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किसानों के लिए अहम खबर! ‘कृषक उपहार योजना’ में संशोधन, लाभार्थियों की नई सूची जारी

जयपुर राज्य सरकार ने किसानों को पारदर्शी और डिजिटल माध्यम से कृषि जिंसों की बिक्री हेतु प्रोत्साहित करने के लिए संचालित ‘कृषक उपहार योजना’ में संशोधन के प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की है। अब इस योजना का लाभ उन किसानों को ही मिलेगा जो ई-नाम पोर्टल के माध्यम से बिक्री करते हुए ई-पेमेंट (इलेक्ट्रॉनिक भुगतान) प्रणाली से भुगतान प्राप्त करते हैं।  मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को कृषि विपणन विभाग द्वारा भिजवाए गए प्रस्ताव के अनुसार अब उन्हीं किसानों को उपहार कूपन जारी किया जाएगा, जिनकी जिंसों की बिक्री ई-नाम पोर्टल पर दर्ज हुई हो और उसका भुगतान ई-पेमेंट के माध्यम से प्राप्त किया गया हो। योजना के वर्तमान स्वरूप में देखा जा रहा था कि ई-नाम पर कृषि जिंस के विक्रय पर्चियों पर जारी कूपन की तुलना में ई-पेमेंट पर जारी कूपन की संख्या काफी कम है। अब केवल ई-पेमेंट पर ही उपहार कूपन जारी किए जाने से ई-नाम पोर्टल पर बिक्री के साथ-साथ किसान और व्यापारी तत्काल एवं सुरक्षित डिजिटल लेन-देन के लिए प्रेरित होंगे।  संशोधित योजना में ई-पेमेंट से प्राप्त कृषि उपज विक्रय की प्रति 10 हजार रूपये की राशि एवं इसके गुणकों में उपहार कूपन ई-नाम सॉफ्टवेयर द्वारा जारी किए जा सकेंगे। प्रत्येक 6 माह में मंडी स्तर पर ड्रॉ निकालकर 50,000 रूपये का प्रथम पुरस्कार 30,000 रूपये का द्वितीय पुरस्कार और 20,000 रूपये का तृतीय पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

MP में बहन ने दिखाई भाई के लिए अपार मोहब्बत, दिया ऐसा उपहार जो बदल दे जिंदगी

जबलपुर रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर 14 वर्षीय बहन ने अपने पांच वर्षीय भाई को जीवनरक्षक स्टेमसेल का उपहार दिया है। दो साल की उम्र में उसका भाई सिकल सेल (अनुवांशिक रक्त विकार) जैसी घातक बीमारी की चपेट में आ गया था। नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चिकित्सकों ने नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा निवासी किशोरी का स्टेम सेल लेकर बोन मैरो ट्रांसप्लांट के माध्यम से मासूम को नई जिंदगी दी है। पूरा इलाज आयुष्मान योजना से निश्शुल्क किया गया। एफेरेसिस तकनीक के माध्यम से स्टेम सेल प्राप्त कर ट्रांसप्लांट बीएमटी यूनिट की प्रभारी डॉ. श्वेता पाठक ने बताया कि रोहन (परिवर्तित नाम) को दो वर्ष की उम्र में सिकल सेल की बीमारी की पुष्टि हुई थी और वह नियमित रूप से खून चढ़वाने के लिए अस्पताल में उपचाररत था। संस्थान में सुविधा प्रारंभ होते ही उसके बोन मैरो ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया शुरू की गई। रोहन के बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए उसकी बहन से स्टेम सेल मैचिंग की गई और एफेरेसिस तकनीक के माध्यम से स्टेम सेल प्राप्त कर ट्रांसप्लांट किया गया।   चिकित्सकों ने टीमवर्क से किया कार्य ट्रांसप्लांट में कालेज के डीन डॉ. नवनीत सक्सेना के नेतृत्व में चिकित्सकों ने टीम वर्क से कार्य किया। इसमें अधीक्षक डॉ. अरविंद शर्मा, उप अधीक्षक डॉ. ऋचा शर्मा, डॉ. लक्ष्मी सिंगौतिया सुपरिटेंडेंट, कैंसर अस्पताल, डॉ. मोनिका लाजरस (एचओडी पीडियाट्रिक्स) सहित नर्सिंग स्टाफ से पूनम, एलिजाबेथ, रिंकी का विशेष सहयोग रहा। बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट की ऐसी पड़ी नींव महत्वपूर्ण है कि इसी साल फरवरी में स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट (एससीआइ) के दूसरे फ्लोर पर करीब चार हजार वर्गफीट क्षेत्र में अत्याधुनिक बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट की शुरुआत हुई थी। इसमें 10 निजी वार्ड बनाए गए हैं जो कि पूरी तरह वातानुकूलित हैं और इस रोग से पीड़ित बच्चों को स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने की दिशा में एक सफल प्रयास की शुरुआत माना जाता है। यूनिट की प्रभारी डॉ. श्वेता पाठक ने इसको आकार-प्रकार देने में विशेष भूमिका का निर्वाह किया है। 

