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विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने हेतु आयोजित किया जा रहा है प्रशिक्षण कार्यक्रम

भोपाल  पुलिस महानिदेशक  कैलाश मकवाणा ने “VVIP/VIP Security & Protection Course” का आज विशेष शाखा प्रशिक्षण संस्थान, श्यामला हिल्स भोपाल में शुभारंभ किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 12 मई से 15 मई 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों को विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित मानक प्रक्रियाओं, समन्वय तंत्र, आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित कार्यवाही तथा आधुनिक सुरक्षा उपायों के संबंध में सैद्धांतिक एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है। उद्घाटन सत्र में महत्वपूर्ण विषयों पर पुलिस मुख्यालय, इंटेलिजेंस विंग, मुख्यमंत्री सुरक्षा शाखा, बी.डी.डी.एस. टीम, डॉग स्क्वॉड तथा अन्य विशेषज्ञ इकाइयों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशेषज्ञ प्रशिक्षकों द्वारा सहभागिता करते हुए विषय विशेषज्ञ के रूप में मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य में विशिष्ट एवं अतिविशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था को अधिक सुदृढ़, समन्वित, प्रभावी एवं तकनीकी रूप से सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस)  ए. साई मनोहर, पुलिस महानिरीक्षक (इंटेलिजेंस) डॉ. आशीष, उप पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था एवं सुरक्षा)  तरुण नायक, उप पुलिस महानिरीक्षक (इंटेलिजेंस)  डी. कल्याण चक्रवर्ती, सहायक पुलिस महानिरीक्षक (प्रशिक्षण) मती आभा तिर्की सहित विशेष शाखा के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

वन्यजीव संरक्षण में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग, CM डॉ. यादव के नेतृत्व में नई पहचान

