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भोपाल की अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की सुस्ती, बिना अनुमति फल-फूल रही 250 बस्तियां

भोपाल  भोपाल जिले में अवैध कॉलोनियों पर प्रशासन की कार्रवाई पूरी तरह ठप हो गई है, यही कारण है कि भूमाफिया बिना अनुमतियों के प्लाट बेचकर मोटा लाभ कमा रहे हैं। जबकि पिछले दिनों ईंटखेड़ी के घासीपुरा इलाके की अवैध कॉलोनी स्थित मकान में ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा हो चुका है। इसके बाद भी जिम्मेदारों ने अवैध कॉलोनियों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की है। जबकि छह महीने पहले कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश सभी एसडीएम को दिए थे, जिसके बाद एसडीएम द्वारा करीब 250 अवैध कॉलोनियों को चिह्नित तो किया था, लेकिन इसके आगे कार्रवाई नहीं बढ़ सकी और मामला ठंडे बस्ते में चला गया है। अधिकारियों की अनदेखी के चलते यहां बीते दो से तीन महीने की बात करें, तो अन्य तहसील/सर्कल में कोई भी बड़ी कार्रवाई नहीं हुई। दरअसल, प्रशासन ने जिले में 250 ऐसी जमीनें चिह्नित की थीं, जहां अवैध कॉलोनियों का निर्माण जारी है। इन कॉलोनियों के निर्माण के लिए शासकीय अनुमति नहीं ली गई है। एसडीएम ने ऐसी कॉलोनियों को नोटिस तो जारी किए, लेकिन इसके बाद एक्शन नहीं लिया। सूत्रों की मानें तो राजनीतिक संरक्षण की वजह से अधिकारियों द्वारा अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई नहीं की गई है। जिले में कोलार, हुजूर, गोविंदपुरा व बैरसिया क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों जमकर फल-फूल रही हैं। कोलार में अवैध कॉलोनियों का जाल कोलार तहसील के आसपास ही अवैध कॉलोनियों का जाल बुना जा रहा है। रतनपुर सड़क, पिपलिया केशो, सेमरी, सोहागपुर, गेहूखेड़ा, राजहर्ष सहित अन्य क्षेत्रों में कृषि भूमि पर कॉलोनियों का निर्माण किया जा रहा है। यह सभी गांव नगर निगम क्षेत्र में आते हैं। यहां पर कृषि भूमि पर सड़क बनाकर प्लाट बेचे जा रहे हैं। इसके लिए बकायदा कॉलोनाइजरों ने बोर्ड लगा रखे हैं। इसमें से किसी ने भी न तो टीएनसीपी से और न ही नगर निगम से अनुमति ली है। हुजूर से बैरसिया तक काटे जा रहे अवैध प्लाट जिले की हुजूर तहसील से लेकर बैरसिया तक भूमाफिया अवैध कॉलोनियों में जमकर प्लाट बेच रहे हैं। यहां पर भोपाल बायपास से लगे नगर निगम सीमा के पास वाले ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलोनियों काटी गई हैं, जिनमें से किसी के पास भी अनुमतियां नहीं हैं। लांबाखेड़ा से लेकर बैरसिया तक 35 किलोमीटर के मार्ग पर कृषि भूमि पर अवैध प्लाटिंग की जा रही है। इसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इस तरह लोगों को फंसा रहे भूमाफिया लोगों को फंसाकर अवैध कॉलोनियों में प्लाट बेचने के लिए भूमाफिया नए-नए तरीके अपना रहे हैं। यह विकसित कॉलोनियों की तर्ज पर कवर्ड कैंपस बनाकर दे रहे हैं। वो जमीन के चारों तरफ बाउंड्री बनाते हैं। इसके बाद रोड, बिजली के पोल व सीवेज लाइन बिछाते हैं। ऐसे में जब कोई व्यक्ति प्लाट लेने आता है, तो वो यह देखकर आकर्षित हो जाता है। ऐसी एक-दो नहीं, करीब 50 से अधिक अवैध कॉलोनियां बन रही हैं। हालांकि, एक बार कॉलोनी में प्लाट बेचने के बाद तथा कथित बिल्डर कभी वहां पलटकर नहीं देखते हैं। एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जिले में अवैध कॉलोनियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने के निर्देश सभी एसडीएम को दिए गए हैं। पिछले महीनों में अवैध कॉलोनाइजरों को नोटिस जारी किए गए थे। इसके बाद जिन कॉलोनाइजरों ने दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं, उन पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।  -कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक जारी, MP हाईकोर्ट में 29 अक्टूबर को होगी सुनवाई

