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दिव्यांग कल्याण परिषद ने विधायक को सौंपा 10 सूत्रीय मांग पत्र, पेंशन बढ़ाने की मांग

दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य,10 सूत्रीय मांगों का सौपा मांग पत्र,दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन 600 से बढ़ा कर 5 हजार कराये,सरकार तक भेजे हमारी मांगे,आज जनसुनवाई में आये नागरिको की विधायक ने सुनी समस्याए आष्टा मध्य प्रदेश के आष्टा में दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य आज विधायक गोपालसिंह इंजीनियर द्वारा प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में पहुचे । दिव्यांग जनों ने 10 सूत्रीय मांग पत्र विधायक को सौपा एवं उनकी मांगों को शासन तक पहुचने एवं उन मांगो को पूर्ण कराने की मांग की । सौपे गये मांग पत्र में मांग की गई कि अभी दिव्यांजनो को 600₹ पेंशन मिलती है सरकार उसे बढ़ा कर 5 हजार करे । दिव्यांग जनों को एवं आये अन्य  ग्रामीणोंजनों को विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने भरोसा दिया कि उनकी समस्या को जल्द हल कर जो मांग शासन स्तर की है उसे वे शासन तक पहुचायेंगे । आज जनसुनवाई में कई ग्रामो से ग्रामीण विधायक कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में  पहुचे । स्मरण रहे प्रत्येक बुधवार को आष्टा विधायक अपने कार्यालय में सुबाह 10 बजे से जनता की समस्याओं को सुनने,उनेह हल करवाने के लिये जनसुनवाई करते है । आज बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यालय में उपस्तिथ रह कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने जनता की समस्याओं को सुना एवं उनकी समस्याओं को हल करने के सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिये । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर जो की हर बुधवार को अपने कार्यालय में जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत उपस्तिथ रहते है । आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र से नागरिक जनसुनवाई में पहुचे एवं अपनी अपनी पीड़ा से विधायक को अवगत कराया एवं आवेदन दिये। जनता से प्राप्त आवेदनों पर विधायक ने कहा की आपका जन सेवक होने के नाते आपकी समस्याओं को सुनना, हल करना मेरा धर्म है। आज आये आवेदनों को तत्काल सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ग्रामीणों की समस्याओं का समय सीमा में तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिये । आज जनसुनवाई में कई विभागों के 44 आवेदन प्राप्त हुए उन्हें निराकरण हेतु भेजे गये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्यालय आये सभी नागरिको को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं का जल्द निराकरण होगा,जो मांग शासन स्तर की है उनेह वे शासन तक पहुचायेंगे। मीडिया प्रभारी सुशील संचेती ने जानकारी देते हुए बताया की आज जनसुनवाई में दिव्यांजनो की दस सूत्रीय मांगों के साथ घाटे वाले बाबा स्थल पर चबूतरा एवं टीन शेड निर्माण कराने,किसान सम्मन निधि अप्राप्त होने की शिकायत,मकान का पट्टा दिलाने,ग्राम टिंगम टेकरी मांडा गुराडिया तहसील जावर में मकान का पट्टा दिलाने,करंट लगने पर आर्थिक सहायता प्रदाय हेतु,स्पेशल मोबाइल एवं दिव्यांगों के लिए छड़ी प्रदाय हेतु मांग पत्र,दुपाड़िया से मुंदीखेड़ी तक रोड एवं डीपी हेतु आवेदन,अज्ञात वाहन से टक्कर मारने पर सहायता राशि दिलाने,काजीपुरा वार्ड क्रमांक 9 आष्टा में बाउंड्री वॉल एवं तीन पहिया वाहन दिलाने,ग्राम पंचायत अरनिया जोहरी में वाधयन्त्र हेतु राशि स्वीकृत करने, इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन हेतु आवेदन,आर्थिक सहायता की मांग,प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम क़िस्त प्रदाय हेतु मांग सहित अन्य 44 आवेदन प्राप्त हुए। सभी आई शिकायतों एवं आवेदनों को सम्बंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देश दिये है । विभागों की आई समस्याओं को लेकर मौके से ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को आई समस्याओं के निराकरण करने के निर्देश दिये,कुछ आवेदन निराकरण हेतु सम्बंधित विभागों को भेजे गये ।

यात्रियों पर नई पाबंदी: अब रेलवे स्टेशन पर भी लागू होंगे एयरपोर्ट रूल्स, भारी सामान ले जाना पड़ेगा महंगा

