samacharsecretary.com

केचुआ की तलाश में पहुंची पुलिस को मिला करैत, म्यूल खाते की जांच ने खोला 176 FIR का राज

राजनांदगांव  छत्तीसगढ़ की मोहला-मानपुर पुलिस ने साईबर ठगी से जुड़े एक म्यूल बैंक खाते की जांच से देश के 14 अन्य राज्यों में साइबर ठगी के नेटवर्क का राजफाश किया है। इस मामले में पश्चिम बंगाल से मुख्य आरोपित आदित्य रजक (22) और सहआरोपित सुमन वर्मा को गिरफ्तार किया गया है। जबकि एक अन्य आरोपित कृष्णा चौधरी को पुलिस ने अगस्त में दबोचा था। जांच में म्यूल अकाउंट से एक लाख 71 हजार से अधिक लेन-देन के मामले मिले हैं। मोहला-मानपुर पुलिस के मुताबिक करीब आरोपितों पर करीब 14 राज्य में 176 एफआइआर दर्ज हैं। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह ने बताया कि मामले की शुरुआत खड़गांव थाने में दर्ज अपराध से हुई। जनवरी 2026 में पीड़िता से ठगी के 3,12,348 रुपये नौ बैंक खातों में भेजे गए थे। लेनदेन की जांच में म्यूल बैंक खाता संख्या 211071614 सामने आया, जिसमें 60 हजार रुपये का लेनदेन मिला। तकनीकी और बैंकिंग विश्लेषण में इस खाते की कड़ियां देशभर में दर्ज साइबर ठगी के मामलों से जुड़ती चली गईं। देश के 14 राज्यों में दर्ज एफआईआर इनमें कर्नाटक में 54, बिहार में 46, तेलंगाना में 28, उत्तर प्रदेश में 10, केरल में आठ, महाराष्ट्र में सात, हरियाणा और तमिलनाडु में छह-छह, दिल्ली में चार तथा पश्चिम बंगाल में तीन एफआईआर शामिल हैं। अंडमान-निकोबार, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और राजस्थान में भी एक-एक मामला दर्ज मिला। गिरोह से जुड़ी 31 शिकायतें मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में भी मिली हैं। अंबागढ़ चौकी में 15, खड़गांव में नौ, मोहला में तीन, मानपुर में दो तथा गोटाटोला और मदनवाड़ा में एक-एक शिकायत दर्ज है। तहखाने में छिपा था आरोपी पुलिस के अनुसार, मुख्य सरगना आदित्य रजक पश्चिम बंगाल में किराए के एक मकान के तहखाने में छिपा था। लगातार ठिकाने बदल रहे आरोपितों को तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर 27 सितंबर को पकड़ा गया। पश्चिम बंगाल में तीन दिन पूछताछ के बाद उन्हें मोहला-मानपुर लाया गया। गिरफ्तार आरोपितों में आदित्य रजक, कृष्णा चौधरी और सुमन वर्मा शामिल हैं। तीनों को न्यायालय में पेश किया गया है। लेनदेन की कड़ियां जांच रही पुलिस कार्रवाई खड़गांव थाना प्रभारी निरीक्षक सुशील त्रिपाठी, प्रशिक्षु उप निरीक्षक अब्दुल रियाज और टीम ने की। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक यशपाल सिंह ने बताया कि पुलिस अब नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और लेनदेन की कड़ियों की जांच कर रही है। अब तक इस वर्चुअल खाते में कितनी रकम आई इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। आदित्य और कृष्णा मिलकर चला रहे थे गिरोह पुलिस की जांच में सामने आया है कि गिरोह को आदित्य रजक और कृष्णा चौधरी मिलकर चला रहे थे। ये दोनों ही बार-बार जगह बदल कर किराए के मकान में रहते थे। दोनों ही उत्तरप्रदेश के मूल निवासी बताए जा रहे हैं। आरोपितों को बंगाली भाषा भी नहीं आती। पुलिस ने आदित्य को 14 अगस्त को पश्चिम बंगाल से ही पकड़ा था। उसे से मिली लिंक पर आदित्य को पकड़ा जा सका।  

बस्तर की बदली तस्वीर को देश दुनिया तक पहुंचाएं सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर – राज्यपाल डेका

