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मध्यप्रदेश भवन में हुई मैहर बैंड की सांस्कृतिक संध्या

भोपाल मध्यप्रदेश भवन में शुक्रवार को आवासीय आयुक्त श्रीमती रश्मि अरुण शमी के मुख्य आतिथ्य में सांस्कृतिक संध्या में मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध मैहर बैंड की प्रस्तुति दी गई। मैहर बैंड की प्रस्तुति में जल तरंग वादन में श्री सौरभ कुमार चौरसिया, वायलिन में श्री गोकर्ण प्रसाद पांडे, हारमोनियम में श्री गौतम भारती, सरोद-वादन में श्री बृजेश कुमार द्विवेदी, तबला-वादन में डॉ. अशोक कुमार बाड़ोलिया और सारंगी पर श्री मोहम्मद अहमद खान ने संगत दी। बैंड द्वारा विभिन्न शास्त्रीय राग और लोकधुनों की प्रस्तुति दी गयी। आवासीय कला संस्था आर्ट ईचौल मैहर की संस्थापक श्रीमती अंबिका बैरी ने संस्था द्वारा दिए जा रहे सिरेमिक, काष्ठ, मेटल और पत्थर शिल्प-कला प्रशिक्षण और फैलोशिप पर प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में मैहर जिले के ग्राम महेदर के गीताजंली इंटरनेशनल के डेलास ब्रांड द्वारा जिले के ओडीओपी टमाटर के प्रसंस्कृत उत्पादों में सॉस, कैचअप, प्यूरी और चटनी प्रदर्शित और विक्रय की गई। मैहर के शारदा माता के प्रसाद के साथ मृगनयनी और विंध्य हर्बल्स के उत्पादों पर 10 प्रतिशत की विशेष छूट प्रदान की गई। कार्यक्रम में नई दिल्ली में पदस्थ मध्यप्रदेश शासन के अधिकारी-कर्मचारी और दिल्ली में निवासरत मध्यप्रदेश के निवासी उपस्थित थे।  

राजस्थान पुलिस में नौकरी का मौका: RPSC ने 1015 पदों पर निकली भर्ती

  जयपुर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने पुलिस विभाग में सब-इंस्पेक्टर (SI) और प्लाटून कमांडर के कुल 1015 पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। इच्छुक और योग्य अभ्यर्थी 10 अगस्त से 8 सितंबर 2025 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया आयोग की वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in या sso.rajasthan.gov.in के माध्यम से पूरी की जा सकती है। इस भर्ती की परीक्षा तिथि बाद में घोषित की जाएगी। रिक्तियों का विवरण इस प्रकार है: राजस्थान पुलिस में सब-इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर के कुल 1015 पदों पर भर्ती निकाली गई है। इनमें सब इंस्पेक्टर (एपी) के 896 पद, सब इंस्पेक्टर (एपी) सहरिया के 4 पद, अनुसूचित क्षेत्र के 25 पद, सब इंस्पेक्टर (आईबी) के 26 पद और प्लाटून कमांडर (आरएसी) के 64 पद शामिल हैं। यह वैकेंसी युवाओं के लिए सरकारी सेवा में जाने का सुनहरा अवसर है। जानें योग्यता और आयु सीमा इन पदों के लिए उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक  होना आवश्यक है। आयु सीमा 20 से 25 वर्ष के बीच निर्धारित की गई है। हालांकि, आरक्षित वर्गों को राजस्थान सरकार के नियमों के अनुसार अधिकतम आयु में छूट दी जाएगी। चयनित उम्मीदवारों को पे मैट्रिक्स लेवल 11 (ग्रेड पे 4200 रुपये) के अनुसार वेतन मिलेगा। राजस्थान पुलिस SI भर्ती में चयन प्रक्रिया तीन चरणों में होगी। लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षण (PET) और साक्षात्कार। प्रत्येक चरण में उम्मीदवार के प्रदर्शन के आधार पर मेरिट सूची तैयार की जाएगी। आवेदन शुल्क जनरल व ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को आवेदन शुल्क के रूप में 600 रुपये जमा करने होंगे। जबकि एससी, एसटी, पिछड़ा वर्ग (Non-Creamy Layer), आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) व सहरिया व दिव्यांग उम्मीदवारों को 400 रुपये शुल्क देना होगा।   कैसे करें आवेदन?     RPSC की वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in या sso.rajasthan.gov.in पर जाएं।     SSO ID से लॉगिन करें या नया रजिस्ट्रेशन करें।     “Recruitment Portal” में जाकर SI भर्ती लिंक चुनें।     आवेदन फॉर्म भरें और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें।     श्रेणी अनुसार शुल्क का भुगतान करें।     अंत में फॉर्म सबमिट करें और प्रिंट निकालें।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव बार्सिलोना में ऐतिहासिक और स्थापत्य स्थलों का करेंगे भ्रमण

