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अवैध खनिज ढुलाई पर रोक की तैयारी, बिहार में ट्रांजिट पास सिस्टम लागू

छपरा  बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व विभाग ने राज्य में अन्य राज्यों से लघु खनिज लेकर प्रवेश करने वाले वाहनों के लिए नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। विभाग के अनुसार 10 जून से बाहरी राज्यों से बालू, पत्थर तथा अन्य लघु खनिज लेकर बिहार आने वाले सभी वाहनों के लिए इंटर स्टेट ट्रांजिट पास (आईएसटीपी) लेना अनिवार्य होगा। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य खनिज परिवहन को पारदर्शी बनाना, अवैध ढुलाई पर रोक लगाना तथा राज्य के राजस्व में वृद्धि सुनिश्चित करना है। विभाग द्वारा जारी निर्देश के अनुसार यदि परिवहन चालान में खनिज की मात्रा वजन के रूप में दर्ज है तो ट्रांजिट पास के लिए 60 रुपये प्रति मीट्रिक टन तथा मात्रा आयतन के रूप में अंकित होने पर 85 रुपये प्रति घनमीटर की दर से शुल्क निर्धारित किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से एक ही चालान का बार-बार उपयोग कर खनिज ढुलाई की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही बिहार में आयातित खनिजों का सटीक आंकड़ा भी उपलब्ध हो सकेगा। पोर्टल पर कराना होगा रजिस्ट्रेशन खनिज विकास पदाधिकारी सर्वेश कुमार संभव ने स्पष्ट किया है कि सभी संबंधित वाहन मालिकों को आईएसटीपी पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बाद प्राप्त लॉगिन आईडी और पासवर्ड के माध्यम से वाहन मालिक पोर्टल पर लॉगिन कर सकेंगे। अन्य राज्यों से खनिज स्रोत पर परिवहन चालान जारी होने के छह घंटे के भीतर वाहन पर लदे खनिज की मात्रा के अनुसार ऑनलाइन ट्रांजिट पास प्राप्त करना आवश्यक होगा। ट्रांजिट पास का भुगतान भी पूरी तरह ऑनलाइन माध्यम से ही किया जाएगा। विभाग ने यह भी बताया है कि आईएसटीपी की वैधता मूल खनिज परिवहन चालान की वैधता के अनुरूप होगी। परिवहन के दौरान वाहन चालक के पास ट्रांजिट पास के साथ-साथ संबंधित राज्य द्वारा निर्गत वैध खनिज परिवहन चालान भी होना जरूरी है। जांच के दौरान दोनों में से कोई एक दस्तावेज नहीं मिलने पर बिहार खनिज (समानुदान, अवैध खनन, परिवहन एवं भंडारण निवारण) नियमावली, 2019, यथा संशोधित 2026 के तहत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अवैध खनिज परिवहन में जब्त किए गए वाहनों को निर्धारित जुर्माना जमा करने के बाद ही छोड़ा जाएगा। सारण के खनिज विकास पदाधिकारी ने सभी वाहन मालिकों और परिवहनकर्ताओं से नए नियमों का पूर्ण अनुपालन करने की अपील की है।  

हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को लगाई फटकार, बोले- भत्ते से ज्यादा खर्च मुकदमे पर कर दिया