 लखनऊ क्या आपने कभी सोचा था कि रेलवे स्टेशन पर भी एयरपोर्ट जैसी सख्ती देखने को मिलेगी? अब यह हकीकत बनने जा रही है. भारतीय रेलवे यात्रियों के लगेज को लेकर नए नियम लागू करने की तैयारी में है. पहले भी वजन और साइज को लेकर नियम मौजूद थे, लेकिन उन्हें उतनी सख्ती से लागू नहीं किया जाता था. अब हालात बदलने वाले हैं. स्टेशन पर प्रवेश से पहले यात्रियों को अपने बैग का वजन इलेक्ट्रॉनिक मशीन पर कराना होगा. अगर बैग तय सीमा से ज्यादा भारी निकला या साइज बहुत बड़ा हुआ—तो सीधा अतिरिक्त चार्ज या जुर्माना देना पड़ेगा. किन स्टेशनों से होगी शुरुआत? रेलवे ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उत्तर रेलवे और उत्तर मध्य रेलवे के कुछ बड़े स्टेशनों को चुना है.     लखनऊ चारबाग     प्रयागराज जंक्शन     बनारस     कानपुर सेंट्रल     अलीगढ़     मिर्जापुर     गोविंदपुरी     इटावा इन जगहों पर इलेक्ट्रॉनिक लगेज मशीनें लगाई जा रही हैं. नियम साफ है- प्लेटफॉर्म पर वही यात्री जाएंगे जिनके बैग सीमा के अंदर होंगे. चलिए नियमों को आसान भाषा में समझते हैं: बेसिक नियम: हर बैग पर यात्री का नाम और पता साफ लिखा होना चाहिए. बैग मजबूती से पैक होना चाहिए, वरना रेलवे जिम्मेदारी से बच सकता है. अगर चाहते हैं कि लगेज उसी ट्रेन से जाए, तो डिपार्चर से कम से कम 30 मिनट पहले बुकिंग ऑफिस में जमा करना होगा. मुफ्त अलाउंस: हर क्लास के हिसाब से सामान की मुफ्त सीमा तय है. 5–12 साल के बच्चों को आधा अलाउंस मिलता है. ज्यादा वजन पर सामान्य रेट से 1.5 गुना चार्ज लगेगा. अगर बैग बिना बुकिंग पकड़ा गया, तो 6 गुना जुर्माना देना पड़ेगा (न्यूनतम ₹50). भारी या बड़े सामान: 100 किलो से ज्यादा या तय साइज़ से बड़ा सामान “बल्की” कहलाएगा. ऐसे सामान पर डबल रेट का सरचार्ज लगेगा. इसे सिर्फ ब्रेक वैन में भेजा जा सकता है. मना किए गए सामान: विस्फोटक, ज्वलनशील पदार्थ, गैस सिलेंडर, बदबूदार या खतरनाक चीजें बिल्कुल मना हैं. पर्सनल लगेज: ट्रंक या सूटकेस का माप 100x60x25 सेमी से ज्यादा नहीं होना चाहिए. AC 3-टियर और चेयर कार में यह सीमा और भी कम है. बिजनेस का सामान “पर्सनल लगेज” के नाम पर नहीं ले जा सकते. ऑक्सीजन सिलेंडर: मरीज मेडिकल सर्टिफिकेट के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर मुफ्त ले जा सकते हैं. चोरी या नुकसान: चोरी होने पर FIR फॉर्म भरकर तुरंत शिकायत की जा सकती है. अगर सामान पहले से डिक्लेयर नहीं किया गया, तो रेलवे की जिम्मेदारी सिर्फ ₹100/किलो तक होगी. पालतू जानवर: कुत्तों को ब्रेक वैन या तय नियमों के हिसाब से ले जाया जा सकता है. AC फर्स्ट क्लास में तभी ले जाएंगे, जब बाकी यात्री राजी हों. गलत पाए जाने पर 6 गुना पेनल्टी. अतिरिक्त वजन: सीमा से ज्यादा लेकिन बुकिंग के साथ 1.5 गुना रेट. बिना बुकिंग पकड़े जाने पर 6 गुना रेट. साइकिल और स्कूटर: इन पर फ्री अलाउंस नहीं है. इन्हें अलग से बुक कर चार्ज देना होगा. भारतीय रेलवे अब सफर को और अनुशासित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. यानी अगर आप ट्रेन पकड़ने जा रहे हैं, तो सिर्फ टिकट ही नहीं, बैग का वजन और साइज भी आपके पासपोर्ट की तरह चेक होगा.

