samacharsecretary.com

बरसात में मछलियों के प्रजनन को बचाने के लिए 15 अगस्त तक नहीं होगी मछली पकड़ने की अनुमति

जगदलपुर. मछलियों के संरक्षण और प्रजनन को बढ़ावा देने के लिए 16 जून से 15 अगस्त तक मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया है. बरसात का मौसम मछलियों के प्रजनन का सबसे महत्वपूर्ण समय माना जाता है. इसी को ध्यान में रखते हुए नदी और नालों में मछली शिकार पर रोक लगाई गई है. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है. दोषी पाए जाने पर कारावास और आर्थिक दंड दोनों हो सकते हैं. हालांकि केज कल्चर गतिविधियों को छूट दी गई है. दूसरे राज्यों से मछली आयात और बिक्री पर कोई प्रतिबंध नहीं रहेगा. व्यापारियों को आयात से जुड़े दस्तावेज साथ रखना अनिवार्य होगा. बरसात में बड़ी संख्या में ग्रामीण मछली पकड़कर आय अर्जित करते हैं. इसी कारण प्रतिबंध अवधि में निगरानी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है. मत्स्य विभाग ने नियमों का पालन सुनिश्चित करने की अपील की है. उद्देश्य आने वाले वर्षों के लिए मत्स्य संसाधनों का संरक्षण करना है.

रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी

बुनियादी ढांचे, स्वास्थ्य सेवाएं और जन-कल्याण के लिए 24 हजार 200 करोड़ रूपये की स्वीकृति मध्यप्रदेश (परोपकारी संस्थाओं के लिए) मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति के प्रस्ताव पर उप समिति गठित रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स माध्यम से संचालित किए जाने के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2,381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति श्रमिक कल्याण संबंधी योजनाओं के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति जनजातीय विद्यार्थियों को शैक्षणिक सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रूपये की स्वीकृति रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए 639 करोड़ 25 लाख रूपये की स्वीकृति स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन और विभागीय परिसंपत्तियों के संधारण के लिए 492 करोड़ 45 लाख रूपये की स्वीकृति मुख्यमंत्री डॉ. यादव की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक में लिए गए निर्णय भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रि-परिषद की बैठक मंत्रालय में हुई। बैठक में मध्यप्रदेश के बुनियादी ढांचे और जन-कल्याण को बड़ी रफ्तार देते हुए कुल 24,200 करोड़ रुपये के प्रस्तावों को मंजूरी दी गई है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण सहित कुल 19,472 करोड़ 29 लाख रुपये का पुनरीक्षित बजट स्वीकृत किया गया। राज्य में विश्वस्तरीय सुपर-स्पेशियलिटी चिकित्सा सुविधाओं को बढ़ाने और परोपकारी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए 'मेगा स्वास्थ्य सेवा अधोसंरचना प्रोत्साहन नीति 2026 लागू करने के प्रस्ताव पर मंत्रि-परिषद ने 5 सदस्यीय मंत्रि-मण्डल उप समिति का गठन किया है। समिति सभी संबंधित पहलुओं का अध्ययन कर रिपोर्ट देगी। मंत्रि-परिषद ने ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए रीवा, देवास और गुना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को आउटसोर्स मॉडल पर चलाने का पायलट प्रोजेक्ट भी मंजूर किया गया। वन्य-प्राणी संरक्षण और संवेदनशील क्षेत्रों के 94 गांवों के विस्थापन व मुआवजे के लिए 16वें वित्त आयोग की अवधि 2026-2031 के तहत 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रुपये आवंटित किए हैं। सामाजिक और आर्थिक समावेशन को बढ़ावा देते हुए जनजातीय विद्यार्थियों की शैक्षणिक व आवासीय सुविधाओं के लिए 687 करोड़ रुपये और स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के उद्देश्य से रेशम उत्पादन की विभिन्न योजनाओं के लिए 639 करोड़ 25 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। मंत्रि-परिषद द्वारा श्रम कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन,औद्योगिक सुरक्षा और श्रमिक कल्याण योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रुपये तथा स्थानीय निकायों के वित्तीय प्रबंधन व ऑडिट व्यवस्था को दुरुस्त रखने के लिए स्थानीय निधि संपरीक्षा के संचालन के लिए 492 करोड़ 45 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यह सभी निर्णय आगामी पांच वर्षों में मध्यप्रदेश के समग्र, समावेशी और सतत विकास को सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ी पहल है। इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की पुनरीक्षित लागत और अतिरिक्त वित्त पोषण के लिए 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने इंदौर मेट्रो रेल परियोजना की मूल लागत 7 हजार 500.80करोड़रूपये में 5 हजार 388.58 करोड़ रूपये की अतिरिक्त लागत जोड़कर पुनरीक्षित लागत 12 हजार 889.38 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की है। इसके अतिरिक्त उ‌द्योग के स्वीकृत मानदंडों के अनुसार परियोजना के लिए अतिरिक्त वित्त पोषण पीपीपी घटक एवं आंतरिक ऋण के प्रभाव को सम्मिलित करते हुए 6 हजार 582.91 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस तरह कुल 19 हजार 472 करोड़ 29 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। अतिरिक्त वित्त पोषण में भारत शासन और मध्यप्रदेश शासन द्वारा 1,696 करोड़ 74 लाख रूपये की अतिरिक्त इक्विटी और केन्द्रीय करों के लिए 214 करोड़ 64 लाख रूपये का अतिरिक्त अधीनस्थ ऋण, वित्त पोषण एजेंसी बैंकों से ऋण निधि के विरुद्ध 3,496 करोड़ 15 लाख रूपये का अतिरिक्त पीटीए/आंतरिक ऋण, मध्यप्रदेश शासन से राज्य करों के लिए 656 करोड़ 96 लाख रूपये एवं आईडीसीकी लागत के लिए 518 करोड़ 42 लाख रूपये का अतिरिक्त ऋण शामिल है। प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास संबंधी मुआवजा के लिए 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वन विभाग के अंतर्गत प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट और ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के सोलहवें केन्द्रीय वित आयोग की अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए कुल 2 हजार 381 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। स्वीकृति अनुसार प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (नॉन-रिकरिंग), प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (रिकरिंग) और प्रोजेक्ट टाइगर एण्ड एलिफेंट (प्रोजेक्ट एलिफेंट) के लिए एक हजार 131 करोड़ 15 लाख रूपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इन तीनों योजनाओं से वन्यप्राणी संरक्षण के वैज्ञानिक सिद्धान्तों के आधार पर बनाई गई प्रबंध योजना का क्रियान्वयन किया जाना है, जिसमें मुख्यतः प्रदेश के टाइगर रिजर्व, कूनो राष्ट्रीय उद्यान तथा गांधीसागर अभयारण्य में वन एवं वन्य-प्राणी सुरक्षा के लिए हैबीटेट सुधार, अग्नि एवं वन सुरक्षा, जल स्त्रोतों का विकास, वन मार्गो का रखरखाव आवश्यक संरचनाओं का निर्माण एवं उनका रखरखाव, हाथियों का प्रबंधन एवं सुरक्षा कार्य, रेस्क्यू सामग्री क्रय, कैम्प निर्माण, दवाईयां क्रय एवं हाथियों के लिए भोजन व्यवस्था आदि कार्य किए जायेंगे। ग्रामों के पुनर्वास के लिए मुआवजा सम्बंधी योजना के लिए एक हजार 250 करोड़ रूपये की स्वीकृति दी गई है। योजना का मुख्य उद्देश्य संरक्षित वन क्षेत्रों में वन्य-प्राणियों के संवेदनशील आवास स्थलों को एवं वन्य-प्राणियों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित कर रहे ग्रामों को संरक्षित वन क्षेत्र के बाहर पुनर्वसित करना है। इसमें ग्रामीणों के अचल सम्पत्ति का विधि अनुसार अधिग्रहण कर निर्धारित मुआवजा का भुगतान किया जाता है। योजना का क्रियान्वयन संजय टाइगर रिजर्व, सतपुडा टाइगर रिजर्व, पन्ना टाइगर रिजर्व, वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, रातापानी टाइगर रिजर्व, ओरछा अभयारण्य और कूनो राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत 94 ग्रामों में किया जायेगा। श्रमिक कल्याण से संबंधित योजनाओं के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा श्रमिक कल्याण से संबंधित श्रम विभाग अंतर्गत विभिन्न योजनाओं के एक अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक कुल 5 वर्षों तक संचालन के लिए 531 करोड़ 78 लाख रूपये की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार श्रम आयुक्त कार्यालय के संचालन के लिए 57 करोड़ 48 … Read more

जासूसी एंगल की जांच तेज, यूपी के कई शहरों की तस्वीरें पाकिस्तान भेजने का आरोप; धार से गिरफ्तारी

