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प्रदेश को शीघ्र मिलेंगे 851 नए एंबुलेंस:प्रधानमंत्री जन मन योजना के अंतर्गत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए होगी एंबुलेंस की विशेष व्यवस्था

रायपुर प्रदेश के कोने-कोने तक स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण हेतु राज्य सरकार पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। भरोसेमंद चिकित्सा सुविधा आमजन तक पहुँचाने की दिशा में उठाया गया यह कदम ऐतिहासिक है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज अपने निवास परिसर से मैदानी स्वास्थ्य अमले के लिए 151 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर विभिन्न जिलों के लिए रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इन वाहनों के माध्यम से बस्तर और सरगुजा क्षेत्र के सुदूर अंचलों में भी लोगों को समय पर प्रभावी उपचार मिल सकेगा। यह 'स्वस्थ छत्तीसगढ़' की दिशा में एक सशक्त पहल सिद्ध होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की स्वास्थ्य व्यवस्था को सशक्त और सुलभ बनाने की दिशा में आज एक नया अध्याय जुड़ गया है। पुराने, अनुपयोगी हो चुके वाहनों को स्क्रैप कर उनकी जगह अत्याधुनिक नए वाहन शामिल किए गए हैं। यह पहल राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन, समयबद्ध निरीक्षण और निगरानी को भी गति प्रदान करेगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जिला और विकासखंड स्तर पर कार्यरत अधिकारियों एवं मैदानी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे वाहनों से नियमित निरीक्षण, स्वास्थ्य शिविरों की निगरानी, दूरस्थ अंचलों तक त्वरित पहुँच और आपातकालीन परिस्थितियों में समयबद्ध हस्तक्षेप संभव हो सकेगा। इससे राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का संचालन अधिक प्रभावी और गतिशील होगा तथा राज्य में स्वास्थ्य सेवा वितरण प्रणाली और अधिक सक्रिय, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी बनेगी। यह पहल प्रदेश के संपूर्ण स्वास्थ्य तंत्र को गति देने का कार्य करेगी। मुख्यमंत्री साय ने बताया कि प्रदेश के सभी जिलों को ये वाहन चरणबद्ध रूप से उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रथम चरण में बस्तर और सरगुजा संभाग के 12 जिलों को ये वाहन भेजे जा रहे हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि शीघ्र ही प्रदेश में 851 नवीन एंबुलेंस सेवाएं शुरू की जाएंगी, जिनमें से 375 एंबुलेंस 108 आपातकालीन सेवाओं के लिए, 30 एंबुलेंस ग्रामीण चलित चिकित्सा इकाइयों के लिए तथा 163 ‘मुक्तांजली’ शव वाहन निःशुल्क सेवा के अंतर्गत दी जाएंगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जनजातीय समुदायों के उत्थान हेतु समर्पित भाव से कार्य कर रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में प्रधानमंत्री ‘जन मन योजना’ के तहत विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 30 एंबुलेंस की व्यवस्था भी शीघ्र की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब वर्षा ऋतु जैसे चुनौतीपूर्ण समय में भी राज्य सरकार घर-घर स्वास्थ्य सेवा पहुँचाने के अपने संकल्प को पूरी तत्परता से पूर्ण कर सकेगी। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं को सशक्त करने हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी और इस दिशा में निरंतर प्रतिबद्धता दोहराई। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार पूरी क्षमता के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में निरंतर कार्यरत है। उन्होंने स्वास्थ्य अधोसंरचना को मजबूत बनाने हेतु सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी तथा मैदानी स्वास्थ्य अमले को इस विशेष सौगात के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस अवसर पर सीजीएमएससी के अध्यक्ष दीपक म्हस्के, वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज, स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया, आयुक्त डॉ. प्रियंका शुक्ला सहित बड़ी संख्या में अधिकारीगण एवं गणमान्यजन उपस्थित थे।