 जबलपुर  हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा व न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष गुरुवार को लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो के दुरुपयोग को चुनौती के मामले में सुनवाई हुई। मेटा कंपनी की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी वर्चुअल पैरवी की। उन्होंने माना कि इंटरनेट मीडिया के कई प्लेटफार्म्स पर हाई कोर्ट प्रकरणों की सुनवाई के वीडियो का दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें आपत्तिजनक वीडियो के यूआरएल लिंक उपलब्ध करा दिए जाएं तो उन वीडियो को हटा दिया जाएगा। 29 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई हाई कोर्ट ने याचिकाकर्ता को उक्त लिंक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने अंतरिम आदेश के तहत सभी क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक अगली सुनवाई तक बरकरार रखी है। मामले की अगली सुनवाई 29 अक्टूबर को होगी। कोर्ट की बातों को मिर्च मसाला लगाकर करते हैं वायरल जबलपुर निवासी अधिवक्ता अरिहंत तिवारी और विदित शाह ने याचिका दायर कर बताया कि मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मीम्स या शार्ट्स के माध्यम से डाली जाती है। यह आपत्तिजनक है। कई बार न्यायाधीशों द्वारा ओपन कोर्ट में कही बातों को मिर्च मसाला लगाकर उन्हें वायरल किया जाता है। यह अदालत की अवमानना है। गतिविधियों की मानिटरिंग करें आईटी याचिका में मांग की गई कि यूट्यूब के स्थान पर वेबेक्स आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए प्रकरणों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए, जो कि कुछ हद तक सुरक्षित है। यह मांग भी की गई कि रजिस्ट्रार आईटी भी इस तरह की गतिविधियों पर मानिटरिंग करें और नियंत्रण सुनिश्चित करें।

गृह युद्ध की साजिश रचने का आरोप: गिरिराज सिंह का बड़ा बयान

बेगूसराय,  ‘आई लव मुहम्मद’ बनाम ‘आई लव महाकाल’ विवाद को लेकर केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय सांसद गिरिराज सिंह ने विपक्षी नेताओं पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी, असदुद्दीन ओवैसी और मुफ्ती जैसे नेता देश में लोगों को भड़काकर गृह युद्ध जैसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं। गिरिराज सिंह ने शुक्रवार को मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अभी दो दिन पहले लेह में जो घटना हुई, वह राहुल गांधी की ही योजना का हिस्सा है। उनका काम करने का तरीका अर्बन नक्सलियों जैसा है। ‘आई लव मुहम्मद’ विवाद भी उसी कड़ी का हिस्सा है। लेकिन अब आम जनता इनसे दूरी बना रही है। मुस्लिम समाज से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि ओवैसी जैसे नेताओं को लोगों को भड़काने के बजाय सामाजिक समरसता की बात करनी चाहिए। राहुल गांधी न केवल देश में आगजनी कर रहे हैं बल्कि विदेशी अखबारों के साथ मिलकर भारत को बदनाम करने का काम भी कर रहे हैं। लगता है उन्हें देश से ज्यादा विदेश से प्यार हो गया है। केंद्रीय मंत्री ने राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को ‘नेपो किड’ करार देते हुए कहा कि दोनों केवल बड़े राजनीतिक घरानों से आने के कारण ही पहचाने जाते हैं। अगर ये खानदानी राजनीति के वारिस नहीं होते तो मोहल्ले के लोग भी इन्हें नहीं पहचानते। लेह से लेकर मणिपुर तक आग भड़काने का काम राहुल गांधी ने किया है। वहीं, राहुल गांधी द्वारा ‘हाइड्रोजन बम’ फोड़ने वाले बयान पर गुरुवार को उन्होंने कहा कि वे अर्बन नक्सल की ओर बढ़ रहे हैं। राजनीति में हाइड्रोजन और न्यूक्लियर बम नहीं होते हैं। राजनीति सामाजिक सरोकार और लोकतांत्रिक व्यवस्था का है, आग लगाने का नहीं है। वे देश में गृह युद्ध करवाना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा था कि राहुल गांधी जिस ढंग की भाषा बोल रहे हैं, अगर वह भाषा मैं बोलूं तो उन्हें बड़ा बुरा लगेगा।  

ब्रह्माकुमारी प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री साय से की मुलाकात, वैश्विक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिया निमंत्रण

