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नगर निगमों में बढ़ी जवाबदेही, पंजाब के कमिश्नरों और ADC डेवलपमेंट को मिले सख्त आदेश

लुधियाना. लोकल बॉडीज विभाग के प्रिंसीपल सैक्रेटरी का चार्ज संभालते ही धनश्याम थोरी एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। उन्होंने पंजाब के सभी नगर निगम कमिश्नरों को ग्राऊंड लैवल पर उतरने के निर्देश दिए हैं जिसके चलते पंजाब के सभी नगर निगम कमिश्नर व ए.डी.सी. डिवेल्पमेंट हफ्ते में 3 दिन सुबह एक घंटा फील्ड में नजर आएंगे। इस नए सिस्टम के तहत हर कमिश्नर को हर सोमवार सुबह 7 से 8 बजे तक फील्ड में रहने के लिए बोला गया है ताकि ग्राऊंड जीरो पर हालात का जायजा लेकर समस्याओं का समाधान करने की दिशा में कदम उठाया जाए। सी.एम., चीफ सैक्रेटरी से लेकर मंत्री तक वीडियो कॉल पर करेंगे चैकिंग थोरी द्वारा नगर निगम कमिश्नरों व ए.डी.सी. डिवैल्पमैंट पर हफ्ते में 3 दिन सुबह एक घंटा फील्ड में जरूर जाने की जो शर्त लगाई गई है, उस पर अमल होने बारे क्रॉस चैकिंग करने का भी फार्मूला लागू कर दिया गया है जिसके तहत प्रिंसीपल सैक्रेटरी खुद वीडियो कॉल पर रहेंगे और इसका लिंक सीएम, चीफ सैक्रेटरी से लेकर मंत्री तक होगा।

स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए अहम खबर: कल से शुरू होगी ट्रांसफर आवेदन प्रक्रिया, 3 साल की सेवा की शर्त

भोपाल. स्वास्थ्य विभाग के अफसर-कर्मचारियों की अब ट्रांसफर में मनमानी नहीं चलेगी। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SAP) जारी की है। जिसके तहत अब एक स्थान पर तीन साल की सर्विस को जरूरी कर दिया है। तीन साल की सर्विस पूरी कर चुके अफसर-कर्मचारियों का ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसमें भी अफसर-कर्मचारी मनपसंद जिले या गृह क्षेत्र के आसपास तबादला नहीं करा पाएंगे। इनका स्वेच्छा से किया जाएगा तबादला स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि करंट पोस्टिंग के दौरान सिर्फ गंभीर बीमारी, दिव्यांग, उनके आश्रित की देखभाल, विधावा, परित्यक्ता महिला, सिंगल मदर या फादर बच्चों की परवरिश या एक स्थान पर पति-पत्नी तबादला चाहते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जाएगा।  8 से 12 जून तक ऑनलाइन लिए जाएंगे आवेदन स्वास्थ्य विभाग ने अफसर-कर्मचारियों से पांच दिन में आवेदन मांगे हैं। इसके लिए 8 से 12 जून तक की तारीख जारी है। इस बीच अफसर-कर्मचारी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।  ई-एचआरएमआईएस पोर्टल पर होगी पूरी प्रोसेस ट्रांसफर की पूरी प्रोसेस ई-एचआरएमआईएस पोर्टल के जरिए की जाएगी। किसी भी पद के लिए ऑफलाइन आवेदन मान्य नहीं किया जाएगा।

