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मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम ने मध्य प्रदेश को भारत के 2030 तक मलेरिया-मुक्त होने के लक्ष्य के करीब ला दिया है

मध्य प्रदेश सरकार और गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स ने मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम ‘EMBED’ की 10 वर्षों की सफलता का जश्न मनाया -मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम ने मध्य प्रदेश को भारत के 2030 तक मलेरिया-मुक्त होने के लक्ष्य के करीब ला दिया है -इस कार्यक्रम ने 2015-2025 के बीच मलेरिया के मामलों में 97% की कमी लाई है, जिससे राज्य पहली बार लो-ट्रांसमिशन जोन में आ गया है – मच्छर जनित रोगों के उन्मूलन के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए कला और साहित्य का उपयोग करने वाले युवा छात्रों को सम्मानित किया गया – नए डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए – सप्लाई चेन ऐप और कम्युनिटी हेल्थ वालंटियर ऐप, ताकि रियल-टाइम निगरानी को मजबूत किया जा सके और मलेरिया की दवाओं और टेस्ट किट तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित की जा सके।   भोपाल भारत ने 2030 तक मलेरिया उन्मूलन का लक्ष्य रखा है, और मध्य प्रदेश इस दिशा में EMBED (एलिमिनेशन ऑफ मॉस्किटो बोर्न इंडिमिक डिजीजेज) के साथ नेतृत्व कर रहा है। यह एक सार्वजनिक-निजी पहल है, जिसे राज्य सरकार द्वारा गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) और फैमिली हेल्थ इंडिया (एफएचआई) के सहयोग से 2015 में शुरू किया गया था। पिछले वर्षों में, इस कार्यक्रम ने राज्य को राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन फ्रेमवर्क में उच्च मलेरिया संचरण (श्रेणी 3) से कम संचरण (श्रेणी 1) की ओर बढ़ने में मदद की है। अब तक 3,047 से अधिक गांव और बस्तियां मलेरिया मुक्त हो चुकी हैं। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में, डॉ. हिमांशु जायसवार, उप संचालक स्वास्थ्य सेवाएँ, मध्य प्रदेश; सुधीर सितापती, एमडी और सीईओ, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड; और पकज़न दस्तूर, हेड, सस्टेनेबिलिटी एंड सीएसआर, गोदरेज इंडस्ट्रीज ग्रुप, सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों और सभी अग्रिम पंक्ति के योगदानकर्ताओं की उपस्थिति थी। कार्यक्रम में फैमिली हेल्थ इंडिया से जुड़े एनजीओ, शिक्षकों और आशा कार्यकर्ताओं को सम्मानित किया गया, जिन्होंने दूरस्थ जंगलों और गांवों तक पहुंचकर परिवारों को रोग मुक्त जीवन जीने के लिए जागरूक किया। EMBED कार्यक्रम के दस वर्षों की उपलब्धियों को आगे बढ़ाते हुए, मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग ने गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स के सहयोग से एक तकनीक आधारित नई पहल शुरू की है। इस पहल के अंतर्गत दो अत्याधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किए गए हैं- कम्युनिटी हेल्थ वॉलंटियर ऐप और सप्लाई चेन ऐप, जिनका उद्देश्य मलेरिया उन्मूलन की प्रक्रिया को तेज़, सटीक और अधिक प्रभावी बनाना है। कम्युनिटी हेल्थ वॉलंटियर ऐप स्थानीय स्वास्थ्यकर्मियों और स्वयंसेवकों को लार्वा व बुखार के सर्वेक्षण को डिजिटल रूप से करने में सक्षम बनाता है। यह ऐप रीयल-टाइम डेटा कैप्चर, डैशबोर्ड, जियो-ट्रैकिंग और ऑटोमैटेड रिमाइंडर जैसी उन्नत सुविधाओं से लैस है, जो हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं।वहीं, सप्लाई चेन ऐप दवाओं और डायग्नोस्टिक किट्स के वितरण की पूरी प्रक्रिया को पूर्णतः डिजिटल बना देता है। पहले जो मैनुअल प्रणाली देरी और डेटा की कमी से प्रभावित होती थी, अब उसकी जगह रीयल-टाइम डैशबोर्ड, जियो-ट्रैकिंग और ऑटोमेटेड अलर्ट्स ने ले ली है। इससे अधिकारी अब इन्वेंटरी की निगरानी, डिस्ट्रीब्यूशन ट्रैकिंग के साथ ही गांव, ब्लॉक और ज़िला स्तर पर कमी की त्वरित पूर्ति कर सकते हैं, जिससे मलेरिया रोकथाम के सभी आवश्यक साधन समय पर और सुचारू रूप से उपलब्ध हो सकें। एक महीने तक चली 'स्मॉल बाइट, बिग फाइट' प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित करने के लिए एक अभिनंदन समारोह भी आयोजित किया गया, जिसने छात्रों को चित्रकला, निबंध और कविताओं के माध्यम से मच्छर जनित बीमारियों के खिलाफ साधारण निवारक कार्यों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। EMBED कार्यक्रम के प्रभाव पर टिप्पणी करते हुए, मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री, श्री राजेंद्र शुक्ला ने कहा, "भारत के राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत, हमारा लक्ष्य 2030 तक देश को मलेरिया-मुक्त बनाना है। मैं इस महत्वपूर्ण मिशन में सहयोग करने के लिए गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स द्वारा किए गए कार्य की सराहना करता हूं। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि मध्य प्रदेश ने पिछले दस वर्षों में मलेरिया के मामलों में 97% की कमी हासिल की है। यह सफलता हमारे स्वास्थ्य विभाग, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स और फैमिली हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के बीच मजबूत साझेदारी के माध्यम से मिली है।" इस यात्रा पर विचार करते हुए, सुधीर सितापती, एमडी और सीईओ, गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड (जीसीपीएल) ने कहा, "मलेरिया में 97% की कमी का मतलब है कि मध्य प्रदेश में हर दूसरा बच्चा, जो कभी जोखिम में था, अब सुरक्षित है, यह राज्य सरकार के कार्यक्रम की बदौलत है। पिछले 10 वर्षों में, हमारे सीएसआर प्रयासों ने दृश्यमान बदलाव लाया है, और मैं आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य सेवा से लेकर स्थानीय स्वयंसेवकों तक पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को बधाई देता हूं, जिन्होंने इसे संभव बनाया।" 2015 में, मध्य प्रदेश में मलेरिया के 100,000 मामले थे, जिसमें मंडला और डिंडोरी जैसे आदिवासी जिले सबसे अधिक प्रभावित थे, इससे न केवल स्वास्थ्य बल्कि शिक्षा और आय पर भी असर पड़ा। इसके जवाब में, राज्य सरकार ने गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, फैमिली हेल्थ इंडिया और स्वास्थ्य विभाग के साथ साझेदारी में EMBED प्रोग्राम लॉन्च किया, जिसमें नए साझेदारी मॉडल की आवश्यकता को पहचाना गया। पिछले 10 वर्षों में, इस कार्यक्रम ने 1 लाख ग्राम चौपाल सत्रों, स्कूल कार्यक्रमों, युवा-नेतृत्व वाले अभियानों, और साप्ताहिक अभियानों के माध्यम से समुदायों को सशक्त बनाया। उन्होंने स्थानीय स्वयंसेवकों को प्रशिक्षित किया, डिजिटल उपकरण पेश किए, मच्छर निरोधकों की उपलब्धता के लिए किराना स्टोर तक पहुँच और स्थानीय अभियान चलाए, जिससे स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत किया गया और रोकथाम, परीक्षण और उपचार में सुधार हुआ। दशकों के निरंतर प्रयासों के बाद, इस कार्यक्रम के परिणामस्वरूप मध्य प्रदेश में 11 मिलियन से अधिक लोगों तक पहुंचने की परिवर्तनकारी सफलता मिली है। इस कार्यक्रम को मध्य प्रदेश में 4,597 स्वयंसेवकों के साथ-साथ अन्य राज्यों में 5,857 लोगों द्वारा समर्थित किया गया है। इसकी सफलता को देखते हुए, कार्यक्रम के मॉडल का उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में विस्तार किया गया है, जिससे 3 मिलियन से अधिक घरों और 28 मिलियन लोगों के जीवन में बदलाव आया है। डॉ. हिमांशु जायसवार, उप संचालक स्वास्थ्य सेवाएँ, मध्य प्रदेश, ने टिप्पणी की, "जीसीपीएल द्वारा समर्थित मध्य प्रदेश का मलेरिया कार्यक्रम यह दर्शाता है कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी का समग्र दृष्टिकोण एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय चुनौती से कैसे निपट सकता है। निगरानी को मजबूत … Read more

