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मध्य प्रदेश पहला ऐसा राज्य, जहां भोपाल में स्थापित होगी एयरोप्लेन डिस्मेंटल यूनिट; जर्मन कंपनी से बातचीत जारी

भोपाल  पड़ोसी राज्यों में मप्र पहला ऐसा राज्य है जो एयरोप्लेन डिस्मेंटल यूनिट (टियरडाउन यूनिट) स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जर्मनी की एक कंपनी से इसके लिए बातचीत चल रही है। यह यूनिट देश में एयरोप्लेन की कमी को दूर करने में अहम रोल अदा करेगी। भविष्य में मप्र को एयरोप्लेन का रख-रखाव, मरम्मत और ओवरहाल (एमआरओ) यूनिट भी मिल सकती है। जब किसी भी राज्य में ये दोनों यूनिट हो तो प्लेन का निर्माण करने वाली कंपनियां उत्पादन की दिशा में कदम रख सकती है। डिस्मेंटल यूनिट लगाने की इच्छुक जर्मनी कंपनी के प्रमुखों से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की दो दौर की बातचीत हो चुकी है। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री उक्त यूनिट की स्थापना को लेकर काफी प्रयासरत है। इसकी शुरुआत जर्मनी यात्रा के दौरान हुई थी। तभी मुख्यमंत्री से उक्त यूनिट में रूचि रखने वाली कंपनी के प्रमुखों की बातचीत हुई थी, इसके बाद जर्मनी का एक दल हाल में मध्यप्रदेश के भ्रमण पर आया था। अधिकारियों की माने तो सरकार कंपनी को जमीन और कई सुविधाएं देने को तैयार है। इस यूनिट को सरकार 70 से 100 एकड़ जमीन देने के लिए लगभग तैयार है। कंपनी की शर्त है कि उन्हें भोपाल के नजदीक जमीन दी जाए, ताकि उक्त यूनिट के लिए जरूरी अमले को आवागमन में आसानी हो। हालांकि सरकार के पास भोपाल के आसपास जमीन की उपलब्धता बहुत कम है। क्या होती है एयरोप्लेन डिस्मेंटल यूनिट यह हवाई जहाज को विघटित करने वाली इकाई अर्थात टियर डाउन इकाई कहलाती है। विशेषज्ञों के मुताबिक यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी विमान को व्यवस्थित रूप से अलग किया जाता है। इसमें सबसे अहम, उपयोगी पुर्जों अथवा उपकरणों को बचाना प्रमुख चुनौती होती है। इस प्रक्रिया में खतरनाक सामग्रियों को हटाना, इंजन और लैंडिंग गियर जैसे प्रमुख पुर्जों को अलग करना, फिर शेष संरचना को पुनर्चक्रण के लिए छोटे टुकड़ों में काटना शामिल होता है। प्लेन डिस्मेंटल यूनिट से प्रदेश को ये होंगे फायदे प्लेन एक बड़ा स्ट्रक्चर होता है, जिसे नष्ट करने की प्रक्रिया बहुत लंबी और जटिल होती है। इसमें कई महीने लगते हैं और सैंकड़ों कर्मचारियों की जरुरत होती है, जो कि प्रभावी तकनीकी से दक्ष होते हैं। यूनिट स्थापित की जाती है तो एयरोप्लेन के निर्माण से जुड़े कामों में दक्ष कर्मचारियों का मूवमेंट बढ़ेगा। प्लेन में कई कलपुर्जे होते हैं, जिनकी औसत आयु अलग-अलग होती है। ये बहुत महंगे और आसानी से उपल–ब्ध नहीं होने वाले उपकरणों में शामिल होते हैं। जब कई अलग-अलग कारणों से प्लेन को ऑपरेशन से बाहर किया जाता है तब भी उक्त प्लेन में उपयोग किए जाने योग्य कई उपकरण होते हैं, इन्हें सुरक्षित निकालना और उपयोग करना बड़ी चुनौती होता है।

