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DKS अस्पताल को मिली नई मंजूरी, रुमेटोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी विभाग होंगे शुरू

रायपुर  रायपुर के DKS सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में रुमेटोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी विभाग खोलने की अनुमति मिल गई है। इस फैसले के साथ DKS अस्पताल छत्तीसगढ़ का पहला सरकारी संस्थान बन जाएगा, जहां गठिया, डायबिटीज, थायरॉइड और हार्मोनल समस्याओं का सुपर स्पेशियलिटी स्तर पर इलाज एक ही जगह उपलब्ध होगा। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में पंडित जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज और DKS अस्पताल की स्वशासी समिति की सामान्य सभा में यह निर्णय लिया गया। बैठक में तय किया गया कि दोनों विभागों के लिए अस्पताल में 10-10 बेड के नए वार्ड बनाए जाएंगे, ताकि मरीजों को बेहतर सुविधा मिल सके। रुमेटोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी दोनों ही सुपर स्पेशियलिटी विभाग हैं, जिनमें संयुक्त दर्द, गठिया, ऑटोइम्यून समस्याएं, डायबिटीज, थायरॉइड और हार्मोनल विकार जैसे मामलों का विशेषज्ञ इलाज संभव होगा। वर्तमान में ऐसे मरीजों का इलाज जनरल मेडिसिन और ऑर्थोपेडिक्स विभाग द्वारा किया जा रहा है, जबकि रुमेटोलॉजी DM/DNB सुपर स्पेशियलिटी श्रेणी में आती है और राज्य में इसकी गंभीर कमी है। समझिए इससे मरीजों को क्या फायदा होगा रुमेटोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी सुपर स्पेशियलिटी विभाग हैं। गठिया और हार्मोन संबंधी बीमारियों का स्पेशलिस्ट से इलाज होगा। संयुक्त दर्द, गठिया, थायरॉइड, हार्मोनल समस्याओं और डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारियों का इलाज विशेषज्ञ करेंगे। अस्पताल में दोनों विभागों के लिए 10-10 बेड के नए वार्ड को मंजूरी मिली है। सचिव ने निरीक्षण के बाद मांगा था प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित कटारिया ने 22 सितंबर को अस्पताल का निरीक्षण किया था।निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने दोनों विभाग शुरू करने की मांग रखी थी। इसके बाद सचिव ने इसका विस्तृत प्रस्ताव बनाने और भेजने के निर्देश दिए थे। राज्य में सरकारी स्तर पर स्पेशलिस्ट की कमी छत्तीसगढ़ के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में रुमेटोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ मौजूद नहीं हैं। अंबेडकर अस्पताल में एक DM एंडोक्राइनोलॉजी डॉक्टर हैं, लेकिन वे सिर्फ बच्चों का इलाज करते हैं। चर्चा है कि विभाग शुरू होने पर उन्हें DKS में शिफ्ट किया जा सकता है, हालांकि पहले भी 5 साल पहले ऐसा प्रयास असफल हुआ था। डॉक्टर ने प्रस्तावित OPD में बैठने से इनकार कर दिया था। डायबिटीज और हार्मोनल बीमारियों में तेजी से बढ़ोतरी रायपुर समेत पूरे प्रदेश में डायबिटीज के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। अब 10 साल से ज्यादा उम्र के बच्चों में टाइप-2 डायबिटीज मिलने लगी है। छोटे बच्चों में टाइप-1 यानी जेनेटिक डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। हार्मोनल समस्याओं, थायरॉइड और अन्य बीमारियों के इलाज के लिए विशेषज्ञों की भारी कमी है। वहीं जोड़ों के दर्द, गठिया और ऑटोइम्यून बीमारियों वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वर्तमान में ऐसे मरीजों का इलाज जनरल मेडिसिन और आर्थोपेडिक्स विभाग संभाल रहा है, जो सुपर स्पेशियलिटी की श्रेणी में नहीं आता। रुमेटोलॉजी DM/DNB सुपर स्पेशियलिटी कोर्स है, जिसकी राज्य में कमी है। स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अमित कटारिया ने 22 सितंबर को DKS अस्पताल का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के दौरान अस्पताल प्रबंधन ने दोनों विभाग प्रारंभ करने की मांग रखी थी, जिसके बाद सचिव ने प्रस्ताव तैयार कर भेजने के निर्देश दिए थे। अब इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल गई है। राज्य में सरकारी स्तर पर स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की भारी कमी है। छत्तीसगढ़ के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में रुमेटोलॉजी और एंडोक्राइनोलॉजी विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं। अंबेडकर अस्पताल में एक DM एंडोक्राइनोलॉजी डॉक्टर हैं, जो फिलहाल सिर्फ बच्चों का इलाज करते हैं। चर्चा है कि विभाग शुरू होने के बाद उन्हें DKS अस्पताल में शिफ्ट किया जा सकता है, हालांकि पहले भी पांच वर्ष पूर्व ऐसा प्रयास असफल रहा था। रायपुर सहित पूरे प्रदेश में डायबिटीज और हार्मोनल विकारों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। अब 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों में भी टाइप-2 डायबिटीज के मामले सामने आने लगे हैं, जबकि छोटे बच्चों में टाइप-1 जेनेटिक डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही जोड़ों के दर्द, गठिया और ऑटोइम्यून बीमारियों के मरीजों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। ऐसे में सुपर स्पेशियलिटी विभागों की शुरुआत मरीजों को बड़ा लाभ देगी और इलाज की गुणवत्ता में सुधार लाएगी।  

पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल का संदेश: लक्ष्य तय करें और कठिनाइयों को अवसर बनाएं

रायपुर : 'लक्ष्य तय करें, कठिनाइयों को अवसर में बदलें' : पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल नवा रायपुर में बच्चों संग प्रेरक संवाद, बच्चों के रोचक सवालों का मंत्री ने दिया जवाब रायपुर नवा रायपुर स्थित सरकारी आवास पर आज पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल ने रयान इंटरनेशनल स्कूल, रायपुर के बच्चों से आत्मीय मुलाकात की। यह मुलाकात केवल शिष्टाचार भर नहीं रही, बल्कि जीवन मूल्य, लक्ष्य निर्धारण, संघर्ष, शिक्षा के महत्व और छत्तीसगढ़ के पर्यटन पर गहन और प्रेरक संवाद का अवसर बन गई। बच्चों ने बड़े ध्यान से मंत्री जी की बातों को सुना और इसे अपने स्कूली व आगामी जीवन के लिए महत्वपूर्ण सीख बताया। 'लक्ष्य तय करें, कठिनाइयों को अवसर में बदलें' : पर्यटन मंत्री  राजेश अग्रवाल     मंत्री  अग्रवाल ने बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हुए कहा कि सफलता के लिए स्पष्ट लक्ष्य और अनुशासन बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ‘‘हर छात्र को अपने अंदर स्वच्छता, संस्कार और अनुशासन का बीज बोना चाहिए। आपका लक्ष्य जितना स्पष्ट होगा, उतनी जल्दी आप सही दिशा में आगे बढ़ेंगे। कठिनाइयाँ हर जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन उनमें छिपे अवसर को पहचानना ही असली सफलता है। शिक्षा केवल अंकों के लिए नहीं, बल्कि अच्छे चरित्र और मजबूत व्यक्तित्व के निर्माण के लिए होती है।’’ बच्चों के सवाल, मंत्री के जवाब     संवाद के दौरान एक छात्र ने मंत्री  अग्रवाल से पूछा कि उन्हें राजनीति में आने की प्रेरणा कहाँ से मिली। इस पर  अग्रवाल ने कहा, ‘‘मुझे राजनीति में आने की सबसे बड़ी प्रेरणा मेरे पिताजी से मिली। बचपन से ही उन्हें लोगों की मदद करते, समाज के लिए काम करते देखता था। वहीं से मन में भावना आई कि जीवन ऐसा हो, जिससे अधिक से अधिक लोगों का भला हो सके। राजनीति मेरे लिए सत्ता नहीं, सेवा का माध्यम है।’’     एक अन्य छात्र ने सवाल किया कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन के क्षेत्र में क्या संभावनाएँ हैं। इस पर  अग्रवाल ने जवाब देते हुए कहा कि ‘‘छत्तीसगढ़ में पर्यटन की अपार संभावनाएँ हैं।  