इंदौर और भोपाल सहित 23 जिलों में शीतलहर का अलर्ट, न्यूनतम तापमान 7° तक गिरा

 भोपाल/इंदौर मध्य प्रदेश में नवंबर के पहले हफ्ते से ही ठिठुरन का दौर जारी है। दिन में सर्द हवाएं चल रही हैं, जबकि सुबह और रात में पारा तेजी से गिर रहा है। भोपाल और इंदौर में तो 25 साल का रिकॉर्ड तक टूट गया है। बीती रात प्रदेश के 11 शहरों में तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अगले चार दिन तक शीतलहर (Cold Wave) का अलर्ट जारी किया है। बुधवार को भोपाल, इंदौर समेत कुल 23 जिलों में शीतलहर की चेतावनी दी गई है। स्कूलों के समय में बदलाव  ठंड बढ़ने के चलते देवास जिले में कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने सभी स्कूलों के समय में बदलाव का आदेश जारी किया है। अब नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के स्कूल सुबह 10 बजे से पहले नहीं खुलेंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है। हिमालय में बर्फबारी का असर एमपी तक  मौसम विशेषज्ञ पी.के. शाह ने बताया कि इस बार हिमालय क्षेत्र में वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक सप्ताह पहले ही सक्रिय हो गए हैं। इसके कारण जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी हो रही है। उत्तर से दक्षिण की ओर बहने वाली ठंडी हवाओं का असर मध्य प्रदेश में भी दिख रहा है, जिससे ठंड का असर तेजी से बढ़ा है। पूर्वी हिस्सों में भी बढ़ी सर्दी  अब तक सर्दी का असर मुख्य रूप से पश्चिमी मध्य प्रदेश—भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग—में ज्यादा था। लेकिन अब इसका असर पूर्वी हिस्सों, यानी जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल संभाग तक पहुंच गया है। नवंबर में टूटा 25 साल का रिकॉर्ड इस बार ठंड ने नवंबर में ही पिछले कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भोपाल और इंदौर में पारा 25 साल में सबसे नीचे चला गया है। मौसम विभाग के वैज्ञानिक अरुण शर्मा ने बताया कि हिमालय क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) सामान्य से एक सप्ताह पहले सक्रिय हो गया। इसी कारण जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी बर्फबारी हो रही है, और उत्तरी हवा के रुख के चलते ठंडी लहरों का असर मध्यप्रदेश तक पहुंच गया है। पूर्वी मध्यप्रदेश में भी दिखने लगा असर अब तक ठंड का असर मुख्य रूप से प्रदेश के पश्चिमी हिस्से भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभागों में था, लेकिन अब जबलपुर, सागर, रीवा और शहडोल जैसे पूर्वी इलाकों में भी कड़ाके की सर्दी महसूस की जा रही है। सोमवार-मंगलवार की रात जबलपुर में सीजन की सबसे सर्द रात दर्ज हुई, जहां पारा 9.7 डिग्री रहा। भोपाल में 8.3, इंदौर में 8.4, ग्वालियर में 11 और उज्जैन में 11.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। सबसे ठंडा शहर राजगढ़ रहा, जहां पारा 8 डिग्री तक गिर गया। प्रदेश के शहर हिमाचल-उत्तराखंड से भी ठंडे हैरानी की बात यह है कि जहां हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फ गिर रही है, वहीं मध्यप्रदेश के कई शहरों में तापमान शिमला, मसूरी और देहरादून से भी नीचे है। प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में रात में तापमान 13.8 डिग्री और दिन में 23.6 डिग्री दर्ज किया गया। बैतूल, धार, रायसेन, सीधी और मलाजखंड में भी दिन का तापमान 27 डिग्री से कम रहा।  कहां है तेज शीतलहर का असर? मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर, शहडोल और जबलपुर में तेज शीतलहर का असर महसूस किया जा रहा है। वहीं, राजगढ़, सीहोर, शाजापुर, रीवा, बालाघाट और छतरपुर जैसे जिलों में ठंडी हवाएं चलेगी। बालाघाट जिले के मालाजखंड क्षेत्र में बुधवार को Cold Day का अनुभव होने की संभावना है। ठंडी हवाओं ने बढ़ाई ठिठुरन पहाड़ों से आने वाली ठंडी हवाओं ने MP को नवंबर में ही सर्दियों के आगोश में ला दिया है। दिन में भी ठंडी हवाएं चल रही हैं और रात का तापमान तेजी से गिरने से लोगों को ठिठुरन महसूस हो रही है। प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में रात में तापमान 13.8 डिग्री और दिन में 23.6 डिग्री दर्ज किया गया। पचमढ़ी में रात का पारा ज्यादा, दिन में कम प्रदेश के इकलौते हिल स्टेशन पचमढ़ी में रात में ठंड का असर जरूर कम है, लेकिन दिन में यहां सर्दी है। सोमवार-मंगलवार की रात में पचमढ़ी का तापमान 13.8 डिग्री रहा, लेकिन मंगलवार को दिन का तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। बैतूल, धार, रायसेन, सीधी, मलाजखंड में पारा 27 डिग्री से कम ही दर्ज किया गया। कई शहरों के तापमान में गिरावट बीती रात MP के कई शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे गिर गया।     इंदौर:  8.3डिग्री     भोपाल: 8.0डिग्री     उज्जैन: 11.5डिग्री     ग्वालियर: 10.7डिग्री     जबलपुर: 9.8डिग्री     शहडोल: 7.5डिग्री मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान मौसम वैज्ञानिक का कहना है कि वर्तमान में उत्तरी पंजाब और आसपास के क्षेत्रों में वेस्टर्न डिस्टरबेंस साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है जिसके प्रभाव से MP में ठंडी हवाएं बनी हुई हैं। साथ ही एक ट्रफ भी सक्रिय है, जो ठंड को और बढ़ा रहा है। मौसम विभाग की सलाह     ठंड से बचने के लिए सभी नागरिक सावधानी बरतें।     सुबह की वॉक सूरज निकलने के बाद ही करें।     बुजुर्ग और बच्चों के लिए ऊनी कपड़ों का उपयोग जरूरी है। राजगढ़ रहा सबसे ठंडा शहर  सोमवार-मंगलवार की रात को कई शहरों में सीजन की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई। जबलपुर में तापमान 9.7 डिग्री, भोपाल में 8.3 डिग्री, इंदौर में 8.4 डिग्री, ग्वालियर में 11 डिग्री और उज्जैन में 11.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। वहीं राजगढ़ प्रदेश का सबसे ठंडा शहर रहा, जहां न्यूनतम तापमान 8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। छतरपुर के नौगांव और उमरिया में 8.5 डिग्री, बालाघाट के मलाजखंड में 8.8 डिग्री और रीवा में 9.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों तक प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में ठंड का प्रभाव और बढ़ेगा। पिछले 10 साल से नवंबर में ठंड का ट्रेंड प्रदेश में नवंबर में पिछले 10 साल से ठंड के साथ बारिश का ट्रेंड भी है। इस बार भी ऐसा ही मौसम रहेगा। वहीं, बारिश के लिहाज से अक्टूबर का महीना उम्मीदों पर खरा उतरा है। इसमें औसत 2.8 इंच पानी गिर गया, जो सामान्य 1.3 इंच से 121% ज्यादा है। वहीं, भोपाल … Read more

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी! बिहार विधानसभा चुनाव में तोड़ा वोटिंग का रिकॉर्ड, पुरुषों को छोड़ा पीछे

