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चलती तिपहिया साइकिल बनी आग का गोला, हरियाणा में दिव्यांग व्यक्ति की दर्दनाक मौत

पानीपत/चरखी दादरी. चरखी दादरी जिले के गांव कन्हेटी में वीरवार देर शाम ई-ट्राइसाइकिल में आग लगने से एक बड़ा दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे में दिव्यांग युवक की मौके पर ही मृत्यु हो गई। सूचना मिलने सदर पुलिस थाने के अंतर्गत आने वाली इमलोटा पुलिस चौकी टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल के शवगृह में रखवाया। शुक्रवार को स्वजनों के बयान दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम करवाया गया। मृतक की पहचान कन्हेटी निवासी रविंद्र (29) के रूप में हुई है। स्वजनों से मिली जानकारी के अनुसार रविंद्र पांच साल पहले इमलोटा के समीप सड़क हादसे का शिकार हो गया था। हादसे में लगी गंभीर चोटों के कारण उसके पेट से नीचे के हिस्से ने काम करना छोड़ दिया था। जिसके चलते वह चलने-फिरने में पूरी तरह से असमर्थ था। वह ई-ट्राइसाइकिल के जरिए ही इधर-उधर जाता था। बीते करीब दो साल से वह झज्जर जिले के गांव बिरोहड़ के खेल मैदान पर जाता था और युवाओं को अभ्यास करवाता था। वीरवार शाम को वह गांव कन्हेटी स्थित सैयद पीर मजार पर मत्था टेकने के लिए गया था। वहां से लौटने के लिए उसने अपनी ई-ट्राइसाइकिल पर बैठकर उसे स्टार्ट किया तो उसी दौरान वह आग पकड़ गई। वह दिव्यांग होने के कारण उसने फंस गया और नीचे नहीं उतर पाया। आसपास के लोगों ने आग की लपटे देखी तो वहां पहुंचकर उसे बचाने का प्रयास किया। लेकिन तब तक जिंदा जलने से उसकी दर्दनाक मृत्यु हो चुकी थी। बाद में ग्रामीणों ने डायल 112 पर काल कर घटना की जानकारी दी तो पुलिस टीम मौके पर पहुंची और निरीक्षण किया। पुलिस ने मृतक के चचेरे भाई राजेश के बयान पर इतफाकिया मौत की कार्रवाई की है। आग लगने का कारण शार्ट सर्किट या दूसरा तकनीकि कारण माना जा रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

R Nait के नए गाने पर बवाल, शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच

बठिंडा. पंजाबी गायक आर नैत एक बार फिर विवादों में फंस गए हैं। उनके नए गाना ‘रील’ को लेकर हिंदू संगठनों में भारी रोष पाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार गाने में साधुओं और सनातन धर्म के पवित्र प्रतिकों को आपत्तिजनक रूप में दिखाया गया है। इस बात की शिकायत थाना डिवीजन नंबर 3 में हिंदू संगठन शिवसेना ने दी है। जानकारी के अनुसार शिकायत में शिवसेना नेताओं ने आरोप लगाते कहा कि गाने में आर नैत साधु के रूप में दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद गाने में अभिनेत्री साधु बने आर नैत को अपनी समस्या बताती है कि सोशल मीडिया पर उसकी रील नहीं चल रही। इसके बाद आर नैत अजीब तरीके से माला हिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके बाद आर नैत रात के समय में साधुओं के साथ नाचते गाते दिखाई दे रहे हैं और फिर आर नैत अभिनेत्री का फोन लेकर उस पर माला घूमाते दिखाई देते हैं। शिवसेना ने आगे बताया कि इस सीन को देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे कि आर नैत तंत्र-मंत्र और पूजा की विधि का मजाक उड़ा रहे हैं। गाने के अंत के सीन में आर नैत अपनी आंखें ऊपर चढ़ाकर अजीब ढंग से अभिनेत्री के सिर पर हाथ फेरते हुए दिखाई देते हैं। इस गाने के सामने आने के बाद हिंदू संगठनों में भारी रोष पाया जा रहा है। उनका कहना है कि हिंदुओं की पूजा अर्चना और साधुओं को अपमान किया जा रहा है। इस बात की शिकायत लुधियाना पुलिस तक पहुंच चुकी है।

KPMG रिपोर्ट में बड़ा बदलाव: पूर्वी सिंहभूम ने शिक्षा रैंकिंग में लगाई छलांग, 1 नंबर पर पहुंचा