स्पेन प्रवास का चौथा दिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव बार्सिलोना में ऐतिहासिक और स्थापत्य स्थलों का करेंगे भ्रमण भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्पेन प्रवास के चौथे और अंतिम दिन 19 जुलाई को बार्सिलोना की सांस्कृतिक एवं स्थापत्य धरोहर स्थलों का भ्रमण करेंगे। दिन की शुरुआत प्रसिद्ध पार्क गुएल के भ्रमण से होगी, जो आर्किटेक्चर और प्रकृति के मेल का अद्भुत प्रतीक है। वे सागरादा फैमिलिया चर्च का भ्रमण भी करेंगे, जिसे विश्व की सबसे अनूठी निर्माण शैलियों में गिना जाता है। यहां की सृजनात्मकता और सांस्कृतिक ऊर्जा, उस दृष्टि से मेल खाती है, जिसके अंतर्गत मध्यप्रदेश मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कला, संस्कृति और निवेश—तीनों के समन्वय से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव बार्सिलोना स्थित विश्वप्रसिद्ध पिकासो संग्रहालय का भ्रमण भी करेंगे। भ्रमण न केवल सांस्कृतिक समृद्धि में अनुभव होगा, बल्कि मध्यप्रदेश में रचनात्मक उद्योगों और कला से जुड़े क्षेत्रों में संभावनाओं की खोज की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव इसी दिन बार्सिलोना से दिल्ली के लिए रवाना होंगे।  

राजस्थान भर्ती 2025: विषयवार एग्जाम शेड्यूल जारी, कब है परीक्षा?