हमारे यहाँ प्राकृतिक सौंदर्य, जलप्रपात, गुफाएँ, पुरातात्विक धरोहरें, आदिवासी संस्कृति और लोक कला की अनूठी विरासत है। हमारी कोशिश है कि छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया के पर्यटन मानचित्र पर अग्रणी स्थान मिले। इस क्षेत्र में हम उत्कृष्ट कार्य करेंगे, ताकि आप जैसी नई पीढ़ी अपने राज्य पर गर्व महसूस कर सके।’’ शिक्षा, लक्ष्य और आत्मविश्वास पर जोर      अग्रवाल ने बच्चों को समझाया कि ‘‘पढ़ाई का महत्व केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की दिशा तय करती है। उन्होंने कहा कि हर विषय को ध्यान से पढ़िए, केवल रटने के लिए नहीं बल्कि समझने के लिए। सवाल पूछने से कभी संकोच मत कीजिए। यही आदत आगे चलकर आपको अलग पहचान दिलाएगी। कठिन समय में घबराने के बजाय समाधान खोजिए, तब आप हर चुनौती को अवसर में बदल पाएँगे।‘‘     मंत्री  अग्रवाल ने भी बच्चों को शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि ‘‘आप सभी हमारे राज्य और देश का भविष्य हैं। ईमानदारी, मेहनत और अनुशासन को अपना मंत्र बनाइए, फिर जीवन में कोई भी लक्ष्य दूर नहीं रहेगा।     स्कूली छात्रों ने मंत्री  अग्रवाल से आटोग्राफ लिया व उनके साथ फोटोग्राफ भी खिंचवाई। मंत्री से मुलाकात पर स्कूली बच्चों ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा कि हमे मंत्री जी से बात कर बहुत अच्छा लगा व उनसे बहुत कुछ सीखने मिला, अब हम अपना लक्ष्य तय करेंगे और उन्हें पाने के लिए मेहनत भी उतनी ही ईमानदारी से करेंगे। पढ़ाई सिर्फ नंबर लाने के लिए नहीं, बल्कि अच्छा इंसान बनने के लिए भी ज़रूरी है। पहली बार किसी मंत्री से इतने करीब बैठकर बातचीत करने का मौका मिला है। रयान इंटरनेशनल स्कूल के इन बच्चों और पर्यटन मंत्री के बीच हुआ यह संवाद सकारात्मकता, प्रेरणा और आत्मविश्वास से भरा रहा। यह मुलाकात बच्चों के लिए केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और भविष्य की दिशा तय करने वाली एक महत्वपूर्ण सीख साबित हुई।

रायपुर : नवंबर में विशेष अभियान, पेंशनर अब किसी भी बैंक में जमा कर सकेंगे डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र

