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छात्राओं के स्वास्थ्य पर जोर: सरोजनी नायडू महाविद्यालय में हुआ बड़ा हेल्थ चेकअप कैंप

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने सरोजनी नायडू शासकीय कन्या महाविद्यालय भोपाल में छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि “स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार” अभियान का मूल किशोरियों और युवतियों का संपूर्ण स्वास्थ्य है। स्वस्थ परिवार की आधारशिला महिलाओं का स्वास्थ्य है। उन्होंने कहा कि हीमोग्लोबिन जांच, पौष्टिक आहार, नियमित व्यायाम और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाकर जीवन के लक्ष्यों को सहजता से प्राप्त किया जा सकता है। उन्होंने छात्राओं से अपील की कि वे निकटतम शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में जाकर नियमित स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएँ, जहाँ जांच, परामर्श और उपचार निःशुल्क उपलब्ध है। स्वस्थ नारी – सशक्त परिवार अभियान के अंतर्गत सरोजनी नायडू शासकीय कन्या महाविद्यालय भोपाल में विशेष स्वास्थ्य परीक्षण एवं जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में कुल 4,518 छात्राओं की स्वास्थ्य जांच की गई। साथ ही, विषय विशेषज्ञों ने छात्राओं को स्वस्थ जीवनशैली से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गयीं। लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल ने छात्राओं से कहा कि अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को छुपाने से वे और गंभीर हो सकती हैं। इसलिए बेझिझक होकर स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं या संस्थाओं से परामर्श लेना चाहिए। विधायक भगवानदास सबनानी, माननीय महापौर श्रीमती मालती राय, मिशन संचालक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. सलोनी सिडाना सहित स्वास्थ्य विभाग, उच्च शिक्षा विभाग और महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। शिविर में हीमोग्लोबिन, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, सिकल सेल स्क्रीनिंग, क्षय रोग तथा नेत्र रोग की जांच कर विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परामर्श दिया गया। छात्राओं ने ‘खुल के पूछो’ कार्यक्रम में पोषण, मासिक धर्म स्वच्छता, त्वचा व सौंदर्य संबंधी प्रश्न पूछे जिनका विशेषज्ञों ने समाधान किया। स्वास्थ्य जागरूकता गतिविधियों के अंतर्गत स्वास्थ्य खेल, जुम्बा सत्र (थोड़ी सेहत, थोड़ी मस्ती) का आयोजन किया गया। कई छात्राओं ने स्वैच्छिक रक्तदान भी किया। शिविर में आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ आईडी एवं आयुष्मान कार्ड भी बनाए गए। कुल 439 आभा और आयुष्मान कार्ड बनाए गए, 459 छात्राओं का दंत परीक्षण, 152 को मानसिक स्वास्थ्य परामर्श, 381 को आयुष एवं पोषण सेवाएँ तथा 120 की सिकल सेल टेस्टिंग की गई। साथ ही, 20 यूनिट रक्तदान भी हुआ।  

व्यावहारिक ज्योतिर्विज्ञान डिप्लोमा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि: 30 अक्टूबर

भोपाल  स्कूल शिक्षा विभाग के अंतर्गत संचालित महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान एक वर्षीय व्यवहारिक ज्योतिर्विज्ञान (ज्योतिष) और व्यावहारिक वास्तु शास्त्र डिप्लोमा कोर्स शुरू कर रहा है। डिप्लोमा के लिये एमपी ऑनलाइन के माध्यम से 25 सितंबर से आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गयी है। आवेदन 30 अक्टूबर 2025 तक किये जा सकेंगे। इसके लिये न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता माध्यमिक शिक्षा मंडल अथवा मान्यता प्राप्त बोर्ड से कक्षा 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक है। कक्षाएं एक नवम्बर 2025 से ऑनलाइन प्रारंभ की जायेंगी। ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से ज्योतिर्विज्ञान कक्षाओं का संचालन सप्ताह में 3 दिवस सोमवार, बुधवार, शुक्रवार एवं व्यावहारिक वास्तु शास्त्र कक्षाओं का संचालन सप्ताह में 3 दिवस मंगलवार, गुरूवार, शनिवार को किया जायेगा। ऑनलाइन कक्षाओं का केन्द्र महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान भोपाल के सेकण्ड स्टॉप स्थित संस्कृत भवन रहेगा। पाठ्यक्रम से संबंधित नियम तैयार कर लिये गये हैं। पाठ्यक्रम विवरण, प्रश्न पत्र एवं अन्य जानकारी संस्थान की वेबसाइट https://www.mpssbhopal.org पर उपलब्ध हैं।  