खेल नर्सरियों पर गहन पड़ताल, हिसार में कोचों की भूमिका भी जांच में शामिल

हिसार खिलाड़ियों को निखारने और उन्हें खेल की बारीकियों से परिचित कराने के उद्देश्य से स्थापित खेल नर्सरियों की अब गहन पड़ताल शुरू हो गई है। खेल विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कदम बढ़ाया है कि कहीं इन नर्सरियों की आड़ में केवल औपचारिकताएं ही तो पूरी नहीं की जा रहीं। इसी क्रम में हिसार जिले की 169 खेल नर्सरियों की जांच शुरू कर दी गई है। जिला खेल अधिकारी नरेश सैनी के नेतृत्व में गठित टीम ने जांच का जिम्मा संभाल लिया है। जांच को निष्पक्ष और प्रभावी बनाने के लिए इसमें विभिन्न खेलों के अनुभवी कोचों को शामिल किया गया है, ताकि हर नर्सरी का मूल्यांकन उसके खेल विशेष के मानकों पर किया जा सके। जांच शुरू होते ही मचा हलचल गत सप्ताह जैसे ही जांच प्रक्रिया शुरू हुई, नर्सरियों में कार्यरत कोचों के बीच हलचल तेज हो गई। एक-दूसरे से संपर्क साधकर वे जांच के मानकों और पूछे गए बिंदुओं की जानकारी जुटाने में लगे हैं। जिन नर्सरियों की जांच पूरी हो चुकी है, वहां के कोचों से अन्य लोग विस्तार से जानकारी ले रहे हैं। यह पहला अवसर नहीं है जब खेल नर्सरियों की जांच की जा रही है। पूर्व वर्षों में हुई जांच में भी कई अनियमितताएं सामने आई थीं, जिनकी रिपोर्ट निदेशालय को सौंपी गई थी और कई खेल नर्सरियों पर निदेशायल ने संज्ञान भी लिया था। पुराने इसी अनुभव के आधार पर इस बार जांच को और अधिक गहराई से अंजाम दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य, प्रतिभा को मिले सही मंच सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि उभरती खेल प्रतिभाओं को वे सभी सुविधाएं मिलें, जिनके लिए ये नर्सरियां स्थापित की गई हैं। यदि खिलाड़ियों को सही प्रशिक्षण और संसाधन मिलते हैं, तो वे प्रदेश और देश के लिए पदक जीतकर गौरव बढ़ा सकते हैं। हिसार के जिला खेल अधिकारी नरेश सैनी ने कहा कि निदेशालय के दिशा-निर्देश पर खेल नर्सरियों की जांच की जा रही है। पिछले करीब एक सप्ताह से टीमें लगातार निरीक्षण कर रही हैं। जांच दल में विभिन्न खेलों के कोचों को शामिल किया गया है।  

