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शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए हो रहे लगातार नवाचार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

बच्चों को शिक्षा देने के साथ उनके समग्र विकास के होंगे प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए हो रहे लगातार नवाचार: मुख्यमंत्री डॉ. यादव स्कूल शिक्षा विभाग की कला से समृद्ध शिक्षा है अनुगूंज: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 200 सीटर बालक छात्रावास का किया लोकार्पण भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश में उभरती प्रतिभाओं को स्कूल शिक्षा विभाग ने अनुगूंज के माध्यम से सशक्त मंच दिया है, जो सराहनीय है। स्कूल शिक्षा विभाग बच्चों में शिक्षा के साथ उनके समग्र व्यक्तित्व विकास के लिए प्रतिबद्ध है। डॉ. यादव ने कहा कि सरकारी स्कूलों के विकास के लिए निरंतर नवाचार किए जाते रहेंगे। हमारे कई सरकारी स्कूलों ने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त कर मध्यप्रदेश को गौरवान्वित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय भोपाल में आयोजित अनुगूंज कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा मंत्री  उदय प्रताप सिंह, विधायक  भगवान दास सबनानी, भोपाल महापौर मती मालती राय, अध्यक्ष नगर निगम  किशन सूर्यवंशी, भोपाल जिला पंचायत के उपाध्यक्ष  जाट भी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सुभाष शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय में सुपर -100 योजना में अध्ययन करने वाले 200 सीटर बालक छात्रावास भवन का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि शासकीय शिक्षकों का योगदान वास्तव में अद्भुत है। जिस कर्मठता और दिल से शिक्षक काम करते हैं। निश्चित ही वे बधाई के पात्र हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि दिल्ली में लाल किले के बाद सम्राट विक्रमादित्य नाट्य का मंचल अब भोपाल में 2 और 3 नवम्बर को होने वाला है। उन्होंने बड़ी संख्या में नागरिकों से इसमें शामिल होने का अनुरोध किया। सांदीपनि विद्यालय की हो रही है प्रशंसा मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य हो रहे हैं, अब सांदीपनि विद्यालयों में प्रवेश के लिए विद्यार्थी इच्छुक रहते हैं। यह बदलते दौर का मध्यप्रदेश है। प्रदेश में श्रेष्ठ परीक्षा परिणाम आ रहे हैं। प्रदेश में अब बच्चे प्राइवेट स्कूल से सरकारी स्कूलों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। उन्होंने अनुगूंज कार्यक्रम के लिए मंच सज्जा और आकल्पन की प्रशंसा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सम्राट विक्रमादित्य का उल्लेख करते हुए इन्हें राष्ट्र को स्वतंत्र करवाने से लेकर सुशासन, वीरता और दानशीलता के क्षेत्र में अद्भुत कार्य करने वाला शासक बताया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा हमारे बीच मानो आज भी सम्राट विक्रमादित्य शासन कर रहे हों। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अनुगूंज में शामिल मेंटर्स को सम्मानित किया। जनजाति कल्याण मंत्री कुंवर डॉ. विजय शाह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति: 2020 विद्यार्थी के सर्वागींण विकास पर जोर देते हुए कला और संस्कृति के समावेश की दिशा को प्रशस्त करती है। इसका सर्वश्रेष्ठ उदाहरण अनुगूंज है। सांस्कृतिक कार्यक्रम अनुगूंज के सातवें संस्करण में स्कूल के विद्यार्थियों ने वाद्य संगीत, ओडिसी विधा में आम और चमेली का विवाह, भरतनाट्यम विधा में दशावतारम, कथक नृत्य वाटिका विधा में आमंत्रण सिंहस्थ का और मणिपुरी नृत्य विधा में कृष्ण वन्दना की प्रस्तुति दी। नाटक में बच्चों ने ताना बना टूट ना जाए की प्रस्तुति दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आमंत्रण सिंहस्थ का सहित सभी प्रस्तुतियों की प्रशंसा की। कार्यक्रम में आयुक्त लोक शिक्षण मती शिल्पा गुप्ता ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव और अन्य अतिथियों का स्वागत किया। स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. संजय गोयल ने आभार माना। कार्यक्रम का संचालन स्कूल के बच्चों ने किया। इसके साथ मंच संचालन में  विनय उपाध्याय ने बच्चों का सहयोग किया।  

मध्यप्रदेश में रोजगार का नया मॉडल: एक परीक्षा से सभी पदों पर भर्ती, दो लाख नए पद होंगे सृजित