राजस्थान को विकास की रफ्तार, पीएम मोदी ने दी 1.22 लाख करोड़ की परियोजनाएं, युवाओं को बांटे नियुक्ति पत्र

बांसवाड़ा राजस्थान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी सौगात दी है. पीएम मोदी ने बांसवाड़ा में केंद्र और राज्य सरकार की 1,22,100 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया. साथ ही 15000 से अधिक नियुक्ति पत्र भी बांटा.  प्रधानमंत्री मोदी ने तीन ट्रेनों को भी हरी झंडी दिखाया.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के बांसवाड़ा में 1,22,100 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया. साथ ही उन्होंने राजस्थान के सरकारी विभागों और संगठनों में नवनियुक्त युवाओं को 15,000 से अधिक नियुक्ति पत्र वितरित किए. इनमें 5770 से अधिक पशु परिचारक, 4190 कनिष्ठ सहायक, 1800 कनिष्ठ प्रशिक्षक, 1460 कनिष्ठ अभियंता, 1200 तृतीय श्रेणी लेवल-2 शिक्षक आदि शामिल हैं. पीएम मोदी ने तीन ट्रेनों को भी दिखाई हरी झंडी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान दौरे में तीन ट्रेनों को हरी झंडी दिखाई. जिसमें बीकानेर और दिल्ली कैंट के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन, जोधपुर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन और दिल्ली कैंट और उदयपुर सिटी-चंडीगढ़ एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं. 90,000 करोड़ रुपये की बिजली परियोजनाओं का शुभारंभ किया : पीएम मोदी बांसवाड़ा में एक जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “नवरात्रि के दौरान शक्ति के नौ रूपों की पूजा की जाती है. और आज ‘ऊर्जा शक्ति’, यानी बिजली उत्पादन से जुड़ा एक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. भारत की बिजली उत्पादन क्षमताओं का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है… आज 90,000 करोड़ रुपये की बिजली परियोजनाओं का शुभारंभ किया गया… हर राज्य को महत्व दिया जा रहा है.” कांग्रेस के समय बिजली गई ,खबर नहीं थी, आई वो खबर थी : पीएम मोदी प्रधानमंत्री मोदी ने कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला. कहा, “कांग्रेस ने कभी बिजली के महत्व पर ध्यान नहीं दिया. 2014 में जब मुझे सेवा करने का मौका मिला, तब देश में 2.5 करोड़ घर ऐसे थे जिनमें बिजली का कनेक्शन नहीं था. आजादी के 70 साल बाद भी 18,000 गांवों में बिजली के खंभे नहीं थे. बड़े शहरों में घंटों बिजली कटौती होती थी. गांवों में 4-5 घंटे बिजली आने पर जश्न मनाया जाता था. लोग मजाक करते थे, “हमारे यहां बिजली गई वो खबर नहीं है. बिजली आई, वो खबर है…” लोग एक-दूसरे को बधाई देते थे जब उनके यहां एक घंटे के लिए बिजली आती थी… 2014 में हमारी सरकार ने इस स्थिति को बदलने का फैसला किया… हमने भारत के हर गांव में बिजली पहुंचाई. हमने 2.5 करोड़ घरों को मुफ्त बिजली कनेक्शन दिए.” हमारी सरकार कांग्रेस के भ्रष्टाचार से मिले घावों पर मरहम लगा रही : पीएम मोदी जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “हमारी सरकार कांग्रेस के भ्रष्टाचार से मिले घावों पर मरहम लगा रही है. कांग्रेस सरकार में राजस्थान पेपर लीक का अड्डा बन गया था. जल जीवन मिशन भी भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया. महिलाओं के खिलाफ अपराध चरम पर थे. बलात्कारियों को संरक्षण दिया जा रहा था. बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जैसे क्षेत्रों में अपराध और अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा था. लेकिन जब भाजपा को मौका मिला, तो हमने कानून-व्यवस्था को मजबूत किया. नई परियोजनाएं शुरू की जा रही हैं.”