पीएम जनमन योजना में जनजातीय बसाहटों में बढ़ी आधारभूत सुविधाएं

सहरिया, बैगा, भारिया परिवारों को मिल रहा योजनाओं का सीधा लाभ भोपाल  जनजातीय बसाहटों को आधारभूत सुविधाओं से संपन्न बनाने और जनजातीय परिवारों में खुशियां लाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन को साकार करते हुए मध्यप्रदेश ने पीएम जनमन योजना में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में पीएम जनमन योजना में 5800 जनजातीय बसाहटों में रह रहे 2 लाख 62 हजार से ज्यादा सहरिया, बैगा और भारिया परिवारों को विभिन्न विभागों की योजनाओं का सीधा लाभ मिला है। आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान भारत, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि, राशन कार्ड देने में 100 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। वे हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ लेने में इन दस्तावेज का उपयोग कर रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, बहुउद्देशीय केंद्र, हर घर नल से जल, हर घर बिजली, सबको पोषण, सबको स्वास्थ्य, सबको शिक्षा, गांव-गांव मोबाइल नेटवर्क, वन धन विकास केंद्र बनाने जैसी परिवर्तनकारी योजनाओं को इन बसाहटों में क्रियान्वित किया जा रहा है। इसकी जिम्मेदारी योजनाओं से संबंधित विभागों को दी गई है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आई है। जनजातीय परिवारों को आवास सुविधा उपलब्ध कराने में शिवपुरी जिला न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश में आगे है। यहां 16 हजार से ज्यादा आवास बन चुके हैं। शहडोल में 10711, श्योपुर 7639, उमरिया में 6410, छिंदवाड़ा में 5479 मंडला में 5446 आवास बने हैं। अन्य जिलों में विभिन्न स्तरों पर तेजी से काम चल रहा है। सड़क सुविधा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 1570 बसाहटों में 2265 किमी सड़कें बनाने का लक्ष्य है। राष्ट्रीय ग्रामीण अधोसंरचना विकास ऐजेंसी को 269 किमी की 117 सड़कें बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। हाल में 739 किमी लंबाई की 377 सड़कों की स्वीकृति मिल गई है। इनके निर्माण के लिये टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा 17 जिलों में 125 बहुउद्देशीय केंद्रों के निर्माण का काम चल रहा है। सबसे ज्यादा 33 शिवपुरी और 24 श्योपुर में बन रहे हैं। हर घर नल से जल हर घर नल से जल पहुंचाने के लिए 4843 बसाहटों में रह रहे 12 लाख 30 हजार घरों में नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य है। अब तक 8,43,258 घरों में नल से जल पहुंच रहा है। शेष घरों में दिसंबर माह तक पहुंच जाएगा। सबको स्वास्थ्य सबको स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से 3132 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई गई हैं और 1268 में मोबाइल मेडिकल यूनिट संचालित हैं। इस प्रकार 4400 गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच गई हैं। मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से अब तक 4 लाख से अधिक रोगियों का परीक्षण किया गया है। विशेष रूप से टीबी और सिकल सेल की जांच की गई है। करीब 27000 रोगियों की फिजियोथैरेपी कराई गई। विद्युत सुविधा जनजातीय परिवारों को ग्रिड के माध्यम से हर घर बिजली देने में 24,800 घरों में विद्युत सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। दुर्गम क्षेत्रों में आफग्रिड के माध्यम से नवकरणीय ऊर्जा विभाग के सहयोग से 11 जरूरतमंद जिलों के 2060 गांवों में विद्युत सुविधा देने का काम तेजी से चल रहा है। सभी बसाहटों में पोषण देने के लिए 704 आंगनबाड़ी केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इनमें 628 बन गये हैं और शेष अगले दो महीनों में बन जायेंगे। इसके अलावा 76 नये आंगनवाड़ी केन्द्र खोलने का भी प्रस्ताव है। इन केन्द्रों में बच्चों के पोषण का स्तर लगातार मॉनिटर किया जा रहा है। सबको शिक्षा सबको शिक्षा सुविधा देने के लिए जिन जनजातीय बसाहटों के पास प्राथमिक शाला की सुविधा दी जा रही है। वर्तमान में 16 जिलों में 106 छात्रावास स्वीकृत किए गये हैं। मोबाइल सुविधाओं को सुदृढ़ बनाते हुए 15 जिला में उपयुक्त स्थान पर 4जी मोबाइल नेटवर्क दिया जा रहा है। टावर के लिये स्थान चिन्हित कर लिये गये हैं। इसके अलावा वन एवं तकनीकी शिक्षा विभागों द्वारा 11 जिलों में 83 वन-धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं। इससे 5000 जनजातीय हितग्राही जुड़े हैं। सभी को उद्यमिता जागरूकता कार्यक्रम और उद्यमिता विकास कार्यक्रम के अंतर्गत वन-विकास केंद्र का बिजनेस प्लान बनाने में प्रशिक्षण दिया गया है।  