भोपाल प्रदेश में संघ लोकसेवा आयोग (यूपीएससी) की तरह एक ही परीक्षा से सभी वर्गों के कर्मचारियों- अधिकारियों का चयन किया जाएगा। मुख्यमंत्री डा मोहन यादव ने कहा कि यूपीएससी की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी एक परीक्षा कराई जाएगी, ताकि अलग-अलग पदों को भरने के लिए कई परीक्षाएं न करानी पड़ें। पुलिस भर्ती में तेजी लाने के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड बनाया जा रहा है। पुलिस विभाग में 20 हजार पद भरे जाएंगे। भर्ती प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। आंगनबाड़ी पर्यवेक्षकों के 476 नए पद स्वीकृत किए गए हैं। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिकाओं के 19,504 नए पदों पर पहली बार डिजिटल पद्धति से भर्ती की प्रक्रिया शुरू की जा रही हैं। साथ ही नई भर्ती आरंभ कर दो लाख नए पद भी सृजित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री यादव राज्य कर्मचारी संघ द्वारा मंत्रालय स्थित सरदार वल्लभ भाई पटेल पार्क में आयोजित दीपावली मिलन समारोह को संबोधित कर रहे थे।   कर्मचारियों के पदनाम परिवर्तन के लिए नए आयोग का गठन होगा मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि सरकार की सफलता कर्मचारियों के सहयोग के बिना संभव नहीं है। कर्मचारी प्रदेश के सच्चे कर्मयोगी हैं जो प्रत्येक जनकल्याणकारी योजना को जमीन पर उतारने में अहम भूमिका निभाते हैं। राज्य सरकार कर्मचारियों के हितों के लिए हर कदम पर साथ खड़ी है। राज्य शासन ने एक जनवरी 2005 को या उसके बाद नियुक्त कर्मचारियों के लिए एकीकृत पेंशन योजना लागू करने के लिए समिति गठित करने का निर्णय लिया है, इससे पेंशन की विसंगतियों को दूर करने में मदद मिलेगी। राज्य सरकार सभी वर्गों का समान रूप से ध्यान रख रही है। विभिन्न कर्मचारी संवर्गों की वेतन विसंगति, ग्रेड पे, पदनाम परिवर्तन के लिए सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारियों को सम्मिलित कर नया आयोग बनाया जाएगा। जल्द देंगे पदोन्नति का लाभ     मुख्यमंत्री डा. यादव ने कहा कि कर्मचारियों के हितों का ध्यान रखते हुए राज्य सरकार ने नौ साल से लंबित हाउस रेंट अलाउंस का निराकरण कराया है।     सरकार की मंशा है कि सभी पात्र अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रमोशन हों लेकिन प्रकरण अभी कोर्ट में लंबित है। हमें विश्वास है कि प्रदेश के लगभग चार लाख अधिकारियों-कर्मचारियों को जल्द ही पदोन्नति का लाभ मिलेगा।     मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में केंद्रीय कर्मचारियों के समान कर्मचारियों को भी 55 प्रतिशत महंगाई भत्ते का लाभ दिया है और एरियर का भुगतान भी पांच समान किस्तों में जून से अक्टूबर 2025 तक कर्मचारियों को किया जा चुका है।     जल्द ही राज्य सरकार के दो साल पूरे होने जा रहे हैं, इस मौके पर कर्मचारियों के हित में हर संभव निर्णय लिए जाएंगे।     अब तक कर्मचारियों को स्मार्ट सिटी परियोजना के 366 आवास आवंटित किए जा चुके हैं। नए 300 से अधिक आवास भी बनकर तैयार हैं। जल्द ही इन्हें सिंगल क्लिक के माध्यम से अधिकारियों-कर्मचारियों को आवंटित किया जाएगा। 25 वर्षों में कई बार बदल गईं भर्ती एजेंसियां प्रदेश में पिछले 25 वर्षों में कर्मचारियों की भर्ती के लिए कई बार नई- नई एजेंसियों का गठन हो चुका है, फिर भी गड़बड़ियां नहीं रुक पाई हैं। कांग्रेस सरकार में तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती के लिए मिनी पीएससी हुआ करती थी। इसके बाद कई वर्षों तक मेडिकल और इंजीनियरिंग की प्रवेश परीक्षा करवाने वाले व्यावसायिक परीक्षा मंडल(व्यापम) द्वारा कराई गईं। लेकिन 2013 में परीक्षा भर्ती घोटाला सामने आने के बाद इसका नाम बदलकर पीईबी यानी प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड कर दिया गया। इसके साथ ही कर्मचारी चयन मंडल के जरिए भर्ती कराई जा रही है। कई भर्ती परीक्षाओं का जिम्मा एमपी ऑनलाइन को भी दिया गया है।     एक जनवरी 2026 से होगी वर्ष में एक बार परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की तर्ज पर वर्ष में केवल एक बार परीक्षा होगी और सभी श्रेणी के पदों के लिए प्रावीण्य सूची बना ली जाएगी।     प्रतीक्षा सूची भी एक ही रहेगी। जनवरी, 2026 से भर्ती-चयन की यह प्रक्रिया लागू करने की तैयारी है।     राज्य लोक सेवा आयोग (पीएससी) और कर्मचारी चयन मंडल के माध्यम से होने वाली भर्ती परीक्षाएं अब बार-बार नहीं होंगी।     प्रदेश में द्वितीय और कार्यपालिक तृतीय श्रेणी के पदों की भर्ती पीएससी के माध्यम से होती है। तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के लिए कर्मचारी चयन मंडल परीक्षाएं कराता है।     अभी जैसे-जैसे विभागों की ओर से पद उपलब्ध होते हैं, वैसे-वैसे दोनों एजेंसियां अपने कैलेंडर के हिसाब से परीक्षाएं आयोजित करती हैं। नई प्रक्रिया में युवाओं को बार- बार फीस भी नहीं देनी पड़ेगी।