रायपुर : नवंबर में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र के लिए विशेष अभियान: अब पेंशनर किसी भी बैंक में जमा कर सकेंगे DLC रायपुर राज्य शासन द्वारा पेंशनरों की सुविधा के लिए नवंबर माह में डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र (Digital Life Certificate-DLC) जमा करने हेतु विशेष अभियान प्रारंभ किया गया है। इस अभियान के अंतर्गत पेंशनरों को अब जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए अपने मूल बैंक शाखा में जाने की आवश्यकता नहीं होगी। वे किसी भी बैंक में जाकर या घर बैठे "Jeevan Pramaan" मोबाइल ऐप एवं वेबसाइट https://jeevanpramaan.gov.in/ के माध्यम से डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जमा कर सकते हैं। भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन मंत्रालय, पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग, नई दिल्ली तथा संचालनालय, पेंशन एवं भविष्य निधि, छत्तीसगढ़ के निर्देशानुसार यह सुविधा राज्य के सभी पेंशनरों के लिए उपलब्ध कराई गई है। संचालक, पेंशन एवं भविष्य निधि, छत्तीसगढ़, रायपुर, श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने सभी बैंकों एवं जिला कोषालयों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बैंक अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में निर्देश दिए कि नवंबर माह में पेंशन वितरण की तिथि से पूर्व अधिकतम संख्या में पेंशनरों के डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र प्राप्त किए जाएं, ताकि किसी भी पेंशनर की पेंशन बाधित न हो। इन निर्देशों के पालन में भारतीय स्टेट बैंक सहित अन्य बैंकों द्वारा "डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र मिशन 4.0" (Digital Life Certificate Mission 4.0) के अंतर्गत विभिन्न शहरों में विशेष कैम्प आयोजित किए जा रहे हैं। इन कैम्पों में फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक के माध्यम से पेंशनरों से डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र प्राप्त किए जाएंगे। भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार अब सभी बैंक अपनी शाखाओं में आने वाले प्रत्येक पेंशनर का डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जनरेट करने के लिए उत्तरदायी होंगे, चाहे पेंशनर का खाता किसी भी बैंक या शाखा में हो।सभी पेंशनरों से अपील की गई है कि वे इस सुविधा का लाभ उठाकर समय पर अपना जीवन प्रमाणपत्र (Life Certificate) प्रस्तुत करें, ताकि उनकी पेंशन निर्बाध रूप से जारी रह सके।

पश्चिम रेलवे रतलाम मंडल ने ट्रेनों के समय पालन क्षमता बढ़ाने के लिए किया संशोधन

इंदौर आने वाले दिनों में अगर आप ट्रेन से सफर करने वाले हैं तो ये खबर आपके काम की है। जानकारी के लिए बता दें कि पश्चिम रेलवे के रतलाम मंडल ने इंदौर-देवास-उज्जैन रेल मार्ग पर ट्रेनों की समय पालन क्षमता सुधारने के लिए तीन महत्वपूर्ण ट्रेनों के समय में आंशिक बदलाव किए हैं। इसलिए जो भी पैसेंजर यात्रा करने का प्लान बना रहे हैं उन्हें पहले चेक करना जरूरी होगा। यह संशोधित समय-सारणी अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। अधिकारियों के अनुसार, यह कदम ट्रेनों के सुचारु संचालन और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है। इन ट्रेनों की बदली रहेगी टाइमिंग -गाड़ी संख्या 19343 इंदौर-नैनपुर पेंचवैली एक्सप्रेस ट्रेन 22 नवंबर से अगले आदेश तक इंदौर से 13:15 बजे प्रस्थान करेगी। गाड़ी संख्या 20917 इंदौर-पुरी हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन 25 नवंबर से अगले आदेश तक इंदौर से 15:05 बजे चलेगी। देवास स्टेशन पर इसका आगमन 15:31 बजे तथा प्रस्थान 15:33 बजे निर्धारित किया गया है। -गाड़ी संख्या 22191 इंदौर-जबलपुर एक्सप्रेस ट्रेन 22 नवंबर से अगले आदेश तक इंदौर से 19:35 बजे रवाना होगी। देवास स्टेशन पर इसका आगमन 20:01 बजे तथा प्रस्थान 20:03 बजे रहेगा।