BPSC ASO Exam 2025: 10 सितंबर को प्रीलिम्स, देखें पूरा शेड्यूल

पटना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने सहायक अनुभाग अधिकारी के पद हेतु प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा 2025 की तारीख घोषित कर दी है। आयोग के अनुसार, यह परीक्षा राज्य के 11 जिलों में स्थित विभिन्न परीक्षा केन्द्रों पर आयोजित की जाएगी। परीक्षा केंद्रों की विस्तृत सूची उम्मीदवारों को उनके एडमिट कार्ड में उपलब्ध कराई जाएगी। 10 सितंबर को होगी प्रारंभिक परीक्षा बीपीएससी सहायक अनुभाग पदाधिकारी (ASO) प्रारंभिक परीक्षा 2025 का आयोजन 10 सितंबर 2025 (बुधवार) को किया जाएगा। यह परीक्षा सामान्य ज्ञान (वस्तुनिष्ठ प्रकार) विषय पर आधारित होगी, जो दोपहर 12:00 बजे से अपराह्न 2:15 बजे तक चलेगी। यानी कुल परीक्षा अवधि 2 घंटे 15 मिनट की होगी। जल्द जारी होंगे एडमिट कार्ड परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड जल्द ही बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जारी किए जाएंगे। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा केंद्र पर परीक्षा समय से कम से कम एक घंटा पहले पहुंचें, ताकि समय पर आवश्यक जांच प्रक्रिया पूरी की जा सके। उम्मीदवारों के लिए यह अनिवार्य है कि वे परीक्षा में शामिल होते समय अपने साथ एक वैध फोटो पहचान पत्र (जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि) अवश्य लाएं। इसके साथ ही, परीक्षा केंद्र में किसी भी प्रकार की इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जैसे मोबाइल फोन, स्मार्ट वॉच, कैलकुलेटर आदि ले जाने की कड़ाई से मनाही है। कुल 41 रिक्त पदों के लिए भर्ती इस भर्ती अभियान का उद्देश्य बिहार लोक सेवा आयोग में सहायक अनुभाग पदाधिकारी के कुल 41 रिक्त पदों को भरना है। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 29 मई से 23 जून 2025 तक आयोग की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर आयोजित की गई थी। इतना मिलेगा वेतन चयन प्रक्रिया के अंतर्गत सफल उम्मीदवारों को वेतन स्तर-7 के अंतर्गत रखा जाएगा, जिसमें उन्हें प्रतिमाह ₹44,900 से ₹1,42,400 तक का वेतन प्रदान किया जाएगा। बीपीएससी एएसओ एडमिट कार्ड 2025: डाउनलोड करने के चरण     सबसे पहले बिहार लोक सेवा आयोग की आधिकारिक वेबसाइट bpsc.bihar.gov.in पर जाएं।     होमपेज पर दिए गए "ASO Admit Card 2025" लिंक पर क्लिक करें।     अब अपनी लॉगिन डिटेल्स (यूजरनेम और पासवर्ड) दर्ज करें और सबमिट करें।     स्क्रीन पर आपका एडमिट कार्ड दिखाई देगा, उसे ध्यानपूर्वक जांचें और डाउनलोड करें।     भविष्य में उपयोग के लिए उसका प्रिंटआउट निकालकर सुरक्षित रखें।

फलोद्यान बगिया विकास में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया विशेष उत्साह