उपमुख्यमंत्री शर्मा डड़सेना कलार समाज द्वारा आयोजित भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन जन्मोत्सव कार्यक्रम में हुए शामिल

रायपुर : डड़सेना कलार समाज सशक्त रूप से संगठित होकर एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा- उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा उपमुख्यमंत्री  शर्मा डड़सेना कलार समाज द्वारा आयोजित भगवान  सहस्त्रबाहु अर्जुन जन्मोत्सव कार्यक्रम में हुए शामिल उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने भगवान सहस्त्रबाहु चौक में भव्य प्रतिमा स्थापना और सौर्दर्यीकरण की घोषणा की रायपुर  प्रदेश के उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने  कवर्धा शहर के भारत माता चौक में डड़सेना कलार समाज द्वारा आयोजित भगवान  सहस्त्रबाहु अर्जुन जन्मोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शमिल होकर समाज के साथ पारंपरिक और आध्यात्मिक उत्सव साझा किया। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन के तैलचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने रायपुर रोड स्थित भगवान सहस्त्रबाहु चौक का सौंदर्यीकरण तथा भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन की भव्य प्रतिमा की स्थापना करने की घोषणा की। उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि डड़सेना कलार समाज आज सशक्त रूप से संगठित होकर एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। समाज ने शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं, जिससे यह सिद्ध होता है कि नई पीढ़ी जागरूक और लक्ष्य के प्रति समर्पित है। उन्होंने गर्व के साथ उल्लेख किया कि समाज के युवा प्रतियोगी परीक्षाओं में चयनित होकर प्रशासनिक और अन्य महत्वपूर्ण सेवाओं में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं, जो न केवल समाज बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि समाज के वरिष्ठजनों द्वारा दिखाई जा रही एकजुटता, अनुशासन और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण की भावना प्रेरणादायक है। इसी संगठित प्रयास का परिणाम है कि समाज की नई पीढ़ी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रही है तथा राज्य और राष्ट्र के निर्माण में अपना योगदान दे रही है। उपमुख्यमंत्री  शर्मा ने कहा कि समाज के सर्वांगीण उत्थान और विकास से जुड़े हर सार्थक प्रयास में छत्तीसगढ़ सरकार पूर्ण सहयोग प्रदान करेगी। शिक्षा, कौशल विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक सशक्तिकरण जैसे सभी क्षेत्रों में सरकार की योजनाओं और संसाधनों का लाभ समाज को प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि समाज आगे बढ़ने का संकल्प ले तो सरकार सदैव उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष  चंद्रप्रकाश चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष  पवन जायसवाल, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष मती देवकुमारी चंद्रवंशी, मती सतविंदर पाहुजा, पार्षद  दीपक सिन्हा, अध्यक्ष  रूपेन्द्र जयसवाल,  गजेंद्र जयसवाल,  खेलूराम जयसवाल,  आत्माराम जायसवाल,  श्याम लाल, बद्री जायसवाल,  रोहित,  उमराव सहित जनप्रतिनिधि, समाज के नागरिक उपस्थित थे।

जशपुर के युवाओं ने बढ़ाया प्रदेश का मान: हिमालय की 5350 मीटर ऊंचाई पर किया ट्रैकिंग और आइस क्लाइंबिंग

रायपुर  मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने  जशपुर जिले के बगिया स्थित सीएम कैंप कार्यालय में ट्राइबल अल्पाइन एक्सपीडिशन हिमालय 2025 में सफलता प्राप्त करने वाले जशपुर जिले के पर्वतारोहियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। मुख्यमंत्री  साय ने युवाओं के साहस, अनुशासन और अदम्य इच्छाशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि जशपुर के युवाओं ने यह साबित किया है कि दृढ़ इच्छाशक्ति, लगन और आत्मविश्वास से किसी भी महान लक्ष्य को प्राप्त करना असंभव नहीं है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि इस उल्लेखनीय उपलब्धि से जशपुर और पूरे प्रदेश के आदिवासी युवाओं में एडवेंचर स्पोर्ट्स के प्रति नई जागरूकता और उत्साह पैदा होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों से युवाओं में आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और सामूहिक भावना का विकास होता है। उल्लेखनीय है कि जशपुर जिले के युवाओं ने हिमाचल प्रदेश में आयोजित ट्राइबल अल्पाइन एक्सपीडिशन हिमालय 2025 में भाग लेकर दुहांगन वैली में 5350 मीटर ऊंचाई तक सफलतापूर्वक आरोहण किया और छत्तीसगढ़ राज्य का गौरव बढ़ाया। अभियान के दौरान दल के सदस्यों ने ट्रैकिंग, रॉक क्लाइंबिंग और आइस क्लाइंबिंग जैसी कठिन व रोमांचक गतिविधियों में अपनी अद्वितीय दक्षता और साहस का परिचय दिया। यह दल जिला प्रशासन, जशपुर के सहयोग से सितंबर माह में रवाना हुआ था। युवाओं ने मुख्यमंत्री  साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन और प्रशासन के सहयोग एवं प्रोत्साहन से ही उन्हें हिमालय अभियान का हिस्सा बनने और यह उपलब्धि हासिल करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि इस अभियान से मिले अनुभव और आत्मविश्वास से जिले के अन्य युवा भी साहसिक खेलों में भागीदारी के लिए प्रेरित होंगे। युवाओं ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि शासन के सहयोग से आदिवासी वनांचल क्षेत्र जशपुर से हिमालय अभियान में भाग लेने का अवसर मिला। वहां विभिन्न प्रकार की एडवेंचर गतिविधियों — ट्रैकिंग, रॉक क्लाइंबिंग और आइस क्लाइंबिंग — में हिस्सा लेकर उन्होंने कठिन परिस्थितियों में टीम भावना और धैर्य का अभ्यास किया। उल्लेखनीय है कि जनजातीय हिमालय पर्वतारोहण अभियान 2025 की शुरुआत एक स्थानीय प्रशिक्षण पहल के रूप में हुई थी, जो सामूहिक विश्वास, सहयोग और समर्पण से एक सशक्त अभियान में परिवर्तित हुई। इस पहल ने न केवल युवाओं में आत्मविश्वास और रोमांच की भावना जगाई, बल्कि छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सशक्त बनाया।

