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पुजारी को धमकी देने वाले दो आरोपी वाराणसी से गिरफ्तार, लाउडस्पीकर विवाद बना मामला

वाराणसी उत्तर प्रदेश के वाराणसी के मदनपुरा इलाके में लाउडस्पीकर पर हनुमान चालीसा बजाने पर एक मंदिर के पुजारी को धमकाने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। पुजारी संजय प्रजापति ने पुलिस को बताया कि शुक्रवार को हनुमान मंदिर में पूजा करने के बाद, उन्होंने टेप रिकॉर्डर पर भक्ति गीत चलाए, तभी अब्दुल नासिर और उसका बेटा वहां आए और गाली-गलौज करने लगे। उन्होंने लाउडस्पीकर बंद करने को कहा और चेतावनी दी कि अगर दोबारा भक्ति गीत बजाया गया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इसके बाद, कई लोग पुजारी को घेरकर धमकाने लगे, जिसके बाद पुजारी ने पुलिस को शिकायत दी। काशी ज़ोन के पुलिस उपायुक्त गौरव बंसल ने कहा कि मामला दर्ज कर लिया गया है और दोनों आरोपियों को शुक्रवार रात गिरफ्तार कर लिया गया।  

DC की समीक्षा बैठक: रांची समाहरणालय में सुरक्षा और साफ-सफाई सुधार को दिशा

रांची झारखंड के रांची समाहरणालय ब्लॉक-ए के कार्यालय कक्ष में उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक हुई। इस बैठक में समाहरणालय परिसर की सुरक्षा, स्वच्छता और सौंदर्यीकरण से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार किया गया। पूर्व में आयोजित वरीय पदाधिकारियों की बैठक, ऑल हैंड मीटिंग, और अन्य उठाए गए मुद्दों के आधार पर दिए गए निर्देशों की क्रमवार समीक्षा की गई। बैठक में जिला नजारत उप समाहर्ता डॉ. सुदेश कुमार, विशेष विनियमन पदाधिकारी मनीषा तिर्की, जिला सूचना एवं जन संपर्क पदाधिकारी उर्वशी पांडेय, जिला सूचना एवं विज्ञान पदाधिकारी राजीव कुमार, सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा रवि शंकर मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। भजंत्री ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को पूर्व में जारी आदेशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस समीक्षा बैठक में समाहरणालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक बेहतर बनाने के लिए परिसरों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने का निर्देश दिया गया। इससे परिसर की निगरानी सशक्त होगी और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार आएगा। इसके अलावा समाहरणालय ब्लॉक-ए और ब्लॉक-बी की विशेष साफ-सफाई पर जोर दिया गया। पाकिर्ंग क्षेत्र में लंबे समय से खड़े वाहनों को हटाने के लिए भी तत्काल कारर्वाई करने का आदेश दिया गया ताकि परिसर को व्यवस्थित रखा जा सके। भजंत्री ने समाहरणालय के मुख्य गेट पर बायोमेट्रिक मशीन लगाने का भी निर्देश दिया जिससे कर्मचारियों की उपस्थिति की मॉनिटरिंग सटीक ढंग से हो सके। यह कदम कार्यालय में अनुशासन और समर्पण को बढ़ावा देगा। साथ ही समाहरणालय परिसर और सुभाष चंद्र बोस पार्क के सौंदर्यीकरण के लिए भी विशेष रूप से कदम उठाने के लिए संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है ताकि दोनों स्थान स्वच्छ और आकर्षक बन सकें। बैठक में विभिन्न विभागों से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर भी चर्चा की गई और कार्यान्वयन को समयबद्ध करने का आदेश दिया गया। भजन्त्री ने सभी पदाधिकारियों को कहा कि वे पूर्व में दिए गए निर्देशों का प्रभावी और समय पर पालन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि समाहरणालय परिसर का स्वच्छ, सुरक्षित और सुंदर होना आवश्यक है और इसके लिए सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। भजंत्री ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों के पालन की नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का आदेश भी दिया गया ताकि अगली समीक्षा बैठक में कार्यों की स्थिति पर विस्तृत चर्चा की जा सके। यह बैठक प्रशासनिक कार्यों को बेहतर बनाने और जनता को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