खेतों में जानलेवा खतरा, 189 कीटनाशक सैंपल फेल, विधानसभा में पेश हुआ डेटा

जयपुर  दो साल में 535 किसानों की मौत, 5.1 करोड़ रुपये का मुआवजा और 189 घटिया कीटनाशक सैंपल… आंकड़े थोड़े चौकाने वाले हैं लेकिन राजस्थान में सवाल उठा रहे हैं। विधानसभा में पेश किए गए ये आंकड़े केमिकल-आधारित खेती के खतरनाक पहलू और सुरक्षा में कमी व नियमों के पालन पर सवाल उठा रहे हैं। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी 2024 और जनवरी 2026 के बीच खेतों में काम करते समय कीटनाशकों के संपर्क में आने से किसानों की मौत हुई। बीकानेर में सबसे ज्यादा 57 मौतें हुईं, इसके बाद चुरू (56), हनुमानगढ़ (42) और झालावाड़ (42) का नंबर आता है। जोधपुर में 38 मौतें हुईं। श्रीगंगानगर और ब्यावर में 31-31 मौतें हुईं। मुआवजे में भी सामने आई कमी इस दौरान राज्य सरकार ने प्रभावित परिवारों को मुआवजे के तौर पर 5.1 करोड़ रुपये दिए। हालांकि, अलग-अलग जिलों में मुआवजे की रकम में काफी अंतर था और इससे मौतों की रिपोर्ट और मंजूर किए गए दावों के बीच की कमियां सामने आईं। बीकानेर को मुआवजे के तौर पर 92 लाख रुपये, चुरू को 72 लाख रुपये, जोधपुर को 58 लाख रुपये और हनुमानगढ़ को 48 लाख रुपये मिले। श्रीगंगानगर को 18 लाख रुपये मिले। झालावाड़ में 42 मौतें होने के बावजूद, वहां भी सिर्फ 18 लाख रुपये ही मिले। डीग में आठ मौतें हुईं लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिला, जबकि कोटा में 11 मौतें हुईं और 2 लाख रुपये मिले। अधिकारियों ने इस अंतर की वजह दावों की जांच और मंजूरी की प्रक्रियाओं को बताया। नहीं बताई हर मौत की सटीक वजह कृषि विभाग के रिकॉर्ड में हर मौत की सटीक वजह नहीं बताई गई थी। इस डेटा में कीटनाशकों के इस्तेमाल से जुड़े खेती के कामों के दौरान हुई मौतें शामिल थीं और इसमें सिर्फ वही मामले थे जिनकी रिपोर्ट अधिकारियों ने दी थी और जिनकी पुष्टि की थी। किशनपोल के विधायक अमीन कागजी ने कहा, "अगर रोजमर्रा के खेती के कामों के दौरान सैकड़ों किसान मर रहे हैं तो सरकार सिर्फ मुआवजा देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती। हमें जवाबदेही, कीटनाशकों के लिए सख्त नियम और पूरे राजस्थान में किसानों के लिए एक व्यापक सुरक्षा कार्यक्रम की जरूरत है।" कीटनाशक के सैंपल क्वालिटी टेस्ट में फेल मौतों के इन आंकड़ों के साथ विधानसभा से एक और चिंताजनक जानकारी सामने आई। उसी दो साल की अवधि में 189 कीटनाशक के नमूने क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गए। पूरे राजस्थान से इकट्ठा किए गए 5,570 कीटनाशक के नमूनों में से 5,521 का विश्लेषण किया गया। जहां 5,332 नमूने तय मानकों पर खरे उतरे, वहीं 189 घटिया क्वालिटी के पाए गए। क्वालिटी की जांच के बाद अधिकारियों ने 282 नोटिस जारी किए, 14 कोर्ट केस दर्ज किए, 14 लाइसेंस सस्पेंड किए और 22 लाइसेंस रद कर दिए। घटिया क्वालिटी वाले कीटनाशक नमूनों की सूची में श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ सबसे ऊपर रहे, जहां हर जगह 17-17 नमूने खराब पाए गए। इसके बाद बीकानेर (13), कोटा (10) और भीलवाड़ा (9) का नंबर आता है। श्रीगंगानगर में सबसे ज्यादा 34 नोटिस भी जारी किए गए, जिसके बाद बीकानेर (20), हनुमानगढ़ (19) और चूरू (17) का स्थान रहा। 14 मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू की गई, जिनमें बीकानेर में पांच और श्रीगंगानगर में तीन मामले शामिल थे। कीटनाशक को लेकर खड़े होते सवाल ये आंकड़े भारत में कीटनाशकों से जुड़े खतरों की एक गंभीर तस्वीर पेश करते हैं। ज्यादा पैदावार वाली खेती में लंबे समय से केमिकल वाले कीटनाशकों पर बहुत ज्यादा निर्भरता रही है, लेकिन जानकारों ने बार-बार चेतावनी दी है कि सुरक्षा के अपर्याप्त साधनों, असुरक्षित तरीके से इस्तेमाल, जरूरत से ज्यादा छिड़काव और खराब क्वालिटी के एग्रोकेमिकल्स की वजह से खेत जहरीली जगहों में बदल सकते हैं। इंसानी सेहत को होने वाले खतरों के अलावा, कीटनाशकों के बहुत ज्यादा इस्तेमाल का संबंध मिट्टी की क्वालिटी खराब होने, पानी के दूषित होने, जैव-विविधता के नुकसान और परागण करने वाले व फायदेमंद कीड़ों की आबादी घटने से भी जोड़ा गया है। इससे केमिकल पर बहुत ज्यादा निर्भर खेती के टिकाऊपन को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।

