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‘User Does Not Exist’ मामले में झारखंड हाईकोर्ट का आदेश, विशेषज्ञों के सामने होगा लाइव लॉग-इन

रांची माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम रुख अपनाया है. परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों की ओर से JSSC पोर्टल पर "User Does Not Exist" संदेश आने और Response Sheet डाउनलोड नहीं होने की शिकायत पर अदालत ने आयोग के IT और कंप्यूटर विशेषज्ञों को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने यह व्यवस्था इसलिए की है ताकि तकनीकी स्थिति की मौके पर ही जांच कर वास्तविक कारण स्पष्ट किया जा सके. याचिकाकर्ताओं ने उठाई तकनीकी समस्या यह मामला विकास पांडेय एवं अन्य अभ्यर्थियों द्वारा दायर रिट याचिका से जुड़ा है. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत में पक्ष रखा. याचिका में कहा गया कि माध्यमिक आचार्य परीक्षा देने के बाद जब अभ्यर्थियों ने JSSC की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के जरिए लॉग-इन कर Response Sheet और Answer Key डाउनलोड करने की कोशिश की, तब पोर्टल पर "User Does Not Exist" का संदेश दिखाई दिया. इसके कारण वे अपनी Response Sheet प्राप्त नहीं कर सके. JSSC ने शपथ पत्र में क्या कहा मामले में JSSC ने अदालत में शपथ पत्र दाखिल कर अपना पक्ष रखा है. आयोग ने अपने जवाब में संभावना जताई कि यह समस्या अभ्यर्थियों द्वारा ई-मेल आईडी या पासवर्ड सही तरीके से दर्ज नहीं करने के कारण सामने आई होगी. हालांकि, याचिकाकर्ताओं का कहना है कि उन्होंने सही विवरण दर्ज किया था, इसके बावजूद पोर्टल पर यही संदेश आता रहा और Response Sheet डाउनलोड नहीं हो सकी. कोर्ट ने तकनीकी जांच का दिया आदेश सुनवाई के दौरान न्यायालय ने केवल दस्तावेजों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय तकनीकी स्तर पर जांच कराने का फैसला किया. अदालत ने निर्देश दिया कि JSSC के कंप्यूटर और IT विशेषज्ञ अगली सुनवाई में अदालत में मौजूद रहें. साथ ही याचिकाकर्ताओं को भी अपनी ई-मेल आईडी और पासवर्ड के साथ उपस्थित रहने को कहा गया है. कोर्ट के सामने होगा लाइव लॉग-इन हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई के दौरान JSSC के तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में संबंधित अभ्यर्थियों के अकाउंट में लॉग-इन कर यह देखा जाएगा कि उनकी Response Sheet और Answer Key वास्तव में उपलब्ध है या नहीं. यदि उपलब्ध है तो उसे डाउनलोड किया जा सकता है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी. इससे यह साफ हो सकेगा कि समस्या अभ्यर्थियों द्वारा गलत विवरण दर्ज करने की थी या फिर JSSC पोर्टल में कोई तकनीकी खामी थी. 13 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को दोपहर 12:15 बजे निर्धारित की है. अधिवक्ता चंचल जैन ने बताया कि याचिकाकर्ताओं की मुख्य मांग यही है कि Response Sheet और Answer Key से जुड़ी तकनीकी समस्या की निष्पक्ष जांच विशेषज्ञों की मौजूदगी में कराई जाए. हाईकोर्ट के इस निर्देश को उन अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जिन्होंने परीक्षा के बाद अपनी Response Sheet डाउनलोड नहीं कर पाने की शिकायत उठाई है.

मेला क्षेत्र 7 जोन और 20 सेक्टरों में विभाजित, 3 हजार पुलिसकर्मी रहेंगे तैनात

मथुरा/बरसाना  ब्रज के प्रमुख पर्वों में से एक श्री राधा अष्टमी पर्व को लेकर योगी सरकार ने बरसाना में व्यापक तैयारियां की हैं। आगामी 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को बरसाना स्थित प्रसिद्ध श्री लाडली जी मंदिर में राधा रानी का जन्मोत्सव पूरी भव्यता और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्री जी का विशेष अभिषेक और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पर्व में लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की है। 7 जोन और 20 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से पूरे बरसाना मेला क्षेत्र को 7 जोन और 20 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। चप्पे- चप्पे पर नजर रखने के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 8 अपर पुलिस अधीक्षक, 38 पुलिस उपाधीक्षक, 75 निरीक्षक, 320 उप निरीक्षक, 68 महिला उप निरीक्षक, पीएसी की 2 कंपनी और पीएसी फ्लड की 2 प्लाटून शामिल हैं। इसके अलावा 155 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की सघन निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की मदद के लिए 2 खोया- पाया केंद्र और 6 वॉच टावर भी स्थापित किए गए हैं। यातायात और सुगम दर्शन के लिए विशेष प्रबंध श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए भारी वाहनों का रूट डायवर्जन लागू किया गया है। उ.प्र.राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) द्वारा 160 विशेष बसें चलाई जाएंगी, जबकि 40 बसों को रिजर्व रखा गया है। प्रत्येक बस पर दो- दो चालकों की ड्यूटी लगाई गई है। बरसाना में एक अस्थायी बस स्टैंड भी बनाया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 38 होल्डिंग एरिया, 50 पार्किंग स्थल, 88 बैरियर, 14 बैरिकेडिंग और 7 स्थानों पर जूता-घर की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त मेले पर जोर स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेला क्षेत्र में 12 मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। आपात स्थिति के लिए बाइक एंबुलेंस, नियमित दूरी पर एंबुलेंस और एंटी-वेनम दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मेला क्षेत्र में उत्कृष्ट साफ- सफाई और पूरी तरह 'प्लास्टिक मुक्त' बनाने की व्यवस्था की गई है। भंडारा संचालकों को भी नियमित कूड़ा उठान और कूड़ादान रखने की हिदायत दी गई है। रोशनी से जगमग हुआ बरसाना  सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा के लिहाज से ट्रांसफार्मर और पोल की प्लास्टिक रैपिंग करने का कार्य किया गया है। मथुरा- वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) द्वारा फसाड लाइटिंग, वॉल पेंटिंग और कपड़ों की सजावट से पूरे बरसाना को एक नव्य-भव्य रूप दिया गया है। वहीं खाद्य सुरक्षा मथुरा/बरसाना  ब्रज के प्रमुख पर्वों में से एक श्री राधा अष्टमी पर्व को लेकर योगी सरकार ने बरसाना में व्यापक तैयारियां की हैं। आगामी 19 सितंबर 2026 (शनिवार) को बरसाना स्थित प्रसिद्ध श्री लाडली जी मंदिर में राधा रानी का जन्मोत्सव पूरी भव्यता और धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। इस अवसर पर श्री जी का विशेष अभिषेक और कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। पर्व में लगभग 25 लाख श्रद्धालुओं के उमड़ने की संभावना को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार और स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए चाक-चौबंद व्यवस्था की है। 7 जोन और 20 सेक्टरों में बंटा मेला क्षेत्र भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिहाज से पूरे बरसाना मेला क्षेत्र को 7 जोन और 20 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। चप्पे- चप्पे पर नजर रखने के लिए लगभग 3 हजार पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। इनमें 8 अपर पुलिस अधीक्षक, 38 पुलिस उपाधीक्षक, 75 निरीक्षक, 320 उप निरीक्षक, 68 महिला उप निरीक्षक, पीएसी की 2 कंपनी और पीएसी फ्लड की 2 प्लाटून शामिल हैं। इसके अलावा 155 सीसीटीवी कैमरों और ड्रोन के जरिए पूरे मेला क्षेत्र की सघन निगरानी की जाएगी। श्रद्धालुओं की मदद के लिए 2 खोया- पाया केंद्र और 6 वॉच टावर भी स्थापित किए गए हैं। यातायात और सुगम दर्शन के लिए विशेष प्रबंध श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई असुविधा न हो, इसके लिए भारी वाहनों का रूट डायवर्जन लागू किया गया है। उ.प्र.राज्य सड़क परिवहन निगम (यूपी रोडवेज) द्वारा 160 विशेष बसें चलाई जाएंगी, जबकि 40 बसों को रिजर्व रखा गया है। प्रत्येक बस पर दो- दो चालकों की ड्यूटी लगाई गई है। बरसाना में एक अस्थायी बस स्टैंड भी बनाया गया है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए 38 होल्डिंग एरिया, 50 पार्किंग स्थल, 88 बैरियर, 14 बैरिकेडिंग और 7 स्थानों पर जूता-घर की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य, स्वच्छता और प्लास्टिक मुक्त मेले पर जोर स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेला क्षेत्र में 12 मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। आपात स्थिति के लिए बाइक एंबुलेंस, नियमित दूरी पर एंबुलेंस और एंटी-वेनम दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। मेला क्षेत्र में उत्कृष्ट साफ- सफाई और पूरी तरह 'प्लास्टिक मुक्त' बनाने की व्यवस्था की गई है। भंडारा संचालकों को भी नियमित कूड़ा उठान और कूड़ादान रखने की हिदायत दी गई है। रोशनी से जगमग हुआ बरसाना  सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने, निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने तथा सुरक्षा के लिहाज से ट्रांसफार्मर और पोल की प्लास्टिक रैपिंग करने का कार्य किया गया है। मथुरा- वृंदावन विकास प्राधिकरण (एमवीडीए) द्वारा फसाड लाइटिंग, वॉल पेंटिंग और कपड़ों की सजावट से पूरे बरसाना को एक नव्य-भव्य रूप दिया गया है। वहीं खाद्य सुरक्षा विभाग भी मिलावटखोरों पर नकेल कसने के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।   स्थानीय निवासियों को भी मिलेंगे दर्शन के पास: जिलाधिकारी जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह ने कहा कि 19 सितंबर को श्री राधा अष्टमी पर्व को बरसाना में अत्यंत दिव्य, भव्य और धूमधाम से मनाया जाएगा। हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है कि बरसाना आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधाएं मिलें और वे बिना किसी परेशानी के सुगमता के साथ श्रीजी के दर्शन कर सकें। इसके लिए प्रशासन पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बाहरी श्रद्धालुओं के साथ- साथ इस बार बरसाना के स्थानीय निवासियों की सहूलियत का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। स्थानीय लोग भी इस पावन अवसर पर अपने आराध्य श्रीजी (श्री राधारानी जी) के दर्शन कर सकें, इसके लिए उन्हें प्रशासन की ओर से विशेष पास जारी किए गए हैं, ताकि उन्हें भीड़भाड़ में … Read more

आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन विषय पर एक-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

रायपुर छत्तीसगढ़ शासन इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आज गुरुवार को ‘आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन’ विषय पर एक-दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य राज्य शासन के अधिकारियों- कर्मचारियों को आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन की तकनीकी प्रक्रियाओं, ऑफलाइन सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन तथा आधार सेवाओं के सुरक्षित उपयोग से संबंधित व्यावहारिक जानकारी प्रदान करना था। कार्यशाला की मुख्य अतिथि खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की सचिव रीना बाबासाहेब कंगाले रहीं। उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं का लाभ सही हितग्राहियों तक पहुंचाने के लिए आधार प्रमाणीकरण एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। इसके प्रभावी क्रियान्वयन में कुछ व्यावहारिक चुनौतियां भी सामने आती हैं। ऐसे में आधार की ऑफलाइन सत्यापन व्यवस्था की जानकारी अधिकारियों एवं संबंधित विभागों के लिए महत्वपूर्ण और उपयोगी है।  कंगाले ने हितग्राही सत्यापन से जुड़ी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि फिंगरप्रिंट आधारित आधार प्रमाणीकरण के माध्यम से हितग्राहियों की पहचान सुनिश्चित करने से छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने और पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया को मजबूती मिली है। उन्होंने कहा कि कार्यशाला से अधिकारियों एवं विभागीय प्रतिनिधियों को आधार प्रमाणीकरण एवं सत्यापन की प्रक्रियाओं की बेहतर समझ मिलेगी तथा वे निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप इसका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित कर सकेंगे।   33 जिलों में 1,100 से अधिक आधार सेवा केंद्र संचालित  कार्यशाला में छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसाइटी (चिप्स) के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों में इन-हाउस मॉडल के तहत 1,100 से अधिक आधार सेवा केंद्र शासकीय परिसरों में संचालित किए जा रहे हैं । इन केंद्रों के माध्यम से नागरिकों को आधार नामांकन एवं अद्यतन की सुरक्षित, सुगम और विश्वसनीय सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है । उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 3 करोड़ 17 लाख 33 हजार से अधिक आधार पंजीकरण किए जा चुके हैं।  7 लाख से अधिक बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन अग्रवाल ने बताया कि नागरिकों तक आधार सेवाओं की सहज पहुँच सुनिश्चित करने के लिए राज्य के विभिन्न जिलों में विशेष आधार शिविरों का आयोजन किया गया है। विशेष रूप से 5-15 वर्ष तथा 15-17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन पर विशेष ध्यान देते हुए, इन शिविरों के माध्यम से अब तक 7 लाख से अधिक बच्चों का अनिवार्य बायोमेट्रिक अद्यतन सफलतापूर्वक किया जा चुका है। राज्य में 14 नये आधार सेवा केंद्र खोलने की अनुमति अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़़ राज्य के नागरिकों की सुविधा के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण ने राज्य में 14 नये आधार सेवा केंद्र खोलने की अनुमति प्रदान की है, जिसमें से 5 जिलों दुर्ग, महासमुंद, रायपुर, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा में आधार सेवा केंद्र का संचालन भी प्रारम्भ कर दिया गया है शेष स्थानों पर कार्य प्रगतिरत है । चिप्स द्वारा इन 14 स्थानों के अतिरिक्त 7 अन्य जिलों में आधार सेवा केंद्र खोलने का प्रस्ताव भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण को प्रेषित किया है।   आधार के सुरक्षित उपयोग एवं निर्धारित प्रक्रियाओं की दी जानकारी   कार्यशाला में वक्ता के रूप में नई दिल्ली से आये भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण के आधार उपयोग प्रभाग एवं मीडिया के  निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने कहा कि आधार अधिनियम के प्रावधानों के तहत आधार से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए स्पष्ट नियम एवं निर्धारित व्यवस्थाएं लागू हैं। उन्होंने कहा कि आधार का उपयोग नागरिकों की पहचान के सत्यापन को सुगम और सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने बताया कि नागरिक स्वयं भी अपने आधार का सत्यापन कर सकते हैं, जिसके लिए ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन माध्यम की सुविधा भी उपलब्ध है। उन्होंने आधार के सुरक्षित उपयोग, सत्यापन की निर्धारित प्रक्रियाओं, नागरिक सुविधा तथा डेटा सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों की जानकारी देते हुए कहा कि आधार सेवाओं का उपयोग निर्धारित नियमों एवं प्रक्रियाओं के अनुरूप किया जाना आवश्यक है। लेफ्टिनेंट कर्नल प्रवीण चौधरी ने बताया कि ऑफलाइन आधार सत्यापन का उपयोग व्यवसायिक संस्थाएं, बैंक आदि निजी संस्थाओं द्वारा आधार के मोबाइल एप के माध्यम से भी किया जा सकेगा।  कार्यशाला में वक्ता के रूप में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण, क्षेत्रीय कार्यालय, हैदराबाद के निदेशक  टी. रामकृष्ण उपस्थित रहे। उन्होंने देश में आधार व्यवस्था के क्रमिक विस्तार तथा इसके लिए विकसित की गई तकनीकी एवं संस्थागत अधोसंरचना की विस्तृत जानकारी दी । उन्होंने बताया कि आधार सेवा केंद्रों के निरंतर विस्तार के साथ नागरिकों के लिए नामांकन, अद्यतन एवं प्रमाणीकरण जैसी सेवाओं की पहुंच भी लगातार बढ़ी है। उन्होंने आधार की तकनीकी संरचना, सेवा वितरण तंत्र तथा इसके सुचारू संचालन के लिए विभिन्न स्तरों पर कार्यरत व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं पर भी जानकारी दी। तकनीकी सत्रों में आधार सत्यापन की प्रक्रियाओं पर हुई विस्तार से चर्चा कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में प्रतिभागियों को ऑफलाइन आधार सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन तथा आधार सेवाओं के सुरक्षित उपयोग से संबंधित व्यावहारिक जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने सीमित नेटवर्क वाले क्षेत्रों में ऑफलाइन सत्यापन की उपयोगिता तथा फिंगरप्रिंट अथवा आइरिस प्रमाणीकरण में कठिनाई होने की स्थिति में फेस ऑथेंटिकेशन के उपयोग और लाभों के बारे में विस्तार से बताया।  