जशपुर को मिला नया खेल केंद्र: सन्ना पंडरापाठ में एनटीपीसी के सहयोग से बनेगी तीरंदाजी अकादमी

रायपुर : जशपुर जिले के सन्ना पंडरापाठ में तीरंदाजी अकादमी स्थापित करने हेतु एनटीपीसी के साथ हुआ एग्रीमेंट 20 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत से बनेगा आधुनिक आर्चरी सेंटर छत्तीसगढ़ के युवाओं को तीरंदाजी के क्षेत्र में आगे बढ़ने का मिलेगा अवसर – मुख्यमंत्री  साय रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की उपस्थिति में आज जशपुर जिले के बगिया स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में बगीचा विकासखंड अंतर्गत सन्ना पंडरापाठ में तीरंदाजी अकादमी स्थापित करने के लिए जिला प्रशासन और एनटीपीसी के बीच एग्रीमेंट किया गया। एनटीपीसी द्वारा यह परियोजना कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के तहत 20 करोड़ 53 लाख रुपए की लागत से संचालित की जाएगी। इस अवसर पर कलेक्टर  रोहित व्यास और एनटीपीसी के अपर महाप्रबंधक (मानव संसाधन)  बिलाश मोहंती उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि एनटीपीसी द्वारा सीएसआर के माध्यम से आर्चरी सेंटर की स्थापना के लिए 20 करोड़ 53 लाख रुपए की राशि प्रदान की जा रही है, यह अत्यंत हर्ष का विषय है। उन्होंने कहा कि जशपुर क्षेत्र के युवाओं में तीरंदाजी के प्रति अपार संभावनाएं हैं, और इस सेंटर के आरंभ होने से उन्हें प्रशिक्षण और संसाधनों की बड़ी सुविधा प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि वर्ष 2036 में भारत ने ओलंपिक खेलों की मेज़बानी के लिए दावेदारी प्रस्तुत की है। हमारी कोशिश होगी कि छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी राष्ट्रीय टीम में अधिकतम संख्या में शामिल हों और पदक जीतकर प्रदेश व देश का नाम रोशन करें। यह तभी संभव है जब हम आर्चरी सेंटर जैसे और प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करें। ऐसे केंद्रों के माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान कर उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने घोषणा की है कि ओलंपिक में स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को 3 करोड़ रुपए, रजत पदक विजेताओं को 2 करोड़ रुपए और कांस्य पदक प्राप्त करने वालों को 1 करोड़ रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री  साय ने यह भी कहा कि राज्य खेल अलंकरण समारोह को पुनः आयोजित किए गए हैं और इसके माध्यम से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि राज्य में ‘खेलो इंडिया’ के नए प्रशिक्षण केंद्र आरंभ किए गए हैं और जनजातीय क्षेत्रों में खेल अधोसंरचना के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा देश प्राचीन काल से ही तीरंदाजी में अग्रणी रहा है। महाभारत और रामायण जैसे हमारे पवित्र ग्रंथों के नायक भी इस विधा में पारंगत रहे हैं। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए हमें आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षित मार्गदर्शन के माध्यम से नए आर्चर्स तैयार करने होंगे। उल्लेखनीय है कि सन्ना पंडरापाठ में 10.27 एकड़ भूमि में यह अकादमी स्थापित की जाएगी। यहां आउटडोर तीरंदाजी रेंज, खिलाड़ियों के लिए छात्रावास, स्टाफ क्वार्टर, खिलाड़ियों की सुविधा हेतु भवन, जैविक खेती के लिए छायादार नर्सरी, पुस्तकालय, चिकित्सा केंद्र, कौशल विकास केंद्र, हर्बल वृक्षारोपण तथा प्रशिक्षण मैदान जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