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दोनों चरणों का मतदान संपन्न हो गया है. पहले चरण में 6 नवंबर को 65.08% और दूसरे चरण में इससे भी अधिक मतदान दर्ज किया गया, जिससे स्पष्ट है कि इस बार जनता ने बढ़-चढ़कर अपनी राय रखी है. खासतौर पर महिलाओं और युवाओं की भागीदारी ने इस चुनाव को ऐतिहासिक बना दिया है. किस पार्टी को मिला महिलाओं का वोट? पीपुल्स पल्स रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के एग्जिट पोल के अनुसार, बिहार की महिलाओं ने एनडीए के पक्ष में बड़ी संख्या में मतदान किया है. सर्वे के मुताबिक 45.8% मतदाताओं ने एनडीए को वोट दिया, जबकि कुल 66.8% ने गठबंधन के प्रति सकारात्मक रुख दिखाया. लिंग आधारित विश्लेषण में 38.2% पुरुषों ने महागठबंधन को समर्थन दिया, जबकि केवल 24.8% महिलाओं ने विपक्ष को वोट किया. इसका अर्थ है कि महिला वोटर एनडीए के पक्ष में निर्णायक भूमिका निभा रही हैं. महिलाओं ने क्यों NDA को दिया ज्यादा वोट? महिलाओं द्वारा एनडीए को अधिक वोट देने के पीछे “जीविका दीदी योजना” को अहम कारण माना जा रहा है. इस योजना के तहत बिहार सरकार ने 1.5 करोड़ महिलाओं को 10-10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी थी. यह योजना एनडीए के लिए “गेमचेंजर” साबित हुई, क्योंकि इससे महिला मतदाताओं में भारी उत्साह पैदा हुआ. विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्कीम का प्रभाव लगभग 4.5 करोड़ मतदाताओं तक पड़ सकता है, जिससे चुनावी समीकरण पर सीधा असर पड़ा. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए को महिलाओं का यह समर्थन निर्णायक बढ़त दिला सकता है. दूसरी ओर, महागठबंधन महिला वोट बैंक में पिछड़ता दिख रहा है. बिहार में इस बार महिलाएं बनेंगी गेमचेंजर?  बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महिलाओं ने मतदान के इतिहास की नई पटकथा लिख दी है. राज्य में दो चरणों की वोटिंग में ना सिर्फ रिकॉर्ड मतदान हुआ, बल्कि महिलाओं ने भागीदारी के मामले में पुरुषों को पीछे छोड़ दिया. दोनों चरणों को मिलाकर 71.06 फीसदी यानी 3.51 करोड़ महिलाओं ने मतदान किया, जो अब तक का सबसे हाई आंकड़ा है. यह पिछले चुनावों की तुलना में करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है. दूसरी ओर, पुरुषों में 62.8 फीसदी यानी 3.93 करोड़ मतदाताओं ने वोट डाले. यानी महिला और पुरुष वोटिंग में करीब 9 प्रतिशत (8.8%) का अंतर रिकॉर्ड किया गया है. राज्य में कुल 66.91 फीसदी मतदान के साथ 1951 से अब तक का सबसे हाई वोटिंग रिकॉर्ड बना है. पहले चरण में 69.04 फीसदी महिलाओं और दूसरे चरण में 74.03 फीसदी महिलाओं ने वोट डालकर दिखा दिया कि बिहार की 'नारी शक्ति' अब सिर्फ दर्शक नहीं, बल्कि चुनावी गणित बदलने वाली संभावित गेमचेंजर बन चुकी है. दोनों चरणों में 71 फीसदी महिलाओं ने वोट किया बिहार में दो चरणों 6 नवंबर और 11 नवंबर को वोटिंग में नारी शक्ति ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया और पुरुषों को पीछे छोड़ दिया. दोनों चरणों में 71.06 फीसदी यानी 3,51,45,791 महिलाओं ने वोटिंग में हिस्सा लिया. यह अब तक का सर्वोच्च मतदान है. पिछले उच्च मतदान से 10 प्रतिशत ज्यादा है. पुरुषों की बात करें तो दोनों चरणों में 39379366 ने मतदान किया. यानी कुल 62.8 फीसदी पुरुषों ने मतदान में हिस्सा लिया. यह आंकड़ा भी पिछले दो दशकों में सबसे ज्यादा है. हालांकि, 1990 के दशक के मतदान से कम है. 9 फीसदी कम रहा पुरुषों का मतदान आंकड़े के मुताबिक, पुरुष मतदाताओं की हिस्सेदारी महिला वोटर्स के मुकाबले करीब 9 फीसदी (8.8%) कम रही. महिला और पुरुषों के बीच वोटिंग में 4233575 का अंतर रहा. पहले चरण में वोटिंग की बात करें तो 69.04 फीसदी यानी 1,76,77,219 और दूसरे चरण में 74.03 फीसदी यानी 1,74,68,572 महिलाओं ने मतदान किया.  पुरुषों की बात करें तो पहले चरण में 61.56 फीसदी यानी 1,98,35,325  और दूसरे चरण में 64.1 फीसदी यानी 1,95,44,041 ने मताधिकार का प्रयोग किया. कितने महिला-पुरुषों ने मतदान किया? कुल मतदाताओं की बात करें तो पहले चरण में 37513302 महिला-पुरुषों ने वोटिंग में हिस्सा लिया. यानी पहले चरण में 65.08 फीसदी वोटिंग हुई. दूसरे चरण में 37013556 महिला-पुरुषों ने वोटिंग की और 68.76% वोटिंग हुई. कुल 74526858 लोगों ने मतदान में हिस्सा लिया और दोनों चरणों में कुल 66.91 प्रतिशत मतदान रहा. हालांकि, ये आंकड़े अंतिम नहीं हैं और इसमें डाक मत पत्र शामिल नहीं हैं. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने साथी आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ दूसरे चरण में सभी 45,399 मतदान केंद्रों की वेबकास्टिंग सुविधा के जरिए ईसीआई के नियंत्रण केंद्र से चुनावों के संचालन की निगरानी की. 8.5 लाख से ज्यादा कर्मचारी उतरे मैदान में बिहार में दो चरणों में हुए चुनावों में 8.5 लाख से ज्यादा मतदान संबंधी कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई. 2,616 उम्मीदवार मैदान में उतरे और 1.4 लाख से ज्यादा मतदान एजेंट बनाए गए. 243 सामान्य पर्यवेक्षक, 38 पुलिस पर्यवेक्षक और 67 व्यय पर्यवेक्षक चुनाव संचालन और निगरानी करने वाली चुनाव मशीनरी का हिस्सा रहे. इस वर्ष पहली बार, अंतर्राष्ट्रीय चुनाव आगंतुक कार्यक्रम (IEVP) के अंतर्गत, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस, बेल्जियम और कोलंबिया जैसे छह देशों के 16 प्रतिनिधियों ने बिहार का दौरा किया और चुनाव प्रक्रिया देखी. प्रतिनिधियों ने बिहार चुनावों की सराहना करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे सुव्यवस्थित, पारदर्शी, कुशल और सहभागी चुनावों में से एक है. किस पार्टी को मिले कितने प्रतिशत वोट? पीपुल्स पल्स के एग्जिट पोल के आंकड़ों के अनुसार, एनडीए को लगभग 46.2% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन को 37.9% वोट मिलने की संभावना जताई गई है. प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को 9.7% वोट मिलने का अनुमान है, जबकि शेष छोटे दलों को करीब 6.2% वोट मिलने की संभावना है. कुल मिलाकर, बढ़ी महिला भागीदारी ने बिहार चुनाव की दिशा तय कर दी है.