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका ने कहा कि बस्तर में नक्सलवाद का प्रभाव समाप्त होने के बाद केंद्र और राज्य सरकार द्वारा क्षेत्र के लोगों के कल्याण और विकास के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं। स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से कार्य हो रहे हैं। कौशल प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। बस्तर में विकास के साथ लोगों का विश्वास बढ़ रहा है और भय का वातावरण धीरे-धीरे समाप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर बस्तर में हो रहे इन सकारात्मक बदलावों को देश-विदेश तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्यपाल आज दिल्ली से आए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के दल से मुलाकात के दौरान संबोधित कर रहे थे। ये सभी इन्फ्लुएंसर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत छत्तीसगढ़ भ्रमण पर आए हैं। उन्होंने विशेष रूप से बस्तर में नक्सलवाद   समाप्त होने के बाद आए बदलाव, विकास कार्यों, स्थानीय जनजीवन और पर्यटन की संभावनाओं को करीब से जाना और समझा। इन्फ्लुएंसर ने राज्यपाल को बताया कि उन्होंने तीन दिन बस्तर में बिताए और इस दौरान स्थानीय ग्रामीणों से संवाद किया। उन्होंने नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों और गांवों का भ्रमण कर वहां की वर्तमान स्थिति को देखा। उन्होंने बताया कि मीडिया के माध्यम से उन्हें छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद समाप्त होने और बस्तर में हो रहे बदलाव की जानकारी मिली थी। इसी बदलाव को प्रत्यक्ष रूप से देखने और समझने के उद्देश्य से वे यहां पहुंचे हैं। इन्फ्लुएंसर ने कहा कि बस्तर में उन्हें शांति और सुकून का अनुभव हुआ। यहां की प्राकृतिक सुंदरता ने उन्हें विशेष रूप से आकर्षित किया। सड़क संपर्क बेहतर हुआ है तथा प्रभावित लोगों के पुनर्वास और रोजगार के लिए किए जा रहे प्रयास भी दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर में उन्होंने जितने बदलाव की कल्पना की थी, उससे कहीं अधिक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिला। वे अपने सोशल मीडिया मंचों के माध्यम से इन अनुभवों को देश-दुनिया तक पहुंचाएंगे, जिससे बस्तर के प्रति बनी पुरानी धारणाएं दूर हों और अधिक लोग यहां पर्यटन के लिए आएं। राज्यपाल ने कहा कि बस्तर के बच्चों में शिक्षा के प्रति उत्साह बढ़ा है। जो बच्चे  स्कूल नहीं जाते थे अब रोज स्कूल जाते हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना सहित विभिन्न विकास योजनाओं के माध्यम से गांवों को बेहतर सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है। बस्तर के शहरों और पर्यटन स्थलों के विकास के लिए भी कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रोजगार के अवसर बढ़ेंगे तो विकास की गति भी तेज होगी और सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंच सकेगा। छत्तीसगढ़ पर्यटन मंडल के प्रबंध संचालक  सौमिल रंजन चौबे ने बताया कि दिल्ली से 41 सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर छत्तीसगढ़ पहुंचे हैं। इनके सोशल मीडिया माध्यमों से पांच करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं। इन्फ्लुएंसर ने छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के बाद हुए बदलाव और विकास कार्यों को प्रत्यक्ष रूप से देखा है तथा अपने अनुभवों को सोशल मीडिया के माध्यम से साझा करेंगे। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर. प्रसन्ना सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

वृद्धजन हमारी अमूल्य धरोहर, उनके अनुभव और आशीर्वाद से समृद्ध होता समाज : मंत्री श्री कुशवाह

भोपाल  सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाह ने कहा कि वृद्धजन हमारे परिवार और समाज की अमूल्य धरोहर हैं। उनके जीवन का अनुभव, ज्ञान और आशीर्वाद नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शन का आधार है। वृद्धजनों का सम्मान केवल एक दिन तक सीमित न रहकर हमारे व्यवहार और संस्कारों का हिस्सा होना चाहिए। उन्होंने यह बात अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध जन्म दिवस के अवसर पर प्रशासन अकादमी के स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में कहीं। कार्यक्रम में 500 से अधिक वृद्धिजनों को शाल श्रीफल देकर सम्मानित किया गया कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद श्री आलोक शर्मा ने की तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक श्री भगवानदास सबनानी उपस्थित थे। मंत्री श्री कुशवाह कहा कि कार्यक्रम में ऐसे वयोवृद्ध भी उपस्थित हैं, जिन्होंने अपने जीवन के 100 वर्ष पूरे किए हैं। उनके पास एक शताब्दी का अनुभव है, जिससे समाज और युवा पीढ़ी बहुत कुछ सीख सकती है। 100 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके वरिष्ठजन एक खुली किताब की तरह होते हैं। उनके साथ बैठकर, उनसे संवाद कर उनके जीवन के अनुभव और ज्ञान को आत्मसात किया जा सकता है। वरिष्ठजन परिवार से जुड़े रहें और उन्हें अनावश्यक सामाजिक बंदिशों में न बांधा जाए। जो वृद्धजन स्वस्थ हैं और काम करना चाहते हैं, उन्हें अपनी क्षमता के अनुसार सक्रिय रहने के अवसर मिलना चाहिए। मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि भारत की पारिवारिक व्यवस्था, संस्कार और जीवन-मूल्य पूरी दुनिया के लिए प्रेरणा का विषय हैं। दुनिया के कई विकसित देश भी परिवार, बुजुर्गों के सम्मान और जीवन-मूल्यों से जुड़ी भारतीय परंपराओं से सीख रहे हैं। हमें अपनी इस समृद्ध परंपरा को और मजबूत करते हुए वृद्धजनों के सम्मान और सेवा को जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश के वृद्धजनों, दिव्यांगजनों तथा अन्य सामाजिक रूप से जरूरतमंद वर्गों की आवश्यकताओं को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से पूरा करने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य है कि जरूरतमंद वर्गों तक योजनाओं का लाभ पहुंचे और उन्हें सम्मानजनक एवं बेहतर जीवन के लिए आवश्यक सहयोग उपलब्ध हो। सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत भी वरिष्ठजनों के सम्मान एवं कल्याण को महत्व दिया जा रहा है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य परीक्षण और सहायक उपकरणों की उपलब्धता इसी दिशा में किए जा रहे कार्यों का हिस्सा है। उन्होंने सभी वृद्धजनों के स्वस्थ, सुखी एवं दीर्घायु जीवन की कामना की। भोपाल सांसद श्री आलोक शर्मा ने कहा कि वरिष्ठजनों ने अपने अनुभव, योगदान और संस्कारों से परिवार एवं समाज को समृद्ध किया है। उनका सम्मान और गरिमापूर्ण उपस्थिति परिवार तथा समाज की समृद्ध परंपरा का प्रतीक है। उनके जीवन का अनुभव नई पीढ़ी को निरंतर प्रेरणा देता है। विधायक श्री भगवानदास सबनानी ने कहा कि सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत वृद्धजनों का सम्मान समाज में उनके योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। उनके अनुभव और आशीर्वाद समाज के लिए अमूल्य हैं। उन्होंने सभी वरिष्ठजनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए उनके स्वस्थ एवं सुखी जीवन की कामना की। परशुराम कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पं. श्री विष्णु राजोरिया ने अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि माता-पिता और वृद्धजनों की सेवा एवं सम्मान हमारी संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान है। परिवार और समाज में वरिष्ठजनों के अनुभव एवं मार्गदर्शन को सम्मान देना हमारी जिम्मेदारी है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग की प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर ने कहा कि जीवन प्रत्याशा बढ़ने के साथ वरिष्ठजनों के स्वास्थ्य, सामाजिक एवं आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां भी बढ़ी हैं। वृद्धजनों को स्वास्थ्य सुविधाओं, सामाजिक सुरक्षा और साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। विभाग द्वारा इस दिशा में विभिन्न स्तरों पर कार्य किए जा रहे हैं तथा देखभाल से जुड़े प्रशिक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है। सामाजिक न्याय एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के आयुक्त श्री कृष्ण गोपाल तिवारी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस का उद्देश्य वरिष्ठजनों के योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के साथ उनके सम्मान और गरिमापूर्ण जीवन को सुनिश्चित करना है। कार्यक्रम में स्वास्थ्य परीक्षण एवं साइबर जागरूकता जैसी सुविधाओं के माध्यम से वृद्धजनों को आवश्यक जानकारी और सहयोग उपलब्ध कराया गया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठजनों को आवश्यक सेवाएं और सहयोग उपलब्ध कराने के लिए विभाग द्वारा निरंतर कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में 100 वर्ष की आयु पूर्ण करने वाली तीन शतायु माताओं श्रीमती राजूबाई, श्रीमती तुलसीबाई एवं श्रीमती कौशल्या देवी को विशेष शतायु सम्मान प्रदान किया गया। तीनों शतायु माताओं को ₹5,100 की सम्मान राशि एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में महावीर संस्था द्वारा दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग एवं आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए। इससे दिव्यांगजनों को दैनिक जीवन में अधिक सुविधा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सहयोग मिलेगा। साथ ही वरिष्ठजनों के लिए स्वास्थ्य परीक्षण की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक जांच एवं स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में जरूरतमंद दिव्यांगजनों को ट्राइसाइकिल वितरित की गईं। इससे उन्हें आवागमन में सुविधा मिलेगी और दैनिक गतिविधियों में अधिक आत्मनिर्भरता प्राप्त होगी। वृद्ध मित्रों ने सक्रिय रूप से अपनी सेवाएं दीं। उन्होंने वरिष्ठजनों की सहायता करने, उन्हें कार्यक्रम स्थल तक पहुंचाने तथा आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में सहयोग किया। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव श्रीमती सोनाली पोंक्षे वायंगणकर, आयुक्त श्री कृष्ण गोपाल तिवारी सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में वरिष्ठजन उपस्थित रहे।  

