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25 उद्योगों पर 79 लाख रुपये से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित

रायपुर रायगढ़ जिले में वायु गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा लगातार सघन निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। मंडल ने स्पष्ट किया है कि जिले की वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘संतोषजनक’ से ‘मध्यम’ श्रेणी के बीच स्थिर बनी हुई है। पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वाले उद्योगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करते हुए इस वर्ष अब तक 25 उद्योगों पर 79 लाख रुपये से अधिक की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति राशि अधिरोपित की गई है। आधुनिक तकनीक से वायु गुणवत्ता की सतत निगरानी रायगढ़ जिले में वायु गुणवत्ता की सटीक निगरानी के लिए 4 सतत परिवेशीय वायु गुणवत्ता निगरानी प्रणाली (CAAQMS) स्थापित की गई हैं। ये केंद्र खनन प्रभावित क्षेत्रों—कुंजेमुरा, मिलुपारा (तमनार), छाल (धरमजयगढ़) तथा औद्योगिक क्षेत्र पूंजीपथरा में संचालित हैं। इसके अतिरिक्त, नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के अंतर्गत रायगढ़ शहर और ओ.पी. जिंदल औद्योगिक पार्क क्षेत्र में नियमित रूप से मैन्युअल मॉनिटरिंग भी की जा रही है। नियम उल्लंघन पर जीरो टॉलरेंस नीति मंडल द्वारा पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन के मामलों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जा रही है। जनवरी 2026 से मई 2026 तक प्रदूषण मानकों का उल्लंघन करने वाले 8 उद्योगों पर 3 लाख 22 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इसी प्रकार, फ्लाई ऐश प्रबंधन एवं परिवहन संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने वाले 17 उद्योगों पर 76 लाख 20 हजार 255 रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई है। इस प्रकार कुल 25 उद्योगों पर 79 लाख रुपये से अधिक की कार्रवाई की गई है। फ्लाई ऐश परिवहन के लिए सख्त SOP और डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था सड़कों पर उड़ने वाली धूल एवं राखड़ की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मंडल द्वारा विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू की गई है। इसके तहत कच्चे माल और औद्योगिक उत्पादों के परिवहन के दौरान डस्ट कंट्रोल उपायों का पालन अनिवार्य किया गया है। फ्लाई ऐश के पारदर्शी और वैज्ञानिक निपटान के लिए IWMMS पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है, जिसके माध्यम से राखड़ के उठाव से लेकर अंतिम निपटान तक की प्रत्येक गतिविधि की डिजिटल निगरानी की जा रही है। पर्यावरण संरक्षण के प्रति सतत प्रतिबद्धता क्षेत्रीय कार्यालय, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अनुसार रायगढ़ जिले में प्रदूषण स्तर में लगातार वृद्धि होने की आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले की वायु गुणवत्ता नियंत्रित और स्थिर बनी हुई है। मंडल द्वारा उद्योगों का नियमित निरीक्षण किया जा रहा है और पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।