मध्यप्रदेश में बढ़ेंगे मतदान केंद्र, इलेक्शन कमीशन को भेजा गया प्रस्ताव

भोपाल मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के साथ ही मध्य प्रदेश में करीब 8001 नए पोलिंग बूथ (मतदान केंद्र) भी बनाए जाएंगे। इसका प्रस्ताव तैयार करके मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने भारत निर्वाचन आयोग को भेज दिया है। प्रदेश में वर्तमान में 65 हजार 14 मतदाता बूथ हैं। वर्तमान में औसतन 1500 मतदाताओं पर एक बूथ है। चुनाव आयोग की नई गाइडलाइन के मुताबिक अब किसी भी पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता ही रखे जा सकेंगे। इस लिहाज से एमपी में कुल बूथों की संख्या 73 हजार 15 हो जाएगी। राजनीतिक दलों को भी बढ़ानी होगी बीएलए की संख्या राजनीतिक दलों की ओर से 1,18,500 बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) नियुक्त किए गए हैं। भाजपा के निर्वाचन आयोग समन्वय विभाग के प्रदेश संयोजक एसएस उप्पल ने बताया कि भाजपा के प्रदेश में 64 हजार 500 बीएलए है और कांग्रेस के 54 हजार बीएलए हैं। बूथों की संख्या बढ़ने से राजनीतिक दलों को भी अपने बीएलए बढ़ाने होंगे। उनका प्रशिक्षण से लेकर उनकी जानकारी मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय को देनी होगी। इसी आधार पर वे आगामी चुनाव में पार्टी के लिए कार्य कर पाएंगे।   इसलिए पड़ी जरूरत 1500 मतदाताओं पर एक बूथ की व्यवस्था है लेकिन इतनी संख्या होने पर समय से मतदान की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है। कई बार देर रात तक मतदान की स्थिति देखी गई है। ऐसे में निर्वाचन आयोग ने इसकी नई गाइडलाइन तय कर किसी भी पोलिंग बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता ही रखे जाने का निर्णय लिया। राजनीतिक पार्टियों ने क्या कहा? भाजपा प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल ने कहा कि निर्वाचन आयोग की तैयारियों के साथ हमारी भी तैयारी है। हमारे अभी करीब 64 हजार 500 बीएलए है। इनकी चुनावी प्रक्रिया के माध्यम से नियुक्ति की गई है। जैसे ही निर्वाचन आयोग बूथों की संख्या बढ़ाएगा, हम अपने बीएलए भी उसी अनुरूप बनाएंगे। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के सलाहकार केके मिश्रा ने कहा कि निर्वाचन आयोग के हर पारदर्शी निर्णय का कांग्रेस पार्टी पालन करने को तैयार है। हमारी पूरी तैयारियां भी है, किंतु निर्वाचन आयोग को अपनी ईमानदार और निष्पक्षता वाली शैली को देश के सामने प्रस्तुत करना होगा।

विशेष आर्टिकल :एक जिला एक उत्पाद: स्थानीय हुनर से वैश्विक पहचान तक उत्तर प्रदेश की सफलता गाथा

