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मुख्यमंत्री डॉ. यादव: विक्रमादित्य थे भारतीय न्याय व्यवस्था के महान पुरोधा

मुख्यमंत्री इंदौर में अखिल भारतीय बैठक में हुए शामिल  इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि भारतीय न्याय व्यवस्था का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। सम्राट विक्रमादित्य भारतीय न्याय व्यवस्था के महान पुरोधा थे, जिनके निर्णयों की मिसाल आज भी दी जाती है। न्याय के क्षेत्र में उनकी पहचान विश्व स्तर पर अद्वितीय थी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को इंदौर में विश्व हिंदू परिषद विधि प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित अखिल भारतीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के अनेक कानूनों में समयानुकूल बदलाव किए गए हैं, जो समय की आवश्यकता भी थे। न्याय व्यवस्था में मन की पवित्रता और पंचों का निष्पक्ष निर्णय ही असली न्याय है। उन्होंने कहा कि हमें अपनी भारतीय संस्कृति और न्याय परंपरा पर गर्व है और न्यायालयों के निर्णयों का सबको समान रूप से पालन करना चाहिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। प्रदेश में कोलाहल नियंत्रण अधिनियम का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। साथ ही खुले में मांस विक्रय पर प्रतिबंध लगाया गया है और उसका भी सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून सबके लिए समान है और उसके साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने लव जिहाद के विषय में स्पष्ट कहा कि यह धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्ति की गरिमा के विरुद्ध है। प्रदेश में लव जिहाद करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा और उनके विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि न्याय और कानून व्यवस्था में किसी भी प्रकार का भेदभाव न हो। समाज के प्रत्येक वर्ग को समान न्याय मिले और जनता को यह विश्वास रहे कि मध्यप्रदेश में कानून सर्वोपरि है। कार्यक्रम को स्वामी जितेंद्रानंद जी महाराज ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर केंद्रीय विधि और न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल, परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक जी, संयुक्त महामंत्री डॉ. सुरेंद्र जैन, राष्ट्रीय संयोजक विधि प्रकोष्ठ डॉ. अभिषेक अत्रे एवं विधि प्रकोष्ठ के संरक्षक न्यायमूर्ति व्ही.एस. कोकजे विशेष रूप मौजूद थे।  

रायपुर विशेष: महतारियों के सशक्तिकरण में छत्तीसगढ़ सरकार ने स्थापित की एक नई मिसाल

