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मां की रोटी’ कैंटीन शुरू, गरीबों और छात्रों के लिए राहतभरा कदम

महासमुंद नगर में सामाजिक सरोकार की दिशा में बुधवार को एक प्रेरणादायक पहल हुई। स्टेशन रोड स्थित 'मां की रोटी' नामक महिला संचालित कैंटीन का शुभारंभ नगर पालिका अध्यक्ष निखिलकांत साहू एवं उपाध्यक्ष देवीचंद राठी ने किया। इस कैंटीन का संचालन शहर की जय गंगा मैया महिला समूह द्वारा किया जाएगा, जिसका उद्देश्य जनता को मात्र 50 रुपये में स्वादिष्ट और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है।   सस्ती दर पर मिलेगा भोजन इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष निखिलकांत साहू ने कहा कि यह पहल न केवल लोगों को सस्ती दर पर भोजन उपलब्ध कराएगी, बल्कि महिला सशक्तीकरण का भी बेहतरीन उदाहरण बनेगी। महिला समूहों ने समय-समय पर अपनी कार्यकुशलता और प्रतिबद्धता सिद्ध की है, और मुझे विश्वास है कि वे इस जिम्मेदारी को भी बखूबी निभाएंगे। नगर पालिका उपाध्यक्ष देवीचंद राठी ने महिला समूह को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हमारे नगर की महिलाओं को यह अवसर मिलना गौरव की बात है। हम आशा करते हैं कि यह कैंटीन स्वच्छता, गुणवत्ता और स्वाद तीनों मानकों पर खरा उतरेगी। लोगों को मिलेगा घर जैसा भोजन जनपद उपाध्यक्ष हुलसी चंद्राकर ने महिला समूहों की कार्यक्षमता की सराहना करते हुए कहा कि महिला समूह कोई भी कार्य मन से करे तो उसमें सफलता निश्चित होती है। ‘मां की रोटी’ से आमजन को घर जैसा भोजन मिलेगा, यह विश्वास है। कार्यक्रम में नगर के नेता प्रतिपक्ष नानू भाई, धनेंद्र चंद्राकर, नीरज चंद्राकर, पीयूष साहू, चंद्रशेखर बेलदार समेत कई गणमान्य नागरिक एवं मां फाउंडेशन मुंबई के विलास कांबले, गणेश गुली, संजय तारम उपस्थित रहे। मां फाउंडेशन ने इस कैंटीन में सहयोग प्रदान किया है। कैंटीन की मार्गदर्शक प्रेमशीला बघेल ने बताया कि यह कैंटीन नगर पालिका की राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन योजना के अंतर्गत गठित महिला समूह द्वारा संचालित की जा रही है। समूह में कुल 12 सदस्य हैं। यहां प्रतिदिन केवल 50 में एक प्लेट चावल, तीन रोटी, एक कटोरी दाल और सब्जी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा नाश्ते के विकल्प भी मौजूद हैं। अन्नपूर्णा दाल भात सेंटर का बुरा हालनगर के गुरु घासीदास प्रतीक्षा बस स्टैंड में संचालित अन्नपूर्णा दाल भात सेंटर का बुरा हाल है। यहां स्वच्छता पर जरा भी ध्यान नहीं है। यही नहीं सेंटर खुलने व बंद होने का समय भी निर्धारित नहीं है। नागरिकों ने बताया कि गिनती के लोग ही भोजन करते हैं। इसके बाद भोजन खत्म हो जाता है। यही हाल बिरकोनी औद्योगिक क्षेत्र में संचालित दाल भात सेंटर का है। यहां के श्रमिकों ने बताया कि घंटेभर के लिए यहां का दाल भात केंद्र खुलता है। इस अवधि में कुछ ही लोग भोजन कर पाते हैं। बताया जाता है कि केंद्र संचालन में भाजपा के एक मंडल पदाधिकारी की भूमिका है। संचालन में परोक्ष रूप से जुड़े नेताजी के व्यवहार से श्रमिकों को भोजन नहीं मिल रहा है, दूसरी ओर पार्टी की छवि भी जनमानस में बिगड़ रही है।