डब्ल्यूबीएम रोड निर्माण में मिली अनियमितता, भिण्ड प्रशासन ने किया कड़ा एक्शन

 भिण्ड नगर पालिका भिण्ड में डब्ल्यूबीएम (WBM) रोड के निर्माण कार्यों में अनियमितता की शिकायत लोकायुक्त के माध्यम से नगरीय विकास एवं आवास विभाग को प्राप्त हुई थी। इस शिकायत के आधार पर विभाग द्वारा अधीक्षण यंत्री स्तर पर एक जांच समिति गठित की गई। जांच समिति की रिपोर्ट में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री हरीश बाबू शाक्यवार, तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) वीरेन्द्र तिवारी तथा उपयंत्री अमित कुमार शर्मा को दोषी पाया गया है। दोष सिद्ध होने पर हरीश बाबू शाक्यवार एवं वीरेन्द्र तिवारी की आगामी एक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोकी गई है। उपयंत्री अमित कुमार शर्मा मूलत: नगर निगम मुरैना के कर्मचारी है अतएव उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही करने के लिये आयुक्त नगरीय प्रशासन  संकेत भोंडवे द्वारा आयुक्त नगर निगम मुरैना को निर्देशित किया गया है। आयुक्त  भोंडवे ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिये विभाग निरंतर सक्रिय है। स्थानीय निकायों में किसी भी स्तर पर अनियमितता की शिकायत मिलने पर दोषी व्यक्ति के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई भविष्य में भी जारी रहेगी।  

रायपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में आंगनबाड़ी सुविधाओं का विकास, 10 नए भवन बनेंगे

रायपुर  दक्षिण विधानसभा में 10 नए आधुनिक आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाएंगे। इसके पश्चात अन्य वार्डों में भी आंगनबाड़ी केंद्र बनाए जाने हैं। शासन से प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है। यह बात दक्षिण विधानसभा के भाजपा विधायक सुनील सोनी ने कही। हमारा रायपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र विकास की नित नई ऊंचाइयों को छू रहा है। क्षेत्र में लगातार ऐसे विकास कार्य हो रहे हैं, जिससे सीधे आमजन को लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि दक्षिण विधानसभा क्षेत्र के ब्राह्मणपारा वार्ड और महंत लक्ष्मीनारायण दास वार्ड, पुरानी बस्ती में आंगनबाड़ी भवन निर्माण के लिए 23,38000 रुपए की स्वीकृति प्राप्त हुई है। इसके लिए उन्होंने समस्त क्षेत्रवासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हम लगातार समस्याओं के समाधान और सुविधाओं के विस्तार के साथ क्षेत्र के चहुंमुखी विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं जिससे क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है। इसी प्रकार आगे बढ़ते हुए हम निश्चित ही एक विकसित विधानसभा क्षेत्र के निर्माण में सफल होंगे।

मध्य प्रदेश: तेज रफ्तार ने ली 14 हजार से ज्यादा जानें, ग्रामीण क्षेत्रों में दोगुनी मौतें