रांची झारखंड के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा देश की प्रतिष्ठित कंसल्टिंग एजेंसी केपीएमजी द्वारा जारी अप्रैल-मई 2026 की जिला शिक्षा प्रदर्शन समीक्षा रिपोर्ट (12वां संस्करण) में पूर्वी सिंहभूम ने पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया है. 24 जिलों के शैक्षणिक प्रदर्शन, प्रशासनिक दक्षता और बुनियादी ढांचे के मूल्यांकन के बाद पूर्वी सिंहभूम को झारखंड का सर्वश्रेष्ठ जिला घोषित किया गया है. यह उपलब्धि किसी एक परीक्षा परिणाम का नतीजा नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, नियमित मॉनिटरिंग, बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और डेटा आधारित प्रबंधन का संयुक्त परिणाम मानी जा रही है. जिला शिक्षा पदाधिकारी मनोज कुमार और जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार पांडेय की टीम के प्रयासों का असर अब राज्य स्तरीय रैंकिंग में साफ दिखाई देने लगा है. लगातार सुधार के दम पर शीर्ष पर पहुंचा पूर्वी सिंहभूम पिछले कुछ महीनों की रैंकिंग पर नजर डालें तो पूर्वी सिंहभूम का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है. दिसंबर 2025 में जिला पांचवें स्थान पर था. जनवरी 2026 में यह सातवें स्थान पर खिसक गया, जबकि फरवरी में 11वें स्थान पर पहुंच गया था. इसके बाद मार्च में जिले ने शानदार वापसी करते हुए चौथा स्थान हासिल किया और अप्रैल-मई 2026 की रिपोर्ट में सीधे पहले स्थान पर पहुंच गया. यानी कुछ ही महीनों में जिले ने तीन पायदान की छलांग लगाकर रामगढ़ और लोहरदगा जैसे जिलों को पीछे छोड़ दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि कक्षा संचालन पर विशेष ध्यान, समय पर डेटा रिपोर्टिंग और मजबूत जिला स्तरीय समन्वय के कारण यह सफलता संभव हुई है. पिछले महीनों में पूर्वी सिंहभूम की रैंकिंग     दिसंबर: 5वां स्थान     जनवरी: 7वां स्थान     फरवरी: 11वां स्थान     मार्च: चौथा स्थान     अप्रैल-मई: पहला स्थान 13 प्रमुख संकेतकों के आधार पर तैयार हुई रैंकिंग शिक्षा विभाग की समीक्षा रिपोर्ट 13 प्रमुख मानकों के आधार पर तैयार की गई है. इसमें हाई प्रायोरिटी संकेतकों को 70 प्रतिशत और इनेबलर्स को 30 प्रतिशत महत्व दिया गया है. झारखंड के टॉप-5 जिले     पूर्वी सिंहभूम: 77.95 प्रतिशत (रैंक-1)     लोहरदगा: 69.77 प्रतिशत (रैंक-2)     रामगढ़: 68.56 प्रतिशत (रैंक-3)     सरायकेला-खरसावां: 67.88 प्रतिशत (रैंक-4)     दुमका: 67.31 प्रतिशत (रैंक-5) वहीं दुमका, धनबाद और हजारीबाग ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है. सबसे पिछड़े तीन जिले     गिरिडीह: 49.81 प्रतिशत (रैंक-22)     गोड्डा: 46.25 प्रतिशत (रैंक-23)     गढ़वा: 45.49 प्रतिशत (रैंक-24) रिपोर्ट के अनुसार खूंटी और गढ़वा की रैंकिंग में सबसे अधिक गिरावट दर्ज की गई है. मैट्रिक परीक्षा 2026 में पूर्वी सिंहभूम का शानदार प्रदर्शन जिले ने जैक मैट्रिक परीक्षा 2026 में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है. पूर्वी सिंहभूम के 128 स्कूलों में एक भी छात्र फेल नहीं हुआ. इस मामले में जिले ने गुमला के 127 और दुमका के 100 स्कूलों को पीछे छोड़ दिया. जिले के आठ स्कूल ऐसे रहे, जहां सभी विद्यार्थियों ने प्रथम श्रेणी में परीक्षा पास की. केवल चार स्कूल ऐसे रहे, जहां 20 प्रतिशत से अधिक छात्र असफल हुए. यह आंकड़ा रांची के 14 और पश्चिमी सिंहभूम के 15 स्कूलों की तुलना में काफी बेहतर माना जा रहा है. 98 प्रतिशत रहा औसत सफलता प्रतिशत मैट्रिक परीक्षा में जिले का औसत पास प्रतिशत 98 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो राज्य के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शनों में शामिल है. विज्ञान, वाणिज्य और कला तीनों संकायों में पूर्वी सिंहभूम के स्कूलों ने शानदार प्रदर्शन किया. जिले के आठ स्कूल ऐसे रहे, जहां तीनों संकायों में शत-प्रतिशत विद्यार्थी सफल हुए. यह उपलब्धि हजारीबाग, रांची और धनबाद जैसे पारंपरिक शिक्षा केंद्रों से भी बेहतर रही. प्रथम श्रेणी में उत्कृष्ट परिणाम     विज्ञान संकाय में 21 स्कूलों के सभी विद्यार्थी प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए.     वाणिज्य संकाय में 13 स्कूलों ने यह उपलब्धि हासिल की.     कला संकाय में तीन स्कूलों के सभी छात्र प्रथम श्रेणी से पास हुए. 100 प्रतिशत परिणाम वाले स्कूल     विज्ञान: 40 स्कूल     वाणिज्य: 30 स्कूल     कला: 21 स्कूल छात्र उपस्थिति में भी आया उल्लेखनीय सुधार पूर्वी सिंहभूम के सरकारी और सहायता प्राप्त 1,675 स्कूलों में अप्रैल महीने के दौरान विद्यार्थियों की औसत उपस्थिति 66.50 प्रतिशत दर्ज की गई. इस क्षेत्र में जिले ने पांच रैंक का सुधार किया है. सामूहिक प्रयासों का दिखा असर शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह उपलब्धि किसी एक व्यक्ति या एक परीक्षा का परिणाम नहीं है. नियमित मॉनिटरिंग, जवाबदेही तय करने की व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए सामूहिक प्रयासों का असर अब सामने आने लगा है. पूर्वी सिंहभूम की यह उपलब्धि न केवल जिले के लिए गर्व की बात है, बल्कि पूरे झारखंड के लिए एक सकारात्मक संकेत भी है कि योजनाबद्ध प्रयास और प्रभावी प्रशासन के जरिए सरकारी शिक्षा व्यवस्था में उल्लेखनीय बदलाव संभव है. आखिर शिक्षा की असली परीक्षा सिर्फ बोर्ड रिजल्ट नहीं, बल्कि लगातार बेहतर होते स्कूल और सीखते हुए बच्चे होते हैं.