वन मंत्री कश्यप बोले — सुकमा में दूरस्थ नियद नेल्ला नार योजना सभी गांवों तक पहुँची, कोई पात्र हितग्राही न छूटे

रायपुर : सुकमा के दूरस्थ नियद नेल्ला नार योजना गांवों तक पहुंचे, कोई पात्र हितग्राही न छूटे : वन मंत्री  कश्यप मंत्री  कश्यप ने की विभागीय योजनाओं की समीक्षा रायपुर, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप ने आज  सुकमा जिले के कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में विभिन्न विभागों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का वास्तविक परिणाम धरातल पर स्पष्ट रूप से दिखाई देना चाहिए, जिससे प्रत्येक पात्र हितग्राही को योजनाओं का पूर्ण लाभ समय पर मिल सके। मंत्री  कश्यप ने कहा कि शासन की मंशा है कि ग्रामीण अंचलों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाए। इसके लिए सभी अधिकारी और कर्मचारी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ कार्य करें। उन्होंने सुकमा के दूरस्थ और अंदरूनी क्षेत्रों में शासकीय योजनाओं के सेचुरेशन (पूर्ण कवरेज) पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि कोई भी पात्र हितग्राही योजना के लाभ से वंचित न रह जाए। मंत्री  कश्यप ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपने कार्य की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करें और योजनाओं की स्थिति का फीडबैक सीधे ग्रामीणों से प्राप्त करें। उन्होंने कहा कि दूर गांव से अपनी समस्या लेकर आने वाले ग्रामीणों की समस्याओं का  उचित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।  बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना, एनआरएलएम, स्वच्छ भारत मिशन, लोक निर्माण विभाग, ग्रामीण स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, खाद्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, जल जीवन मिशन तथा माओवादी पीड़ित और आत्मसमर्पित माओवादी परिवारों के पुनर्वास कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई। मंत्री  कश्यप ने इन योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन हेतु दिशा-निर्देश अधिकारियों को दिए। बैठक के अंत में जिला पंचायत सीईओ  मुकुन्द ठाकुर ने मंत्री  कश्यप को मार्गदर्शन और सहयोग के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। बैठक में महिला आयोग की सदस्य सु दीपिका सोरी, कलेक्टर  देवेश कुमार ध्रुव, एसपी  किरण चव्हाण, वरिष्ठ जनप्रतिनिधि  धनीराम बारसे, नगर पालिका परिषद सुकमा अध्यक्ष  हुंगाराम मरकाम, जिला पंचायत सदस्य  कोरसा सन्नू,  हुंगाराम मरकाम सहित अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि तथा सभी विभागों के जिला अधिकारी उपस्थित रहे।

उद्योग संगम में छत्तीसगढ़ का जलवा — चारों श्रेणियों में नंबर वन, विकास का प्रस्तुत किया नया मॉडल

रायपुर : चारों श्रेणियों में अव्वल रहा छत्तीसगढ़ — उद्योग संगम में दिखा सुधार और विकास का नया मॉडल DPIIT की BRAP रैंकिंग में ‘टॉप अचीवर’ बना छत्तीसगढ़, निवेशकों के लिए भरोसे का केंद्र बना राज्य रायपुर छत्तीसगढ़ ने एक बार फिर देशभर में अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है। उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT), भारत सरकार द्वारा आयोजित ‘उद्योग संगम’ में राज्य को बिज़नेस रिफॉर्म एक्शन प्लान (BRAP) की चारों प्रमुख श्रेणियों में ‘टॉप अचीवर’ घोषित किया गया। यह उपलब्धि उस परिवर्तन यात्रा की गवाही है जो छत्तीसगढ़ ने बीते वर्षों में तय की है। कभी BRAP रैंकिंग में निचले पायदान पर रहने वाला यह राज्य आज गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे औद्योगिक दिग्गजों के साथ कदम से कदम मिलाकर खड़ा है। सुशासन, पारदर्शिता और उद्योग-अनुकूल नीतियों के बल पर छत्तीसगढ़ ने खुद को सुधार और विकास का नया मॉडल बना दिया है। राज्य ने BRAP के तहत अब तक 434 सुधार लागू किए हैं — जो इज ऑफ डूइंग बिज़नेस  और इज ऑफ लिविंग को सशक्त बनाने की दिशा में उसके निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं। इन सुधारों में सबसे बड़ी पहल रही ‘जन विश्वास अधिनियम’, जिसके तहत छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य बना जिसने छोटे कारोबारी अपराधों को डीक्रिमिनलाइज कर दिया। इस कदम ने सरकार और उद्योग जगत के बीच भरोसे और सहयोग का नया पुल बनाया है। अब कारोबार में अनावश्यक डर या जटिलता की जगह पारदर्शिता और सहजता ने ले ली है। इसी कड़ी में राज्य ने भूमि अभिलेखों के स्वचालित म्यूटेशन की ऐतिहासिक शुरुआत की — यह कदम छत्तीसगढ़ को देश का पहला राज्य बनाता है जहाँ जमीन पंजीयन के साथ ही स्वामित्व का हस्तांतरण स्वतः हो जाता है। इससे न केवल प्रक्रियाएं सरल हुई हैं बल्कि लोगों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से भी मुक्ति मिली है। राज्य सरकार ने कई और सुधारों को धरातल पर उतारा है — जैसे दुकानों और प्रतिष्ठानों को 24×7 संचालन की अनुमति, फ्लैटेड इंडस्ट्री के लिए FAR में वृद्धि, भूमि उपयोगिता बढ़ाने हेतु सेटबैक में कमी, और फैक्ट्री लाइसेंस की वैधता 10 से बढ़ाकर 15 वर्ष करने के साथ ऑटो-रिन्यूअल सुविधा। इन सभी कदमों ने मिलकर राज्य में उद्योगों के लिए एक भरोसेमंद, स्थिर और पारदर्शी वातावरण तैयार किया है। इन उल्लेखनीय सुधारों के लिए छत्तीसगढ़ के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन और निवेश आयुक्त ऋतु  सेन (IAS) को केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने सम्मानित किया। यह सम्मान इस बात का प्रतीक है कि छत्तीसगढ़ अब भारत के आर्थिक परिदृश्य में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इन सुधारों का असर निवेश माहौल पर साफ दिख रहा है। बीते दस महीनों में ₹7.5 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो यह साबित करते हैं कि निवेशक छत्तीसगढ़ की नीतियों, पारदर्शी प्रशासन और तेज़ निर्णय प्रणाली पर पूरा भरोसा करते हैं। यह सफलता छत्तीसगढ़ के लिए नए युग की शुरुआत है — ऐसा छत्तीसगढ़ जो विकास की दिशा तय कर रहा है, अवसरों को गढ़ रहा है और सबके लिए प्रगतिशील भविष्य की नींव रख रहा है। "छत्तीसगढ़ का ‘टॉप अचीवर’ बनना पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने उद्योग, सुशासन और पारदर्शिता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। छत्तीसगढ़ ने निचले पायदान से उठकर देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की पंक्ति में स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि सरकार की प्रतिबद्धता, प्रशासन की मेहनत और निवेशकों के भरोसे का परिणाम है।  छत्तीसगढ़ अब इज ऑफ डूइंग बिज़नेस  से आगे बढ़कर इज ऑफ लिविंग का भी प्रतीक बन चुका है – जहाँ सुधार, विश्वास और विकास एक साथ आगे बढ़ रहे हैं।" – मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय

विशेष आर्टिकल- नंद बाबा दुग्ध मिशन: यूपी में डेयरी क्रांति, किसानों की आय बढ़ी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था बनी आत्मनिर्भर