चंडीगढ़. महज 7,299 रुपये के यात्रा भत्ता (टीए) बिल को लेकर शुरू हुआ विवाद 19 वर्ष तक अदालतों में चलता रहा, लेकिन आखिरकार पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा सरकार की नियमित द्वितीय अपील को खारिज करते हुए इस लंबे कानूनी विवाद पर विराम लगा दिया। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब मूल वाद की राशि 25 हजार रुपये से कम हो तो सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) की धारा 102 के तहत नियमित द्वितीय अपील सुनवाई योग्य नहीं होती। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने यह फैसला हरियाणा सरकार और उसके अधिकारियों द्वारा दायर अपील पर सुनाया। मामले की शुरुआत उस समय हुई जब रोहतक के ओपी खन्ना ने अपने लंबित टीए बिलों के भुगतान के लिए दीवानी मुकदमा दायर किया। रिकॉर्ड के अनुसार दिसंबर 1999 से अप्रैल 2002 के बीच विभिन्न सरकारी दौरों से संबंधित 7,299 रुपये के यात्रा भत्ता बिलों का भुगतान नहीं किया गया था। खन्ना ने दावा किया कि बिलों का भुगतान अनुचित रूप से रोका गया है और उन्होंने राशि के साथ ब्याज की भी मांग की। दूसरी ओर हरियाणा सरकार का पक्ष था कि संबंधित टीए बिलों को बजट की अनुपलब्धता तथा स्थानीय यात्रा भत्ता और किलोमीटर संबंधी दावों पर उठाई गई आपत्तियों के कारण रोका गया था। विभाग ने यह भी कहा कि मामले को उद्योग निदेशक, हरियाणा के पास स्पष्टीकरण और मार्गदर्शन के लिए भेजा गया था तथा उठाई गई आपत्तियों की जानकारी कर्मचारी को दे दी गई थी। वर्ष 2006 में सिविल जज (जूनियर डिवीजन), रोहतक ने ओपी खन्ना का मुकदमा खारिज कर दिया। इसके बाद उन्होंने जिला जज, रोहतक की अदालत में अपील दायर की। प्रथम अपीलीय अदालत ने 1 फरवरी 2007 को निचली अदालत का फैसला पलटते हुए खन्ना के पक्ष में निर्णय दिया। इसी आदेश को चुनौती देते हुए हरियाणा सरकार ने हाई कोर्ट में नियमित द्वितीय अपील दाखिल कर दी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि चूंकि मूल विवादित राशि 10 हजार रुपये से कम थी, इसलिए प्रथम अपील ही सुनवाई योग्य नहीं थी। वहीं न्याय मित्र अंकुर मित्तल ने अदालत को बताया कि सीपीसी की धारा 102 स्पष्ट रूप से कहती है कि 25 हजार रुपये से कम राशि वाले मामलों में दूसरी अपील नहीं की जा सकती। इसलिए सरकार की यह अपील प्रारंभिक स्तर पर ही अस्वीकार्य है। हाई कोर्ट ने सरकारी विभागों द्वारा बेहद छोटी रकम के मामलों में वर्षों तक मुकदमेबाजी करने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि कई बार सरकारी विभाग विवादित राशि से कई गुना अधिक रकम मुकदमेबाजी पर खर्च कर देते हैं। इससे न केवल सार्वजनिक धन की बर्बादी होती है बल्कि न्यायालयों का बहुमूल्य समय भी ऐसे मामलों में खर्च होता है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि मूल वाद की राशि मात्र 7,299 रुपये थी, जो 25 हजार रुपये की वैधानिक सीमा से काफी कम है। ऐसे में सीपीसी की धारा 102 के स्पष्ट परविधान के कारण नियमित द्वितीय अपील सुनवाई योग्य नहीं है। अदालत ने इसी आधार पर हरियाणा सरकार की अपील को खारिज कर दिया।

रिवाल्वर थीम और लग्जरी पेंडेंट की चर्चा, यूएस ज्वेलरी शो में दिखा सिद्धू मूसेवाला का अनोखा अंदाज