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने वन और वन्य जीव संरक्षण के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बनाई है। राज्य सरकार ने वन्य जीवों के संरक्षण को केवल पर्यावरणीय दायित्व नहीं माना। सरकार ने इसे विकास, पर्यटन, स्थानीय रोजगार, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक सहभागिता से जोड़कर व्यापक जन आंदोलन का स्वरूप दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की दूरगामी सोच से मध्यप्रदेश आज ‘टाइगर स्टेट’ के साथ ही देश के सबसे व्यापक और वैज्ञानिक वन्य जीव संरक्षण मॉडल के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का विजन है कि प्रदेश के वन और नदियां केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। मध्यप्रदेश के वन देश की कई प्रमुख नदियों का मायका हैं। इस तरह ये वन कई राज्यों की जल सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसी सोच के साथ राज्य सरकार जलवायु अनुकूल, विज्ञान आधारित और समुदाय केंद्रित वन प्रबंधन मॉडल को आगे बढ़ा रही है। कूनो बना वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन का ग्लोबल प्रयोगशाला श्योपुर का कूनो नेशनल पार्क आज विश्व स्तर पर वन्यजीव संरक्षण का प्रतीक बन चुका है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में प्रारंभ हुए ‘प्रोजेक्ट चीता’ को नई गति देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बोत्सवाना से लाई गई मादा चीतों को खुले जंगल में छोड़कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाया। वर्तमान में कूनो में चीतों की संख्या 57 तक पहुंच चुकी है। एक शताब्दी पूर्व लुप्त हो चुके चीतों की देश में सफल पुनर्स्थापना ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वैज्ञानिक प्रबंधन और राजनीतिक प्रतिबद्धता के बल पर विलुप्त प्रजातियों का पुनर्वास संभव है। मध्यप्रदेश में चीतों साथ ही लुप्त हो चुकी ‘जंगली भैंसा’ प्रजाति को भी कान्हा की घास-भूमि में आबाद किया जा रहा है। राज्य सरकार अब कूनो को ‘ग्लोबल ब्रीडिंग सेंटर’ के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रही है। साथ ही गांधी सागर अभयारण्य को चीतों का दूसरा और वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौंरादेही को तीसरा बड़ा चीता लैंडस्केप बनाया जा रहा है। नौंरादेही में चीतों के पुनर्वास के लिये सॉफ्ट रिलीज बोमा के निर्माण से परियोजना के अगले चरण का शुभारंभ हो चुका है। विलुप्त प्रजातियों की पुनर्स्थापना का अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव के कार्यकाल में चीतों के साथ ही कई दुर्लभ और विलुप्तप्राय प्रजातियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन पर विशेष ध्यान दिया गया है। कान्हा टाइगर रिजर्व में असम के काजीरंगा नेशनल पार्क से लाए गए जंगली भैंसों का पुनर्वास इस दिशा में ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है। यह प्रयास केवल एक प्रजाति को पुनर्स्थापित करने तक सीमित नहीं, बल्कि विलुप्त हो रही जैव-विविधता और पारिस्थितकी तंत्र को पुनर्जीवित करने का अभियान है। चंबल, कूनो और नर्मदा क्षेत्र में घड़ियाल, मगरमच्छ और कछुओं के संरक्षण के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। राष्ट्रीय चंबल सेंचुरी पहले से ही दुनिया में घड़ियालों की सबसे बड़ी शरणस्थली मानी जाती है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा कूनो नदी में घड़ियाल और कछुओं को छोड़ना तथा ओंकारेश्वर क्षेत्र में नर्मदा नदी में मगरमच्छों का संवर्धन शुरू करना प्रदेश की जलीय जैव विविधता संरक्षण नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने जन्मदिन पर वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व, नौंरादेही में संरक्षित प्रजाति के कछुओं को जल में विमुक्त कर प्रकृति और जैव विविधता के प्रति अपनी संवेदनशीलता का परिचय दिया। उनका मानना है कि वन्य और जलीय जीव पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। गिद्ध संरक्षण में प्रदेश कर रहा देश का नेतृत्व मध्यप्रदेश गिद्ध संरक्षण में देश का सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरा है। कभी विलुप्ति के कगार पर पहुंचे गिद्धों की संख्या राज्य में अब 14 हजार से अधिक हो चुकी है, जो देश में सर्वाधिक है। बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसायटी और वन विहार नेशनल पार्क के सहयोग से भोपाल के केरवा क्षेत्र में घायल गिद्धों के लिए रेस्क्यू सेंटर संचालित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा वन विहार में उपचार के बाद 23 फरवरी 2026 को मुक्त किया गया एक गिद्ध पाकिस्तान और उज्बेकिस्तान तक की लंबी यात्रा पूरी कर चुका है, जिसे संरक्षण प्रयासों की सफलता का प्रतीक माना जा रहा है। नए टाइगर रिजर्व और अभयारण्य से बढ़ा संरक्षण क्षेत्र मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नेतृत्व में राज्य सरकार ने वन क्षेत्रों के विस्तार और जैव- विविधता संपन्न क्षेत्रों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। दिसंबर-2024 में रातापानी अभयारण्य को टाइगर रिजर्व के दर्जे के साथ वन एवं वन्य जीव संरक्षण को नया आयाम मिला। यह निर्णय वर्ष 2008 में अनुमति मिलने के बावजूद अब तक लंबित रहा था, इसलिए इसे ऐतिहासिक माना गया। इस टाइगर रिजर्व का नाम विश्व प्रसिद्ध पुरातत्वविद् पं. विष्णुदेव धर वाकणकर के नाम पर रखा गया। शिवपुरी स्थित माधव टाइगर रिजर्व को मार्च-2025 में प्रदेश का 9वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया। यहां मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए 13 किलोमीटर लंबी सुरक्षा दीवार भी बनाई गई है। सागर जिले के 258.64 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अप्रैल 2025 में ‘डॉ. भीमराव अंबेडकर वन्यजीव अभयारण्य’ घोषित किया गया। साथ ही ओंकारेश्वर और जहानगढ़ को नए वन्य जीव अभयारण्य के रूप में विकसित करने की स्वीकृति प्रदान की गई। ताप्ती क्षेत्र को अगस्त 2025 में मध्यप्रदेश का पहला कंजर्वेशन रिजर्व घोषित किया गया, यहाँ टाइगर, तेंदुआ, बायसन और जंगली कुत्तों जैसी दुर्लभ प्रजातियां पाई जाती हैं। हाथी संरक्षण के लिये उठाये गये महत्वपूर्ण कदम राज्य सरकार ने हाथियों के संरक्षण और मानव-हाथी संघर्ष को कम करने के लिए 47 करोड़ रुपये से अधिक की व्यापक योजना को मंजूरी दी है। राज्य स्तरीय ‘हाथी टास्क फोर्स’ का गठन, ‘हाथी मित्र’ योजना, रेडियो टैगिंग और सोलर फेंसिंग जैसे कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। मानव-हाथी संघर्ष में जनहानि होने पर मुआवजा राशि को 8 लाख से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करना सरकार की संवेदनशीलता को दर्शाता है। साथ ही कर्नाटक, केरल और असम जैसे राज्यों की श्रेष्ठ कार्य प्रणालियों को अपनाकर अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जा रहा है। टाइगर कॉरिडोर और वाइल्ड लाइफ फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर वन्य जीव संरक्षण में अब केवल रिजर्व बनाना पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि उनके बीच सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक है। मध्यप्रदेश में कान्हा, बांधवगढ़, पन्ना और पेंच को जोड़ने वाली 5,500 करोड़ … Read more