एक बगिया मां के नाम परियोजना, MPSEDC ने किया ऐप का निर्माण फलोद्यान बगिया विकास में स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने दिखाया विशेष उत्साह 34 हजार से अधिक महिलाओं ने कराया ऐप पर रजिस्ट्रेशन, निजी भूमि पर विकसित की जाएगी बगिया भोपाल स्व सहायता समूह की महिलाओं को समृद्ध बनाने के लिए प्रदेश सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। नवाचारों के माध्यम से महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा महात्मा गांधी नरेगा अंतर्गत प्रदेश में "एक बगिया मां के नाम" परियोजना शुरू की गई है। इसके अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं की निजी भूमि पर फलोद्यान की बगिया लगाई जाएगी। फलोद्यान की बगिया लगाने को लेकर समूह की महिलाओं ने विशेष उत्साह का दिखाया है। प्रदेश में निर्धारित लक्ष्य से अधिक 34 हजार 84 महिलाओं ने एक बगिया मां के नाम ऐप पर पंजीयन कराया है। परियोजना के अंतर्गत सरकार हितग्राहियों को पौधे, खाद, गड्ढे खोदने के साथ ही पौधों की सुरक्षा के लिए कटीले तार की फेंसिंग और सिंचाई के लिए 50 हजार लीटर का जल कुंड बनाने के लिए राशि प्रदान कर रही है। योजनान्तर्गत प्रदेश में फलदार पौधे लगाने का कार्य भी शुरू हो गया है। MPSEDC ने किया ऐप का निर्माण एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने वाली स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का चयन एक बगिया मां के नाम ऐप से किया जा रहा है। ऐप का निर्माण मनरेगा परिषद द्वारा MPSEDC के माध्यम से कराया गया है। अन्य किसी माध्यम से हितग्राही का चयन नहीं किया जाएगा। चयनित महिला हितग्राही के नाम पर भूमि नहीं होने की दशा में उस महिला के पति-पिता-ससुर-पुत्र की भूमि पर उनकी सहमति के आधार पर पौधरोपण किया जा सकेगा। पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से किया जा रहा पौधरोपण प्रदेश में पहली बार अत्याधुनिक तकनीक से पौधरोपण का कार्य किया जा रहा है। इसके लिए सिपरी सॉफ्टवेयर की मदद ली जा रही है। इस सॉफ्टवेयर के माध्यम से पौधरोपण के लिए जमीन का चयन वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से किया गया है। जमीन चिन्हित होने के बाद सॉफ्टवेयर की मदद से ही भूमि का परीक्षण किया गया है। जलवायु के साथ ही किस जमीन पर कौन सा फलदार पौधा उपयोगी है, पौधा कब और किस समय लगाया जाएगा, पौधों की सिंचाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी कहाँ पर उपलब्ध है, यह सब वैज्ञानिक पद्धति (सिपरी सॉफ्टवेयर) के माध्यम से पता लगाया जा रहा है। जमीन के उपयोगी नहीं पाए जाने पर पौधरोपण का कार्य नहीं होगा। पौधरोपण का कार्य बेहतर ढंग से हो इसके लिए संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रदेश में 31 हजार 300 महिलाओं को मिलेगा परियोजना का लाभ “एक बगिया माँ के नाम’’ परियोजना अंतर्गत प्रदेश की 31 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को लाभ मिलेगा। इनकी निजी जमीन पर 30 लाख से अधिक फलदार पौधे लगाएं जाएंगे, जो समूह की महिलाओं की आर्थिक समृद्धि का आधार बनेंगे। हर एक ब्लॉक में 100 हितग्राहियों का किया जा रहा चयन एक बगिया मां के नाम परियोजना अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में न्यूनतम 100 हितग्राहियों का चयन किया जा रहा है। चयनित हुई समूह की पात्र महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण महिलाओं को वर्ष में दो बार दिया जाएगा। न्यूनतम 0.5, अधिकतम 1 एकड़ जमीन होना अनिवार्य एक बगिया मां के नाम परियोजना का लाभ लेने के लिए चयनित हुई समूह की महिला के पास बगिया लगाने के लिए भूमि की सीमा भी निर्धारित की गई है। चयनित महिला के पास न्यूनतम 0.5 या अधिकतम एक एकड़ जमीन होना अनिवार्य है। प्रति 25 एकड़ पर 1 'कृषि सखी' की होगी तैनाती फलोद्यान की बगिया लगाने के लिए चयनित हितग्राहियों की सहायता के लिए कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ये कृषि सखी हितग्राहियों को खाद, पानी, कीटों की रोकथाम, जैविक खाद, जैविक कीटनाशक तैयार करने और अंतरवर्तीय फसलों की खेती के बारे में जानकारी प्रदान करेंगी। प्रत्येक 25 एकड़ पर एक कृषि सखी की तैनाती की जाएगी। ड्रोन-सैटेलाइट इमेज और डैशबोर्ड से निगरानी पौधरोपण का कार्य सही ढंग से हो रहा है या नहीं, पौधे कहाँ लगे हैं, कहाँ नहीं लगे, इसकी ड्रोन-सैटेलाइट इमेज से बकायदा निगरानी भी की जाएगी। साथ ही पर्यवेक्षण के लिए अलग से एक डैशबोर्ड भी बनाया गया है। प्रदर्शन के आधार पर प्रथम 3 जिले, 10 जनपद पंचायत व 25 ग्राम पंचायतों को पुरस्कृत भी किया जाएगा। हितग्राहियों के चयन में टॉप 5 जिले एक बगिया मां के नाम परियोजना के लिए हितग्राहियों के चयन में प्रदेश के 5 जिले सिंगरौली, देवास, खंडवा, निवाड़ी और टीकमगढ़ अग्रणी हैं।  

चांदी खरीदने वालों के लिए खुशखबरी! अब मिलेगी हॉलमार्किंग की गारंटी, धोखाधड़ी से बचेंगे ग्राहक