पंजाब की फसल कटाई में धीमी रफ्तार, 67% प्रमुख एरिया में अभी बाकी है धान की कटाई

चंडीगढ़ पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की  जारी रिपोर्ट के अनुसार अभी फिलहाल सिर्फ 33 प्रतिशत एरिया में धान की फसल कटाई हुई इसलिए फसल के 67 प्रतिशत प्रमुख एरिया की कटाई बाकी है। फसल में नमी की समस्या भी अब पहले से कम हो गई है जिस कारण अगले दो सप्ताह के दौरान किसानों कटाई पर जोर रहेगा। बाढ़ व बारिश के कारण पहले ही धान की कटाई में देरी हुई है। इसका असर पराली जलाने के मामलों पर भी देखने को मिलेगा। पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) और पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) चंडीगढ़ की संयुक्त टीम की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में दिवाली से पहले 17 अक्तूबर को पराली जलाने के 37 मामले सामने आए थे लेकिन 21 अक्तूबर को यह केस बढ़कर 109 तक पहुंच गए। इस तरह मामलों में पहले से ही बढ़ोतरी हुई है।  हरियाणा में पराली के 6 मामले पकड़ में आए थे जो 21 अक्तूबर को बढ़कर 18 एक हो गए। पीयू-पीजीआई की टीम सैटेलाइट से पराली जलाने के मामले पर नजर रख रही है। अगर कुल मामलों की बात की जाए तो 1 सितंबर से लेकर 21 अक्तूबर तक पंजाब में पराली के 583, हरियाणा में 301 और पंजाब पाकिस्तान में 3935 केस अब तक रिपोर्ट किए गए हैं। पंजाब के चार जिलों में अब तक सबसे अधिक कटाई प्रदेश के चार जिलों में ही धान की अब तक सबसे अधिक कटाई हुई है। अमृतसर में 1.80 लाख एरिया में धान की रोपाई हुई थी और अब तक 70 प्रतिशत एरिया में फसल की कटाई हो चुकी है। इसी तरह गुरदासपुर में 1.55 लाख हेक्टेयर एरिया में फसल की रोपाई हुई थी, जबकि 62.74 प्रतिशत एरिया में फसल की कटाई की जा चुकी है। इसी तरह रोपड़ में 72 प्रतिशत और तरनतारन में 67.95 प्रतिशत कटाई का काम पूरा हो चुका है। अब इन जिलों में कटाई पकड़ेगी जोर लुधियाना में सबसे अधिक 2.57 लाख हेक्टेयर एरिया में धान की फसल लगाई गई थी लेकिन अभी तक जिले में सिर्फ 26% एरिया में ही फसल कटाई हो पाई है। इसके अलावा बठिंडा में 2.14 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई जबकि सिर्फ 13% एरिया में कटाई हो पाई है। श्री मुक्तसर साहिब 31%, संगरुर 17%, मोगा में 8%, फिरोजपुर 37% और जालंधर में 23% फसल की कटाई हो सकी है। आने वाले दिनों में इन जिलों में कटाई रफ्तार पकड़ेगी जिससे पराली जलाने के मामले भी बढ़ सकते हैं। 175 लाख मीट्रिक टन खरीद का लक्ष्य सरकार ने इस बार 175 लाख मीट्रिक टन खरीद धान की खरीद का लक्ष्य तय किया है। बाढ़ के कारण प्रदेश में फसल का काफी नुकसान हुआ है। अब तक 5 लाख एकड़ एरिया में फसल खराब हो चुकी है जिस कारण इस लक्ष्य को भी कम किया गया है। पहले सरकार ने 180 लाख मीट्रिक टन निर्धारित किया था। धान की खरीद के लिए इस बार 1822 नियमित केंद्र स्थापित किए गए हैं।