1.25 करोड़ बहनों को मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की मिलेगी 36वीं किश्त

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बुधवार 13 मई को नरसिंहपुर जिले के मुंगवानी में ‘मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना’ की 36वीं किश्त जारी करेंगे। प्रदेश की 1 करोड़ 25 लाख 22 हजार 542 लाड़ली बहनों के बैंक खातों में 1,835 करोड़ 67 लाख 29 हजार 250 रूपये की राशि सिंगल क्लिक से अंतरित की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में विभिन्न विकास कार्यों का लोकार्पण एवं भूमि-पूजन भी करेंगे। मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना महिलाओं के जीवन में आर्थिक सुरक्षा, आत्मविश्वास और सम्मान का आधार बन चुकी है। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की परिवार के निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है, पोषण एवं स्वास्थ्य स्तर में सुधार हुआ है और ग्रामीण तथा शहरी दोनों क्षेत्रों में महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। करोड़ों महिलाओं के जीवन में आया सकारात्मक परिवर्तन मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना ने मध्यप्रदेश में महिला कल्याण के क्षेत्र में एक नई मिसाल स्थापित की है। यह केवल आर्थिक सहायता योजना नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बन गई है। योजना से प्रदेश की महिलाओं के जीवन में व्यापक और सकरात्मक परिवर्तन आए है। नियमित आर्थिक सहायता ने महिलाओं को घरेलू खर्चों के प्रबंधन ने अधिक आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे वे अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ बच्चों के पोषण, शिक्षा और स्वास्थ्य पर अधिक प्रभावी ढंग से खर्च कर पा रही है। योजना से प्राप्त राशि ने अनेक महिलाओं को स्व-सहायता समूहों, लघु उद्योगों और स्व-रोजगार गतिविधियों से जुड़ने के लिये प्रेरित किया है। इससे उनकी आय के अतिरिक्त स्त्रोत विकसित हुए है। आर्थिक रूप से सशक्त होने के साथ महिलाओं के परिवार के महत्वपूर्ण निर्णयों में भागीदारी बढ़ी है और उनकी राय को अधिक महत्व मिलने लगा है। बैंक खातों में सीधे राशि अंतरण की व्यवस्था ने महिलाओं को औपचारिक बैंकिग और वित्तीय सेवाओं से जोड़ा है। इससे बहनों में वित्तीय साक्षरता और आर्थिक आत्मविश्वास में वृद्धि हुई है।  

कुम्हारी में दुर्घटना पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जताया गहरा दुःख : मृतकों के परिजनों को 9-9 लाख रुपये सहायता राशि देने की घोषणा

रायपुर   दुर्ग जिले के कुम्हारी थाना क्षेत्र में शॉर्ट सर्किट और सिलेंडर विस्फोट से एक ही परिवार के चार सदस्यों की दर्दनाक मौत पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि यह घटना अत्यंत हृदयविदारक है। इससे मन अत्यंत व्यथित है। उन्होंने शोकाकुल परिजनों के प्रति गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कठिन समय में राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रभावित परिवार के साथ खड़ी है। उन्होंने अधिकारियों को परिजनों को हर संभव मदद उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की विशेष सहायता राशि देने की घोषणा की है। यह राशि शासन के नियमानुसार दी जाने वाली 4-4 लाख रुपये की सहायता के अतिरिक्त होगी। मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को परिजनों के ठहरने, भोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने तथा घटना के कारणों की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं।

Resolve applications received under the Good Governance Festival with seriousness and sensitivity: Principal Secretary Bora

रायपुर प्रमुख सचिव एवं दुर्ग जिले के प्रभारी सचिव  सोनमणि बोरा ने आज दुर्ग जिले के अधिकारियों की बैठक लेकर शासन की योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने बैठक में शासन की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, विभागीय समन्वय और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान पर विशेष जोर दिया। लोक निर्माण विभाग कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि दुर्ग जिला सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और प्रशासनिक दृष्टि से प्रदेश का महत्वपूर्ण जिला रहा है, इसलिए इसकी पहचान को बनाए रखते हुए अधिकारी बेहतर तालमेल के साथ कार्य करें। उन्होंने विभागीय समन्वय से दुर्ग जिले के मॉडल जिले के रूप में विकसत करने पर बल दिया।  प्रमुख सचिव  बोरा ने समीक्षा बैठक में कहा कि आमजनों को विभागीय सेवाओं का त्वरित लाभ मिले, यह अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि शासन की महत्वाकांक्षी सुशासन तिहार के अंतर्गत शिविरों में प्राप्त आवेदनों का गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए। बैठक में कलेक्टर अभिजीत सिंह एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक विजय अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। शुद्ध पेयजल, नाला सफाई और पीएम आवास पर जोर प्रभारी    सचिव  बोरा ने कहा कि ग्रीष्म ऋतु को देखते हुए आमजनों के लिए शुद्ध पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित हो। साथ ही आवश्यकतानुसार टैंकरों के माध्यम से जलापूर्ति भी सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने बरसात पूर्व बड़े नालों सफाई कराने, अतिक्रमण हटाने तथा सैप्टिक टैंक सफाई में एसओपी का पालन करने के निर्देश भी दिए। इसके साथ ही नगरीय क्षेत्रों में स्वीकृत पीएम आवास निर्माण कार्यों को शीघ्र पूर्ण कराने तथा हितग्राही सम्मेलन आयोजित कर लोगों को निर्माण के लिए प्रेरित करने पर जोर दिया। मनरेगा मजदूरी भुगतान शुरू, श्रमिकों तक जानकारी पहुंचाने के निर्देश बैठक में मनरेगा की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि दुर्ग जिले में 14 जनवरी 2026 से लंबित लगभग 30 करोड़ 83 लाख रुपये की मजदूरी राशि शासन द्वारा स्वीकृत कर दी गई है और श्रमिकों के खातों में भुगतान शुरू हो गया है। प्रभारी सचिव ने सभी जनपद पंचायत सीईओ और रोजगार सहायकों को निर्देशित किया कि वे श्रमिकों से सीधे संपर्क कर मजदूरी भुगतान संबंधी जानकारी साझा करें तथा भुगतान से जुड़ी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करें। लखपति दीदी, स्वास्थ्य और शिक्षा पर भी फोकस बैठक में बताया गया कि एनआरएलएम के तहत जिले में 78 हजार 411 लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 37 हजार महिलाओं को “लखपति दीदी” बनाया जा चुका है। स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा के दौरान प्रभारी सचिव ने संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने, शिशु मृत्यु दर को शून्य करने तथा सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने स्कूलों और छात्रावासों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाने तथा 16 जून तक सभी छात्रावासों में आवश्यक मरम्मत एवं सुधार कार्य पूर्ण कराने को कहा। किसानों को पारदर्शिता के साथ खाद और बीज कृषि विभाग को आगामी खरीफ सीजन के लिए उर्वरक वितरण की कार्ययोजना तैयार करने तथा पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंनेे कहा कि किसानों को पारदर्शिता के साथ खाद और बीज का वितरण किया जाए। रासायनिक खाद के कालाबाजारी करने वाले पर कड़ी कार्यवाही करने के निर्देश दिए। वन विभाग की समीक्षा के दौरान अधिकारियों ने बताया कि किसान वृक्ष मित्र योजना के तहत जिले में एक लाख 46 हजार पौधरोपण का लक्ष्य निर्धारित है। साथ ही चीचा और बेलौदी क्षेत्र को वेटलैंड घोषित किया गया है। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक  विजय अग्रवाल ने पुलिस विभाग की विभिन्न गतिविधियों की जानकारी पावर पॉइंट प्रस्तुतीकरण के माध्यम से दी। बैठक में वनमंडलाधिकारी दीपेश कपिल, एडीएम वीरेन्द्र सिंह, अपर कलेक्टर योगिता देवांगन सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

निकाय चुनाव को लेकर पंजाब में घमासान: भाजपा का आरोप- नियमों के खिलाफ हो रही प्रक्रिया

बरनाला  पंजाब में होने जा रहे नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल पूरी तरह गरमा गया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पंजाब के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्य चुनाव आयुक्त को ज्ञापन सौंपकर वर्तमान चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भाजपा ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार और चुनाव आयोग मिलकर लोकतांत्रिक नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। भाजपा का यह प्रतिनिधिमंडल पंजाब भाजपा की राज्य कोर कमेटी के सदस्यों और राज्य उपाध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के नेतृत्व में चुनाव आयुक्त से मिला। इस प्रतिनिधिमंडल में परमपाल कौर, रंजीत सिंह गिल, एन.के. वर्मा और मोहित गर्ग भी शामिल थे। भाजपा नेताओं ने कहा कि चुनाव आयोग ने स्वयं 30 अप्रैल 2026 को एक शेड्यूल जारी किया था, जिसके अनुसार आपत्तियों के निपटारे के लिए 11 मई 2026 और मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के लिए 12 मई 2026 की तारीख तय की गई थी। क्यों लगे कानून के उल्लंघन के आरोप? लेकिन हैरानी की बात यह है कि कई जिलों में इस अवधि के समाप्त होने से पहले ही अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो सीधे तौर पर कानून का उल्लंघन है। भाजपा नेताओं ने कहा कि माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में सरकार ने आश्वासन दिया था कि वार्डबंदी और मतदाता सूची के संबंध में सभी आपत्तियों का निपटारा किया जाएगा। लेकिन बिना किसी सुनवाई के अधिसूचना जारी करना अदालत की अवमानना है। भाजपा ने दावा किया है कि कई वार्डों में पंजीकृत मतदाताओं की संख्या वहां की कुल जनसंख्या से भी अधिक दिखाई गई है, जो कि एक 'जनसांख्यिकीयअसंभव' बात है। उन्होंने आरोप लगाया कि वार्डों के आरक्षण में रोटेशन के नियमों को ताक पर रख दिया गया है। जहां एससी जनसंख्या अधिक है, उन वार्डों की अनदेखी कर कम जनसंख्या वाले वार्डों को आरक्षित कर दिया गया है। पार्टी ने कहा कि चुनाव आयोग द्वारा दिखाई जा रही जल्दबाजी विपक्षी दलों को तैयारी का मौका न देने की एक साजिश है ताकि चुनावों की निष्पक्षता को खत्म किया जा सके। भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने क्या कहा? भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया है कि यदि चुनाव आयोग ने तुरंत इन अवैध अधिसूचनाओं को वापस नहीं लिया और आपत्तियों का निपटारा नहीं किया, तो पार्टी उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगी और पूरी चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग करेगी। उन्होंने मांग की है कि चुनावी प्रक्रिया को तुरंत स्थगित किया जाए। आपत्तियों के निपटारे के लिए ''स्पीकिंग ऑर्डर'' जारी किए जाएं। मतदाता सूची के संशोधन के बाद उम्मीदवारों के चयन के लिए नया और उचित समय दिया जाए।  

कूनो में 4 चीता शावकों की मृत्यु, माँ सुरक्षित और स्वस्थ प्रारंभिक जांच में जंगली जानवर के हमले की आशंका