रिकॉर्ड बना, अब विवाद! लिम्का बुक में दर्ज धौज गांव फिर सुर्खियों में

फरीदाबाद  अल-फलाह यूनिवर्सिटी में एक टेरर मॉड्यूल मामले के सामने आने के बाद धौज गांव चर्चा में है, लेकिन इसी के साथ गांव की छवि को नुकसान पहुंचने की बात भी जोर पकड़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि 2001 में धौज गांव का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हो चुका है। रिटायर्ड एडिशनल सेशन जज अब्दुल माजिद ने भी पुलिस और खुफिया विभाग पर सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जब थाना महज एक किलोमीटर दूरी पर है, तो फिर पुलिस को इस टेरर मॉड्यूल की कोई जानकारी क्यों नहीं मिली? ग्रामीणों ने बताया कि धौज गांव में सभी बिरादरी के लोग आपसी भाईचारे के साथ रहते हैं और गांव में इससे पहले कभी भी इस तरह की कोई घटना नहीं हुई। लोगों का कहना है कि कुछ व्यक्तियों की गतिविधियों के आधार पर पूरे गांव को बदनाम करना ठीक नहीं है। जांच में सामने आया नाम हाजी मद्रासी का भी ग्रामीणों ने बचाव किया। जानकारी के अनुसार, हाजी मद्रासी ने मुजम्मिल को किराए पर कमरा दिया था, लेकिन उन्हें उसके बारे में केवल इतना पता था कि वह एक बड़ा डॉक्टर है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी व्यक्ति के पेशे या उससे मिलने-जुलने वाले लोग उसके किसी अवैध गतिविधि से जुड़े हों, यह मान लेना गलत है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरी जांच निष्पक्ष तरीके से की जाए और गांव की छवि को बिना वजह धूमिल न किया जाए। 

इन कर्मचारियों का DA 8 प्रतिशत बढ़ा, नवम्बर 2025 से मिलेगा पूूरा पैसा

चंडीगढ़ हरियाणा सरकार ने उन राज्य कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डी.ए.) में वृद्धि को मंजूरी दी है जो 5वें वेतन आयोग की वेतन संरचना के अनुसार वेतन प्राप्त कर रहे हैं। संशोधित दर अनुसार डी.ए. को मौजूदा 466 प्रतिशत से बढ़ाकर 474 प्रतिशत किया गया है जो 1 जुलाई 2025 से प्रभावी होगी। इस संबंधी आदेश मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी, जिनके पास वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव का दायित्व भी है, द्वारा जारी किया गया है। बढ़ा हुआ डी.ए. नवम्बर 2025 के वेतन के साथ प्रदान किया जाएगा जबकि जुलाई से अक्तूबर 2025 तक की बकाया राशि दिसम्बर 2025 में दी जाएगी। वित्तीय नियमों अनुसार डी.ए. की राशि में यदि 50 पैसे या उससे अधिक का अंश हो तो उसे अगले पूर्ण रुपए तक पूर्णांकित किया जाएगा और 50 पैसे से कम के अंश को नजरअंदाज किया जाएगा ।  

सोयाबीन के लिए भावांतर योजना में नया मॉडल रेट: 4255 रुपए

भावांतर योजना में सोयाबीन का मॉडल रेट बढ़कर हुआ 4255 रुपए भोपाल  भावांतर योजना 2025 के अंतर्गत  सोयाबीन विक्रेता किसानों के लिए आज 18 नवंबर को 4255 रुपए प्रति क्विंटल का मॉडल रेट जारी किया गया है। यह मॉडल रेट उन किसानों के लिए है जिन्होंने अपनी सोयाबीन की उपज मंडी प्रांगणों में विक्रय की है। इस मॉडल रेट के आधार पर ही भावांतर की राशि की गणना की जाएगी। सोयाबीन के मॉडल रेट में लगातार वृद्धि जारी है। पहला मॉडल रेट 7 नवंबर को 4020 रुपए प्रति क्विंटल जारी किया गया था। इसी तरह 8 नवंबर को 4033 रुपए, 9 और 10 नवंबर को 4036 रुपए, 11 नवंबर को 4056 रुपए, 12 नवंबर को 4077 रुपए, 13 नवंबर को 4130 रुपए, 14 नवंबर को 4184 रुपए, 15 नवंबर को 4225 रुपए, 16 नवंबर को 4234 रुपए तथा 17 नवंबर को 4236 रुपए प्रति क्विंटल  का मॉडल रेट जारी हुआ था। राज्य सरकार की गारंटी है कि किसानों को हर हाल में सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य की 5328 रुपए प्रति क्विंटल की राशि मिलेगी। भावान्तर का मॉडल रेट बढ़ने का आशय यह है कि मंडी में सोयाबीन का भाव बढ़ रहा है। नमी कम होने से सोयाबीन की गुणवत्ता ठीक होने से रेट का बढ़ना स्वाभाविक है। किसानों को मंडी में अच्छा भाव मिल रहा है। वैसे भी मॉडल भाव पिछले चौदह दिन के सोयाबीन के बाजार भाव का भारित औसत है। एमएसपी से ऑक्शन भाव / मॉडल भाव के अंतर की राशि सरकार दे रही है और किसान के नुक़सान की भरपाई कर रही है। प्रदेश में भावान्तर योजना के सफल क्रियान्वयन ने किसानों को एमएसपी की राशि मिलने की गारंटी दी है। व्यापारियों को मंडी से व्यापार मिल रहा है, जो उपार्जन की वजह से प्रभावित हो जाता है।  