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय बोले- दूरस्थ अंचलों तक बैंकिंग सेवाएं पहुँचाना सरकार की प्राथमिकता

ग्राम आरा, कुडे़केला और छिछली में शुरू हुई नई बैंक शाखाएं 23 ग्राम पंचायतों एवं 48 आश्रित ग्रामों के लगभग 44 हज़ार लोगों को मिलेगा लाभ रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राज्य और जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध कराना हमारी सरकार की प्राथमिकता है, ताकि किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को वित्तीय सेवाएं उनके ही गाँव में सुलभ हों। उन्होंने कहा कि बैंकिंग सेवाएं न केवल आर्थिक गतिविधियों को गति देती हैं, बल्कि शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन का भी आधार बनती हैं। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के बगिया ग्राम में मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय से वर्चुअल माध्यम से जशपुर विकासखंड के ग्राम आरा, पत्थलगांव विकासखंड के ग्राम कुडे़केला (घरजियाबथान) और बगीचा विकासखंड के ग्राम छिछली में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की नई शाखाओं का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के 12वें वार्षिक प्रतिवेदन का भी विमोचन किया। 44 हज़ार से अधिक ग्रामीण होंगे लाभान्वित मुख्यमंत्री साय ने कार्यकम को वर्चुअली संबोधित करते हुए  कहा कि जशपुर जिले में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के तीन नई शाखाओं के शुरू होने से 23 ग्राम पंचायतों और 48 आश्रित ग्रामों के लगभग 44 हज़ार लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। अब ग्रामीणों को बैंकिंग कार्यों के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, जिससे समय और धन की बचत होगी। अटल डिजिटल सुविधा केंद्र से ग्रामीणों को मिलेगी वित्तीय सेवाएं मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि जशपुर जिले की 268 पंचायतों में अटल डिजिटल सुविधा केंद्र शुरू किए गए हैं, जिनके माध्यम से अब तक लगभग 15 करोड़ रुपये का लेन-देन हो चुका है। आगामी पंचायत दिवस तक जिले की सभी पंचायतों में ये सुविधा केंद्र प्रारंभ करने की योजना है। इन केंद्रों से ग्रामीणों को उनके गाँव में ही बैंकिंग, बीमा और सरकारी योजनाओं से जुड़ी सेवाएं उपलब्ध होंगी। जशपुर जिले के ग्राम छिछली की सरपंच श्रीमती अनिमा मिंज, आरा के सरपंच श्री मनोज भगत और कुडे़केला के सरपंच श्रीमती शशिकांता पैंकरा ने कहा कि नई बैंक शाखाओं से अब उनके क्षेत्र के ग्रामीणों को सभी बैंकिंग सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध होंगी। ग्राम पंचायत आरा से वर्चुअली जुड़ी विधायक श्रीमती रायमुनी भगत  ने कहा कि बैंक खुलने से हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ सीधे बैंक के माध्यम से हितग्राहियों को मिलेगा। ग्राम कुडे़केला से वर्चुअली जुड़ी विधायक गोमती साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जनधन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इससे लोगों में वित्तीय जागरूकता बढ़ी है और अब 3 नए ग्रामीण बैंकों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के विकास में  गति आएगी। जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सालिक साय ने भी मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया। इन 3 नई शाखाओं के खुलने से जिले में छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक की कुल शाखाओं की संख्या बढ़कर 30 हो गई है। कैंप कार्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में माटीकला बोर्ड के अध्यक्ष श्री शंभूनाथ चक्रवर्ती, जिला पंचायत सदस्य वेद प्रकाश भगत, उपेन्द्र यादव,  सुनील गुप्ता, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार, छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के चेयरमैन विनोद अरोड़ा सहित तीनों ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधिगण और ग्रामीण वर्चुअल माध्यम से उपस्थित रहे।