विशेष आर्टिकल : एक जिला एक उत्पाद (ODOP) UP की आर्थिक क्रांति का प्रतीक – स्थानीय कारीगरों से वैश्विक बाजार तक की यात्रा लखनऊ उत्तर प्रदेश सरकार की एक जिला एक उत्पाद (ODOP) योजना ने न केवल राज्य के पारंपरिक उद्योगों को नई पहचान दी है, बल्कि लाखों लोगों की जिंदगी को बदलकर एक आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की नींव रखी है। 2018 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा शुरू की गई यह योजना अब 75 जिलों में 74 उत्पादों (मई 2025 में 12 नए उत्पाद जोड़े गए) को कवर कर रही है, जो राज्य को 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से ले जा रही है। यह योजना न केवल आर्थिक विकास का माध्यम बनी है, बल्कि स्थानीय कारीगरों, किसानों और उद्यमियों को वैश्विक पटल पर चमकाने का जरिया भी। आइए, जानते हैं कैसे ODOP ने उत्तर प्रदेश को एक नई ऊंचाई दी है। ODOP योजना: एक नजर में ODOP का मूल मंत्र है – हर जिले की अनूठी पहचान को ब्रांड बनाना। योजना के तहत प्रत्येक जिले का एक विशेष उत्पाद चुना जाता है, जैसे आगरा का चमड़ा, लखनऊ की चिकनकारी, मुरादाबाद का पीतल उद्योग, या गोरखपुर की टेराकोटा। सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली सुविधाओं में कौशल विकास, बिना गारंटी ऋण, मार्केटिंग सहायता, ब्रांडिंग और निर्यात प्रोत्साहन शामिल हैं। मुख्य घटक उद्देश्य कौशल विकास 80,000+ कारीगरों को प्रशिक्षण, उपकरण वितरण। वित्तीय सहायता ₹50,000 से ₹5 लाख तक ऋण, 35% तक सब्सिडी। मार्केटिंग ODOP मार्ट पोर्टल, फ्लिपकार्ट जैसे प्लेटफॉर्म पर बिक्री। इंफ्रास्ट्रक्चर 10 कॉमन फैसिलिटी सेंटर (CFC) पूर्ण, 18 निर्माणाधीन। यह योजना 'आत्मनिर्भर भारत' का मजबूत स्तंभ है, जो स्थानीय संसाधनों को वैश्विक बाजार से जोड़ती है। ODOP से प्रदेश में आर्थिक विकास: आंकड़ों की कहानी ODOP ने उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति दी है। 2017-18 में राज्य के निर्यात ₹88,967 करोड़ थे, जो 2022-23 में बढ़कर ₹1.74 लाख करोड़ हो गए – यानी लगभग दोगुना। 2025 तक निर्यात में 76% की वृद्धि हुई है, जबकि कुल निर्यात ₹2 लाख करोड़ को पार कर चुका है। • रोजगार सृजन: 40 लाख+ लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार, जिसमें MSME क्षेत्र में 2 करोड़ नौकरियां शामिल हैं। पलायन रुका – अब 90% युवा राज्य में ही रोजगार पा रहे हैं। • निवेश आकर्षण: 2017 से अब तक ₹1,88,000 करोड़ से अधिक निवेश आया। • वैश्विक पहुंच: 15 ODOP उत्पादों को GI टैग मिला, 10 और प्रक्रिया में। फ्लिपकार्ट पर अप्रैल 2020 से अक्टूबर 2021 तक ₹1,000 करोड़ से अधिक की 2 करोड़ ODOP उत्पाद बिके। G20 समिट में PM मोदी ने ODOP उत्पाद उपहार दिए। ODOP-2.0 के तहत ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता सुधार पर जोर दिया जा रहा है, जो 2024-25 में जिला-वार लक्ष्य निर्धारित कर रहा है। यह योजना राज्य को $1 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर ले जा रही है। ODOP से बदली जिंदगियां: प्रेरक सफलता कहानियां ODOP ने साधारण कारीगरों को उद्यमी बना दिया है। हार्दोई जिले के इकबाल हुसैन की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। पारंपरिक हथकरघा व्यवसाय करने वाले इकबाल ने ODOP के तहत ₹10 लाख का ऋण लिया और कुर्ता-पजामा निर्माण शुरू किया। आज वे 50 बुनकरों को रोजगार दे रहे हैं, मासिक टर्नओवर ₹15 लाख है। "पहले बाजार की कमी थी, अब ODOP मार्ट और निर्यात से हमारी उत्पाद वैश्विक हो गए," वे कहते हैं। इसी तरह, हरदोई के ही महाशर हुसैन ने ₹25 लाख ऋण से तौलिया फैक्ट्री लगाई, जो गांव में 30 महिलाओं को रोजगार दे रही है। मुरादाबाद के पीतल कारीगरों ने CFC की मदद से निर्यात दोगुना किया, जबकि आगरा के चमड़ा उद्योग में हजारों युवाओं को कौशल प्रशिक्षण मिला। ये कहानियां साबित करती हैं कि ODOP ने न केवल आय बढ़ाई, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण भी लाया – खासकर महिलाओं और ग्रामीण युवाओं के लिए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रेरक भाषण: ODOP को आत्मनिर्भर भारत का आधार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ODOP को बार-बार अपनी दूरदृष्टि का प्रतीक बताया है। 8 फरवरी 2024 को लखनऊ में ODOP CFC उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा, "ODOP योजना ने पारंपरिक उद्योगों को बाजार में प्रवेश दिलाया और तकनीकी समर्थन दिया। यह आत्मनिर्भर भारत का आधार स्तंभ बन चुकी है, जो उत्तर प्रदेश को गौरवान्वित कर रही है।" उन्होंने बताया कि 2018 से पहले कारीगरों को 'इंस्पेक्टर राज' का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब युवा उद्यमी बन रहे हैं। 24 जनवरी 2024 को उत्तर प्रदेश स्थापना दिवस पर अवध शिल्पग्राम में बोलते हुए सीएम योगी ने कहा, "पहले निर्यात ₹86,000 करोड़ था, ODOP ने इसे ₹2 लाख करोड़ कर दिया। चीनी नकली उत्पादों की जगह अब ODOP उत्पाद बाजार में हैं।" G20 समिट के संदर्भ में उन्होंने कहा, "PM मोदी ने ODOP उत्पादों को वैश्विक मंच पर उपहार बनाकर हमारी योजना को अंतरराष्ट्रीय पहचान दी।" 21 सितंबर 2025 को 'सेवा पखवाड़ा' में उन्होंने जोर दिया, "ODOP ने MSME में 2 करोड़ नौकरियां पैदा कीं, जो पलायन रोकने का माध्यम है।" योगी जी के ये उद्गार ODOP को सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक प्रगति का संगम बनाते हैं। भाजपा सरकार की ODOP: लाखों लोगों का लाभार्थी, राष्ट्रीय मॉडल भाजपा सरकार की यह योजना लाखों लोगों के जीवन का आधार बनी है। 80,000 कारीगरों को प्रशिक्षण, 40 लाख रोजगार, और ₹2 ट्रिलियन निर्यात – ये आंकड़े साबित करते हैं कि ODOP ने बड़े पैमाने पर लाभ पहुंचाया। योजना की सफलता ने अन्य राज्यों को प्रेरित किया, और केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय स्तर पर अपनाया। पारदर्शी ऋण वितरण, डिजिटल मार्केटिंग (ODOP मार्ट पोर्टल), और GI टैगिंग ने भ्रष्टाचार मुक्त विकास सुनिश्चित किया। यह कदम 'वोकल फॉर लोकल' को साकार करता है, जो गरीबी उन्मूलन और समावेशी विकास का प्रतीक है। निष्कर्ष: ODOP – उत्तर प्रदेश का गौरव, भारत का भविष्य ODOP योजना ने उत्तर प्रदेश को आर्थिक महाशक्ति बनाने की राह दिखाई है। कारीगरों की बदली किस्मत, दोगुने निर्यात, और करोड़ों नौकरियां – यह सब योगी सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति का परिणाम है। आइए, हम सब मिलकर 'लोकल को ग्लोबल' बनाएं। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट odopup.in पर जाएं।