वॉरंट मिलने के बाद अलका लांबा ने कोर्ट में छोड़ा खास मैसेज, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली  पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता अलका लांबा शनिवार को राजधानी दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट के सामने पेश हुईं, जहां उन्होंने अदालत से जमानत ले ली। दरअसल निषेधाज्ञा उल्लंघन से जुड़े एक मामले में कोर्ट ने उनके खिलाफ वॉरंट जारी कर दिया था, जिसके बाद वह अदालत में पेश हुईं, जहां अदालत ने उन्हें जमानत दे दी। राउज एवेन्यू कोर्ट ने इस मामले में दायर आरोपपत्र पर संज्ञान लेते हुए उन्हें समन जारी किए थे। हालांकि कई समन जारी होने के बाद भी वह अदालत में पेश नहीं हुईं, जिसके कारण कोर्ट ने उनके खिलाफ जमानती वॉरंट जारी कर दिया, तब जाकर लांबा शनिवार को राउज एवेन्यू अदालत में पेश हुईं और वहां से जमानत हासिल कर ली। हालांकि जमानत मिलने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर बताया था कि मेरे खिलाफ वॉरंट जारी हुआ है साथ ही उन्होंने खुद को सोनम वांगचुक के साथ रखने की गुजारिश भी की थी। इससे पहले कोर्ट ने जब उन्हें समन जारी किए थे तो वह अदालत में पेश नहीं हुईं थीं और उन्होंने दो मौकों पर पेशी से छूट मांग ली थी। इसके बाद, अदालत ने 24 सितंबर को उनके खिलाफ जमानती वारंट जारी कर दिया था। तब जाकर वह आज अदालत में पेश हुईं। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक (एसीजेएम) वैभव चौरसिया की कोर्ट ने शनिवार को अलका लांबा को जमानत दे दी और अभियोजन पक्ष को आरोपपत्र की एक प्रति उन्हें देने का निर्देश दिया। अदालत ने आरोपों पर दलीलें सुनने के लिए मामले को 15 अक्टूबर के लिए सूचीबद्ध किया है। यह मामला जंतर-मंतर पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान निषेधाज्ञा के कथित उल्लंघन से संबंधित है, जिसमें 2024 के आम चुनाव से पहले महिला आरक्षण लागू करने की मांग की गई थी। इस मामले में कांग्रेस की इस महिला नेता के खिलाफ साल 2024 में संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज की गई थी। लांबा ने कहा था- प्लीज वांगचुक जी के साथ रखना उधर इस मामले को लेकर अलका लांबा ने शनिवार को सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए बताया, 'मेरे खिलाफ वॉरंट जारी हुआ है, प्लीज़ सोनम वांगचुक जी के साथ ही रखना, बहुत कुछ सीखने को मिलेगा- संघर्ष जारी रहेगा…लड़ेंगे और जीतेंगे।' हालांकि लांबा की ये तम्मना पूरी नहीं हो सकी और अदालत ने उन्हें जमानत देते हुए उनकी गिरफ्तारी का रास्ता बंद कर दिया।  

मान सरकार का ऐतिहासिक फैसला: राज्य के लिए नया अध्याय शुरू

कोटकपूरा गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शताब्दी समारोह को समर्पित पंजाब विधानसभा का एक विशेष सत्र 24 नवंबर को चंडीगढ़ के बाहर आयोजित किया जा रहा है। श्री गुरु तेग बहादुर जी का 350वां शहीदी समारोह मुख्य रूप से 23 नवंबर से शुरू हो रहा है और 24 नवंबर शहीदी दिवस है। इतिहास में यह पहली बार होगा जब पंजाब सरकार राजधानी के बाहर श्री आनंदपुर साहिब में विधानसभा का सत्र आयोजित कर रही है। पंजाब सरकार ने इस सत्र की तैयारियां शुरू कर दी हैं और इस सरकारी प्रस्ताव पर मंथन के लिए बैठकों का दौर चल रहा है। सोमवार को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में एक विशेष बैठक बुलाई है। स्पीकर कार्यालय के अनुसार भारतीय संविधान के मुताबिक विधानसभा का सत्र कहीं भी आयोजित किया जा सकता है और राज्यपाल की स्वीकृति से पंजाब सरकार 24 नवंबर को श्री आनंदपुर साहिब स्थित बाबा जीवन सिंह मेमोरियल पार्क में यह सत्र आयोजित करने की तैयारी कर रही है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान 5 अक्टूबर को श्री आनंदपुर साहिब स्थित बाबा जीवन सिंह मेमोरियल पार्क का उद्घाटन करेंगे। विधानसभा स्पीकर कार्यालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोमवार को श्री आनंदपुर साहिब में पंजाब विधानसभा का सत्र आयोजित करने के लिए एक बैठक बुलाई है जिसमें सत्र के प्रारूप पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस संबंध में पंजाब विधानसभा सचिवालय के साथ पत्राचार किया जा रहा है। 