छत्तीसगढ़ में 1.12 लाख से अधिक वेंडर्स को मिला आर्थिक संबल

रायपुर कभी सड़क किनारे ठेला लगाकर सब्जियां बेचने वाले, चाय-नाश्ते की छोटी दुकान चलाने वाले या फिर फुटपाथ पर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों स्ट्रीट वेंडर (रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों) के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी चुनौती थी। बैंक ऋण तक पहुंच नहीं होने के कारण उनका व्यवसाय सीमित था। लेकिन प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि) योजना ने इन छोटे उद्यमियों के जीवन में बदलाव की नई कहानी लिखी है।  छत्तीसगढ़ में इस योजना के माध्यम से अब तक 1 लाख 12 हजार 36 से अधिक स्ट्रीट वेंडर (पथ विक्रेताओं) को 256 करोड़ 94 लाख रुपये से अधिक की ऋण सहायता उपलब्ध कराई जा चुकी है। योजना ने न केवल उनके कारोबार को मजबूती दी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका का नया अवसर भी प्रदान किया है।    कोविड-19 महामारी के दौरान आजीविका पर पड़े गंभीर प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने 1 जून 2020 को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (च्ड ैट।छपकीप) योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रीट वेंडर को बिना गारंटी कार्यशील पूंजी ऋण उपलब्ध कराना है, ताकि वे अपने व्यवसाय को फिर से शुरू कर सकें और उसका विस्तार कर सकें। योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें किसी प्रकार की गारंटी की आवश्यकता नहीं होती। समय पर ऋण चुकाने वाले हितग्राहियों को अगले चरण में अधिक राशि का ऋण प्राप्त करने का अवसर मिलता है।      योजना के तहत लाभार्थियों को चरणबद्ध तरीके से ऋण उपलब्ध कराया जाता है। प्रथम चरण में 10,000 रूपए तक का ऋण, द्वितीय चरण में 20,000 रूपए तक का ऋण तथा तृतीय चरण में 50,000 रूपए तक का ऋण दिया जाता है। अर्थात इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम 10 हजार रुपये से लेकर अधिकतम 50 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण सहायता प्राप्त की जा सकती है। समय पर पुनर्भुगतान करने वाले हितग्राही ही अगले चरण के लिए पात्र बनते हैं।      पीएम स्वनिधि योजना का लाभ उन छोटे कारोबारियों को मिलता है जो सड़क किनारे या सार्वजनिक स्थानों पर वस्तुएं एवं सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। इनमें सब्जी एवं फल विक्रेता, चाय, नाश्ता एवं फास्ट फूड विक्रेता, पान दुकान संचालक, कपड़ा एवं रेडीमेड वस्त्र विक्रेता, जूता-चप्पल विक्रेता, किताब एवं स्टेशनरी विक्रेता, फूल एवं पूजा सामग्री विक्रेता, मोबाइल एक्सेसरीज विक्रेता, नाई, मोची, लॉन्ड्री जैसी सेवाएं देने वाले स्वरोजगारी, जैसे अनेक छोटे व्यवसाय शामिल हैं।     छत्तीसगढ़ में योजना का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। दुर्ग, रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, रायगढ़ और धमतरी जैसे जिलों में हजारों पथ विक्रेताओं को ऋण सहायता प्रदान की गई है। राज्य स्तर पर 267.22 करोड़ रुपये की स्वीकृत राशि के विरुद्ध 256.94 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया जा चुका है, जिससे 1.12 लाख से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय का कहना है कि पीएम स्वनिधि योजना केवल ऋण वितरण कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह छोटे उद्यमियों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने का एक व्यापक अभियान है। इससे स्ट्रीट वेंडर्स की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है, उनकी आय में वृद्धि हो रही है और वे अपने परिवार के लिए बेहतर भविष्य का निर्माण कर पा रहे हैं। आज छत्तीसगढ़ के शहरों और कस्बों में हजारों पथ विक्रेता इस योजना के सहारे अपने कारोबार को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना वास्तव में उन मेहनतकश हाथों को आर्थिक संबल देने का माध्यम बनी है, जो अपने परिश्रम से शहरों की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करते हैं।

डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में बाल श्रम पर बड़ी कार्रवाई

रायपुर  विश्व बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के नेतृत्व में बच्चों के संरक्षण हेतु प्रदेशभर में विशेष कार्रवाई की गई। इस दौरान रायपुर के उरला औद्योगिक क्षेत्र से 9 नाबालिग बच्चों, बिलासपुर में आरपीएफ के माध्यम से 7 बच्चों तथा रायपुर जीआरपी के माध्यम से 4 बच्चों का रेस्क्यू कर कुल 20 बच्चों को संरक्षण में लिया गया। इसी क्रम में आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में राजधानी रायपुर के उरला स्थित मारुति नंदन स्ट्रक्चर इंडस्ट्रीज में विशेष औचक छापामार कार्रवाई की गई। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि लोहे की फैक्ट्री में नाबालिग बच्चों से गंभीर एवं जोखिमपूर्ण प्रकृति का कार्य कराया जा रहा था। मौके से 9 बच्चों को तत्काल संरक्षण में लेकर नियमानुसार प्रकरण दर्ज किया गया तथा उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला कि रेस्क्यू किए गए बच्चे ओडिशा, उत्तर प्रदेश के बरेली तथा पश्चिम बंगाल के आसनसोल के निवासी हैं। बच्चों ने बताया कि उन्हें एक ठेकेदार के माध्यम से रायपुर लाया गया था, जो बिहार का रहने वाला है। मामले में संबंधित ठेकेदार, बच्चों को यहां लाने वाले अन्य व्यक्तियों तथा संभावित बाल तस्करी के पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है। बच्चों के परिजनों से संपर्क स्थापित करने की प्रक्रिया भी प्रारंभ कर दी गई है। प्रकरण में प्रथम दृष्टया बच्चों के साथ क्रूरता, शोषण एवं अवैध रूप से जोखिमपूर्ण कार्य कराए जाने के तथ्य सामने आने पर संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75, 79 एवं 143 के तहत वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। साथ ही बाल श्रम एवं संभावित बाल तस्करी से जुड़े अन्य कानूनी पहलुओं की भी विस्तृत जांच की जा रही है। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि, बाल श्रम बच्चों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है, विशेषकर तब जब उनसे जोखिमपूर्ण उद्योगों में कार्य कराया जाता है। प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित बचपन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सम्मानजनक जीवन का अधिकार प्राप्त है। बाल श्रम एवं बाल तस्करी जैसी कुप्रथाओं के विरुद्ध आयोग पूरी प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। ऐसे मामलों में दोषियों के विरुद्ध विधिसम्मत कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी तथा बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे। इस कार्रवाई में जिला बाल संरक्षण अधिकारी संजय निराला, विपिन ठाकुर, श्रम विभाग की टीम एवं संबंधित अधिकारियों की संयुक्त उपस्थिति रही। रेस्क्यू किए गए सभी बच्चों को आवश्यक संरक्षण, परामर्श, चिकित्सकीय सहायता एवं पुनर्वास की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में महतारी वंदन योजना का अभियान तेज, ई-केवाईसी में रायगढ़ जिला रहा अव्वल

रायपुर. महतारी वंदन योजना के तहत पात्र हितग्राहियों का ई-केवाईसी कार्य रायगढ़ जिले में तेज गति से पूरा किया जा रहा है। कलेक्टर के मार्गदर्शन में महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक तथा वीएलई की संयुक्त टीम घर-घर पहुंचकर उन महिलाओं का ई-केवाईसी कर रही है, जो वृद्धावस्था, बीमारी या दिव्यांगता के कारण केंद्रों तक नहीं पहुंच पा रही हैं। अभियान के अंतर्गत सेक्टरवार और ग्रामवार सूची तैयार कर शेष हितग्राहियों की पहचान की गई है। टीम दस्तावेज सत्यापन के साथ ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी कर रही है, जिससे किसी भी पात्र महिला के योजना से वंचित रहने की संभावना समाप्त हो रही है। रानीसागर खड़ियापारा क्षेत्र में विशेष अभियान के दौरान तीन अस्वस्थ महिलाओं के घर पहुंचकर ई-केवाईसी कराया गया, जिनमें दो मामलों में प्रक्रिया सफल रही, जबकि एक प्रकरण तकनीकी कारणों से लंबित है। गौरतलब है कि रायगढ़ जिले ने महतारी वंदन योजना के ई-केवाईसी अभियान में पूरे प्रदेश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। राज्य स्तरीय रिपोर्ट के अनुसार जिले ने 96.47 प्रतिशत ई-केवाईसी पूर्ण कर लिया है, जबकि विभागीय आंकड़ों के अनुसार यह प्रगति लगभग 97 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। योजना के तहत पात्र विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1000 रुपये की आर्थिक सहायता सीधे बैंक खाते में दी जाती है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ई-केवाईसी अनिवार्य किया गया है।

“शिक्षा केंद्रों के निकट छेड़छाड़ की घटनाएं न हों, महिलाओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर रहें”