भोपाल  मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बाद एमपी एटीएस ने धार जिले से एक और संदिग्ध आतंकी को गिरफ्तार किया है। संदिग्ध की पहचान हाजी अजहर के रूप में हुई है। इससे पहले एटीएस ने भोपाल से मोहम्मद फराज को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान टीम को कई अहम सुराग मिले हैं। अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तारी हो चुकी है। टीम ने इससे पहले नईम अब्दुल्ला को पकड़ा था। उसकी निशानदेही पर हरियाणा के नूंह से एक संदिग्ध को पूछताछ के लिए भोपाल लाया गया है। मोहम्मद फराज और नईम अब्दुल्ला से पूछताछ हो रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों की निशानदेही पर हुई कार्रवाई में जांच एजेंसी को कई अहम डिजिटल इनपुट मिले हैं। पाकिस्तान के नंबर पर होती थी बात सूत्रों के अनुसार में इस बात का खुलासा हुआ है कि संदिग्धों के मोबाइल फोन पर पाकिस्तान के नंबर मिले हैं। जांच के दौरान यह पाया गया है कि संदिग्ध पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नंबरों से बात करते थे। फिलहाल जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश में है कि यह लोग किस नेटवर्क के संपर्क ने और क्या काम करते थे। भोपाल से गिरफ्तार संदिग्ध मोहम्मद फराज के मोबाइल की डिजिटल सबूत मिले हैं। इस सबूतों से साफ होता है कि वह विदेशी नेटवर्क के संपर्क में था और बातचीत के लिए एक स्पेशल ऐप का इस्तेमाल करता था। मामले का खुलासा होने के बाद जांच एजेंसी मोहम्मद फराज के चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। यूपी के शहरों की भेजी गई तस्वीरें सूत्रों के अनुसार जांच में यह बात सामने आई है कि नईम अब्दुल्ला ने उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों की तस्वीरें और वीडियो पाकिस्तान भेज हैं। फराज के मोबाइल फोन की डिजिटल जांच में ऐसे सबूत मिले हैं।     MP में ATS की बड़ी कार्रवाई     धार से एक संदिग्ध को किया गिरफ्तार     भोपाल से मोहम्मद फराज की हुई थी गिरफ्तारी     जांच में खुलासा, यूपी के कई शहर की भेजी गई फोटो आर्थिक लेनदेन की जांच जांच एजेंसी गिरफ्तार सभी संदिग्धों के आर्थिक लेन देन की जांच भी कर रही है। फिलहाल इसको लेकर कोई जानकारी सामने नहीं आई है। टीम ने पूरे मामले की जांच तेज कर दी है।

लखनऊ मेट्रो सेकंड फेज शुरू, पीजीआई से बाराबंकी तक पहुंचेगा नेटवर्क, 40 लाख लोगों को फायदा

लखनऊ  लखनऊ मेट्रो का महाविस्तार होने जा रहा है। मेट्रो के सेकंड फेज के लिए काम शुरू हो गया है। टेंडर होने के बाद जुलाई से निर्माण कार्य शुरू करने की योजना है। बताया जा रहा है कि लखनऊ में मेट्रो का नेटवर्क रेलवे से भी बड़ा हो जाएगा इसमें शहर के आसपास के इलाकों को भी कवर किया जाएगा। आगे के चरणों में पीजीआई, बख्शी का तालाब, बाराबंकी तक मेट्रो की सुविधा मिलेगी। इसके तहत 150 किमी का नया मेट्रो ट्रैक बिछाया जाएगा। दस नए कॉरिडोर बनेंगे। मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार के लिए मंजूरी इसमें शहर में तकरीबन दस नए मेट्रो कॉरिडोर विकसित किए जाएंगे। इस रिपोर्ट को शासन को भेजी गई थी। सरकार ने मेट्रो कॉरिडोर के विस्तार के लिए मंजूरी भी दे दी है। अब मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन की ओर से विस्तृत कार्ययोजना (डीपीआर) बनाई जा रही है। इस मामले निगरानी मुख्य सचिव के जरिये खुद मुख्यमंत्री कर रहे हैं। 35 से 40 लाख की आबादी को लाभ मिलेगा सूत्र बताते हैं कि अयोध्या रोड पर बाराबंकी तक, सीतापुर रोड पर इटौंजा तक, कानपुर रोड पर उन्नाव तक, हरदोई रोड पर संडीला तक के अतिरिक्त इसका पीजीआई और मोहनलालगंज तक विस्तार किया जाएगा। एयरपोर्ट से मुंशी पुलिया वाली मेट्रो लाइन को आगे तक बढ़ाया जाएगा। अनुमान के मुताबिक मेट्रो विस्तार होने से लखनऊ की 35 से 40 लाख की आबादी को इसका लाभ मिलेगा। करीब 10 वर्ष में पूरा होगा प्रोजेक्ट प्राप्त जानकारी के अनुसार बाराबंकी, संडीला, उन्नाव, इटौंजा, मोहनलालगंज तक कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी। प्रोजेक्ट करीब 10 वर्ष में पूरा होगा। इस पर करीब 30 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मेट्रो का विस्तार 150 किलोमीटर तक होने जा रहा है। मेट्रो की ओर से कराए गए सर्वे के आधार पर नेटवर्क विस्तार का प्रस्ताव तैयार किया गया है।     मेट्रो प्रशासन की ओर से तैयार कराए जा रहे डीपीआर में सभी मेट्रो स्टेशनों पर पार्किंग सुविधाओं को विकसित किया जाएगा।     यहां ई साइकिल, ई-बाइक जैसी ई-व्हीकल सेवाएं भी यात्रियों को मिलेंगी।     पीजीआई, मोहनलालगंज, गोसाईंगंज, बंथरा, राजाजीपुरम, काकोरी, दुबग्गा, मलिहाबाद, रहीमाबाद, कमता, चिनहट, मटियारी, बीबीडी, तिवारीगंज, सफेदाबाद, मड़ियांव, केशवनगर, आईआईएम, बृज की रसोई, बख्शी का तालाब, इटौंजा, जानकीपुरम आदि इलाकों को कवर करने की योजना है।