इंदौर में 6 लाख की डकैती से हड़कंप, युवक को चादर से ढककर पीटा; 5 गिरफ्तार

 इंदौर  इंदौर में कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। शहर के दूधिया स्थित नीलगिरी परिसर में हथियारबंद बदमाशों ने एक रिहाइशी फ्लैट पर धावा बोलकर लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के जेवरात और नकदी लूट ली। घटना का सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए वारदात में शामिल सभी पांचों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जिनमें तीन नाबालिग शामिल हैं। चादर से ढककर की बेरहमी से पिटाई, फिर मचाया तांडव वारदात खुड़ैल थाना क्षेत्र के अंतर्गत नीलगिरी परिसर (ब्लॉक नंबर 01) के फ्लैट नंबर 402 में रहने वाले चौबे परिवार के साथ घटी। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, बीते 27 सितंबर 2026 को पांच बदमाशों की टोली ने योजनाबद्ध तरीके से वारदात को अंजाम दिया… बहाने से खुलवाया दरवाजा: बदमाशों ने पहले झांसा देकर फ्लैट का दरवाजा खुलवाया। बंधक बनाकर मारपीट: अंदर दाखिल होते ही आरोपियों ने पीड़ित को चादर से ढक दिया ताकि वह उनका चेहरा न देख सके और फिर उसके साथ जमकर मारपीट की। लाखों का माल पार: इसके बाद बदमाशों ने अलमारी व घर में रखे सोने-चांदी के आभूषण और नकद रकम समेटी और मौके से रफूचक्कर हो गए। सीसीटीवी फुटेज से खुला राज, चोरी का सामान भी बरामद घटना के बाद पुलिस ने मामला दर्ज कर पड़ताल शुरू की। सोसाइटी परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने पर पांचों संदिग्धों की आवाजाही स्पष्ट दिखाई दी। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी कर पांचों आरोपियों को धर दबोचा। पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि गिरोह के पांच में से तीन सदस्य नाबालिग हैं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लूटी गई नकदी और जेवरात भी बरामद कर लिए हैं।

पुलिस सेवा समाज सेवा का सशक्त माध्यम, सिद्धांतों पर अडिग रहना सफलता की कुंजी: प्रकाश सिंह