भोपाल  सोने के बाद अब चांदी खरीदने वालों को भी हॉलमार्क का लाभ मिलने वाला है। एक सितंबर से देश भर के साथ ही चांदी के गहनों और बर्तनों पर सरकार हॉलमार्क लागू करने जा रही है, हालांकि प्रारंभ में इसे स्वैच्छिक तौर पर लागू किया जा रहा है। चांदी पर 6 डिजिट वाली एचयूआईडी हॉलमार्किंग लागू होगी। यानी अब हर चांदी पर सोने की तरह ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (bureau of indian standards) की मुहर (BIS Seal) होगी, जो शुद्धता और असलियत की गारंटी देगी। 900, 800, 835, 925, 970 और 990 जैसी 6 ग्रेड चांदी पर हॉलमार्किंग लागू की जाएगी। इससे ग्राहकों को सही दाम मिलेगा और ईमानदार व्यापारियों का विश्वास बढ़ेगा। गहनों की मजदूरी बढ़ेगी, तो गहने भी होंगे महंगे एमपी के सराफा कारोबारियों की मानें तो इससे गहनों की मजदूरी पर 30 फीसदी का इजाफा होगा। इससे वर्तमान में एक हजार रुपए की मिलने वाली पायल के दाम 1500 रुपए तक हो जाएंगे। ग्वालियर में सालाना चांदी का 500 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होता है। जाने क्या है 'हॉलमार्क' (What is Hallmark) हॉलमार्क एक सरकारी मान्यता प्राप्त प्रमाण है, जो धातु की शुद्धता बताता है। जैसे, सोने में 22 कैरेट या 18 कैरेट का हॉलमार्क होता है, वैसे ही अब चांदी पर भी एक खास निशान होगा, जो बताएगा कि उसमें चांदी की शुद्धता कितनी है। बीआईएस के तहत मान्यता प्राप्त अस्सेइंग और हॉलमार्किंग सेंटर में धातु की जांच के बाद यह मुहर लगाई जाती है। ग्राहकों को क्या फायदे? (Costumer Benefits) शुद्धता की गारंटी : हर हॉलमार्क चांदी पर बीआईएस का लोगो, शुद्धता का अंक और पंजीकरण नंबर। सही दाम : वजन और शुद्धता में धोखाधड़ी की संभावना कम। बेचने में आसानी : हॉलमार्क चांदी की पुनर्खरीद पर बेहतर रेट मिलेगा। व्यापारियों को क्या फायदे? साख में बढ़ोतरी – ग्राहकों का भरोसा मजबूत होगा। नकली बाजार पर रोक : मिलावटी चांदी बेचने वालों पर लगाम। बिक्री में वृद्धि : गुणवत्ता की गारंटी से ग्राहक वफादारी बढ़ेगी।

उपभोक्ता आयोग का काम प्रशंसनीय: 3.07 लाख से अधिक प्रकरण हुए निराकृत, 78 हजार का 90 दिन में निपटान

भोपाल  खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया है कि उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग में उपभोक्ताओं के आवेदन पर लगातार कार्यवाही की जा रही है। जून 2025 तक कुल 3 लाख 7 हजार 536 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। कुल प्राप्त प्रकरण संख्या 3 लाख 31 हजार 789 हैं। राजपूत ने बताया है कि निराकृत प्रकरणों में से 78 हजार 20 प्रकरणों का निराकरण 90 दिन में किया गया। उपभोक्त विवाद प्रतितोषण आयोग अंतर्गत जिला अनूपपुर में 475, अशोकनगर में 2365, बड़वानी 1093, बालाघाट 3571, बैतूल 2228, भिंड 6175, भोपाल क्रं-एक 19 हजार 498, भोपाल क्रं-2 4395, बुरहानपुर 1739, छतरपुर 6579, छिंदवाड़ा 6479, दमोह 5634, दतिया 5821, देवास 3313, धार 4337, डिंडोरी 676, गुना 10 हजार 865, ग्वालियर 23 हजार 210, हरदा 3014, इंदौर क्रं-1 में 27 हजार 916, इंदौर क्रं-2 में 5863, जबलपुर क्रं-1 में 15 हजार 464, जबलपुर क्रं-2 में 3566, झाबुआ 1288, कटनी 3781, खंडवा 6081, मंडला 4785, मंडलेश्वर 4063, मंदसौर 7954, मुरैना 9162, नर्मदापुरम 5597, नरसिंहपुर 2536, नीमच 1995, पन्ना 1585, रायसेन 1193, राजगढ़ 5050, रतलाम 3999, रीवा 11 हजार 904, सागर 9297, सतना 11 हजार 65, सीहोर 6565, सिवनी 4051, शहडोल 1801, शाजापुर 3190, श्योपुर 2258, शिवपुरी 11 हजार 84, सीधी 2172, टीकमगढ़ 3428, उज्जैन 12 हजार 537, उमरिया 485 और विदिशा में 4354 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है।  

शाही विरासत पर सुलगा विवाद: भोपाल में 15000 करोड़ की संपत्ति पर 20+ दावेदारों का दावा