अच्छी शिक्षा और नैतिक मूल्यों पर दें जोर: राज्यपाल बागडे

 जयपुर राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि अच्छी शिक्षा देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों की बौद्धिक क्षमता कैसे बढ़े, इस पर भी विशेष रूप से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थान विद्यार्थियों में नैतिकता और सहनशीलता के गुण विकसित करने पर विशेष ध्यान दे।  उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा के प्रकाश पुंज होते है। ज्ञान का पूरे समाज में प्रसार यहीं से होता है। इसलिए उन्हें उत्कृष्ट बनाने लिए सभी मिलकर कार्य करें। राज्यपाल श्री बागडे रविवार को लोकभवन से महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के 23 वें स्थापना दिवस पर संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वामी श्री रामसुखदास जी महाराज का स्मरण करते हुए कहा कि वह विरले संत थे। उनके नाम पर विश्वविद्यालय में भवन निर्माण अच्छी पहल है। वह ऐसे संत थे जो प्रचार प्रसार से दूर रहते थे। उन्होंने कभी अपनी फोटो तक नहीं खिंचवाई। अपने चरण छूने से भी वह मना करते थे। ऐसे आदर्श संतों से प्रेरणा लेनी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि ऐसे ही एक महापुरुष गीता प्रेस के जरिए देश में संस्कृति और संस्कारों के प्रसार की अभूतपूर्व भूमिका निभाने वाले  हनुमान प्रसाद पोद्दार जी थे।  गोविंद वल्लभ पंत जी उन्हें भारत रत्न पुरस्कार देना चाहते थे और परन्तु उन्होंने लेने से मना कर दिया। श्री बागडे ने विश्वविद्यालय भवनों का नाम संत, महात्माओं के नाम पर किए जाने की सराहना की परंतु यह भी कहा कि जिन महापुरुषों, संतों के नाम पर भवनों के नाम रखे गये हैं, उनके बारे में संक्षिप्त और सार्थक परिचय पुस्तिका भी प्रकाशित हो ताकि नई पीढ़ी को उनके बारे में निरंतर जानकारी मिलती रहे। उन्होंने कहा कि बीकानेर में महाराजा गंगासिंह जी के समय खेजड़ी को काटने पर रोक का कानून बना था। राज्य सरकार ने भी खेजड़ी संरक्षण के लिए कानून बनाया है। लोकभवन स्तर पर पिछले वर्ष सर्वपल्ली राधाकृष्ण आयुर्वेद विश्वविद्यालय में 300 से अधिक खेजड़ी के पेड़ लगाए गए। हमारा प्रयास है कि खेजड़ी का एक ऐसा पार्क विकसित किया जाए ताकि इस मरुभूमि के कल्पवृक्ष के बारे में जागरूकता का प्रसार हो। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों की इस वृक्ष से इसीसे और निकटता होगी। राज्यपाल ने गंग नहर निर्माण शताब्दी वर्ष पर जल संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पानी की बचत ही इसका निर्माण है। पानी बचाने के लिए जागरूकता का प्रसार होना चाहिए। उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा राजस्थान के पारंपरिक पेड़ पौधों और जल संरक्षण से जुड़ी संस्कृति से जुड़ी किसी परियोजना पर कार्य करने की भी आवश्यकता जताई। केंद्रीय विधि एवं कानून मंत्री श्री अर्जुनराम मेघवाल ने स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि विश्वविद्यालय शिक्षा का आदर्श केंद्र बने। उन्होंने कहा कि विकसित भारत का जो संकल्प देश के प्रधानमंत्री की पहल पर लिया गया है, उसकी पूर्ति युवाओं के कंधों पर है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में ज्ञान परंपरा के आलोक में भारतीय संस्कृति से जुड़े मूल्यों पर कार्य करने की आवश्यकता जताई। उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री श्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि  गंगनहर योजना के शताब्दी वर्ष पर जल संरक्षण के महती काम आरंभ हुए हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा में राजस्थान में किए जा रहे प्रयासों के बारे में जानकारी दी और कहा कि सरकार का प्रयास है कि उच्च शिक्षा गुणवत्ता और प्रसार में राजस्थान अग्रणी बने। इससे पहले कुलगुरु आचार्य मनोज दीक्षित ने विश्वविद्यालय गतिविधियों के बारे में विस्तार से बताया। राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री बागडे ने विश्वविद्यालय में परीक्षा केंद्र, आचार्य तुलसी भवन, विज्ञान भवन, करणी भवन, कला भवन, रामसुखदास जी भवन का लोकार्पण किया। उन्होंने राजस्थान नॉलेज कॉर्पोरेशन के साथ विश्वविद्यालय के हुए एमओयू के लिए बधाई दी और कहा कि इससे विद्यार्थियों को सूचना और संचार प्रौद्योगिकी के नवीनतम ज्ञान, कौशल विकास का लाभ मिलेगा।