छठ पर्व पर मुख्यमंत्री का विशेष दौरा, घाटों की तैयारियों का लिया जायजा

नई दिल्ली दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को बोट से यमुना नदी के प्रवेश बिंदु पल्ला गांव से लेकर आईटीओ के नजदीक स्थित हाथी घाट तक विभिन्न छठ घाटों का दौरा किया। इस दौरान उनके साथ दिल्ली के कैबिनेट मंत्री प्रवेश साहिब सिंह और कपिल मिश्रा के अलावा लक्ष्मी नगर से विधायक अभय वर्मा और विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।  इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि यमुना तट पर महापर्व छठ की तैयारियों को लेकर सरकार पूरी गंभीरता और युद्धस्तर पर काम में जुटी है। आज पल्ला गांव से लेकर हाथी घाट तक लगभग तीन घंटे तक विभिन्न छठ घाटों का निरीक्षण किया और बोट से यमुना जी के किनारों का विस्तृत सर्वे किया।  उन्होंने कहा कि यह जमीनी सर्वेक्षण केवल व्यवस्थाओं की समीक्षा नहीं, बल्कि दिल्ली में एक भव्य और सुव्यवस्थित छठ आयोजन सुनिश्चित करने की ठोस नींव है। यह पर्व उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के भाइयों-बहनों को दिल्ली की मिट्टी से जोड़ता है और एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना को सशक्त करता है। संबंधित विभागों को साफ-सफाई, घाटों के निर्माण, सुरक्षा और अन्य सभी सुविधाओं की रूपरेखा शीघ्र तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि लाखों श्रद्धालु बिना किसी कठिनाई के छठ मईया की पूजा-अर्चना कर सकें। उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों ने छठ को यमुना से दूर कर दिया था। यमुना किनारे इस बार आस्था के महापर्व छठ का भव्य आयोजन होगा। उनकी सरकार पल्ला गांव से लेकर ओखला तक छठ के आयोजन की तैयारियों में पूरी निष्ठा और तत्परता से जुटी है। जब यमुना के घाटों पर लाखों श्रद्धालु डूबते सूरज और उगते सूर्य को अर्घ्य देंगे तब वह क्षण हर श्रद्धालु के लिए अविस्मरणीय बने, यही हमारा संकल्प और प्रयास है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी में पूर्वांचलवासियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, इसलिए उनकी धार्मिक आस्था व सुविधा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली में यमुना के प्रवेश स्थल पल्ला से लेकर अंतिम स्थल ओखला तक दोनों किनारों पर छठ पर्व का आयोजन किया जाएगा। इन दोनों किनारों पर जहां भी छठ पर्व के लिए समतल किनारे उपलब्ध होंगे, वहां सरकार की ओर से व्रतधरियों को समुचित सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी। छठ घाटों को लेकर अधिकारियों को निर्देश दिए जा रहे हैं।  उल्लेखनीय है कि छठ पर्व की तैयारियों को लेकर 29 सितंबर को मुख्यमंत्री ने दिल्ली सचिवालय में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने पल्ला से लेकर वजीराबाद तक के किनारों पर विशेष व्यवस्था के साथ ही आईटीओ, ओखला जैसे पुराने स्थलों पर भी व्यवस्थाएं और दुरुस्त करने का निर्देश अधिकारियों को दिया था।  मुख्यमंत्री ने छठ पूजा के दौरान घाटों की सफाई व स्वच्छता के साथ धूल से बचाने के लिए पानी का छिड़काव, पुलिस व ट्रैफिक पुलिस को सुरक्षा व यातायात व्यवस्था चौकस रखने के आदेश जारी किए गए हैं। उन्होंने कहा कि सिंचाई विभाग को छठ पर्व से पूर्व यमुना से जलकुंभी निकालने के भी आदेश जारी किए गए हैं। इस बार इन स्थलों पर प्रकाश की विशेष व्यवस्था की जाएगी ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।  मुख्यमंत्री ने बताया कि दिल्ली में यमुना के किनारो के अलावा मुनक नहर, मुंगेशपुर ड्रेन के अलावा कृत्रिम तालाबों में भी छठ पूजा आयोजित की जाती है। राजधानी में कुल मिलाकर 929 स्थलों पर पूजा-अर्चना की जाती है। इन स्थलों पर सरकार की ओर से समुचित व्यवस्थाएं की जाएंगी। अगर किसी संस्थान को एनओसी चाहिए तो उसे भी बिना किसी परेशानी से उसे दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे विशेष स्थान भी चिन्हित किए जाएंगे जहां छठ पूजा का विशेष आयोजिन किया जाएगा।  मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि अगर यमुना में अतिरिक्त पानी की जरूरत होती तो हरियाणा सरकार से निवेदन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि छठ महापर्व पूर्वांचलवासियों की आस्था और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण पर्व है और इसे पूरी श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाने के लिए दिल्ली सरकार पूरी तरह तैयार है।   