भोपाल  शाही परिवार की संपत्ति का विवाद फिर से सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने MP हाई कोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी है। यह आदेश भोपाल के आखिरी नवाब हमीदुल्लाह खान की संपत्ति से जुड़ा है। नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान को 1962 में एकमात्र वारिस घोषित किया गया था। साजिदा सुल्तान, फिल्म अभिनेता सैफ अली खान की दादी हैं। अब नवाब के भाइयों और अन्य रिश्तेदारों के वंशज इस दावे का विरोध कर रहे हैं। नवाब ओबैदुल्लाह खान के वंशजों ने दी याचिका सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस पी एस नरसिम्हा और अतुल चन्दुरकर की बेंच ने 8 अगस्त को यह फैसला सुनाया। उन्होंने उमर फारूक अली और राशिद अली की याचिका पर नोटिस जारी किया। ये दोनों नवाब ओबैदुल्लाह खान के वंशज हैं। उनके वकील आदिल सिंह बोपराई ने बताया कि MP हाई कोर्ट ने 30 जून को फैसला सुनाया था। इसमें कहा गया था कि नवाब की संपत्ति का बंटवारा मुस्लिम पर्सनल लॉ के हिसाब से होना चाहिए। यह फैसला 'तलत फातिमा (रामपुर) केस' पर आधारित था। हालांकि, हाई कोर्ट ने मामले को फिर से विचार करने के लिए ट्रायल कोर्ट को भेज दिया। सुप्रीम कोर्ट में इसी फैसले को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने सैफ की फैमिली के पक्ष में दिया था फैसला 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने 'तलत फातिमा रामपुर केस' में फैसला दिया था कि शाही संपत्ति का बंटवारा पर्सनल लॉ के हिसाब से होना चाहिए। MP हाई कोर्ट ने 2000 के ट्रायल कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था। ट्रायल कोर्ट ने नवाब की बेटी साजिदा सुल्तान, उनके बेटे मंसूर अली खान (दिवंगत क्रिकेटर) और उनके कानूनी वारिसों (सैफ अली खान, सोहा अली खान, सबा सुल्तान और शर्मिला टैगोर) के अधिकारों को सही माना था। हाई कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट का फैसला 1997 के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर आधारित था, जिसे 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने पलट दिया था। और भी हैं इस मामले में पेंच इस संपत्ति विवाद में एक और पेच है। 2015 में सरकार ने आबिदा सुल्तान की संपत्ति को जब्त कर लिया था। आबिदा सुल्तान, हमीदुल्लाह खान की सबसे बड़ी बेटी थीं। वह पाकिस्तान चली गई थीं। भारत में उनकी संपत्ति को 'शत्रु संपत्ति' घोषित कर दिया गया है। जबलपुर के वकील राजेश कुमार पंचोली के अनुसार, आबिदा सुल्तान 1972 के मूल मामले में शामिल थीं। इस मामले में भोपाल की शाही संपत्ति के लिए 20 से अधिक दावेदार थे। रामपुर केस की चर्चा क्यों हो रही है? 2019 का रामपुर केस इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि इसमें कहा गया था कि सभी वारिसों को, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, संपत्ति में हिस्सा मिलना चाहिए। लेकिन पंचोली का कहना है कि यह मामला भोपाल पर पूरी तरह से लागू नहीं हो सकता। 1972 से नवाब की कई संपत्तियां, जो भोपाल, सीहोर और रायसेन में फैली हुई हैं, वो या तो बेची जा चुकी हैं या दूसरों के कब्जे में हैं। फिलहाल हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान किसी भी नई बिक्री या हस्तांतरण पर रोक लगा दी है।  