पटना ब्लैकआउट ड्रिल 14 मई को, आपदा तैयारी का होगा अभ्यास

 पटना  राजधानी पटना में 14 मई की शाम 7 बजे सिविल डिफेंस ब्लैकआउट और मॉकड्रिल आयोजित किया जाएगा। हवाई हमले जैसी आपात स्थिति से निपटने की तैयारी और तंत्र की प्रभावशीलता जांचने के लिए यह अभ्यास किया जा रहा है। जिलाध‍िकारी डॉ. त्‍यागराजन एसएम ने लोगों से अपील की है कि निर्धारित समय पर अपने घर, दुकान और प्रतिष्ठानों की सभी लाइटें बंद रखें तथा किसी भी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह केवल पूर्व निर्धारित मॉकड्रिल है, वास्तविक खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है। दो मिनट बजेगा सायरन, फिर होगा ब्लैकआउट 14 मई को निर्धारित समय पर हवाई हमले की चेतावनी के रूप में दो मिनट तक सिविल डिफेंस का सायरन बजाया जाएगा। सायरन बजते ही ब्लैकआउट शुरू होगा। इस दौरान फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, एनसीसी, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, नगर निकाय, सिविल डिफेंस और पुलिस समेत आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों की तत्परता और समन्वय का परीक्षण किया जाएगा। इन इलाकों में होगा मॉक अभ्यास जिलाधिकारी ने बताया कि नागरिक सुरक्षा निदेशालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पटना नगर निगम क्षेत्र के अलावा दानापुर निजामत, खगौल और फुलवारीशरीफ में भी मॉकड्रिल और ब्लैकआउट कराया जाएगा। मॉक अभ्यास के लिए पटना समाहरणालय, बिस्कोमान भवन, बांकीपुर बस स्टैंड और इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) को सिमुलेशन साइट के रूप में चिन्हित किया गया है। छह तरह के आपदा परिदृश्यों का होगा अभ्यास प्रशासन के अनुसार मॉकड्रिल के दौरान छह प्रमुख परिदृश्यों पर अभ्यास किया जाएगा। इनमें एयर रेड अर्ली वार्निंग सिस्टम, ब्लैकआउट व्यवस्था, लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन, मेडिकल रिस्पॉन्स और फायर फाइटिंग शामिल हैं। प्रत्येक सिमुलेशन स्थल पर अलग-अलग आपदा परिस्थितियां तैयार कर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास कराया जाएगा। आवश्यक सेवाओं पर नहीं पड़ेगा असर जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि मॉकड्रिल के दौरान आवश्यक सेवाएं सामान्य रूप से जारी रहेंगी। अस्पतालों में ब्लैकआउट के लिए खिड़कियों पर क्यूबिकल पर्दे या प्राइवेसी कर्टेन का इस्तेमाल किया जाएगा ताकि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। प्रचार-प्रसार और नागरिक सहभागिता पर जोर जिला प्रशासन ने स्कूलों, व्यवसायिक संस्थानों और सिविल सोसाइटी संगठनों के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया है ताकि अधिकतम नागरिक इस अभ्यास में भागीदारी कर सकें। 13 मई को पटना समाहरणालय में हवाई हमले पर आधारित टेबल-टॉप एक्सरसाइज भी आयोजित की जाएगी। कंट्रोल रूम रहेगा सक्रिय मॉकड्रिल के दौरान जिला आपातकालीन संचालन केंद्र और जिला नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय रहेंगे। किसी भी सूचना या सहायता के लिए लोग इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:     जिला आपातकालीन संचालन केंद्र: 0612-2210118     जिला नियंत्रण कक्ष: 0612-2219810 / 2219234     आपातकालीन सेवा: 112 प्रशासन ने लोगों से सहयोग की अपील करते हुए कहा है कि नागरिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए इस तरह के अभ्यास साल में कम-से-कम दो बार आयोजित किए जाते हैं।  