छत्तीसगढ़: रायपुर-फर्जी राशन कार्ड की रेस में आगे, दुर्ग भी पीछे नहीं

रायपुर छत्तीसगढ़ में राशन कार्डों का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। इसमें रायपुर राजधानी 19,574 फर्जी राशन कार्ड के साथ पहले और दुर्ग 18,112 के साथ दूसरे नंबर पर है। वन नेशन वन राशन कार्ड योजना के तहत तैयार आंकड़ों की जांच में पता चला कि 46 लाख से अधिक सदस्य संदिग्ध हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है, जिन्होंने डुप्लीकेट आधार कार्ड, मृत व्यक्तियों के नाम और फर्जी दस्तावेजों से राशन कार्ड में सदस्य जोड़ रखे थे। खाद्य विभाग की ओर से शुरू किए गए भौतिक सत्यापन अभियान में अब तक 1 लाख 93 हजार 67 फर्जी सदस्य चिन्हांकित कर उनके नाम काट दिए गए हैं। विभाग का मानना है कि यह कार्रवाई राशन वितरण प्रणाली को पारदर्शी बनाने और फर्जीवाड़ा रोकने के लिए बेहद अहम है। जिलावार तस्वीर, रायपुर टॉप पर रायपुर में सबसे ज्यादा में 19,574 फर्जी सदस्य उजागर हुए हैं। दुर्ग में 18,112, जांजगीर-चांपा में 17,529, राजनांदगांव में 17,327 और कोरबा में 16,064 भी गड़बड़ी वाले शीर्ष जिलों में शामिल हैं। सरगुजा में 15,626, बलौदाबाजार में 13,833, महासमुंद में 13,308, धमतरी में 10,937 और कवर्धा में 9,987 में भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए। दूसरी ओर गरियाबंद में 7,027 और कांकेर में 7,669 ऐसे जिले रहे, जहां अपेक्षाकृत कम फर्जी सदस्य मिले। जशपुर में 9,727, बालोद 8,925 और बेमेतरा 8,641 में भी गड़बड़ी सामने आई। सबसे ज्यादा फर्जी सदस्य     रायपुर -19,574     दुर्ग – 18,112     जांजगीर-चांपा – 17,529     राजनांदगांव -17,327     कोरबा -16,064 अभी और हटेंगे 53 हजार नाम जांच टीम के मुताबिक अभी करीब 53 हजार संदिग्ध सदस्यों की जांच बाकी है। इनमें मृतक, पलायन कर चुके लोग और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े सदस्य शामिल हैं। इनके सत्यापन के बाद नाम निरस्त कर दिए जाएंगे। सबसे कम फर्जी सदस्य     गरियाबंद -7,027     कांकेर -7,669     बेमेतरा -8,641     बालोद -8,925     जशपुर -9,727 कैसे हो रही जांच खाद्य विभाग ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि जिन परिवारों का ई-केवाईसी पूरा नहीं हुआ है, उनका घर-घर भौतिक सत्यापन कराया जाए। इसके लिए पटवारी, पंचायत सचिव, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी और आशा कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है। यदि कोई सदस्य गलत या अपात्र पाया जाता है तो उसका नाम तत्काल हटाया जा रहा है। विभाग का लक्ष्य है कि 31 अक्टूबर तक सभी जिलों का सत्यापन पूरा कर लिया जाए।  

MP सरकार का बड़ा फैसला: अब तीसरे बच्चे वाले भी होंगे सरकारी नौकरी के लिए योग्य!

