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BJP की हरियाणा रणनीति: अक्टूबर में होगा मंत्रियों का रिव्यू, वन स्टेट-वन इलेक्शन पर फोकस

चंडीगढ़  हरियाणा में विधानसभा चुनाव में हारी 42 सीटों पर अगले चुनाव में कमल खिलाने के लिए भाजपा पूरी रणनीति के साथ जुट गई है। मिशन-2029 की तैयारियों को धार देने के लिए हर क्षेत्र के लिए अलग रणनीति तैयार की जा रही है। संगठनात्मक मजबूती, जनता से सीधा संवाद और हारी हुई सीटों पर रणनीति, इन्हीं तीन बिंदुओं पर मिशन-2029 की नींव रखी जा रही है। भाजपा नेताओं ने मंगलवार को चंडीगढ़ और पंचकूला में एक के बाद एक कई बैठकें की। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मोहनलाल बडौली और संगठन मंत्री फणीन्द्रनाथ शर्मा ने अलग-अलग बैठकों की कमान संभाली। प्रदेश महामंत्री सुरेंद्र पुनिया, डॉ. अर्चना गुप्ता और कृष्ण कुमार बेदी भी इन बैठकों में शामिल हुए। सबसे पहले सुबह मुख्यमंत्री आवास पर जिला अध्यक्षों, जिला प्रभारियों और पार्टी पदाधिकारियों की पहली बैठक हुई। इस बैठक में हाल ही में संपन्न जिला कार्यकारिणी की बैठकों की समीक्षा की गई और संगठन व सरकार के बीच बेहतर तालमेल की रणनीति पर चर्चा हुई। हरियाणा भाजपा के प्रदेश महामंत्री व कैबिनेट मंत्री कृष्ण कुमार बेदी, डॉ. अर्चना गुप्ता और सुरेंद्र पूनिया की मौजूदगी में हुई बैठक में तय किया गया कि जनता तक सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं को और प्रभावी ढंग से पहुंचाया जाए, ताकि पार्टी की पकड़ जमीनी स्तर पर और मजबूत हो सके। हारे हुए नेताओं को भी बुलाया इसके बाद भाजपा ने उन 42 नेताओं को बुलाया जो 2024 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की टिकट पर हार चुके थे। इनमें पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, पूर्व कैबिनेट मंत्री कंवरपाल गुर्जर और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता जैसे दिग्गज भी शामिल रहे। इस बैठक का मकसद मिशन-2029 के तहत उन सीटों पर विशेष रणनीति बनाना है, जहां भाजपा को पिछली बार झटका लगा था। मुख्यमंत्री और संगठन पदाधिकारियों ने इन नेताओं से फीडबैक लिया और चुनावी समीकरणों पर गहन मंथन किया। पार्टी का मानना है कि यदि इन सीटों पर पुख्ता तैयारी की जाए तो आने वाले चुनावों में भाजपा का ग्राफ दोबारा ऊपर उठ सकता है। भाजपा इन सीटों पर शेडो प्रभारी नियुक्त कर चुकी है। दोपहर तीन बजे मुख्यमंत्री नायब सैनी ने विधायकों से मुलाकात कर उनके क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों पर चर्चा की। इसके बाद शाम को मंत्रियों के साथ बैठक में विभागीय कार्यों, प्राथमिकताओं और आगामी योजनाओं की समीक्षा की गई। छठी बैठक पंचकूला में मन की बात कार्यक्रम की हुई, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष और महामंत्री शामिल हुए। बड़े लक्ष्य को साधने की तैयारी राजनीतिक हलकों में भाजपा की इन बैठकों को बेहद अहम माना जा रहा है। एक ओर भाजपा अपने घर को दुरुस्त करने में जुटी है तो दूसरी ओर विपक्षी दलों की नजर भी इन बैठकों पर टिकी हुई है। यह स्पष्ट है कि हरियाणा की राजनीति में आने वाले दिनों में भाजपा अपनी रणनीति और जमीनी पकड़ को और मजबूत करने के लिए आक्रामक तेवर अपनाएगी। भाजपा की तैयारी बड़े लक्ष्य को साधने की है। 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा विधानसभा चुनाव में हारे भाजपा प्रत्याशियों की बैठक के बाद पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने बताया कि 17 सितंबर से दो अक्टूबर तक सेवा पखवाड़ा मनाया जाएगा। जिन विधानसभा सीटों पर हार हुई हैं, उनमें कोई प्रतिनिधि न रहने के कारण विकास में कमी न आ जाए, इसके लिए बैठक में कार्ययोजना बनाई गई। उन्होंने ऐसी बैठकों की पहल के लिए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को साधुवाद दिया है। हारी हुई सीटों पर विशेष ध्यान बीजेपी ने अपनी पिछली हार से सबक लेते हुए उन 42 विधानसभा सीटों पर विशेष ध्यान देना शुरू कर दिया है। इन सीटों का जिम्मा पहले ही 12 मंत्रियों और 30 विधायकों को सौंपा जा चुका है। बैठक में मुख्यमंत्री ने इन प्रभारियों से जमीनी स्तर का फीडबैक लिया और उन्हें निर्देश दिए कि वे हारे हुए प्रत्याशियों के साथ मिलकर संगठन को मजबूत करें। पार्टी की रणनीति स्पष्ट है: हर महीने इन सीटों की समीक्षा की जाएगी, ताकि 2029 तक पूरी तैयारी के साथ चुनाव लड़ा जा सके। पार्टी का लक्ष्य केवल हारी हुई सीटों को जीतना ही नहीं, बल्कि जीती हुई सीटों पर भी अपनी पकड़ मजबूत करना है। इसलिए, हर सीट के लिए अलग रणनीति तैयार की जा रही है। पार्टी ऐसे नए चेहरे भी तैयार करेगी जो विरोधी दलों के उम्मीदवारों को कड़ी टक्कर दे सकें। मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड और संगठनात्मक मजबूती संगठनात्मक स्तर पर भी बीजेपी ने कमर कस ली है। प्रदेश अध्यक्ष मोहन लाल बड़ौली ने बताया कि जिला कार्यकारिणी की बैठकें हो चुकी हैं और अब 23, 24 और 25 अगस्त को 377 मंडलों की बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में विकास कार्यों और मुख्यमंत्री की घोषणाओं पर भी चर्चा होगी। पार्टी ने सभी मंत्रियों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड बनाने का भी फैसला किया है। इस रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा अक्टूबर में की जाएगी, जब सरकार को एक साल पूरा हो जाएगा। इस समीक्षा का उद्देश्य यह देखना होगा कि किस मंत्री के विभाग में जनहित के कितने काम हुए हैं और उनकी सक्रियता कितनी है। इससे पार्टी को न केवल सरकार की कार्यप्रणाली का आकलन करने में मदद मिलेगी, बल्कि यह भी तय हो पाएगा कि कौन से नेता जनता के बीच कितने प्रभावी हैं। 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की तैयारी केंद्र सरकार की 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की योजना के मद्देनजर, बीजेपी की यह तैयारी काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह रणनीति इस बात का संकेत देती है कि पार्टी हर परिस्थिति के लिए तैयार है, चाहे चुनाव कभी भी हों। संगठनात्मक स्तर पर कार्यकर्ताओं और नेताओं की ड्यूटी लगाकर और उनके रिपोर्ट कार्ड बनाकर, पार्टी अपनी पूरी मशीनरी को सक्रिय और जवाबदेह बनाना चाहती है। यह योजना न केवल हरियाणा में बीजेपी की स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगी कि पार्टी हर सीट पर जीत के लिए एक मजबूत और समन्वित रणनीति के साथ मैदान में उतरे।   