भोपाल  मध्य प्रदेश में तेज रफ्तार वाहन चलाने वालों पर अंकुश लगाया जाए तो हर साल 10 हजार से अधिक लोगों की जान बच सकती है। सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में 75 प्रतिशत मामले तेज रफ्तार के रहे। पुलिस ट्रेनिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (पीटीआरआई) के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में वर्ष 2024 में 14 हजार 791 लोगों की मृत्यु सड़क दुर्घटनाओं में हुई है, जबकि 2023 से 13 हजार 798 लोगों की जान चली गई थी।ग्रामीण क्षेत्रों की सड़कों पर हुई मौतों की संख्या शहरी क्षेत्र की तुलना में दोगुना से भी अधिक है। ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों पर दुर्घटनाओं से लगभग नौ हजार लोगों की मौत हुई है। पिछले चार वर्ष से यह संख्या आठ हजार से नौ हजार के बीच है। इसका कारण यह है कि भीड़ नहीं होने के कारण लोग तेज गति से वाहन चलाते हैं। दूसरा यह की सड़कों पर संरक्षा (सेफ्टी) मापदंडों का पालन भी ठीक से नहीं हो पाता। अंधेरा, अंधा मोड़, संकरी सड़क जैसे ब्लैक स्पाट भी यहां दुर्घटनाओं की वजह बनते हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि कुल मौतों में शराब पीकर और मोबाइल पर बात करते हुए वाहन चलाने के कारण 500 से अधिक लोगों की मौत हुई है। पुलिस मुख्यालय अब इस रिपोर्ट के आधार पर सभी जिलों और संबंधित एजेंसियों को दुर्घटनाएं रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करने के लिए निर्देशित करने जा रहा है। ये है दुर्घटनाओं की बड़ी वजह     मध्य प्रदेश में ट्रैफिक पुलिस का अमला मात्र साढ़े तीन हजार है, जबकि जिस तरह से वाहनों की संख्या बढ़ रही है उससे इसका दोगुना पुलिस बल चाहिए।     मध्य प्रदेश में ब्लैक स्पाट यानी दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की संख्या घटने की जगह बढ़ रही है। इनकी संख्या 400 से अधिक है। स्थायी तौर पर इस समस्या को हल करने के लिए जिम्मेदार एजेंसिया रुचि नहीं ले रही हैं। पुलिस की चेकिंग के दौरान चालान की कार्रवाई में सबसे अधिक ध्यान हेलमेट और सीट बेल्ट नहीं लगाने वालों पर रहता है। दोनों को मिला लें तो प्रतिवर्ष आंकड़ा औसत 10 लाख के ऊपर रहता है, जबकि तेज गति से वाहन चलाने वालों में 50 हजार के विरुद्ध भी कार्रवाई नहीं होती। वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी     यह सही है कि सड़क हादसों की बड़ी वजह तेज गति से वाहन चलाना है। सभी को गति सीमा का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सड़कें बेहतर होने से रफ्तार भी बढ़ी है। दुर्घटनाएं रोकने के लिए विशेष अभियान चलाकर भी यातायात नियम तोड़ने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है। – शाहिद अबसार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (पीटीआरआई)।  

आयुर्वेद से नई उम्मीद: मध्य प्रदेश में ओजोन थेरेपी से होगा कैंसर पीड़ितों का इलाज आसान