150 से अधिक अधिकारियों ने लिया भाग कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक भास्कर विलास संदीपन, कोष एवं लेखा संचालनालय के संचालक एस. जयवर्धन, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण संचालनालय की संचालक डॉ. फरिहा आलम, चिप्स के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी शशांक पांडे, संयुक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपम आशीष टोप्पो एवं आशीष जायसवाल सहित विभिन्न विभागों के 150 से अधिक अधिकारियों ने भाग लिया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने लिए अनेक ऐतिहासिक निर्णय, जनकल्याण और राष्ट्र निर्माण को मिली नई गति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर   प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिवस पर आज राजधानी रायपुर का महादेव घाट सवा लाख दीपों की ज्योति से जगमगा उठा। खारुन नदी के पावन तट पर आयोजित विराट दीपोत्सव एवं महाआरती ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय शामिल हुए और प्रदेशवासियों के साथ प्रधानमंत्री  मोदी के उत्तम स्वास्थ्य एवं दीर्घायु जीवन की मंगलकामना की। सवा लाख दीपों की एक साथ प्रज्वलित ज्योति से महादेव घाट का पूरा परिसर आलोकित हो उठा। श्रद्धा, आस्था और जनभागीदारी के इस अनुपम संगम के बीच खारुन मैया की भव्य महाआरती की गई। मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने अपना जीवन राष्ट्र और जनसेवा को समर्पित किया है। उनके नेतृत्व में भारत ने विकास, जनकल्याण और राष्ट्रीय स्वाभिमान के क्षेत्र में अनेक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। प्रधानमंत्री  मोदी दिन-रात 140 करोड़ देशवासियों की सेवा में जुटे हैं और उनके नेतृत्व में आज भारत विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज खारुन मैया के पावन तट पर प्रज्वलित सवा लाख दीप प्रधानमंत्री  मोदी के प्रति छत्तीसगढ़वासियों के स्नेह, आत्मीयता और शुभकामनाओं की अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से प्रधानमंत्री  मोदी को जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ, सुदीर्घ और यशस्वी जीवन की मंगलकामना की। विराट दीपोत्सव के दौरान साध्वी प्रज्ञा भारती एवं आचार्यों द्वारा विधि-विधान के साथ खारुन मैया की महाआरती की गई। मुख्यमंत्री  साय ने भी महाआरती में सहभागिता की। इस अवसर पर प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी को समर्पित साध्वी प्रज्ञा भारती द्वारा रचित एवं स्वरबद्ध गीत का मुख्यमंत्री ने विमोचन किया। प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में देश ने देखे ऐतिहासिक परिवर्तन मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने ऐसे अनेक ऐतिहासिक निर्णय और परिवर्तन देखे हैं, जिनकी लंबे समय से प्रतीक्षा थी। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को हटाने से लेकर अयोध्या में भगवान  रामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने तक देश ने नए आत्मविश्वास और सामर्थ्य का अनुभव किया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रहित में बड़े और दूरगामी निर्णय लिए गए हैं। उनके दृढ़ संकल्प, स्पष्ट दृष्टि और राष्ट्रसेवा की भावना ने देश में विकास और जनकल्याण की गति को तेज किया है। आज भारत विश्व मंच पर अधिक आत्मविश्वास और सामर्थ्य के साथ अपनी भूमिका निभा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के लिए शासन का केंद्र हमेशा गरीब और समाज के अंतिम पायदान पर खड़ा व्यक्ति रहा है। इसी भावना के अनुरूप गरीब परिवारों को पक्का आवास, घर-घर शौचालय, जन-धन खाते, रसोई गैस कनेक्शन, खाद्यान्न सुरक्षा और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जोड़ने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी प्रत्येक देशवासी को अपने परिवार का सदस्य मानकर ‘सबका साथ, सबका विकास’ के ध्येय के साथ निरंतर कार्य कर रहे हैं। उनकी सरकार ने गरीब की छोटी से छोटी आवश्यकता और उसके जीवन को बेहतर बनाने वाली सुविधाओं को शासन की प्राथमिकता बनाया है। प्रधानमंत्री के साथ काम करने का अवसर मेरे सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण अनुभव : मुख्यमंत्री  साय मुख्यमंत्री  साय ने प्रधानमंत्री  मोदी के साथ अपने कार्य अनुभव को स्मरण करते हुए कहा कि वर्ष 2014 में जब  नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने, तब मुझे भी उनकी सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री के रूप में कार्य करने का अवसर प्राप्त हुआ। उस दौरान मुझे उनकी कार्यशैली, अनुशासन, परिश्रम और जनसेवा के प्रति समर्पण को निकट से देखने और समझने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी का पूरा जीवन राष्ट्र के प्रति समर्पण और जनसेवा की प्रेरक यात्रा है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में प्रदेश की सेवा से लेकर प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व करने तक उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष सेवा और सुशासन को समर्पित रहे हैं। यह देश का सौभाग्य है कि हमें ऐसा नेतृत्व मिला है, जिसने विश्व पटल पर भारत का मान और सम्मान बढ़ाया है। प्रधानमंत्री  मोदी का छत्तीसगढ़ से रहा है गहरा आत्मीय जुड़ाव मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी का छत्तीसगढ़ के लोगों के साथ गहरा आत्मीय जुड़ाव रहा है। प्रदेश के विकास को केंद्र सरकार से निरंतर सहयोग और मार्गदर्शन मिला है। प्रधानमंत्री  मोदी की विकास दृष्टि में छत्तीसगढ़ और विशेष रूप से यहां के जनजातीय तथा दूरस्थ अंचलों के विकास को महत्वपूर्ण स्थान मिला है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व, केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह की दृढ़ इच्छाशक्ति और हमारे सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से छत्तीसगढ़ ने माओवादी हिंसा के विरुद्ध निर्णायक सफलता हासिल की है। वर्षों तक हिंसा और पिछड़ेपन का दंश झेलने वाले बस्तर में आज शांति और विकास के नए द्वार खुले हैं। सड़क, बिजली, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य मूलभूत सुविधाएं दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं तथा विकास की नई संभावनाएं आकार ले रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर के लोगों के जीवन में आ रहा यह परिवर्तन विकसित छत्तीसगढ़ के संकल्प को नई शक्ति दे रहा है। राज्य सरकार का प्रयास है कि शांति के वातावरण में बस्तर की प्राकृतिक संपदा, पर्यटन, संस्कृति और वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था की संभावनाओं को स्थानीय लोगों की समृद्धि और रोजगार से जोड़ा जाए। जनसेवा के 25 वर्षों पर एक महीने तक ‘सेवा संकल्प अभियान’ मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में जनसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आज 17 सितम्बर से 17 अक्टूबर तक देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ प्रारंभ हुआ है। यह अभियान प्रधानमंत्री  मोदी के सेवा, सुशासन, गरीब कल्याण और राष्ट्र निर्माण के संकल्प को जनभागीदारी से आगे बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से स्वच्छता, स्वास्थ्य, पोषण, पर्यावरण संरक्षण, जरूरतमंदों की सहायता और जनकल्याण से जुड़े विभिन्न कार्यों को जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने प्रदेशवासियों से इस अभियान में सक्रिय सहभागिता करते हुए सेवा के संकल्प को अपने गांव, शहर, मोहल्ले और समाज तक पहुंचाने का आह्वान किया। सवा लाख दीपों ने दिया सामूहिक शुभकामनाओं का संदेश मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि आज महादेव घाट पर सवा लाख दीप … Read more