भोपाल  मध्य प्रदेश में सरकारी नौकरी में दो बच्चों की पाबंदी की शर्त 24 साल बाद खत्म होने जा रही है। यह पाबंदी 26 जनवरी 2001 को लागू की गई थी। अब जल्द ही इस प्रस्ताव को कैबिनेट में लाकर शर्त को समाप्त किया जाएगा। इसके बाद नौकरी कर रहे किसी अधिकारी या कर्मचारी का तीसरा बच्चा होने पर उन्हें नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जा सकेगा। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार उच्च स्तर से मिले निर्देशों के बाद यह प्रक्रिया शुरू हुई और तमाम परिस्थितियों का आंकलन करने के बाद उच्च स्तर पर सहमति बन गई। तीसरी संतान से जुड़े केस समाप्त होंगे नई व्यवस्था के लागू होने के बाद तीसरी संतान से जुड़े जितने भी मामले न्यायालयों या विभागीय जांचों में लंबित हैं, उन्हें स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। अब उन मामलों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। वर्ष 2001 के बाद जिन सरकारी कर्मचारियों पर तीसरी संतान के आधार पर कार्रवाई हो चुकी है या वे नौकरी से बाहर किए जा चुके हैं, उन मामलों पर सुनवाई नहीं होगी। तीसरी संतान से जुड़े केस होंगे समाप्त नई व्यवस्था के तहत, तीसरी संतान से संबंधित जितने भी केस न्यायालयों या विभागीय जांचों में लंबित हैं, उन्हें अब स्वतः समाप्त मान लिया जाएगा। ऐसे मामलों पर अब कोई कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, पुराने मामलों में जिन सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी थी, उन्हें पुनः नहीं खोला जाएगा। कौन से विभाग होंगे प्रभावित? इस बदलाव से सबसे ज्यादा असर चिकित्सा शिक्षा (Medical Education), स्वास्थ्य (Health), स्कूल शिक्षा (School Education), और उच्च शिक्षा (Higher Education) विभागों पर पड़ेगा। अनुमान है कि इस पाबंदी के कारण इन विभागों में करीब 8 से 10 हजार मामले लंबित हो सकते हैं। चिकित्सा शिक्षा से जुड़ी लगभग 12 शिकायतें सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंची हैं, जिन पर जल्द फैसला लिया जाएगा। पड़ोसी राज्यों में पहले ही हटाई गई पाबंदी मध्य प्रदेश के पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही इस पाबंदी को हटा चुके हैं। राजस्थान ने 11 मई 2016 को, और छत्तीसगढ़ ने 14 जुलाई 2017 को यह पाबंदी समाप्त कर दी थी। इन राज्यों में अब तीसरी संतान वाले लोग सरकारी नौकरी में काम कर रहे हैं। प्रजनन दर पर ध्यान मध्य प्रदेश की प्रजनन दर (fertility rate) 2.9 है, जो राष्ट्रीय औसत (2.1) से ज्यादा है। शहरी इलाकों में यह दर 2.1 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.8 