कोर्ट केस और नोटिस के बाद आगरा प्रशासन ने मजार शिफ्टिंग का लिया फैसला

आगरा आगरा पुलिस प्रशासन ने एमजी रोड पर आगरा कॉलेज के सामने बीच सड़क स्थित विवादित मजार को हटाने की बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. यातायात बाधित होने और हादसों की आशंका के कारण इस मजार को हटाने की मांग लंबे समय से हो रही थी. प्रशासन और संबंधित पक्षों के बीच कई दौर की चर्चा के बाद सहमति बनी, जिसके तहत अब कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच पुलिस बल की निगरानी में मजार को शिफ्ट किया जा रहा है. इस दौरान सुरक्षा के मद्देनजर एमजी रोड के इस रास्ते को रोक दिया गया है. हिंदूवादी नेता ने दायर किया था कोर्ट में वाद इस मजार को लेकर लंबे समय से कानूनी विवाद भी चल रहा था. हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से दोनों मजारों के ध्वस्तीकरण की मांग को लेकर अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन) की अदालत में वाद दायर किया था. वादी का आरोप था कि यह मजार और दरगाह सरकारी भूमि पर बनी हैं. अधिकारियों को जारी हुआ था समन इससे पहले कुंवर अजय तोमर ने 19 जनवरी 2026 को धारा 80 सीपीसी के तहत नोटिस भेजकर कार्रवाई की मांग की थी. अधिकारियों द्वारा समय सीमा में जवाब न देने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया. इसके बाद न्यायाधीश श्वेत्शा चंद्रा की अदालत ने वाद स्वीकार करते हुए आगरा के जिलाधिकारी, नगर आयुक्त और पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता को समन जारी किए थे. आखिरकार अब सहमति से शिफ्टिंग की कार्रवाई की जा रही है. पक्षकार का बयान योगी यूथ ब्रिगेड के प्रदेश अध्यक्ष और ताजमहल-तेजोमहालय केस के पक्षकार हिंदूवादी नेता कुंवर अजय तोमर लगातार इसके लिए लड़ रहे थे. कुंवर अजय तोमर ने मजार के ध्वस्तीकरण के लिए 19 जनवरी 2026 को आगरा नगर निगम के नगर आयुक्त, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता और डीएम को धारा 80 सीपीसी का नोटिस भेजा था जिस पर अधिकारियों ने ना कोई संज्ञान लिया और ना कोई कार्रवाई की थी, जिसके बाद उन्होंने 10 अप्रैल 2026 को अपर सिविल जज सीनियर डिवीजन कोर्ट में वाद दाखिल किया था. जिसमें अभी अगले महीने 21 जुलाई को सुनवाई भी होनी है लेकिन उससे पहले ही अब प्रशासन ने मजार पर कार्रवाई कर दी है. यह मामला डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य तक भी पहुंचा था और उन्होंने भी अधिकारियों को कार्रवाई के आदेश दिए थे. वहीं, कुंवर अजय तोमर ने पूरी कार्रवाई पर प्रशासन का आभार जताया है और इस कार्रवाई को अपनी बड़ी जीत बताया है उन्होंने कहा कि यह आगरा वासियों के लिए  राहत भरी खबर है इससे कहीं ना कहीं अब जाम की समस्या से राहत मिलेगी, यातायात बाधित नहीं होगा. तोमर ने कहा कि हमारी लड़ाई यही नहीं रुकेगी सामने नागरी प्रचारिणी के बराबर में बनीं दरगाह का भी आधा हिस्सा अवैध है उस पर भी ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी चाहिए. अजय तोमर का कहना है कि कोर्ट में हमने जो वाद दाखिल किया है उसमें एमजी रोड वाली मजार और सामने बनी दरगाह दोनों शामिल है. बता दें कि कुंवर अजय तोमर ने इसके अलावा 27 मस्जिदों मजारों और दरगाहों पर कार्रवाई के लिए एक और धारा 80 सीपीसी का नोटिस नगर निगम के नगर आयुक्त, पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता, आगरा के डीएम और छावनी परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को भेजा है.

सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ रहे राजस्थान के लाखों असंगठित श्रमिक

जयपुर किसी भी देश या प्रदेश के विकास की यात्रा तभी सार्थक होती है, जब समाज के अंतिम व्यक्ति तक उसके हक और योजनाओं की पहुंच हो। अंत्योदय के इसी संकल्प को साकार करने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इसी क्रम में ‘ई-श्रम पोर्टल’ एक ऐतिहासिक पहल के रूप में उभरा है। इस पोर्टल के जरिए ना केवल श्रमिकों का एकीकृत राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, बल्कि यूनिवर्सल अकाउंट नंबर के जरिए उन तक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। हमारे देश की अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्यों, कृषि, घरेलू सेवाओं, रेहड़ी-पटरी व्यवसाय, परिवहन, वस्त्र उद्योग के साथ ही गिग वर्कर्स अपनी मेहनत से देश की प्रगति में योगदान दे रहे हैं। इन असंगठित श्रमिकों की कोई समग्र और प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध नहीं होने से उन तक योजनाओं का लाभ प्रभावी रूप से पहुंचाना चुनौतीपूर्ण होता है। इसी को देखते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 26 अगस्त 2021 को ई-श्रम पोर्टल की शुरुआत की गई। ई-श्रम पोर्टल के प्रति राजस्थान के श्रमिकों में बढ़ती जागरुकता मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान भी इस महत्वपूर्ण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभा रहा है। राज्य में ई-श्रम पोर्टल के प्रति श्रमिकों की बढ़ती जागरुकता के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। अब तक राजस्थान में 1 करोड़ 54 लाख 50 हजार 294 श्रमिक ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 82 लाख 40 हजार 291 महिलाएं और 72 लाख 9 हजार 896 पुरुष श्रमिक शामिल हैं। यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि महिलाओं की भागीदारी 53.33 प्रतिशत है, जो आर्थिक और सामाजिक क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती सक्रियता का परिचायक है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था के आधार कृषि क्षेत्र में सर्वाधिक पंजीकरण राजस्थान में पंजीकृत श्रमिकों के क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो कृषि क्षेत्र सबसे आगे है। राज्य में 85 लाख 99 हजार 316 कृषि श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि की केंद्रीय भूमिका को दर्शाता है। इसके बाद निर्माण क्षेत्र के 24 लाख 29 हजार 179 तथा वस्त्र एवं परिधान उद्योग के 8 लाख 2 हजार 650 श्रमिक पंजीकृत हुए हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि ई-श्रम पोर्टल ने विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को एक साझा मंच पर लाने में सफलता प्राप्त की है। पंजीकरण के विभिन्न माध्यमों का विश्लेषण करें तो स्वयं पंजीकरण की प्रक्रिया को श्रमिकों ने व्यापक रूप से अपनाया है। राज्य में 1 करोड़ 2 लाख 27 हजार 852 श्रमिकों ने स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कराया है। इसके अतिरिक्त कॉमन सर्विस सेंटर्स के माध्यम से 51 लाख 62 हजार 175 श्रमिकों का पंजीकरण हुआ है। राज्य सेवा केंद्रों, उमंग प्लेटफॉर्म तथा अन्य माध्यमों से भी हजारों श्रमिक इस अभियान से जुड़े हैं। यह दर्शाता है कि सरकार ने श्रमिकों तक पहुंच बनाने के प्रभावी प्रयास किए हैं। वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ से एक क्लिक दूर योजनाएं ई-श्रम पोर्टल पर 21 अक्टूबर 2024 को ‘वन-स्टॉप-सॉल्यूशन’ की शुरुआत की गई, जिसके माध्यम से विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं को एकीकृत किया गया। इस व्यवस्था ने श्रमिकों के लिए योजनाओं की जानकारी प्राप्त करना और लाभ उठाने को पहले की तुलना में कहीं अधिक सरल बना दिया है। अब पंजीकृत श्रमिक एक क्लिक पर प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन योजना, व्यापारियों एवं स्व-रोजगार व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना, अटल पेंशन योजना, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम-वृद्धावस्था सुरक्षा, आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना, बुनकर स्वास्थ्य बीमा योजना, प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना तथा सफाई कर्मचारियों-हाथ से मैला ढोने वाले व्यक्तियों के पुनर्वास संबंधी योजनाओं जैसी अनेक सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जुड़ सकते हैं। इसके साथ ही ई-श्रम पोर्टल रोजगार, कौशल विकास और स्वरोजगार के अवसरों को भी बढ़ावा दे रहा है। दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना, गरीब कल्याण रोजगार योजना, दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय योजना, प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना, प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम जैसी योजनाओं को पोर्टल से जोड़कर श्रमिकों के लिए रोजगार और आजीविका के नए द्वार खोले गए हैं। इससे ना केवल रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि श्रमिक आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं। सरल और सुलभ पंजीकरण प्रक्रिया से बढ़ी सक्रियता ई-श्रम पोर्टल की एक बड़ी विशेषता इसकी सरल और सुलभ पंजीकरण प्रक्रिया है। 16 से 59 वर्ष आयु वर्ग का कोई भी असंगठित श्रमिक (जो ईपीएफओ, ईएसआईसी या सरकारी वित्त पोषित राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली का सदस्य नहीं हो) इस पोर्टल पर पंजीकरण कर सकता है। श्रमिक अपने आधार और मोबाइल नंबर के माध्यम से स्वयं ऑनलाइन पंजीकरण कर सकते हैं। इसके अलावा नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर या राज्य सेवा केंद्र में भी निःशुल्क पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है। उमंग ऐप और पोर्टल के माध्यम से भी श्रमिक अपनी प्रोफाइल को विभिन्न योजनाओं से जोड़कर लाभ प्राप्त कर सकते हैं। राजस्थान सहित पूरे देश में ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से असंगठित श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का नया अध्याय लिखा जा रहा है। वर्तमान समय में ई-श्रम पोर्टल असंगठित श्रमिकों के लिए केवल एक डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। यह श्रमिकों को पेंशन, बीमा, स्वास्थ्य, आवास, खाद्य सुरक्षा, कौशल विकास और रोजगार जैसी आवश्यक सुविधाओं से जोड़ने वाला एकीकृत मंच है। साथ ही, सरकार को भी लक्षित लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पारदर्शी और प्रभावी तरीके से पहुंचाने में सहायता मिल रही है। यह पहल ना केवल श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि विकसित भारत एवं विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प को पूरा करने में उनकी भागीदारी को भी सुनिश्चित कर रही है।