50 साल से अधिक उम्र के कलाकारों के लिए खुशखबरी, बिहार सरकार दे रही 3000 रुपये पेंशन

पटना  Bihar Artist Pension Scheme:कला के मंच पर वर्षों तक अपनी प्रतिभा दिखाने वाले वरिष्ठ कलाकारों के लिए बिहार सरकार की मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना आर्थिक सहारा बन रही है। 50 वर्ष से अधिक उम्र और कम आय वाले ऐसे कलाकार, जिन्होंने कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों तक योगदान दिया है, इस योजना का लाभ ले सकते हैं। चयनित कलाकारों को हर महीने 3,000 रुपये पेंशन दी जाती है। जनवरी 2026 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक विभिन्न जिलों के करीब 411 कलाकारों को डीबीटी के माध्यम से पेंशन दी जा रही है। 50 साल की उम्र और 10 साल का अनुभव जरूरी योजना का लाभ लेने के लिए कलाकार की उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। आवेदक बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए और कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों का अनुभव होना जरूरी है। इसके साथ ही उसकी वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम होनी चाहिए। आवेदक को किसी अन्य सरकारी पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा हो। कलाकार का बिहार के कला एवं संस्कृति विभाग के पोर्टल पर पंजीकरण भी अनिवार्य है। विभागीय विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा के बाद पात्र कलाकारों को पेंशन की स्वीकृति दी जाती है। अब तक 411 कलाकारों को मिली पेंशन सरकारी स्वीकृतियों के अनुसार जून 2026 के लिए अलग-अलग आदेशों में 258 और 153 अनुशंसित कलाकारों को 3,000 रुपये प्रतिमाह की दर से पेंशन देने की मंजूरी दी गई। इस तरह करीब 411 कलाकारों को योजना के तहत पेंशन उपलब्ध कराई गई है। राशि सीधे कलाकारों के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है। आवेदन से चयन तक कैसे पहुंचता है नाम? कलाकारों को सबसे पहले बिहार कलाकार पंजीकरण पोर्टल पर अपनी प्रोफाइल बनानी होती है। इसके लिए artistregistration.bihar.gov.in पर जाकर नाम और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करना होगा। मोबाइल पर आए ओटीपी के बाद आवेदन फार्म खुलेगा। आवेदन में व्यक्तिगत जानकारी के साथ कलाकार को अपने कला क्षेत्र, अनुभव और अब तक दी गई प्रस्तुतियों का विवरण देना होगा। बैंक खाते की जानकारी के साथ अपनी तस्वीर, प्रस्तुतियों की तस्वीरें और वीडियो भी अपलोड किए जा सकते हैं। तीन स्तरों पर होती है जांच आवेदन मिलने के बाद पात्रता की प्राथमिक जांच की जाती है। इसके बाद आवेदन संबंधित जिले के कला एवं संस्कृति कार्यालय तक पहुंचता है। यहां कलाकार के आयु, निवास, आय और कला क्षेत्र से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाती है। जिला स्तर की जांच के बाद आवेदन विभागीय चयन समिति के पास भेजे जाते हैं। समिति पात्र कलाकारों के अनुभव, आर्थिक स्थिति और कला क्षेत्र में योगदान से जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा करती है। अनुशंसित कलाकारों के नाम पर अंतिम स्वीकृति के बाद पेंशन की राशि डीबीटी से बैंक खाते में भेजी जाती है। किन कलाकारों के लिए है योजना?     उम्र 50 वर्ष या उससे अधिक हो।     बिहार का स्थायी निवासी होना जरूरी।     कला के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव हो।     वार्षिक आय 1.20 लाख रुपये से कम हो।     किसी अन्य सरकारी पेंशन का लाभ नहीं ले रहे हों।     बिहार कलाकार पंजीकरण पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है।     विभागीय जांच और चयन समिति की अनुशंसा के बाद पेंशन स्वीकृत होगी। ऐसे करें पंजीयन 1. artistregistration.bihar.gov.in पर जाएं। 2. नाम और मोबाइल नंबर से रजिस्ट्रेशन करें। 3. ओटीपी के बाद बेसिक डिटेल भरें। 4. कला क्षेत्र, अनुभव और प्रस्तुतियों की जानकारी दें। 5. बैंक खाते का विवरण भरें। 6. फोटो, प्रस्तुति की तस्वीरें और वीडियो अपलोड करें। 7. आवेदन जमा करने के बाद विभागीय जांच और चयन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करें।  

500 मीटर तटबंध ध्वस्त, रेलवे लाइन पर मंडराया खतरा; राघोपुर में स्थायी समाधान की मांग

भागलपुर  राघोपुर 1994 से गंगा के कटाव का दंश झेल रहा है। गंगा की धारा के दबाव में वर्षों से गांव और खेती की जमीन कटती रही है। हर साल बाढ़ और कटाव के दौरान करोड़ों रुपये की योजनाएं और फ्लड फाइटिंग कार्य किए गए, लेकिन राघोपुर को अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल सका। 500 मीटर तटबंध ध्वस्त होने से मचा था हाहाकार राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध पर इस बार कटाव ने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी। करीब 500 मीटर तटबंध ध्वस्त होने के बाद इलाके में हाहाकार मच गया था। ग्रामीणों की चिंता और हालात की गंभीरता मुख्यमंत्री तक पहुंची। इसके बाद मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप से गंगा की धारा को रोकने और राघोपुर को बचाने के लिए बड़े स्तर पर बचाव कार्य शुरू हुआ। बचाव कार्य से फिलहाल कटाव पर नियंत्रण मिला है, लेकिन खतरा पूरी तरह टला नहीं है। तटबंध के आगे बची जमीन और उसके बाद मौजूद रेलवे लाइन की सुरक्षा अब सबसे बड़ी चिंता है। अब तक करोड़ों खर्च, फिर भी कटाव बरकरार उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार राघोपुर-काजीकोरैया जमींदारी तटबंध पर वर्ष 2005-06 में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से स्थायी कटाव निरोधी कार्य शुरू हुआ था। इसके बाद 2008 में करीब 18.77 करोड़, 2014 में करीब 67.99 करोड़ और 2015 में करीब 65 करोड़ रुपये की योजनाओं का उल्लेख मिलता है। 2016 में इस्माइलपुर-बिंदटोली और राघोपुर क्षेत्र के लिए करीब 115 करोड़ रुपये की योजना भी सामने आई थी। एक पुराने आकलन के अनुसार, 2006 से 2019 के बीच पूरे नवगछिया अनुमंडल में स्थायी कटाव निरोधी और फ्लड फाइटिंग कार्यों पर करीब 686 करोड़ रुपये खर्च हुए। इसके बावजूद राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध हर साल गंगा के दबाव से जूझता रहा। 2026 में फिर करीब पांच करोड़ की योजना राघोपुर को कटाव से बचाने के लिए वर्ष 2026 में भी करीब पांच करोड़ रुपये की प्राक्कलित लागत से कटाव निरोधी योजना तैयार की गई थी। लेकिन जुलाई में गंगा के तेज कटाव ने बचाव की तैयारियों की परीक्षा ले ली। तटबंध का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हुआ और जल संसाधन विभाग का अस्थायी कैंप कार्यालय भी गंगा में समा गया। जल संसाधन विभाग के अभियंता प्रमुख ई. वरुण कुमार ने रेलवे ट्रैक की सुरक्षा को प्राथमिकता बताते हुए अतिरिक्त संसाधन और बड़े संवेदकों को बचाव कार्य में लगाने की बात कही है। विभाग के अनुसार नदी की मुख्य धारा तटबंध की ओर शिफ्ट होने और विक्रमशिला सेतु के अपस्ट्रीम में तेज बहाव के कारण मार्जिनल बांध पर लगातार दबाव बना हुआ था। सवाल सिर्फ कटाव का नहीं, खर्च का भी राघोपुर की मौजूदा स्थिति अब सिर्फ बाढ़ और कटाव का मामला नहीं रह गई है। वर्षों में करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी तटबंध बार-बार कमजोर पड़ रहा है। ऐसे में स्थायी समाधान को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। रेलवे लाइन तक पहुंचा संकट राघोपुर में कटाव जिस तेजी से बढ़ा है, उसने रेलवे लाइन की सुरक्षा को भी चिंता के केंद्र में ला दिया है। यदि गंगा की धारा इसी दिशा में दबाव बनाए रखती है तो बची जमीन के साथ रेलवे परिसंपत्तियों पर भी खतरा बढ़ सकता है। इसी बीच स्थायी समाधान की दिशा में पहल को लेकर प्रधानमंत्री के निर्देश पर बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के भागलपुर एवं राघोपुर आगमन को लेकर ग्रामीणों में उम्मीद जगी है। वर्षों से कटाव का दंश झेल रहे लोगों को उम्मीद है कि इस बार सिर्फ तत्काल बचाव तक मामला सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राघोपुर के लिए स्थायी कटाव निरोधी समाधान की दिशा में ठोस निर्णय होगा। सुलगते सवाल     क्या स्थायी कटाव निरोधी योजनाओं की तकनीकी डिजाइन बदलती नदी की धारा के अनुरूप रही?     क्या निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और निगरानी पर्याप्त रही?     क्या हर साल फ्लड फाइटिंग पर होने वाले खर्च के बावजूद स्थायी सुरक्षा की प्रभावी रणनीति तैयार नहीं हो सकी?  

CM योगी ने विश्वकर्मा मंदिर में की पूजा, शिल्पकारों के लिए पीएम विश्वकर्मा योजना की सराहना की

लखनऊ भगवान विश्वकर्मा की पावन जयंती पर शिल्पकारों-कारीगरों सहित समस्त प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो देश शिल्पकारों व कारीगरों को सम्मान देता है, वही आगे बढ़ता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने इसी भावना को अपनाकर पीएम विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का प्लेटफार्म दिया है। उन्होंने शिल्प व कारीगरी को आधुनिक तकनीक और नए बाजार से जोड़कर शिल्पकारों-कारीगरों को समृद्धि के पथ पर आगे बढ़ाया है। सीएम योगी गुरुवार सुबह जटाशंकर स्थित श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर में आयोजित श्री विश्वकर्मा पूजनोत्सव कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। विश्वकर्मा मंदिर में सीएम योगी ने पूजा की मंदिर में भगवान विश्वकर्मा की विधि विधान से आराधना करने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि राजमिस्त्री, बढ़ई, हलवाई, सोनार का काम करने वालों सहित कारीगरी के तमाम पेशे से जुड़े लोगों के लिए उनकी शिल्प कला ही स्वावलंबन का आधार थी। पर, यह हुनर, शिल्प-कारीगरी आजादी के बाद दशकों तक उपेक्षा का शिकार रही। पीएम मोदी जी के मार्गदर्शन में पहली बार डबल इंजन सरकार ने शिल्पकारों-कारीगरों को प्रशिक्षण, टूलकिट और रोजगार के विभिन्न आयामों के साथ जोड़कर उन्हें आगे बढ़ाया है। डबल इंजन सरकार के प्रोत्साहन से यूपी में आज तीन करोड़ से अधिक लोग कारीगरी, शिल्प से जुड़कर रोजगार और स्वावलंबन की राह पर सफलतापूर्वक आगे बढ़े हैं। भगवान विश्वकर्मा सृष्टि और PM मोदी नए भारत के शिल्पी- योगी सीएम योगी ने कहा कि आज का दिन अत्यंत पवित्र है। आज सृष्टि के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की जयंती है तो साथ ही आज नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का जन्मदिन भी है। आज हर कारीगर, शिल्पी जिसके पास कोई विशिष्ट शिल्प है, वह पूजन के जरिये सृष्टि के शिल्पी प्रभु विश्वकर्मा के प्रति कृतज्ञता व्यक्त कर रहा है। मुख्यमंत्री ने पीएम मोदी के सुदीर्घ स्वस्थ जीवन की कामना करते हुए कहा, ‘गुरु गोरखनाथ की पावन धरा से भगवान विश्वकर्मा के मंदिर में सृष्टि के शिल्पी के श्रीचरणों में नमन करते हुए मैं यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिन पर प्रदेशवासियों की तरफ से हृदय से बधाई देता हूं। यह प्रार्थना है कि लंबे समय तक उनका मार्गदर्शन प्राप्त होता रहे और उनकी विकसित भारत की परिकल्पना साकार हो।’ कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने श्री विश्वकर्मा पूजनोत्सव पुस्तक का विमोचन भी किया। मंदिर समिति के अध्यक्ष ने सीएम का स्वागत किया मुख्यमंत्री का स्वागत श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर समिति के अध्यक्ष दयानंद शर्मा ने किया। इस अवसर पर महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्रा, क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, स्थानीय पार्षद छट्ठीलाल गुप्ता, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, श्री विश्वकर्मा पंचायत मंदिर समिति से जुड़े जयप्रकाश शर्मा, अनूप शर्मा, अजय विश्वकर्मा सहित बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता रही।