कलेक्टर ने हितग्राही मूलक योजनाओं की बैंकर्स के साथ की समीक्षा बैठक

कलेक्टर ने हितग्राही मूलक योजनाओं की बैंकर्स के साथ की समीक्षा बैठक बैंकर्स के साथ विभागीय अधिकारी समन्वय स्थापित कर निर्धारित लक्ष्यों की  पूर्ति करें :-कलेक्टर श्री शुक्ला  सिंगरौली  केंद्र एवं प्रदेश सरकार की हितग्राही मूलक योजनाओं के लंबित प्रकरणों का बैंकर्स समय पर निराकरण कर हितग्राहियों को लाभ प्रदान करें । उन्होने कहा कि जो भी प्रकरण बैंकर्स के पास लंबित है केंद्र एवं प्रदेश सरकार के महत्वकांशी योजनाओं से संबंधित हैं उनका निराकरण समय पर किया जाए उक्त आशय का निर्देश कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित डी एल सी सी की बैठक के दौरान कलेक्टर श्री चंद्रशेखर शुक्ला  के द्वारा उपस्थित बैंकर्स के अधिकारियों को दिया गया ।    कलेक्टर ने बैंकवर लंबित प्रकरणों की जानकारी लेने के पश्चात निर्देश दिए कि निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप बैंकर प्रकरणों का निराकरण कर हितग्राहियों को लाभ प्रदान करें। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिए कि बैंकों से संपर्क कर लंबित प्रकरणों का निराकरण करवाए। एवं नए प्रकरण तैयार कर लक्ष्यों के अनुसार बैंकों में प्रस्तुति करें। साथ ही कितने प्रकरण प्रस्तुत किए गए है उनकी जानकारी से  टीएल  बैठक अवगत कराये ।     कलेक्टर ने निर्देश दिए कि किसानों के फसल बीमा के साथ साथ सुरक्षा बीमा योजना, जीवन बीमा योजना , अटल पेंशन योजना का भी लाभ प्रदान किया जाए। इसके अलावा भी बैंकों से संबंधित सीएम हेल्प लाईन के प्रकरणों की  संतुष्टि के साथ निराकरण किया जाना सुनिश्चित करें। बैठक के दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी गजेंद्र सिंह नागेश , आदिमजाति कल्याण विभाग के ए.सी ट्राइबल नीलकंठ मरकाम, लोकसेवा प्रबंधक रमेश पटेल सहित बैंकों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कलेक्टर ने की लोगों से सावधानी बरतने की अपील

सतना सतना जिले में पिछले 15, 16 घंटे से लगातार हो रही भारी वर्षा के दृष्टिगत कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने लोगों से अपील की है कि जल संरचनाओं, नदी, नालों एवं तालाबों के आसपास नहीं जाएं। आवश्यक कार्य होने पर ही बाहर निकले और सुरक्षित रूप से वाहनों का इस्तेमाल करें। जिले में हो रही भारी वर्षा के दृष्टिगत स्कूलों में शुक्रवार का अवकाश घोषित कर दिया गया है। अपने बच्चों को निगरानी में रखें और आपदा अथवा बाढ़ की स्थिति में कंट्रोल रूम, पुलिस प्रशासन के नजदीकी अधिकारियों को तत्काल सूचना दें। कलेक्टर ने कहा है कि जिला प्रशासन, पुलिस, होमगार्ड सहित आपदा प्रबंधन की टीम अलर्ट मोड पर हैं। किसी भी विषम परिस्थितियों के उत्पन्न होने की सूचना तत्काल देवें।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा-यह केवल दस्तावेज नहीं, संकल्प है, दिशा है, विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है