भोपाल  श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में मादा चीता केजीपी-12 के 4 शावक मंगलवार सुबह एक मांद के पास मृत पाये गये हैं। मॉनिटरिंग टीम को श्योपुर टेरिटोरियल डिवीजन क्षेत्र में स्थित मांद के पास एक माह आयु के चारों मृत शावक क्षत-विक्षत अवस्था में मिले। शावकों का जन्म 11 अप्रैल 2026 को खुले जंगल में हुआ था। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है शावकों को किसी हिंसक जानवर ने मारा है। वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि शावकों की मां पूरी तरह सुरक्षित, स्वस्थ और सामान्य स्थिति में है। कूनो में मौजूद अन्य सभी चीते भी स्वस्थ हैं और उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। वन विभाग के अनुसार शावकों को अंतिम बार 11 मई की शाम जीवित देखा गया था। प्रारंभिक तौर पर यह मामला किसी अन्य वन्य जीव द्वारा शिकार किए जाने का प्रतीत हो रहा है। हालांकि मृत्यु के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।  

योग से निरोगी समाज बनाने की पहल, प्रदेशव्यापी प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता अभियान शुरू

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में, राज्य सरकार योग को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” अभियान का उद्देश्य, योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना तथा स्वस्थ एवं निरोग समाज का निर्माण करना है। यह बात उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 के सफल आयोजन एवं व्यापक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से आयुष विभाग द्वारा “घर-घर योग, हर व्यक्ति निरोग” अभियान के अंतर्गत आयोजित प्रदेशव्यापी योग प्रशिक्षण एवं जन-जागरूकता कार्यक्रम का वर्चुअली शुभारंभ कर कही। यह अभियान 12 मई से 21 जून 2026 तक प्रदेशभर में संचालित होगा। आयुष मंत्री  परमार ने कहा कि योग, भारत की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विरासत का महत्वपूर्ण आधार है और वर्तमान समय में स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का सबसे प्रभावी माध्यम भी है। मंत्री  परमार ने कहा कि प्रदेश सरकार योग एवं आयुष को समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचाने के लिए सतत रूप से कार्य कर रही है। मंत्री  परमार ने कहा कि अभियान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए “योग-सखी” एवं “योग-दूत” तैयार किए जा रहे हैं, जो घर-घर जाकर नागरिकों को योग के प्रति प्रेरित करेंगे। साथ ही विद्यालयों एवं महाविद्यालयों तक भी इस अभियान का विस्तार किया जा रहा है, जिससे युवाओं में योग एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता विकसित की जा सके।  परमार ने कहा कि इस अभियान के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 2026 को व्यापक जनभागीदारी एवं उत्साह के साथ मनाने की तैयारियों को नई गति मिलेगी। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के वीडियो संदेश का प्रसारण किया गया। संदेश में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में योग आज वैश्विक जनआंदोलन बन चुका है। योग केवल शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक संतुलन एवं आंतरिक चेतना को जागृत करने का प्रभावी माध्यम है। डॉ यादव ने कहा कि योग एवं आयुर्वेद भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की अमूल्य धरोहर हैं, जो आज संपूर्ण विश्व को स्वस्थ जीवन का मार्ग दिखा रही हैं। डॉ यादव ने प्रदेश में आयुष सेवाओं के विस्तार, आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के सुदृढ़ीकरण तथा योग एवं वेलनेस गतिविधियों को जनसामान्य तक पहुंचाने के प्रयासों की सराहना करते हुए अभियान को जनभागीदारी से सफल बनाने का आह्वान किया। प्रमुख सचिव आयुष  शोभित जैन ने बताया कि यह अभियान 21 जून तक निरंतर चलेगा, जिसके अंतर्गत प्रदेश के 800 आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में योग शिक्षक नागरिकों के छोटे-छोटे समूहों को नियमित योगाभ्यास कराएंगे।  शोभित जैन ने बताया कि अभियान के अंतर्गत राज्यभर के लगभग 2000 आयुष संस्थानों आयुष महाविद्यालयों, चिकित्सालयों एवं आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में प्रतिदिन लाइव योग प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे। पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक महाविद्यालय, भोपाल के मास्टर ट्रेनर स्टूडियो से प्रतिदिन 45 मिनट के ऑनलाइन योग सत्र आयोजित होंगे, जिनसे प्रदेशभर के हजारों नागरिक यूट्यूब में प्रसारित वीडियो से प्रशिक्षण ले सकेंगे। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का लाइव प्रसारण प्रदेश के लगभग 2000 आयुष संस्थानों में किया जाएगा, जिससे लगभग 15 हजार से अधिक प्रशिक्षार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित होगी।  जैन ने कहा कि अभियान को व्यापक जनआंदोलन का स्वरूप देने के लिए प्रशिक्षण, यूट्यूब लिंक एवं अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए आमजन को साझा किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नागरिक अपने घर से ही योग प्रशिक्षण प्राप्त कर सके। उन्होंने बताया कि अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के प्रत्येक वर्ग तक योग की पहुंच सुनिश्चित करना तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों, योग विशेषज्ञों एवं आयुष संस्थानों से जुड़े प्रतिनिधियों की सहभागिता रही। 