लखनऊ नंद बाबा दुग्ध मिशन (Nand Baba Dugdh Mission) उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में 6 जून 2023 को लॉन्च किया गया। यह मिशन भगवान कृष्ण (नंद बाबा) के नाम पर नामित है, जो गौ-पालन की सांस्कृतिक परंपरा को आर्थिक शक्ति से जोड़ता है। ₹1000 करोड़ की लागत से 5 वर्षीय (2023-2028) यह योजना दुग्ध उत्पादन बढ़ाने, किसानों की आय दोगुनी करने और देसी गायों के संरक्षण पर केंद्रित है। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह द्वारा अनावरणित, यह हर गांव में दुग्ध सहकारी समितियां गठित कर दूध का उचित मूल्य सुनिश्चित करती है। UP Dairy Policy 2022 के साथ एकीकृत, मिशन ने 2025 तक 4,922 नई समितियां स्थापित कीं, दूध उत्पादन 38.78 मिलियन टन (देश का 16%) पहुंचाया। मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना जैसे उप-योजनाओं से ₹11.80 लाख तक सब्सिडी मिल रही है, जो ग्रामीण रोजगार और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही है। यह PM मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन का हिस्सा है। मिशन का उद्देश्य: दुग्ध उत्पादन से आत्मनिर्भरता तक मिशन का मुख्य लक्ष्य दुग्ध उत्पादकों को गांव स्तर पर उचित मूल्य प्रदान करना और देसी नस्लों (साहीवाल, गिर, थार पारकर) को प्रोत्साहित करना है। प्रमुख उद्देश्य: •    आय वृद्धि: किसानों की मासिक आय ₹5,000 से बढ़ाकर ₹50,000+ करना। •    संरक्षण: देसी गायों की संख्या बढ़ाना, स्ट्रे कैटल प्रबंधन। •    रोजगार: 1 करोड़+ ग्रामीण नौकरियां (विजन 2047)। •    मार्केटिंग: UP Mart लिंकेज से निर्यात बढ़ावा। •    महिला फोकस: SHG के माध्यम 41,000+ महिलाओं को जोड़ना। मिशन की प्रमुख योजनाएं: विस्तृत संरचना मिशन के तहत 4 मुख्य उप-योजनाएं संचालित हैं, जो FPOs, सहकारी संस्थाओं और निजी उद्यमियों को लाभ पहुंचाती हैं: योजना का नाम    विवरण    लाभ/सब्सिडी    लक्ष्य (2025-26) नंदिनी कृषक समृद्धि योजना    10 दुधारू देसी गायों की इकाई स्थापना; प्रशिक्षण और फीड सहायता।    ₹11.80 लाख तक (50% अनुदान, कुल लागत ₹23.60 लाख)    600 इकाइयां (प्रदेश स्तर) मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ-संवर्धन योजना    2 दुधारू देसी गायों पर फोकस; चारा/आहार इकाई स्थापना।    ₹80,000 तक अनुदान (2 गायों के लिए)    2,100 इकाइयां (75 जिलों में) मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना    8-12 लीटर दूध वाली गाय: ₹10,000; 12+ लीटर: ₹15,000 प्रोत्साहन।    ₹10,000-₹15,000/गाय    11,000+ देसी गायें प्रारंभिक दुग्ध सहकारी समिति गठन    गांव स्तर पर समितियां; डिजिटल भुगतान और बाजार लिंकेज।    5% ब्याज सब्सिडी (₹1 करोड़ तक)    8,600+ समितियां (नई 4,922) आवेदन प्रक्रिया: •    ऑनलाइन पोर्टल: nandbabadugdhmission.up.gov.in पर रजिस्ट्रेशन। •    दस्तावेज: आधार, बैंक पासबुक, भूमि प्रमाण-पत्र। •    चयन: ई-लॉटरी + जिला समिति सत्यापन (अंतिम तिथि: 23 अगस्त 2025 मिनी नंदिनी के लिए)। •    हेल्पलाइन: 1800-XXX-XXXX (जल्द शुरू)। प्रभाव: 2025 तक ₹36 लाख करोड़ निवेश प्रस्ताव, NPA 2.5% से कम, मार्केट साइज ₹1,837 अरब (CAGR 14%)। प्रेरक उदाहरण: मिशन से जीवन परिवर्तन 1.    झांसी की बालिनी SHG (महिला समूह): नंदिनी योजना से 10 गायों की इकाई। ₹150 करोड़ टर्नओवर, 41,000 महिलाएं लाभान्वित। "मिशन ने हमें आत्मनिर्भर बनाया।" 2.    चंदौली के रामू यादव (स्वदेशी गौ-संवर्धन): 2 गायों पर ₹80,000 अनुदान। मासिक आय ₹50,000, पलायन रुका। 3.    गाजियाबाद के पशुपालक (प्रगतिशील योजना): 12 लीटर वाली गाय पर ₹15,000। 11,000 देसी गायें जिले में, आय दोगुनी। योगी आदित्यनाथ की दृष्टि: मिशन पर प्रेरक उद्धरण CM योगी ने मिशन को 'गौ-रक्षा की आर्थिक क्रांति' बताया: •    लॉन्च समारोह (6 जून 2023): "नंद बाबा मिशन से किसानों की आय दोगुनी होगी। ₹1000 करोड़ से देसी गायें संरक्षित, ग्रामीण UP आत्मनिर्भर बनेगा।" •    बजट समीक्षा 2025: "मिशन से 1 करोड़ नौकरियां। स्वदेशी गौ-संवर्धन से सांस्कृतिक धरोहर आर्थिक शक्ति बनेगी।" •    NDDB MoU (जून 2025): "नंद बाबा + डेयरी पॉलिसी से UP दूध उत्पादन में नंबर-1। महिलाओं को प्राथमिकता।" •    X पर योगी जी: #NandBabaMission – "एक गाय, एक परिवार की समृद्धि!" निष्कर्ष: नंद बाबा – UP का दुग्ध भविष्य नंद बाबा दुग्ध मिशन ने देसी गायों को आर्थिक इंजन बनाया, जहां ₹11.80 लाख सब्सिडी से लाखों किसान सशक्त हो रहे हैं। योगी सरकार का यह प्रयास विकसित भारत-2047 का आधार बनेगा। आवेदन करें, आत्मनिर्भर बनें! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश!

विशेष आर्टिकल-उत्तर प्रदेश में गिर गाय का महत्व: विशेषताएं, फायदे और ग्रामीण विकास में योगदान