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि बदलते दौर में पुलिस बल को नई चुनौतियों से निपटने के लिए व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध करवाए जाएंगे। अपराधों के अन्वेषण का दायित्व निभाने वाले विवेचना अधिकारियों को अन्वेषण भत्ता भी मिले, इस दृष्टि से अन्य राज्यों में लागू व्यवस्थाओं का अध्ययन किया गया है। इस क्षेत्र में अपराध स्थल पर त्वरित पहुंच, सुरक्षा व्यवस्था, साक्ष्य संकलन, अभियुक्त गवाह और पीड़ित के परिवहन, भोजन आदि के साथ फोटोग्राफी -वीडियोग्राफी, डिजिटल साक्ष्य संग्रह, न्यायलीन प्रक्रिया से जुड़े आकस्मिक खर्च देखते हुए मध्यप्रदेश में अन्वेषण भत्ता लागू किए जाने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में निर्देश दिए कि पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति मजबूत रहे, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारियों से लेकर आरक्षक स्तर तक सजगता और सक्रियता से भूमिका निभाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रालय में गृह विभाग की समीक्षा में कहा कि सायबर अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए गृह विभाग द्वारा आईटी कंसल्टेंट की सेवाएं लेने का कार्य प्राथमिकता से किया जाए। बैठक में सिंहस्थ: 2028 के लिए भीड़ प्रबंधन, कानून व्यवस्था, वीआईपी सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और आपदा प्रबंधन के उद्देश्य से आवश्यक पुलिस बल की व्यवस्था पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सिंहस्थ की दृष्टि से विभिन्न कंट्रोल रूम तथा अन्य व्यवस्थाओं को इस तरह पूर्ण किया जाए ताकि उनका स्थाई महत्व और प्रभाव रहे। उज्जैन में अनेक बाबा महाकाल मंदिर सहित देव स्थान हैं। सभी व्यवस्थाओं को तात्कालिक के स्थान पर स्थायी अधोसंरचना के रूप में विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बसंत पंचमी और हाल ही में भोजशाला से संबंधित प्रसंग में पुलिस बल की सजग सक्रिय भूमिका के लिए वरिष्ठ अधिकारियों और फोर्स के अन्य सदस्यों को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पुलिस द्वारा किए जा रहे नवाचार सराहनीय हैं। राज्य को नक्सल मुक्त बनाने, आपदा मित्रों को प्रशिक्षित करने, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, अन्य विभागों के सहयोग से सुगम परिवहन सुनिश्चित करने, अग्निशमन इकाईयों को सहयोग, एयर एम्बुलेंस के उपयोग में सहयोग, सैनिक कल्याण प्रयासों को बढ़ाने के कार्य सराहनीय हैं। इसके साथ ही खुले स्थानों में मांस विक्रय पर प्रतिबंध और तेज ध्वनि में स्पीकर आदि के प्रयोग को नियंत्रित करने के निर्देशों का भी निरंतर पालन किया गया है। यह व्यवस्थाएं सुचारू बनी रहें, इसके लिए विभाग का अमला सक्रिय रहे। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन वर्चुअली शामिल हुए। अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव गृह श्री संजय कुमार शुक्ल, अपर मुख्य सचिव वित्त श्री मनीष रस्तोगी, पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाणा, एडीजी श्री ए. साई मनोहर सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में मध्यप्रदेश पुलिस चयन और भर्ती बोर्ड के गठन की पहल, सायबर अपराधों, सोशल मीडिया आधारित गतिविधियों और अपराधों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) के बढ़ते दुरूपयोग के प्रभावी विशलेषण के लिए राज्य सायबर सेल ने विशेषज्ञों की सेवाएं प्राप्त करने के संबंध में विचार किया गया। इसके साथ ही काउंटर टेररिस्ट ग्रुप की संरचना और बल में वृद्धि, राज्य स्तरीय उन्नत प्रशिक्षण संस्थान के माध्यम से एटीएस,एसटीएफ, हॉक फोर्स और अन्य विशिष्ट इकाईयों के लिए क्षमता संवर्धन प्रबंध, जिला स्तर पर सीन ऑफ क्राइम मोबाइल इकाई के संचालन के प्रावधान, वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों को विशेष भत्ता देने, एआई का प्रयोग कर सेफगार्ड एमपी प्रणाली के माध्यम से बुजुर्गों, कमजोर व्यक्तियों, महिलाओं की सुरक्षा के लिए देश में एक नई तरह की पहल करने के संबंध में भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रमुख निर्देश          पूरे प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति सुदृढ़ रहे, इसके लिए वरिष्ठ अधिकारी मुस्तैद रहें।          शिक्षा केंद्रों के निकट छेड़छाड़ की घटनाएं न हों, महिलाओं की सुरक्षा के प्रति गंभीर रहें।          गौवंश रक्षा पर पूरा ध्यान दें, उल्लंघन करने वालों के विरूद्ध सख्त एक्शन हो।          भू-माफिया के विरूद्ध कार्यवाही सख्त हो। अपराधियों की सम्पत्ति कुर्क करने में पीछे न रहें। संगठित अपराधियों पर निरंतर नजर रखी जाएं। मुखबिर तंत्र सशक्त रहना चाहिए।          राज्य में ई-चालान व्यवस्था और ई-साक्ष्य जैसे उपायों का अधिक से अधिक प्रयोग करें। आईटी के अधिकतम प्रयोग से अपराधों के नियंत्रण और जांच कार्य में आसानी लाएं जिससे कि मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में अग्रणी बने।          प्रतिदिन ग्रामों से दूध ,सब्जी आदि लाने वाले किसानों को कृषक कल्याण वर्ष में जीवन रक्षा के लिए हेलमेट प्रदान किए जा रहे हैं। पुलिस विभाग ऐसे अभिनव प्रयोग में सहयोगी बने और दुर्घटनाओं से बचाव के लिए उपयोगी हेलमेट के इस्तेमाल के लिए नागरिकों को जागरूक करने का अभियान जारी रखे।          पुलिसकर्मियों के लिए अपने आवास अर्थात आशियाने की व्यवस्था करने में गृह विभाग आवश्यक सहयोग दे। पुलिस लाइन्स में आवास गृहों की व्यवस्था और पुलिस हाउसिंग बोर्ड द्वारा नए आवास गृहों के निर्माण करवाने के साथ ही वैकल्पिक व्यवस्थाएं विकसित की जाएं, ताकि कम व्यय पर पुलिस जवानों को मकान उपलब्ध हो सके।          विभाग के श्रेष्ठ कार्य करने वालों को प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाए।          प्रदेश में नशा विरोधी अभियान निरंतर संचालित करें। युवाओं को हर हालत में नशे से बचाना है।          सिंहस्थ : 2028 में सुरक्षा उपकरणों के साथ ही पार्किंग, परिवहन और भीड़ प्रबंधन के लिए बेहतर व्यवस्थाएं बनाएं। प्रमुख उपलब्धियां और नवाचार बैठक में गृह विभाग द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए श्रेष्ठ कार्यों की भी चर्चा हुई। प्रमुख उपलब्धियों और नवाचारों की जानकारी दी गई।          सैनिक कल्याण के क्षेत्र मध्यप्रदेश के कार्य की रक्षा मंत्रालय द्वारा सराहना की गई।          संपदा संचालनालय द्वारा शासकीय आवास गृह के ऑनलाइन आवंटन का कार्य किया जा रहा है।          आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में क्षमता वर्धन के लिए निरंतरण प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।  