भोपाल  कैंसर रोगियों को आधुनिक चिकित्सा पद्धति में रेडिएशन से होने वाली पीड़ा कम करने के लिए आयुर्वेद चिकित्सकों ने ओजोन थेरेपी की शुरुआत की है। इंदौर के आयुर्वेद शासकीय अस्तपताल में प्रयोग के तौर पर यह थेरेपी शुरू कर दी गई है। इसके सकारात्मक परिणाम देख प्रदेश भर के शासकीय आयुर्वेद अस्पतालों में शुरू करने की तैयारी है। दरअसल आयुष मंत्रालय ने ही इस तरह की थेरेपी का सुझाव दिया था, जिसके बाद इसे शुरू किया गया है। आयुर्वेद में ओजोन थेरेपी नई प्रक्रिया है, जिसे पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के संतुलित मेल से विकसित किया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक, यह प्रक्रिया शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ाकर कैंसर कोशिकाओं को कमजोर करती है। वहीं शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए तैयार करती है। इसमें आयुर्वेदिक औषधियों का ही इस्तेमाल होता है। एक महीने पहले इंदौर के शासकीय अष्टांग आयुर्वेद महाविद्यालय अस्पताल में प्रायोगिक तौर पर इसे शुरू किया गया था। 50 रोगियों पर हुआ इसका प्रयोग 50 रोगियों पर इसका प्रयोग हुआ। उनमें दर्द, सूजन में कमी और जीवन स्तर में सुधार दिखा है। उसके बाद इसे कारुण्य कार्यक्रम में शामिल किया गया है, जो कैंसर, अल्जाइमर और पार्किंसन जैसे रोगों में सहायक उपचार के लिए वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों के इस्तेमाल के लिए है। अधिकारियों का कहना है कि इसी महीने से भोपाल के पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय अस्पताल में इसकी सुविधा मिलने लगेगी। उसके बाद प्रदेश के सभी सात शासकीय आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज-अस्पतालों में इसकी सुविधा मिलेगी। ऐसे काम करती है ओजोन थेरेपी विशेषज्ञों के मुताबिक ओजोन ऑक्सीजन का सक्रिय रूप है। इसे शरीर में अलग-अलग तरीकों से पहुंचाया जाता है। इसे अंतःशिरा (आईवी), इंजेक्शन, ऑटोहेमोथेरेपी, ओजोन साना और ओजोनेटेड तेल या पानी का उपयोग कर शरीर में पहुंचाया जाता है। इसका असर प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, संक्रामक तत्वों को रोकने, दर्द और सूजन कम करने तथा कोशिकाओं के पुनर्जन्म को बढ़ावा देने में दिखता है। दूसरी बीमारियों में भी उपयोगी कैंसर के अलावा ओजोन थेरेपी का प्रयोग गठिया, घुटनों और कमर दर्द, त्वचा रोग, मधुमेह, हृदय रोग और घाव भरने की प्रक्रिया में भी कारगर पाया गया है। इंदौर में शुरू किया गया है उपचार     ओजोन थेरेपी से कैंसर के मरीजों का उपचार इंदौर में शुरू किया गया है। प्रयास है कि आने वाले समय में प्रदेश के सभी प्रमुख आयुर्वेद अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। हम भी इसकी तैयारी कर रहे हैं। – डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद महाविद्यालय भोपाल।  