मुख्यमंत्री साय को वैश्विक शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए दिया निमंत्रण रायपुर,  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय से राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री  निवास कार्यालय में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के प्रतिनिधि मण्डल ने सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर रायपुर की संचालिका ब्रह्माकुमारी सविता दीदी ने मुख्यमंत्री  साय को आगामी 10 से 13 अक्टूबर तक माउण्ट आबू में आयोजित होने वाले वैश्विक शिखर महासम्मेलन में सम्मिलित होने हेतु आमंत्रित किया। मुख्यमंत्री  साय ने प्रतिनिधि मण्डल को इस आयोजन के लिए शुभकामनाएँ दीं तथा आमंत्रण के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा शांति, आध्यात्मिकता और मानवता के कल्याण के लिए किए जा रहे कार्य अनुकरणीय हैं। भेंट के दौरान सविता दीदी ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आगामी रायपुर प्रवास के दौरान नवा रायपुर, सेक्टर-20 स्थित शान्ति शिखर के नये भवन "एकेडमी फार ए पीसफुल वर्ल्ड- शान्ति शिखर" के लोकार्पण कार्यक्रम की जानकारी भी मुख्यमंत्री को दी। प्रतिनिधि मण्डल में ब्रह्माकुमारी सविता दीदी के साथ बीके रश्मि दीदी, बीके महेश डोडवानी और बीके हीरेन्द्र नायक भी उपस्थित रहे।  

भाजपा को लाडो लक्ष्मी योजना से मिलेगी बढ़त? हरियाणा में बेटियों को मिलेंगे सबसे ज्यादा रुपये

चंडीगढ़  हरियाणा सरकार ने लाडो लक्ष्मी योजना की शुरुआत कर देश की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है। यह योजना न सिर्फ हरियाणा सरकार के लिए गेम चेंजर साबित होगी बल्कि भाजपा बिहार, पश्चिम बंगाल, पंजाब और यूपी के विधानसभा चुनाव में भी इस योजना को भुनाने की कोशिश करेगी। इस योजना की सबसे बड़ी यूएसपी यही है कि जो राशि पात्र महिलाओं व लाभार्थियों को दी जा रही है, वह देश में सबसे ज्यादा है। पूरे देश में इस समय आठ योजनाएं चल रही हैं जिनके माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उनके बैंक खाते में हर माह वित्तीय मदद दी जाती है। राज्य सरकार की लाडो लक्ष्मी योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 2100 रुपये दिए जाएंगे। बाकी किसी योजना में इतने पैसे नहीं मिलते हैं। मध्य प्रदेश में 1250 रुपये, ओडिशा में 800 रुपये, महाराष्ट्र में 1500 रुपये, पश्चिम बंगाल में 1200 रुपये, झारखंड में 1000 रुपये, कर्नाटक में दो हजार रुपये, तेलगांना में दो हजार रुपये और हिमाचल प्रदेश में 11 सौ रुपये दिए जा रहे हैं। दिल्ली और पंजाब में भी योजना प्रस्तावित हैं, जहां एक-एक हजार रुपये दिए जाने हैं। भाजपा सरकार अब यही भुनाने की कोशिश करेगी कि उसने जो वादा किया था, उसे वह समय पर पूरा कर रही है। हालांकि विपक्ष सवाल उठा रहा है कि पहले सभी महिलाओं को वित्तीय मदद देने की घोषणा की गई थी, मगर अब सिर्फ कुछ ही महिलाओं को दी जा रही है। विपक्ष को जवाब देते हुए सीएम ने कहा- अभी तो सरकार को एक साल पूरा नहीं हुआ है। इस योजना को चार चरणों में पूरा जाना है। बाकी तीन चरणों की घोषणा भी बहुत जल्द किया जाएगा। सबसे ज्यादा हरियाणा में महिलाओं को दिए जाएंगे पैसे प्रदेश                       योजना        लाभ (राशि) मध्यप्रदेश             लाडली बहना      1250 ओडिशा               सुभद्रा                800 महाराष्ट्र         माझी लाडकी बहीण   1500 पश्चिम बंगाल     लक्ष्मी भंडार    1200 झारखंड          मैया सम्मान       1000 कर्नाटक       गृह लक्ष्मी योजना    2000 तेलगांना       गृह लक्ष्मी योजना    2000 योजना को लेकर महिलाओं में था गजब उत्साह लाडो लक्ष्मी योजना के लॉचिंग के मौके पर ताऊ देवी लाल स्टेडियम महिलाओं से पूरा खचाखच भरा हुआ था। योजना को लेकर महिलाओं के चेहरे पर एक अलग ही खुशी देखने को मिल रही थी। महिलाओं को इस बात का अहसास था कि जब उनके खाते में रुपये आएंगे तो वे उन रुपयों से अपनी ख्वाहिशों को पूरा कर पाएंगी। अंबाला से पहुंची पल्लवी ने बताया, ये पैसे उनकी जिंदगी के लिए काफी अहम रखते हैं। उनके पति एक दुकान में नौकरी करते हैं। उन पैसों से जैसे-तैसे खर्चा चल रहा है। इससे उन्हें काफी बल मिल पाएगा। वहीं, पंचकूला की सखी ने बताया, सरकार से मिलने वाली यह मदद उनके परिवार के लिए काफी मायने रखती हैं। इस महंगाई के दौर में ये पैसे उनके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में मदद करेगी। अब प्रतियोगी परीक्षाओं की कर पाउंगी तैयारी : पुष्पेंद्र रायपुररानी की पुष्पेंद्र ने बताया, उसे इस योजना का बेसब्री से इंतजार था। इस योजना से आने वाले रुपयों से मैं अब प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर पाउंगी। मेरा सपना सरकारी नौकरी करने का है। इस वित्तीय मदद से मैं अब सीईटी की कोचिंग की तैयारी कर पाउंगी। मेरे मम्मी पापा नहीं है, इस योजना से मिलेगा सहारा : रजनी मंच से लाडो लक्ष्मी योजना में आवेदन करने वाली रजनी ने बताया, उसके मम्मी-पापा नहीं है। राज्य सरकार की इस योजना से मुझे काफी लाभ मिलेगा। इन रुपयों की मदद से मेरी आगे की पढ़ाई सुचारू रूप से जारी रह सकेगी। मैं नर्सरी टीचर बनना चाहती हूं। पैसे होंगे तो कुछ कर पाउंगी : कामना रायपुररानी की कामना ने बताया, वह अभी ग्रेजुएशन कर रही हैं। ग्रेजुएशन के बाद कुछ सोचा नहीं है। इतने पैसे नहीं हैं कि कोई तैयारी कर पाउं। अब यदि पैसे आते हैं तो मैं कुछ आगे सोच पाउंगी। मेरे पास प्रशासन की ओर से कॉल आई थी कि आपको इस योजना में आवेदन कर सकती हैं। यह सुनते ही मैं खुश हो गई थी।