पुलिस सेवा समाज सेवा का सशक्त माध्यम, सिद्धांतों पर अडिग रहना ही सफलता का आधार : प्रकाश सिंह लखनऊ,   पद्मएवं पूर्व पुलिस महानिदेशक प्रकाश सिंह ने अपनी पुस्तक ‘संघर्ष’ के विमोचन के अवसर पर कहा कि उन्होंने यह पुस्तक आत्मकथा के रूप में नहीं, बल्कि अपने सेवाकाल के कुछ अविस्मरणीय अनुभवों और उनसे मिलने वाली सीख को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से लिखी है।  उन्होंने कहा कि उनके पुलिस सेवाकाल की शुरुआत ही चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से हुई और उन्हें नगालैंड में विद्रोह की चुनौती के बीच करीब चार वर्ष कार्य करने का अवसर मिला। इसके बाद असम में उग्रवाद की चुनौती के बीच पुलिस महानिदेशक के रूप में जिम्मेदारी मिली। उत्तर प्रदेश में भी उस समय संगठित अपराध और माफिया की चुनौती थी। उन्होंने कहा कि पंजाब में आतंकवाद के चरम दौर में बीएसएफ में रहते हुए उन्हें बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करना पड़ा। पाकिस्तान से सीमा पार कर आने वाले आतंकवादियों और हथियारों की आवाजाही रोकने के लिए सीमा सुरक्षा को मजबूत करने की रणनीति पर काम किया गया और बेहतर तकनीक का उपयोग करते हुए बॉर्डर फेंसिंग तैयार की गई, जिसके बाद पाकिस्तान से आतंकवादियों की आवाजाही पर प्रभावी रोक लगी और आतंकवाद को मिलने वाली ‘ऑक्सीजन’ धीरे-धीरे समाप्त हुई।  उन्होंने कश्मीर में आतंकवाद के विरुद्ध अपने अनुभवों और अपने ऊपर हुए जानलेवा हमलों का भी उल्लेख किया। इन अनुभवों को देवी दुर्गा की कृपा और ईश्वर की रक्षा से जोड़ा तथा पुस्तक को देवी दुर्गा को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि पीड़ित और परेशान व्यक्ति अपनी समस्या लेकर पुलिस के पास आता है। किसी की बेटी का अपहरण हुआ हो, संपत्ति पर कब्जा हुआ हो या उसके साथ कोई अन्य अपराध हुआ हो। ऐसे व्यक्ति की पीड़ा दूर करना, उसके आंसू पोंछना और उसके साथ संवेदनशीलता से पेश आना पुलिस अधिकारी के लिए समाज सेवा का अवसर है। उन्होंने कहा कि पीड़ित व्यक्ति की समस्या दूर करने के बाद मिलने वाला आशीर्वाद किसी ईश्वर के आशीर्वाद से कम नहीं है। इसी भावना ने उन्हें कठिन परिस्थितियों के बावजूद 35 वर्ष तक पुलिस सेवा में बने रहने की प्रेरणा दी।  उन्होंने कहा कि ‘संघर्ष’ में उन्होंने अपने सेवाकाल के अनुभवों, चुनौतियों, सिद्धांतों और आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सीख को संकलित किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सभी उपस्थित लोगों को शुभकामनाएं दीं। बॉक्स हर पुलिसकर्मी वर्दी में एक नागरिक है और हर नागरिक बिना वर्दी का पुलिसकर्मी : स्वामी धर्मबंधु स्वामी धर्मबंधु जी ने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के साथ आध्यात्मिकता भी आवश्यक है। नागरिकों में नैतिकता, अनुशासन, करुणा, न्याय, शांति और राष्ट्र के प्रति समर्पण जैसे मूल्यों का विकास होना चाहिए।  उन्होंने कहा कि युवाओं में राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति जगाने में भारतीय संस्कृति एवं शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने प्रकाश सिंह को कर्तव्यनिष्ठा, राष्ट्रीयता और ईमानदारी का प्रतीक बताते हुए कहा कि उनका जीवन और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। सादगी और राष्ट्रसेवा के प्रति उनका समर्पण अनुकरणीय है। स्वामी धर्मबंधु ने कहा कि इतिहास हमें वर्तमान को समझने और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार होने की सीख देता है। भारतीय परंपरा में राष्ट्र और कर्तव्य के प्रति समर्पण को सर्वोच्च महत्व दिया गया है। उन्होंने पुलिस सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि हर पुलिसकर्मी वर्दी में एक नागरिक है और हर नागरिक बिना वर्दी का पुलिसकर्मी है। पुलिस और नागरिकों के बीच बेहतर सामंजस्य तथा पारस्परिक जिम्मेदारी की भावना से ही मजबूत समाज और सशक्त राष्ट्र का निर्माण संभव है। सड़क सुरक्षा और पुलिस आधुनिकीकरण से सुरक्षित यातायात को मिलेगी मजबूती : डीजीपी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने कहा कि आज का समारोह उत्तर प्रदेश पुलिस के लिए गौरव और प्रेरणा का अवसर है, जिसमें पुलिस सेवा के तीन महत्वपूर्ण पक्ष- शौर्य एवं उत्कृष्ट सेवा का सम्मान, सड़क सुरक्षा के लिए आधुनिक संसाधनों का सुदृढ़ीकरण तथा पुलिस सेवा के अनुभवों एवं विचारों का संरक्षण और उन्हें आगे बढ़ाने का कार्य एक साथ हो रहा है। समारोह में 16 राष्ट्रपति वीरता पदक और 10 मुख्यमंत्री वीरता पदक प्रदान किए जा रहे हैं।  उन्होंने निरीक्षक स्वर्गीय सुनील कुमार को मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशन में 87 आधुनिक इंटरसेप्टर वाहनों को प्रदेश के सर्वाधिक दुर्घटना बहुल जनपदों के लिए रवाना किया जा रहा है।  डीजीपी ने कहा कि प्रदेश के सभी 75 जिलों में जीरो फैटलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना लागू की गई है, जिसके तहत इंफोर्समेंट, इंजीनियरिंग, एजुकेशन और अवेयरनेस, इलेक्ट्रॉनिक इंफोर्समेंट तथा इमरजेंसी रिस्पांस के माध्यम से सड़क दुर्घटनाओं और जनहानि को कम करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 7.89 प्रतिशत, मृत्यु में 9.08 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 8.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है, जिससे 1,100 से अधिक बहुमूल्य जीवन बचाए गए हैं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा विकसित ‘यूपी गति’ एप के माध्यम से 20 शहरों के 109 सिटी रूट्स पर यातायात की 24×7 लाइव और रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है तथा अप्रैल 2026 से छह माह में कंजेशन प्वाइंट्स में चार प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, डेटा ड्रिवन एनालिसिस और टारगेटेड एनफोर्समेंट के माध्यम से ‘सुरक्षित यातायात, सुरक्षित नागरिक’ के संकल्प को मजबूती मिल रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व और मार्गदर्शन में अपराध एवं अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण आधार बन चुकी है और एटीएस, एसटीएफ, साइबर क्राइम, एंटी करप्शन, विजिलेंस, महिला एवं बाल सुरक्षा, ट्रैफिक तथा फॉरेंसिक सहित सभी इकाइयां अपने दायित्वों का प्रभावी, समन्वित और विधिसम्मत निर्वहन कर रही हैं।   अत्याधुनिक उपकरणों से लैस हैं इंटरसेप्टर वाहन मुख्यमंत्री ने अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित 87 इंटरसेप्टर वाहनों (चार पहिया एवं दो पहिया) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये उन्नत इंटरसेप्टर वाहन प्रदेश में यातायात व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के साथ सड़क यात्रियों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने … Read more