अब नहीं चलेगी मनमानी! पंजाब में हूटर और सायरन लगाने वालों पर होगी कार्रवाई

जालंधर/चंडीगढ़. यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए पंजाब पुलिस ने निजी वाहनों पर हूटर, सायरन और फ्लैशर के अवैध उपयोग के खिलाफ पांच दिवसीय राज्यव्यापी विशेष अभियान चलाया, जिसके दौरान 29 हजार से अधिक वाहनों की जांच की गई। यह व्यापक अभियान पूरे राज्य में 2 जून 2026 से शुरू किया गया था। पंजाब के पुलिस महानिदेशक (डी.जी.पी.) गौरव यादव के निर्देशों पर चलाए गए इस अभियान के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले तथा बिना किसी अधिकार के हूटर, सायरन, फ्लैशर या अन्य किसी भी अवैध संकेतक उपकरण का उपयोग करने वाले निजी वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की गई। विशेष पुलिस महानिदेशक (स्पैशल डी.जी.पी.) कानून एवं व्यवस्था प्रवीण सिन्हा ने अभियान की जानकारी देते हुए कहा कि ऐसे उपकरण केवल आपातकालीन वाहनों और आवश्यक सेवाओं के लिए निर्धारित हैं। उन्होंने कहा कि निजी व्यक्तियों को इनका दुरुपयोग करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पांच दिवसीय अभियान के परिणाम साझा करते हुए स्पेशल डीजीपी ने बताया कि पुलिस टीमों ने कुल 29,324 वाहनों की जांच की। जांच के दौरान 52 अवैध हूटर, 10 सायरन और 403 फ्लैशर वाहनों से हटाए गए। इसके अलावा नियमों का उल्लंघन करने वाले 4,221 वाहनों के चालान किए गए तथा 48 वाहनों को जब्त भी किया गया। उल्लंघनकत्र्ताओं को कड़ी चेतावनी देते हुए प्रवीण सिन्हा ने कहा कि यह अभियान पूरे राज्य में आगे भी जारी रहेगा और फ्लैशर, सायरन या हूटर का अनधिकृत उपयोग करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस दौरान ‘गैंगस्टरों पर वार’ अभियान के 137वें दिन भी पुलिस की कार्रवाई जारी रही। पुलिस टीमों ने आठ हथियारों सहित 320 व्यक्तियों को गिरफ्तार किया, जिससे अभियान शुरू होने के बाद से अब तक कुल गिरफ्तारियों की संख्या 34,532 हो गई है। इसके अतिरिक्त 97 व्यक्तियों के खिलाफ एहतियाती कार्रवाई की गई, जबकि 13 व्यक्तियों को सत्यापन और पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। पुलिस ने अभियान के दौरान सात भगोड़े अपराधियों (पीओ) को भी गिरफ्तार किया।