धारा 163 के तहत सख्ती: जैसलमेर के बासनपीर जूनी में पुलिस-प्रशासन अलर्ट पर

जैसलमेर जैसलमेर के बासनपीर जूनी क्षेत्र में संभावित अशांति को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन धारा 163 लागू की है। सभी तरह के धरना-प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। पोस्टर-बैनर चिपकाने या नारेबाजी पर भी प्रतिबंध है। इस संबंध में बुधवार को जैसलमेर के उपखंड मजिस्ट्रेट ने आदेश जारी किया। बासनपीर जूनी क्षेत्र में 10 जुलाई को दो समुदायों के बीच विवाद हुआ था। बासनपीर में एक स्कूल के पास छतरी निर्माण के दौरान कथित तौर पर कुछ लोगों ने पथराव किया था। आरोप है कि दूसरे समुदाय के लोगों ने महिलाओं को आगे करते हुए पथराव किया था। इस घटना से वहां तनाव पैदा हुआ। फिलहाल तनापूर्ण हालातों के बीच आगे कोई विवाद न हो, इसके लिए जिला प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। जिला प्रशासन ने आशंका जताई है कि बासनपीर जूनी गांव में उत्पन्न तनाव की स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए उक्त क्षेत्र में असामाजिक तत्वों की ओर से कानून एवं शांति व्यवस्था भंग करने की कोशिश की जा सकती है, जिससे जन साधारण की सुरक्षा और शांति को खतरा पैदा हो सकता है। जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश में कहा गया है, “बासनपीर जूनी की सीमा के भीतर कोई व्यक्ति किसी भी तरह का हथियार लेकर सार्वजनिक स्थलों पर लेकर नहीं घूमेगा। न ही बासनपीर जूनी की सीमा में किसी भी प्रकार की सभा, रैली, जुलूस और प्रदर्शन बिना पूर्व सक्षम अनुमति के निकाले जाएंगे। सिख समुदाय के व्यक्तियों को उनकी धार्मिक परंपरा के अनुसार नियमान्तर्गत निर्धारित कृपाण रखने की छूट रहेगी। आदेश में कहा गया है, “कोई भी व्यक्ति साम्प्रदायिक सद्भावना को ठेस पहुंचाने वाले नारे नहीं लगाएगा और न ही इस प्रकार का भाषण देगा। कोई भी व्यक्ति बिना पूर्व अनुमति के लाउडस्पीकर का उपयोग नहीं करेगा। किसी भी स्थान पर एक समय में 5 या 5 से अधिक व्यक्ति एकत्रित नहीं रहेंगे।” जिला प्रशासन की तरफ से स्पष्ट किया गया है कि अगर कोई व्यक्ति नियमों का उल्लंघन करेगा तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के प्रावधानों के अंतर्गत अभियोग चलाए जा सकते हैं।  

विश्वास सारंग का वार: दिग्विजय सिंह जानबूझकर कांवड़ यात्रा को बना रहे विवादित

भोपाल मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह द्वारा सोशल मीडिया पर कांवड़ यात्रा और नमाज को लेकर जारी की गई तस्वीर पर युवा खेल व कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि दिग्विजय सिंह की मंशा कांवड़ यात्रा को विवादास्पद बनाने की है। राज्य के मंत्री विश्वास सारंग ने दिग्विजय सिंह की सोशल मीडिया पर जारी पोस्ट को लेकर कहा कि ‘मौलाना दिग्विजय सिंह’ केवल सनातन का विरोध करते हैं; ⁠कांवड़ यात्रा जैसे पावन पर्व को भी वह विवादास्पद बनाना चाहते हैं। उनसे इसके अलावा कोई अपेक्षा की ही नहीं जा सकती है। मंत्री सारंग ने पूर्व में दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए बयानों का हवाला देते हुए कहा कि जाकिर नायक को महिमामंडन करने वाले, आतंकवादियों को संरक्षण करने वाले, सेना के हर ऑपरेशन पर विवाद खड़ा करने वाले, पाकिस्तान परस्ती की बात करने वाले, तुष्टिकरण को आगे बढ़कर राजनीति करने वाले दिग्विजय सिंह से और कुछ अपेक्षा भी नहीं है। दिग्विजय सिंह को मौलाना दिग्विजय कहते हुए सारंग ने कहा कि दिग्विजय सिंह हर समय हिंदू धर्म का, हिंदू धर्मावलंबियों का और हिंदू साधु-संतों के अलावा हिंदू त्योहारों का अपमान करते आए हैं, इसलिए उन्हें मौलाना दिग्विजय सिंह कहा जाता है। भगवा आतंकवाद वाले दिग्विजय सिंह के पुराने बयान का जिक्र करते हुए मंत्री सारंग ने आगे कहा कि ⁠भगवा आतंकवाद जैसे शब्दों का इजाद करके उन्होंने ही सनातन को इस दुनिया में बदनाम करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि वे दिग्विजय सिंह से कहना चाहते हैं कि हिंदू और सनातन धर्म के किसी भी त्यौहार पर इस तरीके की टिप्पणी होगी, तो वह सहन नहीं की जाएगी। दिग्विजय सिंह को चाहिए कि वे इस पूरे मामले में माफी मांगें। दरअसल, दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की है जिसमें एक तरफ सड़क पर कांवड़ यात्रा है तो दूसरी तरफ सड़क पर नमाज करते लोगों की तस्वीर है, जिसमें लिखा है, एक देश, दो कानून।  