लखनऊ  गिर गाय (Gir Cow) भारत की सबसे प्रसिद्ध देसी दुधारू नस्लों में से एक है, जो गुजरात के गिर अभयारण्य क्षेत्र से उत्पन्न हुई। मुख्यमंत्री स्वदेशी गौ संवर्धन योजना और नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत उत्तर प्रदेश में गिर गाय को प्राथमिकता दी जा रही है, जहां 2025 तक 11,000+ गिर गायें वितरित हो चुकी हैं। योगी सरकार ने ₹80,000 तक अनुदान (2 गायों पर) से किसानों को यह नस्ल उपलब्ध कराई, जिससे दूध उत्पादन 8-12 लीटर/दिन और आय ₹50,000+ मासिक तक पहुंची। गिर गाय का दूध A2 प्रोटीन युक्त, उच्च FAT (4.5-5.5%) और स्वास्थ्यवर्धक होता है, जो डायबिटीज, हृदय रोग में लाभकारी है। यह नस्ल गर्मी, रोग प्रतिरोधक और कम रखरखाव वाली है, जो UP Dairy Policy 2022 के तहत आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार बन रही है। गिर गाय की प्रमुख विशेषताएं: वैज्ञानिक और व्यावहारिक विश्लेषण विशेषता    विवरण    लाभ (UP संदर्भ में) 1. शारीरिक संरचना    – रंग: लाल-भूरा (गहरा लाल से हल्का भूरा)। – सींग: गोलाकार, पीछे की ओर मुड़े हुए। – कान: लटकते हुए, बड़े। – कूबड़: मध्यम आकार। – वजन: वयस्क गाय 350-450 किग्रा, बैल 550-650 किग्रा।    – आकर्षक दिखावट: बाजार में उच्च मूल्य। – कम स्थान: UP के छोटे फार्म में उपयुक्त। 2. दूध उत्पादन क्षमता    – प्रतिदिन: 8-12 लीटर (औसत), अधिकतम 20+ लीटर। – लैक्टेशन पीरियड: 280-300 दिन। – वार्षिक: 2,500-3,500 लीटर। – FAT: 4.5-5.5%, SNF 8.5-9%।    – उच्च आय: ₹50/लीटर पर ₹4,000-6,000 मासिक (2 गायें)। – A2 दूध: प्रीमियम मूल्य (₹80-100/लीटर)। 3. दूध की गुणवत्ता    – A2 बीटा-कैसिन: एलर्जी-मुक्त, पाचन में आसान। – उच्च कैल्शियम, प्रोटीन: बच्चों/बुजुर्गों के लिए आदर्श। – प्राकृतिक एंटीबॉडी: रोग प्रतिरोधक।    – स्वास्थ्य बाजार: UP Mart/Amul पर डिमांड। – निर्यात: G20 गिफ्टिंग में चयन। 4. पर्यावरण अनुकूलता    – गर्मी सहनशील: 45°C तक। – कम चारा: 25-30 किग्रा हरा/5-6 किग्रा सूखा चारा। – रोग प्रतिरोधक: खुरपका-मुंहपका, ब्रूसेलोसिस।    – UP जलवायु: गर्मी/सूखे में जीवित। – कम लागत: ₹1,500 मासिक रखरखाव। 5. प्रजनन और दीर्घायु    – पहला ब्यांत: 36-40 माह। – ब्यांत अंतराल: 12-14 माह। – उम्र: 15-18 वर्ष (10+ लैक्टेशन)।    – दीर्घकालिक लाभ: 1 गाय से 10+ बछड़े। – बछड़ा मूल्य: ₹30,000-50,000। 6. आर्थिक लाभ    – गोबर: 15-20 किग्रा/दिन (खाद/गैस)। – गौमूत्र: 5-7 लीटर/दिन (पेंट/दवा)।    – अतिरिक्त आय: ₹10,000+ मासिक (गोबर पेंट)। उत्तर प्रदेश में गिर गाय का योगदान: योगी सरकार की योजनाओं से •    स्वदेशी गौ संवर्धन योजना: 2 गिर गायें + ₹80,000 अनुदान → 50 लीटर दूध/दिन। •    नंदिनी योजना: 10 गिर गायें + ₹11.80 लाख → 120 लीटर/दिन। •    NDDB-PCDF MoU: गुजरात से उच्च गुणवत्ता गिर गायें आयात, कानपुर प्लांट में प्रोसेसिंग। •    परिणाम: 38.78 मिलियन टन दूध में 10%+ गिर नस्ल योगदान। 41,000+ SHG महिलाएं लाभान्वित। प्रेरक उदाहरण: UP में गिर गाय से समृद्धि 1.    गाजीपुर के अमितेश सिंह (SC किसान):  o    2024: 2 गिर गायें + ₹80,000। o    2025: 60 लीटर दूध/दिन, ₹40,000 मासिक। A2 दूध से प्रीमियम बिक्री। 2.    झांसी SHG (मीरा देवी):  o    10 गिर गायें नंदिनी से। o    अब: ₹1 लाख मासिक, गोबर पेंट निर्यात। योगी आदित्यनाथ का उद्धरण •    लॉन्च 2023:  "गिर गाय हमारी देसी धरोहर। ₹80,000 अनुदान से किसान आत्मनिर्भर, A2 दूध से स्वास्थ्य क्रांति!" निष्कर्ष: गिर गाय – UP का दुग्ध स्वर्ण गिर गाय A2 दूध, कम रखरखाव और उच्च लाभ से योगी सरकार की डेयरी क्रांति का प्रतीक है। आवेदन करें, गिर गाय अपनाएं! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश!

विशेष आर्टिकल- कृषि क्षेत्र में स्वर्णिम विकास: उत्तर प्रदेश के किसानों और योगी सरकार की उपलब्धियां

लखनऊ एक समय था जब उत्तर प्रदेश को 'बीमारू' राज्य कहा जाता था, जहां कृषि क्षेत्र भ्रष्टाचार, बाढ़, सूखा और निम्न उत्पादकता से जूझता था। लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार ने 2017 से अब तक कृषि को आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ बना दिया। आज UP देश का 21% खाद्यान्न उत्पादन करता है, जबकि केवल 11% कृषि भूमि होने पर भी फल-सब्जी का 15% और 11% उत्पादन यहां से आता है। कृषि वृद्धि दर 13.7% (राष्ट्रीय औसत 9.5% से अधिक), GSDP में 28% योगदान और UP-AGREES प्रोजेक्ट जैसे प्रयासों से राज्य वैश्विक खाद्य आपूर्तिकर्ता बनने की दिशा में अग्रसर है। PM किसान सम्मान निधि, सॉइल हेल्थ कार्ड, MSP और सोलर पैनल इंस्टॉलेशन से 1 करोड़+ किसान लाभान्वित हुए हैं। बजट 2025-26 में ₹2.25 लाख करोड़ इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए आवंटित, यह उत्थान PM मोदी के विकसित भारत-2047 विजन का जीवंत प्रमाण है। योगी सरकार की प्रमुख उपलब्धियां: आंकड़ों में कृषि क्रांति योगी सरकार ने तकनीकी नवाचार, सिंचाई, बीमा और बाजार लिंकेज पर फोकस कर कृषि को मजबूत किया। यहां कुछ प्रमुख आंकड़े: पैरामीटर    2017 से पहले    2025 तक    वृद्धि खाद्यान्न उत्पादन (% राष्ट्रीय)    15%    21%    40%+ फल-सब्जी उत्पादन (करोड़ टन/वर्ष)    ~3.5    4+    14%+ कृषि वृद्धि दर (%)    8.6    13.7    59%+ सिंचाई परियोजनाएं (परियोजनाएं)    सीमित (बांसागर आदि अधर में)    11 एक्सप्रेसवे + 6 कार्यरत, बांसागर पूर्ण    3 गुना+ किसान सम्मान निधि लाभार्थी (करोड़)    न्यून    10 (वार्षिक)    नया आयाम फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स    सीमित    65,000+ (15 एग्रो पार्क)    10 गुना+ कृषि विश्वविद्यालय    4    5 (नया जोड़)    25%+ मुख्य पहलें: •    UP-AGREES प्रोजेक्ट (जनवरी 2025): किसानों को तकनीकी सहायता, ग्रामीण उद्यमिता – 23% खाद्यान्न योगदान। •    फूड प्रोसेसिंग पॉलिसी-2023: 19 नए प्रोजेक्ट, सब्सिडी, ब्याज छूट – 1,000 यूनिट्स/जिला लक्ष्य। •    DSR Conclave 2025: सीधी बुआई से जल संरक्षण, वैश्विक खाद्य हब लक्ष्य। •    सॉइल हेल्थ कार्ड और बीमा: MSP से किसानों को न्यूनतम मूल्य। •    सिंचाई: बांसागर, सरयू नहर, मध्य गंगा नहर पूर्ण – 64,000 हेक्टेयर भूमि मुक्त। ये प्रयास कृषि GSDP को 28% बढ़ा चुके हैं, जहां UP $1 ट्रिलियन इकोनॉमी की ओर अग्रसर है। लाभार्थियों की प्रेरक कहानियां: साधारण किसानों से आत्मनिर्भर उद्यमी तक योगी सरकार की योजनाओं ने लाखों किसानों को सशक्त किया। यहां कुछ वास्तविक उदाहरण: 1.    झांसी के रामू सिंह (UP-AGREES लाभार्थी):  o    पहले: सूखे से जूझते, मासिक आय ₹5,000। o    सहायता: सॉइल हेल्थ कार्ड + सोलर पैनल से ड्रिप इरिगेशन। o    अब: गेहूं उत्पादन 20% बढ़ा, ₹50,000 मासिक, परिवार की शिक्षा-स्वास्थ्य में निवेश। "योगी जी की तकनीक ने मेरी जिंदगी बदली।" 2.    वाराणसी की महिला SHG (DSR Conclave से प्रेरित):  o    पहले: बिचौलियों से शोषण। o    सहायता: PM किसान + MSP से न्यूनतम मूल्य, फूड प्रोसेसिंग यूनिट। o    अब: 41 महिलाएं, ₹1 करोड़ टर्नओवर, निर्यात शुरू। "सरकार ने हमें बाजार दिया।" 3.    बुलंदशहर के छोटे किसान (फूड प्रोसेसिंग लाभार्थी):  o    पहले: फसल बर्बाद। o    सहायता: एग्रो पार्क + सब्सिडी से प्रोसेसिंग यूनिट। o    अब: 100+ रोजगार, फल-सब्जी निर्यात, आय दोगुनी। "पॉलिसी-2023 ने हमें उद्यमी बनाया।" ये कहानियां साबित करती हैं कि नीतियां जमीनी स्तर पर काम कर रही हैं, खासकर महिलाओं और छोटे किसानों के लिए। योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषण: कृषि पर दृष्टि CM योगी ने कृषि को 'आत्मनिर्भर UP की कुंजी' बताया: •    DSR Conclave 2025 (6 अक्टूबर): "UP 21% खाद्यान्न उत्पादन करता है। 11 वर्षों में कृषि में क्रांतिकारी बदलाव – सॉइल कार्ड, MSP, किसान सम्मान से किसान सशक्त। 2030 तक वैश्विक खाद्य हब!" •    UP-AGREES उद्घाटन (28 जनवरी 2025): *"UP 23% खाद्यान्न, 15% सब्जी उत्पादक। AGREES से किसान आत्मनिर्भर, तकनीक से तीन गुना उत्पादन।" •    8 वर्ष पूर्णता (24 मार्च 2025): *"कृषि वृद्धि 13.7% – BIMARU से ग्रोथ इंजन। 6 करोड़ गरीब ऊपर उठे।" •    कृषि भारत-2024 (15 नवंबर 2024): *"20% कृषि योगदान – जल जीवन मिशन से महिलाओं की कहानियां। लोकल से ग्लोबल!" निष्कर्ष: कृषि – UP का समृद्धि आधार योगी सरकार ने UP-AGREES, DSR Conclave और फूड प्रोसेसिंग से कृषि को उपेक्षा से उत्कृष्टता तक पहुंचाया। 21% राष्ट्रीय योगदान से UP वैश्विक खाद्य हब बनेगा। किसान, आत्मनिर्भर बनें – नया UP आपके हाथ में! जय किसान! जय उत्तर प्रदेश!