इनकम टैक्स विभाग में तबादलों की बड़ी सूची जारी, मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के 182 अधिकारी प्रभावित

रायपुर. छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के आयकर विभाग में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल (Income Tax Department Transfers) किया गया है। प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त ने बस्तर से लेकर ग्वालियर तक पदस्थ 182 अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं। विभागीय स्तर पर हुए इस बदलाव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्थानांतरण सूची में 20 अतिरिक्त, संयुक्त आयुक्त एवं अतिरिक्त संयुक्त अन्वेषण निदेशक शामिल हैं। इसके अलावा 48 उपायुक्त और 114 आयकर अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। हाल ही में पदोन्नत हुए 14 अधिकारियों के नाम भी इस सूची में शामिल हैं। उनकी पदोन्नति के बाद से ही तबादलों की चर्चाएं तेज हो गई थीं। अतिरिक्त प्रभार भी सौंपे गए प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए 18 अतिरिक्त आयुक्त और 11 उपायुक्तों को अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। विभाग का मानना है कि इस फेरबदल से कार्यप्रणाली में तेजी आएगी और प्रशासनिक समन्वय बेहतर होगा। जून में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश आदेश के अनुसार सभी स्थानांतरित अधिकारियों को 12 से 15 जून के बीच अपनी नई पदस्थापना स्थल पर अनिवार्य रूप से कार्यभार ग्रहण करना होगा। विभाग ने समयसीमा का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी जारी किए हैं।

डाक विभाग की भूमिका पर आधारित प्रदर्शनी ‘गेट योरसेल्फ काउंटेड’ का आयोजन

 रांची  डिजिटल युग से पहले देश में जनगणना जैसे विशाल राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में डाक विभाग की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण थी, इसकी झलक रांची के आड्रे हाउस में आयोजित दो दिवसीय प्रदर्शनी गेट योरसेल्फ काउंटेड, स्वतंत्र भारत में जनगणना का एक डाक इतिहास में दिखाया गया। इस प्रदर्शनी 1951 से 2011 तक के दुर्लभ दस्तावेजों, पोस्टकार्डों, डाक टिकटों, प्रथम दिवस आवरणों और अन्य अभिलेखीय सामग्रियों के माध्यम से बताया गया है कि कैसे डाक व्यवस्था ने देश की जनगणना प्रक्रिया को गति देने और लोगों तक इसकी जानकारी पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। स्वतंत्रता के बाद भारत को चुनावों के संचालन और नियोजित विकास के लिए विश्वसनीय जनसंख्या आंकड़ों की आवश्यकता थी। इसी महत्व को देखते हुए संविधान सभा ने संविधान लागू होने से पहले ही जनगणना अधिनियम, 1948 पारित किया था। उस समय सीमित संचार साधनों और कम साक्षरता दर के कारण जनगणना के प्रति जागरूकता फैलाना बड़ी चुनौती थी। ऐसे में डाक विभाग ने न केवल प्रचार-प्रसार का कार्य संभाला, बल्कि गणनाकर्मियों और अधिकारियों के बीच संवाद स्थापित कर जनगणना की प्रगति पर नजर रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। प्रदर्शनी के क्यूरेटर विकास कुमार, जो अज़ीम प्रेमजी विश्वविद्यालय, बेंगलुरु में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक हैं,ने इस अनूठे संग्रह को तैयार किया है। यह भ्रमणशील प्रदर्शनी इससे पहले जम्मू, बेंगलुरु और लखनऊ में भी प्रदर्शित की जा चुकी है। प्रदर्शनी का उद्घाटन झारखंड के निदेशक, जनगणना संचालन प्रभात कुमार ने किया। आयोजक विकास कुमार ने कहा कि मोबाइल आधारित जनगणना प्रणालियों के दौर में यह प्रदर्शनी उस ऐतिहासिक यात्रा को याद करने का अवसर है, जिसमें डाकघरों और डाककर्मियों ने देश की सांख्यिकीय व्यवस्था को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इस प्रदर्शनी में दिखा जनगणना का इतिहास 1951 से 2011 तक 11 बार बदले थे जनगणना के मुहर। जनगणना की शुरूआत डाक से हुई थी, डाक के माध्यम से ही जनगणना की जागरूकता और अभियान चलाया गया था। 15 भाषाओं में जनगणना की जानकारी के लिए विज्ञापन थे, जिनमें हिंदी, अंग्रेजी, असमिया, बंगला , गुजराती , कन्नड, कोंकणी, मलयालम, मराठी, ओडिया, पंजाबी, सिंधी, तमिल,तेलुगू, उर्दू शामिल थे।  