10 नवंबर को राहुल गांधी पहुंचेंगे पचमढ़ी, जिला अध्यक्षों से करेंगे चर्चा — MP में पहली बार करेंगे नाइट स्टे

भोपाल लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 10 नवंबर को मध्यप्रदेश आएंगे। वे पचमढ़ी में जिला अध्यक्षों और पदाधिकारी से चर्चा करेंगे। राहुल गांधी पहली बार प्रदेश में रात बिताएंगे। राहुल गांधी के पचमढ़ी दौरे को लेकर मध्यप्रदेश कांग्रेस दफ्तर में बैठक जारी है। बैठक में राहुल गांधी के दौरे को लेकर रोड मैप बन रहा है। बता दें कि 2 नवंबर से 11 नवंबर तक पचमढ़ी में ट्रेनिंग होनी है। प्रदेश के नवनियुक्त जिला अध्यक्षों की ट्रेनिंग होगी। राहुल गांधी पचमढ़ी जिला अध्यक्षों के ट्रेनिंग में शामिल होंगे।   30- 32 साल से कांग्रेस को निपटा रहे मामले पर बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा- राहुल गांधी अपनी जिंदगी में पहली बार मध्यप्रदेश की धरती पर रात बिताने आ रहे हैं। 60 – 65 साल के राहुल गांधी 30- 32 साल से कांग्रेस को निपटा रहे हैं। 30-32 साल में मध्यप्रदेश में कभी नहीं रुके, पचमढ़ी है इसलिए रुक रहे हैं और कहीं होता तो रुकते भी नहीं। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट चुका यह फुरफुर वाले नेता है। यही बोलने आते हैं लंगड़ा है यह घोड़ा है, कौन से कार्यकर्ताओं से बात करेंगे। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट चुका है। नियुक्ति से लेकर दायित्वों में कांग्रेसी ठगे गए। ना राजनीतिक भविष्य है ना व्यक्तिगत उद्धार हो रहा है, न ही पद मिल रही ना ही प्रतिष्ठा, ऐसे में राहुल गांधी का आना व्यर्थ है।

गुजरात में चमकेगा मध्य प्रदेश पुलिस का जलवा, राष्ट्रीय एकता दिवस परेड में 334 जवान होंगे शामिल

भोपाल गुजरात में मध्य प्रदेश पुलिस का तराना गूंज रहा है। दरअसल, गुजरात के गांधीनगर एवं केवड़िया में आयोजित राष्ट्रीय एकता दिवस परेड-2025 में एमपी पुलिस के कुल 334 जवान भाग लेंगे। यह दल अदम्य उत्साह, अनुशासन और देशभक्ति की भावना के साथ राज्य का प्रतिनिधित्व करेगा। मध्यप्रदेश पुलिस का कॉन्टिजेंट गांधीनगर और केवड़िया में रहकर प्रशिक्षण, रिहर्सल और परेड अभ्यास में संलग्न है। जवानों ने प्रतिकूल परिस्थितियां एवं गहन अभ्यास कार्यक्रमों के बावजूद अथक परिश्रम और एकजुटता के साथ अपने प्रदर्शन की तैयारी की है। दल गुजरात पहुंच गया है। 31 अक्टूबर 2025 को आयोजित एकता दिवस परेड के दौरान मध्यप्रदेश पुलिस के कॉन्टिजेंट अपनी अनुशासित चाल, सटीक कमांड तथा उत्कृष्ट तालमेल से सभी को प्रभावित करेगा। परेड दल का नेतृत्व परेड कमाण्डर उपुअ अन्नपूर्णा सिरसाम, सहायक कमाण्डर के रूप में उपनिरीक्षक संजय चौहान एवं उपनिरीक्षक चंचल रोमड़े दायित्व संभालेंगे। सहयोगार्थ उपुअ निति दण्डोत्या, उपनिरीक्षक राजवीर विक्रम और उपनिरीक्षक रितेश सिसौदिया महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। कॉन्टिजेंट में प्लाटून संख्या 144 एवं बैण्ड बल 72 का संयोजन रहेगा।

गंगा महोत्सव 2025: योगी सरकार के प्रयास से काशी के घाटों पर बजेगा सुर-ताल का संगम