मध्य प्रदेश के 9 जिलों में गधों का सफाया, चीन के प्रभाव पर सवाल

भोपाल  क्या मध्य प्रदेश में अब गधे दुर्लभ हो जाएंगे? ये सवाल इसलिए भी खास हो जाता है क्योंकि तीन दशक से भी कम समय में इनकी संख्या में 94% की कमी आई है। एमपी में गधों की जमसंख्या में तेजी से गिरावट देखी गई है। नई रिपोर्ट बताती है कि हिंदुस्तान का दिल कहे जाने वाले इस प्रदेश में अब सिर्फ 3,052 गधे बचे हैं, जो कि 1997 में 49,289 की संख्या से एक बड़ी गिरावट है। राज्य के 55 में से नौ जिलों में एक भी गधा नहीं पाया गया है,जो इस बात का संकेत है कि यह जानवर,जो कभी ग्रामीण भारत में परिवहन और व्यापार का मुख्य आधार था,लगभग पूरी तरह से गायब हो चुका है। गधों के गायब होने का कारण टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार,गधों के गायब होने के पीछे अभी तक कोई खास अध्ययन नहीं हुआ है,लेकिन गुड़गांव के एक पशु अधिकार कार्यकर्ता नरेश कादियान ने केंद्र सरकार से गधों को लुप्तप्राय प्रजाति घोषित करने का आग्रह किया है। वह चेतावनी देते हैं कि चीन की गधों की खाल की मांग ही इस गिरावट का कारण बन रही है। वह चीन के एजियाओ उद्योग को इसके लिए दोषी मानते हैं। इस उद्योग में गधों की खाल को उबालकर एक जिलेटिन निकाला जाता है जिसका इस्तेमाल पारंपरिक टॉनिक,कामोत्तेजक और एंटी एजिंग क्रीम बनाने में किया जाता है। इसी वजह से यह प्रजाति विलुप्त होने की कगार पर पहुंच रही है। आधिकारिक आंकड़े आधिकारिक आँकड़ों के अनुसार नर्मदापुरम में सबसे ज्यादा (332) गधे हैं। इसके बाद छतरपुर (232),रीवा (226) और मुरैना (228) का नंबर आता है। दूसरी ओर विदिशा में जहां कभी 6,400 से ज्यादा गधे थे,अब वहां सिर्फ 171 बचे हैं और भोपाल में केवल 56 । डिंडोरी, निवाड़ी, सिवनी, हरदा और उमरिया जैसे जिलों में एक भी गधा दर्ज नहीं हुआ है,जो स्थानीय रूप से उनके विलुप्त होने की पुष्टि करता है। अन्य पशुओं की स्थिति जनगणना से पशुधन की अन्य श्रेणियों में भी बड़े रुझान सामने आते हैं। मध्य प्रदेश में कुल 3.75 करोड़ जानवर हैं, जिनमें शामिल हैं:

चांद-तारे नहीं, जनता के बीच किया निशाना: नीतीश ने तेजस्वी के वादे पर साधा निशाना

पटना बिहार विधानसभा चुनाव के बीच जीविका योजना को लेकर वादों और दावों का दौर चल पड़ा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नेता तेजस्वी यादव के जीविका दीदी को लेकर किए गए चुनावी वादे पर तंज कसा है। सीएम ने गुरुवार को कहा कि वो चांद तारे तोड़ लाने के लिए बात कर रहे हैं। जीविका दीदियों और बिहार की महिलाओं का हितैषी दिखने की कोशिश कर रहे हैं। मगर सच यह है कि जीविका दीदियों के नाम पर ये लोग अपने परिवार की आजीविका तलाश रहे हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने गुरुवार को एक लंबा सोशल मीडिया पोस्ट शेयर किया। इसमें आरजेडी और तेजस्वी यादव का नाम लिए बिना सीएम ने कहा कि बिहार की जनता ने इन लोगों को भी मौका दिया था लेकिन तब इनका ध्यान सेवा करने से ज्यादा मेवा खाने पर लगा हुआ था। इनके कार्यकाल में महिलाओं का विकास सिर्फ इनके परिवार तक ही सीमित था। इन लोगों के राज में बिहार की महिलाओं ने जो दुख- दर्द और जंगलराज का दंश झेला है, वह किसी से छिपा नहीं है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि ऐसे लोगों को पता होना चाहिए कि ये 2005 से पहले वाला बिहार नहीं है। बिहार की बहन-बेटियां पढ़ रही हैं, आगे बढ़ रही हैं, नौकरियां कर रही हैं, स्वरोजगार में लगी हैं, नौकरियां दे रही हैं, बिहार और देश का नाम रोशन कर रही हैं। बिहार की बहन-बेटियों को पता है कि उनके उत्थान और सम्मान के लिए किसने काम किया है। नीतीश ने अपने पोस्ट में अपनी सरकार में महिलाओं के लिए लाई गई योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बिहार में 1.40 करोड़ से अधिक जीविका दीदियां अलग-अलग कामों से बिहार और देश की अर्थव्यवस्था में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा, "हमने देश में पहली बार पंचायत और नगर निकाय चुनावों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की। हमने सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की। महिलाओं के लिए डोमिसाइल नीति लागू की। हमारी सरकार ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण लागू किया।" तेजस्वी का जीविका दीदी को 30000 रुपये सैलरी देने का वादा आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने बुधवार को जीविका दीदियों को लेकर बड़ा चुनावी वादा किया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन की सरकार बनने पर जीविका दीदियों को स्थायी नौकरी दी जाएगी और उन्हें हर महीने 30000 रुपये वेतन दिया जाएगा। इसके अलावा उन्होंने जीविका दीदियों के लिए 5 लाख रुपये का बीमा और 2000 रुपये अलग से भत्ता देने का भी वादा किया।  