सुप्रीम कोर्ट का दिवाली से पहले अहम फैसला, दिल्ली-NCR में चल सकेंगे ग्रीन पटाखे

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली से पहले पटाखों को लेकर शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में उन निर्माताओं को ग्रीन पटाखे बनाने की इजाजत दे दी, जिनके पास नेशनल एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (NEERI) और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से प्रमाणित सर्टिफिकेट हैं। हालांकि, कोर्ट ने यह शर्त रखी है कि ये निर्माता दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में अगले आदेश तक किसी भी प्रकार के पटाखों की बिक्री नहीं कर सकेंगे। निर्माताओं को यह सुनिश्चित करने के लिए हलफनामा देना होगा कि वे दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री नहीं करेंगे। यह फैसला वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के मकसद से लिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह हितधारकों के साथ मिलकर दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री और भंडारण पर प्रतिबंध से संबंधित समाधान तैयार करे और इसे 8 अक्टूबर तक कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे। इससे पहले, एससी ने दिल्ली-एनसीआर में पटाखों पर प्रतिबंध को चुनिंदा तरीके से लागू करने पर सवाल उठाया था। इसने कहा था कि अगर स्वच्छ हवा राष्ट्रीय राजधानी के कुलीन निवासियों का अधिकार है, तो यह पूरे देश के नागरिकों को भी मिलना चाहिए। चीफ जस्टिस बीआर गवई और जज विनोद चंद्रन की पीठ राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में पटाखों के विनियमन से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। कोर्ट का तर्क और संतुलन सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि बिहार में खनन पर प्रतिबंध लगाने से अवैध माफिया पैदा हो गए। ऐसे में दिल्ली-NCR में भी पटाखों पर पूर्ण पाबंदी से अवैध बाजार बढ़ रहा है। कोर्ट का कहना है कि इस मसले पर संतुलित दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है। बिक्री पर अभी भी संशय हालांकि राहत सिर्फ निर्माण तक सीमित है। कोर्ट ने अभी साफ नहीं किया है कि दिल्ली-NCR में पटाखों की बिक्री और दागने की इजाजत होगी या नहीं। इस पर अंतिम फैसला 8 अक्टूबर की सुनवाई में हो सकता है। केंद्र सरकार को आदेश सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि सभी हितधारकों के साथ मिलकर पटाखों पर प्रतिबंध लागू करने की स्पष्ट नीति बनाई जाए। कोर्ट ने माना कि अब तक दिल्ली-NCR में पूरी तरह बैन लागू नहीं हो सका है। अब सभी की निगाहें 8 अक्टूबर पर दिल्ली-NCR की जनता में उत्सुकता है कि क्या दिवाली पर सालों बाद पटाखों की आवाज गूंजेगी। अब देखना होगा कि 8 अक्टूबर की सुनवाई में कोर्ट बिक्री और आतिशबाज़ी पर क्या फैसला सुनाता है। इससे कई सवाल खड़े हुए हैं कि क्या यह कदम प्रदूषण संकट को और बढ़ाएगा या फिर “ग्रीन पटाखे” सच में समाधान साबित होंगे। पटाखा बनाने वालों को देना होगा लिखित वचन बता दें कि पटाखा निर्माताओं को यह भी लिखित वचन देना होगा कि वे दिल्ली-एनसीआर में कोई पटाखा नहीं बेचेंगे। यह आदेश इसलिए दिया गया है क्योंकि इस क्षेत्र में दिवाली के समय प्रदूषण का स्तर बहुत बढ़ जाता है। इस मामले पर अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि आगे बिक्री पर क्या कदम उठाए जाएं। पूरे देश में नहीं लगा सकते रोक- बीआर गवई  बता दें कि, मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने साफ कहा कि वह पूरे देश में पटाखों की बिक्री और निर्माण पर पूरी तरह से रोक नहीं लगा सकता, क्योंकि केंद्र सरकार ने इस बारे में कोई राष्ट्रीय स्तर का प्रतिबंध प्रस्तावित नहीं किया है। राजधानी में 494 तक पहुंच गया था एक्यूआई शीर्ष अदालत का यह कदम दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए उठाया गया है। नवंबर 2024 में राजधानी का औसत एक्यूआई 494 तक पहुंच गया था, जिससे शहर घने स्मॉग की चादर में लिपट गया था और लोगों का सांस लेना मुश्किल हो गया था। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला दिवाली से ठीक पहले आया है, जब पटाखों की बिक्री और जलाने से प्रदूषण का स्तर और ज्यादा बढ़ सकता था। अब दिल्ली-एनसीआर में पटाखों की बिक्री पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी।  क्या NCR के शहर ही साफ हवा के हकदार? चीफ जस्टिस ने कहा, ‘अगर एनसीआर के शहर स्वच्छ हवा के हकदार हैं, तो दूसरे शहरों के लोग क्यों नहीं? जो भी नीति होनी चाहिए, वह अखिल भारतीय स्तर पर होनी चाहिए। हम केवल इसलिए दिल्ली के लिए नीति नहीं बना सकते कि वे देश के कुलीन नागरिक हैं।’ उन्होंने कहा, ‘मैं पिछली सर्दियों में अमृतसर में था और वहां प्रदूषण दिल्ली से भी बदतर था। अगर पटाखों पर प्रतिबंध लगाना है, तो उन्हें पूरे देश में प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।’ सीनियर वकील अपराजिता सिंह ने कहा कि कुलीन वर्ग अपना ख्याल खुद रखता है। प्रदूषण होने पर वे दिल्ली से बाहर चले जाते हैं। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग से इस मुद्दे पर विस्तृत रिपोर्ट प्राप्त करने को कहा।