श्रम स्टाट रेटिंग की परिकल्पना, सुरक्षा प्रावधानों के अनुपालन को मिलेगी मजबूती

श्रम स्टाट रेटिंग की परिकल्पना के साथ श्रम सुरक्षा प्रावधानों का होगा बेहतर परिपालन श्रम स्टाट रेटिंग की परिकल्पना, सुरक्षा प्रावधानों के अनुपालन को मिलेगी मजबूती कर्मचारी सुरक्षा पर फोकस, श्रम स्टाट रेटिंग से बढ़ेगा नियमों का पालन भोपाल राज्य के उद्योग तथा व्यवसायों के लिए श्रम कानूनों के प्रमुख प्रावधानों एवं औद्योगिक स्वास्थ्य व सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के परिपालन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन करने वाले प्रबंधन हेतु श्रम स्टार रेटिंग की परिकल्पना की गई है। गत दिवस राज्य के उद्योग तथा व्यवसायों के प्रतिष्ठित संगठनों तथा प्रबंधकों से वीडियों कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस संबंध में चर्चा की गयी। श्रम विभाग के सचिव रघुराम एम राजेन्द्रन ने इस अवसर पर कहा कि सभी के सहयोग से श्रम सुरक्षा प्रावधानों का बेहतर परिपालन किया जायेगा। चर्चा के प्रारंभ में सचिव श्रम राजेन्द्रन द्वारा प्रस्ताव की प्रारंभिक रूप रेखा प्रस्तुत की और श्रम आयुक्त ने इसकी आवश्यकता और उपयोगिता पर प्रकाश डाला। श्रम स्टार रेटिंग की प्रस्तुति अपर श्रम आयुक्त प्रभात दुबे द्वारा की गयी। इस दौरान विभिन्न संगठनों तथा प्रबंधकों द्वारा एकमत से इस प्रस्ताव की सराहना करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किये। कहा गया कि सेल्फ असेसमेंट की प्रणाली में स्व-प्रबंधन को प्रस्तावित वेटेज अधिक प्रतीत होता है। यह प्रणाली अधिक युक्तियुक्त होना चाहिये। महिला सहभागिता के संबंध में उद्योग-वार पृथक-पृथक मापदण्ड होना चाहिए। कई उद्योगों में महिलाएँ अधिक और कहीं अत्यन्त न्यून हैं अतः इसके अनुरूप वेटेज होना चाहिए। दिव्यांग श्रमिकों की नियुक्ति पर भी वेटेज हो। रेटिंग के घटक उद्योगों की श्रेणी (वृहद/मध्यम/लघु/सूक्ष्म/खतरनाक/ गैर खतरनाक आदि), श्रमिक संख्या तथा उत्पादों की प्रकृति आदि के अनुसार तय होना चाहिए। वेटेज भी उद्योग/ व्यवसाय की प्रकृति के अनुसार हो। लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों हेतु यह अनिवार्य नहीं होना चाहिए। स्वतंत्र इम्पेनल्ड एजेंसियों का चयन उद्योगों तथा विभाग की सहमति से तय किया जाना उचित होगा। उच्च रेटिंग के आधार पर शासकीय क्रय में प्राथमिकता तथा शासन से सब्सिडी और अन्य इन्सेंटिव मिलना चाहिए। श्रम कानूनों के किन प्रावधानों को सम्मिलित किया जायेगा, यह स्पष्ट होना चाहिए। अन्य प्रस्तावित मापदण्डों में भी सुस्पष्ट विवरण हो। रेटिंग जारी होने के बाद प्रभावशील होने की समय-सीमा नियत हो और रेटिंग कितनी समय अवधि में होगी इसकी फ्रीक्वेंसी तय हो। समस्त प्रणाली पारदर्शी हो तथा ऑन लाइन हो और अंतिम रूप दिये जाने के पूर्व नियमित रूप से स्टेक होल्डर्स से चर्चा की जावे। सचिव श्रम ने प्राप्त सुझावों पर विचार करने तथा नियमित चर्चा किये जाने हेतु आश्वस्त करते हुए स्पष्ट किया कि इसके पश्चात ही अंतिम योजना जारी की जायेगी। सुझाव e mail id – commlab@nic.in पर भेजे जा सकते हैं। साथ ही व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का भी सुझाव दिया। उन्होंने योजना प्रारंभ करने आगामी 02 अक्टूबर, 2025 का लक्ष्य प्रस्तावित किया। उन्होंने जिलों में होने वाले युवा संगम, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PMVBRY) तथा दुर्घटना रहित दिवस संबंधी योजनाओं की जानकारी देते हुए इनसे जुडने का आग्रह किया। उन्होंने Reducing the compliance burden, Decriminalization and Ease of Doing Business के प्रयासों की जानकारी देने और अन्य कार्यक्रम, योजनाओं की जानकारी ग्रुप पर देने का सुझाव दिया। श्रम आयुक्त् द्वारा सभी से ठेका श्रमिकों को निर्धारित वेतन, समय पर वेतन भुगतान तथा अन्य हितलाभ जैसे ईएसआइ तथा पीएफ आदि प्रदान करने का अनुरोध किया। उन्होंने ‘’एक पेड मां के नाम’’अभियान में भागीदारी का भी आग्रह किया। चर्चा में सचिव श्रम रघुराज एम. राजेन्द्रन, श्रम आयुक्त श्रीमती रजनी सिंह, विभागीय अधिकारी तथा राज्य के विभिन्न क्षेत्र के वृहद, मध्यम तथा लघु उद्योगों के विभिन्न प्रतिष्ठित औद्योगिक संगठन जैसे एसोसिएशन ऑफ इण्डस्ट्रीज, पीथमपुर, इंदौर, देवास, मालनपुर, ग्वालियर,सी.आइ.आइ., मध्यप्रदेश एसोसिएशन ऑफ टेक्सटाइल मिल्स आदि के पदाधिकारी तथा विभिन्न उद्योग तथा व्यवसायों के वरिष्ठ प्रबंधक शामिल हुए।  

स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह का निर्देश: सरकारी स्कूलों की पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण हो उच्च गुणवत्ता का