घर में मिली बुजुर्ग दंपति की हत्या की गुत्थी सुलझाने में जुटी पुलिस

रायपुर राजधानी रायपुर से सटे अभनपुर थाना क्षेत्र के बिरोदा गांव में सोमवार को एक दिल दहला देने वाली डबल मर्डर की घटना सामने आई है। गांव के एक घर में बुजुर्ग दंपति भूखन ध्रुव (उम्र 62 साल) और उनकी पत्नी रूखमणी ध्रुव (उम्र 60 साल) की लाशें खून से लथपथ हालत में मिलीं। आशंका जताई जा रही है कि दोनों की घर के अंदर गला रेतकर हत्या की गई है। घटना की सूचना फैलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। घटना की सूचना मिलते ही अभनपुर पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायपुर डॉ. लाल उमेद सिंह भी अपनी टीम के साथ पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल का निरीक्षण कर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। मौके पर ACCU टीम, एफएसएल यूनिट, फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट और डॉग स्क्वॉड को बुलाया गया, जिन्होंने घटनास्थल से साक्ष्य एकत्रित किए। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि हत्या धारदार हथियार से की गई है और यह मामला पूर्व नियोजित हत्या का हो सकता है। पुलिस ने घर को पूरी तरह सील कर दिया है और सभी संभावित पहलुओं से जांच की जा रही है। मर्ग पंचनामा की कार्रवाई पूरी कर ली गई है, और अभनपुर थाना पुलिस द्वारा आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है। समाचार लिखे जाने तक हत्या के पीछे का कारण स्पष्ट नहीं हो सका था, न ही किसी आरोपी की पहचान हुई है। हालांकि, पुलिस ने गांव के आसपास के लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है और जल्द ही किसी बड़े खुलासे की उम्मीद जताई जा रही है।

राहत कार्यों में तेजी लाएं: लोकसभा अध्यक्ष ने अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों में किया स्थलीय निरीक्षण

कोटा कोटा दौरे पर आए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को शहर के अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर हालात का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने जलभराव, नालों की क्षतिग्रस्त बाउंड्री और वर्षा जनित समस्याओं से जूझ रहे नागरिकों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। बिरला ने रानपुर बंधा, धर्मपुरा, बड़ा बस्ती, अनंतपुरा, रायपुरा और देवली अरब समेत कई क्षेत्रों का दौरा किया। उनके साथ ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, ओएसडी राजीव दत्ता, जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया और अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि जलभराव की समस्या किन कारणों से उत्पन्न हुई, साथ ही नालों की सीमित क्षमता और जल निकासी के अभाव को भी प्रमुख वजह बताया। रानपुर इलाके में हाल ही में एक युवती की जलभराव में डूबने से मौत हो गई थी। बिरला ने इस मामले में कॉलेज और जिला प्रशासन से जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि नालों की क्षमता बढ़ाई जाए और वैकल्पिक जलनिकासी मार्गों की तलाश की जाए, जिससे हर साल आने वाली समस्याओं का स्थायी समाधान निकाला जा सके। उन्होंने सभी प्रभावित क्षेत्रों का जल्द से जल्द सर्वे करने और आवश्यक प्रस्ताव तैयार करने को कहा। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने में किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिरला इसके बाद कोटा ग्रामीण के निमोदा हरीजी गांव पहुंचे, जहां हाल ही में नदी में डूबने से कुछ लोगों की मौत हो गई थी। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मिलकर शोक संवेदना प्रकट की और उन्हें ढांढस बंधाया। साथ ही अधिकारियों को पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। जिन लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं लगा है, उन्हें खोजने के लिए अतिरिक्त रेस्क्यू टीमें लगाने को भी कहा। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन की लापरवाही की शिकायत भी की। ग्रामीणों का कहना था कि यदि समय रहते रेस्क्यू टीमें पहुंच जातीं, तो कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। बिरला ने इन शिकायतों को गंभीरता से लिया और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए।  