गोविंदगढ़ किला पर दंपती के साथ दरिंदगी, दो आरोपी गिरफ्तार, रीवा में सनसनी

रीवा   रीवा जिले में करीब एक साल पहले न्यू कपल के साथ हुई दरिंदगी जैसी ही खौफनाक घटना फिर हुई. इस बार ये घटना गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र में हुई. यहां भी बदमाशों ने हैवानियत की हदें पार की. गोविंदगढ़ किला घूमने गए पति-पत्नि को बदमाशों ने पहले तो उनके साथ बेरहमी मारपीट की और फिर दोनों को खंभे से बांधकर बंधक बनाया. इसके बाद दोबारा लोहे के पाइप से पीटा. कपल के कपडे़ फाड़कर महिला के साथ अश्लील हरकतें की. कपल को लूटकर बंधा हुआ मौके से बदमाश फरार हो गए. गोविंदगढ़ किला घूमने गया था कपल ये भयावह घटना 24 सितंबर  शाम तकरीबन 5 बजे की है. गोविंदगढ़ निवासी कपल घूमने के लिए गोविंदगढ़ किला पहुंचे. इसी दौरान पति-पत्नि तालाब किनारे जाकर बैठ गए. अचानक दो बदमाश वहां आ धमके और बदसलूकी करने लगे. ये देखकर महिला के पति ने परिजनों को फोन करके सूचना दी. इसके बाद बदमाशों ने दंपती के मोबाइल फोन छीन लिए और फिर मारपीट शुरू कर दी. खंभे से बांधकर पीटा, पति-पत्नी के कपड़े फाड़े दोनों बदमाश यहीं नहीं रुके. पति-पत्नी को खंडहर में ले गए और बंधक बना लिया. दोनों को अलग-अलग खंभों से रस्सी से बांध दिया. बदमाशों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए दोबारा लोहे के पाइप से पति-पत्नी की जमकर पिटाई की और महिला के कपडे फाड़ दिए. उसके साथ ही अश्लील हरकतें भी की. बदमाश अपने मंसूबों मे कमयाब हो पाते, इससे पहले ही पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई. पुलिस के आने भनक लगते ही बदमाशों ने पति-पत्नी से पर्स और नगदी छीनी और जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए. बदमाशों के घेरते ही युवक ने परिजनों को किया कॉल चूंकि बदमाशों द्वारा घेरते ही महिला के पति ने परिजनों को फोन करके सारा वाकया बता दिया. इसके बाद जब अचानक पति-पत्नी के फोन बंद हुए तो परिजनों को बड़ी अनहोनी होने की आशंका हुई. परिजनों ने तत्काल घटना की सूचना पुलिस को दी. इस पर थाना प्रभारी अरविन्द राठौर पुलिस टीम के साथ गोविंदगढ़ किला पहुंचे. पुलिस ने पति-पत्नी को बंधन से मुक्त कराया. गंभीर रूप से घायल दंपती को अस्पताल में भर्ती कराया. इसके बाद पुलिस बदमाशो की तलाश मे जुट गई. घटना के 24 घंटे के अंदर दोनों बदमाश गिरफ्तार एसडीओपी उदित मिश्रा ने बताया "पति-पत्नी की शिकायत पर गोविंदगढ़ थाने मे मामला दर्ज किया गया. दंपती को के सथ दो बदमाशों ने मारपीट कर रस्सी के जरिए खंभे से बांधा. महिला के साथ छेड़खानी की गई है. अलग -अलग टीम गठित कर बदमाशों की तलाश शुरू की गई. घटना के अगले दिन गुरुवार को थाना क्षेत्र मे दबिश देते हुए कुछ संदेहियों को पकड़कर पुलिस की टीम ने पूछताछ की तो दो आरोपियों ने वारदात करना कबूल लिया." दंपती से लूटे गए मोबाइल, नगदी बरामद एसडीओपी उदित मिश्रा ने बताया "इस वारदात के दो आरोपी शिव कुमार मिश्रा और महेन्द्र कुमार लोनिया को गिरफ्तार किया गया है. इनके पास से लूटे हुए 3 मोबाइल फोन, पर्स, और नगदी बरामद की गई है. इसके आलावा लोहे वारदात मे मारपीट के लिए इस्तेमाल की गई लोहे की पाइप भी बरामद किए गए है. आरोपियों से पूछताछ की जा रही, जो भी तथ्य निकलेंगे उसके आधार पर आगे के कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल दोनों आरोपियों के खिलाफ 309[6], 74 BNS 351 [3]के तहत अपराध दर्ज किया गया है." एक साल पहले गुढ़ थाना क्षेत्र में भी हुई थी दरिंदगी रीवा जिले के गुढ़ थाना क्षेत्र में 22 अक्टूबर 2024 में भी ऐसी ही दरिंदगी की वारदात सामने आई थी. सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया था. दरिंदों ने ऐसी घिनौनी वारदात की थी, जिसे सुनकर लोग अंदर तक कांप गए. इस वारदात के 6 माह बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आठों दरिंदों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. मामले के अनुसार पति और पत्नी एक-दूसरे की फोटो खींच रहे थे कि इसी दौरान समीप मे ही शराब पार्टी कर रहे बदमाशों की नजर दंपती पर पड़ी. शराब के नशे मे धुत दरिंदों ने पति-पत्नि के साथ मारपीट शुरू कर दी. पति का मोबाइल छीना और उसे बंधक बना लिया. इसके बाद पति के सामने ही नवविवाहिता से सामूहिक दुष्कर्म किया. 

यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो : सीएम युवा कॉनक्लेव के दूसरे दिन उमड़ा उत्साह