फेडरेशन ने उद्योगपतियों के हित में किया निरंतर सहयोग : मंत्री काश्यप

भोपाल  फेडेरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री मध्यप्रदेश के विकास को नई गति देने वाला प्रमुख स्तंभ है। प्रदेश के स्थानीय और युवा उद्योगपतियों को नई दिशा दी है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास और श्रम मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल निजी होटल में फेडेरेशन के नवनिर्वाचित पदाधिकारियों के पदभार ग्रहण समारोह को संबोधित कर रहे थे। मंत्री  पटेल ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव और ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के आयोजन और उद्योगों को दिए जा रहे नीतिगत प्रोत्साहन से प्रदेश के छोटे उद्यमियों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में एक नया आत्मविश्वास जागा है, जिससे अब गांव का व्यक्ति भी उद्योग लगाने का साहस जुटा रहा है। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चेतन्य काश्यप भी समारोह में शामिल हुए और उन्होंने भी संबोधित किया। मंत्री  पटेल ने कहा कि मजदूर और उद्योगपति के बीच का संबंध हितों के टकराव की जगह आपसी समन्वय का होना चाहिए और इसे वास्तविकता में बदलना सरकार की प्राथमिकता है। इसी दिशा में मंत्री  पटेल ने फेडरेशन के प्रतिनिधियों को श्रम संबंधी विभागीय समितियों में सक्रिय भागीदारी के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने '' जैसी पहलों का उल्लेख किया, जो श्रम और उद्योगों के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर अनावश्यक प्रशासनिक हस्तक्षेप को कम करने का कार्य कर रही हैं। मंत्री  पटेल ने उद्योगों की भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्किल मैपिंग पर विशेष बल दिया और उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे अपने आवश्यक 'स्किल लेवल' की पहचान कर विभाग को सूचित करें। सरकार इन जरूरतों के आधार पर स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित कर कुशल कार्यबल उपलब्ध कराएगी, जिससे उद्योगों को श्रमिकों की कमी का सामना न करना पड़े और स्थानीय स्तर पर ही रोजगार के अवसर उपलब्ध हो। मंत्री  पटेल ने कहा कि प्रदेश कृषि उत्पादन के उच्चतम स्तर को प्राप्त कर रहा है इसलिए अब हम सभी को 'प्रोसेसिंग' (प्रसंस्करण) क्षेत्र पर केंद्रित करना होगा। राज्य की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन के लिए उपयुक्त है। इसके साथ ही, उन्होंने श्रम विभाग में जारी सुधारों की चर्चा करते हुए बताया कि अनावश्यक कानूनों को समाप्त किया जा रहा है और शेष प्रमुख कानूनों में एकरूपता लाने का प्रयास किया जा रहा है। निरीक्षण प्रणाली में पारदर्शिता लाने के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड और डिजिटल सिस्टम लागू किए गए हैं जिससे प्रक्रियाएं सिस्टम आधारित और पारदर्शी बनी रहें। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री  चेतन्य काश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में वर्ष 2025 को 'उद्योग वर्ष' के रूप में मनाया गया है जिसका मुख्य केंद्र स्थानीय उद्यमियों और युवाओं को नए अवसर प्रदान करना था। मंत्री  काश्यप ने कहा कि फेडरेशन ने उद्योगपतियों के हित में शासन के कार्यों में निरंतर सहयोग किया है। साथ ही उन्होंने उद्यमियों से गुणवत्ता और निरंतरता बनाए रखने का आग्रह किया, जिससे वैश्विक बाजार में प्रदेश की साख और मजबूत हो सके। मंत्री  काश्यप ने औद्योगिक बुनियादी ढांचे के विस्तार के बारे बताते हुए कहा कि विभाग ने पिछले डेढ़ वर्षों में 1200 से अधिक प्लॉट पूरी पारदर्शिता के साथ ऑनलाइन आवंटित किए हैं और आगामी दो वर्षों में 3 हजार नए प्लॉट उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। मध्यप्रदेश ने निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए एक अनूठी पहल की है, जिसके तहत लैंड-लॉक्ड राज्य होने की चुनौतियों को देखते हुए निर्यातकों को 50 प्रतिशत परिवहन सब्सिडी प्रदान की जा रही है। सब्सिडी वितरण की इस पूरी प्रक्रिया को 'डेट ऑफ प्रोडक्शन' के आधार पर पारदर्शी और ऑनलाइन बनाया गया है, जिससे उद्यमियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।मंत्री  काश्यप ने कहा कि व्यापारियों के कल्याण के लिए एक 'व्यापार बोर्ड' का गठन किया गया है, जिसमें फेडरेशन के प्रतिनिधि को स्थायी सदस्य के रूप में स्थान दिया गया है। मंत्री द्वय ने नवनिर्वाचित अध्यक्ष  हिमांशु खरे एवं संयुक्त अध्यक्ष  वीरेंद्र कुमार पोरवाल और  अखिलेश राठी को अंगवस्त्रम् भेंट कर नवनिर्वाचन का प्रमाण पत्र प्रदान किया और शुभकामनाएं दी। साथ ही निवृतमान अध्यक्ष  दीपक शर्मा को अध्यक्षीय कार्यकाल के लिए शाल, फल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। फेडेरेशन की ओर से अध्यक्ष  खड़े ने मंत्रीद्वय को स्मृति चिन्ह भेंट किया।  पूर्व अध्यक्ष डॉ. आर.एस. गोस्वामी ने स्वागत उद्बोधन में फेडरेशन द्वारा प्रदेश में उद्योगों के विकास और विस्तार के प्रयासों के लिए सरकार की सराहना की। समारोह के दौरान अध्यक्ष  दीपक शर्मा के कार्यकाल और उपलब्धियों पर आधारित वीडियो का प्रसारण किया गया। इस अवसर पर फेडरेशन के सदस्य और आमजन उपस्थित रहें।  