जयपुर राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने वरिष्ठ अध्यापक (सीनियर टीचर) भर्ती परीक्षा 2024 के लिए विषयवार परीक्षा तिथियों की घोषणा कर दी है। यह परीक्षा 2129 पदों पर भर्ती के लिए 7 सितंबर से 12 सितंबर 2025 तक आयोजित की जाएगी आयोग ने विस्तृत परीक्षा कार्यक्रम अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर जारी कर दिया है। परीक्षा शेड्यूल और शिफ्ट टाइमिंग राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा सीनियर टीचर भर्ती परीक्षा का आयोजन 7 से 12 सितंबर 2025 तक किया जाएगा। यह परीक्षा प्रतिदिन दो शिफ्टों में आयोजित होगी। पहली शिफ्ट सुबह 10:00 बजे से 12:00 बजे तक और दूसरी शिफ्ट दोपहर 3:00 बजे से 5:30 बजे तक होगी। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें और अपने प्रवेश पत्र के साथ सभी जरूरी दस्तावेज साथ रखें। देखें पूरी शेड्यूल समूह विषय परीक्षा तिथि परीक्षा समय समूह-A सामान्य ज्ञान (समूह-A) 07-09-2025 सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक समूह-A सामाजिक विज्ञान 07-09-2025 दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक समूह-B सामान्य ज्ञान (समूह-B) 08-09-2025 सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक समूह-B हिंदी 08-09-2025 दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक समूह-C सामान्य ज्ञान (समूह-C) 09-09-2025 सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक समूह-C विज्ञान 09-09-2025 दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक समूह-C संस्कृत 10-09-2025 सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक समूह-C उर्दू 10-09-2025 दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक समूह-D सामान्य ज्ञान (समूह-D) 11-09-2025 सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक समूह-D गणित 11-09-2025 दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक समूह-D अंग्रेजी 12-09-2025 सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक समूह-D पंजाबी 12-09-2025 दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:30 बजे तक रिक्तियों का विवरण इस भर्ती के तहत कुल 2129 पदों को भरा जाएगा। इनमें हिंदी के 288, अंग्रेजी के 327, गणित के 694, विज्ञान के 350, सामाजिक विज्ञान के 88, संस्कृत के 309, पंजाबी के 64 और उर्दू के 9 पद शामिल हैं। क्षेत्रवार देखा जाए तो टीएसपी (TSP) क्षेत्र में 402 और नॉन-टीएसपी क्षेत्र में 1727 पद हैं। उम्मीदवारों को अपने विषय और क्षेत्र के अनुसार पदों की जानकारी जरूर लेनी चाहिए। परीक्षा पैटर्न और नेगेटिव मार्किंग सीनियर टीचर चयन प्रक्रिया पूरी तरह से लिखित प्रतियोगी परीक्षा पर आधारित है। इसमें दो पेपर होंगे। पेपर I (200 अंक, 100 प्रश्न, समय 2 घंटे) और पेपर II (300 अंक, 150 प्रश्न, समय 2 घंटे 30 मिनट)। दोनों पेपर में बहुविकल्पीय प्रश्न होंगे और प्रत्येक गलत उत्तर पर एक तिहाई अंक काटे जाएंगे।  

हाई कोर्ट का मानवीय फैसला: 6 माह की गर्भवती नाबालिग पर नहीं थोपा जाएगा गर्भपात

जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट कर दिया कि दुष्कर्म पीड़िता नाबालिग किसी भी हालत में आरोपित के घर पर नहीं रह सकती। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने आदेश दिया कि जब तक पीड़िता बालिग नहीं हो जाती, उसे रीवा के नारी निकेतन में ही रखा जाए। नारी निकेतन की अधीक्षक को भी निर्देशित किया गया है कि पीड़िता की सुरक्षा और देखरेख में कोई चूक न हो। यह मामला रीवा जिले के मऊगंज क्षेत्र से जुड़ा है, जहां एक 17 वर्षीय किशोरी ने गर्भधारण किया था। मऊगंज अदालत ने गर्भपात की अनुमति हेतु हाई कोर्ट को पत्र भेजा था। कोर्ट ने जब इस पर सुनवाई की तो पता चला कि पीड़िता आरोपित भूपेंद्र साकेत के साथ रह रही थी और उसने मेडिकल जांच व गर्भपात कराने से इनकार कर दिया है। गर्भ अब लगभग 25 सप्ताह का हो चुका है। कोर्ट ने साफ किया कि पीड़िता की मर्जी के बिना गर्भपात कराने का आदेश नहीं दिया जा सकता, खासकर जब वह मेडिकल जांच भी नहीं करवा रही। इस स्थिति में, यदि माता-पिता लड़की को अपने पास नहीं रखना चाहते, तो उसे नारी निकेतन में ही सुरक्षित रूप से रखा जाए। वहीं, एक अन्य मामले में कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया के दुरुपयोग पर कड़ा रुख अपनाया। भोपाल की एक महिला ने सतना निवासी अरुणेंद्र कुमार गौतम पर शादी का झांसा देकर शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया था। इस पर पुलिस ने दुष्कर्म और अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया था। याचिकाकर्ता ने हाई कोर्ट में अग्रिम ज़मानत की अर्जी दी, जिसे मंजूर कर लिया गया। बाद में महिला ने जमानत रद्द करने की मांग की, लेकिन याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों में सामने आया कि महिला पहले भी जबलपुर में ऐसे ही एक मामले में एफआईआर दर्ज करा चुकी है और वह पहले से शादीशुदा भी है। कोर्ट ने इन तथ्यों के आधार पर एफआईआर और आपराधिक कार्रवाई को निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का इस तरह दुरुपयोग नहीं होना चाहिए।