सरकार ने शुरू की CJI की नियुक्ति प्रक्रिया, अगले चीफ जस्टिस बनने वाले चेहरे पर लगी नज़र

नई दिल्ली  सीजेआई बीआर गवई के बाद देश का अगला चीफ जस्टिस कौन होगा, इसकी प्रक्रिया केंद्र सरकार ने शुरू कर दी है। सीजेआई गवई 23 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इससे पहले तक नए सीजेआई के नाम का चयन हो जाना है। जस्टिस सूर्यकांत अगले सीजेआई के रेस में हैं और उनका बनना लगभग तय है। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों की नियुक्ति की प्रक्रिया से वाकिफ लोगों ने बताया कि जस्टिस गवई से उनके उत्तराधिकारी का नाम बताने वाला लेटर आज शाम या शुक्रवार को दिया जाएगा। मेमोरेंडम ऑफ प्रोसीजर के अनुसार, जो सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट जजों की नियुक्ति, ट्रांसफर और पदोन्नति को गाइड करने वाले डॉक्यूमेंट्स का एक सेट है, उसमें कहा गया है कि भारत के चीफ जस्टिस के पद पर नियुक्ति सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज की होनी चाहिए, जिन्हें पद संभालने के लिए फिट माना जाए। केंद्रीय कानून मंत्री सही समय पर भारत के जाने चीफ जस्टिस से उनके अगले चीफ जस्टिस की नियुक्ति के लिए सिफारिश मांगेंगे। आमतौर पर, यह लेटर मौजूदा सीजेआई के 65 साल की उम्र में रिटायर होने से एक महीने पहले भेजा जाता है। जस्टिस सूर्यकांत सीजेआई गवई के बाद सबसे सीनियर जज हैं और अगले सीजेआई बनने की सबसे ज्यादा संभावना है। एक बार नियुक्त होने के बाद, जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर को अगले सीजेआई बन जाएंगे और 9 फरवरी, 2027 तक लगभग 15 महीने तक इस पद पर रहेंगे।  

भैया दूज की अनोखी जश्न: जेल अधीक्षक को तिलक लगाकर ड्रम वाली मुस्कान ने मनाई खुशी

मेरठ  चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड की आरोपी मुस्कान रस्तोगी ने जेल में भैया दूज मनाया है। गुरुवार को भाई दूज के मौके पर मेरठ कारागार के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने उन 27 महिला बंदियों से तिलक लगवाया, जिनके भाई मुलाकात के लिए नहीं पहुंचे। पति सौरभ की हत्या के आरोप में प्रेमी साहिल के साथ जेल में बंद मुस्कान के घर से उसका भाई भी जेल नहीं पहुंचा था। ऐसे में जेल अधीक्षक ने मुस्कान से भाई दूज का तिलक लगवाया। नीले ड्रम हत्याकांड से मुस्कान सुर्खियों में आई थी। उसकी मां कविता ने बताया है कि परिवार अब मुस्कान से कोई संबंध नहीं रखना चाहता। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी त्योहार पर वह उससे नहीं मिलेंगे, क्योंकि मुस्कान उनके जीवन का हिस्सा नहीं रही। वहीं, भैया दूज पर जेल परिसर में रोली, चावल, मिठाई और जलपान की विशेष व्यवस्था की गई। बहनों के लिए छायादार पंडाल लगाए गए, ताकि वह सहजता से पर्व मना सकें। सुबह से ही बंदियों और उनके परिजनों में उत्साह देखने को मिला और देर शाम तक तिलक का क्रम जारी रहा। डेरा सच्चा सौदा की ओर से फ्री भोजन की आयोज भैया दूज के अवसर पर मेरठ जिला कारागार परिसर में डेरा सच्चा सौदा के नेतृत्व में निशुल्क भोजन शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में बंदियों से मिलने आने वाली महिलाओं और बच्चों के लिए भोजन और पेयजल की व्यवस्था की गई। चार टुकड़ों में थी लाश; शव का पंचनामा भरने वाले दारोगा का बयान सौरभ हत्याकांड में शव का पंचनामा भरने वाले दारोगा धर्मेंद्र कुमार के जिला जज कोर्ट में 6 अक्टूबर को बयान दर्ज कराया था। दारोगा ने कोर्ट को बताया कि नीले ड्रम में लाश को सीमेंट से जमाया हुआ था। कटर से ड्रम और सीमेंट को काटकर मोर्चरी पर शव को बाहर निकाला गया। लाश टुकड़ों में मिली थी। सिर को धड़ से काटकर अलग किया गया था। दोनों हाथों को भी कलाई से काटकर अलग किया हुआ था। दोनों कटे हुए हाथ एक पॉलीथिन में बंद मिले थे। चाकू भी ड्रम के अंदर ही मिला था।  