पीएम श्री एयर एम्बुलेंस से ताराबाई को उच्च स्तरीय इलाज के लिए इंदौर भेजा, परिजनों ने CM मोहन यादव को किया धन्यवाद

पीएम श्री एयर एम्बुलेंस से ताराबाई को उच्च स्तरीय इलाज के लिए इंदौर भेजा मरीज के परिजनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार व्यक्त किया इंदौर  खुशियों की दास्तां पीएमश्री एयर एम्बुलेंस सेवा प्रदेश में गंभीर बीमारियों से ग्रसित मरीजों को उच्च स्तरीय उपचार के लिए बड़े शहरों के अस्पतालों में भेजने हेतु वरदान सिद्ध हो रही है। इस योजना के तहत मंगलवार सुबह खंडवा जिले के पंधाना विकासखण्ड के ग्राम शाहपुरा निवासी श्रीमती ताराबाई पति बलराम उम्र 73 वर्ष को खंडवा की हवाई पट्टी से एयर एम्बुलेंस के माध्यम से इंदौर के एम वाय हॉस्पिटल में उच्च स्तरीय इलाज के लिए भिजवाया गया। मरीज के साथ उनके परिजन श्री लक्ष्मण ओसवाल भी गए। उन्होंने ताराबाई के उपचार के लिए एयर एंबुलेंस की निशुल्क सुविधा मिलने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर खंडवा महापौर श्रीमती अमृता अमर यादव और श्री मुकेश तन्वे भी मौजूद थे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. ओ.पी. जुगतावत ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में चोट के कारण ताराबाई लकवा ग्रस्त हो गई थी, मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए आज एयर एंबुलेंस के माध्यम से इंदौर भिजवाया गया है, जिससे वहां उन्हें उच्च स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। डॉ. जुगतावत ने बताया कि एयर एम्बुलेंस से आयुष्मान कार्ड धारको को राज्य के भीतर और बाहर सूचीबद्ध अस्पतालों में इलाज के लिए भेजने हेतु निशुल्क सेवा उपलब्ध है। गैर आयुष्मान कार्ड नागरिको को राज्य के भीतर सरकारी अस्पतालों तक निशुल्क तथा राज्य के बाहर अनुमोदित दरों पर सशुल्क सेवा उपलब्ध है। इस दौरान सिविल सर्जन डॉ. अनिरुद्ध कौशल, अस्पताल अधीक्षक डॉ.रंजीत बड़ोले, नोडल अधिकारी एयर एंबुलेंस डॉ.दीपशिखा इवने व अधिकारी मौजूद थे।

प्रदेश के 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 स्कूल लीडर्स के प्रयासों की सराहना