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री पाटिल से की भेंट

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरूवार को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी आर पाटील से भेंट कर मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन और योजनाओं के कार्यों में तेजी लाने से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में हर घर नल से जल पहुंचाने के लक्ष्य को गति देने के लिए केन्द्र सरकार से आवश्यक सहयोग और लंबित विषयों के शीघ्र निराकरण का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बैठक में जल जीवन मिशन के लिए केन्द्रांश जारी करने का भी अनुरोध किया। उन्होंने 100 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली योजनाओं के लिए केन्द्रांश की राशि की प्रतिपूर्ति के लिये पोर्टल पर विकल्प प्रारंभ करने का विषय भी रखा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जल जीवन मिशन-2.0 के अंतर्गत मध्यप्रदेश के लिए वर्तमान वित्तीय वर्ष में आवंटित राशि में वृद्धि किए जाने का अनुरोध किया, जिससे प्रदेश में पेयजल योजनाओं के कार्यों को अपेक्षित गति से आगे बढ़ाया जा सके। बैठक में ‘सुजलाम भारत’ ऐप में जियो-टैगिंग से संबंधित तकनीकी कमियों के निराकरण का विषय भी प्रमुखता से रखा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि तकनीकी व्यवस्था को सुचारु बनाने से योजनाओं की निगरानी और प्रगति के प्रभावी आकलन में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से मध्यप्रदेश के हित में इन विषयों पर आवश्यक सहयोग प्रदान करने का अनुरोध करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार ग्रामीण परिवारों को नल से स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल जीवन मिशन के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है।  

महानदी हमें बांटने वाली नहीं, दोनों राज्यों को जोड़ने वाली जीवनधारा : समाधान ऐसा हो जिसमें दोनों राज्यों की जीत हो – मुख्यमंत्री साय