ओसियान इंटरप्राइजेज के कॉरपोरेट गिफ्टिंग स्टॉल पर 125 से अधिक युवाओं ने गहरी रुचि दिखाई विभिन्न मशीनरी सप्लायर स्टॉल्स पर रही जबरदस्त भीड़ योगी सरकार की पहल से बढ़ा स्टार्टअप्स का मनोबल ग्रेटर नोएडा यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो (UPITS-2025) में आयोजित सीएम युवा कॉनक्लेव के दूसरे दिन युवाओं की भारी भीड़ देखी गई। हजारों छात्र-छात्राओं ने स्टॉल्स का भ्रमण कर नए बिजनेस आइडियाज और इनोवेटिव उद्यमों की जानकारी प्राप्त की। 2000 से अधिक बिजनेस इन्क्वायरी फिरोजाबाद, गाजियाबाद, मेरठ, आगरा, गौतमबुद्ध नगर, मैनपुरी और मथुरा से आए 700 से अधिक छात्रों समेत एनसीआर के करीब 1500 युवाओं ने प्रदर्शनी विजिट की। समस्त स्टॉल्स पर युवाओं द्वारा 2000 से अधिक बिजनेस इन्क्वायरी की गईं। खास तौर पर ओसियान इंटरप्राइजेज के कॉरपोरेट गिफ्टिंग स्टॉल पर 125 से अधिक युवाओं ने गहरी रुचि दिखाई। वहीं, क्यूटीएम, ग्रिप इंटरनेशनल, प्रॉस्पर ग्रुप और कोशिश सस्टेनेबल साल्यूशन्स के मशीनरी सप्लायर स्टॉल्स पर भी जबरदस्त भीड़ रही। स्टार्टअप्स और फूड ब्रांड्स का आकर्षण कॉनक्लेव के दौरान 20 से अधिक बी टू बी मीटिंग्स सम्पन्न हुईं। इसके साथ ही डॉ. गैराज, मिस्टर सैंडविच, धोबीलाइट, अर्द्धसैनिक कैंटीन और अमूल इंडिया जैसे स्टार्टअप्स व ब्रांड्स ने छात्रों को अपने बिजनेस मॉडल प्रस्तुत किए। विषय विशेषज्ञों ने भी उद्यमिता और स्टार्टअप स्थापना पर विस्तृत जानकारी देकर युवाओं का मार्गदर्शन किया। योगी सरकार की पहल से बढ़ा आत्मविश्वास सीएम युवा कॉनक्लेव ने स्पष्ट कर दिया कि योगी सरकार की नीतियां और UPITS-2025 जैसे प्लेटफॉर्म न केवल निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं बल्कि प्रदेश के युवाओं को रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर भी प्रदान कर रहे हैं। यह आयोजन प्रदेश में स्टार्टअप इकोसिस्टम और आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।  

जीएसटी बचत उत्सव: ट्रैक्टर खरीदी में किसानों को मिली बड़ी राहत : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज जीएसटी बचत उत्सव के बीच औचक निरीक्षण पर देवपुरी स्थित ट्रैक्टर शोरूम पहुंचे। साय ने यहां किसानों से आत्मीय संवाद कर जीएसटी कटौती पर उनकी प्रतिक्रिया और खरीदी में हुई बचत की जानकारी ली। मुख्यमंत्री श्री साय ने शोरूम में ट्रैक्टर और हार्वेस्टर खरीदने आए किसानों को चाबी सौंपकर शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री साय ने अभनपुर के बिरोदा निवासी रवि कुमार साहू को उनके नए हार्वेस्टर की चाबी सौंपी। इस अवसर पर खुशी व्यक्त करते हुए रवि साहू ने कहा, "मैने सपने में भी नहीं सोच था कि मैं नया हार्वेस्टर खरीदूंगा। मैं सेकेंड हैंड हार्वेस्टर खरीदने के बारे में सोच रहा था। जीएसटी उत्सव में नए हार्वेस्टर खरीद पर मुझे पूरे 2 लाख रुपए की बचत हुई