योगी सरकार ने किया बड़ा फैसला: यूपी में 1022 नए अग्निशमन कर्मियों की भर्ती और हर जिले में फायर चौकी

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्सप्रेसवे पर हर 100 किमी की दूरी पर फायर टेंडर युक्त एक छोटी फायर चौकी बनाने के निर्देश दिए हैं। आग लगने पर इससे गोल्डन ऑवर में राहत दी जा सकेगी। इसके साथ ही अग्निकांड को रोकने और हादसा होने पर त्वरित राहत देने के लिए फायर महकमे में 1022 पद (98 राजपत्रित और 922 अराजपत्रित) बढ़ाए जाएंगे। राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में भी पद बढ़ाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने गुरुवार को उत्तर प्रदेश अग्निशमन तथा आपात सेवा विभाग में पदों के सृजन व अभियोजन संवर्गीय अधिकारियों के कैडर रिव्यू के संबंध में बैठक की। इस दौरान उन्होंने कहा कि हर मंडल में विशेष यूनिट गठित की जाए। केमिकल, बायोलॉजिकल और रेडियोलॉजिकल हादसा होने पर विशेष यूनिट सहायक साबित होगी। बहुमंजिला इमारतों में हादसा होने पर भी इस यूनिट की मदद ली जा सकेगी। फायर सर्विस को केवल आग बुझाने तक सीमित न रखकर इसे आपदा प्रबंधन, रेस्क्यू ऑपरेशन और आपात सेवाओं में काम करने के लिए भी विकसित किया जाए। उन्होंने कहा कि फायर महकमे को अति आधुनिक उपकरणों और ट्रेनिंग के जरिए मजबूत किया जाए। बैठक में कुछ बड़े हादसों का भी जिक्र हुआ। अफसरों को समय-समय पर बड़े प्रतिष्ठानों, मॉल व मल्टीप्लेक्स के साथ बहुमंजिला अपार्टमेंट का निरीक्षण करने के भी निर्देश दिए गए। मुख्यमंत्री ने विभाग की प्रशासनिक क्षमता और वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाने के लिए हर जिले में लेखा कैडर स्थापित करने के भी निर्देश दिए। विभाग की नई ऑपरेशनल इकाइयों के रूप में कुशीनगर, आजमगढ़, श्रावस्ती, कानपुर नगर, अयोध्या, अलीगढ़, मुरादाबाद, चित्रकूट और सोनभद्र एयरपोर्ट पर अग्निशमन सेवाओं की यूनिट तैनात की जा चुकी है। अग्निशमन विभाग में बढ़ेंगे 1022 पद मुख्यमंत्री योगी ने विभागीय कैडर रिव्यू की आवश्यकता पर चर्चा करते हुए कहा कि नए पद भी सृजित होने चाहिए। राज्य अग्निशमन प्रशिक्षण महाविद्यालय में अतिरिक्त पद सृजित कर प्रशिक्षण एवं अनुसंधान की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने को भी कहा। इस निर्देश के साथ ही विभाग में राजपत्रित और अराजपत्रित स्तर के नए 1022 पदों के सृजित होने का रास्ता भी साफ हो गया।  

दिल्ली में महिलाओं को बड़ी राहत: नाइट शिफ्ट की मिली इजाजत, लेकिन माननी होंगी ये सख्त शर्तें