के करीब है। इसके अलावा, बिहार राज्य में सबसे अधिक प्रजनन दर (3.0) है, जिसका मतलब है कि यहां एक महिला औसतन 3 बच्चों को जन्म देती है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की प्रजनन दर 2.0 भोपाल की प्रजनन दर 2.0 है, जो राज्य के बाकी हिस्सों से कम है। राज्य के कुछ अन्य जिलों में जैसे पन्ना (4.1), शिवपुरी (4.0), और बड़वानी (3.9) में उच्च प्रजनन दर देखी जाती है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख का बयान हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने भारत की जनसंख्या नीति पर विचार करते हुए कहा था कि औसतन तीन बच्चों का होना चाहिए। उनका मानना है कि इससे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसे संसाधनों पर दबाव नहीं बढ़ेगा। उनके इस बयान के बाद ही मध्य प्रदेश में दो बच्चों की सीमा हटाने की प्रक्रिया को गति मिली, और इस नीति में बदलाव के लिए तैयारी शुरू हो गई। कौन से विभाग प्रभावित होंगे सबसे ज्यादा शिकायतें मेडिकल एजुकेशन, हेल्थ, स्कूल शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग से जुड़ी हैं। अनुमान है कि ऐसे मामलों की संख्या आठ से दस हजार के बीच हो सकती है। मेडिकल एजुकेशन की करीब 12 शिकायतें सामान्य प्रशासन विभाग तक पहुंच चुकी हैं, जिन पर फैसला होना है। पहले एक जज तक की नौकरी दो संतान की पाबंदी की वजह से चली गई थी। अन्य राज्यों का उदाहरण राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही यह पाबंदी हटा चुके हैं। राजस्थान ने 11 मई 2016 और छत्तीसगढ़ ने 14 जुलाई 2017 को इसे खत्म किया। वहां अब तीन बच्चों वाले कर्मचारी भी सरकारी नौकरी में काम कर रहे हैं। मप्र की प्रजनन दर और राष्ट्रीय तुलना राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS 2019-20) के अनुसार, मध्य प्रदेश की प्रजनन दर 2.9 है। शहरी क्षेत्रों में यह 2.1 और ग्रामीण क्षेत्रों में 2.8 के करीब है, जबकि राष्ट्रीय औसत 2.1 है। देश में सबसे अधिक प्रजनन दर बिहार में है, जहां औसतन एक महिला 3 बच्चे को जन्म देती है। मप्र के अन्य राज्य जैसे मेघालय, उत्तर प्रदेश और झारखंड में भी प्रजनन दर राष्ट्रीय औसत से अधिक है। भोपाल में प्रजनन दर 2.0 है, जो राज्य में सबसे कम है, जबकि पन्ना, शिवपुरी और बड़वानी में यह क्रमशः 4.1, 4.0 और 3.9 है। मोहन भागवत के बयान का असर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में कहा कि भारत की औसत जनसंख्या नीति 2.1 के अनुसार औसतन तीन बच्चे होना चाहिए। इसके बाद दो बच्चों की सीमा हटाने की प्रक्रिया को गति मिली और नीति में बदलाव की तैयारी शुरू हुई।