लास वेगास/चंगीगढ़. अमेरिका में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय ज्वेलरी प्रदर्शनी में दिवंगत पंजाबी सुपरस्टार सिद्धू मूसेवाला के नाम से जुड़ा एक खास ज्वेलरी पीस लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। लास वेगास में 5 जून को हुए प्रतिष्ठित ज्वेलरी ट्रेड इवेंट में यह पेंडेंट पहली बार सार्वजनिक रूप से पेश किया गया, जिसे न्यूयॉर्क की एक जानी-मानी ज्वेलरी कंपनी ने तैयार किया है। इस पेंडेंट की सबसे बड़ी खासियत इसकी कलात्मक डिजाइन है। इसमें पगड़ी पहने, रिवाल्वर लिए हुए चेहरे की आकृति बनाई गई है, जो मूसेवाला की पहचान और उनकी सांस्कृतिक छवि को दर्शाती है। हीरों और रत्नों की बारीक जड़ाई इसे एक हाई-एंड कस्टम ज्वेलरी पीस का रूप देती है। इस एक्सक्लूसिव पेंडेंट की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत करीब 2 लाख अमेरिकी डॉलर बताई जा रही है, जो भारतीय मुद्रा में लगभग डेढ़ से पौने दो करोड़ रुपये के बराबर है। कंपनी की जानकारी के मुताबिक, इस पेंडेंट में कुल 81.92 कैरेट के नेचुरल डायमंड्स जड़े गए हैं, जबकि इसे 14 कैरेट गोल्ड से तैयार किया गया है। पेंडेंट का वजन लगभग 400 ग्राम बताया जा रहा है, जो इसे बेहद खास और प्रीमियम बनाता है। कंपनी ने इस पेंडेंट का वीडियो अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर साझा किया है, जिसके बाद यह तेजी से वायरल हो गया। दुनियाभर से फैंस और ज्वेलरी एक्सपर्ट्स इस अनोखी क्रिएशन पर चर्चा कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी कलाकार को समर्पित इस तरह की ज्वेलरी उसकी अंतरराष्ट्रीय लोकप्रियता और स्थायी प्रभाव को दर्शाती है। प्रदर्शनी के दौरान मौजूद भारतीय दर्शकों ने न सिर्फ सिद्धू मूसेवाला को पहचाना, बल्कि उनके नाम से जुड़े इस पेंडेंट को खरीदने में भी दिलचस्पी दिखाई। बातचीत के दौरान कंपनी के प्रतिनिधि ने उनके गाने भी सुनाए और बताया कि मूसेवाला के ट्रैक आज भी दुनियाभर में लाखों लोगों की प्लेलिस्ट का हिस्सा हैं।

पेयजल संकट से मिली निजात, सूरजपुर के दूरस्थ अंचलों में घर-घर पहुंचा पानी

सूरजपुर/रायपुर. प्रदेश के दूरस्थ, पहाड़ी एवं जनजातीय अंचलों में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के विशेष प्रयासों और निर्देशों से महत्वपूर्ण सफलता प्राप्त हुई है। मंत्री के मार्गदर्शन में सूरजपुर जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा बंद पड़े सोलर पेयजल पंपों की मरम्मत तथा नए पंपों की स्थापना कर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था को पुनः सुचारु किया गया है। सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड सहित विभिन्न दूरस्थ ग्रामों में तकनीकी खराबी के कारण प्रभावित पेयजल योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त किया गया। ग्राम करौटी-ए (परसापारा), कोलुहा भाटपारा एवं बैजानपाठ में नए मोटर पंप स्थापित कर सोलर पंपों को पुनः कार्यशील बनाया गया, जिससे ग्रामीणों को नियमित एवं स्वच्छ पेयजल उपलब्ध होने लगा है। इसके अलावा भैयाथान विकासखंड के दतिमा आमापारा इंद्रावास, कसकेला औरापारा तथा सूरजपुर विकासखंड के लटोरी कुशवाहापारा एवं मंजीरा फुलवारपारा में भी खराब सोलर पंपों की मरम्मत कर पेयजल आपूर्ति बहाल की गई। वहीं चांदनी-बिहारपुर क्षेत्र के भाटपारा गांव में नया मोटर पंप स्थापित कर लंबे समय से चली आ रही पेयजल समस्या का समाधान किया गया, जिससे विशेष रूप से पंडो समुदाय के परिवारों को बड़ी राहत मिली है। मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा है कि प्रदेश के अंतिम छोर तक मूलभूत सुविधाओं की पहुंच सुनिश्चित करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए लगातार निगरानी और त्वरित कार्रवाई की जा रही है, ताकि किसी भी ग्रामीण को पेयजल संकट का सामना न करना पड़े। ग्रामीणों ने पेयजल व्यवस्था बहाल होने पर राज्य सरकार, मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े तथा जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें घर के समीप ही स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो रहा है। यह पहल ग्रामीण जीवन को सुगम बनाने, महिलाओं एवं बच्चों के श्रम की बचत करने तथा जनजातीय अंचलों में जीवन स्तर सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

साव ने दिए निर्देश : निर्माणाधीन सड़कों और पुलों की वजह से बरसात में लोगों को आवाजाही में न हो परेशानी

उप मुख्यमंत्री अरुण साव के बस्तर प्रवास का दूसरा दिन : मिशन अमृत, राष्ट्रीय राजमार्ग और तालाब सौंदर्यीकरण कार्यों का किया निरीक्षण साव ने दिए निर्देश : निर्माणाधीन सड़कों और पुलों की वजह से बरसात में लोगों को आवाजाही में न हो परेशानी  रायपुर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने चार दिवसीय बस्तर प्रवास के दूसरे दिन आज कोण्डागांव में विभिन्न विकास एवं अधोसंरचना निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की जानकारी की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसियों को गुणवत्ता और समय-सीमा का विशेष ध्यान रखते हुए सभी कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री साव ने कोंडागांव नगर पालिका में मिशन अमृत 2.0 के अंतर्गत निर्माणाधीन जल प्रदाय योजना के कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने प्रगतिरत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के कार्यों का जायजा लेकर परियोजना के तकनीकी पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को ठेकेदार के साथ बेहतर समन्वय बनाकर निर्माण कार्य की बाधाओं को दूर कर कार्य में तेजी लाने को कहा। उन्होंने गुणवत्ता और समय-सीमा का  विशेष ध्यान रखने को कहा। केंद्र सरकार की मिशन अमृत 2.0 योजना के तहत कोण्डागांव में पेयजल आपूर्ति के लिए 9 एमएलडी क्षमता का वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना के अंतर्गत कोण्डागांव से 25 किलोमीटर दूर कोसारटेडा बांध से पानी लाकर उसका शोधन कर नल कनेक्शनों के माध्यम से घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। लगभग 104 करोड़ रुपये की लागत वाली इस योजना का 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। योजना के तहत दो ओवरहेड टैंकों का भी निर्माण किया जा रहा है। उप मुख्यमंत्री ने कोपाबेड़ा में 3 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से किए जा रहे तालाब सौंदर्यीकरण एवं अन्य विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कोपाबेड़ा से शिव मंदिर तक निर्माणाधीन सड़क चौड़ीकरण कार्य का भी जायजा लिया। लगभग 2.9 किलोमीटर लंबी यह सड़क 4 करोड़ 61 लाख रुपये की लागत से निर्मित की जा रही है। उप मुख्यमंत्री साव ने निर्माणाधीन कोण्डागांव-नारायणपुर राष्ट्रीय राजमार्ग-130डी के कार्यों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों एवं निर्माण एजेंसी से सड़क के साथ ही इस मार्ग में बनने वाले पुल-पुलियों के निर्माण की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने इस प्रगतिरत सड़क के कारण बरसात में लोगों को आवाजाही में कोई समस्या न हो, इसका खास ध्यान रखने को कहा।  साव ने कोंडागांव के चिखलपुट्टी में नवनिर्मित बस स्टैंड का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों को यहां यात्री सुविधाओं के विस्तार तथा बस स्टैंड के समुचित संचालन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर श्रीमती नुपूर राशि पन्ना, नगर पालिका के अध्यक्ष नरपति पटेल और उपाध्यक्ष जसकेतू उसेंडी सहित लोक निर्माण, नगरीय प्रशासन एवं विकास तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी इस दौरान मौजूद थे।

“राम नाम पर पहले पाबंदी थी” – गोंडा में विपक्ष पर जमकर बरसे सीएम योगी

गोंडा यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को गोंडा को 515.6 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं का उपहार दिया। उन्होंने इस मौके पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि 2017 से पहले यहां पर भगवान श्रीराम का नाम लेने पर प्रतिबंध था। भगवान का नाम लेने वाले श्रद्धालुओं पर डंडे बरसते थे। अब ऐसा नहीं है। उन्होंने कहा कि अब अगर कोई उत्सव के रंग में भंग डालने का काम करेगा तो उसका भविष्य स्वाहा हो जाएगा। सीएम योगी ने गोंडा में परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण करने के बाद जनसभा को संबोधित किया। जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के बाद गोंडा का विकास तुष्टीकरण, अराजकता, भाई-भतीजावाद और जातिवाद की भेंट चढ़ गया था। उसी का खामियाजा गोंडा को भुगतना पढ़ा। जहां सरयू मैया की असीम कृपा रहनी चाहिए थी। जहां फसले लहलहाते हुए देश के पेट को भरने का कार्य करती। वह जनपद पिछड़ता गया। सीएम योगी ने कहा कि महाराज सुहेलदेव हमारे लिए प्रेरणा है। आक्रांताओं को दहलाने वाला शौर्य कैसा होना चाहिए, महाराज सुहेलदेव उसके प्रतीक हैं। विदेशी आक्रांताओं के साथ कैसा व्यवहार होना चाहिए, विदेशी आक्रांताओं का मुंहतोड़ जवाब देना चाहिए इसकी प्रेरणा महराज सुहेलदेव ने हम सबको एक हजार वर्ष पहले दी थी। देश की आजादी में कैसे त्याग और बलिदान होना चाहिए गोंडा उसका प्रतीक है। आज गोंडा के पास अपना इंजीनियरिंग और एग्रीकल्चर कॉलेज है। कम्पोजिट विद्यालय और अस्पताल बन रहे हैं। गोंडा में जहां जो चाहिए वो विकास किया जा रहा है। विकास के कार्य, गरीब कल्याणकारी कार्य, विरासत से जुड़े हुए कार्य, नौजवानों के लिए नौकरी और निवेश के माध्यम से रोजगार हो। यह तब संभव हो पा रहा है, जब आपने कमल का बटन दबाया। अच्छी सरकार चुनोगे तो अच्छे परिणाम आएंगे। सीएम योगी ने कहा कि अब तो श्री अयोध्या धाम में राम भक्त के अलावा कोई 'रामद्रोही' घुस ही नहीं सकता है। ऐसी व्यवस्था कर दी गई है। आज अयोध्या चमक रही है। एक नई अयोध्या का मॉडल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि 2015-16 में भी दुर्गा पूजा के समय गोंडा में दंगे का प्रयास किया गया था। मां दुर्गा की पूजा के बाद मूर्ति विसर्जन नहीं किया जाता था। उत्सव के पहले उपद्रव होता था। उन्होंने कहा कि बेटी सुरक्षित नहीं। व्यापारी सुरक्षित नहीं। और सत्ता में बैठे लोग 2017 के पहले इन दंगाई और पेशेवर गुंडो के सामने नतमस्तक होते थे। प्रदेश में कर्फ्यू रहता था। अब उत्सव के रंग में किसी ने भंग डालने का काम किया तो उसका वर्तमान तो जाएगा ही, उसका भविष्य भी स्वाहा हो जाएगा। 500 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार भव्य राम मंदिर का निर्माण हुआ है। अब उत्तर प्रदेश में कानून का राज है और कोई भी अपराधियों के रंग में भंग नहीं डाल सकता। अयोध्या में अब रामभक्तों के अलावा कोई रामद्रोही कदम भी नहीं रख सकता।

रणथंभौर टाइगर रिजर्व: शावकों संग बाघिन रिद्धि का खूबसूरत वीडियो हुआ वायरल

 रणथंभौर राजस्थान के सबसे बड़े और मशहूर रणथंभौर टाइगर रिजर्व (Ranthambore Tiger Reserve) से एक बेहद ही मनमोहक वीडियो सामने आया है. इस वीडियो ने वन्यजीव प्रेमियों का दिल जीत लिया है. 'बाघों की नर्सरी' कहे जाने वाले इस रिजर्व में बाघिन टी-124 (RBT-124 Riddhi) अपने शावकों पर मां का प्यार लुटाती और उनकी नटखट अठखेलियों का आनंद लेती नजर आ रही है. वायरल वीडियो में क्या दिखा? 40 सेकंड के इस वीडियो में बाघिन रिद्धि जमीन पर आराम से लेटी हुई अपने दो शावकों को दूध पिलाती नजर आ रही है. तभी पीछे झाड़ियों में से एक और नन्हा शावक अठखेलियां करता हुआ निकलता है और सीधे अपनी मां के पेट पर आकर खड़ा हो जाता है. जब वह नटखट शावक नीचे उतरता है, तो बाघिन अपनी एक टांग हवा में उठाकर उसे भी दूध पीने का इशारा करती है. मां का इशारा पाते ही वह शावक भी अपने बाकी भाई-बहनों के साथ दूध पीने में मग्न हो जाता है. डीएफओ का अंदेशा हुआ सच इससे पहले रणथंभौर के नाल घाटी वन क्षेत्र में वन विभाग की नियमित गश्त के दौरान बाघिन रिद्धि को सिर्फ एक नन्हें शावक के साथ देखा गया था. तब उस शावक की उम्र करीब 2 से 3 महीने आंकी गई थी. रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह ने उस वक्त बताया था कि अभी बाघिन के साथ एक ही शावक नजर आया है, लेकिन संभवतया उसने और भी शावकों को जन्म दिया होगा. इस नए वायरल वीडियो ने वन विभाग के उस अंदेशे पर मुहर लगा दी है. शावकों को सुरक्षित और अठखेलियां करते देखना बाघ संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी सफलता है. बाघिन रिद्धि और उसके शावकों को किसी तरह का व्यवधान न हो, इसके लिए वन विभाग द्वारा नाल घाटी क्षेत्र में विशेष सतर्कता बरती जा रही है. वन विभाग की टीम लगातार इनकी निगरानी कर रही है ताकि उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. रणथंभौर में कुल कितने बाघ हैं? रणथंभौर में लगातार बढ़ती बाघों की संख्या वन प्रशासन और वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक सुखद अहसास है. यहां के बाघों की वजह से न सिर्फ रणथंभौर बल्कि प्रदेश के अन्य टाइगर रिजर्व भी आबाद हो रहे हैं. रणथंभौर में बाघों का वर्तमान कुनबा 77 तक पहुंच चुका है. इसमें 25 बाघ हैं, 23 बाघिन और 29 शावक हैं.

दिव्यांगता मामले में HC का अहम फैसला, कारोबारी के परिवार को मिलेगी 87 लाख की राहत

चंडीगढ़. सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता का शिकार हुए एक कारोबारी के परिवार को पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने करीब 22 वर्ष पुराने मामले में मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण जींद (एमएसीटी) द्वारा दिए गए मुआवजे को बढ़ाते हुए कुल 87.66 लाख रुपये कर दिया। पहले ट्रिब्यूनल ने 24.86 लाख रुपये मुआवजा दिया था। अब अदालत ने 62.80 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने का आदेश दिया है। जस्टिस सुदीप्ति शर्मा ने श्याम सुंदर गुप्ता के कानूनी वारिसों की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि दुर्घटना ने पीड़ित की न केवल शारीरिक क्षमता छीन ली, बल्कि उसकी आजीविका और सामान्य जीवन जीने की संभावनाएं भी समाप्त कर दी थीं। ऐसे मामलों में पीड़ित और उसके परिवार को न्यायोचित एवं पर्याप्त मुआवजा मिलना चाहिए। रिकार्ड के अनुसार 26 नवंबर 2003 को हुए सड़क हादसे में श्याम सुंदर गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए थे। दुर्घटना में उनकी रीढ़ की हड्डी, कूल्हे, पैर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें आईं। चिकित्सकीय जांच में उन्हें 100 प्रतिशत स्थायी दिव्यांग घोषित किया गया। वह अपने दैनिक कार्य स्वयं करने में असमर्थ हो गए थे और जीवन भर दूसरों पर निर्भर रहने को मजबूर हो गए। दुर्घटना के बाद उन्हें देश के विभिन्न अस्पतालों में लंबे समय तक इलाज कराना पड़ा। लगभग 12 वर्ष तक बिस्तर पर रहने के बाद 26 मार्च 2015 को उनका निधन हो गया। हाई कोर्ट ने पाया कि ट्रिब्यूनल ने मुआवजा तय करते समय कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त विचार नहीं किया था। अदालत ने आयकर रिटर्न के आधार पर उनकी मासिक आय 10,855 रुपये मानी और भविष्य की आय की संभावनाओं को भी जोड़ा। इसके बाद 100 प्रतिशत कार्यात्मक दिव्यांगता को ध्यान में रखते हुए आय के नुकसान की पुनर्गणना की गई। अदालत ने दर्द एवं पीड़ा के लिए 15 लाख रुपये, परिचारक खर्च के लिए आठ लाख रुपये, चिकित्सा खर्च के लिए 35 लाख रुपये से अधिक, विशेष आहार, परिवहन खर्च, जीवन की सुविधाओं से वंचित होने तथा विशेष उपकरणों के लिए अलग-अलग मुआवजा प्रदान किया। अदालत ने कहा कि दुर्घटना के कारण पीड़ित सम्मानजनक और स्वतंत्र जीवन जीने की क्षमता खो बैठा था, जिसकी भरपाई केवल चिकित्सा खर्च से नहीं हो सकती। हाई कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि घायल व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के बाद भी इलाज, दर्द एवं पीड़ा तथा अन्य खर्चों के मद में मिलने वाली राशि उसके कानूनी वारिसों को प्राप्त करने का अधिकार है, क्योंकि यह राशि उसकी संपत्ति का हिस्सा बन जाती है। इसी आधार पर अदालत ने बीमा कंपनियों और अन्य संबंधित पक्षों को बढ़ी हुई मुआवजा राशि दो महीने के भीतर जमा कराने का आदेश दिया।

बिना वैध अनुमति नहीं होगी रजिस्ट्री, अनधिकृत कॉलोनियों पर प्रशासन का बड़ा फैसला

पटियाला/सनौर. पटियाला डिवेल्पमेंट अथॉरिटी, पटियाला (पी.डी.ए.) की मुख्य प्रशासक अपरना एम.बी. ने बताया है कि पी.डी.ए. द्वारा जिला पटियाला में बिना स्वीकृति के अस्तित्व में आई अनधिकृत कॉलोनियों के विरुद्ध पापरा एक्ट, 1995 की धाराओं के तहत बनती कार्रवाई की जा रही है। मुख्य प्रशासक ने बताया कि इस संबंध में कई अनधिकृत कॉलोनियों को ध्वस्त करने की कार्रवाई की गई है तथा संबंधित सब-रजिस्ट्रारों को इन 100 से अधिक अनधिकृत कॉलोनियों में प्लॉटों की रजिस्ट्रियां दर्ज न करने संबंधी भी लिखा गया है। अपरना एम.बी. ने आगे बताया कि कॉलोनाइजरों एवं प्रमोटरों द्वारा इन अनधिकृत कॉलोनियों में बुनियादी सुविधाएं जैसे पानी, सीवरेज और बिजली की सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जातीं। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी मेहनत की कमाई इन अनधिकृत कॉलोनियों में न लगाएं और इन अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित प्लॉटों की कोई खरीद-फरोख्त न करें। पी.डी.ए. की मुख्य प्रशासक ने लोगों को सूचित किया कि इन अनधिकृत कॉलोनियों में स्थित प्लॉटों के लिए पी.डी.ए. कार्यालय द्वारा एन.ओ.सी. जारी नहीं किए जाते। इन अनधिकृत कॉलोनियों की पूरी सूची पी.डी.ए. पटियाला कार्यालय की वैबसाइट पर भी देखी जा सकती है। उन्होंने ऐसे कॉलोनाइजरों और प्रमोटरों को भी चेतावनी दी है कि वे किसी भी प्रकार की कॉलोनी विकसित करने से पहले पुड्डा के नियमों के अनुसार सक्षम अधिकारी से लाइसेंस प्राप्त करें, अन्यथा उनके विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी और अनधिकृत कॉलोनी को ध्वस्त कर दिया जाएगा।

ऑनलाइन सीट बुकिंग कर स्टेज कैरिज की तरह चल रहीं बसों पर होगी सख्त कार्रवाई

 लखनऊ  उत्तर प्रदेश में अखिल भारतीय पर्यटक परमिट (AITP) के तहत संचालित उन बसों के खिलाफ परिवहन विभाग ने सख्त रुख अपनाया है, जो ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीटवार बुकिंग कर स्टेज कैरिज की तरह संचालन कर रही हैं। परिवहन आयुक्त उत्तर प्रदेश के निर्देश पर 9 से 11 जून तक प्रदेशव्यापी विशेष चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाली बसों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) डॉ. उदित नारायण ने बताया कि अभियान के तहत प्रदेश के प्रमुख मार्गों, एक्सप्रेस-वे और टोल प्लाजाओं पर 24 घंटे प्रवर्तन दल तैनात रहेंगे। विशेष रूप से यमुना एक्सप्रेस-वे, आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे और पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर सघन जांच अभियान चलाया जाएगा, ताकि नियमों के विपरीत संचालित हो रही बसों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सके। अवैध यात्री परिवहन पर रहेगी विशेष नजर परिवहन विभाग के अनुसार, कुछ पर्यटक परमिट धारक बसें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए अलग-अलग यात्रियों को सीटवार टिकट बेचकर स्टेज कैरिज की तरह संचालन कर रही हैं, जो परिवहन नियमों के अनुरूप नहीं है। ऐसे मामलों पर रोक लगाने और अवैध यात्री परिवहन को नियंत्रित करने के लिए यह विशेष अभियान चलाया जा रहा है। संयुक्त टीमें करेंगी कार्रवाई डॉ. उदित नारायण ने बताया कि अभियान के दौरान परिवहन विभाग, यात्रीकर अधिकारियों और रोडवेज अधिकारियों की संयुक्त टीमें विभिन्न स्थानों पर जांच करेंगी। चेकिंग के दौरान दस्तावेजों, परमिट की शर्तों और संचालन प्रणाली की गहन पड़ताल की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर चालान, जुर्माना और अन्य वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। गौतमबुद्ध नगर में पहले से जारी है कार्रवाई उन्होंने बताया कि गौतमबुद्ध नगर में प्रवर्तन विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है। मई माह के दौरान 242 बसों की जांच की गई, जिनके खिलाफ विभिन्न मामलों में कार्रवाई करते हुए करीब एक लाख रुपये का जुर्माना वसूला गया। इसके अलावा वाहनों पर बकाया 67 लाख रुपये का कर भी जमा कराया गया। यात्रियों की सुरक्षा और नियमों के पालन पर जोर परिवहन विभाग का कहना है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अवैध यात्री परिवहन पर प्रभावी रोक लगाना, यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परिवहन नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराना है। विभाग को उम्मीद है कि विशेष चेकिंग अभियान के माध्यम से नियमों के विरुद्ध संचालित हो रही बसों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।