है। किसानों की चिंता का समाधान हमारे संवेदनशील प्रधानमंत्री मोदी जी और किसानहितैषी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी ही कर सकते हैं। मुख्यमंत्री जी ने स्वयं मुझे मेरे नए हार्वेस्टर की चाबी सौंपी और मुझसे बेहद आत्मीयता से संवाद किया। मैंने उन्हें बताया कि मेरे पास दो एकड़ खेत है और अब हार्वेस्टर आने से मैं गांव में साझेदारी से और अधिक खेती कर पाऊंगा।” श्री रवि ने जीएसटी में कटौती के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। मुख्यमंत्री  साय ने अभनपुर कोलर से आए वरिष्ठ किसान ज्ञानिक राम साहू को उनके नए ट्रैक्टर की चाबी सौंपी। मुख्यमंत्री से संवाद करते हुए साहू ने बताया कि जीएसटी में कटौती के बाद नए ट्रैक्टर की खरीदी पर उन्हें पूरे 60 हजार रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि इस बचत से उनका परिवार त्योहार को और अच्छे से मना सकेगा। ट्रैक्टर शो रूम के प्रोप्राइटर अशोक अग्रवाल ने मुख्यमंत्री से संवाद में बताया कि जीएसटी में कटौती के कारण बिक्री में इज़ाफ़ा हो रहा है और ग्राहकों का उत्साह बढ़ा है। उन्होंने कहा, “पहले जो ट्रैक्टर 10.25 लाख रुपए का आता था, वह अब 9.75 लाख रुपए में उपलब्ध है, जिससे किसानों को 50 हजार रुपए की बचत हो रही है। इसी तरह 7.62 लाख का ट्रैक्टर अब 7.21 लाख और 6.51 लाख का ट्रैक्टर अब 6.11 लाख रुपए में मिल रहा है। कीमतों में कटौती और फेस्टिवल डिस्काउंट से किसानों की बड़ी बचत हो रही है। जीएसटी दर घटने के बाद हार्वेस्टर भी सस्ते हो गए हैं।” जीएसटी कटौती से बाइक खरीदी में 7 हजार की बचत इसके बाद मुख्यमंत्री साय देवपुरी के बजाज बाइक शोरूम पहुंचे और यहां मौजूद ग्राहकों से जीएसटी कटौती पर आत्मीय चर्चा की। उन्होंने बाइक खरीदने आए संतोषी नगर निवासी श्री एम.डी. गुलाब को उनकी नई बाइक की चाबी सौंपी।  श्री गुलाब ने बताया कि जीएसटी में कटौती के बाद बाइक खरीदने पर उन्हें 7 हजार रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा, “मैंने बजाज प्लेटिना 110 सीसी बाइक खरीदी है, जिसकी पहले कीमत 89,000 रुपए थी, जो अब मुझे 82,000 रुपए में मिली।” मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में लागू जीएसटी 2.0 ने आम जनता, किसानों और उपभोक्ताओं को वास्तविक राहत दी है। ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और अन्य कृषि यंत्रों की कीमतों में आई कमी से किसानों को सीधा लाभ हो रहा है, जिससे उनकी खेती-किसानी और जीवनयापन और सुगम होगा। उन्होंने कहा कि इस जीएसटी बचत उत्सव से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ कम हुआ है और त्यौहारी सीजन में परिवारों की खुशियाँ बढ़ी हैं।  यह सुधार न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति दे रहा है बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उत्साह और समृद्धि का नया वातावरण भी बना रहा है।