देश के गेहूं निर्यात में म.प्र. का योगदान 40 प्रतिशत

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की किसान हितैषी नीतियों और योजनाओं के परिणामस्वरूप इस साल गेहूँ उत्पादन 365.11 लाख मीट्र‍िक टन तक पहुंच गया है। उत्पादकता बढ़कर 3780 किलो प्रति हैक्टेयर हो गई है। मध्यप्रदेश “गेंहूं प्रदेश” बन गया है। देश के कुल गेहूँ उत्पादन में मध्यप्रदेश का योगदान 18 प्रतिशत है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में मध्यप्रदेश के गेंहूं की मांग लगातार बनी हुई है। प्राकृतिक मिठास के कारण शरबती और डयूरम गेहूँ की मांग जर्मनी, अमेरिका, इटली, यूके, दुबई, साउथ अफ्रीका जैसे देशों में बनी हुई है। भारत से विदेशों को निर्यात किये जाने वाले गेहूँ में मध्यप्रदेश का योगदान 35 से 40 प्रतिशत होता है। प्रदेश के गेहूँ को ओमान, यमन, यूएई, साउथ कोरिया, कतर, बांग्लादेश, सउदी अरब, मलेशिया, साउथ अफ्रीका और इंडोनेशिया में पसंद किया जा रहा है। मध्यप्रदेश का गेहूँ ब्रेड, बिस्किट और पास्ता के लिये सर्वाधिक उपयुक्त है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा गेहूँ उत्पादक किसानों के हित में नई योजनाएं बनाने और समय पर मदद करने की रणनीति के फलस्वरूप मध्यप्रदेश ने परंपरागत गेहूँ उत्पादक राज्यों की बराबरी कर ली है। वर्ष 2004–05 में सिर्फ 42 लाख हैक्टेयर में गेहूँ होता था, जो आज बढकर 96.58 लाख हैक्टेयर हो गया है। क्या है मध्यप्रदेश के गेंहूं में भारत सरकार के गेहूँ अनुसंधान निदेशालय ने अपने अनुसंधान में दो हजार सेम्पल का परीक्षण करने के बाद उच्च स्तर की गुणवत्ता का दाना पाया। प्रदेश के सामान्य से सामान्य किस्म के गेहूँ में भी औसत रूप से 12.6 प्रतिशत प्रोटीन, 43.6 पीपीएम (पार्टस पर मिलियन) आयरन तथा 38.2 पीपीएम जिंक पाया गया है। कठिया प्रजाति के गेहूँ में भरपूर प्रोटीन, आयरन, मैग्नीज और जिंक है। इन्हीं विशेषताओं से मध्यप्रदेश के गेहूँ को अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। प्रदेश में गेंहूं की उगाई जाने वाली किस्मों की अपनी विशेषताएं हैं, जैसे जे.डब्ल्यू.एस.17, जे.डब्ल्यू. 3020 और जे.डब्ल्यू. 321 नामक गेहूँ की किस्में – एक सिंचाई में 35 क्विंटल तक उत्पादन देती हैं। जे.डब्ल्यू. 1142, जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1203 किस्मों से अधिक तापमान में भी बेहतर उत्पादन मिलता है। जे.डब्ल्यू. 1202 और जे.डब्ल्यू. 3288 तथा जे.डब्ल्यू. 1106 किस्में प्रोटीन से भरपूर हैं। एमपीआर 1215 और जे.डब्ल्यू. 3211 किस्में निर्यात के लिये बेहतर है। गेहूँ की 51 किस्मों का विकास पौष्टिक आहार बनाने के लिये गेहूँ वर्ष 2026 में की जो 5 किस्में उपयोग में आ रही हैं उनमें से 4 मध्यप्रदेश में विकसित की गई हैं। इनमें एम.पी.ओ. 1215, एम.पी. 3211, एम.पी. 1202 एवं एम.पी. 4010 शामिल हैं। मध्यप्रदेश में अब तक गेहूँ की 51 किस्मों का विकास हुआ है। इनमें से 12 किस्मों का विकास सिर्फ एक दशक की अल्प अवधि में हुआ है। 100 लाख मीट्र‍िक टन उपार्जन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से गेहूँ खरीदी का लक्ष्य 78 लाख मीट्र‍िक टन से बढ़कर 100 लाख मीट्र‍िक टन हो गया है। प्रदेश में गेहूँ का उपार्जन जारी है। किसानों के लिए उपार्जन केन्द्रों में पूरे इंतजाम किए गये हैं। गेहूँ उपार्जन 23 मई तक चलेगा। किसानों से 2585 रुपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस राशि सहित 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूँ का उपार्जन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश देश का सबसे बडा प्रामाणिक बीज उत्पादक राज्य भी है। सहकारी क्षेत्र में बीज उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो गया है। बीज उत्पादन कंपनियों से तीन लाख से ज्यादा किसान जुडे हैं। ये कंपनियां अब भंडारण विपणन और खादय प्रसंस्‍करण से भी जुड़ रही हैं। फार्मर प्रोडयूसर कंपनियों को और ज्यादा मजबूत बनाया जा रहा है। इन सभी गतिविधियों से मध्यप्रदेश न केवल गेहूँ बल्कि अन्य फसलों के उत्पादन में राष्ट्र में अग्रणी बना हुआ है।  