मोदी सरकार के 12 साल पर बोले सम्राट चौधरी, बिहार को औद्योगिक हब बनाने की तैयारी

पटना पटना के एक निजी होटल में आयोजित मीडिया संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देश और बिहार में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया. इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की और बिहार के विकास को लेकर सरकार की आगामी योजनाओं का विस्तृत खाका पेश किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने कई ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं. अब सरकार का लक्ष्य भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है और बिहार भी इस अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. भाजपा ने अपने संकल्पों को पूरा किया सम्राट चौधरी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने हमेशा अपने वैचारिक और राजनीतिक संकल्पों को पूरा करने का प्रयास किया है. उन्होंने कहा कि जनसंघ के दौर से लेकर आज तक पार्टी ने जो वादे किए, उन्हें पूरा करने की दिशा में काम किया. उन्होंने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने को ऐतिहासिक फैसला बताया. साथ ही अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा सपना बताया, जो प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में साकार हुआ. मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा कभी अपने एजेंडे और विचारधारा से पीछे नहीं हटी है. यही कारण है कि जनता लगातार पार्टी पर भरोसा जता रही है. बिहार में 5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बिहार में औद्योगिक माहौल को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में कई नई औद्योगिक परियोजनाओं की शुरुआत हुई है और बड़े निवेशक बिहार में रुचि दिखा रहे हैं. उन्होंने घोषणा की कि सरकार ने 20 नवंबर तक बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश को जमीन पर उतारने का लक्ष्य तय किया है. उनका कहना था कि यदि यह लक्ष्य पूरा होता है तो बिहार देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों में शामिल हो जाएगा. उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में डाटा सेंटर परियोजना पर जल्द काम शुरू होने वाला है, जिससे आईटी और तकनीकी क्षेत्र में नए अवसर पैदा होंगे. उद्योगों को 30 दिनों में मिलेगी मंजूरी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि उद्योग लगाने के लिए आवेदन करने वाले निवेशकों को अब लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा. सरकार ऐसी व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है, जिसके तहत उद्योगों से जुड़े जरूरी प्रस्तावों को 30 दिनों के भीतर मंजूरी मिल जाएगी. इससे कारोबार शुरू करने की प्रक्रिया आसान होगी और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा. राजगीर और मुंगेर में बनेगा डिफेंस कॉरिडोर मुख्यमंत्री ने बिहार में रक्षा क्षेत्र के विकास को लेकर भी बड़ी घोषणा की. उन्होंने कहा कि राजगीर और मुंगेर को डिफेंस कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा. उनका कहना था कि देश रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बिहार भी इस विकास यात्रा का हिस्सा बनेगा. डिफेंस कॉरिडोर बनने से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य में निवेश बढ़ेगा. एयरपोर्ट, हेलीपैड और एयरस्ट्रिप पर जोर सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के हर जिले को बेहतर हवाई संपर्क से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है. उन्होंने बताया कि राजगीर और सासाराम-कैमूर क्षेत्र के बीच नई एयरस्ट्रिप बनाने की योजना पर काम शुरू हो चुका है. उन्होंने कहा कि जरूरत के अनुसार विभिन्न जिलों में एयरपोर्ट, हेलीपैड और एयरस्ट्रिप विकसित किए जाएंगे. इससे पर्यटन, उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा. मुख्यमंत्री ने पटना एयरपोर्ट के नए स्वरूप की भी सराहना की और कहा कि अब वहां पहुंचकर बिहार में बदलाव साफ दिखाई देता है. सड़क, बिजली और सौर ऊर्जा पर फोकस मुख्यमंत्री ने दावा किया कि सड़क और बिजली के क्षेत्र में बिहार ने बड़ी प्रगति की है. उन्होंने कहा कि ग्रामीण सड़कों के निर्माण और गांवों को जोड़ने के मामले में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है. उन्होंने प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना का भी जिक्र किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के जरिए लाखों परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जाएगा. इससे लोगों को सस्ती और स्वच्छ बिजली मिलेगी तथा बिजली बिल का बोझ कम होगा. जीएसटी और जनधन योजना का किया जिक्र सम्राट चौधरी ने कहा कि जीएसटी लागू होने के बाद राज्यों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है. उन्होंने बिहार की 14 करोड़ आबादी को राज्य की सबसे बड़ी ताकत बताया. उन्होंने जनधन योजना और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) को केंद्र सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब सरकारी योजनाओं का पैसा सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंच रहा है. इससे पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार में कमी आई है. शिक्षकों के वेतन और पेंशन पर नहीं लगेगी रोक राज्य की वित्तीय स्थिति पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार शिक्षकों के वेतन और पेंशन को लेकर पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि वेतन और पेंशन कर्मचारियों का अधिकार है और इसे किसी भी परिस्थिति में रोका नहीं जाएगा. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विकास योजनाओं के उपयोगिता प्रमाणपत्र जरूर लिए जाएं, लेकिन वेतन और पेंशन भुगतान में किसी तरह की बाधा नहीं आनी चाहिए. बड़ी परियोजनाओं की खुद करेंगे समीक्षा मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यों को लंबित योजनाओं की नियमित समीक्षा करने का निर्देश दिया है. इसी के तहत बिहार सरकार ने भी बड़ा फैसला लिया है. सम्राट चौधरी ने कहा कि 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली सभी प्रमुख परियोजनाओं की समीक्षा वह स्वयं करेंगे. इससे परियोजनाओं में होने वाली देरी की वजहों का पता चलेगा और विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जा सकेगा.

डिप्टी सीएम ने सड़क हादसों में कमी के लिए दिए सख्त निर्देश

 जयपुर उपमुख्यमंत्री एवं परिवहन तथा सड़क सुरक्षा मंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और मानव जीवन की सुरक्षा व सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क सुरक्षा को जन आंदोलन बनाते हुए साझा जिम्मेदारी के साथ कार्य करें तथा दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए ठोस एवं प्रभावी कदम उठाएं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल सरकारी दायित्व नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। सरकार सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, घायलों को त्वरित सहायता उपलब्ध कराने तथा प्रत्येक नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निरंतर और प्रभावी प्रयास कर रही है। डॉ. बैरवा शुक्रवार को शासन सचिवालय में आयोजित स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल की 22वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने 21वीं बैठक में लिए गए निर्णयों की क्रियान्विति की समीक्षा की तथा राज्य में सड़क सुरक्षा गतिविधियों, केन्द्र सरकार की पीएम राहत योजना की प्रगति और राज्य सरकार की 10 वर्षीय सड़क सुरक्षा कार्ययोजना के क्रियान्वयन की समीक्षा करते हुए समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री डॉ. बैरवा ने सड़क सुरक्षा नियमावली में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश देते हुए कहा कि दुर्घटना पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जाए तथा सहायता राशि स्वीकृत करने में अनावश्यक विलंब नहीं हो। उन्होंने सड़क सुरक्षा मित्रों को प्रोत्साहन राशि के साथ आवश्यक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि भारी वाहन चालकों के लाइसेंस नवीनीकरण के समय उन्हें उचित प्रशिक्षण दिया जाए। साथ ही विद्यालयों और महाविद्यालयों में सड़क सुरक्षा शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाए। इससे युवाओं में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। बैठक में राज्य एवं राष्ट्रीय राजमार्गों पर स्थित आबादी क्षेत्रों, स्कूलों, अस्पतालों, जंक्शनों तथा उनसे जुड़ी छोटी सड़कों पर नियमानुसार रोड फर्नीचर एवं सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मोटर वाहन कर्मकार अधिनियम, 1961 के अनुसार वाहन चालकों द्वारा निर्धारित समय तक ही वाहन संचालन सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता एवं प्रवर्तन कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया। डॉ. बैरवा ने यातायात नियमों के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई एवं यात्रियों की सुरक्षित, सुगम एवं आरामदायक यात्रा सुनिश्चित करने के लिए बसों की फिटनेस, मरम्मत और रखरखाव कार्यों को प्राथमिकता देने तथा बस एवं ट्रक चालकों के नियमित स्वास्थ्य परीक्षण और पर्याप्त विश्राम की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा। सभी जिलों के शिक्षण संस्थानों में बेसिक लाइफ सपोर्ट बीएलएस प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए गए, ताकि दुर्घटना की स्थिति में लोगों को प्राथमिक चिकित्सा और जीवनरक्षक सहायता उपलब्ध कराई जा सके। उपमुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री आयुष्मान जीवन रक्षा योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश देते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने वाले “गुड सेमेरिटन” को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि गुड सेमेरिटन को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि 5 हजार रुपये से बढ़ाकर 10 हजार रुपये कर दी गई है। राज्य में अब तक 340 गुड सेमेरिटन सम्मानित किए जा चुके हैं। बैठक में राज्य के राजमार्गों पर इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम आईटीएमएस की स्थापना की प्रगति तथा राज्य स्तरीय सड़क सुरक्षा अभियान की समीक्षा भी की गई। बैठक में शासन सचिव डॉ. जोगा राम, परिवहन विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री भवानी सिंह देथा, प्रशिक्षण एवं यातायात डीजीपी श्री अनिल पालीवाल,महानिरीक्षक श्री दीपक कुमार,यातायात एडीजीपी डॉ.बी.एल मीना सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

