उन्होंने हिंसा में लिप्त नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि अब भी गुमराह होकर हमारे ही जो लोग हाथ में हथियार लेकर बैठे हैं, वो हथियार डाल दें, पुनर्वसन नीति का फायदा उठाएं, अपने और अपने परिवार के कल्याण के बारे में सोचें और विकसित बस्तर के संकल्प के साथ जुड़ जाएं। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद से किसी का भला नहीं होता, न हथियार उठाने वाले लोगों का, न आदिवासियों और न सुरक्षाबलों का भला होता है। उन्होंने कहा कि सिर्फ शांति ही विकास का रास्ता प्रशस्त कर सकती है। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि आत्मसमर्पण कर चुके 700 नक्सलियों ने इन खेलों में खिलाड़ी के रूप में सामने आकर पूरे देश के लिए बहुत बड़ा उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि इन खिलाड़ियों ने भय की जगह आशा चुनी, विभाजन की जगह एकता का रास्ता चुना और विनाश की जगह विकास का रास्ता चुना है और यही प्रधानमंत्री मोदी जी की नए भारत और विकसित बस्तर की संकल्पना है। उन्होंने कहा कि हमारे बस्तर की संस्कृति … Read more

भारत का ‘ब्यूटी सुपरपॉवर’: बाड़मेर की मुल्तानी मिट्टी की ग्लोबल डिमांड, अमेरिका और जापान में भारी कीमत पर बिकती है

बाड़मेर  पश्चिम राजस्थान के सरहदी बाड़मेर जिले का नाम अक्सर वीरों की भूमि, युद्धों की कहानियों और थार की शौर्यगाथाओं के कारण सुर्खियों में रहता है, लेकिन इस सीमांत इलाके की पहचान केवल वीरता तक सीमित नहीं है. यहां की रेगिस्तानी धरती में एक ऐसा प्राकृतिक खजाना छिपा है जिसकी मांग दुनिया भर में तेजी से बढ़ रही है. अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे विकसित देश तक इसके दीवाने हो चुके हैं. इस मिट्टी का उपयोग चेहरे की खूबसूरती निखारने से लेकर बालों की मजबूती तक के लिए किया जाता है. स्थानीय लोग तो वर्षों से इस पारंपरिक मिट्टी पर भरोसा करते आए हैं, लेकिन अब अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी उद्योग भी इसे अपने उत्पादों में खास जगह देने लगा है. बाड़मेर समेत आसपास के क्षेत्रों में मिलने वाली मुल्तानी मिट्टी दिखने में भले ही सामान्य लगे, लेकिन इसके गुण इसे खास बनाते हैं. चेहरे पर लगाने से स्किन ग्लो करती है और टाइट होती है, जबकि बालों पर लगाने से वे घने, काले और रेशमी बन जाते हैं. यही कारण है कि देसी बाजारों से निकलकर मुल्तानी मिट्टी अब अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी ब्रांडों की पहली पसंद बन चुकी है. विदेशों में इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई है कि कई जगह इसे प्रीमियम स्किन केयर प्रोडक्ट्स में शामिल किया जा रहा है. बाड़मेर में 20–30 रुपये किलो, विदेशों में कई गुना महंगी थार के धोरों में मिलने वाली यह मुल्तानी मिट्टी स्थानीय बाजारों में 20 से 30 रुपये प्रति किलो में आसानी से मिल जाती है. लेकिन जब यही मिट्टी अमेरिका, जापान और यूरोप के बाजारों में पहुंचती है तो इसकी कीमत कई गुना बढ़ जाती है. विदेशों में इसे नेचुरल स्किन क्लेंज़र और ब्यूटी इंग्रेडिएंट के रूप में बेचा जाता है, जहां इसका मूल्य प्रीमियम श्रेणी में माना जाता है. बाड़मेर की मिट्टी की खासियत यही है कि इसमें पाए जाने वाले मिनरल्स की गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतरती है, जिसके कारण विदेशी उपभोक्ताओं के बीच इसकी मांग तेजी से बढ़ी है. अब अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भी कर रहीं हैं इस्तेमाल बड़ी अंतरराष्ट्रीय कंपनियां मुल्तानी मिट्टी को फेस मास्क, स्किन केयर किट और स्पा ट्रीटमेंट जैसे उत्पादों में शामिल कर रही हैं. मुल्तानी मिट्टी नेचुरल स्किन क्लेंज़र, ऑयल कंट्रोल एजेंट, टॉक्सिन एब्ज़ॉर्बर और आयुर्वेदिक ब्यूटी इंग्रेडिएंट के रूप में बेहद लोकप्रिय हो चुकी है. खास बात यह है कि यह 100 फीसदी प्राकृतिक होती है और किसी भी रसायन से मुक्त रहती है, जिससे यह संवेदनशील त्वचा के लिए भी सुरक्षित मानी जाती है. यही वजह है कि केमिकल बेस्ड प्रोडक्ट्स से दूरी बनाने वाले देशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. थार की मिट्टी का विदेशी क्रेज क्यों बढ़ रहा है बाड़मेर और आसपास का इलाका सदियों से मुल्तानी मिट्टी के लिए जाना जाता है. यहां की मिट्टी में प्राकृतिक मिनरल्स की भरपूर मात्रा होती है जो त्वचा के लिए लाभकारी मानी जाती है. यही मिनरल्स स्किन टाइटनिंग, ग्लो बढ़ाने और त्वचा को साफ रखने में कारगर होते हैं. आयुर्वेदिक उपचारों में मुल्तानी मिट्टी का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है और आधुनिक बाजार भी अब इसकी क्षमता को समझने लगा है. अंतरराष्ट्रीय मार्केट में इसकी इतनी डिमांड क्यों है अमेरिका और जापान जैसे देशों में नेचुरल स्किन केयर प्रोडक्ट्स की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. वहां के उपभोक्ता केमिकल युक्त उत्पादों से दूरी बनाते हुए मिट्टी और जड़ी-बूटी आधारित उत्पादों की ओर बढ़ रहे हैं. बाड़मेर की मुल्तानी मिट्टी का टेक्सचर और उच्च गुणवत्ता वाले मिनरल्स इसे अंतरराष्ट्रीय उपयोग के लिए उपयुक्त बनाते हैं. विदेशों में इसका प्रयोग फेस मास्क, स्पा थेरेपी, स्किन केयर सेट और कई ब्यूटी प्रोडक्ट्स में खूब किया जा रहा है.

60 फीट ऊंचा और 700 किलो वजन वाला महात्रिशूल, छिंदवाड़ा से अयोध्या तक सनातन हिंदू एकता यात्रा”

छिंदवाड़ा  छिंदवाड़ा के एक छोटे से गांव में एक ऐसे त्रिशूल का निर्माण किया गया है, जिसे उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा त्रिशूल होने का दावा किया जा रहा है. इस त्रिशूल को उत्तर प्रदेश के अयोध्या मैं विघ्नेश्वर धाम शिव मंदिर में स्थापित किया जाएगा. छिंदवाड़ा से 2 फरवरी को त्रिशूल सनातन हिंदू एकता यात्रा निकाली जाएगी जिसमें श्री राम जन्मभूमि अयोध्या के शिव मंदिर में उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े त्रिशूल की स्थापना की जाएगी. त्रिशूल को छिंदवाड़ा के आदि शक्ति दुर्गा माता मंदिर में दर्शन के लिए रखा गया है. क्यों निकाली जा रही त्रिशूल सनातन हिन्दू एकता यात्रा श्री राम जन्मभूमि अयोध्या में विघ्नेश्वर धाम के अमित योगी ने बताया कि, ''ये उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा त्रिशूल है, जो छिंदवाड़ा से बनकर अयोध्या जाएगा. त्रिशूल सनातन हिन्दू एकता यात्रा का प्रमुख संकल्प इसलिए लिया गया है. जिसमें 1- भारत गौरवशाली हिन्दू राष्ट्र घोषित हो. 2. गौ माता राष्ट्र माता घोषित हो 3. श्री अयोध्या काशी, मथुरा क्षेत्र में मांस मदिरा बन्द हो 4. श्री कृष्ण जन्मभूमि पर भव्य मन्दिर निर्माण हो 5. हर हिन्दू घरों में शस्त्र-शास्त्र, गाय माता, भगवा ध्वज, ॐ स्थापित हो 6. हर हिन्दू के मस्तक पर चन्दन, सिर पर शिखा, हाथ में कलावा स्थापित हो 7. हर घरों में तुलसी माता, संध्या दीपक, शाम को परिवार सहित रामचरित मानस पाठ हो 8. हर मंदिर में हिन्दू समाज के सभी वर्गों द्वारा 365 पुजारी, यजमान जोड़े जाये जिससे समाजिक समरसता का भाव स्थापित हो. 1 साल में बनकर तैयार हुआ यूपी का सबसे बड़ा त्रिशूल यात्रा के संयोजक ऋषि राज सिंह बैंस ने बताया कि, ''छोटे से गांव झिरलिंगा के सुशील विश्वकर्मा ने इसे बनाया जो 1 साल में बनकर तैयार हुआ है. इस त्रिशूल की ऊंचाई 60 फीट, चौड़ाई 11 फीट और वजन 700 किलो है जो पूरी तरीके से स्टील से बनाया हुआ है. दर्शन के लिए त्रिशूल को आदि शक्ति दुर्गा मंदिर में रखा गया है.'' 2 फरवरी को आदिशक्ति दुर्गा मंदिर से त्रिशूल सनातन हिंदू यात्रा शुरू की जाएगी. त्रिशूल को विशेष वाहन से अयोध्या तक ले जाया जाएगा. लेकिन हर शहर में नगर भ्रमणकर शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसके तहत सिवनी, लखनादौन, जबलपुर, कटनी, सतना, रीवा, प्रयागराज, प्रतापगढ़, अमेठी, सुल्तानपुर और अयोध्या धाम में शोभायात्रा निकालने के बाद विघ्नेश्वर शिव मंदिर में स्थापित किया जाएगा.

भोपाल में प्रदूषण मुक्त सफर की शुरुआत, 21 दिसंबर से दौड़ेगी मेट्रो ट्रेन, मोहन सरकार की बड़ी योजना

 भोपाल मध्य प्रदेश अब देश के उन 12 चुनिंदा राज्यों में शामिल हो रहा है, जहां एक से अधिक शहरों में मेट्रो का संचालन हो रहा है। इंदौर की तरह अब राजधानी भोपाल भी मेट्रो के नये दौर में प्रवेश करने को तैयार है। प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि भोपाल में मेट्रो का संचालन 21 दिसंबर से शुरू कर दिया जाएगा। इससे राजधानी की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में एक बड़ा परिवर्तन देखने को मिलेगा। राजधानी के यात्रियों के लिए यह एक महत्वपूर्ण और लंबे समय से प्रतीक्षित सुविधा है, जिसका उद्देश्य शहर की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के दबाव को कम कर यातायात निर्बाध बनाना है। इंदौर मेट्रो सबसे पहले चली प्रदेश में सबसे पहले इंदौर मेट्रो ट्रेन की शुरुआत 31 मई, 2025 को हुई। अभी इसका छह किलोमीटर (गांधीनगर से सुपर कॉरिडोर स्टेशन 3 तक) के 'सुपर प्रॉयोरिटी कॉरिडोर' पर कमर्शियल रन किया जा रहा है, जो कि कुल 31.32 किमी के पहले चरण का हिस्सा है, जिसका धीरे-धीरे विस्तार हो रहा है। वहीं, भोपाल में 21 दिसंबर को कमर्शियल रन शुरू होगा। इसमें भोपाल एम्स से सुभाष नगर तक साढ़े सात किमी प्रायोरिटी कॉरिडोर पर मेट्रो दौड़ेगी। यह भोपाल के पहले चरण के 30 किमी का हिस्सा है। प्रदेश में इंदौर और भोपाल में कुल 60 किमी के काम को पूरा करने का लक्ष्य दिसंबर 2028 तय किया गया है। प्रदूषण मुक्त सफर मेट्रो के शुरू होने से रोजाना हजारों यात्रियों को तेज, सुरक्षित और प्रदूषण-मुक्त यात्रा का विकल्प मिलेगा। हालांकि अभी यात्रियों की संख्या कम है, लेकिन आने वाले समय में मेट्रो की दूरी बढ़ने के साथ उपयोग बढ़ने की बात विशेषज्ञ बता रहे हैं। साथ ही शहर के प्रमुख इलाकों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी, जिससे समय और ईंधन की बचत भी होगी। राज्य सरकार का कहना है कि मेट्रो परियोजना न केवल परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाएगी, बल्कि भोपाल को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने के लक्ष्य को और सुदृढ़ करेगी। मेट्रो कॉरिडोर के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है। इसी तरह इंदौर में मेट्रो संचालन शुरू होने के बाद से शहरवासियों में आधुनिक परिवहन व्यवस्था को लेकर उत्साह देखने को मिला है और अब भोपाल में भी इसी तरह की प्रतिक्रिया की उम्मीद है। अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस अधिकारियों के अनुसार, मेट्रो ट्रेन अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगी। सुरक्षा के लिए ऑटोमैटिक डोर सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी, यात्री सूचना प्रणाली जैसी आधुनिक तकनीक इसमें शामिल हैं। पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा-कुशल प्रणाली अपनाई गई है। आने वाले महीनों में मेट्रो के अन्य चरणों पर भी तेजी से काम किया जाएगा, ताकि पूरे शहर को बेहतर नेटवर्क से जोड़ा जा सके। अभी इन 11 राज्यों में दौड़ती है मेट्रो दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, गुजरात, केरल, राजस्थान, हरियाणा शामिल है। अब भोपाल मेट्रो के व्यावसायिक संचालन की शुरुआत के साथ मध्य प्रदेश 12वां राज्य बन गया। देश के इन शहरों में चल रही मेट्रो     दिल्ली-एनसीआर: देश का सबसे बड़ा मेट्रो नेटवर्क     कोलकाता: भारत की पहली मेट्रो (1984 में शुरू)।     मुंबई: देश के बड़े मेट्रो नेटवर्क में से एक।     बेंगलुरु (नम्मा मेट्रो): दक्षिण भारत का प्रमुख नेटवर्क।     हैदराबाद: आधुनिक मेट्रो प्रणाली के लिए जाना जाता है।     चेन्नई: एक और बड़ा महानगर मेट्रो।     जयपुर: राजस्थान की राजधानी में मेट्रो।     कोच्चि (केरल): दक्षिण भारत का महत्वपूर्ण मेट्रो नेटवर्क।     लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी में मेट्रो।     नोएडा-ग्रेटर नोएडा: दिल्ली से सटा हुआ मेट्रो नेटवर्क।     अहमदाबाद: गुजरात का मेट्रो नेटवर्क।     नागपुर: अपनी डबल-डेकर मेट्रो के लिए प्रसिद्ध।     कानपुर: उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण मेट्रो।     पुणे: महाराष्ट्र का एक और मेट्रो शहर।     गुरुग्राम (रैपिड मेट्रो): दिल्ली मेट्रो से जुड़ा हुआ। यहां चल रहा काम  पटना, आगरा में भी मेट्रो या तो चल रही है या निर्माण के विभिन्न चरणों में है, जिससे भारत का मेट्रो नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है।  

मुख्यमंत्री इंदौर में देंगे मेट्रो को लेकर बड़ी सौगात, मेट्रोपॉलिटन एरिया और अंडरग्राउंड रूट पर होगी चर्चा