सीएम मोहन ने कहा कि विभागों में भर्ती की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखनी चाहिए।

भोपाल नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद से राज्य सरकार ने कई विभागों में लगभग 29,000 पद भरे हैं। अभी भी 1.04 लाख से ज्यादा पद खाली हैं। एमपी सीएम मोहन यादव ने जुलाई को एक मीटिंग में सरकारी भर्तियों की रफ्तार की समीक्षा की। उन्होंने विभागों को भर्ती प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए। सरकार इस साल 27000 से ज्यादा लोगों को नौकरी देने की योजना बना रही है। सरकार रोजगार के लिए एक पोर्टल चला रही है, जिस पर 27 लाख से ज्यादा नौकरी चाहने वालों ने अपना नाम दर्ज कराया है। सीएम मोहन यादव ने जुलाई को एक मीटिंग की। इस मीटिंग में उन्होंने सरकारी भर्तियों की रफ्तार पर बात की। उन्होंने कहा कि भर्ती का काम ठीक से होना चाहिए और इसे सबसे ज्यादा जरूरी मानना चाहिए। सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) भर्तियों पर नजर रखता है। GAD ने मीटिंग में बताया कि उन्होंने कितने लोगों को नौकरी दी है। उन्होंने यह भी बताया कि वे इस साल 27000 से ज्यादा लोगों को नौकरी देंगे। खाली पदों को भरने के लिए योजना 15 जुलाई तक 27 लाख से ज्यादा लोग एमपी एम्प्लॉयमेंट पोर्टल पर नौकरी के लिए रजिस्टर कर चुके थे। सरकार ने बताया कि इस पोर्टल पर सिर्फ वही लोग रजिस्टर करते हैं जो नौकरी ढूंढ रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि राज्य में इतने ही लोग बेरोजगार हैं। एक बड़े सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सरकारी नौकरियों की भर्ती पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने कहा कि खाली सरकारी पदों को भरने के लिए एक योजना बनाई गई है। चल रही प्रमोशन प्रक्रिया बीजेपी ने 2023 के विधानसभा चुनावों के लिए अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि वे पांच साल में 2.5 लाख सरकारी नौकरियां देंगे। सरकार का मानना है कि प्रमोशन की प्रक्रिया शुरू होने से भी कई पद भर जाएंगे। हालांकि, यह मामला अभी हाई कोर्ट में है। प्रमोशन कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद ही किए जाएंगे। विभागों को एक्शन में रहने के निर्देश जीएडी ने सभी विभागों को यह बताया है कि वे हर साल खाली पदों को कैसे भर सकते हैं। खाली पदों और भर्तियों की जानकारी रखने के लिए एक पोर्टल भी बनाया गया है। जुलाई की मीटिंग में सीएम मोहन ने कहा कि विभागों में भर्ती की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखनी चाहिए। सीएम मोहन यादव ने कहा कि मुख्य सचिव और GAD के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने सभी विभागों को समय पर काम करने के लिए कहा है। उन्होंने कहा कि विभागों को इन निर्देशों का पालन करने के बाद रिपोर्ट भी जमा करनी होगी।

तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें

महिला बंदियों ने सीखा संवाद, संवेदना और सपनों को संवारने का हुनर महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें भोपाल  कभी टूटी हुई उम्मीदों के सहारे जी रही केन्द्रीय जेल भोपाल की महिलाएं अब सपनों को नया आकार दे रही हैं। केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जब इन महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें गर्व से नम हो गई। यह कार्यशाला मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और तिनका-तिनका फाउंडेशन के सहयोग से “टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से सुधार और व्यक्तित्व विकास” विषय पर आयोजित की गई थी। कार्यशाला में महिला बंदियों ने न सिर्फ संवाद के गुर सीखे बल्कि आत्मविश्लेषण, सुधार और एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने का संकल्प भी लिया। बहुत कुछ सीखा मैंने यहाँ 56 वर्षीय पुतलीबाई, जो कभी अनपढ़ थीं, आज अख़बार पढ़ती हैं, टीवी समाचार देखती हैं और चित्र बनाना जानती हैं। भावुक होकर उन्होंने कहा,“मेरा जीवन बहुत कठिन था। लेकिन यहां मैंने पढ़ना, चित्र बनाना और अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानना सीखा है। परिवार में औरत की ज़िंदगी कहीं ज़्यादा कठिन होती है। यहां मुझे आज़ादी महसूस होती है।” “मैं फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं” कल्पना, जो किन्नर समुदाय से हैं, ने कहा “बाहर हमारे साथ भेदभाव होता है, यहां नहीं। यहां पढ़ाई की, कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। अब मैं बाहर जाकर फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं।”  “खेतों में मेहनत करूंगी, बच्चों को पालूंगी” सुनीता बाई ने अपने भीतर के पश्चाताप को शब्द दिए “मुझसे गलती हुई, उसका पछतावा है। यहां रहकर मैंने बागवानी सीखी है। अब बाहर जाकर खेती करूंगी और अपने बच्चों का पालन-पोषण करूंगी।” कला और शब्दों से उभरे भाव कार्यशाला में महिलाओं ने “जेल में सपना”, “जेल में उत्सव”, “जेल में रेडियो” जैसे विषयों पर चित्र बनाकर अपने मन की स्थिति को व्यक्त किया। हर बंद दरवाज़े के पीछे खुलती है एक उम्मीद की खिड़की कार्यक्रम की सूत्रधार और तिनका-तिनका फाउंडेशन की अध्यक्ष सुवर्तिका नंदा ने कहानियों और संवाद के ज़रिए महिलाओं को संदेश दिया कि “हर परिस्थिति में डटे रहना ही असली नारी शक्ति है। सीखते रहना, आगे बढ़ते रहना ही जीत है।” सतत कौशल विकास की प्रतिबद्धता राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर ने बताया कि महिला बंदियों के लिए आयोग द्वारा कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और आगे भी प्रदेश में इन्हें विस्तारित किया जाएगा। कार्यशाला में डीआईजी जयपटेल, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे, और आनंद विभाग के संचालक प्रवीण गंगराड़े भी उपस्थित रहे। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यशाला नहीं, बल्कि उन ज़िंदगियों की कहानी है जो तिनका-तिनका जोड़कर खुद को फिर से गढ़ रही हैं। जहां दीवारें हैं, वहीं नए रास्ते भी हैं। जहां सज़ा है, वहीं पुनर्जन्म भी।  

तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें

महिला बंदियों ने सीखा संवाद, संवेदना और सपनों को संवारने का हुनर महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा तिनका-तिनका उम्मीद: जेल की दीवारों के भीतर उगती नई ज़िंदगी की किरणें भोपाल  कभी टूटी हुई उम्मीदों के सहारे जी रही केन्द्रीय जेल भोपाल की महिलाएं अब सपनों को नया आकार दे रही हैं। केंद्रीय जेल के महिला वार्ड में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में जब इन महिला बंदियों ने रंगों और शब्दों के ज़रिये अपनी ज़िंदगी को कागज़ पर उकेरा, तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें गर्व से नम हो गई। यह कार्यशाला मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और तिनका-तिनका फाउंडेशन के सहयोग से “टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से सुधार और व्यक्तित्व विकास” विषय पर आयोजित की गई थी। कार्यशाला में महिला बंदियों ने न सिर्फ संवाद के गुर सीखे बल्कि आत्मविश्लेषण, सुधार और एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर होने का संकल्प भी लिया। बहुत कुछ सीखा मैंने यहाँ 56 वर्षीय पुतलीबाई, जो कभी अनपढ़ थीं, आज अख़बार पढ़ती हैं, टीवी समाचार देखती हैं और चित्र बनाना जानती हैं। भावुक होकर उन्होंने कहा,“मेरा जीवन बहुत कठिन था। लेकिन यहां मैंने पढ़ना, चित्र बनाना और अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानना सीखा है। परिवार में औरत की ज़िंदगी कहीं ज़्यादा कठिन होती है। यहां मुझे आज़ादी महसूस होती है।” “मैं फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं” कल्पना, जो किन्नर समुदाय से हैं, ने कहा “बाहर हमारे साथ भेदभाव होता है, यहां नहीं। यहां पढ़ाई की, कुछ नया करने की प्रेरणा मिली। अब मैं बाहर जाकर फैशन डिज़ाइनर बनना चाहती हूं।”  “खेतों में मेहनत करूंगी, बच्चों को पालूंगी” सुनीता बाई ने अपने भीतर के पश्चाताप को शब्द दिए “मुझसे गलती हुई, उसका पछतावा है। यहां रहकर मैंने बागवानी सीखी है। अब बाहर जाकर खेती करूंगी और अपने बच्चों का पालन-पोषण करूंगी।” कला और शब्दों से उभरे भाव कार्यशाला में महिलाओं ने “जेल में सपना”, “जेल में उत्सव”, “जेल में रेडियो” जैसे विषयों पर चित्र बनाकर अपने मन की स्थिति को व्यक्त किया। हर बंद दरवाज़े के पीछे खुलती है एक उम्मीद की खिड़की कार्यक्रम की सूत्रधार और तिनका-तिनका फाउंडेशन की अध्यक्ष सुवर्तिका नंदा ने कहानियों और संवाद के ज़रिए महिलाओं को संदेश दिया कि “हर परिस्थिति में डटे रहना ही असली नारी शक्ति है। सीखते रहना, आगे बढ़ते रहना ही जीत है।” सतत कौशल विकास की प्रतिबद्धता राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव सुरेश तोमर ने बताया कि महिला बंदियों के लिए आयोग द्वारा कौशल विकास के कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं और आगे भी प्रदेश में इन्हें विस्तारित किया जाएगा। कार्यशाला में डीआईजी जयपटेल, जेल अधीक्षक राकेश भांगरे, और आनंद विभाग के संचालक प्रवीण गंगराड़े भी उपस्थित रहे। यह आयोजन सिर्फ एक कार्यशाला नहीं, बल्कि उन ज़िंदगियों की कहानी है जो तिनका-तिनका जोड़कर खुद को फिर से गढ़ रही हैं। जहां दीवारें हैं, वहीं नए रास्ते भी हैं। जहां सज़ा है, वहीं पुनर्जन्म भी।  