‘अंत्योदय’ संकल्प के साथ ग्रामीण सेवा शिविरों का संचालन, मंत्री जोगाराम पटेल ने किया अवलोकन

 जयपुर संसदीय कार्य, विधि एवं विधिक कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने शुक्रवार को पंचायत समिति लूणी की ग्राम पंचायत शिकारपुरा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर का अवलोकन किया। इस दौरान जिला कलक्टर  आलोक रंजन, जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी आशीष कुमार मिश्रा भी साथ रहे। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा मुख्यमंत्री  भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में प्रदेश सरकार हर वर्ग के उत्थान और कल्याण के लिए अनवरत काम कर रही है। उन्होंने कहा ग्रामीण और शहरी सेवा शिविरों के माध्यम से ‘लक्ष्य-अंत्योदय,प्रण-अंत्योदय, पथ-अंत्योदय’ का संकल्प साकार हो रहा है। जोगाराम पटेल ने कहा आमजन को राज्य सरकार की विभिन्न जन-कल्याणकारी एवं फ्लैगशिप योजनाओं का लाभ सीधे उनके घर-द्वार तक पहुँचाने के लिए 12 जून से 15 जुलाई तक प्रदेशभर में ग्रामीण सेवा शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा इन शिविरों में आमजन से जुड़े काम हाथों-हाथ संपादित किए जा रहे है। विधि मंत्री ने कहा अभियान के तहत 22 विभागों के अनेक कार्य संपादित किये जा रहे है। उन्होंने कहा शिविर में प्रत्येक नागरिक का कार्य उसी दिन पूर्ण करने का हरसंभव प्रयास करें। उन्होंने कहा यदि कोई कार्य अपूर्ण या लंबित रहते हैं तो विभागीय अधिकारी उन कार्यों का समयबद्ध रूप से निस्तारण सुनिश्चित करें। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि विधि मंत्री ने कहा हमारी सरकार ने युवाओं को 5 साल में 4 लाख सरकारी नौकरी देने का लक्ष्य रखा है। अब तक 1 लाख 25 हजार से अधिक सरकारी पदों पर नियुक्तियां दी गई है। उन्होंने कहा 1 लाख 35 हजार से अधिक पदों पर भर्तियां प्रक्रियाधीन है और इस वर्ष 1 लाख 25 हजार पदों का भर्ती कैलेण्डर भी जारी किया गया है। उन्होंने कहा हमारे कार्यकाल में बिना पेपरलीक के 350 से अधिक परीक्षाएं आयोजित की गई हैं। जोगाराम पटेल ने कहा किसानों की उन्नति एवं आर्थिक संबल देने के लिए खेत तलाई, फॉर्म पौंड, तारबंदी और कृषि यंत्रों के लिए सब्सिडी उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा पशुपालकों के कल्याण के लिए मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना और गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना का संचालन किया जा रहा है। उन्होंने कहा सभी पशुपालक अपने पशुओं का बीमा करवायें। जोगाराम पटेल ने कहा शिविर में आपसी सहमति से बँटवारा, राजस्व रिकॉर्ड में शुद्धि, रास्ता खोलने के प्रकरणों का निस्तारण भी किया जाएगा। उन्होंने सभी नागरिक इन शिविरों में आकर  अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। संसदीय कार्य मंत्री ने शिकारपुरा धाम में राजाराम जी महाराज मंदिर में विधिवत पूजा- अर्चना कर प्रदेश के खुशहाली के लिए कामना की। उन्होंने आश्रम के गादीपति महंत दयाराम महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया।