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धान किसानों की बढ़ी चिंता, हरियाणा में पिछैती फसल पर सूखे की मार

बहादुरगढ़. धान उत्पादक किसान इस बार आशा और निराशा के बीच झूल रहे हैं। मानसून की बेरुखी ने खेती का पूरा गणित बिगाड़ दिया है। समय पर रोपाई या बिजाई की गई धान की फसल फिलहाल संभली हुई है, लेकिन उसे बचाए रखने के लिए किसान दिन-रात ट्यूबवेल चला रहे हैं। दूसरी ओर, पिछैती रोपाई वाले खेतों में सूखे का असर पहले ही दिखाई दे चुका है। कहीं फसल की जुताई की जा चुकी है तो कहीं किसान उसे पशु चारे के लिए काटने को मजबूर हैं। बहादुरगढ़ क्षेत्र में इस बार करीब 20 हजार हेक्टेयर में धान की फसल है। मानसून कमजोर रहने और लंबे समय से पर्याप्त बारिश नहीं होने के कारण किसानों के सामने खेतों में नमी बनाए रखना बड़ी चुनौती बन गया है। समय पर रोपी गई फसल की स्थिति ठीक समय पर रोपी गई फसल की स्थिति अभी अपेक्षाकृत ठीक है, मगर इसके लिए लगातार सिंचाई करनी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि धान को पानी की जरूरत के समय नहरों में भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। ऐसे में ट्यूबवेल ही एकमात्र सहारा है। इससे डीजल और बिजली के साथ सिंचाई का खर्च बढ़ रहा है। किसान आनंद के अनुसार, पिछले सप्ताह तीन-चार दिन बूंदाबांदी हुई, जिससे कुछ राहत मिली, लेकिन खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई। तापमान बढ़ने के साथ पानी की जरूरत और बढ़ गई है। यदि ट्यूबवेल से सिंचाई नहीं की जाए तो फसल पर असर पड़ने का डर है। क्या इस बार बचेगा मुनाफा? लगातार सिंचाई के बावजूद इस बात की चिंता है कि अंत में उत्पादन कितना होगा और बढ़ी हुई लागत के बाद हाथ में मुनाफा कितना बचेगा। पिछैती रोपाई वाली फसल पर संकट सूखे की सबसे ज्यादा मार पिछैती रोपाई वाली फसल पर पड़ी है। मौसम में अगले एक-दो दिन में बदलाव और बारिश की संभावना से किसानों को उम्मीद बंधी है। अब देखना यह है कि आसमान से कितनी राहत मिलती है और खेतों में खड़ी धान की फसल किसानों की उम्मीद को उत्पादन और मुनाफे में कितना बदल पाती है। इधर, कृ़षि विभाग के एसडीओ डा. सुनील कौशिक ने बताया कि अभी फसल की स्थिति ठीक है।

खाद्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, 650 किलो संदिग्ध पनीर पकड़ा; जांच को भेजे नमूने

रायपुर. राजधानी रायपुर में संदिग्ध पनीर की सूचना पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने जोरा मॉल के सामने खड़े एक पिकअप वाहन का औचक निरीक्षण किया। वाहन में ओडिशा परिवहन के लिए रखी गई करीब 650 किलो संदिग्ध पनीर की सामग्री मिली। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के नोडल अधिकारी डोमेंद्र ध्रुव ने बताया कि संदिग्ध पनीर को लेकर प्राप्त सूचना के आधार पर टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की। निरीक्षण के दौरान पिकअप वाहन में रखे पनीर की गुणवत्ता को लेकर आशंका होने पर उसका नमूना जांच के लिए संकलित किया गया। जांच के दौरान यह सामग्री बिरगांव निवासी अंशु बंसल के नाम से संबंधित पाई गई। नमूना लेने के बाद बची हुई सामग्री को नियमानुसार उनकी ही अभिरक्षा में सीज कर सुरक्षित रखा गया है। विभाग के अधिकारियों के मुताबिक पनीर के सैंपल की जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि सामग्री खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरती है या नहीं।

CM विष्णु देव साय का अफसरों को दो टूक, विकास कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं; समय पर पूरा करें काम

विकास कार्यों में लेटलतीफी बर्दाश्त नहीं, तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित  करने के दिए निर्देश खामभाठा में निर्माणाधीन पुल से बच्चों और ग्रामीणों को हो रही परेशानी को मुख्यमंत्री ने गंभीरता से लिया गरियाबंद कलेक्टर से दूरभाष पर ली जानकारी, निश्चित समयसीमा में पुल निर्माण पूरा कराने के निर्देश स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के लिए तत्काल सुरक्षित वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने कहा सुनिश्चित निर्माणाधीन स्थल पर खुले सरिए, गड्ढे एवं अन्य जोखिमों को तत्काल दूर करने के निर्देश रायपुर   मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि प्रदेश में जनसुविधा से जुड़े विकास एवं निर्माण कार्यों को तय समयसीमा में गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करना संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी है। निर्माण कार्यों में अनावश्यक देरी और कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारी निर्माणाधीन कार्यों की नियमित निगरानी करें और जहां भी कार्य की गति धीमी है, वहां बाधाओं को तत्काल दूर कर काम में तेजी लाएं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकास कार्यों में देरी का सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ता है। विशेष रूप से सड़क, पुल-पुलिया, स्कूल और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े निर्माण कार्यों में समयबद्धता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनहित से जुड़े कार्यों में लेटलतीफी को गंभीरता से लिया जाएगा और अनावश्यक विलंब के लिए जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसी क्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गरियाबंद जिले के मैनपुर विकासखंड अंतर्गत खामभाठा क्षेत्र में निर्माणाधीन पुल के कारण स्कूली बच्चों एवं ग्रामीणों को आवागमन में हो रही परेशानी की जानकारी मिलते ही इसे गंभीरता से लिया। उन्होंने गरियाबंद कलेक्टर रणबीर शर्मा से दूरभाष पर चर्चा कर वस्तुस्थिति की जानकारी ली और निश्चित समयसीमा तय कर पुल का निर्माण गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा कराने के निर्देश दिए। साथ ही लेटलतीफी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब तलब करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि पुल का निर्माण पूरा होने तक स्कूली बच्चों और क्षेत्रवासियों को किसी भी परिस्थिति में जोखिम उठाकर आवागमन न करना पड़े, इसके लिए जिला प्रशासन तत्काल सुरक्षित और सुगम वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करे। मुख्यमंत्री साय ने निर्माणाधीन पुल स्थल पर सुरक्षा के सभी आवश्यक प्रबंध तत्काल करने के निर्देश दिए। उन्होंने खुले एवं खतरनाक तरीके से लगे सरियों को सुरक्षित करने, गहरे गड्ढों और अन्य जोखिमपूर्ण स्थानों को दुरुस्त करने तथा आवश्यकता के अनुसार बैरिकेडिंग सहित सभी जरूरी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री साय ने सभी जिला कलेक्टरों को निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी करने के निर्देश देते हुए कहा कि निर्माण में आ रही बाधाओं का तत्काल समाधान किया जाए और कार्य में तेजी लाई जाए। अधिकारी पूरी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करें तथा यह सुनिश्चित करें कि स्वीकृत विकास कार्यों का लाभ नागरिकों को निर्धारित समय पर मिले। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनसुविधा और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े विकास कार्यों में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।

CM सेहत योजना: पंजाब में 33 लाख हेल्थ कार्ड बांटने की तैयारी, घर-घर पहुंचेंगे अधिकारी

चंडीगढ़. पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्डों के वितरण में अब तेजी आने वाली है, करीब 33 लाख कार्ड जल्द ही जिलों में उपलब्ध होने की उम्मीद है। राज्य सरकार सभी पात्र लाभार्थियों को योजना के दायरे में लाने के लिए कार्य कर रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने बताया कि करीब 31 लाख मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड पहले ही जिलों में उपलब्ध हो चुके हैं, जबकि लगभग 2 लाख और कार्ड जल्द उपलब्ध होने की उम्मीद है। सरकार ने करीब 2,008 गांवों और वार्डों की पहचान की है, जहां 400 या उससे अधिक लाभार्थी कार्ड के लिए पात्र हैं। इन स्थानों पर विशेष वितरण शिविर लगाए जाएंगे, ताकि कार्ड वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके और लाभार्थियों को अपने क्षेत्र में ही कार्ड प्राप्त करने की सुविधा मिल सके। लाभार्थियों को शिविरों के बारे में दी गई सूचना लाभार्थियों को शिविरों के बारे में पहले से सूचित किया जाएगा। आशा कार्यकर्ताओं, आशा फैसिलिटेटरों, सेहत मित्रों और अन्य फील्ड स्टाफ को लाभार्थियों को शिविरों तक लाने तथा अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए तैनात किया जाएगा। मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान द्वारा मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्ड वितरण कार्यक्रम के औपचारिक शुभारंभ के बाद शिविर आधारित वितरण शुरू होगा। सरकार ने कार्यक्रम शुरू होने के एक सप्ताह के भीतर इन शिविरों में कार्ड वितरण पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिन गांवों और वार्डों में 400 से कम लाभार्थी हैं, वहां पहले से चल रही घर-घर कार्ड वितरण व्यवस्था जारी रहेगी। शिविरों के बाद भी जो कार्ड वितरित नहीं हो पाएँगे, उन्हें भी आशा कार्यकर्ताओं और आशा फैसिलिटेटरों के माध्यम से लाभार्थियों के घरों तक पहुंचाया जाएगा। अंतिम स्तर तक कार्ड पहुंचाने को प्रोत्साहित करने के लिए आशा कार्यकर्ताओं को प्रत्येक सफलतापूर्वक वितरित कार्ड के लिए 10 रुपये, जबकि आशा फैसिलिटेटरों को प्रति कार्ड ₹2 दिए जाएंगे। घर-घर कार्ड वितरण का रिकॉर्ड रखा जाएगा और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा प्रोत्साहन राशि के दावों की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। दो सप्ताह के भीतर घरों तक पहुंचाए जाएंगे कार्ड शिविर आधारित वितरण अभियान पूरा होने के बाद शेष कार्डों को अगले दो सप्ताह के भीतर घर-घर वितरण व्यवस्था के माध्यम से वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य स्वास्थ्य एजेंसी द्वारा जिलों को कार्ड तथा सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) सामग्री पहले ही उपलब्ध करवाई जा चुकी है, इसमें कार्ड जैकेट, लिफाफे और ब्रोशर भी शामिल हैं। अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया की करीबी निगरानी करने तथा निर्धारित समयसीमा और मानक संचालन प्रक्रिया (स्टैण्डर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर) का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे पंजाब में मुख्यमंत्री सेहत योजना कार्डों का वितरण पूरा करना है, सरकार का विशेष जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि कोई भी पात्र लाभार्थी योजना के लाभ से वंचित न रहे।

सिंगरौली के विकास का मेगा प्लान तैयार, कृषि, पर्यावरण और जल प्रबंधन पर रहेगा खास फोकस

सिंगरौली   मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि राज्य की खनिज संपदा विकास के लिए एक अहम संपत्ति है और इसका इस्तेमाल पारदर्शिता और पर्यावरण संतुलन के साथ किया जाना चाहिए।'राज्य खनिज अन्वेषण नीति 2026' की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि खनिज नीतियों का मकसद राजस्व बढ़ाना और साथ ही रोजगार, निवेश और स्थानीय विकास के मौकों का विस्तार करना होना चाहिए। राज्य सरकार यह सुनिश्चित कर रही है।बैठक में मुख्य सचिव अशोक बरनवाल, मुख्यमंत्री कार्यालय के अतिरिक्त मुख्य सचिव नीरज मंडलोई और खनिज संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी दी मुख्यमंत्री ने प्रस्तावित नीति को मंजूरी दी और अधिकारियों को जनहित में इसे प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्देश दिया। सीएम मोहन यादव ने कहा कि जिला खनिज कोष (DMF) का सही इस्तेमाल करके खनिज-समृद्ध सिंगरौली जिले को शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल कल्याण, कृषि, वन, पर्यावरण, सड़क सुविधाओं और जल-संसाधन प्रबंधन के क्षेत्रों में एक मॉडल जिले के तौर पर विकसित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की खनिज संपदा राज्य के विकास के लिए एक अहम संपत्ति है और इन प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल पारदर्शिता और पर्यावरण संतुलन के साथ किया जाना चाहिए, जिससे राजस्व की प्राप्ति हो, निवेश को बढ़ावा मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए मौके पैदा हों। प्रदेश को देश के खनिज क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने का काम होना चाहिए उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों से होने वाले ज्यादातर फायदे को जन-कल्याणकारी योजनाओं में लगाया जाना चाहिए। विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाते हुए मध्य प्रदेश को देश के खनिज क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में काम किया जाना चाहिए। बैठक में खनिज संसाधन विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल ने बताया कि कई पहलों के जरिए खनिज से होने वाले राजस्व को बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित नीति का मकसद 2026-27 के आखिर तक खनिज संसाधनों से होने वाली आय को 13,720 करोड़ रुपये और 2030-31 तक 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। सबसे अधिक मिनरल रेवेन्यू दस जिलों से आता है मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में,अगस्त 2026 के आखिर तक मिनरल से होने वाली कमाई सालाना लक्ष्य (106 प्रतिशत) से ज्यादा रही। जानकारी के मुताबिक, सबसे अधिक मिनरल रेवेन्यू दस जिलों से आता है। इनमें सिंगरौली, अनूपपुर, शहडोल, कटनी, बालाघाट, सतना, जबलपुर, छिंदवाड़ा, उमरिया और बैतूल शामिल हैं। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में जुलाई 2026 के आखिर तक इन दस जिलों के पास कुल 3,147.10 करोड़ रुपये का डीएमएफ फंड मौजूद है, जिसमें सिंगरौली जिले का योगदान सबसे अधिक है। बताया गया कि सभी 55 जिलों का कुल डीएमएफ फंड 3,574.53 करोड़ रुपये है।  

हिसार एयरपोर्ट से देशभर की कनेक्टिविटी होगी मजबूत, बढ़ाई जाएंगी फ्लाइट्स की संख्या

चंडीगढ़  हिसार एयरपोर्ट से देश के अलग-अलग हिस्सों में उड़ानों की संख्या में बढ़ोतरी की जाएगी। विशेषकर कनेक्ट फ्लाइट्स पर फोकस रहेगा, ताकि अधिक से अधिक यात्रियों को लाभ हो सके। कनेक्टिंग फ्लाइट वह यात्रा है, जिसमें अंतिम गंतव्य पर पहुंचने के लिए बीच के किसी हवाई अड्डे पर विमान बदलना पड़ता है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने वीरवार को ‘स्टेट प्रगति पोर्टल’ के तहत चल रही 75 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली 11 विकास परियोजनाओं की समीक्षा बैठक में कहा कि हिसार एयरपोर्ट के पास आईएमसी (इंटिग्रेटिड मैनुफैक्चरिंग कलस्टर) के कार्य को तेजी से पूरा करवाया जाए। 1578 एकड़ में परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी प्राप्त हो चुकी है और परियोजना के निर्माण कार्य का टेंडर किया जा चुका है। ऊर्जा विभाग की आयुक्त एवं सचिव आशिमा बराड़ ने बताया कि गुरुग्राम की 11 केवी फीडर लाइन नवीनीकरण की एक परियोजना में 93 प्रतिशत तथा दूसरी में 79 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। जगाधरी क्षेत्र में आरडीएसएस परियोजना को दिसंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। यमुनानगर में दीनबंधु छोटूराम ताप विद्युत संयंत्र में 800 मेगावाट अल्ट्रा सुपरक्रिटिकल यूनिट की स्थापना संबंधी कार्य निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार चल रहा है। रेवाड़ी जिले में आरडीएसएस के तहत लास रिडक्शन परियोजना का लगभग 86 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसे 30 नवंबर तक पूरा करवा दिया जाएगा। साढ़ौरा में 66 केवी सबस्टेशन को 220 केवी स्तर पर अपग्रेड करने की परियोजना का 95 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कुरुक्षेत्र सर्कल में कृषि कनेक्शनों के लिए 4,717 एच-पोल लगाने तथा नए ट्रांसफार्मर उपलब्ध कराने की परियोजना का 57 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। कैथल सर्कल में 2847 एच-पोल एवं नए ट्रांसफार्मरों से संबंधित परियोजना का 72 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।

BRICS सम्मेलन में विदेशी मेहमान चखेंगे बिहार का स्वाद, सत्तू और मखाना बने खास पहचान

पटना  BRICS सम्मेलन में विदेशी मेहमानों को भारत की विविधता के साथ बिहार के खास जायके का स्वाद भी चखने को मिलेगा। दिल्ली में होने वाले BRICS Summit की वेलकम किट में बिहार के सत्तू और मखाना को शामिल किया गया है। बिहार के इन दोनों उत्पादों के वैश्विक मंच पर पहुंचने से सीएम सम्राट चौधरी गदगद हैं। मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताते हुए इसे बिहार के लिए गौरव का क्षण बताया है। उन्होंने अपने एक्स हैंडल पर लिखा कि 'नए बिहार की नई पहचान,बिहार का स्वाद अब दुनिया के सामने।' मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली BRICS Summit की वेलकम किट में शामिल सत्तू और मखाना बिहार के स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लोकल टू ग्‍लोबल (Local to Global) के संकल्प को इससे मजबूती मिली है। एक ही मेज पर दिखेगी भारत की स्वाद विविधता BRICS सम्मेलन में आने वाले विदेशी मेहमानों को भारतीय खानपान की विविधता से रूबरू कराने की तैयारी की गई है। मेन्यू में देश के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक और लोकप्रिय व्यंजनों को शामिल किया गया है। एक ही मेज पर रागी का डोसा, बाजरे का उपमा, कश्मीरी पुलाव, हैदराबादी बिरयानी और लखनवी कबाब जैसे व्यंजन नजर आएंगे। इसके साथ ही बाजरा उपमा, अवधी कबाब, हैदराबादी बिरयानी और किनुआ बिरयानी जैसे व्यंजन भी मेहमानों को परोसे जाने की जानकारी सामने आई है। इस तरह BRICS सम्मेलन के जरिए विदेशी मेहमानों को एक ही जगह पर भारत के अलग-अलग राज्यों और क्षेत्रों के स्वाद का अनुभव मिलेगा। सत्तू-मखाना बने बिहार की पहचान वेलकम किट में सत्तू और मखाना को जगह मिलना ब‍िहार के लिए खास महत्व रखता है। सत्तू लंबे समय से बिहार के पारंपरिक खानपान का हिस्सा रहा है, जबकि मखाना अब देश-दुनिया में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। खासकर मिथिलांचल का मखाना बिहार की कृषि और स्थानीय उद्यमिता की महत्वपूर्ण पहचान बन चुका है। इसके बढ़ते बाजार के बीच अंतरराष्ट्रीय मेहमानों तक बिहार के इस उत्पाद की पहुंच राज्य के लिए नए अवसरों का संकेत भी मानी जा रही है। 'लोकल टू ग्लोबल' की दिखी तस्वीर BRICS जैसे वैश्विक मंच पर बिहार के सत्तू और मखाना की मौजूदगी को ‘लोकल टू ग्लोबल’ की सोच से जोड़कर देखा जा रहा है। स्थानीय उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की कोशिशों के बीच बिहार के पारंपरिक स्वाद को दुनिया के प्रभावशाली प्रतिनिधियों तक पहुंचाने का यह मौका अहम है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इसी संदर्भ में इसे बिहार की नई पहचान से जोड़ा है। अब BRICS सम्मेलन में दुनिया के अलग-अलग देशों से आने वाले मेहमान जब भारतीय व्यंजनों का स्वाद चखेंगे, तो उनकी मेज पर बिहार का सत्तू और मखाना भी अपनी खास मौजूदगी दर्ज कराएगा।     बिहार का गौरव वैश्विक मंच पर!     दिल्ली BRICS Summit में Welcome Kit में शामिल सत्तू और मखाना हमारे स्वाद, परंपरा और उद्यमिता की पहचान हैं।     माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी का आभार, जिन्होंने ‘Local to Global’ संकल्प को साकार किया।     नए बिहार की नई पहचान—बिहार का स्वाद अब…

स्वास्थ्य विभाग की ऑनलाइन बैठक में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने चिकित्साधिकारियों को दिए निर्देश

लखनऊ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर 2026 तक संचालित होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ को लेकर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को आवास पर वर्चुअल बैठक की। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अभियान के तहत आयोजित होने वाली विभिन्न गतिविधियों की तैयारियों की समीक्षा की और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान का उद्देश्य सेवा, स्वास्थ्य और जनकल्याण की भावना को जन-जन तक पहुंचाना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अभियान के तहत होने वाले सभी कार्यक्रमों का प्रभावी, व्यवस्थित और समयबद्ध संचालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाओं एवं योजनाओं का लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि इस अभियान में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले चिकित्सा अधिकारियों, कर्मचारियों को सम्मानित भी किया जाएगा। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने बताया कि अभियान के अंतर्गत 17 सितंबर को सेवा दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन प्रदेशभर में रक्तदान शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसी दिन शाम 7 बजे बजे प्रदेश की सभी स्वास्थ्य इकाइयों पर ‘आशीर्वाद का दीपक’ प्रज्वलित किया जाएगा। इसके माध्यम से सेवा, समर्पण और जनकल्याण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। वहीं, 25 सितंबर से 2 अक्टूबर तक पूरे प्रदेश में व्यापक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में आमजन को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं, जांच सुविधाओं तथा स्वास्थ्य विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाएगा। कार्ययोजना करें तैयार उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक जिले में अभियान की गतिविधियों की कार्ययोजना पहले से तैयार की जाए और सभी कार्यक्रमों की नियमित समीक्षा की जाए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के साथ-साथ पात्र लाभार्थियों को योजनाओं का सीधा लाभ दिलाना अभियान की प्राथमिकता होनी चाहिए। इनकी रही उपस्थिति वर्चुअल बैठक में राज्यमंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, मंत्री सोमेंद्र तोमर, उपाध्यक्ष, भाजपा, उत्तर प्रदेश कामेश्वर सिंह, प्रमुख सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) अमित कुमार घोष सहित स्वास्थ्य विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Chandigarh Municipal Election: सात वार्ड SC के लिए रिजर्व, चुनावी समीकरण बदले

चंडीगढ़. दिसंबर में होने वाले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर आज यानी शुक्रवार को वार्ड रिजर्वेशन का ड्रॉ निकाला गया। सेक्टर-6 स्थित यूटी गेस्ट हाउस में स्टेट इलेक्शन कमिश्नर की निगरानी में ड्रॉ हुआ। वार्ड आरक्षण ड्राॅ में सात वार्ड अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें वार्ड-29, वार्ड-4, वार्ड-9, वार्ड-15, वार्ड-1, वार्ड-3 और वार्ड-32 शामिल हैं। इन सात एससी वार्डों में से वार्ड-29, वार्ड-3 और वार्ड-32 एससी महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि बाकी चार वार्ड एससी महिला और पुरुष दोनों के लिए खुले रहेंगे। आरक्षण की इस तस्वीर से कई मौजूदा पार्षदों की चुनावी तैयारी और राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। इस बार आरक्षण ड्राॅ की प्रक्रिया में नगर निगम के कुल 35 वार्डों में से पहले से आरक्षित 16 वार्डों को शामिल नहीं किया गया। इन 16 वार्डों को बाहर करने के बाद बचे 19 वार्डों में ही नया ड्राॅ हुआ। इसी ड्राॅ में सात वार्ड एससी और नौ वार्ड सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए। यानी बचे 19 वार्डों में से कुल 16 वार्ड आरक्षित हो गए, जबकि सिर्फ तीन वार्ड सामान्य श्रेणी के लिए बचे। वर्ष 2021 के चुनाव में एससी के लिए वार्ड-7, 16, 19, 24, 26, 28 और 31 आरक्षित थे। इनमें वार्ड-16, 19 और 28 एससी महिला के लिए आरक्षित किए गए थे। इस बार एससी आरक्षण पूरी तरह नए वार्डों में चला गया है। वार्ड-29, 4, 9, 15, 1, 3 और 32 को एससी के लिए आरक्षित किए जाने से इन वार्डों में अब एससी वर्ग के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा। आरक्षण का सबसे बड़ा असर मौजूदा पार्षदों पर दिखाई देगा। वार्ड-3 से भाजपा के पार्षद दलिप शर्मा लगातार तीसरी जीत की तैयारी में थे, लेकिन वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने से अब उन्हें दूसरे वार्ड से चुनावी जमीन तलाशनी पड़ सकती है। वार्ड-4 की पार्षद और डिप्टी मेयर सुमन शर्मा के सामने भी यही चुनौती खड़ी हो गई है। वार्ड-9 की भाजपा पार्षद बिमला दुबे भी अब अपने मौजूदा वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। वार्ड-15 के रामचंद्र यादव के लिए भी आरक्षण बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यादव हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं। अब वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने के बाद उन्हें भी नई सीट तलाशनी होगी। वार्ड-29 में आप के टिकट पर जीतकर बाद में कांग्रेस में शामिल हुए मुन्नवर के लिए भी मौजूदा वार्ड की सीट बदल गई है। वहीं वार्ड-32 के भाजपा पार्षद और सीनियर डिप्टी मेयर जसमानप्रीत सिंह के सामने भी अब नई राजनीतिक जमीन तलाशने की चुनौती होगी। एससी महिला के लिए आरक्षित तीन वार्डों में वार्ड-29, वार्ड-3 और वार्ड-32 शामिल होने से इन सीटों पर अब एससी महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगी। वहीं नौ सामान्य महिला वार्डों के आरक्षण से भी कई मौजूदा पुरुष पार्षदों को अपनी सीट छोड़कर नए वार्ड में जाना पड़ सकता है। ऐसे में आरक्षण ड्राॅ ने चुनाव से पहले ही नगर निगम की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं।

अब AI से पढ़ेंगे शिक्षक! Google Education करेगी बिहार के स्कूल शिक्षकों का क्षमतावर्धन

पटना  माध्यमिक व प्लस टू विद्यालयों में पढ़ा रहे शिक्षकों का क्षमतावर्धन गूगल की टीम करेगी। शिक्षक दिवस के दिन इस वर्ष शिक्षा विभाग ने गूगल एजुकेशन के साथ करार किया था। अब गूगल की टीम शिक्षकों के क्षमतावर्धन की दिशा में काम आरंभ करने वाली है। इस क्रम में इसी माह 23-24 को गूगल के वरीय अधिकारियों की टीम फिर बिहार आ रही है। शिक्षकों के क्षमतावर्धन का क्रियान्वयन किस तरह से आगे बढ़े इस पर विमर्श होना है। शिक्षकों को उनके विषय में एआई के माध्यम से दक्ष किया जाएगा इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार माध्यमिक व इंटर स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षकों को एआई के माध्यम से उनके विषय में दक्ष किया जाएगा। अगर कोई शिक्षक विद्यालय में फिजिक्स पढ़ा रहे तो पाठ्यक्रम के हिसाब से उन्हें संबंधित विषय के सभी पहलुओं के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। संबंधित विषय में अगर हाल में कोई नयी चीज आयी है तो गूगल की टीम उसे भी संबंधित शिक्षकों को बताएगी। अध्यापन के सिस्टम में हो जाएगा बदलाव गूगल एजुकेशन द्वारा क्षमतावर्धन से शिक्षकों द्वारा पढ़ाने के सिस्टम में आ जाएगा बदलाव। शिक्षक अभी पाठ्य पुस्तक में उपलब्ध सामग्री के माध्यम से ही पढ़ाते हैं। अब एआई के प्रशिक्षण से उन्हें संबंधित विषय पर कई तरह की सामग्री उपलब्ध करायी जाएगी। अलग किस्म के नोट्स मिलेंगे। शिक्षक अपने विद्यार्थियों को नए सिरे से पढ़ाएंगे। यही नहीं प्रश्नों के नए सेट्स भी उपलब्ध होंगे। गूगल एजुकेशन की टीम तय करेगी प्रशिक्षण का फार्मेट गूगल एजुकेशन की टीम इसी माह तय करेगी कि प्रशिक्षण का फारमेट क्या होगा। जिला स्तर पर शिक्षकों का क्षमतवर्धन कार्यक्रम चलेगा या फिर राज्य स्तर पर। पहले किन-किन विषयों के प्रशिक्षण कार्यक्रम चलेंगे यह भी तय होना है।