  इंदौर  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव आज 14 दिसंबर को रेसीडेंसी कोठी में शहर में चल रहे विकास कार्यों की समीक्षा करेंगे। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य फोकस इंदौर मेट्रो ट्रेन के अंडरग्राउंड रूट पर रहेगा। इंदौर में यह बैठक सरकार के दो साल पूर्ण होने के बाद हो रही है। इस कारण माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री इंदौर को सौगात दे सकते है। बैठक में इंदौर के मेट्रोपाॅलिटन सिटी एरिया की घोषणा हो सकती है। पहले इसका एरिया छह हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में था। बाद में इंदौर विकास प्राधिकरण ने इसका प्रस्ताव 9 हजार वर्गकिलोमीटर एरिया किया है और प्रस्ताव सरकार को भेजा था। इस एरिया में उज्जैन, देवास, महू व धार की पंचायतें, कुछ नगरीय निकाय शामिल होंगे। एरिया की सीमा का खुलासा बैठक के दौरान होगा। मुख्यमंत्री इस बात पर अंतिम फैसला ले सकते हैं कि मेट्रो के रूट में कोई बदलाव किया जाएगा या पुराना रूट ही बरकरार रहेगा। पिछले दिनों मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तय अंडरग्राउंड रुट पर आपत्ति ली थी और मेट्रो को बंगाली काॅलोनी से ही अंडरग्राउंड करने पर जोर दिया था।   मेट्रो के अलावा, बैठक में बीआरटीएस की बस रैलिंग हटाने में हो रही देरी को लेकर भी चर्चा होगी। नौ महीने से अधिक समय तक रैलिंग नहीं हटाए जाने पर हाईकोर्ट ने भी नाराजगी व्यक्त की है। बीआरटीएस पर बनने वाले नए ब्रिजों को लेकर भी फैसला हो सकता है। समीक्षा बैठक में सभी विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहेंगे। आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर शहर में किए जा रहे कार्यों की समीक्षा भी की जाएगी। शहर के मास्टर प्लान की 23 सड़कों पर काम शुरू हो चुका है, लेकिन कुछ सड़कों के मार्ग में अभी भी बाधक निर्माण नहीं हटाए गए हैं।   

रविशंकर प्रसाद का राहुल गांधी पर पलटवार: बोले– ‘मुझसे ही असहज हो जाते हैं’

पटना  संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की ओर से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को लेकर की गई टिप्पणी पर पलटवार करते हुए भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वे मुझे तो झेल नहीं पाते हैं और गृह मंत्री शाह को कैसे झेल सकते हैं। भाजपा सांसद का यह बयान उस वक्त आया, जब राहुल गांधी ने एसआईआर को लेकर टिप्पणी की थी। राहुल गांधी ने कहा था कि मेरे सवालों पर गृह मंत्री नर्वस हो जाते हैं, जवाब नहीं दे पाते हैं। भाजपा सांसद ने पटना में शनिवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि उन्हें झूठ बोलने की आदत हो गई है। उन्होंने कहा कि अभी मैंने संसद में राहुल गांधी को करारा जवाब दिया। वह मेरे जवाब भी नहीं संभाल पा रहे हैं, तो गृह मंत्री अमित शाह को कैसे संभालेंगे? मैंने उनकी हर बात का जवाब दिया। राहुल गांधी द्वारा वोट चोरी का मुद्दा उठाए जाने पर भाजपा सांसद ने कहा कि वे लगातार वोट चोरी का मुद्दा उठा रहे हैं, जबकि जनता कह रही है कि वोट चोरी नहीं हुआ। वे बेवजह का झूठ फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने एक भी शिकायत दर्ज नहीं कराई, और न ही कांग्रेस पार्टी की ओर से शिकायत की गई। एसआईआर को लेकर राहुल गांधी और इंडी अलायंस ने हंगामा किया। वोटर अधिकार यात्रा निकाली गई। जनता को भ्रमित करने का काम किया गया। लेकिन, परिणाम क्या निकला? करारी हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस के खाते में आई पांच सीट। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को झूठ बोलने का यह कैसा अहंकार है। जनता भलीभांति जानती है कि क्या सच है। भाजपा सांसद ने कहा कि अमित शाह ने विस्तार से बताया कि एसआईआर उनके समय में भी होता था। अगर कांग्रेस जीतती है, तो चुनाव आयोग अच्छा है; अगर कांग्रेस हारती है, तो चुनाव आयोग बुरा है। तो, इसका क्या जवाब दिया जा सकता है? जनता उन्हें वोट नहीं देती है और भविष्य में भी नहीं देगी।

नीतीश सरकार का बड़ा प्रशासनिक फैसला: 36 IAS अफसरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, विभागों में बदलाव