प्रत्येक मृतक सदस्य को 5-5 लाख रुपए देने की घोषणा की

रायपुर दुर्ग जिले के कुम्हारी थाना क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 04 खपरी में गैस सिलेंडर ब्लास्ट की दर्दनाक घटना में एक ही परिवार के चार सदस्यों होमदास वैष्णव (40 वर्ष), लक्ष्मी वैष्णव (18 वर्ष), चांदनी वैष्णव (17 वर्ष) एवं मासूम गोपिका वैष्णव (2 वर्ष) की मौके पर ही दुखद मृत्यु हो गई। दुर्ग प्रवास के दौरान घटना की जानकारी मिलते ही छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल और स्कूल शिक्षा मंत्री  गजेन्द्र यादव तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और मौके का निरीक्षण कर स्थिति की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने आसपास के लोगों से चर्चा कर राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा भी की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय को घटना की जानकारी मिलने पर उनके निर्देशानुसार स्वास्थ्य मंत्री  जायसवाल ने मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की। उन्होंने प्रत्येक चार मृतक को 5-5 लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त जिला प्रशासन द्वारा आरबीसी 6-4 के तहत प्रत्येक चार मृतक के परिजन को 4-4 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय एवं स्वास्थ्य मंत्री  जायसवाल ने इस घटना पर गहरी शोक संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्माओं की शांति प्रदान करने की प्रार्थना की। इस दौरान दुर्ग लोकसभा सांसद  विजय बघेल जी, विधायक  रिकेश सेन,  डोमनलाल कोरसेवाड़ा,  ईश्वर साहू, खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के अध्यक्ष  राकेश पांडेय, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष  जितेंद्र साहू, दुर्ग कलेक्टर  अभिजीत सिंह समेत जिला प्रशासन की टीम एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपथित रहे।