रायपुर स्त्री पुरुष समानता के मामले में छत्तीसगढ़ की मिसाल पूरे देश में रही है लेकिन आर्थिक समानता में फिर भी पुरुषों का पलड़ा अब तक भारी होता था। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी की सरकार आने के बाद इस आर्थिक विषमता को दूर करने का रास्ता भी खुल गया है। अब छत्तीसगढ़ की हर माँ और बहन आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर है। अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए वे स्वयं निर्णय ले सकती हैं। महतारी वंदन योजना जैसी योजनाएं महिलाओं को उनके श्रम और भागीदारी के लिए सम्मानित करती हैं वहीं साय सरकार की आजीविकामूलक योजनाओं से महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने की राह मिली है। आधी आबादी को सशक्त कर मुख्यमंत्री ने विकसित छत्तीसगढ़ की आधारशिला रख दी है। छत्तीसगढ़ ने पिछले 19 महीनों में महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में नई पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने महिलाओं को आर्थिक, सामाजिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य के हर मोर्चे पर मजबूत बनाने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और त्वरित लाभ पहुंचाने की व्यवस्था स्थापित की गई है, जिससे महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला है। आर्थिक स्वावलंबन – महतारी वंदन योजना आत्मनिर्भर महिला की ओर कदम  1 मार्च 2024 से लागू इस महत्वाकांक्षी योजना ने राज्य की महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण में क्रांति ला दी है। विवाहित महिलाओं को प्रतिमाह 1,000 रुपए सीधे बैंक खाते में हस्तांतरित किए जा रहे हैं।मार्च 2024 से सितम्बर 2025 तक 69.15 लाख से अधिक महिलाओं को 12,376.19 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है।यह राशि महिलाओं की आत्मनिर्भरता, पोषण और मूलभूत जरूरतों की पूर्ति में सहायक है।चालू वित्तीय वर्ष में इस योजना के लिए 5, 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।  179 महतारी सदन के निर्माण के लिए 52.20 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक सदन 2,500 वर्गफुट में 29.20 लाख रुपए की लागत से बनेगा, जो महिलाओं के लिए प्रशिक्षण, बैठक और सामुदायिक गतिविधियों का केंद्र होगा। स्वरोजगार और उद्यमिता का विस्तार साय सरकार ने महिला श्रमिकों और स्व-सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई योजनाएँ शुरू की हैं: जिसमें मुख्यमंत्री सिलाई मशीन सहायता योजना के तहत 18 से 50 वर्ष की पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को 7,900 रुपए की सहायता एक सिलाई मशीन के लिए दी जा रही है।दीदी ई-रिक्शा सहायता योजना से 3 वर्ष से पंजीकृत महिला श्रमिकों को 1 लाख रुपए की अनुदान राशि प्रदान की जा रही है। मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत गर्भवती महिला श्रमिकों को 20,000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है, ताकि उन्हें पौष्टिक आहार मिल सके। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण योजना ने पंजीकृत श्रमिकों को अपनी 18-21 वर्ष की अविवाहित पुत्रियों के पढ़ाई लिखाई तथा अन्य आवश्यक खर्चों के लिए 20,000 रुपए की सहायता राशि प्रदान की जा रही है। महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त  और आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी साय सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। जिसमें महतारी शक्ति ऋण योजना के माध्यम से  उन्हें बिना जमानत के 25,000 रुपए का ऋण देकर स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।सक्षम योजना – 2 लाख से कम वार्षिक आय वाली महिलाओं को 3% ब्याज पर 2 लाख रुपए तक ऋण भी दिया जा रहा है।राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) – 800 करोड़ रुपए का प्रावधान, “लखपति महिला” और “ड्रोन दीदी” जैसी नवाचारी पहलें भी योजनाओं में शामिल है।इन योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ, उन्हें रोजगार के स्थायी अवसर भी प्रदान किए जा रहे हैं। साय सरकार ने महिला सुरक्षा को नीति के केंद्र में रखा है। नवाबिहान योजना से घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को कानूनी, चिकित्सा, परामर्श और आश्रय सुविधा प्रदान की जाती है।इसके लिए 20 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। छत्तीसगढ़ सखी वन-स्टॉप सेंटर में SOP लागू करने वाला देश में पहला राज्य बन गया है। 27 जिलों में सेंटर संचालित, 24×7 सेवा उपलब्ध है।महिला हेल्पलाइन 181 और डायल 112 द्वारा संकट में फंसी महिलाओं को त्वरित सहायता और पुलिस समन्वय की सुविधा प्रदान की जाती है।  शुचिता योजना के तहत 2,000 स्कूलों में नैपकिन वेंडिंग मशीनें, 3 लाख से अधिक किशोरियों को स्वच्छता सामग्री प्रदान की जा रही है जिसके लिए 13 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान है।हाई स्कूल छात्राओं के लिए साइकिल वितरण योजना के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान है।  गर्भवती और धात्री महिलाओं को पौष्टिक आहार, स्वास्थ्य पूरक और पोषण पुनर्वास केंद्रों के माध्यम से सहायता दी जा रही है।   नवा रायपुर में 200 करोड़ रुपए की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण किया जा रहा है,जहाँ महिला समूहों के उत्पादों की बिक्री होगी।जशप्योर ब्रांड  जशपुर जिला में निवासरत आदिवासी महिलाओं द्वारा संचालित वन-आधारित उत्पाद है,जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहचान बना रहा है, साथ ही“वोकल फॉर लोकल” का सफल उदाहरण भी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में महिला एवं बाल विकास विभाग को 8,245 करोड़ रुपए का बजट आबंटित किया गया है। इसमें महतारी वंदन, पोषण, स्वास्थ्य, ऋण और सुरक्षा योजनाओं का विस्तार शामिल है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का मानना है कि महिला सशक्तिकरण केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि धरातल पर वास्तविक बदलाव लाने से संभव है। वहीं, महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हर योजना का लाभ पात्र महिलाओं तक समय पर और पारदर्शी ढंग से पहुँचे।     डॉ. दानेश्वरी संभाकर     सहायक संचालक