सुपरमार्केट्स को मिली GST छूट, छोटे दुकानदारों को छोड़ दिया बाहर

 ग्वालियर  जीएसटी कम होने के बाद मंगलवार को कांच मिल क्षेत्र के निवासी बीपी श्रीवास्तव ने दुकान से घी का पैकेट खरीदा। घी का पैकेट 595 रुपए में दुकानदार ने दिया। पहले भी उन्हें घी का पैकेट इतनी ही कीमत में मिलता था। जब उन्होंने दुकानदार से जीएसटी कम करके घी देने के लिए कहा तो उसने कहा कि अभी तो पुरानी रेट में ही मिलेगा। जब हमें कम कीमत पर मिलेगा तब हम भी आपको कम कीमत पर देंगे। ऐसा केवल एक व्यक्ति के साथ नहीं हो रहा है, बल्कि शहर में बड़े सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर को छोड़ दें, गली मोहल्लों सहित अन्य जगहों की दुकानों पर जीएसटी कम होने के बाद भी सामान पुरानी कीमत या एमआरपी पर ही मिल रहा है। बिस्किट हो, चिप्स का पैकेट हो या अन्य ऐसी ही कोई पैक्ड सामग्री हो, उपभोक्ताओं को जीएसटी की छूट लागू होने के दो दिन बाद भी एमपीआरपी पर ही मिल रहे है। ऐसे में अभी लोगों को जीएसटी कम होने से कम ही राहत मिल पा रही है। सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर पर क्यों मिल रही है छूट     सुपर मार्केट या डिपार्टमेंटल स्टोर न केवल जीएसटी में रजिस्टर्ड हैं, बल्कि वे बिलिंग भी सॉफ्टवेयर से करते हैं। ऐसे में उनके साफ्टवेयर में जीएसटी कम कर दिया गया है। इसलिए इन स्टोर पर लोगों को कम कीमत में सामान मिल रहा है। जबकि छोटी व गली मोहल्लों की दुकानों में से अधिकतर जीएसटी में रजिस्टर्ड ही नहीं है, साथ ही इन दुकानों पर बिलिंग के लिए किसी तरह का साफ्टवेयर भी उपयोग नहीं करते। ऐसे में ये दुकानदार अभी भी जीटएसटी कम होने के बाद भी पुरानी एमआरपी पर ही चीजें बेच रहे हैं। शहर में अधिकतर दुकानदारों को सामान डिस्ट्रीब्यूटर या उनके एजेंट ही सप्लाई करते हैं। ये लोग सीधे सीधे कच्चे बिल पर ही माल सप्लाई करते हैं। ऐसे में दुकानदारों का कहना है कि एजेंट या डिस्ट्रीब्यूटर को तो हम माल के पैसे दे चुके हैं, अब वो वापस नहीं करेगा। इसलिए जब तक पुराना माल है तब तक पुरानी ही कीमत में बेचेंगे। जिन मेडिकल स्टोरों पर कंप्यूटर से बिलिंग हो रही है वहां पर लोगों को दवाओं पर जीएसटी से राहत मिल रही है। हालांकि मेडिकल स्टोर वाले अब पहले जो 10 से 15 प्रतिशत डिस्काउंट दवा पर देते थे, वह नहीं दे रहे हैंं। ऑनलाइन ग्रोसरी का सामान बेचने वाली कंपनियों ने भी कीमत घटाई ऑनलाइन ग्रोसरी सहित अन्य आयटम बेचने वाली कंपनियों ने अपने यहां सभी सामग्रियों की कीमतों को जीएसटी कटौती के मुताबिक घटा दिया है। आर्डर मिलने के बाद वे तुरंत डिलेवरी भी दे रही हैं। ऐसे में लोग अब दुकानों से पुरानी दरों की जगह ऑनलाइन चीजें मंगा रहे हैं। दुकानदारों की यह भी समस्या गोले का मंदिर चौराहे पर एक दुकानदार से जब 5 रुपए का बिस्किट पैकेट और एक 10 रुपये का चिप्स का पैकेट लिया गया और उससे जीएसटी कम करने की बात की तो उसने कहा कि माल नहीं बेच पाएंगे, क्योंकि आप तो 5 और 10 का सिक्का या नोट दोगे। बिस्किट पर 20 पैसे कम होंगे और चिप्स पर 40 पैसे। ऐसे में अब 60 पैसे मैं कहां से लाउंगा। ये सिक्के तो अब चलन में भी नहीं है। इस वजह से 5 से लेकर 50 रुपये की चीजें पुरानी कीमतों पर ही बिक रही हैं। क्या कहते हैं दुकानदार     पांच से दस रुपये या सौ रुपये तक के पैकेट पर जीएसटी कम करके बेचें भी, लेकिन छोटे सिक्के चलन में नहीं है। ऐसे में इन चीजों को एमआरपी पर ही बेचना पड़ रहा है। जिन चीजों पर 20 से 30 या अधिक राशि छूट की होती है उसमें जरूर कम करते हैं। – प्रमोद जैन, किराना दुकानदार जब नया स्टॉक आएगा तभी कम करेंगे     अभी तक घर के उपयोग की जो भी चीजें खरीदी हैं, उन वे सभी एमपीआरपी या पुरानी दर पर मिल रही थी, उसी पर मिल रही हैं। दुकानदार कह देते हैं, जब नया स्टॉक आएगा तभी ही कम पर मिलेंगी। – सुधीर झा, निवासी मुरार क्या कहते हैं व्यापारी संघ के पदाधिकारी     जब भी नई व्यवस्था होती है तो उसमें स्थिरता आने में समय लगता है। वर्तमान में जीएसटी का फायदा 5 हजार रुपये से अधिक की खरीदारी पर ही दिखेगा। दुकानदारों के पास 10 से 15 दिन या एक महीने का ही स्टाक होगा। तब तक छोटे आयटमों पर ही जीएसटी का फायदा आम आदमी को नहीं मिलेगा। लेकिन एक महीने में यह व्यवस्था पूरी तरह से सेटल हो जाएगी। इसके बाद सभी को राहत मिलेगी और बचत होगी। – प्रवीण अग्रवाल, अध्यक्ष चैंबर ऑफ कॉमर्स  