सारनी पॉवर हाउस बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ कर रहा सेवाओं का विस्तार

रोशनी के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा पॉवर हाउस सारनी सारनी पॉवर हाउस बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ कर रहा सेवाओं का विस्तार पॉवर हाउस सारनी की पहल: रोशनी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का संगम बैतूल बैतूल जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर एक छोटा सा कस्बा सारनी स्थित है। वर्ष 1965 के आसपास वहां सतपुड़ा ताप विद्युत गृह की स्थापना हुई थी। वर्ष 2007 तक सतपुड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन मध्यप्रदेश का सबसे बड़ा पॉवर प्लांट था लेकिन कुछ पुरानी यूनिट बंद होने के बाद वर्ष 2019 से यह मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी का मध्यप्रदेश का तीसरा बड़ा थर्मल पॉवर स्टेशन बन गया। वर्ष 2014 से 250-250 मेगावॉट की दो यूनिट यहां बिजली का उत्पादन कर रही हैं। सारनी के आसपास सुरम्य वन क्षेत्र है। यहां भरपूर वन संपदा उपलब्ध है। वनों में स्थित सागौन, साल, पलास तथा अन्य वृक्ष यहां की हरी-भरी घाटियों को बेहद सुंदर बनाते हैं। इस क्षेत्र की आबादी करीब 86 हजार के आसपास है। सारनी पॉवर हाउस अस्पताल आसपास के क्षेत्र में संजीवनी साबित हो रहा दरअसल बात हो रही है सारनी पॉवर हाउस के अस्पताल की जहां कंपनी कार्मिकों के अलावा अन्य समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य की देखभाल बेहतर तरीके से की जा रही है। सारनी पॉवर हाउस में करीब 580 से ज्यादा अभियंता व कार्मिक कार्यरत हैं। यह कार्मिक सुविधाजनक आवासीय परिसर में रहकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सारनी कस्बे में बच्चों की पढ़ाई के लिए केन्द्रीय विद्यालय है, बाजार है और बुनियादी जरूरत की सारी सुविधाएं यहां पर उपलब्ध हैं। 55 वर्ष पुराना अस्पताल पूर्णत: सुसज्जित सारनी स्थित यह अस्पताल 1971 में स्थापित हुआ। इस अस्पताल के पहले चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रवीण कुमार थे जो बाद में मध्यप्रदेश राज्य विद्युत मंडल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी नियुक्त हुए। सतपुड़ा ताप विद्युत गृह सारनी के मुख्य अभियंता वी. के. कैथवार ने बताया कि यह अस्पताल सभी तरह की स्वास्थ्य सेवाओं से युक्त है तथा पॉवर हाउस के कार्मिकों के साथ अन्य समुदाय के लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। सुदूर अंचल में स्थापित होने के बावजूद यहां अस्पताल में 30 बिस्तरों की व्यवस्था है। अस्पताल में पूर्णकालिक चिकित्सक तथा अनुबंध के आधार पर विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी चिकित्सा सेवाएं देते हैं। अस्पताल में पदस्थ चिकित्सा अधिकारी डॉ. विजय रघुवंशी ने बताया कि अस्पताल में पैरामेडिकल स्टाफ, फार्मासिस्ट, स्टाफ नर्स व वार्ड बॉय सभी मिलकर बिजली अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ आसपास के लोगों की स्वास्थ्य सेवाओं में जुटे हुए हैं।  दूरदराज के लोगों का सहारा अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की दृष्टि से पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं, इनमें महिला वार्ड, पुरुष वार्ड, वर्न यूनिट, एक्स-रे रूम, पैथोलॉजी लैब, ऑपरेशन थिएटर के साथ दवाई वितरण की समुचित व्यवस्था उपलब्ध है। यहां पर इलाज के लिए प्रतिदिन आने वाले मरीजों की संख्या की बात करें तो औसतन 70 से 75 मरीजों की ओपीडी रहती है। इनमें कंपनी कार्मिकों एव उनके परिजनों के अलावा आसपास के गांव के लोग भी अपने परिवार सहित आकर स्वास्थ्य की सुविधाओं का लाभ लेते हैं। यह अस्पताल दूरदराज के समुदाय के लोगों के स्वास्थ्य की भी देखभाल करने में सक्षम है।  दो एम्बुलेंस से तत्काल इलाज की सुविधा मध्यप्रदेश पॉवर जनरेटिंग कंपनी के प्रबंध संचालक मनजीत सिंह बताते हैं कि यह अस्पताल सारनी और इसके आसपास के लोगों के लिए वरदान साबित हो रहा है। यहां पर दो एम्बुलेंस भी मरीज की सेवा में तत्पर रहती हैं जो दूर दराज के मरीजों को लाने तथा जरूरत पड़ने पर जिला अस्पताल बैतूल या नर्मदापुरम पहुंचाने का कार्य करती हैं।  

इतिहास में पहली बार! अयोध्या में संतों और भक्तों का महाकुंभ, 8 राज्यों के मुख्यमंत्री देंगे शुभारंभ