मुख्यमंत्री साय ने ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान पर आधारित पुस्तिका का किया विमोचन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज विधानसभा परिसर स्थित अपने कक्ष में ‘मोर गांव मोर पानी’ महाअभियान पर आधारित पुस्तिका का विमोचन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पंचायती राज दिवस के अवसर पर प्रारंभ किए गए इस विशेष अभियान ने जल संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में अभूतपूर्व चेतना उत्पन्न की है। विमोचन कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा, प्रमुख सचिव पंचायत  निहारिका बारीक, आयुक्त मनरेगा और संचालक प्रधानमंत्री आवास योजना तारण प्रकाश सिन्हा सहित अनेक अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रियता और जनता की स्वप्रेरित भागीदारी के चलते यह अभियान अब एक जनआंदोलन का रूप ले चुका है। लोग स्वेच्छा से जल संरक्षण जैसे पुनीत कार्यों से जुड़ रहे हैं, जो सकारात्मक सामाजिक परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। उन्होंने कहा कि पुस्तिका में राज्य की विभिन्न पंचायतों द्वारा जल संरक्षण के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों और नवाचारों को संकलित किया गया है, जो अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणास्रोत बनेंगे। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि अभियान के अंतर्गत सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियों के माध्यम से जल संरक्षण के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। प्रदेश की 11,000 से अधिक ग्राम पंचायत भवनों की दीवारों पर भूजल स्तर अंकित किया गया है, जिससे लोगों में जल के महत्व को लेकर व्यावहारिक चेतना जागृत हुई है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की भूमिका जल संरक्षण को जन-भागीदारी से जोड़ने में महत्वपूर्ण रही है, और यह चेतना आने वाले समय में और भी व्यापक स्वरूप लेगी। उल्लेखनीय है कि ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान के तहत रैली, दीवार लेखन जैसे माध्यमों से व्यापक स्तर पर जनसामान्य को जल संरक्षण के प्रति संवेदनशील और जागरूक किया गया है। 626 क्लस्टर्स में आयोजित प्रशिक्षणों के माध्यम से 56,000 से अधिक प्रतिभागियों को जल प्रबंधन और संरक्षण के लिए तैयार किया गया है। अभियान में GIS तकनीक का उपयोग कर जल संरक्षण कार्यों की प्रभावी योजना बनाई जा रही है, जबकि जलदूत ऐप के माध्यम से खुले कुओं का जल स्तर मापा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, परकोलेशन टैंक, अर्दन डैम, डिफंक्ट बोरवेल रिचार्ज स्ट्रक्चर जैसे संरचनात्मक उपायों के माध्यम से जल पुनर्भरण और संरक्षण के स्थायी प्रयास किए जा रहे हैं। ग्राम पंचायतों के यह प्रयास छत्तीसगढ़ को जल संरक्षण के राष्ट्रीय मॉडल के रूप में स्थापित करेंगे।