दीनदयाल रसोई योजना:नगरीय निकायों ने किफायती दर पर भोजन की व्यवस्था

भोपाल  दीनदयाल रसोई योजना में नगरीय निकायों द्वारा अब तक करीब 4 करोड़ 60 लाख भोजन थाली का वितरण मात्र 5 रूपये प्रति थाली की दर पर जरूरतमंदों को किया गया है। यह योजना 51 जिला मुख्यालयों के 191 रसोई केन्द्रों के माध्यम से संचालित है। इनमें 166 स्थाई और 25 चलित रसोई केन्द्र कार्यरत हैं। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में व्यवसाय और श्रम कार्यों के सिलसिले में ग्रामीण क्षेत्रों से जरूरतमंद परिवारों का निरंतर आगमन होता है। नगरीय निकायों द्वारा इनके ठहरने और किफायती दर पर भोजन व्यवस्था के प्रयास किये जा रहे हैं। नगरीय निकायों द्वारा संचालन वर्तमान में 166 स्थाई रसोई केन्द्र में से 16 नगर निगमों में 58 रसोई केन्द्र और 99 नगर पालिका परिषद में 99 रसोई केन्द्र और 9 नगर परिषदों में 9 रसोई केन्द्र संचालित हो रहे हैं। इसके साथ ही 25 चलित रसोई केन्द्र में से 16 नगर निगमों में 23 और 2 नगर पालिका परिषद में 2 चलित रसोई केन्द्र संचालित हो रहे हैं। नगरीय निकायों द्वारा चलित रसोई केन्द्र की व्यवस्था इस उद्देश्य से की गई है कि जिन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में श्रमिक कार्य कर रहे हैं उन्हें कार्य स्थल पर ही किफायती दर पर भोजन उपलब्ध कराया जाये। प्रदेश में चलित रसोई केन्द्र के वाहनों और उपकरणों की एकरूपता के लिये नगरीय प्रशासन संचालनालय ने सुसज्जित वाहन उपलब्ध कराने की योजना तैयार की है। इसी के साथ दीनदयाल रसोई योजना के लिये नगरीय निकायों को अनुदान राशि भी उपलब्ध कराई जा रही है। योजना के विस्तार के लिये 68 नवीन रसोई घरों के संचालन का प्रस्ताव स्वीकृति के लिये राज्य शासन को भेजा गया है। धार्मिक नगरों में रसोई केन्द्र नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 6 धार्मिक नगरों मैहर, चित्रकूट, ओंकारेश्वर, महेश्वर, ओरछा और अमरकंटक में भी बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये दीनदयाल रसोई योजना का विस्तार किया है। नगरीय निकायों द्वारा जरूरतमंदों को दी जाने वाली थाली में परोसे जाने वाले खाने की गुणवत्ता पर भी लगातार निगरानी रखी जा रही है।  

जशपुर में 74,000 परिवारों को मिला पक्का घर, PM आवास योजना से आई खुशहाली

जशपुर  छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर जिले में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शासन की योजनाओं का लाभ अब समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना से दूरस्थ अंचलों के लोगों को लाभान्वित किया जा रहा है और हितग्राही अपने खुद के मकान में सुकून से जीवन व्यतीत कर रहे हैं। जिला पंचायत विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार जशपुर जिले में 74 हजार 346 मकान पूर्ण हो चुके हैं। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम खटंगा के एक साधारण परिवार की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है, जहां शासन की तीन योजनाओं ने एक साथ उनकी ज़िंदगी को नई दिशा दी है।  74 हजार से अधिक आवास बन कर तैयार सुरेशराम की पत्नी सुमित्रा बाई बताती हैं पहले हम कच्चे घर में रहते थे। बरसात हो या गर्मी, हमेशा डर बना रहता था। पानी टपकता था, दीवारें गिरने का डर और रात-बिरात सांप, बिच्छू का डर अलग से। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना से मिला पक्का घर अब हमारे लिए एक नई दुनिया जैसा है। अब न डर है, न परेशानी3 घर भी साफ-सुथरा है, और बच्चों को पढ़ने-लिखने का भी अच्छा माहौल मिल गया है।  उनकी बेटी कुमारी संगीता बताती है जब कच्चा घर था, तब हम पढ़ाई भी ठीक से नहीं कर पाते थे। बरसात के दिन बहुत दिक्कत होती थी। अब जब पक्का घर मिला है, तो मन लगता है। हम अब बहुत खुश हैं। उन्होंने आगे बताया कि मुझे मुख्यमंत्री महतारी वंदन योजना के तहत हर महीने 1000 मिलते हैं। उसी से हम तेल, नमक, साबुन जैसे जरूरी सामान खरीद लेते हैं। कभी बेटी को स्कूल के लिए कॉपी-किताब भी लेना हो, तो उसी से काम चल जाता है।