अयोध्या  भगवान राम की नगरी में एक बार फिर से सनातन के महाकुंभ का जैसा नजारा होने वाला है. अयोध्या धाम में एक बड़े अनुष्ठान का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें आठ राज्यों के मुख्यमंत्री समेत देश के बड़े-बड़े साधु संत शामिल होंगे. आयोजन को लेकर राम नगरी के सभी प्रमुख मठ मंदिरों में राम भक्तों का जमावड़ा शुरू हो गया है. राम मंदिर में रामलला के प्राण प्रतिष्ठा के भव्य आयोजन के बाद अयोध्या में ये दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन होने जा रहा है. कल सुबह 10 बजे करीब 20 हजार राम भक्त कलश यात्रा निकालकर इस धार्मिक अनुष्ठान का शुभारंभ करेंगे. इसको लेकर जिला प्रशासन ने भी तैयारियां पूरी कर ली है. भव्य आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनेगा अयोध्या जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री वल्लभाचार्य जी महाराज की माने तो देश में ऐसा पहली बार हो रहा है कि एक स्थान पर एक साथ 501 विद्वान 501 श्री रामार्चा महायज्ञ का अनुष्ठान करेंगे. यह पहली बार है जब भारत की धरती पर इतने विशाल स्तर पर श्री रामार्चा महायज्ञ का आयोजन होने जा रहा है. अयोध्या धाम एक ऐतिहासिक और भव्य आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है. कल से 14 अक्टूबर 2025 तक अयोध्या में श्रीरामहर्षण मैथिली सख्य पीठ धर्मार्थ सेवा ट्रस्ट एवं श्रीराम हर्षणम चारुशीला मंदिर, जानकी घाट द्वारा एक भव्य राम महायज्ञ, रामार्चा पूजन एवं राम नाम जप अनुष्ठान का आयोजन किया जाने वाला है. महायज्ञ में विशेष रूप से 151 श्रीमद्भागवत महापुराण पारायण भी होगा, जिसके लिए देशभर से 151 विद्वान अयोध्या आएंगे. वृन्दावन के विख्यात संत मालूक पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्र दास जी महाराज अपने मुखारबिंद से राम नगरी में श्रीमद्भागवत की कथा सुनाएंगे. संत समाज का दिव्य संगम होगा वहीं वृंदावन से स्वामी बिहारी दास जी महाराज भक्तमाल जी की कथा का अमृतपान कराएंगे. राम नगरी में इस दौरान संत समाज का दिव्य संगम होगा, जहां देश के महान महापुरुष अपनी वाणी से भक्तों को लाभान्वित करेंगे. योग गुरु बाबा रामदेव सहित अनेक प्रतिष्ठित संत और महापुरुष इस आयोजन में आने वाले हैं. यही नहीं देश के राजनीतिक जगत के दिग्गज राज नेताओं का भी इस अनुष्ठान में आगमन होगा. आठ राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आमंत्रण भेजा गया है. यूपी के मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ 8 या 9 अक्टूबर को इस अनुष्ठान में शामिल होंगे, जिसकी पुष्टि जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी श्री वल्लभाचार्य महाराज ने की है. वहीं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का आगमन 11 अक्टूबर को होगा. भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ से सीएम विष्णु देव सहाय भी इस आयोजन का हिस्सा बनेंगे. हिंदू परंपरा की प्राचीन से आधुनिक यात्रा पर मंथन प्रतिदिन संत सम्मेलन (शाम 5 से 8 बजे तक) आयोजित होगा, जिसमें सनातन धर्म के विस्तार, अयोध्या धाम के विकास और हिंदू परंपरा की प्राचीन से आधुनिक यात्रा पर विशेष मंथन होगा. अयोध्या में यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि सनातन धर्म का महाकुंभ सिद्ध होगा. पहली बार भारत में इस स्तर का संत-समागम, राम भक्तों का महासंग्रह और राजनीतिक-धार्मिक महापुरुषों का संगम होने जा रहा है.

राज्य के विकास व चुनाव मामलों पर सीएम हेमंत से हुई आयुक्तों की चर्चा

रांची झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से आज यहां कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में दो अधिकारियों से शिष्टाचार मुलाकात हुईं। पहली मुलाकात झारखंड की राज्य निर्वाचन आयुक्त अलका तिवारी ने मुख्यमंत्री से की, जिसमें दोनों के बीच सौहार्दपूर्ण चर्चा हुई। यह मुलाकात एक पारंपरिक शिष्टाचार भेंट थी, जिसमें चुनाव संबंधी प्रशासनिक विषयों पर चर्चा हुई। वहीं, दूसरी शिष्टाचार मुलाकात विकास आयुक्त, झारखंड अजय कुमार सिंह ने मुख्यमंत्री से की। इस अवसर पर सिंह ने मुख्यमंत्री को विभिन्न विकास परियोजनाओं और योजनाओं की वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। सोरेन ने भी संबंधित योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया। सोरेन ने अधिकारियों से चर्चा करते हुए सहयोग और वैश्विक तौर पर सकारात्मक परिवर्तनों के लिए प्रतिबद्धता व्यक्त की।