निवेश मित्र नीतियों से हुई मप्र के निर्यात में 6% की बढ़ोतरी

अब तक का सबसे ज्यादा 66,218 करोड रुपए का हुआ निर्यात भोपाल मध्यप्रदेश ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में निर्यात में अपनी रेंकिंग में सुधार करते हुए अब तक का सबसे ज्यादा 66,218 करोड रुपए का निर्यात किया है। निर्यात में 6% की बढ़ोतरी हुई है जो फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया उत्पादों में निर्यात बढ़ने के फलस्वरूप हुई है। फेडेरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मर्केंडाइज एक्सपोर्ट में 66,218 करोड रुपए का योगदान है जबकि स्पेशल इकोनामिक जोन में सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों ने राज्य के एक्सपोर्ट पोर्टफोलियो में 4038 करोड रुपए का योगदान दिया है। इन क्षेत्रों में आर्थिक विकास बढ़ने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर निर्यात में मध्यप्रदेश की रैंकिंग 15 से 11 हो गई है। रिपोर्ट के अनुसार फार्मास्यूटिकल, इंजीनियरिंग गुड्स और सोया आधारित कृषि उत्पाद मिलाकर मध्यप्रदेश ने विश्व बाजार के प्रतिमानों के अनुसार निर्यात रैंकिंग में बढ़ोतरी की है। निवेश मित्र औद्योगिक विकास की नीतियां, औदयोगीकरण का बढ़ता आधार मध्यप्रदेश का निर्यात बढ़ने के प्रमुख कारण है। इसके अलावा निर्यात को प्रोत्साहित करने वाली अधोसंरचना में बढ़ोतरी होना और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों का मध्यप्रदेश की ओर आकर्षित होने को भी प्रमुख है। पिछले साल तक फार्मास्यूटिकल, एनिमल फीड, मशीनरी, एल्यूमिनियम और टेक्सटाइल पांच ऐसे निर्यात सेक्टर थे जो प्रथम पांच निर्यातकों में शामिल थे। मुख्य रूप से बांग्लादेश, फ्रांस, यूएई और नीदरलैंड में मध्यप्रदेश को निर्यात का बड़ा मार्केट मिला है। फार्मास्यूटिकल और मशीनरी के निर्यात में मध्यप्रदेश के लिए सबसे बड़ा मार्केट यूएस है। मध्यप्रदेश से वर्ष 2024-25 में 11,968 करोड रुपए के फार्मास्यूटिकल्स, 6062 रुपए के एनिमल फीड, 4795 करोड रुपए के एल्युमिनियम, 4656 रुपए का निर्यात और 5497 रुपए की मशीनरी का निर्यात हुआ। पिछले छह वर्षों से मध्यप्रदेश का निर्यात लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2019-20 में 37,692 करोड रुपए, 2020-21 में 47,959 करोड रुपए, 2021-22 में 58,407 करोड रुपए, 2022-23 में 65,878 करोड रुपए, 2023-24 में 65,255 करोड़ रुपए और 2024-25 में 66,218 करोड रुपए का निर्यात मध्यप्रदेश से हुआ। इसमें स्पेशल इकोनामिक जोन से हुए निर्यात के आंकड़े भी शामिल है। धार जिला निर्यात में प्रथम है। यहां से 17,830 करोड रुपए का निर्यात हुआ जबकि इंदौर से 13,500 करोड रुपए का निर्यात हुआ। यहां से फार्मास्यूटिकल, ऑटोमेटिक और फूड प्रोसेसिंग सेक्टर से निर्यात हुआ। उज्जैन ने भी अपना पिछला रिकॉर्ड तोड़ते हुए 2,288 करोड रुपए का निर्यात किया, जिसमें इंडस्ट्रियल, कृषि आधारित उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण उत्पाद शामिल हैं। राज्य सरकार द्वारा औद्योगिक विकास पर फोकस रखते हुए और व्यापारिक संबंधों को मजबूत बनाने से यह उपलब्धि हासिल हुई है। इससे न सिर्फ राज्य की आर्थिक आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिली है बल्कि देश के कुल निर्यात में भी मध्यप्रदेश का योगदान बढ़ा है।  