रायपुर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के सौहार्दपूर्ण और स्थायी समाधान की दिशा में आज नई दिल्ली में महत्वपूर्ण पहल हुई। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह की अध्यक्षता में कर्तव्य भवन में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय और ओडिशा के मुख्यमंत्री  मोहन चरण माझी ने महानदी से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की और अपने-अपने राज्यों का पक्ष रखा। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के मुख्य सचिव सहित केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय, केंद्रीय जल आयोग तथा दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने बैठक में छत्तीसगढ़ का पक्ष रखते हुए कहा कि महानदी केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की सभ्यता, संस्कृति, कृषि और जनजीवन से जुड़ी जीवनधारा है। महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा को बांटने वाली नहीं, बल्कि दोनों राज्यों को जोड़ने वाली नदी है। इसलिए इसका समाधान भी प्रतिस्पर्धा या टकराव के बजाय सहयोग, विश्वास और सहमति की भावना से निकलना चाहिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारा प्रयास ऐसा समाधान निकालने का होना चाहिए जिसमें दोनों राज्यों और वहां के नागरिकों के हित सुरक्षित हों। छत्तीसगढ़ न्यायपूर्ण, निष्पक्ष, वैज्ञानिक, पारदर्शी और दीर्घकालिक समाधान का पक्षधर है। ऐसा समाधान दोनों राज्यों के किसानों, आम नागरिकों और आने वाली पीढ़ियों के हितों को ध्यान में रखकर तैयार होना चाहिए। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महानदी का उद्गम छत्तीसगढ़ में होता है और इसके जलग्रहण क्षेत्र का बड़ा हिस्सा प्रदेश में स्थित है। राज्य में कृषि, सिंचाई, पेयजल और विशेष रूप से आदिवासी एवं ग्रामीण अंचलों की विकास आवश्यकताएं महानदी से जुड़ी हुई हैं। इसलिए किसी भी स्थायी समाधान में छत्तीसगढ़ की इन वास्तविक आवश्यकताओं का समुचित ध्यान रखा जाना आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि छत्तीसगढ़ अपने हितों की बात करते हुए ओडिशा की आवश्यकताओं और हितों का भी पूरा सम्मान करता है। हीराकुंड ओडिशा की जीवनरेखा है और छत्तीसगढ़ उसके महत्व को भलीभांति समझता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ हीराकुंड जलाशय के हितों और उसके सुचारु संचालन के लिए आवश्यक सहयोग की भावना के साथ आगे बढ़ने को तैयार है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जल जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन को  साझी समृद्धि का माध्यम बनाना चाहिए। दोनों राज्यों के बीच ऐसा तंत्र विकसित हो, जिसमें जल उपलब्धता, आवश्यकता और उपयोग से संबंधित तथ्य पारदर्शी ढंग से साझा हों और वैज्ञानिक आधार पर निर्णय लिए जाएं। केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की पहल से समाधान की उम्मीद मुख्यमंत्री  साय ने महानदी जल विवाद के समाधान के लिए केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री  अमित शाह द्वारा की गई पहल का स्वागत करते हुए कहा कि केंद्र सरकार की मध्यस्थता में दोनों राज्यों के बीच सकारात्मक संवाद से आपसी सहमति का रास्ता निकलने की उम्मीद मजबूत हुई है। उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल के राष्ट्रीय एकीकरण में योगदान का स्मरण करते हुए कहा कि स्वतंत्रता के बाद सरदार पटेल ने देश को एक सूत्र में पिरोने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। आज राज्यों के बीच वर्षों से लंबित विषयों को संवाद और सहमति के माध्यम से समाधान की दिशा में आगे बढ़ाने के प्रयास भी सहकारी संघवाद और राष्ट्रीय एकता की इसी भावना को मजबूत करते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यों के बीच जल संबंधी प्रश्नों का सौहार्दपूर्ण समाधान राज्यों के बीच विश्वास, सहयोग और भावनात्मक जुड़ाव को भी मजबूत करता है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप राज्यों और केंद्र के बीच समन्वय से जटिल विषयों पर समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का वातावरण बना है। संवाद और वैज्ञानिक तथ्यों से निकलेगा टिकाऊ समाधान मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि महानदी से संबंधित विषय में भावनाओं के साथ वैज्ञानिक तथ्यों का भी उतना ही महत्व है। छत्तीसगढ़ को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय की मध्यस्थता तथा केंद्रीय जल आयोग के निष्पक्ष, वैज्ञानिक और पारदर्शी तकनीकी आकलन पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि जल उपलब्धता, वर्तमान एवं भविष्य की आवश्यकताओं, सिंचाई, पेयजल, पर्यावरणीय जरूरतों और दोनों राज्यों की विकास संबंधी आवश्यकताओं का समग्र अध्ययन करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। तकनीकी स्तर पर तथ्य स्पष्ट होंगे और राजनीतिक स्तर पर संवाद एवं विश्वास कायम रहेगा तो निश्चित रूप से ऐसा समाधान निकल सकता है, जो दोनों राज्यों को स्वीकार्य हो और आने वाली पीढ़ियों के हित में भी हो। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों के परामर्श और केंद्र सरकार की मध्यस्थता से जो न्यायसंगत एवं व्यावहारिक समाधान सामने आएगा, छत्तीसगढ़ उसे सकारात्मक भावना से आगे बढ़ाने में पूरा सहयोग करेगा। बस्तर की तरह दृढ़ इच्छाशक्ति और समन्वय से समाधान की दिशा में बढ़ने का विश्वास मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ ने केंद्र और राज्य के बीच मजबूत समन्वय के सकारात्मक परिणामों को बस्तर में करीब से देखा है। नक्सलवाद जैसी दशकों पुरानी चुनौती से निपटने के लिए सुरक्षा, विकास और जनविश्वास को साथ लेकर जिस समन्वित दृष्टिकोण से काम किया गया, उससे बस्तर में व्यापक बदलाव आया है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जटिल और लंबे समय से लंबित विषयों में भी जब स्पष्ट इच्छाशक्ति, निरंतर संवाद और सभी पक्षों के बीच विश्वास हो, तो समाधान की दिशा में निर्णायक प्रगति संभव है। महानदी के विषय पर भी इसी सकारात्मक भावना से दोनों राज्य आगे बढ़ सकते हैं। महानदी विवाद नहीं, सहयोग की धारा बने : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  साय ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच गहरे सामाजिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों पड़ोसी राज्यों के लोगों के बीच आत्मीय संबंध सदियों पुराने हैं। दोनों प्रदेशों की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली में अनेक समानताएं हैं। उन्होंने महाप्रभु जगन्नाथ की आस्था और शिवरीनारायण से पुरी तक जुड़े सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारी आस्था और संस्कृति हमें जोड़ती है। महानदी भी इसी साझा विरासत और जीवन का हिस्सा है। इसलिए महानदी को विवाद की रेखा नहीं, बल्कि सहयोग, विकास और विश्वास की धारा बनाना हमारा सामूहिक प्रयास होना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि दोनों राज्यों की प्राथमिकता अपने किसानों और नागरिकों का हित है। दोनों राज्यों के नेतृत्व को जमीनी आवश्यकताओं की समझ है। इसलिए परस्पर विश्वास के … Read more

धमतरी के 498 केंद्रों में सजी पोषण और खुशियों की चौपाल, बच्चों-महिलाओं को मिल रहा लाभ