गाय संरक्षण पर सख्ती से बढ़ी अर्थव्यवस्था, यूपी में 36 हजार गिरफ्तारियां

लखनऊ भारतीय संस्कृति में गाय को जो स्थान प्राप्त है, वह न केवल आस्था का प्रश्न है, बल्कि यह समाज, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के अंतर्सबंधों की वह सुदृढ़ डोर है जिसने हजारों वर्षों से इस देश को जोड़े रखा है। भारतीय शास्त्र साहित्य में गाय की महिमा का गान अनगिनत स्थानों पर हुआ है और उन्हें विश्वस्य मातरः की संज्ञा दी गई है। अर्थात गाय पूरे विश्व की माता हैं। यही कारण है कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी दर पीढ़ी, अनवरत प्रवाहित होता रहा। जब इस पवित्र परंपरा पर कोई आघात होता है तो वह केवल धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करता, बल्कि उस सभ्यतागत सूत्र को भी तोड़ने का प्रयास करता है जिस पर भारतीय समाज की नींव टिकी है। आज के समय में जब विकास की अंधी दौड़ में परंपराएं पीछे छूट रही हैं तो उत्तर प्रदेश में योगी सरकार गोसंरक्षण को सनातनी दृष्टि से स्थापित करती हुई दिखाई देती है। गोवंश की रक्षा का मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संकल्प सिर्फ धार्मिक भावना तक ही नहीं है, बल्कि कानून व्यवस्था, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और सामाजिक चेतना से भी जुड़ा हुआ है। यह गोसंरक्षण से ग्रामोदय की राह है, जो व्यापक सामाजिक-आर्थिक अभियान के रूप में उभर आया है। गो संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल उत्तर प्रदेश में 2017 में जब योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो लोगों में विकास की उम्मीद के साथ यह आकांक्षा भी थी कि अब गोकशी के बढ़ते अपराधों, माफियाओं के आतंक और कानून के दुरुपयोग से मुक्ति मिलेगी। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही जनआकांक्षाओं को समझा और गोसंरक्षण को अपनी प्राथमिकताओं में सर्वोच्च स्थान दिया। अब जबकि सरकार के नौ साल पूरे हो चुके हैं, परिणाम सामने है। 2017 से 2025 के मध्य योगी सरकार ने गो हिंसा से जुड़े मामलों में लगभग 36 हजार आरोपितों को गिरफ्तार किया। यह आंकड़े मात्र प्रशासनिक उपलब्धियां नहीं, इस बात का प्रमाण भी है कि राज्य अब अपराधियों के समक्ष निरुपाय नहीं खड़ा, बल्कि राज्य शक्ति सनातन मूल्यों के रक्षार्थ सुदृढ़ता से खड़ी है। इन गिरफ्तारियों के साथ-साथ 13,793 आरोपियों के विरुद्ध गुण्डा अधिनियम के अन्तर्गत कार्रवाई की गई। 178 अभियुक्तों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया गया और 14,305 मामलों में गैंगस्टर एक्ट का प्रयोग किया गया। इसके अतिरिक्त 83 करोड़ 32 लाख रुपये की सम्पत्ति जब्त की गई। इन कदमों से यह स्पष्ट संदेश गया कि गोमाता के प्रति हिंसा न केवल कानूनी दृष्टि से दंडनीय है, बल्कि सामाजिक व्यवस्था के विरुद्ध संगठित होकर साजिशें रचने वालों के खिलाफ राज्य पूरी कठोरता से कार्रवाई करेगा। अर्थव्यवस्था की रीढ़ गोमाता योगी सरकार की दृष्टि यह है कि जब गाय सुरक्षित रहेगी, जब वह स्वस्थ रहेगी, तो वह उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन सकती है। वर्तमान में इसे सुनिश्चित वास्तविकता के रूप में देखा जा सकता है। योगी सरकार ने गोशालाओं को केवल आश्रय स्थल नहीं, बल्कि उत्पादन केंद्रों के रूप में विकसित किया है। आज उत्तर प्रदेश में गाय के दूध से निर्मित पनीर, मक्खन, घी और अन्य दुग्ध उत्पाद न केवल स्थानीय बाजारों में बल्कि पूरे देश में अपनी पहचान बना रहे हैं। गोबर से बनाई जा रही जैविक खाद किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटाकर किसान न केवल अपनी लागत कम कर रहे हैं बल्कि मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ा रहे हैं। गोबर गैस संयंत्रों से ग्रामीण ऊर्जा आपूर्ति को नई दिशा मिल रही है। पर्यावरण के अनुकूल इस ऊर्जा का स्रोत न केवल ग्रामीण परिवारों की ईंधन समस्या हल कर रहा है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में कमी में भी योगदान दे रहा है। पंचगव्य आधारित उत्पादों ने तो जैसे एक नई क्रान्ति ही ला दी है। आयुर्वेदिक औषधियों में गोघृत और पंचगव्य की मांग दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है। गाय के गोबर से निर्मित दीये, अगरबत्ती, धूप और मूर्तियां धार्मिक बाजारों में बड़ी तेजी से स्थान बना रहे हैं। यह उद्योग न केवल राजस्व उत्पन्न कर रहा है, बल्कि लाखों ग्रामीण युवाओं को रोजगार भी दे रहा है। गोवंश आधारित उत्पादों के निर्माण में महिलाओं की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण बन रही है। कई स्वयं सहायता समूह गोबर से दीये, अगरबत्ती और अन्य उत्पाद बनाकर बाजार में बेच रहे हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ रही है और वे आत्मनिर्भर बन रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह मॉडल सामाजिक परिवर्तन का बड़ा माध्यम है गोकशी किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं यह समझना जरूरी है कि गोकशी पर रोक केवल एक धार्मिक या भावनात्मक प्रश्न नहीं है। यह एक संगठित अपराध जगत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा है। पूर्ववर्ती सरकारों के कालखंड में जो माफिया तंत्र पनपा था, उसने गोकशी को एक सुनियोजित उद्योग का रूप दे दिया था। योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट संदेश दिया कि प्रदेश में गोकशी और अवैध पशु वध को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसी नीति के तहत गोकशी, पशु तस्करी और अवैध बूचड़खानों के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया। सरकार ने कानून को और कठोर बनाते हुए उत्तर प्रदेश गोवध निवारण (संशोधन) अध्यादेश 2020 भी लागू किया जिसमें 10 वर्ष तक कठोर कारावास और 3 से 5 लाख रुपये तक जुर्माने का प्रावधान किया गया। समृद्धि व धर्म का आधार उत्तर प्रदेश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक विकास के साथ जोड़ा है। गोसंरक्षण की नीति यह संदेश देती है कि विकास का मार्ग केवल आधुनिक तकनीक से नहीं, बल्कि परंपराओं के सम्मान से भी प्रशस्त होता है। जब सांस्कृतिक मूल्यों को आर्थिक विकास से जोड़ा जाता है, तब समाज में व्यापक सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देते हैं। शास्त्रों में गाय को समृद्धि और धर्म का आधार माना गया है। उत्तर प्रदेश में गोसंरक्षण भविष्य की समृद्धि का आधार बना है जिसमें संस्कृति और करुणा निहित है।