खरसिया के 29 एकल शिक्षकीय और शिक्षक विहीन शालाओं में हुई शिक्षकों की व्यवस्था

रायपुर वर्षों से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे  रायगढ़ जिले के खरसिया विकासखंड की विद्यालयों में अब नई उम्मीद दिखाई दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मंशानुरूप छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग की युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया ने न केवल एकल शिक्षकीय व शिक्षकविहीन विद्यालयों की दशा सुधरी है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में ठोस पहल भी साबित हो रही है। प्राथमिक शाला धांगरपारा सरवानी, जहाँ लंबे समय से शिक्षक नहीं थे, अब दो शिक्षकों की तैनाती से बच्चों की पढ़ाई नए उत्साह के साथ शुरू हो चुकी है। इसी प्रकार खरसिया विकासखंड के 29 एकल शिक्षकीय शालाओं में भी शिक्षकों की नियुक्ति कर दी गई है, जिससे इन स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था मजबूत हुई है।         युक्तियुक्तकरण से सिर्फ प्राथमिक ही नहीं, बल्कि उच्च स्तरीय शिक्षा व्यवस्था भी सुदृढ़ हुई है। हाईस्कूल पामगढ़, छोटे मूड़पार और नगरपालिका कन्या हायर सेकेंडरी विद्यालय जो वर्षों से विषयवार शिक्षकों की कमी से जूझ रहे थे, अब व्याख्याता शिक्षकों की पदस्थापना से लाभान्वित हो रहे हैं। इससे विद्यालय के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ हो रही है। शासन की इस महत्वपूर्ण पहल से ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के सैकड़ों विद्यालयों में आवश्यकता अनुरूप शिक्षकों की पदस्थापना की गई है। इससे छात्र-शिक्षक अनुपात संतुलित हुआ है।            गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रदेश में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। इस पहल से दूरस्थ, आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता का नया संतुलन कायम हो रहा है। यह पहल न केवल खरसिया, बल्कि पूरे रायगढ़ जिले की शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। युक्तियुक्तकरण के लिए पालकों एवं छात्रों ने शासन-प्रशासन के प्रति जताया आभार युक्तियुक्तकरण से पालकों और विद्यार्थियों में उत्साह का माहौल। ग्राम कोलम चितवाही के पालकों का कहना है कि लंबे समय से जिस बदलाव की प्रतीक्षा थी, वह अब पूरी हो गई है। इससे बच्चों को न केवल नियमित शिक्षा मिल रही है, बल्कि बेहतर वातावरण और सुविधाएँ भी उपलब्ध हो रही है। पालक महेश अगरिया ने बताया कि उनकी दो बालिकाएं है, वे दोनों ग्राम के शासकीय स्कूल में अध्ययन के लिए जाती है। पहले शिक्षक के कमी के कारण उनके दोनों बच्चों की पढ़ाई काफी प्रभावित हो रही थी, लेकिन युक्तियुक्तकरण से स्कूल में शिक्षकों की पदस्थापना के फलस्वरूप उनकी बच्चियों की पढ़ाई में काफी सुधार आया है। वहीं बालिकाओं ने बताया कि स्कूल में शिक्षक के आ जाने से सभी कक्षाएं नियमित रूप से लग रही है और उन्हें विषयवार गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त हो रही है। उन्होंने स्कूल में बेहतर शिक्षा व्यवस्था के लिए शासन-प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

सरकारी स्कूल के बच्चों में पोषाहार के बाद तबियत बिगड़ी, 120 छात्र प्रभावित

दौसा जिले के चूड़ियावास राजकीय सीनियर सेकंडरी स्कूल में शनिवार को पोषाहार खाने के बाद 120 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। सुबह 10 बजे बच्चों को दूध पिलाया गया था और दोपहर के खाने में आलू-टमाटर की सब्जी व रोटी दी गई थी। इसके कुछ देर बाद कई बच्चों को उल्टी व पेट दर्द की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते बीमार बच्चों की संख्या 100 के पार हो गई, जिससे स्कूल प्रशासन और शिक्षकों के हाथ-पांव फूल गए। बच्चों को तुरंत जीप, जुगाड़ और मोटर साइकिलों से नांगल राजावतान स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। अस्पताल में बेड कम होने के कारण बच्चों का इलाज फर्श पर बिछाकर शुरू किया गया। करीब 20 बच्चों की हालत गंभीर होने पर उन्हें दौसा जिला अस्पताल रैफर करना पड़ा। सूचना मिलते ही शिक्षा विभाग व पुलिस अधिकारी भी अस्पताल पहुंचे। घटना की जानकारी लगते ही परिजन भी बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे और हंगामा मच गया। नर्सिंगकर्मियों व डॉक्टरों ने बच्चों को ड्रिप और इंजेक्शन देकर उपचार शुरू किया। जिला शिक्षा अधिकारी अशोक शर्मा और सीबीईओ सत्यनारायण मीणा ने मौके पर पहुंचकर स्कूल और अस्पताल दोनों जगह के हालातों का जायजा लिया और दूध व रोटी-सब्जी के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे।   बताया गया कि सुबह दूध पीने और दोपहर का भोजन करने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़नी शुरू हुई, जबकि  शिक्षकों ने भी वही भोजन किया था। फिलहाल बच्चों की तबीयत स्थिर बताई जा रही है, हालांकि फूड पॉइजनिंग की असल वजह जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।