धमतरी में 'आंगन मिलन सेवा' से संवर रहा बच्चों और महिलाओं का भविष्य 498 केंद्रों में सज रही पोषण और खुशियों की चौपाल ​रायपुर ​        धमतरी जिले में 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आयोजित 'आंगन मिलन सेवा' कार्यक्रम से आंगनबाड़ी केंद्र खुशियों, खेल-कूद और पोषण जागरूकता के जीवंत सामुदायिक केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। जिले के कुल 1,164 आंगनबाड़ी केंद्रों में से अब तक 498 केंद्रों में 30 सितंबर तक इस विशेष आयोजन को सफलतापूर्वक संपन्न कराया जा चुका है। 25 सितंबर से शुरू हुआ यह अभियान आगामी 6 अक्टूबर तक निरंतर जारी रहेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के सर्वांगीण विकास और सामुदायिक सहभागिता को बढ़ावा देना है। ​पोषण, स्वास्थ्य और संस्कृति का अनोखा संगम         ​'आंगन मिलन सेवा' के माध्यम से महिलाओं और बच्चों को स्वास्थ्य, स्वच्छता और विभिन्न शासकीय कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। कार्यक्रमों में ‘मेरी पौष्टिक थाली’ एवं पौष्टिक व्यंजन प्रदर्शनी, स्वस्थ शिशु प्रतियोगिता, चित्रकला, मनोरंजक खेल और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जा रही हैं। नन्हें-मुन्नों की मनमोहक नृत्य प्रस्तुतियों ने इस आयोजन को बेहद खास बना दिया है।          ​महिलाओं की सहभागिता बढ़ाने के उद्देश्य से महतारी वंदन योजना और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना की हितग्राहियों के लिए रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही फुगड़ी, रस्साकशी, मटकी फोड़ और कुर्सी दौड़ जैसे पारंपरिक छत्तीसगढ़ी खेलों ने महिलाओं में एक नया उत्साह भर दिया है। ​'न्योता भोज' और 'घर-घर मुनगा' से मजबूत हो रही पोषण की नींव            ​कार्यक्रम के दौरान संतुलित आहार और स्थानीय पौष्टिक खाद्य पदार्थों के महत्व पर विशेषज्ञों द्वारा जागरूक किया जा रहा है। सामुदायिक सहयोग को प्रगाढ़ करने के लिए ‘न्योता भोज’ का आयोजन कर आंगनबाड़ी के बच्चों को स्वादिष्ट एवं पौष्टिक भोजन कराया जा रहा है। साथ ही, स्थानीय स्तर पर अत्यधिक पोषक माने जाने वाले मुनगा को दैनिक आहार में शामिल करने के लिए ‘घर-घर मुनगा, हर घर मुनगा’ अभियान चलाकर परिवारों को प्रेरित किया जा रहा है। ​जन-भागीदारी से बना सामुदायिक उत्सव        ​अभियान को मिल रहे अपार जनसमर्थन के आंकड़े इसकी सफलता की कहानी खुद बयां करते हैं। अब तक आयोजित कार्यक्रमों में 2,171 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, सहायिकाओं और मितानिनों की सक्रिय भूमिका रही है। वहीं 6,543 से अधिक बच्चों ने उत्साहपूर्वक विभिन्न गतिविधियों में भाग लिया और 4,379 से अधिक महिलाओं ने प्रतियोगिताओं में अपनी जीवंत सहभागिता निभाई। इतना ही नहीं, 6,033 से अधिक पुरुषों ने भी आगे बढ़कर इस पहल का समर्थन किया, जिससे यह विभागीय कार्यक्रम महज एक औपचारिक आयोजन न रहकर एक व्यापक और उमंग भरे सामुदायिक उत्सव में बदल गया। 'खिलौना दान करें, बच्चे के सर्वांगीण विकास में भागीदार बनें'          ​महिला एवं बाल विकास विभाग ने आम नागरिकों, जनप्रतिनिधियों एवं प्रबुद्धजनों से अपील करते हुए खिलौना बैंक में योगदान देने का आह्वान किया है। लोग अपने घरों में रखे पुराने या नए, सुरक्षित एवं उपयोगी खिलौनों को निकटतम आंगनबाड़ी केंद्र में दान कर सकते हैं।        ​विभाग का मानना है कि खिलौने केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि बच्चों में जिज्ञासा, रचनात्मकता और बौद्धिक क्षमता विकसित करने के सशक्त माध्यम हैं।जनभागीदारी के इस पावन प्रयास से आंगनबाड़ी केंद्रों को और अधिक समृद्ध बनाकर बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखी जा रही है।

अमित शाह 3 अक्टूबर को भोपाल में करेंगे विकास कार्यों का शुभारंभ, गोपालक दीदियों का सम्मान

सेवा संकल्प अभियान अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर को आएंगे भोपाल राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन में पशुपालक दीदियों के सम्मान के साथ विभिन्न विकास कार्यों का करेंगे शुभारंभ व अनुदान राशि का वितरण लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं की बढ़ेगी आय भोपाल  ‘सेवा संकल्प अभियान' के अंतर्गत केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह 3 अक्टूबर को भोपाल आएंगे। वे भोपाल के भेल दशहरा मैदान में आयोजित ‘राज्य स्तरीय गोपालक सम्मेलन' में शामिल होकर उत्कृष्ट कार्य करने वाली गोपालक दीदियों को सम्मानित करेंगे और 'डॉ. भीमराव अंबेडकर कामधेनु योजना' के स्वीकृति पत्रों का वितरण करेंगे। इसके साथ ही वे प्रदेशवासियों को डेयरी प्रसंस्करण, दुग्ध संयंत्र और गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला से जुड़ी विभिन्न विकास सौगातों की सौगात देंगे। सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शाह 255 करोड़ रुपये की लागत से उज्जैन में बनने वाले नए डेयरी प्लांट का भूमिपूजन करेंगे। इसके अतिरिक्त, 16.80 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित फर्मेंटेड प्रोडक्ट डेयरी प्लांट और एमपी स्टेट को-ऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन भोपाल में ‘नेशनल प्रोग्राम फॉर डेयरी डेवलपमेंट' के तहत 12.40 करोड़ रुपये की लागत से बनी अत्याधुनिक प्रयोगशाला एंव मिनी डेयरी संयंत्र शिवपुरी का शुभारंभ किया जाएगा। कार्यक्रम में भोपाल और इंदौर दुग्ध संघ के दुग्ध उत्पादकों को लगभग 12 करोड़ रुपये की बोनस राशि वितरित की जाएगी तथा ‘कृषक कल्याण वर्ष' के अंतर्गत पशुपालन एवं डेयरी विभाग द्वारा विशेष प्रदर्शनी भी लगायी जाएगी। प्रदेश सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के रखरखाव एवं भरण-पोषण के लिए माह जुलाई और अगस्त 2026 की 101 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान राशि ऑनलाइन डीबीटी के माध्यम से सीधे खातों में हस्तांतरित की जाएगी। यह राशि गौशालाओं में दर्ज गोवंश के समुचित व्यवस्थापन, आहार एवं भरण-पोषण के लिए दी जाती है। राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत एवं संचालित गौशालाओं में संरक्षित गोवंश के लिए 40 रुपये प्रति गोवंश प्रतिदिन की दर से अनुदान राशि उपलब्ध कराई जाती है। महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल लखपति गोपालक दीदी योजना पशुपालन से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि, अतिरिक्त आय के अवसर और पशुपालन की उत्पादकता बढ़ने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। योजना का उद्देश्य पशुपालन को केवल पारंपरिक आजीविका तक सीमित न रखते हुए इसे ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता और समृद्धि का माध्यम बनाना है। प्रदेश सरकार द्वारा ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से ‘लखपति गोपालक दीदी योजना’ का संचालन किया जा रहा है। “शून्य पूंजीगत निवेश, अधिकतम आनुवंशिक एवं आर्थिक लाभ” के मूल मंत्र पर आधारित इस योजना से प्रदेश की 2 लाख से अधिक महिलाएं जुड़ी हुई हैं। योजना के तहत अवर्णित (नॉन-डिस्क्रिप्ट) नस्ल की गायों और भैंसों मंप उच्च नस्ल के सीमन से कृत्रिम गर्भाधान को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे पशुपालकों को बिना अतिरिक्त खर्च के बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशु प्राप्त हो रहे हैं। उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ेगा दुग्ध उत्पादन उच्च नस्ल के कृत्रिम गर्भाधान से उत्पन्न होने वाली F1 नस्ल की बछिया अपनी माता की तुलना में लगभग 2.5 से 3 गुना अधिक दूध देने में सक्षम होती है। इससे पशुपालक परिवारों को एक लैक्टेशन में प्रति बछिया 50 से 60 हजार रुपये की अतिरिक्त आय होती है। पूरे जीवनकाल (5 से 6 लैक्टेशन) के दौरान एक बछिया से लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये तक की अतिरिक्त कमाई की जा सकेगी। उदाहरण के तौर पर यदि किसी परिवार के पास ऐसी 3 से 4 बछियां होती हैं, तो उनका कुल अतिरिक्त आर्थिक लाभ 10 लाख रुपये से अधिक हो सकता है। यह योजना पशुपालन को पारंपरिक आजीविका से आगे बढ़ाकर ग्रामीण महिलाओं की समृद्धि का मुख्य जरिया बना रही है।  