रायपुर छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में आज का दिन ऐतिहासिक बन गया, जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने “छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047” दस्तावेज को प्रदेश की जनता को समर्पित किया। नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित भव्य कार्यक्रम में राज्य मंत्रिमंडल के सदस्यगण, नीति आयोग भारत सरकार, विषय विशेषज्ञ, जनप्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दस्तावेज केवल शब्दों का संकलन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर, समृद्ध और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का एक ठोस संकल्प और स्पष्ट दिशा है। उन्होंने कहा कि यह विज़न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत@2047 के संकल्प से प्रेरित है और छत्तीसगढ़ को भारत के अग्रणी एवं विकसित राज्य में शामिल करने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां सोच बड़ी हो, दिशा स्पष्ट हो और जन-जन की भागीदारी हो, वहाँ विकास तय होता है। आज हम अपने राज्य का विज़न डाक्यूमेंट – छत्तीसगढ़ अंजोर विज़न@2047 प्रदेशवासियों को समर्पित कर रहे हैं। यह हमारे लिए गर्व की बात है कि छत्तीसगढ़ उन चुनिंदा राज्यों में है जिन्होंने यह विज़न तैयार किया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने स्वयं पिछले माह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में हुई नीति आयोग की बैठक में इस विज़न की जानकारी दी, जिसे विशेष रूप से सराहा गया। उन्होंने कहा कि श्रद्धेय पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी ने हमारे राज्य की नींव रखी थी, और प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में यह आगे बढ़ा है। ऐसे ऐतिहासिक अवसर पर, जब हम राज्य की स्थापना के रजत जयंती और अटल निर्माण वर्ष मना रहे हैं, यह विज़न जनता को समर्पित किया जाना अत्यंत सार्थक है। उन्होंने कहा कि यह दस्तावेज जनभागीदारी का प्रतीक है, जिसमें प्रदेश के तीन करोड़ लोगों के सपने और संकल्प समाहित हैं। इसे तैयार करने में न केवल विशेषज्ञों और विभागों का सहयोग रहा, बल्कि वर्किंग ग्रुप्स, संभाग स्तरीय जनसंवाद और मोर सपना मोर विकसित छत्तीसगढ़ पोर्टल के माध्यम से जनता के सुझाव भी शामिल किए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में जब भारत वैश्विक आशाओं का केंद्र बन चुका है, तब छत्तीसगढ़ भी विकसित भारत की दिशा में अग्रणी भूमिका निभाने को तैयार है। हम आतंकवाद और नक्सलवाद के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस नीति के साथ विकास के नए कीर्तिमान रच रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऊँचा लक्ष्य रखना और मेहनत करना हमने मोदी जी से सीखा है। पहले कहते थे मोदी हैं तो मुमकिन है, अब कहते हैं मोदी हैं तो निश्चित है – 2047 तक का लक्ष्य अब हमारी साझा दिशा है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि विकसित भारत की भव्य इमारत को ऊर्जावान बनाने में छत्तीसगढ़ पावर हाउस की भूमिका निभाएगा। हमारा स्टील, इस लक्ष्य को फौलादी बनाएगा। उन्होंने बताया कि स्टील उत्पादन को वर्ष 2030 तक 28 मिलियन टन से बढ़ाकर 45 मिलियन टन किया जाएगा, और यह गर्व का विषय है कि जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बने देश के सबसे ऊंचे ब्रिज में छत्तीसगढ़ के स्टील का उपयोग हुआ है। इसी तरह, कोयला उत्पादन को 207 मिलियन टन से बढ़ाकर 437 मिलियन टन, विद्युत उत्पादन को वर्तमान 30 हजार मेगावाट से देश में शीर्ष स्थान तक पहुँचाया जाएगा। आयरन ओर उत्पादन को 46 से बढ़ाकर 100 मिलियन टन किया जाएगा। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बना है, जहां लिथियम खनिज ब्लॉक की सफल नीलामी हुई है। मुख्यमंत्री ने मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी को संसाधनों के प्रबंधन का सबसे अहम आधार बताया। उन्होंने कहा कि राज्य में वर्ष 1853 से 2014 तक केवल 1100 रूट किलोमीटर रेलमार्ग बने थे, जिन्हें वर्ष 2030 तक दोगुना किया जाएगा। बोधघाट परियोजना जैसी योजनाओं से सिंचाई और बिजली उत्पादन को नया विस्तार मिलेगा। उन्होंने बताया कि यह विज़न स्पष्ट कार्ययोजना के साथ तैयार किया गया है, जिसमें 2030 तक अल्पकालिक, 2035 तक मध्यकालिक और वर्ष 2047 तक दीर्घकालिक लक्ष्य रखे गए हैं।  राज्य के 13 प्रमुख क्षेत्रों में 10 मिशनों के माध्यम से संतुलित विकास किया जाएगा मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अंजोर विज़न @2047 के माध्यम से राज्य के 13 प्रमुख क्षेत्रों में 10 मिशनों के माध्यम से आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जाएगा, इनमें  कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, पर्यटन, संस्कृति, लॉजिस्टिक्स और आईटी से लेकर जैविक खेती और शिक्षा तक का समावेश है। रायपुर की भौगोलिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए लॉजिस्टिक्स नीति तैयार की गई है जो ई-कॉमर्स को गति देगी। राज्य की जीडीपी 5 लाख करोड़ रूपए से बढ़ाकर 75 लाख करोड़ करने का लक्ष्य उन्होंने बताया कि इस विजन के माध्यम से राज्य की जीडीपी को 5 लाख करोड़ रूपए से वर्ष 2030 तक 11 लाख करोड़ और वर्ष 2047 तक 75 लाख करोड़ रुपए तक करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य है। कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कृषि उन्नति मिशन, जैविक खेती, निर्यात आधारित संभावनाएं और किसान सम्मान निधि जैसी योजनाएं प्रभावी होंगी। वर्ष 2047 तक किसानों की आय में 10 गुना से अधिक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है। स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन प्रत्याशा के क्षेत्र में भी ठोस योजनाएँ बनाई गई हैं। आयुष्मान भारत योजना के तहत 87 प्रतिशत लोग पहले ही कवर हो चुके हैं, लक्ष्य 100 प्रतिशत का है। नवा रायपुर में मेडीसिटी, बस्तर-सरगुजा में सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल तथा राज्य में कई मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जा रहे हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद अब कोई भी विद्यालय शिक्षकविहीन नहीं है। 5 हजार नई शिक्षक भर्ती, 1 हजार पीएमस्कूल, 36 आदर्श कॉलेज और ग्लोबल स्किल यूनिवर्सिटी की स्थापना पर काम हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में बेरोजगारी दर 2.7 प्रतिशत है, जिसे 2047 तक 1 प्रतिशत से कम लाने का लक्ष्य है। पैन-आईआईटी संस्थानों के सहयोग से स्किल डेवलपमेंट को नई दिशा दी जा रही है। आईटी सेक्टर में सेमीकंडक्टर प्लांट और एआई डाटा सेंटर पार्क विकसित किए जा रहे हैं। पिछले डेढ़ वर्षों में 350 से अधिक नीतिगत और प्रशासनिक सुधार किए गए हैं और 6.75 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 से उद्योगों को एक क्लिक पर मंजूरी उन्होंने बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम 2.0 के माध्यम से उद्योगों को एक क्लिक पर मंजूरी दी जा रही है। पर्यटन को … Read more