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि शैक्षणिक सत्र वर्ष 2026-27 में पाठ्य पुस्तक निगम द्वारा मुद्रित की जाने वाली किताबें उच्च गुणवत्ता की हों। उन्होंने कहा कि मुद्रण कार्य से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं तय समय-सीमा में पूरी की जायें। उन्होंने कहा कि पाठ्य पुस्तकों का वितरण शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही पूरा किया जाये। यह व्यवस्था सुनिश्चित की जाये। स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह  मंत्रालय में पाठ्य पुस्तक निगम की गवर्निंग बॉडी की बैठक ली। बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता, वित्त, माध्यमिक‍ शिक्षा मंडल के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। बैठक में पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी विनय निगम ने बताया कि शैक्षणिक सत्र 2026-27 में करीब 9 करोड़ पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण होगा। इसके लिये ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के तहत निविदा की प्रक्रिया होगी। निगम शैक्षणिक सत्र 2026-27 में 10 मार्च 2026 तक सभी पाठ्य पुस्तकों का मुद्रण कार्य पूरा कर लेगा। बैठक में बताया गया कि इस वर्ष अप्रैल 2025 में शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकों का वितरण शुरू किया गया था। इस वर्ष अब तक लगभग सभी पाठ्य पुस्तकों का वितरण विद्यार्थियों को किया जा चुका है। बैठक में बताया गया कि निगम ने कुछ सरकारी स्कूलों को खेल-कूद मैदान, अतिरिक्त कक्ष और नवीन कक्ष निर्माण के लिये अनुदान राशि मंजूर की है। किताबों की पांडुलिपि डेढ़ माह में मिलेगी बैठक में भी बताया गया कि राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा अगले शैक्षणिक सत्र के लिये एनसीईआरटी और एससीईआरटी से किताबों की पांडुलिपि सितंबर 2025 अंत तक पाठ्य पुस्तक निगम को उपलब्ध करा दी जायेंगी। मध्यप्रदेश, देश के उन चुनिंदा राज्यों में है, जहां बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें सत्र शुरू होते ही वितरित की गयीं।   स्थानीय भाषा में सामग्री विकास स्कूल शिक्षा विभाग ने 8 स्थानीय भाषाओं- बुन्देली, बघेली, मालवी, निवाड़ी, गोंडी, भीली, बारेली और कोरकू भाषाओं में सामग्री का विकास किया है। विभाग का यह प्रयास बच्चों में स्थानीय भाषा के प्रति लगाव के उद्देश्य से किया गया है।

दांतों की बीमारियों से परेशान MP: एम्स सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट

भोपाल  एम्स भोपाल ने मध्यप्रदेश में दांत और मुंह की बीमारियों पर अब तक का सबसे बड़ा राज्यव्यापी सर्वेक्षण पूरा किया है। 2002-03 के बाद पहली बार इतने बड़े स्तर पर मौखिक स्वास्थ्य की स्थिति दर्ज की गई है। इस रिपोर्ट को हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साउथ-ईस्ट एशिया जर्नल आफ पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित किया है। यह सर्वेक्षण एम्स भोपाल के दंत विभाग और रीजनल ट्रेनिंग सेंटर फार ओरल हेल्थ प्रमोशन एंड डेंटल पब्लिक हेल्थ के नोडल अधिकारी डा. अभिनव सिंह के नेतृत्व में किया गया। इसमें मध्यप्रदेश शासन के स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय ने सहयोग दिया। अध्ययन में प्रदेश के 41 जिलों के शहरी और ग्रामीण इलाकों से करीब 48 हजार लोगों को शामिल किया गया। नतीजे चौंकाने वाले सर्वे के मुताबिक, प्रदेश में दांतों में कीड़े लगना 40 से 70 प्रतिशत लोगों में पाया गया। मसूड़ों की बीमारी 50 से 87 प्रतिशत और मुंह के कैंसर दो से 17 प्रतिशत तक देखी गईं। सबसे गंभीर स्थिति यह रही कि 70 प्रतिशत से अधिक बुजुर्ग और लगभग 50 फीसद 5 साल के बच्चे दांतों की सड़न यानी कैविटी से जूझ रहे हैं। देश का पहला मौखिक स्वास्थ्य डेटा बैंक एम्स भोपाल ने केवल सर्वे ही नहीं किया, बल्कि इसके आधार पर देश का पहला मौखिक स्वास्थ्य डेटा बैंक भी बनाया है। डब्ल्यूएचओ माडल पर आधारित इस डेटा बैंक में जिलेवार मौखिक स्वास्थ्य की स्थिति और सेवाओं का ब्योरा दर्ज है। सरकार और नीति-निर्माता अब इस आधार पर नई योजनाएं बना सकेंगे। तकनीक से आई पारदर्शिता सर्वेक्षण को पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए मोबाइल एप और जीपीएस तकनीक का उपयोग किया गया। साथ ही एम्स भोपाल ने अपने ट्रेनिंग सेंटर के माध्यम से डॉक्टरों, शिक्षकों और काउंसलरों को विशेष प्रशिक्षण देने की भी शुरुआत की है, ताकि रोकथाम और उपचार की सुविधाएं सीधे समाज तक पहुंच सकें। विशेषज्ञों की राय डॉ. अभिनव सिंह का कहना है कि अब जब मौखिक स्वास्थ्य की वास्तविक तस्वीर सामने आ चुकी है तो जनजागरुकता बढ़ाने, बचाव और उपचार के लिए ठोस कदम उठाए जा सकते हैं। यह सर्वे मध्य प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश में मौखिक स्वास्थ्य को नई दिशा देगा।     दांतों में कीड़े (कैविटी) – 40% से 70%     मसूड़ों की बीमारी (गम डिजीज) – 50% से 87%     मुंह के कैंसर से पहले की अवस्थाएं – 2% से 17%     बुजुर्गों में दांतों की सड़न – 70% से अधिक     5 साल के बच्चों में कैविटी – लगभग 50%