Bhopal पुलिस ने मछली गैंग पर कसा शिकंजा, अब तक 15 गिरफ्तार और 50 से ज्यादा पूछताछ

भोपाल राजधानी में चर्चित हाई-प्रोफाइल ड्रग्स-हथियार तस्करी मामले में पुलिस ने यासीन मछली और शाहवर मछली के नेटवर्क की परत-दर-परत पोल खोल दी है। यह खुलासा न केवल ड्रग माफिया के काम करने के तरीके को उजागर करता है, बल्कि शहर के पार्टी कल्चर की उस अंधेरी सच्चाई को भी सामने लाता है, जहां नशा मौज-मस्ती से आगे बढ़कर संगठित अपराध का बड़ा जरिया बन चुका है। 15 की गिरफ्तारी, 50 से पूछताछ अब तक क्राइम ब्रांच यासीन के 15 करीबियों को गिरफ्तार कर चुकी है और 50 से अधिक लोगों से पूछताछ हो चुकी है। पूरे रैकेट का पर्दाफाश यासीन और शाहवर के मोबाइलों में मिली ड्रग चैट और फोटो से हुआ है। रिमांड के दौरान पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि इस रैकेट में 50 से ज्यादा लोग काम करते थे, जो दिल्ली और राजस्थान से माल लाकर भोपाल में सप्लाई करते थे। यासीन पब और क्लब में आने वाले युवाओं को टारगेट करता था। शुरुआत में उन्हें मुफ्त ड्रग दी जाती थी ताकि लत लग जाए, फिर महंगे दामों में ड्रग बेचे जाते थे।   अब तक ये 15 हुए गिरफ्तार गिरफ्तार आरोपियों में सोहेल खान, समीर उद्दीन, आशू उर्फ शाहरूख, सैफुद्दीन, यासीन उर्फ मिंटू उर्फ मछली, शाहवर मछली, जगजीत सिंह उर्फ जग्गा, अंशुल सिंह उर्फ भूरी, अंकित कहार, अमन दहिया, शुभम शर्मा, शकीर उर्फ छोटू, तौफीक निजामी, थाई महिला बेंचामत मून, नाइजीरियन नागरिक और चार अन्य शामिल हैं।

दिल्ली मेट्रो का यात्री रिकॉर्ड टूटा, राखी के दिन 81 लाख से ज्यादा लोगों ने किया सफर