मुख्यमंत्री यादव का दावा: स्पेन दौरा साबित होगा ऐतिहासिक निवेश उपलब्धि

निवेश के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा स्पेन दौरा : मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्पेन दौरा बनेगा निवेश का नया अध्याय: डॉ. यादव का बड़ा बयान मुख्यमंत्री यादव का दावा: स्पेन दौरा साबित होगा ऐतिहासिक निवेश उपलब्धि भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में विभिन्न सेक्टर्स में निवेश के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्रम में स्पेन का दौरा निवेश के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेन के दौरे के दूसरे दिन और दो देशों की यात्रा के पांचवें दिन मीडिया को जारी संदेश में कहा कि स्पेन के साथ भारत विशेष रूप से मध्यप्रदेश के व्यापारिक तथा औद्योगिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की पहल हुई है। खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल आदि क्षेत्रों में स्पेन के उद्यमी मध्यप्रदेश में निवेश करें, इन संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। विभिन्न इकाईयों का अवलोकन भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि निश्चित ही इसके सुखद परिणाम आएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 18 औद्योगिक नीतियों की जानकारी निवेशकों को दी जा रही है। युवाओं को कार्य का अवसर मिले और राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर हो। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुसार विकसित भारत के लिए मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक निवेश और रोजगार के प्रयास किये जा रहे हैं।  

तकनीकी साझेदारी की पहल: मुख्यमंत्री यादव का सबमर कंपनी में दौरा

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बार्सिलोना में सबमर कंपनी का किया दौरा मध्यप्रदेश को एआई-रेडी, ग्रीन और सस्टेनेबल डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर हब बनाने की दिशा में अहम पहल तकनीकी साझेदारी की पहल: मुख्यमंत्री यादव का सबमर कंपनी में दौरा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मध्यप्रदेश को भविष्य की जरूरतों के अनुसार तैयार करने और वैश्विक स्तर पर डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तथा ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने के उद्देश्य से गुरुवार को स्पेन के बार्सिलोना में स्थित इमर्शन कूलिंग टेक्नोलॉजी में अग्रणी कंपनी सबमर के मुख्यालय का दौरा किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सबमर की अत्याधुनिक तकनीकों, कार्यप्रणाली और ग्रीन एनर्जी समाधानों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। उन्हें स्मार्ट पोड और माइक्रो पोड जैसी उन्नत तकनीकों के साथ ही कंपनी की डिजाइन एंड बिल्ड क्षमताओं तथा इनोवेशन लैब्स की जानकारी दी गई। सबमर ने बताया कि वह अब तक 400 मेगावॉट से अधिक इमर्शन कूलिंग समाधान विश्वभर में तैनात कर चुकी है और OCP-रेडी ग्रीन कूलिंग सॉल्यूशन प्रदान करने वाली दुनिया की पहली कंपनी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कंपनी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश डेटा सेंटर और एआई इन्फ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में वैश्विक निवेश के लिए एक नई ऊर्जा और अवसर का केंद्र बन रहा है। सबमर जैसी अग्रणी तकनीकी कंपनियों के साथ साझेदारी से राज्य को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।" दौरे के दौरान सबमर और मध्यप्रदेश सरकार के बीच संभावित रणनीतिक सहयोग पर चर्चा हुई। कंपनी सबमर को मध्यप्रदेश में तकनीकी सलाहकार और सर्टिफायर के रूप में शामिल कर, नए डेटा सेंटर परियोजनाओं की डिजाइन, सस्टेनेबिलिटी और एआई-रेडिनेस के मानकों को परिभाषित करने में भागीदार बनाया जाएगा। सबमर ने यह भी अवगत कराया कि वह भारत में अपनी कमर्शियल, आरएंडडी और प्रोडक्शन इकाइयों की स्थापना की योजना बना रही है। इसके लिए मध्यप्रदेश को प्राथमिकता देते हुए कंपनी के इंडिया हेड देव त्यागी जुलाई के अंत में मध्यप्रदेश का दौरा करेंगे, जिससे संभावित साझेदारियों को जमीनी स्तर पर आगे बढ़ाया जा सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह यात्रा न केवल तकनीकी नवाचारों के साथ प्रत्यक्ष संवाद का माध्यम बनी, बल्कि यह प्रदेश को ग्रीन और AI-रेडी डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक ठोस कदम भी सिद्ध होगी। 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्यप्रदेश में विभिन्न सेक्टर्स में निवेश के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रॉयल पैलेस ऑफ मैड्रिड महल न केवल यूरोप के सबसे विशाल और भव्य शाही महलों में से एक है, बल्कि भारत और स्पेन के बीच दशकों पुराने रणनीतिक संबंधों का भी सशक्त प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि यह महल केवल स्थापत्य सौंदर्य का नमूना नहीं, बल्कि भारत और स्पेन के बीच परस्पर सम्मान, संवाद और सहयोग की जीवंत मिसाल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रॉयल पैलेस ऑफ मैड्रिड के भ्रमण के बाद यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने रॉयल पैलेस के भ्रमण के दौरान उसके ऐतिहासिक महत्व, स्थापत्य कला और संरक्षित यूरोप की दुर्लभ कलाकृतियों, शस्त्रों और राजसी वस्तुओं का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि रॉयल पैलेस जैसी धरोहरें हमें न केवल अतीत की गौरवशाली झलक दिखाती हैं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की गरिमा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान की अहमियत भी सिखाती हैं। उल्लेखनीय है कि इसी रॉयल पैलेस में वर्ष 2006 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ.ए.पी.जे.अब्दुल कलाम का राजकीय सम्मान के साथ स्वागत हुआ था।इन ऐतिहासिक अवसरों की स्मृतियों को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यह स्थल भारत और स्पेन के मधुर संबंधों की नींव का जीवंत साक्षी है। निवेश के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा स्पेन दौरा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में विभिन्न सेक्टर्स में निवेश के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इस क्रम में स्पेन का दौरा निवेश के क्षेत्र में मील का पत्थर सिद्ध होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्पेन के दौरे के दूसरे दिन और दो देशों की यात्रा के पांचवें दिन मीडिया को जारी संदेश में कहा कि स्पेन के साथ भारत विशेष रूप से मध्यप्रदेश के व्यापारिक तथा औद्योगिक संबंधों को प्रगाढ़ बनाने की पहल हुई है। खाद्य प्रसंस्करण, टेक्सटाइल आदि क्षेत्रों में स्पेन के उद्यमी मध्यप्रदेश में निवेश करें, इन संभावनाओं पर चर्चा की जा रही है। विभिन्न इकाईयों का अवलोकन भी किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आशा व्यक्त की कि निश्चित ही इसके सुखद परिणाम आएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि 18 औद्योगिक नीतियों की जानकारी निवेशकों को दी जा रही है। युवाओं को कार्य का अवसर मिले और राज्य की आर्थिक स्थिति बेहतर हो। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्प के अनुसार विकसित भारत के लिए मध्यप्रदेश में अधिक से अधिक निवेश और रोजगार के प्रयास किये जा रहे हैं।  