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर सूरजपुर जिला प्रशासन ने वितरित की मुआवजा राशि

रायपुर : हाथी के हमले में जान गंवाने वाले ग्रामीणों के परिजनों को त्वरित राहत पीड़ितों को मिली राहत: मंत्री लक्ष्मी Rajwade के प्रयास से वितरित हुआ मुआवजा मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े की पहल पर सूरजपुर जिला प्रशासन ने वितरित की मुआवजा राशि रायपुर महिला बाल विकास एवं समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े के निर्देशों पर जिला प्रशासन और वन विभाग ने तत्परता दिखाते हुए सूरजपुर जिला के कल्याणपुर में हाथी हमले के शिकार हुए हितग्राहियों के परिजनों को मुआवजा राशि का वितरण कर दिया है। मंत्री श्रीमती राजवाड़े घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देशित किया था कि पीड़ित परिवारों को बिना किसी विलंब के सहायता राशि उपलब्ध कराई जाए।   सूरजपुर जिले के कल्याणपुर निवासी दो ग्रामीणों की हाथी हमले में मृत्यु होने के पश्चात, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग (सूरजपुर मंडल) द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत त्वरित कार्रवाई की गई। विभागीय दस्तावेजों के अनुसार, दोनों प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजा राशि स्वीकृत कर वितरित की गई है, जिनमें हितग्राही श्रीमती कांति भोई को डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में 5 लाख 50 हजार रूपए एवं श्रीमती राजेश्वरी सिंह श्याम को डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में 5 लाख 50 हजार रूपए भेज दी गई है। साथ ही डिविजनल फारेस्ट ऑफिसर सूरजपुर को 50-50 हजार रूपए डीबीटी के माध्यम से प्रदान किया गया है। मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े जी ने कहा कि क्षेत्र की जनता की सुरक्षा और संकट की घड़ी में उनके साथ खड़ा होना सुशासन सरकार की प्राथमिकता है। हाथी-मानव द्वंद्व को कम करने के लिए प्रशासन सजग है और प्रभावितों को हर संभव मदद दी जाएगी। इस त्वरित कार्रवाई से पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल मिला है, जिसके लिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने मंत्री श्रीमती राजवाड़े के प्रति आभार व्यक्त किया है।

सरकारी भवनों में सोलर क्रांति की तैयारी: मंत्री शुक्ला बोले- RESCO मॉडल पर बढ़े जागरूकता अभियान

सौर ऊर्जा अपनाएं, भविष्य बचाएं शासकीय भवनों में रेस्को मॉडल से सोलर पैनल लगाने के लिए जागरूकता जरूरी : मंत्री शुक्ला जिला पंचायत भोपाल में शासकीय संस्थाओं और रेस्को विकासक इकाइयों के मध्य हुए विद्युत क्रय अनुबंध भोपाल नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा निरंतर ईंधन (फ्यूल) और ऊर्जा बचाने का आहवान किया गया है। हमें दृढ़ संकल्प के साथ इस दिशा में काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप शासन और प्रशासन को एक साथ मिलकर ग्रीन एनर्जी की ओर शिफ्ट होना होगा। मंत्री शुक्ला मंगलवार को जिला पंचायत कार्यालय के सभाकक्ष में प्रदेश के विभिन्न विभागों के शासकीय भवनों में सोलर रूफ़टॉप संयंत्र स्थापना के लिये शासकीय संस्थाओं व रेस्को विकासक इकाइयों के मध्य विद्युत क्रय अनुबंध निष्पादन के अवसर पर संबोधित कर रहे थे। मंत्री शुक्ला ने लक्ष्य निर्धारित करते हुए कहा कि हमारी 50 प्रतिशत ऊर्जा खपत नवकरणीय ऊर्जा से होनी चाहिए और मध्यप्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आमजनों में जागरूकता लाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आने वाले समय में हर घर की छत पर सोलर पैनल नजर आने चाहिए। उन्होंने निर्देश दिये कि कि रेस्को पद्धति के अंतर्गत किए जा रहे कार्यों में समय पर भुगतान एवं उचित मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाएं। रेस्को एक महत्वपूर्ण बचत योजना अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने कहा कि रेस्को योजना शून्य निवेश, पहले दिन से बचत और नेट जीरो की ओर बढ़ने का एक सशक्त माध्यम है। यह शासन के लिए एक महत्वपूर्ण बचत योजना है। उन्होंने कहा कि यह एक साझेदारी का प्रोजेक्ट है, इसलिए सभी संबंधित विभागों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए। आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे ही कार्यक्रम प्रदेश के सभी जिलों में आयोजित किए जाएंगे। समय पर भुगतान पर मिलेगी छूट प्रबंध संचालक अमनबीर सिंह बैंस ने योजना की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि रेस्को पद्धति से 3.78 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली जनरेट होगी। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों को तत्परता से बेहतर प्रबंध कर कार्य करने के निर्देश दिए। एमडी बैंस ने बताया कि बिजली बिलों का भुगतान 3 से 10 तारीख के बीच करने पर भुगतान राशि में 1 प्रतिशत की छूट का प्रावधान है, जबकि देरी से भुगतान करने पर 1.5 प्रतिशत की पेनल्टी लगाई जाएगी। शासकीय कार्यालय बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण में बनेंगे सहभागी योजना के सफल एवं दक्षतापूर्ण क्रियान्वयन से मध्यप्रदेश निश्चित रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा। शासकीय कार्यालय इस मॉडल को अपनाकर न केवल आर्थिक बचत करेंगे, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी अपना अहम योगदान देंगे। बैठक में कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, सीईओ जिला पंचायत श्रीमती इला तिवारी एवं जिला अधिकारी उपस्थित थे।  