सेपरेट हॉस्टल फॉर फ्रेशर्स: RGPV ने सीनियर्स-जूनियर्स को अलग-अलग आवास में रखा

भोपाल  राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (आरजीपीवी) ने वरिष्ठ और कनिष्ठ विद्यार्थियों के बीच रैगिंग और मारपीट की बढ़ती घटनाओं को देखेते हुए इस सत्र से एक नई पहल की है। इस बार कनिष्ठ विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। इसके अलावा इस बार मेरिट के आधार पर नवप्रवेशित विद्यार्थियों को छात्रावास आवंटित किया जाएगा। अब किसी भी छात्र संगठन की सिफारिश पर छात्रावास आवंटित नहीं होंगे। इसके अलावा सख्त नियम भी बनाए गए हैं। विवि प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि छात्र राजनीति, संगठनात्मक दबाव या किसी भी प्रकार के बाहरी प्रभाव से छात्रावास आवंटन नहीं होगा यह निर्णय विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और अनुशासित माहौल को बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है। बता दें, कि प्रदेश में सबसे अधिक आरजीपीवी में रैगिंग और मारपीट की घटनाएं यूजीसी की एंटी रैगिंग कमेटी में दर्ज हुई है। पुराने छात्रावास आवंटन को किया गया निरस्त विश्वविद्यालय ने सभी पुराने छात्रावास आवंटन को पूरी तरह निरस्त कर दिसंबर 2024 की परीक्षा में प्राप्त मेरिट और मध्यप्रदेश शासन की आरक्षण नीति के आधार पर नए सिरे से रूम आवंटन की प्रक्रिया शुरू की है। इसमें लिए द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के बालक छात्रावास के लिए 690 और कन्या छात्रावास के लिए 510 आवेदन प्राप्त हुए हैं। विद्यार्थी भी इस नई व्यवस्था समर्थन कर रहे हैं। इस बार विवि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छात्रावास उन्हीं को मिलेंगे जो वास्तव में अध्ययनरत और पात्र हैं।इसके लिए न केवल आवेदकों की कक्षा व मेरिट आधारित पात्रता तय की जा रही है, बल्कि आवंटन को अस्थायी (प्रोविजनल) रूप में रखा गया है। नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए अलग छात्रावास विश्वविद्यालय परिसर में कुल पांच छात्रावासों में लगभग 1460 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था है, जबकि नवप्रवेषित 1200 समेत चार वर्षों के कुल 4500 छात्र-छात्राएं हैं।इस कारण प्रबंधन ने इस बार आवंटन मेरिट के आधार पर करने का निर्णय लिया है। इसमें नवप्रवेशित विद्यार्थियों को अलग छात्रावास में रखा जाएगा। छात्रों के लिए यह व्यवस्था इसमें लड़कों को चंद्रशेखर आजाद छात्रावास में करीब 270 और भास्कराचार्य में 135 छात्रों को कमरे आवंटित किए गए हैं। वहीं लगभग 450 लड़कियों के लिए रानी अहिल्याबाई छात्रावास आवंटित किया गया है। छात्राओं के लिए लक्ष्मीबाई छात्रावास नर्धारित वहीं द्वितीय, तृतीय और अंतिम वर्ष के 370 छात्रों के लिए एपीजे अब्दुल कलाम छात्रावास और 230 छात्राओं के लिए रानी लक्ष्मीबाई छात्रावास निर्धारित किए गए हैं। इसे लेकर प्रो. एस.एस भदौरिया, संचालक, यूआईटी, आरजीपीवी यह ने बताया कि यह व्यवस्था विवि में अनुशासन बनाए रखने के उद्देश्य से लागू की गई है। 1200 आवेदन मिले है, नियमों और मेरिट के आधार पर रूम आवंटित किए जा रहे हैं।

पहली कक्षा में एडमिशन को लेकर राज्य सरकार और CBSE के दो अलग-अलग नियम का मामला पहुंचा हाईकोर्ट

 इंदौर  पहली कक्षा में बच्चों के प्रवेश को लेकर राज्य शासन और केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के दो अलग-अलग नियम अभिभावकों के लिए परेशानी की वजह बन रहे हैं। मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। सीबीएसई स्कूल एसोसिएशन की ओर से पैरवी कर रहे अभिभाषक गौरव छाबड़ा ने बताया कि सीबीएसई स्कूलों में प्रवेश की आयु केंद्रीय शिक्षा नीति में निर्धारित की गई है। इसके हिसाब से एक अप्रैल के पहले छह वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों को ही कक्षा एक में प्रवेश दिया जाता है। दूसरी तरफ राज्य सरकार ने मार्च में एक आदेश जारी किया है। इसमें 30 सितंबर तक छह वर्ष की आयु पूरी करने वालों को प्रवेश देने के लिए कहा है। इन दोनों नियमों में करीब छह माह का अंतर आ रहा है। ऐसी स्थिति में अभिभावक असमंजस में हैं। कोई छात्र एक साल पढ़ाई के बाद किसी अन्य राज्य में स्थानांतरित होता है तो नियमों की वजह से उसे दोबारा कक्षा एक में पढ़ना पड़ेगा। याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान दो सरकारों के दो नियमों के कारण आने वाली परेशानी को कोर्ट के समक्ष रखा गया। कोर्ट ने केंद्रीय शिक्षा सचिव, अध्यक्ष सीबीएसई बोर्ड, मप्र शासन, संचालक राज्य शिक्षा केंद्र और इंदौर के जिला शिक्षा अधिकारी को नोटिस जारी किया है।

परम वीर चक्र मेजर सोमनाथ शर्मा एवं कैप्टन विक्रम बत्रा की शौर्य गाथा एनसीईआरटी की कक्षा आठवीं के सिलेबस में शामिल