गौलाना में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ का शुभारंभ, 1,751 चयनित विद्यार्थियों का सम्मान; 9 केंद्रों पर होगी निःशुल्क तैयारी

भोपाल  उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा है कि गरीब और सामान्य परिवार के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के सपनों के बीच आर्थिक परिस्थितियां बाधा नहीं बनें, यही ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ का मूल उद्देश्य है। सरकार का प्रयास है कि विद्यार्थियों को अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की सुविधा निःशुल्क उपलब्ध हो। मंत्री  परमार गुरुवार को शाजापुर जिले के गौलाना स्थित डॉ भीमराव अंबेडकर शासकीय सांदीपनि विद्यालय में ‘प्रतिभा मंदिर प्रकल्प’ के शुभारंभ एवं प्रतिभा खोज परीक्षा में चयनित विद्यार्थियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने चयनित 1 हजार 751 विद्यार्थियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे। गरीब पिता की पीड़ा से उपजा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का संकल्प मंत्री  परमार ने कहा कि अच्छे विद्यालयों में पढ़ने का अवसर हर बच्चे का अधिकार है। उन्होंने कहा कि एक गरीब पिता की उस पीड़ा ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया, जब उसकी बेटी ने शहर के बड़े और अच्छे विद्यालय को देखकर वहां पढ़ने की इच्छा व्यक्त की, लेकिन आर्थिक स्थिति के कारण पिता अपनी बेटी का सपना पूरा नहीं कर सका। इसी पीड़ा को समझते हुए सरकार ने ऐसे विद्यालयों और शैक्षणिक व्यवस्थाओं के निर्माण पर जोर दिया, जहां गरीब परिवार के बच्चे भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकें।  परमार ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को व्यापक बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से प्रदेश में सीएम राइज एवं सांदीपनि विद्यालयों के माध्यम से विद्यार्थियों को बेहतर अधोसंरचना, सुविधाएं और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध हो रही है। महंगी कोचिंग के आर्थिक बोझ से विद्यार्थियों को मिलेगी मुक्ति मंत्री  परमार ने कहा कि JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए अनेक विद्यार्थी इंदौर, कोटा सहित बड़े शहरों का रुख करते हैं। महंगी कोचिंग और रहने-खाने का खर्च सामान्य एवं गरीब परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होता है। कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए अपनी जमीन तक बेचने को मजबूर हो जाते हैं।  परमार ने कहा कि ‘प्रतिभा मंदिर’ के माध्यम से इसी आर्थिक बोझ को कम करने का प्रयास किया गया है। अब विद्यार्थियों को अपने जिले में ही निःशुल्क कोचिंग और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध होगा। 6,600 से अधिक पंजीयन, 1,751 विद्यार्थियों का चयन मंत्री  परमार ने बताया कि प्रतिभा खोज परीक्षा के लिए 6,600 से अधिक विद्यार्थियों ने पंजीयन कराया था। परीक्षा के परिणाम में 1,751 विद्यार्थियों का चयन हुआ है। इनमें 937 विद्यार्थी कक्षा 9 की आधारभूत तैयारी, 347 JEE तथा 467 NEET की तैयारी करेंगे। विद्यार्थियों की व्यापक भागीदारी को देखते हुए प्रतिभा मंदिर केंद्रों की संख्या 3 से बढ़ाकर 9 की गई है। उन्होंने कहा कि आवश्यकता होने पर आगे एक-दो केंद्र और बढ़ाए जाएंगे, ताकि चयनित किसी भी विद्यार्थी को तैयारी के अवसर से वंचित न होना पड़े। कोटा और नई दिल्ली के विशेषज्ञ देंगे मार्गदर्शन प्रतिभा मंदिर की कक्षाएं कोटा एवं नई दिल्ली स्थित स्टूडियो से ऑनलाइन संचालित होंगी। विषय-विशेषज्ञ शिक्षक विद्यार्थियों को JEE और NEET की तैयारी के लिए मार्गदर्शन देंगे। अध्ययन सामग्री डिजिटल माध्यमों के साथ मुद्रित स्वरूप में भी उपलब्ध कराई जाएगी। मंत्री  परमार ने कहा कि यह केवल कोचिंग की व्यवस्था नहीं, बल्कि प्रतिभाओं के निर्माण की एक सतत प्रक्रिया है। उन्होंने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और भविष्य को गढ़ने का कार्य करते हैं। जिस प्रकार मंदिर के शिल्पकार पत्थर को तराशकर सुंदर प्रतिमा का निर्माण करता है, उसी प्रकार शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और मार्गदर्शन से विद्यार्थियों के जीवन को आकार देते हैं। अब महाविद्यालयों में पीएससी की तैयारी की भी होगी व्यवस्था मंत्री  परमार ने कार्यक्रम में घोषणा की कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आने वाले समय में महाविद्यालयों में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी के लिए भी कोचिंग की व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार आवश्यकता के अनुसार इस व्यवस्था पर संसाधन उपलब्ध कराएगी, ताकि विद्यार्थियों को प्रशासनिक एवं अन्य सेवाओं में जाने के लिए अपने ही संस्थानों में बेहतर मार्गदर्शन मिल सके। इसकी शुरुआत शाजापुर जिले से करने का प्रयास किया जाएगा। प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय संकल्प को धरातल पर उतारने का प्रयास मंत्री  परमार ने कहा कि 15 अगस्त को लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी द्वारा युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के समान अवसर उपलब्ध कराने के राष्ट्रीय संकल्प को मध्यप्रदेश में धरातल पर उतारने की दिशा में ‘प्रतिभा मंदिर’ महत्वपूर्ण पहल है। प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर विद्यार्थियों को यह प्रकल्प समर्पित करना इस संकल्प को सेवा और कार्य के रूप में आगे बढ़ाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के माध्यम से शिक्षा को भारतीय दृष्टि, ज्ञान और आत्मविश्वास से जोड़ने का कार्य किया गया है। विद्यार्थियों में यह भाव विकसित होना चाहिए कि वे केवल अपने भविष्य के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र के निर्माण के लिए भी शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। नवाचार और प्रतिभाओं को भी मिलेगा प्रोत्साहन मंत्री  परमार ने बताया कि जिले में विद्यार्थियों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए चित्रकला एवं भाषण प्रतियोगिताओं के साथ विज्ञान एवं अन्य क्षेत्रों में किए जा रहे नवाचारों को भी प्रोत्साहित और पुरस्कृत किया जाएगा। इसका उद्देश्य विद्यालय और महाविद्यालय स्तर की प्रतिभाओं को आगे बढ़ाकर उन्हें प्रदेश और देश के विकास से जोड़ना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि एकाग्रता, परिश्रम और निरंतर सीखने की भावना के साथ आगे बढ़ें। सरकार उनके साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक, ज्ञान आधारित और भारत-केंद्रित परिवर्तन के लिए निरंतर कार्य किया जा रहा है। शिक्षा के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को मिलेगी गति मंत्री  परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे नवाचारों का उद्देश्य ऐसे विद्यार्थियों का निर्माण करना है, जो ज्ञान, कौशल, संस्कार और राष्ट्रभाव से संपन्न हों। विद्यालय और महाविद्यालय केवल शिक्षा प्राप्त करने के स्थान नहीं, बल्कि श्रेष्ठ नागरिकों के निर्माण के केंद्र हैं। उन्होंने कहा कि ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना भारत की विशेषता है। हमारे विद्यार्थी ज्ञान … Read more