नई दिल्ली रक्षा बंधन पर दिल्ली मेट्रो ने रिकॉर्ड बना डाला। रक्षाबंधन से एक दिन पहले 8 अगस्त 2025 को दिल्ली मेट्रो ने अब तक की सबसे बड़ी डेली राइडरशिप दर्ज की। इस दिन 81 लाख से भी ज्यादा पैसेंजर ने दिल्ली मेट्रो में सफर किया। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने ट्वीट करते हुए बताया कि 8 अगस्त को सभी कॉरिडोर मिलाकर कुल 81.87 लाख पैसेंजर जर्नी हुईं, जो एक नया रिकॉर्ड है। डीएमआरसी ने इसे यात्रियों के बढ़ते भरोसे का संकेत बताया। रक्षाबंधन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने उसी दिन 92 अतिरिक्त ट्रिप चलाईं। अगले दिन, यानी रक्षाबंधन पर, 455 अतिरिक्त ट्रिप का संचालन किया। डीएमआरसी के मुताबिक, इससे पहले का रिकॉर्ड 18 नवंबर 2024 को बना था, जब 78.67 लाख पैसेंजर जर्नी दर्ज हुई थीं। अन्य उच्च राइडरशिप वाले दिनों में 20 अगस्त 2024 शामिल है, जब 77.48 लाख जर्नी हुई थीं। 13 फरवरी 2024 को 71.09 लाख जर्नी दर्ज की गई थीं। पब्लिक ट्रांसपोर्ट के तौर पर बढ़ती मेट्रो की लोकप्रियता दिल्ली मेट्रो का यह नया रिकॉर्ड राजधानी और आसपास के इलाकों में मेट्रो के बढ़ते महत्व और पब्लिक ट्रांसपोर्ट के तौर पर उसकी लोकप्रियता को एक बार फिर साबित करता है। अधिकारी ने बताया कि त्योहारों के दौरान बढ़ी हुई डिमांड को पूरा करने के लिए मेट्रो अपनी ऑपरेशन कैपेसिटी को एडजस्ट करती है, जिससे यात्रियों को सुविधाजनक यात्रा अनुभव मिल सके। क्यों बढ़ जाती है मेट्रो में भीड़? त्योहारी सीजन में लोग ट्रैफिक जाम से बचने और समय पर गंतव्य तक पहुंचने के लिए मेट्रो को प्राथमिकता देते हैं। 8 अगस्त को दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर लंबा जाम था, जिससे बचने के लिए मेट्रो सबसे सुविधाजनक विकल्प रही। यह न केवल समय बचाती है बल्कि आरामदायक और सुरक्षित सफर भी सुनिश्चित करती है। रक्षाबंधन जैसे मौकों पर घर जाने, खरीदारी करने और रिश्तेदारों से मिलने के लिए मेट्रो की लोकप्रियता और भी बढ़ जाती है।