प्रदेश के 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 स्कूल लीडर्स के अनुकरणीय प्रयासों को सराहना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिये किये जा रहे हैं प्रयास भोपाल  प्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित सांदीपनि विद्यालय शिक्षण नेतृत्व और शैक्षिक वातावरण में गुणवत्ता के नये मानक प्रस्तुत कर रहे हैं। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये इन विद्यालयों में शिक्षकों को उनके नवाचारी प्रयासों के लिये राज्य स्तरीय पहचान प्रदान करने तथा उनके प्रोत्साहन के लिये "प्रेरक प्रयास" कार्यक्रम की अभिनव पहल प्रारंभ की गई है। इस पहल से विद्यालयों के स्कूल लीडर्स और शिक्षकों द्वारा किये जा रहे अनुकरणीय एवं प्रभावी कार्यों को हर सप्ताह राज्य स्तर से सभी विद्यालयों में विस्तारित किया जा रहा है। प्रेरक प्रयास कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सांदीपनि विद्यालय स्तर पर हो रहे हर सकारात्मक प्रयास, चाहे वह छोटा हो या बड़ा उनकी समय पर पहचान हो और सबसे सामने लाया जाये। इस प्रयास से सीखने और सिखाने की परंपरा को बढ़ावा मिल रहा है। इस कार्यक्रम में हर सप्ताह विद्यालयों में नेतृत्व, शिक्षण पद्धति, विद्यार्थी की उपस्थिति एवं प्रगति, नवाचार को पहचान कर चयन किया जाता है, जिन्हें तीन श्रेणियों में आरंभकर्ता, प्रयासकर्ता, सर्वोत्तम गुणवत्ता के रूप में बांटा जाता है। उन्हें विद्यालय स्तर पर सम्मानित कर राज्य स्तर पर बढ़ावा देने के लिये बहुरंगीय पोस्टर के माध्यम से सभी शिक्षकों के बीच साझा किया जाता है। प्रदेश में 260 सांदीपनि विद्यालयों में 950 से अधिक शिक्षकों के अनुकरणीय प्रयासों को राज्य स्तर पर पहचान दिलायी गयी है। विद्यांजलि पोर्टल के माध्यम से स्वयंसेवकों को आमंत्रण केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने विद्यांजलि पोर्टल की शुरूआत की है। इस पोर्टल के माध्यम से स्कूल शिक्षा को सामुदायिक भागीदारी से मजबूत करने के प्रयास किये जा रहे हैं। नई शिक्षा नीति-2020 में स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में सहभागिता को प्रोत्साहित करने के बिन्दु को मुख्य रूप से जोड़ा गया है। विद्यांजलि एक ऐसा मंच है, जहाँ विभिन्न पृष्ठभूमि से जुड़े लोग जैसे पेशेवर, सेवानिवृत्त, गृहणियां और स्वयंसेवी संगठन अपने समय, कौशल और संसाधनों के माध्यम से शासकीय विद्यालयों की गुणवत्ता सुधार में सहभागी बन सकते हैं। यह पहल स्वच्छ भारत मिशन के अनुरूप शुरू की गयी है।  

हरियाणा सरकार का बड़े स्तर पर कदम, 2 जिलों में खुलेंगी ऑर्गेनिक फसलों की मंडियां

करनाल  हरियाणा में प्राकृतिक और ऑर्गेनिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार बड़े स्तर पर कदम उठाने जा रही है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने बताया कि किसानों को अपनी जैविक फसलों की बिक्री में कोई दिक्कत न आए, इसके लिए गुरुग्राम और हिसार में विशेष ऑर्गेनिक मंडियां स्थापित की जाएंगी। इन मंडियों में किसान सीधे अपनी शुद्ध और प्राकृतिक उत्पादित फसलें बेच सकेंगे, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। करनाल के महाराणा प्रताप बागवानी विश्वविद्यालय के दौरे के दौरान राणा ने कहा कि वर्तमान खेती में रासायनिक खादों और दवाइयों के अत्यधिक उपयोग से स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि किसान धीरे-धीरे गेहूं-धान आधारित खेती से आगे बढ़कर मोटे अनाज और प्राकृतिक तरीकों की ओर रुख करें। मंत्री ने बताया कि प्राकृतिक खेती को अपनाने वालों को सरकार की ओर से भारी अनुदान दिया जा रहा है, ताकि किसान इसमें अधिक रुचि लें और स्वस्थ व पोषक फसलों का उत्पादन बढ़े। राणा ने कहा कि ऑर्गेनिक फसलों के लिए अलग मंडियां बनाना सरकार की प्राथमिक योजना का हिस्सा है और इससे किसानों को बेहतर बाजार और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण अनाज उपलब्ध होगा।