अब्बास अंसारी की विधायकी बहाल होने की संभावना, राजनीतिक हलचल तेज

 प्रयागराज मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अब्बास अंसारी की विधायकी बहाल हो सकती है। उत्तर प्रदेश की की मऊ सदर सीट पर अब उपचुनाव नहीं होगा। हेट स्पीच मामले में एमपी एमएलए कोर्ट मऊ के फैसले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। आपको बता दें कि हेट स्पीच मामले में एमपी एमएलए कोर्ट मऊ की ओर से सुनाई गई दो साल की सजा पर रोक की मांग करते हुए दाखिल क्रिमिनल रिवीजन को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इस फैसले के चलते अब्बास अंसारी की विधायकी अब बहाल हो जाएगी। तीन मार्च 2022 को दर्ज हुआ मुकदमा नफरती भाषण और चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन करने के मामले में अभियोजन के अनुसार एसआई गंगाराम बिंद की तहरीर पर शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज हुई। इसमें सदर विधायक अब्बास अंसारी और अन्य को आरोपी बनाया गया। आरोप था कि तीन मार्च 22 को विधानसभा चुनाव के दौरान सदर विधानसभा सीट से सुभासपा के प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ रहे अब्बास अंसारी ने नगर क्षेत्र के पहाड़पुर मैदान में जनसभा के दौरान कहा कि जनपद मऊ के प्रशासन को चुनाव के बाद रोक कर हिसाब किताब करने व इसके बाद सबक सिखाने की धमकी मंच से दी गई थी। यह है पूरा मामला विधानसभा चुनाव-2022 के अब्बास अंसारी पर सपा की सरकार बनने पर राज्य अधिकारियों को परिणाम भुगतने की धमकी देने और दो समुदायों में वैमनस्यता फैलाने का आरोप लगा था। इस मामले में मुकदमा दर्ज किया गया। एमपी/एमएलए कोर्ट ने अब्बास अंसारी को विभिन्न समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सेवक को चोट पहुंचाने की धमकी देने के अपराध का दोषी करार देते हुए दो साल कैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ अब्बास अंसारी ने विशेष अपर सत्र न्यायाधीश के समक्ष सजा को स्थगित करने के लिए प्रार्थना दाखिल किया था जिसे पांच जुलाई को खारिज कर दिया गया। इस आदेश के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।  

दंतेवाड़ा में 21 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 25.5 लाख का इनाम घोषित 13 शामिल

दंतेवाड़ा बस्तर में नक्सली संगठन को बड़ा झटका लगा है. लोन वर्राटू अभियान से प्रभावित होकर दंतेवाड़ा में 21 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है. 21 में से 13 नक्सलियों पर कुल 25 लाख 50 हजार का इनाम घोषित था. सभी आत्मसर्पित माओवादी अपने-अपने क्षेत्र में नक्सली बंद सप्ताह के दौरान रोड खोदना, पेड़ काटना, नक्सली बैनर, पोस्टर एवं पाम्प्लेट लगाने जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं.

यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश पर साधा निशाना

अखिलेश के समय आत्महत्या को मजबूर होते थे किसान, 86 लाख किसानों का योगी सरकार ने किया कर्जमाफ : कृषि मंत्री  – यूपी के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश पर साधा निशाना – बोले- सपा सरकार में न बोआई कर पाते थे किसान, न मिलता था न्यूनतम समर्थन मूल्य  – प्रदेश में खाद-यूरिया की कोई कमी नहीं, जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वालों के खिलाफ कसा जा रहा शिकंजा : शाही  – अनियमिता पाए जाने पर अबतक 1196 फुटकर विक्रेताओं के लाइसेंस किये गये निरस्त : कृषि मंत्री  – हाई प्राइज़ और टैगिंग करने वाले 132 थोक विक्रेताओं को नोटिस, 13 के लाइसेंस सस्पेंड और 4 के रद्द : कृषि मंत्री – खाद-यूरिया की कालाबाजारी करने वाले 93 लोगों के खिलाफ दर्ज किये गये हैं मुकदमे : सूर्य प्रताप शाही  – सीमावर्ती जनपदों में बढ़ाई गई है चौकसी, खाद-यूरिया के तस्करों और माफिया को बख्शा नहीं जाएगा : कृषि मंत्री  – रबी 2025-26 सीजन के लिए इस बार 138.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य : शाही  – प्रदेश में 15 लाख 91 हजार मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के फर्टिलाइजर उपलब्ध : कृषि मंत्री – खाद वितरण में अनियमिता पाए जाने पर सीतापुर, बलरामपुर और श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारियों को किया गया है निलंबित : शाही  लखनऊ  प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने  प्रेस वार्ता में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव को किसानों के बारे में बोलने का कोई हक नहीं है। उनके शासनकाल में किसान न तो समय से बोआई कर पाते थे और न ही उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की सुविधा मिलती थी। उस दौर में कर्ज में डूबे 86 लाख किसानों के 36 हजार करोड़ रुपये योगी सरकार को माफ करने पड़े। यदि सपा सरकार इतनी ही किसान हितैषी थी तो किसानों को आत्महत्या क्यों करनी पड़ी। कालाबाजारी और जमाखोरी पर सरकार कस रही शिकंजा कृषि मंत्री ने साफ कहा कि प्रदेश में खाद और यूरिया की कोई कमी नहीं है। दिक्कत केवल जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वाले तत्व पैदा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब तक 1196 फुटकर विक्रेताओं के लाइसेंस निरस्त किए जा चुके हैं। 132 थोक विक्रेताओं को नोटिस, 13 को निलंबन और 4 का लाइसेंस रद्द किया गया है। 93 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। सीतापुर, बलरामपुर और श्रावस्ती के जिला कृषि अधिकारियों को निलंबित किया गया है। वहीं, महाराजगंज और सिद्धार्थनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में बड़ी संख्या में ऐसे लोग पकड़े गए हैं जिन्होंने बिना जोत के ही दर्जनों बोरी यूरिया उठा ली। मंत्री ने चेतावनी दी कि ऐसे माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों को हर हाल में मिलेगी खाद सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि राज्य सरकार हर किसान को समय से खाद और बीज उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह सक्रिय है। फिलहाल प्रदेश में 15 लाख 91 हजार मीट्रिक टन विभिन्न प्रकार के फर्टिलाइजर उपलब्ध हैं। खरीफ 2024 में अब तक 32 लाख 7 हजार मीट्रिक टन खाद की बिक्री हुई है, जो पिछले साल की तुलना में साढ़े चार लाख मीट्रिक टन अधिक है। उन्होंने कहा कि 15 से ज्यादा जनपदों में 10 हजार मीट्रिक टन से ज्यादा यूरिया की खपत हुई है, फिर भी कहीं कमी नहीं होने दी गई। रबी सीजन के लिए सरकार ने किये हैं बड़े इंतजाम कृषि मंत्री ने बताया कि रबी 2025-26 सीजन के लिए इस बार 138.78 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती का लक्ष्य तय किया गया है। पिछले वर्ष 132.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी की बुवाई हुई थी। इस बार 4 लाख हेक्टेयर का विस्तार किया जाएगा। किसानों को 10 लाख क्विंटल अनुदानित बीज उपलब्ध कराया जाएगा। गेहूं, जौ, मक्का, राई और अलसी समेत दलहन-तिलहन के बीज किसानों तक पहुंचाए जाएंगे। किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए लगभग 12.80 लाख मिनी किट भी उपलब्ध कराई जाएगी। गन्ना किसानों को गन्ने के साथ ही दलहन-तिलहन की बोवाई के लिए प्रेरित किया जाएगा और उन्हें नि:शुल्क बीज उपलब्ध कराई जाएगी।  फर्टिलाइजर की मांग और सब्सिडी की दी जानकारी शाही ने कहा कि रबी सीजन के लिए 41 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 17 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 7.08 लाख मीट्रिक टन एनपी, 1.78 लाख मीट्रिक टन एसएसपी और 2 लाख मीट्रिक टन पोटाश की मांग भारत सरकार से की जाएगी। उन्होंने बताया कि यूरिया पर केंद्र सरकार 1908 रुपये प्रति बोरी तक सब्सिडी दे रही है और किसानों को मात्र 266.50 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है। अगर यह सब्सिडी न हो तो यूरिया की कीमत 2200 रुपये तक पड़ती। डीएपी, एनपी, एसएसपी और पोटाश पर भी सरकार बड़ी मात्रा में सब्सिडी दे रही है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। खाद्यान उत्पादन और जीएसवीए में रिकॉर्ड बढ़ोतरी कृषि मंत्री ने दावा किया कि समय से खाद, बेहतर बीज और सिंचाई सुविधाओं के कारण प्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन पिछले वर्षों की तुलना में करीब 200 लाख मीट्रिक टन बढ़ा है। इस समय यह 737 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है। गन्ना उत्पादन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। किसानों की बढ़ी पैदावार का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ा है। कृषि क्षेत्र से जुड़े जीएसवीए में जबरदस्त उछाल आया है, जो सपा शासन के दौरान दो लाख करोड़ रुपये था और अब बढ़कर सात लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। किसानों को किया आश्वस्त प्रेस वार्ता के अंत में सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि किसानों को किसी भी हाल में निराश नहीं होने दिया जाएगा। राज्य सरकार और प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना है। सीमावर्ती जिलों में खाद की तस्करी रोकने के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने दोहराया कि असली किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होगी, लेकिन जमाखोरी, कालाबाजारी और तस्करी करने वाले माफियाओं को हर हाल में सख्त कार्रवाई झेलनी पड़ेगी। पत्रकार वार्ता के दौरान राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख और कृषि विभाग के अधिकारीगण मौजूद रहे।  प्रेस वार्ता के महत्वपूर्ण बिंदु * प्रदेश में खरीफ 2024 का रकबा बढ़कर 105.93 लाख हेक्टेयर पहुंचा। * 2013-14 में खरीफ का रकबा 90.46 लाख हेक्टेयर था। * अब तक खरीफ रकबे में 15.47 … Read more