योगी सरकार ने तैयार किया बाल ट्रॉमा केयर को इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप

योगी सरकार पीडियाट्रिक ट्रॉमा इंटीग्रेशन से हर साल बचाएगी करीब 1,800 जानें  – योगी सरकार ने तैयार किया बाल ट्रॉमा केयर को इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप – योगी सरकार बनाएगी प्रदेश में करीब 6 करोड़ बच्चों के लिए हाई-लेवल, कम लागत वाला पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर मॉडल  – बच्चों में ट्रॉमा से होने वाली मौतों को कम करने पर फोकस, त्वरित उपचार और समन्वित देखभाल को बनाया जाएगा आधार लखनऊ,  योगी सरकार ने बच्चों को गंभीर दुर्घटनाओं और चोटों के बाद समय पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में पीडियाट्रिक ट्रॉमा केयर को मौजूदा इमरजेंसी स्वास्थ्य व्यवस्था से जोड़ने का रोडमैप तैयार कर लिया है। इसका उद्देश्य प्रदेश के करीब 6 करोड़ बच्चों के लिए हाई-लेवल कम लागत वाली एकीकृत ट्रॉमा केयर व्यवस्था विकसित करना है। इसके तहत अस्पतालों, इमरजेंसी सेवाओं, एंबुलेंस, विशेषज्ञ चिकित्सकों और रेफरल सिस्टम को एक साझा नेटवर्क में जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इस व्यवस्था से हर साल करीब 1,800 जानें बचाने का लक्ष्य रखा गया है। ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी 12 से 15 प्रतिशत ले जाने का लक्ष्य योगी सरकार ने बाल ट्रॉमा को यूनिफाइड इमरजेंसी केयर आर्किटेक्चर विकसित करने की योजना बनायी है। इसका आधार गंभीर रूप से घायल बच्चे को दुर्घटना स्थल से लेकर प्राथमिक उपचार, ट्रॉमा सेंटर, विशेषज्ञ उपचार और आगे की देखभाल तक हर स्तर पर समयबद्ध और समन्वित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे इलाज में होने वाली देरी और मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजने में लगने वाले अतिरिक्त समय को कम किया जाएगा। वर्तमान में इमरजेंसी विभागों में ट्रॉमा बेड की हिस्सेदारी करीब 3 से 5 प्रतिशत है, जबकि एकीकृत ट्रामा केयर के जरिये इसे 12 से 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके तहत प्रदेश में अलग-अलग स्तर की ट्रॉमा सुविधाओं का नेटवर्क विकसित करने की योजना है। इसमें लेवल-1 का एक, लेवल-2 के 36 और लेवल-3 के 126 इंटीग्रेटेड ट्रॉमा एवं इमरजेंसी यूनिट (आईटीईएमयू) को विकसित किया जाएगा। इससे कुल 173 इंटरकनेक्टेड सुविधाएं तैयार होंगी और करीब 2,853 नए बेड जुड़ेंगे। इसका मकसद गंभीर रूप से घायल बच्चों को जरूरत के अनुसार जल्द विशेषज्ञ उपचार उपलब्ध कराना है।  'गोल्डन ऑवर' में इलाज पर विशेष फोकस पीडियाट्रिक ट्रॉमा में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है इसलिए दुर्घटना के बाद तत्काल रिस्पांस, प्रशिक्षित मेडिकल टीम, एंबुलेंस कनेक्टिविटी और उपयुक्त ट्रॉमा सेंटर तक त्वरित रेफरल को एक साथ जोड़ने पर जोर है। इसमें 'गोल्डन ऑवर' के दौरान इलाज उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए प्रशिक्षित मेडिकल टीम, एंबुलेंस कनेक्टिविटी और उचित ट्रॉमा सेंटर तक तेजी से पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा। इसके लिए योगी सरकार करीब 45 करोड़ रुपये खर्च करेगी।