मोहन यादव सरकार का बड़ा फैसला: एक परीक्षा, कई सरकारी नौकरियों का रास्ता खुलेगा

भोपाल  मध्य प्रदेश शासन के विभिन्न विभागों में होने वाली कर्मचारियों की नियुक्ति का पैटर्न बदलने जा रहा है. अब सरकारी विभागों में होने वाली नियुक्तियां यूपीएससी की तर्ज पर की जाएंगी. यानि कि विभिन्न सरकारी विभागों के लिए अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा देने की जरुरत नहीं होगी, बल्कि इस परीक्षा के माध्यम से सभी विभागों के विभिन्न रिक्त पदों के लिए एक ही मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी. सामान्य प्रशासन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी एक वर्ष में एक ही भर्ती परीक्षा कराए जाने के संबंध में प्रारंभिक दौर की चर्चा कर चुके हैं. इस संबंध अंतिम निर्णय लिया जाना बाकी है. उम्मीदवारों को केवल एक बार देनी होगी फीस एकल भर्ती परीक्षा से अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा की झंझट से मुक्ति तो मिलेगी ही, साथ ही अलग-अलग विभागों की परीक्षा के लिए बार-बार आवेदन करने और फीस भरने की जरूरत नहीं रहेगी. उम्मीदवारों को परीक्षा की तैयारी करने और स्लॉट चुनने में दिक्कत नहीं होगी. इससे सरकार को बार-बार परीक्षा आयोजित कराने के लिए समय और पैसा बर्बाद नहीं करना पड़ेगा. यदि कोई उम्मीदवार चयनित पद नहीं लेता है, तो वेटिंग लिस्ट के कारण अगला उम्मीदवार तुरंत नियुक्त हो सकेगा. इससे रिक्तियों को बिल्कुल भी नहीं छोड़ना पड़ेगा. मुख्यमंत्री ने बार-बार परीक्षा पर जताई चिंता मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के डायरेक्टर साकेत मालवीय ने बताया कि "विभिन्न सरकारी विभागों के लिए बार-बार परीक्षाएं आयोजित करने से सबसे अधिक परेशानी अभ्यर्थियों को होती थी. ऐसे में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भर्ती परीक्षाओं की व्यवस्था को परिवर्तित करने के निर्देश दिए थे. मालवीय ने बताया कि मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल के लिए एसएससी और यूपीएससी की परीक्षाओं का पैटर्न आदर्श है. जिससे यूपीएससी की तरह मध्य प्रदेश के विभिन्न विभागों में भी एकल परीक्षा का आयोजन किया जा सके. जिस तरह संघ लोक सेवा आयोग एक परीक्षा कराता है और विभिन्न श्रेणी के उपलब्ध पदों के लिए मेरिट के हिसाब से चयन होता है. अब यही प्रक्रिया मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में नियुक्ति के लिए अपनाई जाएगी. सभी विभागों में एक जैसे होंगे भर्ती नियम अधिकारियों ने बताया कि एकल परीक्षा प्रणाली में सभी सरकारी विभागों के भर्ती नियम भी अब एक जैसे होंगे. सामान्य प्रशासन विभाग ही इन्हें बनाकर अधिसूचित करने के लिए देगा. यह व्यवस्था इसलिए की जा रही है, ताकि प्रदेश के सभी सरकारी विभागों की नियुक्तियों में एकरूपता रहे. इसमें समान प्रकृति के पदों के लिए एक जैसे नियम हो जाएंगे. साथ ही यह लाभ भी होगा कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियों को विज्ञापन निकालते समय विभागीय भर्ती नियम के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा और समय पर विज्ञापन जारी हो जाएंगे. कोर्ट जाने के लिए बाध्य नहीं होंगे अभ्यर्थी अभी मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की परीक्षाओं में नकल और अनियमितताओं की घटनाएं सामने आती रहती है. लेकिन नई व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए नियम से लेकर परीक्षा का पूरा ब्योरा ऑनलाइन रहेगा. अभी राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से होने वाली परीक्षा में कई चीज सार्वजनिक नहीं की जाती हैं, जिससे अभ्यर्थी कोर्ट चले जाते हैं. परीक्षा परिणाम या चयन सूची पर रोक लगा जाती है. इससे पूरी प्रक्रिया रुक जाती है. आगे ऐसा न हो, इसके लिए सभी जानकारियां ऑनलाइन की जाएंगी, ताकि किसी को सूचना के अभाव में कोई भ्रम या संदेह ना रहे और अभ्यर्थी कोर्ट जाने के लिए बाध्य न हो. नए पैटर्न में इस प्रकार होंगी परीक्षाएं     मध्य प्रदेश शासन के सभी विभागों के लिए साल में एक बार एकल परीक्षा का आयोजन किया जाएगा.     इसमें सभी श्रेणी के पदों के लिए मेरिट के हिसाब से सूची बन जाएगी, लेकिन वेटिंग लिस्ट एक रहेगी.     एकल परीक्षा के लिए सभी विभागों से रिक्त पदों की संख्या साल में एक बार पूछी जाएगी.     सभी विभागों से मिले प्रस्तावों के आधार पर सितंबर महीने में परीक्षा का कैलेंडर तैयार किया जाएगा.     सामान्य प्रशासन विभाग जनवरी 2026 से कर्मचारियों के चयन की यह प्रक्रिया लागू करने की तैयारी में है. इन विभागों में बड़ी संख्या में होगी भर्ती बता दें कि मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने साल 2024 के जून महीने में आयोजित कैबिनेट बैठक स्वास्थ्य विभाग के 46,491 नए पदों का भर्ती करने का निर्णय लिया था. इसी प्रकार 22 अक्टूबर, 2024 को हुई कैबिनेट की बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग में सहायिका के 12,670 पद और सुपरवाइजर के 467 पदों पर भर्ती को मंजूरी दी गई थी. वहीं बीते 9 जुलाई को हुई कैबिनेट की बैठक में तीनों विद्युत वितरण कंपनियों के लिए 49 हजार 263 नए पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है. इन पदों पर भर्ती आने वाले वर्षों में की जाएगी. बता दें कि वर्तमान में मध्य प्रदेश के सरकारी विभागों में 1 लाख 40 हजार पद खाली हैं. सरकार एक साल में इनमें से 27 हजार रिक्त पदों को भरने जा रही है.