दंतेवाड़ा: आदि कर्मयोगी अभियान के लिए जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त, क्रियान्वयन होगा तेज

दंतेवाड़ा: आदि कर्मयोगी अभियान के लिए जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त, क्रियान्वयन होगा तेज आदि कर्मयोगी अभियान में दंतेवाड़ा जिला को मिली नोडल अधिकारी नियुक्ति, अभियान को मिलेगा नया प्रोत्साहन कलेक्टर द्वारा आदि पर्व सेवा के रूपरेखा के संबंध में अधिकारियों को दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश आदि कर्मयोगी अभियान का मूल उद्देश्य जनजातीय गांवों में विजन निर्माण एवं परिवर्तनकारी प्रक्रिया, मूलभूत सेवा प्रदाय को उत्कृष्ट बनाने के लिए नोडल अधिकारी गंभीरता से दायित्वों का निर्वहन करें-कलेक्टर दुदावत इसके अंतर्गत आदि सेवा पर्व 17 सितंबर से 02 अक्टूबर तक चलेगा दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ शासन, आदिम जाति विकास विभाग, अनुसूचित जाति विकास विभाग पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक विकास विभाग के द्वारा सभी ग्रामों में आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत कलस्टर का आयोजन कर शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं को प्रत्येक ग्राम के जन तक पहुंचाना है। ज्ञात हो कि अभियान के अतंर्गत  आदिसेवा पर्व/पखवाड़ा (17 सितंबर से 02 अक्टूबर) जिले के सभी ग्राम पंचायतों में मनाया जायेगा। शासन के निर्देशानुसार जिला कार्यालय द्वारा अभियान के सुचारू क्रियान्वयन के तहत जिला स्तरीय नोडल अधिकारी नियुक्त कर दायित्व सौंपे गए है। इस संबंध में संपूर्ण अभियान की रूपरेखा निर्धारण के संबंध में कलेक्टर कुणाल दुदावत द्वारा आज जिला पंचायत सभाकक्ष में महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया था। बैठक में अभियान पर प्रकाश डालते हुए कलेक्टर ने कहा कि जनजातीय गांवों में विजन निर्माण एवं परिवर्तनकारी प्रक्रिया है जो जनजातीय समुदायों को अपनी आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने और विकास की दिशा में एक स्थायी मार्ग निर्धारित करने में सक्षम बनाती है। इसमें सामूहिक लक्ष्यों की पहचान करने, स्थानीय चुनौतियों का समाधान करने और प्रगति के लिए पारंपरिक ज्ञान का लाभ उठाने हेतु सहभागी संवाद को बढ़ावा देना शामिल है। इसके तहत ब्लॉक टीम का गठन, गांव के दौरे के लिए रोस्टर,सामुदायिक लामबंदी के लिए जिले के द्वारा सीएसओ की पहचान, सीएसओ द्वारा प्रवेश बिंदु गतिविधि,ट्रांसेक्ट वॉक की घोषणा, प्रारूप भरना, संसाधन मानचित्रण, विजन निर्माण तथा सीएसओ और ब्लॉक टीम द्वारा गांव की जरूरतों को सारणीबद्ध किये जाने जैसे व्यापक चरण शामिल रहेगें। नागरिक समाज संगठन (सीएसओ) इस प्रक्रिया में सुविधा प्रदाता के रूप में कार्य करके, समुदायों और बाहरी संसाधनों के बीच के अंतरालों को पाटकर और समावेशी नीतियों की हिमायत (एडवोकेसी) करके महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे। क्षमता निर्माण पहलों, जागरूकता सृजन और सहयोगात्मक साझेदारियों के माध्यम से, नागरिक समाज संगठन जनजातीय गाँवों को आत्मनिर्भर, समतामूलक और सांस्कृतिक रूप से निहित विकास योजनाओं की कल्पना करने और उन्हें साकार करने के लिए सशक्त बनाएंगे। गांव के मानचित्रण के तहत आवास,पानी,बिजली जैसे सेवाओं की उपलब्धता, सामुदायिक संस्थान,पहुंच सेवाएं,आजीविका के संसाधन को सम्मिलात किया जायेगा। जल संसाधन के तहत झरने, तालाब, नदी,नाला,कुएं,बावड़ी, बांध, सिंचाई में सुधार की संभावनाएं परिवर्तन को प्रमुखता से इंगित किये जायेगे। साथ ही आवास,जलापूर्ति,स्वास्थ्य एवं पोषण देखभाल, शिक्षा,सड़क एवं परिवहन, बिजली,सामुदायिक एवं धार्मिक सुविधाएं, संचार, बाजार और व्यापार जैसी मूलभूत सेवाओं में आगामी 5 वर्षों में महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी फीडबैक पर भी नोडल अधिकारियों के सुझाव भी शामिल होगें। इसके साथ ही कलेक्टर दुदावत ने कहा कि आदि कर्म योगी अभियान वस्तुतः स्थानीय समुदाय के परिकल्पना को आदर्श ग्राम के रूप में साकार करना है। क्योकि परिवर्तन में शहरी क्षेत्र में जो विकास के उच्च स्तर के मानक है भविष्य में वे ग्रामीण क्षेत्रों के मानक होगें। अतः इसके लिए नियुक्त नोडल अधिकारी द्वारा ग्राम पंचायतों में जाकर दिये गए विकास के बिंदुओं की गहन जांच पड़ताल करके प्रारूप को भरे जायेगे। कुल मिलाकर यह व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने की कोशिश है ताकि दूरस्थ क्षेत्रों में सेवा प्रदाय सेवाओं को उत्कृष्ट बनाया जा सके। बैठक के दौरान अपर कलेक्टर राजेश पात्रे, आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त राजीव नाग सहित जिला प्रमुख अधिकारी उपस्थित थे।