‘साड़ीज़ ऑफ़ इंडिया’ प्रदर्शनी, नई दिल्ली में बाग प्रिंट बना आकर्षण का केन्द्र

भोपाल दिल्ली क्राफ्ट्स काउंसिल द्वारा नई दिल्ली में प्रतिष्ठित ‘साड़ीज़ ऑफ़ इंडिया’ प्रदर्शनी में कला और परंपरा का अनोखा संगम देखने को मिला। इस भव्य प्रदर्शनी में देशभर के चुनिंदा और श्रेष्ठ शिल्पकारों को आमंत्रित किया गया है, जहाँ भारत की विविधता और समृद्ध हस्तकला परंपरा को एक ही छत के नीचे देखने का अवसर मिल रहा है। मध्यप्रदेश का बाग प्रिंट आयोजन का विशेष आकर्षण बना हुआ है। प्रदर्शनी 27 सितम्बर तक चलेगी। प्रदर्शनी के दूसरे दिन बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री और सांसद सुश्री कंगना रनौत ने मध्यप्रदेश के बाग प्रिंट शिल्पकार श्री मोहम्मद आरिफ खत्री की कलाकृतियों की जमकर तारीफ़ की और विस्तार से बाग प्रिंट की तकनीक और प्राकृतिक रंगों के महत्व पर बातचीत की। श्री खत्री ने सुश्री रनौत को मध्यप्रदेश बाग प्रिंट कला के उद्गम स्थल बाग गांव आने का आमंत्रिण दिया। उन्होंने कहा कि हमारी पीढ़ियाँ इस धरोहर को संभालती आई हैं और आज भी यह गाँव कला की जीवंत पाठशाला है। प्रदर्शनी में उपस्थित जानी-मानी क्राफ्ट रिवाइवलिस्ट मंजीरी नेरोला, कामियानी जलन और दिल्ली क्राफ्ट्स काउंसिल की अध्यक्ष श्रीमती पूर्णिमा राय ने भी बाग प्रिंट साड़ियों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिकता का बाग प्रिंट सुंदर संगम हैं, जिनमें प्राकृतिक रंगों की चमक और हस्तकला की शान झलकती है। गौरतलब है कि श्री खत्री को उनके नवाचार और बाग प्रिंट को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। कला-प्रेमियों और दर्शकों के लिए यह प्रदर्शनी केवल साड़ियों का नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के विविध रंगों का उत्सव है।