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छत्तीसगढ़ से जुड़ेंगे 3 बड़े राज्य, रायपुर-रांची दूरी होगी महज 7 घंटे; बिलासपुर समेत कई शहरों को फायदा

रायपुर  रायपुर से रांची और धनबाद तक का सफर अब आसान होने वाला है. क्योंकि छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच बन रहा रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे दोनों राज्यों के बीच गेंमचेंचर होने वाला है. इसके बनने के बाद रायपुर से रांची का सफर महज 7 घंटे में पूरा हो जाएगा. जबकि रायपुर से धनबाद का सफर भी 8 से 9 घंटे के बीच में पूरा हो जाएगा. इस हाईवे के बनने से छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों से और तेज हो जाएगी. 707 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे का काम अलग-अलग चरणों में पूरा किया जा रहा है. छत्तीसगढ़ के लिहाज से यह प्रोजेक्ट बेहद अहम माना जा रहा है. क्योंकि इससे न केवल पश्चिम की तरफ रोड कनेक्टिविटी मजबूत होगी. बल्कि ईधन और समय की भी अच्छी बचत होनी शुरू हो जाएगी।  रायपुर से रांची 7 घंटे में  रायपुर-धनबाद इकोनॉमिक कॉरिडोर (EC-07) के बनने के बाद छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर और झारखंड की राजधानी रांची के बीच सफर आसान हो जाएगा. अभी दोनों शहरों के बीच की दूरी तय करने में 13 से 14 घंटे का समय लग जाता है, क्योंकि टू-लेन रास्तों से होकर जाना पड़ता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के बनने के बाद यह सफर 7 घंटे में पूरा कर लिया जाएगा. वहीं दोनों शहरों के बीच 30 किलोमीटर तक का फर्क आएगा।  रायपुर से धनबाद का सफर 9 घंटे में  छत्तीसगढ़ और झारखंड के इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से रायपुर और धनबाद की दूरी में भी बड़ा अंतर आएगा. अभी दोनों शहरों के सफर में 14 से 16 घंटे का समय लगता है. लेकिन इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने से दोनों शहरों के बीच का सफर 8 से 9 घंटे में पूरा हो जाएगा. यह एक्सप्रेसवे पुराने घुमावदार रास्तों के बजाय कई जगह बिल्कुल नया और सीधा रास्ता बना देगा. रायपुर से धनबाद के बीच बनकर तैयार होने वाला है यह ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे एक्सेस-कंट्रोल्ड से लेस होगा. जिससे यहां 100 किलोमीटर रफ्तार से गाड़ियां दौड़ सकेगी।  छत्तीसगढ़ की तीन राज्यों तक कनेक्टिविटी     छत्तीसगढ़: रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, पत्थलगांव, कुनकुरी, जशपुर तक जाएगा.      झारखंड: गुमला, रांची, बोकारो और धनबाद तक जाएगा.     यहां से आगे का यह सफर छत्तीसगढ़ को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से भी कनेक्ट कर देगा. छत्तीसगढ़ में 384 किलोमीटर का हिस्सा  रायपुर-धनबाद एक्सप्रेसवे का 384 किलोमीटर का हिस्सा छत्तीसगढ़ में बनाया जा रहा है. प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) की तरफ से प्रेस रिलीज जारी करके बताया गया कि NHAI ने पत्थलगांव-कुनकुरी से छत्तीसगढ़-झारखंड सीमा तक NH-43 पर इस प्रोजेक्ट का काम शुरू कर दिया है. यह राजमार्ग सीधे तौर पर रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़ और कोरबा जैसे औद्योगिक केंद्रों को झारखंड के धनबाद से जोड़ देगा. रायपुर से बिलासपुर के बीच का पुराना मार्ग 6-लेन के ब्राउनफील्ड एक्सप्रेसवे में अपग्रेड हो रहा है. जबकि बिलासपुर से आगे धनबाद तक यह पूरी तरह से एक नया रूट होगा. यह टोटल 104.25 किलोमीटर लंबा रूट है।  ट्रैफिक का दवाब नहीं होगा  इस एक्सप्रेसवे की खास बात यह है कि रास्ते में पड़ने वाले बड़े शहरों जैसे रायपुर, कोरबा, जशपुर, गुमला, रांची, बोकारो के बाहर से बायपास और ओवरब्रिज दिए गए हैं. जिससे शहर के अंदर का लोकल ट्रैफिक और जाम सफर को धीमा नहीं करेगा. इस पूरे रूट पर 382 से अधिक स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं. जिसमें 7 बड़े पुल, 30 छोटे पुल, 6 फ्लाईओवर्स और जंगली जानवरों को पैदल चलने वालों की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर अंडरपास शामिल हैं. जिससे ट्रैफिक का दवाब कम रहेगा।  2027 तक शुरू करने की तैयारी फिलहाल एनएचएआई की तरफ से छत्तीसगढ़ और झारखंड में अलग-अलग चरणों में इसका काम शुरू हो चुका है. एक्सप्रेसवे का ज्यादातर हिस्सा 2026 के दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. जबकि 2027 तक इसे शुरू करने की तैयारी है. यह एक्सप्रेसवे चालू होने के बाद लॉजिस्टिक्स लागत को 30 से 40 प्रतिशत तक कम कर देगा. जिससे छत्तीसगढ़ और झारखंड के बीच हाईस्पीड कनेक्टिविटी हो जाएगी। 

MP में 12 और सड़कों पर टोल की तैयारी, बढ़ेगा सफर का खर्च; सरकार को सालाना 3 हजार करोड़ की उम्मीद

भोपाल  मध्यप्रदेश में आने वाले समय में सड़क से सफर करना महंगा हो सकता है। राज्य सरकार सड़कों से होने वाली आय बढ़ाने के लिए टोल व्यवस्था का विस्तार करने की तैयारी में है। कम से कम 12 और सड़कों को टोल के दायरे में लाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा कुछ अन्य सड़कों को भी भविष्य में इस व्यवस्था से जोड़ने की योजना है। फिलहाल प्रदेश में मध्यप्रदेश रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (एमपीआरडीसी) की अलग-अलग योजनाओं के तहत 93 सड़कों पर 139 टोल प्लाजा संचालित हो रहे हैं। विभाग का मानना है कि नई सड़कों को टोल व्यवस्था से जोड़कर सरकार की आय में बड़ा इजाफा किया जा सकता है। अभी 400 करोड़, लक्ष्य 3 हजार करोड़ तक पीडब्ल्यूडी से जुड़े अधिकारियों के अनुसार प्रदेश में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के टोल से सालाना करीब 4 हजार करोड़ रुपये की आय होती है। इसके मुकाबले पीडब्ल्यूडी और एमपीआरडीसी की टोल से कमाई करीब 400 करोड़ रुपये सालाना है। इसी अंतर को देखते हुए विभाग अगले 10 से 15 साल में टोल से होने वाली आय को बढ़ाकर 2 हजार से 3 हजार करोड़ रुपये सालाना तक पहुंचाना चाहता है। इसके लिए नई सड़कों का निर्माण टोल आधारित मॉडल पर करने पर जोर दिया जा रहा है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार टोल आधारित नई सड़कों से विभाग की आय बढ़ेगी। इससे सड़क क्षेत्र में निवेश के साथ राज्य के राजस्व में भी विभाग का योगदान बढ़ाया जा सकेगा।  निजी कंपनियों के बजाय सरकार के पास आएगा टोल सड़क निर्माण के लिए पीडब्ल्यूडी अब हाइब्रिड एन्युटी मॉडल यानी एचएएम को ज्यादा बढ़ावा देने की तैयारी में है। इसका उद्देश्य यह भी है कि सड़क बनने के बाद टोल से मिलने वाली राशि सरकार के पास आए। बीओटी मॉडल में सड़क बनाने वाली निजी कंपनी निवेश करती है और तय अवधि तक टोल से अपनी लागत और मुनाफा वसूलती है। वहीं एचएएम में सड़क निर्माण की लागत का 40 प्रतिशत हिस्सा सरकार देती है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत राशि निजी कंपनी लगाती है। इस मॉडल में सड़क बनने के बाद टोल वसूली पीडब्ल्यूडी के माध्यम से किए जाने का प्रावधान है। यही वजह है कि विभाग नई परियोजनाओं के लिए एचएएम मॉडल को प्राथमिकता देने पर विचार कर रहा है।  एमपीआरडीसी के टोल आधारित सड़क प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक हाल में कुछ सड़कों को एचएएम के तहत मंजूरी दी गई है। इनमें सिवनी-बालाघाट, विदिशा-भोपाल और दमोह-कटनी सड़क परियोजनाएं शामिल हैं। इन सड़कों पर टोल प्लाजा बनाए जाने की योजना है। इसके अलावा आने वाले समय में एचएएम के तहत और सड़क परियोजनाएं मंजूर किए जाने की तैयारी है।  वाहन चालकों पर बढ़ेगा खर्च नई सड़कों को टोल नेटवर्क में शामिल किए जाने का सीधा असर वाहन चालकों पर पड़ेगा। इन सड़कों का इस्तेमाल करने वाले लोगों को निर्धारित शुल्क देना होगा। सरकार जहां इसे सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए अतिरिक्त आय का जरिया मान रही है, वहीं यात्रियों और माल परिवहन करने वाले वाहनों के लिए यात्रा की लागत बढ़ने की संभावना है। नई सड़कों पर टोल लागू होने से पहले शुल्क की दर और वसूली की व्यवस्था तय की जाएगी। 

सात जिलों में 35 निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण

भोपाल  लोक निर्माण मंत्री  राकेश सिंह एवं विभाग के प्रमुख सचिव  सुखवीर सिंह के निर्देशानुसार प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण व्यवस्था के तहत 5 सितंबर को सात जिलों में 35 निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया गया। मुख्य अभियंताओं के सात दलों ने विदिशा, बालाघाट, मुरैना, झाबुआ, मैहर, नीमच एवं निवाड़ी जिलों में यादृच्छिक आधार पर चयनित कार्यों का निरीक्षण किया। निरीक्षण किए गए कार्यों में लोक निर्माण विभाग के सड़क एवं पुल संबंधी 21, पीआईयू के चार भवन, मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के छह, मध्यप्रदेश भवन विकास निगम के तीन तथा राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित एक कार्य शामिल है। औचक निरीक्षण रिपोर्ट की समीक्षा मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। अधिकारियों को नोटिस, ठेकेदार के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई विदिशा जिले में चटोली मुख्य सड़क से हबीबगंज-कैथोरा तक चार किलोमीटर सड़क निर्माण कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाए जाने पर संबंधित अनुविभागीय अधिकारी एवं उपयंत्री को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। साथ ही ठेकेदार मेसर्स अनादि कंस्ट्रक्शन कंपनी, सिरोंज के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई करने के निर्देश मुख्य अभियंता, भोपाल को दिए गए। विदिशा जिले के नटेरन में मध्यप्रदेश भवन विकास निगम द्वारा निर्माणाधीन शासकीय एक्सीलेंस हाई स्कूल भवन की गुणवत्ता भी संतोषजनक नहीं पाई गई। संबंधित कंसल्टेंट, इलेक्ट्रिकल कॉन्ट्रैक्टर एवं आर्किटेक्ट को नोटिस जारी करने तथा ठेकेदार मेसर्स एसेंट कंस्ट्रक्शन्स प्राइवेट लिमिटेड के विरुद्ध ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई के निर्देश दिए गए। इसी प्रकार, 20 अगस्त को नरसिंहपुर जिले में निरीक्षण किए गए मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के करेली-सिंहपुर-डांगीढाना मार्ग की स्थिति संतोषजनक नहीं पाए जाने पर ठेकेदार मेसर्स गैनन डंकरली एंड कंपनी लिमिटेड को ब्लैकलिस्ट करने और राशि राजसात करने के निर्देश मुख्य अभियंता, एमपीआरडीसी को दिए गए। निरीक्षण किए गए अन्य 23 कार्यों में पाई गई कमियों को दूर करते हुए आवश्यक आंशिक सुधार निर्धारित समय-सीमा में कराने के निर्देश भी संबंधित अधिकारियों को दिए गए। लोकपथ की शिकायतों का चार दिन में हो निराकरण प्रबंध संचालक  यादव ने औचक निरीक्षण में सामने आई कमियों को समय-सीमा में दूर कराने और मुख्य अभियंता कॉन्फ्रेंस में दिए गए निर्देशों का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का शिकायतकर्ता की संतुष्टि के साथ एल-1 स्तर पर निराकरण कराने तथा मुख्य अभियंताओं एवं अधीक्षण यंत्रियों को इसकी नियमित समीक्षा करने को कहा। लोकपथ ऐप पर प्राप्त शिकायतों का निराकरण अनिवार्य रूप से चार दिवस में करने के निर्देश भी दिए गए। वर्षाकाल में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत को दें प्राथमिकता सड़क मरम्मत के साथ सड़क सुरक्षा, जंगल सफाई, रोड मार्किंग एवं पेंटिंग के कार्य समय पर पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। सड़क एवं पुल-पुलियों के आवश्यक संधारण, वर्षाकाल में क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत तथा चिन्हित ब्लैक स्पॉट के शॉर्ट टर्म एवं लॉन्ग टर्म सुधार कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने को कहा गया। परफॉर्मेंस गारंटी वाले कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर वर्षाकाल समाप्त होते ही कार्य प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में विभागीय परिसंपत्तियों से संबंधित किसी भी घटना की जानकारी तत्काल इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम में दर्ज करने, एमपीआरडीसी के एआरएस सिस्टम के सूचना बोर्ड लगाने, सेफ स्कूल जोन मॉडल के प्रस्ताव भेजने तथा लोक कल्याण सूचकांक पोर्टल पर विभागीय जानकारी नियमित रूप से अद्यतन करने के निर्देश दिए गए। लोक कल्याण सरोवर एवं पौधारोपण के नवीन लक्ष्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने को भी कहा गया। इसके अतिरिक्त बिटुमिन के बिलों का संबंधित रिफाइनरी के पोर्टल पर सत्यापन, जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों पर समयबद्ध कार्रवाई तथा औचक निरीक्षण व्यवस्था की गंभीरता एवं प्रभावशीलता बनाए रखने के निर्देश दिए गए। आगामी 15 सितंबर को आयोजित होने वाले अभियंता दिवस की सभी तैयारियां भी समय-सीमा में पूर्ण करने को कहा गया।  

पीएम सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना से सरगुजा में बढ़ रही ऊर्जा आत्मनिर्भरता

रायपुर प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना सरगुजा जिले में परिवारों को बिजली खर्च से राहत देने के साथ उन्हें ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का प्रभावी माध्यम बन रही है। घरों की छतों पर स्थापित रूफटॉप सोलर संयंत्र अब केवल घरेलू बिजली की जरूरत पूरी करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि हितग्राही अतिरिक्त बिजली का उत्पादन कर विद्युत ग्रिड में भी योगदान दे रहे हैं। अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत आमदरहा निवासी आलम साय रजवाड़े इसकी प्रेरणादायी मिसाल हैं। बिजली उपभोक्ता से बने बिजली दाता  आलम साय ने अपने घर की छत पर प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के तहत सोलर संयंत्र स्थापित कराया। उन्होंने बताया कि संयंत्र लगने से पहले उनके घर का मासिक बिजली बिल लगभग 1,500 से 2,000 रुपये तक आता था। सौर ऊर्जा का उपयोग शुरू होने के बाद पिछले लगभग साढ़े तीन महीने से उनका बिजली बिल शून्य है। इससे परिवार के मासिक खर्च में उल्लेखनीय राहत मिली है।  आलम साय कहते हैं, “पहले मैं बिजली उपभोक्ता था, लेकिन अब बिजली दाता बन गया हूं।” उन्होंने बताया कि सोलर संयंत्र से उत्पादित बिजली से पहले घर की जरूरत पूरी होती है और इसके बाद बचने वाली अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है। साढ़े तीन माह में 850 यूनिट अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी  आलम साय के अनुसार उनके घर में स्थापित सोलर संयंत्र से घरेलू खपत के बाद अतिरिक्त बिजली का भी उत्पादन हो रहा है। लगभग साढ़े तीन महीने की अवधि में करीब 850 यूनिट अतिरिक्त बिजली ग्रिड को दी जा चुकी है। इस तरह उनका परिवार बिजली की जरूरत पूरी करने के साथ ऊर्जा उत्पादन में भी भागीदार बन गया है। 1.08 लाख रुपये की डबल सब्सिडी से कम हुआ आर्थिक भार  आलम साय ने बताया कि सोलर संयंत्र स्थापित करने के लिए उन्हें केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपये तथा राज्य सरकार की ओर से 30 हजार रुपये की सहायता प्राप्त हुई। इस तरह कुल 1 लाख 8 हजार रुपये की सब्सिडी मिलने से सोलर संयंत्र स्थापित करने का आर्थिक भार काफी कम हुआ। उन्होंने बताया कि योजना के तहत आवेदन से लेकर संयंत्र स्थापना तक की प्रक्रिया सुविधाजनक रही। योजना से मिले लाभ से उत्साहित आलम साय ने अन्य पात्र बिजली उपभोक्ताओं से भी प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना का लाभ लेने की अपील की। “बिजली बिल से मिली राहत, योजना से बहुत खुश हूं”  आलम साय ने कहा, “मेरा बिजली बिल लगभग साढ़े तीन महीने से शून्य है। योजना का मुझे बहुत फायदा मिला है और मैं इससे बहुत खुश हूं।” उन्होंने आम परिवारों को सौर ऊर्जा से जोड़ने और इसके लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। लक्ष्य के करीब पहुंचा सरगुजा, 1,733 घरों में लगे सोलर संयंत्र विभागीय जानकारी के अनुसार सरगुजा जिले में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कुल 2,000 सोलर संयंत्र स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके विरुद्ध अब तक 1,733 घरों में रूफटॉप सोलर संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। इनमें शहरी क्षेत्र के 1,360 तथा ग्रामीण क्षेत्र के 373 संयंत्र शामिल हैं। प्रधानमंत्री सूर्य घर-मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से सरगुजा में घरों की छतें अब ऊर्जा उत्पादन का केंद्र बन रही हैं। योजना से जहां परिवारों के बिजली खर्च में कमी आ रही है, वहीं स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा मिलने के साथ ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी जिले की भागीदारी मजबूत हो रही है।  

स्वच्छ वायु प्रबंधन में मध्यप्रदेश का स्वर्णिम प्रदर्शन: इंदौर द्वितीय, जबलपुर तृतीय और भोपाल चौथे स्थान पर, वार्ड श्रेणी में भोपाल का वार्ड-60 अलंकृत

भोपाल  पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जनभागीदारी की दिशा में मध्यप्रदेश ने स्वर्णिम उपलब्धि अर्जित की है। राष्ट्रीय स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 के परिणामों में देश के शीर्ष पाँच स्वच्छ वायु शहरों में प्रदेश के तीन प्रमुख नगरों ने अनुपम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय पटल पर प्रदेश का गौरव बढ़ाया है। 'राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस' के अवसर पर सोमवार को नई दिल्ली स्थित इंदिरा पर्यावरण भवन के गंगा प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में 10 लाख से अधिक आबादी वाली श्रेणी में इंदौर एवं जबलपुर तथा वार्ड स्तरीय श्रेणी में भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से अलंकृत किया गया। यह सम्मान नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव तथा पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के सचिव श्री तन्मय कुमार द्वारा प्रदान किया गया। दस लाख से अधिक जनसंख्या श्रेणी में प्रदेश का उत्कृष्ट प्रदर्शन राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) के अंतर्गत 10 लाख से अधिक जनसंख्या वाले महानगरों की प्रतिस्पर्धा में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन अत्यंत सराहनीय रहा। इस वर्ग में इंदौर ने संपूर्ण देश में द्वितीय, जबलपुर ने तृतीय तथा राजधानी भोपाल ने चतुर्थ स्थान अर्जित कर स्वच्छ वायु प्रबंधन में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। इसी श्रेणी में ग्वालियर ने 39वाँ स्थान प्राप्त किया। वहीं, 3 से 10 लाख जनसंख्या वर्ग में उज्जैन ने 16वाँ और सागर ने 21वाँ स्थान प्राप्त किया, जबकि 3 लाख से कम जनसंख्या श्रेणी में देवास ने 7वाँ स्थान हासिल किया। उल्लेखनीय है कि केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा संचालित इस सर्वेक्षण में देश के 130 प्रमुख शहरों के मध्य निर्धारित मापदंडों पर स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहित करने के लिए रैंकिंग जारी की जाती है। इंदौर एवं जबलपुर की अनुकरणीय उपलब्धियां स्वच्छता के क्षेत्र में निरंतर नवमानक स्थापित करने वाले इंदौर नगर ने धूल नियंत्रण, मैकेनाइज्ड सड़क सफाई, हरित क्षेत्र के विस्तार तथा नागरिक सहभागिता के बल पर वायु गुणवत्ता प्रबंधन में देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। समारोह में इंदौर नगर निगम की ओर से महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, आयुक्त श्री क्षितिज सिंघल एवं एमआईसी सदस्य श्री अश्विनी शुक्ला ने यह सम्मान ग्रहण किया। वहीं, प्रदूषण नियंत्रण एवं सुनियोजित पर्यावरण संरक्षण कार्यों के दम पर तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले जबलपुर नगर निगम की ओर से महापौर श्री जगत बहादुर सिंह 'अन्नू', आयुक्त श्री राम प्रसाद अहिरवार, श्री कमलेश श्रीवास्तव, श्री संभव अयाची एवं श्री जी.एस. मरावी ने पुरस्कार प्राप्त किया। भोपाल के वार्ड क्रमांक-60 को मिला राष्ट्रीय गौरव वार्ड स्तरीय वायु गुणवत्ता में अभूतपूर्व सुधार और नवाचारों के लिए भोपाल नगर निगम के वार्ड क्रमांक-60 को राष्ट्रीय स्तर पर विशेष रूप से सराहा गया। स्थानीय स्तर पर हरित पहल, सघन पौधारोपण तथा नागरिक जागरूकता के प्रभावी प्रयासों के लिए अपर आयुक्त श्री अमन मिश्रा एवं एमआईसी सदस्य श्री आर. के. सिंह बघेल ने यह प्रतिष्ठित सम्मान स्वीकार किया। सतत् विकास और दूरदर्शी नेतृत्व की सुखद परिणति यह राष्ट्रीय गौरव प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत' के पावन संकल्प तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में संचालित पर्यावरण संरक्षण अभियानों का फलश्रम है। प्रदेश के नगरीय निकायों द्वारा धूल नियंत्रण, जल छिड़काव, खुले में कचरा जलाने पर रोकथाम, निर्माण स्थलों की निगरानी एवं व्यापक जनचेतना के जो प्रयास किए गए हैं, आज उन्हीं की परिणति स्वरूप मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय वायु संरक्षण पटल पर यह सफलता अर्जित की है।  

खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की तैयारियों की समीक्षा की

रायपुर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री  दयालदास बघेल ने आज मंत्रालय महानदी भवन नवा रायपुर में खाद्य विभाग के अधिकारियों की समीक्षा बैठक ली । उक्त बैठक में सचिव खाद्य मती रीना बाबा साहेब कंगाले, संचालक खाद्य डॉ. फरिया आलम, प्रबंध संचालक नागरिक आपूर्ति निगम  विलास भोसकर संदीपन, प्रबंध संचालक विपणन संघ  जितेन्द्र शुक्ला, महाप्रबंधक भारतीय खाद्य निगम  दीपक शर्मा एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।  मंत्री  बघेल ने सिटी गैस वितरण योजना के विभागीय वेबसाइट का शुभारंभ किया गया। मंत्री   बघेल ने बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 में भारतीय खाद्य निगम एवं नागरिक आपूर्ति निगम में कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन की गति बढ़ाये जाने के निर्देश दिये गये। माह सितंबर एवं अक्टूबर 2026 के 2 माह के चावल का समयानुसार भंडारण एवं वितरण कराये जाने के निर्देश दिये। आगामी खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान उपार्जन की तैयारियों यथा -बारदानों की व्यवस्था, नवीन खरीदी केन्द्रों में धान खरीदी की समुचित व्यवस्था आदि के संबंध में निर्देश दिये गये। मंत्री   बघेल ने खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में किसान पंजीयन के संबंध में शेष किसानों के एग्रीस्टेक पंजीयन कार्य में तेजी लाये जाने के निर्देश दिये ।  उन्होंने खरीदी केन्द्रों एवं संग्रहण केन्द्रों में शॉर्टेज की मात्रा में कमी लाये जाने के संबंध में निर्देश दिये गये।   खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री ने राज्य भण्डार गृह निगम के गोदाम निर्माण प्रगति की समीक्षा की एवं निर्माणाधीन गोदामों के समयानुसार निर्माण कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये। नापतौल विभाग की की समीक्षा करते हुए धरमकांटा का सत्यापन धान खरीदी प्रारंभ होने के पूर्व किये जाने के निर्देश दियेे। बैठक में जिला खाद्य नियंत्रक/खाद्य अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी, जिला प्रबंधक नागरिक आपूर्ति निगम, प्रबंधक राज्य भण्डार गृह निगम एवं नापतौल के जिला स्तरीय अधिकारीगण उपस्थित थे।

संदिग्ध अवैध शराब की घटना पर जिला दंडाधिकारी ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश

भोपाल  कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी सागर प्रतिभा पाल ने सागर जिले के बंडा क्षेत्र में संदिग्ध अमानक/अवैध शराब के सेवन से हुई घटना को गंभीरता से लेते हुए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। विगत दिनों सागर जिले की शाहगढ़ तहसील के ग्राम नौराज एवं गूगरा खुर्द तथा बंडा तहसील के ग्राम बमूरा आदि में 4 एवं 5 सितंबर की दरम्यानी रात संदिग्ध अमानक/अवैध शराब के सेवन के बाद ग्रामीणों के बीमार होने तथा कुछ मरीजों की मृत्यु की घटना सामने आई थी। प्रभावित ग्रामीणों ने उल्टी, बेहोशी एवं शरीर में झटके जैसे लक्षणों की शिकायत के बाद प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बंडा पहुंचकर उपचार कराया। चिकित्सकों द्वारा मरीजों का उपचार किया गया, लेकिन उपचार के दौरान कुछ मरीजों की मृत्यु हो गई। कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी ने घटना की वास्तविक परिस्थितियों एवं कारणों का तथ्यात्मक रूप से पता लगाने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 196 के तहत मजिस्ट्रियल जांच के निर्देश दिए हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मृतकों द्वारा शराब का सेवन किया गया था, जिसे संदिग्ध अमानक/अवैध शराब बताया गया है। मजिस्ट्रियल जांच के लिए अनुविभागीय दंडाधिकारी, जैसीनगर, जिला सागर को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। जांच में घटना किन परिस्थितियों में हुई, इसका वास्तविक कारण क्या था और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, इन सभी पहलुओं की विस्तृत जांच की जाएगी। मजिस्ट्रियल जांच में यह भी निर्धारित किया जाएगा कि मृतकों की मृत्यु का वास्तविक कारण संदिग्ध अमानक/अवैध शराब का सेवन था अथवा कोई अन्य कारण। साथ ही शराब के निर्माण, भंडारण एवं वितरण से संबंधित तथ्यों की भी जांच की जाएगी। यह भी पता लगाया जाएगा कि इसमें कौन-कौन संलिप्त थे। इसके अतिरिक्त, संबंधित नियामकीय विभागों द्वारा अपने दायित्वों के निर्वहन में किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई या नहीं, घटना के लिए मुख्य रूप से कौन-कौन से व्यक्ति जिम्मेदार हैं तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कौन-कौन से प्रशासनिक एवं कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं, इसकी भी जांच की जाएगी। जिला प्रशासन ने जांच अधिकारी को निर्धारित सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक जांच कर स्पष्ट अभिमत सहित जांच प्रतिवेदन कलेक्टर कार्यालय में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।  

बाढ़ में योगी सरकार का राहत अभियान जारी, 6.83 लाख लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट बांटे

लखनऊ योगी सरकार ने प्रदेश में बाढ़ की चुनौती के बीच राहत और बचाव कार्यों को पूरी तत्परता के साथ तेज कर दिया है। बाढ़ प्रबंधन की मजबूत व्यवस्था, मौके पर तैनात राहत टीमें और प्रभावित लोगों तक तत्काल मदद पहुंचाने के कारण प्रशासनिक अमला लगातार सक्रिय है। उत्तर प्रदेश राहत आयुक्त कार्यालय के मुताबिक अब तक 6.83 लाख से अधिक लंच पैकेट व 1.11 लाख से ज्यादा बाढ़ राहत किट जरूरतमंदों तक पहुंचाए जा चुके हैं। वहीं 19,496 प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। साथ ही बाढ़ से जनहानि शून्य है। राहत एवं बचाव अभियान के तहत अब तक स्थापित बाढ़ चौकियों की संख्या 1,634 की जा चुकी है। प्रभावित क्षेत्रों में अब तक 1,072 मेडिकल टीमें गठित की जा चुकी हैं। वहीं, राहत और बचाव कार्यों के लिए 2,161 नाव एवं मोटरबोट राहत अभियान में जुटी हुईं हैं। योगी सरकार के निर्देश पर बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का अभियान भी जारी है। सोमवार को 6,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया, जबकि अब तक 19,496 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया जा चुका है। प्रभावितों के लिए 1,315 शरणालय स्थापित किए गए हैं। भोजन और राहत सामग्री पहुंचाने में भी प्रशासन पूरी सक्रियता दिखा रहा है। अब तक 1.11 लाख से अधिक बाढ़ राहत किट और 6.83 लाख से अधिक लंच पैकेट वितरित किए गए हैं। स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अब तक 6.68 लाख क्लोरीन टैबलेट और 2.60 लाख से अधिक ओआरएस पैकेट भी वितरित किए गए हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त मकानों के मामलों में भी प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। अब तक 1,490 मकान क्षतिग्रस्त होने की सूचना है, जिसके सापेक्ष कुल 1,272 मामलों में सहायता दी जा चुकी है। प्रभावित जिले अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बदायूं, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, चंदौली, फर्रुखाबाद, गाजीपुर, गोंडा, गोरखपुर, हरदोई, कासगंज, कानपुर नगर, लखीमपुर खीरी, मिर्जापुर, मुरादाबाद, प्रयागराज, रायबरेली, संत कबीर नगर, रामपुर, सीतापुर, शाहजहांपुर, उन्नाव और वाराणसी।

समान नागरिक संहिता- छत्तीसगढ़ में ड्राफ्टिंग तेज कुलपतियों ने जमीनी सर्वे और अकादमिक शोध पर दिया जोर

​रायपुर छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को व्यावहारिक, समावेशी और जन-उपयोगी बनाने के लिए राज्य शासन द्वारा गठित UCC समिति ने जन-परामर्श और विचार-विमर्श की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसी कड़ी में समान नागरिक संहिता (UCC)प्रारूप समिति द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती ज्योति रानी सिंह के समक्ष विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और भरण-पोषण जैसे संवेदनशील मुद्दों पर विभिन्न विश्वविद्यालयों से आए कुलपति ने खुलकर अपनी राय रखी। बैठक में पारंपरिक सामाजिक मान्यताओं से लेकर आधुनिक वैधानिक सुधारों तक के कई अहम पहलुओं पर गहन मंथन हुआ। ​बैठक के दौरान प्रदेश के प्रमुख शिक्षाविदों और कुलपति ने कानून निर्माण की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिन्हें UCC समिति ने ड्राफ्टिंग प्रक्रिया में प्राथमिकता से शामिल करने का आश्वासन दिया है। देश के प्रतिष्ठित विधिक संस्थानों में शामिल हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (HNLU) के कुलपति प्रोफेसर  विवेकानंदन ने पावर पाईट प्रजेन्टेशन देकर समान नागरिक संहिता (UCC) के संबंध में विस्तृत सुझाव दिए। उन्होंने एक मजबूत, निष्पक्ष और न्यायसंगत मसौदा तैयार करने के लिए हर संभव तकनीकी और कानूनी सहयोग देने के लिए हिदायतुल्लाह राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की ओर से प्रतिबद्धता जताई। एक ऐसा कानून है जो देश के सभी नागरिकों के लिए धर्म, जाति या लिंग के भेदभाव के बिना विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक जैसे नियम तय करता है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अधिकार देना और विशेषकर महिलाओं के लिए न्याय व समानता सुनिश्चित करना है।  पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सच्चिदानंद शुक्ला ने ड्राफ्ट को शोध-आधारित बनाने के लिए समाजशास्त्र, मानवशास्त्र तथा विधि विभागों के विशेषज्ञों एवं शोधकर्ताओं के इनपुट्स को शामिल करने पर बल दिया। प्रदेश के सभी जिलों में व्यापक जमीनी सर्वे कराने और आम जनता से सीधे प्रतिक्रिया (जन-फीडबैक) लेने का सुझाव दिया गया, ताकि कानून राज्य की वास्तविक परिस्थितियों और जन-आकांक्षाओं के अनुरूप तैयार हो सके। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर मनोज दयाल ने भी इस संबंध में सुझाव दिए। ​समिति ने दिया प्राथमिकता का आश्वासन  ​शिक्षाविदों के इन प्रस्तावों की सराहना करते हुए UCC समिति के सदस्यों, सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी श्री एम. के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार और सेवानिवृत्त प्राचार्या श्रीमती ज्योति रानी सिंह ने आश्वासन दिया कि जन-संवाद, अकादमिक शोध और विधिक संतुलन पर आधारित इन सभी सुझावों को अंतिम ड्राफ्ट में प्रमुखता से शामिल किया जाएगा।

यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में तय होगी मोबिलिटी की नई दिशा, 8 सत्रों में होगा मंथन

भोपाल  इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में 11 एवं 12 सितंबर को आयोजित होने वाली यात्री परिवहन विजन समिट-2026 में मध्यप्रदेश में यात्री परिवहन को अधिक सुगम, सुरक्षित, स्मार्ट और प्रदूषणरहित बनाने की दिशा में वृहद स्तर पर मंथन किया जाएगा। दो दिवसीय समिट में विशेषज्ञों, बस ऑपरेटरों, उद्यमियों और नीति-निर्माताओं के बीच संवाद होगा। 8 सत्रों के माध्यम से यात्री परिवहन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। समिट में मुख्यमंत्री सुगम यात्री परिवहन सेवा अंतर्गत मध्यप्रदेश मोबिलिटी विजन-2030 को केंद्र में रखते हुए सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से निवेश को बढ़ावा देने, रोजगार एवं उद्यमिता सृजन के लिए केंद्र सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय रूप से सुदृढ़ एवं आत्मनिर्भर सार्वजनिक बस संचालन की रणनीति पर चर्चा होगी। इसके साथ ही बस संचालन एवं इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (आईटीएमएस) में सार्वजनिक-निजी भागीदारी, सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में सुरक्षा, विश्वसनीयता एवं यात्री सुरक्षा को मजबूत करने, हरित मोबिलिटी के लिए स्वच्छ ईंधन और भविष्य के लिए तैयार बस बेड़े को विकसित करने के विषय पर भी विशेषज्ञ अपने सुझाव देंगे। समिट में यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए एकीकृत टिकटिंग एवं स्वचालित किराया संग्रह प्रणाली लागू करने और निर्बाध यात्रा अनुभव विकसित करने पर भी चर्चा होगी। इसके साथ ही डेटा आधारित निर्णय प्रणाली और एआई विश्लेषण के माध्यम से इंट्रा-सिटी एवं इंटर-सिटी बस मार्गों और संचालन की बेहतर योजना तैयार करने के विकल्पों पर भी मंथन किया जाएगा। समिट का उद्देश्य प्रदेश में ऐसी यात्री परिवहन व्यवस्था विकसित करना है, जो आधुनिक तकनीक, निजी निवेश, पर्यावरण संरक्षण और यात्री सुविधाओं के समन्वय से भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सके। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के यात्रियों को बेहतर परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश सरकार के परिवहन विभाग द्वारा परिवहन विजन समिट 2026 का आयोजन किया जा रहा है।