बीएसएफ का बड़ा ऑपरेशन: नक्सली नागेश का विशाल स्मारक जमींदोज

कांकेर कांकेर जिले में नक्सल मुक्त भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में 47 बटालियन बीएसएफ पखांजूर के जवानों ने एक और बड़ी कार्रवाई की है. जवानों ने भारी बारिश और दुर्गम रास्तों की चुनौती के बीच परतापुर थाना क्षेत्र के गांव वाट्टेकल व परालमस्पी के घने जंगलों में नक्सलियों के बनाए गए लगभग 14 फीट ऊंचे स्मारक को ध्वस्त कर दिया गया है. जानकारी के अनुसार, 47 बटालियन कमांडेंट विजेंद्र नाथ गंगोली के निर्देश पर विशेष ऑपरेशन की योजना बनाई गई थी. 12 जुलाई 2025 की रात को विभिन्न टीमें वालेर नदी और कठिन नालों को पार करते हुए अति नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पहुंची. गश्त के दौरान जवानों को मृत नक्सली नागेश का बनाया स्मारक मिला, जिसे मौके पर ही उखाड़कर नष्ट कर दिया गया. गौरतलब है कि नक्सली अपने मारे गए साथियों की याद में जगह-जगह स्मारक खड़े करते हैं. इन्हीं स्मारकों के जरिए वे ग्रामीणों पर प्रभाव जमाने और अपनी विचारधारा फैलाने की कोशिश करते हैं.