डीएम करेंगे प्रतिदिन समीक्षा, पिछड़ रहे जिलों पर रहेगा विशेष फोकस

16 सितम्बर से शुरू होगा विशेष अभियान, किसानों की 100% रजिस्ट्री का लक्ष्य डीएम करेंगे प्रतिदिन समीक्षा, पिछड़ रहे जिलों पर रहेगा विशेष फोकस किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में अब तक जनपद बिजनौर सबसे आगे  लखनऊ उत्तर प्रदेश में किसानों की फार्मर रजिस्ट्री को लेकर बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 16 सितम्बर, 2025 से प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान के तहत जिलाधिकारियों को फार्मर रजिस्ट्री की प्रगति पर प्रतिदिन समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि राजस्व अधिकारियों को मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) उपलब्ध कराई जाए, ताकि अधिकार अभिलेख में “मालिकों के नाम” को आधार के अनुसार सही किया जा सके।  फार्मर रजिस्ट्री में बिजनौर सबसे आगे  प्रदेश में कुल 2.88 करोड़ से अधिक किसानों की फार्मर रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया है। इसके सापेक्ष अब तक 50 प्रतिशत से अधिक लगभग 1.45 करोड़ किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है। किसानों की फार्मर रजिस्ट्री में अब तक बिजनौर जिला सबसे आगे है, जहां 58% से अधिक रजिस्ट्री पूर्ण हो चुकी है। इसके बाद हरदोई (57.84%), श्रावस्ती (57.47%), पीलीभीत (56.89%) और रामपुर (56.72%) टॉप-5 जिलों में शामिल हैं। जो किसान अभी तक रजिस्ट्री का हिस्सा नहीं हैं, उनके डाटा का फील्ड ऑफिसर्स द्वारा वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इसमें अमरोहा, आजमगढ़, बलरामपुर, एटा और जौनपुर जैसे जिलों में 100 प्रतिशत वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है। पीएम किसान योजना में 100% पंजीकरण पर जोर योगी सरकार ने जिलाधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के अंतर्गत किसानों का 100% पंजीकरण अगली किस्त जारी होने से पहले पूरा हो। इसके साथ ही सभी जिलाधिकारियों को व्यापक आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियां चलाने के भी निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को विशेष रूप से चेताया गया है कि पिछड़ रहे जिलों पर विशेष ध्यान दिया जाए और लक्ष्य प्राप्त करने के लिए अतिरिक्त प्रयास किए जाएं।

साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर

चीन, पाकिस्तान जैसे देशों की 'ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी' का डटकर मुकाबला करना बेहद जरूरी  -सीएम योगी के मार्गदर्शन में यूपीएसआईएफएस में जारी तीन दिनी सेमिनार के अंतिम दिन एक्सपर्ट्स ने कई प्रमुख विषयों पर पैनल डिस्कशन में लिया हिस्सा -साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उसे तोड़ने के लिए वैश्विक समन्वय और संगठित प्रयास की आवश्यकता जताया गया जोर -अपराधियों को सजा दिलाने तथा न्यायिक प्रक्रिया को सही तरीके से लागू कराने के लिए पारंपरिक तौर-तरीकों से साथ भविष्य आधारित तकनीक के प्रयोग पर हुआ मंथन -फॉरेंसिक साइंस में उन्नति, जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण व आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग जैसे विषयों और बदलते परिदश्यों को लेकर हुई सकारात्मक चर्चा लखनऊ  उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए प्रतिबद्ध योगी सरकार भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए प्रदेश के समक्ष उत्पन्न होने वाली चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रही है। इस दिशा में सीएम योगी के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेस (यूपीएसआईएफएस) में जारी तीन दिवसीय सेमिनार के तीसरे व अंतिम दिन बुधवार को कई अहम विषयों पर लेकर चर्चा हुई। इसमें साइबर सुरक्षा से लेकर फॉरेंसिक साइंस की उन्नति से लेकर कई विषयों पर पैनल डिस्कशन का आयोजन हुआ जिसमें जीनोम मैपिंग, जिनियोलॉजिकल डाटाबेस निर्माण, एआई व आंत्रप्रेन्योरशिप जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।              इसी कड़ी में साइबर क्राइम को लेकर एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देशों की ओर से भारत की साइबर सुरक्षा में सेंध लगाने की बढ़ती कोशिशों पर लगाम लगाने की जरूरत है। एक्सपर्ट्स ने माना कि चीन-पाकिस्तान की ऑफेंसिव स्ट्रैटेजी का सामना करने के लिए भारत को तेजी से सिक्योर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करनेकी जरूरत है। साइबर क्राइम की सबसे अहम कड़ी साइबर किल चेन को रक्तबीज बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। वहीं, फॉरेंसिक की फील्ड में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य आधारित तकनीकों के प्रयोग के जरिए पीड़ितों को न्याय व सहायता दिलाने के साथ दोषियों को दंड दिलाने पर जोर दिया गया। इस दौरान भारत समेत विश्व के कई मामलों का न केवल उल्लेख किया गया बल्कि, उससे मिलने वाली सीख पर भी चर्चा की गई।         छोटा सा परिवर्तन ला सकता है बहुत बड़ा इंपैक्ट बुधवार को पैनल डिस्कशन में हिस्सा लेते हुए महाराष्ट्र के प्रमुख सचिव ब्रजेश सिंह ने साइबर खतरे व पुलिसिंग के वैश्विक परिदृश्य को लेकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया में आज छोटा सा परिवर्तन बहुत बड़ा इंपैक्ट ला सकता है। हिज्बुल्ला पेजर अटैक इसका उदाहरण है। उन्होंने कहा कि साइबर किल चेन रक्तबीज की तरह है। भारत का सबसे बड़े पोर्ट यानी 3 महीने के लिए जीएनपीटी का पोर्ट ऑपरेट नहीं हो पाया एक मालवेयर के कारण। यह साइबर किल चेन का उदाहरण था। साइबर क्राइम इंफ्रास्ट्रक्चर को वैश्विक प्रयासों के जरिए ही तोड़ा जा सकता है। उन्होंने बताया कि लॉकबिट को तोड़ने के लिए 11 देशों की सुरक्षा एजेंसियों को साथ आकर काम करना पड़ा। यानी, साइबर क्राइम पर आकर ट्रेडिशनल पुलिसिंग के मेथड फेल हो जाते हैं। साइबर किल चेन मॉड्यूलर होता है। रेकॉन, वेपनाइजेशन, डिलीवरी व उत्पीड़न समेत 7 स्टेज इसका हिस्सा हैं।  संकट को रियल टाइम में मैप करना जरूरी ब्रजेश सिंह ने कहा कि संकट को रीयल टाइम में मैप करना जरूरी है। एक बार खतरा भांपने के बाद सबूतों को चिह्नित कर उन्हें सुरक्षित करने की जरूरत है। साइबर केसेस की भी चेन ऑफ कस्टडी भी फॉरेंसिक्स की तरह ही काम करती है। उन्होंने कहा कि अगले चरण में मनी कटऑफ जरूरी हो जाता है। इसमें वॉलेट, ब्लॉकचेन, डिजिटल मनी समेत जैसी सभी तथ्यों पर कार्य करने की जरूरत है। इसके अगले चरण में क्रिमिनल इंफ्रास्ट्रक्चर को सीज करने की जरूरत है। इसके अतिरिक्त, पोटेंशियल विक्टिम को अलर्ट करने व रिस्पॉन्स मैकेनिज्म पर कार्य करने की जरूरत है और उनकी मदद की जानी चाहिए। साइबर क्राइम पीड़ितों के लिए मदद, परामर्श और न्याय प्रदान करने की प्रक्रिया त्वरित होनी चाहिए। डिजिटल अरेस्ट समेत जितने भी साइबर फ्रॉड हैं उसे न केवल रोकना है बल्कि हर केस से सीख लेकर एक विस्तृत मैकेनिज्म तैयार करने की जरूरत है। उन्होंने आरबीआई का साइबर सिक्योरिटी फ्रेमवर्क की तारीफ करते हुए जोर देकर कहा कि भारत में डिजिटल सॉवरेनिटी में फोकस करना होगा, इससे केस सॉल्विंग में मदद मिलेगी। साथ ही, यह भी कहा कि हेल्थ डेटा कितना जरूरी है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि अगर हमें पता होता कि जिन्ना को तपेदिक है तो शायद स्थिति अलग होती। साइबर सिक्योरिटी भी कृषि की तरह है, इसे बाहर से इंपोर्ट नहीं किया जा सकता है, इसे भारत में ही विकसित करना होगा।  तेजी से बदल रही है हैकिंग की प्रक्रिया ऑस्ट्रेलिया के साइबर एक्सपर्ट रॉबी अब्राहम ने वर्चुअल माध्यम से पैनल डिस्कशन में जुड़कर हैकिंग की बदलती प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पहले प्रोग्रामिंग, स्क्रिप्टिंग, ओएस, नेटवर्किंग प्रोटेकॉल,शेलकोड राइटिंग जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होता था। उन्होंने विभिन्न मालवेयर की जानकारी देते हुए बताया कि फिलीपींस के एक स्टूडेंट ने आई लव यू वॉर्म बनाया था जिसे ईमेल से सर्कुलेट किया गया जिससे 8.7 बिलियन यूएस डॉलर का विश्व को नुकसान हुआ। इसी प्रकार, कन्फिगर वॉर्म के जरिए एक रूसी साइबर क्राइम ग्रुप ने 9 बिलियन यूएस डॉलर का नुकसान कुल 190 देशों में किया। क्रिप्टोलॉकर के पीछे रूसी साइबर क्राइम ग्रुप का हाथ होने की आशंका है जिसके जरिए 27 मिलियन बिटक्वॉइन की ग्लोबली कमाई की गई और इसको फिरौती के रूप में इस्तेमाल किया गया। पर आज के परिदृष्य में चीजें बदल चुकी हैं। उनके अनुसार, अब ई-मेल व सोशल मीडिया पर रैनसमवेयर और फिशिंगवेयर के जरिए साइबर हमले हो रहे हैं। इसके जरिए ब्राउजिंग डाटा, क्रिप्टो वॉलेट समेत कॉन्फिडेंशियल जानकारियों तक हैकर्स का एक्सेस बढ़ जाता है। अब हैकिंग के बजाए हैकर्स लॉगिंग पर फोकस करते हैं। इससे वह सिस्टम एक्सेस कर ऐसे क्रिडेंशियल्स को हासिल कर लेते हैं जो या तो सीधे तौर पर फायदा पहुंचाता है या उसे डार्क वेब पर बेच देते हैं। इसे रोकने के लिए रेगुलर सिक्योरिटी ट्रेनिंग, सभी अकाउंट को एमएफए इनेबल करना, एंटीवायरस का इस्तेमाल, ई-मेल और मैसेज के प्रति … Read more