कब्रिस्तान भूमि पर कब्जे का मामला, प्रशासन ने ध्वस्त की मस्जिद

लखनऊ उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने शनिवार को कब्रिस्तान के लिए आरक्षित सरकारी भूमि पर बने कथित अवैध निर्माण के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कसेरुआ गांव स्थित मुस्तफा कादरी मस्जिद को ध्वस्त करना शुरू कर दिया. प्रशासन की मौजूदगी में दो बुलडोजर और एक क्रेन की मदद से कई घंटे तक कार्रवाई चली. संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया और चार थानों की पुलिस फोर्स तैनात की गई. कार्रवाई के दौरान मस्जिद परिसर से "आई लव मोहम्मद" लिखे पोस्टर और हरे रंग का एक झंडा मिलने का दावा भी सामने आया है. पुलिस ने इन सामग्रियों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है. पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार बिश्नोई ने कहा कि बरामद पोस्टरों और झंडे के संबंध में जांच की जा रही है तथा यह पता लगाया जाएगा कि इन्हें वहां किसने रखा था और उनका उद्देश्य क्या था. उन्होंने कहा कि सभी तथ्यों की जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन के अनुसार, गाटा संख्या 409 की भूमि कब्रिस्तान के लिए आरक्षित थी. जनवरी 2026 में राजस्व विभाग की पैमाइश के दौरान यहां मस्जिद निर्माण और कब्जे का मामला सामने आया था. इसके बाद तहसीलदार न्यायालय में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 67 के तहत वाद दायर किया गया. सुनवाई के दौरान मस्जिद समिति को अपने दावे के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया, लेकिन प्रशासन का कहना है कि पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सके. संभल के जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया कि तहसीलदार न्यायालय द्वारा अवैध कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया था. इस आदेश को चुनौती देते हुए जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की गई, लेकिन अपील खारिज होने के बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई. तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि ग्रामीणों द्वारा कब्रिस्तान के लिए भूमि उपलब्ध कराने की मांग के बाद अभिलेखों की जांच की गई थी, जिसमें आरक्षित भूमि पर निर्माण का मामला सामने आया. प्रशासन का कहना है कि कब्जामुक्त कराई गई भूमि को ग्राम सभा के माध्यम से कब्रिस्तान के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा. फिलहाल इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम हैं और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है. प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने तथा अफवाहों से बचने की अपील की है.