छत्तीसगढ़-गुजरात रिश्तों में नई मजबूती — CM विष्णु देव साय का गुजरात दौरा बना विकास का सेतु

रायपुर : छत्तीसगढ़ और गुजरात के बीच विकास, तकनीक, संस्कृति और निवेश का नया अध्याय : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गुजरात प्रवास रहा ऐतिहासिक और सार्थक गुजरात यात्रा में सहयोग, नवाचार और निवेश के नए आयाम खुले– भारत पर्व से इन्वेस्टर कनेक्ट तक छत्तीसगढ़ का बढ़ा गौरव रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का गुजरात प्रवास छत्तीसगढ़ के विकास, तकनीकी शिक्षा, सांस्कृतिक गौरव और औद्योगिक निवेश—चारों आयामों में उल्लेखनीय उपलब्धियों से परिपूर्ण रहा। इस यात्रा ने दोनों राज्यों के बीच विकास, सहयोग और साझेदारी के सेतु को और सुदृढ़ किया है। गांधीनगर में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से सौजन्य भेंट मुख्यमंत्री साय ने गांधीनगर में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल से सौजन्य भेंट की। दोनों नेताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के संकल्प को साकार करने में राज्यों की साझी भूमिका पर विचार-विमर्श किया। साय ने कहा कि भारत की शक्ति उसकी संघीय एकता में है, और गुजरात–छत्तीसगढ़ का सहयोग इस दिशा में मिसाल बनेगा। ‘बस्तर आर्ट’ और ‘बस्तर दशहरा’ की भेंट – संस्कृति के माध्यम से जुड़ाव मुख्यमंत्री साय ने इस अवसर पर गुजरात के मुख्यमंत्री पटेल को बस्तर की लोककला और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत पर आधारित बस्तर आर्ट और “बस्तर दशहरा” की कॉफी टेबल बुक भेंट की। मुख्यमंत्री पटेल ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध संस्कृति की सराहना की और रजत जयंती वर्ष की शुभकामनाएँ दीं। यह सांस्कृतिक संवाद दोनों राज्यों के बीच भावनात्मक संबंधों को और सुदृढ़ करने वाला रहा। उद्योग, पर्यटन और सुशासन में सहयोग का रोडमैप तैयार बैठक में दोनों मुख्यमंत्रियों ने उद्योग, पर्यटन, तकनीकी शिक्षा और सुशासन के क्षेत्रों में साझा कार्ययोजना पर सहमति जताई। साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की नीति अब ‘संपर्क से सहयोग और सहयोग से समृद्धि’ की दिशा में आगे बढ़ रही है। NAMTECH कॉलेज में तकनीकी शिक्षा का नया दृष्टिकोण गांधीनगर स्थित NAMTECH के भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री साय ने आधुनिक तकनीकी शिक्षा की नवीन पद्धतियों का अवलोकन किया। उन्होंने छात्रों और प्राध्यापकों से संवाद कर कॉलेज के नेटवर्क्ड मॉडल की जानकारी ली। छत्तीसगढ़ में हर वर्ष 10,000 युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में अब हर वर्ष 10,000 युवाओं को आधुनिक तकनीक, रोबोटिक्स, ऑटोमेशन और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईटीआई कॉलेजों को आधुनिक रूप देकर छत्तीसगढ़ को टेक्नोलॉजी-ड्रिवन स्टेट बनाने का लक्ष्य है। गुजरात मॉडल से प्रेरित तकनीकी-औद्योगिक साझेदारी की शुरुआत NAMTECH कॉलेज प्रबंधन ने छत्तीसगढ़ में भी इसी तरह का नेटवर्क्ड कॉलेज मॉडल लागू करने की इच्छा जताई। मुख्यमंत्री ने इसे उद्योगोन्मुख शिक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि “यह मॉडल हमारे युवाओं को रोजगार के साथ-साथ उद्यमिता की भावना से भी जोड़ेगा।” भारत पर्व में छत्तीसगढ़ की संस्कृति ने बिखेरा रंग मुख्यमंत्री साय ने केवड़िया स्थित एकता नगर में आयोजित भारत पर्व में शामिल होकर सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि भारत पर्व हमारी विविधता में एकता का उत्सव है, जहाँ हर राज्य की संस्कृति राष्ट्र की एकता को सशक्त करती है। ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस तरह सरदार पटेल ने रियासतों को जोड़कर अखंड भारत बनाया, उसी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के संकल्प को व्यवहारिक रूप दिया है। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी को उन्होंने भारत की भावनात्मक एकता का जीवंत प्रतीक बताया। सांस्कृतिक दल से मुलाकात और प्रोत्साहन मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक दल से भेंट कर उन्हें शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि “हमारी संस्कृति हमारी पहचान है, और जब छत्तीसगढ़ का लोकनृत्य गुजरात की भूमि पर गूंजता है, तो यह केवल कला नहीं, बल्कि एकता की अनुभूति है।” इन्वेस्टर कनेक्ट: छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाएं अहमदाबाद में आयोजित इन्वेस्टर कनेक्ट कार्यक्रम में मुख्यमंत्री साय ने देश के शीर्ष उद्योगपतियों से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा की। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ को ₹33,321 करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे 14,900 नए रोजगार सृजित होंगे। नई औद्योगिक नीति से निवेश के नए द्वार खुले मुख्यमंत्री ने कहा कि नई औद्योगिक नीति के लागू होने के बाद से अब तक ₹7.83 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य ने पिछले 22 महीनों में 350 से अधिक सुधार किए हैं, जिससे उद्योग स्थापना और संचालन बेहद सरल हुआ है। ऊर्जा, खनिज और तकनीक के संगम से बनेगा विकसित छत्तीसगढ़ मुख्यमंत्री ने कहा कि गुजरात के पास उद्यम है तो छत्तीसगढ़ के पास ऊर्जा, खनिज और कुशल जनशक्ति है। उन्होंने कहा कि “दोनों राज्यों का मेल विकसित भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होगा।” प्रमुख कंपनियों ने जताई गहरी रुचि इस कार्यक्रम में टोरेंट पावर, ओनिक्स थ्री एनर्सोल, लीजियम लाइफ साइंसेस, माला क्रिएशन, टोरेंट फार्मा, सफायर सेमीकॉम और मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल जैसी कंपनियों ने निवेश प्रस्ताव प्रस्तुत किए। यह निवेश न केवल औद्योगिक विकास, बल्कि स्वास्थ्य, फार्मा और हरित ऊर्जा के क्षेत्रों को भी गति देगा। नवा रायपुर बनेगा एआई और डेटा सेंटर हब मुख्यमंत्री ने बताया कि नवा रायपुर को आईटी और एआई डेटा सेंटर हब के रूप में विकसित किया जा रहा है। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की कई कंपनियाँ यहाँ निवेश में रुचि दिखा रही हैं। पर्यटन को उद्योग का दर्जा देकर हॉस्पिटैलिटी और वेलनेस सेक्टर में भी नई संभावनाएँ खुली हैं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि “विकसित भारत 2047 का सपना तभी साकार होगा जब हमारे युवा नई तकनीक में दक्ष हों, हमारी संस्कृति विश्व मंच पर पहचानी जाए, और हमारे राज्य आपसी सहयोग से आगे बढ़ें। गुजरात यात्रा ने इन तीनों आयामों को एक सूत्र में जोड़ा है।" इस अवसर पर सीएसआईडीसी के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, सचिव राहुल भगत, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