बिना गार्ड वाले ATM बनते थे निशाना: जालंधर पुलिस ने लुटेरे गिरोह का किया पर्दाफाश

जालंधर जालंधर देहात पुलिस ने एटीएम लूट की बड़ी वारदातों को अंजाम देने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने भोगपुर के यूके बैंक और किशनगढ़ के एसबीआई बैंक के एटीएम को निशाना बनाने वाले तीन आरोपियों कमलजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह और हरप्रीत सिंह को गिरफ्तार किया। जालंधर के एसएसपी हरविंदर सिंह विर्क ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि बीती 1 और 2 मई की मध्यरात्रि को अपराधियों ने दो अलग-अलग जगहों पर एटीएम लूटने की कोशिश की थी। पहली वारदात भोगपुर स्थित यूके बैंक के एटीएम में हुई और दूसरी किशनगढ़ में एसबीआई बैंक के एटीएम में। इन घटनाओं की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने तुरंत विशेष टीमों का गठन किया। तकनीकी जांच और खुफिया सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने घेराबंदी की और गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों को दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कमलजीत सिंह, गुरप्रीत सिंह और हरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। ड्राइवर बनकर करते थे रेकी पुलिस पूछताछ में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी पेशे से ड्राइवर हैं। अपनी इसी नौकरी की आड़ में वे अलग-अलग रूटों पर जाते थे और ऐसे एटीएम की पहचान करते थे जहां सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता नहीं होते थे। एसएसपी विर्क ने बताया कि यह गिरोह विशेष रूप से उन एटीएम को टारगेट करता था, जहां रात के समय कोई सिक्योरिटी गार्ड तैनात नहीं होता था। वारदात से पहले आरोपी कई दिनों तक उस इलाके की रेकी करते थे ताकि पुलिस की गश्त और स्थानीय हलचल का पता लगा सकें। हथियार और वाहन बरामद गिरफ्तारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वह गाड़ी भी बरामद की है, जिसका इस्तेमाल वे वारदात के बाद भागने के लिए करते थे। इसके अलावा, एटीएम मशीन को काटने और तोड़ने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कटर और अन्य लोहे के औजार भी पुलिस ने जब्त किए हैं। पुलिस का मानना है कि इन आरोपियों की गिरफ्तारी से इलाके में एटीएम लूट की घटनाओं पर लगाम लगेगी। आरोपियों के पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि उन्होंने पहले कितनी और वारदातों को अंजाम दिया है। रिमांड पर शुरू हुई पूछताछ पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। उन्हें माननीय अदालत में पेश किया गया, जहां से पुलिस ने उनका रिमांड हासिल किया है। रिमांड के दौरान पुलिस आरोपियों से गहन पूछताछ करेगी। पुलिस को उम्मीद है कि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके द्वारा की गई पिछली वारदातों के बारे में भी अहम सुराग मिल सकते हैं। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि चोरी किए गए कैश को वे कहां ठिकाने लगाते थे।  

प्रधानमंत्री के आहवान पर लग्जरी कार छोड़ इलेक्ट्रिक स्कूटी से मंत्रालय पहुंचे ऊर्जा मंत्री तोमर