कलमा पढ़ाने के बहाने साजिश? एयरफोर्स अफसर की पत्नी ने लगाए रेप और ब्लैकमेलिंग के आरोप

छिंदवाड़ा   मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा के एक मौलाना का बड़ा कांड सामने आया है। यहां आरोप मौलाना ने एक एयरफोर्स अफसर की पत्नी को जबरन कलमा पढ़ाया और दोस्तों के से पीड़िता को ब्लैकमेल करके दुष्कर्म करवाया। आरोप है कि मौलाना और उसके साथियों ने महिला की आपत्तिजनक तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर लगभग सवा तीन लाख रुपए ऐंठे हैं। फिलहाल छिंदवाड़ा का रहने वाला आरोपी मौलाना पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उसके दो सहयोगी गिरफ्तार हो चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, पीड़िता महाराष्ट्र के नागपुर में भारतीय वायु सेना के एक अधिकारी की पत्नी है। उसने पुलिस में दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग, जबरन वसूली और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने की शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस के अनुसार, 24 वर्षीय पीड़िता नागपुर में प्रॉपर्टी डीलिंग का काम करती है। पति नौकरी के कारण अकसर दूसरे शहर में रहते थे। फरवरी 2025 में पीड़िता के पुराने सहपाठी अयाज ताज मदारे ने जमीन खरीदने की इच्छा जताई और बात करने के लिए वर्धा रोड स्थित एक होटल में बुलाया। पीड़िता का आरोप है कि होटल में बातचीत के दौरान आरोपी ने उसे कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। जिसके बाद वह बेहोश हो गई। पीड़िता का आरोप है कि इसी दौरान आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और आपत्तिजनक फोटो व वीडियो बना लिए। जब पीड़िता को होश आया तो उसे अपने साथ हुई हैवानियत की जानकारी लगी। उसका आरोप है कि आरोपी यही नहीं रूका उसने बाद में उसकी वीडियो और तस्वीरों को सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर उसे लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। शुरू हुआ ब्लैकमेलिंग का सिलसिला पीड़िता के मुताबिक, आरोपी कई महीनों तक उसे ब्लैकमेल करता रहा। वीडियो और तस्वीरें वायरल करने की धमकी देकर उसने उससे कई बार पैसे लिए। थोड़े थोड़े करके आरोपी ने उससे लगभग 3 लाख 9 हजार रुपये वसूले गए। हद तो तब हो गई जब मई 2025 में आरोपी ने महिला को नागपुर के समीप कलमेश्वर क्षेत्र बुलाया। वहां उसकी मुलाकात अमीन शेख और छिंदवाड़ा के रहने वाले एक मौलाना से करवाई। तीनों ने मिलकर उससे कलमा पढ़वाया गया और धर्म परिवर्तन का दवाब बनाया। इस दौरान कई तंत्र-मंत्र जैसी गतिविधियां कराई गईं। महिला का आरोप है कि उसकी यह सब उसकी इच्छा के विरुद्ध किया गया और उसे मानसिक रूप से डराने का प्रयास किया गया।  

मुंडेश्वरी धाम के विकास को गति, कैमूर-रोहतास के बीच बनेगा एयरपोर्ट, जल्द शुरू होगा रोप-वे