जनजातीय संग्रहालय में संभावना में नृत्य गायन एवं वादन प्रस्तुति हुई

भोपाल  मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में नृत्य, गायन एवं वादन पर केंद्रित गतिविधि "संभावना" का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें 10 अगस्त को अग्नेश केरकेट्टा एवं साथी, भोपाल द्वारा उरांव जनजाति नृत्य सरहुल एवं उमाशंकर नामदेव एवं साथी, दमोह द्वारा राई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। अग्नेश केरकेट्टा एवं साथी, भोपाल द्वारा उरांव जनजाति नृत्य सरहुल की प्रस्तुति दी गई। मध्यप्रदेश के जनजातियों में उराँव जनजाति रायगढ़ जिले की जशपुर तहसील के आसपास निवास करती हैं। उराँव जनजातियों का सर्वाधिक प्रसिद्ध नृत्य है सरहुल। उराँव जनजाति शाल सरई वृक्ष में अपने ग्राम देवता का निवास मानती हैं, इसलिए वर्ष में एक बार चैत्र मास की पूर्णिमा को शाल वृक्ष की पूजा करते हैं और शाल वृक्ष के आसपास नृत्य करते हैं। शाल वृक्ष पर सफेद कपड़े का झण्डा फहराया जाता है।  सरहुल एक समूह नृत्य है इसमें युवक-युवतियां और प्रौढ़ उरांव शामिल होते हैं। नृत्य में पद संचलन वाद्य तालों पर नहीं बल्कि गीतों की लय और तोड़ पर होता है। नृत्य धीमी गति के साथ प्रारंभ होता है और अत्यन्त तीव्र गति के चरम पर समापन। इस नृत्य में पुरूष नर्तक एक विशेष प्रकार का साफा बाँधते हैं तथा महिलाएँ अपने जूड़े में बगुला पंख की सफेद कलंगी लगाती हैं। नर्तकों के वस्त्र प्रायः सफेद होते हैं। सरहुल नृत्य के प्रमुख वाद्य मांदर, झाँझ और नगाड़ा है। कहीं-कहीं चौमुखा चकोल भी बजाते हैं। उमाशंकर नामदेव एवं साथी, दमोह द्वारा राई नृत्य की प्रस्तुति दी गई। बुन्देलखण्ड अंचल की अपनी जातीय परम्परा मूलतः शौर्य और श्रृंगार परक है। यह अकारण नहीं है कि बुन्देलखण्ड के प्रख्यात लोकनृत्य राई में एक ओर तीव्र शारीरिक चपलता, बेग, अंग, मुद्राएं और समूहन के लयात्मक विन्यास है, वहीं दूसरी ओर नृत्य के लास्य का समावेश और लोक कविता के रूप में उद्याम श्रृंगार परक अर्थों की नियोजना। इसमें ऊर्जा, शक्ति और लालित्य एकमेक है। इस नृत्य को बुन्देलखण्ड में मंचीय नृत्य की स्थिति मात्र में सीमित नहीं किया गया है। बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे के जन्म के समय और विवाह के अवसर पर राई नृत्य का आयोजन प्रतिष्ठा मूलक माना जाता है। अनेक बार किसी अभीप्सित कार्य की पूर्ति होने या मनौती होने पर भी राई नृत्य के आयोजन किये जाते हैं। राई एक जीवन्त कलात्मक हिस्सेदारी की तरह ही है। जीवन का अटूट हिस्सा जिसमें आनंद की स्वच्छंद अभिव्यक्ति मनुष्य की जीवनी शक्ति जैसा प्रकट होता है। मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय परिसर में प्रत्येक रविवार दोपहर 2 बजे से आयोजित होने वाली गतिविधि में मध्यप्रदेश के पांच लोकांचलों एवं सात प्रमुख जनजातियों की बहुविध कला परंपराओं की प्रस्तुति के साथ ही देश के अन्य राज्यों के कलारूपों को देखने समझने का अवसर भी जनसामान्य को प्राप्त होगा।  

आस्था का केंद्र सजेगा नए रूप में, श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर में भूमि पूजन संपन्न