MiG-2 ने भरी आखिरी उड़ान, भारतीय वायुसेना ने किया सलामी के साथ विदा

चंडीगढ़   चंडीगढ़ के इंडियन एयरफोर्स स्टेशन से भारतीय वायुसेना के प्रसिद्ध जंगी विमान मिग-21 की विदाई का महत्त्वपूर्ण क्षण नजदीक आ गया है। आज 12 विंग एयरफोर्स स्टेशन में इसके अंतिम प्रस्थान से पहले फुल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन हुआ, जिसमें मिग-21 को वाटर कैनन सैल्यूट के साथ सम्मानित किया गया। आसमान में सूर्य किरण एरोबेटिक टीम और आकाश गंगा स्काई डाइवर्स ने शानदार एरोबेटिक प्रदर्शन कर समारोह को यादगार बना दिया। जब मिग-21 ने गर्जना करते हुए उड़ान भरी, तो पूरा शहर गूंज उठा। 62 वर्षों के गौरवशाली इतिहास के साथ अब मिग-21 भारतीय वायुसेना से विदा हो रहा है। मिग-21 को पहली बार 1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था। मिकोयन ग्युरेविच (मिग-21) का चंडीगढ़ से करीब छह दशक पुराना गहरा नाता रहा है, और यहीं से इसकी विदाई हो रही है। यह विमान न केवल वायुसेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का विषय रहा है। इसकी विदाई भावुक कर देने वाला क्षण होगा, क्योंकि इसने दशकों तक देश की हवाई सीमाओं की सुरक्षा की है। 26 सितंबर को मिग-21 की आखिरी उड़ान भारतीय वायुसेना ने मिग-21 को आधिकारिक तौर पर 26 सितंबर को रिटायर करने का ऐलान किया है। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के आगरा से विशेष टीम भी चंडीगढ़ पहुंच रही है, ताकि इस ऐतिहासिक विदाई में हिस्सा ले सके। मिग-21 का गौरवशाली इतिहास      1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया।     भारत का पहला सुपरसोनिक लड़ाकू विमान, जिसकी गति ध्वनि की गति से भी अधिक थी।     1971 के भारत-पाक युद्ध में दुश्मन के कई विमानों को मार गिराकर निर्णायक भूमिका निभाई।     कारगिल युद्ध (1999) में भी वीरता और ताकत का परिचय दिया।     ‘वायुसेना की रीढ़’ के रूप में विख्यात, देश की हवाई सुरक्षा की आधारशिला रहा।     62 वर्षों तक भारतीय वायुसेना की ताकत बना रहा। मिग-21 की तकनीकी खूबियां     अधिकतम गति लगभग 2,200 किलोमीटर प्रति घंटा (Mach 2.05)।     उड़ान की अधिकतम ऊंचाई 17,500 मीटर।     हवा से हवा और हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों से लैस।     छोटा, परंतु अत्यंत शक्तिशाली डिजाइन, जो तेज हमलों और हवाई युद्ध के लिए उपयुक्त। मिग-21 की विदाई न केवल भारतीय वायुसेना के लिए बल्कि पूरे देश के लिए एक भावुक और गौरवशाली क्षण है। यह विमान वर्षों तक हमारी हवाई सीमाओं की रक्षा करता रहा और अब अपनी आखिरी उड़ान के साथ इतिहास बन जाएगा।