रायपुर : पीएम सूर्य घर योजना: सूरज की रोशनी से रोशन हुए घर, बिजली बिल शून्य

रायपुर ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई “पीएम सूर्य घर योजना” से प्रदेश के लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। योजना के अंतर्गत घरों की छत पर रूफटॉप सोलर पैनल लगने से अब लोग न केवल अपनी बिजली की जरूरतें पूरी कर रहे हैं, बल्कि ऊर्जा उत्पादक भी बन रहे हैं। मुंगेली जिले के विकासखण्ड पथरिया के सरगॉव ग्राम निवासी श्री लक्की पाड़े इसका उदाहरण बने हैं। उन्होंने योजना का लाभ उठाकर अपने घर पर 3 किलोवॉट का सोलर पैनल स्थापित किया। इससे उनका बिजली बिल शून्य हो गया। श्री पाड़े ने बताया कि पहले हर माह बिजली बिल की चिंता रहती थी, लेकिन अब सूरज की रोशनी से घर रोशन हो रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और प्रशासन का आभार व्यक्त किया। विद्युत विभाग के अधिकारियों ने बताया कि योजना में उपभोक्ताओं को केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये और राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा आसान किश्तों में बैंक फाइनेंस और कम ब्याज दर पर ऋण की सुविधा भी उपलब्ध है। योजना से न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिल रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। प्रदेश में इस योजना का तेजी से विस्तार हो रहा है और लोग ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

रायपुर : पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना: सूरज की रोशनी से आत्मनिर्भरता की राह पर बाबा साहू

रायपुर रायगढ़ निवासी बाबा साहू की कहानी सिर्फ एक घर को रोशन करने की नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के जरिए आत्मनिर्भरता और हरित भविष्य की एक मिसाल है। अगस्त 2025 में बाबा साहू ने अपने घर की छत पर 5 किलोवाट का सोलर प्लांट स्थापित करके इसकी शुरुआत की। बाबा साहू ने बताया कि सरकारी बैंक से उन्हें लोन की सुविधा आसानी से मिल गई और छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी ने कुछ ही दिनों में प्लांट का संचालन शुरू कर दिया। इस सरल और पारदर्शी प्रक्रिया ने योजना पर उनका भरोसा और भी मजबूत किया। आज उनके सोलर प्लांट से प्रतिदिन 20-25 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है, जिससे उनके मासिक बिजली बिल में 80-90 प्रतिशत तक की भारी कमी आई है। बाबा साहू ने बताया कि सोलर प्लांट रख-रखाव बहुत कम है। वे बताते हैं कि यह योजना सिर्फ बिजली बिल कम करने का साधन नहीं है, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का एक सशक्त माध्यम भी है। बाबा साहू शहरवासियों से कहते हैं कि हर परिवार को अपनी छत को ऊर्जा उत्पादन का साधन बनाना चाहिए, ताकि वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनें, बल्कि एक हरित और सशक्त भविष्य के निर्माण में भी योगदान दे सकें।

अम्बेडकर अस्पताल के सर्जरी विभाग में विदेशी युवती का सफल उपचार, मरीज ने जताई कृतज्ञता