म.प्र. उद्योग प्रोत्साहन और निवेश अनुकूल वातावरण तैयार करने कर रहा निरंतर प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

म.प्र. BRAP 2024’ के अंतर्गत चार बिजनेस सेंट्रिक रिफॉर्म क्षेत्रों में टॉप एचीवर्स स्टेट के रूप में हुआ सम्मानित म.प्र. उद्योग प्रोत्साहन और निवेश अनुकूल वातावरण तैयार करने कर रहा निरंतर प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री ने नई दिल्ली के उद्योग समागम में प्रदेश के नवाचारों को किया साझा केंद्रीय मंत्री गोयल ने की मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति की सराहना म.प्र. को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में मिला शीर्ष स्थान मंत्री काश्यप ने एमएसएमई क्षेत्र में हुए विकास की दी जानकारी भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश उद्योगों को प्रोत्साहित करने और निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने औद्योगिक विकास को नई दिशा दी है और सभी राज्यों को नवीन उद्योगों की स्थापना के लिए प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को नई दिल्ली में सुषमा स्वराज भवन में आयोजित ‘उद्योग समागम’ को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश को बिजनेस रिफार्म एक्शन प्लान (BRAP)-2024’ के अंतर्गत चार बिजनेस सेंट्रिक रिफॉर्म क्षेत्रों Business Entry, Labour Regulation Enablers, Land Administration और Services Sector में ‘Top Achiever State’ के रूप में सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह पुरस्कार केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल से प्राप्त किया। यह सम्मान राज्य की पारदर्शी औद्योगिक नीतियों और निवेशकों में विश्वास के वातावरण का प्रतीक है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने Ease of Doing Business को केवल नीतिगत सुधारों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे Speed, Scale और Skill of Doing में बदल दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की इंडस्ट्रियल ग्रोथ रेट उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। राज्य के सभी क्षेत्रों में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए गए हैं, जिससे स्थानीय उद्यमिता को बल मिला है। उन्होंने बताया कि पहली बार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट (GIS) का सफल आयोजन राजधानी भोपाल में किया गया, जिससे मध्यप्रदेश की औद्योगिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर सशक्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने जनविश्वास अधिनियम से कानूनों की जटिलताओं को सरल बनाया है और निवेशकों में भरोसे का वातावरण स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में MP e-Seva Portal से 56 विभागों की 1700 से अधिक सेवाएं एक मंच पर उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे निवेशकों को पारदर्शी, तीव्र और सुगम प्रक्रिया का लाभ मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने अपने नवाचारों, डिजिटल सेवाओं और निवेश-अनुकूल दृष्टिकोण से एक आदर्श स्थापित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में MSME क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और आईटी सहित सभी औद्योगिक क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार ठोस कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री ने उद्योग समागम के आयोजन और सभी राज्यों को उद्योगों को प्रोत्साहित करने की दिशा में प्रेरित करने के लिये केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का आभार माना। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री गोयल ने ‘उद्योग समागम’ में राज्यों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा कि भारत की औद्योगिक प्रगति केंद्र और राज्यों के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने Business Reform Action Plan (BRAP) 2026 गाइड बुक का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि यह केवल सुधारों का दस्तावेज़ नहीं बल्कि ‘गुड गवर्नेंस और विश्वास आधारित नीति-निर्माण’ का उदाहरण है। केन्द्रीय मंत्री गोयल ने कहा कि राज्य सरकारों के बीच अनुभवों का यह साझा मंच भारत को विकसित भारत @2047 के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिये गति प्रदान कर रहा है। एमएसएमई मंत्री काश्यप का संबोधन एमएसएमई मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश उद्योग और रोजगार के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति कर रहा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 को राज्य सरकार ‘उद्योग एवं रोजगार वर्ष’ के रूप में मना रही है। उन्होंने कहा कि जनविश्वास बिल 2024 के तहत पांच विभागों के आठ अधिनियमों की 64 धाराओं में संशोधन कर प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है। मंत्री काश्यप ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी की उपस्थिति में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 के दौरान 18 नई औद्योगिक नीतियों का विमोचन किया गया तथा धार में देश के सबसे बड़े पीएम मित्रा टेक्सटाइल पार्क का शिलान्यास हुआ। उन्होंने कहा कि InvestMP Portal और Single Window System से निवेशकों को सभी आवश्यक अनुमतियां एक ही मंच पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। कॉन्फ्रेंस में BRAP 2026 गाइड बुक का विमोचन किया गया। केंद्रीय मंत्री गोयल ने राज्यों के उद्योग मंत्रियों से संवाद किया। इस संवाद सत्र में मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, असम, हरियाणा, केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, उत्तरप्रदेश, त्रिपुरा, आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, दिल्ली और नागालैंड के उद्योग मंत्रियों ने अपने राज्यों के नवाचार और उपलब्धियाँ साझा कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के संबोधन के बाद मध्यप्रदेश की औद्योगिक प्रगति, नीतिगत सुधारों और निवेश संवर्धन के नवाचारों पर आधारित ऑडियो-वीडियो प्रस्तुति की गई। इस प्रस्तुति में जनविश्वास अधिनियम, SAMPADA 2.0, Cyber Tehsil, RCMS और Labour Case Management System जैसे नवाचारों को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया। कार्यक्रम के अंत में BRAP Felicitation Ceremony का आयोजन हुआ, जिसमें केन्द्रीय मंत्री गोयल ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सम्मानित किया। समारोह में नीति आयोग, डीपीआईआईटी, राज्य सरकारों, उद्योग संगठनों और निवेशक संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधि उपस्थित रहे। इन्वेस्ट एमपी पोर्टल और एकल-विंडो प्रणाली प्रदेश का इन्वेस्ट एमपी पोर्टल, एकल-विंडो प्रणाली, ऑनलाइन मंजूरी और डिजिटल सुविधा सेवाएं प्रदान करती है। राज्य ने 2,600 से अधिक अनुपालनों को युक्तिसंगत या डिजिटाइज़ किया है और 925 पुराने कानूनी प्रावधानों को निरस्त किया है। इसके अलावा 26 अधिनियमों में 108 प्रावधानों को अपराधमुक्त किया गया है, जो दंडात्मक अनुपालन प्रवर्तन से सुविधा-आधारित दृष्टिकोण में बदलाव को दर्शाता है। इन सुधारों का उद्देश्य नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और उत्तरदायित्व को बढ़ावा देना है, जिससे मध्यप्रदेश निवेशकों और उद्योगों के लिए एक आकर्षक गंतव्य बन जाए। मध्यप्रदेश: निवेश के लिए एक उभरता हुआ केंद्र मध्यप्रदेश ने व्यापार-अनुकूल वातावरण बनाने में एक बड़ा कदम उठाया है, जिससे राज्य के निवेश क्लाइमेट में परिवर्तन आया है। राज्य के श्रम सुधार गेम-चेंजर हैं, जो महिलाओं को सभी क्षेत्रों में रात की शिफ्टों में काम करने की अनुमति देते हैं, साथ ही काम के घंटों और ओवरटाइम प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाकर उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता … Read more