पटना  बिहार में नीतीश कुमार सरकार ने एक बार फिर प्रशासनिक मशीनरी को मजबूत करने के लिए बड़े स्तर पर फेरबदल किया है। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने शुक्रवार शाम को 36 भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग की अधिसूचना जारी की। इस लिस्ट में कई महत्वपूर्ण विभागों जैसे कृषि, मत्स्य पालन, सूचना एवं जनसंपर्क, पंचायती राज, स्वास्थ्य और शिक्षा आदि में नए निदेशक और अपर सचिव नियुक्त किए गए हैं। साथ ही उप विकास आयुक्त (DDC) और अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) स्तर पर भी अहम बदलाव किए गए हैं। यह कदम राज्य की विकास योजनाओं को गति देने और कुशल प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया माना जा रहा है।  प्रमुख नियुक्तियां: फल-सब्जी निगम से लेकर स्वास्थ्य समिति तक नए प्रबंध निदेशक वरिष्ठ IAS अधिकारी शीर्षत कपिल अशोक को बिहार राज्य फल एवं सब्जी विकास निगम का प्रबंध निदेशक बनाया गया है। धर्मेंद्र कुमार को सामाजिक सुरक्षा निदेशक, उपेंद्र प्रसाद को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग में अपर सचिव और नवीन कुमार सिंह को पंचायती राज विभाग में निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा डॉ. विद्या नंद सिंह हस्तशिल्प निदेशक बने हैं, सुनील कुमार (क्रमांक-1) को नियोजन एवं प्रशिक्षण निदेशक, आदित्य प्रकाश को पंचायती राज विभाग में अपर सचिव और अमित कुमार पांडेय को राज्य स्वास्थ्य समिति का कार्यपालक निदेशक (साथ ही स्वास्थ्य विभाग में अपर सचिव का अतिरिक्त प्रभार) नियुक्त किया गया है। अन्य महत्वपूर्ण विभागों में नए चेहरे: सूचना एवं जनसंपर्क से कृषि तक श्याम बिहारी मीणा को बिहार राज्य योजना परिषद में अपर सचिव बनाया गया। सुनील कुमार बिहार राज्य खाद्य एवं असैनिक आपूर्ति निगम के प्रबंध निदेशक बने हैं। सुहर्ष भगत को भू-अभिलेख एवं परिमाप निदेशक, अमन समीर को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग निदेशक और मनेश कुमार मीणा को खान निदेशक की कमान सौंपी गई है। तुषार सिंगला मत्स्य निदेशक बने हैं, विजय कुमार शिक्षा विभाग में अपर सचिव, मनोज कुमार रजक नगर विकास एवं आवास विभाग में अपर सचिव, धनंजय कुमार स्वास्थ्य विभाग में अपर सचिव और आरिफ अहसन राज्य परिवहन आयुक्त नियुक्त हुए हैं।  अनिल कुमार को सूचना एवं जनसंपर्क विभाग का निदेशक (साथ ही बिहार राज्य संवाद समिति के प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त प्रभार) बनाया गया है। कुमार अनुराग बिहार राज्य भवन निर्माण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक बने हैं। सुमित कुमार को बिहार एड्स नियंत्रण सोसाइटी का परियोजना निदेशक, सौरभ सुमन यादव को कृषि निदेशक, नवीन कुमार को बिहार शिक्षा परियोजना परिषद का परियोजना निदेशक, यतेन्द्र कुमार पाल को बिहार राज्य पाठ्य पुस्तक प्रकाशन निगम का प्रबंध निदेशक, विक्रम विरकर को प्राथमिक शिक्षा निदेशक और प्रियंका रानी को अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण निदेशक बनाया गया है। DDC और SDO स्तर पर बदलाव: जिलों में नए चेहरे तैनात उप विकास आयुक्त के पदों पर आकाश चौधरी को बेगूसराय, नीलिमा साहू को नवादा और निहारिका छवि को बक्सर नियुक्त किया गया है। अनुमंडल पदाधिकारी के रूप में निशांत सिहारा को मोतिहारी सदर (पूर्वी चंपारण), प्रधुम्न सिंह यादव को कटिहार, अंजली शर्मा को अरेराज (पूर्वी चंपारण), शिप्रा विजयकुमार चौधरी को आरा सदर (भोजपुर), डॉ. नेहा कुमारी को सासाराम (रोहतास) और कृष्ण चंद्र गुप्ता को कहलगांव (भागलपुर) की जिम्मेदारी दी गई है। यह व्यापक फेरबदल राज्य में विकास कार्यों को नई गति देने और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने का संकेत देता है। आने वाले दिनों में और बदलाव की संभावना बनी हुई है।