भभुआ. जिले के भगवानपुर प्रखंड में स्थित सबसे प्राचीन माता मुंडेश्वरी धाम परिसर में मंगलवार को आयोजित सभा को संबोधित करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कई महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि शीघ्र ही रोहतास व कैमूर के बीच जमीन चिह्नित कर एयरपोर्ट बनवाया जाएगा। इसके लिए मैंने पदाधिकारियों को निर्देश दे दिया है। उन्होंने कहा कि माता मुंडेश्वरी मंदिर को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई कार्य होंगे। यहां लंबित रोप-वे निर्माण का कार्य बरसात के बाद शुरू होगा। मैं अगली बार आऊंगा तो रोप-वे का शिलान्यास करूंगा। हेलीकॉप्टर की सेवा भी मिलेगी उन्होंने कहा कि इसके अलावा मां ताराचंडी, तुतला भवानी, गुप्ता धाम आदि धार्मिक स्थलों को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए यहां हेलीकॉप्टर की सुविधा शुरू होगी। कैमूर जिले को टूरिस्ट हब के रूप में विकसित करने के लिए पूरा प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसा पहाड़ का दृश्य विश्व में शायद ही कहीं देखने को मिले। मां मुंडेश्वरी धाम परिसर में स्थित धर्मशाला का भी जीर्णोद्धार किया जाएगा, ताकि यहां आने वाले श्रद्धालुओं को लाभ मिले। सभी प्रखंडों में खुलेंगे मॉडल स्कूल उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बिहार में दो साल के अंदर सभी प्रखंडों में मॉडल स्कूल खोलेगी। जिसमें सभी तरह की शैक्षणिक व्यवस्था होगी। यहां के बच्चे नीट, जेईई, आईआईटी की तैयारी करने बाहर नहीं जाएंगे। मॉडल स्कूलों में पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों के बच्चे भी पढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि जब पदाधिकारी व जनप्रतिनिधियों के बच्चे मॉडल स्कूल में पढ़ेंगे तब लगेगा कि बिहार का विकास हो रहा है। कैमूर के बच्चे वाराणसी के बीएचयू में पढ़ने जाते हैं। हमने पदाधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि बिहार की धरती पर बीएचयू की शाखा खोली जाए। इसके लिए भी काम जल्द शुरू होगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सबकी समस्याओं के समाधान के लिए कार्य कर रही है। सहयोग शिविर के एक माह होने वाले हैं। जिसमें तीन लाख 36 हजार 78 आवेदन आए, जिसमें दो लाख 61628 आवेदनों का निष्पादन कर दिया गया है, जो 90 प्रतिशत है। उन्होंने कहा कि जो पदाधिकारी दस दिन में कोई आदेश नहीं करता, उसे 11वें दिन नोटिस दिया जाता है। इसके बाद फिर 20 दिन तक आदेश नहीं देने पर 21वें दिन नोटिस दिया जाता है, फिर 25 दिन तक आदेश नहीं करने पर 26वें दिन नोटिस दिया जाती है और यदि पदाधिकारी 30 दिन तक कोई ओदश नहीं करते हैं तो वे 31वें दिन स्वत: निलंबित (सस्पेंड) हो जाएंगे। सीएम ने कहा कि हमारी सरकारी जनता से संवाद यानी जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना चाहती है, ताकि बिहार की जनता कोई परेशानी न झेले। 'अपराधी या तो बिहार छोड़ दें…' उन्होंने कहा कि बिहार को अपराध मुक्त बनाना है। इसके लिए अपराधी या तो बिहार छोड़ दें या अपराध छोड़ दें। यदि अपराधी पकड़े जाते हैं तो पहले उनसे कहा जाएगा कि वे अपराध छोड़ दें, और यदि इसके बाद भी वे नहीं मानते हैं और अपराध करते हैं तो 48 घंटा के अंदर उन्हें अपराध की श्रेणी की तरह ही जवाब दिया जाएगा। सीएम ने कहा कि बिहार में बिजली महंगे दर पर खरीदी जाती थी, लेकिन अब बिहार में थर्मल पावर है। यहां जब झारखंड से बिहार अलग हुआ था तब आबादी लगभग 6 करोड़ थी, और अब लगभग 14 करोड़ है। बिहार की आबादी बढ़ने के साथ ही संरचना को भी बढ़ाया गया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हम गांव-गांव बिजली पहुंचाएंगे तब तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, हम घर-घर बिजली पहुंचाएंगे। अब हमारी सरकारी 25 लाख बीपीएल लोगों के घरों की छत पर सोलर प्लेट लगाएगी। इससे आगामी 25 वर्ष तक बिजली बिल से मुक्ति और 125 यूनिट से अधिक बिजली उत्पादन पर सरकार पैसा देगी।