भोपाल  एनसीईआरटी की आठवीं कक्षा की अंग्रेजी पुस्तक 'पूरवी' में अब भारत के वीर सपूतों की कहानियां सुनाई जाएंगी। इस पुस्तक में पहले परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा और कारगिल हीरो कैप्टन विक्रम बत्रा की शौर्य  कहानियां शामिल की गई हैं।  इस पुस्तक के माध्यम से छात्रों को भारत के इतिहास और संस्कृति के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। नए पाठ्यक्रम में शामिल प्रमुख बिंदु: – मेजर सोमनाथ शर्मा: पहले परमवीर चक्र विजेता, जिन्होंने 1947-48 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अद्वितीय साहस दिखाया। – कैप्टन विक्रम बत्रा: कारगिल युद्ध में परमवीर चक्र विजेता, जिन्होंने अपने अदम्य साहस से दुश्मनों को पराजित किया। – आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा: झारखंड के प्रसिद्ध आदिवासी नेता, जिन्होंने ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ाई लड़ी। – महान गणितज्ञ:     – आर्यभट्ट: प्राचीन भारत के प्रसिद्ध गणितज्ञ और खगोलशास्त्री।     – वराहमिहिर: ज्योतिष और गणित के प्रसिद्ध विद्वान।     – भास्कराचार्य: गणितज्ञ और खगोलशास्त्री, जिन्होंने बीजगणित और ज्यामिति में महत्वपूर्ण योगदान दिया। – देश की पहली महिला भौतिक वैज्ञानिक बिभा चौधरी: भारतीय विज्ञान के इतिहास में एक महत्वपूर्ण स्थान रखने वाली वैज्ञानिक। – भारतीय साहित्यकार:     – तेनाली राम: विजयनगर साम्राज्य के प्रसिद्ध तेलुगु कवि।     – सरोजनी नायडू: प्रसिद्ध भारतीय अंग्रेजी कवयित्री और स्वतंत्रता सेनानी। इन सभी व्यक्तित्वों की कहानियों और योगदानों को शामिल करके, एनसीईआरटी ने छात्रों को भारत के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति से परिचित कराने का एक महत्वपूर्ण प्रयास किया है।

प्रयागराज-वाराणसी के लिए चेतावनी! IMD का यलो अलर्ट, दिल्ली-मुंबई में पहले से बारिश जारी

नई दिल्ली  हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में बारिश ने खूब तबाही मचाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हिमाचल में अब तक 55 से ज़्यादा लोगों की जान जा चुकी है। जान-माल का करोड़ों का नुकसान भी हुआ है। आज कहाँ-कहाँ होगी बारिश? मौसम विभाग (IMD) ने 16 जुलाई के लिए कई राज्यों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। IMD के मुताबिक, आज दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बारिश होने की संभावना है। दिल्ली में कैसा रहेगा मौसम? दिल्ली में आज यानी 16 जुलाई को बारिश की संभावना है। राजौरी गार्डन, मुंडाका, कंझावला, बवाना, बुद्ध जयंती पार्क, रोहिणी, पश्चिम विहार और दिल्ली कैंट जैसे इलाकों में बारिश हो सकती है। पिछले कई दिनों से राजधानी में बादल छाए हुए हैं, और 18 तारीख तक ऐसा ही मौसम बना रह सकता है. कहीं-कहीं बादलों की गरज भी सुनाई दे सकती है। उत्तर प्रदेश में बारिश का अपडेट उत्तर प्रदेश में, नोएडा समेत कई इलाकों में पिछले दिनों बारिश हुई थी, और आज भी यह सिलसिला जारी रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, मुजफ्फरनगर, किठौर, संभल, गढ़मुक्तेश्वर, सियाना, जहांगीराबाद, बहजोई, नरौरा, प्रयागराज, वाराणसी, सहसवान, अनूपशहर, खतौली, सकौती टांडा, हस्तिनापुर, कासगंज और एटा में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा, हरियाणा के असंध, सफीदों, सोनीपत, खरखौदा, कैथल, राजौंद, पानीपत और गोहाना में भी बारिश का अनुमान है। पहाड़ी राज्यों में बारिश और अलर्ट हिमाचल प्रदेश के कई जिलों, जैसे कुल्लू, चंबा, कांगड़ा, मंडी, ऊना, हमीरपुर, बिलासपुर, सोलन और शिमला में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने की भी चेतावनी दी गई है।