रायपुर: अम्बेडकर अस्पताल में जनरल सर्जरी विभाग ने विदेशी युवती का सफल ऑपरेशन किया अम्बेडकर अस्पताल के सर्जरी विभाग में विदेशी युवती का सफल उपचार, मरीज ने जताई कृतज्ञता रायपुर के अम्बेडकर अस्पताल में एक और विदेशी युवती का सफल ऑपरेशन, डॉक्टरों की प्रशंसा 20 वर्षीय युवती के ब्रेस्ट के बेनाइन फाइब्रो एपिथीलियल ट्यूमर की सफल सर्जरी ईस्ट अफ़्रीका के देश रवांडा की रहने वाली है मरीज इससे पहले लाइटलेम्बा, क्रिसेंट (दक्षिण अफ्रीका) की युवती का हो चुका है सफल उपचार रायपुर प्रदेश का सबसे बड़ा पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय एवं इससे संबद्ध डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय लगातार अपनी उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाओं से न केवल प्रदेश और देश बल्कि विदेशों से आए मरीजों का भी भरोसा जीत रहा है। अनुभवी डॉक्टरों की टीम एवं उपचार प्राप्त करने की सरलतम प्रक्रिया के कारण यह अस्पताल सर्वाधिक विश्वसनीय संस्थान के रूप में अपनी पहचान व्यापक स्तर पर दर्ज कर चुका है। इसी क्रम में हाल ही में अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग में रवांडा (ईस्ट अफ़्रीका) की 20 वर्षीय युवती के लेफ्ट ब्रेस्ट के बेनाइन फाइब्रो एपिथीलियल ट्यूमर का सफल ऑपरेशन किया गया। जनरल सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू सिंह के नेतृत्व में हुए इस ऑपरेशन की विशेषता यह रही कि ब्रेस्ट के ट्यूमर को निकालने के बाद मरीज के भावी जीवन, विशेषकर मातृत्व अवस्था पर इस सर्जरी का कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।  डॉ. मंजू सिंह के अनुसार वर्तमान में युवती पूरी तरह ठीक है और उसे अस्पताल से छुट्टी भी दी जा रही है। ऑपरेशन के संदर्भ में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि एक 20 वर्षीय विदेशी युवती लेफ्ट ब्रेस्ट में दर्द की समस्या के साथ अस्पताल के ब्रेस्ट क्लिनिक में आई थी। जहां पर जांच के बाद पता चला कि उसके ब्रेस्ट में बेनाइन फाइब्रो एपिथेलियल ट्यूमर है। मरीज की बायोप्सी हुई। उसके बाद ब्रेस्ट की कॉस्मेसिस (Cosmesis) मेंटेन करते हुए ऑपरेशन किया गया ।  ब्रेस्ट के ट्यूमर एवं उसके आसपास के टिश्यू को हटाते हुए वाईड लोकल एक्सीजन किया गया। इस बात का ध्यान रखा गया कि ब्रेस्ट के शेप और साइज में कोई अंतर नहीं आये। साथ ही साथ सर्जरी के बाद निशान (scar) भी दिखाई नहीं दे।  पं. नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय के डीन डॉ. विवेक चौधरी के कहा है कि चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल के लिए यह गर्व की बात है कि यहाँ न केवल देश बल्कि विदेश से भी मरीज उपचार हेतु आ रहे हैं और स्वस्थ होकर लौट रहे हैं। जनरल सर्जरी विभाग द्वारा युवती का सफल उपचार हमारी चिकित्सा टीम की दक्षता, निष्ठा और समर्पण का प्रमाण है। मैं पूरी टीम को इस सफलता के लिए बधाई देता हूँ और विश्वास दिलाता हूँ कि हमारा संस्थान आगे भी इसी तरह उत्कृष्ट चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करता रहेगा। अम्बेडकर अस्पताल के सर्जरी विभाग की इन उपलब्धियों ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी अस्पतालों की सेवाएँ न केवल सुलभ और किफायती हैं बल्कि उच्चस्तरीय गुणवत्तापरक भी हैं। यही कारण है कि अब विदेशी मरीज भी यहाँ उपचार के लिए आ रहे हैं। अम्बेडकर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर ने जानकारी देते हुए कहा है कि अम्बेडकर अस्पताल के जनरल सर्जरी विभाग की ओपीडी में ब्रेस्ट क्लीनिक का संचालन नियमित तौर पर किया जा रहा है। यहां पर प्रतिमाह 300 से 400 ब्रेस्ट से संबंधित समस्याओं के केस महिला डॉक्टरों के द्वारा देखे जाते हैं। आवश्यकतानुसार जरूरत पड़ने पर ऑपरेशन भी किया जाता है। वर्तमान में यहां जनरल सर्जरी विभाग में ब्रेस्ट की रीडक्शन सर्जरी भी की जा रही है जिसमें स्तनों के असामान्य आकार को ऑपरेशन के जरिए सामान्य स्थिति में लाया जाता है।  मरीज का ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. मंजू सिंह के साथ डॉ. अमित अग्रवाल, डॉ. मनीष साहू, डॉ. कृतिका एवं डाॅ. तपिश, एनेस्थीसिया से डॉ. प्रतिभा शाह एवं डॉ. मंजुलता टंडन एवं अन्य शामिल रहे।  गौरतलब है कि इससे पहले भी जनरल सर्जरी विभाग में दक्षिण अफ्रीका की एक युवती का सफल उपचार किया जा चुका है।