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा डीजल , पेट्रोल की बचत करने के लिए वाहनों के कम से कम उपयोग के देशव्यापी आव्हान का असर अब मध्यप्रदेश में भी दिखाई देने लगा है। प्रधानमंत्री के आहवान के बाद ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने मंगलवार को इस पर अमल शुरू कर दिया है। ऊर्जा मंत्री  तोमर भोपाल में इलेक्ट्रिक दुपहिया वाहन से न केवल सड़कों पर घूमते नजर आए, बल्कि भोपाल स्थित अपने शासकीय बंगले सी-18 शिवाजी नगर से मंत्रालय भी इसी वाहन से पहुंचे। ऊर्जा मंत्री  तोमर ने कहा कि वह प्रधानमंत्री की अपील का स्वागत करते हैं और उनकी अपील का अनुसरण करते हुए इसका पालन कर रहे हैं। उनका कहना है कि वह सभी से अपील करेंगे कि वह भी पेट्रोल डीजल का कम से कम इस्तेमाल करें और अत्याधिक आवश्यकता होने पर ही डीजल-पेट्रोल वाहनों का उपयोग करें। मंत्री  तोमर ने कहा कि इससे विदेशों पर हमारी निर्भरता कम होगी और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा। उन्होंने कहा कि अपनी विधानसभा में भ्रमण के दौरान भी वह इलैक्ट्रिक दोपहिया वाहन का ही इस्तेमाल करेंगे।  

‘आरोप साबित हुए तो सियासत छोड़ दूंगा’: AAP MLA का मजीठिया पर तीखा वार

लुधियाना लुधियाना हलका सेंट्रल से आम आदमी पार्टी के विधायक अशोक पराशर पप्पी ने अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार, ठगी और अवैध वसूली के गंभीर आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। एक दिन पहले अकाली दल के वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और विधायक के कथित पूर्व पीए। घर को ही प्रेस क्लब बना लिया है प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विधायक अशोक पराशर पप्पी अकाली नेता बिक्रम सिंह मजीठिया पर जमकर बरसे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा मजीठिया ने अपने घर में ही एक प्रेस क्लब खोल रखा है। जो कोई भी झूठी कहानी लेकर उनके पास पहुंच जाता है, उसे वो अपने साथ बिठा लेते हैं और बिना किसी जांच-पड़ताल के प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देते हैं। विधायक ने बड़ी चुनौती देते हुए कहा कि अगर मजीठिया और निखिल सभरवाल अपनी बातों में जरा भी सच्चे हैं तो वे मेरे साथ गुरु घर (गुरुद्वारा साहिब) चलें। वहां पांच प्यारे बैठें और इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करें। अगर मैं इस जांच में दोषी या गलत पाया गया तो मैं उसी वक्त हमेशा के लिए सियासत छोड़ दूंगा। निखिल एक हैकर है, जिन खातों की बात हो रही वो मेरे हैं ही नहीं कल निखिल द्वारा मीडिया के सामने जारी की गई बैंक स्टेटमेंट पर सफाई देते हुए विधायक ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया। उन्होंने कहा कि जिन बैंक खातों के नंबर दिखाकर पैसे ट्रांसफर होने के दावे किए जा रहे हैं असल में उन बैंकों में उनका या उनके किसी परिवार वाले का कोई अकाउंट ही नहीं है। विधायक ने निखिल को एक शातिर इंसान और हैकर बताते हुए कहा कि इसने पहले भी एक अन्य व्यक्ति की आईडी हैक की थी। विधायक ने स्पष्ट किया कि वे इस पूरे झूठे प्रकरण को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। कल मजीठिया और निखिल ने लगाए थे ये आरोप यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब विधायक के दफ्तर इंचार्ज रहे निखिल सभरवाल जो की चाय का कम करता था बिक्रम सिंह मजीठिया से मुलाकात की। दोनों ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस की। मजीठिया ने आम आदमी पार्टी को एक बिजनेस मॉडल बताते हुए विधायक और उनके बेटे पर करोड़ों रुपए ऐंठने का आरोप लगाया था। 30 लाख की ट्रांजेक्शन का दावा निखिल ने बैंक स्टेटमेंट सार्वजनिक करते हुए आरोप लगाया था कि 24 अप्रैल 2024 को नगर निगम के एक बिल्डिंग इंस्पेक्टर ने उसके (निखिल के) खाते में 30 लाख रुपए डाले थे। उसका दावा था कि अगले ही दिन इसमें से 15 लाख रुपए विधायक पप्पी पराशर के खाते में और 99 हजार रुपए उनके बेटे के खाते में ट्रांसफर किए गए। बकाया 14 लाख रुपए कैश निकालकर उसने विधायक को सौंपे थे। मजीठिया ने सवाल उठाया था कि एक इंस्पेक्टर किस हैसियत से निखिल को 30 लाख रुपए दे रहा है? उन्होंने इस मामले में ED की जांच की मांग की थी। डीसी रेट पर भर्ती के लिए 1 लाख रुपए फीस निखिल ने खुद को विधायक के दफ्तर का इंचार्ज बताते हुए अपना आईडी कार्ड भी दिखाया था। उसने दावा किया कि विधायक की तरफ से डीसी रेट पर सरकारी विभागों (39 क्लर्क और 87 कर्मचारी) में भर्ती करवाने के लिए प्रति व्यक्ति एक लाख रुपए की फीस तय की गई थी। निखिल के मुताबिक, उसने 100 से ज्यादा लोगों से पैसे लेकर विधायक को पहुंचाए। नौकरी से निकाला और धमकियां दीं निखिल ने आरोप लगाया कि जब लोगों की भर्तियां नहीं हुईं और वे पैसे वापस मांगने विधायक के दफ्तर आने लगे (जिनमें निखिल के रिश्तेदार भी थे), तो खुद को फंसता देख विधायक ने 2 साल पहले उसे नौकरी से निकाल दिया। उलटा, एसीपी सेंट्रल से कहकर उसी पर ठगी का पर्चा (FIR) दर्ज करवा दिया और सारा दोष उसके सिर मढ़ दिया। निखिल ने वीडियो जारी कर यह भी कहा था कि विधायक ने उसे शहर छोड़ने की धमकी दी है और कहा है कि अगर उसने कहीं उनका नाम लिया तो उसके घर के 2-3 लोगों को मरवाने में उन्हें कोई हिचक नहीं होगी।  