2002 से वर्तमान तक तकनीकी शिक्षा का विस्तार, आधुनिकता और आत्मनिर्भरता की नई दिशा

भोपाल  मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा का विस्तार बीते दो दशकों में हुए व्यापक बदलावों की कहानी कहता है। वर्ष 2002 में प्रदेश में जहां शासकीय एवं निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 266 थी, वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,211 हो गई। इस प्रकार दो दशकों में तकनीकी शिक्षण संस्थानों के नेटवर्क में लगभग 355 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसी अवधि में पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों की संख्या भी वर्ष 2002 के 42 से बढ़कर वर्ष 2024 में 129 हो गई, अर्थात लगभग 212 प्रतिशत की वृद्धि। यह विस्तार प्रदेश में तकनीकी एवं कौशल आधारित शिक्षा के बढ़ते आधार और युवाओं के लिए उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों के व्यापक विस्तार को दर्शाता है। यह यात्रा केवल संस्थानों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है। तकनीकी शिक्षा के विस्तारित आधार ने विद्यार्थियों के लिए अध्ययन, कौशल-विकास, रोजगार, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के नए अवसरों की नींव तैयार की है। अब इसी आधार को गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक, उद्योगोन्मुख शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इसी विकसित आधार को नई दिशा और गति देने का कार्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार के नेतृत्व में किया जा रहा है। वर्तमान सरकार के विगत ढाई वर्षों में तकनीकी शिक्षा को केवल संस्थानों और प्रवेश संख्या के विस्तार तक सीमित न रखते हुए उसे भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था, रोजगार, उद्यमिता, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है। विस्तार से गुणवत्ता और उपयोगिता की ओर वर्ष 2002 से 2024 तक तकनीकी शिक्षा के संस्थागत विस्तार ने प्रदेश में एक मजबूत आधार तैयार किया। अब इसी आधार पर तकनीकी शिक्षा को अधिक आधुनिक, रोजगारोन्मुख और कौशल-आधारित बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है। वर्तमान में प्रदेश में 138 इंजीनियरिंग महाविद्यालय संचालित हैं, जिनकी कुल प्रवेश क्षमता 74,722 है। वहीं 128 पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में 36,491 सीटों के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। इस परिवर्तन का अगला महत्वपूर्ण पक्ष है—तकनीकी शिक्षा को विद्यार्थियों की वास्तविक आवश्यकताओं और रोजगार बाजार से जोड़ना। शासकीय संस्थानों में सक्रिय ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल के माध्यम से 40 से 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को रोजगार एवं प्लेसमेंट प्राप्त हो रहा है। इस प्रकार तकनीकी शिक्षा का विकास अब केवल ‘कितने संस्थान’ के प्रश्न से आगे बढ़कर ‘इन संस्थानों से विद्यार्थियों को क्या अवसर मिल रहे हैं’ के प्रश्न का उत्तर देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में बढ़ता विश्वास तकनीकी शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि का प्रभाव प्रवेश संख्या में भी दिखाई देता है। सत्र 2024-25 में 1 लाख 50 हजार 178 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जो सत्र 2025-26 में बढ़कर 1 लाख 89 हजार 210 हो गया। इस प्रकार कुल प्रवेश में 25.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप प्रवेश संख्या में 21.38 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह संकेत देता है कि तकनीकी एवं कौशल आधारित शिक्षा अब युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार की महत्वपूर्ण राह बन रही है। डिप्लोमा को 12वीं के समतुल्य मान्यता : तकनीकी शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने का कदम तकनीकी शिक्षा को सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से अधिक व्यापक अवसरों से जोड़ने के लिए पॉलिटेक्निक डिप्लोमा को कक्षा 12वीं के समतुल्य घोषित किया गया है। इस निर्णय से डिप्लोमा विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न रोजगार अवसरों का दायरा विस्तृत हुआ है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप पॉलिटेक्निक डिप्लोमा उत्तीर्ण विद्यार्थी तकनीकी के साथ-साथ गैर-तकनीकी विषयों में भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकता है। अर्थात तकनीकी शिक्षा को अब एक अलग धारा के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में सशक्त किया जा रहा है। प्रतिभा के साथ सरकार का आर्थिक संबल तकनीकी शिक्षा के विस्तार को तभी सार्थक बनाया जा सकता है, जब आर्थिक कारणों से कोई प्रतिभाशाली विद्यार्थी अवसर से वंचित न हो। इसी दृष्टि से मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है। सत्र 2024-25 में 78 हजार 218 से अधिक विद्यार्थियों को लगभग 750 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 74 हजार 349 मेधावी विद्यार्थियों को लगभग 1,100 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता दी गई। इसी प्रकार मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14 हजार 447 विद्यार्थियों को 14.55 करोड़ रूपये तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 35 हजार से अधिक विद्यार्थियों को 127.50 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई। SGSITS इंदौर में ‘अटल वित्तीय सहायता योजना’ की शुरुआत भी इसी छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण का उदाहरण है। योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रतिवर्ष 1 करोड़ रूपये की आनुपातिक आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। डिप्लोमा से द्वितीय वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को भी इसका लाभ दिया जा रहा है।  मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा : ज्ञान के साथ आत्मविश्वास राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीकी शिक्षा में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी माध्यम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बी.टेक. सिविल के हिंदी माध्यम विद्यार्थियों को विशेष प्रोत्साहन तथा अंतिम वर्ष में अधिकतम 2 लाख रूपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है। इस पहल का उद्देश्य केवल भाषा का विकल्प देना नहीं, बल्कि हिंदी माध्यम से आने वाले विद्यार्थियों के लिए तकनीकी विषयों की समझ, आत्मविश्वास और अवसरों को मजबूत करना है। स्थानीय आवश्यकता से जुड़ी तकनीकी शिक्षा तकनीकी शिक्षा को स्थानीय अर्थव्यवस्था और उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में सिंगरौली में 76.56 करोड़ रूपये की लागत से अत्याधुनिक खनन प्रौद्योगिकी महाविद्यालय का निर्माण प्रगति पर है। CSR सहयोग से विकसित हो रहा यह संस्थान स्थानीय खनन एवं ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इस प्रकार तकनीकी शिक्षा को स्थानीय संसाधनों, उद्योगों और रोजगार की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों से शैक्षणिक जुड़ाव IIT इंदौर एवं MANIT भोपाल के साथ शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से प्रदेश के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में अध्ययन, अनुसंधान … Read more