हर मां और बच्चा सुरक्षित: बाढ़ राहत में मान सरकार का मानवीय चेहरा

पंजाब  दशकों के बाद, पंजाब एक बार फिर से बाढ़ जैसी भयानक त्रासदी से जूझ रहा है जिसने पंजाब के लोगों का जीवन तहस नहस कर दिया है। इस मुश्किल घड़ी में, जहां मान सरकार अपने लोगों के साथ एक परिवार की तरह कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है और उनको जरूरत की हर चीज उपलब्ध करा रही है, वहीं महिलाओं की बुनियादी ज़रूरतों को भी पूरा करने में मान सरकार ने कोई कसर नहीं छोड़ी है और गर्भवती महिलाओं का भी ख़ास ख्याल रखा है। मान सरकार ने इन महिलाओं की देखभाल के लिए कई ज़रूरी निर्देश भी दिए हैं। आप पार्टी की युवा और महिला विंग ने भी बाढ़ प्रभावित इलाकों – नाभा, पठानकोट, गुरदासपुर और कई अन्य ज़िलों में राहत कार्य तेज़ कर दिए है। कार्यकर्ताओं ने गांव-गांव जाकर राहत सामग्री, राशन पहुंचाया और ख़ास तौर पर महिलाओं और बच्चों की ज़रूरतों का ध्यान रखा। इसके अलावा, फ़िरोज़पुर और फाज़िल्का के राहत शिविरों में महिलाओं को सैनिटरी पैड और मच्छरदानियां भी बांटी गईं। बाढ़ प्रभावित जिलों में तैनात 11,103 से अधिक आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर दवाइयाँ उपलब्ध करा रही हैं और जल एवं वेक्टर जनित बीमारियों के बारे में जागरूकता बढ़ा रही हैं। वे गर्भवती महिलाओं की ट्रैकिंग और देखभाल को भी प्राथमिकता दे रही हैं और यह सुनिश्चित कर रही हैं कि नियमित टीकाकरण मे कोई रुकावट ना आए । मान सरकार ने बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों और गर्भवती महिलाओं की सहायता के लिए लगभग 458 रैपिड रिस्पांस टीमें, 360 मोबाइल मेडिकल यूनिट और 424 एम्बुलेंस तैनात कीं और बोट एम्बुलेंस के ज़रिए प्रसव सुविधाएं प्रदान कीं। इतना ही नहीं, सवास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य की देखभाल के लिए कई चिकित्सा शिविर भी लगाए और महिलाओं के लिए विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई। इन शिविरों में प्रसव पूर्व जांच और दवाइयां भी उपलब्ध करावाई गई। गुरदासपुर में, अधिकारियों ने गर्भवती महिलाओं सहित गंभीर रूप से बीमार मरीजों को आपातकालीन स्थिति में निकालने के लिए विशेष रूप से बोट एम्बुलेंस और एक हेलीकॉप्टर तैनात किया है। इन प्रयासों से आठ गर्भवती महिलाओं को बचाया गया है, जिनमें से एक महिला ने बोट पर ही चिकित्सकीय देखरेख में सुरक्षित डिलीवरी की और स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को बचाव कार्यों के लिए सक्रिय किया एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को बचाव कार्यों के लिए सक्रिय किया गया। सतलुज नदी के पास भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा पर बाढ़ प्रभावित सीमावर्ती गांवों के निवासियों के लिए स्वास्थ्य विभाग आशा की किरण बनकर उभरा है। सिविल सर्जन डॉ. राजविंदर कौर ने बताया कि पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने विभाग को बाढ़ पीड़ितों को हर संभव सहायता प्रदान करने, खासकर संकटग्रस्त गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित निकालने और डिलीवरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इन आदेशों का पालन करते हुए, स्वास्थ्य विभाग ने टेंडी वाला से मंजीत कौर और कालू वाला से मनप्रीत कौर को सफलतापूर्वक बचाया और उन्हें सिविल अस्पताल में भर्ती कराया, जहां उन्होंने सुरक्षित रूप से अपने बच्चों को जन्म दिया। गर्भवती महिलाओं के लिए 108 एम्बुलेंस सेवा निःशुल्क उपलब्ध करवाई गई। सैनिटरी नैपकिन और प्रसूति देखभाल पर काम किया इस चुनौतीपूर्ण समय में स्वास्थ्य विभाग के विशेष चिकित्सा शिविरों ने महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की हैं और प्रभावित परिवारों को हौंसला दिया है। अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक, स्वास्थ्य विभाग इस संकट में समुदाय के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहा है और उनका साथ दिया है। इसलिए, आप सरकार की ये पहल स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि उन्होंने महिलाओं की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान दिया है और सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पहलुओं – जैसे सैनिटरी नैपकिन, प्रसूति देखभाल – पर भी काम किया है, जो इस कठिन समय में महिलाओं के लिए बेहद ज़रूरी हैं। सतलुज नदी के पास के गांवों में चिन्हित 45 गर्भवती महिलाओं में से, पिछले सप्ताह चार डिलिवरियां हुई तीन सरकारी अस्पतालों में और एक निजी पैनल में।