नई दिल्ली दिल्ली सरकार ने गुरुवार को जारी एक अधिसूचना में दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में महिला कर्मचारियों को उनकी अनिवार्य लिखित सहमति के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दे दी है। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि दिल्ली दुकान एवं प्रतिष्ठान अधिनियम के अनुसार, प्रत्येक कर्मचारी को ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन और अधिकतम 48 घंटे प्रति सप्ताह ड्यूटी का अधिकार होगा। इसके अलावा, आंतरिक शिकायत समितियां (ICCS) भी गठित की जानी होंगी। दुकानों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में नाइट शिफ्ट में महिला कर्मचारियों को नियुक्त करने के नगर सरकार के प्रस्ताव को इस वर्ष के प्रारंभ में उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना द्वारा मंजूरी दी गई थी। दिल्ली सरकार के श्रम विभाग द्वारा हाल ही में जारी अधिसूचना में दिल्ली दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1954 के तहत महिलाओं को रोजगार देने तथा उनके रोजगार की शर्तों से संबंधित दो प्रविष्टियां जोड़ी गईं। इसमें यह भी प्रावधान किया गया है कि महिला कर्मचारियों को नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति होगी, लेकिन इसके लिए उनकी लिखित सहमति अनिवार्य होगी।   अधिसूचना में कहा गया है कि किसी भी कर्मचारी को किसी भी दिन नौ घंटे (भोजन और आराम के समय सहित) से अधिक और सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसमें कहा गया है कि नियोक्ता उन सभी कर्मचारियों के लिए सुरक्षा, संरक्षा और परिवहन के संबंध में उपयुक्त व्यवस्था करेंगे, जिन्हें ओवरटाइम या नाइट शिफ्ट में काम करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा, किसी भी कर्मचारी को लगातार पांच घंटे से अधिक काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। अधिसूचना में कहा गया है, "पात्र कर्मचारियों को दिल्ली दुकान एवं स्थापना अधिनियम, 1954 की धारा 8 के तहत सामान्य दर से दोगुनी दर पर ओवरटाइम मजदूरी का भुगतान किया जाएगा। शिफ्ट में काम, यदि कोई हो, इस तरह से किया जाएगा कि किसी भी कर्मचारी को केवल रात की शिफ्ट में काम करने के लिए मजबूर न किया जाए।" महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला श्रमिकों को नियुक्त करने वाले प्रत्येक नियोक्ता को कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 के तहत आईसीसी का गठन करना होगा।  

राष्ट्रीय बालरंग भोपाल में 5 दिसम्बर को, व्यवस्थाओं को लेकर हुई बैठक

भोपाल भोपाल में राष्ट्रीय बालरंग-2025 इस वर्ष 5 दिसम्बर को इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय परिसर, श्यामला हिल्स, भोपाल में आयोजित होगा। आयोजन की व्यवस्था एवं तैयारियों को लेकर संचालक श्री डी.एस. कुशवाह की अध्यक्षता में गुरूवार को लोक शिक्षण संचालनालय भोपाल में बैठक हुई। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय बालरंग में 20 से अधिक राज्यों के स्कूल के विद्यार्थी अपने राज्यों की लोक संस्कृति पर आधारित प्रस्तुतियाँ देंगे। बालरंग में 500 से अधिक विद्यार्थी भागीदारी करेंगे। इसी के साथ बालरंग में 5 हजार विद्यार्थी सहभागिता कर एक भारत-श्रेष्ठ भारत की थीम पर राज्यों की लोक कलाओं से परिचित हो सकेंगे। बैठक में बताया गया कि राष्ट्रीय बालरंग का आयोजन वर्ष 2005 से निरंतर भोपाल में हो रहा है। बैठक में विद्यार्थियों के आवास, परिवहन एवं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा की गयी। विभिन्न राज्यों से आये विद्यार्थियों को भोपाल के नजदीक पुरातत्व धरोहर भोजपुर, भीमबेटका और साँची का भ्रमण भी कराया जायेगा। 

खंडवा जिले की उद्यानिकी फसलों के लिये उद्यमियों से परियोजना प्रस्ताव आमंत्रित

हॉर्टिकल्चर क्लस्टर विकास कार्यक्रम भोपाल केन्द्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) द्वारा हॉर्टिकल्चर क्लस्टर विकास कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य बागवानी उत्पादों के उत्पादन, गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन एवं विपणन आदि को प्रोत्साहित करते हुए किसानों की आय में वृद्धि करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत मल्टी कमोडिटी, हाई-वेल्यू क्लस्टर तथा पेरी-अर्बन क्लस्टर की पहचान एवं विकास किया जाना प्रस्तावित है। मध्यप्रदेश के खंडवा जिले की प्रमुख उद्यानिकी फसलें प्याज, अरबी, टमाटर, मिर्च और तरबूज के संबंध में क्रियान्वयन एजेंसी (आई.ए.) के रूप में किसान उत्पादक संगठन के साथ उनके महासंघ, सहकारी समितियाँ, फर्म, कम्पनियाँ और इच्छुक हितधारक, उद्यमी एनएचबी की वेबसाइट http://nhb.gov.in पर उपलब्ध प्रारूप में वांछित दस्तावेजों के साथ परियोजना प्रस्ताव भारत सरकार को भेजे जा सकते हैं।