वाराणसी देव दीपावली से पहले काशी के घाटों पर संगीत, नृत्य व लोक कलाओं की संगीतमय सरिता बहेगी। माँ जान्हवी के पावन तट पर इस वर्ष गंगा महोत्सव का आयोजन 1 से 4 नवम्बर तक किया जाएगा। योगी सरकार के प्रयास से राजघाट पर देशभर के नामचीन कलाकार अपनी प्रस्तुति देकर काशी की इस सांस्कृतिक परंपरा को और भव्य बनाएंगे जिनमें शास्त्रीय, भक्ति तथा लोक संगीत का अद्भुत संगम दिखाई देगा। इस महोत्सव में गायक हंसराज रघुवंशी अपने भजनों से श्रोताओं को भक्ति रस से ओत-प्रोत करेंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी अपने लोक गायन से उत्तर भारत की लोक परंपराओं को जीवंत करेंगी। पद्मश्री गीता चन्द्रन का भरतनाट्यम नृत्य भी कार्यक्रम का विशेष आकर्षण रहेगा। वहीं, नमो घाट पर काशी सांसद सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता के प्रमुख कलाकार भी अपनी प्रस्तुति देंगे। कई मायनों में विशिष्ट होगा आयोजन संयुक्त निदेशक पर्यटन दिनेश कुमार ने बताया कि चार दिवसीय इस उत्सव में गीत, संगीत, नृत्य और वादन की गंगा बहेगी। गंगा महोत्सव के मंच पर लोक और शास्त्रीय संगीत की स्वर लहरियां गूंजेंगी तो साथ ही पारंपरिक नृत्य शैलियों की झलक भी देखने को मिलेगी। महोत्सव में विशेष रूप से गायक हंसराज रघुवंशी आयोजन के अंतिम दिन अपने भजनों से श्रद्धा और भक्ति का भाव जगाएंगे। वहीं, पद्मश्री मालिनी अवस्थी 3 अक्टूबर को लोक गायन से काशी की धरती पर उत्तर भारत की लोक परंपराओं को सजीव करेंगी। इसके अतिरिक्त, 2 अक्टूबर को पद्मश्री गीता चंद्रन भरतनाट्यम की प्रस्तुति देंगी। गंगा महोत्सव के अंतर्गत होने वाली प्रस्तुतियां शाम 4 बजे से शुरू होंगी। READ MORE: CM योगी ने किया चरण सुहावे गुरु चरण यात्रा का स्वागत, कहा- गुरु परंपरा ने भारत को केवल आस्था नहीं, बल्कि… काशी गंगा महोत्सव ये प्रमुख कलाकार देंगे प्रस्तुति प्रथम दिन, 1 नवंबर पं० माता प्रसाद मिश्र एवं पं० रविशंकर मिश्र–कथक युगल नृत्य कविता मोहन्ती–ओडिसी नृत्य विदुषी श्वेता दुबे–गायन विदुषी कमला शंकर–स्लाइड गिटार डॉ० रिपि मिश्र–शास्त्रीय गायन डॉ० दिवाकर कश्यप एवं डॉ० प्रभाकर कश्यप–उपशास्त्रीय गायन रवि शर्मा एवं समूह–ब्रज लोक नृत्य एवं संगीत पं० नवल किशोर मल्लिक–शास्त्रीय गायन READ MORE: CM योगी के विजन को मिल रही उड़ान, उत्तरप्रदेश के हवाई अड्डों से 60 लाख से अधिक यात्रियों ने किया सफर दूसरा दिन, 2 नवंबर शिवानी शुक्ला–गायन प्रवीण उद्भव–तालयात्रा राजकुमार तिवारी उर्फ राजन तिवारी–गायन डॉ० अर्चना आदित्य महास्कर–गायन सवीर, साकार कलाकृति–पारम्परिक लोक नृत्य वन्दना मिश्रा–गायन प्रो० पं० साहित्य नाहर एवं डॉ० पं० संतोष नाहर–सितार एवं वायलिन जुगलबन्दी ओम प्रकाश–भजन गायन पद्मश्री गीता चन्द्रन–भरतनाट्यम तीसरा दिन 3 नवंबर मीना मिश्रा–गायन विशाल कृष्ण–कथक नृत्य दिव्या शर्मा–हिन्दुस्तानी खयाल गायकी राकेश कुमार–जनजातीय लोक नृत्य इन्दु गुप्ता–लोक गायन चेतन जोशी–बांसुरी वादन विदुषी कविता द्विवेदी–ओडिसी नृत्य पद्मश्री मालिनी अवस्थी–लोक गायन चौथा दिन, 4 नवंबर डॉ० शुभांकर डे–गायन डॉ० प्रेम किशोर मिश्र एवं साथी-सितार, सरोद जुगलबन्दी व गायन राहुल रोहित मिश्र–शास्त्रीय गायन रूपन सरकार समन्ता–शास्त्रीय गायन वासुमती बद्रीनाथन–शास्त्रीय गायन शिवानी मिश्रा–कथक समूह नृत्य मानसी रघुवंशी–गायन हंसराज रघुवंशी–भजन गायन