डाक व्यवस्था में बड़ा बदलाव: IT 2.0 से होंगी सेवाएं हाईटेक और कुशल

श्योपुर  डाकघर अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और डिजिटल होंगे। डाक विभाग ने आईटी 2.0 एप्लिकेशन के रोलआउट की घोषणा की है, जो डाक सेवाओं को आधुनिक तकनीक से सुसज्जित करने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल है। यह नया एप्लिकेशन 22 जुलाई 2025 से श्योपुर, मुरैना और भिंड जिलों के सभी डाकघरों में लागू किया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को बेहतर, तेज और पारदर्शी सेवाएं प्रदान करना है। डाक विभाग ने बताया कि IT 2.0 एप्लिकेशन की मदद से डाकघरों की कार्यप्रणाली पूरी तरह से डिजिटल हो जाएगी, जिससे लेनदेन की गति और सटीकता में इज़ाफा होगा। यह नया सिस्टम एक यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस के साथ आएगा, जिससे हर उम्र के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकेंगे। डाउनटाइम की जानकारी इस बदलाव को सही तरीके से लागू करने के लिए 21 जुलाई 2025 को एक दिन का सिस्टम डाउनटाइम निर्धारित किया गया है। इस दिन किसी भी प्रकार का सार्वजनिक लेनदेन नहीं होगा, क्योंकि उस दौरान डेटा माइग्रेशन, सिस्टम चेकिंग और तकनीकी कॉन्फिगरेशन किया जाएगा। डाक विभाग ने ग्राहकों से अपील की है कि वे 21 जुलाई से पहले अपने जरूरी डाक-संबंधी कार्य पूरे कर लें ताकि उन्हें किसी असुविधा का सामना न करना पड़े। विभाग ने इस अस्थायी असुविधा के लिए खेद व्यक्त करते हुए भरोसा दिलाया है कि इस परिवर्तन के बाद डाक सेवाएं पहले से कहीं अधिक डिजिटल, तेज और विश्वसनीय होंगी। तकनीकी रूप से सशक्त डाक सेवाएं आईटी 2.0 एप्लिकेशन न केवल डाक विभाग की कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाएगा, बल्कि यह ग्राहक अनुभव को भी पूरी तरह बदल देगा। डिजिटल लेनदेन, ट्रैकिंग सिस्टम, रियल टाइम अपडेट और पेपरलेस वर्कफ्लो जैसी सुविधाएं अब ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के डाकघरों में उपलब्ध होंगी।

IIT इंदौर का इनोवेशन: बिना सीमेंट का सुपरकंक्रीट, मजबूती में सब पर भारी

इंदौर  इमारतें अब सीमेंट के बिना भी बनेंगी, वो भी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और टिकाऊ। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) इंदौर ने एक ऐसा अनोखा कंक्रीट विकसित किया है जो पूरी तरह से सीमेंट मुक्त है, लेकिन ताकत और स्थायित्व में पारंपरिक कंक्रीट को पीछे छोड़ देता है। IIT इंदौर के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. अभिषेक राजपूत और उनकी टीम ने इस नई तकनीक को विकसित किया है। इसे जियोपॉलिमर हाई-स्ट्रेंथ कंक्रीट (Geo-Polymer High Strength Concrete – GHSC) नाम दिया गया है। इसकी सबसे खास बात यह है कि यह औद्योगिक अपशिष्ट जैसे फ्लाई ऐश और GGBS (ग्राउंड ग्रेन्युलेटेड ब्लास्ट फर्नेस स्लैग) से तैयार किया गया है। ये ऐसे पदार्थ हैं जो फैक्ट्रियों से निकलकर प्रदूषण फैलाते हैं, लेकिन अब निर्माण कार्य में इनका उपयोग होगा। सीमेंट उद्योग दुनिया में सबसे ज्यादाकार्बन डाइऑक्साइड छोड़ने वालों में से एक है। हर साल लगभग 2.5 अरब टन CO₂ सीमेंट निर्माण से निकलता है। GHSC इस उत्सर्जन को 80% तक घटा सकता है, जिससे यह नेट जीरो कार्बन लक्ष्य की ओर एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। पारंपरिक कंक्रीट को ठोस बनाने के लिए पानी से "क्योर" करना पड़ता है। लेकिन इस नई तकनीक में पानी की जरूरत नहीं होती, जिससे निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में पानी की बचत होती है। यह कंक्रीट केवल 3 दिनों में ही 80 MPa से ज्यादा ताकत हासिल कर लेता है। जबकि सामान्य कंक्रीट को इतनी मजबूती पाने में कई हफ्ते लगते हैं। कम खर्च में ज्यादा फायदा GHSC को स्थानीय अपशिष्ट सामग्री से बनाया जा सकता है, जिससे लागत में 20% तक की कटौती होती है। यानी यह न सिर्फ सस्ता है, बल्कि टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल भी है। किन निर्माणों में आएगा काम?     सेना के बंकर व आपातकालीन शेल्टर     ब्रिज और रेलवे स्लीपर     हाईवे की मरम्मत     आपदा राहत के प्रीफैब्रिकेटेड ढांचे IIT इंदौर के निदेशक प्रो. सुहास जोशी के अनुसार, यह प्रोजेक्ट दिखाता है कि कैसे विज्ञान और तकनीक से हरित भारत के लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। प्रोजेक्ट प्रमुख डॉ. अभिषेक राजपूत ने कहा कि यह तकनीक न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर है, बल्कि निर्माण जगत के लिए भी भविष्य का समाधान है।