चुनाव आयोग का अहम ऐलान, पहले पोस्टल बैलेट फिर EVM की गिनती होगी बिहार में

पटना  बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले इलेक्शन कमीशन (चुनाव आयोग) ने बड़ा ऐलान किया है. गुरुवार को आयोग ने बताया कि अब वोटों की गिनती के समय EVM से पहले पोस्टल बैलेट के वोटों की गिनती होगी. यह फैसला पोस्टल बैलेट की संख्या में हुई भारी बढ़ोतरी के मद्देनजर लिया गया है. आयोग ने बताया इसका उद्देश्य वोटों की गिनती में देरी को कम करने के साथ-साथ पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित करना है.   पोस्टल बैलेट की गिनती के बाद ही खुलेंगे EVM नए निर्देश के अनुसार, चुनाव आयोग ने कहा कि ईवीएम/वीवीपैट की मतगणना का दूसरा अंतिम चरण तब तक शुरू नहीं होगा जब तक डाक मतपत्रों (पोस्टल बैलट) की गिनती पूरी नहीं हो जाती उस मतगणना केंद्र पर जहां डाक मतपत्रों की गिनती हो रही है. चुनाव आयोग ने यह भी निर्देश दिया कि जहां डाक मतपत्रों की संख्या अधिक हो, वहां रिटर्निंग ऑफिसर (आरओ) को यह सुनिश्चित करना होगा कि पर्याप्त संख्या में टेबल और गिनती कर्मचारी उपलब्ध हों ताकि कोई देरी न हो और मतगणना प्रक्रिया को और सुचारू बनाया जा सके.  चुनाव आयोग के बदलाव से क्या बदलेगा? चुनाव आयोग ने अपने आदेश में साफ तौर पर कहा है कि जब तक पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी नहीं होती है. किसी भी हालत में ईवीएम नहीं खोली जा सकेगी. आम तौर पर अब तक ऐसा होता चला आ रहा है कि पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी न होने के बाद भी 8:30 बजे ईवीएम खोल दी जाती थी. हालांकि अब ऐसा नहीं हो सकेगा. अब पोस्टल बैलेट की गिनती पूरी होने के बाद ही ईवीएम खोली जाएगी. चुनाव आयोग ने साफ किया कि अगर किसी जगह ज्यादा पोस्टल बैलेट हैं, तो इसके लिए ज्यादा टेबल लगाई जाएंगी. अगर कोई समस्या आती है तो इसकी जिम्मेदारी वहां मौजूद चुनाव अधिकारियों की है. अगर कहीं ज्यादा कर्मचारियों की जरुरत पड़ती है तो वो भी किया जाएगा. ताकि परिणाम आने में किसी भी तरह की कोई देरी न हो, लेकिन पहले पोस्टल बैलेट की गिनती ही पूरी की जाएगी. इसके नतीजों के बाद ईवीएम में मौजूद वोटों की गिनती शुरू होगी. पोस्टल बैलेट से कौन देता है वोट? पोस्टल बैलेट की शुरुआत चुनाव आयोग की तरफ से वोटिंग के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ाने के लिए की गई थी. इसका इस्तेमाल उन लोगों के द्वारा किया जाता है जो कि अपनी नौकरी के कारण अपने चुनाव क्षेत्र में मतदान नहीं कर पाते हैं. इसके साथ ही 80 साल से ऊपर के लोग पोस्टल बैलेट के जरिए ही वोट देते हैं. इनमें दिव्यांग व्यक्ति भी शामिल होते हैं. हालांकि इससे पहले रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है. आम लोगों की वोटिंंग से कई दिन पहले ही इनकी वोटिंंग पूरी हो जाती है.जब भी किसी चुनाव में वोटों की गणना शुरू होती है तो सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती शुरू होती है. इसके बाद ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती होती है. चुनाव प्रक्रिया में लगातार बदलाव कर रहा है आयोग प्रेस नोट में इस बात पर जोर दिया गया है कि यह पूरी प्रक्रिया को और अधिक सुव्यवस्थित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. यह पहल चुनाव आयोग की ओर से पिछले छह महीनों में किए गए व्यापक चुनावी सुधारों की श्रृंखला का एक हिस्सा है. आयोग के पिछले 29 उपायों में मतदाताओं की सुविधा बढ़ाने, चुनावी प्रणाली को मजबूत करने और तकनीक के उपयोग को बेहतर बनाने की पहल शामिल रही हैं.