मुख्यमंत्री ने विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 का किया शुभारंभ, 25 ट्रेड के कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर

लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित विश्वकर्मा स्वरोजगार एवं स्वदेशी मेला-2026 के अवसर पर प्रदर्शनी एवं मार्जिन मनी ऋण पोर्टल का शुभारंभ किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सरकारों को सैफई में महोत्सव आयोजित कर मुंबई से डांस कराने और बर्मिंघम की बग्गी लाकर अपना जन्मदिन मनाने से फुर्सत न हो, तब कारीगरों के बारे में सोचने का समय कहां से आता। उन्होंने कहा कि तब स्वदेशी और आत्मनिर्भरता के बारे में सोचने की भी फुर्सत नहीं थी। हमारी सरकार ने परंपरागत कारीगरों के हुनर को सम्मान देने और उसे बाजार की आवश्यकता से जोड़ने का काम किया। वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना लागू की गई और वर्ष 2019 में विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना शुरू की गई। छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को प्रदान की टूलकिट  मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा की जयंती और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस का यह अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण है। कारीगरों और हस्तशिल्पियों के सम्मान का यह कार्यक्रम नए भारत के शिल्पी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वकर्मा से जुड़ी योजनाओं को आगे बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन दिया। उत्तर प्रदेश में 2019 से विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के माध्यम से पारंपरिक कारीगरों और हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण, टूलकिट तथा स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। पिछले सात-आठ वर्षों में छह लाख से अधिक हस्तशिल्पियों और कारीगरों को टूलकिट उपलब्ध कराने के साथ प्रशिक्षण दिया गया है और उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाया गया है। भगवान विश्वकर्मा के मानस प्रतिनिधि हैं हमारे कारीगर मुख्यमंत्री ने भगवान विश्वकर्मा के शिल्प और उनकी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि अपनी अद्भुत शिल्पकला से भगवान विश्वकर्मा ने समाज के कल्याण में योगदान दिया। भगवान शिव का त्रिशूल, इंद्र का वज्र और श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र भी भगवान विश्वकर्मा की शिल्पकला से जुड़े उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई उद्योग या कारीगरी का क्षेत्र नहीं होगा, जहां विश्वकर्मा पूजन की परंपरा न रही हो। उन्होंने रामायण के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि जब भगवान राम को लंका पर चढ़ाई करनी थी, तब समुद्र पर सेतु का निर्माण करने वाले नल और नील भगवान विश्वकर्मा के मानस पुत्र माने जाते हैं। सौ योजन समुद्र में बिना पिलर के सेतु का निर्माण कुछ ही दिनों में पूरा होना उस समय की अद्भुत कारीगरी और शिल्पकला को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान विश्वकर्मा के उन्हीं मानस प्रतिनिधियों के रूप में आज हमारे कारीगर और हस्तशिल्पी समाज के सामने हैं। पहले कारीगर उद्यमी था, फिर श्रमिक बनने को मजबूर हुआ मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत उस समय दुनिया में विकसित था, जब भारत का कारीगर उद्यमी था और हस्तशिल्पी आत्मनिर्भर था। उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों ने गरीबी और पैसे का हवाला देकर कारीगरों को सुविधाओं से वंचित रखा। उनके पास हुनर और कारीगरी थी, लेकिन बाजार उनसे दूर कर दिया गया। बैंकिंग व्यवस्था से उन्हें दूर रखा गया और डिजाइन तथा तकनीक की बदलती मांग के अनुरूप उन्हें आगे बढ़ने का अवसर नहीं मिला। उन्होंने कहा कि इसका परिणाम यह हुआ कि जो कारीगर कभी उद्यमी हुआ करता था, वह श्रमिक बनने और बदहाली में जीवन जीने को मजबूर हो गया। वर्ष 2017 में मुख्यमंत्री का दायित्व मिलने पर उन्होंने प्रदेश के कारीगरों की स्थिति को लेकर चिंता जताई। उस समय हस्तशिल्पी और कारीगर हताश और निराश थे तथा पलायन कर रहे थे। जिनके परिश्रम से प्रदेश में रौनक और रोजगार का सृजन होता था, वही कारीगर कथित बीमारी, भ्रष्टाचार और अराजकता के कारण प्रदेश से बाहर जाने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थिति यह थी कि कारीगरों के हित में काम करने के बजाय लोग कारीगरों से वसूली और उनका शोषण करते थे। प्रशिक्षण के साथ मानदेय और टूलकिट भी मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने यह समझा कि बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी जैसे परंपरागत कार्य करने वाले लोग रोजाना मेहनत कर अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। यदि उन्हें प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा तो प्रशिक्षण अवधि में उनके परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। इसलिए सरकार ने केवल प्रशिक्षण देने के बजाय प्रशिक्षण के साथ मानदेय, प्रशिक्षण पूरा होने पर टूलकिट और उसके बाद बैंक से जोड़ने की व्यवस्था की। उन्होंने बताया कि योजना के तहत 10 दिन का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है और प्रशिक्षण के दौरान ₹5,000 का मानदेय उपलब्ध कराया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ₹15,000 तक की टूलकिट दी जाती है। इसका उद्देश्य पारंपरिक हुनर को आज की बाजार और समाज की मांग के अनुरूप विकसित करना है। 16 से बढ़कर 25 ट्रेड, परंपरागत कारीगरों के साथ युवाओं को भी अवसर मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना के पहले चरण में 16 ट्रेड शामिल किए गए थे। इनमें 11 पारंपरिक ट्रेड-बढ़ई, दर्जी, कुम्हार, लोहार, नाई, राजमिस्त्री, सुनार, टोकरी बुनकर, हलवाई, मोची और धोबी थे। अब सरकार ने पांच नए पारंपरिक ट्रेड भी जोड़े हैं। इनमें मूर्तिकार, दूधिया, माला बनाने वाला माली, भड़भूजा और मछुआरा शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन पारंपरिक कार्यों से समाज का पेट भरता रहा, उनके करने वालों को लंबे समय तक पर्याप्त सहयोग नहीं मिला। सरकार ने अब ऐसे लोगों के साथ खड़े होकर उन्हें आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा युवाओं की रुचि और आज की जरूरतों को देखते हुए मोबाइल रिपेयर, ऑटोमोबाइल रिपेयर, इलेक्ट्रॉनिक आइटम की मरम्मत, विद्युत उपकरणों का रिपेयर, प्लंबिंग, कंप्यूटर रिपेयर, सोलर इंस्टॉलेशन, डिजिटल फोटोग्राफी और ब्यूटी पार्लर जैसे ट्रेड भी जोड़े गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि युवा अपनी रुचि के अनुसार किसी भी ट्रेड में जा सकता है। इन 25 ट्रेड का मूल उद्देश्य एक ही है कि कारीगर और हस्तशिल्पी श्रमिक न बने, बल्कि उद्यमी बने। ₹10 लाख तक ब्याजमुक्त और गारंटीमुक्त ऋण मुख्यमंत्री ने कहा कि कारीगर को उद्यमी बनाने की प्रक्रिया में प्रशिक्षण और टूलकिट के साथ बैंक से जोड़ना भी जरूरी है। सीएम युवा उद्यमी योजना में युवाओं को ₹5 लाख तक का … Read more