एक ही पेड़ पर बौर, कच्चे और पके आम एक साथ, हैरान कर रही वैरायटी

सहारनपुर  मीठे-मीठे आमों का सीजन चल रहा है और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सहारनपुर जिला पूरे देश में आम की बेहतरीन किस्मों के लिए मशहूर है। इस बार यहां आम की एक ऐसी अनोखी वैरायटी हुई है, जो हर तरफ चर्चा में है। आमतौर पर आम के पेड़ पर साल में एक बार बौर आती है और फिर निश्चित समय पर फल तैयार होते हैं। लेकिन, इस वैरायटी की खासियत यह है कि ये केवल मौसम विशेष तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे साल फल देने की क्षमता रखता है। आम की इस दुर्लभ किस्म को 'सदाबहार' नाम दिया गया है। सदाबहार 'आम' के पेड़ की सबसे खास बात यह है कि इसके ऊपर एक साथ बौर, छोटे फल और पकने के लिए तैयार आम दिखाई देते हैं। यानी पेड़ पर हर समय किसी न किसी अवस्था में फल मौजूद रहता है। यही वजह है कि इसे देखने के लिए दूर-दराज के इलाकों से लोग सहारनपुर पहुंच रहे हैं। खासकर वो लोग, जिन्होंने आम के बड़े-बड़े बाग लगा रखे हैं। नई बोर के साथ छोटे फल और पके फल आम की अनोखी किस्म को संरक्षित और विकसित करने का काम कर रहे किसान राजेंद्र अटल बताते हैं कि उनके पास कई दुर्लभ और विशेष पौधों का संरक्षण किया जा रहा है। सदाबहार आम का यह पेड़ अब अपने तीसरे साल में प्रवेश कर चुका है और लगातार बेहतर फल दे रहा है। पिछले साल भी इस पेड़ ने सालभर फल दिए थे और इस समय भी नई बौर के साथ छोटे और पकने के लिए तैयार फल एक साथ मौजूद हैं। दूसरे आम से कितना अलग है सदाबहार राजेंद्र अटल बताते हैं कि इस किस्म की एक और विशेषता इसका आकार है। अन्य आम के पेड़ों के मुकाबले यह छोटा रहता है, जिससे इसकी देखभाल और फल तोड़ने का काम आसान हो जाता है। साइज में छोटा होने के बावजूद इसकी उत्पादकता काफी अच्छी मानी जाती है। ये आम बेहद मीठे और खुशबूदार होते हैं। यही कारण है कि एक बार इसका स्वाद चखने वाले लोग इसकी तारीफ किए बिना नहीं रहते। जैविक तरीके से उगाया जाता है सदाबहार आम एक और खास बात यह भी है कि इस वैरायटी की खेती पूरी तरह जैविक तरीके से की जा रही है। राजेंद्र अटल बताते हैं कि इसके उत्पादन में किसी प्रकार की रासायनिक खाद या केमिकल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। प्राकृतिक तरीकों से तैयार होने के बावजूद यह पेड़ लगातार फल देने में सक्षम है, जो इसे अन्य किस्मों से अलग बनाता है। फिलहाल राजेंद्र अटल के पास सदाबहार आम के करीब 20 पेड़ हैं। साथ ही कलम विधि के जरिए नए पौधे भी तैयार किए जा रहे हैं।  

पंजाब कांग्रेस में चुनावी मंथन तेज, वरिष्ठ नेता ऑब्जर्वर कमेटी के साथ करेंगे रणनीति पर चर्चा

चंडीगढ़. प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट के बीच कांग्रेस भी चुनावी रणनीति बनाने में तेजी से जुट गई है। आज नई दिल्ली में पंजाब कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं को तलब किया गया है। सुबह दस बजे से हाईकमान की ओर से गठित तीन सदस्य ऑब्जर्वर कमेटी पंजाब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा, पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी के अलावा विधायक परगट सिंह सहित अन्य विधायकों और संगठन के लोगों से कमेटी मुलाकात करेगी। इस संबंध में सोमवार को सभी नेताओं को दिल्ली पहुंचने के आदेश दिए गए। कुछ नेता सोमवार ही दिल्ली पहुंच गए हैं। जानकारी अनुसार आब्जर्वर कमेटी में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन, पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन और पूर्व मंत्री भजनलाल जाटव पंजाब कांग्रेस नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे। नेताओं से मुलाकात कर पंजाब में चुनावी तैयारियों की लेंगे रिपोर्ट साथ ही सभी नेताओं से एक-एक कर मुलाकात कर पंजाब में चुनावी तैयारियों को लेकर रिपोर्ट लेंगे। तीनों आब्जर्वर के साथ होने वाली इस बैठक को इस समय काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक के बाद ही चुनाव को लेकर कांग्रेस की रणनीति को लेकर स्थिति स्प्षट हो पाएगी। सूत्रों अनुसार आब्जर्वर कमेटी पंजाब को लेकर अपनी रिपोर्ट इसी हफ्ते कांग्रेस अध्यक्ष को सौंपे देगी। जिसके बाद पंजाब कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष के साथ ही चुनाव को लेकर पार्टी के अन्य रिक्त पदों पर नियुक्ति को लेकर फैसला लिया जाएगा। लंबे समय से पंजाब कांग्रेस में प्रदेेश अध्यक्ष के बदलाव करने या नहीं होने को लेकर चर्चाएं चल रही हैं, लेकिन अभी हाईकमान ने कोई फैसला नहीं लिया है। बीते महीने भर में चार से पांच बार पंजाब कांग्रेस नेताओं को दिल्ली तलब किया जा चुका है। विधानसभा चुनाव में जीत के लिए कांग्रेस नेताओं के बीच चल रही धड़ेबाजी को खतम करना कांग्रेस हाईकमान के लिए बड़ी चुनौती माना जा रहा है। मंगलवार की बैैठक के बाद ही कांग्रेस की आगे की रणनीति स्पष्ट हो पाएगी।