सुदेश महतो की सुरक्षा पर सवाल, आजसू प्रतिनिधिमंडल ने जांच की रखी मांग, मुख्य सचिव और DGP को सौंपा ज्ञापन

रांची झारखंड में आजसू पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव तथा डीजीपी से मिला और ज्ञापन सौंपकर पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं पार्टी प्रमुख सुदेश महतो की हत्या की साजिश उग्रवादियों द्वारा बार- बार रचे जाने और उनका नाम हिटलिस्ट में रखने की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एन आई ए) से करवाने और उनकी सुरक्षा की नए सिरे से समीक्षा करने की मांग की। मुख्य सचिव अलका तिवारी तथा डीजीपी अनुराग गुप्ता ने आजसू प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि उग्रवादियों की हिटलिस्ट में सुदेश कुमार महतो का नाम बार- बार आने के संबंध में जांच करवाई जाएगी। आजसू पार्टी के शीर्ष नेताओं ने कहा कि इस बात का खुलासा होना चाहिए कि सुदेश महतो लगातार उग्रवादियों के निशाने पर क्यों हैं? प्रतिनिधिमंडल में पूर्व विधायक डॉ लंबोदर महतो, मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत, केंद्रीय उपाध्यक्ष द्वय प्रवीण प्रभाकर एवं हसन अंसारी शामिल थे। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता डॉ देवशरण भगत ने बताया कि बार बार उग्रवादियों द्वारा सुदेश महतो की हत्या की साजिश की जानकारी सामने आती रहती है, लेकिन इसके कारणों का अभी तक पुलिस द्वारा खुलासा नहीं किया गया है। इस संबंध में पार्टी नेताओं ने राज्य के मुख्य सचिव और डीजीपी से मिलकर स्मारपत्र सौंपा। डॉ भगत ने कहा कि विगत 5 अगस्त को गुमला जिले के कामडारा थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए पीएलएफआई उग्रवादी माटिर्न केरकेट्टा ने भी सुदेश महतो को अपनी हिटलिस्ट में रखा था और हमले की फिराक में था। उसने 2023 में अनगड़ा थाना क्षेत्र में बैठक कर सुदेश महतो की हत्या की योजना बनाई थी, जिसका खुलासा पुलिस ने किया था। उग्रवादियों ने अपने सदस्य देव सिंह मुंडा को योजना के तहत आजसू में शामिल भी करवाया था। हसन अंसारी ने कहा कि इससे पूर्व किसी राजनेता द्वारा सुदेश महतो की हत्या के लिए उग्रवादियों को 5 करोड़ रुपयों की सुपारी देने की बात सामने आ चुकी है। इस बात का खुलासा होना चाहिए कि बार -बार किस कारण से हत्या की साजिश रची जा रही है और इस साजिश के पीछे कौन है? आजसू नेताओं ने कहा कि 2005 में सिल्ली से पोगड़ा जाने के रास्ते में केन बम लगाने की साजिश सामने आई थी। 2013 में पीएलएफआई कमांडर जीदन गुड़यिा द्वारा किसी राजनेता से 5 करोड़ की सुपारी ली गई थी, जिसके बाद 27 एवं 28यू जनवरी 2014 को सिल्ली प्रतिभा महोत्सव में टाइम बम लगाकर हमले का प्रयास किया गया। इसमें विफल होने पर 26 फरवरी 2014 को जोन्हा में एक विवाह समारोह में हमले की योजना बनाई गई, जिसे पुलिस और ग्रामीणों की तत्परता से विफल किया गया। बाद में खुलासा हुआ कि एक उग्रवादी देव सिंह मुंडा को साजिश के तहत आजसू में शामिल भी करवाया गया था। आजसू नेताओं ने बताया कि पीएलएफआई द्वारा 2014 में पार्टी के केंद्रीय महासचिव स्व तिलेश्वर साहु की भी हत्या हजारीबाग जिले के बरही में कर दी गई थी। आजसू नेताओं ने डीजीपी से मांग की कि पूर्व मंत्री एवं पार्टी के प्रधान महासचिव रामचंद्र सहिस की भी सुरक्षा वापस ले ली गई है, जिसे तुरंत वापस किया जाए।  

निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट का प्रावधान

फुटवियर-लेदर नीति 2025 : निजी औद्योगिक पार्कों को मिलेगा बड़ा प्रोत्साहन निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट का प्रावधान 25 से 100 एकड़ तक के पार्कों को 45 करोड़ तक मिलेगी आर्थिक सहायता  100 एकड़ से बड़े औद्योगिक पार्कों को 80 करोड़ रुपए तक मिलेगा प्रोत्साहन  औद्योगिक पार्कों के जरिये हजारों युवाओं को मिलेंगे रोज़गार के अवसर  फुटवियर और लेदर सेक्टर को मिलेगी वैश्विक पहचान, यूपी बनेगा निवेश का नया केंद्र लखनऊ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने फुटवियर, लेदर और नॉन लेदर क्षेत्र विकास नीति-2025 के तहत सबसे ज़्यादा फोकस निजी औद्योगिक पार्कों पर किया है। इन पार्कों को निवेश बढ़ाने और रोज़गार सृजन के लिए बड़े पैमाने पर वित्तीय सहायता और टैक्स में छूट दी जाएगी। सरकार ने नीति में स्पष्ट किया है कि ऐसे पार्कों को विकसित करने वाले डेवलपर्स को 25 प्रतिशत पात्र पूंजी निवेश या अधिकतम राशि के रूप में वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह मदद पार्क के आकार के अनुसार होगी।  सरकार की मंशा, रोजगार के साथ मिले वैश्विक पहचान इस नीति के जरिये सरकार चाहती है कि राज्य में बड़े पैमाने पर निजी औद्योगिक पार्कों की स्थापना हो। ऐसे पार्कों के जरिये हजारों युवाओं को रोज़गार मिलेगा। फुटवियर और लेदर सेक्टर को वैश्विक पहचान मिलेगी। यूपी निवेश का नया केंद्र बनेगा। यह नीति अधिसूचना जारी होने की तिथि से 5 साल तक प्रभावी रहेगी। इसके तहत सभी नए प्रोजेक्ट, विस्तार या विविधीकरण करने वाले औद्योगिक उपक्रम वित्तीय प्रोत्साहनों के पात्र होंगे। पात्र औद्योगिक इकाइयों में कंपनी, साझेदारी, सोसाइटी, ट्रस्ट और निजी उपक्रम शामिल होंगे। कैसा होना चाहिए निजी औद्योगिक पार्क? ▪️न्यूनतम 25 एकड़ भूमि पर विकसित होना अनिवार्य। ▪️प्रत्येक पार्क में कम से कम 5 औद्योगिक इकाइयां होंगी। ▪️कोई भी इकाई 80% से अधिक भूमि का उपयोग नहीं कर सकेगी। ▪️कुल क्षेत्रफल का 25% हिस्सा हरियाली और सामान्य अवसंरचना के लिए सुरक्षित रखना होगा। ▪️25 एकड़ से 100 एकड़ तक के पार्कों का निर्माण 5 वर्षों में पूर्ण करना होगा।  ▪️100 एकड़ एवं इससे अधिक के पार्कों का निर्माण 6 वर्षों में पूर्ण करना होगा।  कितनी वित्तीय सहायता मिलेगी? ▪️25 से 100 एकड़ तक के पार्क : पात्र पूंजी निवेश का 25% या अधिकतम ₹45 करोड़। ▪️100 एकड़ से बड़े पार्क : पात्र पूंजी निवेश का 25% या अधिकतम ₹80 करोड़। ▪️सभी पार्क विकासकर्ताओं को 100% स्टाम्प शुल्क में छूट। किन मदों पर खर्च मान्य वित्तीय सहायता केवल बुनियादी ढांचा विकास पर खर्च की जा सकेगी। इसमें सड़क, स्ट्रीट लाइट, सीवरेज, ड्रेनेज, बाउंड्री वॉल, पावर सप्लाई, जल आपूर्ति, बैंकिंग सुविधाएं, वेयरहाउस, होटल, हॉस्पिटल, ट्रेड फेयर/डिस्प्ले सेंटर, ट्रांसपोर्ट सुविधा और स्किल डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट जैसे कार्य शामिल होंगे। किस पर नहीं मिलेगा लाभ? ▪️भूमि की खरीद लागत। ▪️ईंधन, वाहन, फर्नीचर, पुरानी मशीनरी। ▪️अन्य सेवा शुल्क।    

विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग

पटना  राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय भोजपुर में Blockchain Technology विषय पर 5 दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम का आयोजन विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ,बिहार सरकार के अंतर्गत संचालित गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज भोजपुर ,आरा  में  Blockchain Technology के विषय पर NIELIT Patna के सहयोग से निशुल्क 5 दिवसीय ट्रेनिंग प्रोग्राम 20 Aug- 26 Aug  तक आयोजित की जा रही है । यह कार्यक्रम ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल के द्वारा 4th सेमेस्टर के सीएसई एवं ईसीई के छात्रों के लिए आयोजित की जा रही है । इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य छात्रों के स्किल डेवलपमेंट को बढ़ाना है ताकि प्लेसमेंट के लिए अपने को बेहतर बना सके.

खरीफ 2025 के मौसम के लिए सहकारिता विभाग ने ऑनलाइन आमंत्रित किया है आवेदन

बिहार राज्य फसल सहायता योजना: 31 अक्टूबर तक करें आवेदन  खरीफ 2025 के मौसम के लिए सहकारिता विभाग ने ऑनलाइन आमंत्रित किया है आवेदन फसल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक क्षति होने पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मिलेगा  20 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मिलेगी सहायता राशि  नगर पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों के किसान भी इस योजना के लिए हैं पात्र   पटना राज्य सरकार के सहकारिता विभाग ने बिहार राज्य फसल सहायता योजना के तहत खरीफ 2025 के मौसम के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन 31 अक्टूबर, 2025 तक निःशुल्क किए जा सकते हैं। इस योजना के तहत फसल उत्पादन में 20 प्रतिशत तक क्षति होने पर 7,500 रुपये प्रति हेक्टेयर और 20 प्रतिशत से अधिक क्षति होने पर 10,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा। प्रति किसान अधिकतम 2 हेक्टेयर के लिए ही सहायता राशि दी जाएगी। रैयत, गैर-रैयत तथा आंशिक रूप से रैयत एवं गैर-रैयत श्रेणी के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। नगर पंचायत और नगर परिषद क्षेत्रों के किसान भी इसके लिए पात्र हैं। योजना के तहत अधिसूचित फसलों से संबंधित जिलों के नाम विभागीय वेबसाइट पर उपलब्ध हैं। इस योजना के बारे में बताते हुए सहकारिता विभाग के मंत्री डॉ॰ प्रेम कुमार ने कहा है कि बिहार राज्य फसल सहायता योजना बिहार सरकार की एक महत्वाकांक्षी, पूर्णतः निःशुल्क पहल है, जिसकी मदद से प्राकृतिक आपदाओं में क्षतिग्रस्त फसलों के लिए बिना किसी प्रीमियम के किसानों को वित्तीय सहारा प्रदान किया जाता है। सहकारिता विभाग इसे और अधिक पारदर्शी एवं सरल बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रहा है।  यह है आवेदन की प्रक्रिया कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर पंजीकृत किसान सीधे योजना के तहत आवेदन कर सकते हैं। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत कृषि विभाग द्वारा सत्यापित रैयत श्रेणी के किसान केवल रैयत श्रेणी अथवा आंशिक रूप से रैयत तथा गैर-रैयत श्रेणी में ही आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के समय किसानों को फसल और बुआई के रकबे की जानकारी देनी होगी। फसल कटाई के समय प्रयोग आधारित उपज दर के आंकड़ों के आधार पर योग्य ग्राम पंचायतों या अधिसूचित क्षेत्र इकाई का चयन किया जाएगा। इसके बाद चयनित पंचायतों के आवेदक किसानों को नियमानुसार दस्तावेज अपलोड करने होंगे। योजना के निर्देशों के अनुसार, चयनित ग्राम पंचायतों के आवेदक किसानों का सत्यापन होने के बाद उनके आधार-लिंक्ड बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि का भुगतान किया जाएगा। गलत या भ्रामक जानकारी देने पर आवेदन अस्वीकार कर दिए जाएंगे। इस संबंध में अधिक जानकारी सहकारिता विभाग की वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है।