बोलातरा मालाणी क्षेत्र की आस्था और गौरव का प्रतीक श्री रावल मल्लीनाथ जी का प्राचीन मंदिर, जिसे भक्त मालाजाल मंदिर के नाम से भी जानते हैं, अब नए भव्य स्वरूप में निखरेगा। यह ऐतिहासिक मंदिर तिलवाड़ा कस्बे के मालाजाल में पवित्र लूणी नदी के किनारे स्थित है। सैकड़ों वर्षों की परंपरा से जुड़े इस मंदिर के जीर्णोद्धार कार्य का शुभारंभ भूमि पूजन के साथ किया गया। भूमि पूजन रावल श्री मल्लीनाथ जी के 25वें गादीपति एवं संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल ने वैदिक मंत्रोच्चार और पारंपरिक विधि-विधान के बीच संपन्न कराया। इस दौरान संस्थान समिति के पदाधिकारी, माला पोता परिवार के सदस्य और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मालाणी के संस्थापक और लोकदेवता रावल किशन सिंह जसोल ने बताया कि रावल मल्लीनाथ जी न केवल मालाणी क्षेत्र के संस्थापक थे, बल्कि लोकदेवता और सिद्ध पुरुष के रूप में आज भी पूजनीय हैं। 1358 ईस्वी में राव शल्काजी के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में जन्मे मल्लीनाथ जी वीर योद्धा, चमत्कारी संत और ‘त्राता’ (रक्षक) के रूप में लोकमानस में स्थापित हुए। उनकी स्मृति में प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण एकादशी से तिलवाड़ा पशु मेला आयोजित होता है, जो अब विश्वविख्यात है। करीब 700 वर्ष पहले संतों के प्रथम समागम से शुरू हुए इस मेले में ऐतिहासिक रूप से रानी रूपादे जी, गुरु उगमसी भाटी, राणा कुम्भा, रामदेवजी, हड़बूजी और कई संत-राजघराने शामिल रहे थे। मालाजाल की आध्यात्मिक महत्ता मालाजाल संतों की तपोभूमि मानी जाती है। मान्यता है कि रावल मल्लीनाथ जी ने यहां जाल की टहनी रोपकर तत्काल एक विशाल वृक्ष प्रकट किया था, जो आज भी हरा-भरा है और आस्था का केंद्र है। 14 अगस्त को होगा शिलान्यास जीर्णोद्धार के दूसरे चरण का भव्य शिलान्यास 14 अगस्त 2025 को होगा। इसमें बाड़मेर, जोधपुर, जालौर और जैसलमेर जिलों से हजारों श्रद्धालु और माला पोता वंशज शामिल होंगे। कार्यक्रम में गणपति पूजन, नवग्रह पूजन, वास्तु पूजन, यंत्र पूजन, हवन और शीला स्थापना जैसे अनुष्ठान होंगे। महाप्रसादी वितरण और मंदिर के भावी स्वरूप की प्रदर्शनी भी लगेगी। एक वर्ष में पूर्ण होगा निर्माण कार्य शिलान्यास के बाद मंदिर निर्माण शुरू होगा, जिसे एक वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है। इसके बाद यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र बनेगा, बल्कि क्षेत्रीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को भी मजबूत करेगा। जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी भूमि पूजन में संस्थान उपाध्यक्ष कुंवर हरिश्चंद्र सिंह जसोल, सचिव सुमेरसिंह वरिया, सदस्य मोहनसिंह बूड़ीवाड़ा, गुलाबसिंह डंडाली, स्वरूप सिंह लूणा, पूर्व विधायक शैतान सिंह राठौड़ सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और श्रद्धालु उपस्थित रहे।

छत्तीसगढ़ के 141879 किसानों को 152.84 करोड़ रुपये का दावा भुगतान

11 अगस्त को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्लेम का होगा पात्र बीमित किसानों के खाते में सीधे अंतरण रायपुर,  भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं मौसम आधारित फसल बीमा योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के एक लाख 41 हजार 879 पात्र बीमित किसानों को कुल 152 करोड़ 84 लाख 62 हजार रुपये का दावा राशि का भुगतान राष्ट्रव्यापी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से किया जाएगा। जिसमें खरीफ सीजन 2024 के 33 हजार 943 पात्र किसानों को 10 करोड़ 25 लाख 97 हजार रुपये तथा रबी सीजन 2024-25 के एक लाख 7 हजार 936 पात्र किसानों को 142 करोड़ 58 लाख 65 हजार रुपये का दावा भुगतान शामिल है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत यह भुगतान 11 अगस्त 2025 (सोमवार) को राष्ट्रव्यापी प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण आधारित स्वचालित प्रणाली के माध्यम से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में राजस्थान के झुंझुनू में आयोजित कार्यक्रम में होगी। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा होंगे। कार्यक्रम में केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किशोरी लाल मीना विशिष्ट अतिथि होंगे। यह कार्यक्रम दोपहर 12 बजे से आरंभ होगा। छत्तीसगढ़ के पात्र बीमित कृषकों को वर्चुअल मोड से कार्यक्रम में शामिल करने हेतु जिला स्तर पर कार्यालय उप संचालक कृषि तथा विकासखण्ड स्तर पर कार्यालय वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी में आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं, ताकि अधिक से अधिक लाभार्थी कृषक इसका हिस्सा बन सकें। मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन ने इस अवसर पर कहा कि किसानों की आर्थिक सुरक्षा हमारी सर्वाेच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना जैसे प्रभावी कार्यक्रम किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं फसल हानि से उबारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यह दावा भुगतान हमारे कृषकों के विश्वास और आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगा। हमारी सरकार खेती को लाभकारी बनाने, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, आधुनिक तकनीक के प्रसार और फसल विविधीकरण के माध्यम से प्रदेश की कृषि को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए संकल्पित है।