उपभोक्ताओं के हित में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, बिजली कनेक्शन से जुड़े विवाद पर मिली राहत

जीरकपुर. जीरकपुर की सुषमा वैलेंसिया सोसाइटी में रहने वाले 500 से ज़्यादा परिवारों को बड़ी राहत देते हुए पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने साफ किया है कि किसी बिल्डर द्वारा लोगों से करोड़ों रुपये इकट्ठा करके प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ देने के के कारण नागरिंकों को बेसिक सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता। अदालत ने कहा कि नागरिकों को प्रशासनिक प्रणाली की नाकामी का खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए और चिलचिलाती गर्मी में बच्चों, बुज़ुर्गों और महिलाओं को बिजली जैसी जरूरी सुविधाओं से वंचित नहीं रखा जा सकता। ये टिप्पणी तब सामने आईं जब सुषमा वैलेंसिया अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन की तरफ से दायर की गई एक पिटीशन की सुनवाई के दौरान कोर्ट के ध्यान में लाया गया कि सोसाइटी में सैकड़ों परिवार रह रहे हैं, जबकि प्रोजेक्ट के डेवलपर्स कथित तौर पर प्रोजेक्ट अधूरा छोड़कर गायब हो गए हैं। इस वजह से लोग लंबे समय से नियमित बिजली कनेक्शन के लिए जूझ रहे हैं। जिदगी भर की कमाई खर्च करके खरीदे फ्लैट: पिटीशनर पिटीशनर ने कोर्ट को बताया कि लोगों ने जिंदगी भर की कमाई खर्च करके फ्लैट खरीदे थे, लेकिन अब वह बेसिक सुविधाओं के लिए भी दर-दर की ठोकरें खाने के लिए मजबूर हैं।  सुनवाई के दौरान PSPCL ने कोर्ट को बताया कि अगर लोग करीब 4.44 करोड़ रुपये की बकाया रकम जमा कर दें तो बिजली कनेक्शन जारी किए जा सकते हैं। इसके उलट एसोसिएशन ने दलील दी कि यह जिम्मेदारी लोगों की नहीं, बल्कि बिल्डर की है, जिसने लोगों से करोड़ों रुपये वसूलने के बाद प्रोजेक्ट अधूरा छोड़ दिया। 20 हजार रुपये जमा करने पर मिलेगा टेम्पररी कनेक्शन हाईकोर्ट ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए कहा कि हर वह निवासी जो नॉर्मल चार्ज के साथ 20 हजार रुपये जमा करता है, उसे टेम्पररी बिजली कनेक्शन दिया जाए। कोर्ट ने साफ किया कि यह सिर्फ एक अंतरिम व्यवस्था होगी और इससे परमानेंट कनेक्शन का कोई अधिकार नहीं बनेगा। साथ ही, PSPCL, GMADA और दूसरे संबंधित डिपार्टमेंट को भी इस समस्या का परमानेंट समाधान निकालने के लिए एक जॉइंट मीटिंग करने को कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 19 जून को होगी। 150 परिवार दूसरी जगहों पर रहने को मजबूर  सोसाइटी के लोगों का कहना है कि बिजली की लंबे समय से चली आ रही समस्या के कारण हालात इतने गंभीर हो गए थे कि करीब 150 परिवार सुषमा वालेंसिया छोड़कर दूसरी जगहों पर रहने को मजबूर हो गए थे। लोगों का कहना है कि जिन लोगों ने करोड़ों रुपये खर्च कर इन्वेस्टमेंट के तौर पर फ्लैट खरीदे थे, उनके किराएदार भी एक-एक करके दूसरी सोसाइटियों में चले गए, जिससे फ्लैट मालिकों को भारी फाइनेंशियल नुकसान उठाना पड़ा। अब हाईकोर्ट के दखल के बाद लोगों को उम्मीद है कि लंबे समय से चली आ रही यह मुश्किल आखिरकार हल की ओर बढ़ेगी। हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करेंगे: गिल मामले को लेकर पावरकॉम के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर अमनदीप सिंह गिल ने कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अभी सोसायटी के लिए कोई डेडिकेटेड फीडर नहीं है, लेकिन जल्द ही वहां फीडर पहुंचा दिया जाएगा ताकि कोर्ट के निर्देशों के अनुसार योग्य लोगों को टेम्पररी बिजली कनेक्शन जारी किए जा सकें।