प्रमाण पत्र जारी करने में लापरवाही पड़ी भारी, गोंडा के पंचायत सचिवों पर कार्रवाई तय

गोंडा उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में ग्राम पंचायत सचिवालयों से आमजन को मिलने वाली सेवाओं में लापरवाही बरतने वाले ग्राम पंचायत सचिवों पर अब कार्रवाई तय मानी जा रही है। डीपीआरओ लालजी दूबे ने इस संबंध में सख्त निर्देश जारी करते हुए सभी सहायक विकास अधिकारियों (पंचायत) और ग्राम पंचायत सचिवों को पंचायत भवनों से नियमित रूप से प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए हैं। डीपीआरओ ने चेतावनी दी है कि लापरवारी पर मई माह का वेतन रोकने की कार्रवाई की जाएगी। डीपीआरओ कार्यालय से जारी पत्र में कहा गया है कि शासन के निर्देशों के बावजूद जिले की कई ग्राम पंचायतों में सीएससी के माध्यम से प्रमाण पत्र जारी करने का कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है। विभागीय समीक्षा में सामने आया कि जिले की कुल 1192 ग्राम पंचायतों में से वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक केवल 431 ग्राम पंचायतों द्वारा ही प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि 761 ग्राम पंचायतों में अभी तक यह कार्य शुरू भी नहीं हो पाया है। पत्र में पंचायत सहायकों और वीएलई के माध्यम से प्रत्येक ग्राम पंचायत में हर माह कम से कम 100 प्रमाण पत्र जारी कराने के निर्देश दिए गए हैं। इनमें जन्म प्रमाण पत्र, मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र और ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र शामिल हैं। विकासखंडवार समीक्षा में इटियाथोक, करनैलगंज और पंडरी कृपाल ब्लॉक की स्थिति बेहतर पाई गई, जबकि कई विकासखंडों में कार्य संतोषजनक नहीं मिला। डीपीआरओ लालजी दूबे ने चेतावनी देते हुए कहा कि मई माह तक जिन ग्राम पंचायतों में प्रमाण पत्र जारी नहीं होंगे, वहां कार्यरत संबंधित ग्राम पंचायत सचिवों का वेतन रोक दिया जाएगा। काम न करने वाली कार्यकत्रियों की संविदा होगी समाप्त मनकापुर ब्लाक सभागार में बाल विकास परियोजनाधिकारी रमा सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को बैठक का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि जिस कार्यकत्री के काम में लापरवाही मिली उसे नोटिस देने के बाद संविदा समाप्त करने की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेज दी जाएगी। बैठक में ब्लॉक की समस्त आंगनबाडी कार्यकत्रियों के कार्यों की समीक्षा की गई। जिन आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के कार्यों में शिथिलता पाई गई। उन्हें कडी फटकार लगाते हुए शासन की मंशानुसार काम पूरा करके पोर्टल पर अपलोड करने की हिदायत दी गई। सीडीपीओ ने प्रधानमंत्री मातृ वंदन योजना की समीक्षा के दौरान सभी गांवों से लाभार्थियों का आवेदन लेकर योजना का लाभ दिलवाने का निर्देश दिया। कहा कि इस योजना में कोताही कतई बर्दास्त नहीं किया जायेगा। अपार आईडी बनवाने पर विशेष जोर देने के साथ समुदाय आधारित गतिविधियों को सम्पन्न कराने का निर्देश दिया।